July 18, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (4970)

    भिलाई: मानसून की तैयारियों और वार्ड क्रमांक 01 में होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर, निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडेय ने आज जोन-1 का व्यापक दौरा किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों की समीक्षा और शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना था।

    ? मुख्य निरीक्षण बिंदु और निर्देश

    1. भेलवा तालाब: सौंदर्यीकरण और संधारण

    नेहरू नगर स्थित भेलवा तालाब के निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने निम्नलिखित निर्देश दिए:

    स्वच्छता: तालाब के चारों ओर नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।

    सुविधाएं: खेल उपकरणों की मरम्मत और परिसर के आवश्यक संधारण (Maintenance) कार्य तत्काल किए जाएं।

    नागरिक सेवा: नागरिकों के लिए सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता पर हो।

    2. मानसून पूर्व तैयारी: नाला सफाई और रिटर्निंग वॉल

    वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए आयुक्त ने सख्ती दिखाई:

    संजय नगर नाला: नाले की गाद (Silt) निकालने का कार्य युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए ताकि जल प्रवाह सुगम रहे।

    गुणवत्ता: रिटर्निंग वॉल के निर्माण में सामग्री और कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने की हिदायत दी।

    डेडलाइन: सभी निर्माण कार्य वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं।

    3. आदर्श आचार संहिता और संपत्ति विरूपण

    वार्ड क्रमांक 01 में आगामी उपचुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता प्रभावी है, जिसे लेकर आयुक्त ने कड़े कदम उठाए:

    पोस्टर-बैनर पर कार्रवाई: सार्वजनिक दीवारों और सरकारी संपत्तियों पर अवैध रूप से लगे पोस्टर, बैनर और वॉल पेंटिंग को तत्काल हटाने (संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत) के निर्देश दिए।

    निर्माण पर रोक: वार्ड 1 की सीमा के भीतर कोई भी नया निर्माण कार्य प्रारंभ न करने के आदेश दिए गए।

    समीक्षा: लोक निर्माण विभाग द्वारा पहले से चल रहे रोड और नाली निर्माण कार्यों का मौके पर अवलोकन किया गया।

    ? आयुक्त का वक्तव्य

    "शहर की स्वच्छता और व्यवस्थित विकास हमारी प्राथमिकता है। मानसून से पहले सभी नालों की सफाई और रिटर्निंग वॉल का कार्य पूर्ण करना अनिवार्य है। साथ ही वार्ड 1 में आदर्श आचार संहिता का पालन करते हुए संपत्ति विरूपण पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।" — राजीव कुमार पांडेय, आयुक्त

    ? निरीक्षण दल में शामिल अधिकारी

    इस दौरान आयुक्त के साथ मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी उपस्थित रहे:

    ऐशा लहरे (जोन आयुक्त)

    जावेद अली (स्वास्थ्य अधिकारी)

    अंकित सक्सेना (सहायक जोन स्वास्थ्य अधिकारी)

    संबंधित क्षेत्रों के स्वच्छता निरीक्षक एवं अन्य कर्मचारी।

      भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भाजपा नेत्री सुषमा जेठानी को सिंधी साहित्य अकादमी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर भिलाई-3 सिंधी पंचायत द्वारा भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
    कार्यक्रम में विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, भाजपा के वरिष्ठ नेता राकेश पाण्डेय, जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन एवं छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश महामंत्री अजय भसीन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    भाजपा नेता राकेश पाण्डेय ने सुषमा जेठानी को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सिंधी साहित्य, भाषा और संस्कृति को नई दिशा एवं पहचान मिलेगी। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने संगठन की ओर से शुभकामनाएं देते हुए इसे समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स की ओर से सुषमा जेठानी का पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में भिलाई-3 पंचायत अध्यक्ष शमन लाल नथानी, वैशाली नगर श्रीराम सिंधी पंचायत सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे।
    अपने उद्बोधन में अजय भसीन ने कहा कि सुषमा जेठानी सरल, सहज और समाजसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं तथा उनकी नियुक्ति से समाज को नई ऊर्जा मिलेगी। कार्यक्रम में खुर्सीपार पंचायत, सेक्टर-4 सिंधी पंचायत सहित बड़ी संख्या में व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

    दुर्ग / शौर्यपथ

    भीषण गर्मी से जूझ रहे दुर्ग शहर में जहां आम नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, वहीं जनहित के लिए लगाए गए वाटर एटीएम अब कथित तौर पर “जल व्यापार” का माध्यम बनते नजर आ रहे हैं। इंदिरा मार्केट स्थित वाटर एटीएम संचालक पर पानी की कालाबाजारी और मनमाने दामों पर बिक्री के गंभीर आरोप लगे हैं।

    स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के अनुसार, जिस वाटर एटीएम से पहले ₹10 में पूरा केन भर जाता था, अब ₹15 से ₹20 डालने के बाद भी केन पूरा नहीं भर पा रहा। आरोप है कि एटीएम संचालक के कर्मचारी अंदर से पाइप के माध्यम से बड़े केनों में पानी भरकर ई-रिक्शा के जरिए दुकानों तक पहुंचा रहे हैं और एक केन ₹30 से ₹40 तक में बेचा जा रहा है।

    शौर्यपथ टीम के पास इस पूरे मामले के वीडियो फुटेज मौजूद हैं, जिसमें कथित तौर पर वाटर एटीएम से बड़े पैमाने पर पानी भरकर निजी बिक्री किए जाने के दृश्य कैद हैं।

    जनहित की योजना या निजी कमाई का जरिया?

    नगर निगम द्वारा शहर में वाटर एटीएम आम जनता को राहत देने और लागत मूल्य पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए थे। लेकिन आरोप है कि ठेकेदारों की मनमानी ने इस योजना की मूल भावना को ही प्रभावित कर दिया है।

    व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो महीनों से यह खेल लगातार चल रहा है और प्रतिदिन सैकड़ों केन पानी निजी रूप से बेचा जा रहा है। इससे निगम प्रशासन को लाखों रुपए के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।

    जल विभाग भी हुआ सख्त

    मामले में जब जल विभाग प्रभारी से चर्चा की गई तो उन्होंने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए नाराजगी जताई। विभागीय प्रभारी ने वीडियो फुटेज मांगते हुए मामले की जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निगम प्रशासन और जल विभाग इस मामले में केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाएंगे, या फिर वास्तव में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई होगी।

    भ्रष्टाचार पर कार्रवाई या फिर लीपापोती?

    प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव लगातार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई की बात कर रहे हैं। ऐसे में दुर्ग निगम प्रशासन और शहरी सरकार के सामने अब यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है कि जनहित की योजना में कथित गड़बड़ी करने वालों पर वास्तव में सख्त कदम उठाए जाते हैं या फिर मामला नोटिस और चेतावनी तक सीमित रह जाता है।

    भीषण गर्मी के बीच पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता पर मुनाफाखोरी का यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

    दुर्ग।

    ग्राम पंचायत समोदा में अफीम कांड के खुलासे को लेकर सुर्खियों में आए सरपंच अरुण गौतम अब खुद कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। पंचायत चुनाव में दिए गए शपथ-पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने के आरोप में उनका निर्वाचन न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया है। यह फैसला न सिर्फ समोदा बल्कि पूरे जिले की पंचायत राजनीति में बड़ा संदेश लेकर आया है।

    ⚖️ कोर्ट का सख्त रुख, निर्वाचन हुआ शून्य

    अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी, दुर्ग द्वारा 5 मई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि अरुण गौतम ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथ-पत्र (प्ररूप-4-ख-01) में अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी जानबूझकर छुपाई।

    इसे छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम 1995 के नियम 31(क) का उल्लंघन मानते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया गया।

    ? याचिका से खुला मामला

    यह पूरा मामला याचिकाकर्ता श्रीमती भुनेश्वरी देशमुख द्वारा दायर चुनाव याचिका से सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि:

    गौतम ने आपराधिक प्रकरणों को छुपाकर मतदाताओं को भ्रमित किया

    नामांकन प्रक्रिया में गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ा

    कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों में थाना पुलगांव के कई गंभीर मामलों का उल्लेख किया गया, जिनमें हत्या के प्रयास (धारा 307 IPC) जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    ? कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

    रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा पहले आपत्ति खारिज करना नियम विरुद्ध पाया गया

    सुनवाई के दौरान तथ्य स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुए

    शपथ-पत्र में जानकारी छुपाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छल माना गया

    ? अब क्या होगा आगे?

    अरुण गौतम का सरपंच पद तत्काल प्रभाव से समाप्त

    जनपद पंचायत दुर्ग को उप-चुनाव (Bye-election) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

    राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी

    याचिकाकर्ता को 500 रुपये की प्रतिभूति राशि वापस करने का आदेश

    ?️ पृष्ठभूमि: कड़ा मुकाबला, अब पूरा उलटफेर

    2025 के पंचायत चुनाव में अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुनेश्वरी देशमुख को 741 वोट प्राप्त हुए थे।

    चुनाव परिणाम के बाद ही शपथ-पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसे बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर पुनः सुनवाई में लिया गया और अब यह बड़ा फैसला सामने आया।

    ⚠️ राजनीतिक और सामाजिक संदेश

    यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि पंचायत चुनावों में भी पारदर्शिता और सच्चाई से कोई समझौता नहीं होगा।

    शपथ-पत्र में जानकारी छुपाना अब सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ धोखा माना जा रहा है।

    ? अपडेट

    अरुण गौतम की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आगे इस फैसले को चुनौती देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    ? निष्कर्ष:

    समोदा का यह मामला अब एक मिसाल बन गया है—जहां सच छुपाने की कीमत सत्ता गंवाकर चुकानी पड़ी। पंचायत स्तर से लेकर बड़े चुनावों तक, यह फैसला आने वाले समय में प्रत्याशियों के लिए एक कड़ा संदेश है।

    16 जिलों के समाजजन पहुंचे दुर्ग, पटेल चौक पर चक्का जाम… देवालय खोलने और नए अध्यक्ष को भवन सौंपने की मांग

    दुर्ग। केंद्रीय गोंडवाना धमधागढ़ देवालय एवं गोंडवाना भवन को लेकर आदिवासी समाज में लंबे समय से चल रहा विवाद सोमवार को खुलकर सड़क पर दिखाई दिया। समाज के आस्था केंद्र माने जाने वाले इस देवालय में तालाबंदी की कार्रवाई के विरोध में 16 जिलों से पहुंचे समाजजनों ने पहले जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और बाद में अचानक पटेल चौक पर चक्का जाम कर दिया।

    बताया जा रहा है कि केंद्रीय गोंडवाना धमधागढ़ देवालय गोंडवाना समाज का एक प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक केंद्र है, जहां वर्षों से समाज के धार्मिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। पिछले लगभग 20 वर्षों तक संस्था के अध्यक्ष रहे एम.डी. ठाकुर हाल ही में हुए चुनाव में पराजित हो गए थे, जिसके बाद कमलेश ध्रुव नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

    हालांकि चुनाव संपन्न होने के बाद भी भवन और देवालय के संचालन को लेकर विवाद समाप्त नहीं हो सका। समाज के लोगों का आरोप है कि कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक पेचीदगियों का हवाला देकर गोंडवाना भवन एवं देवालय में तालाबंदी कर दी गई, जिससे समाज की धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में समाजजन जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और देवालय को तत्काल खोलने तथा भवन का संचालन नव-निर्वाचित अध्यक्ष को सौंपने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

    स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब समस्या का तत्काल समाधान नहीं निकलता देख समाज के लोगों ने अचानक पटेल चौक पर चक्का जाम कर दिया। देखते ही देखते क्षेत्र में यातायात प्रभावित हो गया और पुलिस प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा।

    पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार समाज के प्रमुख लोगों से चर्चा कर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से समाज के प्रतिनिधियों के एक समूह को चर्चा के लिए कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया है।

    समाचार लिखे जाने तक प्रशासन और समाज के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता जारी थी, जबकि पटेल चौक पर प्रदर्शन और चक्का जाम की स्थिति बनी हुई थी।

    समाज के लोगों में पूर्व अध्यक्ष एम.डी. ठाकुर के प्रति नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समाज की आस्था से जुड़े इस केंद्र को विवाद और तालेबंदी से मुक्त कर नए निर्वाचित नेतृत्व को सौंपा जाना चाहिए, ताकि समाज की गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकें।

    फिलहाल पूरे मामले पर जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वार्ता के बाद समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।

    दुर्ग | 

    दुर्ग शहर के विभिन्न वार्डों में गहराते जल संकट और बदहाल जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर आज जन-प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की। शहर के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से पानी की बूंद-बूंद के लिए मची हाहाकार और स्थानीय तालाबों के सूखने/खाली किए जाने के विरोध में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

    प्रमुख समस्याएँ: क्यों प्यासा है दुर्ग?

    ज्ञापन में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए प्रमुख रूप से तीन बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया:

    तालाबों का अस्तित्व खतरे में: शहर के पारंपरिक जल स्रोतों (तालाबों) को खाली किया जा रहा है, जिससे न केवल भूजल स्तर गिर रहा है बल्कि पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

    अनियमित जलापूर्ति: कई मोहल्लों में नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी का दबाव (Pressure) बहुत कम है, और कुछ क्षेत्रों में तो घंटों तक पानी की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

    भीषण गर्मी में आम नागरिक बेहाल: पारा बढ़ने के साथ ही पानी की खपत बढ़ी है, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभाग सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रहे हैं।

    ज्ञापन की मुख्य मांगें

    कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

    जलापूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग: उन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए जहाँ पानी नहीं पहुँच रहा है और वहां टैंकरों के बजाय पाइपलाइन व्यवस्था को सुधारा जाए।

    तालाबों का संरक्षण: तालाबों को खाली करने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए जल संचय की योजना बनाई जाए।

    दोषियों पर कार्रवाई: जलापूर्ति बाधित होने के पीछे यदि कोई तकनीकी लापरवाही या प्रशासनिक ढिलाई है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

    प्रशासनिक आश्वासन

    कलेक्टर महोदय ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को वस्तुस्थिति की जांच करने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि "हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

    "पानी का अधिकार, बुनियादी अधिकार है। दुर्ग की जनता को प्यासा रखकर विकास की बातें बेमानी हैं। हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस पर त्वरित एक्शन लेगा।"

    भिलाई ब्यूरो 

    भिलाई। छत्तीसगढ़ और नागपुर विदर्भ क्षेत्र में तबलीग़ जमात के 'अमीर' हाजी मोहम्मद असलम का शनिवार 2 मई को तड़के दो बजे इंतकाल हो गया। हाजी असलम कई दिनों से बीमार चल रहे थे। खुर्सीपार निवासी सैय्यद असलम ने बताया कि मरहूम हाजी मोहम्मद असलम के जनाजे की नमाज़ यंग मुस्लिम फुटबॉल ग्राउंड मोमिनपुरा नागपुर में उनके बेटे मौलाना अब्दुल्ला ने पढ़ाई। 

     नमाजे जनाजा मे निजामुद्दीन मरकज दिल्ली, बरार, महाराष्ट्र, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के उलेमा के साथ आम लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के मुस्लिम समाज के लोगों ने हजारों की तादाद में नागपुर पहुंच कर अपनी अकीदत का इजहार किया। 

    गौरतलब है कि तबलीग़ जमात में आध्यात्मिक स्तर पर संगठन प्रमुख 'अमीर' का पद मशविरा से तय होता है। हाजी मोहम्मद असलम नागपुर के रहने वाले थे और तबलीग़ के काम को लेकर छत्तीसगढ़ बरार , महाराष्ट्र सहित देश विदेश में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि हाजी मोहम्मद असलम ने अल्लाह के दीन और हज़रत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम की पाकीजा जिंदगी को अपनाने लोगों की सच्ची रहनुमाई की। समाज के लिए उनका दुनिया से जाना एक रहनुमा एक सच्चा दाई (प्रेरक व्यक्तित्व) और बुर्जुग शख्सियत का चला जाना है।

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    आईकेएफ सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान संवाद किया वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच ने

    भिलाई। टाइगर कैपिटल के सहयोग से इंडिया खेलो फुटबॉल (आईकेएफ) के सीज़न-6 के ट्रायल के दौरान वरिष्ठ पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने पालकों और उभरते फुटबॉलरों से संवाद किया। उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों की परवरिश में सामने आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए पालकों को कुछ सुझाव भी दिए। उल्लेखनीय है कि यहां 2 और 3 मई 4 अलग-अलग सत्रों में सेक्टर-2 के फुटबॉल ग्राउंड में ट्रायल रखा गया था। जिसमें 200 से ज्यादा उभरते फुटबॉलरों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया।

    ट्रायल के आखिरी दौर के बाद 3 मई की शाम पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन का संवाद सत्र रखा गया। उन्होंने इस दौरान समाज में खास तौर पर बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजीटल दुनिया में बढ़ती निर्भरता को बड़ी चुनौती बताया।

    उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि आज स्मार्ट फोन की लत के चलते मैदान के बजाए डिजीटल दुनिया में खेल खेला जा रहा है, जो हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों को सलाह दी कि दूसरों को भी खेल के लिए प्रेरित करें।

    जैन ने पालकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समय दें और उन्हें सुनने की कोशिश करें। क्योंकि किसी भी बच्चे के लिए माता-पिता से बेहतर काउंसलर कोई नहीं होता। जिस तरह किसी भी पौधे की शुरूआती अवस्था में सुरक्षा के लिए उसके चारों तरफ से घेरा लगाना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह बच्चों को भी एक उम्र तक पैरेंट्स की जरूरत पड़ती है। इसलिए अपने बच्चों को भरपूर समय दें और उनके खानपान के साथ नींद पर भी ध्यान दें। इस दौरान कुछ पालकों और बच्चों ने सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा भी शांत की।

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    भिलाई: शिक्षा ही समाज की तरक्की की चाबी है, और जब किसी जरूरतमंद बच्चे के सपनों को संसाधनों की कमी से टूटने का डर सताता है, तो समाज के जागरूक संगठनों का आगे आना एक नई उम्मीद जगाता है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण भिलाई में सर्व समाज कल्याण समिति द्वारा पेश किया गया है, जिसने सेक्टर-7 की बेटी ईशा साहू की संपूर्ण शिक्षा का बीड़ा उठाया है।

    इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू ने की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि समाज के हर जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा से जोड़ना ही समिति का परम ध्येय है।

    भिलाई टाइम्स की खबर बनी उम्मीद की किरण

    इस नेक पहल की शुरुआत तब हुई जब 'भिलाई टाइम्स' में प्रकाशित एक समाचार के माध्यम से ईशा साहू की संघर्षपूर्ण स्थिति और उनकी पढ़ाई में आ रही बाधाओं की जानकारी सामने आई। अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू के निर्देश पर समिति की टीम ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और ईशा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का विस्तृत सर्वे किया।

    निर्णय: ईशा की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी समिति की

    सर्वे रिपोर्ट और परिवार की वास्तविक स्थिति को समझने के बाद, सर्व समाज कल्याण समिति ने एक बड़ा और प्रशंसनीय निर्णय लिया। समिति के पदाधिकारियों ने आज ईशा के परिवार से मुलाकात की और उन्हें यह सुखद संदेश दिया कि "अब ईशा की आगे की संपूर्ण शिक्षा की जिम्मेदारी सर्व समाज कल्याण समिति भिलाई द्वारा उठाई जाएगी।"

    इस जिम्मेदारी के अंतर्गत ईशा को किसी भी मोड़ पर पढ़ाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। समिति द्वारा ईशा को निम्नलिखित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी:

    स्कूल की पूरी पढ़ाई का खर्च।

    स्कूल ड्रेस।

    कॉपी-किताबें।

    शिक्षा से संबंधित अन्य सभी आवश्यक सामग्री।

    अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू का विजन

    इस नेक पहल पर अपना वक्तव्य देते हुए सर्व समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू ने कहा:

    "हमारा प्रयास समाज के हर उस जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी भी कारण से पीछे रह रहा है। ईशा साहू की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाकर हम न केवल उसके सपनों को सच करने में मदद कर रहे हैं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत नींव भी रख रहे हैं। सर्व समाज कल्याण समिति समाज के प्रति अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।"

    यह पहल भिलाई में एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि यदि समाज और उसके संगठन एकजुट हों, तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

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