October 24, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रमन बाजार में हथियार के साथ घूम रहा था युवक, पूछताछ में तीन और नाम सामने आए, पिस्टल व मैग्जिन बरामद

    मृणेन्द्र चौबे

    राजनांदगांव/शौर्यपथ /चिखली के रमन बाजार क्षेत्र में पिस्टल दिखाकर लोगों के बीच दहशत पैदा करने और इलाके में दबदबा कायम करने की कोशिश करने वाले चार युवकों को चिखली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल और मैग्जिन बरामद की है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी रमन बाजार तालाब क्षेत्र में पिस्टल दिखाकर लोगों को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे थे। चारों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस के अनुसार 1 अक्टूबर की रात चिखली पुलिस की टीम क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि बड़ा तालाब पार रमन बाजार में एक युवक पिस्टल दिखाकर लोगों को डरा-धमका रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आसपास घेराबंदी की। पुलिस ने मौके से धनुष साहू उर्फ गोलू (19), पिता स्व. भानू साहू, निवासी रमन बाजार चिखली वार्ड क्रमांक 10 को पकड़ा। पुलिस द्वारा विधिवत तलाशी लेने पर उसके कब्जे से काले रंग की पिस्टल और मैग्जिन बरामद हुई।

    हथियार बरामद होने के बाद पुलिस ने धनुष साहू से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि पिस्टल शेख शहबाज उर्फ शिब्बू और जफर मोमीन द्वारा खरीदकर लाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने मामले में आगे जांच करते हुए शेख शहबाज उर्फ शिब्बू, जफर मोमीन और ऐश्वर्य झा उर्फ राम को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में चारों द्वारा चिखली क्षेत्र में पिस्टल दिखाकर लोगों को डराने-धमकाने और क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करने की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई। गिरफ्तार आरोपियों में शेख शहबाज उर्फ शिब्बू (28), पिता शेख परवेज, निवासी ओवरब्रिज के पास स्टेशनपारा वार्ड क्रमांक 12; जफर मोमीन (20), पिता हाजी सफीक मोमीन, निवासी पेट्रोल पंप के पास वार्ड क्रमांक 10; तथा ऐश्वर्य झा उर्फ राम (19), पिता स्व. विवेकानंद झा, निवासी देशमुख होटल चौक के पास चिखली वार्ड क्रमांक 5 शामिल हैं।

    पुलिस ने बताया कि चारों आरोपियों के खिलाफ पूर्व में भी अलग-अलग मामलों में अपराध दर्ज हैं। इनमें शेख शहबाज के खिलाफ आर्म्स एक्ट सहित मारपीट, धमकी और अन्य धाराओं में कई प्रकरण दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। जफर मोमीन, ऐश्वर्य झा और धनुष साहू के खिलाफ भी पूर्व में प्रतिबंधात्मक एवं अन्य धाराओं में मामले दर्ज बताए गए हैं।

    पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया। उक्त कार्रवाई में प्रभारी उप निरीक्षक कैलाश चन्द्र मरई, उप निरीक्षक सत्तुलाल कंवर, सहायक उप निरीक्षक विनोद वर्मा, पीएसआई दुर्गेश धुरंधर सहित पुलिस टीम के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    कृष्णा मंडल । दंन्तेवाड़ा

    एक शिक्षक छुट्टी पर, दूसरे को आश्रम का जिम्मा—अब बच्चों को पढ़ाएगा कौन? दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल 

    अटैचमेंट पर रोक के बाद भी शिक्षक स्कूल से बाहर, आश्रमों में अधीक्षक की जिम्मेदारी; दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी!

    दंतेवाड़ा। जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूल पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को आश्रमों की जिम्मेदारी सौंपे जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का मामला सामने आया है।

    राज्य सरकार की व्यवस्था के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 1+1 और माध्यमिक विद्यालयों में 1+3 शिक्षकों की व्यवस्था है। लेकिन शिक्षकों के अवकाश पर रहने की स्थिति में कई स्कूलों में पहले ही उपलब्ध शिक्षक संख्या घट जाती है। ऐसे में यदि बचे हुए शिक्षक को भी आश्रम अधीक्षक का अतिरिक्त दायित्व दे दिया जाए, तो स्कूल में बच्चों की नियमित पढ़ाई किस तरह संचालित होगी, यह बड़ा सवाल है।

    दंतेवाड़ा जिले में कई शिक्षक अवकाश पर रहने के कारण स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी बनी रहती है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालय में यदि एक शिक्षक अवकाश पर है और दूसरे शिक्षक को आश्रम अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है, तो संबंधित स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं बचता। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर पड़ने की आशंका है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि जब राज्य सरकार, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के अटैचमेंट और आंतरिक व्यवस्था पर रोक की बात कही गई है, तो फिर स्कूल में पदस्थ शिक्षक को वहां की शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना आश्रम अधीक्षक की जिम्मेदारी कैसे दी जा रही है?

    मामले में संबंधित शिक्षक का कहना है कि उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी और एसी विभाग की ओर से आश्रम अधीक्षक का दायित्व सौंपा गया है। शिक्षक के मुताबिक उन्होंने स्कूल में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अतिथि शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग भी अधिकारियों से की है।

    वहीं, उनका कहना है कि जिले के आश्रमों में अधीक्षक के रूप में कार्यरत कई कर्मचारी मूल रूप से शिक्षक ही हैं। यदि यह व्यवस्था व्यापक स्तर पर लागू है, तो सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि दंतेवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और बच्चों की पढ़ाई की पूरी व्यवस्था का है।

    *स्कूलों में पहले शिक्षक चाहिए या फिर शिक्षकों से दूसरे विभागीय दायित्व पूरे कराए जाएंगे?*

    *यह सवाल अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से पूछा जा रहा है।*

    आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिले में बच्चों की शिक्षा पहले से ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालित होती है। ऐसे में स्कूलों में उपलब्ध शिक्षकों को दूसरे दायित्वों में लगाने से पहले वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था करना जरूरी है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

    अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और राज्य सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और शिक्षकविहीन हो रहे स्कूलों में तत्काल शिक्षकों की व्यवस्था कब तक की जाती हैं

    *आश्रम अधीक्षक का पक्ष*

    संबंधित आश्रम अधीक्षक/शिक्षक का कहना है कि उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी एवं एसी विभाग द्वारा आश्रम अधीक्षक का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने स्कूल की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विभागीय अधिकारियों से अतिथि शिक्षक की मांग की है। उनका कहना है कि जिले के कई आश्रमों में अधीक्षक की जिम्मेदारी शिक्षकों के पास ही है।

    मुख्य सवाल: जब स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही उपलब्ध नहीं है, तो क्या वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था किए बिना शिक्षक को आश्रम अधीक्षक की जिम्मेदारी देना उचित है?

    मृणेन्द्र चौबे ( राजनांदगांव )

    राजनांदगांव/ शौर्यपथ / चिखली-शांतिनगर क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर शुक्रवार को लोगों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक खैरागढ़ रोड पर एकत्र हुए और चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की और क्षेत्र के तीन पार्षदों के पुतले फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद रहा। प्रदर्शन में शामिल नागरिकों ने क्षेत्र में बढ़ती नशे की गतिविधियों को लेकर गंभीर नाराजगी जताई। लोगों का आरोप है कि मोहल्ले के कई हिस्सों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों का जमावड़ा रहता है। शराबखोरी के साथ कुछ स्थानों पर गांजा और शराब की बिक्री की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नागरिकों का कहना था कि सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की गतिविधियों से महिलाओं, बच्चों और परिवारों को परेशानी होती है तथा क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है।

    0 पार्षदों पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप

    लोगों ने स्थानीय पार्षदों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत और ध्यानाकर्षण कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप था कि पार्षदों को नियमित रूप से क्षेत्र में पहुंचकर समस्याओं का जायजा लेना चाहिए, लेकिन जनसमस्याओं को लेकर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।

    0 सड़क के गड्ढों से हादसों का खतरा

    प्रदर्शन के दौरान सड़कों की खराब स्थिति भी प्रमुख मुद्दा रही। नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में जगह-जगह सड़क पर गड्ढे बने हुए हैं। इन गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना था कि कई बार हादसे की स्थिति बन चुकी है, इसके बावजूद गड्ढों की मरम्मत को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

    0 अंडरब्रिज का काम अधूरा, स्मार्ट मीटर पर भी नाराजगी

    क्षेत्र में अंडरब्रिज का काम अधूरा रहने को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना था कि अधूरे काम के कारण आवागमन में परेशानी हो रही है और इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर लगाए जाने और मीटर रीडिंग को लेकर उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों का मुद्दा भी प्रदर्शन के दौरान उठाया गया। लोगों ने संबंधित विभाग से मीटर और रीडिंग से जुड़ी शिकायतों का समाधान करने की मांग की।

    0 काम नहीं करवा सकते तो इस्तीफा दें

    प्रदर्शन के दौरान नागरिकों ने कहा कि पार्षद जनता के प्रतिनिधि हैं और क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनका समाधान करवाना उनकी जिम्मेदारी है। आक्रोशित लोगों ने कहा कि यदि पार्षद जनता के काम नहीं करवा सकते और क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे सकते तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

    चक्काजाम के दौरान पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। प्रदर्शनकारियों ने नशे की गतिविधियों पर कार्रवाई, सड़क के गड्ढों की मरम्मत, अंडरब्रिज का काम पूरा कराने और स्मार्ट मीटर संबंधी समस्याओं के निराकरण की मांग की। नागरिकों ने कहा कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।

    फ्लाईदुबई FZ1073 में सह-पायलट के कथित हमले से मचा हड़कंप, विमान हजारों फीट नीचे आया; गंभीर रूप से घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर बचाई विमान में सवार लोगों…

    जनसंपर्क विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; 1 अक्टूबर को टिकरिया ने संभाला पदभार, अधिकारियों-कर्मचारियों ने किया आत्मीय स्वागत

    रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने जनसंपर्क विभाग के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए आईएएस अधिकारी आशीष कुमार टिकरिया को जनसंपर्क संचालक की जिम्मेदारी सौंपी है। शासन के प्रशासनिक फेरबदल के बाद श्री टिकरिया ने 1 अक्टूबर 2026 को जनसंपर्क संचालनालय पहुंचकर विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। पदभार ग्रहण के अवसर पर विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।

    रजत बंसल को जनसंपर्क आयुक्त और ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ के CEO की जिम्मेदारी

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत आईएएस अधिकारी रजत बंसल को जनसंपर्क आयुक्त के साथ ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पास मुख्यमंत्री सचिवालय और खनिज साधन विभाग से जुड़े दायित्व भी हैं।

    जनसंपर्क आयुक्त के रूप में रजत बंसल के सामने शासन की नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने तथा मीडिया समन्वय को मजबूत करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहेगी।

    वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के MD भी हैं आशीष टिकरिया

    आशीष कुमार टिकरिया वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक (MD) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें उनके मौजूदा दायित्वों के साथ जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसी प्रशासनिक आदेश के तहत उन्हें जनसंपर्क विभाग की नई जिम्मेदारी मिली है।

    1 अक्टूबर को पदभार ग्रहण करने के बाद विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनसे मुलाकात कर नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।

    सरकार और जनता के बीच संवाद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    जनसंपर्क संचालनालय राज्य शासन और आम जनता के बीच सूचना एवं संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। शासन की योजनाओं, नीतियों, कार्यक्रमों और विकास कार्यों की जानकारी को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के माध्यम से आम नागरिकों तक पहुंचाने में विभाग की प्रमुख भूमिका रहती है।

    डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में जनसंपर्क विभाग की भूमिका और व्यापक हुई है। ऐसे में संचालक के रूप में आशीष टिकरिया के सामने सरकारी सूचनाओं के त्वरित प्रसार, मीडिया समन्वय तथा शासन की योजनाओं की तथ्यात्मक जानकारी आम जनता तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

    नई जिम्मेदारी के साथ नई अपेक्षाएं

    आशीष टिकरिया के पदभार ग्रहण के साथ जनसंपर्क संचालनालय में उनकी नई प्रशासनिक जिम्मेदारी औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। वहीं, जनसंपर्क आयुक्त के रूप में रजत बंसल के साथ विभागीय स्तर पर जिम्मेदारियों का नया प्रशासनिक स्वरूप सामने आया है।

    अब विभाग की कार्यप्रणाली, मीडिया समन्वय, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार तथा शासन-जनता के बीच सूचना के प्रभावी आदान-प्रदान को लेकर दोनों अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

    ‘प्रोजेक्ट सियान आशीष सेवा’ और ‘प्रोजेक्ट सियान श्रम सम्मान’ का हुआ शुभारम्भ

    सियान सेवा महाकुंभ में 80 वर्ष से अधिक आयु के 1810 वरिष्ठजनों को देशभर में यात्रा के लिए निशुल्क बस पास

    समाज कल्याण की योजनाओं से प्रदेश के 15.90 लाख वरिष्ठजन लाभान्वित; मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से 2.55 लाख ने की आध्यात्मिक यात्रा

    रायपुर, 6/ अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत समाज कल्याण विभाग द्वारा रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में सियान सेवा महाकुंभ आयोजित किया गया। समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने वरिष्ठजनों को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनसे संवाद किया। कार्यक्रम में 4 हजार से अधिक वरिष्ठजन लाभान्वित हुए।

    महाकुंभ में नई सियान आशीष सेवा योजना के अंतर्गत 80 वर्ष से अधिक आयु के 1810 वरिष्ठ नागरिकों को सम्पूर्ण भारत में निशुल्क यात्रा के लिए बस पास प्रदान किए गए। इसके साथ ही आवश्यकता के अनुसार 2 हजार छड़ियां, एक हजार श्रवण यंत्र और 20 ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। बस पास से वरिष्ठजनों को यात्रा में सुविधा मिलेगी, जबकि सहायक उपकरण उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों को सुगम बनाएंगे।

    मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि वरिष्ठजन हमारी सांस्कृतिक विरासत और जीवन अनुभव के संवाहक हैं। उन्होंने अपने परिश्रम से परिवार और समाज को मजबूत आधार दिया है। उनका सम्मान करने के साथ उनके अनुभव को समाज के विकास में भी स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “वरिष्ठजन केवल कल की विरासत नहीं हैं, बल्कि आज के विकास के सहभागी हैं।” विकसित भारत के संकल्प और नवा अंजोर-अंजोर 2047 की सोच में वरिष्ठजनों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।

    श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का वृद्धजन कल्याण का संकल्प पेंशन तक सीमित नहीं है। वरिष्ठजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा, देखभाल, आवागमन, सामाजिक सहभागिता और गरिमापूर्ण जीवन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए 400 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लिए 450 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से वर्तमान में प्रदेश के 15,90,080 वरिष्ठजन लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर पात्र हितग्राही तक सहायता समय पर, पारदर्शिता के साथ और सम्मानपूर्वक पहुंचे।

    मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 2 लाख 55 हजार 845 वरिष्ठजनों को आध्यात्मिक यात्रा का लाभ मिला है। तीर्थयात्रा कई वरिष्ठजनों की जीवनभर की इच्छा होती है और यह योजना उन्हें उस इच्छा को पूरा करने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि सियान आशीष सेवा योजना के बस पास भी वरिष्ठजनों की यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने सियान हेल्पलाइन 155326 की जानकारी देते हुए कहा कि आवश्यकता के समय वरिष्ठजनों को सहायता और भरोसा मिलना चाहिए। उन्होंने वृद्धाश्रमों, अटल वयो अभ्युदय योजना, प्रशामक देखरेख गृह और सियान गुड़ी जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग का प्रयास वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आत्मीय और सम्मानपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है। उनका ध्यान ऐसे समाज के निर्माण पर है, जहां वरिष्ठजन स्वस्थ और सक्रिय रहें तथा परिवार और समुदाय से जुड़े रहें।

    उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि वरिष्ठजनों के जीवन में आई सुविधा और उनके चेहरे की मुस्कान से आंकी जानी चाहिए। उन्होंने सभी से सुरक्षा, सहभागिता और गरिमा के तीन संकल्प लेने का आह्वान किया। श्रीमती राजवाड़े ने कहा, “आपका अनुभव हमारी शक्ति है, आपकी गरिमा हमारी जिम्मेदारी है और आपकी सहभागिता विकसित छत्तीसगढ़ की पहचान है।”

    रायपुर जिला प्रशासन की विशेष पहल

    अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर रायपुर जिला प्रशासन ने ‘प्रोजेक्ट सियान आशीष सेवा’ और ‘प्रोजेक्ट सियान श्रम सम्मान’ की शुरुआत की। प्रोजेक्ट सियान आशीष सेवा के तहत जिले के 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठजनों को देशभर में यात्रा के लिए निःशुल्क बस पास उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
    प्रोजेक्ट सियान श्रम सम्मान के अंतर्गत श्रम विभाग में लंबे समय से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को संबंधित योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत 60 वरिष्ठ श्रमिकों को लाभ प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई। पात्र निर्माण श्रमिकों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक पेंशन सहायता योजना के अंतर्गत 1500 रुपये मासिक पेंशन तथा तीन वर्ष से पंजीकृत 59 से 60 वर्ष आयु के श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के अंतर्गत 20 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रावधान है। रायपुर जिले की इस पहल का उद्देश्य पात्र वरिष्ठ श्रमिकों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

    कार्यक्रम में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री गौरीशंकर श्रीवास तथा विधायक श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री मोतीलाल साहू उपस्थित रहे। समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, रायपुर कलेक्टर श्री गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, संचालक श्री गजेंद्र सिंह ठाकुर सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में वरिष्ठजन भी मौजूद थे।

    संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग, साइट म्यूजियम सहित विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं

    ऐतिहासिक स्वरूप और मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए विरासत पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ प्रदेश में विरासत पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के मध्य बुधवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) सम्पन्न हुआ। इस समझौते के माध्यम से प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं एवं अधोसंरचना का सुनियोजित विकास किया जाएगा।

    समझौते के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के परामर्श से संरक्षणाधीन स्मारकों एवं पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं के समुचित विकास की योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं के माध्यम से पुरातात्विक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ पर्यटन अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जाएगा।

    पर्यटकों के लिए विकसित की जाने वाली सुविधाओं में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग और क्लॉक रूम जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज भी शामिल होंगे। विशेष रूप से समावेशी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा लैंडस्केपिंग सहित पर्यटकों की आवश्यकता के अनुरूप अन्य अधोसंरचनाओं का भी विकास किया जा सकेगा।

    पुरातात्विक धरोहरों की मौलिकता रहेगी सर्वोपरि

    विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्मारकों की मौलिकता और उनके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्तावित विकास कार्यों की डिजाइन, निर्माण सामग्री एवं संरचना इस प्रकार निर्धारित की जाएगी कि संबंधित स्मारक को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे। सभी कार्य पुरातत्त्वीय अधिनियमों और नियमों के अनुरूप किए जाएंगे। परियोजनाओं का क्रियान्वयन भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किया जाएगा।

    केंद्र, राज्य, सीएसआर और पीपीपी से जुटाए जा सकेंगे संसाधन

    पुरातात्विक स्थलों पर प्रस्तावित पर्यटक सुविधाओं एवं अधोसंरचना विकास के लिए संसाधन जुटाने की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ राज्य शासन की एजेंसियों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से संसाधन जुटाए जा सकेंगे। विकसित सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन अथवा शासन द्वारा अधिकृत एजेंसी की होगी।

    योजना एवं क्रियान्वयन समिति करेगी निगरानी

    विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने और उनके क्रियान्वयन की सतत निगरानी के लिए “योजना एवं क्रियान्वयन समिति” का गठन किया जाएगा। यह समिति परियोजनाओं की योजना तैयार करने से लेकर विकास एवं प्रबंधन तक विभिन्न चरणों की निगरानी करेगी। इससे संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

    विरासत पर्यटन को मिलेगी नई दिशा

    यह समझौता ज्ञापन प्रदेश की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के साथ पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और विरासत पर्यटन के समन्वित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे पुरातात्विक महत्व के स्थलों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और प्रदेश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने में सहायता मिलेगी।

    एमओयू के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, भारत सरकार के महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में मध्य क्षेत्र के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज तथा रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु उपस्थित रहे। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की ओर से संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।

    ​रायपुर, /
    मानसून के अंतिम दौर में भारी बारिश के बाद जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए धमतरी जिले में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और गुणवत्ता की निगरानी के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। 'स्रोत से घर तक सुरक्षित पानी और हर बूंद में भरोसा' के संकल्प के साथ जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) जल जीवन मिशन के तहत पानी की शुद्धता, क्लोरीनेशन और टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित कर रहे हैं।
    ​कलेक्टर के निर्देशानुसार संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के बाद जलभराव के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए व ई की रोकथाम करना है।

    ​ग्रामीण जल सुरक्षा का मजबूत ढांचा

    धमतरी जिले में सुरक्षित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशाल और सुदृढ़ अधोसंरचना निरंतर कार्यरत है। जिले में पेयजल के लिए कुल 16,024 स्रोत उपलब्ध हैं, जिनमें 9,981 हैंडपंप, 718 नल-जल योजनाएं और 2 वृहद समूह जल प्रदाय योजनाएं शामिल हैं, जो दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक पानी पहुंचा रही हैं। पानी के सुरक्षित भंडारण के लिए जिले भर में 548 जल टंकियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही, जलापूर्ति को पूरी तरह कीटाणुरहित और सुरक्षित बनाने के लिए 529 आधुनिक क्लोरिनेटर मशीनें स्थापित की गई हैं, जो नमक और पानी के घोल से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा सक्रिय क्लोरीन तैयार कर पानी को सूक्ष्मजीवों और हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त रखती हैं।

    ​3,110 'जल बहिनियां' बनीं गांव-गांव की पहरेदार

    ​पेयजल की गुणवत्ता जांच में जनभागीदारी का अनूठा मॉडल प्रस्तुत करते हुए जिले के 623 गांवों में फील्ड टेस्ट किट (FTK) वितरित की गई है। प्रत्येक गांव से 5-5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रकार 3,110 प्रशिक्षित 'जल बहिनियां' प्राथमिक स्तर पर पानी की नियमित जांच कर रही हैं। यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो विभागीय अमला तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करता है।

    ​हर सप्ताह 120 घरों और 15 टंकियों के पानी का लैब टेस्ट

    ​जांच व्यवस्था को केवल जलस्रोत तक सीमित न रखते हुए उपभोक्ता के घर तक विस्तारित किया गया है। जिले के चारों विकासखंडों—कुरूद, मगरलोड, धमतरी और नगरी से हर सप्ताह 30-30 यानी कुल 120 घरेलू जल नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कराया जा रहा है। इसके अलावा हर हफ्ते 15 जल टंकियों की भी विशेष निगरानी की जा रही है।
    ​ ​जिला प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने नागरिकों से पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है। पानी के रंग, गंध या स्वाद में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखने पर तुरंत ग्राम पंचायत या PHE विभाग को सूचित करने का आग्रह किया गया है, ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके।

    मरकाटोला घाट सड़क हादसे के घायलों और परिजनों से की मुलाकात, बेहतर उपचार के दिए निर्देश

    चार घायल स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज

    रायपुर / नेशनल हाईवे-30 स्थित मरकाटोला घाट पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में घायल कवर्धा के लोगों से मिलने उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचे। उन्होंने घायलों का कुशलक्षेम जाना और उनके परिजनों से मुलाकात कर उपचार की स्थिति की जानकारी ली।

    उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने घायल रोमन सोरा से मुलाकात कर उनसे स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने परिजनों से भी उपचार और अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में चर्चा की। परिजनों ने उपचार व्यवस्था पर संतुष्टि व्यक्त की।

    श्री शर्मा ने विशेषज्ञ चिकित्सकों से घायल के स्वास्थ्य और आगे के उपचार की जानकारी ली। चिकित्सकों ने बताया कि घायल के पैरों का ऑपरेशन किया जाना है। शारीरिक स्थिति सामान्य होने के बाद आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पर उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों एवं संबंधित अधिकारियों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर अस्पताल सुपरिटेंडेंट डॉ संतोष सोनकर, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सुंदरानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

    उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा हादसे के बाद से लगातार सभी घायलों के उपचार की जानकारी ले रहे हैं। एक घायल को उच्च स्तरीय उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निःशुल्क उपचार सुनिश्चित कराया जा रहा है। घायलों के परिजनों के ठहरने के लिए सेवा सदन में निःशुल्क व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई थी।

    उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में भर्ती सभी घायलों को समुचित एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। इस बीच स्वास्थ्य में सुधार के बाद चार घायलों अरमान कोसले, गणेश पात्रे, प्रदीप साहू और दीप चन्द्र को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

     

    ​रायपुर /
    गांवों की अर्थव्यवस्था केवल खेतों में पैदा होने वाली फसलों से नहीं, बल्कि किसानों के सामूहिक निर्णयों, बाजार की समझ और अपने उत्पादों का सही मूल्य हासिल करने की क्षमता से मजबूत होती है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) की पाँच वर्षों की यात्रा ग्रामीण उद्यमिता और महिला नेतृत्व की एक ऐतिहासिक मिसाल बनकर उभरी है। यहाँ किसानों और महिला कृषकों ने मिलकर न केवल एक व्यावसायिक मंच खड़ा किया है, बल्कि ‘किसान-स्वामित्व वाले व्यवसाय’ की एक नई राह तैयार की है।

    ​550 शेयरधारकों की उपस्थिति से गूंजा सामूहिकता का संकल्प

    ​'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत नगरी विकासखंड में आयोजित एफपीसी की वार्षिक आमसभा में करीब 550 महिला एवं पुरुष शेयरधारक शामिल हुए। नगरी के सभी पांच क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) से पहुंचे सदस्यों ने कंपनी की 5 वर्षों की प्रगति, वित्तीय लेखा-जोखा, लाभांश और आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

    ​चुनौतियों से शुरू हुआ विश्वास का सफर

    ​शुरुआती दौर में छोटे-सीमांत किसानों, विशेषकर महिलाओं को एक मंच पर लाना और उनमें संस्थागत स्वामित्व की भावना जगाना एक बड़ी चुनौती थी। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (BoDs) के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि निरंतर संवाद और पारदर्शी कार्यशैली से धीरे-धीरे यह संशय विश्वास में बदल गया। आज महिला किसान केवल योजना की लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया और सामूहिक व्यवसाय की सक्रिय संचालक हैं।

    ​खेत से बाजार तक सामूहिक पहुँच और ब्रांडिंग

    ​किसानों को केवल कच्चे माल का उत्पादक बनाए रखने के बजाय उन्हें प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ने पर बल दिया जा रहा है। गट्टासिल्ली एफपीसी द्वारा स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।गट्टासिल्ली एफपीसी बिचौलियों के जाल को तोड़कर किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत सुगंधित धान और प्रसिद्ध नगरी दुबराज का संगठित विपणन सुनिश्चित किया जा रहा है, वहीं लघु वनोपज (NTFP) समेत अन्य कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए नए और आकर्षक बाजार अवसरों की खोज की जा रही है, ताकि किसानों को उनके पसीने की सही कीमत मिल सके।
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    ​महिला नेतृत्व ने संभाली कमान

    ​स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ से जुड़ी महिलाओं की सक्रियता ने इस मॉडल को एक नई दिशा दी है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ग्रामीण महिलाओं की सशक्त मौजूदगी यह संदेश देती है कि वे केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यावसायिक निर्णय लेने और उद्यमिता में भी अग्रणी हैं। इससे न केवल पारिवारिक आय बढ़ी है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महिलाओं का मान-सम्मान बढ़ा है।

    ​कृषि, संस्कृति और सामुदायिक चेतना का संगम

    ​वार्षिक आमसभा में न केवल व्यापारिक आंकड़ों पर बात हुई, बल्कि नगरी की समृद्ध कृषि-संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। स्थानीय सीएलएफ की महिलाओं और बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसमें “छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा क्यों कहा जाता है” और ‘पुनर्योजी कृषि पद्धतियों’ के महत्व को कलात्मक ढंग से पेश किया गया।
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    डिजिटल विपणन और ब्रांडिंग

    ​पांच वर्षों का यह सफल सफर गट्टासिल्ली एफपीसी के लिए आगे कई नए रास्ते खोलता है। आने वाले समय में संस्था का ध्यान उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, ब्रांडिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग और व्यापक बाजार नेटवर्क स्थापित करने पर होगा।
    ​ सामूहिकता से स्वामित्व, स्वामित्व से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता—गट्टासिल्ली FPC की यह कहानी साबित करती है कि जब विकास की बागडोर जनता के हाथों में होती है, तो बदलाव स्थायी और प्रेरणादायी होता है।

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