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March 21, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

जगदलपुर, शौर्यपथ | कांकेर जिला साहू संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण समारोह तथा युवक-युवती परिचय सम्मेलन सामाजिक समरसता, उत्साह और गरिमा के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन साहू समाज की एकता, परंपरा और भविष्य की दिशा को मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम में बस्तर जिला साहू संघ के जिलाध्यक्ष हरि लाल साहू ने विशेष रूप से उपस्थित होकर समाज के हित में गंभीर और प्रेरणादायी विचार रखे। उन्होंने कहा कि बस्तर, जगदलपुर और कांकेर के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते को और अधिक सशक्त किया जाना चाहिए, ताकि समाज के युवाओं और युवतियों को वैवाहिक संबंध स्थापित करने में पारस्परिक सहयोग मिल सके। उनके उद्बोधन को समाजजनों ने तालियों के साथ सराहा।

श्री साहू ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास जताया कि नई टीम समाज को संगठित कर सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

इस गरिमामय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव रहे। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वालों में पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र साहू, पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विपिन साहू, रायपुर विधायक मोतीलाल साहू, पूर्व विधायक लेखराम साहू, सुकमा जिला अध्यक्ष जगन्नाथ राजू साहू, कोंडागांव जिला अध्यक्ष राजेश साहू, दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष एन.आर. साहू सहित टी.आर. साहू, हलदर साहू, ओमप्रकाश साहू एवं अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मातृशक्ति, युवा वर्ग और बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। आयोजन ने समाज में नई ऊर्जा, आपसी सौहार्द और भविष्य के प्रति आशा का संचार किया।

दुर्ग | शौर्यपथ

दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार 31 जनवरी को शहरी सरकार की मुखिया के रूप में अपना पहला जन्मदिन मना रही हैं। जन्मदिन से पहले शहर में समर्थकों द्वारा लगाए गए फ्लेक्स, बैनर और कटआउट्स की भरमार ने एक बार फिर शहर की सुंदरता, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी पृष्ठभूमि में महापौर अलका बाघमार ने 29 जनवरी को एक सराहनीय और विनम्र पहल करते हुए अपने समर्थकों से अनुरोध किया कि वे शहर के खंभों, सार्वजनिक स्थलों और यातायात मार्गों पर लगाए गए फ्लेक्स-बैनर स्वयं हटा लें। महापौर ने स्पष्ट किया कि उन्हें समर्थकों का प्रेम और आशीर्वाद स्वीकार है, लेकिन शहर की सुंदरता, स्वच्छता और नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि है।

महापौर का यह बयान निश्चित ही स्वागत योग्य है, लेकिन अब सवाल यह नहीं कि क्या कहा गया, बल्कि यह है कि क्या किया जाएगा।

अतिक्रमण टीम की अग्निपरीक्षा

अब निगाहें नगर निगम के अतिक्रमण विभाग पर टिकी हैं। क्या निगम प्रशासन महापौर की मंशा के अनुरूप नियम विरुद्ध टंगे फ्लेक्स-बैनर हटाने की कार्रवाई करेगा?

क्या महापौर के समर्थक स्वयं आगे आकर अपने बैनर हटाएंगे, या फिर यह अनुरोध भी पूर्व के नेताओं के बयानों की तरह कागज़ी साबित होगा?

शहर की जनता अब केवल बयान सुनकर संतुष्ट होने वाली नहीं रही है। वर्षों से जनता ने देखा है कि कैसे नियमों की दुहाई आम नागरिकों के लिए तो दी जाती है, लेकिन राजनीतिक बैनरों पर वही नियम मौन हो जाते हैं।

नीरज पाल बनाम अलका बाघमार

इस संदर्भ में भिलाई नगर निगम के पूर्व महापौर नीरज पाल का उदाहरण आज भी मिसाल के रूप में सामने है। नीरज पाल ने अपने जन्मदिन से पहले स्वयं आगे बढ़कर शहर के खंभों से अपने सभी बधाई बैनर और पोस्टर उतरवाए थे। उन्होंने न सिर्फ अपील की, बल्कि कार्रवाई कर दिखायी—और समर्थकों से भी यही अपेक्षा रखी।

आज दुर्ग की जनता यही सवाल पूछ रही है— क्या महापौर अलका बाघमार भी नीरज पाल की तरह बयान से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई करेंगी?

या फिर यह पहल भी एक औपचारिक अनुरोध बनकर रह जाएगी?

30 जनवरी की कार्रवाई बताएगी दिशा

महापौर का अनुरोध 29 जनवरी को सामने आया। अब 30 जनवरी का दिन यह तय करेगा कि नगर निगम प्रशासन और अतिक्रमण विभाग इस अनुरोध को कितनी गंभीरता से लेता है।

यदि आज नियम विरुद्ध फ्लेक्स हटाए जाते हैं, तो यह दुर्ग की राजनीति में एक सकारात्मक और भरोसेमंद संदेश होगा।

और यदि ऐसा नहीं होता, तो जनता इसे भी एक और “अच्छा बयान” मानकर आगे बढ़ जाएगी।

सार --

महापौर अलका बाघमार का कदम निस्संदेह प्रशंसनीय है, लेकिन शहर की जनता अब शब्द नहीं, उदाहरण चाहती है।

दुर्ग को आज एक ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है, जो नीरज पाल की तरह सिर्फ कहे नहीं—करके दिखाए।

अब देखना यह है कि

दुर्ग की महापौर इतिहास रचेंगी या बयानबाज़ी की सूची में एक और नाम जुड़ जाएगा।

✍️ शौर्यपथ लेख:

दुर्ग की धरती पर आज एक ऐसी घटना घटी, जिसने यह साबित कर दिया कि अगर सत्ता में बैठा व्यक्ति संवेदनशील हो, तो वह सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि किसी का भविष्य भी संवार देता है।

महर्षि दयानंद स्कूल का 8 वर्षीय छात्र ओजश चक्रधारी… उम्र इतनी कम कि सपनों की दुनिया अभी रंग भरना सीख ही रही थी। लेकिन अचानक फीस न भर पाने की मजबूरी ने उसके सपनों पर ताला जड़ दिया। स्कूल से बाहर कर दिए जाने की टीस जब एक मासूम दिल तक पहुँची, तो वह रोते हुए अपनी माँ विजयी लक्ष्मी से बस इतना कह सका—

“माँ, मैं पढ़ना चाहता हूँ…”

माँ के लिए इससे बड़ा दर्द और क्या हो सकता है? बेटे के भविष्य की चिंता लिए वह सेवा सदन मंत्री गजेंद्र यादव के पास पहुँचीं। यह मुलाकात किसी औपचारिकता की नहीं थी, यह एक माँ की आख़िरी उम्मीद थी।

मंत्री गजेंद्र यादव ने न सिर्फ पूरे मामले को ध्यान से सुना, बल्कि उसी क्षण यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता आज भी राजनीति में ज़िंदा है। उन्होंने तुरंत स्कूल प्रबंधन से फोन पर बात की और दो टूक शब्दों में कहा—

“बच्चे की फीस मैं भरूंगा, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए।”

यह सिर्फ फीस भरने का निर्णय नहीं था, यह एक बच्चे के आत्मविश्वास को वापस देने का संकल्प था। वह एक वाक्य—

“मैं हूँ ना, चिंता क्यों करते हो”

ओजश और उसके परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं था।

जब यही शब्द प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री के मुख से निकलते हैं, तो वे सिर्फ आश्वासन नहीं रहते, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के भीतर ऐसा आत्मबल भर देते हैं, जो जीवन की दिशा बदल देता है। एक पल में डर, निराशा और असहायता—आशा और विश्वास में बदल जाती है।

इस संवेदनशील पहल ने समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार है, और कोई भी बच्चा सिर्फ आर्थिक कारणों से अपने सपनों से दूर नहीं किया जा सकता।

आज ओजश की आँखों में फिर से पढ़ाई की चमक है, उसकी माँ के चेहरे पर सुकून है, और समाज के सामने एक उदाहरण है—

कि जब जनप्रतिनिधि दिल से सोचते हैं, तब शासन सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि सहारा बन जाता है।

यह कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि उस “मैं हूँ ना” की है, जो किसी के जीवन में उजाला भर देता है। ?

  दुर्ग। दिनांक 28 जनवरी 2026 को डायल 112 चीता वन थाना मोहन नगर की टीम ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए एक लापता महिला को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाया।
ड्यूटी पर तैनात आरक्षक राजेश्वर साहू (आईडी 1001) एवं चालक दुष्यंत कुमार (आईडी 197) को शाम 6:35 बजे सूचना मिली कि शांति नगर के पास एक अज्ञात महिला बैठी हुई है, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही है।
सूचना मिलते ही डायल 112 टीम मौके पर पहुंची। पूछताछ में महिला ने अपना निवास माया नगर, रिसाली बताया। टीम ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए महिला को 112 वाहन में बैठाकर माया नगर, रिसाली ले जाकर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। पहचान सुनिश्चित होने पर महिला को आजाद मार्केट, माया नगर, रिसाली स्थित उसके घर पहुंचाया गया, जहां परिजन मिले।
परिजनों ने बताया कि महिला 17 दिसंबर 2025 को बिना बताए घर से चली गई थी और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उसकी तलाश की जा रही थी। महिला की पहचान उत्तरी मनहरे, पिता भगवती मनहरे, उम्र 42 वर्ष, निवासी आज़ाद मार्केट, माया नगर, रिसाली के रूप में हुई।
डायल 112 टीम के अथक प्रयासों से महिला को सुरक्षित एवं सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। इस मानवीय कार्य की स्थानीय लोगों ने सराहना की।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंप कर रखी विभिन्न मांगें,पांडेय ने पूरा कराने दिया आश्वासन

भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ यूपी बिहार रेल यात्री सेवा संघ के अध्यक्ष हाजी एम. एच. सिद्दीकी एवं सचिव मोहम्मद सलीम (अधिवक्ता) के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय से उनके आवास पर मुलाकात कर उन्हें रेल यात्रा में होने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया। जिसमे प्रमुख रूप से उ.प्र. बिहार जाने वाले यात्रियों की समस्याओं के समाधान करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान गोंदिया बरौनी एक्सप्रेस 15231/15232 या सारनाथ एक्सप्रेस 15159/15160 को सप्ताह में कम से कम तीन दिन वाया मऊ, बेल्थरा रोड़, सलेमपुर, भटनी, मैरवा, सिवान, छपरा होकर चलाने और इसे वापसी में भिलाई पावर हाउस स्टेशन पर भी स्टॉपेज देने की मांग रखी गई।
वहीं दुर्ग गोरखपुर नौतनवा एक्सप्रेस 18201/18202 को नियमित रूप से प्रतिदिन चलाने के साथ ही नौतनवा एक्सप्रेस 18201 के समय को परिवर्तित कर शाम 4.00 बजे से पहले दुर्ग से चलाने की मांग की गई। जिससे बनारस से आगे जाने वाले यात्रियों को समय पर अपने गाँव पहुंचने में आसानी हो। इसी तरह पावर हाउस रेलवे स्टेशन पर स्टॉपेज देने की भी मांग की गई। प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने सभी मांगो को गंभीरता पूर्वक सुना और इन्हें पूर्ण कराने पूरी कोशिश करने का आश्वासन दिया। इस दौरान हीरालाल यादव, सत्तार अहमद, शशांक पाण्डेय, विवेक नायक, शाहनवाज़ अहमद एवं शहादत हुसैन भी प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप में शामिल थे।

 

दुर्ग |
नगर पालिक निगम दुर्ग की मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को महापौर श्रीमती अलका बाघमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल सहित सभी एमआईसी सदस्यों की उपस्थिति में नगर विकास से जुड़े अहम एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें जल प्रबंधन, सड़क, पाइपलाइन एवं स्वच्छता से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक में ये रहे उपस्थित

एमआईसी सदस्य नरेंद्र बंजारे, देवनारायण चंद्राकर, शेखर चंद्राकर, लीना दिनेश देवांगन, ज्ञानेश्वर ताम्रकर, काशीराम कोसरे, मनीष साहू, शिव नायक, लीलाधर पाल, शशि साहू, नीलेश अग्रवाल, हर्षिका संभव जैन, उपायुक्त मोहेन्द्र साहू, अभियंता अधिकारी विनीता वर्मा, मो. सलीम सिद्दीकी, प्रकाशचंद थावनी, सुरेश केवलानी, पंकज साहू, रेवाराम मनु, दुर्गेश गुप्ता, अभय मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।


जल प्रबंधन को मजबूती

नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 04, गया नगर में 1500 किलोलीटर क्षमता के उच्च स्तरीय जलागार के निर्माण हेतु 15वें वित्त आयोग अनुदान अंतर्गत मिलियन प्लस सिटीज (जल प्रबंधन) योजना के तहत ₹199.02 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।


सड़क व पाइपलाइन कार्यों को बड़ी मंजूरी

  • महाराजा चौक से बोरसी चौक तक प्रस्तावित 1.80 किमी लंबे फोरलेन सड़क निर्माण के लिए आवश्यक पाइपलाइन शिफ्टिंग कार्य को स्वीकृति।

  • मिनीमाता चौक से महाराजा चौक होते हुए ठगड़ा डेम तक पाइपलाइन शिफ्टिंग कार्य को वर्ष 2025–26 के बजट में सम्मिलित करते हुए ₹439.50 लाख की स्वीकृति।

  • चंडी मंदिर से नया पारा मार्ग (लंबाई 0.90 किमी) के चौड़ीकरण एवं पुनर्निर्माण अंतर्गत पाइपलाइन शिफ्टिंग हेतु ₹100.45 लाख स्वीकृत।


स्वच्छता को मिलेगा नया आयाम

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) घटक के तहत शहर में 8 स्थानों पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इसके अंतर्गत सूखा एवं गीला कचरा प्रबंधन हेतु नए संयंत्रों की स्थापना, पूर्व स्थापित संयंत्रों के उन्नयन तथा आगामी 5 वर्षों के संचालन एवं संधारण के लिए कुल ₹1597.69 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह पहल शहर में कचरे के पृथक्करण, वैज्ञानिक निपटान और स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


महापौर का निर्देश

महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने बैठक में एमआईसी सदस्यों से अनुरोध किया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु 8 उपयुक्त स्थानों का शीघ्र चिन्हांकन कर विभाग को जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ हो सके।


इन सभी स्वीकृतियों से नगर में जलापूर्ति, सड़क, स्वच्छता एवं नागरिक सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा और दुर्ग शहर के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

RPSC SI भर्ती पर उठे सवाल,
न्यायिक जांच के घेरे में रहीं डॉ. मंजू शर्मा —
इस्तीफा, अपील और अब अदालत का अगला कदम?”**

जयपुर।
राजस्थान की सबसे चर्चित भर्तियों में शामिल सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती–2021 एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की तत्कालीन सदस्य और प्रख्यात कवि कुमार विश्वास की पत्नी डॉ. मंजू शर्मा का नाम न्यायिक जांच के दायरे में आया, हालांकि उनके विरुद्ध अब तक किसी प्रकार का सीधा कानूनी आरोप या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा मामला

अगस्त 2024 में राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने SI भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “Systematic Corruption” से प्रभावित बताया। अदालत ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए यह संकेत दिया कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार स्तर पर प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है।

इन्हीं टिप्पणियों के बाद आयोग के तत्कालीन सदस्यों की भूमिका न्यायिक जांच के दायरे में आई, जिनमें डॉ. मंजू शर्मा भी शामिल रहीं।

इस्तीफा लेकिन आरोप से इनकार

अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद डॉ. मंजू शर्मा ने
? 1 सितंबर 2025 को RPSC सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे राजस्थान के राज्यपाल ने
? 15 सितंबर 2025 को स्वीकार कर लिया।

अपने इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि—

  • उनके खिलाफ किसी भी एजेंसी में कोई आपराधिक जांच लंबित नहीं है

  • उन्हें किसी भी मामले में अभियुक्त नहीं बनाया गया है

  • उन्होंने आयोग की गरिमा और अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए पद छोड़ा

अब मामला अदालत में विचाराधीन

डॉ. मंजू शर्मा ने हाईकोर्ट की एकल पीठ की टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए उन्हें हटाने की मांग के साथ विशेष अपील (Special Appeal) दायर की है।
उनका तर्क है कि—

“बिना पक्षकार बनाए और बिना सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार की टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”

भर्ती का भविष्य अधर में

अब बड़ा सवाल यह है कि—

  • क्या SI भर्ती 2021 पूरी तरह रद्द होगी?

  • क्या न्यायिक जांच किसी औपचारिक आपराधिक जांच में बदलेगी?

  • या फिर हाईकोर्ट की अपील में कोई नया मोड़ आएगा?

फिलहाल, मामला न्यायालय के विचाराधीन है, और अंतिम निर्णय आना बाकी है।


✍️ नोट: यह समाचार न्यायालयी रिकॉर्ड, सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है।

 

⚖️ मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर स्कूल शिक्षा सचिव को सौंपे 253 पन्नों के दस्तावेज

? बोले— प्रार्थना और दुवा में गरीब बच्चों की जीत की कामना कीजिए

रायपुर।
छत्तीसगढ़ में गरीब, वंचित, शोषित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लाखों बच्चों के शिक्षा अधिकारों की लड़ाई एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिनांक 23/01/2026 को जारी आदेश के अनुपालन में आज स्कूल शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेसी को 253 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज सौंपा।

यह मामला जनहित याचिका क्रमांक 22/2016 से जुड़ा है। जिरह के दौरान विकास तिवारी द्वारा राजधानी रायपुर के सुंदर नगर स्थित कृष्णा किड्स एकेडमी (बिना मान्यता संचालित) में एक नन्ही बच्ची को शिक्षिका द्वारा अगरबत्ती से जलाने की गंभीर घटना न्यायालय के संज्ञान में लाई गई थी। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रायपुर के एक विंग में साजिश के तहत आग लगाए जाने और उसमें रखे गए गरीब छात्रों के आरटीई दस्तावेज, निजी स्कूलों की मान्यता फाइलें, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के कागजात तथा फीस नियामक से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जलाकर नष्ट करने के प्रमाण और समाचार भी प्रस्तुत किए गए थे।

इन गंभीर आरोपों पर माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आदेश दिया था कि संबंधित सभी दस्तावेज 10 दिनों के भीतर स्कूल शिक्षा सचिव को सौंपे जाएं, ताकि विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को निर्धारित है।

दस्तावेज सौंपने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से भावुक अपील करते हुए कहा—

“छत्तीसगढ़ के गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग के हजारों-लाखों बच्चों के हक़ की लड़ाई और आप सभी के बच्चों को बेहतर स्कूल शिक्षा दिलाने की लड़ाई मैं अकेला लड़ रहा हूँ।
मेरी क्षमता से कहीं अधिक मजबूती और कुर्बानी के साथ इस संघर्ष में खड़ा हूँ।
इस लड़ाई में मेरी जीत का अर्थ लाखों गरीब बच्चों की जीत है,
और मेरी हार लाखों बच्चों की हार होगी।
इसलिए प्रार्थना और दुवा में उन बच्चों की जीत की कामना कीजिए।”

उनका यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति की याचिका नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 11 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई और स्कूल शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

संगम स्नान स्थगित कर प्रयागराज से प्रस्थान, बोले— “पीड़ा के क्षणों में जल भी शांति नहीं दे सकता”

प्रयागराज।
महाराष्ट्र में हुए दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री समेत पाँच लोगों के असामयिक निधन की अत्यंत दुखद घटना ने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया है। इस राष्ट्रीय त्रासदी के बाद ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा है कि वे अब विशेष परिस्थिति में ही प्रयागराज छोड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर वे अब कोई और चर्चा नहीं करना चाहते

मंगलवार की रात प्रशासन की ओर से ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा शंकराचार्य के मुख्य कार्याधिकारी चंद्रप्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र एवं प्रस्ताव भेजा गया। इसमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराने का आमंत्रण दिया गया था। माना जा रहा है कि उमा भारती के बयान के पश्चात सरकार और प्रशासन दोनों ने पहल करते हुए यह आमंत्रण भेजा।

हालाँकि, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गहरे शोक और संवेदना के भाव में संगम स्नान से विरत रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा—

“संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है।
लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं।
जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति नहीं दे सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती

“आज हम यहाँ से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।
ये प्रश्न न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।”

शंकराचार्य का यह निर्णय केवल एक व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शोक के प्रति संवेदनशीलता, नैतिक चेतना और आत्मिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जा रहा है। उनके शब्दों और मौन में वह पीड़ा झलकती है, जो आज पूरे देश के हृदय में समाई हुई है।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की

    रायपुर / छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व श्री विवेक आचार्य ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं का विस्तृत विवरण दिया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत संवर्धन तीनों क्षेत्रों में समन्वित प्रगति का मॉडल स्थापित किया है।

पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा,पर्यटन विभाग- निवेश, रोजगार और वैश्विक पहचान की ओर तेज़ कदम
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से निजी निवेश के नए द्वार खुले। राज्य और देश के प्रमुख शहरों में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक निजी निवेश सुनिश्चित किया गया। इससे पर्यटन अधोसंरचना, होटल, रिसॉर्ट और साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रामलला दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के साथ हुए समझौते के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में लगभग 42 हजार 500 श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों से अयोध्या दर्शन कराया गया। यह योजना धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। राज्य में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होम-स्टे नीति लागू की गई। 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने 24 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ होम-स्टे नीति 2025-30 को अधिसूचित किया है। यह नीति राज्य भर में नए होम-स्टे के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पंूजी निवेश सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है, जो ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन का समर्थन करती है, इसके लिए राज्य सरकार ने बजट भी स्वीकृत किया है।

फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर- 350 करोड़ की परियोजना
डॉ. रोहित यादव ने बताया कि भारत सरकार की राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत एकीकृत फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर के विकास की मंजूरी मिली है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 350 करोड़ रूपए है। भूमि पूजन 24 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के करकमलों से हुई है। यह छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी।

भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना
संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व श्री विवेक आचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। एक जनवरी 2026 को भारत के पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस परियोजना का भूमिपूजन किया। भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है।

मयाली-बगीचा विकास, सिरपुर एकीकृत विकास का मास्टर प्लान तैयार
भारत सरकार ने जशपुर में मयाली-बगीचा सर्किट अंर्तगत तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ रूपए मंजूर किए हैं। इस परियोजना का भूमिपूजन 25 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा किया गया था। सिरपुर एकीकृत विकास सिरपुर को एक विश्व विरासत स्थल में बदलने के लिए एक मास्टर प्लान विकसित किया जा रहा है।

चित्रकोट ग्लोबल डेस्टिनेशन डेवलपमेंट
चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट नामक एक व्यापक प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को एक वैश्विक स्तर पर पुनर्विकसित करना है। इस परियोजना हेतु पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार से 250 करोड़ रूपए की फंडिंग अपेक्षित है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन का राष्ट्रव्यापी प्रचार
पर्यटन सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में आयोजित वैश्विक यात्रा कार्यक्रमों में भाग लेकर छत्तीसगढ़ पर्यटन का देश-विदेश मे भी प्रचार-प्रसार किया, जिससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर भी जगह मिली। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने फिक्की जैसी संस्थाओं के साथ भी भागीदारी की है, जिससे देश के प्रमुख प्रचार मंचों और कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। यूनिवर्सल ट्रैवल कॉन्क्लेव जैसी प्रसिद्ध यात्रा प्रदर्शनियों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

राज्य में पर्यटन से संबंधित व्यवसायों के पंजीकरण में तेजी से वृद्धि
छत्तीसगढ़ में जनवरी 2024 तक टूर ऑपरेटर व ट्रेवल ऑपरेटरों की संख्या मात्र 30 थी, वर्तमान में यह संख्या 300 से अधिक पहुंच चुकी है। इसके अतिरिक्त 15 होटल छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के साथ पंजीकृत है, जिसकी और अधिक बढ़ने की संभावना है। रिसॉर्टस और मोटल की परिचालन दक्षता और रणनीतिक प्रबंधन के कारण छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का वित्तीय लाभ वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 2 करोड़ रूपए था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लाभ पांच गुना बढ़कर 10 करोड़ रूपए हो गया है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन से स्थानीय व्यक्तियों के लिए रोजगार, 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य
सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति 2026 के तहत अगले पांच वर्षों में 350 करोड़ रूपए. से अधिक के निवेश का अनुमान है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल लीजकम डेवलपमेंट मॉडल के तहत 17 पर्यटन संपत्तियों को निजी भागीदारी से आउटसोर्स कर 200 करोड़ रूपए का निवेश आकर्षित करने की योजना बना रही है, जिससे सैकड़ों स्थानीय व्यक्तियों के लिए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। राज्यभर में 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य है। इसी तरह चित्रकोट में टेंट सिटी के विकास की योजना है, जिसके तहत चित्रकोट फॉल्स के पास साहसिक गतिविधियों के साथ कम से कम 50 लक्जरी टेंट लगाए जाएंगे। फिक्की के सहयोग से छत्तीसगढ़ ट्रैवल मार्ट नामक एक वार्षिक फ्लैगशिप कार्यक्रम स्थापित किया जाएगा। यह आयोजन बीटूबी पर्यटन को बढ़ावा देने पर केन्द्रित होगा, जिसके तहत भारतीय राज्यों के 200 से अधिक टूर ऑपरेटरों को आकर्षित करने योजना है।
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की उपलब्धियां
संस्कृति एवं पुरातत्त्व के संचालक श्री विवके आचार्य ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के कलाकारों, साहित्यकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन किया जा रहा है, जिससे विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके। उन्होंने बताया कि चिन्हारी पोर्टल मंे पंजीकृत 141 कलाकारों एवं साहित्यकारों को वित्तीय वर्ष-2024-25 में लगभग 34 लाख रूपए एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 130 कलाकारों को लगभग 31 लाख रूपए की राशि पेंशन के रूप में प्रदान की गई। इसी तरह कलाकार कल्याण कोष योजना के अंर्तगत कलाकारों और साहित्यकारों अथवा उनके परिवार के सदस्यों की बीमारी, दुर्घटना एवं मृत्यु की स्थिति में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 08 अर्थाभाव ग्रस्त साहित्यकारों/कलाकारों को 2 लाख रूपए एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 44 प्रकरणों हेतु 14 लाख रूपए स्वीकृत किया गया है। राज्य शासन छत्तीसगढ़ के कलाकारों एवं साहित्यकारों के प्रत्येक सुख-दुख मेें साथी है, तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ राज्य के कलाकारों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है।

बस्तर पंडुम
छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए किया जा रहा है। यह उत्सव तीन चरणों में 10 जनवरी से 9 फरवरी 2026 तक चलेगा। जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्य, वाद्य यंत्र, वेश-भूषा-आभूषण, पूजा पद्धति, हस्तशिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय, पारंपरिक व्यंजन, क्षेत्रीय साहित्य, वन-आधारित औषधीय ज्ञान, पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी।

पुरातत्व क्षेत्र की उपलब्धियां
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन ने प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी है। संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा कराए जा रहे इस उत्खनन में वैज्ञानिक ए.एम.एस. रेडियोकार्बन (कार्बन-14) डेटिंग के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल यानी 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी।
भारत भवन विविध कला एवं सांस्कृतिक केन्द्र, राज्य अभिलेखागार, राजकीय मानव संग्रहालय एवं स्वामी विवेकानंद स्मारक संग्रहालय की स्थापना की योजना है।

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