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दुर्ग, / शौर्यपथ /
नगर पालिक निगम दुर्ग क्षेत्र अंतर्गत पुरानी गंज मंडी में आयोजित सुशासन तिहार जनसमस्या निवारण शिविर में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करते हुए विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचाया गया। शिविर में जनता की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
शिविर में विभिन्न विभागों से कुल 982 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 772 मांग संबंधी तथा 210 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। प्रशासन द्वारा कई मामलों का मौके पर ही निराकरण कर नागरिकों को तत्काल राहत प्रदान की गई।
त्वरित सेवा के तहत शिविर में—
का तत्काल निराकरण कर हितग्राहियों को वितरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र एवं आवास की चाबी प्रदान की गई। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 10 गर्भवती माताओं की गोदभराई रस्म भी संपन्न कराई गई, जिससे कार्यक्रम में सामाजिक सरोकार और संवेदनशीलता का विशेष वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में उपस्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के बीच जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति जान रही है तथा समस्या निवारण शिविरों के माध्यम से त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।
महापौर अलका बाघमार ने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शिविरों में पहुंचकर अपनी समस्याओं का निराकरण कराने और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शिविर में मंत्री गजेन्द्र यादव एवं महापौर अलका बाघमार ने विभागीय अधिकारियों से आवेदन निराकरण की जानकारी ली। वहीं संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर एवं कलेक्टर अभिजीत सिंह ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कार्यक्रम में निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल, सभापति श्याम शर्मा, एमआईसी सदस्य देव नारायण चन्द्राकर, नरेंद्र बंजारे, लीना दिनेश देवांगन, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, शिव नायक, निलेश अग्रवाल, हर्षिका संभव जैन, शशी साहू, एसडीएम हरिवंश मिरी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
शौर्यपथ विशेष
दुर्ग। शहर के तकियापारा क्षेत्र में संचालित एक बड़े कबाड़ गोदाम की तस्वीरें अब प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। खुले मैदान में भारी मात्रा में प्लास्टिक, लोहे और अन्य कबाड़ सामग्री का भंडारण, चारों तरफ फैली अव्यवस्था और बीच बस्ती में संचालित यह कारोबार अब स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बड़े पैमाने पर कबाड़ सामग्री खुले में जमा की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल एक गोदाम नहीं, बल्कि अव्यवस्थित और विवादित कबाड़ कारोबार का केंद्र बन चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां दिनभर संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं और कई बार चोरी के सामान की खरीदी-बिक्री को लेकर भी चर्चाएं सामने आती रही हैं।
“साबिर कबाड़ी” का नाम फिर चर्चा में
क्षेत्र में लंबे समय से संचालित इस कारोबार को लेकर “साबिर कबाड़ी” का नाम लगातार विवादों में सामने आता रहा है। पूर्व में प्रशासनिक कार्रवाई, पुलिस जांच और शिकायतों के बावजूद कारोबार पर स्थायी नियंत्रण नहीं दिखने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष और दोष सिद्ध होना प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
अपराध का पहला पायदान बनता कबाड़ कारोबार?
सामाजिक जानकारों का मानना है कि चोरी की छोटी घटनाओं के पीछे कबाड़ नेटवर्क बड़ी भूमिका निभाता है। नशे और गलत संगति में पड़े युवक छोटी-मोटी चोरी कर कबाड़ियों को सामान बेच देते हैं, जिससे अपराध की प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाती है। यही कारण है कि पुलिस व्यवस्था में कबाड़ कारोबार को अपराध जगत की शुरुआती कड़ी माना जाता है।
निगम और पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
नगर निगम नियमों के अनुसार घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार खुले रूप से कबाड़ भंडारण और व्यवसाय पर नियंत्रण आवश्यक माना जाता है। इसके बावजूद यदि वर्षों से विवादित कारोबार जारी है, तो सवाल यह भी उठता है कि आखिर कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर क्यों रह जाती है?
अब शहरवासियों की नजर नगर निगम आयुक्त और पुलिस प्रशासन पर टिकी हुई है। लोगों की मांग है कि ऐसे गोदामों की नियमित जांच हो, अवैध भंडारण हटाया जाए, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड अनिवार्य किया जाए और चोरी के सामान की खरीद-बिक्री में संलिप्त पाए जाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
शहर की जनता अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि परिणाम चाहती है — ताकि अपराध को जन्म देने वाले ऐसे अवैध नेटवर्क पर स्थायी रूप से रोक लग सके।
विज्ञापन और चाटुकारिता से दूर, ज़मीनी पत्रकारिता के दम पर तेजी से बढ़ रहा “द रियल India” चैनल
दुर्ग / शौर्यपथ।
सोशल मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के दौर में जहां कई यूट्यूब चैनल विज्ञापनों, प्रायोजित प्रचार और झूठी वाहवाही के सहारे दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दुर्ग शहर का “द रियल इंडिया” नामक चैनल अपनी निष्पक्ष और तेज़ क्राइम रिपोर्टिंग के कारण आम जनता के बीच लगातार भरोसे का नाम बनता जा रहा है।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में घटित होने वाली अपराध की घटनाओं को त्वरित और तथ्यात्मक तरीके से जनता तक पहुंचाने में यह चैनल लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि आम लोग अब दिखावटी प्रचार से हटकर वास्तविक खबरों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं और “द रियल इंडिया” के फॉलोअर्स एवं दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां कुछ चैनल केवल दुकानदारों और प्रायोजकों की कृत्रिम प्रशंसा कर दर्शकों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, वहीं “द रियल इंडिया” बिना अनावश्यक प्रचार के सीधे मुद्दों और अपराध से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देता है। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
क्राइम रिपोर्टिंग के क्षेत्र में चैनल के युवा पत्रकार की सक्रियता और निरंतर अपडेट देने की शैली को लेकर लोग खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। घर बैठे हर छोटी-बड़ी आपराधिक गतिविधि की जानकारी मिलने से आम जनता इस चैनल को भरोसेमंद माध्यम के रूप में देखने लगी है।
सोशल मीडिया के इस प्रतिस्पर्धी दौर में “द रियल इंडिया” उन चैनलों के लिए एक सीख बनकर उभर रहा है जो केवल विज्ञापन आधारित सामग्री और झूठी लोकप्रियता के सहारे पत्रकारिता की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जनता अब सजावटी प्रचार नहीं बल्कि सच्ची और ज़मीनी खबरों को महत्व देने लगी है।
डिजिटल पत्रकारिता में तेजी से बदलते इस माहौल ने यह साफ कर दिया है कि दर्शक अब जागरूक हो चुके हैं और वे उन्हीं मंचों को पसंद कर रहे हैं जो बिना पक्षपात और बिना दिखावे के वास्तविक खबरों को सामने लाते हैं।
The real india के क्राइम समाचार इस Link पर देख सकते है
दुर्ग । शौर्यपथ / दुर्ग नगर निगम के स्वास्थ्य प्रभारी एवं भाजपा पार्षद निलेश अग्रवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला वर्षों पुराने भूमि सौदे और सीमांकन विवाद से जुड़ा है, जिसमें राजनीतिक प्रभाव, प्रशासनिक दबाव और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजस्व प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा की स्थानीय छवि को भी प्रभावित करने वाली स्थिति निर्मित कर दी है।
भूमि स्वामी रजत सुराना ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2005 में उन्होंने पवन अग्रवाल से खसरा नंबर 80/3 की भूमि खरीदी थी। इसी खसरा नंबर की भूमि कई अन्य लोगों को भी वर्षों पहले बेची जा चुकी है। उस समय खरीदारों के आवागमन के लिए लगभग 30 फीट और 60 फीट चौड़ी सड़क छोड़ी गई थी, जिसका उपयोग आज भी रहवासी कर रहे हैं।
आरोप है कि अब पवन अग्रवाल के पुत्र और भाजपा पार्षद निलेश अग्रवाल उक्त सड़क-रास्ते की भूमि को रजत सुराना की भूमि खसरा नंबर 80/352 में समायोजित कराने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि पूर्व में स्वयं पवन अग्रवाल विभिन्न राजस्व प्रकरणों में यह स्वीकार कर चुके हैं कि उक्त बची हुई भूमि सड़क-रास्ते के रूप में उपयोग में है।
सत्ता का प्रभाव या प्रशासनिक निष्पक्षता पर दबाव?
शहर में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि भाजपा पार्षद होने और सत्ता से निकटता के कारण निलेश अग्रवाल प्रशासनिक तंत्र पर प्रभाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि वे स्वर्गीय हेमचंद यादव के पुत्र भाजपा नेता जीत यादव के करीबी माने जाते हैं, जिनकी प्रदेश स्तर तक मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है। हालांकि जीत यादव की राजनीति में साफ-सुथरी छवि मानी जाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर निलेश अग्रवाल को लेकर लगातार विवाद सामने आने से भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी असहज स्थिति निर्मित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, महापौर अलका बाघमार से करीबी संबंधों को लेकर भी प्रशासनिक दबाव की चर्चाएं तेज हैं। सीमांकन प्रक्रिया के दौरान जिस प्रकार आपत्तियों और दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आया, उसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
स्वास्थ्य प्रभारी के कार्यकाल पर पहले से उठते रहे हैं सवाल
निलेश अग्रवाल वर्तमान में दुर्ग निगम में स्वास्थ्य प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में शहर की सफाई व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही है। शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर, बदबूदार वातावरण और अव्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में नाराजगी बनी हुई है। वार्ड के स्थानीय निवासियों द्वारा भी निष्क्रियता और जनसमस्याओं की अनदेखी के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
ऐसे में अब भूमि विवाद में उनका नाम सामने आने से विपक्ष को भाजपा और निगम प्रशासन पर निशाना साधने का अवसर मिल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह विवाद भाजपा की छवि को स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
भूमि स्वामी रजत सुराना ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पूरे सीमांकन प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा वास्तविक सड़क-रास्ते की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में पृथक दर्ज किया जाए। साथ ही विवादित प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका की भी जांच की मांग उठ रही है।
फिलहाल यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सत्ता, प्रशासन और राजनीतिक प्रभाव के उपयोग को लेकर दुर्ग की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
दुर्ग, ।
न्यू आदर्श नगर, जोन-3 मार्ग क्रमांक 8 में शुक्रवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। क्षेत्र की बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने वट (बरगद) वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में विधि-विधान से पूजा संपन्न की तथा वट वृक्ष पर जल अर्पित कर रोली, अक्षत, फल एवं पूजा सामग्री चढ़ाई।
पूजन के पश्चात महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत लपेटा। यह परंपरा पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, विश्वास और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
व्रत के दौरान महिलाओं ने माता सावित्री एवं सत्यवान की कथा का श्रवण और वाचन किया। कथा में माता सावित्री के अदम्य साहस, तप और अपने पति के प्रति अटूट प्रेम का उल्लेख किया गया, जिन्होंने यमराज से भी अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर सरिता ठाकुर, स्वेता बक्शी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा तथा महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं भी दीं।
भिलाई। जमीन फर्जीवाड़ा मामले में न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने उद्योगपति दंपति के खिलाफ अपराध दर्ज होने के बाद सिमप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड की डायरेक्टर ए 5 सूर्यविहार कालोनी जुनवानी भिलाई निवासी संगीता केतन शाह ने कहा कि ग्राम कोहका में पटवारी हल्का नंबर 14/19 खसरा को होटल को किराए पर दिया गया था। एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किराएदार उसे खाली नहीं कर रहा था। इस दौरान हुडको निवासी सुनील कुमार सोमन ने संगीता शाह को होटल खाली कराकर देने के लिए एग्रीमेंट करने को कहा था। तब उसके साथ 10 लाख रुपए का एग्रीमेंट किया गया। लेकिन साल भर होने के बाद सुनील सोमन ने होटल को खाली नहीं कराया। उसके रकम को भी वापस लौटा दिया गया था। उसके बाद सुनील सोमन ने षडयंत्र और साजिश करके पुराने एग्रीमेंट का फायदा उठाकर मुझे कहा आपने मेरे साथ जमीन बेचने का सौदा किया है। बचे हुए चालीस लाख रुपए लेकर इस जमीन का रजिस्ट्री करिए। तब संगीता शाह ने कहा करोड़ों की जमीन को पचास लाख में कैसे दु। ये एग्रीमेंट आपने मुझसे जमीन खाली कराने के लिए बनाया था। संगीता शाह ने कहा कि उक्त जमीन करोड़ो रुपए की है उसे कैसे औने-पौने दाम पर बेच सकती हूं। सुनील सोमन पूरी तरह से प्लान तैयार कर सिमप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड और हम पति-पत्नी को बदनाम करने के लिए ऐसा षड्यंत्र रचा गया है। षड्यंत्र कर न्यायालय के माध्यम से अपराध दर्ज करवा दिया। मै तीस वर्षो से कंपनी को संभाल रही हूं भिलाई-दुर्ग के लोग सभी जानते पहचाने है। कभी इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई लेकिन सुनील सोमन ने साजिश कर शाह परिवार के ऊपर गलत आरोप लगाकर बदनाम करने का साजिश रचा है। सुनील सोमन ने भरोसे को तोड़कर इस तरह से प्लान तैयार कर हम लोगों को फंसाया है। सुपेला पुलिस से सांठगांठ कर इस तरह का साजिश रचकर बदनाम किया।
करोड़ो की जमीन को लाखों में कैसे बेचू
सिमप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड डॉयरेक्टर संगीता केतन शाह ने जारी विज्ञप्ति में बताया है कि स्मृति नगर कोहका की मेरी कंपनी जमीन करोड़ो रुपए की है कैसे उसे लाखों में बेच देती। कभी भी सुनील सोमन के साथ जमीन बेचने का कोई भी एग्रीमेंट नहीं हुआ था। जबकी होटल को खाली कराने के लिए यह किया गया था। खाली नहीं कराने की स्थिति में सुनील सोमन सारा रकम भी उसे डबल दिया गया है। मेरी छवि को जिस तरह से धूमिल किया गया है। जल्द उनके चेहरों को भी बेनकाब करुंगी। इस फर्जीवाड़े में कोई सच्चाई नहीं है। इसमें दोनों पति और पत्नी का कोई रोल नहीं है। सिर्फ बदनाम करने के लिए इस तरह का सोमन ने साजिश रचा है। इसकी निषष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भिलाई-दुर्ग/शौर्यपथ।
देशभर में बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी कथित प्रताड़ना, आर्थिक उत्पीड़न और नागरिक अधिकारों के हनन के खिलाफ 14 मई 2026 को भिलाई-दुर्ग में व्यापक “जन अधिकार आंदोलन” आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस आंदोलन के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी।
आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि वर्तमान समय में अनेक नागरिक बैंक रिकवरी प्रक्रिया, नोटिस प्रताड़ना, मानसिक दबाव और आर्थिक शोषण जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई मामलों में लोगों को न्याय और सुनवाई के लिए प्रभावी मंच तक उपलब्ध नहीं हो पाता। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए आंदोलन के दौरान “उधारकर्ता आयोग” (Borrower Commission) के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी, ताकि ऋण लेने वाले नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में भारतीय मुद्रा प्रणाली और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की जाएगी। आंदोलनकारियों के अनुसार जनता को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि डिजिटल मुद्रा प्रणाली का संचालन किस प्रकार हो रहा है और उससे जुड़ी नीतियां किस संस्था के नियंत्रण में कार्य कर रही हैं।
आंदोलन के दौरान बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी कथित अवैध वसूली, मानसिक प्रताड़ना, प्रशासनिक निष्क्रियता और वित्तीय अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर भी खुलकर आवाज उठाई जाएगी। आयोजकों ने मांग की है कि संबंधित मामलों में बैंक एवं एनबीएफसी संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
आंदोलनकारियों ने बैंकिंग व्यवस्था के आर्थिक मॉडल पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि देश में प्रचलित मुद्रा की तुलना में कई गुना अधिक ऋण वितरण किया गया है। आंदोलन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा कि जब देश में लगभग 38 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में है, तब केवल सरकारी बैंकों द्वारा ही 107 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण कैसे किया गया। साथ ही निजी बैंकों और वित्तीय कंपनियों की ऋण व्यवस्था की भी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।
दोपहर 12 बजे से विभिन्न विषय विशेषज्ञों और वक्ताओं द्वारा पर्यावरण, स्वास्थ्य, बैंकिंग और आर्थिक विषयों पर रिसर्च आधारित जानकारी साझा की जाएगी। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से बैंकिंग व्यवस्था, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आम जनता पर पड़ रहे प्रभावों पर विशेष संबोधन आयोजित होगा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में शाम 4 बजे आंदोलनकारी नारेबाजी और पैदल मार्च करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे, जहां ज्ञापन एवं शिकायत पत्र सौंपा जाएगा।
आंदोलन के संयोजकों ने सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, युवाओं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम में सहभागी बनने की अपील की है।
आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी संस्था या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि “आर्थिक अन्याय, बैंकिंग प्रताड़ना और नागरिक अधिकारों की रक्षा” के लिए जनता की लोकतांत्रिक आवाज है।
भिलाई/शौर्यपथ।
भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप में व्याप्त अव्यवस्थाओं, भ्रष्टाचार, अवैध कब्जों और मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर भिलाई इस्पात मज़दूर संघ यूनियन ने प्रबंधन के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। यूनियन की महत्वपूर्ण बैठक इस्पात भवन स्थित कॉफी हाउस में संघ के महामंत्री चन्ना केशवलू के नेतृत्व में आयोजित हुई, जिसमें टाउनशिप की विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर सेवाएं विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं तथा लंबे समय से जमे अधिकारियों के कारण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। यूनियन ने प्रबंधन के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारियों और नागरिकों के साथ मिलकर आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा।
यूनियन ने प्रबंधन का ध्यान टाउनशिप की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि नियमित कर्मचारियों को रिक्त आवास आवंटन की प्रक्रिया सरल और तेज की जाए। पुराने क्वार्टर्स में खराब हो चुकी बिजली वायरिंग और स्विच बोर्डों को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल बदला जाए। आवासीय क्षेत्रों में संचालित अवैध खटालों को हटाकर सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं, कुत्तों और सुअरों पर नियंत्रण किया जाए, क्योंकि इनके कारण दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं।
बैठक में फॉरेस्ट एवेन्यू रोड और गैरेज रोड को बढ़ते यातायात दबाव के मद्देनजर वन-वे घोषित करने, मानसून पूर्व सभी बीएसपी आवासों की छतों पर टारपेल्टिंग कार्य पूर्ण कराने और टाउनशिप में अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने कहा कि अवैध कब्जों के कारण असामाजिक गतिविधियों और अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है।
मार्केट क्षेत्रों में अवैध ठेलों और अतिक्रमण के कारण लगातार जाम की स्थिति निर्मित होने तथा कबाड़ी दुकानों से गंदगी और बदबू फैलने पर भी चिंता जताई गई। भीषण गर्मी को देखते हुए टाउनशिप में दिन में दो बार नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
यूनियन ने मकानों के बैकलेन और नालियों की सफाई, गटर लाइन पर ढक्कन लगाने, झाड़ियों की कटाई और दूषित पेयजल समस्या के समाधान हेतु पाइपलाइन बदलने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। कई स्कूलों और सामाजिक भवनों द्वारा मैदानों पर किए गए कथित अवैध कब्जों को हटाने की मांग भी बैठक में की गई।
इसके अलावा सेक्टर-4 में पेयजल आपूर्ति समय में सुधार, सेक्टर-6 ई मछली मार्केट से एमजीएम तक अवैध अतिक्रमण हटाने, सभी पोलों पर स्ट्रीट लाइट लगाने, लगातार हो रही बिजली कटौती रोकने तथा मुर्गा चौक से खुर्सीपार फाटक तक सड़क मार्ग पर खड़े ट्रकों एवं ट्रेलरों को हटाकर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की गई।
यूनियन ने आरोप लगाया कि टाउनशिप में नए महाप्रबंधक इंचार्ज की नियुक्ति के बाद अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है। साथ ही संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों को मोबाइल फोन एवं सिम कार्ड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि बारिश से पहले इन सभी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो नागरिकों और कर्मचारियों का आक्रोश उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
बैठक में उपाध्यक्ष सुधीर गडेवाल, संयुक्त महामंत्री प्रदीप कुमार पाल, मृगेंद्र कुमार, भूपेंद्र बंजारे, सचिव ए. वेंकट रमैया, अखिलेश उपाध्याय, संजय कुमार साकुरे, पूरन लाल साहू, संतोष सिंह, कोषाध्यक्ष रवि चौधरी, नारायण प्रसाद बाजपेयी सहित यूनियन के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भिलाईनगर/शौर्यपथ।
नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा शहर में अवैध रूप से वाहन खड़े कर सड़क और आवागमन बाधित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार जोन-1 नेहरू नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सुपेला एवं आकाश गंगा परिसर में सड़क बाधा उत्पन्न करने वालों पर चालानी कार्रवाई की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वार्ड क्रमांक 17 आकाश गंगा परिसर में प्रतिष्ठानों के सामने अवैध रूप से वाहन खड़े पाए जाने पर संबंधित वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया। कार्रवाई के दौरान गौरी शंकर, मनोज कुमार, सौरभ, प्रकाश हालधर, भोले बाबा, देवनाथ, पवन कुमार गुप्ता एवं रमेश गुप्ता सहित विभिन्न लोगों से कुल 1400 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
इसी प्रकार राखी फर्नीचर रोड के सामने अवैध रूप से सब्जी ट्रक पार्किंग कर सड़क एवं यातायात बाधित करने पर संबंधित वाहन संचालकों पर 1800 रुपये की चालानी कार्रवाई की गई।
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर अवैध पार्किंग, अतिक्रमण एवं आवागमन बाधित करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार अभियान जारी रहेगा। नागरिकों से यातायात व्यवस्था बनाए रखने एवं निर्धारित स्थानों पर ही वाहन पार्क करने की अपील की गई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
