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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
BHAVYA योजना के तहत छत्तीसगढ़ का प्रस्ताव केंद्र को भेजने मंजूर, मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में स्टेट लेवल कमेटी ने दी स्वीकृति
रायपुर / शौर्यपथ / भारत औद्योगिक विकास योजना (क्च॥्रङ्कङ्घ्र) के तहत छत्तीसगढ़ में इंटीग्रेटेड मल्टी-सेक्टर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित स्टेट लेवल कमेटी की बैठक में नवा रायपुर अटल नगर में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे भारत सरकार को भेजने की मंजूरी दी गई।
406.72 एकड़ में प्रस्तावित है औद्योगिक पार्क
छत्तीसगढ़ कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (ष्टक्रष्ठ्र) द्वारा प्रस्तावित यह पार्क जिला रायपुर के नवा रायपुर अटल नगर में करीब 406.72 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। यहां विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवश्यक अधोसंरचना और सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बैठक में परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (ष्ठक्कक्र), मास्टर प्लान, भूमि उपलब्धता, आवश्यक अधोसंरचना, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवस्था तथा क्च॥्रङ्कङ्घ्र की संचालन गाइडलाइन के अनुरूप प्रस्ताव का परीक्षण किया गया।
ष्ठक्कढ्ढढ्ढञ्ज के समक्ष रखा जाएगा प्रस्ताव
स्टेट लेवल कमेटी की मंजूरी के बाद अब ष्टक्रष्ठ्र निर्धारित प्रक्रिया के तहत परियोजना प्रस्ताव को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (ष्ठक्कढ्ढढ्ढञ्ज), भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा। केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के अगले चरणों पर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, ष्टस्ढ्ढष्ठष्ट के प्रबंध संचालक उमेश कुमार झा, हृक्रष्ठ्र नवा रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित कलेक्टर रायपुर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।
रायपुर / शौर्यपथ / पूरे छत्तीसगढ़ में 2 अक्टूबर 2026 से 'रिफॉर्म उत्सवÓ के साथ विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। जन योजना अभियान (पीपीसी) के साथ आयोजित इस अभियान में ग्राम सभाओं को गांव की विकास प्राथमिकताएं तय करने और योजनाओं पर सीधे संवाद का प्रमुख मंच बनाया जाएगा। ग्रामीणों की जरूरतों, विकास की कमियों, उपलब्ध संसाधनों और आवश्यक कार्यों के सुझावों को ग्राम पंचायत की आगामी विकास योजना में शामिल किया जाएगा।
रोजगार से आजीविका तक होगी चर्चा
रिफॉर्म उत्सव के दौरान ग्राम सभाओं में वीबी-जीरामजी के तहत 125 दिवस रोजगार की वैधानिक गारंटी, 15 दिन में रोजगार, समय पर मजदूरी भुगतान और अनुमेय 375 कार्यों में से स्थानीय जरूरत के कार्यों के चयन पर चर्चा होगी। आजीविका संवर्धन, ग्रामीण अधोसंरचना, योजनाओं का अभिसरण, लखपति दीदी योजना और आजीविका गतिविधियां भी चर्चा के प्रमुख विषय होंगे। पंचायत प्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्राम सभा तय करेगी विकास की दिशा
2 अक्टूबर की ग्राम सभा में वीजीपीपी की प्रक्रिया, ग्राम पंचायत के आधारभूत आंकड़े, आधार मानचित्र और उपलब्ध अनुमेय कार्यों की जानकारी दी जाएगी। डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं परिसंपत्तियों की भी पहचान होगी। अक्टूबर-नवंबर में बस्ती व वार्ड स्तर पर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (क्कक्र्र), स्थल सत्यापन और सामुदायिक परामर्श से स्थानीय जरूरतों व विकास की कमियां चिन्हित की जाएंगी।दिसंबर में वीजीपीपी का प्रारूप ग्राम सभा में रखा जाएगा। सुझावों और विचार-विमर्श के बाद ग्राम सभा इसे अनुमोदित करेगी। इसके बाद विकासखंड और जिला स्तर पर योजनाओं का समेकन किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया 15 जनवरी तक पूरी की जाएगी।
जल, आजीविका और अधोसंरचना पर फोकस
वीजीपीपी में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियों और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। वीबी-जीरामजी के 375 अनुमेय कार्यों में से गांव की जरूरत के अनुसार कार्य चुने जा सकेंगे।
क्तक्र कोड से मिलेंगे 8 प्रमुख वार्ता बिंदु
रिफॉर्म उत्सव के लिए पंचायत सचिवों को वीबी-जीरामजी से जुड़े 8 प्रमुख वार्ता बिंदु उपलब्ध कराए गए हैं। ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्तक्र कोड के जरिए ग्रामीण इन जानकारियों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। यह पहल ग्राम सभा को केवल योजनाओं की जानकारी देने के बजाय गांव की जरूरतों की पहचान, विकास कार्यों के चयन और भविष्य की विकास योजना तैयार करने का सहभागी मंच बनाएगी।
समान अंक पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को वरीयता; विश्वविद्यालयों के अध्यापन अनुभव को भी मिलेगा लाभ — 'हनुमान अंशÓ के लिए एसजीएसटी समतुल्य राशि की प्रतिपूर्ति का निर्णय
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अतिथि व्याख्याताओं की नीति, फिल्म 'हनुमान अंशÓ को टैक्स फ्री किए जाने तथा पूर्व अग्निवीर सैनिकों के लिए आरक्षण लागू करने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
अतिथि व्याख्याता नीति-2026 को कार्योत्तर मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में प्रशासकीय अनुमोदन के बाद जारी संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026 का कार्योत्तर अनुमोदन किया। संशोधित नीति में मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता देने का प्रावधान किया गया है।
अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों में अब शासकीय महाविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में भी एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 5 माह अध्यापन कार्य पूर्ण करने पर 5 अंक दिए जाएंगे। पूर्व नीति में राजकीय विश्वविद्यालय के अध्यापन अनुभव का लाभ स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं था।
कैबिनेट ने शासकीय महाविद्यालयों के साथ राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को उनके पूर्व कार्यानुभव के आधार पर रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर देने का भी निर्णय लिया है। मानदेय में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखंड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय व्यवस्था लागू की जाएगी।
इसके अलावा अतिथि व्याख्याताओं एवं अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि और आकस्मिक अवकाश से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है।
'हनुमान अंशÓ पर एसजीएसटी समतुल्य राशि की प्रतिपूर्ति
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 10 सितंबर 2026 को फिल्म 'हनुमान अंशÓ को टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा के अनुपालन में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश का अनुसमर्थन किया।
इसके तहत फिल्म के प्रदर्शन के लिए दर्शकों से प्रवेश पर देय राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति सिनेमाघरों को किए जाने का प्रावधान लागू रहेगा।
पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के नियम मंजूर
मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम, 2026 को मंजूरी दे दी।
इस आरक्षण का लाभ पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा।
नए नियमों में पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तें, भर्ती के मापदंड, आरक्षण तथा चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके साथ ही पूर्व में किए गए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से लागू करने का रास्ता स्पष्ट हो गया है।
चेन्नई/कोयंबटूर:
तमिलनाडु के कोयंबटूर से एक ऐसी हैरतअंगेज और जांबाजी की सच्ची घटना सामने आई है, जिसने बड़े-बड़े फिल्मी स्टंट को भी पीछे छोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक सफेद हुंडई क्रेटा (Hyundai Creta) कार हाईवे पर बेहद तेज रफ्तार में दौड़ रही है और एक शख्स उसकी छत पर जान दांव पर लगाकर लटका हुआ है। यह कोई रील या स्टंट नहीं, बल्कि कर्तव्य की वेदी पर अपनी जान की बाजी लगाने वाले तमिलनाडु पुलिस के हेड कांस्टेबल एम. वेलमुरुगन (M Velmurugan) हैं।
रूटीन चेकिंग से शुरू हुआ 40 किलोमीटर का 'लाइव चेस'
यह पूरी घटना कोयंबटूर के विलंकुरिची (Vilankurichi) इलाके से शुरू हुई। कोविलपालयम थाने से जुड़े हेड कांस्टेबल वेलमुरुगन और उनकी टीम सड़कों पर रूटीन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान उन्होंने कर्नाटक नंबर की एक संदिग्ध सफेद क्रेटा कार को रुकने का इशारा किया।
पुलिस को देखते ही कार सवार तस्कर घबरा गए। जब पुलिसकर्मियों ने गाड़ी की तलाशी लेनी चाही, तो तस्करों ने उन्हें धक्का दिया और तेजी से कार भगाने लगे। इसी बीच, हेड कांस्टेबल वेलमुरुगन ने गजब की फुर्ती दिखाई और कार को रोकने के लिए सीधे उसकी छत (रूफ रेल) पर चढ़कर मजबूती से लटक गए।
मौत की रफ्तार... तस्करों ने 40 KM तक नहीं रोकी कार
तस्करों ने कांस्टेबल को नीचे गिराने और पुलिस से बचने के लिए अविनाशी रोड (हाईवे) पर कार को अत्यधिक तेज रफ्तार में दौड़ाया। वेलमुरुगन ने बिना डरे कार की छत को कसकर पकड़े रखा। मौत के इस सफर के दौरान तस्करों ने गाड़ी को लहराने की भी कोशिश की, लेकिन कांस्टेबल का हौसला नहीं डिगा। करीब 40 किलोमीटर तक कार की छत पर लटके रहने के बाद, पुलिस की टीम ने करुमथम्पट्टी (Karumathampatti) के पास चारों तरफ से घेराबंदी कर कार को जबरन रुकवाया।
कार के रुकते ही पुलिस ने तुरंत तीनों तस्करों को दबोच लिया। जब गाड़ी की तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए—कार के अंदर भारी मात्रा में यानी 300 किलोग्राम प्रतिबंधित गुटखा (तंबाकू) छिपाकर ले जाया जा रहा था। इस बेहद खतरनाक मिशन में जांबाज वेलमुरुगन पूरी तरह सुरक्षित रहे।
मुख्यमंत्री 'थालापति' विजय ने सचिवालय में थपथपाई पीठ
इस बहादुरी का वीडियो वायरल होने के बाद तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थालापति विजय) ने इस घटना का संज्ञान लिया। 29 सितंबर को मुख्यमंत्री विजय ने जांबाज हेड कांस्टेबल एम. वेलमुरुगन को विशेष तौर पर चेन्नई स्थित राज्य सचिवालय (Secretariat) आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री ने वेलमुरुगन को उनकी इस असाधारण बहादुरी, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा के लिए व्यक्तिगत रूप से बधाई दी और सम्मानित किया। इस दौरान पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस बल के प्रमुख महेश कुमार अग्रवाल भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री विजय ने कांस्टेबल के साहस की सराहना करने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में ड्यूटी के दौरान अपनी सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखने की हिदायत दी।
सोशल मीडिया पर लोग हेड कांस्टेबल वेलमुरुगन के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं और उन्हें असल जिंदगी का 'सिंघम' और 'सुपरहीरो' बता रहे हैं।
दुर्ग । अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित ग्राम भरदा में ग्रामीणों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में त्वरित पहल की गई है। कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने राहत शिविर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और ग्रामीणों से क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने जलभराव से निजात दिलाने के लिए पक्की निकासी नाली की मांग रखी।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने मौके पर आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने 28 सितंबर को ₹12.87 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।
पुरुषोत्तम निषाद के घर से केशव ठाकुर के घर तक बनेगी नाली
वीबी-जी रामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी) योजना के तहत स्वीकृत नाली पुरुषोत्तम निषाद के निवास से केशव ठाकुर के निवास तक बनाई जाएगी। स्वीकृत राशि में ₹2.56 लाख मजदूरी और ₹10.31 लाख सामग्री मद के लिए निर्धारित किए गए हैं।
नाली निर्माण से बारिश के दौरान मार्ग पर होने वाले जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के साथ ग्रामीणों का आवागमन भी सुगम और सुरक्षित होने की उम्मीद है।
जल निकासी के साथ ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार
जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि वीबी-जी रामजी योजना के तहत गांवों की स्थानीय जरूरतों को विकास कार्यों से जोड़ा जा रहा है। भरदा की निकासी नाली इसी पहल का उदाहरण है। इससे एक ओर स्थायी जल निकासी की अधोसंरचना तैयार होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा।
योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र ग्रामीणों को मांग के आधार पर 15 दिवस के भीतर ₹300 प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी दर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
फसल क्षति के सर्वेक्षण के भी निर्देश
अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। नाली की त्वरित स्वीकृति और फसल क्षति के सर्वेक्षण के निर्देशों पर सरपंच सुनीता भारदीय सहित ग्रामीणों ने मंत्री गजेंद्र यादव, कलेक्टर अभिजीत सिंह और जिला पंचायत प्रशासन के प्रति आभार जताया।
भरदा में अब जलभराव से राहत के साथ रोजगार और स्थायी अधोसंरचना—दोनों पर एक साथ काम आगे बढ़ेगा।
आईपीएस अधिकारियों की CAPF में नियुक्ति और अवमानना मामलों की लिस्टिंग पर कोर्ट सख्त; पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय प्रदूषण और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन के संकेत
नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई और न्यायिक कार्यवाही हुई। इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF), विशेष रूप से CRPF और BSF में IPS अधिकारियों की नियुक्ति/डेपुटेशन से जुड़े अवमानना मामलों तथा पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण का मामला प्रमुख रहा। इसके अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) से संबंधित याचिकाओं और चुनाव आयोग से जुड़े कानूनी मामलों की आगामी सुनवाई को लेकर भी गतिविधियां चर्चा में रहीं।
CAPF-IPS डेपुटेशन मामले में रजिस्ट्री से जवाब तलब
CRPF-BSF सहित CAPF में IPS अधिकारियों की नियुक्ति और इससे संबंधित अवमानना याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले को डेली कॉज लिस्ट से हटाए जाने पर कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने रजिस्ट्री से यह स्पष्ट करने को कहा कि जब इस संबंध में न्यायिक आदेश मौजूद था, तो मामला सूची से हटाया क्यों गया।
मामले को बाद में दोपहर बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। इस घटनाक्रम ने न्यायिक आदेशों के अनुरूप मामलों की लिस्टिंग और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
पटाखों पर प्रतिबंध या खुली छूट नहीं, संतुलन पर जोर
वहीं, पटाखों के इस्तेमाल और उससे होने वाले वायु प्रदूषण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय चिंताओं के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक पहलुओं पर भी विचार किया। सुनवाई के दौरान अदालत के रुख से संकेत मिला कि वह न तो पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में है और न ही उनके बेरोकटोक इस्तेमाल की अनुमति देने के पक्ष में।
अदालत के समक्ष प्रमुख चिंता यह रही कि त्योहारों के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से उत्पन्न वायु प्रदूषण का बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। साथ ही धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है। ऐसे में न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच व्यावहारिक संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।
CEC से जुड़े मामलों पर भी कानूनी हलकों में नजर
इसी बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामलों, उनके कथित एकतरफा निर्णयों पर उठाए गए सवालों, चुनाव आयोग से संबंधित अधिनियमों के तहत दायर याचिकाओं तथा क्यूरेटिव पिटिशन को लेकर भी कानूनी हलकों में चर्चा रही। इन मामलों की आगामी सुनवाइयों और अगले सप्ताह की संभावित लिस्टिंग पर भी नजर बनी हुई है।
इस प्रकार 30 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में न्यायिक आदेशों की अनुपालना, CAPF में IPS डेपुटेशन, पर्यावरण बनाम धार्मिक परंपराएं और चुनाव आयोग से जुड़े संवैधानिक-कानूनी प्रश्न अलग-अलग महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में सामने आए।
मां के लौटने पर टूटा मिला अलमारी का लॉकर, करीब 48 हजार रुपये का माल चोरी; मचांदुर चौकी पुलिस जांच में जुटी
दुर्ग। घर का दरवाजा खुला छोड़कर पड़ोस की दुकान तक जाना परिवार को भारी पड़ गया। इसी दौरान अज्ञात आरोपी ने घर में प्रवेश कर अलमारी का लॉकर तोड़ दिया और उसमें रखे सोने-चांदी के जेवरात तथा नकदी पर हाथ साफ कर दिया। चोरी का पता परिवार के सदस्य के घर लौटने के बाद चला। मामले में शिकायत मिलने के बाद मचांदुर चौकी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार प्रार्थी अश्विनी कुमार देवांगन फर्नीचर का काम करता है। वह 20 सितंबर को काम के सिलसिले में भिलाई गया हुआ था। उसकी मां अरुणा देवांगन भी गांव गई थीं। घर पर उसका छोटा भाई मौजूद था। इसी दौरान वह घर का दरवाजा खुला छोड़कर पड़ोस की दुकान से मंजन लेने चला गया।
बताया गया है कि इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने घर में प्रवेश कर अलमारी का लॉकर तोड़ दिया और उसमें रखे सामान को लेकर फरार हो गया। 24 सितंबर को जब अरुणा देवांगन घर वापस लौटीं, तब अलमारी का लॉकर टूटा हुआ मिला। जांच करने पर एक जोड़ी सोने के झुमके, एक चांदी की चाबी-रिंग, एक चांदी की अंगूठी तथा नकदी गायब मिली।
परिवार द्वारा अपने स्तर पर आसपास पता तलाश करने के बाद मचांदुर चौकी पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी गई। चोरी गए सामान और नकदी की कुल कीमत करीब 48 हजार रुपये बताई गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा अज्ञात आरोपी की तलाश में जुटी है।
सामान्य सभा में जल प्रभारी लीना देवांगन से सवाल—तीन महीने की बाढ़ का जवाब देकर नौ महीने की पानी समस्या पर क्यों चुप्पी?
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में पेयजल व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। निर्धारित समय पर पानी नहीं मिलने की शिकायत पर जब पार्षद ने जल विभाग की प्रभारी श्रीमती लीना देवांगन से जवाब मांगा और अधिकारियों से लिखित जवाब देने की मांग की, तो पानी की देरी के पीछे बाढ़ की स्थिति को कारण बताया गया।
बाढ़ और अत्यधिक बारिश के दौरान जलापूर्ति प्रभावित होना स्वाभाविक परिस्थितियों से जुड़ा विषय हो सकता है। लेकिन सामान्य सभा में उठे सवाल का मूल मुद्दा इससे आगे का है—यदि बाढ़ के कारण साल में लगभग तीन महीने जल वितरण प्रभावित होता है, तो बाकी नौ महीनों में समय पर और निर्धारित अवधि में पानी नहीं मिलने की शिकायतों का कारण क्या है?
यही सवाल सामान्य सभा में चर्चा के दौरान सामने आया, लेकिन इस पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ सका।
तीन महीने की बाढ़, नौ महीने का सवाल अनुत्तरित
जल विभाग की ओर से बाढ़ को पानी की देरी का कारण बताया जाना अपनी जगह है, लेकिन नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था केवल बरसात के तीन महीनों तक सीमित नहीं है।
शहर के नागरिकों को वर्षभर निर्धारित समय और पर्याप्त दबाव के साथ पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम की नियमित जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी वार्ड में निर्धारित समय पर पानी नहीं पहुंच रहा है तो उसके पीछे पाइपलाइन, मोटर-पंप, टंकी, वाल्व संचालन, बिजली आपूर्ति, वितरण व्यवस्था अथवा विभागीय मॉनिटरिंग में से वास्तविक कारण क्या है—इसकी जानकारी जनता के सामने आनी चाहिए।
खास बात यह है कि जल विभाग से जुड़ी ऐसी समस्याओं पर पहले भी नगर निगम स्तर पर समीक्षा होती रही है। एक पूर्व समीक्षा में महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने अधिकारियों को इंटकवेल से फिल्टर प्लांट तक मशीनरी की नियमित निगरानी और प्राकृतिक कारणों को छोड़कर मानवीय कारणों से पानी की आपूर्ति प्रभावित न होने देने के निर्देश दिए थे।
जब प्रभारी के वार्ड में ही सवाल खड़ा हो तो जवाबदेही किसकी?
सामान्य सभा में चर्चा के दौरान यह सवाल भी महत्वपूर्ण बनकर सामने आया कि यदि जल विभाग की प्रभारी के ही वार्ड में निर्धारित समय पर पानी नहीं पहुंच रहा है, तो विभागीय व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का सवाल है।
और जब पार्षदों द्वारा अधिकारियों के फोन नहीं उठाने अथवा शिकायतों का समय पर जवाब नहीं मिलने की बात भी सामान्य सभा में सामने आती है, तब सवाल और गंभीर हो जाता है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच शिकायतों के समाधान की प्रभावी व्यवस्था आखिर कितनी सक्रिय है?
डेढ़ साल बाद भी वही सवाल—कहां है स्थायी समाधान?
महापौर श्रीमती अलका बाघमार के नेतृत्व वाली नगर निगम की वर्तमान परिषद को लगभग डेढ़ साल से अधिक समय हो चुका है। इस अवधि में जल आपूर्ति से संबंधित समस्याओं पर समीक्षा और निर्देश दिए जाने के बावजूद यदि सामान्य सभा में पार्षदों को निर्धारित समय पर पानी नहीं मिलने की शिकायत दोहरानी पड़ रही है, तो अब केवल कारण बताने के बजाय स्थायी समाधान की कार्ययोजना सामने आना जरूरी है।
हालांकि यह भी तथ्य है कि हालिया महीनों में निगम स्तर पर जलापूर्ति और तकनीकी समस्याओं की समीक्षा की गई है तथा अधिकारियों को मशीनरी, मोटर-पंप और पाइपलाइन संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में सामान्य सभा का ताजा सवाल यह है कि निर्देशों का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
महापौर के सामने अब सीधी चुनौती—जिम्मेदारी तय होगी या जवाब फिर टलेगा?
शहर की जनता ने महापौर के रूप में श्रीमती अलका बाघमार को अपना प्रतिनिधि चुना है। इसलिए जलापूर्ति जैसी बुनियादी नागरिक सुविधा को लेकर उठने वाले सवालों पर अंतिम प्रशासनिक जवाबदेही की निगाह स्वाभाविक रूप से महापौर और निगम प्रशासन की ओर जाती है।
अब देखना यह है कि सामान्य सभा में सामने आए इन सवालों के बाद महापौर जल विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करती हैं या नहीं, तथा निर्धारित समय पर पानी उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस समयबद्ध व्यवस्था सामने आती है या नहीं।
जनता को बहाना नहीं, पानी चाहिए
बाढ़ हो, तकनीकी खराबी हो, बिजली की समस्या हो या पाइपलाइन में लीकेज—हर परिस्थिति का सामना करने के लिए नगर निगम के पास वैकल्पिक व्यवस्था और स्पष्ट आपात योजना होना जरूरी है।
क्योंकि नागरिकों के लिए सवाल यह नहीं है कि पानी क्यों नहीं आया। सवाल यह है कि पानी समय पर क्यों नहीं आया और अगली बार भी यही समस्या न हो, इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
दुर्ग की सामान्य सभा में उठा यह सवाल अब केवल एक पार्षद के वार्ड का सवाल नहीं रह गया है। यह शहर की वर्षभर की पेयजल व्यवस्था, विभागीय जवाबदेही और ‘सुशासन’ के दावों की जमीनी कसौटी से जुड़ा सवाल बन चुका है।
नोट: हालिया उपलब्ध रिपोर्टों में 30 सितंबर 2026 की सामान्य सभा में पेयजल सहित विभिन्न नागरिक सुविधाओं पर चर्चा प्रस्तावित होने की पुष्टि मिलती है। � साथ ही सितंबर 2026 में महापौर अलका बाघमार और आयुक्त लीना कोसम द्वारा जलभराव/जलनिकासी की व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी रिपोर्ट हुआ है।
2400 लाइट 8-10 वार्ड में बांटे जाने के आरोप से बढ़ा सवाल—बाकी वार्डों का नंबर कब आएगा?
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में विद्युत विभाग से जुड़े एक सवाल ने विभागीय जानकारी और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए। भारतीय जनता पार्टी के पार्षद आशीष चंद्राकर ने विद्युत विभाग के प्रभारी ज्ञानेश्वर ताम्रकार से लाइटों के वितरण को लेकर सवाल किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी।
आशीष चंद्राकर ने जानना चाहा कि नगर निगम ने लाइटें किस विभाग/एजेंसी से, किस दर पर और कितनी संख्या में खरीदीं तथा उन्हें शहर के किन-किन वार्डों में वितरित किया गया। सामान्य सभा में प्रस्तुत जवाब में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं की पूरी जानकारी सामने नहीं आने पर उन्होंने विद्युत प्रभारी से जवाब-तलब किया।
सवाल-जवाब के दौरान विद्युत प्रभारी ज्ञानेश्वर ताम्रकार ने स्वीकार किया कि अधिकारियों द्वारा उन्हें अधूरी जानकारी दी गई है और उन्होंने शाम 5 बजे तक पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही।
सवाल जवाब का नहीं, व्यवस्था की जवाबदेही का है
मामला केवल एक पार्षद को अधूरी जानकारी मिलने तक सीमित नहीं है। सामान्य सभा नगर निगम की महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक और विभागीय जवाबदेही की व्यवस्था है, जहां पार्षदों द्वारा पूछे गए सवालों पर विभाग से तथ्यात्मक और पूर्ण जानकारी अपेक्षित होती है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब सामान्य सभा में ही किसी विभाग के प्रभारी को अपने ही विभाग की खरीदी और वितरण से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो, तो नगर निगम की खरीद और वितरण व्यवस्था की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?
2400 लाइट सिर्फ चंद वार्ड में? आरोप की पुष्टि जरूरी
सामान्य सभा में पार्षद आशीष चंद्राकर ने यह भी आरोप लगाया कि अकेले 8-10 वार्ड में लगभग 2400 लाइट वितरित की जा चुकी हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
यदि विभागीय रिकॉर्ड में वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में लाइटें किसी एक वार्ड में वितरित होना दर्ज है, तो स्वाभाविक रूप से नगर निगम से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि कुल कितनी लाइटें खरीदी गईं, किस वार्ड को कितनी लाइटें मिलीं और वितरण का आधार क्या था?
अब जनता के सामने आने चाहिए ये आंकड़े
नगर निगम की ओर से यदि शाम 5 बजे तक पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो उसमें कम से कम इन सवालों का स्पष्ट उत्तर होना चाहिए—
कुल कितनी लाइटों की खरीदी हुई?
किस एजेंसी से खरीदी गई?
प्रति लाइट कितनी कीमत चुकाई गई?
खरीद की कुल लागत कितनी रही?
किस तारीख को और किस प्रक्रिया के तहत खरीद हुई?
वार्डवार कितनी लाइटें वितरित की गईं?
किस वार्ड में वास्तव में कितनी लाइटें दी गईं?
वितरण के लिए क्या कोई निर्धारित मापदंड था?
किन वार्डों में कितनी लाइटें अभी लंबित हैं?
आखिर लाइटें नगर निगम की संपत्ति हैं और उनका पैसा जनता के संसाधनों से आता है। इसलिए खरीदी से लेकर वार्डवार वितरण तक की पूरी जानकारी सार्वजनिक होना केवल पार्षदों का सवाल नहीं, बल्कि शहर की जनता के जानने का अधिकार भी है।
अब निगाहें विद्युत विभाग द्वारा शाम 5 बजे तक दिए जाने वाले उस जवाब पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सामान्य सभा में उठे सवालों का जवाब केवल समय मांगकर टाला गया या वास्तव में वार्डवार और खरीदवार पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने रखा जाएगा।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारत और इटली ने पर्यटन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। पर्यटन संबंधी दूसरे भारत-इटली संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की बैठक में फिल्म-पर्यटन, पर्यटन गंतव्यों के युग्मीकरण, कौशल विकास, पर्यटन आंकड़ों के आदान-प्रदान तथा कारोबार-से-कारोबार (बी2बी) सहभागिता बढ़ाने सहित कई विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार और इटली के पर्यटन मंत्रालय की महासचिव इमानुएला ट्रिपी ने की। दोनों देशों के पर्यटन, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ भारत स्थित पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।
बैठक में दोनों देशों के बीच कम ज्ञात पर्यटन गंतव्यों को बढ़ावा देने, फिल्म निर्माण के माध्यम से पर्यटन को प्रोत्साहित करने तथा पर्यटन क्षेत्र में कौशल एवं क्षमता निर्माण पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सहयोग को जमीन पर आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों ने चिन्हित क्षेत्रों में लक्षित तकनीकी समूह गठित करने और संपर्क बिंदु नामित करने पर सहमति व्यक्त की। इसका उद्देश्य संबंधित सरकारी एवं उद्योग हितधारकों के बीच निरंतर संपर्क और सहयोग को सुगम बनाना है।
2027 में संस्कृति एवं पर्यटन वर्ष
दोनों पक्षों ने प्रस्तावित भारत-इटली संस्कृति एवं पर्यटन वर्ष 2027 के संदर्भ में भी पर्यटन सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं पर्यटन संबंधी आदान-प्रदान को और मजबूत करना है।
संयुक्त कार्य समूह की बैठक से पर्यटन क्षेत्र में भारत और इटली के बीच संस्थागत तथा उद्योगगत संपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में सहयोग का नया आधार तैयार हुआ है।
स्रोत : प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), दिल्ली
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले सीजन के लिए आयोजित दो दिवसीय चयन ट्रायल सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में संपन्न हुआ। ट्रायल के लिए 373 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें 223 खिलाड़ी मैदान पर उतरे। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के मूल्यांकन के बाद 130 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है।
प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे खिलाड़ियों ने लीग में स्थान बनाने के लिए अपना दमखम दिखाया। चयन प्रक्रिया के दौरान खेल कौशल, प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के आधार पर खिलाड़ियों का मूल्यांकन किया गया।
उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव लगातार दूसरे दिन ट्रायल स्थल पहुंचे। उन्होंने खिलाड़ियों का खेल देखा, उनसे मुलाकात की और निरंतर अभ्यास व मेहनत से खेल को निखारने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री साव ने कहा कि चयन ट्रायल का सफल आयोजन राज्य की हॉकी प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है। 373 खिलाड़ियों का पंजीकरण और विभिन्न क्षेत्रों से भागीदारी प्रदेश में हॉकी के प्रति उत्साह को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब शॉर्टलिस्ट 130 खिलाड़ियों को प्लेयर ड्राफ्ट के जरिए लीग की छह टीमों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल, अनुभव और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
8 अक्टूबर को प्लेयर ड्राफ्ट
चयन ट्रायल के बाद अब 8 अक्टूबर को रायपुर में सीएचएल प्लेयर ड्राफ्ट आयोजित होगा। इसमें शॉर्टलिस्ट 130 खिलाड़ी शामिल होंगे और छह फ्रेंचाइजी टीमें अपने-अपने खिलाड़ी दल का चयन करेंगी। इसके साथ ही लीग के पहले सीजन के लिए टीमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक आकांक्षा शिक्षा खलखो, छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव और सचिव फिरोज अंसारी मौजूद रहे।
मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत; कैंसर दवा की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर पर केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली / सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान नागरिक अधिकारों और आम मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। एक ओर अदालत ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई, वहीं दूसरी ओर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए।
संभल मामले में हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख की लागत
संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की हिरासत को रद्द कर दिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष हुई।
अदालत के इस आदेश का सीधा संबंध मुल्ला अफरोज की हिरासत की वैधानिकता से था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हिरासत रद्द किए जाने और सरकार पर लागत लगाए जाने से संबंधित आदेश को मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैंसर दवाओं की कीमतों पर अदालत की गंभीर चिंता
इसी दौरान कैंसर और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दवा के खरीद मूल्य और MRP के बीच भारी अंतर पर सवाल उठाए। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई में एक उदाहरण सामने आया, जिसमें किसी कैंसर दवा की निर्माता से खुदरा स्तर तक कीमत करीब 2,700 रुपये बताई गई, जबकि उसकी MRP करीब 27,000 रुपये थी।
कीमत में इस बड़े अंतर पर अदालत ने गंभीर टिप्पणी की और इसे “carnage” शब्द से संबोधित किया। अदालत ने केंद्र सरकार से दवाओं की कीमतों और इस तरह के मूल्य अंतर से जुड़े मुद्दे पर जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर महंगी दवाओं के आर्थिक प्रभाव और दवाओं के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रूप से सामने आए। अदालत द्वारा केंद्र से जवाब मांगे जाने के बाद अब सरकार का पक्ष और आगे की न्यायिक कार्यवाही इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
