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June 19, 2026
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दुर्ग

दुर्ग (5114)

दुर्ग | 

दुर्ग शहर के विभिन्न वार्डों में गहराते जल संकट और बदहाल जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर आज जन-प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की। शहर के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से पानी की बूंद-बूंद के लिए मची हाहाकार और स्थानीय तालाबों के सूखने/खाली किए जाने के विरोध में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

प्रमुख समस्याएँ: क्यों प्यासा है दुर्ग?

ज्ञापन में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए प्रमुख रूप से तीन बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया:

तालाबों का अस्तित्व खतरे में: शहर के पारंपरिक जल स्रोतों (तालाबों) को खाली किया जा रहा है, जिससे न केवल भूजल स्तर गिर रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

अनियमित जलापूर्ति: कई मोहल्लों में नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी का दबाव (Pressure) बहुत कम है, और कुछ क्षेत्रों में तो घंटों तक पानी की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

भीषण गर्मी में आम नागरिक बेहाल: पारा बढ़ने के साथ ही पानी की खपत बढ़ी है, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभाग सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रहे हैं।

ज्ञापन की मुख्य मांगें

कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

जलापूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग: उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए जहाँ पानी नहीं पहुँच रहा है और वहां टैंकरों के बजाय पाइपलाइन व्यवस्था को सुधारा जाए।

तालाबों का संरक्षण: तालाबों को खाली करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए जल संचय की योजना बनाई जाए।

दोषियों पर कार्रवाई: जलापूर्ति बाधित होने के पीछे यदि कोई तकनीकी लापरवाही या प्रशासनिक ढिलाई है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

प्रशासनिक आश्वासन

कलेक्टर महोदय ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को वस्तुस्थिति की जांच करने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि "हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

"पानी का अधिकार, बुनियादी अधिकार है। दुर्ग की जनता को प्यासा रखकर विकास की बातें बेमानी हैं। हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस पर त्वरित एक्शन लेगा।"

भिलाई ब्यूरो 

भिलाई। छत्तीसगढ़ और नागपुर विदर्भ क्षेत्र में तबलीग़ जमात के 'अमीर' हाजी मोहम्मद असलम का शनिवार 2 मई को तड़के दो बजे इंतकाल हो गया। हाजी असलम कई दिनों से बीमार चल रहे थे। खुर्सीपार निवासी सैय्यद असलम ने बताया कि मरहूम हाजी मोहम्मद असलम के जनाजे की नमाज़ यंग मुस्लिम फुटबॉल ग्राउंड मोमिनपुरा नागपुर में उनके बेटे मौलाना अब्दुल्ला ने पढ़ाई। 

 नमाजे जनाजा मे निजामुद्दीन मरकज दिल्ली, बरार, महाराष्ट्र, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के उलेमा के साथ आम लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के मुस्लिम समाज के लोगों ने हजारों की तादाद में नागपुर पहुंच कर अपनी अकीदत का इजहार किया। 

गौरतलब है कि तबलीग़ जमात में आध्यात्मिक स्तर पर संगठन प्रमुख 'अमीर' का पद मशविरा से तय होता है। हाजी मोहम्मद असलम नागपुर के रहने वाले थे और तबलीग़ के काम को लेकर छत्तीसगढ़ बरार , महाराष्ट्र सहित देश विदेश में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि हाजी मोहम्मद असलम ने अल्लाह के दीन और हज़रत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम की पाकीजा जिंदगी को अपनाने लोगों की सच्ची रहनुमाई की। समाज के लिए उनका दुनिया से जाना एक रहनुमा एक सच्चा दाई (प्रेरक व्यक्तित्व) और बुर्जुग शख्सियत का चला जाना है।

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आईकेएफ सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान संवाद किया वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच ने

भिलाई। टाइगर कैपिटल के सहयोग से इंडिया खेलो फुटबॉल (आईकेएफ) के सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने पालकों और उभरते फुटबॉलरों से संवाद किया। उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों की परवरिश में सामने आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए पालकों को कुछ सुझाव भी दिए। उल्लेखनीय है कि यहां 2 और 3 मई 4 अलग-अलग सत्रों में सेक्टर-2 के फुटबॉल ग्राउंड में ट्रायल रखा गया था। जिसमें 200 से ज्यादा उभरते फुटबॉलरों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया।

ट्रायल के आखिरी दौर के बाद 3 मई की शाम पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन का संवाद सत्र रखा गया। उन्होंने इस दौरान समाज में खास तौर पर बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजीटल दुनिया में बढ़ती निर्भरता को बड़ी चुनौती बताया।

उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि आज स्मार्ट फोन की लत के चलते मैदान के बजाए डिजीटल दुनिया में खेल खेला जा रहा है, जो हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों को सलाह दी कि दूसरों को भी खेल के लिए प्रेरित करें।

जैन ने पालकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समय दें और उन्हें सुनने की कोशिश करें। क्योंकि किसी भी बच्चे के लिए माता-पिता से बेहतर काउंसलर कोई नहीं होता। जिस तरह किसी भी पौधे की शुरूआती अवस्था में सुरक्षा के लिए उसके चारों तरफ से घेरा लगाना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह बच्चों को भी एक उम्र तक पैरेंट्स की जरूरत पड़ती है। इसलिए अपने बच्चों को भरपूर समय दें और उनके खानपान के साथ नींद पर भी ध्यान दें। इस दौरान कुछ पालकों और बच्चों ने सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा भी शांत की।

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दुर्ग। शौर्यपथ 
शहर के प्रमुख बस स्टैंड और आसपास का बाजार क्षेत्र इन दिनों अव्यवस्था, अतिक्रमण और विवादित निर्माणों के कारण चर्चा में है। जमीनी हालात और उपलब्ध तस्वीरें संकेत देती हैं कि विस्थापन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही नए निर्माण कार्य आगे बढ़ रहे हैं, जिससे न सिर्फ नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।


मामला क्या है?

  • बस स्टैंड क्षेत्र में पुराने शौचालय के पास स्थित दुकानों को हटाकर बसों के लिए स्थान विकसित करने की योजना प्रस्तावित है।
  • विभागीय कर्मचारियों की माने तो यह योजना अभी प्रक्रियाधीन बताई जा रही है, लेकिन इसी दौरान पास के हिस्से में नई दुकान का निर्माण शुरू/जारी होने की बात सामने आई है।
  • निर्माण स्थल पर मटेरियल (गिट्टी/रेत) का ढेर और ढांचा खड़ा होना संकेत देता है कि काम आगे बढ़ चुका है।
  • वार्ड के इंजिनियर एवं EE भी नहीं दे पारहे है संतुष्टि पूर्ण जवाब 
  • अन्य विस्थापितों से चर्चा पर ज्ञात हुआ कि अन्य विस्थापितों को अभी तक नहीं मिली निर्माण की अनुमति 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह निर्माण बिना अंतिम स्वीकृति/विस्थापन पूर्ण हुए हो रहा है, तो यह नियमों की अनदेखी का मामला बन सकता है।


पुरानी दुकानें—कार्रवाई अधूरी, स्थिति यथावत

दूसरी ओर, जिन दुकानों को हटाने/शिफ्ट करने की बात है, वहां शटर बंद हैं लेकिन अंतिम कार्रवाई और स्पष्ट आवंटन/पुनर्वास की स्थिति सामने नहीं आई
इससे यह सवाल उठ रहा है कि एक तरफ नई दुकान बन रही है, वहीं पुरानी प्रक्रिया अधूरी क्यों है?


पार्किंग और यातायात पर असर

बस स्टैंड क्षेत्र पहले से ही भीड़भाड़ वाला है।

  • पार्किंग एरिया पर दबाव पहले से अधिक है
  • अवैध रूप से संचालित राम रसोई पर कार्यवाही का ना होना और शिकायत पर बाजार अधिकारी का जवाब ना देना आशंका का विषय 
  • बस स्टंट में लगातार अवैध कब्ज़े पर कार्यवाही का न होना बाजार अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल 
  • सड़क किनारे निर्माण/मटेरियल से आवागमन प्रभावित होने की आशंका
  • बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए असुविधा बढ़ने का खतरा

शहरी योजना के मानकों के अनुसार, ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण यातायात आकलन और स्पष्ट लेआउट के बाद ही होना चाहिए।


इंदिरा मार्केट का उदाहरण: पुरानी फाइलें, अधूरा समाधान

इंदिरा मार्केट की पार्किंग में वर्षों पहले बने विवादित दुकानों का मामला आज भी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

  • एक दुकान पर ताला लगा, लेकिन अंतिम निपटारा/आवंटन स्पष्ट नहीं
  • संबंधित मामलों में सूचना का अभाव और पारदर्शिता पर सवाल

यह उदाहरण बताता है कि निर्णय लेने और उन्हें अंतिम रूप देने के बीच बड़ा गैप है।


जवाबदेही पर सवाल, लेकिन आधिकारिक पक्ष जरूरी

मामले में स्थानीय स्तर पर बाजार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
साथ ही, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों/जनप्रतिनिधियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है

  • क्या निर्माण को अनुमति दी गई है?
  • क्या विस्थापन की वैकल्पिक व्यवस्था तय हो चुकी है?
  • क्या यह अस्थायी ढांचा है या स्थायी निर्माण?

इन सवालों के स्पष्ट जवाब से ही स्थिति साफ हो सकेगी।


नियम क्या कहते हैं? (संक्षेप में)

  • नगर निगम क्षेत्र में निर्माण से पहले स्वीकृत नक्शा/अनुमति अनिवार्य
  • सार्वजनिक/यातायात क्षेत्रों में निर्माण हेतु विशेष अनुमोदन और सुरक्षा मानक
  • अतिक्रमण/अनधिकृत निर्माण पर नोटिस, सीलिंग/हटाने की कार्रवाई

  

भिलाई: शिक्षा ही समाज की तरक्की की चाबी है, और जब किसी जरूरतमंद बच्चे के सपनों को संसाधनों की कमी से टूटने का डर सताता है, तो समाज के जागरूक संगठनों का आगे आना एक नई उम्मीद जगाता है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण भिलाई में सर्व समाज कल्याण समिति द्वारा पेश किया गया है, जिसने सेक्टर-7 की बेटी ईशा साहू की संपूर्ण शिक्षा का बीड़ा उठाया है।

इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू ने की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि समाज के हर जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा से जोड़ना ही समिति का परम ध्येय है।

भिलाई टाइम्स की खबर बनी उम्मीद की किरण

इस नेक पहल की शुरुआत तब हुई जब 'भिलाई टाइम्स' में प्रकाशित एक समाचार के माध्यम से ईशा साहू की संघर्षपूर्ण स्थिति और उनकी पढ़ाई में आ रही बाधाओं की जानकारी सामने आई। अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू के निर्देश पर समिति की टीम ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और ईशा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का विस्तृत सर्वे किया।

निर्णय: ईशा की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी समिति की

सर्वे रिपोर्ट और परिवार की वास्तविक स्थिति को समझने के बाद, सर्व समाज कल्याण समिति ने एक बड़ा और प्रशंसनीय निर्णय लिया। समिति के पदाधिकारियों ने आज ईशा के परिवार से मुलाकात की और उन्हें यह सुखद संदेश दिया कि "अब ईशा की आगे की संपूर्ण शिक्षा की जिम्मेदारी सर्व समाज कल्याण समिति भिलाई द्वारा उठाई जाएगी।"

इस जिम्मेदारी के अंतर्गत ईशा को किसी भी मोड़ पर पढ़ाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। समिति द्वारा ईशा को निम्नलिखित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी:

स्कूल की पूरी पढ़ाई का खर्च।

स्कूल ड्रेस।

कॉपी-किताबें।

शिक्षा से संबंधित अन्य सभी आवश्यक सामग्री।

अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू का विजन

इस नेक पहल पर अपना वक्तव्य देते हुए सर्व समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू ने कहा:

"हमारा प्रयास समाज के हर उस जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी भी कारण से पीछे रह रहा है। ईशा साहू की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाकर हम न केवल उसके सपनों को सच करने में मदद कर रहे हैं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत नींव भी रख रहे हैं। सर्व समाज कल्याण समिति समाज के प्रति अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।"

यह पहल भिलाई में एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि यदि समाज और उसके संगठन एकजुट हों, तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

दुर्ग। खेल और खिलाड़ियों के लिए काम करने वाले संगठन क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रसाद महानकर के दुर्ग प्रवास के दौरान दुर्ग जिला ईकाई के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के पं. रत्नाकर झा सभागार में हुई। इस बैठक में क्रीड़ा भारती के प्रदेश मंत्री और राष्ट्रीय युवा आयाम प्रमुख सुमित उपाध्याय भी विशेष रुप से शामिल हुए। 

राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रसाद महानकर ने कहा कि खेल भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है। खेलों के माध्यम से बालक-बालिकाओं में संस्कार, अनुशासन और टीम वर्क की भावना जागृत करके श्रेष्ठ नागरिक तैयार करने की दिशा में सार्थक कार्य को गति प्रदान करने में सबका सक्रिय योगदान आवश्यक है। खेल खिलाना और खिलाड़ी तैयार करना केवल सरकार का काम नहीं है क्योंकि भारतीय परिवेश में खेलों पर समाज का ही प्रथम अधिकार है, समाज ही खेलों का प्रथम संरक्षक भी है। गांवों में अभाव के बीच भी उत्कृष्ठ खिलाड़ी तैयार होते रहे हैं। हर घर में खेल के लिए वातावरण होना चाहिए। खेल केवल मेडल और रिकार्ड के लिए नही बल्कि शरीर व मन को स्वस्थ रखने का ध्येय के साथ हो। 

 प्रदेश मंत्री और राष्ट्रीय युवा आयाम प्रमुख सुमित उपाध्याय ने कहा कि आगामी वर्ष 2036 के ओलंपिक में कबड्डी के खेल को शामिल कराना क्रीड़ा भारती का संकल्प है। इसके लिए कबड्डी के प्रति छात्र-छात्राओं, बच्चों, युवाओं, महिलाओं में भाव जागृत कराने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि अलग अलग स्तर जैसे विद्यालयों, कालेजों, हास्टलों, युवा क्लबों, महिला स्वसहायता समूहों के स्तर पर आयु वर्ग के साथ महिला-पुरुष की टीमों के बीच कबड्डी की छोटी छोटी प्रतियोगिताओं के माध्यम से जनमानस में कबड्डी के प्रति रुचि बढ़ाना आवश्यक है। कबड्डी का खेल हमारी जड़ों से जुड़ा खेल है। क्रीड़ा भारती के प्लेटफार्म पर आनलाइन पंजीयन के माध्यम से टीमों को जोड़कर ऐसे आयोजन देश भर में शुरु हुए हैं। 

 बैठक में प्रदेश के कबड्डी आयोजन प्रमुख डा. सुनील साहू ने कबड्डी के आयोजन को लेकर किये जा रहे कार्यों पर जानकारी दी और आगामी कार्ययोजना से अवगत कराया। दुर्ग विभाग प्रमुख विनोद नायर ने क्रीड़ा भारती के कार्यों से प्रभावित खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को क्रीड़ा भारती का सदस्य बनाये जाने पर अपने विचार रखे।

 बैठक का संचालन प्रान्त दिव्यांग प्रमुख राजेन्द्र कुमार ने किया। बैठक में प्रमुख रुप से महिला आयाम प्रदेश प्रमुख पूनम मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष किशन, जिला मंत्री संध्या दुबे, बालक दास डहरे, योग प्रमुख हितेश साहू, मीडिया प्रभारी प्रमोद वाघ, कल्पना स्वामी, युवा प्रमुख महावीर, कार्यकारिणी सदस्य रमेश दुबे, हिना साहू, नीतेश सिंह, मृदुला शरण, ओम झा सहित खिलाड़ीगण और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

भिलाई: नगर पालिक निगम भिलाई के चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे सत्ताधारी दल पर हमलावर होने के बजाय भाजपा के भीतर की 'अंदरूनी खींचतान' सड़कों पर नुमाया होने लगी है। सोमवार, 4 मई को निगम के सामने हुए जंगी प्रदर्शन में जो कुछ भी हुआ, उसने भिलाई भाजपा के भीतर पनप रही गुटबाजी और 'वर्चस्व की जंग' को सार्वजनिक कर दिया है।

कमिश्नर का नाम लेते ही 'खामोश' हुआ माइक

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य महापौर नीरज पाल और कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को घेरना था, लेकिन सारा फोकस तब बदल गया जब भाजपा पार्षद संतोष मौर्या ने निगम कमिश्नर राजीव कुमार पांडेय पर निशाना साधा। हैरानी की बात यह रही कि किसी विरोधी दल ने नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के एक विशेष नेता के निर्देश पर मौर्या का माइक बंद कर दिया गया।

यह घटना केवल एक माइक बंद होने की नहीं, बल्कि उस 'अदृश्य अंकुश' की ओर इशारा करती है, जो भाजपा के कुछ नेताओं का अधिकारियों के प्रति नरम रुख और अपने ही पार्षदों के प्रति कठोर नियंत्रण को दर्शाता है।

मीडिया को देख डैमेज कंट्रोल की कोशिश

जब जिलाध्यक्ष को इस बात का अहसास हुआ कि मीडिया के कैमरे इस पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रहे हैं और पार्टी की किरकिरी हो रही है, तब आनन-फानन में संतोष मौर्या को वापस बुलाया गया। हालांकि, तब तक तीर कमान से निकल चुका था। मंच पर ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच का विरोधाभास और गुटबाजी का आलम साफ नजर आ रहा था।

पीयूष मिश्रा का कड़ा रुख और अंदरूनी अंतर्विरोध

एक तरफ संतोष मौर्या का माइक बंद किया गया, तो दूसरी तरफ भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने भी कमिश्नर पर सीधा हमला बोला। एक ही मंच पर एक ही अधिकारी के खिलाफ दो पार्षदों के लिए अलग-अलग पैमाना होना यह बताता है कि भिलाई भाजपा में 'पावर सेंटर' बंटे हुए हैं।

संगठन में 'वर्चस्व' की पुरानी बीमारी

यह पहली बार नहीं है जब भिलाई में भाजपा के भीतर गुटबाजी दिखी हो। हाल ही में:

BJYM नियुक्तियां: BJYM के ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष के बीच का टकराव अभी ठंडा भी नहीं हुआ था।

निकाय चुनाव का खतरा: आने वाले कुछ महीनों में भिलाई निगम के चुनाव होने वाले हैं। यदि गुटबाजी इसी तरह हावी रही, तो टिकट वितरण के समय 'गहमागहमी' और 'भितरघात' की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी।

निष्कर्ष: कांग्रेस से पहले अपनों से लड़ना होगा!

भिलाई में भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का समय है। एक तरफ पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जंगी प्रदर्शन' का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ मंच पर ही अपनों की आवाज दबाई जा रही है। अगर नेतृत्व ने समय रहते इन 'गुटों' को एक सूत्र में नहीं पिरोया, तो निकाय चुनाव में कांग्रेस के भ्रष्टाचार से ज्यादा भाजपा की यह अंदरूनी 'जंग' उस पर भारी पड़ सकती है।

राजनीतिक गलियारों का बड़ा सवाल: > "क्या भिलाई भाजपा के कुछ नेता पर्दे के पीछे से अधिकारियों को बचा रहे हैं, या फिर यह केवल अपनी ही पार्टी के भीतर एक-दूसरे को नीचा दिखाने का खेल है?"

दुर्ग। राष्ट्र निर्माण की नींव में अपना पसीना बहाने वाले 'श्रमयोगियों' के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने हेतु श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ द्वारा अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। दुर्ग के गायत्री मंदिर (वार्ड–25) स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्था ने मेहनतकश मजदूर भाई-बहनों को उपहार एवं मिष्ठान भेंट कर उनके समर्पण को सलाम किया।

कठिन परिश्रम को कृतज्ञता का नमन

इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय उन श्रमिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना था, जो चिलचिलाती धूप और विपरीत परिस्थितियों की परवाह किए बिना समाज और देश के विकास चक्र को गतिमान रखते हैं। संस्था का मानना है कि हर ईंट और हर निर्माण के पीछे एक मजदूर के सपनों और संघर्ष की कहानी छिपी होती है।

नेतृत्व के विचार: "मजदूर राष्ट्र की रीढ़"

संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष नीतू श्रीवास्तव ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में कहा:

"मजदूर हमारे समाज की असली रीढ़ हैं। उनके पसीने की हर बूंद से राष्ट्र की प्रगति की इबारत लिखी जाती है। उनके सम्मान और सहयोग के बिना किसी भी विकसित समाज की कल्पना करना असंभव है। हमारा यह लघु प्रयास उनके असीम योगदान के प्रति एक विनम्र कृतज्ञता है।"

वहीं, कार्यक्रम की प्रभारी और वार्ड–25 की पार्षद व संस्था अध्यक्ष मनीष सोनी ने अपने उद्बोधन में जोर देते हुए कहा कि मजदूरों का सम्मान हमारे संस्कारों का अभिन्न अंग है। हमें सदैव उनके परिश्रम की कद्र करनी चाहिए और उनके जीवन को सुगम बनाने हेतु तत्पर रहना चाहिए।

इनकी रही गरिमामय उपस्थिति

आयोजन को सफल बनाने में संस्था के मार्गदर्शकों और सदस्यों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से:

संरक्षक: अंजन राय चौधरी

वरिष्ठ सदस्य: प्रीति खरे, साधना चौधरी, रूपलता साहू, अनुपम जैन

सहयोगी: शैलेश वर्मा, सीमा गुप्ता, रानी साहू, संगीता देवांगन, रानी भाटिया

सभी अतिथियों ने मजदूरों के साथ खुशियाँ साझा कीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के अंत में श्रमिकों के चेहरों पर खिली मुस्कान ने इस आयोजन की सार्थकता को सिद्ध कर दिया।

श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़: सेवा, समर्पण और सम्मान का संकल्प।

  दुर्ग / शौर्यपथ / गजेन्द्र यादव ने आज लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सभाकक्ष में जिले में आगामी सुशासन तिहार की तैयारियों एवं विभागवार कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बिजली, पानी, आवास, राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को जनहित के कार्यों को तेजी से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
मंत्री ने 01 मई से शुरू होने वाले सुशासन तिहार को लेकर सभी तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों का त्वरित और संवेदनशील निराकरण किया जाए, ताकि आम जनता को बिना किसी विलंब के लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्य करने की हिदायत दी और चेताया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि इस दौरान मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी शिविरों में शामिल होकर सीधे जनता से फीडबैक भी लेंगे।
राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री ने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर जोर दिया और विशेष रूप से समय सीमा से बाहर हो चुके मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी कार्य पारदर्शिता से हों।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एक स्कूल को “मॉडल स्कूल” के रूप में विकसित करने तथा आदर्श कन्या विद्यालय में विद्यार्थियों को जेईई और नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कराने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। वहीं जिले के 34 छात्रावासों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने आदिवासी विकास विभाग को सभी छात्रावासों का निरीक्षण कर भोजन, स्वच्छता और सुरक्षा की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।
खाद्य विभाग को निर्देशित करते हुए मंत्री ने उचित मूल्य दुकानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तीन महीने का राशन स्टॉक अनिवार्य रूप से बनाए रखने को कहा। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में उन्होंने प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा गांवों में बीपी और शुगर जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
मनरेगा के तहत व्यापक पौधारोपण अभियान चलाने, कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रेरित करने और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया। ऊर्जा विभाग को मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना के तहत सर्वे कर आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
मंत्री यादव ने दोहराया कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखना चाहिए। बैठक में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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