January 23, 2026
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दुर्ग

दुर्ग (4954)

सुशासन का पोस्टर दुर्ग में फ टा हुआ,आयुक्त की कलम चल रही, शहर ठहर गया!


दुर्ग । शौर्यपथ ।

साल 2024 की दीपावली के बाद दुर्ग नगर पालिक निगम प्रशासन की कमान आयुक्त सुमित अग्रवाल के हाथों में आई। प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा "सुशासन" का दावा किया जा रहा है, लेकिन दुर्ग निगम क्षेत्र की जमीनी हकीकत इस दावे को आईना दिखाती नजर आ रही है। बड़े-बड़े वादों के सहारे भारतीय जनता पार्टी ने शहरी सरकार पर कब्जा तो कर लिया, पर शहर का विकास मानो फ ाइलों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमट कर रह गया है।
यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि दुर्ग निगम क्षेत्र में पसरी बदहाली की तस्वीर है। बीते लगभग एक वर्ष में विकास कार्य लगभग ठप्प हैं, ठेकेदार नजर नहीं आ रहे और निगम आर्थिक किल्लत से जूझ रहा है। इसके उलट, शहर भर में अव्यवस्थाओं का साम्राज्य तेजी से फैलता दिख रहा है, जिसने आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चर्च रोड के पास अवैध बाजार, समृद्धि बाजार क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर चल रही गतिविधियां, सुराना कॉलेज के सामने बदबूदार माहौल और संभावित बीमारियों का खतरा—ये सब निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा प्रश्नचिन्ह हैं। बड़े दुकानदारों के अवैध कब्जे आयुक्त की नजरों से ओझल हैं, जबकि गरीबों के ठेले-गुमठियों पर अतिक्रमण के नाम पर सख्ती दिखाई देती है। यही नहीं, अवैध रूप से हुए राम रसोई अनुबंध के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न होना, चयनात्मक प्रशासन की ओर इशारा करता है।
शहर के मध्य स्थित चौपाटी की बदहाल हालत "हमने बनाया, हम ही संवारेंगे" जैसे नारों की पोल खोल रही है। सड़कों पर आवारा मवेशियों की फौज, जगह-जगह गड्ढे, बदहाल चौक-चौराहे और नागरिकों को पीने के लिए दूषित जल—ये सब नगर निगम की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हैं। सुशासन तिहार में आवेदकों को गलत या भ्रामक जवाब देना और कार्रवाई के नाम पर चपरासियों व प्लेसमेंट कर्मचारियों को नोटिस थमाना, जबकि उच्च अधिकारियों को बचाने की रणनीति अपनाना, प्रशासनिक निष्पक्षता पर गहरी चोट है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्ग निगम क्षेत्र में भाजपा की शहरी सरकार होने के बावजूद, और यहीं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सरोज पाण्डेय, दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर तथा छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव का निवास स्थान होने के बावजूद, शहर की यह बदहाली आज चर्चा का विषय बनी हुई है।
ऐसे में आमजन के बीच यह सवाल गूंज रहा है—दुर्ग में ज्यादा ताकतवर कौन है? आयुक्त या फि र जनप्रतिनिधि?
शहर की अव्यवस्था, विकास की रफ्तार पर ब्रेक और निगम अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई ने आयुक्त सुमित अग्रवाल की नैतिक जिम्मेदारी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब निगाहें प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर टिकी हैं—क्या वे दुर्ग निगम क्षेत्र की सुध लेंगे, या फिर "सुशासन" केवल सोशल मीडिया और विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाएगा?
दुर्ग की जनता आज जवाब चाहती है—क्योंकि सवाल सिर्फ विकास का नहीं, भरोसे का भी है।

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिला पंचायत के सामने स्थित चौहान चाय केंद्र नामक एक अवैध गुमटी अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गढ़ कलेवा योजना के अंतर्गत विधिवत स्थान आबंटन और भारी अनुदान दिए जाने के बावजूद, ठीक उसके सामने यह अवैध गुमटी बेखौफ खड़ी है और उसी से जिला पंचायत में हजारों रुपये के फर्जी बिल पास कराए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार इस मामले की शिकायत जन दर्शन में होने के बाद दस्तावेजों की जांच जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रूपेश पांडे को सौंपी गई। यद्यपि उनका पद जिला पंचायत अधिकारियों से कनिष्ठ होने के कारण वे प्रत्यक्ष कार्रवाई के अधिकार में नहीं हैं, फिर भी उन्होंने संपूर्ण जांच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनपद पंचायत कार्यालय के ठीक सामने खड़ी अवैध गुमटी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और भी हैरानी की बात यह है कि इस अवैध ढांचे पर बिजली कनेक्शन तक उपलब्ध है, जो व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि नगर निगम के अतिक्रमण विभाग द्वारा गुमटी हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन किसी उच्च अधिकारी के कथित हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई रोक दी गई। इस दावे की सच्चाई जांच का विषय है, किंतु यह निर्विवाद तथ्य है कि एक अवैध गुमटी से फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग उजागर हो चुका है।

अब प्रश्न यह है कि पूर्व में ऐसे कितने फर्जी बिल जिला पंचायत में पास किए गए होंगे? अवैध गुमटी संचालक और इससे जुड़े अधिकारियों पर जिला प्रशासन अब तक मौन क्यों है? क्या प्रभावशाली संरक्षण के चलते कार्रवाई से बचा जा रहा है?

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि व्यवस्था में गहरी सेंध का संकेत देता है, जिसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच अब जनहित की अनिवार्य मांग बन चुकी है।

देश–प्रदेश से जुटेंगे श्रद्धालु, प्रशासन पूरी तरह रहेगा मुस्तैद – कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव

     दुर्ग / शौर्यपथ / इस्पात नगरी भिलाई पहली बार सनातन धर्म के प्रमुख ध्वजवाहक, प्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के दिव्य आगमन की साक्षी बनने जा रही है। सेवा समर्पण समिति, दुर्ग के तत्वावधान में 25 से 29 दिसंबर 2025 तक भिलाई स्थित जयंती स्टेडियम के समीप ग्राउंड में दिव्य श्री हनुमंत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक होगी, जिसमें देश–प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
इस भव्य आयोजन को लेकर दुर्ग सर्किट हाउस में एक विस्तृत प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव एवं कार्यक्रम के आयोजक खादी ग्रामोद्योग अध्यक्ष राकेश पाण्डेय ने आयोजन की तैयारियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर विस्तृत जानकारी दी।
कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि 27 दिसंबर को विशेष दिव्य दरबार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी श्रद्धालुओं की पर्ची निकालकर उनकी समस्याओं के समाधान हेतु मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को लेकर समिति द्वारा तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। कार्यक्रम संयोजक राकेश पाण्डेय के नेतृत्व में समिति अध्यक्ष पंडित वीरेन्द्र प्रसाद शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी आयोजन की सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से संपन्न कराने में जुटे हुए हैं, जो सामाजिक समभाव और सहयोग की भावना को दर्शाता है।
श्री यादव ने कहा कि यह आयोजन न केवल दुर्ग–भिलाई बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। इसी दृष्टि से जिला प्रशासन हर स्तर पर मुस्तैद रहेगा। ट्रैफिक प्रबंधन, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, सुरक्षा सहित सभी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता में रखा जाएगा। शासन स्तर पर भी हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर शासन की ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल के तहत स्वदेशी निर्मित उत्पादों और योजनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा जनजागरण हेतु चलाए जा रहे अभियानों—जैसे नशा मुक्ति, साइबर जागरूकता, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ और स्वदेशी अपनाओ—से संबंधित प्रदर्शनी एवं स्टॉल भी लगाए जाएंगे, ताकि श्रद्धालु कथा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ सकें।
कार्यक्रम के आयोजक राकेश पाण्डेय ने जानकारी दी कि 15 दिसंबर को दोपहर 2 बजे ध्वज पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न समाजों के प्रमुखों एवं धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। ध्वज पूजन के पश्चात प्रतिदिन सामूहिक रूप से श्री हनुमान चालीसा का वाचन किया जाएगा।
श्री यादव ने आगे कहा कि कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशाल एवं सुव्यवस्थित डोमशेड, पर्याप्त वाहन पार्किंग, और सुचारु आवागमन की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए पुलिस प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। परिस्थितियों एवं भीड़ प्रबंधन को देखते हुए समिति द्वारा तय कार्यक्रमों के स्वरूप में आवश्यकतानुसार परिवर्तन भी किया जा सकता है।
अंत में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव एवं आयोजनकर्ता राकेश पाण्डेय ने कहा कि भिलाई की पावन धरा पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का आगमन हम सभी के लिए अत्यंत सौभाग्यशाली क्षण है। उन्होंने देश एवं प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में दिव्य श्री हनुमंत कथा में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने की अपील की।
प्रेस वार्ता में पूर्व कैबिनेट मंत्री रमशिला साहू, पूर्व विधायक सांवलाराम डहरे, जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक, सेवा समर्पण समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

   दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने शासकीय कर्मियों के लिए वेतनमान के अनुसार मोबाइल भत्ता स्वीकृत कर ऑफिस व फील्ड से वापस आने पर मोबाइल फोन डिस्कनेक्ट कर स्वतंत्र रहने का अधिकार देने की मांग की है। संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ओर मुख्य सचिव विकासशील को भेजे पत्र में कहा है कि डिजिटल दौर में प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को घर पहुंचने पर भी आफिस, कार्यालयों ओर विभाग की रिपोर्ट देनी होती है। इसके चलते अधिकारी-कर्मचारी घर पर भी दफ्तर का काम करते रहते हैं, इससे उनके निजी जीवन में प्रभाव पड़ता है। इंटरनेट ने कार्यालयों को घर तक पहुंचा दिया है। कार्य की अधिकता और जरूरत को देखते हुए अब अधिकारी कर्मचारियों को कार्यस्थल से घर पहुंचने पर मोबाइल फोन डिस्कनेक्ट करने की आवश्यकता है जिससे वे स्वाभाविक रूप से परिवार और परिजनों को अपना समय दे सके और मानसिक ओर शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें ।
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने बताया कि हम सभी को इस गंभीर मुद्दे पर विचार विमर्श करके इसके लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के संगठनों को भी इसके लिए एक प्लेटफार्म पर आकर बैठक कर विचार करने की जरूरत है। जिससे अधिकारी कर्मचारियों को उनके मौलिक अधिकार मिल सके। महामंत्री सैय्यद असलम ने बताया कि अब समय आ गया है कि सभी कर्मचारियों को मोबाइल भत्ता स्वीकृत किया जाए।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर क्लास वन ऑफिसर अपने निजी मोबाइल से शासकीय कार्यों के लिए उपयोग करते हैं हालांकि विभिन्न विभागों में अफसर अपने और टेबल पर कार्य करने वालों को कुछ मोबाइल खर्च देते हैं जो वास्तविक खर्च से अत्यंत न्यूनतम होता है। ऐसे में उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, तृतीय श्रेणी अधिकारी व कर्मचारियों और द्वितीय श्रेणी अधिकारी व कर्मचारियों और प्रथम श्रेणी अधिकारी सभी को वेतनमान के अनुरूप मोबाइल भत्ता स्वीकृत कर आफिस या कार्यालयों व फील्ड से वापस आने पर डिस्कनेक्ट कर मूल रूप से स्वतंत्र रहने का अधिकार देना चाहिए।

   भिलाई / शौर्यपथ / प्रख्यात लोकवाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय अपने समूह के साथ अगले सप्ताह खजुराहो महोत्सव में देश-विदेश के मेहमानों के बीच अनूठी प्रस्तुति देने जा रहे हैं। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से 16 और 17 दिसंबर को आयोजित होने वाले खजुराहो महोत्सव में रिखी क्षत्रिय अपने समूह के साथ छत्तीसगढ़ लोक बैंड के तहत 101 पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी के माध्यम से, पारंपरिक धुनों एवं देशभक्त गीतों की प्रस्तुति देंगे।
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में प्रस्तुति देने रिखी व उनका समूह 14 दिसंबर को भिलाई से रवाना हो रहा है। रिखी क्षत्रिय ने बताया कि यहां प्रस्तुति देना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि खजुराहो में न सिर्फ देश भर के कला प्रशंसक पहुंचते हैं बल्कि विदेशी मेहमानों की भी बहुतायत होती है। उन्होंने बताया कि खजुराहो महोत्सव के लिए पूरा समूह लगातार रिहर्सल में जुटा है और उम्मीद है वहां छत्तीसगढ़ के कलाकारों की प्रस्तुति को बेहद पसंद किया जाएगा।
खजुराहो महोत्सव में छत्तीसगढ़िया लोक रंग का जादू जगाने जा रहे दल में रामकुमार पाटिल, डोरेलाल साहू, रामकुमार निषाद, कुलदीप सार्वा, प्रदीप ठाकुर, सुनील कुमार,सुशील कुमार, जय कुमार सेन, एनेश्वर विश्वकर्मा, मोहेंद्र निषाद ,भोज राम,प्रमोद और सागर शामिल हैं।

  दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अत्यधिक ठंड और शीतलहर के प्रकोप को तथा बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, जिले में संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, बी.एस.पी., सी.बी.एस.ई., एवं अन्य पाठ्यक्रम संचालित विद्यालयों के संचालन समय में तत्काल प्रभाव से परिवर्तन के निर्देश दिए है। यह आदेश 15 जनवरी 2026 तक प्रभावशील रहेगा। परिवर्तित समय सारणी के अनुसार, दो पाली में संचालित होने वाली शालाओं में, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक की प्रथम पाली सोमवार से शुक्रवार तक पूर्वान्ह 08.00 बजे से पूर्वान्ह 11.45 बजे तक, और शनिवार को अपरान्ह 12.15 बजे से सायं 04.15 बजे तक चलेगी। और हाई/उ.मा.वि. की द्वितीय पाली सोमवार से शुक्रवार तक अपरान्ह 12.00 बजे से सायं 04.45 बजे तक, और शनिवार को पूर्वान्ह 08.00 बजे से पूर्वान्ह 12.00 बजे तक संचालित होगी। वहीं, एक पाली में संचालित होने वाली शालाओं का समय सोमवार से शुक्रवार तक पूर्वान्ह 10.00 बजे से सायं 04.00 बजे तक और शनिवार को पूर्वान्ह 08.00 बजे से पूर्वान्ह 12.00 बजे तक निर्धारित किया गया है।

दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय बौद्ध महासभा के कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव 14 दिसंबर रविवार को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर संस्कृतिक भवन सेक्टर 6 भिलाई में सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल उमाकांत ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण निष्पक्ष संपन्न कराने विभिन्न व्यवस्थाएं बनाई गई है। इसके अंतर्गत सभी प्रत्याशियों से अपने अपने वार्ड में सौह्राद्रपूर्ण ढंग से मतदाताओं के बीच प्रचार प्रसार करने अपील की गई है। वहीं मतदान परिसर में प्रत्याशियों के लिए पांच पंडाल में बैठने की निशुल्क व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पंडाल में अलग-अलग वार्ड के सदस्यों के लिए बैठने की व्यवस्था है। प्रत्याशी प्रतिनिधियों को पहचान पत्र जारी किया गया है। वहीं 30 स्वतंत्र चुनाव सहायक की नियुक्ति की गई है। जिससे चुनाव संचालन सुचारु रूप से हो सके। उन्होंने बताया कि चुनाव परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से व्यवस्था बनाने विचार सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति की गई है वहीं पुलिस प्रशासन को भी सूचित किया गया है। चुनाव अधिकारी एल उमाकांत ने सभी प्रत्याशियों से शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने और चुनाव संचालन समिति को सहयोग प्रदान करने की अपील की है।

- 04 करोड़ 65 लाख रूपए लागत के महाविद्यालय भवन निर्माण कार्य का किया भूमिपूजन
- विज्ञान प्रायोगिक सामग्री खरीदी के लिए 5 लाख रूपए की घोषणा

दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के धमधा तहसील अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय पेंड्रावान (धमधा) के नवीन भवन के लिए भूमिपूजन आज प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। 4 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत के इस महाविद्यालय भवन के बन जाने से क्षेत्र के बारहवी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहूलियत होगी। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक ईश्वर साहू, राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे एवं सुरेंद्र कौशिक उपस्थित थे।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने कहा कि जीवन की सफलता केवल शिक्षा की डिग्री पाने से नही है अपितु संस्कृति और संस्कार को आत्मसात कर जीवन जीना है। उन्होंने महाविद्यालयीन विद्यार्थियों द्वारा छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति का सराहना करते हुए सांस्कृतिक दल के लिए 5100 रूपए प्रोत्साहन राशि अपने तरफ से प्रदान करने की घोषणा की। मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन मंे प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को क्रमशः पूरी कर रही है। प्रदेश में सरकार शांति और विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने बस्तर में नक्सली उन्मूलन में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की विजन के साथ 2047 तक प्रदेश को विकसित राज्य बनायंेगे। उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने पेंड्रावान और बोरी महाविद्यालय में अहाता निर्माण का भरोसा दिलाया, वहीं उन्होंने महाविद्यालय के विज्ञान प्रायोगिक सामग्री खरीदी के लिए 5 लाख रूपए की घोषणा की।
क्षेत्रीय विधायक ईश्वर साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज गांव वालों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी की गारंटी को प्रदेश सरकार द्वारा समय से पहले पूरी करने की पहल से अवगत कराते हुए प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को रेखांकित किया। महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषाकिरण अग्रवाल ने महाविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधियों एवं मागों से मंत्री जी को अवगत कराया। सरपंच श्रीमती प्रतिमा सिन्हा ने स्वागत उद्बोधन में ग्राम एवं क्षेत्र की जनता की विभिन्न मांगों की ओर मुख्य अतिथि मंत्री वर्मा का ध्यान आकृष्ट किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं पंचायत प्रतिनिधि, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

दुर्ग । शौर्यपथ  । नगर निगम में विपक्ष की भूमिका सुचारू रखने और जनता की आवाज़ बनने के दायित्व पर खरा उतरने को लेकर कांग्रेस के भीतर सांबा-सा तनाव स्पष्ट दिखने लगा है। पिछले छह महीनों के आंदोलन और नेता प्रतिपक्ष पद की प्रतीक्षा के बाद जब संजय कोहले को वह आरामदेह ऑफिस-व्यवस्था मिल गई, तो उनसे जुड़ी असंतुष्टि धीरे-धीरे मुखर होती जा रही है। अब कांग्रेस के नव-निर्वाचित जिला अध्यक्ष व पूर्व महापौर धीरज बांकलीवाल के ऊपर यह दायित्व सुलझाने की बड़ी जिम्मेदारी आ खड़ी हुई है — कि वे क्या निगम में सचमुच मजबूत विपक्ष तैयार कर पाएंगे या मामला फिर भी धूल में दफन हो जाएगा।

वृहत आरोप और नगर की बदहाल हालत

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और शहरवासियों के कहे अनुसार पिछले 20 सालों में जिस तरह निगम की हालत वर्तमान में बदहाली के शिखर पर नजर आ रही है, वह पहली बार भयावह रूप में नजर आ रहा है। जल आपूर्ति में अनियमितता, टूटे-फूटे और गड्ढों से भरी सड़कें, अतिक्रमण, रात में अंधेरे वाले रास्ते, बदबूदार वातावरण, कार्यालयों में अधिकारियों का अनुपस्थित होना, सफाई व्यवस्था की विफलता और धनवानों द्वारा अवैध पक्का निर्माण — ये वे मुद्दे हैं जो नागरिकों की रोज की परेशानियों का कारण बने हुए हैं।

इन तमाम समस्याओं के बीच कांग्रेस के दर्जनभर पार्षदों की उम्मीद थी कि उन्हें मिले नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले निगम में विपक्षी तीखापन बनाए रखकर जनता की आवाज़ बुलंद करेंगे। पर स्थानीय लोगों और कई पार्षदों का आरोप है कि कोहले पिछले छह महीने में सिर्फ़ एसी-कमरा और कैमरा मिलने के लिए आंदोलन करते रहे; और जैसे ही सुविधाएँ मिलीं, उन्होंने महापौर की प्रशंसा करने वाले व्यवहार में आ धीरे-धीरे विपक्षी भूमिका से दूरी बना ली।

कांग्रेस बनाम भाजपा: संगठनात्मक अनुशासन और जनता की धारणा

असंतुष्टि केवल कांग्रेस पार्षदों तक सीमित नहीं रही — दबी जुबां में भाजपा के कुछ पार्षद भी कहते सुने गए हैं कि जब नेता प्रतिपक्ष ही मौन हो जाए तो उनको किसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषण यह बताता है कि विपक्ष की सक्रियता ही लोकतंत्र में सत्ता को जवाबदेह बनाती है; और यदि विपक्ष का नेतृत्व स्वयं साइलेंट मोड में चला जाए तो नगर शासन की जवाबदेही कमजोर पड़ती है और प्रशासनिक अनियमितताएँ बढ़ती हैं।

पार्टी कार्यकारिणी के अंदर यह मत बनता जा रहा है कि संगठन द्वारा दी गई ज़िम्मेदारी का यदि निर्वाह ईमानदारी से नहीं हो रहा तो बदलाव अपरिहार्य है। कई कांग्रेस पार्षद अब धीरज बांकलीवाल से यही अपेक्षा रखते हैं कि वे युवा जोश और सशक्त नेतृत्व के साथ नगर निगम में विपक्षी चेहरा बदलकर नए सिरे से सक्रियता दिखाएँ — वरना आरोपों को लेकर अंदरूनी असंतोष और सार्वजनिक धारणा दोनों ही पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती हैं।

धीरज बांकलीवाल पर क्या दबाव है?

धीरज बांकलीवाल, जिनके पास निगम की राजनीति की जानकारी और पूर्व महापौर के नाते अनुभव भी है, के ऊपर अब दो तरह का दबाव है — एक, निगम में अनियमितताओं और जनक्रोध के मुद्दों को उजागर कर एक जिम्मेदार और संघर्षशील विपक्षी नेतृत्व स्थापित करना; और दूसरा, संगठनात्मक संतुलन बनाए रखते हुए ऐसे कदम उठाना कि पार्टी की छवि सुधारे और स्थानीय लोकप्रियता बनी रहे। यदि बांकलीवाल पहले ही कार्यालय आवंटन आदि जैसी सुविधाएँ मिलने के बाद मौन रहने वालों की राह अपनाते हैं, तो कांग्रेस के लिए दीर्घकालिक राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सम्भावित परिणाम और राजनीतिक रणनीति

यदि जिला अध्यक्ष शीघ्र ही कदम नहीं उठाते — जैसे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर पुनर्विचार, नया चेहरा उतारना, या पारदर्शी सामूहिक रणनीति अपनाना — तो निगम में कांग्रेस का संघर्ष कमजोर दिखेगा और स्थानीय मतदाता वर्ग में निराशा बढ़ेगी। दूसरी तरफ़, सक्रिय विपक्ष और नियमित धरनों, प्रश्न-काल, जन सुनवाइयों और मीडिया-प्रेसर के जरिये मुद्दों को उठाने से निगम प्रशासन पर असर पड़ सकता है और नगर की समस्याओं का समाधान भी तेज़ हो सकता है — यही कांग्रेस पार्षदों की अपेक्षा है।

निष्कर्ष — यह मरीज कौन ठीक करेगा?

कुर्सी का मोह — यह केवल एक व्यक्तिगत दोष का टैग नहीं रह जाता बल्कि जब वह मोह लोकतंत्र के आवश्यक प्रतिस्पर्धी तंत्र को प्रभावित करने लगे, तब मामला गंभीर हो जाता है। आज की सवा-सवाल भरी राजनीति में धीरज बांकलीवाल के सामने यह चुनौती है कि वे क्या संजय कोहले को नए सिरे से सक्रिय कर पाएँगे, या आवश्यकता हुई तो विपक्ष का चेहरा बदलकर निगम में जनता की आवाज़ को फिर से बुलंद कर पाएँगे।

कांग्रेस की अगले कुछ कार्यवाहियों और निगम में उठने वाले सार्वजनिक मुद्दों पर उनके कदम यह तय करेंगे कि क्या दुर्ग नगर निगम में विपक्ष फिर से एक दबंग और जवाबदेह शक्ति बनकर उभरेगा — या कुर्सी का मोह लोकतंत्र की ज़रूरतों पर भारी पड़ जाएगा।

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