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रायपुर, । छत्तीसगढ़ विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम तथा वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग से संबंधित वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1823 करोड़ 87 लाख 69 हजार रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं। इनमें वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 1567 करोड़ 86 लाख 79 हजार रुपये तथा श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ 90 हजार रुपये शामिल हैं।
उद्योग मंत्री Laxmi Lal Devangan (लखनलाल देवांगन) ने सदन में बताया कि Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
मंत्री देवांगन ने बताया कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए बजट में 1750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें:
652 करोड़ रुपये उद्योगों को अनुदान के लिए
लगभग 700 करोड़ रुपये औद्योगिक भूमि अर्जन, भूमि विकास और अधोसंरचना विकास के लिए रखे गए हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन अब ई-निविदा प्रणाली से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और राजस्व में 20% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
राज्य को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें स्टील, पावर, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, आईटी, बीपीओ और क्लीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों के निवेश शामिल हैं।
पिछले एक वर्ष में
951 नए उद्योग स्थापित हुए
8000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ
45 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित हुए।
बस्तर से सरगुजा तक 23 नए औद्योगिक क्षेत्र और पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें 4 फ्लेटेड फैक्ट्री अधोसंरचना भी शामिल हैं।
महिलाओं की रोजगार में भागीदारी बढ़ाने के लिए बिलासपुर जिले में दो कामकाजी महिला हॉस्टल बनाए जा रहे हैं, जिनके लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
साथ ही स्टार्ट-अप मिशन को बढ़ावा देने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
श्रम मंत्री देवांगन ने बताया कि असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत अधिसूचित 56 श्रेणियों के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए 128 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए अभिनव पहल करते हुए:
वर्तमान में 96 बच्चों को डीपीएस और राजकुमार कॉलेज सहित उत्कृष्ट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है।
अगले वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 बच्चों को उत्कृष्ट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
इसके अलावा श्रमिक हित में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:
श्रमिक आवास योजना की राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये
ई-रिक्शा सहायता भी 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये
राज्य में 32.58 लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित 31 योजनाओं पर वर्ष 2025 में लगभग 387 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान
इंडस्ट्रियल हाइजीन लैब के लिए 5 करोड़ रुपये
कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए
10 जिला अधिकारी
85 आबकारी उपनिरीक्षक
की भर्ती की गई है, जबकि 200 आबकारी आरक्षक की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्धारित 10,500 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 10,145 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष के 8430 करोड़ रुपये की तुलना में 20.35% अधिक है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 12,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 28 फरवरी 2026 तक 9660 करोड़ रुपये (80.50%) प्राप्त हो चुके हैं।
नवा रायपुर में आबकारी विभाग का कम्पोजिट कार्यालय भवन बनाने की योजना है, जिसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और ओबीसी-अल्पसंख्यक विभाग के लिए 6,976 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 6,976 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इस दौरान विभागीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं अब SANKALP मॉडल पर आधारित होंगी।
मंत्री जायसवाल ने कहा, “मैं जीवन की रक्षा का संकल्प लेकर सेवा का दीप जलाने आया हूं। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का हर नागरिक स्वस्थ रहे।”
मंत्री ने बताया कि SANKALP के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को सात प्रमुख आधारों पर विकसित किया जाएगा—
S – Strengthened Institutions (सशक्त संस्थान)
A – Academic Excellence (उत्कृष्ट अकादमिक गुणवत्ता)
N – Next Generation Research (नवोन्मेषी अनुसंधान)
K – Knowledge & Clinical Competency (कौशल एवं क्लीनिकल दक्षता)
A – Advance Medical Facilities (आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं)
L – Life Saving Infrastructure (जीवन रक्षक अधोसंरचना)
P – Professional & Transparent Governance (पारदर्शी प्रबंधन)
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज सुविधा प्रदान करने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार द्वारा स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत—
प्रदेश में 25 नए डायलिसिस केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
आम नागरिकों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 जन औषधि केंद्रों का विस्तार किया जाएगा।
रायपुर में प्रदेश का पहला होम्योपैथी कॉलेज खोला जाएगा।
बिलासपुर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाएगा।
रायपुर में अत्याधुनिक कार्डियक इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी।
सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में अधोसंरचना विकास के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने बताया कि अंबिकापुर और धमतरी में जिला अस्पतालों के नए भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा रायपुर के कालीबाड़ी क्षेत्र में 200 बिस्तरों वाला मातृ एवं शिशु चिकित्सालय तथा चिरमिरी में नया जिला अस्पताल बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने हेतु दुर्ग, कोंडागांव, जशपुर और रायपुर में जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
रायपुर में मध्य भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जिसके लिए 95 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश को जांच के लिए अन्य महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आसपास के राज्यों को भी लाभ मिलेगा।
राज्य में एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत करने के लिए 300 नई एम्बुलेंस की खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 70 वेंटिलेटर युक्त अत्याधुनिक एम्बुलेंस और नवजात शिशुओं के लिए 10 विशेष एम्बुलेंस भी जल्द खरीदी जाएंगी।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।
राज्य में बनने वाले पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों (दंतेवाड़ा, मनेन्द्रगढ़, जशपुर, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम) के लिए 1,240 पद तथा संबंधित अस्पतालों के लिए 500 पद स्वीकृत किए जाएंगे।
इसके अलावा डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर के ट्रामा सेंटर भवन निर्माण और उपकरणों की खरीदी के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में छात्रावास निर्माण के लिए 83 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। इसके तहत रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर और जगदलपुर में छात्रावास बनाए जाएंगे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयुष विभाग हेतु 544 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
इसके अंतर्गत—
औषधियों के लिए 25.73 करोड़ रुपये
उपकरणों के लिए 4.16 करोड़ रुपये
जनभागीदारी के माध्यम से 7 आयुर्वेद चिकित्सालय, 13 आयुष पॉलीक्लिनिक और 692 आयुष औषधालयों के उन्नयन का भी प्रावधान है।
इस विभाग के लिए 251 करोड़ 68 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना शुरू करेगी, जिसके तहत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा और आवासीय सुविधा दी जाएगी।
इसके अंतर्गत—
बिलासपुर में 500 सीटर कन्या प्रयास आवासीय विद्यालय
रायपुर में 200 सीटर पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास
रायगढ़ और मनेन्द्रगढ़ में 100-100 सीटर छात्रावास
जशपुर में 50 सीटर प्री-मैट्रिक छात्रावास
निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए CG-ACE योजना के तहत उड़ान, शिखर और मंजिल योजनाएं शुरू की जाएंगी, जिसके लिए 9.63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट चर्चा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कई विधायकों ने भाग लिया और अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
राज्य के चिन्हांकित 43 जनजातियों और उपजातियों की संस्कृति, परिधान और चित्रकला का प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय कलाकार होंगे शामिल ,सजेगा आदि रंग, परिधान और हाट
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर 13 और 14 मार्च 2026 को नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में Óपरम्परा से पहचान तकÓ - आदि परब - 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से 'आदि परब-2026Ó का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उक्त आशय की जानकारी आज टीआरटीआई में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा और प्रशिक्षण संस्थान के संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम ने दी।
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा और आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम ने प्रेसवार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर 'आदि परब-2026Ó का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों के साथ-साथ मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय समुदाय भी शामिल होंगे द्य आयोजन का उद्देश्य जनजातीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पारंपरिक ज्ञान के संवर्धन को बढ़ावा देना है।
पहली बार एक मंच पर दिखेंगी 43 जनजातियों की वेशभूषाएँ
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत "आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो" का आयोजन 13 मार्च को सुबह 10.30 बजे से शाम 8 बजे तक और 14 मार्च को शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा। इस आयोजन में राज्य की 43 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विशेषताओं को पहली बार एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्राकृतिक रंगों, स्थानीय संसाधनों और हाथों से बने वस्त्रों से तैयार ये परिधान जनजातीय जीवन शैली और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देंगे। इसमें भाग लेने के लिए 120 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है।
'आदि रंगÓ में चित्रकला के माध्यम से जल-जंगल-जमीन का संदेश
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने प्रेसवार्ता में बताया कि आदि परब के तहत "आदि रंग - जनजातीय चित्रकला महोत्सव" भी आयोजित होगा। इस महोत्सव में जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण, जनजातीय जीवन दर्शन और पर्यावरणीय चुनौतियों को प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम में 155 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। चित्रकला प्रतियोगिता 18-30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की दो श्रेणियों में होगी।
दोनों श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही दोनों आयु वर्गों के 10-10 प्रतिभागियों को 2000 रुपये का सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा।
आदि-हाट में मिलेगा जनजातीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद
श्री बोरा ने बताया कि आयोजन के दौरान "आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला" भी लगाया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। यहां 14 समूहों द्वारा हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आगंतुक प्रदेश के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकेंगे।
यूपीएससी में चयनित जनजातीय युवाओं का होगा सम्मान
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2025 में छत्तीसगढ़ से आदिम जाति विकास विभाग की योजनाओं के सहयोग से चयनित अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी श्री डायमंड सिंह ध्रुव और श्री अंकित साकनी का सम्मान किया जाएगा। साथ ही इस मौके पर 'प्रयासÓ संस्थान के विद्यार्थियों को विभागीय योजनाओं के तहत लैपटॉप भी वितरित किए जाएंगे।
जगदलपुर में ?3.29 करोड़ के इनामी 108 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 44 महिला कैडर भी शामिल
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रही मुहिम को एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा है कि अब बस्तर में बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की जीत हो रही है। उन्होंने कहा कि जगदलपुर में ?3.29 करोड़ के इनामी 108 सशस्त्र माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बस्तर में शांति, सुशासन और विकास की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादी कैडरों में 44 महिला माओवादी भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि बस्तर के लोगों में अब विकास और शांति के मार्ग पर आगे बढऩे का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों तथा बस्तर क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के कारण बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इससे बस्तर में शांति का वातावरण मजबूत हो रहा है और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस सफलता के लिए सुरक्षा बलों के साहस, प्रशासन के प्रयासों तथा स्थानीय लोगों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग अब भय और हिंसा से मुक्त होकर विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढऩा चाहते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र सरकार के साथ समन्वय करते हुए नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को भयमुक्त, शांतिपूर्ण और विकसित बनाना है। इसके लिए सुरक्षा, विकास और विश्वास—इन तीनों मोर्चों पर लगातार कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि भयमुक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण सरकार का अटल संकल्प है।
नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर विकास की तेज उड़ान को तैयार • मत्स्य बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में 5वें स्थान पर • बीजापुर में बनेगा 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय
रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 50 हजार 537 करोड़ 98 लाख 68 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इन अनुदान मांगों में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा अनुसूचित जनजाति विकास से जुड़े विभिन्न विभागों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
पारित अनुदान मांगों के अंतर्गत कृषि विभाग के लिए 7075 करोड़ 90 लाख 56 हजार रुपए, पशुपालन विभाग के लिए 656 करोड़ 12 लाख 49 हजार रुपए तथा मत्स्य पालन विभाग के लिए 110 करोड़ 67 लाख 30 हजार रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आदिम जाति कल्याण के लिए 157 करोड़ 05 लाख 58 हजार रुपए तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए 39 हजार 568 करोड़ 18 लाख 20 हजार रुपए निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जनजाति उपयोजना के तहत सड़कों और पुलों के लिए 1596 करोड़ 89 लाख रुपए, भवन निर्माण के लिए 215 करोड़ 69 लाख 19 हजार रुपए, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के लिए 447 करोड़ 30 लाख रुपए, त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता के लिए 453 करोड़ 91 लाख 68 हजार रुपए तथा नगरीय निकायों के लिए 256 करोड़ 24 लाख 68 हजार रुपए का प्रावधान भी शामिल है।
सदन में अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मूल स्वरूप खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है। राज्य की लगभग 70 से 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और प्रदेश एक जनजातीय बाहुल्य राज्य भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नवा रायपुर में विश्व स्तरीय जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की स्थापना कर उन जनजातीय नायकों को पहचान देने का प्रयास किया है, जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिल पाया था। इस संग्रहालय का अध्ययन करने के लिए देश-विदेश के विशेषज्ञ भी आ रहे हैं।
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि नक्सलवाद के कमजोर पडऩे के बाद बस्तर क्षेत्र अब विकास की तेज उड़ान भरने के लिए तैयार है। केंद्र और राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से क्षेत्र में शांति और विकास का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष का बजट "संकल्प" थीम पर आधारित है और इसी संकल्प के माध्यम से प्रदेश के विकास को नई गति दी जाएगी।
कृषि क्षेत्र के संबंध में उन्होंने बताया कि राज्य सरकार कृषि उन्नति योजना के माध्यम से किसानों से धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है। इसके साथ ही धान के अलावा अन्य फसलें लेने वाले किसानों को प्रति वर्ष 10 हजार रुपए की आदान सहायता दी जा रही है, जिससे दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार कम वर्षा वाले क्षेत्रों और पड़ती भूमि में मसूर, चना और तिवरा जैसी दलहनी फसलों के उन्नत बीज तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है।
मंत्री ने कहा कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में गरियाबंद, दंतेवाड़ा और सुकमा को जैविक जिला घोषित किया गया था और अन्य जिलों में भी जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही किसानों को "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" जैसी तकनीकों के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र के विकास पर भी विशेष जोर दिया गया है। मंत्री ने बताया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए एनडीडीबी के साथ एमओयू किया गया है। आगामी बजट में हरे चारे के विकास के लिए 7.50 करोड़ रुपए, चिलिंग प्लांट के लिए 50 लाख रुपए, सूकर वितरण के लिए 5 करोड़ रुपए तथा बकरी वितरण के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य राष्ट्रीय स्तर पर छठे स्थान से बढ़कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही धमधा के राजपुर में मत्स्य कॉलेज भवन और छात्रावास निर्माण के लिए इस बजट में 3 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
अनुसूचित जनजाति विकास के संबंध में मंत्री ने बताया कि वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में आश्रम और छात्रावास भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। पिछले दो वर्षों में 167 आश्रम-छात्रावास भवन स्वीकृत किए गए हैं, जिनका निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा बीजापुर में 500 सीटों वाला आवासीय प्रयास विद्यालय स्थापित किया जाएगा, जिससे जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे।
सदन में अनुदान मांगों पर हुई चर्चा में विधायक पुन्नूलाल मोहले, व्यास कश्यप, मोतीलाल साहू, कवासी लखमा, धर्मजीत सिंह, जनक ध्रुव, तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम, धरमलाल कौशिक, रामकुमार यादव, दलेश्वर साहू, कुंवर सिंह निषाद, लता उसेंडी, अंबिका मरकाम, भावना बोहरा और सावित्री मंडावी ने अपने विचार रखे। चर्चा के बाद सदन ने अनुदान मांगों को पारित कर दिया।
खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने आयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक दिशानिर्देश
शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने सभी ऑयल कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में संचालित सभी 5 एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में एलपीजी गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। इस अवसर पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को राज्य में एलपीजी गैस की दैनिक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बैठक में ऑयल कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेण्डर वर्तमान में केवल विशेष अत्यावश्यक संस्थाओं, जैसे अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को ही सप्लाई किए जा रहे हैं। इस पर खाद्य सचिव श्रीमती रीना कंगाले ने निर्देशित किया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों की परीक्षाएँ चल रही हैं, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं एवं छात्रावासों को गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।
बैठक के दौरान सचिव श्रीमती कंगाले ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर 15 प्रतिशत कमर्शियल सप्लाई होटलों आदि को भी दिए जाने पर विचार किया जाए, ताकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही जिलों में एलपीजी गैस के दुरुपयोग तथा अवैध गैस रिफिलिंग की रोकथाम के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए। इस संबंध में जिला प्रशासन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके।
बैठक में राज्य में डीजल, पेट्रोल एवं सीएनजी गैस की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के तीनों डीजल-पेट्रोल डिपो में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। इस पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीजल और पेट्रोल की दैनिक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर भी नियमित निगरानी रखी जाए।
खाद्य सचिव श्रीमती कंगाले ने राज्य के उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है और इन पेट्रोलियम पदार्थों की किसी प्रकार की कमी या शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के माध्यम से गैस सिलेण्डर की आपूर्ति नियमानुसार नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए उपभोक्ता टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क कर सकते हैं।
दर्जनों डंपर, जेसीबी और चैन माउंटिंग मशीन से चल रहा काम, सूचना के बाद भी खनिज विभाग मौन
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार अपने वादों को पूरा करने का प्रयास कर रही है, लेकिन कुछ विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता शासन की छवि पर सवाल खड़े कर रही है। दुर्ग जिले में अवैध खनन और परिवहन के लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
हाल ही में एक और मामला सामने आया है, जहां ग्राम कोड़ियां, विकासखंड धमधा में खेत को तालाब बनाने के नाम पर 8 से 10 फीट तक गहरी खुदाई कर मुरम मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस कार्य में दर्जनभर 12 चक्का डंपर, दो जेसीबी और एक चैन माउंटिंग मशीन लगातार लगी हुई हैं, और बड़े पैमाने पर मुरम/मिट्टी का परिवहन किया जा रहा है।
सूचना के बाद भी नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस मामले की शिकायत क्षेत्र के एसडीएम तक भी पहुंचाई गई थी। एसडीएम द्वारा इस संबंध में खनिज विभाग को सूचना देने की बात कही गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक खनिज विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में भारी मशीनों और डंपरों से कार्य खुलेआम चल रहा है, इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है।
चगोरी में भी 35 एकड़ जमीन पर मुरम /मिट्टी पाटने का मामला
इससे पहले भी हमारे समाचार पत्र द्वारा ग्राम चगोरी के पास लगभग 35 एकड़ जमीन पर हजारों गाड़ियों से मुरम / मिट्टी पाटने के मामले को प्रमुखता से उठाया गया था। इस कार्य की सूचना संबंधित विभागीय अधिकारियों को देने के बावजूद आज तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जबकि कार्य वर्तमान समय में भी जारी बताया जा रहा है।
राजस्व को हो रही भारी हानि
खनिज विभाग की निष्क्रियता के कारण न केवल अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि शासन को राजस्व की भारी हानि भी उठानी पड़ रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर खनिज विभाग इन मामलों पर कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है?
क्या कलेक्टर लेंगे संज्ञान?
अब देखने वाली बात यह होगी कि दुर्ग कलेक्टर इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर ग्राम चगोरी में 35 एकड़ भूमि पर हुए मुरम/मिट्टी पाटने से हुए राजस्व नुकसान तथा ग्राम कोड़ियां में खेत के नाम पर चल रहे अवैध खनन और परिवहन पर क्या कार्रवाई करते हैं।
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा, और विभागीय अधिकारी जिलाधीश को गुमराह करने में सफल हो जाएंगे — यह आने वाला समय ही बताएगा।
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में आगामी दिनों में कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व और बड़ी प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने जा रही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सभी अधिकारी पूरी सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि 13 मार्च को अलविदा की नमाज, 14 और 15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा सब-इंस्पेक्टर एवं समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा, 19 मार्च से चैत्र नवरात्र तथा 20-21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाए जाने की संभावना है। इन सभी आयोजनों के कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियां होंगी, इसलिए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए, पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती हो और हर स्थिति पर सतत नजर रखी जाए।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने परीक्षा के दौरान पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी जाए, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि त्योहारों और परीक्षाओं के इस संवेदनशील समय में प्रशासनिक समन्वय, सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना बेहद जरूरी है, ताकि प्रदेश में शांति और व्यवस्था कायम रहे।
दुर्ग। दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में लगातार बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त महामंत्री निकिता मिलिंद ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) पर भी कार्रवाई की मांग उठाते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में इसे जल्दबाजी और राजनीतिक अपरिपक्वता से जोड़कर भी देखा जा रहा है। ⚖️
निकिता मिलिंद ने अपने बयान में कहा कि ग्राम समोदा में लगभग 8 से 10 एकड़ खेत में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में जिस “सुशासन” की बात कही जा रही है, वह अब “सूखा नशा आसन” बनता दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार अफीम वही पौधा है जिससे आगे चलकर हेरोइन जैसे घातक नशीले पदार्थ तैयार होते हैं, इसलिए इतने बड़े स्तर पर इसकी खेती का सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
SP की जवाबदेही पर उठाया प्रश्न
कांग्रेस महामंत्री ने कहा कि जब किसी छोटे मामले में आरक्षक या थानेदार को तत्काल लाइन अटैच कर दिया जाता है, तो इतने बड़े स्तर पर चल रही अफीम की खेती आखिर पुलिस और प्रशासन की नजर से कैसे छिपी रही। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जिम्मेदारी तय होती है तो क्या वही मापदंड जिले के पुलिस अधीक्षक पर भी लागू किए जाएंगे, जो सामान्य पुलिसकर्मियों पर लागू होते हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि इस अवैध खेती के पीछे किन-किन लोगों की भूमिका है।
सरकार पहले ही दे चुकी है सख्त कार्रवाई का संदेश
गौरतलब है कि इस मामले में प्रदेश सरकार पहले ही कड़ा रुख अपना चुकी है। गृहमंत्री विजय शर्मा विधानसभा में स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को संरक्षण नहीं दिया जाएगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच प्रशासनिक स्तर पर जारी है और संबंधित विभाग लगातार तथ्य जुटा रहे हैं।
राजनीतिक बयान या अपरिपक्वता?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब जांच प्रक्रिया अभी जारी है और सरकार स्वयं सख्त कार्रवाई का संकेत दे चुकी है, ऐसे समय में सीधे जिला पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई की मांग करना राजनीतिक रूप से जल्दबाजी भरा कदम माना जा सकता है। कुछ जानकार इसे नई जिम्मेदारी संभालने के बाद दिए गए अपरिपक्व राजनीतिक बयान के रूप में भी देख रहे हैं।
फिलहाल समोदा अफीम कांड में जांच आगे बढ़ रही है और प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासनिक जांच के बाद किन-किन स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है।
रायपुर / शौर्यपथ / बलरामपुर जिले के विकासखंड कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत त्रिपुरी के सरना टोली क्षेत्र में मुखबिर के द्वारा अफीम की संभावित खेती की सूचना प्राप्त होने पर कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा के निर्देश एवं पुलिस अधीक्षक श्री बैंकर वैभव के मार्गदर्शन में प्रशासन एवं पुलिस की संयुक्त टीम अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तत्काल मौके पर पहुंची। जांच के दौरान प्रथम दृष्टिया पाया गया कि लगभग 2 एकड़ से अधिक की भूमि पर अफीम की अवैध खेती की जा रही थी। टीम के द्वारा संबंधित क्षेत्र को अभिरक्षा में लेकर आवश्यक जांच प्रारंभ की गई। साथ ही संबंधित एजेन्सी को सूचना दी गई है, प्रशासनिक टीम भी मौके पर मौजूद है। शाम होने के कारण कल सुबह वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन द्वारा क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाते हुए पुलिस की रात्रिकालीन निगरानी भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। जिला प्रशासन द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए एनडीपीएस एक्ट तथा एसएसएल की टीम, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम की उपस्थिति में आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
