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खेल / शौर्यपथ / मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने इंटरनैशनल क्रिकेट में सेंचुरी की सेंचुरी लगाई है, ऐसा करने वाले वो दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं। आज से ठीक 30 साल पहले सचिन ने करियर की पहली सेंचुरी ठोकी थी। 1989 में इंटरनैशनल डेब्यू करने वाले तेंदुलकर 1990 में इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा थे। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच 9 से 14 अगस्त के बीच मैनचेस्टर में खेला गया था। इस मैच के आखिरी दिन यानी कि 14 अगस्त को तेंदुलकर ने करियर की पहली सेंचुरी ठोकी थी।
इस सेंचुरी के साथ ही तेंदुलकर ने इंटरनैशनल क्रिकेट में 100 सेंचुरी के सफर का आगाज किया था। तेंदुलकर को उस टेस्ट में मैन ऑफ द मैच भी चुना गया था, उनकी सेंचुरी के दम पर ही भारत वो टेस्ट मैच ड्रॉ कराने में सफल रहा था। भारत को दूसरी पारी में इंग्लैंड ने 408 रनों का टारगेट दिया था। तेंदुलकर छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे थे। टीम इंडिया ने 127 रनों पर पांच विकेट गंवा दिए थे और टीम पर हार का संकट मंडरा रहा था, तब तेंदुलकर क्रीज पर उतरे थे।
तेंदुलकर ने पहले कपिल देव के साथ और फिर मनोज प्रभाकर के साथ मिलकर टीम इंडिया को हार से बचाया था। तेंदुलकर उस मैच में 119 रन बनाकर नॉटआउट लौटे थे। पहली पारी में भी तेंदुलकर ने जबर्दस्त बल्लेबाजी करते हुए 68 रन बनाए थे। उस समय टीम इंडिया के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन थे और उन्होंने पहली पारी में 179 रन बनाए थे।
टीम इंडिया सीरीज का पहला मैच 247 रनों से गंवा चुकी थी, ऐसे में दूसरा टेस्ट मैच हारने का मतलब था कि इंग्लैंड को सीरीज में अजेय बढ़त मिल जाती, लेकिन तेंदुलकर ने इंग्लैंड के इरादों को पूरा नहीं होने दिया था। सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच भी ड्रॉ रहा था और इंग्लैंड ने सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली थी। तेंदुलकर ने भारत के लिए 200 टेस्ट मैचों में 51 सेंचुरी और 463 वनडे इंटरनैशनल मैचों में 49 सेंचुरी जड़ी हैं। तेंदुलकर ने 2013 में अपना आखिरी इंटरनैशनल मैच खेला था।
खेल / शौर्यपथ / मुंबई के क्रिकेटर करन तिवारी ने सोमवार रात को मलाड में अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। करन मुंबई की प्रोफेशनल क्रिकेट टीम के सदस्य नहीं थे, लेकिन नेट बॉलर के तौर पर जुड़े थे। अभी तक उनकी मौत का कारण पता नहीं चला है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि वो अपने करियर को लेकर डिप्रेशन में थे और इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली। कोविड-19 महामारी के चलते करियर में आए ब्रेक से वो परेशान थे। करन महज 27 साल के थे। कुरार पुलिस स्टेशन में एक्सिडेंटल डेथ का केस दर्ज किया गया है, कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है।
टाइम्स नाउ में छपी खबर के मुताबिक करन मिडिल क्लास परिवार से थे। पुलिस ने कहा कि करन ने अपने एक करीबी दोस्त को फोन किया था और उनसे मौजूदा स्थिति के बारे में बात की थी। करन इस बात से परेशान थे कि उन्हें अपना टैलेंट दिखाने के लिए मौका नहीं मिल रहा है। करन ने राजस्थान में रह रहे अपने दोस्त से बात की थी। करन के दोस्त ने यह सारी बातें उनकी बहन को बताईं, जो राजस्थान में ही रहती हैं। सोमवार रात करीब 10:30 बजे करन अपने कमरे में गए और दरवाजा बंद कर लिया, जब तक दरवाजा तोड़ा गया वो मर चुके थे।
करन सीनियर टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन्होंने काफी बार कोशिश की, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कोविड-19 के चलते देश में क्रिकेट के तमाम इवेंट्स स्थगित हो गए थे, जिससे करन की मुश्किलें और बढ़ गई थीं। एक्टर जीतू वर्मा करन के करीबी दोस्त थे और उन्होंने बताया कि करन काफी समय से संघर्ष कर रहा था।
खेल / शौर्यपथ / इंग्लैंड के सीनियर तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को वेस्टइंडीज के खिलाफ बुधवार (8 जुलाई) से शुरू होने वाले पहले टेस्ट क्रिकेट मैच की प्लेइंग इलेवन में जगह मिलने की संभावना नहीं है। इंग्लैंड का टीम प्रबंधन तेज गेंदबाजी के अगुआ जेम्स एंडरसन के साथ जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड को प्लेइंग इलेवन में रखने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के अनुसार, ''ब्रॉड को आठ साल में पहली बार घरेलू टेस्ट मैच से बाहर होना पड़ सकता है, क्योंकि इंग्लैंड जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड की तेज गेंदबाजी की जोड़ी को जल्द से जल्द मौका देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
मार्क वुड और जोफ्रा आर्चर दोनों चोटों से परेशान थे, लेकिन अब वे फिट है। इंग्लैंड के दक्षिण अफ्रीकी दौरे के दौरान चोटिल होने वाले वुड अब खेलने के लिए तैयार है। टीम में ऑफ स्पिनर डोमिनिक बेस के रूप में केवल एक स्पिनर है और ऐसे में ब्रॉड को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ''बुधवार से शुरू होने वाले मैच के लिए चुनी गई (13 सदस्यीय) टीम में कोई अतिरिक्त बल्लेबाज नहीं है और एक स्पिनर डॉम बेस है, ऐसे में मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड और कार्यवाहक कप्तान बेन स्टोक्स को केवल तेज गेंदबाजी आक्रमण के बारे में ही सोचना होगा।''
यहां तक कि इंग्लैंड की टीम के बीच आपस में खेले गए अभ्यास मैच में अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्रिस वोक्स को भी एजिस बॉउल में मौका मिलने की संभावना नहीं है। ब्रॉड को आखिरी बार 2012 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ही घरेलू टेस्ट में विश्राम दिया गया था। उन्होंने अब तक 485 टेस्ट विकेट लिए हैं और इंग्लैंड की तरफ से एंडरसन के बाद सर्वाधिक विकेट लेने वाले दूसरे गेंदबाज हैं।
इंग्लैंड के मुख्य कोच सिल्वरवुड और कार्यवाहक कप्तान स्टोक्स हालांकि वुड को प्राथमिकता दे सकते हैं जो 90 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं। इंग्लैंड को वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ लगातार छह टेस्ट मैच खेलने हैं और ऐसे में तेज गेंदबाजों को तरोताजा बनाये रखने के लिए वह रोटेशन की नीति अपना सकता है।
इंग्लैंड की 13 सदस्यीय टीम : बेन स्टोक्स (कप्तान), जेम्स एंडरसन, जोफ्रा आर्चर, डोमिनिक बेस, स्टुअर्ट ब्रॉड, रोरी बर्न्स, जोस बटलर (विकेटकीपर), जॉक क्रॉली, जो डेनली, ओली पोप, डोम सिबली, क्रिस वोक्स, मार्क वुड।
खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली अपनी फिटनेस को लेकर काफी सीरियस रहते हैं। विराट अपनी डाइट और वर्कआउट दोनों से किसी तरह का समझौता करना पसंद नहीं करते हैं। कोविड-19 महामारी (कोरोना वायरस संक्रमण) के चलते वो भले ही क्रिकेट के मैदान से दूर हैं, लेकिन अपनी फिटनेस कैसे बनाई रखनी है, यह उनको अच्छी तरह पता है। विराट ने वेटलिफ्टिंग का एक वीडियो शेयर किया, जिसके लिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने उन्हें ट्रोल किया। विराट ने अपने जवाब से केपी की बोलती बंद कर दी।
विराट ने वेटलिफ्टिंग का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'अगर मुझे मौका मिले रोज एक एक्सरसाइज चुनने का तो ये ही होगी। Love the power snatch' इस वीडियो पर कमेंट करते हुए पीटरसन ने लिखा, 'बाइक पर चढ़िए।' जिस पर विराट ने जवाब में लिखा, 'रिटायरमेंट के बाद।' इस तरह से विराट ने अपने जवाब से केपी को शांत कर दिया। केपी के अलावा ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने भी विराट को ट्रोल किया।
वॉर्नर ने कमेंट में लिखा, 'यह भार उठाना काफी आसान दिख रहा है।' हालांकि वॉर्नर को विराट ने जवाब नहीं दिया। विराट इन दिनों मुंबई में अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ हैं। मुंबई में कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए अभी तक क्रिकेटरों ने पूरी तरह से आउटडोर ट्रेनिंग शुरू नहीं की है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी अभी क्रिकेटरों का ट्रेनिंग कैंप नहीं शुरू किया है।
खेल / शौर्यपथ / कोरोना वायरस काल या इसके बाद क्रिकेट में कोई हाई फाइव्स, हग्स, हेड का एक-दूसरे रब करना नहीं होगा। अब केवल कोहनी और स्माइल से ही एक-दूसरे से संपर्क करना होगा और सेलिब्रेशन मनाना होगा। हाल ही में इंग्लैंड के अभ्यास सत्र में टीम स्टोक्स और टीम बटलर के बीच हुए मैच में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। न्यूजीलैंड में चोटिल होने के बाद पहली बार मैदान में लौटे तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने विकेट सेलिब्रेशन टीममेट से कोहनी से कोहनी टकराकर किया।
कोरोना वायरस महामारी के दो माह बाद शुरू हुए फुटबॉल में भी कोहनी से कोहनी टकराकर खुशी मनाने की नई अभिव्यक्ति शुरू हुई। क्रिकेट में सेलिब्रेशन अब कैसे होंगे यदि इसमें कोई संदेह है तो बुधवार के इंग्लैंड के अभ्यास सत्र को देख सकते हैं। इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज तीन माह के बाद शुरू होने वाली है। यह सीरीज 8 जुलाई से खेली जाएगी। इससे पहले इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों ने अलग-अलग प्रैक्टिस मैच खेला।
इंग्लैंड क्रिकेट ने अपने ऑफिशियल टि्वटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें जेम्स एंडरसन जो डेनले का विकेट लेने के बाद कोहनी से कोहनी टकराकर विकेट सेलिब्रेट कर रहे हैं। विकेटकीपर बेन फोक्स हाईफाइव के लिए स्वभावतः अपना हाथ ऊपर उठा रहे हैं। यह मैच इंग्लैंड के ट्रेनिंग दल को दो टीमों में बांटकर कराया जा रहा है।
टीम स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया था। टीम स्टोक्स के लिए खेलते हुए एंडरसन ने 18 ओवर में 49 रन देकर 2 विकेट लिए। एंडरसन को बार-बार सैनेटाइजर का प्रयोग करते भी देखा जा सकता है।
टीम बटलर ने तीन दिवसीय अभ्यास मैच में टीम बटलर ने अपनी पहली पारी 90 ओवर में पांच विकेट पर 287 रन बनाकर घोषित कर दी थी। जेम्स ब्रासी और डेन लारेंस ने अर्द्धशतक बनाए। बेन स्टोक्स के नेतृत्व में इंग्लैंड की टीम पहले टेस्ट में साउथम्पटन में वेस्टइंडीज का सामना 8 जुलाई को करेगी। नए नियमों के साथ यह पहला इंटरनेशनल टेस्ट मैच होगा। इसमें गेंद को चमकाने के लिए मुंह की लार का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
टीम बटलर की तरफ से ओपनर रोरी बर्न्स ने 21, ओपनर जेम्स ब्रेसी ने 85, जो डेनले ने 48, डैन लॉरेंस ने 58, ओली पोप ने 25 और कप्तान जोस बटलर ने नाबाद 24 रन बनाए। टीम स्टोक्स की तरफ से जेम्स एंडरसन और क्रेग ओवर्टन ने दो-दो विकेट लिए।
खेल / शौर्यपथ / भारतीय तेज गेंदबाज श्रीसंत ने अपने करियर में कई दिग्गज क्रिकेटरों को देखा है। वह उन कुछ चुनिंदा क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने अपने देश के लिए टी-20 और वनडे विश्वकप दोनों जीते हैं। वह 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थे। टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच में वह सेंटर में थे। इस मैच में श्रीसंत ने चार ओवर में 44 रन देकर सोहैल तनवीर का विकेट झटका था। श्रीसंत ने हाल ही में बताया कि 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में उनका सबसे ज्यादा दबाव वाला लम्हा कौन-सा था।
2007 टी-20 वर्ल्ड कप के भारत और पाकिस्तान के फाइनल मैच में उनकी गेंदबाजी से ज्यादा चर्चा उनकी फील्डिंग की हुई थी। खासतौर पर मिसबाह उल हक के उस कैच की, जिसकी वजह से भारतीय क्रिकेट टीम इंतिहास रच पाई। पाकिस्तान को चार गेंदों पर छह रन की जरूरत थी। मिसबाह ने शॉट खेला और श्रीसंत ने फाइन लेग पर शानदार कैच लपक कर टीम इंडिया की इतिहास रचने में मदद की।
हालांकि कई लोग आज भी उस कैच को नहीं भूले हैं, लेकिन 37 वर्षीय श्रीसंत के मुताबिक मिसबाह के कैच से ज्यादा वह शाहिद अफरीदी के कैच के दौरान दबाव में थे। उस वाकये को याद करते हुए श्रीसंत ने क्रिकट्रेकर के साथ बातचीत में कहा कि इरफान पठान को पता था कि शाहिद अफरीदी गेंद को हवा में मारेंगे और पहले ही उन्होंने मुझसे कैच लेने के लिए तैयार रहने को कह दिया था।
श्रीसंत ने बताया, ''मेरे लिए शाहिद अफरीदी का कैच ज्यादा मुश्किल था। इरफान पठान ने मुझसे कहा था कि अफरीदी जरूर सिक्स के लिए हिट करेंगे, बॉल लॉन्ग ऑफ के लिए आएगी और पहली ही गेंद में वह आउट हो जाएंगे। तू पकड़ लेना। उन्होंने पहले ही देख लिया था कि क्या होने वाला है।वह कई बार अफरीदी का विकेट ले चुके थे। किस्मत से गेंद हवा में ऊपर चली गई, और मैंने उसे पकड़ लिया।''
श्रीसंत की तरह और भी कई हैं, जो आज भी मिसबाह के कैच को याद करते हैं। मिसबाह के कैच के बारे में श्रीसंत ने कहा कि जब गेंद मेरी तरफ आ रही थी, मैं सचमुच उस वक्त कैच के बारे में नहीं सोच रहा था, बल्कि मैं उन्हें दो रन लेने से रोकने की तरफ सोच रहा था।
उन्होंने कहा, ''मिसबाह के विकेट के समय, मैं दाएं या बाएं डाइव कर गेंद को रोकने के बारे में सोच रहा था, ताकि मिसबाह दो रन न ले सकें। मैं गेंद को कैच करने के बारे में नहीं सोच रहा था। यहां तक कि धोनी भाई ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि मिसबाह का कैच भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे दबाव वाला कैच था। लेकिन मेरे लिए उस मैच में अफरीदी का कैच मेरे करियर का सबसे दबाव वाला कैच था।''
खेल / शौर्यपथ / अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अंपायरों के एलीट पैनल के सबसे युवा सदस्य नितिन मेनन एशेज सीरीज को सर्वोच्च चुनौती मानते हैं लेकिन उनका कहना है कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी जानबूझकर या अनजाने में गेंद पर लार नहीं लगाएं। 22 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना छोड़ने वाले 36 साल के मेनन इसके बाद अंपायरिंग से जुड़े जिसका हिस्सा उनके परिवार में कई सदस्य हैं। मेनन ने तीन साल पहले अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और सोमवार को 12 सदस्यीय एलीट पैनल में उनका प्रवेश सोने पर सुहागा रहा।
कोविड-19 महामारी के बीच एलीट पैनल का हिस्सा बने मेनन को नहीं पता कि उन्हें कब अंपायरिंग का मौका मिलेगा, लेकिन उन्हें पता है कि आईसीसी के मौजूदा दिशानिर्देशों को लागू करना बड़ी चुनौती होगी। मेनन ने पीटीआई से कहा, ''मुख्य चुनौती गेंद को संभालना होगा, यह चुनौती टेस्ट मैचों में अधिक होगी। शुरुआत में नियमों को लागू करने से पहले हम खिलाड़ियों को चेतावनी देंगे, जैसा कि हम तब करते हैं जब कोई खिलाड़ी खतरनाक तरीके से पिच पर दौड़ता है।''
इंदौर के रहने वाले इस अंपायर ने कहा, ''खिलाड़ियों के जानबूझकर की जगह गलती से लार लगाने की संभावना अधिक है, इसलिए हम इसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे। इंग्लैंड में सीरीज (अगले महीने शुरू होने वाली) के बाद खेलने के हालात को लेकर विस्तृत नियम आएंगे जिसके बाद हमें बेहतर पता चलेगा कि खेल में हाल में किए गए बदलावों को कैसे लागू करना है।''
स्थिति सामान्य होने पर मेनन को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक एशेज सीरीज का हिस्सा बनने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ''इसमें कोई संदेह नहीं कि मैंने एशेज में अंपायरिंग का सपना देखा है। यह एकमात्र सीरीज है जो मैं टीवी पर देखता हूं। वहां का माहौल, जिस तरह से सीरीज खेली जाती है उसका मैं भी हिस्सा बनना चाहता हूं। यह इंग्लैंड में हो या ऑस्ट्रेलिया में मैं इसका हिस्सा बनना पसंद करूंगा। और विश्व कप में अंपायरिंग, यह चाहे टी20 हो या वनडे अंतरराष्ट्रीय।''
कोरोना वायरस महामारी के कारण यात्रा संबंधी पाबंदियों को देखते हुए आईसीसी ने फैसला किया है कि सीरीजओं में केवल स्थानीय अंपायर अंपायरिंग करेंगे। इंग्लैंड में पहुंचने के बाद ट्रेनिंग शुरू करने से पहले वेस्टइंडीज टीम को जिस तरह पृथकवास में रहना पड़ा अंपायरों को भी वैसा ही करना होगा और मेनन को लगता है कि इसका अंपायरों पर मानसिक प्रभाव पड़ेगा।
खिलाड़ियों का गेंद पर लार नहीं लगाना सुनिश्चित करने के अलावा अंपायरों को यह भी देखना होगा कि खिलाड़ी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें और गेंद के संपर्क में आने के बाद वे हाथ को नियमित रूप से सैनिटाइज करें। अंपायरों को भी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा ओर अब उन्हें मैदान पर खिलाड़ी की निजी चीजों को नहीं संभालना होगा।
मेनन ने कहा, ''ग्लव्स पहनना अंपायरों की व्यक्तिगत पसंद होगी लेकिन हमने फैसला किया है कि हम अपनी जेब में सैनिटाइजर रखेंगे। विकेट गिरने के बाद और ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान हमें हाथ में गेंद रखी होगी इसलिए सुरक्षित रहना बेहतर है।'' उन्होंने कहा, ''और अगर खिलाड़ी गेंद पर लार लगा देते हैं तो हमें उसे तुरंत सेनेटाइज करना होगा। यह चौथे अंपायर का काम होगा। वह वाइप्स लेकर आएगा और गेंद को सैनिटाइज करेगा।''
खेल में हो रहे इन बदलावों का ओवर गति पर असर पड़ सकता है लेकिन मेनन ने कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, ''हम वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ इंग्लैंड की घरेलू सीरीज में अंपायरिंग करने वालों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। आईसीसी जो भी नियम बनाएगा हम उसका पालन करेंगे।''
तीन टेस्ट सहित 43 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग कर चुके मेनन ने कहा कि घरेलू अंपायर पर अधिक दबाव होता है और एलीट पैनल का हिस्सा होने के कारण उन पर इस तरह का कोई दबाव नहीं होगा। भारत नियमित रूप से विश्वस्तरीय अंपायर तैयार करने में विफल रहा है लेकिन मेनन का मानना है कि अब स्थिति बेहतर हो रही है।
खेल / शौर्यपथ / वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड के सिलेक्टर्स टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के सिलेक्शन को लेकर दुविधा में पड़ गए हैं। सिलेक्टर एड स्मिथ, जेम्स टेलर और कोच क्रिस सिल्वरवुड पहले टेस्ट के लिए टॉप ऑर्डर को लेकर रॉरी बर्न्स, डोम सिबली, जो डेनली और जैक क्राउली के नामों पर विचार कर सकते हैं। बर्न्स ने पिछले करीब 18 महीनों के दौरान दो शतकों के साथ शानदार प्रदर्शन कर टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत की है।
दक्षिण अफ्रीका दौरे में लगी चोट से बर्न्स पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और ऐसा माना जा रहा है कि वो सलामी बल्लेबाज के रूप में इंग्लैंड की ओर से पारी की शुरुआत करेंगे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट जीतने में क्राउली, सिबली और डेनली ने इंग्लिश टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था। सिबली ने उस सीरीज में अपने करियर का पहला शतक जमाया था। इंग्लैंड का टॉप ऑर्डर इस समय उतना मजबूत नहीं है, जितना कि पहले था। एंड्रयू स्ट्रॉस और फिर उसके बाद जॉनाथन ट्रॉट के संन्यास लेने के बाद इंग्लैंड की टीम में सलामी बल्लेबाज की कमी खलती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिबली और बर्न्स सलामी जोड़ी के रूप में इंग्लिश पारी की शुरुआत कर सकते हैं, जबकि क्राउली या डेनली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कर टीम के बैटिंग ऑर्डर को मजबूती दे सकते हैं। क्राउली ने टीम में खुद के सिलेक्शन की संभावना को लेकर कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अभी तक कोई फैसला लिया गया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले कुछ सप्ताह में प्रैक्टिस मैच में बेहतर प्रदर्शन कर मैं अपनी दावेदारी को मजबूत कर सकता हूं।'
खेल /शौर्यपथ / भारत के पूर्व बल्लेबाज कृष्णामाचारी श्रीकांत ने 1983 विश्वकप विजेता टीम के अपने कप्तान कपिल देव की सराहना करते हुए कहा है कि उन्होंने खिलाडिय़ों को खुद पर भरोसा रखना सिखाया। श्रीकांत ने स्टार स्पोट्र्स के कार्यक्रम 'विनिंग द वल्र्ड कप-1983Ó में विश्वकप फाइनल के लम्हों को याद करते हुए कहा, "वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया। ओस पडऩे के कारण विकेट पर काफी नमी थी। हमें पहले बल्लेबाजी करनी थी और हमारे पास लॉड्र्स में खेलने के कोई खास अनुभव नहीं था। यह हमारे लिए बहुत नया था।"
पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, "वहीं अगर आप वेस्टइंडीज की गेंदबाजी आक्रमण को देखें तो उनमें एक से एक दिग्गज गेंदबाज थे और जोएल गार्नर ने अपनी लंबाई का पूरा इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाजों को गेंद ठीक से देखना और खेलना मुश्किल बना दिया था।"
श्रीकांत ने कहा, "ऐसे वक्त में कपिल ने हमारे सामने उदाहरण पेश किया। उनका आत्मविश्वास और खेल के प्रति उनका नजरिया उनके बारे में सबसे अच्छी चीजें हैं। कपिल की खासियत थी कि उन्होंने भारतीयों को खुद पर भरोसा रखना सिखाया और यही उनकी महानता है। "
बता दें कि श्रीकांत ने कम स्कोर वाले फाइनल में सर्वाधिक रन बनाए थे। इस दौरान गेंद ओस के बीच 10 फीट की ऊंचाई से आ रही थी। श्रीकांत जूझ रहे थे, लेकिन मैंने उन्होंने अमरनाथ से बात की और उन्होंने श्रीकांत को अपना स्वाभाविक खेल खेलने को कहा। अगले ओवर में श्रीकांत ने चौका जड़ा और अंत में 38 रन बनाए, जो विश्व कप फाइनल का सर्वोच्च स्कोर रहा था।
फाइनल मैच में 183 रनों पर आउट होने के बावजूद भारत ने दिग्गजों से सजी वेस्टइंडीज की टीम को लॉर्डस में 43 रनों से हराकर पूरी दुनिया को चकित कर दिया। पहला विश्व कप 1975 में खेला गया था। वेस्टइंडीज दो बार विश्व कप जीत चुका था, लेकिन कपिल देव ने तीसरी बात खिताब जीतने का उनका सपना चूर-चूर कर दिया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
