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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी
ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुँचेगी एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा
एक वर्ष में 5,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण: विज्ञान और नवाचार को मिलेगी नई उड़ान
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी। उन्होंने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।
मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।
एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा
उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, विधायक श्री सुशांत शुक्ला, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिला गुणवत्तायुक्त बीज, कृषि विभाग के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों ने प्रगतिशील किसान भानुप्रताप को बनाया नवाचार का प्रतीक
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर प्रेरणादायी परिणाम देने लगे हैं। किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की राज्य सरकार की पहल ने एक बार फिर नई मिसाल कायम की है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दरमोहली के प्रगतिशील किसान एवं लोक कलाकार श्री भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला ने अपनी रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक कृषि उपकरण को कम लागत वाली सीड ड्रिल में बदलकर खेती में नवाचार का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ-ऑयल) योजना के अंतर्गत कृषि विभाग से प्राप्त 80 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मूंगफली बीज का उपयोग करते हुए उन्होंने लगभग दो एकड़ क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से बुवाई शुरू की है। स्वयं विकसित की गई सीड ड्रिल की मदद से कम समय में समान दूरी पर बीज की बुवाई संभव हुई, जिससे श्रम लागत घटी, बीज की बचत हुई और बेहतर अंकुरण की संभावना भी बढ़ गई।
मुख्यमंत्री की सोच—किसान बने आत्मनिर्भर, खेती बने लाभ का माध्यम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की स्पष्ट मंशा है कि प्रदेश का किसान केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार का नेतृत्वकर्ता बने। इसी सोच के अनुरूप कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और स्थानीय स्तर पर विकसित नवाचारों को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
स्थानीय नवाचार बना पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा
उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकसित ऐसे नवाचार खेती को अधिक किफायती, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ ऐसे उपयोगी स्थानीय प्रयोगों को अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, ताकि सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ रहा है और किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
सरकारी योजना और किसान की प्रतिभा का सफल संगम
जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित योजनाएं अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला का यह नवाचार इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब सरकार की दूरदर्शी नीतियां, विभागीय सहयोग और किसान की रचनात्मक सोच एक साथ मिलती हैं, तो खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और समृद्धि का आधार बन जाती है।
यह मॉडल आज न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के "समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़" के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।
कलेक्टर विजय दयाराम के. के सख्त निर्देश पर खनिज विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, शिकायत मिलते ही उड़नदस्ता सक्रिय; अवैध परिवहन करने वालों पर दर्ज हुए प्रकरण
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का प्रभावी मंच भी बन रही है। इसका ताजा उदाहरण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में देखने को मिला, जहां सीएम हेल्पलाइन (1076) में दर्ज एक शिकायत पर जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। नवपदस्थ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देश पर जिला खनिज विभाग के विशेष अभियान में अवैध रूप से रेत और गिट्टी का परिवहन कर रहे छह ट्रैक्टर जब्त किए गए।
शिकायत प्राप्त होते ही कलेक्टर ने जिला खनिज विभाग को तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान कोलबिर्रा और रुमगा क्षेत्र से रेत से भरे तीन ट्रैक्टर, खंता और पिपरिया क्षेत्र से रेत से भरे दो ट्रैक्टर तथा सधवानी क्षेत्र से गिट्टी से भरा एक ट्रैक्टर बिना वैध दस्तावेजों के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। सभी वाहनों को मौके पर जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कानूनी शिकंजा, जुर्माना जमा होने के बाद ही मिलेगी रिहाई
खनिज विभाग ने सभी वाहन स्वामियों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अर्थदंड एवं समझौता राशि जमा किए बिना किसी भी जब्त वाहन को मुक्त नहीं किया जाएगा।
हर शिकायत पर होगी समयबद्ध कार्रवाई : कलेक्टर
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध नियमित अभियान चलाने तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ शासन के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
जनभागीदारी से अवैध खनन पर लगेगी लगाम
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध रेत, गिट्टी अथवा अन्य खनिजों के उत्खनन या परिवहन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना सीएम हेल्पलाइन 1076 या संबंधित विभाग को दें। प्रशासन का कहना है कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू की सक्रिय भूमिका रही। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में अवैध खनिज कारोबार के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
धमतरी / शौर्यपथ / जिले की नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय (भा.पु.से.) ने सोमवार को विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। निवर्तमान पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार (भा.पु.से.) ने विभागीय प्रक्रिया के तहत उन्हें कार्यभार सौंपते हुए जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा, संवेदनशील प्रकरणों और चल रहे विशेष अभियानों की विस्तृत जानकारी दी।
पदभार ग्रहण के बाद पुलिस कार्यालय में आयोजित परिचय कार्यक्रम में जिले के राजपत्रित अधिकारी, एसडीओपी, डीएसपी सहित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने नई एसपी का स्वागत किया। इस दौरान सभी अधिकारियों ने उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा जनोन्मुखी पुलिसिंग को नई गति देने का भरोसा दिलाया।
नई पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आमजन की सुरक्षा, अपराधों पर त्वरित नियंत्रण, पीड़ितों को समयबद्ध न्याय और पुलिस-जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना धमतरी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को अनुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा भाव के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
कार्यालय की शाखाओं का किया निरीक्षण
पदभार संभालने के तुरंत बाद एसपी भावना पांडेय ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने शाखा प्रभारियों से लंबित प्रकरणों, अभिलेखों, कार्यालयीन व्यवस्था और कार्यप्रणाली की जानकारी ली। साथ ही लंबित मामलों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण, अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण और समयबद्ध कार्य निष्पादन के निर्देश दिए।
जनसुनवाई और संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर
एसपी ने कहा कि आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने तथा नागरिकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, ईमानदारी और उत्तरदायित्व ही धमतरी पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बल पर जिले में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पांडेय, नगर पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार चतुर्वेदी, एसडीओपी कुरूद रागिनी मिश्रा, डीएसपी मोनिका मरावी, मीना साहू, रक्षित निरीक्षक दीपक शर्मा सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाया गया। प्रश्न लगाने वाले विधायक लता उसेंडी ने विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय UGC मानकों से काफी पीछे है। जहां 223 शिक्षकों की जरूरत है, वहां केवल 29 शिक्षक ही कार्यरत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी कमी कब तक दूर की जाएगी और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालय में सैकड़ों शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। विधायक ने पूछा कि जब वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है, तो नियुक्तियां अब तक क्यों नहीं की गईं।
सबसे अहम सवाल उन विषयों में भर्ती को लेकर उठाया गया, जिनमें फिलहाल एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। विधायक ने इसे संसाधनों का दुरुपयोग बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसके साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि हजारों सीटें खाली होना इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है।
बस्तर जैसे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्र का जिक्र करते हुए विधायक लता उसेंडी ने कहा कि यहां उच्च शिक्षा की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों के इसे लागू करना संभव नहीं है।
निष्कर्ष:विधानसभा में उठे इन सवालों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, खासकर बस्तर क्षेत्र में, गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अब निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
रायपुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा वर्ष 2019 से 2023 के बीच की गई भर्तियों में अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को विधायक सुश्री लता उसेंडी ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद सरकार ने जांच की स्थिति स्पष्ट की।
विधायक लता उसेंडी ने अपने प्रश्न में पूछा कि इस अवधि में राज्य सेवा परीक्षा, वन सेवा, सहायक प्राध्यापक सहित विभिन्न भर्तियों में कितने पदों पर चयन हुआ और क्या इन भर्तियों में किसी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक, मूल्यांकन में त्रुटि, इंटरव्यू अंक में हेरफेर या अन्य अनियमितताओं की शिकायतें सरकार को मिली हैं।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इन शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच कराई गई है और यदि हां, तो जांच किस एजेंसी—EOW, CBI या अन्य—द्वारा की जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि चयनित अभ्यर्थियों में से कितने उम्मीदवार आयोग के पदाधिकारियों या अधिकारियों के रिश्तेदार हैं और क्या इस संबंध में कोई जांच हुई है।
इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवाब में बताया कि CGPSC भर्तियों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है। विशेष रूप से राज्य सेवा परीक्षा 2021 की जांच CBI को सौंपी गई है और फिलहाल यह प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने की कोई निश्चित समय सीमा अभी तय नहीं है और आगे की कार्रवाई CBI की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में उठे इस मुद्दे ने CGPSC की भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें CBI जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी।
निशांत ताम्रकर (क्राइम रिपोर्ट)
दुर्ग / शौर्यपथ / पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के कुंदरापारा में रविवार रात करीब 9:30 बजे हुई सनसनीखेज हत्या ने एक ओर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, तो दूसरी ओर दुर्ग पुलिस ने दावा किया कि महज 12 घंटे के भीतर वारदात में शामिल एक ही परिवार के छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, जैतखाम के पास करीब तीन वर्ष पुरानी रंजिश के चलते अक्षय कोठारी, उनके भाई लेखराम कोठारी, गोपा उर्फ सूर्यदेव कोठारी और उनके चाचा बल्ला उर्फ रोशन कोठारी पर लाठी, डंडे, ईंट और चाकू से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल लेखराम कोठारी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है।
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही एफएसएल टीम को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए और घेराबंदी कर लक्ष्मी चेलक, आकाश चेलक, सत्यम चेलक, खेलू चेलक, प्रकाश चेलक तथा देवचंद चेलक को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त ईंट, डंडे, चाकू और वारदात के समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या करना स्वीकार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया।
मृतक
स्मार्ट पुलिसिंग पर उठे सवाल
हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन वारदात ने शहर की तथाकथित "स्मार्ट पुलिसिंग" पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात करीब साढ़े नौ बजे घनी आबादी वाले कुंदरापारा में दो पक्षों के बीच लंबे समय तक खूनी संघर्ष चलता रहा। स्थानीय लोगों के सामने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन इलाके में समय रहते पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखी।
इलाके के लोगों में भय का माहौल भी चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अपराधियों के डर से लोग पुलिस को सूचना देने से भी हिचकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए और 12 घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि केवल त्वरित गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराध पर पहले से प्रभावी नियंत्रण और लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी उतना ही जरूरी है।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग पुलिस के 'ऑपरेशन विश्वास' के तहत जिलेभर में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, अड्डेबाजी और संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। 10 से 12 जुलाई तक चले विशेष अभियान में 114 लोगों पर छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 36(च) के तहत कार्रवाई की गई।
इस अभियान में मोहन नगर थाना और दुर्ग कोतवाली थाना की कार्रवाई भी प्रमुख रही। मोहन नगर थाना क्षेत्र में 8 और कोतवाली (दुर्ग) थाना क्षेत्र में 7 लोगों के खिलाफ सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन और अड्डेबाजी के मामले में कार्रवाई की गई। दोनों थाना क्षेत्रों में कुल 15 लोगों पर वैधानिक कार्रवाई हुई।
जिले के सभी थाना एवं चौकी क्षेत्रों में बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क, तालाब और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सघन चेकिंग की गई। वहीं तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध शराब बिक्री के मामलों में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा उनके कब्जे से अवैध शराब और नकदी जब्त की गई।
दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन विश्वास के तहत ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अड्डेबाजी, सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन या अवैध शराब बिक्री की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि जिले में सुरक्षित और नशामुक्त वातावरण बनाए रखा जा सके।
मृणेन्द्र चौबे
राजनांदगांव/शौर्यपथ / नवपदस्थ पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अजय यादव ने कार्यभार संभालते ही पुलिस महकमे को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि अवैध कारोबार में संलिप्त अपराधियों के साथ अगर पुलिस के किसी भी स्तर के अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत पाई गई, तो उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
पदभार ग्रहण करने के बाद आईजी अजय यादव ने राजनांदगांव, खैरागढ़ और मानपुर-मोहला जिले के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने पूरे रेंज के अपराध पैटर्न, कानून-व्यवस्था और जनता की अपेक्षाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की।
0 बेसिक पुलिसिंग को मजबूत करने पर रहेगा जोर
आईजी अजय यादव ने कहा कि उनका मुख्य फोकस रेंज में बेसिक पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी व मजबूत बनाने पर रहेगा। इसके लिए वे जल्द ही सभी जिलों का जमीनी दौरा करेंगे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। अपराधों का त्वरित अनुसंधान और अपराधियों की धरपकड़ पुलिस की प्राथमिकता होगी।
0 अवैध शराब, सट्टा और जुए पर होगी चौतरफा कार्रवाई
शासन की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए नए आईजी ने कहा कि अवैध शराब, जुआ और सट्टा जैसे सामाजिक अपराधों पर चौतरफा और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने माना कि राजनांदगांव रेंज की सीमाएं मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से लगी होने के कारण अवैध शराब के परिवहन की चुनौती रहती है। हालांकि, पुलिस पहले भी इस पर लगातार कार्रवाई करती रही है, लेकिन अब सीमाओं पर निगरानी और सख्त की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या अपराधियों को संरक्षण देना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ेगा।
0 ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और उपलब्ध बल का बेहतर उपयोग
शहर की ट्रैफिक समस्या को लेकर आईजी ने कहा कि वे जल्द ही राजनांदगांव एसपी के साथ पृथक से बैठक कर यातायात व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। उपलब्ध पुलिस बल का आकलन कर उसका इस तरह से प्रबंधन किया जाएगा ताकि यातायात सुचारू हो सके और कमियों को दूर किया जा सके। बल की कमी के सवाल पर उन्होंने कहा कि औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण पुलिस बल की मांग हमेशा बनी रहती है, लेकिन मुख्य फोकस उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर होना चाहिए।
0 शौर्यपथ के सवाल पर आईजी ने दिखाई सख्ती
दैनिक शौर्यपथ ने आईजी अजय यादव के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि रेंज के कई क्षेत्रों में अवैध नशे के कारोबार में नाबालिग बच्चों का सहारा लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस पर आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कहा कि नाबालिगों को अपराध के लिए इस्तेमाल करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल छोटे-छोटे वाहकों पर कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा कर मुख्य सरगनाओं और इस कारोबार को संचालित करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा और भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाएगा।
कैबिनेट से उम्मीद टूटी तो आंदोलन हुआ और उग्र, खून से लिखा पत्र, इच्छामृत्यु की मांग, भीख मांगकर और एक पैर पर खड़े होकर जताया विरोध
दुर्ग ।
छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 1 जुलाई से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है और 8 जुलाई की राज्य कैबिनेट बैठक में संविलियन और समायोजन को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं होने के बाद शिक्षकों का आक्रोश और तेज हो गया है। खास बात यह है कि आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र दुर्ग जिला बना हुआ है, जो प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह क्षेत्र भी है।
कैबिनेट बैठक के बाद फूटा आक्रोश
कैबिनेट बैठक से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद लगाए बैठे अतिथि शिक्षकों को जब कोई राहत नहीं मिली, तो आंदोलन और अधिक उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालकर दुर्ग कलेक्ट्रेट का घेराव किया और शासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
भावुक शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति तक मांग डाली। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें न तो सम्मान मिला और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा।
बारिश में भी नहीं डिगा आंदोलन
लगातार बारिश के बावजूद हजारों अतिथि शिक्षक धरना स्थल पर डटे हुए हैं। शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने कई अनोखे तरीके अपनाए हैं।
एक पैर पर खड़े होकर विरोध प्रदर्शन।
हाथों में कटोरा लेकर भीख मांगते हुए प्रदर्शन।
खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग।
लगातार धरना और रैलियों के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास।
इन प्रदर्शनों ने प्रदेशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
क्या हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें?
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 10 से 12 वर्षों से दूरस्थ और ग्रामीण सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें केवल लगभग ₹20,000 मासिक मानदेय पर कार्य करना पड़ रहा है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं—
संविलियन (नियमितीकरण)
समान कार्य के लिए समान वेतन
पूर्ण सेवा सुरक्षा
सम्मानजनक रोजगार एवं भविष्य की स्थायी व्यवस्था
₹2,000 बढ़ोतरी का प्रस्ताव ठुकराया
सूत्रों के अनुसार सरकार की ओर से ₹2,000 मानदेय वृद्धि और 12 महीने के भुगतान से जुड़ा एक प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन अतिथि शिक्षक संघ ने इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया।
संघ का स्पष्ट कहना है कि उनका आंदोलन केवल वेतन वृद्धि के लिए नहीं, बल्कि संविलियन और स्थायी सेवा सुरक्षा के लिए है। जब तक इस संबंध में ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और कई विषयों पर प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों को रायपुर में आंदोलन करना चाहिए क्योंकि वे पूरे प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए हैं।
मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षकों की कुछ व्यावहारिक मांगों, जैसे रविवार अवकाश आदि, पर शासन सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है।
कांग्रेस का भी मिला समर्थन
अतिथि शिक्षकों के आंदोलन को विपक्षी दल कांग्रेस का भी समर्थन मिला है। कांग्रेस नेताओं ने धरना स्थल पहुंचकर आंदोलनरत शिक्षकों के साथ एकजुटता जताई और सरकार से शीघ्र समाधान निकालने की मांग की।
सरकार के सामने बढ़ती चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सरकार के लिए भी बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। नई शिक्षा सत्र की शुरुआत के बीच हजारों अतिथि शिक्षकों की हड़ताल का सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ने लगा है।
अब सबकी निगाहें सरकार पर
अतिथि शिक्षक संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द संविलियन और सेवा सुरक्षा पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ऐसे में अब पूरे प्रदेश की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है कि क्या संवाद से समाधान निकलेगा या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा।
भव्य कांवर यात्रा की तैयारियां तेज, हजारों शिवभक्त होंगे शामिल; सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का बनेगा संगम
पाटन। बोल बम कांवर यात्रा समिति, पाटन की महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को रेस्ट हाउस पाटन में समिति के संयोजक श्री जितेन्द्र वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सावन के तीसरे सोमवार, 17 अगस्त को पाटन से टोलाघाट तक भव्य एवं विशाल कांवर यात्रा निकाली जाएगी। आयोजन को अधिक व्यवस्थित, भव्य और श्रद्धामय बनाने के लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
इस वर्ष की यात्रा का विशेष आकर्षण "एक मुठ्ठी अन्नदान" अभियान रहेगा। भगवान शिव के नाम पर शिवभक्तों से प्राप्त एक-एक मुठ्ठी अन्न से महाप्रसाद तैयार किया जाएगा, जो सेवा, सहयोग और सामाजिक समरसता का अनूठा संदेश देगा।
समिति के संयोजक श्री जितेन्द्र वर्मा ने कहा कि कांवर यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था, अनुशासन, सेवा और सामाजिक एकता का महापर्व है। प्रत्येक वर्ष हजारों शिवभक्त "बोल बम" के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए इस यात्रा में शामिल होते हैं। इस वर्ष भी यात्रा पाटन ओग्गर तालाब स्थित भगवान भोलेनाथ मंदिर से आशीर्वाद लेकर टोलाघाट के लिए रवाना होगी।
बैठक में यात्रा मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, पेयजल, भोजन, विश्राम स्थल, यातायात समन्वय, स्वच्छता, प्रचार-प्रसार तथा स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए विभिन्न दायित्वों का निर्धारण किया गया।
बैठक के अंत में श्री जितेन्द्र वर्मा ने पाटन क्षेत्र के सभी सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों, युवा मंडलों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, स्वयंसेवकों एवं शिवभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में यात्रा में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति या समिति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था और सामूहिक सहभागिता का महापर्व है।
बैठक में भाजपा प्रदेश मंत्री श्री जितेन्द्र वर्मा, भाजपा महामंत्री श्री दिलीप साहू, योगेश (निक्की) भाले, कमलेश वर्मा, रानी केशव बंछोर, कमलेश चंद्राकर, धर्मेन्द्र सिन्हा, ज्योतिप्रकाश साहू, पी.एन. दुबे, राकेश पाण्डेय, निशा सोनी सहित बड़ी संख्या में समिति के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिवभक्त उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
