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May 25, 2026
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दुर्ग / शौर्यपथ / पटरी पार क्षेत्र की आम जनता की वर्षों पुरानी मांग पर वार्ड क्रमांक 15 सिकोला बस्ती की जर्जर हो चुकी सड़क भाजपा शासन काल में लंबे समय से उपेक्षित थी । जिसे अब 25 लाख की अधोसंरचना मद से नवनिर्मित किया जाएगा । शहर विधायक अरुण वोरा से वार्ड वासियों ने निगम द्वारा लगातार मांग किए जाने पर भी सड़क निर्माण नहीं किए जाने की शिकायत की जा रही थी जिसे संज्ञान में लेकर विधायक वोरा ने हस्तक्षेप पर पायल मेडिकल से एफसीआई के बाजू धमधा रोड तक 345 मीटर की 6 मीटर चौड़ी सड़क का सीमेंटीकरण करवाने महापौर से चर्चा किया। अब उक्त सड़क का निर्माण किया जाएगा । जिससे क्षेत्र की हजारों जनता को आवागमन में सुविधा होगी। इसके साथ ही वार्ड 28 के पांच बिल्डिंग क्षेत्र में 17 वर्षों से लंबित जर्जर सड़क के 11 लाख के डामरीकरण कार्य का भी आज आस पास के वार्ड वासियों की मौजूदगी में महापौर धीरज बाकलीवाल के मुख्य आतिथ्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा भूमिपूजन कर कार्य प्रारम्भ करवाया गया।
महापौर बाकलीवाल ने कहा कि नवरात्रि के सुभपर्व पर पांच बिल्डिंग एवं पटरी पार सिकोला बस्ती के नागरिकों को नई सड़कों की सौगात मिलने जा रही है। कोविड के कारण नगर निगम के निर्माण कार्यों में आई धीमी गति को अब पुनः तेजी से निष्पादित किया जाएगा व शहर में विकास नजर आने लगेंगे। उन्होंने लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक रहने की अपील करते हुए मास्क, सेनेटाइजर का इस्तेमाल करने व दुर्गा पंडाल में दर्शनार्थियों को भी आग्रह किया है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अवश्य करें। इस अवसर पर सभापति राजेश यादव एमआईसी मेंबर व पार्षद सहित अधिक संख्या में वार्ड नागरिकगण उपस्थित थे। इस दौरान उपस्थित पार्षद सहित वार्ड निवासियों ने इस विकास कार्य के लिए महापौर बाकलीवाल जी का आभार व्यक्त किये ।

प्रवासी श्रमिकों के लिए प्रदेश भर में बनाए गए थे साढ़े 21 हजार से अधिक क्वारेंटाइन सेंटर
आवास एवं भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं कराई गई थीं मुहैया, कोरोना के संभावित मरीजों की तत्काल जांच करवाई गईं
कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने में इन क्वारेंटाइन सेंटरों से मिली बड़ी मदद

रायपुर / शौर्यपथ / देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ लौटे प्रवासी श्रमिकों के लिए ग्राम पंचायतों में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटरों से कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने में बड़ी सहायता मिली है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से इसके लिए प्रदेश भर में 21 हजार 580 क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए थे। कोरोना काल में प्रदेश लौटे छह लाख 80 हजार 665 लोग इन सेंटरों में सफलतापूर्वक क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर अपने घर पहुंच चुके हैं। इन लोगों ने खुद के एवं अन्य ग्रामीणों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से क्वारेंटाइन अवधि पूर्ण करने के बाद अगले दस दिनों तक होम-क्वारेंटाइन में रहने के निर्देशों का भी गंभीरता से पालन किया है।
गांवों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटरों का संचालन एवं नियंत्रण संबंधित जिला प्रशासन द्वारा किया गया। इनके संचालन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। ग्राम पंचायतों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटरों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को आवास और भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं। अस्थायी शौचालयों, पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नानगृहों, स्वच्छ पेयजल, लाइट एवं पंखों की भी वहां व्यवस्था की गई थी। लोगों के मनोरंजन के लिए टेलीविजन एवं रेडियो के इंतजाम के साथ अनेक रचनात्मक गतिविधियां भी वहां संचालित की जा रही थीं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने योग और प्राणायाम का भी अभ्यास कराया गया। वृक्षारोपण, पेंटिंग, खेलकूद, पठन-पाठन जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी उनकी मानसिक सेहत का ध्यान रखा गया।
क्वारेंटाइन सेंटरों में बेहतर साफ-सफाई के साथ कोरोना संक्रमण से बचाव के दिशा-निर्देशों के पालन पर भी जोर दिया गया था। बार-बार हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के साथ ही हैंड-सेनिटाइजर भी उपलब्ध कराया गया था। मुंह ढंकने के लिए मास्क एवं गमछा भी दिया गया। कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मिलने जैसी आपात स्थिति के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रत्येक सेंटर में एक कमरा पृथक से आइसोलेशन के लिए सुरक्षित रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से क्वारेंटाइन सेंटरों में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई। अस्वस्थ लोगों को इलाज और दवाईयां भी मुहैया कराई गईं। संक्रमण की संभावना और लक्षण वाले व्यक्तियों के तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव के निर्देश पर विभाग द्वारा प्रवासी श्रमिकों के लिए मनरेगा के तहत जॉब-कार्ड बनाकर रोजगार दिए जाने के साथ ही उन्हें अन्य योजनाओं के माध्यम से भी रोजगार उपलब्ध कराने त्वरित कदम उठाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा मजदूरों की स्किल-मैपिंग कर औद्योगिक, भवन निर्माण और अन्य क्षेत्रों में उन्हें काम दिलाने के लिए भी गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।

० कलेक्टर ने धान खरीदी के संबंध में समिति प्रबंधकों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों की ली बैठक
० धान खरीदी प्रारंभ होने के पहले सभी तैयारी करने के दिए निर्देश
० धान खरीदी केन्द्र में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य
० 31 अक्टूबर तक किसानों का पंजीयन शत प्रतिशत करने के दिए निर्देश
० जिले की सीमा पर निगरानी रखने के दिए निर्देश 

राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिला पंचायत सभाकक्ष में धान खरीदी और किसान पंजीयन के संबंध में समिति प्रबंधकों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों की बैठक ली। कलेक्टर श्री वर्मा ने धान खरीदी के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाए। ताकि धान खरीदी में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। धान खरीदी केन्द्रों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। धान के पंजीयन का कार्य 31 अक्टूबर तक किया जाना है इस कार्य को समय-सीमा में शत प्रतिशत पूरा किया जाए। पंजीयन कार्य पूरा होने के बाद इसका दावा-आपत्ति भी होना चाहिए। जिससे किसानों को पंजीयन के बाद उनके रकबे की सही जानकारी रहे।
कलेक्टर ने कहा कि जिले के अधिकांश तहसील महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सीमा से लगे हुए है। सीमा से लगे होने के कारण कोचियों द्वारा धान लाने की संभावना बनी रहती है। ऐसी स्थिति में आवागमन वाले सभी रास्तों पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। वहीं सीमा से लगे धान केन्द्रों में कोचियों के माध्यम से धान खपाने की संभावना बनी होती है। समिति प्रबंधकों को धान खरीदी के समय सतर्कता रखनी होगी। धान खरीदी का कार्य पूरी सतर्कता से किया जाना चाहिए। कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि केन्द्रों में सिर्फ खरीफ वर्ष का ही धान खरीदा जाएगा। कुछ लोगों द्वारा पुराने धान को मिलाकर बेचे जाने की शिकायत होती है इस पर भी कड़ी निगरानी रखी जाए।
कलेक्टर वर्मा ने कहा कि धान खरीदी केन्द्रों में बारदाने की व्यवस्था पहले ही कर ली जाए। केन्द्रों में किसानों के लिए पेयजल, छाया, बिजली एवं अन्य सभी व्यवस्थाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण टला नहीं है। धान खरीदी में कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन किया जाना सुनिश्चित करें। धान खरीदी केन्द्रों के कर्मचारी सहित किसानों को मास्क लगाना अनिवार्य है। केन्द्रों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन होना चाहिए इसका ध्यान रखा जाए। कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के सभी उपाए पहले ही कर ली जाए। कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि धान खरीदी पूरी सावधानी से गुणवत्तापूर्ण करनी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। धान खरीदी में किसानों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। शिकायत मिलने और सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि जिले में लगातार गोबर की खरीदी की जा रही है और इसका भुगतान हर 15 दिन में हितग्राहियों के खाते में किया जा रहा है। शासन की यह महत्वपूर्ण योजना इसका प्रचार-प्रसार भी करना आवश्यक है। इस गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है जिसका विक्रय सोयायटी के माध्यम से किसानों को किया जाएगा। इस अवसर पर उप संचालक कृषि जीएस धु्रर्वे, जिला खाद्य अधिकारी केके सोमावार, सीईओ जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक सुनील वर्मा, जिला विपणन अधिकारी सौरभ भारद्वाज, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं जान खलखो सहित समिति प्रबंधक उपस्थित थे।

ख़ास बात ...
सुपेबेड़ा के डायलिसिस वाले मरीजों को अब नहीं आना पड़ेगा रायपुर
स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर सुपेबेड़ा में पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और रायपुर एम्स का पायलट प्रोजेक्ट

   रायपुर / शौर्यपथ / किडनी रोग से प्रभावित सुपेबेड़ा के लोगों को अब पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड (Fluid) लेने रायपुर नहीं आना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य इकाई ने इसके लिए फ्लूइड अब देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही उपलब्ध करा दिया है। नियमित पेरेटोनियल डायलिसिस कराने वाले सुपेबेड़ा के एक मरीज को इसके लिए फ्लूइड 17 अक्टूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दिया गया। देवभोग में ही फ्लूइड मिलने से कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच अब मरीजों को डायलिसिस के लिए बार-बार रायपुर नहीं आना पड़ेगा। किडनी के मरीजों में कोरोना संक्रमण घातक होता है। स्थानीय स्तर पर फ्लूइड मिलने से मरीजों और उसके परिजनों के रायपुर आने-जाने में लगने वाले समय, श्रम और धन की बचत होगी।
      स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव की पहल पर सुपेबेड़ा के किडनी प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एम्स रायपुर द्वारा पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।इसके तहत डायलिसिस के लिए एम्स द्वारा मरीज और उनके परिजनों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। देवभोग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों एवं स्टॉफ को भी किडनी रोग के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये डायलिसिस वाले मरीजों की नियमित निगरानी कर उनका फालो-अप लेंगे। सुपेबेड़ा में डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड की आपूर्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा की जा रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि सुपेबेड़ा के मरीजों के पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए दो करोड़ 40 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अंतर्गत वहां 100 मरीजों के डायलिसिस का प्रबंध किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम को देखते हुए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा। घर में किए जाने वाले पेरेटोनियल डायलिसिस के दौरान किसी तरह की समस्या आने पर मरीज को तुरंत उपचार के लिए देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा सकता है। गंभीर मरीजों को वहां से रायपुर भी रिफर किया जाएगा।

राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी व नोडल अधिकारी श्रीमती तनुजा सलाम के मार्गदर्शन में कार्ययोजना बनाकर 5 से 14 अक्टूबर 2020 तक कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान चलाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 3 लाख 35 हजार 630 घरों में सर्वे किया गया। जिसमें 11 हजार 389 कोरोना के लक्षणात्मक व्यक्तियों की पहचान कर सैम्पल लिया गया। कोरोना संक्रमण के लक्षणात्मक व्यक्तियों के पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें आवश्यकतानुसार होम आइसोलेशन, हॉस्पिटल एडमिशन या कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान मैदानी स्तर के कार्यकर्ता, एएनएम, मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आरएचओ, पंचायत विभाग के कर्मचारी, सुपरवाईजर, नगर निगम के कर्मचारी की टीम द्वारा घर-घर सर्वे किया गया। सर्वे में कोरोना लक्षण वाले 11 हजार 389 व्यक्तियों को चिन्हांकित किया गया। जिसमें 1406 व्यक्ति उच्च जोखिम की श्रेणी में थे। जिन्हें कोई अन्य बीमारी थी एवं 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे। लक्षण सहित एवं उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों का प्राथमिकता क्रम में सैम्पल लिया गया। जिसमें 839 व्यक्ति एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव पाए गये। ऐसे लक्षण वाले व्यक्ति जिनका एंटीजन टेस्ट नेगेटिव था, उनमें से 3861 लोगों का आरटीपीसीआर ट्रूनाट सैम्पल लिया गया।
डॉ. चौधरी ने बताया कि मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. प्रियंका शुक्ला ने भी अभियान के दौरान सर्वें कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक सुझाव दिए। साथ ही प्रति सप्ताह बुधवार एवं गुरूवार को सर्वे अभियान लगातार जारी रहेगा। जिससे कोरोना श्रृंखला को तोड़ी जा सकेगी। उन्होंने जिले के नागरिकों से सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, स्वाद व सूंघने की क्षमता में कमी आदि लक्षण आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में 24 घंटे के भीतर जांच कराने की अपील की है। जिससे कोरोना से स्वयं का बचाव एवं परिवार तथा साथियों का बचाव संभव है।
वर्तमान समय में मास्क ही वैक्सीन है। जब भी घर से निकले तो मास्क पहनकर ही निकलें। कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान के लिए नगर निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक, डिप्टी कलेक्टर लवकेश धु्रव, सहायक नोडल अधिकारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक गिरीश कुर्रे, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री अनामिका विश्वास, जिला डाटा प्रबंधक अखिलेश चोपड़ा, मितानीन, समन्वय आदि को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी।

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के महानिरीक्षक पंजीयन अधीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक ने बताया है कि हाल ही में विभिन्न पंजीयन कार्यालयों में पंजीयन होने वाले दस्तावेजों की संख्या अधिक होने के कारण अपॉइंटमेंट प्राप्त होने में कठिनाई होने बाबत सूचना प्राप्त हुई है। विगत माह रायपुर पंजीयन कार्यालय में कुछ स्टाफ के कोविड-19 से संक्रमित होने के कारण पंजीयन कार्य बाधित हुआ था तथा नवरात्री के त्यौहार होने के कारण पंजीयन योग्य दस्तावेजों की संख्या अधिक होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। यह भी पाया जाता है कि कुछ लोगों द्वारा एक ही दस्तावेज के लिए एक से अधिक बार अपॉइंटमेंट प्राप्त कर लिया जाता है। इस कारण से भी आम लोगों को अपॉइंटमेंट प्राप्त करने में असुविधा हुई है। इस समस्या के निराकरण हेतु ई-पंजीयन सिस्टम में सुधार कर ई-पंजीयन अपॉइंटमेंट की नई व्यवस्था की गई है।
ई-पंजीयन की नई व्यवस्था के अनुसार अब विक्रय पत्र मामले में अपॉइंटमेंट केवल प्रतिफल मूल्य के 5 प्रतिशत से अधिक मूल्य के ई-स्टेम्प के आधार पर ही दिया जाएगा। यदि पूर्व से ही किसी पक्षकार द्वारा प्रतिफल राशि के 5 प्रतिशत से कम मूल्य के ई-स्टेम्प के आधार पर अपॉइंटमेंट प्राप्त किया है, उन्हें 24 घंटा का समय देते हुए सूची भेजी जाएगी कि वे सही मूल्य के आधार पर अपॉइंटमेंट प्राप्त करें। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनका अपॉइंटमेंट निरस्त करते हुए अन्य लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। यह भी व्यवस्था की गई है कि एक ही दस्तावेजों के लिए एक से अधिक अपॉइंटमेंट नहीं लिया जा सके इसके लिए यह व्यवस्था की गई है कि सिस्टम इस बात के लिए भी जांच करेगा कि लिए जा रहे अपॉइंटमेंट में उपयोग किए गए ई-स्टेम्प के द्वारा पूर्व में भी तो अपॉइंटमेंट तो प्राप्त नहीं किया गया है। यदि उसी ई-स्टेम्प में पहले भी अपॉइंटमेंट लिया जा चुका है, तो उन्हें अपॉइंटमेंट प्रदान नहीं किया जा सकेगा।
यदि अपॉइंटमेंट प्राप्त होने के कारण कोई पक्षकार अपना दस्तावेज पंजीयन हेतु निर्धारित तिथि और समय में प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो उसी दस्तावेज को पंजीयन हेतु अपॉइंटमेंट 15 दिवस पश्चात प्राप्त हो सकेगा। पक्षकार आसानी से अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सके इसलिए आगामी 15 दिवस के लिए ऐसी व्यवस्था अपॉइंटमेंट पोर्टल में किया गया है। अपॉइंटमेंट प्राप्त करने के लिए पोर्टल प्रतिदिन सुबह 8 बजे से खुलेगा और यह तब तक जारी रहेगा जब तक आगामी 15 दिवस का अपॉइंटमेंट पूरा बुक न हो जाए।

राजधानी रायपुर में पंजीयन कार्यालय में दस्तावेजों की अधिकता होने के कारण यहां पांचवा उपपंजीयक कार्यालय खोलने की स्वीकृति दी गई है। इस अतिरिक्त पंजीयन कार्यालय में रायपुर एसआर5 के नाम से पंजीयन किया जा सकेगा। पक्षकार इसके लिए आगामी सोमवार 19 अक्टूबर 2020 अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सकेंगे। अपॉइंटमेंट प्राप्त होने में किसी प्रकार की कठिनाई होने पर विभागीय हेल्पलाइन नंबर 07714912523,18002332488 में सम्पर्क किया जा सकता है। पंजीयन हेतु पंजीयन कार्यालय में उपस्थित होने वाले सभी पक्षकारों से अनुरोध किया गया है कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी गाइन-लाइन का पालन करें। पंजीयन कार्यालय में भौतिक दूरी बनाए रखने, मास्क लगाने, सेनेटाईजर इस्तेमाल करने बाबत दिए गए निर्देशों का पालन आवश्य किया जाए।

दुर्ग / शौर्यपथ / गृह एवं लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू 18 अक्टूबर रविवार को दुर्ग जिले के दुर्ग विकासखण्ड के विभिन्न गांवों का दौरा कर स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मंत्री साहू सबेरे 10.30 बजे रायपुर से कार से प्रस्थान करेंगे और दोपहर 12 बजे ग्राम उमरपोटी, 12.45 बजे ग्राम पुरई, 1.30 बजे ग्राम खम्हरिया, 2.15 बजे ग्राम धनोरा, 3 बजे ग्राम हनोदा, 4 बजे ग्राम कोडि़या, 4.45 बजे ग्राम भानपुरी और 5.30 बजे ग्राम कोकड़ी में आयोजित स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वे शाम 6 बजे कोकड़ी से प्रस्थान कर वापस रायपुर आएंगे।

भिलाई / शौर्यपथ / कोविड-19 महामारी के मद्देनजर उत्पादन में प्रतिबंधों और रूकावटों के बावजूद, सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने वर्तमान वित्तवर्ष-2020-21 के अपै्रल से सितम्बर की अवधि के दौरान उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में रिकाॅर्ड निष्पादन दर्ज किया है। साथ ही बीएसपी ने प्रथम तिमाही अपै्रल से जून की अवधि के मुकाबले दूसरे तिमाही जुलाई से सितम्बर की अवधि में उत्पादन में बेहतर वृद्धि दर्ज करने में सफलता प्राप्त किया है। विदित हो कि मार्च से जून-2020 के दौरान स्टील की माँग गिरने के पश्चात् फिर बढ़ोतरी की ओर है। सेल-बीएसपी बढ़ी हुई माँग का फायदा उठाने और प्रथम तिमाही मंें निष्पादन में कमी की भरपाई करने हेतु वर्तमान वित्तवर्ष की शेष अवधि में उत्पादन को अधिकतम करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसा करते हुए संयत्र प्रबंधन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा कार्य स्थलों में सैनिटाइजेशन, लोगों को फेस मास्क पहनने के लिए संवेदनशील बनाना और सोशल डिस्टेंसिंग आदि को बनाए रखने पर जोर दे रही है ताकि कोविड-19 के खतरे से बचाव हो सके।
सेल-बीएसपी द्वारा निष्पादन गति में निरंतर श्रेष्ठ वृद्धि की कड़ी में जहाँ ब्लास्ट फर्नेस-8 ने प्रथम तिमाही अवधि के दौरान 11,84,660 टन हाॅट मेटल का सर्वश्रेष्ठ संचयी उत्पादन किया, वहीं सभी ब्लास्ट फर्नेसों ने संयुक्त रूप से प्रथम तिमाही के मुकाबले में द्वितीय तिमाही में कुल हाॅट मेटल के उत्पादन में 48.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
जहाँ संयंत्र के एसएमएस-3 ने प्रथम तिमाही की अवधि में 8,87,128 टन सर्वाधिक कास्ट स्टील उत्पादन का कीर्तिमान रचा, वहीं दोनों स्टील मेल्टिंग शाॅप्स, एसएमएस-2 एवं एसएमएस-3 ने प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में कुल क्रूड स्टील उत्पादन में 47.3 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। जिसमें प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में एसएमएस-2 से 64 प्रतिशत और एसएमएस-3 से 33.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है।
संयंत्र ने यूनिवर्सल रेल मिल और रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल दोनों से वित्तवर्ष 2019-20 के प्रथम छमाही (अपै्रल से सितम्बर) के 5,89,391 टन पिछले सर्वश्रेष्ठ के मुकाबले वर्तमान वित्तवर्ष 2020-21 के प्रथम छमाही में 5,94,983 टन प्राइम रेल्स का सर्वाधिक उत्पादन किया है। जबकि यूआरएम ने 2019-20 के प्रथम छमाही अवधि में 2,38,842 टन के पिछले सर्वश्रेष्ठ के मुकाबले वर्तमान वित्तवर्ष 2020-21 की इसी अवधि में 2,95,228 टन प्राइम रेल्स का सबसे अधिक उत्पादन दर्ज किया। यूआरएम और आरएसएम दोनांे ने संयुक्त रूप से प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में यूटीएस 90 प्राइम रेल्स के कुल उत्पादन में 25.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। जिसमें प्रथम तिमाही की तुलना मंें द्वितीय तिमाही में आरएसएम से 11.4 प्रतिशत और यूआरएम से 37 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है।
संयंत्र के बार एवं रॉड मिल ने वर्तमान वित्तवर्ष के दौरान सेल सिक्योर टीएमटी उत्पादों के नए ग्रेड को विभिन्न मापदंडों में रोलिंग किया है। वर्ष 2019-20 के प्रथम छमाही में 40,503 टन की तुलना में वर्तमान वित्तवर्ष के प्रथम छमाही में 1,25,176 टन उच्चतम उत्पादन दर्ज किया है।
संयंत्र की अन्य फिनिशिंग मिल्स में, मर्चेंट मिल को प्रथम तिमाही के अपै्रल महीने में प्रचालित नहीं किया गया और वायर रॉड मिल को मई और जून-2020 में प्रचालित नहीं किया गया। मर्चेन्ट मिल ने प्रथम तिमाही की तुलना में द्वितीय तिमाही में 246.7 प्रतिशत का उत्पादन वृद्धि दर्ज किया। जबकि वायर राॅड मिल ने 140.3 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर प्लेट मिल जो प्रथम तिमाही के तीनों महीनों के दौरान प्रचालन से बाहर रही, प्रथम छमाही अवधि में 2,17,000 टन का उत्पादन किया।
संयंत्र ने वर्तमान वित्तवर्ष के प्रथम तिमाही के मुकाबले कुल फिनिश्ड इस्पात और विक्रेय योग्य इस्पात उत्पादन में क्रमशः 102.7 प्रतिशत और 58.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।

राज्य के 97.80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को मिला राशन
शत-प्रतिशत श्रमिकों को मिली क्वारंटाइन सुविधा
श्रमिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन, नगद सहायता, कृषि ऋण,
मनरेगा में रोजगार सहित मिली कई सुविधाएं

रायपुर / शौर्यपथ / लॉकडाउन के दौरान लौटे प्रवासी श्रमिकों को सुविधाएं देने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल राज्य रहा है। यह निष्कर्ष इंटरफेरेंशियल सर्वे स्टेटिक्स एण्ड रिसर्च फाउंडेशन (आईएसएसआरएफ) द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य में प्रवासी श्रमिकों को विभिन्न प्रकार की सुविधा देने के लिए तेजी से कदम उठाए और अनेक श्रमिक हितैषी निर्णय लिए गए।
इंटरफेरेंशियल सर्वे स्टेटिक्स एण्ड रिसर्च फाउंडेशन ने देश के छह प्रमुख प्रवासी श्रमिकों की वापसी वाले राज्यों छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सर्वे किया। जो लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध कराई गई आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं पर केन्द्रित रहा।
छत्तीसगढ़ में लौटे शत-प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को क्वारेंटाईन की सुविधा उपलब्ध कराई गई, 97.80 प्रतिशत प्रवासी श्रमिकों को पात्रतानुसार निःशुल्क और रियायती दरों पर राशन दिया गया, इसी तरह श्रमिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन, नगद सहायता, कृषि और मनरेगा में रोजगार और कृषि ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। छत्तीसगढ़ श्रमिकों को निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन देने के मामले में सर्वेक्षित राज्यों में पहले स्थान पर है।
यह सर्वे बिलासपुर, दंतेवाड़ा, जशपुर, महासमुंद और राजनांदगांव की 99 ग्राम पंचायतों में किया गया। जिसमें पांच सौ से अधिक प्रवासी श्रमिकों को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ में किए गए सर्वे में बिलासपुर जिले की 28, दंतेवाड़ा की 15, जशपुर की 20, महासमुंद की 19 और राजनांदगांव की 17 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन ग्राम पंचायतों में 30 जून से 28 जुलाई के बीच सर्वेक्षण किया गया।
सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहली श्रेणी में गैर कृषि कार्य में संलग्न श्रमिक, जो 52.98 प्रतिशत स्किल्ड हैं और दूसरी श्रेणी में आयरन और वेल्डिंग, फेब्रीकेशन कार्यों में 40.43 प्रतिशत स्किल्ड हैं। कुशल श्रमिकों में छत्तीसगढ़ का योगदान एक तिहाई है। छत्तीसगढ़ से 63.94 प्रतिशत श्रमिक कंस्ट्रक्शन, पाइंप कटिंग वर्क में स्किल्ड हैं।
आईएसएसआरएफ द्वारा ‘ऑन माइग्रेन वर्कस‘ विषय पर किए गए सर्वे में शहरों से गांव में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों पर लॉकडाउन के दौरान उनकी आजीविका और उनकी स्थित पर पड़ने वाले प्रभावों का छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के 34 जिलों में अध्ययन किया गया।

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