October 22, 2026
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    राजनीति

    राजनीति (1246)

    फिटनेस शुल्क ₹800, वसूली ₹5,000 तक! परिवहन विभाग में कथित वसूली पर कांग्रेस का सरकार से सवाल

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग में वाहन फिटनेस से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन स्वामित्व हस्तांतरण तक निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त रकम मांगने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब वाहन फिटनेस का निर्धारित शुल्क 800 रुपये है, तो वाहन मालिकों से 5,000 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतों पर सरकार जवाब क्यों नहीं दे रही है और अतिरिक्त रकम आखिर किसके पास जा रही है?

    फिटनेस जांच या सिर्फ प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया?

    धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि वाहन फिटनेस का उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि तकनीकी रूप से खराब, जर्जर टायरों और खराब लाइटों वाले वाहनों को भी पैसे लेकर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने फिटनेस जांच की वास्तविक प्रक्रिया और निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने फिटनेस जांच का ठेका लेने वाली निजी कंपनी के विरुद्ध सामने आ रही शिकायतों की स्वतंत्र जांच पर भी जोर दिया।

    परिवहन कार्यालयों से नाकों तक वसूली के आरोप

    कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि परिवहन कार्यालयों, सड़कों और परिवहन नाकों पर भी अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। वाहन चालकों के हवाले से उन्होंने कहा कि रात के समय वाहनों को रोककर निजी व्यक्तियों के माध्यम से पैसे मांगे जाने तथा इनकार करने पर दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायतें हैं।

    उन्होंने सवाल उठाया कि निजी व्यक्तियों को किस अधिकारी के आदेश पर वाहनों को रोकने, जांच करने या पैसे वसूलने का अधिकार दिया गया है। कांग्रेस ने परिवहन उड़नदस्तों और नाकों पर निजी व्यक्तियों की भूमिका तथा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच करने की मांग की है।

    लाइसेंस और वाहन ट्रांसफर में भी परेशानी का आरोप

    ठाकुर ने कहा कि आम नागरिकों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित कराने और अन्य परिवहन संबंधी कार्यों के लिए निर्धारित शुल्क जमा करने के बावजूद कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिरिक्त रकम दिए बिना काम नहीं होने की शिकायतें सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं।

    कांग्रेस की मांग—शुल्क और भुगतान का ब्योरा सार्वजनिक हो

    कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि फिटनेस शुल्क और वाहन मालिकों से ली जा रही वास्तविक राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। प्रत्येक परिवहन कार्यालय, फिटनेस केंद्र और नाके पर निर्धारित शुल्क की सूची प्रदर्शित हो तथा हर भुगतान की अनिवार्य रसीद दी जाए।

    धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि अवैध वसूली में संलिप्त पाए जाने वाले निजी व्यक्तियों, कंपनी संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों का निष्पक्ष पालन कराने की मांग भी की। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और परिवहन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

    महेश खंडेलवाल और रणदीप भाटिया बने सह-संयोजक, कार्यकारिणी में पदाधिकारियों व सदस्यों को किया गया शामिल

    राजनांदगांव। भारतीय जनता पार्टी आर्थिक प्रकोष्ठ की राजनांदगांव जिला कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष शिव चन्द्राकर एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की अनुशंसा तथा जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत की सहमति से घोषित कार्यकारिणी में कमलेश बैद को जिला संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, महेश खंडेलवाल एवं रणदीप भाटिया को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है।

    घोषित कार्यकारिणी में संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से विभिन्न पदों पर पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। श्रीमती संगीता शुक्ला को कार्यालय प्रभारी, रोशन साहू को कार्यालय सह-प्रभारी, हरीश मोटलानी को मीडिया प्रभारी तथा महेश गुप्ता को मीडिया सह-प्रभारी बनाया गया है। इसी तरह सुनील कोटडिया को सोशल मीडिया प्रभारी, श्रीमती अंजनी शर्मा को सोशल मीडिया सह-प्रभारी और श्रीमती सुधा पवार को ‘मन की बात’ प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला कार्यसमिति में 28 सदस्य शामिल

    जिला कार्यसमिति सदस्य के रूप में राजेश अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, राजेश साहू, सौरभ खण्डेलवाल, धर्मेन्द्र सोनी, पवन सोनी, मंजुरानी साहू, विम्मी श्रीवास्तव, ओंकार वर्मा, चेतन अग्रवाल, राजू नाहटा, दीपक गिड़िया, राकेश साहू, शंकर कुमार साहू, राजेश सावा, निलेश हरिहरनो, मुकेश शर्मा, संगीता जिंदल, शोभनारायण साहू, शीतल लोडा, अखराज सोनी, हेमलाल साहू, जसप्रीत सिंह, शिवेंद्र साहू, संजय गायकवाड, ज्योति खण्डेलवाल, शंभू गुप्ताईत एवं लीलाधर साहू को शामिल किया गया है।
    भाजपा जिला महामंत्री सौरभ कोठारी एवं डिकेश साहू ने नवगठित कार्यकारिणी से अपेक्षा जताई है कि वह आर्थिक विषयों से जुड़े मुद्दों पर व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों को प्रभावी ढंग से उठाएगी। साथ ही भारतीय जनता पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हुए संगठन को मजबूत करेगी।

    प्रतिमा चंद्राकर ने पिछली ‘अनदेखी’ पर जताई नाराजगी, भूपेश बघेल ने दिया भरोसा; 40 वार्डों में राय को महत्व देने का संकेत

    रिसाली / शौर्यपथ। नगर निगम चुनाव की आहट के साथ रिसाली कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, छाया सांसद राजेंद्र साहू और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत बंजारे सहित वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक में टिकट वितरण, वार्डवार राजनीतिक समीकरण और महापौर पद को लेकर रणनीति पर गंभीर मंथन हुआ।

    बैठक में पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर ने पिछला निगम चुनाव याद करते हुए अपनी नाराजगी खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव के दौरान उनकी पर्याप्त पूछपरख नहीं हुई और निर्णय प्रक्रिया में उनसे अपेक्षित राय-मशविरा नहीं किया गया। उनकी यह बात सामने आने के बाद बैठक का राजनीतिक तापमान बढ़ा और संगठन के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    बताया जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिमा चंद्राकर को भरोसा दिलाया कि इस बार परिस्थितियां अलग होंगी। 40 वार्डों में प्रत्याशी चयन और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी राय और अनुभव को महत्व दिए जाने का संकेत दिया गया। इससे यह संदेश गया कि कांग्रेस इस बार स्थानीय संगठन और वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

    टिकट में गुटबाजी नहीं, जीतने वाले चेहरे पर जोर

    बैठक में टिकट वितरण को लेकर भी स्पष्ट संदेश देने की कोशिश हुई। छाया सांसद राजेंद्र साहू ने कहा कि वार्डवार स्थिति और दावेदारों की जीत की संभावना को देखते हुए सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाना चाहिए। वहीं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत बंजारे ने भी गुटबाजी और चाटुकारिता से दूर रहते हुए जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात कही।

    चर्चा में यह भी सामने आया कि जिन वार्डों में पार्टी के पास केवल एक मजबूत दावेदार होगा, वहां सर्वसम्मति से नाम तय करने का रास्ता अपनाया जा सकता है। इससे टिकट की लंबी खींचतान को कम करने की रणनीति के संकेत मिलते हैं।

    महापौर पद पर ‘स्थानीय चेहरे’ की मांग

    रिसाली महापौर पद को लेकर भी बैठक में स्थानीय चेहरे की पैरवी सामने आई। कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का मानना है कि यदि भाजपा स्थानीय व्यक्ति को महापौर पद के लिए आगे करती है तो कांग्रेस को भी स्थानीय नेतृत्व और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संगठन स्तर पर होना बाकी है।

    कुल मिलाकर बैठक से यह संकेत जरूर मिला कि कांग्रेस इस बार रिसाली के चुनाव को केवल वार्डवार मुकाबले के रूप में नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता, स्थानीय नेतृत्व और सही प्रत्याशी चयन के आधार पर लड़ने की तैयारी कर रही है। पिछली बार की ‘अनदेखी’ की शिकायत को दूर करने का भरोसा भले ही दिया गया हो, लेकिन असली राजनीतिक परीक्षा अब 40 वार्डों में टिकट वितरण और महापौर पद के चेहरे के चयन के समय होगी।

      दुर्ग / शौर्यपथ। निष्पक्ष चुनाव प्रणाली और मतदाता अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को दुर्ग कलेक्ट्रेट का दूसरी बार घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता जुटे तथा केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों के पुतले भी फूंके गए।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से देश के लगभग 13 करोड़ नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित किया गया है। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाता अधिकारों पर गंभीर हमला बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

    प्रदर्शन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर और राकेश ठाकुर ने किया। दोनों नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि लोकतंत्र की गरिमा और चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

    नेताओं ने कहा कि मतदाता का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी ताकत है और किसी भी परिस्थिति में पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    इंडिया गठबंधन के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर यह विरोध सड़क से संसद तक जारी रहेगा।

    प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक एवं पुलिस अमला स्थिति पर नजर बनाए रहा।

    दुर्ग / शौर्यपथ। दिसंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव को लेकर दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज करते हुए संगठन को सक्रिय मोड में लाना शुरू कर दिया है। जामुल के कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भिलाई-3 चरोदा पहुंचकर ब्लॉक कांग्रेस के पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। दोनों बैठकों में प्रत्याशी चयन, संगठनात्मक एकजुटता और संभावित गुटबाजी को नियंत्रित करने का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

    हर वार्ड से एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश

    जामुल में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बघेल ने प्रत्येक वार्ड में आपसी सहमति से एक योग्य नाम सामने लाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी वार्ड में एक से अधिक दावेदार सामने आते हैं, तो अंतिम निर्णय प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा किया जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं को अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होकर चुनाव मैदान में काम करना होगा।

    राजनीतिक तौर पर बघेल का यह संदेश टिकट प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संभावित असंतोष और बगावती तेवरों को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद अक्सर सामने आने वाली नाराजगी और निर्दलीय या बागी प्रत्याशियों की चुनौती को देखते हुए कांग्रेस ने इस बार पहले से ही संगठनात्मक अनुशासन पर जोर देना शुरू कर दिया है।

    भिलाई-3 चरोदा में वार्ड स्तर की तैयारी पर जोर

    भिलाई-3 चरोदा के उमदा स्थित लक्ष्मी पैलेस में आयोजित समीक्षा बैठक में चुनावी तैयारियों को वार्ड स्तर तक मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक में चुनाव प्रभारी विकास उपाध्याय, चुनाव पर्यवेक्षक प्रमोद दुबे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर सहित स्थानीय पदाधिकारी और वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    बैठक में प्रत्येक वार्ड की कमेटियों को सक्रिय करने और स्थानीय संगठन को चुनावी रणनीति का आधार बनाने पर जोर दिया गया। पार्टी की रणनीति में वार्ड स्तर पर संभावित प्रत्याशियों की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय समीकरणों को समझने के साथ चुनावी तैयारी को आगे बढ़ाने की कवायद दिखाई दे रही है।

    गुटबाजी और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने पार्टी के भीतर गुटबाजी तथा सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि संगठन विरोधी गतिविधियों के मामलों में नोटिस जारी करने से लेकर आवश्यक संगठनात्मक कार्रवाई तक की जा सकती है।

    कांग्रेस के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद दावेदारों के बीच असंतोष कई बार सीधे चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है। ऐसे में पार्टी चुनाव से पहले ही अनुशासन और एकजुटता को लेकर स्पष्ट संदेश देकर संभावित विवादों पर नियंत्रण की कोशिश कर रही है।

    बाइक रैली से कार्यकर्ताओं ने दिखाया उत्साह

    भूपेश बघेल के जामुल और भिलाई-3 क्षेत्र पहुंचने पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाइक रैली निकालकर उनका स्वागत किया। कांग्रेस ने इसे कार्यकर्ताओं के उत्साह और आगामी निकाय चुनाव को लेकर बढ़ती सक्रियता के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया।

    हालांकि पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस शुरुआती उत्साह को वार्ड और बूथ स्तर की प्रभावी चुनावी मशीनरी में बदलने की होगी। खासकर जामुल और भिलाई-3 चरोदा जैसे क्षेत्रों में टिकट के दावेदारों के बीच सहमति बनाना और टिकट वितरण के बाद सभी दावेदारों को अधिकृत प्रत्याशी के पीछे एकजुट रखना कांग्रेस की चुनावी रणनीति की वास्तविक परीक्षा होगी।

    भाजपा की सक्रियता के बीच कांग्रेस की तैयारी

    दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में भाजपा भी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर संगठनात्मक बैठकों और चुनावी तैयारियों को गति दे रही है। ऐसे में कांग्रेस का यह अभियान महज कार्यकर्ता सम्मेलन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे टिकट वितरण से पहले संगठन को एक लाइन में लाने और संभावित बगावत को रोकने की शुरुआती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस का ‘एक नाम’ फॉर्मूला टिकट दावेदारी के समय कितना प्रभावी साबित होता है और क्या पार्टी वार्ड स्तर पर दावेदारों के बीच सहमति बनाकर चुनावी मैदान में एकजुटता कायम रख पाती है।

    भिलाई / शौर्यपथ। रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा ने बूथ से लेकर वार्ड स्तर तक संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं और इसी बीच महापौर पद के संभावित दावेदारों के नामों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इनमें भाजपा नेत्री एवं समाजसेविका श्रीमती चंदेश्वरी बांधे का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी उनके नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    चंदेश्वरी बांधे का भाजपा संगठन तथा नगरीय राजनीति में सक्रिय अनुभव रहा है। उनके अनुसार उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा में प्रदेश मंत्री के रूप में की। इसके बाद उन्हें रायपुर संभाग सह प्रभारी की जिम्मेदारी भी मिली। वे नेहरू नगर वार्ड क्रमांक 4 से पार्षद रह चुकी हैं। वर्तमान में भी वे भाजपा संगठन की गतिविधियों में सक्रिय हैं। जुलाई 2026 में सुपेला मंडल भाजपा के संगठन विस्तार के दौरान उन्हें उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    नगरीय राजनीति का अनुभव

    चंदेश्वरी बांधे को नगर निकाय की कार्यप्रणाली और स्थानीय राजनीति का अनुभव है। रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा ने हाल के दिनों में संगठनात्मक गतिविधियां तेज की हैं। पार्टी की बैठकों में बूथ प्रबंधन, वार्डवार रणनीति और महापौर सहित सभी वार्डों में चुनावी तैयारी पर जोर दिया गया है।

    बताया जा रहा है कि भिलाई नगर निगम के महापौर पद से जुड़े आरक्षण समीकरण के बीच चंदेश्वरी बांधे की नजर रिसाली निगम पर है। वे वर्तमान में रिसाली क्षेत्र में निवास करती हैं। हालांकि अंतिम प्रत्याशी चयन भाजपा संगठन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय

    राजनीतिक गतिविधियों के अलावा चंदेश्वरी बांधे विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से भी जुड़ी रही हैं। उनके अनुसार वे सिया कल्याण समिति एवं गणेश उत्सव समिति की अध्यक्ष, सतनामी महिला जागृति समिति की सक्रिय कार्यकर्ता तथा गुरु घासीदास सेवा समिति एवं सतनामी मित्र मंडल की सदस्य रही हैं। इसके अलावा गुरु बालक दास सामाजिक सुरक्षा मोर्चा में संरक्षक तथा गुरु वंदना केंद्र भिलाई में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

    सामाजिक गतिविधियों में सक्रियता के चलते वे अपने राजनीतिक दायरे के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच भी सक्रिय दिखाई देती हैं। रिसाली में भाजपा की चुनावी तैयारियां तेज होने के बीच उनके नाम की चर्चा को इसी व्यापक संगठनात्मक और सामाजिक सक्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    भाजपा की चुनावी तैयारी तेज

    रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा ने हाल ही में संगठनात्मक बैठकें आयोजित कर बूथ और वार्ड स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की है। पार्टी ने महापौर सहित सभी वार्डों में चुनावी तैयारी को लेकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दिया है।

    ऐसे में महापौर पद के लिए चंदेश्वरी बांधे का नाम चर्चा में आना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब अंतिम निर्णय पार्टी संगठन की चयन प्रक्रिया और आगामी चुनावी समीकरणों के आधार पर होगा। फिलहाल उनकी उम्मीदवारी चर्चा और दावेदारी के स्तर पर है, जबकि भाजपा की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

    पूर्व विधायक ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा- सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक असहमति के प्रति असहिष्णुता

    दुर्ग / शौर्यपथ। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार विपक्ष की आवाज से घबराने लगे और सवाल उठाने वाले नेताओं को हिरासत में लिया जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।

    वोरा ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जनता की आवाज बनकर लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आवाज को दबाने के लिए हिरासत का सहारा लेना सरकार की कथित तानाशाही मानसिकता और लोकतांत्रिक असहमति के प्रति असहिष्णुता को दर्शाता है।

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को हिरासत में लेने से सवाल खत्म नहीं होंगे और प्रियंका गांधी को रोकने से जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। के.सी. वेणुगोपाल सहित अन्य कांग्रेस नेताओं की हिरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस का संघर्ष रुकने वाला नहीं है।

    चुनाव प्रक्रिया पर सवालों का जवाब दे सरकार

    अरुण वोरा ने कहा कि विपक्ष यदि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है तो सरकार को उन सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि विपक्ष और जनप्रतिनिधियों का संवैधानिक अधिकार है।

    उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में तानाशाही नहीं चलेगी। संविधान की रक्षा और जनता के मताधिकार की लड़ाई में कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है।” वोरा ने दावा किया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की आवाज को दबाने की जितनी कोशिश होगी, यह मुद्दा जनता के बीच उतनी ही मजबूती से उठेगा।

    पूर्व विधायक ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता और देश की जनता लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए मजबूती के साथ खड़े हैं।

    मुख्यमंत्री के दौरे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए सवाल, बोले- हजारों परिवार प्रभावित, फसल-पशुधन और मकानों को भारी नुकसान; विशेष राहत पैकेज की मांग

    रायपुर / शौर्यपथ। बस्तर संभाग में हालिया भारी बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बाढ़ ने बस्तर के आम लोगों के मकान, गृहस्थी का सामान, फसल और पशुधन को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए मौजूदा राहत राशि को अपर्याप्त बताते हुए व्यापक सर्वेक्षण कर नुकसान के अनुरूप मुआवजा देने की मांग की।
    बाढ़ की स्थिति को लेकर उपलब्ध सरकारी बयानों के मुताबिक 571 गांवों में 22,377 लोग प्रभावित हुए थे और करीब 16 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा और बस्तर के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत शिविरों का निरीक्षण किया था।

    मुख्यमंत्री के दौरे पर बैज ने उठाए सवाल
    दीपक बैज ने मुख्यमंत्री के बस्तर दौरे को लेकर आरोप लगाया कि दौरा प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान की दृष्टि से अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल और पर्याप्त सहायता की जरूरत है। बैज ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से संचालित राहत व्यवस्था केवल औपचारिकता तक सीमित रही।
    हालांकि, मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रभावित परिवारों से मुलाकात, राहत शिविरों का निरीक्षण और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। वहीं बस्तर के प्रभावित परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता की घोषणा की जानकारी भी सार्वजनिक हुई थी।
    बैज ने कहा कि बाढ़ से हजारों घर प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में परिवारों की गृहस्थी का सामान खराब हुआ है। उनके अनुसार सड़कों और पुल-पुलियों के क्षतिग्रस्त होने से कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के सामने बाढ़ के बाद पुनः सामान्य जीवन शुरू करने की चुनौती है।
    राहत शिविरों से लौटे परिवारों की स्थिति पर चिंता
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि कई परिवारों का राशन, घरेलू उपयोग का सामान, बच्चों की कॉपी-किताबें और जरूरी दस्तावेज भी बाढ़ के पानी में खराब हो गए। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों से घर लौटने के बाद अनेक परिवारों के सामने भोजन और दैनिक जरूरतों की समस्या बनी हुई है।
    बैज ने कहा कि सामाजिक संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर प्रभावित परिवारों के लिए भोजन एवं अन्य सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    मुआवजा बढ़ाने और कर्जमाफी की मांग
    दीपक बैज ने सरकार से बाढ़ प्रभावित परिवारों के नुकसान का व्यापक सर्वे कराने और मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि—पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये तथा आंशिक क्षति वाले मकानों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता दी जाए।
    फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कर किसानों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

    प्रभावित किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए।

    पशुधन की क्षति का आकलन कर बाजार दर के अनुरूप मुआवजा दिया जाए।
    बाढ़ में खराब हुए टीवी, फ्रिज, बेड और अन्य घरेलू सामान का भी सर्वे कर सहायता दी जाए।
    प्रभावित परिवारों को दो माह का राशन पुनः उपलब्ध कराया जाए।
    बच्चों की कॉपी-किताब और स्कूल बैग उपलब्ध कराए जाएं।
    जरूरी दस्तावेजों के पुनर्निर्माण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।
    बाढ़ के बाद संक्रमण और बीमारियों की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं।
    पुल-पुलियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष पैकेज की मांग

    बैज ने पूरे बस्तर संभाग में क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों और अन्य अधोसंरचना के पुनर्निर्माण के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल तत्काल राहत से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और आधारभूत संरचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है।
    उन्होंने सरकार से बाढ़ से हुए नुकसान का पारदर्शी एवं विस्तृत सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

    भोजराज सिन्हा बोले—SIR समेत प्रमुख फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति, संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना बंद करे विपक्ष

       भिलाई / शौर्यपथ / चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच भिलाई जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने मंगलवार को संयुक्त पत्रकार वार्ता की। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग के हालिया संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस के उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें आयोग के भीतर मतभेद होने की बात कही गई थी।

    नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के संयुक्त बयान से स्पष्ट हो गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला है।

    सिन्हा ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग की चुनावी प्रक्रिया को लेकर देश और दुनिया में उसकी संस्थागत भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाना विपक्ष की राजनीति का हिस्सा बन गया है।

    अंग्रेजी अखबार में कैबिनेट सचिव को लिखे कथित पत्र के संबंध में सिन्हा ने कहा कि जिस पत्र का उल्लेख किया गया है, वह किसी नीतिगत विषय या SIR से संबंधित नहीं था, बल्कि सामान्य प्रशासनिक विषय से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रति संवैधानिक रूप से जिम्मेदार है, इसलिए इसे किसी नीतिगत मामले से जोड़ना उचित नहीं है।

    भोजराज सिन्हा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर प्रमुख निर्णयों पर सर्वसम्मति की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर दिए गए आदेश के बावजूद विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

    भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने भी पत्रकार वार्ता में चुनाव आयोग के संयुक्त बयान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

    दोनों नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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