July 17, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    आईआईएम रायपुर में जुटेगा पूरा मंत्रिमंडल, सुशासन, नवाचार, नेतृत्व और भविष्य की विकास रणनीति पर होगा व्यापक विचार-विमर्श

    रायपुर,। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' 4 और 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में आयोजित होगा। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित और परिणामोन्मुख बनाते हुए 'विकसित छत्तीसगढ़' के विजन को नई गति प्रदान करना है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को निरंतर सीखते हुए स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को तैयार करना आवश्यक है। इसी सोच के साथ आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और प्रभावी नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

    शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन मंथन होगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास और प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को लगातार बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। सरकार का लक्ष्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, जवाबदेह, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका सीधा लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।

    उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से संभव नहीं होगा, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच मजबूत समन्वय ही राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। चिंतन शिविर में होने वाला यह मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा की दिशा तय करेगा।

    राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन

    चिंतन शिविर के पहले दिन आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास नेतृत्व और जीवन मूल्यों पर व्याख्यान देंगे। इसके बाद अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की शासन व्यवस्था पर अपने विचार रखेंगे, जबकि डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

    दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके बाद सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं, शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे।

    सुशासन की नई कार्यसंस्कृति पर रहेगा फोकस

    चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण और समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुख प्रशासनिक संस्कृति को विकसित करना है। साथ ही शासन में आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।

    दुर्ग। राजनीति में अक्सर यह चर्चा होती है कि समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह प्रभाव और चाटुकारिता को अधिक महत्व मिलने लगा है। ऐसे माहौल में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दुर्ग नगर निगम के लिए घोषित एल्डरमैनों की सूची में तुलसी यादव का नाम शामिल होना केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए सम्मान का संदेश है, जो वर्षों तक बिना किसी पद और अपेक्षा के संगठन की सेवा करते हैं।

    मिलपारा वार्ड निवासी 60 वर्षीय तुलसी यादव पिछले 25 से 30 वर्षों से भी अधिक समय से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले तुलसी यादव कृष्णा मेडिकल में नौकरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी संगठन और समाज सेवा से दूरी नहीं बनाई।

    कोसरिया यादव समाज के संगठन मंत्री के रूप में उन्होंने समाज को संगठित करने और सामाजिक गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरल, सहज और मृदुभाषी व्यक्तित्व के कारण वे समाज में सम्मानित पहचान रखते हैं। राजनीतिक रूप से वे वरिष्ठ भाजपा नेता हेमचंद यादव के समर्थक माने जाते हैं तथा वर्ष 2004 में वार्ड क्रमांक 38 से पार्षद पद के प्रत्याशी भी रह चुके हैं।

    एल्डरमैन के रूप में उनके नाम की घोषणा होते ही मिलपारा वार्ड सहित उनके शुभचिंतकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल तुलसी यादव का नहीं, बल्कि उन सभी निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान है जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के पार्टी के लिए मेहनत की।

    तुलसी यादव की नियुक्ति ने यह संदेश भी दिया है कि भारतीय जनता पार्टी में संगठन के लिए वर्षों तक किया गया समर्पण और निष्ठा आज भी मूल्यवान है। यह निर्णय उन कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा देता है, जो वर्षों से बिना किसी पद की अपेक्षा के पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं।

    तुलसी यादव की कहानी यह साबित करती है कि संगठन की नींव बड़े पदों से नहीं, बल्कि उन साधारण कार्यकर्ताओं से मजबूत होती है जो हर परिस्थिति में पार्टी के साथ खड़े रहते हैं। एल्डरमैन के रूप में मिला यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, सेवा और संगठन के प्रति अटूट विश्वास का सच्चा प्रतिफल माना जा रहा है।

    सड़क पर सत्ता से ज़्यादा नज़र आ रही है विपक्ष की चुप्पी, अब फैसला धीरज बाकलीवाल को करना होगा

    दुर्ग। लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष केवल सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज़ बनकर सत्ता को जवाबदेह बनाने के लिए होता है। यदि विपक्ष ही अपनी भूमिका से पीछे हट जाए तो नुकसान केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम जनता का होता है।

    दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर शहर में लगातार सवाल उठ रहे हैं। गंदगी, बदहाल व्यवस्थाएं, विकास कार्यों में कथित भेदभाव और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष के भीतर से भी समय-समय पर आवाजें उठती रही हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से उम्मीद नेता प्रतिपक्ष से होती है कि वे इन मुद्दों को निगम परिषद से लेकर सड़कों तक मजबूती से उठाएं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज होती जा रही है कि नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले इन मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहे हैं।

    कांग्रेस संगठन इन दिनों नए तेवर और नई कार्यशैली की बात कर रहा है। प्रदेश नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि संगठन में केवल पद धारण करने वाले नहीं, बल्कि मैदान में संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी। कई मंचों से यह भी कहा गया है कि जो लोग केवल पद के भरोसे राजनीति कर रहे हैं, उन्हें अब सक्रिय संघर्षशील कार्यकर्ताओं के लिए जगह छोड़नी चाहिए।

    ऐसे में सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि क्या यही कसौटी नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर भी लागू होगी?

    जनता यह अपेक्षा करती है कि विपक्ष सत्ता के हर निर्णय की समीक्षा करे, जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाए और यदि कहीं अनियमितता हो तो उसके खिलाफ संघर्ष करे। यदि विपक्ष की सक्रियता केवल औपचारिक बैठकों या सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सिमट जाए तो लोकतंत्र का संतुलन प्रभावित होता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुर्ग शहर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के सामने अब संगठनात्मक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चुनौती है। यदि कांग्रेस को नगर निगम में प्रभावी विपक्ष के रूप में स्थापित करना है तो उसे ऐसा नेतृत्व देना होगा जो सड़कों पर संघर्ष करता दिखाई दे, जनता के बीच उपस्थित रहे और सत्ता पक्ष से वैचारिक दूरी बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाए।

    यह किसी व्यक्ति विशेष के निजी जीवन या व्यक्तिगत संबंधों का विषय नहीं है। सार्वजनिक पद पर बैठे प्रत्येक जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन उसके सार्वजनिक कार्यों, सक्रियता और जनता के प्रति जवाबदेही के आधार पर होना स्वाभाविक है।

    अब सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न यही है—क्या कांग्रेस संगठन नगर निगम में विपक्ष की भूमिका को और अधिक धार देने के लिए कोई बड़ा निर्णय लेगा, या फिर वर्तमान व्यवस्था को ही जारी रखेगा? इसका उत्तर आने वाले दिनों में संगठन की रणनीति और नेतृत्व के निर्णयों से स्पष्ट होगा।

    दुर्ग निगम में किसकी चली सबसे ज़्यादा? सरोज पांडे का प्रभाव बरकरार, सांसद-विधायक खेमों को भी मिला प्रतिनिधित्व

    दुर्ग। लगभग ढाई वर्ष के लंबे इंतज़ार के बाद छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति प्रक्रिया को गति देते हुए दुर्ग नगर पालिक निगम के लिए 9 एल्डरमैनों की सूची जारी कर दी है। सूची सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। संगठनात्मक समीकरणों और राजनीतिक संतुलन को साधते हुए जारी इस सूची में एक बार फिर भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सूची में शामिल अधिकांश नाम ऐसे हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं अथवा सरोज पांडे के विश्वस्त माने जाते हैं। इसके साथ ही दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल तथा विधायक एवं मंत्री गजेंद्र यादव के करीबी नेताओं को भी स्थान देकर पार्टी नेतृत्व ने सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है।

    दुर्ग निगम के घोषित 9 एल्डरमैन

    श्री मदन वाडई

    श्रीमती चमेली साहू

    श्री अनुप सोनी

    श्री तुलसी यादव

    श्री दशरथ निर्मलकर

    श्री गौरव शर्मा

    श्री तेखन सिन्हा

    श्री कांतिलाल जैन (गोलू)

    श्री नरेश तेजवानी

    संगठन को प्राथमिकता, सामाजिक संतुलन पर भी ध्यान

    सूची पर नजर डालें तो इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों और लंबे समय से संगठन में कार्यरत कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास दिखाई देता है। पार्टी ने अनुभवी चेहरों के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी अवसर देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन के प्रति समर्पण का सम्मान किया जाएगा।

    अब बढ़ेगी निगम की राजनीतिक सक्रियता

    एल्डरमैनों की नियुक्ति के बाद दुर्ग नगर निगम में कई महत्वपूर्ण समितियों के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। विकास योजनाओं, निगम की नीतियों और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों में इन मनोनीत सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। ऐसे में यह नियुक्ति केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले समय की स्थानीय राजनीतिक दिशा तय करने वाली भी मानी जा रही है।

    चर्चा का विषय बनी सूची

    सूची जारी होने के साथ ही भाजपा के भीतर खुशी का माहौल है, वहीं जिन नेताओं के नामों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी लेकिन सूची में स्थान नहीं मिला, उनके समर्थकों में हल्की निराशा भी देखी जा रही है। कुल मिलाकर यह सूची संगठनात्मक संदेश देने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक रणनीति की झलक भी पेश करती है।

    ढाई वर्षों के इंतज़ार के बाद जारी हुई यह सूची साफ संकेत देती है कि भाजपा ने दुर्ग में संगठन, अनुभव और राजनीतिक संतुलन—तीनों को साधने की कोशिश की है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नव-नियुक्त एल्डरमैन नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहर के विकास में कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

    राजनीति में कुछ लोग जनसेवा से पहचान बनाते हैं, कुछ संघर्ष से, और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी पहचान कैमरे के एंगल, रीलों और पीआर मैनेजमेंट से बनती है। कहते हैं कि एक विधायक महोदय पर "महादेव" की ऐसी असीम कृपा हुई कि देखते ही देखते अपना भव्य मीडिया हाउस खड़ा हो गया। राजधानी की एक पॉश कॉलोनी में स्थित आलीशान कार्यालय देखकर सहज ही प्रश्न उठता है कि यह पत्रकारिता का केंद्र है या फिर ब्रांड मैनेजमेंट का कॉरपोरेट स्टूडियो?

    मिशन वाली पत्रकारिता कब लग्ज़री प्रोजेक्ट में बदल गई, इसका शायद सबसे जीवंत उदाहरण यही है। यहां खबरें कम और इमेज बिल्डिंग ज्यादा दिखाई देती है।

    विधायक महोदय की सबसे बड़ी ताकत बताई जाती है—पीआर और इवेंट मैनेजमेंट। कहते हैं कि उन्होंने निजी दुख को भी सार्वजनिक आयोजन में बदलने की कला विकसित कर ली है। परिवार में शोक का अवसर आया तो श्मशान घाट तक में वीआईपी व्यवस्थाओं की चर्चा रही। संवेदना प्रकट करने वालों के फोन भी मानो इतिहास का हिस्सा बन गए—रिकॉर्ड हुए, संपादित हुए और सोशल मीडिया पर प्रसारित भी हुए।

    ऐसा लगा कि संवेदना भी अब कंटेंट कैलेंडर का हिस्सा बन चुकी है। बस एक औपचारिकता बाकी रह गई थी—"इस शोक आयोजन को सफल बनाने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद" वाला पोस्टर।

    रीलों की दुनिया में शायद यही नया राजनीतिक दर्शन है—जो कैमरे में कैद नहीं हुआ, वह हुआ ही नहीं।

    दिलचस्प बात यह भी है कि विधायक महोदय अक्सर अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर अपरोक्ष टिप्पणियां करने से नहीं चूकते। शायद उन्हें यह याद दिलाने की जरूरत है कि पिछले लगभग 25 वर्षों में प्रदेश में करीब 20 वर्ष उनकी ही सरकार रही है और  लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी लंबे समय से उनकी अपनी ही पार्टी के सांसद करते रहे हैं। ऐसे में अपनी ही राजनीतिक परंपरा, नेतृत्व और संगठन के योगदान को नज़रअंदाज़ कर तंज कसना राजनीतिक परिपक्वता कम और तात्कालिक लोकप्रियता की कोशिश अधिक प्रतीत होता है।

    जनता नेताओं से संवाद चाहती है, स्व-प्रचार नहीं; जवाबदेही चाहती है, पटकथा नहीं; और सेवा चाहती है, स्टूडियो नहीं।

    लोकतंत्र में कैमरे की चमक कुछ समय के लिए तालियां दिला सकती है, लेकिन इतिहास में जगह केवल वही बनाता है जो काम की रोशनी से पहचाना जाए। रीलें कुछ सेकंड चलती हैं, जबकि जनसेवा की असली पटकथा जनता वर्षों तक याद रखती है।

    केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने किया सम्मानित, बोले— "यह सम्मान पूरे समाज का है"

    दुर्ग। मेघगंगा ग्रुप के चेयरमैन मनीष पारख को सामाजिक सेवा, जनकल्याण और सामाजिक दायित्वों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार के केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री Ramdas Athawale द्वारा प्रदान किया गया।

    दुर्ग जिले के सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके मनीष पारख ने व्यापारिक उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने अपने पिता से मिली सेवा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, साइबर जागरूकता और सामाजिक विकास के अनेक क्षेत्रों में लगातार कार्य किया है।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद मनीष पारख ने कहा, "डॉक्टरेट की इस उपाधि के लिए मैं आप सभी के सहयोग, विश्वास और स्नेह के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। यह सम्मान मुझे समाज की सेवा के लिए और अधिक प्रेरित करेगा।"

    सामाजिक सरोकारों में उल्लेखनीय योगदान

    मनीष पारख के नेतृत्व में विभिन्न जनहितकारी पहलें संचालित की गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—

    लाइफकेयर डायग्नोस्टिक्स (NABL मान्यता प्राप्त) के माध्यम से नियमित निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन।

    पिछले 7 वर्षों से निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का सतत संचालन।

    आम नागरिकों में नियमित स्वास्थ्य जांच की संस्कृति विकसित करने के लिए हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत।

    युवाओं के कौशल विकास हेतु विशेष स्किल डेवलपमेंट एवं डिग्री प्रोग्राम का संचालन।

    "मोर शहर, मोर जिम्मेदारी" अभियान के अंतर्गत दुर्ग के गांधी चौक, शहीद चौक, वाई-शेप ब्रिज चौक एवं कचहरी चौक सहित कई प्रमुख स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्य में योगदान।

    शहर की यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए पुलिस विभाग को ट्रैफिक बैरिकेड्स उपलब्ध कराना।

    महावीर स्कूल के अध्यक्ष के रूप में विद्यालय के जीर्णोद्धार, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना।

    दुर्ग पुलिस एवं तत्कालीन रेंज आईजी राम गोपाल गर्ग के साथ मिलकर "साइबर प्रहरी" अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए साइबर अपराध के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना।

    मनीष पारख को मिला यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि उद्योग जगत से जुड़े लोग यदि सामाजिक दायित्वों को प्राथमिकता दें, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव है। यह उपलब्धि दुर्ग जिले के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

    रायपुर। छत्तीसगढ़ को अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सर्वधर्म सेवा संस्था, भिलाई के प्रतिनिधिमंडल ने संस्था के संरक्षक श्री इंद्रजीत सिंह (छोटू भईया) के सहयोग एवं मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की।

    इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को 16 बिंदुओं का विस्तृत सुझाव-पत्र सौंपते हुए पूरे प्रदेश में अंगदान एवं देहदान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आग्रह किया। संस्था ने सुझाव दिया कि शासन स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिससे अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए प्रेरित हों और जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।

    संस्था ने एक महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि अंगदान करने वाले दाताओं को मरणोपरांत राजकीय सम्मान प्रदान किया जाए। संस्था का मानना है कि इससे समाज में अंगदान के प्रति सम्मान, जागरूकता और सकारात्मक सोच विकसित होगी तथा अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।

    सर्वधर्म सेवा संस्था का कहना है कि यदि शासन, चिकित्सा संस्थान, सामाजिक संगठन और आमजन मिलकर समन्वित प्रयास करें, तो छत्तीसगढ़ न केवल हजारों लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बल्कि अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल भी बन सकता है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और इस विषय पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। संस्था ने मुख्यमंत्री के संवेदनशील दृष्टिकोण एवं सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि भविष्य में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं

    *बिहान की दीदी के परिवार को समय पर मिली सहायता, मुश्किल दौर में बनी सरकार की जनकल्याणकारी योजना का सहारा*

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदूर वनांचल तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने एक जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देकर संवेदनशील शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    *दुख की घड़ी में मिला आर्थिक संबल*

    सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम आरलमपल्ली की दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ी बिहान की दीदी दुधी सन्नी का 8 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल गई।

    *दो महीने में मिला दो लाख रुपये का बीमा दावा*

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में बिहान योजना की टीम ने तुरंत बीमा दावा तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की दोरनापाल शाखा को भेजा। बैंक ने भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूरी कीं।

    संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मृतिका के पति एवं नामिनी दुधी सोमा के बैंक खाते में 27 मई 2026 को मात्र दो महीने के भीतर 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि जमा हो गई। यह सहायता राशि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा नायक द्वारा हितग्राही को प्रदान की गई।

    *टीमवर्क से मिली समय पर राहत*

    इस कार्य में भारतीय स्टेट बैंक दोरनापाल के शाखा प्रबंधक श्री आनंद सिंह, बिहान की पीआरपी श्रीमती रूकमणी कर्मा तथा एफएलसीआरपी कुमारी शालिनी ओडला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार को बिना अनावश्यक विलंब के आर्थिक सहायता मिल सकी।

    *गरीब परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बन रही योजना*

    प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन रही है। परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में मिलने वाली बीमा राशि संकट की घड़ी में बड़ा सहारा साबित होती है।

    दुधी सन्नी के परिवार की यह कहानी बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो वह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को नया संबल और विश्वास भी प्रदान करता है।

    *वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने किया मंथन*

    *250 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, बल्क वेस्ट जेनरेटरों की जवाबदेही और जीरो वेस्ट स्टेट के लक्ष्य पर दिया गया जोर*

    रायपुर / छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

    क्षेत्रीय अधिकारी श्री पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    कार्यशाला में राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह एवं श्री पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता श्री योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ श्रीमती नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।

    कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

     कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

    रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।

    *प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत*

    पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।

    बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    *11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई*

    माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।

    *इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन*

    जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

    *हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य*

    कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

    *बदलते बस्तर की नई पहचान*

    पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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