
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में एआई मिशन, भारतनेट फेज-3, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और डिजिटल सुशासन की परियोजनाओं की समीक्षा; शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यापक उपयोग पर जोर
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्ष प्रशासन और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में एआई मिशन, मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स और विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
एआई मिशन से युवाओं को मिलेगा नया अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि युवाओं को एआई आधारित कौशल, रोजगार और नवाचार के लिए तैयार करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और प्रशासन में एआई के उपयोग से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक में बताया गया कि राज्य का एआई मिशन पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा—
एआई कौशल विकास
नवाचार एवं स्टार्टअप
जागरूकता एवं आउटरीच
सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई
सुशासन में एआई का उपयोग
स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, रोबोटिक्स क्लब और हैकाथॉन, महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही एआई डेटा लैब्स, स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाओं और क्लाउड आधारित नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
डिजिटल सुशासन और डेटा सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को प्राथमिकता देते हुए राज्य की एआई नीति तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता, तकनीकी ऑडिट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। प्रत्येक विभाग में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली और एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।
मोबाइल नेटवर्क और भारतनेट का विस्तार
बैठक में बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में लगभग 1,000 नए मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं, जबकि 577 अतिरिक्त टावरों को स्वीकृति मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क एवं इंटरनेट सुविधा समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
भारतनेट फेज-3 के तहत राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को आधुनिक रिंग टोपोलॉजी आधारित नेटवर्क से जोड़ा जाएगा तथा गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
सेवा सेतु से 94.3 प्रतिशत आवेदनों का निराकरण
समीक्षा में बताया गया कि सेवा सेतु पोर्टल पर वर्तमान में 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रदेश के 16,726 सेवा केंद्रों के माध्यम से 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण कर 94.3 प्रतिशत सफलता दर हासिल की गई है। पोर्टल पर क्यूआर आधारित सत्यापन, डिजिलॉकर, आधार प्रमाणीकरण, ई-चालान और डीबीटी जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।
आईटी निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति
बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र और जीआईएस आधारित डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक, चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मयंक अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन, ₹1 करोड़ की विकास राशि और नई नगर पंचायत की घोषणा; पहाड़ी कोरवा बच्चों का कराया शाला प्रवेश
रायपुर। सरगुजा जिले के ऐतिहासिक रामगढ़ महोत्सव-2026 का भव्य समापन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का संकल्प दोहराते हुए क्षेत्र के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की घोषणा की। साथ ही उदयपुर एवं डूमरडीह को मिलाकर नई नगर पंचायत बनाने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा और हाथीपोल जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि सीताबेंगरा गुफा को भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में माना जाता है, जबकि जोगीमारा गुफा अपने प्राचीन भित्तिचित्रों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इस क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व भी और बढ़ जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़ क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि रामगढ़ महोत्सव का आयोजन भविष्य में भी इसी भव्यता के साथ प्रतिवर्ष किया जाएगा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरगुजा जिले में पिछले ढाई वर्षों में 2,387 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं और प्रतिदिन लगभग 1,600 आवास तैयार हो रहे हैं।
उन्होंने किसानों के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल धान खरीदी, 13 लाख किसानों को बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, रामलला दर्शन योजना, तीर्थयात्रा दर्शन योजना, युवाओं के लिए रोजगार तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
समारोह का भावनात्मक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के छह बच्चों का मंच से शाला प्रवेश कराया। उन्होंने बच्चों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई तथा स्कूल बैग, वॉटर बॉटल और अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने 26 से 30 जून तक सरगुजा के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर डॉक्यूमेंट्री तैयार करने वाले टूरिज्म इन्फ्लूएंसर्स को भी प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।
समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, क्षेत्रीय विधायकगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ ने बजट में किए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान, 318 प्रकार के विकास कार्यों से गांवों को मिलेगा नया स्वरूप
रायपुर । ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' का शुभारंभ 1 जुलाई 2026 से देशभर में किया जाएगा। रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अधोसंरचना को नई गति देने वाली इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी।
योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को साकार करते हुए गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाना है। इसके अंतर्गत रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और टिकाऊ परिसंपत्तियों के विकास जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना के अंतर्गत 318 प्रकार के विकास कार्यों को शामिल किया गया है, जिससे गांवों की आधारभूत संरचना मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
योजना का औपचारिक शुभारंभ 2 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इस अवसर पर वे देशभर के राज्यों से वर्चुअल संवाद करेंगे। छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित होगा, जहां उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीणों से जुड़ेंगे।
योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता, डिजिटल जॉब कार्ड, तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली तथा पारदर्शी भुगतान व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
नई व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार होगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा। साथ ही सामाजिक अंकेक्षण और डिजिटल निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही को भी मजबूत किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और गांवों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना विकसित भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक व्यापक पहल मानी जा रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी की प्रशासकीय स्वीकृति, सभी जिलों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश
रायपुर,। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक संवर्ग को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। इस निर्णय से प्रदेशभर के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय के प्रस्ताव पर शासन ने सहायक शिक्षक से लेकर प्राचार्य स्तर तक पात्र शिक्षक संवर्ग को पुनर्नियुक्ति देने का अनुमोदन प्रदान किया है।
शासन ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देशित किया है कि जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र शिक्षकों को शिक्षा सत्र 2026-27 के अंत तक पुनर्नियुक्ति प्रदान करने की आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जाए। साथ ही सभी जिलों में इस संबंध में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शासन के इस फैसले से शासकीय एवं शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बनी रहेगी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के संचालित हो सकेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस निर्णय से शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षण कार्य की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी तथा विद्यालयों के संचालन में स्थिरता आएगी।
कोंडागांव। जिला मुख्यालय स्थित डाकघर में पदस्थ कर्मचारी शेख रूहुल ताज पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक विभागीय कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार शेख रूहुल ताज के खिलाफ अब तक तीन अलग-अलग शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पहला मामला एक डॉक्टर से दुर्व्यवहार का है, जिसमें डॉक्टर ने संभागीय अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। हालांकि, आरोप है कि इस मामले को झूठी रिपोर्ट बनाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दूसरा मामला कोपाबेड़ा निवासी सुमित्रा नेताम से जुड़ा है। आरोप है कि उनसे खाते में जमा करने के नाम पर 20 हजार रुपये लिए गए, लेकिन एक साल तक राशि खाते में जमा नहीं की गई। बाद में रकम लौटा दी गई, पर खाते में जमा नहीं की गई, जिसे ठगी की श्रेणी में माना जा रहा है।
तीसरा मामला कोंडागांव के 20 से अधिक व्यापारियों से जुड़ा है। व्यापारियों को पोस्टर लगाने के नाम पर 6 महीने से 1 साल तक विज्ञापन का आश्वासन दिया गया, लेकिन पोस्टर एक महीने के भीतर ही हटा दिए गए। जब इस संबंध में डाकघर में जानकारी ली गई, तो पता चला कि ऐसी कोई योजना विभाग में थी ही नहीं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि व्यापारियों को गुमराह कर ठगी की गई।
इन तीनों मामलों की जांच के बाद यह बात सामने आ रही है कि संबंधित कर्मचारी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। मामले को लेकर जब जगदलपुर के संभागीय अधीक्षक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन 15 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस देरी से लोगों में विभागीय मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डाकघर जैसे भरोसेमंद संस्थान में इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
वहीं, कोंडागांव डाकघर के मुख्य अधिकारी श्री मिश्रा ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए बताया कि उनका स्थानांतरण हो चुका है और इस विषय में उनके वरिष्ठ अधिकारी ही जवाब देंगे।
रायपुर स्थित उच्च अधिकारी अजय सिंह चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।
अब सवाल यह उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण इस मामले में शामिल है, या फिर इसे जानबूझकर दबाया जा रहा है? आम जनता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
आम जनता उठा रही दोहरे मानदंड का मुद्दा; स्थानीय सरकारी बंगलों के आवंटन और उपयोग पर नियम स्पष्ट करने की मांग
शौर्यपथ लेख । नकटी गांव में विधायक निवास के लिए भूमि खाली कराए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच अब एक नया सवाल राजनीतिक और जनचर्चा का विषय बन गया है। आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि यदि गांव की जमीन पर सरकारी आवास निर्माण के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो ऐसे विधायक और मंत्री जो पहले से राजधानी रायपुर में शासन द्वारा आवंटित सरकारी बंगले में रह रहे हैं, वे अपने स्थानीय विधानसभा क्षेत्र में सरकारी आवास या बंगलों का उपयोग किस नियम के तहत कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में स्थानीय विधायक अनुज शर्मा का कहना है कि प्रभावित 75 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास आवंटित कर दिए गए हैं और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, इस बयान के बावजूद स्थानीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि जनप्रतिनिधियों के लिए सरकारी आवासों के आवंटन संबंधी नियमों का पालन समान रूप से हो रहा है या नहीं।
चर्चा का केंद्र यह है कि यदि छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार विधायक एवं मंत्रियों को राजधानी में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है, तो क्या उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र में भी सरकारी बंगले के उपयोग की अनुमति है? यदि है, तो उसका कानूनी आधार क्या है, और यदि नहीं, तो ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
जनता का कहना है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि आम नागरिकों के अतिक्रमण या शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में बुलडोजर और सख्त कार्रवाई की जाती है, तो जनप्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय स्तर पर सरकारी बंगलों के उपयोग की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विषय पर सरकार को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। यदि स्थानीय सरकारी आवासों का आवंटन किसी विशेष नियम, प्रशासनिक आदेश या सुरक्षा कारणों से किया गया है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
अब सबकी नजर राज्य सरकार पर है। देखना होगा कि सरकार स्थानीय विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे सरकारी आवासों की स्थिति स्पष्ट करती है या नहीं। यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो क्या समान मानदंड अपनाते हुए कार्रवाई होगी, या फिर यह विवाद केवल राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाएगा।
नोट: इस समाचार में व्यक्त प्रश्न और दावे सार्वजनिक चर्चा एवं जनभावनाओं पर आधारित हैं। यह आवश्यक है कि संबंधित नियमों, आवंटन आदेशों और शासन के आधिकारिक अभिलेखों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।
3 पीड़ितों से 5.50 लाख की धोखाधड़ी की शिकायत पर कार्रवाई, पूछताछ में सामने आया बड़ा फर्जी नौकरी रैकेट; लाखों रुपये साथी के खातों में ट्रांसफर करने का खुलासा।
बालोद ।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बालोद पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है, जो स्वयं को छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव से परिचित बताकर लोगों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देती थी। आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लता धीवर (36 वर्ष), पति आकाश धीवर, निवासी पाण्डेपारा, वार्ड क्रमांक-05, थाना एवं जिला बालोद के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, 28 जून 2026 को डामिन साहू निवासी मरारपारा, बालोद ने शिकायत दर्ज कराई कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उसकी मुलाकात योगेश साहू से हुई थी। योगेश ने बताया कि उसने कंप्यूटर शिक्षक की नौकरी के लिए लता धीवर को 3.50 लाख रुपये दिए हैं और सरकारी नौकरी के लिए उसी से संपर्क करने की सलाह दी।
इसके बाद 5 मार्च 2026 को डामिन साहू, बिंदु दुबे और ललिता गजेन्द्र आरोपी के घर पहुंचे। वहां लता धीवर ने दावा किया कि उसकी मुख्य सचिव से सीधी पहचान है और वह कृषि विभाग तथा जिला अस्पताल में नौकरी लगवा सकती है। इसके एवज में उसने प्रत्येक से दो-दो लाख रुपये की मांग की।
शिकायत के अनुसार, डामिन साहू ने 2 लाख रुपये, बिंदु दुबे ने 1.50 लाख रुपये तथा ललिता गजेन्द्र ने 2 लाख रुपये आरोपी को नकद दिए। बाद में न तो किसी की नौकरी लगी और न ही रकम वापस की गई। इस तरह तीनों से कुल 5.50 लाख रुपये की ठगी की गई।
पूछताछ में बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर 7 लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर कुल 25.50 लाख रुपये वसूले। आरोपी के मुताबिक, इस राशि में से 23.92 लाख रुपये साथी द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जबकि करीब 1.57 लाख रुपये उसने कमीशन के रूप में अपने पास रखे।
पुलिस ने आरोपी को 29 जून 2026 को शाम 4:10 बजे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस की अपील
बालोद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धन की मांग करने वाले व्यक्तियों से सावधान रहें। किसी भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में केवल आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें और संदेह होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम
इस कार्रवाई में निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, उप निरीक्षक सुरज साहू, प्रधान आरक्षक योगेश सिन्हा, आरक्षक लक्ष्मण साहू, महिला आरक्षक ममता ठाकुर एवं जागृति ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कांग्रेस नेता ने कथित चोरी की तुलना महमूद गजनवी के हमलों से की; ट्रस्ट और भाजपा की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
नई दिल्ली/अयोध्या।
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रेस वार्ता के दौरान पवन खेड़ा ने दावा किया कि इतिहास में महमूद गजनवी ने 27 वर्षों में 17 बार मंदिरों पर हमले किए थे, जबकि राम मंदिर में कथित रूप से 42–45 दिनों के भीतर 70 बार चढ़ावा चोरी होने की बात सामने आई है। उन्होंने इस तुलना के जरिए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
खेड़ा ने कहा कि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 'देव द्रव्य' (भगवान की संपत्ति) की चोरी अक्षम्य मानी जाती है। उनका आरोप है कि मामले में केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित अनियमितता के पीछे "असल जिम्मेदार" कौन हैं और उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही।
कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इस बीच, राम मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन और ट्रस्ट से जुड़ी खबरों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, पवन खेड़ा के आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में जांच एवं कानूनी प्रक्रिया जारी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, भाजपा या आरएसएस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी समान प्रमुखता से शामिल किया जाएगा ।
सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने दो दिवसीय आयोजन, उत्कृष्ट टीमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करेंगी बीएसपी का प्रतिनिधित्व
भिलाई ।
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति, नवाचार और सतत सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता ‘सुरक्षा-2026’ का आयोजन 27 एवं 29 जून को मानव संसाधन विकास विभाग के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में संयंत्र के विभिन्न विभागों की 47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा से जुड़े नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मार्केटिंग एंड यूटिलिटीज) बी.के. बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। दुर्घटनारहित कार्यस्थल के निर्माण के लिए नवाचार और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अजय टल्लू द्वारा प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) डी. सत्पथी ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 35 सेफ्टी सर्किल टीमों से यह पहल शुरू हुई थी, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 83 हो गई। उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षा-2026’ के लिए कुल 47 केस स्टडी प्राप्त हुईं, जो कर्मचारियों की बढ़ती सुरक्षा जागरूकता और सहभागिता का प्रमाण हैं।
प्रतियोगिता के पहले दिन 20 टीमों और दूसरे दिन 27 टीमों ने अपने केस स्टडी चार मूल्यांकन पैनलों के समक्ष प्रस्तुत किए। प्रत्येक पैनल में दो विशेषज्ञ निर्णायक शामिल थे। प्रस्तुतियों में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित कार्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित नवाचारी उपायों का प्रदर्शन किया गया।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन उच्च स्तरीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाएगा।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, निर्णायक, मेंटर, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सेफ्टी सर्किल टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित हुई ‘सुरक्षा-2026’ एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता।
47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना।
उत्कृष्ट टीमों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने दो दिवसीय आयोजन, उत्कृष्ट टीमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करेंगी बीएसपी का प्रतिनिधित्व
भिलाई ।
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति, नवाचार और सतत सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता ‘सुरक्षा-2026’ का आयोजन 27 एवं 29 जून को मानव संसाधन विकास विभाग के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में संयंत्र के विभिन्न विभागों की 47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा से जुड़े नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मार्केटिंग एंड यूटिलिटीज) बी.के. बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। दुर्घटनारहित कार्यस्थल के निर्माण के लिए नवाचार और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अजय टल्लू द्वारा प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) डी. सत्पथी ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 35 सेफ्टी सर्किल टीमों से यह पहल शुरू हुई थी, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 83 हो गई। उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षा-2026’ के लिए कुल 47 केस स्टडी प्राप्त हुईं, जो कर्मचारियों की बढ़ती सुरक्षा जागरूकता और सहभागिता का प्रमाण हैं।
प्रतियोगिता के पहले दिन 20 टीमों और दूसरे दिन 27 टीमों ने अपने केस स्टडी चार मूल्यांकन पैनलों के समक्ष प्रस्तुत किए। प्रत्येक पैनल में दो विशेषज्ञ निर्णायक शामिल थे। प्रस्तुतियों में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित कार्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित नवाचारी उपायों का प्रदर्शन किया गया।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन उच्च स्तरीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाएगा।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, निर्णायक, मेंटर, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सेफ्टी सर्किल टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित हुई ‘सुरक्षा-2026’ एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता।
47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना।
उत्कृष्ट टीमों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
CBI जांच की मांग, आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख जुर्माने का प्रस्ताव; ट्रस्ट की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
अयोध्या।
राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या (फैजाबाद) बार एसोसिएशन ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बार एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से तीनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने जैसी चेतावनी दी है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा के अनुसार, यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने शहरव्यापी विरोध और चक्का जाम की भी चेतावनी दी है।
आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे वकील
बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इस कथित चढ़ावा घोटाले के आरोपियों की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में पैरवी नहीं करेगा। प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई वकील इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि यह राशि मामले की कानूनी लड़ाई में उपयोग की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे की नकदी की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नकदी की गिनती से जुड़े आठ आरोपियों को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। बार एसोसिएशन का आरोप है कि इतने बड़े स्तर की कथित अनियमितता बिना उच्च स्तर की लापरवाही या संरक्षण के संभव नहीं हो सकती, इसलिए ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
CBI जांच की मांग
बार एसोसिएशन ने पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने की मांग की है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की भी बात कही है।
इस्तीफे की चर्चाएं, आधिकारिक पुष्टि नहीं
कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इस संबंध में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
अयोध्या बार एसोसिएशन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी।
आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख जुर्माने का प्रस्ताव।
पूरे मामले की CBI जांच की मांग।
ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर लगे आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं, और इस संबंध में सक्षम एजेंसियों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ सरकार की सरस्वती साइकिल वितरण योजना बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना के तहत हाई स्कूल में अध्ययनरत छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराई जाती है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों से स्कूल तक उनका आवागमन आसान हो सके, पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे और स्कूल छोड़ने की दर कम हो।
इसी योजना से सूरजपुर जिले के शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा वैष्णवी कसेरा को भी निःशुल्क साइकिल मिली है, जिसने उसके शिक्षा के सपनों को नई उड़ान दी है।
पैदल सफर से साइकिल तक का सफर
सूरजपुर के बाजारपारा की रहने वाली वैष्णवी ने बताया कि पहले वह प्रतिदिन पैदल विद्यालय आती-जाती थी। इससे समय अधिक लगता था और पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। अब निःशुल्क साइकिल मिलने से स्कूल पहुंचना आसान हो जाएगा और वह नियमित रूप से पढ़ाई कर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेगी।
वैष्णवी ने कहा,
"अब मेरे सपनों को नया पंख मिल गया है। पहले पैदल विद्यालय आती थी, अब साइकिल से विद्यालय जाऊंगी और मन लगाकर पढ़ाई कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करूंगी।"
सरकार के प्रति जताया आभार
वैष्णवी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य सरकार के अनुसार, सरस्वती साइकिल योजना से छात्राओं में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ा है और दूरस्थ क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए स्कूल तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हुआ है।
मुख्य बिंदु
सरस्वती साइकिल योजना के तहत हाई स्कूल की छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराई जा रही है।
सूरजपुर की छात्रा वैष्णवी कसेरा को योजना का लाभ मिला।
पहले पैदल स्कूल जाने वाली वैष्णवी अब साइकिल से नियमित रूप से विद्यालय जा सकेगी।
योजना का उद्देश्य बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना, आवागमन सुगम बनाना और ड्रॉप-आउट दर कम करना है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
