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April 10, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड नंबर 38, मिलपारा में विकास के दावों की पोल खुल गई है। तीन-चार महीने पहले जिस 'आकांक्षा शौचालय' का उद्घाटन बड़े तामझाम और जोश के साथ किया गया था, वह आज जनता के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। विडंबना यह है कि सरकारी कागजों और प्रेस विज्ञप्तियों में जिस विकास की गाथा गाई जा रही है, धरातल पर उस पर ताला जड़ा हुआ है।

नीलेश अग्रवाल की अनुभवहीनता जनता पर भारी

शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था के बदहाल होने का सीधा आरोप स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर लग रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य प्रभारी की निष्क्रियता और अनुभवहीनता के कारण जनसुविधाएं दम तोड़ रही हैं। चर्चा आम है कि अनुभव की कमी के बावजूद, केवल महापौर श्रीमती अलका बाघमार का कट्टर समर्थक होने के नाते उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में हुई सामान्य सभा में भी भाजपा पार्षदों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए थे, जो विभाग की विफलता को प्रमाणित करते हैं।

कचरों का ढेर और बदबू बना शहर का चेहरा

महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में दुर्ग शहर की स्थिति 'बदहाली' की ओर अग्रसर है। जगह-जगह कचरों के ढेर और दुर्गंधयुक्त वातावरण अब शहर की नई पहचान बनती जा रही है। बावजूद इसके, निष्क्रिय स्वास्थ्य प्रभारी को महापौर का परोक्ष समर्थन मिलना पूरी शहरी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। जनता अब खुलेआम यह कहने लगी है कि महापौर का ध्यान जनहित के बजाय भेदभावपूर्ण राजनीति पर अधिक है।

सुशासन के दावों के विपरीत शहरी सरकार का रुख

एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 'जीरो टॉलरेंस' और सुशासन की नीति पर चलते हुए भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग की शहरी सरकार इस मंशा के ठीक विपरीत कार्य कर रही है। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय सांसद विजय बघेल, जिनकी पसंद पर महापौर प्रत्याशी का चयन हुआ था, वे भी शहर की इस बदहाली पर मौन साधे हुए हैं। सांसद की यह चुप्पी उनकी संवेदनहीनता को दर्शाती है।

मिलपारा का बंद शौचालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि नगर निगम के खोखले वादों का प्रतीक है। यदि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी किसी अनुभवी हाथों में नहीं सौंपी गई, तो दुर्ग शहर की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

  रायपुर / शौर्यपथ / उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के लिए 30 मार्च 2026 एक ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा (अंबिकापुर) से देश की राजधानी दिल्ली और पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता के लिए नियमित हवाई सेवा का शुभारंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रातः 10 बजे रायपुर से वर्चुअल माध्यम से इस सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर अंबिकापुर के पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक उपस्थित रहेंगे।

नई हवाई सेवा के तहत एलायंस एयर द्वारा 72-सीटर एटीआर विमान संचालित किया जाएगा। दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन—सोमवार और बुधवार—उड़ानें संचालित होंगी। सोमवार को फ्लाइट दिल्ली से बिलासपुर होते हुए अंबिकापुर पहुंचेगी और वहीं से वापस दिल्ली जाएगी। बुधवार को सीधी उड़ान दिल्ली से अंबिकापुर और फिर बिलासपुर होते हुए वापसी करेगी।

इसी तरह कोलकाता के लिए भी सप्ताह में दो दिन—गुरुवार और शनिवार—उड़ानें उपलब्ध रहेंगी। शनिवार को फ्लाइट कोलकाता से बिलासपुर होते हुए अंबिकापुर पहुंचेगी, जबकि गुरुवार को सीधी उड़ान कोलकाता से अंबिकापुर और फिर बिलासपुर के रास्ते वापसी करेगी। इस शेड्यूल से यात्रियों को दोनों दिशाओं में बेहतर और नियमित कनेक्टिविटी मिलेगी।

इस हवाई सेवा से सरगुजा संभाग सीधे दिल्ली और कोलकाता से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, निवेश और पर्यटन को नया बल मिलेगा। क्षेत्र के प्राकृतिक और पर्यटन स्थल—जैसे मैनपाट, तातापानी और जलप्रपात—अब देश-विदेश के पर्यटकों के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगे। साथ ही, स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी आएगी।

गौरतलब है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ योजना के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया है। लगभग 365 एकड़ में फैले इस एयरपोर्ट के विकास हेतु 48.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिससे इसे डीजीसीए मानकों के अनुरूप आधुनिक रूप दिया गया है। टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों की क्षमता के अनुरूप किया गया है तथा 100 वाहनों की पार्किंग और फोरलेन सड़क की सुविधा भी विकसित की गई है।

इस नई हवाई सेवा को सरगुजा के विकास की उड़ान के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्र को राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  रायपुर / शौर्यपथ / सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें।
इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच श्री संतोष शंकर सोनी और श्रीमती पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

  जश्ग्पुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर पालिका क्षेत्र में कर भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ करते हुए नागरिकों को घर बैठे क्यूआर कोड के माध्यम से टैक्स भुगतान की सुविधा प्रदान की।

इस पहल के तहत एचडीएफसी बैंक द्वारा नगर पालिका जशपुर के प्रत्येक घर के लिए यूनिक क्यूआर कोड तैयार किया गया है, जिसे घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में संबंधित मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। नागरिक इस कोड को स्कैन कर आसानी से अपनी देय राशि देख सकेंगे और डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के तुरंत बाद डिजिटल रसीद भी उपलब्ध होगी।

नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को अब जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर जमा करने के लिए नगर पालिका कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह प्रणाली डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से भी भुगतान की सुविधा देती है, जिससे प्रक्रिया और अधिक सुविधाजनक हो गई है।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत वर्तमान में लगभग 4600 आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को शामिल किया गया है। इस डिजिटल प्रणाली से न केवल राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव,कृष्णा राय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय तथा एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। इस पहल को नगरीय प्रशासन के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में अन्य नगर निकायों के लिए भी मॉडल साबित हो सकता है।

   जगदलपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर के केंद्र बस्तर में सोमवार से खेलों का एक नया इतिहास लिखा जाने वाला है। 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026' के प्रथम संस्करण के तहत रायपुर में हुए भव्य उद्घाटन के बाद अब खेल प्रेमियों की नजरें जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर पर टिकी हैं, जहाँ 30 मार्च से एथलेटिक्स की रोमांचक स्पर्धाएं शुरू होने जा रही हैं। इस आयोजन का शुभंकर 'मोर वीर' जनजातीय युवाओं के अदम्य साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुरू हुआ यह महाकुंभ अब अपने सबसे प्रतीक्षित चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 443 प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे।
बस्तर में आयोजित होने वाली एथलेटिक्स स्पर्धाओं में कुल 17 विधाएं शामिल हैं, जिनमें 100 मीटर की फर्राटा दौड़ से लेकर 10,000 मीटर की लंबी दूरी की रेस, हर्डल्स, रिले रेस, और ऊँची व लंबी कूद जैसी श्रेणियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पहले ही दिन डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और 110 मीटर हर्डल्स जैसे फाइनल मुकाबले देखने को मिलेंगे। शाम होते-होते 400 मीटर और रिले रेस के रोमांच के बीच विजेता खिलाड़ियों को पदक प्रदान किए जाएंगे। इस पूरे आयोजन के दौरान एथलेटिक्स में कुल 102 पदकों के लिए खिलाड़ी पसीना बहाएंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 33 स्थानीय खिलाड़ी भी राज्य का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इस आयोजन को 'खेलो इंडिया' के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में खिलाड़ियों के आवास के लिए शहर के 13 प्रमुख होटलों को चिन्हित किया गया है, जबकि उनके आवागमन के लिए एसी वाहनों की सुविधा सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा और अग्निशमन की पुख्ता व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटन विभाग द्वारा आगंतुक खिलाड़ियों और ऑफिशियल्स को बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे खेल के साथ-साथ यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संस्कृति से भी रूबरू हो सकें। भारतीय खेल प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह स्पर्धा न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी, बल्कि बस्तर की वैश्विक छवि को एक खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगी।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष
दुर्ग नगर निगम की शहरी सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला इंदिरा मार्केट की पार्किंग व्यवस्था से जुड़ा है, जहां निगम की सामान्य सभा में लिए गए फैसले भी ठेकेदार की मनमानी के आगे बौने साबित होते नजर आ रहे हैं।
पूर्व में आयोजित सामान्य सभा में भाजपा पार्षद खालिक रिजवी ने इंदिरा मार्केट पार्किंग ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की जा रही है, साथ ही दुकानदारों से सड़क पर दुकान लगाने के नाम पर भी अवैध वसूली हो रही है। इस मुद्दे पर सभा में जमकर हंगामा हुआ और जांच के साथ-साथ पार्किंग स्थल पर निर्धारित शुल्क की सूचना पट्टिका लगाने का निर्णय लिया गया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक नहीं, दो सामान्य सभाएं बीत जाने के बाद भी न तो किसी जांच की कार्रवाई सामने आई और न ही पार्किंग स्थल पर शुल्क सूची का बोर्ड लगाया गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के फैसले सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं।
दोगुनी वसूली, खुलेआम नियमों की अनदेखी
बाजार विभाग से मिली जानकारी के अनुसार दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क मात्र ₹5 निर्धारित है, लेकिन मौके पर ठेकेदार द्वारा ₹10 तक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, पार्किंग स्थल से बाहर अन्य क्षेत्रों में भी अवैध रूप से शुल्क लिया जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों से इस तरह की वसूली कर आम जनता से हजारों रुपये की अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है।
शिकायतें बेअसर, कार्रवाई शून्य
व्यापारियों द्वारा कई बार इस मामले की शिकायत महापौर और निगम प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल प्रेस विज्ञप्तियां ही जारी होती रही हैं। जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्या जनप्रतिनिधि ही बन रहे हैं ‘संरक्षक’?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस पार्किंग ठेकेदारी में किसी जनप्रतिनिधि की भूमिका हो सकती है, जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो रही। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही अनदेखी इस आशंका को बल जरूर देती है।
दोहरा मापदंड क्यों?
एक ओर निगम प्रशासन बाजार की व्यवस्था के नाम पर छोटे दुकानदारों और ठेला व्यवसायियों पर सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्किंग ठेकेदार की खुली लूट पर चुप्पी साधे हुए है। यह दोहरा रवैया शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या महापौर अलका बाघमार और सभापति श्याम शर्मा अपने ही सामान्य सभा के निर्णयों को लागू कराने में सक्षम होंगे, या फिर यह पूरा मामला भी महज दिखावे और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल, इंदिरा मार्केट में आम जनता से जारी यह अवैध वसूली शहरी सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही दोनों पर सीधा प्रश्नचिह्न लगा रही है।

दुर्ग (छत्तीसगढ़)।

दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों अवैध मुरूम और मिट्टी खनन का मामला तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। खेत समतलीकरण और विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर जमीनों को गहरे गड्ढों में तब्दील किया जा रहा है, जहां से मुरूम और मिट्टी का अवैध उत्खनन कर ट्रैक्टर-ट्रकों के जरिए खुलेआम परिवहन किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहा है और राजस्व व खनिज नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है। खेत सुधार के नाम पर हो रही खुदाई कई स्थानों पर खनन का रूप ले चुकी है, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

“खेत सुधार” या खनन का बहाना?

ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर समतलीकरण होना चाहिए, वहां गहराई तक खुदाई कर मुरूम और मिट्टी निकाली जा रही है। इसके बाद इन्हें निर्माण कार्यों में खपाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में न तो रॉयल्टी का भुगतान हो रहा है और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली जा रही है।

अंजोरा, चंगोरी, बिरेंझर और आसपास के क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं। सरपंच इंद्रजीत साहू द्वारा कलेक्टर को लिखे गए पत्र ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसमें अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल

हालांकि समय-समय पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह कार्रवाई केवल औपचारिक नजर आती है। अवैध परिवहन लगातार जारी है, जिससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं न कहीं निगरानी और नियंत्रण में बड़ी चूक हो रही है।

विधायक की भूमिका पर उठते प्रश्न

इस पूरे घटनाक्रम के बीच दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर वे पश्चिम बंगाल में चुनावी मंचों से ‘सुशासन’ का संदेश दे रहे हैं, वहीं उनके अपने क्षेत्र में अवैध मुरूम और मिट्टी खनन चरम पर है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आखिर इस गंभीर मुद्दे पर विधायक की स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया क्यों सामने नहीं आ रही है। क्या यह केवल प्रशासनिक ढिलाई है, या फिर इसके पीछे किसी प्रकार का संरक्षण भी मौजूद है—यह सवाल अब आम जनता के बीच उठने लगा है।

चुनावी माहौल में बढ़ी संवेदनशीलता

आगामी रिसाली नगर निगम चुनाव के मद्देनजर यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। ग्रामीण क्षेत्र का प्रभाव इस चुनाव में अहम माना जाता है, और ऐसे में अवैध खनन का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए बड़ा हथियार बन सकता है।

जनता को जवाब का इंतजार

फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या विधायक ललित चंद्राकर इस मामले में सख्त रुख अपनाकर प्रशासन को ठोस निर्देश देंगे, या फिर यह अवैध खनन यूं ही जारी रहेगा?

दुर्ग ग्रामीण की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई देखना चाहती है—ताकि “सुशासन” केवल मंचों की बात न रहकर हकीकत भी बन सके।

दक्षिण गोवा | विशेष रिपोर्ट

गोवा के दक्षिण जिले के कुर्चोरेम से सामने आया एक सनसनीखेज मामला अब पूरे प्रदेश में आक्रोश और सियासी हलचल का कारण बन गया है। भाजपा पार्षद सुशांत नाइक के 20 वर्षीय बेटे सोहम नाइक पर 25 से 30 नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, अश्लील वीडियो बनाने और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

तीन साल तक चलता रहा ‘साइलेंट क्राइम’

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी पिछले तीन वर्षों से नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसा कर उनका शोषण करता रहा। आरोप है कि वह उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था, जिससे पीड़िताएं लंबे समय तक डर के साए में चुप रहीं।

पार्टी में खुला ‘काला राज’

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने कथित तौर पर एक सामाजिक समारोह/पार्टी में अपने दोस्तों के बीच इन अश्लील वीडियो को दिखाया और अपनी हरकतों का बखान किया।

यहीं से मामला बाहर निकला और देखते ही देखते स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

जनता के दबाव में पुलिस हरकत में

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने 23 मार्च 2026 को सोहम नाइक को हिरासत में लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

कानूनी शिकंजा: POCSO से IT एक्ट तक

आरोपी के खिलाफ दर्ज की गई FIR में शामिल हैं:

POCSO एक्ट (नाबालिगों के यौन अपराध)

गोवा चिल्ड्रन्स एक्ट

आईटी एक्ट (डिजिटल अपराध और वीडियो रिकॉर्डिंग)

अब तक कम से कम तीन FIR दर्ज की जा चुकी हैं।

कोर्ट ने बढ़ाई हिरासत

27 मार्च 2026 को पणजी चिल्ड्रन्स कोर्ट ने आरोपी की पुलिस रिमांड 4 दिन और बढ़ा दी, ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।

सियासी संग्राम तेज

इस घटना के सामने आते ही विपक्ष—खासतौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

विपक्ष का आरोप है कि ऐसे मामलों में प्रभावशाली परिवारों के कारण अक्सर कार्रवाई में देरी होती है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

कबीरधाम | विशेष समाचार

जिला कबीरधाम के ग्राम पंचायत रेंगाखार अंतर्गत ग्राम कोडार में विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां ₹4 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले तटबंध निर्माण कार्य का विधिवत भूमि पूजन संपन्न हुआ। यह परियोजना क्षेत्र में जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और ग्रामीण सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भूमि पूजन कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू एवं जिला अध्यक्ष श्री राजेंद्र चंद्रवंशी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों ने इस परियोजना को क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर बताया।

जल संरक्षण और सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

प्रस्तावित तटबंध निर्माण से न केवल वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि संभावित बाढ़ की स्थिति में गांवों और कृषि भूमि की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

ग्रामीण विकास को मिलेगी गति

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी। जल संसाधनों के सुदृढ़ होने से खेती-किसानी को मजबूती मिलेगी और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।

जनता में उत्साह, विकास की उम्मीद

भूमि पूजन के दौरान स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए जनप्रतिनिधियों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा।

भिलाई/दुर्ग | विशेष राजनीतिक विश्लेषण

भिलाई नगर निगम चुनाव में भले अभी लगभग छह महीने का समय शेष हो, लेकिन सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। आरक्षण के बाद महापौर पद के लिए पिछड़ा वर्ग से प्रत्याशी तय होना है, और इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी के भीतर नामों की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। इन नामों में सबसे प्रमुख नाम महेश वर्मा का उभरकर सामने आ रहा है—जो वर्तमान में भिलाई नगर निगम के पार्षद हैं और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण संगठन के भीतर एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

महेश वर्मा: अनुभव बनाम समीकरण

महेश वर्मा का नाम केवल “सांसद विजय बघेल के करीबी” होने के कारण ही नहीं, बल्कि

नगर निगम की राजनीति में सक्रिय भूमिका

स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ

संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव

के चलते भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।

यही वजह है कि उन्हें एक ग्राउंडेड और अनुभवी चेहरा माना जा रहा है, जो महापौर पद की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हो सकते हैं।

दुर्ग का ‘रिपोर्ट कार्ड’ बना सियासी मुद्दा

प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद हुए नगरीय निकाय चुनाव में विजय बघेल की पसंद को प्राथमिकता मिली थी। लेकिन दुर्ग की महापौर अलका बाघमार की कार्यप्रणाली पिछले एक साल में कई विवादों में घिरी रही।

मुख्य आरोपों में शामिल हैं:

गरीबों के ठेले-गुमटी पर सख्ती, लेकिन अमीरों के अतिक्रमण पर नरमी

गणेश मंदिर के सामने कथित अवैध निर्माण पर चुप्पी

बस स्टैंड की जमीन पर अनुबंध समाप्ति के बाद भी कब्जा

शनिवार बाजार और चौक-चौराहों पर लगातार बढ़ता अतिक्रमण

सफाई व्यवस्था की बदहाली और पेयजल संकट

इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई न होने से जनता ही नहीं, पार्टी के पार्षदों में भी असंतोष बढ़ा है।

जब अपनी ही पार्टी ने उठाए सवाल

हाल ही में सामान्य सभा में जो हुआ, उसने इस असंतोष को सार्वजनिक कर दिया।

सभापति ने खुलकर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए

कई भाजपा पार्षदों ने इसे पार्टी की साख से जोड़ते हुए नाराज़गी जताई

यह घटनाक्रम बताता है कि मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकट बन चुका है।

भिलाई में प्रत्याशी चयन पर असर तय

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुर्ग के अनुभव का असर भिलाई नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी चयन पर पड़ेगा?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:

संगठन इस बार सिर्फ “पसंद” नहीं, “परफॉर्मेंस” को भी तवज्जो देगा

महेश वर्मा का नाम मजबूत जरूर है, लेकिन अंतिम निर्णय में कई अन्य समीकरण भी प्रभाव डालेंगे

इसी बीच, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की धर्मपत्नी के भी दावेदारी पेश करने की चर्चाएं हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो सकता है।

विजय बघेल की भूमिका पर नजर

दुर्ग में महापौर चयन में अहम भूमिका निभाने वाले सांसद विजय बघेल की राय इस बार भी महत्वपूर्ण रहेगी।

लेकिन पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि

“क्या इस बार उनकी पसंद को उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी?”

यदि संगठन महेश वर्मा के नाम को दरकिनार करता है, तो इसे सीधे तौर पर

दुर्ग महापौर के प्रदर्शन और अंदरूनी नाराज़गी से जोड़कर देखा जाएगा।

कांग्रेस नहीं, भाजपा में ज्यादा हलचल

आम तौर पर चुनावी हलचल कांग्रेस में ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार स्थिति उलट दिख रही है।

भाजपा के भीतर ही खींचतान, असंतोष और रणनीतिक मंथन तेज हो गया है।

निष्कर्ष:

भिलाई नगर निगम चुनाव अब सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि

भाजपा के लिए “आंतरिक संतुलन और विश्वसनीयता” की परीक्षा बनता जा रहा है।

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि—

? पार्टी अनुभव और जमीनी पकड़ वाले चेहरों को आगे लाती है

या

? फिर राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देती है

लेकिन इतना तय है कि

दुर्ग की सियासत ने भिलाई की रणनीति को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

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