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दुर्ग। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में दुर्ग में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति सामने आई है। दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी की अनुशंसा पर अनुसूचित जाति विभाग के दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी में गुड्डा उरे को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय एवं प्रभावशाली बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में संगठन लगातार विस्तार और सामाजिक समावेश की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार—
उपाध्यक्ष: 5 पद
महामंत्री: 5 पद
सचिव: 5 पद
इन पदों के बीच गुड्डा उरे की नियुक्ति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
गुड्डा उरे के उपाध्यक्ष बनने की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों, समाजजनों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। इसे संगठन में नई ऊर्जा और अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति आगामी समय में संगठन की जमीनी पकड़ को और सुदृढ़ करेगी तथा सामाजिक संतुलन के साथ कांग्रेस को नई मजबूती प्रदान करेगी।
भिलाई | भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) भिलाई जिले की नवनियुक्त कार्यकारिणी विवादों के घेरे में आ गई है। पार्टी की नई टीम में 'युवा जोश' की जगह 'आपराधिक इतिहास' को तरजीह दिए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जैसे ही कार्यकारिणी की सूची जारी हुई, पार्टी के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया है।
प्रमुख बिंदु: जो पार्टी की साख पर सवाल उठा रहे हैं
दागी चेहरों का दबदबा: नई कार्यकारिणी में ऐसे युवाओं को पदाधिकारी बनाया गया है, जिन पर लूट, मारपीट, धोखाधड़ी और महिलाओं से बदसलूकी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
महादेव सट्टा एप से कनेक्शन: चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पदाधिकारी चर्चित 'महादेव सट्टा एप' मामले में भी आरोपी हैं और जेल की हवा खा चुके हैं।
गैंगस्टर लिंक: रिपोर्ट के अनुसार, सूची में शामिल कुछ नामों का संबंध कुख्यात गैंगस्टरों के साथ भी बताया जा रहा है।
भीतरघात और बगावत: घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर 10 मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को खारिज करते हुए अपनी समानांतर सूची जारी कर दी है, जिससे पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
पार्टी की फजीहत, नेतृत्व ने माँगा स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता और बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भिलाई जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा अध्यक्ष सौरभ जायसवाल को तलब किया है।
जिलाध्यक्ष का बचाव: सौरभ जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे "चरित्र प्रमाण पत्र" माँगे गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अभी सिर्फ आरोप लगे हैं, अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।
निष्कर्ष
शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक साबित हो रही है। एक तरफ जहां युवाओं को जोड़ने की बात हो रही है, वहीं 'लिस्टेड अपराधियों' को पद बांटने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इन नियुक्तियों को रद्द कर 'छवि सुधार' की दिशा में कदम उठाता है या नहीं।
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा के सभापति को राघव चड्ढा सहित 7 सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका सौंपे जाने का दावा सामने आया है। आरोप है कि संबंधित सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) का उल्लंघन किया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विश्वसनीय सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विशेष रूप से राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने की बात भी स्थापित तथ्यों से मेल नहीं खाती, जिससे इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक और संवैधानिक जानकारों के अनुसार, यदि कोई सांसद स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है या व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही संभव है। लेकिन इसके लिए स्पष्ट साक्ष्य, औपचारिक प्रक्रिया और सभापति का निर्णय आवश्यक होता है।
कानूनी स्थिति क्या कहती है?
दलबदल कानून के तहत, यदि किसी दल के 2/3 सांसद एक साथ विलय का दावा नहीं करते, तो व्यक्तिगत स्तर पर पार्टी बदलने पर अयोग्यता लागू हो सकती है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति द्वारा लिया जाता है, जिसे न्यायालय में चुनौती भी दी जा सकती है।
निष्कर्ष:
फिलहाल यह मामला दावों और अटकलों के स्तर पर है। जब तक आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज सामने नहीं आते, इसे सत्यापित खबर के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
रायपुर। शौर्यपथ । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बीच छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा है कि राज्य में अब सत्ता परिवर्तन तय है। उन्होंने दावा किया कि मतदान के शुरुआती रुझान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि जनता बदलाव चाहती है और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की विदाई निकट है।
अरुण साव ने भरोसा जताया कि इस बार पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली पसंद बनकर उभरेगी और “कमल खिलने” के साथ राज्य को सुशासन, सुरक्षा और विकास की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों की सुरक्षा और युवाओं को रोजगार के अवसर देना भाजपा की प्राथमिकता होगी।
? कांग्रेस पर तीखा प्रहार — “ओबीसी के मुद्दे पर दोहरा चेहरा”
उप मुख्यमंत्री साव ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का ओबीसी वर्ग के प्रति रवैया हमेशा से दोहरा रहा है।
उनके अनुसार, जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने अन्य पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा की, लेकिन अब सत्ता से बाहर होने के बाद वह ओबीसी हितैषी बनने का दिखावा कर रही है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की पूर्व भूपेश बघेल सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में भी ओबीसी वर्ग के साथ न्याय नहीं हुआ।
? इतिहास का हवाला, कांग्रेस पर सवाल
नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए साव ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद काका कालेकर आयोग की रिपोर्ट को दबाकर रखा और मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने में भी गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वी.पी. सिंह की सरकार ने मंडल आयोग लागू किया, जबकि उस समय राजीव गांधी ने इसका विरोध किया था।
? राजनीतिक संदेश स्पष्ट
अरुण साव ने कहा कि देश और प्रदेश का ओबीसी वर्ग अब कांग्रेस के “राजनीतिक दिखावे” को समझ चुका है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगा।
? निष्कर्ष:
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा का आत्मविश्वास चरम पर है। अब सबकी नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि क्या वास्तव में “बदलाव की बयार” सत्ता परिवर्तन में बदलती है या नहीं।
भिलाई / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में एक ही पते पर संचालित हो रही कथित केमिकल फैक्ट्रियों का मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव द्वारा विधानसभा में उठाए गए इस मामले में विभागीय जवाब के बाद नए सवाल खड़े हो गए हैं। जवाब से असंतुष्ट विधायक ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है।
विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने अपने उत्तर में कहा कि इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, इसी जवाब में यह भी स्वीकार किया गया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 24 फरवरी 2025 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर जिले के 16 कोलतार प्रोसेसिंग आधारित उद्योगों की जांच कराई थी, जिसमें से 8 उद्योग पर्यावरणीय सहमति की शर्तों के उल्लंघन के दोषी पाए गए। विभाग ने इन पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है, लेकिन कार्रवाई की प्रकृति और स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।
मामले को और उलझाते हुए 24 जून 2025 को प्राप्त एक शिकायत में उद्योगों द्वारा तथ्यों को छिपाकर केंद्रीय पर्यावरण स्वीकृति लेने का आरोप सामने आया, लेकिन इस शिकायत पर कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। वहीं, एक अन्य शिकायत के आधार पर पर्यावरण मंडल ने 7 जुलाई 2025 को पत्र क्रमांक 8879 जारी कर उद्योग संचालनालय समेत अन्य विभागों से पत्राचार किया।
यह मामला EOW तक भी पहुंच चुका है, जहां शिकायत क्रमांक 02/2025 के रूप में पंजीबद्ध है और जांच प्रतिवेदन अब तक लंबित है।
विधायक देवेंद्र यादव ने 20 अप्रैल 2026 को EOW को भेजे पत्र में विधानसभा में दिए गए जवाब को विरोधाभासी बताते हुए कहा है कि एक ओर शिकायत न होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर जांच समिति गठित कर उल्लंघन की पुष्टि भी की गई है। उन्होंने पूरे प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई, जांच की स्थिति और जिम्मेदार अधिकारियों पर हुई कार्यवाही का स्पष्ट विवरण मांगा है।
इस पूरे घटनाक्रम में शिकायतों के अस्तित्व पर भ्रम, जांच की आंशिक कार्रवाई और स्पष्ट निष्कर्षों के अभाव ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें EOW की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
दुर्ग। दुर्ग की राजनीति हमेशा से छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख केंद्र रही है। लेकिन पिछले चार दशकों से यहाँ कांग्रेस का संगठन एक ही 'परिवार' और 'रिमोट कंट्रोल' की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। यह एक ऐसी व्यवस्था थी जहाँ निर्णय संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा नहीं, बल्कि एक खास दरबार में लिए जाते थे। परिणाम? जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी, निष्क्रिय कार्यकर्ता और जनता से दूरी।
धीरज बाकलीवाल: ‘जमीनी संगठन’ और ‘बूथ मज़बूती’ का नया दौर
लेकिन अब दुर्ग शहर कांग्रेस में एक 'नयी रोशनी' दिखाई दे रही है, जिसका श्रेय शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल को जाता है। बाकलीवाल ने पुरानी परिपाटी को चुनौती देते हुए संगठन को फिर से सक्रिय करने का काम शुरू किया है। उनका स्पष्ट विश्वास है कि एक 'सशक्त बूथ ही सशक्त संगठन की आधारशिला' है।
संगठनात्मक कसावट: बाकलीवाल ने 5 ब्लॉक, 10 मंडल, 60 वार्ड और 275 बूथों पर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया है।
सक्रिय विपक्ष: वह केवल संगठनात्मक कार्यों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जनता के मुद्दों को भी मजबूती से उठा रहे हैं। चाहे वो ई-चालान का मुद्दा हो या हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के छात्रों के भविष्य से जुड़ी लापरवाही, बाकलीवाल प्रशासन के सामने मजबूती से पक्ष रख रहे हैं।
सामाजिक सरोकार: धीरज बाकलीवाल सामाजिक रूप से भी जनता से जुड़ रहे हैं। तिरुपति से लौटे तीर्थयात्रियों का स्वागत और ऐसी अन्य गतिविधियाँ उन्हें जनता के करीब ला रही हैं।
अरुण वोरा की ‘गिरती साख’ और ‘गुटबाजी’ का घेरा
दूसरी ओर, पूर्व विधायक अरुण वोरा की कार्यशैली अब चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके समय में संगठन के निर्णय एक ही दरबार से लिए जाते थे। पुराने जिला अध्यक्षों को तो संगठन की गतिविधियों की जानकारी तक नहीं होती थी; हर छोटे-बड़े सवाल का जवाब 'वोरा जी से पूछकर बताएंगे' में सिमट जाता था। जानकार मानते हैं कि पूर्व की राजनीति केवल चुनाव के समय कार्यकर्ताओं को याद करने और संगठन को अपनी मुट्ठी में रखने तक सीमित थी। यह 'एकल ध्रुवीय' व्यवस्था दुर्ग में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।
चुनौतियां अभी बाकी हैं: ‘मतलबपरस्त’ नेताओं और ‘चाटुकारों’ की फौज
यद्यपि यह 'नया उदय' सुखद है, लेकिन धीरज बाकलीवाल के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। संगठन में अभी भी ऐसे नेताओं की फौज है जो केवल सत्ता के लाभ के लिए मंचों पर आसीन हो जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी कोई अहमियत नहीं है। चाटुकारों की यह फौज गुटबाजी को हवा देती है और संगठन के कार्यों में बाधा डालती है।
निष्कर्ष: ‘नयी रोशनी’ से ‘भविष्य की जीत’ की ओर
अगले 17-18 महीनों में चुनावी मोड शुरू हो जाएगा। बाकलीवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन 'मतलबपरस्त' नेताओं से बचते हुए कर्मठ कार्यकर्ताओं की ऐसी टीम तैयार करना है, जो कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचा सके। यदि धीरज बाकलीवाल इसी तरह संगठन और कार्यालय को आबाद रखने में सफल रहे, तो दुर्ग शहर कांग्रेस के लिए यह 'नया उदय' न केवल सुखद होगा, बल्कि भविष्य की जीत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
यह राजनीतिक लेख दुर्ग कांग्रेस में चल रही इस बड़ी उथल-पुथल और 'नयी रोशनी' की शुरुआत को बयां करता है।
मृणेन्द्र चौबे
राजनांगांव /शौर्यपथ / प्रदेश का किसान खरीफ सीज़न की तैयारी में है , सरकार सोसायटियों के माध्यम से खरीफ सीजन की खेती की तैयारियों के लिए किसानों को खाद व ऋण उपलब्ध कराना प्रारंभ कर चुकी है किंतु भाजपा सरकार के निर्देश पर किसानों को दिए जा रहें ऋण पर पूर्व विधायक छन्नी साहू ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि खेती की लागत दिनों दिन बढ़ रही है और सरकार किसानों को दिए जाने वाले ऋण की राशि में लगातार कम कर रही है जो कि सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को स्पष्ट करती है, अनेक सोसायटी से लगातार शिकायत प्राप्त हो रही है कि सोसायटियों में दी जाने वाली ऋण की राशि मे कटौती करते हुए राशि दी जा रही है जो कि किसान विरोधी निर्णय है, जिसका दूरगामी परिणाम सरकार को भुगतने होंगे, ऐसा निर्णय लेकर सरकार लगातार किसानों को हतोत्साहित कर रही है। छन्नी साहू ने भाजपा सरकार से मांग किया है कि पूर्व की तरह सरकार किसानों को खरीफ सीजन की खेती के लिए प्रति एकड़ बीस हजार से अधिक की राशि व पर्याप्त खाद व बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
0ऋण अनुदान की राशि से बचना चाह रही है भाजपा सरकार
खुज्जी विस पूर्व विधायक छन्नी साहू ने कहा है कि पूर्व में रबी व खरीफ सीजन में सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में लिमिट के अनुसार प्रति एकड़ बीस हजार से अधिक की राशि किसानों को उपलब्ध कराते आई है, रबी सीजन के लिए ली गई ऋण की राशि 22 जून से पहले अदा कर खरीफ के लिए पुनः उतना ही राशि उपलब्ध कराते रही है, किन्तु किसान विरोधी भाजपा सरकार रबी और खरीफ को एकसाथ जोड़कर मात्र 13860 रुपये की राशि अभी सोसाइटी के माध्यम से उपलब्ध करा रही है जो कि खेती पर बढ़ते लागत मूल्य से बहुत कम है, यह पुरा खेल ऋण अनुदान की राशि को बचाने के चक्कर मे किया जा रहा है, जिससे खेती और किसान सकंट में दिखाई देते हुए दिख रहे है, पिछले दो वर्षों में भाजपा सरकार के दौरान किसानों का बहुत बुरा अनुभव रहा है बीते दो वर्षों में किसानों को न तो समय पर खाद मिल पाया और न ही बीज उपलब्ध हो पाया है जिसपर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए कार्य करना चाहिए, पूर्व विधायक छन्नी साहू ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि अब समय आ चुका है जब सरकार को उनके किये जा रहे कृत्य का किसानों द्वारा एकजुट होकर माकूल जवाब दिया जाए।
दुर्ग। शौर्यपथ।
एनएसयूआई द्वारा प्रदेश महासचिव Aditya Narang के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रस्तावित प्रवेश शुल्क लागू करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि Bhupesh Baghel के कार्यकाल में शुरू की गई स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। ऐसे में शुल्क लागू किया जाना इस योजना की मूल भावना के विपरीत है।
एनएसयूआई ने अपने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में ₹410 एवं ₹445 जैसे अतिरिक्त शुल्क भी अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ साबित होंगे। साथ ही शिक्षा के अधिकार के तहत सरकारी विद्यालयों में शिक्षा सर्वसुलभ होनी चाहिए और शुल्क का प्रावधान शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
प्रदेश महासचिव आदित्य नारंग ने कहा कि समाचार माध्यमों से यह जानकारी सामने आई है कि फंड की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने आग्रह किया कि शासन अन्य स्रोतों या बजट आवंटन के माध्यम से विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करे, न कि छात्रों पर शुल्क का भार डाला जाए।
एनएसयूआई ने जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया कि जनहित एवं छात्रहित को ध्यान में रखते हुए इस मांग को राज्य शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान तिरुपति युवा चंद्राकर, तुषार कुमार, पीयूष सिन्हा, मयंक देशमुख, दीप बंजारे, कैलाश साहू, मृदुल सिंह, अभय देशलहरा, निशांत राव सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
*पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी की कॉरपोरेट भूमिका क्यों,रायगढ़-तमनार के संदर्भ में यह नियुक्ति और भी अधिक संदिग्ध और चिंताजनक- संजीत विश्वकर्मा प्रदेश संगठन मंत्री आप*
रायपुर। जिंदल समूह द्वारा पूर्व भारतीय वन सेवा वरिष्ठ अधिकारी एस.एस. बाजाज को कॉरपोरेट लाइजनिंग का छत्तीसगढ़ राज्य प्रमुख नियुक्त किया गया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा ने कहा है कि यह नियुक्त बहुत साधारण सी लगती है लेकिन यह केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि राज्य में कॉरपोरेट प्रभाव, प्रशासनिक पहुंच और सत्ता-संबंधों के खतरनाक गठजोड़ का संकेत है। सरकार, प्रशासन और पर्यावरणीय नियम-कानूनों की पूरी समझ रखने वाले ऐसे अधिकारी के पास पद, पहुँच और संवेदनशील जानकारियों का जो प्रभाव है, उसका दुरुपयोग होने की पूरी आशंका है। यह स्थिति जनहित और पारदर्शिता, दोनों के लिए गंभीर खतरा है। यह सांठगांठ, छत्तीसगढ़ में सरकार, अफसरशाही और कॉरपोरेट गठजोड़ के उस काले चेहरे को उजागर करता है, जिसके कारण जल, जंगल, जमीन और जनता के अधिकारों की खुलेआम नीलामी की बड़ी तैयारी की जा रही है।
लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती गीतेश्वरी बघेल कि यह बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है। जिन अधिकारियों पर जनता के संसाधनों की रक्षा करने, कानून का पालन कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब कॉरपोरेट घरानों के लिए रास्ता साफ करने के काम में लग जाएं, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता और पूंजी के गठबंधन से चलने वाली लूट की व्यवस्था है।आखिर छत्तीसगढ़ की जनता यह कैसे माने कि जिन लोगों ने शासन तंत्र, नीतियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संवेदनशील निर्णयों के बीच वर्षों तक काम किया, वे अब उन्हीं जानकारियों और संबंधों का इस्तेमाल कॉरपोरेट हित साधने के लिए नहीं करेंगे? यह सीधा-सीधा हितों का टकराव है। यह नैतिक पतन है। यह छत्तीसगढ़ की जनता के सार्वजनिक विश्वास के साथ विश्वासघात है। रायगढ़, तमनार और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही जनता जमीन, पर्यावरण, प्रदूषण, विस्थापन और जल संकट को लेकर त्रस्त है। वहां यदि कॉरपोरेट कंपनियां पूर्व अधिकारियों को लाइजनिंग के लिए आगे कर रही हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि वे जनता की आवाज को दबाकर, प्रशासन पर प्रभाव डालकर और नियम-कानून को मोड़कर अपने हित सुरक्षित करना चाहती हैं।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ कोई कॉरपोरेट कंपनियों की जागीर नहीं है। यह राज्य यहां की जनता का है, आदिवासियों का है, किसानों का है, युवाओं का है, श्रमिकों का है। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे दलालों, पूंजीपतियों और सत्ता संरक्षित अफसरशाही के हवाले कर दिया है।
हम मांग करते हैं कि इस तरह की नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच हो। पूर्व अधिकारियों के कॉरपोरेट रोल पर सख्त नियम बनें। और रायगढ़-तमनार सहित संवेदनशील क्षेत्रों में चल रही सभी कॉरपोरेट गतिविधियों की पारदर्शी समीक्षा की जाए। यदि सरकार ने इस मामले को हल्के में लिया, तो आम आदमी पार्टी सड़क में जाकर इस मुद्दे को उठाएगी। छत्तीसगढ़ महतारी को लूटने वालों, जनता के अधिकारों का सौदा करने वालों और अफसरशाही को कॉरपोरेट दलाली में बदलने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
