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दुर्ग / शौर्यपथ विशेष /
दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में 17 मार्च को जो घटनाक्रम सामने आया, उसने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। आमतौर पर विपक्ष द्वारा सत्ता पक्ष को घेरने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी के ही पार्षद अपनी ही शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए। खासकर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामलों में दोहरी नीति के आरोपों ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।
सभा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि शहर में छोटे दुकानदारों, ठेला-गुमटी वालों पर कार्रवाई की बात तो जोर-शोर से की जाती है, लेकिन कथित रूप से चतुर्भुज राठी के संरक्षण में संचालित "राम रसोई" पर निगम प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
// बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन पर 'राम रसोईÓ का संचालन, अनुबंध खत्म फिर भी जारी//
जानकारी के अनुसार, बस स्टैंड स्थित कीमती निगम भूमि पर संचालित राम रसोई का अनुबंध समाप्त हो चुका है। आरोप है कि अनुबंध अवधि के दौरान भी शर्तों का पालन नहीं किया गया, इसके बावजूद न तो जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अनुबंध समाप्त होने के बाद भी निर्माण और संचालन जारी है, जो सीधे-सीधे नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
अवैध निर्माण पर विभागों की 'पासिंग द बकÓ
// इस मामले में निगम के अलग-अलग विभागों का रवैया भी सवालों के घेरे में है।
//अतिक्रमण शाखा का कहना है कि उन्हें बाजार विभाग से आदेश नहीं मिला
//बाजार विभाग भवन शाखा पर जिम्मेदारी डाल रहा है
//भवन शाखा का तर्क है कि आवंटन के समय उनसे राय ही नहीं ली गई
इस तरह जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर कार्रवाई से बचने की कोशिश साफ नजर आती है।
शहरभर में अतिक्रमण, कार्रवाई सिर्फ 'कमजोरोंÓ पर?
चर्च रोड, समृद्धि बाजार, जेल चौक, मालवीय नगर, पटेल चौक और कुआं चौक जैसे प्रमुख इलाकों में तेजी से बढ़ते अतिक्रमण पर भी निगम की निष्क्रियता उजागर हुई।
आरोप है कि जहां छोटे व्यापारियों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रशासन मौन साध लेता है।
// सामान्य सभा में भाजपा पार्षदों का विरोध, सभापति ने दिए संकेत//
सामान्य सभा के दौरान भाजपा पार्षदों ने खुलकर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सभापति श्याम शर्मा को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि अवैध कार्यों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि सरकार और पार्टी की छवि पर आंच न आए।
ट्रिपल इंजन सरकार पर उठे सवाल
सभा में यह भी चर्चा रही कि "ट्रिपल इंजन सरकार" का दावा जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ता दिख रहा है। जहां एक ओर राज्य और केंद्र की योजनाओं को गति मिल रही है, वहीं नगर निगम की कार्यप्रणाली विकास में बाधा बनती नजर आ रही है।
// महापौर की चुप्पी पर बढ़ते सवाल //
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल महापौर अलका बाघमार की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली महापौर पर आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में वे मौन हैं।
विशेष रूप से चतुर्भुज राठी से जुड़े मामले में कार्रवाई का अभाव भेदभाव की नीति और मिलीभगत जैसे गंभीर आरोपों को जन्म दे रहा है।
शहर की जनता और राजनीतिक गलियारों में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निगम प्रशासन राम रसोई और अन्य अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करेगा?
क्या नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू होगा?
या फिर यह मामला भी राजनीतिक संरक्षण की भेंट चढ़ जाएगा?
फिलहाल, 17 मार्च की सामान्य सभा ने यह साफ कर दिया है कि दुर्ग की "शहरी सरकार" अब विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही घर के सवालों से घिरी हुई है।
निजी हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना: पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए - मुख्यमंत्री साय
केवल नगर निगम अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराया जाए सीवरेज सफाई का कार्य
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए।
मुख्यमंत्री साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए।
मुख्यमंत्री साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए।
इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की।
बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया।
बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव एस. बसवराजू सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। उन्होंने इस मंगल अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी पावन अवसर से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नव शुरुआत और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी जैसे विविध स्वरूपों में प्रदेश की आस्था और संस्कृति गहराई से रची-बसी है। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को सशक्त बनाती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि सामाजिक समरसता, सकारात्मक सोच और आंतरिक चेतना का भी संचार करती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।
नई दिल्ली / एजेंसी / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पाड़वा, चेटी चांद, नवरेह और सादिबुचेरोबा के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, “चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुडी पड़वा, चेती चांद, नवरेह और सादिबुचेरोबा के शुभ अवसर पर, मैं देश-विदेश में रहने वाले सभी देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।
नव वर्ष के आगमन पर मनाए जाने वाले ये पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध के प्रतीक हैं। उत्सव नई आशाओं, नए संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। हमारी संस्कृत के वाहक ये पर्व मिलकर खुशियां बांटने की हमारी गौरवशाली परंपरा को भी दर्शाते हैं।
मैं कामना करती हूं कि ये सभी त्यौहार भारत के विभिन्न समुदायों को प्रेम, सौहार्द और स्नेह के बंधन में बांधें और सभी के लिए खुशहाली तथा सुख-समृद्धि लेकर आएं।”
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और मानव जीवन की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा और संशोधित जानकारी के अनुसार, इस घटना में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है।
मृतकों की पहचान, एक की हालत नाजुक
मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे और अनमोल मांझी के रूप में हुई है। वहीं सत्यम कुमार की हालत गंभीर है और उसका इलाज जारी है। घटना में घायल एक अन्य युवक प्रशांत कुमार भी उपचाराधीन बताया जा रहा है। सभी मजदूर सिमरन सिटी क्षेत्र के निवासी हैं।
कैसे हुआ हादसा
मंगलवार को मजदूरों को अस्पताल के लगभग 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए उतारा गया था। बताया जा रहा है कि टैंक में उतरते ही एक मजदूर जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गया। उसे बचाने के प्रयास में अन्य मजदूर भी एक-एक कर नीचे उतरे, लेकिन वे भी गैस की चपेट में आ गए। कुछ ही देर में दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि अन्य की हालत गंभीर हो गई।
सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़
घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
सुरक्षा के नाम पर केवल साधारण मास्क दिए गए, जबकि इतने खतरनाक कार्य के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर और अन्य जरूरी उपकरण अनिवार्य होते हैं। मजदूरों को यह भरोसा भी दिलाया गया था कि टैंक में उतरने पर कोई खतरा नहीं है।
अस्पताल के बाहर हंगामा, मुआवजे की मांग
हादसे की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए और जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा उचित मुआवजे की मांग करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
एडीसीपी वेस्ट राहुल देव शर्मा ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा भी की गई है, जिस पर बातचीत जारी है।
बड़ा सवाल
यह हादसा सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि जब सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे खतरनाक कार्य के लिए सख्त नियम और कानून बने हैं, तो फिर बिना पर्याप्त सुरक्षा के मजदूरों को मौत के मुंह में क्यों उतारा गया?
फिलहाल, एक मजदूर जिंदगी के लिए जूझ रहा है, जबकि दो परिवार अपनों को खोने के गम में डूबे हैं — और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतजार जारी है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में होली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व है। यह पर्व आपसी मनमुटाव को भुलाकर रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और हमें इस अवसर पर अपने भीतर की नकारात्मकताओं को त्यागकर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा वर्ग सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाए, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इन योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने प्रदेशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि होली का त्योहार परिवार और समाज के साथ मिलकर आनंद और अपनत्व के साथ मनाने की परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को और मजबूत बनाते हैं।
इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक श्री किरण देव, श्री मोतीलाल साहू, श्री अनुज शर्मा, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, धमतरी महापौर श्री रामू रोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे।
नई दिल्ली /
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से मुलाकात कर त्योहार की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री ने कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बातचीत की और आगामी ईद के त्योहार की शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान, श्री मोदी और युवराज ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक जुड़ाव को अनिवार्य माना। प्रधानमंत्री ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए युवराज द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
"कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बात की और आगामी ईद के त्योहार पर बधाई दी।
हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। हमने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय जुड़ाव पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराया। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हम इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक जुड़ाव अनिवार्य बना हुआ है। मैंने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए उनके निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।"
दुर्ग।
दुर्ग शहर कांग्रेस इन दिनों संगठनात्मक राजनीति और अंदरूनी समीकरणों के चलते चर्चा के केंद्र में है। खासकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हलचल तेज होती नजर आ रही है, जहां एक ओर पुराने और अनुभवी नाम हैं, वहीं दूसरी ओर नई सक्रियता के सहारे उभरती दावेदारियां भी सामने आ रही हैं।
इसी कड़ी में शहर कांग्रेस की महामंत्री निकिता मिलिंद का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। हाल के दिनों में उनके द्वारा लगातार प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाना और मीडिया में सक्रिय बने रहना, पार्टी के भीतर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
क्या सक्रियता का लक्ष्य ‘कुर्सी’?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि—
क्या यह सक्रियता संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति है?
या फिर शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की नजरों में जगह बनाकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश?
हालांकि, इस पद के लिए अब तक महापौर प्रत्याशी प्रेमलता साहू का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है। उनके संगठन में पुराने और मजबूत संबंध, खासकर शहर अध्यक्ष के साथ, उन्हें स्वाभाविक दावेदार बनाते हैं।
विपक्ष की भूमिका पर उठते सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि शहर कांग्रेस स्थानीय मुद्दों पर कितनी सक्रिय है?
जहां एक ओर शहरी सरकार पर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप लग रहे हैं, वहीं कांग्रेस के पार्षदों की अपेक्षित आक्रामक भूमिका नजर नहीं आ रही।
दिलचस्प बात यह है कि निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष (भाजपा) के पार्षद ही अपनी सरकार को घेरते दिखे, जबकि कांग्रेस अपेक्षाकृत शांत नजर आई।
सोशल मीडिया बनाम ज़मीनी राजनीति
दुर्ग कांग्रेस में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि राजनीति का केंद्र जमीनी आंदोलनों से हटकर सोशल मीडिया और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमटता जा रहा है।
निकिता मिलिंद की बढ़ती मीडिया सक्रियता को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है—जहां जमीनी मुद्दों की बजाय राष्ट्रीय राजनीति पर बयानबाजी ज्यादा दिख रही है।
बदलते समीकरण, नई टीम की तैयारी
दुर्ग कांग्रेस की राजनीति में पिछले कुछ समय में बड़ा बदलाव आया है। एक समय तक प्रभावी रहे वोरा परिवार का वर्चस्व अब लगभग समाप्त हो चुका है, और शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में नई टीम और नए चेहरे उभर रहे हैं।
पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे राजेश यादव और धीरज बाकलीवाल का साथ आना भी इन बदलते समीकरणों का संकेत है।
क्या संभव है ‘तेज प्रमोशन’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महामंत्री पद मिलने के तुरंत बाद महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन
“राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं”—खासकर तब, जब संगठन में बड़े बदलाव की प्रक्रिया चल रही हो।
अब देखना यह होगा कि—
क्या अनुभव और पुराने संबंध बाजी मारेंगे?
या फिर नई सक्रियता और रणनीति संगठन में नया समीकरण बनाएगी?
फिलहाल, दुर्ग कांग्रेस में एक बात साफ है—
“कुर्सी एक, दावेदार कई… और सियासत अपने पूरे रंग में!”
लेख - राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर
दुर्ग। शौर्यपथ ।
दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में इस बार सिर्फ मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर खुला ‘मंथन’ और ‘मंथन से निकला असंतोष’ भी साफ दिखाई दिया। शहर की जनता ने जिस भरोसे के साथ “ट्रिपल इंजन सरकार” को चुना था—तेजी से विकास, बेहतर सफाई और सुदृढ़ व्यवस्था—वह भरोसा अब सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है।
शहर में बढ़ते अवैध बाजार, अतिक्रमण, गंदगी और अव्यवस्थित यातायात ने न केवल नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी की छवि पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
सामान्य सभा में उठा ‘जनता का सवाल’
सभा के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के पार्षदों ने शहर की बिगड़ती व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। चर्च मार्ग पर लगने वाला अवैध बाजार और अन्य प्रमुख स्थानों पर बढ़ता अतिक्रमण, प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आया।
सभापति श्याम शर्मा का सख्त संदेश
सामान्य सभा में सभापति श्याम शर्मा ने भी स्पष्ट शब्दों में शहरी सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि—
“जनता ने ट्रिपल इंजन सरकार इसलिए चुनी है कि विकास जमीन पर दिखे, सिर्फ कागज और प्रचार में नहीं।”
“यदि वार्डों में असमान विकास और अव्यवस्था जारी रही, तो जनप्रतिनिधियों के लिए जनता को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।”
उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि मामला अब केवल विपक्ष का आरोप नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी गहरी चिंता का विषय बन चुका है।
विकास बनाम हकीकत
एक ओर शहरी सरकार विकास के दावे और उपलब्धियां गिनाती नजर आती है, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों पर अतिक्रमण, गंदगी और अव्यवस्था इन दावों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं।
पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है—कुछ वार्डों में काम, तो कई वार्डों में बुनियादी सुविधाएं तक अधूरी।
ट्रिपल इंजन का ‘सपना’ बनाम ‘जमीनी सच्चाई’
प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप “ट्रिपल इंजन” का जो सपना जनता ने देखा था, वह अभी तक जमीनी स्तर पर पूरी तरह साकार होता नजर नहीं आ रहा।
अब सवाल यह है कि—
क्या शहरी सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेगी?
क्या अतिक्रमण और अव्यवस्था पर ठोस कार्रवाई होगी?
या फिर “विकास” सिर्फ प्रचार और दावों तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल, सामान्य सभा से निकला संदेश साफ है—
“अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो जवाब सिर्फ सरकार को नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को देना पड़ेगा।”
दुर्ग।
दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा इस बार सिर्फ औपचारिक चर्चा का मंच नहीं रही, बल्कि सफाई व्यवस्था के नाम पर सियासी टकराव और प्रशासनिक सवालों का विस्फोट बन गई। मामला वार्ड नंबर 57 में जनवरी महीने के दौरान पूरे एक हफ्ते तक सफाई कार्य बंद रहने का है, जिसने अब शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
भोजन अवकाश के बाद जब सभा दोबारा शुरू हुई, तो वार्ड के सुपरवाइजर ने खुले मंच पर यह स्वीकार किया कि वार्ड 57 में एक हफ्ते तक काम नहीं हुआ और उसी दौरान वार्ड 58 में कार्य किया गया। यह बयान जैसे ही सामने आया, वार्ड 58 की पार्षद ने तुरंत पलटवार करते हुए पूछा—“आखिर हमारे वार्ड में कहां काम हुआ?”
इस सीधे सवाल के सामने सुपरवाइजर का जवाब न तो स्पष्ट था और न ही संतोषजनक, जिससे यह संदेह और गहरा गया कि कहीं न कहीं दबाव में बयान दिया जा रहा है। अब यह दबाव प्रशासनिक था या राजनीतिक—यह जांच का विषय बन चुका है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभापति श्याम शर्मा ने पार्षदों की सहमति से निगम आयुक्त को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। वहीं, सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के पार्षदों ने तत्काल कार्रवाई की मांग कर दी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने दुर्ग की स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लंबे समय से पार्षद इस मुद्दे पर नाराजगी जता रहे थे, लेकिन अब यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है।
खास बात यह है कि आरोप सिर्फ विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि मामला केवल राजनीति नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर खामी का है।
गुप्ता पर कार्रवाई या ‘आदेश’ का खुलासा?
अब पूरा मामला स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। सवाल यह है कि—
क्या बिना किसी आदेश के एक हफ्ते तक सफाई कार्य रोका जा सकता है?
अगर आदेश था, तो वह किसका था?
और अगर गलती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
नगर निगम के गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या गुप्ता पर निलंबन की गाज गिरेगी, या फिर वे उस नाम का खुलासा करेंगे जिनके निर्देश पर यह पूरा खेल हुआ?
सत्ता पक्ष ही बना ‘सबसे बड़ा विपक्ष’
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि दुर्ग नगर निगम में इस समय सत्ता पक्ष ही अपनी सरकार के खिलाफ सबसे मुखर विपक्ष बन गया है।
अब नजरें निगम आयुक्त की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित रहेगा, या फिर इसके पीछे छिपे “असली आदेश” और जिम्मेदार चेहरे भी सामने आएंगे?
फिलहाल, शहर इंतजार कर रहा है—
“न्याय होगा या सिर्फ कार्रवाई का दिखावा?”
दुर्ग,।
दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में मंगलवार को जो दृश्य सामने आया, उसने नगर निगम की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया। आमतौर पर जहां विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरता है, वहीं इस बार सत्ता पक्ष के पार्षद ही अपनी ही “शहरी सरकार” पर हमलावर नजर आए।
सामान्य सभा में विपक्ष के पार्षद संख्या में भले ही कम रहे और अपेक्षाकृत शांत दिखे, लेकिन सत्ता पक्ष के पार्षदों की एक लंबी कतार ने मोर्चा संभालते हुए महापौर और एमआईसी (MIC) पर सीधा हमला बोला। आरोप साफ था—विकास कार्यों में खुला भेदभाव।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई वार्डों को विकास कार्यों से पूरी तरह वंचित रखा गया है, जबकि कुछ वार्डों में लाखों रुपए के कार्य स्वीकृत कर दिए गए। इस असमानता से नाराज पार्षदों ने सभा के भीतर ही अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
स्थिति इतनी असहज हो गई कि महापौर और एमआईसी सदस्य, पार्षदों के सवालों का संतोषजनक जवाब देने में असफल नजर आए। नगर निगम के इतिहास में यह शायद पहला मौका माना जा रहा है जब सत्ता पक्ष के भीतर ही इस स्तर की खुली नाराजगी और टकराव सामने आया हो।
“ट्रिपल इंजन सरकार” पर भी सवाल
सभा में उठे इस बवाल ने उन दावों पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया, जिनमें “ट्रिपल इंजन सरकार” के जरिए शहर में विकास और सुशासन का वादा किया गया था। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, सांसद विजय बघेल और गृह मंत्री विजय शर्मा के वादों के उलट, अब उसी पार्टी के पार्षद व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष खामोश, सत्ता पक्ष आक्रामक
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जहां विपक्ष अपेक्षाकृत मौन रहा, वहीं सत्ता पक्ष के पार्षद ही सबसे ज्यादा आक्रामक दिखाई दिए। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में शहरी सरकार अपने ही घर में घिरी नजर आई।
“विकास की वीरांगना” पर कटाक्ष
शहर में विकास के दावों और प्रचार के बीच, पार्षदों ने महापौर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। “विकास की वीरांगना” जैसे विशेषणों पर कटाक्ष करते हुए पार्षदों ने कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
अब नजरें सामान्य सभा के दूसरे चरण (भोजन अवकाश के बाद) पर टिकी हैं, जहां यह देखना अहम होगा कि सत्ता पक्ष के पार्षद अपनी ही सरकार से किस तरह जवाब मांगते हैं और क्या शहरी सरकार इस आंतरिक बगावत को संभाल पाएगी या नहीं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
