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March 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

**एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


सरकारी मंच, निजी लापरवाही

सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
पर सवाल यह है कि—

  • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

  • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

“प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

  • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

  • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
समझ लिया गया।


एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

दुर्ग। शौर्यपथ।

शहर की राजनीति में कई बार छोटी दिखने वाली घटनाएँ भी बड़े सवाल खड़े कर जाती हैं। गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर हालिया घटनाक्रम ने यही साबित किया है। चौक का नाम “महेश चौक” घोषित होते ही शहर की फिजा में चर्चा का दौर तेज हो गया—क्या यह महज़ एक नामकरण है, या फिर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं का आईना?

लंबित आवेदन और अचानक निर्णय

पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में साहू समाज द्वारा “कर्मा माता चौक” और राजस्थानी ब्राह्मण समाज द्वारा “परशुराम चौक” नामकरण के लिए आवेदन दिए गए थे। दोनों प्रस्ताव एमआईसी में लंबित रहे। इसके अतिरिक्त, समीप निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर को देखते हुए “जगन्नाथ चौक” नाम की भी चर्चा थी।

लेकिन परिषद के औपचारिक निर्णय से पहले ही गंजपारा चौक को “महेश चौक” के रूप में संबोधित किए जाने की खबर सामने आई। कार्यक्रम में राम रसोई के संरक्षक चतुर्भुज राठी की उपस्थिति ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग दे दिया।

सवालों के घेरे में शहरी सरकार

वर्तमान महापौर अलका बाघमार ने पूर्व सरकार की त्रुटियों को सुधारने का संकल्प लेकर पदभार संभाला था। शपथ ग्रहण के समय निष्पक्षता और पारदर्शिता की जो बात कही गई थी, वह अब गंजपारा चौक के नामकरण प्रकरण में सवालों के घेरे में है।

यदि परिषद द्वारा अब तक औपचारिक निर्णय नहीं हुआ, तो “महेश चौक” नाम की घोषणा किस अधिकार से और किस प्रक्रिया के तहत हुई?

क्या यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरकर लिया गया, या फिर प्रभावशाली वर्गों के दबाव में जल्दबाजी में?

राम रसोई और दोहरे मापदंड का आरोप

बस स्टैंड स्थित राम रसोई के अनुबंध को लेकर भी पूर्व में अनियमितताओं की चर्चा रही है। स्वयं महापौर ने पूर्व सरकार की गलतियों का उल्लेख करते हुए दूरी बनाई थी। किंतु वर्तमान कार्यकाल में भी अनुबंध की शर्तों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद संचालन जारी है और निगम की प्रेस विज्ञप्ति में संचालक को “समाजसेवी” के रूप में प्रस्तुत किया जाना विरोधाभास पैदा करता है।

यही कारण है कि गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर यह धारणा बल पकड़ रही है कि कहीं न कहीं प्रभावशाली और संपन्न वर्ग की आवाज़ अन्य समाजों की अपेक्षा अधिक प्रभावी रही।

भावनाएँ बनाम राजनीति

साहू समाज, राजस्थानी ब्राह्मण समाज और उड़िया समाज की ओर से लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार न करते हुए अचानक एक नाम को आगे बढ़ाना सामाजिक संतुलन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। शहर की विविध सामाजिक संरचना में संतुलन बनाए रखना शहरी सरकार की जिम्मेदारी है।

नामकरण मात्र औपचारिकता नहीं—यह भावनाओं, पहचान और सम्मान का विषय होता है। ऐसे में यदि प्रक्रिया पारदर्शी न हो, तो अविश्वास जन्म लेता है।

निष्पक्षता की कसौटी पर बाघमार सरकार

पिछले एक वर्ष में कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिनमें शहरी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर आलोचना हुई है। गंजपारा चौक प्रकरण ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

क्या यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता के तहत हुआ?

क्या परिषद की सहमति ली गई?

क्या सभी समाजों की भावनाओं का सम्मान किया गया?

इन सवालों के जवाब अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

गंजपारा चौक का नाम चाहे जो भी हो, शहर की जनता निष्पक्ष और पारदर्शी शासन की अपेक्षा रखती है। यदि निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट और सर्वसम्मति से हो, तो विवाद की गुंजाइश कम होती है। लेकिन यदि जल्दबाजी और प्रभाव का आरोप लगे, तो चर्चा का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि शहरी सरकार इन उठते सवालों का जवाब कैसे देती है—और क्या निष्पक्षता की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध कर पाती है, या यह प्रकरण भी राजनीतिक गलियारों में एक और बहस बनकर रह जाएगा।

  दुर्ग, / छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से अवगत कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्मार्ट मीटर जागरूकता पखवाड़ा के तहत दुर्ग शहर वृत्त के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर संभाग पश्चिम भिलाई के वैशाली नगर जोन में एकता चौक, लोहिया रोड और कोहका जोन के तहत मंगल बाजार, पुरानी बस्ती में संपन्न हुए। कार्यक्रम के दौरान बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की उपयोगिता, सटीक बिलिंग प्रक्रिया और बिजली खपत में पारदर्शिता के बारे में विस्तार से बताया गया। दोनों ही स्थानों पर आकर्षक नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया, जिसके माध्यम से स्मार्ट मीटर के लाभों को सरल और मनोरंजक तरीके से आम जनता तक पहुँचाया गया। शिविर में उपभोक्ताओं को मोर बिजली ऐप डाउनलोड करवाया गया, ताकि वे अपने मोबाइल पर ही हर आधे घंटे की वास्तविक समय में बिजली खपत की निगरानी कर सकें। कार्यक्रम में उपभोक्ताओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वैशाली नगर जोन से 32 और कोहका जोन से 35 उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर को लेकर अपना सकारात्मक फीडबैक दर्ज कराया।
इस अवसर पर नगर संभाग पश्चिम भिलाई के कार्यपालन अभियंता श्री नवीन राठी, कार्यपालन अभियंता स्काडा/डीएमएस सुश्री गीता ठाकुर, सहायक अभियंता श्रीमती सीमा बघेल, सुश्री माया भारती एवं अजय कुमार सिंह, कनिष्ठ अभियंता श्री सुरेश सोनी, श्री प्रकाश रामटेके, श्रीमती सोनम प्रजापति एवं श्री ललित पटेल के साथ जीनस पावर की टीम और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अभियान के तहत उपभोक्ताओं के अत्याधुनिक तकनीक से सशक्त बनाना और स्मार्ट मीटर के अद्वितीय लाभों से परिचित कराकर एवं स्मार्ट मीटर को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करते हुए, उन्हें निर्बाध बिजली सेवाओं और सटीक बिलिंग के नए दौर की ओर ले जाना है।

दुर्ग। थाना पाटन क्षेत्र में राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से जुड़ी 1 करोड़ 19 लाख रुपये की बड़ी बीमा धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। एचडीएफसी लाइफ कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया कि आरोपीगणों ने जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, नकली आधार व अन्य केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु दावा प्रस्तुत किया और करोड़ों रुपये की निकासी कर ली। एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर भी मृत्यु दावा लगाया गया, जबकि वह जीवित पाया गया।

मामले में राजेश कनोजिया (44 वर्ष), निवासी पंचशील सेक्टर-01, बोरसी, दुर्ग को गिरफ्तार किया गया है। वह दुर्ग में ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता था और एनपीएस निकासी के नाम पर लोगों से आधार, पैन और बैंक डिटेल लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। जांच में अमान्य क्यूआर कोड, समान पते और संदिग्ध बैंक खातों से लेन-देन जैसी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

प्रकरण में एचडीएफसी लाइफ के पूर्व कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसने कथित रूप से जाली दस्तावेज अपलोड कर सत्यापन प्रक्रिया को दरकिनार किया।

पुलिस ने आरोपी से ₹10,000 नगद एवं डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। एक आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

  दुर्ग। देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ा बेच रहे एक व्यापारी से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी मोहम्मद इस्माइल (44 वर्ष), निवासी कैम्प-02 पावर हाउस भिलाई, थाना छावनी, जिला दुर्ग, घूम-घूमकर कपड़ा बेचने का कार्य करता है। 16 फरवरी को दोपहर करीब 2:30 बजे वह देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ों की दुकान लगाकर बिक्री कर रहा था।
इसी दौरान बजरंग दल के नेता प्रदीप सिन्हा एवं उनके साथियों ने कथित तौर पर मंदिर परिसर का हवाला देते हुए दुकान हटाने को कहा। इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया। प्रार्थी का आरोप है कि आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
व्यापारी ने पुलिस को बताया कि वह विवाद से दूर रहने वाला व्यक्ति है, लेकिन धमकी के बाद वह भयभीत हो गया। उसने घटना का वीडियो रिकॉर्ड होने की बात भी कही है, जिसे जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने प्रार्थी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी

छत्तीसगढ़ के अद्यतन सर्कुलरों संग ‘भू-अभिलेख नियमावली’ का विमोचन

  रायपुर / राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का विमोचन किया।श्री उमेश पटेल और श्री श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के सर्कुलर और आदेशों का संकलन है। अभी तक मार्केट में जो पुस्तक थी, उसके लेखक और प्रकाशक मध्य प्रदेश के हैं। इसके कारण मध्यप्रदेश के सर्कुलर और आदेश उस पुस्तक में मिलते हैं, परंतु छत्तीसगढ़ के नहीं।
अब इस पुस्तक में, वर्ष 2000 के बाद मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी सर्कुलर जो छत्तीसगढ़ राज्य में लागू नहीं है, उन्हें नहीं दिया गया है। छत्तीसगढ़ द्वारा जारी अद्यतन सर्कुलर को अध्याय-वार दिया गया है। परिशिष्ट के रूप में सर्वे, राजस्व वन भूमि के अभिलेख, गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे आदि महत्वपूर्ण विषयों पर जारी लेटेस्ट सर्कुलर शामिल किए गए हैं। विषय से संबंधित प्रश्न, इकाई परिवर्तन, शब्दार्थ आदि का भी समावेश किया गया है।
छत्तीसगढ़ विशेष के लिए नियमावली की यह पुस्तक बाजार के साथ-साथ अमेजन और जेम पोर्टल पर उपलब्ध होगा

गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल

रायपुर, 18 फरवरी 2026/ ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं। शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।

ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है

  रायपुर / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हर्बल गुलाल बनाने के लिए सब्जियों के प्राकृतिक रंगों से रंगकर और उसमें गुलाब गेंदा, पलाश के फूलों की पंखुड़ियों, गुलाब जल, इत्र आदि मिलाकर हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है। पलाश के फूलों से केसरिया गुलाल, पालक भाजी से हरे रंग का गुलाल तथा लाल भाजी से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जा रहा है। इस गुलाल में रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं होने से यह गुलाल त्वचा, आंख, बाल आदि के लिये हानिकारक नहीं है। मानव अनुकूल होने से इस हर्बल गुलाल को बिना किसी चिंता के होली के त्योहार में उपयोग किया जा सकता है।

बस्तर जिले में इस बार होली का त्यौहार न केवल रंगों भरा होगा, बल्कि सेहत और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिलाएं आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर गुलाल तैयार करना सीख रही हैं।

इस अनूठी पहल की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं अपनी रसोई और बाड़ी में मिलने वाली प्राकृतिक वस्तुओं जैसे पालक, लाल भाजी, चुकंदर और फूलों का उपयोग कर सतरंगी गुलाल तैयार करेंगी। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों और गुलाल में अक्सर हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जो त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान पहुँचाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए बिहान की दीदियां कॉर्न फ्लावर के आधार (बेस) में चुकंदर और भाजी के अर्क को मिलाकर पूरी तरह चर्म-रोग मुक्त और इको-फ्रेंडली गुलाल का उत्पादन करेंगी।

प्रशिक्षण के उपरांत महिलाओं ने इस वर्ष 500 किलो से लेकर एक हजार किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उत्पादित गुलाल की पहुंच जन-जन तक बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों और विभिन्न शासकीय कार्यालयों में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। साथ ही जनपद स्तर के स्थानीय बाजारों में भी इस शुद्ध देशी गुलाल का विक्रय किया जाएगा। बिहान से जुड़ी इन महिलाओं के लिए यह केवल रंग बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। इस प्रयास से न केवल बस्तर की महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी रसायनों के खतरे से दूर एक सुरक्षित और खुशहाल होली मनाने का विकल्प मिलेगा।

दुर्ग / शौर्यपथ / पटरी पार औद्योगिक नगर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नशाखोरी और आपराधिक गतिविधियों को लेकर नगर पालिका निगम दुर्ग के पार्षद देवनारायण चंद्राकर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने क्षेत्र में सघन पुलिस गश्त बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवेदन सौंपा।
लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने बताया कि मोहन नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पटरी पार के शक्ति नगर, शांति नगर, सिकोला भाटा, सिकोला बस्ती, कैलाश नगर चरला सहित कई वार्डों में गांजा, नशीली दवाओं और अवैध शराब का कारोबार बढ़ता जा रहा है। इससे युवा वर्ग और स्कूल जाने वाले बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शक्ति नगर तालाब के आसपास शाम से देर रात तक नशाखोरी और जुआ का जमावड़ा लगा रहता है। नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जिससे क्षेत्र में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में शक्ति नगर और शांति नगर में हुई गंभीर वारदातों के कारण आम नागरिकों में दहशत और असुरक्षा का माहौल है।
पार्षद ने एसएसपी से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित गश्त सुनिश्चित कर आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाए।

पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना और गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से "विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा" का शुभारंभ किया। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का "मनखे-मनखे एक समान" का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी। श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी।
कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढऩे का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी।
कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु श्री बालदास साहेब, विधायक श्री ललित चंद्राकर, विधायक श्री मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित "विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा" का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए

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