
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
पाटन / शौर्यपथ / तहसील पाटन अंतर्गत जामगांव (आर) में पदस्थ नायब तहसीलदार धर्मेश श्रीवास्तव ने अपनी अधिवार्षिकी आयु पूर्ण करते हुए शासकीय सेवा से सेवानिवृत्ति ग्रहण की। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय सभागार, पाटन में एक गरिमामय एवं भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में एसडीएम पाटन लवकेश ध्रुव ने श्री श्रीवास्तव के कार्यकाल की सराहना करते हुए उनके प्रशासनिक योगदान, कार्यनिष्ठा एवं सरल व्यक्तित्व की प्रशंसा की। तहसीलदार पवन ठाकुर सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
इस अवसर पर नायब तहसीलदार भूपेंद्र सिंह, मनोज रस्तोगी, कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव, पटवारी शिव कुमार सोनी, स्टेनो राजेश, रविशंकर देवांगन, किशोर साहू, विनय नेताम, पीताम्बर साहू सहित तहसील कार्यालय के अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में श्री धर्मेश श्रीवास्तव को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया एवं भावभीनी विदाई दी गई।
रायपुर / शौर्यपथ / खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आज रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पुरुषों की हॉकी में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच खेला गया। इसमें छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश को 14-6 से हरा कर कांस्य पदक जीता।
रायपुर/नारायणपुर । कभी नक्सल प्रभाव और भौगोलिक अलगाव के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र से आज एक नई पहचान उभर रही है—फुटबॉल प्रतिभाओं की नर्सरी के रूप में। वर्ष 1986 में स्थापित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम, नारायणपुर आज खेल और शिक्षा के माध्यम से सुदूर आदिवासी अंचल के बच्चों का भविष्य संवार रहा है।
इस बदलाव की झलक इन दिनों आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जहां छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी इसी आश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त कर राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। महिला टीम जहां फाइनल में पहुंच चुकी है, वहीं पुरुष टीम ने भी सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली है।
छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ (CFA) के सहायक महासचिव एवं एआईएफएफ कार्यकारी समिति सदस्य मोहन लाल के अनुसार, “दोनों टीमों में लगभग 12-13 खिलाड़ी रामकृष्ण मिशन अकादमी से हैं, जो इस संस्थान की गुणवत्ता और समर्पण को दर्शाता है।”
शिक्षा के साथ खेल का मजबूत आधार
घने जंगलों के बीच बसे दूरदराज गांवों के बच्चों के लिए यह आश्रम एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। यहां लगभग 2,700 से अधिक बच्चे निवास करते हैं, जिन्हें निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ खेल और संगीत में भी प्रशिक्षित किया जाता है।
कम उम्र से ही बच्चों को विभिन्न खेलों से परिचित कराया जाता है और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के अवसर प्रदान किए जाते हैं। हर वर्ष लगभग 50-60 छात्र राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित
आश्रम में खेल के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं—तीन फुटबॉल मैदान, जिनमें एक एस्ट्रो-टर्फ भी शामिल है। इसके अलावा बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए इनडोर एरेना भी मौजूद हैं।
रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी (RKM FA) को तब राष्ट्रीय पहचान मिली, जब यह राज्य का पहला क्लब बना जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया।
खेल से बदलती जिंदगी
मोहन लाल बताते हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के जीवन में खेल ने एक सकारात्मक और परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। यहां से निकले कई छात्र आज देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं और शीर्ष संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं। यह आश्रम न केवल शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी और शिक्षाविद बनने के सपने देखने और उन्हें साकार करने का मंच भी दे रहा है।
अबूझमाड़ की धरती से उठती यह कहानी साबित करती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो संघर्ष की जमीन से भी सफलता के फूल खिल सकते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / भगवान महावीर जन्मोत्सव के पावन अवसर पर महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति द्वारा समाज को Peace, Kindness और Humanity की ओर प्रेरित करने हेतु विभिन्न विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आयोजित “अहिंसा यात्रा” ने शहर में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया।
यह अहिंसा यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक Movement के रूप में सामने आई—जिसका उद्देश्य है सोच में परिवर्तन लाना, नफरत की जगह प्रेम को चुनना और हिंसा के स्थान पर अहिंसा को अपनाना।
सुबह 6:30 बजे गया नगर, चण्डी मंडी से प्रारंभ हुई यह यात्रा नसिया जी तीर्थ तक पहुंची। यात्रा में समाज के वरिष्ठ एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, वहीं महिलाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई, जिससे आयोजन का स्वरूप और भी व्यापक एवं प्रेरणादायी बन गया।
यात्रा के दौरान भगवान महावीर के उपदेशों से सजी तख्तियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जो आमजन को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के संदेश से जागरूक करती नजर आईं। इन संदेशों ने उपस्थित लोगों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना और नई पीढ़ी को महावीर स्वामी के आदर्शों से जोड़ना है। इस प्रकार अहिंसा यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में प्रेम, सौहार्द और मानवता के मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
विशेष रिपोर्ट:
छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में हाल ही में नई कंपनियों को दिए गए काम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा ठेका देने की प्रक्रिया में कई अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कंपनियों ने काम लेने के बाद स्वयं कार्य करने के बजाय इसे बाहरी लोगों को सौंप दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन नई कंपनियों को काम दिया गया है उनमें Innov Source Services Pvt Ltd, Innovision, Team HR, Parragreen और Spectrum जैसी कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने काम हासिल करने के लिए भारी रकम ली और बाद में खुद काम करने के बजाय बाहरी लोगों या अन्य एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंप दी।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में बड़ी मात्रा में पैसों का लेन-देन होने की भी चर्चा है। इस वजह से विभाग की कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
हालांकि, अभी तक इस मामले में विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन बढ़ते विवाद के बीच यह मांग तेज हो रही है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि टेंडर प्रक्रिया में हुई किसी भी संभावित अनियमितता की सच्चाई सामने आ सके।
दुर्ग | शौर्यपथ समाचार
दुर्ग शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट की बदहाल व्यवस्था, अवैध अतिक्रमण और पार्किंग ठेकेदारों की मनमानी वसूली को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। 1 अप्रैल से बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के सामने अब इस अव्यवस्था को सुधारने की बड़ी चुनौती खड़ी है।
अब तक राजस्व वसूली में व्यस्त रहने का हवाला देने वाले मिश्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वित्तीय वर्ष समाप्त होते ही बाजार व्यवस्था पर सख्ती बरती जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीनी हकीकत में बदलेगी या फिर यह भी सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह जाएगी?
? अतिक्रमण से घिरा बाजार, सड़क तक पसरा कारोबार
इंदिरा मार्केट में हालात यह हैं कि पसरा व्यापारियों ने सड़कों तक कब्जा जमा लिया है, जिससे न केवल बाजार की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई है। मुख्य मार्गों और प्रवेश द्वारों पर अतिक्रमण की वजह से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
? पार्किंग ठेकेदारों पर गंभीर आरोप
बाजार में पार्किंग व्यवस्था सुधारने के नाम पर ठेकेदारों द्वारा मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी मूर्ति के आसपास और प्रवेश द्वारों पर अवैध वसूली का खेल लंबे समय से जारी है।
मिश्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि निगम द्वारा निर्धारित शुल्क की सूचना पट्टिकाएं लगाई जाएंगी और ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।
? सामान्य सभा में भी गूंजा मुद्दा
नगर निगम की सामान्य सभा में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा था, जहां सत्तापक्ष के पार्षदों ने ही बाजार की बदहाली और अवैध वसूली को प्रमुखता से उठाया। इससे यह स्पष्ट है कि समस्या सिर्फ आम जनता की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की नजर में भी गंभीर है।
? रसूखदारों पर होगी कार्रवाई या सिर्फ गरीबों पर चलेगा डंडा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल छोटे ठेला व्यापारियों तक सीमित रहेगी, या फिर प्रभावशाली लोगों पर भी समान रूप से होगी?
गणेश मंदिर के सामने “राम रसोई” के नाम पर सड़क पर संचालित होटल,
ओम ज्वेलर्स द्वारा दुकान का सड़क तक विस्तार,
जैसे मामलों में अब तक केवल कार्रवाई की बातें हुई हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।
यदि मिश्रा वास्तव में सख्ती दिखाते हैं, तो यह उनके लिए प्रभावशाली लोगों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाने की पहली परीक्षा होगी।
? अनुभव से कम, जिम्मेदारी बड़ी – फैसले पर भी सवाल
यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि बाजार विभाग के अन्य कर्मचारियों से जूनियर होने के बावजूद अभ्युदय मिश्रा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में यह निर्णय भी अब उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा कि सही था या सवालों के घेरे में आ जाएगा।
⚖️ अब नजर 1 अप्रैल पर…
साल भर से दावे, घोषणाएं और बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं।
अब 1 अप्रैल से शुरू होने वाला समय अभ्युदय मिश्रा के लिए “अग्निपरीक्षा” से कम नहीं होगा।
? क्या इंदिरा मार्केट में व्यवस्था लौटेगी?
? क्या अवैध वसूली पर लगाम लगेगी?
? या फिर पर्दे के पीछे ‘कमीशन का खेल’ और तेज हो जाएगा?
इन सवालों के जवाब अब कार्रवाई ही देगी, बयान नहीं।
"शौर्यपथ : एक अखबार नहीं, एक बेटे का जीवित स्वरूप"
समय का पहिया निरंतर चलता रहता है, लेकिन कुछ तिथियाँ, कुछ क्षण और कुछ स्मृतियाँ ऐसी होती हैं जो जीवन भर हमारे साथ चलती हैं। आज शौर्यपथ दैनिक समाचार अपने 9वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। पाठकों के लिए यह एक अखबार हो सकता है, लेकिन मेरे और मेरे परिवार के लिए यह हमारी पूरी दुनिया है—हमारे बेटे शौर्य का जीवंत अस्तित्व।
शौर्य.. सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि हमारे जीवन का वह उजाला था, जिसे हमने 13 वर्षों तक अपनी हर सांस के साथ जिया। ईश्वर का वह आशीर्वाद जब तक हमारे पास था, हमने उसे एक राजकुमार की तरह पाला, उसके हर सपने, हर इच्छा को पूरा करने का प्रयास किया। वह हमारे जीवन की धड़कन था, हमारे घर की मुस्कान था।
उसके जीवनकाल में शौर्यपथ एक साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में प्रकाशित होता था। वह मासूमियत से पूछता—
"पापा, हमारा पेपर रोज कब आएगा? अभी तो हफ्ते में सिर्फ एक दिन आता है..."
मैं उसे समझाता कि रोज अखबार निकालना आसान नहीं होता। लेकिन शायद उस मासूम सवाल में ही एक सपना छिपा था—एक ऐसा सपना, जिसे हम तब समझ नहीं पाए।
फिर एक दिन ऐसा आया, जिसने हमारी पूरी दुनिया को बदल दिया। शौर्य हमें छोड़कर चला गयाज् एक ऐसी खामोशी देकर, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। उसके जाने के बाद जीवन जैसे ठहर सा गया था, लेकिन उसी ठहराव में हमने उसके उस अधूरे सपने को महसूस किया।
और फिर, उसके जाने के मात्र 40 दिन बाद, 1 अप्रैल 2019 को हमने एक निर्णय लिया—
शौर्यपथ अब साप्ताहिक नहीं, बल्कि दैनिक समाचार पत्र बनेगा।
यह निर्णय सिर्फ एक प्रकाशन का विस्तार नहीं था, यह एक पिता-माता का अपने बेटे के सपने को जीवित रखने का संकल्प था।
उस दिन से आज तक, हर सुबह जब शौर्यपथ हमारे घर पहुंचता है, तो ऐसा लगता है जैसे शौर्य खुद हमें जगाने आया हो। हर पन्ने में उसकी झलक, हर शब्द में उसकी आवाज, और हर खबर में उसका अस्तित्व महसूस होता है।
इन वर्षों में दुनिया ने बहुत कुछ देखा—विशेषकर वैश्विक महामारी का वह कठिन दौर, जब हर व्यवस्था लडख़ड़ा रही थी। लेकिन उन परिस्थितियों में भी शौर्यपथ का प्रकाशन नहीं रुका। क्योंकि यह सिर्फ एक अखबार नहीं था, यह हमारे बेटे का जीवित रूप था—जो हर सुबह हमारे साथ होना ही था।
इन 9 वर्षों में शौर्यपथ ने अपने नाम के अनुरूप, बिना किसी भय और बिना किसी द्वेष के, सच्चाई को सामने लाने का प्रयास किया है। समाज में जो घटित हो रहा है, उसे निष्पक्षता और ईमानदारी से पाठकों तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य रहा है। इस मार्ग पर हमें सराहना भी मिली, और आलोचना भी—लेकिन हमने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
आज, जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि यह यात्रा अकेली नहीं रही। प्रदेश के 17 जिलों में जुड़े हमारे पत्रकार साथी—जो आज एक परिवार की तरह शौर्यपथ से जुड़े हैं—इस यात्रा के सच्चे सहभागी हैं। हम उन सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हर परिस्थिति में हमारा साथ दिया।
हम अपने सम्मानित पाठकों के भी ऋणी हैं, जिनका विश्वास और स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। यही विश्वास हमें हर दिन और बेहतर करने की प्रेरणा देता है।
और अंत में..
शौर्य बेटा.. तू हमारे साथ नहीं है, लेकिन तेरा नाम, तेरा सपना, और तेरी यादें हमें हर दिन जीने का सहारा देती हैं।
तेरी बहन सिद्धि, जो उस समय मात्र 4 वर्ष की थी, आज 12 साल की हो गई है—लेकिन आज भी तुझे महसूस करती है, तुझसे बातें करती है, और तेरी यादों के साथ बड़ी हो रही है।
हम सब तुझे बहुत चाहते हैं...
जहां भी रहो, खुश रहो।
संवाददाता – अजय देशमुख | गुंडरदेही
भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर जैन श्री संघ गुंडरदेही द्वारा स्थानीय शारदा वाटिका में आयोजित भव्य समारोह श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को आत्मसात करते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता ने इसे एक यादगार उत्सव में परिवर्तित कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नन्हे-मुन्ने बच्चों की आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। बहु मंडल की सदस्याओं ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर भगवान महावीर के उपदेशों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान समाज के वरिष्ठजनों की गरिमामयी उपस्थिति और उनके आशीर्वाद ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।
इस आयोजन की सफलता में मातृशक्ति और युवा वर्ग की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिलाओं के समर्पण और युवाओं के सुव्यवस्थित प्रबंधन ने कार्यक्रम को अनुशासन, उत्साह और भव्यता का उत्कृष्ट स्वरूप प्रदान किया।
महोत्सव में आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलंगपुर, सिकोसा और सिराभाठा श्री संघ के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन की शोभा को और बढ़ाया। जैन श्री संघ गुंडरदेही ने सभी आगंतुक संघों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान जीव दया के भाव को साकार करते हुए श्रद्धालुओं ने जीव दया पेटी में ₹21,000 की राशि समर्पित की। संघ ने यह निर्णय लिया कि उक्त राशि श्री कृष्ण गौशाला को सेवा कार्य हेतु प्रदान की जाएगी, जो समाज के सेवा भाव का प्रेरणादायक उदाहरण है।
समापन अवसर पर जैन श्री संघ गुंडरदेही ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं एवं श्रद्धालुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार धर्म और समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा के आदर्शों को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत कर गया।
शौर्यपथ, गुंडरदेही।
गुंडरदेही क्षेत्र में एक वेब पोर्टल पर प्रकाशित और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही कथित अवैध गतिविधियों की खबर जांच में भ्रामक साबित हुई है। खबर में दावा किया गया था कि थाना गुंडरदेही अंतर्गत ग्राम ओटेबंद में दारू, गांजा और सट्टे का कारोबार संचालित हो रहा है, जिसका आधार एक संदिग्ध वीडियो बताया जा रहा था।
हालांकि, वायरल वीडियो में न तो व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट है और न ही यह पुष्टि हो पाई कि वीडियो उक्त स्थान का ही है। वीडियो में केवल कुछ पत्तियों को दिखाया जा रहा है, जिससे किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद वेब पोर्टल द्वारा बिना पुष्ट जानकारी के गंभीर आरोप प्रसारित कर दिए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी (टीआई) नवीन बोरकर ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान न तो वहां शराब की कोई अवैध सामग्री मिली और न ही गांजा या सट्टा संचालन के कोई प्रमाण सामने आए। ग्रामीणों ने भी स्पष्ट रूप से बताया कि उक्त स्थान पर किसी प्रकार की अवैध गतिविधियां नहीं होती हैं।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में फिलहाल ऐसी कोई गतिविधि नहीं पाई गई है, लेकिन भविष्य में यदि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिना सत्यापन के सनसनीखेज खबरें प्रसारित करने वाले कुछ वेब पोर्टल्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील विषयों पर इस प्रकार की भ्रामक खबरें न केवल आमजन में भ्रम फैलाती हैं, बल्कि पुलिस और शासन की छवि को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती हैं।
आवश्यक है कि मीडिया संस्थान जिम्मेदारी के साथ तथ्यों की पुष्टि कर ही खबरों का प्रकाशन करें, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहे और समाज में सही एवं संतुलित जानकारी पहुंच सके।
दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड नंबर 38, मिलपारा में विकास के दावों की पोल खुल गई है। तीन-चार महीने पहले जिस 'आकांक्षा शौचालय' का उद्घाटन बड़े तामझाम और जोश के साथ किया गया था, वह आज जनता के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। विडंबना यह है कि सरकारी कागजों और प्रेस विज्ञप्तियों में जिस विकास की गाथा गाई जा रही है, धरातल पर उस पर ताला जड़ा हुआ है।
नीलेश अग्रवाल की अनुभवहीनता जनता पर भारी
शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था के बदहाल होने का सीधा आरोप स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर लग रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य प्रभारी की निष्क्रियता और अनुभवहीनता के कारण जनसुविधाएं दम तोड़ रही हैं। चर्चा आम है कि अनुभव की कमी के बावजूद, केवल महापौर श्रीमती अलका बाघमार का कट्टर समर्थक होने के नाते उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में हुई सामान्य सभा में भी भाजपा पार्षदों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए थे, जो विभाग की विफलता को प्रमाणित करते हैं।
कचरों का ढेर और बदबू बना शहर का चेहरा
महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में दुर्ग शहर की स्थिति 'बदहाली' की ओर अग्रसर है। जगह-जगह कचरों के ढेर और दुर्गंधयुक्त वातावरण अब शहर की नई पहचान बनती जा रही है। बावजूद इसके, निष्क्रिय स्वास्थ्य प्रभारी को महापौर का परोक्ष समर्थन मिलना पूरी शहरी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। जनता अब खुलेआम यह कहने लगी है कि महापौर का ध्यान जनहित के बजाय भेदभावपूर्ण राजनीति पर अधिक है।
सुशासन के दावों के विपरीत शहरी सरकार का रुख
एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 'जीरो टॉलरेंस' और सुशासन की नीति पर चलते हुए भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग की शहरी सरकार इस मंशा के ठीक विपरीत कार्य कर रही है। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय सांसद विजय बघेल, जिनकी पसंद पर महापौर प्रत्याशी का चयन हुआ था, वे भी शहर की इस बदहाली पर मौन साधे हुए हैं। सांसद की यह चुप्पी उनकी संवेदनहीनता को दर्शाती है।
मिलपारा का बंद शौचालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि नगर निगम के खोखले वादों का प्रतीक है। यदि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी किसी अनुभवी हाथों में नहीं सौंपी गई, तो दुर्ग शहर की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
