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रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 08 अप्रैल को नारायणपुर और कांकेर जिले के प्रवास पर रहेंगे और वहां आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री 8 अप्रैल को सुबह 10.45 बजे पुलिस परेड ग्राउण्ड रायपुर से प्रस्थान कर सुबह 11.30 बजे नारायणपुर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हेलीपेड पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री बघेल जिला मुख्यालय नारायणपुर में सुबह 11.30 बजे आयोजित सामूहिक विवाह एवं लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम पश्चात् नारायणपुर से 12.35 बजे हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 12.55 बजे कांकेर जिले की तहसील अंतागढ़ के ग्राम आमाकड़ा पहुंचेंगे और वहां दोपहर एक बजे से आयोजित ‘झलमत्को लया लयोर गोटुल रच्चा उत्सव-2022‘ कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री बघेल कार्यक्रम पश्चात् अंतागढ़ से प्रस्थान करेंगे।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा नगर पालिकाओं को अधोसंरचना विकास के लिए 5 करोड़ रूपए और नगर पंचायतों को अधोसंरचना विकास के लिए 3 करोड़ रूपए की राशि उपलब्ध कराने की घोषणा पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा समस्त नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अधोसंरचना विकास मद में क्रमशः 5 करोड़ रूपए और 3 करोड़ रूपए की वित्तीय स्वीकृति की अनुशंसा करते हुए नगरीय निकायों से इस मद में कराए जाने वाले कार्यो के प्रस्ताव 15 दिनों में विशेष वाहक के माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बघेल द्वारा 31 मार्च को यह घोषणा की गई थी, जिसके तारतम्य में नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा वित्त समिति की 4 अप्रैल को आयोजित बैठक में वित्तीय वर्ष 2021-22 में अधोसंरचना विकास मद में नगर पालिकाओं को 5 करोड़ रूपए तथा नगर पंचायतों को 3 करोड़ रूपए उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा राजनांदगांव जिले के नगरीय निकायों को छोड़कर अन्य सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भेजे गए पत्र में अधोसंरचना विकास के कार्यो के प्रस्ताव में मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री की घोषणा के अनुरूप कराए जाने वाले कार्यो, सड़क मरम्मत, अनुरक्षण, नवीन सड़क निर्माण, नाला-नाली निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, वंचित क्षेत्रों में अधोसंरचना मद अंतर्गत सड़क, नाली के निर्माण, वंचित क्षेत्रों में पाइप लाईन के माध्यम से पेयजल वितरण के प्रस्ताव, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में 30 प्रतिशत की राशि के कार्यो के प्रस्ताव और स्ट्रीट लाईट के प्रस्ताव शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को प्रस्तावों के संबंध में तकनीकी स्वीकृति, पीआईसी, परिषद् का संकल्प तथा कार्य हेतु प्रस्तावित स्थल के फोटोग्राफस 15 दिनों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय में विशेष वाहक के माध्यम से भेजने को कहा गया है।
रायपुर /शौर्यपथ/
सौजन्य भेंट
छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त ने आज दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में राज्यपाल अनुसुईया उइके से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान दत्त से राज्यपाल उइके ने देश प्रदेश के विभिन्न विषयों पर विमर्श करते हुए छत्तीसगढ़ की वर्तमान आर्थिक, सामाजिक स्थिति एवं कानून व्यवस्था पर भी विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने दत्त को शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त ने काव्य संग्रह भी उइके को भेंट किया।
रायपुर /शौर्यपथ/
नक्सलवाद सहित
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से आज नई दिल्ली में राज्यपाल अनुसुईया उइके ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उइके ने गृह मंत्री शाह से राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों, वहां की समस्याओं और नक्सली गतिविधियों के संबंध में चर्चा की। इस दौरान उइके ने बताया कि उनके द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा किया गया। उन्होंने राज्य के आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं और उनके समाधान के संबंध में शाह को अवगत कराया।
उइके ने केन्द्रीय गृहमंत्री शाह से बस्तर और सरगुजा संभाग के लिए विशेष पैकेज के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि विशेष पैकेज मिलने से इन क्षेत्रों के लोगों का विकास तेजी से हो सकेगा। सुश्री उइके ने इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा विस्तार, यहां के युवाओं में शिक्षा के प्रसार और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विशेष पैकेज को आवश्यक बताया।
इस अवसर पर उइके ने केन्द्रीय गृहमंत्री शाह का शाल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। साथ ही राज्यपाल की गतिविधियों पर आधारित पुस्तक नई सोंच-नई पहल का द्वितीय भाग भी भेंट किया।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार 8 अप्रैल को नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुर वासियों को 127 करोड़ 83 लाख रूपये लागत के 101 विकास कार्यों की सौगात देंगे इनमें 72 करोड़ 8 लाख 25 हजार रूपए की लागत के 46 विकास कार्यों का लोकार्पण और 55 करोड़ 75 लाख रूपये की लागत के 55 विकासकार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इसके अलावा मुख्यमंत्री बघेल सामूहिक कन्या विवाह योजना में शामिल होने सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को चेक एवं उनकी जरूरत के समानों का वितरण करेंगें।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नारायणपुर जिले के 251 जोड़ों का सामूहिक कन्या विवाह योजनांर्तगत विवाह समारोह में शामिल होंगें एवं नवविवाहित जोड़ों को आर्शीवाद प्रदान करेंगें। इसके अलावा मुख्यमंत्री बघेल बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में अबूझमाड़ क्षेत्र के 500 किसानों को मसाहती पट्टे वितरित करेंगें। श्री बघेल समाज कल्याण विभाग के 36 हितग्राहियों को श्रवण यंत्र, ट्रायसिकल, बैटरी चलित ट्रायसिकल, दिव्यांगजन विशिष्ट पहचान कार्ड, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजनातर्गत राशि प्रदाय, रेशम विभाग के हितग्राहियों को 100 नग टसर बुनियादी रीलिंग मशीन, महिला रेशम कृमिपालन समूह को चेक वितरण, कृषि विभाग के हितग्राहियों को उड़द बीज, स्पेयर पंप, स्प्रिंकलर, श्रम विभाग के हितग्राहियांे को भागिनी प्रसूति सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांगजन सहायता योजना एवं 26 हितग्राहियों को वनाधिकार पत्र का वितरण करेंगें।
मुख्यमंत्री बघेल नारायणपुर जिले जिन विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगें, उनमें ब्रेहबेड़ा से मेटाडोंगरी वृहद पुल निर्माण लागत 7 करोड़ 67 लाख रूपए, जिला नारायणपुर में सर्किट हाउस का निर्माण कार्य लागत 5 करोड़ 89 लाख रूपए, सुलेंगा से तिरकानार 5 करोड़ 50 लाख रूपए, नारायणपुर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान प्रशासनिक एकेडमिक भवन निर्माण लागत 5 करोड़ 55 लाख रूपए, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण अंतर्गत ग्राम महिमागवाड़ी से ताडोनार तक सड़क निर्माण लागत 3 करोड़ 20 लाख रूपए, स्कूलपारा से कोहकापारा लागत 3 करोड़ 33 लाख रूपए, नयापारा कुकड़ाझोर से खासपारा के लिए लागत 3 करोड़ 35 लाख रूपए सहित अन्य विकास कार्य शामिल है।
इसी तरह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नारायणुर जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत 24 करोड़ 72 लाख रूपए की लागत से स्थापित होने वाली 36 सोलर आधारित नल-जल योजना, खोडगांव से चिचाडीपारा लागत 6 करोड़ 22 लाख रूपए, जल जीवन मिशन अंतर्गत सोलर ड्यूल पंपों की स्थापना कार्य लागत 5 करोड़ रूपए, मढोनार से कावानार लागत 3 करोड़ 82 लाख रूपए, 37 नवीन आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कार्य लागत 2 करोड़ 5 लाख रूपए सहित अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगें।
रायपुर /शौर्यपथ/
राम वन गमन पर्यटन परिपथ : श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए तैयार है नयी सुविधाएं
छत्तीसगढ़ में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम पर बसा शिवरीनारायण धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। इस स्थान की महत्ता इस बात से पता चलती है कि देश के चार प्रमुख धाम बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम के बाद इसे पांचवे धाम की संज्ञा दी गई है। यह स्थान भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान है इसलिए छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां प्रभु राम का नारायणी रूप गुप्त रूप से विराजमान है इसलिए यह गुप्त तीर्थधाम या गुप्त प्रयागराज के नाम से भी जाना जाता है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए तैयार है नयी सुविधाएंशिवरीनारायण रामायण कालीन घटनाओं से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार वनवास काल के दौरान यहां प्रभु राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे। रामायण काल की स्मृतियों को संजोने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पर्यटन परिपथ के विकास के लिए कॉन्सेप्ट प्लान बनाया गया है। इस प्लान में शिवरीनारायण में मंदिर परिसर के साथ ही आस-पास के क्षेत्र के विकास और श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं के लिए यहां 39 करोड़ रूपए की कार्य योजना तैयार की गई है। प्रथम चरण में 6 करोड़ रूपए के विभिन्न कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, इससे यहां आने वाले लोगों को नई सुविधाएं मिलेंगी।
राम वन गमन पथ: कॉन्सेप्ट प्लान के लिए 133 करोड़ रूपए का प्रावधान -
राम वन गमन कॉन्सेप्ट प्लान में प्रभु राम के छत्तीसगढ़ में वनवास काल में भ्रमण से संबंधित 75 स्थानों को धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनायी गई है। इनमें प्रथम चरण में 9 स्थल चिन्हित कर वहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके लिए 133 करोड़ रूपए की कार्ययोजना तैयार की गई है। चयनित स्थानों पर आवश्यकता अनुसार पहुंच मार्ग का उन्नयन, संकेत बोर्ड, पर्यटक सुविधा केन्द्र, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वैदिक विलेज, पगोड़ा वेटिंग शेड, मूलभूत सुविधा, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, सिटिंग बेंच, रेस्टोरेंट, वाटर फ्रंट डेव्हलपमेंट, विद्युतीकरण आदि कार्य कराए जाएंगे। राम वन गमन मार्ग में आने वाले स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम रायपुर जिले के आरंग तहसील के गांव चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर से शुरू हुआ है।
शिवरीनारायण में नई सुविधाएं-
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में राम वन गमन परिपथ के अंतर्गत विकसित की गई नई सुविधाओं और विभिन्न कार्यों का लोकार्पण करेंगे। यहां प्रथम चरण में 6 करोड़ के विकास कार्य पूर्ण कराए गए हैं। इनमें शिवरीनारायण के मंदिर परिसर का उन्नयन एवं सौदर्यीकरण, दीप स्तंभ, रामायण इंटरप्रिटेशन सेन्टर एवं पर्यटक सूचना केन्द्र, मंदिर मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार, नदी घाट का विकास एवं सौंदर्यीकरण, घाट में प्रभु राम-लक्ष्मण और शबरी माता की प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार घाट में व्यू पाइंट कियोस्क, लैण्ड स्केपिंग कार्य, बाउंड्रीवाल, मॉड्यूलर शॉप, विशाल पार्किंग एरिया और सार्वजनिक शौचालय का निर्माण शामिल है।
स्थापत्य कला एवं मंदिर
शिवरीनारायण का मंदिर समूह दर्शनीय है। यहां की स्थापत्य कला और मूर्तिकला बेजोड़ है। यहां नर-नारायण मंदिर है, इसका निर्माण राजा शबर ने करवाया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। केशवनारायण मंदिर ईंटों से बना है, यह पंचरथ विन्यास पर भूमि शैली पर निर्मित है। यहां चंद्रचूड़ महादेव मंदिर, जगन्नाथ मंदिर भी दर्शनीय है। यह पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सदृश्य है। शिवरीनारायण शहर से लगे ग्राम खरोद में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के अनेक मंदिर हैं इनमें मुख्य रूप से दुल्हादेव मंदिर, लक्ष्मणेश्वर मंदिर, शबरी मंदिर प्रसिद्ध है।
प्रसिद्ध है यहां की रथ यात्रा
शिवरीनारायण शैव, वैष्णव धर्म का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह स्थान भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान होने के कारण यहां रथयात्रा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की विग्रह मूर्तियों को यहीं से जगन्नाथपुरी ले जाया गया था। यहां पुरी की तर्ज पर रथ यात्रा का आयोजन होता है। इसमें छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों के साधु संत और श्रद्धालु शामिल होते हैं।
सबसे बड़ा मेला: साधु संत का शाही स्नान
माघी पूर्णिमा को यहां छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा 15 दिवसीय मेला लगता है। महाशिवरात्रि के दिन मेले का समापन होता है। माघी पूर्णिमा के दिन यहां साधु संत शाही स्नान करते हैं। यहां बहुत दूर-दूर से श्रद्धालु आते है ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ एक दिन के लिए शिवरीनारायण मंदिर में विराजते हैं।
प्रभु राम महानदी मार्ग से यहां पहुंचे
जनश्रुति के अनुसार प्रभु राम वनवास काल में मांड नदी से चंद्रपुर ओर फिर महानदी मार्ग से शिवरीनारायण पहुंचे थे छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के भरतपुर तहसील में मवाई नदी से होकर जनकपुर नामक स्थान से लगभग 26 किलोमीटर की दूर पर स्थित सीतामढ़ी-हरचौका नामक स्थान से प्रभु राम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। प्रभु राम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से लगभग 10 वर्ष से अधिक समय छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों पर व्यतीत किया था।
छत्तीसगढ़ है प्राचीन दक्षिणापथ-
शोधार्थियों के अनुसार त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ दक्षिण कोसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था। दण्डकारण्य में प्रभु राम के वनगमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है। शोधकर्ताओं के शोध से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रभु श्रीराम के द्वारा उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने के बाद छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों का भ्रमण करने के बाद दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था। अतः छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ भी कहा जाता है।
रायपुर /शौर्यपथ/
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आज नई दिल्ली में राज्यपाल अनुसुईया उइके ने मुलाकात की। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री से छत्तीसगढ़ में जनजातियों के साथ ही प्रदेश के विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करते हुए राज्य की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले नगरीय क्षेत्रों में मेसा कानून लागू करने का अनुरोध किया। साथ ही कहा कि मेसा कानून लागू होने से जनजातियों को उनके संवैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पेसा कानून के संबंध में नियम बनाने के संबंध में चर्चा की। चर्चा के दौरान राज्यपाल ने प्रधानमंत्री मोदी को जनजातियों की समस्याओं से अवगत कराया। उइके ने प्रधानमंत्री को जनजातियों के जाति नाम में मात्रात्मक त्रुटियों से अवगत कराते हुए कहा कि इससे पात्र व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। राज्यपाल ने इस विषय पर जल्द निर्णय लेने का भी अनुरोध किया।
राज्यपाल उइके कहा कि उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान वहां के जनजातियों के साथ संवाद किया, उनकी समस्याओं को देखा और समझा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा की और राज्य के आदिवासियों के विकास के संबंध में कई निर्णय लेने की आवश्यकता बताई। उन्होंने अनुरोध किया कि आदिवासी बाहुल्य जिलों में स्थित विश्वविद्यालयों को केेंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय के रूप में उन्नत किया जाये जिससे यहां के जनजातीय समुदायों को लाभ मिल सके। चर्चा के दौरान सुश्री उइके ने बताया कि इन क्षेत्रों की जनजातियों की कला संस्कृति को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने अनुरोध किया कि इन जनजातियों पर शोध कर उनका दस्तावेजीकरण किया जाये जिससे इनकी संस्कृति की पहचान पूरे देश में हो सके। बस्तर और सरगुजा संभाग में निवासरत् जनजातियों के समुचित विकास के लिए राज्यपाल उइके ने प्रधानमंत्री मोदी से विशेष पैकेज देने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि विशेष पैकेज मिलने से इन क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का विस्तार होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और जनजातिय समुदाय का और बेहतर विकास हो सकेगा।
सुश्री उइके ने प्रधानमंत्री मोदी से देश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शहरी सामाजिक कार्यकर्ताओं (ऊषा) और आशा कार्यकर्ताओं के संबंध में भी चर्चा करते हुए कहा कि ये कार्यकर्ता पूरी लगन से प्रदेश सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अपने कार्याे का संपादन कर रहे हैं। कोरोना काल में भी इनके द्वारा लगातार कार्य किया जाता रहा है। सुश्री उइके ने इन कार्यकर्ताओं के कार्याे की सराहना करते हुए श्री मोदी से इनके मानदेय में वृद्धि के साथ ही उनके स्थायीकरण की दिशा में भी विचार करने का अनुरोध किया।
चर्चा
राज्यपाल ने उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल के चार जिलों चन्दौली, कुशीनगर, संत कबीरनगर, संत रविदास नगर को जनजाति जिलों में शामिल करने पर मोदी को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने प्रधानमंत्री को प्रतीक चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में पर्यावरण की बेहतरी और आदिवासियों की आजीविका के लिए कार्य करने वाली नीदरलैंड की वैश्विक संस्था कामनलैण्ड फाउण्डेशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विलियम फरवेर्डा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। कामनलैण्ड फाउण्डेशन ने पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बोडला विकासखण्ड की बैगा बहुल दो ग्राम पंचायतों धोलबज्जा एवं शंभूपीपर का चयन किया है। यहां यह संस्था आदिवासी जन समुदाय के साथ उनके पारंपरिक ज्ञान, विभिन्न योजनाओं के अभिसरण और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदाय की आजीविका के साधनों के विकास के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री बघेल ने विलियम के साथ राज्य में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने एवं आदिवासी समुदाय की आजीविका से संबंधित संचालित योजनाओं और उनके सकारात्मक परिणामों के संबंध में विस्तार से विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री बघेल ने चर्चा के दौरान राज्य मे सुराजी गांव योजना के अंतर्गत संचालित नरवा, गरवा, घुरवा बाड़ी कार्यक्रम, गोधन न्याय योजना एवं मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के बारे में बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के द्वारा स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है और इससे पर्यावरण भी संरक्षित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय को आजीविका के लाभप्रद साधन उपलब्ध कराने के लिए कॉमनलैण्ड फाउण्डेशन द्वारा चयनित ग्राम पंचायतों में वहां की जलवायु के अनुकूल फलों के व्यावसायिक उत्पादन को बढ़ावा देने और उनके प्रसंस्करण का कार्य प्रारंभ करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय जलवायु के अनुकूल अलग-अलग फलों के लिए अलग-अलग उद्यान विकसित किए जाने चाहिए। फलों का प्रसंस्करण भी वहीं किया जाना चाहिए। साथ ही फलदार पौधों की नर्सरी भी समीप में विकसित की जानी चाहिए। यहां पैदा होने वाले फलों के उपयोग से न केवल आदिवासियों के पोषण के स्तर में सुधार होगा, बल्कि फलों और फलों के प्रसंस्कृत उत्पादों के विक्रय से उन्हें अच्छी आमदनी भी होगी। इस अवसर पर कामनलैंड फाउण्डेशन के डायरेक्टर श्री लारेंस, सुश्री हरमा, दिल्ली के सुशील, आदित्य, फाउण्डेशन फॉर इकोलॉजिकल सेक्यूरिटी की मंजीत कौर बल एवं समर्थ संस्था से शुभांगी मौजूद थीं।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप गौठानों को ग्रामीणों को आजीविका के केन्द्र के रूप में विकसित करने को लेकर वहां कई तरह की आयमूलक गतिविधियों को विस्तार किया जा रहा है। गौठानों में अब स्थानीय कृषि एवं वनोत्पाद के प्रसंस्करण के लिए इकाईयों की स्थापना तेजी से की जा रही है, ताकि इसके जरिए उत्पादक कृषकों को बेहतर मूल्य तथा स्थानीय मांग की पूर्ति के साथ-साथ रोजगार के अवसर सुलभ हो सके।
सुराजी गांव योजना के तहत गांवों में अब तक स्थापित 8 हजार 366 गौठानों में से लगभग 350 गौठानों ने तेल मिल एवं दाल मिल की इकाईयां स्थापित किए जाने की कार्ययोजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। अब तक 37 गौठानों ने तेल मिल एवं 65 गौठानों में दाल मिल की इकाईयां स्थापित हो चुकी है। शेष प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना तेजी से कराई जा रही है। यहां यह उल्लेखनीय है कि गौठानों से 11 हजार 693 महिला स्व-सहायता समूह जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या 78 हजार 298 है। इसमें से 5 हजार से अधिक समूह वर्मी खाद का उत्पादन, 1700 से अधिक समूह सामुदायिक सब्जी-बाड़ी, 400 से अधिक समूह मशरूम उत्पादन, 651 समूह मछली पालन, 476 समूह बकरी पालन, 527 समूह मुर्गी पालन, 85 समूह पशु पालन, 325 समूह हर्बल उत्पाद तथा 2100 से अधिक समूह अन्य गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा गौठानों में तेल और दाल मिल का संचालन भी शुरू किया गया है। गौठानों से जुड़े महिला समूह अपनी आयमूलक गतिविधियों के माध्यम से 58 करोड़ 44 लाख रूपए की आय कर चुके हैं, जिसमें सर्वाधिक 32 करोड़ 63 लाख रूपए की आय वर्मी खाद उत्पादन से हुई है।
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 के महानायक क्रांतिकारी मंगल पाण्डे को उनके 08 मार्च को शहादत दिवस पर नमन किया है। बघेल ने अपने संदेश में कहा है कि वीर सेनानी मंगल पाण्डे भारतीय स्वाधीनता के अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने अंग्रेजों के दमन के विरूद्ध सबसे पहले आवाज उठाई। उनके साहस ने अन्य सैनिकों को भी शक्ति दी और विरोध की चिंगारी भड़क उठी। सेनानी मंगल पाण्डे ने अंग्रेजों के समक्ष घुटने नहीं टेके और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ब्रिटिश नियमों की खिलाफत के कारण 8 अप्रैल को श्री मंगल पाण्डे को फांसी दे दी गई। उनकी शहादत ने स्वाधीनता की भावना जन-जन में जगा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री मंगल पाण्डे जैसे महानायकों के साहस और बलिदान से हमने आजादी पाई है। उनकी शहादत हमेशा युवाओं को प्रेरणा देती रहेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
