July 14, 2026
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    बस्तर

    बस्तर (1108)

    दीपक वैष्णव की खास रिपोर्ट | शौर्य पथ | कोंडागांव

    कोंडागांव बस स्टैंड स्थित नेशनल हाइवे पर गुरुवार 17 सितम्बर की दोपहर एक गंभीर घटना ने यातायात व्यवस्था की पोल खोल दी। एक बिना नंबर प्लेट की बुलेरो ने लापरवाही से चलते हुए एक दोपहिया वाहन चालक को ठोकर मार दी। हादसे के बाद यह सामने आया कि बुलेरो चालक के पास न तो कोई दस्तावेज था और न ही वाहन पर आगे-पीछे नंबर प्लेट।
       सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे कोतवाली में पदस्थ एएसआई भूपेंद्र बघेल ने न तो मामले की गंभीरता को समझा और न ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई की। उल्टा बुलेरो चालक को मौके से ही छोड़ दिया गया। गवाहों के मुताबिक, गलती बुलेरो चालक की थी, लेकिन पुलिस ने न तो वाहन ज़ब्त किया, न ही चालक पर चालान किया। इस लापरवाही के चलते आरोपी चालक मौके से फरार हो गया।

    पीड़ित परिवार की मजबूरी
      हादसे में घायल टू-व्हीलर चालक के परिजन अस्पताल में भर्ती थे। इस कारण पीड़ित ने विवाद में समय गंवाने के बजाय सीधे अस्पताल जाना उचित समझा। बुलेरो चालक से नुकसान की भरपाई मांगने पर जब उसने पैसे देने से इनकार किया, तो पीड़ित निराश होकर अपने परिवार के पास चला गया।

    उठते सवाल
      कोंडागांव जिला यातायात व्यवस्था में सुधार की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन बिना नंबर–नेमप्लेट वाले वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। पुलिस विभाग की जिम्मेदारी यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की है, मगर जब मौके पर मौजूद एएसआई ही नियमों को अनदेखा कर दें, तो सवाल उठना लाज़मी है—

    क्या एएसआई को मोटर वाहन अधिनियम की जानकारी नहीं?
    या फिर जानबूझकर बिना कार्रवाई किए वाहन को छोड़ दिया गया?

    कानून क्या कहता है?

    मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 39 और 192 के अनुसार:बिना नंबर प्लेट वाहन चलाना गैरकानूनी है।पहली बार पकड़े जाने पर ₹5,000 तक का जुर्माना।बार-बार अपराध करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना व जेल की सजा।पुलिस को ऐसे वाहन को ज़ब्त करने का अधिकार।

    क्यों है नंबर प्लेट ज़रूरी?
      नंबर प्लेट वाहन की पहचान होती है। हादसा, अपराध या आपात स्थिति में यह सबसे अहम कड़ी होती है। बिना नंबर की गाड़ियां अक्सर अवैध कारोबार, तस्करी या आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल होती रही हैं।

    निष्कर्ष :कोंडागांव का यह मामला केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि पुलिस विभाग की लापरवाही का आईना है। बिना नंबर प्लेट की बुलेरो को छोड़ना न सिर्फ मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी भी है। सवाल उठता है कि क्या पुलिस ऐसे मामलों में भी सिर्फ अनदेखी कर देगी, या फिर जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देगी?

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ।विश्कर्मा जयंती के पावन अवसर पर बुधवार को यातायात विभाग जगदलपुर ने अपने वाहनों की विशेष पूजा-अर्चना दंतेश्वरी मंदिर में कराई। पूजा-अर्चना के दौरान दंतेश्वरी माता से सुरक्षित यातायात व्यवस्था, दुर्घटनामुक्त सेवाओं और जनहित में निरंतर कार्य करने की प्रार्थना की गई। विभाग के कर्मचारियों ने इसे परंपरा और श्रद्धा से जुड़ा अवसर मानते हुए अपने वाहनों की साफ-सफाई कर उन्हें पूजा में सम्मिलित किया।

    इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों ने संदेश दिया कि वाहन केवल सरकारी संसाधन नहीं, बल्कि जनता की सेवा का साधन हैं। उनकी सुरक्षा, देखभाल और सदुपयोग ही विभाग की प्राथमिकता है।

     कोंडागांव / शौर्यपथ / कोंडागांव के नेशनल हाइवे 30 पर स्थित शायद आप इस हरे भरे पठार नुमा जगह को देख के सोच रहे होंगे की ये एक मैदान है और इस जगह पर शायद फुटबॉल या क्रिकेट या कोई भी खेला जाता होगा । मगर शायद आपकी सोच गलत है यह एक तालाब है जिसे वर्षों पहले लोग इस बंधा तालाब से  अपने उपयोग नहाने व रोजमर्रा की जिंदगी के लिए उपयोग किया करते थे।
    इसके बाद इस बंधा तालाब के बाजू में सौंदर्यीकरण के साथ पार्क बना दिया गया कुछ समय यहां बोटिंग भी की गई मगर अब ये हाल है कि आज ये पूरा तालाब जलकुम्भी से भर चुका है साथ ही कोंडागांव नगर पालिका ने इस पर लाखों ख़र्च भी समय-समय पर किया। मगर अब शायद नगर पालिका भी इस जलकुम्भी को निकालने में नाकाम रह गई और आज यह पूरी तरफ से एक हरे भरे मैदान में तब्दील हो चुका है हालाँकि सिर्फ उपर से ही हरा भरा है और सतह पर जल है।

    क्यों कहलाने लगा मैदान
    आपको बतादे की लोग इस जगह को देख के मैदान कहने लगे है क्योंकि की यह चारों तरफ से पूरी तरफ हरा भरा और घना हो गया है देखने मे यह स्टेडियम से कम नहीं लग रहा है ।
    साथ ही आपको बता दे कि यह तालाब कोंडागांव से गुजरने वाली नेशनल हाईवे 30 से लगी हुई है यह मार्ग सीधा राजधानी को जोड़ने वाला मार्ग है साथ ही यह तालाब अब सोसल मीडिया में छाया हुआ है कोई इस मैदान रूपी तालाब को देख के 20 - 20 क्रिकेट खेलने या राज्य स्तरीय फुटबॉल खेलने की बात करते है।

    कांग्रेस नेतृत्व का काम, केवल भ्रम फैलाना और नकारात्मक राजनीति करना – संजय पाण्डे  

        जगदलपुर । शौर्यपथ / बस्तर के सर्वमान्य आदिवासी नेता एवं मंत्री श्री केदार कश्यप पर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे निराधार एवं भ्रामक आरोपों को लेकर जगदलपुर महापौर श्री संजय पाण्डे ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए षड्यंत्र और झूठे प्रचार का सहारा लिया है।
    महापौर संजय पाण्डे ने कहा कि –
     “कांग्रेस भली-भांति जानती है कि बस्तर में उसकी राजनीतिक ज़मीन खो चुकी है और यहां यदि किसी का सशक्त जनाधार है, तो वह भाजपा के आदिवासी नेता श्री केदार कश्यप का है। कांग्रेस का यह दुर्भावनापूर्ण कृत्य केवल एक सौम्य, सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी आदिवासी नेता को बदनाम करने का प्रयास है। श्री केदार कश्यप का व्यवहार हमेशा विनम्र और सरल रहा है, वे जनसामान्य से सहजता से मिलते हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हैं। यही कारण है कि बस्तर की जनता उन्हें अपना सच्चा नेता मानती है।”

    महापौर ने भानपुरी की घटना पर भी कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा –
      “कांग्रेस ने जिस तरह से भानपुरी स्थित मंत्री केदार कश्यप के निवास कार्यालय का घेराव कर वहाँ तोड़फोड़ की, पत्थरबाज़ी की और यहां तक कि ड्यूटी में तैनात महिला पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की, वह कांग्रेस की गुंडागर्दी और अराजक मानसिकता का प्रमाण है। सत्ता से बाहर होने की बौखलाहट में कांग्रेस अब हिंसक और असंवैधानिक रास्ता अख्तियार कर चुकी है। जनता इस कृत्य को कभी माफ नहीं करेगी और कांग्रेस की असली तस्वीर अब पूरी तरह सामने आ चुकी है।”
      उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाना, मनगढ़ंत कहानियां बनाकर सोशल मीडिया में फैलाना कांग्रेस की पुरानी फितरत है, लेकिन केवल आरोप लगाने से आरोप साबित नहीं होते। कांग्रेस का यह आचरण लोकतंत्र और जनभावनाओं के साथ छल करने जैसा है।
      महापौर ने आगे कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ सहित बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए दृढ़संकल्पित है। मंत्री केदार कश्यप निरंतर आदिवासी समाज के उत्थान और बस्तर के विकास के लिए कार्यरत हैं। उनका सौम्य और सरल व्यक्तित्व ही उन्हें जनता के और निकट ले आता है। यही कारण है कि कांग्रेस बस्तर की जनता से जुड़े मुद्दों पर पूरी तरह खाली हो चुकी है और केवल भ्रम फैलाने का असफल प्रयास कर रही है।
      महापौर पाण्डे ने कांग्रेस के हालिया धरना-प्रदर्शन और घेराव की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि –
    “कांग्रेस का कोई भी हठकंडा मंत्री केदार कश्यप जैसे सौम्य और सहज व्यक्तित्व की छवि को प्रभावित नहीं कर सकता। कांग्रेस के टूलकिट की सच्चाई जनता के सामने उजागर हो चुकी है। दरअसल, कांग्रेस के नेता दीपक बैज की लोकप्रियता में गिरावट और अपनी शाख बचाने की मजबूरी में कांग्रेस ऐसे हथकंडे अपना रही है, लेकिन इसमें उसे मुंह की खानी पड़ेगी।”

    अंत में महापौर ने कहा कि –
    “बस्तर की जनता कांग्रेस की इस नकारात्मक राजनीति को न केवल नकारेगी, बल्कि भाजपा के प्रति अपने विश्वास को और मज़बूती से दोहराएगी। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस का अब बस्तर में कोई भविष्य शेष नहीं है।”

    बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी के रथारूढ़ होने नए रथ निर्माण की हुई शुरुआत

    जगदलपुर, शौर्यपथ।  छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की दूसरी प्रमुख रस्म 'डेरी गड़ाई' आज पूरे धार्मिक उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हो गई। यह रस्म बस्तर दशहरा की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसके साथ ही बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की परिक्रमा के लिए रथ निर्माण की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करने की अनुमति प्राप्त हुई। इस अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, महापौर संजय पांडे, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर हरिस एस, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, बस्तर दशहरा पर्व के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेंबर-मेंबरिन और बड़ी संख्या में स्थानीय समुदाय उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

                बस्तर दशहरा पर्व के डेरी गड़ाई रस्म के तहत बिरिंगपाल गांव से विशेष रूप से लाई गई साल की पवित्र टहनियों को सिरहासार में खंभों के साथ विधि-विधानपूर्वक गाड़ा गया। यह प्रक्रिया पारंपरिक वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों के बीच मंत्रोच्चार और परम्परागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। इस रस्म का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह बस्तर दशहरा के रथ निर्माण की शुरुआत का प्रतीक है। रस्म के दौरान सिरहासार में रथ निर्माण की अनुमति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। 

              डेरी गड़ाई रस्म के अवसर पर महिलाओं ने हल्दी खेलने की परंपरा को निभाया, जिसमें वे एक-दूसरे पर हल्दी छिड़ककर उत्सव की खुशी को साझा करती हैं। यह दृश्य स्थानीय संस्कृति की जीवंतता और सामुदायिक एकता को दर्शाता है। हल्दी खेलने की यह परंपरा उत्साह बढ़ाती है। इसके साथ ही सामाजिक समरसता को भी मजबूत करती है। डेरी गड़ाई रस्म के समापन के साथ ही रथ निर्माण का कार्य विधिवत शुरू हो गया है। इस कार्य को झाड़ उमरगांव और बेड़ा उमरगांव के संवरा जाति के कुशल कारीगर संपन्न करेंगे। ये कारीगर अपनी परंपरागत तकनीकों और औजारों का उपयोग करते हुए रथ को तैयार करेंगे, जो आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की रथारूढ़ होने के साथ परिक्रमा के लिए उपयोग किया जाएगा। रथ का निर्माण पूरी तरह से पारंपरिक तरीके से किया जाता है, जिसमें आधुनिक उपकरणों का उपयोग नहीं होता। यह प्रक्रिया न केवल कारीगरी का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखती है। रथ का उपयोग बस्तर दशहरा के दौरान मां दंतेश्वरी की शोभायात्रा में किया जाएगा। यह रथ उत्सव का एक केंद्रीय प्रतीक है, जो मां दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। रथ की परिक्रमा बस्तर दशहरा के सबसे आकर्षक और धार्मिक दृश्यों में से एक होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। साथ ही देश-विदेश के सैलानी भी ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के साक्षी बनते हैं।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज जगदलपुर में मां दंतेश्वरी हवाई अड्डे पर आत्मीय स्वागत किया गया। वे बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और राहत कार्यों की समीक्षा करने के लिए पहुंचे हैं।

    ​हवाई अड्डे पर सांसद महेश कश्यप, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, आयुक्त नगर निगम प्रवीण वर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय के साथ वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और सचिव श्रीमती रीना बाबा साहब कंगाले भी पहुंचे हैं।

    ​हवाई अड्डे पर स्वागत के बाद मुख्यमंत्री श्री साय सड़क मार्ग से दंतेवाड़ा के लिए रवाना हो गए। वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे। इसके साथ ही, वे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा भी करेंगे ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

    कोंडागांव। राजधानी रायपुर से बस्तर संभाग को जोड़ने वाली जीवनरेखा नेशनल हाईवे-30 आज खुद जिंदगी के लिए खतरा बन गई है। एनएचएआई की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी ने इस राष्ट्रीय राजमार्ग को खस्ताहाल कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि कहीं गड्ढे सड़क को निगल रहे हैं, तो कहीं नारायणपुर चौक पर लगा हाई मास्क लाइट अंधड़ में लटककर मौत का झूला बना खड़ा है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क से ज्यादा गड्ढे और धूल उड़ रही है, जिससे लोगों को आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा तो है ही, साथ ही सांस व अस्थमा जैसी बीमारियों का शिकार भी होना पड़ रहा है। तेज रफ्तार वाहनों और अंधे मोड़ के बीच लटकती हाई मास्क लाइट किसी भी वक्त बड़ा हादसा कर सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नींद अब तक टूटी नहीं है।

    जनता पूछ रही है सवाल

    लोगों का गुस्सा अब टोल प्लाजा संचालन को लेकर फूट पड़ा है। सवाल उठ रहे हैं कि –

    • क्या टोल प्लाजा सिर्फ टैक्स वसूली का अड्डा है?

    • सड़कें गड्ढों में समा जाएं, बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो जाए, यातायात अव्यवस्थित हो – तो आखिर टोल की रकम जा कहां रही है?

    • एनएचएआई और ठेकेदारों की जिम्मेदारी केवल ‘वसूली’ तक सीमित है या जनता की सुरक्षा और सुविधा भी उनके दायरे में आती है?

    चेतावनी बन चुका चौक

    कोंडागांव जिला मुख्यालय का नारायणपुर चौक, जो कि एक व्यस्त तिराहा है, रात में पूरी तरह अंधेरे में डूबा रहता है। स्थानीय लोगों ने कई बार यातायात विभाग से सावधानी हेतु बेरिकेड्स और लाइट व्यवस्था सुधारने की मांग की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि सरकार और ठेकेदार दोनों ही बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर बढ़ रहा आक्रोश

    अब जनता सोशल मीडिया पर भी खुलकर सवाल उठा रही है – क्या इस समस्या का समाधान तब होगा जब केंद्रीय मंत्री या बड़े जनप्रतिनिधियों से लोग सड़क पर उतरकर मिलेंगे? या फिर प्रशासन हादसे के बाद ही जागेगा?

    जनहित का सवाल

    यह वही हाईवे है जो राजधानी को सीधे बस्तर से जोड़ता है। ऐसा राजमार्ग जो विकास का प्रतीक होना चाहिए था, वह आज भ्रष्टाचार और लापरवाही का आईना बन गया है। टोल वसूली करने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी जनता के पैसे पर मौज तो कर रहे हैं, लेकिन जनता को सुरक्षा और सुविधा देने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

    एक पेड़ माँ के नाम 2.0 पौधारोपण के लक्ष्य को साय सरकार ने किया पूरा- केदार कश्यप 

    जगदलपुर, शौर्यपथ । आज प्रदेश के वनमंत्री केदार कश्यप बस्तर के बेसोली स्थित शासकीय महाविद्यालय में आयोजित वन महोत्सव और फल उद्यान लोकार्पण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। वनमंत्री श्री कश्यप ने इस अवसर पर "मौलश्री" का पौधा लगाकर वन विभाग बस्तर वन मंडल के वन महोत्सव का औपचारिक शुभारम्भ किया एवं वन मंत्री ने आम जनता से अपील की कि वे अपने घर, मोहल्ले और आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण कर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

    वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वर्ष 1950 से देशभर में वन महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है, जिसका उद्देश्य वनों का संरक्षण, पौधारोपण को बढ़ावा देना और वृक्षों के प्रति जन जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा हमारी विष्णुदेव साय सरकार ने भी वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ में 2 करोड़ 76 लाख पौधरोपण का लक्ष्य तय किया था जिसे वन विभाग ने छत्तीसगढ़ के नागरिकों, स्व सहायता समूहों और महतारी वंदन योजना के हितग्राही महिलाओं के सहयोग से पूरा कर लिया है। लक्ष्य प्राप्ति के बाद भी विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश की हरियाली और सुंदरता को बनाये रखने के उद्देश्य से वृक्षारोपण के कार्य में लगी है। 

    उन्होंने कहा एक पेड़ माँ के नाम 2.0 अभियान के तहत पिछले दो महीनों में राज्य भर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। इसमें केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास विभाग, जीविका समूह, उद्यान विभाग, अन्य सरकारी संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और सामाजिक क्लब भी शामिल हुए। ऐसे सभी लोगों का ह्रदय से आभार। 

    फल उद्यान का लोकार्पण, पांच एकड़ में फैला है उद्यान

    आज वनमंत्री केदार कश्यप ने बेसोली फल वाटिका का उदघाटन किया। महाविद्यालय कैंपस के पाँच एकड़ क्षेत्र में लगभग 775 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण किया गया है। जिसमें आम 180, जामुन 175,अमरुद 175, कटहल 75, सीताफल 75, फ्लावरिंग 95 इसके साथ रामफल, लक्ष्मण फल, हनुमान फल, रूद्राक्ष, लक्ष्मी तरु, बेल इस तरह कुल अलग अलग किस्म के 775 पौधे रोपे गए हैं. 

     

    तेंदूपत्ता महिला हितग्राहियों को चरण पादुका का वितरण एवं चेक वितरण

     वन महोत्सव में वनमंत्री केदार कश्यप ने तेन्दुपत्ता संग्रहण करने वाले महिला हितग्राहियों को चरण पादुका का वितरण किया। वनमंत्री केदार कश्यप ने इस दौरान लोगों को बताया कि पिछले कांग्रेस शासन में न तेन्दु पत्ते का खरीदी हुआ बल्कि चरण पादुका जैसे महत्वपूर्ण योजना जो सीधा हमारे आदिवासी भाई बहनों के हित से जुड़ा था ऐसी हितग्राही मुलक योजना को बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा आज विष्णुदेव साय सरकार में यह योजना फिर से शुरू हो गयी है। वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बस्तर संभाग में अब तक पुरे प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक चरण पादुका का वितरण किया जा चूका है। वनमंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम के दौरान ग्राम चेराकुर के श्रीधर बघेल को राज मोहिनी देवी तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत 2 लाख का चेक प्रदान किया। 

     

    इस दौरान कार्यक्रम में कार्यक्रम में बस्तर के पर्व सांसद दिनेश कश्यप, बस्तर भाजपा जिलाध्यक्ष वेद प्रकाश पाण्डेय, निर्देश दीवान, शकुंतला कश्यप, पूर्व जिला अध्यक्ष रुपसिंह मण्डावी, मंडल अध्यक्ष प्रवीण सांखला, खितेश मौर्य, गौरव कश्यप, जमुना ठाकुर एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से आज जगदलपुर में “कनेक्ट बस्तर” का भव्य शुभारंभ हुआ। यह अनूठी पहल पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    उद्घाटन समारोह का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में किरण सिंह देव (विधायक), वेद प्रकाश पाण्डेय (बीजेपी जिला अध्यक्ष), रूप सिंह मंडावी (पूर्व जिला अध्यक्ष) सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

    समारोह में समिति द्वारा चयनित वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके साथ ही विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आधारित विशेष पैकेज और एक ब्राउज़र प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया, जिससे पर्यटक बस्तर की खूबसूरती को डिजिटल माध्यम से आसानी से खोज सकेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान कही गई अहम बातें वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा,

    “बस्तर क्षेत्र केरल से बड़ा है और इसकी प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है। वर्ष 2026 तक इस क्षेत्र को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य है। पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करके स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।”

    विधायक किरण सिंह देव ने कहा,“‘कनेक्ट बस्तर’ बस्तर के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे गाँवों के लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर पहचान मिलेगी।”

    इस कार्यक्रम के प्रमुख आयोजकों में सीसीएफ सुश्री स्टायलो मंडावी, नवीन कुमार (निदेशक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान) और उत्तम गुप्ता (डीएफओ बस्तर वनमंडल) रहे। कार्यक्रम का समापन भूषण साहू, डिप्टी एमडी, बस्तर वन मंडल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

    कनेक्ट बस्तर’ के प्रमुख उद्देश्य

    पर्यटन बढ़ावा: बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना।

    सांस्कृतिक संवर्धन: बस्तर की लोकसंस्कृति, लोकनृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और त्योहारों को बढ़ावा देना।

    स्थानीय रोजगार: होमस्टे, गाइडिंग, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर सृजित करना।

    प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण: पर्यटकों में पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना।

    सांस्कृतिक और प्राकृतिक अनुभव: झरनों, गुफाओं, मंदिरों और बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव कराना।

    ‘कनेक्ट बस्तर’ पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और पारिस्थितिक संरक्षण को भी नई ऊँचाई प्रदान करेगी।

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