September 21, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक बंद रहेंगे प्रतिष्ठान, चंदा वसूली में दबाव और मारपीट के आरोप; व्यापारियों का दो टूक—चंदा देंगे तो स्वेच्छा से

    बिलासपुर। शहर में कथित जबरिया चंदा वसूली को लेकर व्यापारियों का आक्रोश अब सामूहिक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। चंदा वसूली के नाम पर दबाव, धमकी और मारपीट किए जाने के आरोपों के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। इस दौरान शहर के व्यापारी अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर जबरिया चंदाखोरी के खिलाफ एकजुटता का संदेश देंगे।

    कैट के राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नवदीप सिंह अरोरा ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा के दौरान बंद की घोषणा की। व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शहर में चंदा वसूली के नाम पर कुछ लोगों द्वारा व्यापारियों पर कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर विवाद और मारपीट की स्थिति बनने की बात भी व्यापारियों ने कही।

    व्यापारियों के अनुसार, कुछ मामलों में विवाद इतना बढ़ा कि कथित चंदा वसूली करने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर तक दर्ज कराने की स्थिति बनी। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी सामाजिक, धार्मिक अथवा अन्य आयोजन के लिए व्यापारी सहयोग करना चाहता है तो वह उसकी इच्छा और सामर्थ्य पर निर्भर होना चाहिए।

    चंदा देना है तो स्वेच्छा से, दबाव में नहीं

    व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में स्वेच्छा से सहयोग करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध दुकान-दुकान पहुंचकर कथित दबाव बनाकर चंदा वसूलने की प्रवृत्ति से है।

    व्यापारियों का कहना है कि सहयोग मांगना अलग बात है, लेकिन किसी व्यापारी की इच्छा के विरुद्ध दबाव बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कैट और चेंबर की स्थानीय इकाई ने इस मुद्दे को संगठित रूप से उठाने का निर्णय लिया है।

    व्यापारिक संगठनों का कहना है कि मामले की जानकारी प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी दी जाएगी, ताकि चंदा वसूली को लेकर उत्पन्न हो रहे विवादों और कथित दबाव की स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

    बंद के जरिए देंगे एकजुटता का संदेश

    23 सितंबर का प्रस्तावित बाजार बंद केवल प्रतिष्ठान बंद रखने तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापारियों की सामूहिक एकजुटता का संदेश देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से व्यापारी अलग-अलग स्तर पर इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने का निर्णय लिया गया है।

    व्यापारियों ने दो टूक कहा कि सहयोग करना है तो अपनी इच्छा से करेंगे, लेकिन दबाव या कथित जबरिया वसूली के आधार पर चंदा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    शौर्यपथ विशेष दुर्ग। नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना निश्चित रूप से…
    मछली पकड़ने गए दो युवकों का दावा—पहले गांजा पीने को कहा, मना किया तो लौटकर कनपटी पर बंदूक टिकाई और चाकू से किया हमला; नकदी, मोबाइल और बाइक की चाबी…

    गुंडरदेही*शौर्यपथ 

    ग्राम सरेखा की एक महिला सिकोसा उपस्वास्थ केंद्र स्वास्थ्य कार्यकर्ता पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि बिना सहमति के दवा देने से गर्भ में ही उसके बच्चे की मौत हो गई।

    पीड़िता निशा ने बताया कि उसे पिछले 10-15 दिनों से प्रसव पीड़ा जैसा दर्द हो रहा था। 11 सितंबर शुक्रवार को परिजनों ने जांच के लिए उपस्वास्थ केंद्र सिकोसा लेकर गयी l

    निशा का आरोप है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता नाम सरस्वती साहू साहू बताया जारहा है जिसने परिजनों से बिना पूछे ही उसे दवा दे दी और कहा कि 15 मिनट में डिलीवरी हो जाएगी, और गुंडरदेही लेकर जाओगे तो गाड़ी में ही बच्चा आ जाएगा। जिससे परिवार घबरा गया और अस्पताल नहीं जा पाया। करीब 3 घंटे तक तेज दर्द होता रहा। इसके बाद जब परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो जांच में डॉक्टरों ने बताया कि अभी प्रसव का समय नहीं है। तीन बार जांच के बाद जब अंतिम बार हार्टबीट चेक किया गया तो पता चला कि बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी है।

    पीड़िता ने मीडिया के सामने रोते हुए कहा कि गांव में इस तरह के 7 से 10 मामले पहले भी हो चुके हैं। उसने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य महिला के साथ ऐसी घटना न हो। इस सम्बन्ध मे खंड चिकित्सा अधिकारी सत्येंद्र कुमार मारकंडे ने बताया कि जांच चल रहा है जाँच प्रतिवेदन उच्चअधिकारी को भेज दिया है कार्यवाही की जाएगी

    दल्ली राजहरा में श्रमदान के साथ स्वच्छता अभियान, नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक

    दल्ली राजहरा। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर दल्ली राजहरा के वार्ड क्रमांक 13 में पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान में पर्यावरण प्रेमियों ने श्रमदान कर क्षेत्र की साफ-सफाई की तथा नागरिकों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    अभियान के दौरान स्थानीय नागरिकों को ओजोन परत के महत्व, उसके संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के संबंध में जागरूक किया गया। पर्यावरण प्रेमियों ने लोगों से पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने और प्रकृति के संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

    छोटे प्रयासों से बढ़ेगी बड़ी पर्यावरणीय जागरूकता

    इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू ने कहा कि आज आवश्यकता केवल बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की नहीं, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे जन-जागरूकता अभियानों की है, जिनके माध्यम से लोगों से सीधे संपर्क कर उन्हें पर्यावरण और ओजोन परत के महत्व की जानकारी दी जा सके।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण, जिम्मेदार उपभोग और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक को अपनाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। अनावश्यक ऊर्जा खपत को कम करना, पुराने एसी एवं रेफ्रिजरेटर का जिम्मेदारीपूर्वक निपटान करना, पर्यावरण-अनुकूल उपकरणों को प्राथमिकता देना, पेड़-पौधों की रक्षा करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि ओजोन संरक्षण को केवल वैज्ञानिकों या सरकार की जिम्मेदारी मानने के बजाय प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

    ‘ओजोन की रक्षा, सुरक्षित भविष्य’ का संकल्प

    अभियान में ओजोन परत को पृथ्वी की प्राकृतिक सुरक्षा ढाल बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि ओजोन परत की रक्षा मानव जीवन, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने लोगों से केवल विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर ही नहीं, बल्कि वर्षभर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।

    इन पर्यावरण प्रेमियों ने किया श्रमदान

    अभियान में प्रदीप साहू, टिकेश्वर साहू, राजकुमार साहू, ताराचन्द रावटे, चेलाराम निर्मलकर, कौशल साहू, लोकेंद्र देवांगन, हेमशंकर, त्रिलोचन यादव एवं झंकार भारद्वाज ने श्रमदान किया।

    हमारा संकल्प

    “ओजोन की रक्षा करेंगे,

    पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे,

    प्रदूषण कम करेंगे,

    पेड़-पौधों की रक्षा करेंगे

    और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ पृथ्वी छोड़ेंगे।”

    करोड़ों के कामों में बार-बार एक ही समूह की हिस्सेदारी पर उठे सवाल, दूसरे ठेकेदारों की कड़ी जांच तो आरबीएस के कामों पर निगम की खामोशी क्यों?

    दुर्ग। नगर निगम में निर्माण कार्यों को लेकर महापौर अलका बाघमार लगातार सक्रिय नजर आ रही हैं। कहीं सड़क और पेवर ब्लॉक के निर्माण में बेस की जांच हो रही है तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को डांट-फटकार लगाई जा रही है। लेकिन इसी बीच निगम में काम पाने वाले आरबीएस ग्रुप को लेकर ठेकेदारों और निगम से जुड़े लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं।

    चर्चा का मुख्य विषय यह है कि महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में आरबीएस ग्रुप को नगर निगम के निर्माण कार्यों में लगातार काम मिलने की स्थिति क्यों बनी? निगम की निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद यदि अन्य ठेकेदार दस्तावेजी जांच में अपात्र होते हैं और किसी विशेष समूह को लगातार काम मिलता है, तो इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के दायरे में क्यों नहीं लाई जानी चाहिए?

    तीन-चार करोड़ के काम में आधे काम का दावा—क्या है वास्तविकता?

    निगम से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि यदि किसी अवधि में लगभग तीन से चार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य निकलते हैं तो उनमें बड़ी हिस्सेदारी आरबीएस ग्रुप को मिल रही है। हालांकि इस दावे की वास्तविकता निगम के टेंडर रिकॉर्ड, वर्क ऑर्डर और भुगतान विवरण से ही स्पष्ट हो सकती है।

    यदि आंकड़े इस दावे की पुष्टि करते हैं तो सवाल केवल आरबीएस ग्रुप को काम मिलने का नहीं, बल्कि यह भी होगा कि अन्य वर्षों से निगम में काम कर रहे अनुभवी ठेकेदारों को समान अवसर मिल रहा है या नहीं।

    पोस्टरबाजी और ठेकेदारी का संयोग बना चर्चा का विषय

    महापौर अलका बाघमार के जन्मदिन के दौरान शहर में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए बधाई पोस्टरों ने भी निगम की ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया। जनप्रतिनिधि को जन्मदिन की शुभकामना देना अपने आप में कोई गलत बात नहीं है, लेकिन यदि उसी अवधि में संबंधित ठेकेदारों को बड़ी संख्या में निगम के काम मिलते हैं तो क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?

    इसका जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि निगम के निविदा रिकॉर्ड और ठेकेदारवार कार्य आवंटन के आंकड़ों से मिल सकता है।

    वार्ड 17-18 की नाली ने खड़ा किया गुणवत्ता का बड़ा सवाल

    सबसे गंभीर सवाल वार्ड क्रमांक 17-18 में हुए नाली निर्माण को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि निर्माण में सरिया निर्धारित मानक के अनुरूप लगभग 8 इंच की दूरी पर लगाए जाने के बजाय करीब एक फीट की दूरी पर लगाया गया।

    यदि निर्माण स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के विपरीत हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच होना आवश्यक है। खासकर तब, जब महापौर स्वयं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच को लेकर सक्रिय दिखाई देती हैं।

    अब सवाल यह है कि क्या इस नाली के निर्माण की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (MB), स्वीकृत ड्राइंग, एस्टीमेट और भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी? क्या आवश्यकता पड़ने पर निर्माण को खोलकर वास्तविक स्थिति की जांच होगी?

    दूसरों के काम में सख्ती, आरबीएस के काम में भी वही पैमाना लागू होगा?

    महापौर द्वारा पेवर ब्लॉक के नीचे बेस की जांच करना और निर्माण गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को जवाबदेह बनाना स्वागत योग्य प्रशासनिक कदम हो सकता है। लेकिन इसी कसौटी को निगम के प्रत्येक ठेकेदार और प्रत्येक निर्माण पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

    यही वह बिंदु है जहां आरबीएस ग्रुप से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़ा होता है—क्या निगम प्रशासन आरबीएस के कार्यों की भी उसी कठोरता से जांच करेगा, जिस तरह अन्य ठेकेदारों के कार्यों की जांच की जा रही है?

    कसारीडीह नाला और सुराना कॉलेज का पाथवे भी सवालों में

    दुर्ग शहर में निर्माण कार्यों की संख्या भले ही बढ़ती दिखाई दे रही हो, लेकिन कई पुराने काम अब भी अधूरे हैं। कसारीडीह का नाला लंबे समय से पूर्णता की प्रतीक्षा में है। वहीं वर्ष 2024 में सुराना कॉलेज के सामने पाथवे पार्क का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ था, लेकिन उसके पूर्ण होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

    दूसरी ओर शहर की कई सड़कों पर गड्ढे अब भी नागरिकों के लिए परेशानी का कारण हैं। ऐसे में केवल नए निर्माणों की संख्या नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और पूर्णता भी निगम की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।

    अब सवाल महापौर से नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता से है

    नगर निगम में ठेकेदारी व्यवस्था पारदर्शी है तो फिर ठेकेदारवार कितने काम मिले, कितनी राशि के मिले, कितने काम पूरे हुए और कितने कार्यों में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आईं—इनका पूरा विवरण सार्वजनिक करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

    यदि आरबीएस ग्रुप को लगातार काम मिलना पूरी तरह निविदा नियमों और तकनीकी पात्रता के आधार पर हुआ है तो दस्तावेज स्वयं सारी चर्चाओं का जवाब दे सकते हैं।

    और यदि किसी निर्माण में वास्तव में तकनीकी मानकों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होना चाहिए।

    जनता का सवाल सीधा है—निगम की जांच व्यवस्था क्या सभी ठेकेदारों के लिए समान है?

    क्या पोस्टर लगाने वाला ठेकेदार हो या पोस्टर से दूरी रखने वाला—दोनों के निर्माण कार्यों की जांच एक ही पैमाने से होगी?

    अब वार्ड 17-18 की नाली से लेकर आरबीएस ग्रुप को मिले कार्यों तक, निष्पक्ष तकनीकी जांच ही तय करेगी कि चर्चाओं में कितना तथ्य है और कितना भ्रम।

    पसरा लगाने वालों पर कार्रवाई, लेकिन अनमोल ज्वेलर्स के कथित अतिक्रमण पर मौन क्यों? — बाजार व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन से जवाब की मांग दुर्ग। शहर के सबसे व्यस्त…

    ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन-2026’ की ट्रॉफी का अनावरण, 132 प्रोफेशनल गोल्फर ले रहे हिस्सा

    रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से देश के प्रमुख स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। नवा रायपुर में आयोजित ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन-2026’ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनेगा और प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर स्थित फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब रिजॉर्ट में प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण किया। इस अवसर पर 1983 विश्वकप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एवं पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने स्वयं गोल्फ खेलकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

    प्रतियोगिता में देश-विदेश के 132 प्रोफेशनल गोल्फर, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं, हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने बड़े स्तर के आयोजन से प्रदेश की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी, खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। उन्होंने गोल्फ के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

    खेल अधोसंरचना का हो रहा विस्तार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ की भावना के अनुरूप प्रदेश में विभिन्न खेलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और नेशनल ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच दिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के साथ युवाओं को खेलों के माध्यम से आगे बढ़ने के नए अवसर मिल रहे हैं। क्रिकेट, हॉकी, तीरंदाजी और एथलेटिक्स के साथ अब गोल्फ के बड़े आयोजन प्रदेश की खेल यात्रा को नया आयाम दे रहे हैं।

    खिलाड़ियों को बस्तर-सरगुजा आने का न्योता

    मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए गोल्फ खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए उन्हें प्रतियोगिता के साथ बस्तर और सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता एवं जनजातीय संस्कृति देखने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी छत्तीसगढ़ से टूर्नामेंट की यादों के साथ यहां के आतिथ्य और प्राकृतिक सौंदर्य की स्मृतियां भी लेकर लौटें।

    हर साल हो गोल्फ टूर्नामेंट : कपिल देव

    पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव ने आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन खेल संस्कृति और नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि छत्तीसगढ़ में यह प्रतियोगिता हर वर्ष आयोजित हो और इसकी तारीखें पहले से तय की जाएं, ताकि देश-विदेश के खिलाड़ी अपने कैलेंडर के अनुसार यहां आने की योजना बना सकें।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का वातावरण गोल्फ के लिए अनुकूल है और आने वाले समय में दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता की तरह छत्तीसगढ़ भी देश के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना सकता है।

    पीजीटीआई के सीईओ अमनदीप चहल ने भी छत्तीसगढ़ की व्यवस्थाओं और आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यहां आने वाले खिलाड़ी दोबारा खेलने की इच्छा व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पर्यटन और अन्य खेलों के साथ उभरते गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में भी पहचान बना रहा है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने टीम के साथ राज्य की ओर से की भागीदारी

      रायपुर / शौर्यपथ / गुजरात के गांधीनगर में आयोजित 10वें वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF 2026) में छत्तीसगढ़ ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के नेतृत्व में राज्य से गई टीम ने फोरम में शामिल होकर सर्कुलर इकोनॉमी, संसाधन दक्षता और कचरे को संसाधन में बदलने के आधुनिक समाधानों पर वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। राज्य शहरी विकास अभिकरण के सीईओ सुमीत अग्रवाल भी प्रतिनिधि मंडल में शामिल हैं।
    राज्य की टीम के प्रमुख श्री बोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के अधिकतम उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य का प्रयास है कि नवाचार और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कचरे का बेहतर प्रबंधन करते हुए उसे उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जाए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छ, मजबूत और टिकाऊ शहरों के निर्माण को गति मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में राज्य की पहल और मजबूत होगी।
    फोरम में दुनिया के विभिन्न देशों के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नवाचारी तकनीक विकसित करने वाले संस्थान और क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने, संसाधनों के बेहतर उपयोग, टिकाऊ उत्पादन एवं उपभोग तथा वेस्ट-टू-रिसोर्स जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

    राज्य की टीम ने प्रदर्शनी केंद्रों का किया अवलोकन
    छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने फोरम के दौरान प्रदर्शनी केंद्रों का भी अवलोकन किया। यहां रिसाइक्लिंग, संसाधनों की रिकवरी, कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार करने, टिकाऊ सामग्री तथा सर्कुलर बिजनेस मॉडल से जुड़ी नवीन तकनीकों और समाधानों को प्रदर्शित किया गया था। टीम ने इन तकनीकों और मॉडलों के जरिए कचरे को बोझ के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की संभावनाओं को समझा।

    छत्तीसगढ़ के शहरी विकास के लिए उपयोगी समाधानों की तलाश
    विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में सहभागिता के दौरान राज्य की टीम को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को समझने तथा छत्तीसगढ़ के शहरी विकास और अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र के लिए उपयोगी नवाचारों की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला। इनमें विशेष रूप से संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और वेस्ट-टू-वैल्यू से जुड़े समाधानों पर फोकस रहा।

    एनएसटीआई से मिलेगी कौशल को नई पहचान, 45 वर्ष की आयु सीमा से अनुभव को लाभ-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में अवसरों का विस्तार

    रायुपर / छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय तक ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है। खेतों में लहलहाती फसलें प्रदेश की समृद्धि की कहानी कहती हैं, लेकिन बदलते समय के साथ छत्तीसगढ़ ने विकास की अपनी यात्रा में नए आयाम जोड़े हैं। अब कृषि के साथ उद्योग, तकनीक के साथ कौशल और रोजगार के साथ उद्यमिता भी प्रदेश की नई पहचान बन रही है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत प्रदेश के युवा और अनुभवी मानव संसाधन हैं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद के हालिया निर्णय इसी सोच को आगे बढ़ाते दिखाई देते हैं। एक ओर नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआई) की स्थापना होने से युवाओं को आधुनिक कौशल का मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विभिन्न शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किया जाना अनुभव और क्षमता को नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय है।

    सपनों को डिग्री के साथ हुनर भी चाहिए

    आज का युवा केवल शिक्षा नहीं, रोजगारपरक कौशल चाहता है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के बीच ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व बढ़ गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्राम तेंदुवा में एनएसटीआई की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

    करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं होंगी। यहां दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष करीब एक हजार तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। हजारों युवाओं के सपनों से जुड़ा अवसर है। इससे कोई तकनीकी कौशल हासिल करेगा, कोई उद्योग से जुड़ेगा, तो कोई अपना उद्यम शुरू कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

    कौशल से रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह

    एनएसटीआई की स्थापना होने से युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। आज कौशल केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की क्षमता है। गांव और कस्बे के युवा को भी उद्यमशील बनने का अवसर मिलेगा। एक प्रशिक्षित युवा नौकरी तलाशने वाला बनने के साथ नौकरी देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। यही कौशल से उद्यमिता और रोजगार से आत्मनिर्भरता की यात्रा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के युवाओं से अक्सर कहते हैं कि ऐसा कार्य करें जो युवाओं को रोजगार देने वाला बने, ताकि उनकी नई पहचान बन सके।

    उम्र बढ़ी तो अवसरों का दायरा भी बढ़ा

    अधिकतम आयु सीमा को 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष करने का निर्णय उन लोगों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है, जिनके पास अनुभव, कार्यकुशलता और जिम्मेदारियों का व्यावहारिक ज्ञान है। उम्र बढ़ने के साथ अनुभव बढ़ता है और अनुभव किसी भी व्यवस्था की महत्वपूर्ण पूंजी है। वर्षों तक काम कर चुके लोगों ने व्यवस्था को करीब से समझा है और चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे अनुभव का बेहतर उपयोग नई जिम्मेदारियों में किया जाना संस्थाओं को अधिक सक्षम बना सकता है।

    युवा ऊर्जा और अनुभवी हाथ साथ चलें

    विकास की मजबूत तस्वीर तब बनती है, जब युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच साथ आती है। युवा नई तकनीक और नए विचार लाते हैं, जबकि अनुभवी वर्ग व्यावहारिक समझ और परिस्थितियों से निपटने का अनुभव देता है। एनएसटीआई युवाओं के हुनर को मंच देगा, तो आयु सीमा में वृद्धि अनुभवी वर्ग की क्षमता को अवसर। दोनों निर्णय मिलकर प्रदेश की मानव पूंजी को मजबूत करने की दिशा दिखाते हैं।

    छत्तीसगढ़ का भविष्य केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि उसके लोगों की क्षमता से तय होगा। जब हुनर को मंच, अनुभव को अवसर और सपनों को सही दिशा मिलेगी, तब विकास आंकड़ों से निकलकर लोगों की जिंदगी में दिखाई देगा। यही नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर है, जहां कौशल से रोजगार, अनुभव से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता की राह तैयार हो रही है। इसी तरह के निर्णयों से छत्तीसगढ़ सरकार सेवा करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
    साभार - (एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

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