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देहरादून । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' महा-संवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर संकट से गुजर रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में अब तक करीब 152 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े मामलों के बावजूद अब तक किसी भी प्रमुख दोषी को सजा क्यों नहीं मिली। उनके अनुसार, इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है।
'शिक्षा नहीं, वसूली का तंत्र बन गई है व्यवस्था'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय परीक्षा शुल्क के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर छात्रों से इतनी फीस वसूली जा रही है कि उसका आंकड़ा शिक्षा बजट के बराबर पहुंच जाता है। राहुल गांधी ने इसे "एक्सटॉर्शन मॉडल" बताते हुए सरकार पर शिक्षा के व्यावसायीकरण का आरोप लगाया।
'1 प्रतिशत को फायदा, 99 प्रतिशत छात्र परेशान'
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था का लाभ केवल 1 प्रतिशत ऐसे लोगों को मिलता है जो भ्रष्टाचार और पेपर लीक के नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार और मेहनती छात्र इसकी कीमत चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत एक पेपर लीक से बर्बाद हो जाती है, जो युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है।
NEET अभ्यर्थियों को दिया भरोसा
नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 24 लाख से अधिक छात्रों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र खुद को अकेला न समझें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष छात्रों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ता रहेगा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाता रहेगा।
'यह राजनीतिक सभा नहीं, छात्रों की आवाज है'
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कोई चुनावी या पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि युवाओं की समस्याओं, संघर्षों और भविष्य पर केंद्रित संवाद है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों की चिंताओं को सुनना और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है।
सियासी संदेश भी स्पष्ट
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले आगामी राजनीतिक विमर्श में भी प्रमुख मुद्दा बने रहने की संभावना है।
दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका, डॉग स्क्वाड और क्राइम ब्रांच जांच में जुटी
दुर्ग। पुलगांव थाना क्षेत्र में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब पुलगांव नाला किनारे जंगलनुमा क्षेत्र में एक 55 वर्षीय महिला का अर्धनग्न शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान उरला निवासी भगवंतीन बाई (55 वर्ष) के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, महिला गुरुवार से लापता थी। परिजनों ने शुक्रवार को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बीच पुलगांव नाला के पास जंगलनुमा इलाके में उसका शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली।
सूचना मिलते ही पुलगांव थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही है।
महिला का शव अर्धनग्न अवस्था में मिलने से दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
नई दिल्ल / केंद्र सरकार ने शुक्रवार को विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश और सुशासन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के लिए ₹19,400 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। वहीं, नीति आयोग ने राज्यों के निवेश माहौल का आकलन करने वाली बहुप्रतीक्षित 'निवेश अनुकूलता सूचकांक (Investment Friendliness Index)' रिपोर्ट जारी की। स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
हरियाणा को ₹14,700 करोड़ की विकास सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में आयोजित कार्यक्रम में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल भारत के हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा मिशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ₹14,700 करोड़ से अधिक लागत की रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, सड़क संपर्क, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
चंडीगढ़ में ₹4,700 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का शुभारंभ
केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा संस्थानों के उन्नयन, सड़क संपर्क और शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से ₹4,700 करोड़ से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत की। इन योजनाओं का उद्देश्य नागरिक सुविधाओं में सुधार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
नीति आयोग ने जारी किया 'निवेश अनुकूलता सूचकांक'
नीति आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण का मूल्यांकन करने वाली 'Investment Friendliness Index' रिपोर्ट जारी की। यह सूचकांक राज्यों के प्रशासनिक सुधार, उद्योग-अनुकूल नीतियों, निवेश प्रक्रियाओं की सरलता और कारोबारी वातावरण का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। सरकार का मानना है कि यह रिपोर्ट राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा की समीक्षा बैठक सम्पन्न
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में 16-17 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का समापन हुआ। बैठक में रोग निगरानी प्रणाली, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, महामारी नियंत्रण, टीकाकरण और स्वास्थ्य आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की गई। राज्यों के अधिकारियों के साथ भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
भारतीय वन सेवा अधिकारियों से राष्ट्रपति का संवाद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारतीय वन सेवा (IFoS) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्हें देश की प्राकृतिक विरासत का संरक्षक बताया। उन्होंने अधिकारियों से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के प्रति समर्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया।
विकास और सुशासन की दिशा में अहम दिन
17 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की पहलें देश में हरित परिवहन, आधुनिक अवसंरचना, निवेश प्रोत्साहन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्णयों से देश की विकास गति को और मजबूती मिलेगी तथा राज्यों में प्रतिस्पर्धात्मक निवेश वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।
हरियाणा के जींद में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को मिली नई दिशा
जींद । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के जींद में आयोजित विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह की झलकियां साझा करते हुए देशवासियों को एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने पर बधाई दी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसे देश के रेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रतिभा तथा समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इसे "आत्मनिर्भर भारत" और भविष्य के लिए तैयार आधुनिक परिवहन व्यवस्था का प्रतीक बताया।
स्वच्छ और हरित भारत की ओर बड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन तकनीक आधारित यह ट्रेन भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित यह पहल न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी।
उन्होंने कहा, "देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है। यह स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।"
21वीं सदी की तकनीक का प्रतीक बनी हाइड्रोजन ट्रेन
प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुई यह ट्रेन भारत को भविष्य की उन्नत परिवहन तकनीकों की दिशा में आगे ले जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना की सफलता से देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ट्रेन की तकनीकी विशेषताओं और इसकी क्षमता के बारे में जानकर हर भारतीय गर्व महसूस करेगा।
हरियाणा की धरती को बताया वीरता और आस्था की भूमि
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने शक्तिपीठ माता जयंती के आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए जींद क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वीरतापूर्ण और आध्यात्मिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम में उमड़े जनसमूह के उत्साह को विकास और प्रगति की नई ऊर्जा बताया।
दूरदर्शी नीतियों का परिणाम: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि देश आज भी पुरानी सोच और व्यवस्थाओं पर निर्भर होता, तो वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर रेलवे व्यवस्था पर पड़ता। लेकिन बीते वर्षों में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में दूरदर्शी निर्णय लिए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल समस्याओं की पहचान नहीं करती, बल्कि समय रहते उनके स्थायी समाधान भी तैयार करती है, जिससे देश को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।
नई ऊर्जा, नई तकनीक और नया भारत
जींद में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से आगे बढ़कर हरित और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
नोकिया, वीटीटी, केओएनई और केम्पी के साथ 5जी-6जी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, अनुसंधान और निवेश पर बनी सहमति
नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच प्रौद्योगिकी, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं में डिजिटल तकनीक, उन्नत विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, स्मार्ट अवसंरचना और सतत विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया गया।
नोकिया के साथ 5जी और 6जी तकनीक पर चर्चा
श्री गोयल ने नोकिया कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों, 5जी और 6जी नेटवर्क, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा अनुसंधान एवं नवाचार सहयोग को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया। बैठक में भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल इकोसिस्टम और नोकिया की दीर्घकालिक भूमिका पर भी चर्चा हुई।
वीटीटी के साथ अनुसंधान एवं नवाचार साझेदारी को बढ़ावा
यूरोप के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों में शामिल वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर के साथ हुई बैठक में उन्नत प्रौद्योगिकियों, औद्योगिक परिवर्तन, डिजिटलीकरण, नई सामग्रियों और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने भारतीय और फिनिश संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग तथा तकनीक हस्तांतरण को और प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में केओएनई की बढ़ेगी भागीदारी
केओएनई कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ हुई बैठक में स्मार्ट शहरी अवसंरचना, लिफ्ट एवं एस्केलेटर तकनीक, हरित निर्माण समाधान और उन्नत विनिर्माण पर फोकस रहा। भारत के तेजी से विस्तार करते बुनियादी ढांचे और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्थानीयकरण के अवसरों पर भी विचार किया गया।
केम्पी के साथ औद्योगिक नवाचार और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंथन
श्री गोयल ने केम्पी समूह के शीर्ष नेतृत्व के साथ उन्नत औद्योगिक मशीनरी, वेल्डिंग तकनीक, विनिर्माण नवाचार और स्मार्ट औद्योगिक समाधानों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में निवेश के अवसरों को भी तलाशा गया।
भारत बना वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का भरोसेमंद केंद्र
इन बैठकों के दौरान भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। उद्योग जगत के नेताओं के साथ हुए सीधे संवाद ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।
भारत-फिनलैंड सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत
फिनलैंड दौरे के दौरान हुई ये रणनीतिक बैठकें भारत-फिनलैंड व्यापार मंच की सफलता को आगे बढ़ाते हुए तकनीक, निवेश, अनुसंधान और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खोलने वाली साबित हुई हैं। दोनों देशों ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली । देशभर में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, बांध सुरक्षा विशेषज्ञों तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।
बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए नियमों की अधिसूचना, तकनीकी दिशानिर्देशों के प्रकाशन और बांध सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तैयारी में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। साथ ही आपातकालीन कार्य योजनाओं (ईएपी), व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) मैनुअल तथा जोखिम आकलन अध्ययनों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
नए खतरों से निपटने के लिए बनेंगे विशेष नियम
समिति ने जल संरचनाओं के सामने उभर रहे नए खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए नियम तैयार करने, सुरक्षा जांच चेकलिस्ट में संशोधन करने तथा बांध निर्माण और संशोधन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बांध सुरक्षा अध्याय को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया।
इसके अलावा जांच, डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के मान्यता मानकों को तय करने, बांध विफलता रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने और विशेषज्ञों के पैनल के गठन पर भी सहमति बनी। समिति ने जोखिम वर्गीकरण, खतरा मूल्यांकन, उपकरण स्थापना, आपातकालीन कार्य योजना और जलाशय संचालन के लिए तकनीकी दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।
आईआईटी और एनआईटी संस्थानों के सहयोग से बढ़ेगी विशेषज्ञता
बैठक में बांध सुरक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन विकसित करने के लिए आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा संचालित पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रमों में इंजीनियरों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग को भी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
गाद जमाव और बांध विफलताओं पर विशेष चर्चा
समिति ने जलाशयों में बढ़ती गाद (सिल्टेशन) की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिए नए नियामकीय प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया। बैठक में हाल के वर्षों में हुई कुछ प्रमुख बांध विफलताओं और तकनीकी चुनौतियों पर भी विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए।
इनमें छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रही ड्रेजिंग गतिविधियों से जुड़े तकनीकी अनुभव साझा किए गए।
दिसंबर 2026 तक सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य
बैठक के समापन पर अध्यक्ष ने सभी राज्यों से आह्वान किया कि वे दिसंबर 2026 तक निर्धारित बांधों की व्यापक सुरक्षा जांच, आपातकालीन कार्य योजनाओं की तैयारी और जोखिम मूल्यांकन अध्ययन जैसे सभी अनिवार्य कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि देश के बांधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।
पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता
बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम
इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।
चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।
छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन कर दिया सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश
रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ग्राम दोकड़ा में आयोजित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ परंपरागत गजपति महाराजा की भूमिका का निर्वहन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए सोने की झाड़ू से भगवान के रथ के आगे मार्ग का प्रतीकात्मक रूप से मार्जन किया तथा चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव किया। इसके बाद उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में "जय जगन्नाथ" के जयघोष, शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मुख्यमंत्री साय ने सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1942 से चली आ रही यह गौरवशाली परंपरा आज भी जनआस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और वर्ष 2025 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित हो रही है। उन्होंने गजपति महाराजा की परंपरा निभाने का अवसर देने के लिए दोकड़ावासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्री जगन्नाथ से प्राचीन और आत्मीय संबंध रहा है। देवभोग का चावल आज भी पुरी के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है, जो इस सांस्कृतिक संबंध का जीवंत प्रमाण है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की गारंटी के अनुरूप प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें जारी की जा चुकी हैं तथा रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरचार्ज माफी योजना की अवधि तीन माह बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से चौबीसों घंटे नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। वहीं अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं सहित 520 से अधिक शासकीय सेवाएँ उनके गाँव में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि जशपुर जिले को शीघ्र ही रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं।धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही जशपुर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ विकसित होंगी।
रथयात्रा के दौरान ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने भजन एवं संकीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु भगवान के जयघोष लगाते हुए रथयात्रा में शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को आस्था और लोक संस्कृति के विराट उत्सव में बदल दिया।
इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा सहित श्री जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
16 जुलाई को केंद्र सरकार ने ऊर्जा, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम फैसले लिए। ईंधन निर्यात कर में बदलाव, यूरिया उत्पादन बढ़ाने की नई नीति और झारखंड-ओडिशा में रेल नेटवर्क विस्तार को मंजूरी दी गई।
नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश की ऊर्जा सुरक्षा, कृषि आत्मनिर्भरता और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इन फैसलों का उद्देश्य ईंधन निर्यात व्यवस्था को संतुलित करना, उर्वरक उत्पादन बढ़ाना और रेल संपर्क का विस्तार करना है।
सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विंडफॉल टैक्स) में संशोधन किया है। इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आवश्यकताओं के अनुरूप कर व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है।
कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति’ को मंजूरी दी। इस नीति के माध्यम से देश में घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इसी क्रम में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए झारखंड और ओडिशा में लगभग ₹397 करोड़ लागत की दो नई रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं से दोनों राज्यों में रेल संपर्क बेहतर होगा, माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
16 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता, मध्यस्थता और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई करते हुए निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और समयबद्ध न्याय पर जोर दिया।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को नागरिकता निर्धारण, वाणिज्यिक मध्यस्थता (Arbitration) और वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अदालत ने कई अहम कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
नागरिकता से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 9 के तहत भारतीय नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर होता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने जैसा गंभीर निर्णय बिना उचित जांच, पर्याप्त सुनवाई और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाए नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल को एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई से बचते हुए प्रत्येक मामले में तर्कसंगत और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करना होगा।
मध्यस्थता (Arbitration) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें गैर-हस्ताक्षरकर्ता कंपनियों के विरुद्ध मध्यस्थता कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Tribunal) के क्षेत्राधिकार से संबंधित आदेशों को सीधे संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में अंतिम मध्यस्थता निर्णय आने के बाद ही उपयुक्त कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।
इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने वर्षों से लंबित लगभग 800 पुराने सिविल और आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रोस्टर और विशेष पीठों (Special Benches) के गठन की प्रक्रिया पर चर्चा हुई, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
