June 25, 2022
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शौर्यपथ

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रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री बघेल ने किसान अर्जुन दीवान के घर किया दोपहर का भोजनमुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज अपने भेंट मुलाकात के प्रदेशब्यापी कार्यक्रम के दौरान जशपुर जिले के दुलदुला विकाशखण्ड के ग्राम पतराटोली में किसान अर्जुन सिंह दीवान के घर दोपहर का भोजन किया।कटहल, कुल्थी दाल,बैंग भाजी अरसा और महुआ गुड़ा का लिया स्वादभोजन में उन्होंने स्थानीय कटहल की सब्जी, आमटी भाजी, बैंग भाजी,कुल्थी की दाल, कोयनार,सुनसुनिया भाजी, महुआ गुड़ा, मुनगा भाजी,साखी कांदा ,अरसा और आलू बड़ी, मडुवा हलुवा और महुवा गुडा का लिया स्वाद लिया। इस अवसर पर कुनकुरी विधायक श्री यू. डी. मिंज भी मुख्यमंत्री के साथ थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गांव के किसान के घर खाना खाकर जो आनंद की अनुभूति हुई वो किसी इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गांव के किसान के घर खाना खाकर जो आनंद की अनुभूति हुई वो किसी रेस्टोरेंट में खाकर भी नही आता। शुद्ध देशी और छतीसगढिया खाना का यह स्वाद हमेशा याद रहेगा। घर आगमन पर घर के सदस्यों ने मुख्यमंत्री का परम्परागत तरीके से आत्मीय स्वागत्व किया।
80 वर्षीय किसान अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री के साथ भोजन कर बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि यह80 वर्षीय किसान अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री के साथ भोजन कर बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि यह मेरा और परिवार का सौभाग्य है कि मुख्यमंत्री आज मेरे घर भोजन पर आए। भोजन के दौरान विधायक श्री यू डी मिंज भी मौजूद थे।

राहुल की स्पीच थैरेपी कराई जाएगी
राहुल के पिता श्री रामकुमार ने मुख्यमंत्री और पूरी रेस्क्यू टीम के प्रति जताया आभार

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जांजगीर-चांपा जिले के मालखरौदा विकासखण्ड के पिहरीद गांव में बोरवेल में सकुशल निकाले गए बालक राहुल साहू के आज इलाज के बाद बिलासपुर के अपोलो अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सबकी दुआओं और मेहनत से राहुल स्वस्थ होकर आज अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल को 104 घंटे के लगातार मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बोरवेल से सुरक्षित निकाला गया, इसके बाद उनकी जो मेडिकल समस्याएं थी, उनका डॉक्टरों ने तत्परता से और गंभीरता से इलाज किया और आज राहुल अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया हैै, इससे ज्यादा संतोष की बात दूसरी नहीं हो सकती। श्री बघेल ने कहा कि राहुल की स्पीच थैरेपी कराई जाएगी, जिससे वे बोल सकें।

राहुल के पिता श्री रामकुमार साहू ने अस्पताल से स्वस्थ होकर राहुल के डिस्चार्ज होने पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, जांजगीर-चांपा कलेक्टर सहित पूरी रेस्क्यू टीम को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि राहुल को बचाने के लिये जिला प्रशासन, एन.डी.आर.एफ., एस.डी.आर.एफ., सेना सहित अन्य सभी टीम ने बहुत मेहनत की। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी भी लगातार उनसे बात कर राहुल को सकुशल निकालने और हरसंभव मदद की बात कहते रहे हैं। आज मुख्यमंत्री श्री बघेल के ही कारण राहुल बोरवेल से बाहर निकला और उनके ही निर्देश पर राहुल का बहुत बढ़िया इलाज हो पाया है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री सहित कलेक्टर और अन्य सभी को धन्यवाद देता हूं।

अपोलो अस्पताल से राहुल के डिस्चार्ज होने के समय जांजगीर-चांपा के कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुमार शुक्ला और पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल भी उपस्थित थे।

फरसाबहार में 67 स्थानों पर देवगुड़ी के लिए दो करोड़ की स्वीकृति
कोल्हेजहारिया में प्री एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावास और फरसाबहार में प्रारंभ होगी सहकारी बैंक की शाखा

जशपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जशपुर जिले में फरसबहार विकासखण्ड में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की शुरूआत पमशाला में ईब नदी के तट पर स्थित कंवर समाज के मंदिर राधा कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की। मुख्यमंत्री ने ईब नदी के तट पर आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में ग्राम कोल्हेजहारिया में प्री एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावास तथा पुलिस चौकी की स्थापना, तपकरा में नायब तहसीलदार कोर्ट की घोषणा की। उन्होंने फरसाबहार के हाथी प्रभावित क्षेत्र में हाई मास्ट लाइट लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने तपकरा में स्वामी आत्मानंद स्कूल खोलने, फरसाबहार में सहकारी बैंक प्रारंभ करने, पमशाला के हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी में उन्नयन, फरसाबहार में 67 स्थानों पर देवगुड़ी के सौंदर्यीकरण के लिए दो करोड़ की स्वीकृति की घोषणा की। पमशाला पहंुचने पर वहां मुख्यमंत्री का स्वागत पगड़ी और साफा पहनाकर किया गया।
मुख्यमंत्री ने पमशाला में छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना कर भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में किसानों और ग्रामीणों से शासकीय योजनाओं की मैदानी स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से हाट बाजार क्लिनिक योजना का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लघुवनोपजों की खरीदी और वेल्यू एडिशन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका लाभ भी वनवासियों को मिल रहा है। सबसे पहले जशपुर से ही महुआ से सेनेटाईजर बनाया गया। कार्यक्रम में सितरेंगा के रजनी कुजूर ने बताया कि उन्होंने राशन कार्ड के लिए आवेदन किया है। मुख्यमंत्री ने जल्द ही राशनकार्ड बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। साजबहार के दीपक ने वन अधिकार पट्टा की मांग की। मुख्यमंत्री ने इस पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल फरसाबहार के बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए जल्द ही बस की सुविधा मिलेगी। ग्राम पमशाला में मुख्यमंत्री ने इस स्कूल बच्चों से मुलाकात के दौरान बच्चों की सुविधा के लिए कलेक्टर को जल्द ही बस की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वामी आत्मानंद स्कूल के बच्चों से स्कूल की गतिविधियों और पढ़ाई-लिखाई की जानकारी ली। फरसाबहार आत्मानन्द स्कूल के छात्र नूतन कुमार ने बताया कि स्कूल में पढाई अच्छी होती है।
स्कूल में लैब और लाइब्रेरी आदि की सभी सुविधाएं हैं। स्कूल में अभी 500 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों ने स्कूल दूर होने के कारण बस सुविधा की मांग की । मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को बस की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बांधों और भू-जल संरचनाओं में अनिवार्य रूप से हो डिसिल्टिंग
नरवा विकास से पर्यावरण, वन्य प्राणियों के संरक्षण और वनों के विकास को मिला बढ़ावा
छोटे बांधों के रख-रखाव और राजीव गांधी जल ग्रहण मिशन के पुराने कार्यो का भी समुचित रख-रखाव के निर्देश
वन क्षेत्रों में 1290 करोड़ की लागत से 6395 नालों का हो रहा उपचार
अब तक 2800 नालों के उपचार का कार्य पूर्ण
मुख्यमंत्री ने की नरवा विकास योजना की समीक्षा


   रायपुर / शौर्यपथ /  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि नरवा विकास योजना के अंतर्गत नालों में जल संरक्षण एवं संवर्धन के किए जा रहे कार्यों को वैज्ञानिक पद्धति से किया जाए। नरवा विकास के कार्यों के फलस्वरुप जल स्तर में होने वाले सुधार का आंकलन भी वैज्ञानिक पद्धति से रिमोट सेंसिंग सैटलाइट के जरिए किया जाए। प्रदेश में जिन नालों का उपचार किया गया है, उन्हें दर्शाने वाले नक्शा भी तैयार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री आज यहां अपने निवास कार्यालय में नरवा विकास योजना के अंतर्गत वन क्षेत्रों में कैंपा मद से विभिन्न नालों के उपचार के किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
श्री बघेल ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ का सैटेलाइट नक्शा उपलब्ध है, इसमें जहां-जहां फ्रैक्चर है, वहां पर भू जल संवर्धन संरचनाएं तैयार की जानी चाहिए, जिससे जल का भूमि में अच्छे ढंग से रिसाव हो सकेगा। उन्होंने नरवा उपचार के कार्यों से मिट्टी के क्षरण में आ रही कमी का आंकलन करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बैठक में समीक्षा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी से गांव-गांव में रोजगार सहित आर्थिक गतिविधियांें को अच्छी गति मिली है। इनमें खासकर जल संचयन तथा जैव और पर्यावरण सुधार में नरवा विकास योजना एक कारगर माध्यम साबित हो रहा है। राज्य में नरवा विकास के चलते नाला के आसपास के इलाको में भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हो रही है। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों से भी अधिक वनांचल में नरवा विकास योजना से भू-जल स्तर में 20 से 30 सेंटीमीटर की वृद्धि के साथ उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। इससे वनांचल में वन्य प्राणियों के रहवास में सुधार सहित निस्तारी तथा सिंचाई आदि सुविधाओं का भी लोगों को भरपूर लाभ मिलने लगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरवा विकास के कार्यों से वन क्षेत्रों में भूमिगत जल के स्तर में 20 से 30 सेंटीमीटर और मैदानी क्षेत्रों में 7 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। उन्होंने नालों में भू जल संवर्धन संरचनाओं के निर्माण के दौरान वहां की भूमि की किस्म का विशेष रूप से ध्यान रखने के भी निर्देश दिए। श्री बघेल ने कहा कि रेतीली जगहों में डाइक वाल काफी उपयोगी हो सकती है। उन्होंने भेंट मुलाकात अभियान के दौरान सूरजपुर जिले के भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि सूरजपुर में भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे है वहां नरवा विकास के कार्य करने की जरूरत है।
 मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्रों में नरवा विकास के कार्य किए जा रहे हैं, वहां ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम से जोड़कर उन्हें इन कार्यों की उपयोगिता की जानकारी दी जाए। हर 2 वर्ष में भू-जल संवर्धन स्ट्रक्चर, स्टॉप डेम, चेक डैम बांधों में डिसिल्टिंग का कार्य कराया जाए, इससे पानी का भराव अच्छा होगा और उनकी सिंचाई क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत भी नालों के ट्रीटमेंट का कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र विकास मिशन के तहत पूर्व में कराए गए भू जल संवर्धन और संरक्षण के कार्यों में यदि मरम्मत और जीर्णाेद्धार के कार्य कराने की जरूरत है, तो उन्हें भी प्राथमिकता के तौर पर किया जाना चाहिए इससे कम लागत में भू जल संवर्धन का काम हो सकेगा। इसी तरह जल संसाधन विभाग के बांधों में डिसिल्टिंग और छोटे बांधों के रख-रखाव पर ध्यान दिया जाए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में लगभग 30 हजार बरसाती नालों को चिन्हांकित किया गया है, जिसमें से 8000 नाले राज्य के वन क्षेत्रों में स्थित हैं। वन क्षेत्रों में स्थित 6 हजार 395 नालों का उपचार 01 हजार 290 करोड़ रूपए की लागत राशि से कराया जा रहा है, जिसमें से अब तक लगभग 2 हजार 800 नालों का उपचार पूरा हो चुका है।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ.शिवकुमार डहरिया, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र बहादुर सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, प्रधान मुख्य संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री राकेश चतुर्वेदी, आयुक्त मनरेगा श्री मोहम्मद अब्दुल केसर हक, नोडल अधिकारी नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी डॉ. अय्याज फकीर भाई तम्बोली, मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा श्री व्ही.श्रीनिवास राव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरूण पाण्डेय, अपर प्रबंध संचालक श्री व्ही. आनंद बाबू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 नई दिल्ली/शौर्यपथ  /उत्तर प्रदेश में हो रही बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ जमीयत उलेमा ए हिंद द्वारा सप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर अब 29 जून को अगली सुनवाई होगी. दरअसल, जमीयत ने यूपी सरकार के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था. ऐसे में कोर्ट ने जमीयत को जवाब देने के लिए वक्त दिया. बता दें कि पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सीटी रवि कुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ सुनवाई कर रही है. एससी ने जमीयत की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
तोड़फोड़ की कार्रवाई नियमों के मुताबिक
इधर, पूरे मामले में यूपी सरकार ने तोड़फोड़ को कानूनी ठहराया है. सरकार की ओर से कहा गया कि तोड़फोड़ की कार्रवाई नियमों के मुताबिक है. इस बाबत सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया कि अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है. जमीयत तोड़फोड़ को दंगों से जोड़ रहा है. हालांलि, नोटिस बहुत पहले जारी किए गए थे. 
दंगाइयों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई अलग
यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा, " अलग कानून के तहत दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में जमीयत पर जुर्माना लगाकर याचिका खारिज की जाए. प्रयागराज में जावेद मोहम्मद के घर के खिलाफ कार्यवाही पर्याप्त अवसर देकर किया गया. इसका दंगे से कोई संबंध नहीं है. कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किया गया."
पूरे मामले में यूपी सरकार का आरोप है कि याचिकाकर्ता झूठा आरोप लगा रहा है कि एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. कोई भी प्रभावित पक्ष अदालत के सामने नहीं है. नियमों के मुताबिक कार्रवाई की गई.
अवैध रूप से निर्मित संपत्ति ढहाई गई
बता दें कि उत्तर प्रदेश के विशेष सचिव गृह राकेश कुमार मालपानी ने सुप्रीम कोर्ट में सबूत संलग्नक सहित 63 पेज का हलफनामा दाखिल किया है. हलफनामे के साथ जावेद अहमद के घर पर लगा राजनीतिक दल का साइन बोर्ड, नोटिस सभी चीजें कोर्ट को भेजी गई हैं. हलफनामे में कहा गया है कि बुलडोजर चलाकर अवैध रूप से निर्मित संपत्ति ढहाई गई है. ये प्रक्रिया तो काफी पहले से चल रही है. लिहाजा ये आरोप गलत है कि सरकार और प्रशासन हिंसा के आरोपियों से बदले निकाल रहा है.
गौरतलब है कि 16 जून को सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर एक याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. एससी ने तब कहा था कि तोड़फोड़ कानून के अनुसार होना चाहिए. ये जवाबी कार्यवाही का उपाय नहीं हो सकता.

  नई दिल्ली/शौर्यपथ  /कथित आतंकी के शव को निकालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई के लिए तैयार हो गया है और 27 जून को इस मामले पर सुनवाई करेगा. कथित आतंकी के पिता ने हाईकोर्ट  के फैसले को चुनौती दी है. पिछले साल श्रीनगर में हुए मुठभेड़  में मारे गए कथित आतंकी के पिता ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
याचिका में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की डबल बेंच का आदेश  संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 का उल्लंघन है. जो मृतक के अंतिम संस्कार किए जाने का अधिकार देता है और उसकी रक्षा करता है और परिजनों को धार्मिक प्रथाओं को पूरा करने की अनुमति देता है. याचिका में कहा गया है कि अगर याचिकाकर्ता का बेटा एक आतंकवादी था भी फिर भी वह संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 25 के तहत अपनी धार्मिक प्रथाओं के अनुसार अंतिम संस्कार का हकदार है.
साथ ही याचिकाकर्ता ने सरकार के द्वारा दिए गए इस तर्क का भी विरोध किया है कि यदि शव को निकालने की अनुमति दी जाती है, तो इसका गलत संदेश जाएगा और इसी तरह की याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी. अगर ऐसा होता है भी तो भविष्य में होने वाले ऐसे मुकदमों की अधिकता की संभावना व्यक्त करते हुए कोई भी अदालत मौलिक अधिकारों को लागू करने पर रोक नहीं लगा सकती.
क्या है मामला
दरअसल श्रीनगर के हैदरपुरा में पिछले साल हुई मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक के पिता अमीर माग्रे ने अपने बेटे के शव की खुदाई की मांग की थी. इस पर पर रोक लगाने वाले जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने 3 जून को हाईकोर्ट के एकल-न्यायाधीश के 27 मई के फैसले के संचालन पर रोक लगा दी थी, जिसमें सरकारी अधिकारियों को अमीर माग्रे के शव को निकालने का निर्देश दिया गया था.सिंगल बेंच ने कहा था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा गारंटीकृत जीवन के अधिकार में मानवीय गरिमा और शालीनता के साथ जीने का अधिकार शामिल है और यह मृत व्यक्ति के शव पर भी लागू है. मानवीय गरिमा मृत्यु के बाद भी एक सीमित सीमा तक फैली हुई है.
बेंच ने कहा था
यदि शव ज्यादा सड़ गया है या सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए जोखिम पैदा करने की संभावना है, तो याचिकाकर्ता और उसके करीबी रिश्तेदारों को कब्रिस्तान में उनकी परंपरा और धार्मिक विश्वास के अनुसार अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी जाएगी. सरकार को याचिकाकर्ता को उसके बेटे का शव रखने के अधिकार से वंचित करने के लिए ₹ 5 लाख का मुआवजा देना चाहिए. केंद्र शासित प्रदेश की अपील पर डिवीजन बेंच ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी.

 मुंबई/शौर्यपथ  /महाराष्ट्र के उप मुख्‍यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने एक बार फिर शिवसेना में बागी गुट से चुनौती का सामना कर रहे सीएम उद्धव ठाकरे के प्रति समर्थन जताया है. अजित पवार ने कहा कि  उद्धव ठाकरे सरकार को बहुमत हासिल है और उन्‍हें फैसले लेने का अधिकार है.गौरतलब है कि इससे पहले, कल गुरुवार को भी राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की बैठक के बाद अजित पवार ने महाराष्‍ट्र की सियासी जंग में उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े होने की बात कही थी. एनसीपी की बैठक के बाद अजित ने कहा था, "" महाराष्ट्र मे जो कुछ राजनीतिक परिस्थिति निर्माण हुई है उसमें हम उद्धव ठाकरे के साथ पूरी तरह से खड़े हुए हैं."
वैसे महाराष्‍ट्र की इस 'लड़ाई' में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले बागी गुट की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है. बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में दावा किया कि उनके पास 50 से ज़्यादा विधायकों का समर्थन है. इनमें शिवसेना के 37 से ज़्यादा विधायक हैं. उद्धव कैबिनेट के मंत्री  शिंदे ने कहा, " जिन्हें हमारी भूमिका पर भरोसा है, जो बालासाहेब की आइडियोलॉजी को आगे लेकर जाना चाहते हैं, जिन्हें वो पसंद हैं, वो हमारे साथ आएंगे."शिवसेना के ये सभी बागी विधायक शिंदे के साथ गुवाहाटी के एक होटल में डेरा डाले हुए हैं. शिंदे गुट ने बृहस्पतिवार शाम को विधानसभा उपाध्यक्ष को शिवसेना के 37 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र भेजा था. पत्र में यह भी सूचित किया गया कि सुनील प्रभु के स्थान पर शिवसेना विधायक भरत गोगावले को विधायक दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है.

   नई दिल्‍ली/शौर्यपथ /महाराष्‍ट्र में सियासी संकट जल्‍द खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा. वैसे इस लड़ाई में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले बागी गुट की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है और सीएम उद्धव ठाकरे की स्थिति लगातार कमजोर पड़ रही है. वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता और महाराष्‍ट्र के पूर्व सीएम पृथ्‍वीराज चव्‍हाण  ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि लगता नहीं कि महाराष्‍ट्र मामले को लेकर गतिरोध जल्‍द खत्‍म होने वाला है. उन्‍होंने कहा, "शिवसेना में दरार पड़ गई और यह दो धड़ों में बंट गई. बागी गुट के विधायकों की संख्‍या दो तिहाई होने की स्थिति में ही इस विभाजन को कानूनी माना जाएगा. यह प्रक्रिया तो विधानसभा स्‍पीकर के सामने ही हो सकती है. स्‍वाभाविक है कि ऐसे में बागी गुट को मुंबई आना होगा और स्‍पीकर के सामने जाना होगा, इसके बगैर कुछ नहीं हो सकता."
इस बारे में प्रक्रिया को लेकर बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री चव्‍हाण ने कहा, "देखिए सदन तो अभी है नहीं. अभी बुलाया भी नहीं गया. ऐसे में सीएम को सदन बुलाने के लिए गवर्नर को लेटर लिखना होगा. ऐसे में गर्वनर, उद्धव ठाकरे से पूछ सकते हैं कि आप सीएम हैं या नहीं. आपके पास बहुमत हैं या नहीं, साबित कीजिए. इसके पहले शिवसेना में आई अंदरूनी दरार के बारे में फैसला करना होगा. शिवसेना में लेकर इस समय दो स्थितियां हैं. बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे कह रहे-मैं नेता हूं, दूसरी ओर 2018 में जो चुनाव हुआ था, उसके बाद ठाकरे चुने गए थे. कुल मिलाकर जटिल स्थिति है, ऐसे में चुनाव आयोग का अहम रोल रहेगा कि चुनाव चिन्‍ह किसके पास रहेगा. एक बात तो साफ है कि बागी विधायकों को स्‍पीकर के पास जाना होगा. "

महाराष्‍ट्र विधानसभा में इस समय स्‍पीकर नहीं है, क्‍या डिप्‍टी स्‍पीकर, बागी गुट के कुछ लोगों को अयोग्‍य करार दे सकते हैं, इस पर चव्‍हाण ने कहा, "इस बारे में मेरे लिए कुछ कहना संभव नहीं है. डिप्‍टी स्‍पीकर को जो लीगल एडवाइज मिलेगी, उसके अनुसार वे फैसला करेंगे. " चव्‍हाण ने यह भी कहा कि यह शिवसेना की घर की लड़ाई है.  बेहतर होगा कि वे इसे घर ही सुलझा लें, उद्धव ठाकरे ने भी यही बात कही है. महाराष्‍ट्र संकट में गवर्नर, इलेक्‍शन कमीशन और डिप्‍टी स्‍पीकर के रोल पर उन्‍होंने कहा कि यह सभी संवैधानिक पद हैं और इन्‍हें कानून के मुताबिक काम करना चाहिए. जहां तक ईसी के रोल की बात है तो यह चुनाव चिन्‍ह के बारे में फैसला करते समय होगा, अभी वह स्थिति नहीं आए हैं. गवर्नर का रोल भी तब आएगा जब इस्‍तीफा होगा. महाराष्‍ट्र का सियासी संकट कितना लंबा खिंचेगा, इस सवाल पर इस वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "यह मैं नहीं जानता. कुछ भी कहना मुश्किल है. सीएम मुंबई में बैठे हैं, बागी विधायक गुवाहाटी में हैं. सरकार का कामकाज चल रहा है. बागी गुट का दरख्‍वास्‍त देने होगी, उन्‍हें स्‍पीकर के सामने जाना होगा."

 नोएडा/शौर्यपथ  /नोएडा  के थाना बिसरख क्षेत्र की एक सोसाइटी में रहने वाली एक महिला ने कथित तौर पर घरेलू कलह के चलते जहर  खा लिया और अपने दो साल के बच्चे को भी जहर खिला दिया. घटना में बच्चे की मौत हो गयी जबकि महिला की हालत गंभीर है. थाना बिसरख के प्रभारी निरीक्षक उमेश बहादुर सिंह ने बताया कि थाना क्षेत्र की एक सोसायटी में रहने वाली महिला का अपनी सास से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था जिसके बाद महिला ने अपने बेटे को जहर खिलाकर खुद भी जहर खा लिया.
उन्होंने बताया कि अत्यंत गंभीर हालत में महिला तथा उसके बच्चे को उपचार के लिए ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बच्चे की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे एक अन्य अस्पताल में रेफर किया गया. उन्होंने बताया कि बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि महिला की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मामले की जांच की जा रही है.

मुंबई /शौर्यपथ / महाराष्ट्र  में जारी सियासी घमासान के बीच शिवसेना  के दो गुट शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. अब शिंदे गुट के दो निर्दलीय विधायक महेश बाल्दी और विनोद अग्रवाल ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल  को हटाने के लिए नोटिस भेजा है. डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल एनसीपी  से संबंध रखते हैं. इन दोनों विधायकों ने ऐसे समय पर यह कदम उठाया है जब शिवसेना ने डिप्टी स्पीकर को पत्र लिखकर 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है. ऐसे में इस विषय पर निर्णय लेने वाले डिप्टी स्पीकर को हटाने के लिए ही नोटिस भेजा गया है.शिवसेना ने जीरवाल से 16 विद्रोहियों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया है. कल 12 और आज 4 लोगों के नाम डिप्टी स्पीकर को भेजे गये थे.
वहीं नोटिस भेजने वाले दोनों विधायकों ने अरुणाचल प्रदेश के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है और डिप्टी स्पीकर से शिवसेना के बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिका पर फैसला नहीं करने का आग्रह किया है. अरुणाचल प्रदेश में विधायकों द्वारा उद्धृत मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पीकर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला नहीं कर सकते हैं, यदि उनके खिलाफ "अविश्वास" प्रस्ताव लंबित हो. विधायकों में से एक महेश बाल्दी ने जिरवाल से कहा कि वह किसी को भी अयोग्य घोषित करने की स्थिति में नहीं हैं.
बालदे ने एनडीटीवी से कहा, "मैंने डिप्टी स्पीकर से कहा कि हमें मीडिया से खबर मिली कि आप 12 विधायकों को निकाल रहे हैं. आप खुद अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे हैं. इन परिस्थितियों में आप किसी को अयोग्य नहीं ठहरा सकते. उन्होंने कहा, "पूरी एमवीए (महा विकास अघाड़ी) सरकार के पास संख्याबल नहीं है और वे किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहरा सकते." उन्होंने कहा कि अगर विधायक अयोग्य घोषित किए गए तो क्या वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे? "हम निश्चित रूप से अदालत जाएंगे."

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