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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
दुर्ग / न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।
इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर 2026 को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया।
*न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में*
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
*ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम*
संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था।
इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया।
*विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा*
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं।
*न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर*
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।
दुर्ग, / छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा दुर्ग जिला के प्रभारी सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज अधिकारियों की बैठक के पूर्व कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शताब्दी गार्डन में पौधरोपण किया। उन्होंने मौलश्री का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्हाेंने निगम आयुक्त को शताब्दी गार्डन का संधारण कर इसे पब्लिक गार्डन के रूप में विकसित करने के निर्देश दिये ताकि आम लोगों को भी लाभ मिल सकें। इसी कड़ी में वन मंडलाधिकारी श्री सी.पी. अग्रवाल, अतिरिक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री पुलक भट्टाचार्य, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, नगर निगम भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह, नगर निगम दुर्ग की आयुक्त सुश्री लीना कोसम, नगर निगम भिलाई चरौदा के आयुक्त श्री डी.राजपूत और एसडीएम दुर्ग श्री सोनाल डेविड ने भी मौलश्री एवं अन्य प्रजाति के फलदार पौधरोपण किये।
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दुर्ग/ छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा दुर्ग जिला के प्रभारी सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज पीएम श्री सेजेस कुम्हारी में रोबोटिक्स एवं विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। साथ ही रोबोटिक्स लैब का अवलोकन किया और प्रायोगिक प्रक्रिया के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, एडीएम श्री विरेन्द्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी श्री जगदीश सिंह धीर, विद्यालय की प्राचार्य डॉ. विजया श्रीवास्तव, आईडीबीआई बैंक के जोनल मैनेजर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
विद्यालय में रोबोटिक्स लैब की स्थापना विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, विज्ञान एवं नवाचार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस लैब के माध्यम से विद्यार्थी रोबोटिक्स एवं तकनीकी अवधारणाओं को प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से समझ सकेंगे। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या समाधान तथा तकनीकी कौशल विकसित करने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने अपने उद्बोधन में विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं विकास की सराहना की। उन्होंने विद्यालय में रोबोटिक्स लैब की स्थापना को एक सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान करना भी आवश्यक है। उन्होंने रोबोटिक्स लैब के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रयोगशालाएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं तकनीकी दक्षता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थी प्रयोग करके सीखने की प्रक्रिया से जुड़ते हैं तथा भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वयं को तैयार कर सकते हैं।
विद्यालय की प्राचार्य डॉ. विजया श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने तथा उन्हें आधुनिक तकनीक एवं नवाचार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। रोबोटिक्स लैब का शुभारंभ विद्यालय के शैक्षणिक विकास एवं विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कार्यक्रम पश्चात् प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा एवं अन्य अतिथियों ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण किये। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
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कृष्णा मंडल
*बचेली में अतिक्रमण का खेल! श्मशान घाट के भवन पर कब्जे का आरोप, सीएमओ बोले—एसडीएम से पूछिए!*
*ठेका नगरपालिका से, अतिक्रमण के आरोप ठेकेदार पर! बचेली में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी?*
*सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल! बचेली में कार्रवाई का इंतजार*
बचेली। दंतेवाड़ा जिले के बचेली नगर पालिका क्षेत्र में नजूल भूमि और श्मशान घाट के भवन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। आरोप है कि नगरपालिका से लाखों रुपये के निर्माण कार्यों का ठेका लेने वाले एक ठेकेदार द्वारा बीटीओए के पार्किंग स्थल के निर्माण कार्य के साथ-साथ नजूल भूमि और श्मशान घाट के भवन पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है। श्मशान घाट के भवन का इस्तेमाल स्टोर रूम के रूप में किए जाने के आरोप ने मामले को गंभीर बना दिया है।।
सवाल यह है कि जब नगरपालिका क्षेत्र में कथित तौर पर अतिक्रमण हो रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या नगरपालिका प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है?
*ठेका नगरपालिका से, अतिक्रमण के आरोप ठेकेदार पर!*
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि नगरपालिका जिस ठेकेदार को लाखों रुपये के निर्माण कार्यों का ठेका देती है, उसी ठेकेदार पर सरकारी भूमि और श्मशान घाट के भवन पर अतिक्रमण करने के आरोप हैं।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
क्या संबंधित ठेकेदार को श्मशान घाट के भवन में स्टोर रूम बनाने या उसका उपयोग करने की अनुमति दी गई है? यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या नगरपालिका प्रशासन ने स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया है?
*सीएमओ के जवाब ने बढ़ाए सवाल, बोले—एसडीएम से पूछिए!*
इस पूरे मामले में बचेली नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) का कथित बयान भी चर्चा का विषय है।
बताया जा रहा है कि जब अतिक्रमण के संबंध में सीएमओ से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस मामले में अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) से पूछने की बात कही।
अब सवाल यह है कि नगरपालिका क्षेत्र में कथित अतिक्रमण की स्थिति पर नगरपालिका की जिम्मेदारी क्या है? यदि नगरपालिका क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है, तो उसकी निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है?
सीएमओ द्वारा एसडीएम से जानकारी लेने की बात कहे जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस मामले में जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और कार्रवाई कब होगी?
*एक ही क्षेत्र में पांच अन्य लोगों पर भी अतिक्रमण के आरोप*
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि जिस क्षेत्र में ठेकेदार पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया जा रहा है, उसी क्षेत्र में पांच अन्य लोगों द्वारा भी अतिक्रमण किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इन मामलों में भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
यदि एक ही क्षेत्र में कई लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायतें हैं, तो जिला प्रशासन को पूरे क्षेत्र का सीमांकन कराकर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
*आदिवासी परिवारों पर सख्ती, तो अन्य मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं*
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि किसी आदिवासी परिवार द्वारा अतिक्रमण किया जाता है, तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई करने में सख्ती दिखाता है, लेकिन अन्य कथित अतिक्रमण के मामलों में वैसी तत्परता क्यों नजर नहीं आती?
यह आरोप जांच का विषय है। प्रशासन को सभी मामलों में कानून के अनुसार समान और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति चाहे कोई भी हो, नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
*जिला प्रशासन से सवाल—कब होगी जांच और कार्रवाई?*
बचेली में नजूल भूमि और श्मशान घाट के भवन पर कथित अतिक्रमण का मामला अब जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है ।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन मामले की जांच कराता है या नहीं, संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
*जनता के सवाल सीधे हैं*—श्मशान घाट के भवन का इस्तेमाल किसकी अनुमति से हो रहा है? सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण की जांच कौन करेगा? नगरपालिका और एसडीएम की भूमिका स्पष्ट कब होगी?
अब बचेली की जनता जिला प्रशासन से जवाब और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए नवा रायपुर में यश फैन्स की नई विनिर्माण इकाई का भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में शुरू हुई इस परियोजना पर ₹152.74 करोड़ का निवेश किया जाएगा। प्रदेश की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकाई के रूप में विकसित होने वाले इस संयंत्र से 3,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हजारों युवाओं और उनके परिवारों को आर्थिक संबल देने के साथ प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा देगी।
छत्तीसगढ़ में बनेंगे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के उत्पाद
यश फैन्स क्रॉम्पटन, हैवेल्स, उषा और मिल्टन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के लिए इलेक्ट्रिक पंखे और किचन एप्लायंसेस का निर्माण करती है। नई इकाई शुरू होने से इन उत्पादों का निर्माण छत्तीसगढ़ में भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे राज्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करेगा और ‘मेड इन छत्तीसगढ़’ उत्पाद देशभर के बाजारों तक पहुंच सकेंगे।
परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग है। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध स्टील और एल्युमिनियम का इस्तेमाल प्रदेश में ही तैयार उत्पाद बनाने में किया जाएगा। इससे कच्चे माल के स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कल-पुर्जों की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन और अन्य सहायक सेवाओं की मांग बढ़ने से स्थानीय उद्यमियों तथा छोटे कारोबारियों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्टील, कोयले और बिजली के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। अब राज्य का लक्ष्य इन संसाधनों के आधार पर तैयार उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार रोजगार और आर्थिक विकास को मजबूती देगा। उन्होंने कंपनी को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
नवा रायपुर में कंपनी की पहली इकाई
यश फैन्स के चेयरमैन श्री रितेश नरेडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्टील और एल्युमिनियम की उपलब्धता, देश के मध्य में स्थित होने, मेहनती मानव संसाधन और राज्य सरकार के सहयोग से विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार की अच्छी संभावनाएं हैं। हैदराबाद स्थित कंपनी वर्तमान में हैदराबाद और हिमाचल प्रदेश में 12 विनिर्माण इकाइयां संचालित कर रही है। नवा रायपुर में स्थापित होने वाली इकाई छत्तीसगढ़ में कंपनी की पहली विनिर्माण इकाई होगी।
कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
12 पुल और 6 सड़कों का होगा निर्माण एवं उन्नयन, रायपुर के फुण्डहर चौक पर बनेगा 29.80 करोड़ का ओवरपास
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सड़क और पुल अधोसंरचना के विस्तार के लिए लोक निर्माण विभाग ने 243 करोड़ 81 लाख 11 हजार रुपये के 18 कार्यों की निविदाओं को मंजूरी दी है। इनमें 12 उच्च स्तरीय पुल और 6 सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्य शामिल हैं। विभाग ने चयनित निर्माण एजेंसियों को शीघ्र कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि मजबूत सड़कें और पुल आर्थिक विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान बनाते हैं। विशेषकर ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में बेहतर कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने के साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग की निविदा समिति ने 12 अक्टूबर को आयोजित बैठक में इन कार्यों को मंजूरी दी। बरसात के बाद निर्माण कार्यों के अनुकूल मौसम का उपयोग करते हुए विभाग सड़क और पुल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले पिछले महीने 24 कार्यों के लिए 672 करोड़ रुपये से अधिक की निविदाएं स्वीकृत की गई थीं।
रायपुर में ओवरपास और सर्विस रोड का चौड़ीकरण
राजधानी में यातायात सुधार के लिए वीआईपी रोड स्थित फुण्डहर चौक पर 29 करोड़ 80 लाख 12 हजार रुपये की लागत से ओवरपास बनाया जाएगा। वहीं रायपुरा चौक फ्लाईओवर के दोनों ओर रिंग रोड नंबर-1 (एनएच-30) की 3.66 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड के चौड़ीकरण के लिए 14 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपये की निविदा स्वीकृत की गई है।
सड़क कार्यों में जांजगीर-चांपा जिले के देवरी-तनौद-भुईगांव-शुक्लाभाठा-ससहा मार्ग के 17.40 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण 31 करोड़ 7 लाख 83 हजार रुपये से किया जाएगा। सूरजपुर जिले में 16.85 किलोमीटर रिंग रोड के सुदृढ़ीकरण के लिए 16 करोड़ 8 लाख 59 हजार रुपये की निविदा मंजूर हुई है। रायपुर जिले के समोदा-बनरसी-तुलसी मार्ग के 8.20 किलोमीटर हिस्से तथा बेमेतरा जिले के बहिंगा-तिवरैया-सिमगा पहुंच मार्ग और मदराली-कटई-बेलटुकरी मार्ग के निर्माण एवं उन्नयन कार्य भी स्वीकृत किए गए हैं।
इन्द्रावती और हान्दावाड़ा नदी पर बनेंगे पुल
बस्तर संभाग में बारहमासी आवागमन मजबूत करने के लिए बीजापुर जिले में कुटरू-गुटमांगी मार्ग पर इन्द्रावती नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इसके लिए 36 करोड़ 5 लाख 75 हजार रुपये की निविदा मंजूर हुई है। बस्तर जिले में भंवरडीह नदी और मांढेर नाला पर पुल निर्माण के लिए क्रमशः 12 करोड़ 74 लाख 95 हजार और 10 करोड़ 98 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। डीएमएफ मद से छिन्दनार-कौरगांव मार्ग पर हान्दावाड़ा नदी में पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 5 करोड़ 73 लाख 1 हजार रुपये की निविदा भी मंजूर की गई है।
इसके अतिरिक्त राजनांदगांव जिले के सूखा नाला, कोंडागांव जिले के कलीबेड़ा नाला और परौदा नदी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के मोती नाला तथा कांकेर जिले की निब्रा (मेढकी) नदी और पासंगी नाला पर उच्च स्तरीय पुल बनाए जाएंगे। सरगुजा जिले में दाहीडांड-सोनवरसा मार्ग पर मछली नदी में पुल निर्माण भी इस सूची में शामिल है।
विभाग ने संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को निर्माण कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वीकृत कार्यों को अन्य एजेंसी को सबलेट करने और कार्य संपादन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी को मान्य नहीं किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होने, बरसात में आवागमन की दिक्कतें घटने और स्थानीय लोगों को बाजार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश, 8,444 किसानों को मिलेंगे लगभग 3.8 करोड़ रुपये
रायपुर । रबी सीजन 2025 के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के लंबित प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम का भुगतान आगामी तीन कार्य दिवस के भीतर किया जाएगा। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभागीय और बीमा अधिकारियों को लंबित स्वीकृत प्रकरणों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इससे प्रदेश के 8,444 किसानों को लगभग 3.8 करोड़ रुपये की बीमा राशि मिलेगी।
मंत्री नेताम ने 15 अक्टूबर को राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम चिद्दों के भ्रमण के दौरान किसानों से चर्चा की थी। इस दौरान किसानों ने उद्यानिकी फसलों के बीमा क्लेम का भुगतान नहीं होने की समस्या बताई और लंबित राशि दिलाने का आग्रह किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने अगले ही दिन, 16 अक्टूबर को संबंधित विभागीय एवं बीमा अधिकारियों की बैठक लेकर लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि भुगतान में अनावश्यक देरी न हो और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर तीन कार्य दिवस के भीतर पात्र किसानों के बैंक खातों में राशि अंतरित की जाए।
14,344 आवेदन स्वीकृत
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किसानों ने टमाटर, बैंगन, गोभी, प्याज और आलू सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों का बीमा कराया था। विभागीय जानकारी के अनुसार, रबी सीजन 2025 के लिए कुल 10,514 किसानों ने 15,298 आवेदन प्रस्तुत किए थे। परीक्षण के बाद 8,444 किसानों के 14,344 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। इन स्वीकृत प्रकरणों के अंतर्गत लगभग 3.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।
मंत्री नेताम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के लंबित स्वीकृत बीमा क्लेम का त्वरित निराकरण किया जाए। उन्होंने पात्र किसानों को समय पर आर्थिक राहत उपलब्ध कराने और शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। निर्धारित समय-सीमा में भुगतान होने से लंबे समय से बीमा राशि की प्रतीक्षा कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव विकासशील ने की नियद नेल्ला नार और बस्तर मुन्ने 2.0 की समीक्षा, समय-सीमा में योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश
रायपुर । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने तथा ग्रामीण परिवारों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए नियद नेल्ला नार 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के तहत कार्य किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में दोनों कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ निर्धारित समय-सीमा में पहुंचाया जाए। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत ग्रामीणों को 31 व्यक्तिगत और 14 सामुदायिक योजनाओं का लाभ देने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है।
नियद नेल्ला नार 2.0 के तहत बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, गरियाबंद, मोहला-मानपुर और छुईखदान-अंबागढ़ चौकी सहित दूरस्थ एवं पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को व्यक्तिगत हितग्राहीमूलक योजनाओं से जोड़ने के लिए विभागों को समन्वित रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
योजना के अंतर्गत मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टा, श्रम कार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पोषण आहार, टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन, गणवेश और पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, जाति, जन्म, विवाह, निवास, मृत्यु और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, जननी सुरक्षा, वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और उज्ज्वला योजना जैसी सुविधाओं से भी पात्र परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
सामुदायिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर
व्यक्तिगत योजनाओं के साथ गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 14 सामुदायिक योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत पक्की सड़कों, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधाओं सहित अन्य आवश्यक संसाधनों को योजनाबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर है। इन सुविधाओं का उद्देश्य दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
मुख्य सचिव विकासशील ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी तालमेल और समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचना चाहिए तथा क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, खनिज साधन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबंधित जिलों के कलेक्टर और जिला स्तरीय अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सख्त, बोले—गरीबों के हक से खिलवाड़ करने वालों को नहीं मिलेगी रियायत
रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत गरीब और विशेष पिछड़ी जनजाति के हितग्राहियों की आवास राशि में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में नौ बैगा हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर कुल 5 लाख 9 हजार रुपये लेने और मकान नहीं बनाने की शिकायत पर दो ठेकेदारों के विरुद्ध अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि गरीबों के हक की राशि का दुरुपयोग और आवास निर्माण में धोखाधड़ी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।
राजाढ़ार में पांच हितग्राहियों से 3.20 लाख लेने का आरोप
ग्राम पंचायत राजाढ़ार के पांच हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर 3 लाख 20 हजार रुपये लेने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं करने की शिकायत पर ठेकेदार कुमार मेरावी के विरुद्ध 14 अक्टूबर को थाना चिल्फी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार देवसिंह, मंधोर बाई और पुसीया बाई से 60-60 हजार रुपये, कौशिल्या बाई से 80 हजार रुपये तथा ननकी बाई से 60 हजार रुपये लिए गए थे। हितग्राहियों का आरोप है कि लगभग डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी न तो आवास बनाए गए और न ही राशि लौटाई गई।
आमानारा के चार हितग्राही भी हुए प्रभावित
इसी तरह ग्राम पंचायत आमानारा के चार हितग्राहियों से 1 लाख 89 हजार रुपये लेने की शिकायत पर ठेकेदार तुमेश गोड़ के विरुद्ध 13 अक्टूबर को थाना तरेगांव जंगल में एफआईआर दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैसाखू बैगा से 64 हजार रुपये, सुकोर बाई से 60 हजार रुपये, सोनिया बाई से 45 हजार रुपये और रनो बाई से 20 हजार रुपये लिए जाने की शिकायत है।
उप मुख्यमंत्री ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने की महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। आवास निर्माण के लिए स्वीकृत राशि पर हितग्राहियों का अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता गंभीर मामला है।
उन्होंने अधिकारियों को हितग्राहियों के हितों की रक्षा करने तथा आवास निर्माण में लापरवाही और धोखाधड़ी के मामलों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का संदेश दिया। सरकार का उद्देश्य है कि पात्र परिवारों को समय पर पक्का आवास मिले और गरीबों के अधिकारों का हनन करने वालों को कानून के अनुसार जवाबदेह बनाया जाए।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के एसएनसीयू में चिकित्सकों ने बचाई जान, ऑक्सीजन सपोर्ट और रक्त चढ़ाकर किया उपचार
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने गंभीर अवस्था में भर्ती महज 900 ग्राम वजन के नवजात शिशु को लगभग दो माह के उपचार और विशेष देखभाल से नया जीवन दिया। समय से पहले जन्मे इस शिशु को सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या थी। लगातार चिकित्सकीय निगरानी, आवश्यक उपचार और पोषण प्रबंधन से उसका वजन बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 8 अक्टूबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात को जन्म के बाद गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया था। शिशु की नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। सांस लेने में परेशानी के कारण उसे लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, जबकि गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके साथ ही शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, नियमित फीडिंग और कंगारू मदर केयर (केएमसी) के माध्यम से पोषण एवं विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई।
लगभग दो माह तक चले उपचार के दौरान शिशु के स्वास्थ्य और वजन की लगातार निगरानी की गई। चिकित्सकीय टीम के प्रयासों से उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम पहुंच गया। इस सफलता से परिवार को बड़ी राहत मिली। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के एक परिवार को जिला अस्पताल में ही गंभीर नवजात के उपचार की सुविधा मिलना शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता को भी रेखांकित करता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। जिला अस्पतालों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजातों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस मामले में भी विशेष देखभाल, नियमित निगरानी और समय पर उपचार से सकारात्मक परिणाम सामने आए।
नवजात के उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम और एसएनसीयू के नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे शिशु का स्वस्थ होकर घर लौटना चिकित्सकीय टीम के समर्पण और नवजात देखभाल सेवाओं के महत्व का प्रेरक उदाहरण है।
पीडब्ल्यूडी सचिव ने कोरबा में निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण, बीटी पैच और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत प्राथमिकता से कराने के निर्देश
कोरबा / शौर्यपथ / लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने कोरबा जिले में निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर सड़कों, पुल-पुलियों एवं भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा की और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की मरम्मत और बीटी पैच कार्यों में तेजी लाने तथा क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत प्राथमिकता से कराने पर जोर दिया, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
सचिव बंसल ने कहा कि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का समय पर निराकरण किया जाए, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण एजेंसियों के कार्यों पर कड़ी नजर रखने और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने कटघोरा–हरदीबाजार–बलौदा–अकलतरा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तथा हरदीबाजार–तरदा–सर्वमंगला–इमलीछापर मार्ग की स्थिति देखी। इसके अलावा ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक तक निर्माणाधीन 2.84 किलोमीटर लंबी सीमेंट-कांक्रीट सड़क की प्रगति की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
इस दौरान कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता आर.के. रात्रे, अधीक्षण अभियंता सुरेश भूपल, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता जी.आर. जांगड़े सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन से नक्सली हिंसा से प्रभावित भाई-बहनों का बढ़ा आत्मविश्वास : मुख्यमंत्री साय
छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन, महिला दर्शकों के लिए प्रवेश रहेगा निःशुल्क
रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास के संबंध में हमने राष्ट्रपति महोदया को बस्तर आने का आमंत्रण दिया था। पूर्व में बस्तर के मांझी-चालकी प्रतिनिधियों से भेंट के दौरान भी उनसे बस्तर आने का आग्रह किया गया था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। उनका 22 एवं 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर जाएंगी और वहां मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति महोदया का बस्तर आगमन हम सभी के लिए प्रसन्नता और गौरव का अवसर है।
मुख्यमंत्री साय ने नक्सली हिंसा से प्रभावित एवं अन्य दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर को संबोधित किया है। सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता मिले और वे सम्मान एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के संबंध में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए प्रसन्नता का विषय है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले इस मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। इससे प्रदेश की माताओं-बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के साथ उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
नवा रायपुर में 150 करोड़ से अधिक का निवेश, 3500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिली गति, छत्तीसगढ़ को मिले साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को रोजगार सृजन से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया। इस इकाई की स्थापना पर 150 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उद्योगों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और निवेश का लाभ आम परिवारों तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों, परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिले। यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई इसी सोच का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। उद्योगों के विस्तार से युवाओं और महिलाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल एवं योग्यता के अनुरूप काम मिलने के अवसर बढ़ेंगे। इससे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन की आवश्यकता भी कम करने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए औद्योगिक विकास, कौशल उन्नयन, आधुनिक अधोसंरचना और रोजगार सृजन पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचे और स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिलें।
नई औद्योगिक नीति से निवेशकों का बढ़ा भरोसा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 में रोजगारपरक उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का जोर इन प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने, निर्माण कार्यों को गति देने और उत्पादन शुरू कराकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर है।
उद्योगों की स्थापना एवं संचालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भी विभिन्न सुधार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से राहत देने के उद्देश्य से जनविश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की पहल की गई है। अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाकर निवेशकों को सहयोग दिया जा रहा है, ताकि परियोजनाएं जल्द धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन की शुरुआत हो सके।
निवेश के साथ रोजगार सृजन पर विशेष जोर : ओ.पी. चौधरी
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की औद्योगिक नीति में रोजगार को प्रमुख स्थान दिया गया है। अब औद्योगिक निवेश को केवल उसकी राशि के आधार पर नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अधिक पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत कम रोजगार देने वाले उद्योगों की प्रधानता रही है। नई नीति में श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देकर इस स्थिति में बदलाव लाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्त एवं उद्योग विभाग के समन्वय से औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 तैयार की गई है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी के बजटीय प्रावधान को लगभग 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। उन्होंने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई में 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना इस नीति की रोजगारपरक सोच को दर्शाती है।
वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत बनाने में किया जाएगा। सरकार सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और औद्योगिक विकास को गति देकर आर्थिक प्रगति के लाभ गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि निवेश अनुकूल नीतियों और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। यश ग्रुप की नई इकाई को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कंपनी प्रबंधन को बधाई दी और परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिलाया।
यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड के सीईओ ए.एन. रविचंद्रन ने प्रस्तावित औद्योगिक इकाई की गतिविधियों, उत्पादन योजनाओं और रोजगार संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण तथा राज्य सरकार से मिल रहे सहयोग की सराहना की।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, यश ग्रुप के चेयरमैन रितेश नरेडी, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि, कंपनी प्रबंधन के अधिकारी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
