
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
धान खरीदी, जल प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों की समीक्षा; 30 सितंबर तक रिक्त पदों की जानकारी देने के निर्देश
रायपुर / शौर्यपथ / मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य शासन के विभागीय सचिवों की बैठक हुई। इसमें विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में धान खरीफ विपणन वर्ष की तैयारियों, पेयजल योजनाओं और शहरी एवं औद्योगिक क्षेत्रों में जल प्रबंधन एवं उपचार की समीक्षा की गई। नगरीय विकास विभाग को सिटी वाटर प्लान विकसित भारत-2047 के अनुरूप तैयार करने, परिवहन विभाग को ई-व्हीकल को बढ़ावा देने और खाद्य विभाग को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए गए। 15 से 22 अक्टूबर की अवधि में ग्राम सभाओं के आयोजन की तैयारियां भी समय पर पूरी करने कहा गया।
जिलों की निगरानी के लिए स्कोर कार्ड
मुख्य सचिव ने योजनाओं की कलेक्टर स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए जिला स्कोर कार्ड को अंतिम रूप देने को कहा। कोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी बनाने और पारस पोर्टल से जुड़े अक्टूबर माह के प्रस्तावों पर आईटी विभाग के साथ समन्वय के निर्देश दिए गए।
शासन के सभी विधिक नियमों और निर्देशों की संदर्भ प्रतियां ई-गजट पर अपलोड करने, लंबित पेंशन प्रकरणों की विभागवार निगरानी तथा उनके निराकरण की समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। एपीएआर को आईगॉट से लिंक करने और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
30 सितंबर तक देनी होगी रिक्त पदों की जानकारी
कर्मचारी चयन मंडल के लिए विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की जानकारी 30 सितंबर तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में लोक सेवा गारंटी अधिनियम, रिफॉर्म उत्सव, 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं और सेवा सेतु की प्रगति की भी समीक्षा हुई। बताया गया कि 38 विभागों की 907 सेवाएं वर्तमान में सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
फायर सेफ्टी अधिनियम में आवश्यक सुधार, माय भारत पोर्टल की गतिविधियों में तेजी तथा विभागीय क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स करेगी समेकित रिपोर्टिंग
गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत ने बताया कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स विभिन्न विभागों से सूचनाएं एकत्र कर उनकी समेकित रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे भारत सरकार को भेजा जाएगा।
बैठक में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, ऋचा शर्मा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने अंत में सभी विभागों को स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर निगरानी और लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर महानदी के बढ़ते जलस्तर और जांजगीर-चांपा जिले के तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल, तटीय क्षेत्रों और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर राहत-बचाव तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों को जलस्तर और बहाव की सतत निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर-एसपी ने श्री महंत लालदास महाविद्यालय में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। यहां प्रभावित नागरिकों के ठहरने के साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
पुल पर आवागमन बंद, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी
महानदी पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन बंद कर दिया गया है। पुल एवं आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को तेज बहाव के पास जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य टीमें तैनात
प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आवश्यक दवाइयों के साथ जलभराव से संभावित बीमारियों और संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी उपाय किए जा रहे हैं।
कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए मानव संसाधन और अन्य जरूरी संसाधन तैयार रखे गए हैं।
मुनादी कर लोगों को किया जा रहा सतर्क
संवेदनशील और तटीय क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से लोगों को संभावित जलभराव और सुरक्षा सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। नदी, पुल, घाट और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने तथा सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम नहीं उठाने की अपील की गई है। प्रशासन द्वारा बंद किए गए मार्गों पर जाने से भी बचने कहा गया है।
जिला प्रशासन महानदी के जलस्तर और तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। पुलिस, राजस्व, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें राहत-बचाव के लिए मुस्तैद हैं।
निरीक्षण के दौरान नगर पालिका शिवरीनारायण अध्यक्ष राहुल थवाईत, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, एसडीएम शिवरीनारायण भावना साहू, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजन; देश-विदेश के टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन कारोबारियों ने लिया हिस्सा, उत्कृष्ट हितधारकों का सम्मान
रायपुर / विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट छत्तीसगढ़ मार्केट प्लेस-2026’ का आयोजन नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक व्यू रिसॉर्ट में किया गया। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना, पर्यटन कारोबार बढ़ाना और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के लिए विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाना था। देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशी टूर एजेंसियों के प्रतिनिधि, टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स, होटलियर्स और होम-स्टे संचालक शामिल हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और अध्यक्षता छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने की। पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन अध्यक्ष जसप्रीत भाटिया सहित पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन केवल भ्रमण नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, विरासत और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। छत्तीसगढ़ में बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता, चित्रकोट-तीरथगढ़ जलप्रपात, सिरपुर, राजिम, भोरमदेव और बारनवापारा जैसे विविध पर्यटन संसाधन हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। पर्यटन विकास के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार, महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण तथा ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना भी लक्ष्य है। उन्होंने रायपुर की फिल्म सिटी, भोरमदेव कॉरिडोर और जशपुर के मयाली क्षेत्र की पर्यटन परियोजनाओं का उल्लेख किया।
400 से अधिक ट्रैवल एजेंसियां जुड़ीं
पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य पर्यटन कारोबारियों के बीच व्यावसायिक संबंध मजबूत करना और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है। बीटूबी बैठकों के माध्यम से नए टूर पैकेज और व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने के अवसर मिले हैं। उन्होंने ट्रैवल एजेंट्स से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को अपने पैकेज में शामिल करने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि दिल्ली, भुवनेश्वर, पुणे और चेन्नई सहित प्रमुख शहरों में रोड शो और राष्ट्रीय पर्यटन आयोजनों में सहभागिता के परिणामस्वरूप 400 से अधिक ट्रैवल एजेंसियां छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल से जुड़ी हैं।
डिजिटल तकनीक और AI से पर्यटन को नई दिशा
पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग पर्यटन सूचना, प्रचार-प्रसार, कंटेंट निर्माण और पर्यटक अनुभव बेहतर करने में प्रभावी हो सकता है। उन्होंने चित्रकोट, तीरथगढ़, कुटुमसर-कैलाश-दंडक गुफाओं, मैनपाट, जशपुर, बस्तर दशहरा, सिरपुर, भोरमदेव, ढोलकल गणेश, नारायणपाल और मल्हार सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों की संभावनाएं बताईं।
उन्होंने बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद आधारभूत सुविधाएं मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। 82 होम-स्टे लाभार्थियों के 280 से अधिक कमरों की पहचान, वेबसाइट एवं मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल रिजर्वेशन और निवेशक बैठकों के माध्यम से बाजार पहुंच बढ़ाने का काम किया जा रहा है। सिरपुर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान और शक्तिपीठ कॉरिडोर सहित विभिन्न परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी
पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने कहा कि पर्यटन को रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाते हुए स्थानीय समुदायों को इससे जोड़ना जरूरी है। उन्होंने पर्यटन स्थलों को बेहतर पर्यटन उत्पाद और पैकेज में बदलने तथा डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार पर जोर दिया।
ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन अध्यक्ष जसप्रीत भाटिया ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिली है। शासन, पर्यटन विभाग और सभी हितधारकों को मिलकर समयबद्ध और बेहतर क्रियान्वयन के साथ आगे बढ़ना होगा।
पर्यटन क्षेत्र के उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान
आयोजन में टूर ऑपरेटर्स, होटलियर्स और पर्यटन संस्थाओं के प्रमोशनल स्टॉल लगाए गए। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और धमतरी जिला प्रशासन ने भी पर्यटन स्थलों के प्रचार के लिए स्टॉल लगाए। बीटूबी बैठक में पर्यटन पैकेज, व्यावसायिक साझेदारी और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को छत्तीसगढ़ लाने पर चर्चा हुई।
पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार भी दिए गए। बेस्ट टूरिज्म डिस्ट्रिक्ट प्रमोशन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बेस्ट इको टूरिज्म साइट तक्षक भोरमदेव, बेस्ट होटल एम्बिशन जगदलपुर, बेस्ट टूर ऑपरेटर डी. रमेश कैंप वन्स, बेस्ट टूरिज्म स्टार्टअप हेरिटेज वाला के शिवम त्रिवेदी, बेस्ट एडवेंचर टूर ऑपरेटर ट्रिपी हिल्स जशपुर के सौरभ सिंह और बेस्ट होम-स्टे धुरवा डेरा के मानसिंह को मिला।
इसके अलावा बेस्ट इन्फ्लुएंसर अनुपम सिन्हा, बेस्ट टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर/स्टार परफॉर्मर CTB डोंगरगढ़ के श्रीनिवास राव एवं टीम तथा बेस्ट स्टार परफॉर्मर रिसॉर्ट CTB इको हरेली रिसॉर्ट, बारनवापारा के सुभाष ठाकुर एवं टीम को सम्मानित किया गया। पुरस्कार के साथ ₹11,000 का चेक, मोमेंटो और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के पुरातात्विक स्थलों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ नेक्स्ट यूथ कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की युवा प्रतिभाओं का किया सम्मान
युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और रचनात्मकता से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री
रायपुर, 27 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में आज की जनधारा मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘छत्तीसगढ़ नेक्स्ट यूथ कॉन्क्लेव’ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर प्रदेश का नाम रोशन करने वाली युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया। उन्होंने आज की जनधारा की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित ‘आज की जनधारा साहित्यिक वार्षिकी-2026’ का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का युवा प्रतिभाशाली, परिश्रमी और संभावनाओं से भरपूर है। युवाओं की नई सोच, ऊर्जा और रचनात्मकता प्रदेश के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को अपनी बात सीधी, सच्ची और साहस के साथ रखनी चाहिए तथा अपने विचारों और कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ युवाओं के सामने अवसरों का नया संसार खुला है। आवश्यकता इस बात की है कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े लक्ष्य तय करें और पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्हें हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और नए विचारों को साकार करने के लिए व्यापक अवसर मिल रहे हैं। आज भारत का युवा नवाचार, स्टार्टअप, विज्ञान, तकनीक, खेल, कला-संस्कृति सहित हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। छत्तीसगढ़ के युवाओं में भी अपार सामर्थ्य है और वे अपनी प्रतिभा तथा परिश्रम से विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे प्रेरणादायी प्रयासों को सामने लाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का सशक्त माध्यम बना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पोषण और जनभागीदारी के संदेश का उल्लेख करते हुए ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान की चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषण का सहज और स्थानीय स्रोत है। इसे जनभागीदारी से घर-घर तक पहुंचाकर स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत किया जा सकता है।
प्रकृति और संस्कृति छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश प्रकृति की अनुपम देन से समृद्ध है। यहां के वन, पहाड़, जलप्रपात, गांवों का सहज जीवन और विविध लोक परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान देती हैं। उन्होंने मधेश्वर पहाड़ और वहां की शिवलिंग सदृश प्राकृतिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में अनेक ऐसे स्थल हैं, जिनमें पर्यटन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली आत्मा यहां के गांवों, लोकजीवन और संस्कृति में बसती है। सादरी सहित प्रदेश की विभिन्न बोलियां, लोककला, लोकगीत और नागपुरी संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं। नई पीढ़ी को आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी जड़ों, भाषा-बोली और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहना चाहिए।
संघर्ष से ही मिलता है आगे बढ़ने का संबल
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन के अनुभव युवाओं के साथ साझा करते हुए कहा कि कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था और परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी करते हुए परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और अपने छोटे भाइयों की शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया। जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें संघर्ष करना और जिम्मेदारियों से पीछे न हटना सिखाया।
उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं, लेकिन कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। परिश्रम, धैर्य और संकल्प के साथ किया गया प्रयास व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलता है।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार श्री पीयूष मिश्रा ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला एवं संस्कृति की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण स्वर्गीय श्रीमती तीजन बाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से महाभारत के विभिन्न पात्रों को मंच पर जीवंत किया और पंडवानी को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। श्री मिश्रा ने कार्यक्रम में अपने प्रसिद्ध गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ की प्रस्तुति भी दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कॉन्क्लेव में सम्मानित युवा प्रतिभाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं के विचारों, उपलब्धियों और प्रतिभा को समाज के सामने लाने के साथ उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री कृष्णा दास,मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, आज की जनधारा के प्रधान संपादक श्री सुभाष मिश्रा उपस्थित सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
नई दिल्ली / एजेंसी (PIB)/ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘प्रहार-CT (आतंकवाद-रोधी) नीति और रणनीति’ सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ अगले 10 वर्षों के लिए मजबूत और प्रभावी तंत्र विकसित करने, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा आतंकवाद-रोधी कार्रवाई को थाना स्तर तक मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में ‘प्रहार’ रणनीति के सात प्रमुख स्तंभों—रोकथाम, प्रतिक्रिया, आंतरिक क्षमताओं का एकीकरण, मानवाधिकारों का संरक्षण, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों में कमी, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय तथा Whole-of-Society दृष्टिकोण के साथ रिकवरी और लचीलापन—पर विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, CAPFs और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक तथा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ATS प्रमुख सम्मेलन में शामिल हुए।
थाना स्तर तक पहुंचे ‘प्रहार’ की रणनीति
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। उन्होंने आतंकवादी घटनाओं का लगातार विश्लेषण कर अगले दशक के लिए मजबूत ‘प्रहार’ तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद-रोधी उपायों को थाना स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और प्रहार के प्रत्येक बिंदु पर सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने हर स्तर पर आतंकवाद-रोधी स्वचालित प्रतिक्रिया प्रणाली को संस्थागत बनाने तथा कार्रवाई में देरी रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
36 देशों से 288 भगोड़ों की वापसी का दावा
अमित शाह ने कहा कि सरकार के अनुसार 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। उन्होंने एजेंसियों के बेहतर समन्वय से सीमापार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े शहज़ाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल ध्वस्त किए जाने, 15 राज्यों में 100 से अधिक FIR दर्ज होने और 350 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है।
नया प्रत्यर्पण पोर्टल लॉन्च
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने नया प्रत्यर्पण पोर्टल भी लॉन्च किया। इसके माध्यम से विदेशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर और कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने राज्य पुलिस बलों से केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर विदेश से भगोड़ों को वापस लाने के लिए विशेष टीम गठित करने का भी आग्रह किया।
सम्मेलन में आतंकवाद के बदलते स्वरूप के अनुरूप रणनीति को लगातार अपडेट करने, त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करने और केंद्र व राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / एशियाई खेल 2026 में भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनके शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए भविष्य की सफलताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ईशा सिंह ने बेहतरीन स्कोर के साथ प्रतियोगिता में सटीकता और आत्मसंयम का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईशा आने वाले समय में भी देश के लिए कई और सफलताएं हासिल करेंगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा, “एशियाई खेल 2026 में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल की व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर ईशा सिंह को बधाई। बेहतरीन स्कोर के साथ, ईशा ने बेहद सटीकता और आत्मसंयम का प्रदर्शन किया। भविष्य में और भी सफलताएं अर्जित करने के लिए उन्हें शुभकामनाएं।”
ईशा सिंह की इस उपलब्धि ने एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाजी की मौजूदगी को एक बार फिर मजबूत किया है।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और इसके लिए इस्तेमाल किए जा रहे ECINet तकनीकी प्लेटफॉर्म को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। 2,000 से अधिक समाजसेवियों, एक्टिविस्टों, पूर्व नौकरशाहों, वकीलों और शिक्षाविदों ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को खुला पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
खुले पत्र पर समाजसेवी प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, मद्रास हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. हरिपरंथामन, अर्थशास्त्री जयती घोष और पूर्व नौकरशाह जवाहर सरकार समेत कई लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
ECINet और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर आपत्ति
हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता डेटाबेस का केंद्रीकरण किया जा रहा है और Form-6 में कथित तौर पर अनधिकृत बदलाव किए गए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि ECINet के इस्तेमाल से स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
पत्र में करीब 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका या ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये दावे पत्र भेजने वाले समूह के आरोप हैं और इनके संबंध में चुनाव आयोग का पक्ष अलग है।
SIR पर रोक और न्यायिक जांच की मांग
हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे देश में चल रही SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, मामले का स्वतः संज्ञान लेने और चुनाव आयोग के प्रशासनिक आचरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
पहले सुप्रीम कोर्ट ने SIR को माना था वैध
इस विवाद के बीच महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में SIR प्रक्रिया को संवैधानिक और वैध माना था। कोर्ट ने कहा था कि फर्जी मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करना चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है।
ECI ने सर्वसम्मति से फैसले का दावा किया
चुनाव आयोग ने उठ रहे विवादों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। साथ ही, ECINet प्लेटफॉर्म को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर आयोग ने इसकी समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा भी की है।
SIR को लेकर अब एक ओर मतदाता सूची की शुद्धता और फर्जी नामों को हटाने का संवैधानिक अधिकार महत्वपूर्ण मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर प्रक्रिया की पारदर्शिता, तकनीकी व्यवस्था और वैध मतदाताओं के अधिकारों को लेकर उठाई गई आपत्तियां भी सुप्रीम कोर्ट के संभावित विचार का विषय बन सकती हैं।
नई दिल्ली / एजेंसी / सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को महिलाओं की सुरक्षा, चुनाव चिह्न विवाद, यूपीआई भुगतान शुल्क, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल और सीबीएसई की भाषा नीति समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अलग-अलग पीठों ने संबंधित सरकारों और संस्थाओं से जवाब मांगा तथा कई मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
दिल्ली-NCR में यौन अपराधों पर स्वतः संज्ञान
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों और महिलाओं के साथ बलात्कार की हालिया मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने कानून प्रवर्तन और प्रशासन की ‘सिस्टमैटिक विफलता’ पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि ढीली पेट्रोलिंग और प्रशासनिक कमियों के कारण पार्क, बसें और मेट्रो स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहें महिलाओं के लिए जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बन सकतीं। कोर्ट ने कहा कि केवल सहानुभूति या एकजुटता पर्याप्त नहीं, बल्कि लापरवाही के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस और सरकार से तत्काल जवाब मांगा गया है।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर ECI को तीन महीने
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला करने का निर्देश दिया। आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों और मामले की जटिलता का हवाला देते हुए 5-6 महीने का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। सभी पक्षों को दलीलें और अतिरिक्त हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह दिए गए हैं। तब तक ECI का अंतरिम फ्रीज आदेश लागू रहेगा।
₹2,000 से अधिक UPI लेन-देन पर 0.4% MDR को चुनौती
15 अक्टूबर से चुनिंदा मर्चेंट P2M यूपीआई लेन-देन पर ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने फिलहाल फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार और RBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि फैसला सार्वजनिक परामर्श और पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा के बिना लिया गया।
पैकेट फूड पर वार्निंग लेबल को लेकर FSSAI से सवाल
मैगी, कुरकुरे जैसे पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा स्पष्ट रूप से दिखाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI की प्रस्तावित लंबी समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में इतना समय क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने FSSAI से ‘एडेड शुगर’ की स्पष्ट परिभाषा बताने को कहा। मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया है।
CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी में कक्षा 6 को राहत
कक्षा 9 से लागू होने वाली CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कक्षा 6 के छात्रों को भी वह छूट देने का निर्देश दिया, जो वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी जा रही है। इस मामले में केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद कोर्ट ने CBSE को निर्देश जारी किया।
गांगुली आर्बिट्रेशन मामले में ₹14.49 करोड़ का पुरस्कार बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने एक टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सौरव गांगुली के पक्ष में दिए गए ₹14.49 करोड़ के मध्यस्थता पुरस्कार को चुनौती दी गई थी।
नेताजी के अवशेष भारत लाने की याचिका पर भी सुनवाई
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेष जापान से भारत लाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। कार्यवाही के दौरान एक मध्यस्थ ने याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावों पर सवाल उठाए।
इस तरह 28 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महिला सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से लेकर चुनावी प्रक्रिया, डिजिटल भुगतान और शिक्षा नीति तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं से जवाब और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा तय की।
स्मार्ट मीटर, बढ़े बिजली बिल और पंचायत भवनों के कटे कनेक्शन पर जनपद सदस्य ढालेश साहू ने खोला मोर्चा; 30 सितंबर को अंडा चौक में प्रस्तावित कार्यक्रम
दुर्ग / शौर्यपथ। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। अघोषित बिजली कटौती, पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन काटे जाने, स्मार्ट मीटर से जुड़े बढ़े हुए बिल और ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर जनपद पंचायत दुर्ग के क्षेत्र क्रमांक-24 के सदस्य एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी ढालेश साहू ने क्षेत्रीय विधायक ललित चंद्राकर के खिलाफ विरोध का ऐलान किया है। साहू द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए आवेदन के अनुसार 30 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे अंडा चौक में विधायक का शांतिपूर्ण पुतला दहन कार्यक्रम प्रस्तावित है। हालांकि यह कार्यक्रम जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही आयोजित किए जाने की बात आवेदन में कही गई है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ललित चंद्राकर को दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य और भारतीय जनता पार्टी का विधायक दर्ज किया गया है।
मचांदूर से नगपुरा तक बिजली कटौती का मुद्दा
ढालेश साहू का आरोप है कि मचांदूर से निकुम, अंडा से उतई और कुथरेल से नगपुरा तक विभिन्न गांवों में घरेलू बिजली के साथ-साथ मोटर पंपों की बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।
साहू के मुताबिक, बिजली संकट केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। कई ग्राम पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन कथित तौर पर बकाया बिल के कारण काटे जाने से पंचायतों के शासकीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने और बढ़े हुए बिजली बिलों की वसूली को लेकर भी असंतोष की बात उन्होंने कही है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से अपेक्षित हस्तक्षेप नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध कार्यक्रम की घोषणा की है।
विधायक से मुलाकात के लिए मुख्यालय तक पहुंचने का मुद्दा भी चर्चा में
बिजली के मुद्दे के साथ-साथ दुर्ग ग्रामीण में विधायक की स्थानीय जनसुलभता और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनने लगी है। क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी ग्रामीण को विधायक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी समस्या रखना हो तो उसे दुर्ग मुख्यालय स्थित शासकीय निवास कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में विधायक का कोई स्पष्ट रूप से सक्रिय एवं नियमित स्थानीय जनसंपर्क कार्यालय नहीं होना भी सवालों के घेरे में बताया जा रहा है।
क्षेत्रीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अनेक मामलों में ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं को विधायक से सीधे संपर्क के बजाय विधायक प्रतिनिधियों अथवा कार्यालयीन स्टाफ के माध्यम से अपनी बात पहुंचानी पड़ती है। कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा विधायक के पीए से संपर्क करने पर कथित तौर पर टालमटोल वाले जवाब मिलने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
'प्रतिनिधियों के भरोसे क्षेत्रÓ का सवाल
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो दुर्ग ग्रामीण जैसा विस्तृत विधानसभा क्षेत्र लगातार जनसंपर्क और स्थानीय स्तर पर शिकायतों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा रखता है। ऐसे में स्थानीय विधायक कार्यालय की सक्रियता, नियमित जनदर्शन और आम नागरिकों की विधायक तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दे अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।
विपक्ष अथवा स्थानीय असंतुष्ट राजनीतिक समूहों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि बिजली जैसी रोजमर्रा की समस्या सीधे किसान, विद्यार्थी, घरेलू उपभोक्ता और छोटे व्यवसायी वर्ग को प्रभावित करती है। ऐसे में बिजली कटौती के साथ विधायक तक पहुंच की शिकायतें जुडऩे से विरोध का राजनीतिक स्वर और मुखर होता दिख रहा है।
30 सितंबर को अंडा चौक पर नजर
ढालेश साहू ने जिला कलेक्टर को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर, बुधवार को दोपहर 12 बजे अंडा चौक, दुर्ग ग्रामीण में कार्यक्रम प्रस्तावित है। आवेदन में प्रशासन से अनुमति देने का अनुरोध किया गया है तथा यह भी कहा गया है कि अनुमति मिलने पर ही कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं कानून-व्यवस्था संबंधी निर्देशों का पालन किया जाएगा।
अब निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय और विधायक ललित चंद्राकर की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि अनुमति मिलती है तो 30 सितंबर को अंडा चौक में होने वाला प्रस्तावित पुतला दहन दुर्ग ग्रामीण की बिजली व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधि की जवाबदेही को लेकर एक प्रमुख राजनीतिक विरोध कार्यक्रम के रूप में सामने आ सकता है।
फिलहाल मुख्य सवाल यही है—बिजली कटौती और बिलों की शिकायतों से जूझ रहे ग्रामीणों की आवाज विधायक तक सीधे पहुंचेगी या फिर यह मुद्दा विरोध-प्रदर्शन के जरिए ही आगे बढ़ेगा?
रायपुर/ कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ की स्थानीय पहल ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ में इस अभियान का उल्लेख करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़कर पोषण की दिशा में किए जा रहे प्रयास की सराहना की।
12 सितंबर से शुरू हुआ अभियान
सितंबर माह में पोषण जागरूकता को गति देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य मुनगा के पौधे घर-घर पहुंचाने के साथ परिवारों को इसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति जागरूक करना है।
मुनगा यानी सहजन छत्तीसगढ़ में आसानी से उपलब्ध स्थानीय पौधा है। इसमें विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके औषधीय गुणों के साथ यह कम देखभाल में तेजी से बढ़ने वाला पौधा भी है। राज्य में इसे स्थानीय भोजन, पोषण और हरियाली से जोड़ते हुए कुपोषण के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
महिलाओं, बच्चों और किशोरियों पर विशेष फोकस
अभियान में महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों को अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, जहां पोषण जागरूकता के साथ परिवारों को मुनगा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और घरों तक व्यापक रूप से मुनगा के पौधे वितरित किए गए हैं। प्रदेश में अब तक 10 लाख 29 हजार 831 पौधों का वितरण किया जा चुका है।
जिलों में पौधों का वितरण
बस्तर में 25,244, कांकेर 43,071, दंतेवाड़ा 7,056, नारायणपुर 21,224, बीजापुर 15,699, सुकमा 4,835, कोंडागांव 31,983, सरगुजा 43,754, कोरिया 19,022, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर 11,939, सूरजपुर 64,599, बलरामपुर 27,107 और जशपुर में 1,62,271 पौधे वितरित किए गए।
रायपुर में 23,948, महासमुंद 6,420, धमतरी 48,833, बलौदाबाजार 28,398, गरियाबंद 10,527, दुर्ग 42,474, राजनांदगांव 3,480, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 21,991, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई 39,222, कबीरधाम 75,776, बेमेतरा 19,575 और बालोद में 50,933 पौधे वितरित किए गए।
इसी तरह बिलासपुर में 14,965, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 43,007, जांजगीर-चांपा 57,653, सक्ती 6,425, कोरबा 1,01,002, रायगढ़ 41,776, सारंगढ़-बिलाईगढ़ 9,824 और मुंगेली में 6,518 पौधों का वितरण किया गया।
एक पौधा, पोषण और जनभागीदारी का संदेश
‘हर घर मुनगा’ की खासियत यह है कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध पौधे को पोषण अभियान का माध्यम बनाया गया है। घर के आंगन में लगाया गया एक मुनगा का पौधा परिवार के भोजन में पोषण बढ़ाने के साथ कुपोषण के खिलाफ जागरूकता का माध्यम भी बन सकता है।
इस पहल को केवल पौधरोपण अभियान तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके माध्यम से पौधरोपण, पोषण जागरूकता, आंगनबाड़ी सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में जिले में 96 हजार से अधिक परिवारों को मिला पक्का मकान
पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिला सुरक्षित आशियाना, आवास प्लस 2.0 से छूटे परिवारों तक भी पहुंचेगा लाभ
रायपुर / कभी बारिश में टपकती छत और कमजोर दीवारों के बीच रात गुजारने को मजबूर परिवार आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जशपुर जिले के ऐसे हजारों परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को साकार करने और जीवन में स्थायित्व लाने का माध्यम बनी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में अब तक 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 96 हजार 801 आवास पूर्ण हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक भी पक्के आवास और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री श्री साय की मंशा के अनुरूप आवास प्लस 2.0 के तहत पूर्व में छूटे परिवारों का सर्वेक्षण कर पात्रतानुसार उन्हें भी योजना से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
कच्चे मकान की चिंता खत्म, पक्की छत ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा
जशपुर जिले के अनेक परिवारों का जीवन वर्षों तक कच्चे मकानों में अभाव और कठिनाइयों के बीच बीता। कमजोर दीवारें, टूटी-फूटी छत और बरसात के दिनों में घर के भीतर टपकता पानी उनकी रोजमर्रा की परेशानी का हिस्सा था। बारिश के दौरान सामान को भीगने से बचाना और परिवार के लिए सुरक्षित जगह तलाशना बड़ी चुनौती होती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपना पक्का घर बनाना ऐसे परिवारों के लिए आसान नहीं था।
प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पक्की छत मिलने से परिवारों को मौसम की मार से सुरक्षा के साथ अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है। आज ये आवास केवल ईंट और सीमेंट से बने मकान नहीं, बल्कि परिवारों के बेहतर भविष्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान की मजबूत नींव बन रहे हैं।
जशपुर में 1.12 लाख से अधिक आवास स्वीकृत, 96,801 आवास पूर्ण
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में अब तक कुल 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 96 हजार 801 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन पक्के घरों में हजारों परिवार अब अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर में व्यापक सुधार का प्रयास किया जा रहा है। आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच परिवारों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रही है। इस तरह पक्का मकान परिवार की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और बेहतर जीवन स्तर का भी आधार बन रहा है।
पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों के जीवन में आया बदलाव
जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2023 से 2025 तक जिले में पीएम जनमन के अंतर्गत 2,100 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 1,614 से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं।
इससे विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को सुरक्षित पक्के आवास का लाभ मिला है। पीएम जनमन के तहत आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल उनके जीवन में स्थायी बदलाव का आधार बन रही है।
आवास प्लस 2.0 : छूटे 1.02 लाख से अधिक परिवारों का हुआ सर्वेक्षण
पक्के आवास की सुविधा से कोई पात्र परिवार वंचित न रहे, इसके लिए आवास प्लस 2.0 के तहत जिले में पूर्व में छूटे परिवारों का पुनः सर्वेक्षण किया गया है। इसके अंतर्गत 1 लाख 2 हजार 371 परिवारों का सर्वे किया गया है। सर्वेक्षण के बाद निर्धारित पात्रता के आधार पर परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित संबंधित योजनाओं से लाभान्वित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस पहल से उन जरूरतमंद परिवारों के लिए भी पक्के आवास की उम्मीद मजबूत हुई है, जो किसी कारणवश पूर्व में योजना में शामिल नहीं हो पाए थे। इससे जिले में पक्के आवास का दायरा और व्यापक होगा तथा अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंच सकेगा।
एक पक्का घर, परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव
प्रधानमंत्री आवास योजना से जशपुर में दिखाई दे रहा बदलाव केवल मकानों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। पक्के घर ने हजारों परिवारों को मौसम की चिंता से राहत, बच्चों को बेहतर वातावरण और पूरे परिवार को सुरक्षा तथा सम्मान का अहसास दिया है। पीएम जनमन और आवास प्लस 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से इस बदलाव का दायरा दूरस्थ और वंचित परिवारों तक भी लगातार बढ़ रहा है।
सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच जशपुर के हजारों पक्के आवास बदलाव की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कभी जो पक्का घर परिवारों के लिए दूर का सपना था, वही आज उनके सुरक्षित वर्तमान और बेहतर भविष्य का आधार बन चुका है।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिलने पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने रामनामी समुदाय को दी बधाई
रायपुर, / पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल से आज नया रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत और अनूठी आस्था के प्रतीक रामनामी समुदाय के सदस्यों ने आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर मंत्री श्री अग्रवाल ने रामनामी समुदाय की आस्था, परंपरा, जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर समुदाय के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामनामी समुदाय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समुदाय की आस्था, परंपराएं और जीवनशैली हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखने का कार्य करती हैं। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की उपलब्धि नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और रामनामी समाज की जीवंत विरासत का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इस फिल्म के माध्यम से रामनामी समाज की विशिष्ट पहचान, उनकी आस्था और सांस्कृतिक जीवन को देशभर में पहचान मिली है।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता, जीवंतता और जनजीवन से गहरा जुड़ाव है। यहां की लोक परंपराएं, जनजातीय एवं लोक कलाएं, आस्था से जुड़ी परंपराएं और समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। रामनामी समाज की परंपराएं इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्थानीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा उन्हें व्यापक मंच उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है।
मंत्री श्री अग्रवाल ने रामनामी समुदाय के सदस्यों से बातचीत के दौरान उनकी परंपराओं, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाज की विशिष्ट पहचान से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में समाज और समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर रामनामी समुदाय के सदस्यों ने डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को मिले राष्ट्रीय सम्मान के लिए प्रसन्नता व्यक्त की और मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के प्रति आभार जताया। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।
दिन में 150 और रात में करीब 70 यात्रियों को उपलब्ध कराया गया भोजन, राहत-बचाव कार्य में प्रशासन मुस्तैद
बीजापुर, / भैरमगढ़ के समीप नेलसनार क्षेत्र में बाढ़ के कारण नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आवागमन प्रभावित हुआ। इस दौरान मार्ग में फंसे यात्रियों को जिला प्रशासन की ओर से भोजन उपलब्ध कराया गया।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 26 सितंबर को दिन के समय करीब 150 लोगों तथा रात्रि में लगभग 70 मुसाफिरों को भोजन कराया गया। विपरीत परिस्थितियों में जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल से रास्ते में फंसे लोगों को राहत मिली।
कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम, तहसीलदार सहित मैदानी अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावित एवं फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित मार्गों पर अनावश्यक आवागमन से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
