July 14, 2026
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    बस्तर

    बस्तर (1108)

    महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा महतारी सदन- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

    जगदलपुर, शौर्यपथ।  प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा आपसी समरसता स्थापित करने सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार महतारी सदन का निर्माण कार्य किया जाना है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयास से 166 महतारी सदन की स्वीकृति आदेश जारी किया गया है, इसके लिए 49 करोड़ 80 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की गई है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि न्यू इंडिया के ग्रोथ साइकल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ रहा है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में बनने जा रहा महतारी सदन भी इसी दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि लगातार ग्राम भ्रमण के दौरान महिलाओं द्वारा बैठने की स्थान न होने की शिकायत की और बैठने हेतु स्थान दिलाने की मांग की जाती रही इसलिए महतारी सदन बनाने का विचार आया। ततपश्चात महिलाओं को रोजगार दिलाने और उनको काम काज के लिए स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार गांवों में महतारी सदन बनाने जा रही है। अब तक 368 महतारी सदन की स्वीकृति इसी उद्देश्य को पूर्ति के लिये जारी किया गया है। कार्यों में एकरूपता के दृष्टिकोण से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्य का एक मानक डिजाईन एवं प्राक्कलन तैयार किया गया है। प्रति महतारी सदन की लागत राशि रुपये 30 लाख होगी। 

     

    5 वर्षो में सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाने की योजना

    प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाया जाएगा। महतारी सदन बनाने की शुरुआत हो गयी है। पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में महतारी सदन बनना प्रारंभ किया जा रहा है व 5 साल में सभी ग्राम पंचायत में महतारी सदन बनेंगे। प्रदेश में बनने वाले महतारी सदन का निर्माण लगभग 25 सौ वर्गफुट में कराया जाएगा। सदन में कमरा, शौचालय, बरामदा, हाल, किचन और स्टोररूम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पानी के लिए ट्यूबवेल के साथ वाटर हार्वेस्टिंग भी किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसमे बॉउंड्रीवाल भी बनाये जाएंगे। महतारी सदन में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण किया जाएगा।

     

    बस्तर जिले में नए आठ महतारी सदन स्वीकृत

    बस्तर जिले में आठ नए महतारी सदन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें बस्तर विकासखंड का करंदोला, केशरपाल, चमिया, परचनपाल जगदलपुर विकासखंड का आड़ावाल, दरभा विकासखंड का दरभा और ग़ुमड़पाल, बकावंड विकासखंड का करपावन्ड शामिल है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी बस्तर जिले में 10 महतारी सदन निर्माण की स्वीकृति राज्य शासन द्वारा प्रदान की जा चुकी है, जिसमें दरभा विकासखंड के चिंगमपाल, तोकापाल विकासखंड के परपा और लोहंडीगुड़ा विकासखंड के उसरीबेड़ा में महतारी सदन के निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष महतारी सदन निर्माण का कार्य प्रगति पर हैं।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़, जिसे "धान का कटोरा" के रूप में जाना जाता है, एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां की संस्कृति और परंपराएं गहरे रूप से खेती-किसानी और प्रकृति से जुड़ी हुई हैं। यहां के त्यौहार और पर्व न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं, बल्कि किसानों और उनके पशुधन के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को भी व्यक्त करते हैं। इनमें से एक प्रमुख और लोकप्रिय पर्व है पोला, जो छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से किसानों और उनके बैलों के प्रति समर्पित है, जो खेती-किसानी में उनकी सबसे महत्वपूर्ण सहायता करते हैं। 

         पोला छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व है, जो भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से कृषि और पशुधन, विशेषकर बैलों की पूजा से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ के अलावा, यह पर्व महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। यह त्यौहार किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी मेहनत और पशुधन के योगदान को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। पोला पर्व का मूल उद्देश्य खेती-किसानी में बैलों के योगदान को मान्यता देना और उनकी पूजा करना है। यह छत्तीसगढ़ की सनातन परंपराओं और कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। बैल, जो खेती-किसानी में किसानों के सबसे बड़े सहायक हैं, इस दिन विशेष सम्मान के पात्र बनते हैं। यह पर्व मानसून के समापन और खरीफ फसल की बोआई के बाद मनाया जाता है, जो किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण समय होता है।

     पोला पर्व की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। 

    पोला पर्व के दिन, सुबह से ही उत्साह का माहौल होता है।किसान अपने बैलों को नदी या तालाब में ले जाकर स्नान कराते हैं। इसके बाद बैलों को रंगों, कपड़ों, घुंघरू, घंटियों, और कौड़ियों से सजाया जाता है। उनके सींगों पर पॉलिश और रंग लगाए जाते हैं, और गले में आभूषण पहनाए जाते हैं। बैलों को विशेष भोजन, जैसे गुड़ और चावल का मिश्रण, खिलाया जाता है। जिनके पास बैल नहीं होते, वे मिट्टी या लकड़ी से बने बैलों की पूजा करते हैं। पूजा में चंदन का टीका, धूप, अगरबत्ती, और माला का उपयोग किया जाता है। घरों में महिलाएं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान बनाती हैं, जैसे चीला, गुड़हा, अनरसा, सोहरी, चौसला, ठेठरी, खुरमी, बरा, मुरकु, भजिया, तसमई आदि। ये व्यंजन चावल, गुड़, तिल, और अन्य स्थानीय सामग्रियों से तैयार किए जाते हैं, जो छत्तीसगढ़ की पारम्परिक खाद्य संस्कृति को दर्शाते हैं।

          बच्चों के लिए यह पर्व विशेष रूप से रोमांचक होता है। वे मिट्टी या लकड़ी से बने खिलौनों, जैसे बैल और रसोई के बर्तनों के साथ खेलते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस दिन बैल दौड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जो पर्व के उत्साह को और बढ़ाती हैं।

    पोला पर्व का महत्व केवल धार्मिक या कृषि तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक, सांस्कृतिक, और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। बैल खेती-किसानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी पूजा करके किसान अपनी समृद्धि और प्रगति के लिए आभार व्यक्त करते हैं। यह पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखता है। बच्चों को मिट्टी के खिलौनों जैसे खेलों के माध्यम से अपनी संस्कृति और प्रकृति के महत्व का ज्ञान होता है। बैलों और प्रकृति की पूजा के माध्यम से यह पर्व पर्यावरण और पशुधन के संरक्षण का संदेश देता है। यह हमें हमारी जड़ों और प्रकृति के साथ जुड़ाव की याद दिलाता है।

         आधुनिक युग में, जहां मशीनों ने खेती-किसानी में बैलों की भूमिका को कुछ हद तक कम कर दिया है, फिर भी पोला पर्व अपनी प्रासंगिकता बनाए रखता है। यह पर्व न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संजोता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपने पर्यावरण और पशुधन का सम्मान करना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में भी यह पर्व छोटे स्तर पर मनाया जाता है, जहां लोग मिट्टी के बैलों की पूजा करते हैं और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

    सोनारपाल में की जाएगी उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना-मंत्री केदार कश्यप

    जगदलपुर, शौर्यपथ। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि क्षेत्र में उद्यानिकी फसल की ओर किसानों के रुझान को देखते हुए शीघ्र ही सोनारपाल में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना की जाएगी।

    गुरुवार को मंत्री केदार कश्यप ने बोड़नपाल और सोनारपाल में आयोजित कार्यक्रमों में 80 लाख 57 हजार रुपए लागत के 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन अवसर पर कहा कि हमारी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को गति दी हैण् 18 लाख आवासों के निर्माण की स्वीकृति इस बात का साक्ष्य है। हमारी सरकार ने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का कार्य किया साथ ही विकास कार्यों को एक नई दिशा दी है। उन्होंने इस दौरान क्षेत्रीय ग्रामीणों की मांग पर सोनारपाल में मंदिर के निकट हैंडपंप खनन, बड़ेपारा तारागांव में 2 मीटर पुलिया, सोनारपाल ठाकुरपारा में 2 मीटर पुलिया, माता मंदिर तारागांव में भवन, स्कूल में शेड निर्माण, बाकेल में धान खरीदी केंद्र, डेढ़ करोड़ रूपए की लागत से एनीकट निर्माण, जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण, खालेपारा बाकेल में हैंडपंप स्थापाना एवं सिलाई सेंटर स्थापना की घोषणा भी की।

    मंत्री केदार कश्यप ने सोनारपाल में आयोजित कार्यक्रम में 34 लाख 32 हजार रुपए और बोड़नपाल-2 में आयोजित कार्यक्रम में 46 लाख 25 हजार रुपए के कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। उन्होंने सोनारपाल में 46 लाख 25 हजार रुपए के कार्यों का भूमिपूजन किया, जिनमें चपका ग्राम पंचायत के मारीपारा स्थित माध्यमिक विद्यालय के पास 5 लाख रुपए की लागत से 2 मीटर पुलिया निर्माण, इसी ग्राम पंचायत में मारीपारा से बंगा घर तक 9 लाख 60 हजार रुपए की लागत से 300 मीटर सीसी सड़क का निर्माण, सोनारपाल ग्राम पंचायत में मेन रोड हनुमान मंदिर से संतोषी किराना दुकान तक चार लाख रुपए की लागत से 200 मीटर नाली निर्माण और क्षमता विकास योजना के तहत 5 लाख रुपए की लागत से सीएससी भवन निर्माण कार्य, तारागांव ग्राम पंचायत में बस्तर विकास प्राधिकरण के तहत 6 लाख 50 हजार रुपये की लागत से जोगी घर से मोसू घर तक 200 मीटर सी.सी. रोड निर्माण कार्य और छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा ग्राम तारागांव माता मंदिर में 4 लाख 22 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड निर्माण का भूमिपूजन किया।

             मंत्री श्री कश्यप ने इसके साथ ही बोड़नपाल 02 में आयोजित कार्यक्रम में कुल 46 लाख 25 हजार रुपए के कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमें छात्रावास बेसोली के क्रीड़ा परिसर में बस्तर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत 16 लाख 14 हजार रुपये की लागत से हाई मास्ट लाइट की स्थापना और बेसोली स्कूलपारा श्यामलाल घर के पास डीएमएफ के तहत 3 लाख 30 हजार रुपए की लागत से डेढ़ मीटर पुलिया निर्माण, ग्राम पंचायत बाकेल में छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा माता मंदिर के पास साप्ताहिक बाजार में 23 लाख 51 हजार रुपए की लागत से बाजार शेड निर्माण और अमडीगुड़ा पारा के पिकड़वाही नाला में डीएमएफ के अंतर्गत 3 लाख 30 हजार रुपए की लागत से डेढ़ मीटर पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में अधोसंरचना के विकास और जनसुविधाओं में वृद्धि होगी। इन सभी विकास कार्यों से बस्तर क्षेत्र में ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। श्री कश्यप ने इस अवसर पर ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसे ही जनहितैषी कार्य जारी रहेंगे। इस अवसर पर बस्तर जनपद पंचायत अध्यक्ष संतोष बघेल, जिला पंचायत सदस्य निर्देश दीवान एवं श्रीमती शकुंतला कश्यप सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, अनुविभागीय दंडाधिकारी ऋषिकेश तिवारी सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण उपस्थित रहे।

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। माँ का तबियत खराब होने के कारण व परिवार के लोग खेत मे काम करने के लिए गए हुए थे, इस दौरान घर के अंदर खेल रही बच्ची ने दरवाजे के पीछे छुपे करैत साँप को पकड़ लिया और उसे खिलौना समझ कर काट लिया, इस घटना में जहाँ साँप की मौत हो गई, वही बच्ची सुरक्षित रही, माँ ने जब यह नजारा देखा तो परिजनों को सूचना दिया, जहाँ 24 घंटे तक इलाज के बाद बच्ची को छुट्टी दे दिया गया।

    बताया जा रहा है कि परपा थाना क्षेत्र के ग्राम कोयेनार में रहने वाले पप्पू कश्यप की छोटी बेटी मानवी 9 माह 13 अगस्त को अपनी माँ दीपिका के साथ घर में थी, इसी दौरान दीपिका का स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह घर मे ही रह गई, जबकि परिवार के लोग खेती के लिए चले गए थे, माँ ने मानवी को बाहर ना जाये कहते हुए कमरे में ही खेलने के लिए छोड़ दिया, बच्ची ने खेलने के दौरान अचानक दरवाजे के पीछे एक करैत साँप को देखा, जिसे खिलौना समझ कर बच्ची ने पकड़ कर उसे बीच से काटना शुरू कर दिया, बच्ची ने साँप को इस कदर काटा की साँप की मौत हो गई, कुछ देर के बाद माँ ने साँप को देखा और पास में बच्ची को देख परिजनों को सूचना दिया, जहाँ परिजनों ने बच्ची को बेहतर उपचार के लिए मेकाज लाये, जहाँ उपचार के बाद 14 अगस्त की दोपहर बच्ची को छुट्टी दे दिया गया है।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला कलेक्टोरेट जगदलपुर ’’सेवा-सदन’’ परिसर में कलेक्टर हरिस एस ने ध्वजारोहण किया। इसके उपरांत जिला कार्यालय परिसर में स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर सीपी बघेल सहित कलेक्टोरेट और संयुक्त जिला कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

    केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने ध्वजारोहण कर ली परेड की सलामी

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले में 79 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह गरिमामय और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुख्य कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग परेड मैदान में आयोजित किया गया, जहां मुख्य अतिथि केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जनता के नाम जारी संदेश का वाचन किया। उन्होंने परम्परा के अनुसार शहीद परिवारों और भूतपूर्व सैनिकों से भी मुलाकात की। इस दौरान मंच पर कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा उपस्थित थे।

            स्वतंत्रता पर्व की 79 वीं वर्षगांठ के अवसर पर परेड कमांडर उप पुलिस अधीक्षक संगम राम और परेड टू आईसी निरीक्षक गणेश राम यादव के नेतृत्व में 15 प्लाटूनों ने बैंड की धुन पर आकर्षक मार्च पास्ट किया। शस्त्र रहित मार्चपास्ट में वन विद्यालय जगदलपुर को प्रथम, एनसीसी 9 वीं कंपनी सेजेस धरमपुरा की प्लाटून को द्वितीय पुरस्कार, तथा एनसीसी 10 वीं कंपनी जगतू माहरा हॉयर सेकण्डरी स्कूल जगदलपुर की प्लाटून को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं शस्त्र सहित मार्चपास्ट में सीआरपीएफ 80 वीं बटालियन जगदलपुर को प्रथम, सीआरपीएफ की सेड़वा स्थित 241 बस्तरिया बटालियन (महिला) की प्लाटून को द्वितीय स्थान और जिला पुलिस बल महिला को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इस अवसर पर नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों से भेंटकर मुख्य अतिथि द्वारा शाल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

             कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम और व्यायाम प्रदर्शन किया गया। जिसमें हायर सेकेण्डरी स्कूल तितिरगांव के बच्चों की प्रस्तुति को सराहते हुए प्रथम पुरस्कार, विद्या ज्योति स्कूल की प्रस्तुति को द्वितीय पुरस्कार और सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल कंगोली की प्रस्तुति को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

                 कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, महापौर संजय पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, मुख्य वन संरक्षक आरसी दुग्गा, सीसीएफ वन्यप्राणी स्टायलो मंडावी, कमांडेंट 5 वीं बटालियन जितेंद्र शुक्ला, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता, अपर कलेक्टर सीपी बघेल, अपर कलेक्टर ऋषिकेश तिवारी, आयुक्त नगर निगम प्रवीण वर्मा और अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकगण उपस्थित थे।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। स्थानीय मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री, विधायक जगदलपुर और विधायक तखतपुर का गुरुवार को जगदलपुर आगमन पर जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। ज्ञात हो कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर जिले के मुख्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू शामिल होंगे, जबकि विधायक जगदलपुर किरण सिंह देव जिला दंतेवाड़ा के मुख्य अतिथि हैं और विधायक तखतपुर धरमजीत सिंह जिला सुकमा में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य अतिथि हैं। एयरपोर्ट में इस दौरान विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, महापौर संजय पाण्डे, पूर्व विधायक बैदूराम कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ ही कलेक्टर हरिस एस.,एसपी शलभ कुमार सिन्हा, अपर कलेक्टर ऋषिकेश तिवारी, प्रवीण वर्मा और अन्य अधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। देश की आजादी पर्व स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में हर घर तिरंगा अभियान के तहत जिले में निरन्तर जनजागरूकता निर्मित करने सहित देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता रैली, बाइक रैली इत्यादि का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को कलेक्टर हरिस एस एवं पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने स्थानीय लालबाग परेड ग्राउंड के गणतंत्र द्वार से पुलिस विभाग के अधिकारी और जवानों की तिरंगा रैली को रवाना किया। इस मौके पर पुलिस के अधिकारी और जवानों ने बाईक रैली के माध्यम से तिरंगा लहराते हुए नागरिकों को देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सभी सच्चे शहीदों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान देने के लिए प्रेरक सन्देश दिया। उक्त तिरंगा रैली लालबाग परेड ग्राउंड से महाराणा प्रताप चैक, एनएमडीसी चैक, माड़िया चैक से सिटी कोतवाली चैक होकर पुनः लालबाग परेड ग्राउंड में समाप्त हुई। इससे पहले कलेक्टर एवं एसपी ने ने लालबाग स्थित शहीद स्मारक के तिरंगा झंडा में शुरू की गई लाइटिंग व्यवस्था का भी जायजा लिया।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। कलेक्टर हरिस एस और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने लालबाग मैदान में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के अंतिम रिहर्सल कार्यक्रम के उपरांत एनसीसी कैडेट और स्काउण्ट गाइड के तिरंगा रैली में शामिल हुए। रैली को उन्होंने तिरंगा झंडा लहराकर रवाना किया । उत्साहित एनसीसी कैडेट और स्काउण्ट गाइड ने भारत माता की जयघोष करते हुए तिरंगा यात्रा निकाली । इस दौरान आईपीएस सुमित कुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग, एनसीसी विंग के अधिकारी भी उपस्थित रहे ।

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