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May 25, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

 

साभार - धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक जनसंपर्क

रायपुर, /आज के दौर में टिकाऊ खेती की ओर बढ़ना समय की मांग है। रसायनों के बोझ तले दबती मिट्टी को राहत देने के लिए हरी खाद एक बेहतरीन समाधान बनकर उभरी है। यह न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उर्वरता को भी सुरक्षित रखती है। मिट्टी बचेगी, तो किसान बचेगा और किसान बचेगा, तो देश समृद्ध होगा।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेती में हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन में सुधार लाने में मदद मिल सके। विभाग के अनुसार धान के खेतों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां कम हो रही हैं और मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो रही है।

क्या है हरी खाद?

हरी खाद वह सहायक फसल है जिसे मुख्य फसल बोने से पहले खेत में उगाया जाता है और फूल आने की अवस्था में ही उसे हल चलाकर मिट्टी में दबा दिया जाता है। ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी फसलें हरी खाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। हरी खाद के तहत कई फसलों का उपयोग किया जाता है जिनमें दलहनी और बिना दलहनी फसलें शामिल होती हैं। हरी खाद के लिए झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियों, टहनियों को भी उपयोग में ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए विशेष रूप से ढैंचा फसलों का उपयोग किया जाता है। इन फसलों को खेतों में लगाकर भूमि में सुधार किया जाता है।

मिट्टी की सेहत में सुधार

हरी खाद का सबसे बड़ा प्रभाव मिट्टी की भौतिक और रासायनिक संरचना पर पड़ता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है। हरी खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जिससे हवा का संचार बढ़ता है और पौधों की जड़ें गहराई तक जा पाती हैं। इसके उपयोग से मिट्टी की पानी सोखने की शक्ति बढ़ जाती है, जो सूखे के समय फसलों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है।

उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी

जब मिट्टी स्वस्थ होती है, तो उत्पादन का बढ़ना निश्चित है। हरी खाद के प्रयोग से पैदावार में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे किसान की फसल की लागत घटती है। मित्र कीटों से फसल का संरक्षण करता है। यह जमीन के भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करती है।

हरी खाद बनाने की सही विधि

क्षेत्र की जलवायु के अनुसार सनई या ढैंचा का चुनाव करें। बुवाई का समय मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) इसके लिए सबसे उपयुक्त है। जब फसल लगभग 40-50 दिन की हो जाए और उसमें फूल आने लगें, तब उसे पाटा लगाकर या रोटावेटर की मदद से मिट्टी में मिला दें। पलटने के बाद 10-15 दिनों तक खेत में नमी बनाए रखें ताकि खाद अच्छी तरह सड़कर मिट्टी का हिस्सा बन जाए।

हरी खाद के प्रयोग से बढ़ेगी आय

हरी खाद केवल एक उर्वरक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी का उपचार है। यदि किसान हर दूसरे या तीसरे साल अपने खेत में हरी खाद का प्रयोग करें, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि हम समाज को रसायनों से मुक्त, शुद्ध और पौष्टिक अनाज भी उपलब्ध करा पाएंगे।

कृषि के लिए एक वरदान हरी खाद

हरी खाद का उपयोग कृषि के लिए एक ष्वरदानष् के समान है। वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, ऐसे में हरी खाद (ळतममद डंदनतम) प्राकृतिक तरीके से मिट्टी को पुनर्जीवित करने का सबसे सुलभ विकल्प है।

कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसल से पूर्व हरी खाद के बीज उपलब्ध कराने की भी पहल की जा रही है। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों से मांग लेकर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

विद्यार्थियों की सफलता उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन से छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जारी कर परीक्षा में सफल हुए सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष हाई स्कूल परीक्षा में 77.15 प्रतिशत तथा हायर सेकेंडरी परीक्षा में 83.04 प्रतिशत विद्यार्थियों ने सफलता अर्जित की है, जो प्रदेश की शैक्षणिक प्रगति का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने इस उपलब्धि को राज्य के शिक्षा तंत्र, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बेटियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियां लगातार शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने इसे न केवल छात्राओं के आत्मविश्वास और परिश्रम का प्रमाण बताया, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का भी प्रतीक बताया।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने प्रावीण्य सूची में स्थान बनाकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद इन विद्यार्थियों ने अपने दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम से उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें और विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने परिवार, समाज और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ऐसे विद्यार्थियों, जिन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली है, उन्हें निराश न होने, आत्मविश्वास बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास करने से एक दिन निश्चित ही सफलता उनके कदम चूमेगी।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु पिल्लै, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

 

प्रिंटिंग पॉलिसी पर किया जा रहा है अन्य राज्यों की पॉलिसी का अध्ययन

रायपुर, // सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों और नई पहलों के प्रचार-प्रसार में आउटडोर मीडिया एक अत्यंत प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित है। इसमें होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, ब्रांडिंग, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स और एलईडी वैन अभियान शामिल हैं। हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों, बस स्टॉप्स तथा प्रमुख यातायात मार्गों जैसे उच्च आवागमन वाले स्थानों पर इसका प्रभाव विशेष रूप से अधिक होता है।

आउटडोर मीडिया के क्षेत्र में प्रभावी मॉनिटरिंग एक बड़ी चुनौती रही है। कई मामलों में यह शिकायतें सामने आई हैं कि वेंडर्स द्वारा सरकारी विज्ञापनों की स्थापना में देरी की गई या निगरानी के अभाव में उन्हें समय से पहले हटाकर उनकी जगह व्यावसायिक विज्ञापन लगा दिए गए।

इस समस्या के समाधान के लिए जनसंपर्क विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल करते हुए प्रौद्योगिकी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम ”प्रचार ऐप” विकसित किया गया है। यह प्रणाली तीन चरणों में कार्य करती है। पहले चरण में विभाग प्रचार अभियान की योजना बनाती है, पैनल में शामिल एजेंसियों और उनके एसेट्स का चयन कर प्रचार अभियान कार्य आवंटित करती है। दूसरे चरण में वेंडर्स प्रचार अभियान की समीक्षा कर क्रियान्वयन की योजना बनाती है और एसेट्स को माउंटर्स को सौंपती है। तीसरे चरण में माउंटर्स मैदानी स्तर पर निर्धारित स्थानों पर क्रिएटिव सामग्री स्थापित करती है।

रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करने के लिए माउंटर्स हेतु एक एंड्रॉइड ऐप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से माउंटर्स को जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो तीन चरणों में अपलोड करना अनिवार्य किया गया है-स्थापना से पहले, स्थापना के तुरंत बाद, और अभियान अवधि के दौरान प्रतिदिन कम से कम एक बार। इन तस्वीरों की पहले वेंडर एजेंसी द्वारा समीक्षा की जाती है और फिर उन्हें ऑनलाइन विभाग को भेजा जाता है।

यह एंड-टू-एंड प्रणाली पारदर्शिता को सुनिश्चित करती है और विभाग को सभी सक्रिय अभियानों की लगभग वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रत्येक आउटडोर एसेट की अलग-अलग ट्रैकिंग संभव हो पाती है और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

इसी क्रम में जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को पैनल में शामिल सभी एजेंसियों के साथ एक कार्यशाला आयोजित की। उन्होंने आउटडोर मीडिया की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए तकनीक आधारित ”प्रचार ऐप” समाधान अपनाने पर विशेष जोर दिया।

यह नई प्रणाली 01 अप्रैल 2026 से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स के लिए लागू की जा चुकी है और जल्द ही इसे एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग तथा डिजिटल वॉल पेंटिंग्स जैसे अन्य प्रारूपों तक भी विस्तारित किया जाएगा।

इसी तरह प्रिंटिंग पर काफी शिकायतें सामने आ रही थीं, इन शिकायतों के कारण टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। नई प्रिंटिंग पॉलिसी यथा-शीघ्र लागू की जावेगी। इस हेतु बेहतर एवं पारदर्शी पॉलिसी लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों की मुद्रण नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है।

ग्राम पंचायतों में QR कोड आधारित जागरूकता अभियान और समन्वित कार्यप्रणाली को बताया अनुकरणीय

रायपुर, / केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी जीरामजी) अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा योजनाओं के प्रावधानों को ग्राम स्तर तक पहुंचाने के लिए सुविचारित, व्यापक एवं रणनीतिक पहल की जा रही है, जो ग्रामीण विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विशेष रूप से ग्राम चौपालों, ग्राम सभाओं एवं सोशल मीडिया के माध्यम से चलाए जा रहे व्यापक जन-जागरूकता अभियान की प्रशंसा की। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में QR कोड स्थापना की पहल को नवाचारपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे योजनाओं की जानकारी आमजन तक सरलता से पहुंचेगी तथा पारदर्शिता एवं मॉनिटरिंग को मजबूती मिलेगी।

अपने पत्र में केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने उल्लेख किया कि वन क्षेत्रों एवं विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (PGVT) के समग्र विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया है, जो राज्य के समावेशी एवं सतत विकास दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ के श्रम बजट को राज्य में मानव-दिवस सृजन रुझान को देखते हुए 850 लाख मानव-दिवस से बढ़ाकर 1250 लाख मानव-दिवस स्वीकृत किया गया है। उन्होंने इसे राज्य के सतत प्रयासों एवं बढ़ती कार्यगत आवश्यकता का सकारात्मक परिणाम बताया।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य प्रशासन इसी प्रतिबद्धता एवं ऊर्जा के साथ योजनाओं के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका सृजन को नई गति देगी, बल्कि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

ड्रोन तकनीक ने बढ़ाई कार्रवाई की गति और सटीकता

ड्रोन की मदद से कांकेर जिले में हुई बड़ी कार्रवाई, पोकलेन मशीन और हाईवा जप्त

रायपुर // मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए तकनीक और नवाचार का सहारा लेते हुए एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। इसी कड़ी में अब खनन क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की शुरुआत कर दी गई है, जो राज्य में कानून व्यवस्था, खनिज संसाधन की सुरक्षा तथा राजस्व संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हो रहा है।
राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को जड़ से खत्म किया जाए। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब खनन क्षेत्रों में रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी, जिससे अवैध उत्खनन, परिवहन और संबंधित गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। यह कदम न केवल राजस्व हानि को रोकेगा, बल्कि अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी साबित होगा। खनिज विभाग का मैदानी अमला पहले से ही अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रहा था, लेकिन अब ड्रोन तकनीक के जुड़ने से इस कार्रवाई की गति और सटीकता दोनों बढ़ेंगी। ड्रोन से लगभग 5 किलोमीटर तक की रेंज और 120 मीटर तक ऊंचाई से निगरानी की क्षमता के चलते बड़े और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान कर मौके पर कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे अवैध गतिविधियों में संलिप्तों के बच निकलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन में उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरा, नाइट विजन और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो व्यापक और सटीक निगरानी सुनिश्चित करती हैं। इसके जरिए बड़े और दुर्गम खनन क्षेत्रों पर भी आसानी से नजर रखी जा सकती है।
यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। सरकार का यह साहसिक निर्णय न केवल कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि खनिज संसाधनों के संरक्षण और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। ड्रोन निगरानी की यह नई व्यवस्था राज्य में सुशासन और तकनीकी नवाचार का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।
इसी कड़ी में 29 अप्रैल 2026 को जिला कांकेर के तहकापार रेत खदान क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए सघन निगरानी और छापामार कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों एवं उपकरणों की पहचान की गई। ड्रोन निगरानी शुरू होते ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए।
इसके बाद केंद्रीय उड़नदस्ता दल और कलेक्टर (खनिज शाखा) के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए महानदी के किनारे भूईगांव की सीमा पर विशेष अभियान चलाकर एक चेन माउंटेन पोकलेन मशीन जेसीबी (215 एलसी) तथा एक हाईवा (क्रमांक CG08AV0975) जब्त किया गया।

भिलाई, छत्तीसगढ़ । शौर्यपथ । इस पृथ्वी दिवस पर भारत के युवाओं ने देश के डेयरी उ‌द्योग की पर्यावरणीय और नैतिक लागत के विरुद्ध आवाज़ उठाई। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और साथ ही गोमांस निर्यात में भी अग्रणी एक ऐसा तथ्य जो प्रायः सार्वजनिक विमर्श से ओझल रहता है। भिलाई में युवा प्रतिनिधियों ने सूर्या टी आई मॉल, भिलाई में एक सार्वजनिक प्रतिष्ठापन के माध्यम से डेयरी के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों और उसके गोमांस उ‌द्योग से गहरे संबंध को उजागर किया। इस समय देशभर के 20 शहरों में युवा इस सच्चाई की ओर ध्यान दिला रहे हैं कि "दूध और गोमांस एक ही जानवर से आते हैं", और नागरिकों से आग्रह कर रहे हैं कि वे डेयरी आपूर्ति श्रृंखला में पशुओं की यात्रा और उनके अंततः गोमांस उद्योग में पहुँचने की वास्तविकता पर विचार करें।

दूध और गोमांस के बीच के संबंध पर भारत में जो दीर्घकालीन मौन रहा है, वह अब टूटने लगा है। @animalsaveindia के एक इंस्टाग्राम रील में कौन बनेगा करोड़पति की एक क्लिप साझा की गई, जिसमें प्रतियोगी सिद्धार्थ शर्मा द्वारा डेयरी पशुओं के भविष्य का वर्णन सुनकर प्रस्तोता अमिताभ बच्चन स्पष्ट रूप से चौंके हुए दिखे। यह रील वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक देखे गए रीलों में से एक बन गई 1.2 अरब से अधिक बार देखी गई और 65 लाख लाइक्स अर्जित किए। बाद में बच्चन ने स्वयं भी इस बात को दोहराया कि गाय का दूध वास्तव में उसके बछड़े के लिए होता है, न कि मनुष्यों की चाय के लिए।इस प्रतिष्ठापन में जनता को डेयरी उ‌द्योग के पर्यावरणीय परिणामों पर भी विचार करने का आह्वान किया गया।

भारत में एक लीटर दूध उत्पादन के लिए 1,078 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यह राजस्थान, उत्तर प्रदेश,कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख डेयरी राज्यों में पहले से गहराते भूजल संकट पर एक अतिरिक्त बोझ है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी उ‌द्योग वर्गीकरण अधिसूचना 2025 में डेयरी और वधशालाओं को "रेड" श्रेणी में रखा है: अर्थात इन्हें सर्वाधिक प्रदूषणकारी उ‌द्योगों में गिना जाता है। यह वर्गीकरण दूध-गोमांस के अंतःसंबंध को और पुख्ता करता है तथा इन उ‌द्योगों में संलग्न किसानों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

इसके साथ ही, पशुपालन से उत्सर्जित मीथेन को अब निकट भविष्य में वैश्विक तापमान वृ‌द्धि के एक प्रमुख कारक के रूप में मान्यता मिल रही है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 1.27 करोड़ टन मीथेन उत्सर्जित करता है। ये दुष्प्रभाव गोमांस उ‌द्योग से अलग नहीं किए जा सकते, क्योंकि डेयरी और गोमांस एक ही तंत्र के परस्पर जुड़े हिस्से हैं। जब गाय और भैंसें दूध देना बंद कर देती हैं, तो उनमें से अनेक को गोमांस आपूर्ति श्रृंखला में बेच दिया जाता है।

प्राणी प्रोटेक्शन फाउंडेशन की प्रबंध न्यासी प्रांजलि शुक्ला ने कहा, "हमारा शहर गर्मियों के चरम महीनों में जलता रहता है और हर बीतते वर्ष के साथ यह असह्य होता जा रहा है। इसके बावजूद राज्य लाखों गायों और भैंसों के अंधाधुंध प्रजनन को बढ़ावा देता है, और दूध उत्पादन के लिए उपयोगिता समाप्त होते ही उन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। इस अनियंत्रित प्रजनन और परित्याग के चक्र से मीथेन उत्सर्जन निरंतर बढ़ता जा रहा है। रोज़मर्रा के आहार में डेयरी की केंद्रीय भूमिका के बावजूद, उसके जलवायु प्रभाव को लेकर समाज में व्यापक अज्ञानता बनी हुई है।"

जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ में लू और जलसंकट गहराता जा रहा है, खाद्य सुरक्षा की माँगों को अब स्वयंसिद्ध नहीं माना जा सकता। प्रश्न अब नीति-निर्माताओं, संस्थाओं और उ‌द्योग की ओर मुड़ता है- भारत की खाद्य प्रणालियाँ उन जलवायु और नैतिक चुनौतियों का सामना कैसे करेंगी जो वे स्वयं उत्पन्न कर रही हैं?

दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट शहर के चर्चित आभूषण प्रतिष्ठान सहेली ज्वेलर्स में हुए विवाद ने अब एक व्यापक बहस का रूप ले लिया है। यह मामला केवल एक ग्राहक…

भिलाई | भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) भिलाई जिले की नवनियुक्त कार्यकारिणी विवादों के घेरे में आ गई है। पार्टी की नई टीम में 'युवा जोश' की जगह 'आपराधिक इतिहास' को तरजीह दिए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जैसे ही कार्यकारिणी की सूची जारी हुई, पार्टी के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया है।

प्रमुख बिंदु: जो पार्टी की साख पर सवाल उठा रहे हैं

दागी चेहरों का दबदबा: नई कार्यकारिणी में ऐसे युवाओं को पदाधिकारी बनाया गया है, जिन पर लूट, मारपीट, धोखाधड़ी और महिलाओं से बदसलूकी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।

महादेव सट्टा एप से कनेक्शन: चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पदाधिकारी चर्चित 'महादेव सट्टा एप' मामले में भी आरोपी हैं और जेल की हवा खा चुके हैं।

गैंगस्टर लिंक: रिपोर्ट के अनुसार, सूची में शामिल कुछ नामों का संबंध कुख्यात गैंगस्टरों के साथ भी बताया जा रहा है।

भीतरघात और बगावत: घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर 10 मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को खारिज करते हुए अपनी समानांतर सूची जारी कर दी है, जिससे पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।

पार्टी की फजीहत, नेतृत्व ने माँगा स्पष्टीकरण

मामले की गंभीरता और बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भिलाई जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा अध्यक्ष सौरभ जायसवाल को तलब किया है।

जिलाध्यक्ष का बचाव: सौरभ जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे "चरित्र प्रमाण पत्र" माँगे गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अभी सिर्फ आरोप लगे हैं, अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक साबित हो रही है। एक तरफ जहां युवाओं को जोड़ने की बात हो रही है, वहीं 'लिस्टेड अपराधियों' को पद बांटने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इन नियुक्तियों को रद्द कर 'छवि सुधार' की दिशा में कदम उठाता है या नहीं।

नई दिल्ली/गुवाहाटी, । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।

क्या है पूरा विवाद?
5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।

हाईकोर्ट का रुख सख्त
24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।

अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।

आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।

पुणे–सतारा मार्ग पर आधुनिक 6-लेन सुरंग परियोजना से घटेगा यात्रा समय, बढ़ेगी सुरक्षा और पर्यटन-व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ

 खंबटकी घाट में आधुनिक सुरंग से आसान होगा सफर

नई दिल्ली/महाराष्ट्र, ।
दशकों से चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरे सफर के लिए पहचाने जाने वाले Khambatki Ghat में अब यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। National Highways Authority of India द्वारा NH-48 (पूर्व में NH-4) पर विकसित की जा रही ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना इस क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित राजमार्ग अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।

परियोजना का एक हिस्सा परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के तहत आम जनता के लिए खोला गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और इसका उद्घाटन 2026 की पहली छमाही में होने की संभावना है।


⏱️ 20 मिनट का सफर अब 5–10 मिनट में

पहले जहां खंबटकी घाट का सफर संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और लंबे ट्रैफिक जाम के कारण तनावपूर्ण रहता था, वहीं नई सुरंग के शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो गया है।

यात्रियों के अनुसार:

  • पहले घाट पार करने में 15–20 मिनट लगते थे
  • नई सुरंग से अब वही सफर 5–10 मिनट में पूरा हो रहा है
  • बेहतर लाइटिंग, सीसीटीवी और सुरक्षा सुविधाओं से दुर्घटना जोखिम घटा है

नई सुरंग में आधुनिक रिफ्लेक्टर, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन बिंदु और चौड़ी लेन जैसी सुविधाएं यात्रियों को अधिक सुरक्षित अनुभव प्रदान कर रही हैं।


? क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना

Khambatki Ghat मुंबई-पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों को जोड़ती है, जैसे—

  • Pune
  • Satara
  • Kolhapur
  • Belagavi

साथ ही यह मार्ग लोकप्रिय पर्यटन स्थलों—

  • Mahabaleshwar
  • Panchgani
  • Kaas Plateau
    — तक पहुंचने वाले हजारों पर्यटकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

?️ नई सुरंग से मिलेंगे बड़े फायदे

नई छह-लेन ट्विन ट्यूब सुरंग परियोजना से कई स्तरों पर लाभ होने की उम्मीद है:

✔️ यात्रा समय में बड़ी कमी
✔️ दुर्घटनाओं के जोखिम में उल्लेखनीय गिरावट
✔️ ईंधन की बचत और वाहन रखरखाव लागत कम
✔️ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
✔️ दैनिक यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर

पहले जहां एक दिशा में केवल 0.85 किमी की दो-लेन सुरंग और दूसरी दिशा में लगभग 8 किमी घाट सड़क थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक से लैस नई सुरंग इन सभी समस्याओं का समाधान बनकर उभरी है।


? ‘डर से स्वतंत्रता’ की ओर बढ़ता सफर

नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का प्रतीक बनती जा रही है। यह परियोजना दिखाती है कि जब अवसंरचना को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है, तो यह न केवल दूरी कम करती है, बल्कि समय बचाती है, जानें सुरक्षित करती है और यात्रा को भरोसेमंद बनाती है। ??

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