October 26, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (5109)

    NCC कैडेट्स ने मैराथन, स्वच्छता अभियान और नशामुक्ति जागरूकता के जरिए दिया ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ युवा और नशामुक्त समाज’ का संदेश

    दुर्ग / शौर्यपथ। गांधी जयंती के अवसर पर शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर (वी.वाई.टी.) स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में विभिन्न जागरूकता एवं जनभागीदारी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के NCC कैडेट्स ने स्वच्छता, नशामुक्ति, स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

    कार्यक्रम के तहत NCC कैडेट्स द्वारा मैराथन दौड़ आयोजित की गई। मैराथन महाविद्यालय परिसर से प्रारंभ होकर मालवीय नगर चौक एवं जेल चौक होते हुए पुनः महाविद्यालय परिसर में संपन्न हुई। मैराथन के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित किया गया।

    इसके साथ ही स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। NCC कैडेट्स ने परिसर की साफ-सफाई कर स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। वहीं नशामुक्ति विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कैडेट्स ने नशे के दुष्प्रभावों और नशामुक्त समाज के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए शपथ भी दिलाई गई।

    इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं युवाओं को स्वच्छता अपनाने, स्वस्थ जीवनशैली को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, नशे से दूर रहने तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया गया। NCC कैडेट्स ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करते हुए सामाजिक जागरूकता का सकारात्मक संदेश प्रसारित किया।

    महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने विद्यार्थियों एवं NCC कैडेट्स की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं में सामाजिक चेतना, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वच्छता एवं नशामुक्ति के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    कार्यक्रमों का संचालन एवं NCC कैडेट्स की सहभागिता NCC अधिकारी लेफ्टिनेंट प्रशांत दुबे के मार्गदर्शन में हुई। उन्होंने कहा कि NCC युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके मार्गदर्शन में कैडेट्स ने मैराथन, स्वच्छता अभियान, नशामुक्ति जागरूकता और शपथ ग्रहण कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।

    गांधी जयंती पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से महाविद्यालय परिसर से “स्वच्छ भारत, स्वस्थ युवा और नशामुक्त समाज” का संदेश दिया गया। कार्यक्रमों के जरिए महात्मा गांधी के स्वच्छता, आत्मानुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के आदर्शों को विद्यार्थियों एवं समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

    दुर्ग । अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित ग्राम भरदा में ग्रामीणों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में त्वरित पहल की गई है। कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने राहत शिविर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और ग्रामीणों से क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने जलभराव से निजात दिलाने के लिए पक्की निकासी नाली की मांग रखी।

    समस्या की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने मौके पर आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने 28 सितंबर को ₹12.87 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

    पुरुषोत्तम निषाद के घर से केशव ठाकुर के घर तक बनेगी नाली

    वीबी-जी रामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी) योजना के तहत स्वीकृत नाली पुरुषोत्तम निषाद के निवास से केशव ठाकुर के निवास तक बनाई जाएगी। स्वीकृत राशि में ₹2.56 लाख मजदूरी और ₹10.31 लाख सामग्री मद के लिए निर्धारित किए गए हैं।

    नाली निर्माण से बारिश के दौरान मार्ग पर होने वाले जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के साथ ग्रामीणों का आवागमन भी सुगम और सुरक्षित होने की उम्मीद है।

    जल निकासी के साथ ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार

    जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि वीबी-जी रामजी योजना के तहत गांवों की स्थानीय जरूरतों को विकास कार्यों से जोड़ा जा रहा है। भरदा की निकासी नाली इसी पहल का उदाहरण है। इससे एक ओर स्थायी जल निकासी की अधोसंरचना तैयार होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा।

    योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र ग्रामीणों को मांग के आधार पर 15 दिवस के भीतर ₹300 प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी दर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

    फसल क्षति के सर्वेक्षण के भी निर्देश

    अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। नाली की त्वरित स्वीकृति और फसल क्षति के सर्वेक्षण के निर्देशों पर सरपंच सुनीता भारदीय सहित ग्रामीणों ने मंत्री गजेंद्र यादव, कलेक्टर अभिजीत सिंह और जिला पंचायत प्रशासन के प्रति आभार जताया।

    भरदा में अब जलभराव से राहत के साथ रोजगार और स्थायी अधोसंरचना—दोनों पर एक साथ काम आगे बढ़ेगा।

    मां के लौटने पर टूटा मिला अलमारी का लॉकर, करीब 48 हजार रुपये का माल चोरी; मचांदुर चौकी पुलिस जांच में जुटी

    दुर्ग। घर का दरवाजा खुला छोड़कर पड़ोस की दुकान तक जाना परिवार को भारी पड़ गया। इसी दौरान अज्ञात आरोपी ने घर में प्रवेश कर अलमारी का लॉकर तोड़ दिया और उसमें रखे सोने-चांदी के जेवरात तथा नकदी पर हाथ साफ कर दिया। चोरी का पता परिवार के सदस्य के घर लौटने के बाद चला। मामले में शिकायत मिलने के बाद मचांदुर चौकी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार प्रार्थी अश्विनी कुमार देवांगन फर्नीचर का काम करता है। वह 20 सितंबर को काम के सिलसिले में भिलाई गया हुआ था। उसकी मां अरुणा देवांगन भी गांव गई थीं। घर पर उसका छोटा भाई मौजूद था। इसी दौरान वह घर का दरवाजा खुला छोड़कर पड़ोस की दुकान से मंजन लेने चला गया।

    बताया गया है कि इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने घर में प्रवेश कर अलमारी का लॉकर तोड़ दिया और उसमें रखे सामान को लेकर फरार हो गया। 24 सितंबर को जब अरुणा देवांगन घर वापस लौटीं, तब अलमारी का लॉकर टूटा हुआ मिला। जांच करने पर एक जोड़ी सोने के झुमके, एक चांदी की चाबी-रिंग, एक चांदी की अंगूठी तथा नकदी गायब मिली।

    परिवार द्वारा अपने स्तर पर आसपास पता तलाश करने के बाद मचांदुर चौकी पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी गई। चोरी गए सामान और नकदी की कुल कीमत करीब 48 हजार रुपये बताई गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा अज्ञात आरोपी की तलाश में जुटी है।

    सामान्य सभा में जल प्रभारी लीना देवांगन से सवाल—तीन महीने की बाढ़ का जवाब देकर नौ महीने की पानी समस्या पर क्यों चुप्पी?

    दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में पेयजल व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। निर्धारित समय पर पानी नहीं मिलने की शिकायत पर जब पार्षद ने जल विभाग की प्रभारी श्रीमती लीना देवांगन से जवाब मांगा और अधिकारियों से लिखित जवाब देने की मांग की, तो पानी की देरी के पीछे बाढ़ की स्थिति को कारण बताया गया।

    बाढ़ और अत्यधिक बारिश के दौरान जलापूर्ति प्रभावित होना स्वाभाविक परिस्थितियों से जुड़ा विषय हो सकता है। लेकिन सामान्य सभा में उठे सवाल का मूल मुद्दा इससे आगे का है—यदि बाढ़ के कारण साल में लगभग तीन महीने जल वितरण प्रभावित होता है, तो बाकी नौ महीनों में समय पर और निर्धारित अवधि में पानी नहीं मिलने की शिकायतों का कारण क्या है?

    यही सवाल सामान्य सभा में चर्चा के दौरान सामने आया, लेकिन इस पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ सका।

    तीन महीने की बाढ़, नौ महीने का सवाल अनुत्तरित

    जल विभाग की ओर से बाढ़ को पानी की देरी का कारण बताया जाना अपनी जगह है, लेकिन नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था केवल बरसात के तीन महीनों तक सीमित नहीं है।

    शहर के नागरिकों को वर्षभर निर्धारित समय और पर्याप्त दबाव के साथ पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम की नियमित जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी वार्ड में निर्धारित समय पर पानी नहीं पहुंच रहा है तो उसके पीछे पाइपलाइन, मोटर-पंप, टंकी, वाल्व संचालन, बिजली आपूर्ति, वितरण व्यवस्था अथवा विभागीय मॉनिटरिंग में से वास्तविक कारण क्या है—इसकी जानकारी जनता के सामने आनी चाहिए।

    खास बात यह है कि जल विभाग से जुड़ी ऐसी समस्याओं पर पहले भी नगर निगम स्तर पर समीक्षा होती रही है। एक पूर्व समीक्षा में महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने अधिकारियों को इंटकवेल से फिल्टर प्लांट तक मशीनरी की नियमित निगरानी और प्राकृतिक कारणों को छोड़कर मानवीय कारणों से पानी की आपूर्ति प्रभावित न होने देने के निर्देश दिए थे।

    जब प्रभारी के वार्ड में ही सवाल खड़ा हो तो जवाबदेही किसकी?

    सामान्य सभा में चर्चा के दौरान यह सवाल भी महत्वपूर्ण बनकर सामने आया कि यदि जल विभाग की प्रभारी के ही वार्ड में निर्धारित समय पर पानी नहीं पहुंच रहा है, तो विभागीय व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    यह किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का सवाल है।

    और जब पार्षदों द्वारा अधिकारियों के फोन नहीं उठाने अथवा शिकायतों का समय पर जवाब नहीं मिलने की बात भी सामान्य सभा में सामने आती है, तब सवाल और गंभीर हो जाता है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच शिकायतों के समाधान की प्रभावी व्यवस्था आखिर कितनी सक्रिय है?

    डेढ़ साल बाद भी वही सवाल—कहां है स्थायी समाधान?

    महापौर श्रीमती अलका बाघमार के नेतृत्व वाली नगर निगम की वर्तमान परिषद को लगभग डेढ़ साल से अधिक समय हो चुका है। इस अवधि में जल आपूर्ति से संबंधित समस्याओं पर समीक्षा और निर्देश दिए जाने के बावजूद यदि सामान्य सभा में पार्षदों को निर्धारित समय पर पानी नहीं मिलने की शिकायत दोहरानी पड़ रही है, तो अब केवल कारण बताने के बजाय स्थायी समाधान की कार्ययोजना सामने आना जरूरी है।

    हालांकि यह भी तथ्य है कि हालिया महीनों में निगम स्तर पर जलापूर्ति और तकनीकी समस्याओं की समीक्षा की गई है तथा अधिकारियों को मशीनरी, मोटर-पंप और पाइपलाइन संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी के निर्देश दिए गए थे।

    ऐसे में सामान्य सभा का ताजा सवाल यह है कि निर्देशों का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?

    महापौर के सामने अब सीधी चुनौती—जिम्मेदारी तय होगी या जवाब फिर टलेगा?

    शहर की जनता ने महापौर के रूप में श्रीमती अलका बाघमार को अपना प्रतिनिधि चुना है। इसलिए जलापूर्ति जैसी बुनियादी नागरिक सुविधा को लेकर उठने वाले सवालों पर अंतिम प्रशासनिक जवाबदेही की निगाह स्वाभाविक रूप से महापौर और निगम प्रशासन की ओर जाती है।

    अब देखना यह है कि सामान्य सभा में सामने आए इन सवालों के बाद महापौर जल विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करती हैं या नहीं, तथा निर्धारित समय पर पानी उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस समयबद्ध व्यवस्था सामने आती है या नहीं।

    जनता को बहाना नहीं, पानी चाहिए

    बाढ़ हो, तकनीकी खराबी हो, बिजली की समस्या हो या पाइपलाइन में लीकेज—हर परिस्थिति का सामना करने के लिए नगर निगम के पास वैकल्पिक व्यवस्था और स्पष्ट आपात योजना होना जरूरी है।

    क्योंकि नागरिकों के लिए सवाल यह नहीं है कि पानी क्यों नहीं आया। सवाल यह है कि पानी समय पर क्यों नहीं आया और अगली बार भी यही समस्या न हो, इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय हुई?

    दुर्ग की सामान्य सभा में उठा यह सवाल अब केवल एक पार्षद के वार्ड का सवाल नहीं रह गया है। यह शहर की वर्षभर की पेयजल व्यवस्था, विभागीय जवाबदेही और ‘सुशासन’ के दावों की जमीनी कसौटी से जुड़ा सवाल बन चुका है।

    नोट: हालिया उपलब्ध रिपोर्टों में 30 सितंबर 2026 की सामान्य सभा में पेयजल सहित विभिन्न नागरिक सुविधाओं पर चर्चा प्रस्तावित होने की पुष्टि मिलती है। � साथ ही सितंबर 2026 में महापौर अलका बाघमार और आयुक्त लीना कोसम द्वारा जलभराव/जलनिकासी की व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी रिपोर्ट हुआ है। 

    2400 लाइट 8-10 वार्ड में बांटे जाने के आरोप से बढ़ा सवाल—बाकी वार्डों का नंबर कब आएगा?

    दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में विद्युत विभाग से जुड़े एक सवाल ने विभागीय जानकारी और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए। भारतीय जनता पार्टी के पार्षद आशीष चंद्राकर ने विद्युत विभाग के प्रभारी ज्ञानेश्वर ताम्रकार से लाइटों के वितरण को लेकर सवाल किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी।

    आशीष चंद्राकर ने जानना चाहा कि नगर निगम ने लाइटें किस विभाग/एजेंसी से, किस दर पर और कितनी संख्या में खरीदीं तथा उन्हें शहर के किन-किन वार्डों में वितरित किया गया। सामान्य सभा में प्रस्तुत जवाब में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं की पूरी जानकारी सामने नहीं आने पर उन्होंने विद्युत प्रभारी से जवाब-तलब किया।

    सवाल-जवाब के दौरान विद्युत प्रभारी ज्ञानेश्वर ताम्रकार ने स्वीकार किया कि अधिकारियों द्वारा उन्हें अधूरी जानकारी दी गई है और उन्होंने शाम 5 बजे तक पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही।

    सवाल जवाब का नहीं, व्यवस्था की जवाबदेही का है

    मामला केवल एक पार्षद को अधूरी जानकारी मिलने तक सीमित नहीं है। सामान्य सभा नगर निगम की महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक और विभागीय जवाबदेही की व्यवस्था है, जहां पार्षदों द्वारा पूछे गए सवालों पर विभाग से तथ्यात्मक और पूर्ण जानकारी अपेक्षित होती है।

    ऐसे में सवाल यह है कि जब सामान्य सभा में ही किसी विभाग के प्रभारी को अपने ही विभाग की खरीदी और वितरण से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो, तो नगर निगम की खरीद और वितरण व्यवस्था की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?

    2400 लाइट सिर्फ चंद वार्ड में? आरोप की पुष्टि जरूरी

    सामान्य सभा में पार्षद आशीष चंद्राकर ने यह भी आरोप लगाया कि अकेले 8-10 वार्ड में लगभग 2400 लाइट वितरित की जा चुकी हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

    यदि विभागीय रिकॉर्ड में वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में लाइटें किसी एक वार्ड में वितरित होना दर्ज है, तो स्वाभाविक रूप से नगर निगम से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि कुल कितनी लाइटें खरीदी गईं, किस वार्ड को कितनी लाइटें मिलीं और वितरण का आधार क्या था?

    अब जनता के सामने आने चाहिए ये आंकड़े

    नगर निगम की ओर से यदि शाम 5 बजे तक पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो उसमें कम से कम इन सवालों का स्पष्ट उत्तर होना चाहिए—

    कुल कितनी लाइटों की खरीदी हुई?

    किस एजेंसी से खरीदी गई?

    प्रति लाइट कितनी कीमत चुकाई गई?

    खरीद की कुल लागत कितनी रही?

    किस तारीख को और किस प्रक्रिया के तहत खरीद हुई?

    वार्डवार कितनी लाइटें वितरित की गईं?

    किस वार्ड में वास्तव में कितनी लाइटें दी गईं?

    वितरण के लिए क्या कोई निर्धारित मापदंड था?

    किन वार्डों में कितनी लाइटें अभी लंबित हैं?

    आखिर लाइटें नगर निगम की संपत्ति हैं और उनका पैसा जनता के संसाधनों से आता है। इसलिए खरीदी से लेकर वार्डवार वितरण तक की पूरी जानकारी सार्वजनिक होना केवल पार्षदों का सवाल नहीं, बल्कि शहर की जनता के जानने का अधिकार भी है।

    अब निगाहें विद्युत विभाग द्वारा शाम 5 बजे तक दिए जाने वाले उस जवाब पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सामान्य सभा में उठे सवालों का जवाब केवल समय मांगकर टाला गया या वास्तव में वार्डवार और खरीदवार पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने रखा जाएगा।

    दुर्ग / शौर्यपथ / महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग द्वारा सेवा संकल्प योजना के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 स्थित शंकर नगर नौखोरिया बस्ती में जागरूकता एवं विविध गतिविधियों से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, एएनएम एवं मितानिन शामिल हुईं।

    कार्यक्रम में पार्षद खालिद रिजवी शेरू, महिला मोर्चा अध्यक्ष दिनेश्वरी पुरकर, पार्षद चंद्रशेखर चंद्राकर (वार्ड-10), अजीत वैद्य (वार्ड-12), ज्योति चौहान, छाया सोनी, बब्बीता चौधरी, जाकिर खोखर, वसीम कुरैशी एवं लक्ष्मता कुशरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। एएनएम श्रीमती पुष्पा धनकर और मितानिन कविता यादव ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

    सेवा संकल्प योजना के तहत बलून रेस, मेहंदी और रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ शिशुओं का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

    कार्यक्रम में 2 स्वस्थ शिशु, 2 गोदभराई की महिलाएं, 2 अन्नप्राशन कार्यक्रम, 10 किशोरियां और 29 अन्य महिलाएं सहित हितग्राहियों ने सहभागिता की। इस दौरान महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

    मेहंदी एवं रंगोली प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करना रहा।

    स्मार्ट मीटर, बढ़े बिजली बिल और पंचायत भवनों के कटे कनेक्शन पर जनपद सदस्य ढालेश साहू ने खोला मोर्चा; 30 सितंबर को अंडा चौक में प्रस्तावित कार्यक्रम

    दुर्ग / शौर्यपथ। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। अघोषित बिजली कटौती, पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन काटे जाने, स्मार्ट मीटर से जुड़े बढ़े हुए बिल और ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर जनपद पंचायत दुर्ग के क्षेत्र क्रमांक-24 के सदस्य एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी ढालेश साहू ने क्षेत्रीय विधायक ललित चंद्राकर के खिलाफ विरोध का ऐलान किया है। साहू द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए आवेदन के अनुसार 30 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे अंडा चौक में विधायक का शांतिपूर्ण पुतला दहन कार्यक्रम प्रस्तावित है। हालांकि यह कार्यक्रम जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही आयोजित किए जाने की बात आवेदन में कही गई है।

    छत्तीसगढ़ विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ललित चंद्राकर को दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य और भारतीय जनता पार्टी का विधायक दर्ज किया गया है।

    मचांदूर से नगपुरा तक बिजली कटौती का मुद्दा

    ढालेश साहू का आरोप है कि मचांदूर से निकुम, अंडा से उतई और कुथरेल से नगपुरा तक विभिन्न गांवों में घरेलू बिजली के साथ-साथ मोटर पंपों की बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।

    साहू के मुताबिक, बिजली संकट केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। कई ग्राम पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन कथित तौर पर बकाया बिल के कारण काटे जाने से पंचायतों के शासकीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने और बढ़े हुए बिजली बिलों की वसूली को लेकर भी असंतोष की बात उन्होंने कही है।

    इन्हीं मुद्दों को लेकर उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से अपेक्षित हस्तक्षेप नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध कार्यक्रम की घोषणा की है।

    विधायक से मुलाकात के लिए मुख्यालय तक पहुंचने का मुद्दा भी चर्चा में

    बिजली के मुद्दे के साथ-साथ दुर्ग ग्रामीण में विधायक की स्थानीय जनसुलभता और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनने लगी है। क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी ग्रामीण को विधायक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी समस्या रखना हो तो उसे दुर्ग मुख्यालय स्थित शासकीय निवास कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में विधायक का कोई स्पष्ट रूप से सक्रिय एवं नियमित स्थानीय जनसंपर्क कार्यालय नहीं होना भी सवालों के घेरे में बताया जा रहा है।

    क्षेत्रीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अनेक मामलों में ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं को विधायक से सीधे संपर्क के बजाय विधायक प्रतिनिधियों अथवा कार्यालयीन स्टाफ के माध्यम से अपनी बात पहुंचानी पड़ती है। कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा विधायक के पीए से संपर्क करने पर कथित तौर पर टालमटोल वाले जवाब मिलने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    'प्रतिनिधियों के भरोसे क्षेत्रÓ का सवाल

    राजनीतिक दृष्टि से देखें तो दुर्ग ग्रामीण जैसा विस्तृत विधानसभा क्षेत्र लगातार जनसंपर्क और स्थानीय स्तर पर शिकायतों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा रखता है। ऐसे में स्थानीय विधायक कार्यालय की सक्रियता, नियमित जनदर्शन और आम नागरिकों की विधायक तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दे अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

    विपक्ष अथवा स्थानीय असंतुष्ट राजनीतिक समूहों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि बिजली जैसी रोजमर्रा की समस्या सीधे किसान, विद्यार्थी, घरेलू उपभोक्ता और छोटे व्यवसायी वर्ग को प्रभावित करती है। ऐसे में बिजली कटौती के साथ विधायक तक पहुंच की शिकायतें जुडऩे से विरोध का राजनीतिक स्वर और मुखर होता दिख रहा है।

    30 सितंबर को अंडा चौक पर नजर

    ढालेश साहू ने जिला कलेक्टर को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर, बुधवार को दोपहर 12 बजे अंडा चौक, दुर्ग ग्रामीण में कार्यक्रम प्रस्तावित है। आवेदन में प्रशासन से अनुमति देने का अनुरोध किया गया है तथा यह भी कहा गया है कि अनुमति मिलने पर ही कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं कानून-व्यवस्था संबंधी निर्देशों का पालन किया जाएगा।

    अब निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय और विधायक ललित चंद्राकर की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि अनुमति मिलती है तो 30 सितंबर को अंडा चौक में होने वाला प्रस्तावित पुतला दहन दुर्ग ग्रामीण की बिजली व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधि की जवाबदेही को लेकर एक प्रमुख राजनीतिक विरोध कार्यक्रम के रूप में सामने आ सकता है।

    फिलहाल मुख्य सवाल यही है—बिजली कटौती और बिलों की शिकायतों से जूझ रहे ग्रामीणों की आवाज विधायक तक सीधे पहुंचेगी या फिर यह मुद्दा विरोध-प्रदर्शन के जरिए ही आगे बढ़ेगा?

    केंद्रीय राज्यमंत्री ने दुर्ग के सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    रायपुर। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने दुर्ग प्रवास के दौरान सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने संकटग्रस्त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं की जानकारी ली।

    हर जरूरतमंद महिला तक पहुंचे मदद
    अधिकारियों ने राज्यमंत्री को सेंटर में दर्ज प्रकरणों और महिलाओं को दी जा रही सेवाओं की जानकारी दी। राज्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संकटग्रस्त महिलाओं को समय पर सुरक्षा, अस्थायी आवास, कानूनी सहायता और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने सेंटर में संचालित परामर्श, विधिक सहायता, चिकित्सा एवं पुलिस सहायता तथा अस्थायी आश्रय की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।

    व्यवस्थाओं की सराहना
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने सेंटर की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और स्टाफ द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए केंद्र की सराहना की। सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को काउंसलिंग के साथ आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।
    इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी अशोक शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय साहू सहित वन स्टॉप सेंटर के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

    मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा जलस्तर, जेवरा-सिरसा पुलिस ने दोनों ओर की बेरिकेडिंग

    दुर्ग। मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने और अन्य बैराजों से पानी की आवक बढ़ने के बाद शिवनाथ नदी उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से समोदा नाला पर दुर्ग-बेमेतरा मार्ग की पुलिया पानी में डूब गई, जिसके चलते इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस ने सड़क के दोनों ओर बेरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। पुलिस द्वारा वाहन चालकों को मार्ग पर आगे नहीं बढ़ने तथा वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की गई है।

    जलस्तर बढ़ने से बढ़ी सतर्कता

    शिवनाथ नदी सहित आसपास के नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से लोगों को नदी और नालों के आसपास जाने से बचने तथा पानी के तेज बहाव वाले स्थानों पर किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है।

    पुलिस द्वारा मार्ग पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि जलभराव और तेज बहाव के बीच कोई वाहन या व्यक्ति जोखिम में न पड़े। फिलहाल दुर्ग-बेमेतरा मार्ग पर समोदा नाला की पुलिया से आवागमन बंद है।

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