January 22, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

20 जनवरी से 5 फरवरी तक मेगा एक्सपो, प्रदेशभर के नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ के वाहन खरीदारों के लिए बड़ी सौगात के रूप में ऑटो एक्सपो–2026 का शुभारंभ 20 जनवरी से किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में यह मेगा ऑटो एक्सपो 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, सड्डू, रायपुर में आयोजित होगा।

इस अवधि में एक्सपो के अंतर्गत विक्रय होने वाले वाहनों पर 50 प्रतिशत जीवनकाल आरटीओ टैक्स में छूट प्रदान की जा रही है, जिससे आम नागरिकों को वाहन खरीदी पर उल्लेखनीय आर्थिक राहत मिलेगी। एक्सपो की खास बात यह है कि इसका लाभ प्रदेश के सभी जिलों के नागरिक अपने-अपने क्षेत्र के पंजीकृत डीलरों के माध्यम से भी ले सकेंगे और वाहन का पंजीयन अपने गृह जिले के आरटीओ कार्यालय में करा सकेंगे।

मेगा ऑटो एक्सपो में रायपुर सहित अन्य जिलों के कुल 266 डीलर्स भाग ले रहे हैं। साथ ही देश के प्रमुख बैंक, फाइनेंस एवं इंश्योरेंस कंपनियां कम ब्याज दरों पर ऋण एवं बीमा सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को एक ही मंच पर बेहतर विकल्प, नई तकनीक के वाहन और किफायती सौदे मिल सकेंगे।

 

दुर्ग / शौर्यपथ।
ग्राम चिंगरी में आयोजित शिव महापुराण कथा के षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावविभोर एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पावन कथा श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश एवं कार्तिकेय जन्म-विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ श्रद्धा और दिव्यता के शिखर पर पहुंचा।

कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की अमर लीला का अत्यंत रसपूर्ण, भावनात्मक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। सती के आत्मदाह के पश्चात माता पार्वती का हिमालय के घर जन्म, कठोर तपस्या द्वारा भगवान शिव को पुनः प्रसन्न करना तथा दिव्य विवाह का प्रसंग श्रोताओं को भाव-विभोर कर गया। विवाह अवसर पर हिमालय द्वारा कन्यादान, देवताओं की उपस्थिति और शिव-पार्वती के पावन मिलन ने प्रेम, तप और त्याग की अमर कथा को जीवंत कर दिया।

इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की मार्मिक कथा सुनाई गई। माता पार्वती द्वारा उबटन से निर्मित पुत्र गणेश का द्वारपाल बनना, शिव द्वारा अनजाने में उनका मस्तक विच्छेदन और पश्चात हाथी का मस्तक धारण कर पुनर्जीवन — इस प्रसंग ने माता की ममता और शिव की करुणा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। गणेश के विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य बनने का प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतर गया।

तत्पश्चात भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से उत्पन्न कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध और धर्म की विजय का प्रसंग शक्ति, साहस और धर्मरक्षा का प्रतीक बना।

समापन अवसर पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से भगवान शिव का अभिषेक किया। तदुपरांत तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद का वितरण हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से ग्रहण किया।

यह संपूर्ण आयोजन देवी इशर गौरा-गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मिक उन्नति, सुख-शांति एवं सामूहिक कल्याण रहा। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई और पूरा ग्राम ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय माता दी’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

शिव महापुराण कथा की यह पावन श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिसने जन-जन के हृदय में शिव-पार्वती भक्ति की अमिट छाप छोड़ दी।

   दुर्ग / शौर्यपथ / ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और समापन की दिव्यता से परिपूर्ण रहा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश जन्म, कार्तिकेय जन्म एवं विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिससे पूरा ग्राम शिव-पार्वती की कृपा से आलोकित हो उठा।
कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की महान लीला का रसपूर्ण वर्णन किया। सती के आत्मदाह के बाद माता पार्वती ने हिमालय के घर जन्म लिया और कठोर तप से भगवान शिव को पुनः प्रसन्न किया। विवाह अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ, जहां हिमालय ने कन्यादान किया, देवताओं ने उपस्थित होकर आशीर्वाद दिया और शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाया। यह कथा प्रेम, तपस्या और दिव्य मिलन की अमर गाथा है।
इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की कथा सुनाई गई। माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना पुत्र घोषित किया। जब भगवान शिव आए तो गणेश ने माता की आज्ञा से द्वार रक्षक बने, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया गया, और वे विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य बने। यह कथा माता की ममता और शिव की करुणा का प्रतीक है।
तत्पश्चात कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से व्यथित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से कार्तिकेय का जन्म हुआ। वे छह मुखों वाले, वीर योद्धा के रूप में प्रकट हुए और तारकासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की। बाद में उनका विवाह भी संपन्न हुआ, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
समापन पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से लिंग पूजा की। इसके बाद तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों और पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां दी गईं। पूजन पश्चात महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रामवासियों ने भक्ति-भाव से ग्रहण किया।
यह समस्त कार्यक्रम देवी इशर गौरा गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मोन्नति, सुख-शांति तथा पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति प्राप्ति था। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई, और पूरा ग्राम 'हर हर महादेव' तथा 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा।
यह शिव महापुराण कथा श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिससे सभी के हृदय में शिव-पार्वती की भक्ति स्थायी रूप से बस गई।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट । पूर्व महापौर पर नियम विरुद्ध आवंटन और अनियमितताओं के आरोप लगाने वाली वर्तमान महापौर श्रीमती अलका बाघमार के सामने अब वही मामला निर्णायक मोड़ पर…

 

राजनांदगांव /शौर्यपथ / कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर आधारित प्रख्यात साहित्यकार एवं केंद्रीय विद्यालय खैरागढ़ के हिंदी शिक्षक डॉ. योगेंद्र पांडेय के नवीनतम उपन्यास ‘यशस्विनी’ का विमोचन डॉ. प्रकाश खूंटे द्वारा किया गया। यह विमोचन हिंदी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

डॉ. योगेंद्र पांडेय निरंतर साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं। उनके अनेक उपन्यास, कहानियाँ एवं साहित्यिक रचनाएँ विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों तथा प्रतिष्ठित साहित्यिक प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और समकालीन विषयों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। नवीनतम उपन्यास ‘यशस्विनी’ कोरोना काल के कठिन समय में समाज, परिवार और व्यक्ति के संघर्ष, पीड़ा, धैर्य और आशा को संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करता है। यह कृति महामारी के दौर को साहित्य के माध्यम से सहेजने का एक सार्थक प्रयास है। उपन्यास का विमोचन करते हुए डॉ. प्रकाश खूंटे ने इसे समकालीन हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए आशा व्यक्त की कि यह उपन्यास पाठकों के बीच विशेष स्थान बनाएगा और समाज को आत्ममंथन की दिशा में प्रेरित करेगा।

छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों के लिए यह गर्व का विषय है कि वे अपनी भाषा और संस्कृति को शिखा की तरह प्रज्वलित रखते हुए हिंदी साहित्य को नई ऊर्जा, नई दिशा और नई पहचान प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल राज्य की साहित्यिक पहचान सशक्त होती है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा मिलती है। उपन्यास ‘यशस्विनी’ के प्रकाशन पर डॉ. योगेंद्र पांडेय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं तथा उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की गई।

चंद्रमा मकर राशि में, कर्म–अनुशासन से तय होगी सफलता 20 जनवरी 2026, मंगलवार। आज माघ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। चंद्रमा अपनी स्वराशि मकर…

आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर / आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले जिले मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी की ग्राम पंचायत करमरी में सोमवार को वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन- ग्रामीण) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का संदेश दिया गया। इस दौरान योजना के प्रति उत्साह और सामुदायिक सहभागिता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्ययोजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, वीबी-जी राम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
कार्यक्रम के दौरान हितग्राही श्री विनोद कुमार एवं श्री दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और
आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
कार्यक्रम में जिल पंचायत सीईओ श्रीमती भारती चंद्राकर,जनप्रतिनिधि श्री दिलीप वर्मा, पंचायत प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर की प्रशंसा
करमरी के इस कार्यक्रम की प्रशंसा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट द्वारा करते हुए कार्यक्रम के फोटोग्राफ्स और वीडियो को भी शेयर किया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में उत्कृष्ट क्रियान्वयन पर मिला राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर ।
छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित करते हुए कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के उत्कृष्ट और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। इस उपलब्धि के लिए उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान बेंगलुरु (कर्नाटक) में 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित 13वें नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस के दौरान प्रदान किया गया। सम्मेलन में देशभर के राज्यों द्वारा फसल बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ पाया गया।

राज्य सरकार की इस उल्लेखनीय सफलता पर मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री ने उद्यानिकी एवं कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देते हुए इसे राज्य के किसानों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है।

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की ओर से उद्यानिकी विभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक श्री नीरज शाहा ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के मार्गदर्शन और विभागीय टीम के सामूहिक प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी है।

यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल राज्य सरकार की कृषि नीतियों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि छत्तीसगढ़ किसानों की सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और आय स्थिरता के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।

रायपुर, /
बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है l यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है l सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि तथा आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  दुर्ग, / महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 एवं शी-बॉक्स पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन 19 जनवरी 2026 को शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग एवं छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में किया गया।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रत्येक कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति एवं जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति के गठन की अनिवार्यता की जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी महिला के साथ कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की स्थिति में वह संबंधित कार्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष या शी-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती है। साथ ही समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शिकायत प्राप्त होने पर की जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी शासकीय एवं निजी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही सभी कार्यालयों को अपनी आंतरिक शिकायत समिति को शी-बॉक्स पोर्टल पर ऑनबोर्ड करने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल विवाह प्रतिषेध, सखी वन स्टॉप सेंटर एवं महिला सशक्तिकरण केंद्र की योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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