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May 11, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

गुण्डरदेही। नगर पंचायत गुण्डरदेही में आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए 'सुशासन तिहार' की शुरुआत की गई है। इसके तहत 1 मई से 13 मई तक नगर पंचायत कार्यालय में आवेदन लिए जा रहे हैं।अभी तक 25 आवेदन विभिन्न वार्डों से प्राप्त हुए है नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने नगर के सभी पार्षदों और नागरिकों से इस अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है 

आवेदन करने की तिथि: 1 मई से 13 मई तक

समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक

*आवेदन की प्रक्रिया और कार्य*

नगर के नागरिक और पार्षद अपने वार्ड से जुड़ी समस्याओं का लिखित आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके बाद की प्रक्रिया और संबंधित सेवाओं का विवरण इस प्रकार है:

*डिजिटलीकरण और प्रेषण:*- प्राप्त सभी आवेदनों को ऑनलाइन दर्ज कर संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।

*संबंधित विभाग:* राशन कार्ड, भवन अनुमति, जन्म प्रमाण पत्र एवं विकास कार्यों से जुड़े आवेदनों को शासन के पास भेजा जाएगा और शिविर के दौरान त्वरित निराकरण का प्रयास किया जाएगा।

*अधिकारियों की उपस्थिति:* 14 मई को आयोजित होने वाले जन समस्या निवारण शिविर में सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहेंगे ताकि मौके पर ही समस्याओं का समाधान किया जा सके।

*नगर पंचायत अध्यक्ष की अपील*

नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने अपील की है कि सभी नगरवासी और पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए आगे आएं और अपने आवेदन जमा करें। यह पहल आमजन की समस्याओं को सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और उन्हें सुलझाने का एक बेहतरीन अवसर है।

 शौर्यपथ लेख / यूक्रेन में जारी युद्ध के खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिखने और मध्य-पूर्व के 'न युद्ध, न शांति' के दलदल में फंसे होने के बावजूद, हाल के समय के दूसरे संघर्षों के मुकाबले 'ऑपरेशन सिंदूर' को एक मानक अभियान के तौर पर देखना महत्वपूर्ण है। 'ऑपरेशन सिंदूर' की सबसे खास बातें थीं— सैन्य ताकत का तीव्र और नियंत्रित तरीके से निर्णायक इस्तेमाल, ताकि प्रबंधन करने योग्य संघर्ष-विस्तार में रहते हुए ऐसे रणनीतिक नतीजे हासिल किए जा सकें, जिनकी 'बाहर निकलने की रणनीति' स्पष्ट हो और जो मोदी सरकार के राजनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप हों। इस संघर्ष की शुरुआत का उद्देश्य था - पाकिस्तान के भारत-विरोधी आतंकवादी नेटवर्क के गढ़ पर सीधा हमला करना और अगर पाकिस्तान की सेना भारत के शुरुआती आतंकवाद-रोधी हमले का सैन्य जवाब देती है, तो उसे भारी नुकसान पहुंचाना। ये ऐसे बड़े लक्ष्य नहीं थे, जिनके लिए बहुत बड़े पैमाने पर और हर तरफ सैन्य ताकत के इस्तेमाल की ज़रूरत पड़ती। यह एक ज़िम्मेदार ताकत द्वारा, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के बार-बार दोहराए जाने वाले कृत्यों को सज़ा देने के लिए चलाया गया एक सटीक, सक्रिय और संयमित प्रतिरोधी अभियान था।
हालांकि भारत ने 2019 में बालाकोट में आतंकवाद-रोधी अभियानों में आक्रामक हवाई शक्ति के इस्तेमाल का प्रयोग किया था, लेकिन इस बार जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों पर—जो क्रमशः बहावलपुर और मुरीदके में स्थित हैं—हमला करने की उसकी तत्परता ने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए जोखिम उठाने की एक नई प्रवृत्ति और संघर्ष को बढ़ाने की इच्छाशक्ति को उजागर किया। फिर भी, राजनीतिक स्तर पर सोच में पूरी स्पष्टता थी कि एक व्यापक संघर्ष भारत के हित में नहीं है, भले ही पाकिस्तान की सैन्य परिसंपत्तियों को और अधिक नुकसान पहुँचाने का सैन्य प्रलोभन मौजूद था।
समझदारी और संयम, ज़िम्मेदार राज-काज और सैन्य अभियानों के दो ऐसे साथ-साथ चलने वाले पहलू हैं, जिन्हें भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अच्छी तरह प्रदर्शित किया; खासकर इस मामले में कि उसने अपने हमलों के दौरान कोई भी अतिरिक्त नुकसान नहीं होने दिया और सैन्य श्रेष्ठता होने के बावजूद पाकिस्तान के युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अब पीछे मुड़कर देखने पर, एक लंबे और बड़े संघर्ष से मिलने वाले फ़ायदे, उसके संभावित आर्थिक और मानवीय नुकसानों के मुकाबले बहुत ही मामूली लगते हैं। चार दिनों के भीतर ही संघर्ष को समाप्त कर देने से जो सैकड़ों करोड़ रुपये की बचत हुई, उसने मध्य-पूर्व में चल रहे मौजूदा संघर्ष के दौरान भारत की आर्थिक सहनीयता में योगदान दिया है। दूसरी ओर, मध्य-पूर्व के संघर्ष में अमेरिका के 27 अरब डॉलर से भी ज़्यादा खर्च हो चुके हैं और इस संघर्ष का कोई अंत भी नज़र नहीं आ रहा है।
भारत के मौजूदा उच्च रक्षा संगठन ने संघर्ष के दौरान अच्छी तरह काम किया। ऑपरेशन के नीति-निर्माण और तैयारी के चरण में 'केंद्रीकृत और निर्देशात्मक नियंत्रण' का एक स्पष्ट मॉडल देखने को मिला; इसके पहले स्तर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा मंत्री थे, जबकि दूसरे स्तर पर सीडीएस और तीनों सेना के प्रमुख इसे समर्थन दे रहे थे। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि सेना प्रमुखों और खुफिया एजेंसियों को स्पष्ट और ठोस रणनीतिक परिणाम बताए गए थे, जिसके बाद उन्हें एक व्यावहारिक 'कार्ययोजना’ तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी।
भले ही हज़ारों सालों में युद्ध के स्वरूप में कई बदलाव आए हों, लेकिन कौटिल्य, सुन त्ज़ू, क्लॉज़विट्ज़ और लिडेल हार्ट जैसे प्राचीन और आधुनिक रणनीतिकारों द्वारा बताए गए युद्ध के अधिकांश मूल सिद्धांत समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन सिंदूर' की भारत की सफलता ने तनाव बढ़ाने और प्रतिरोध करने की सीमाओं का विस्तार किया, भारत ऐसा इसलिए कर पाया क्योंकि इसने समय की कसौटी पर खरे उतरे युद्ध के कुछ सिद्धांतों और संकट के समय फ़ैसले लेने के तरीकों का पालन किया। इनमें से, लक्ष्य का चयन और उसे बनाए रखना, शक्ति का केंद्रीकरण, आक्रामक कार्रवाई, अचानक हमला, कमान की एकता, सुरक्षा, सरलता, मनोबल और अनुकूलनशीलता ऐसे सिद्धांत हैं, जिन पर और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
परिचालन स्तर पर, भारत की उभरती हुई बहु-क्षेत्रीय सैन्य रणनीति के 'तलवार' के रूप में आईएएफ का इस्तेमाल करने का फ़ैसला एक साहसी कदम था, जो आज के दौर के संघर्षों के बदलते स्वरूप को दिखाता है और जिस पर बारीकी से नज़र रखने और विश्लेषण करने की ज़रूरत है। पाकिस्तान की चीन से मिली वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने और उन्हें जाम करने के बाद, भारत ने 7 मई को पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में घुसकर हमला किया। इस हमले में पाकिस्तान और पीओजेके में मौजूद 9 अहम आतंकवादी ठिकाने तबाह हो गए, और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख केंद्र नष्ट हो गए। 10 मई को, कुछ ही घंटों के भीतर, भारत ने अपने हमले का दायरा और बढ़ाया तथा 11 प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान एयरबेस, रफ़ीक़ी एयरबेस, मुरीद एयरबेस, सुक्कुर एयरबेस, सियालकोट एयरबेस, पसरूर एयरबेस, चुनियां एयरबेस, सरगोधा एयरबेस, स्कार्दू एयरबेस, भोलारी एयरबेस और जैकोबाबाद एयरबेस शामिल थे। इस कार्रवाई से पाकिस्तान की हवाई और युद्ध संबंधी क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुँचा। आईएएफ की हवाई हमलों की तीव्रता से यह ज़ाहिर हो गया है कि इन हवाई अड्डों, विमानों और वहाँ तैनात हथियार प्रणालियों को पहुँचाया गया नुकसान, 1971 के युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर आईएएफ द्वारा पीएएफ के हवाई अड्डों को पहुँचाए गए कुल नुकसान से कहीं ज़्यादा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली की परिपक्वता को भी साबित कर दिया, जो दुश्मन की मिसाइल और ड्रोन-केंद्रित रणनीति का मुक़ाबला करने में सक्षम है। हालाँकि, आईएएफ को भविष्य में, अधिक शक्तिशाली दुश्मनों के ख़िलाफ़ किसी भी सीमित संघर्ष की स्थिति में अपने प्लेटफ़ॉर्म, हथियारों और प्रणालियों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए, तेज़ गति से लगातार सीखते रहने की आवश्यकता होगी।
भविष्य के युद्ध-क्षेत्रों में, लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों का सामना करने के लिए, ज़्यादा एकीकरण और तालमेल की ज़रूरत होगी। वर्तमान में चल रहे सुधारों और संरचनात्मक पहलों पर शायद फिर से विचार करना पड़े, ताकि एक ऐसा संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जा सके जो 'भारत-विशिष्ट' हो और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सीखे गए अनुभवों पर आधारित हो। हालांकि, दुनिया भर में चल रहे संघर्षों से कई रणनीतिक और परिचालन संबंधी सबक मिलते हैं, लेकिन भारत को दूसरी जगहों से युद्ध-लड़ाई के मॉडल उठाने और उन्हें अपने रणनीतिक और परिचालन वातावरण पर लागू करने के प्रति सावधान रहना चाहिए। उदाहरण के लिए, हवाई परिचालन में मिसाइल और ड्रोन पर ज़्यादा ज़ोर देने के समर्थकों को अपने विचार पर फिर से सोचना चाहिए। भारत के पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों पर जैसा हवाई माहौल है, जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते हैं, वहाँ सिर्फ़ 'बहु-क्षेत्रीय परिचालन' ही सफल होंगे।
भारत के सशस्त्र बलों ने एक जटिल युद्धक्षेत्र के माहौल में खुद को साबित किया है—भले ही सीमित पैमाने पर —जिसने उन्हें कई तरह के ऑपरेशन चलाने और सरकार द्वारा तय किए गए राष्ट्र के सर्वोत्तम हितों के अनुसार, सही समय पर पीछे हटने का अवसर दिया। भारत के रणनीतिक और राष्ट्रीय डीएनए में अलग-अलग पहलू शामिल हैं, जो 21वीं सदी में अब तक राजनीतिक सोच और रणनीतिक अभिव्यक्तियों के संयोजन के रूप में सामने आए हैं। ज़िम्मेदारी और संयम के साथ सक्रिय प्रतिरोध की नींव पर निर्मित 'संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण' की ओर एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिला है। 'ऑपरेशन सिंदूर' इसी धीरे-धीरे उभरते डीएनए की अभिव्यक्ति था।
**साभार -एयर वाइस मार्शल (डॉ.) अर्जुन सुब्रमण्यम (सेवानिवृत्त)
(लेखक एक सैन्य इतिहासकार और रणनीतिक विश्लेषक हैं। वे नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में 'राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में राष्ट्रपति उत्कृष्टता पीठ' के पूर्व अध्यक्ष हैं। वर्तमान में वे कौटिल्य स्कूल ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी में सहायक संकाय सदस्य हैं और भारत के सभी युद्ध महाविद्यालयों में अतिथि संकाय के रूप में कार्यरत हैं।)

डौंडी | शौर्यपथ समाचार

बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत चोरहापड़ाव रेलवे ट्रैक पर एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक प्रेमी जोड़े ने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय नाबालिग युवती और 20 वर्षीय युवक बीते दिन से लापता थे। आज सुबह लगभग 4 बजे दल्लीराजहरा से भानुप्रतापपुर की ओर जा रही ट्रेन के सामने दोनों ने कथित तौर पर आत्मघाती कदम उठा लिया।

घटना की सूचना मिलते ही डौंडी पुलिस एवं रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल से एक मोटरसाइकिल भी जब्त की है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि दोनों साथ में वहां पहुंचे थे।

मृतकों की पहचान लिलिसा उइके (16 वर्ष), निवासी साल्हे गांव, विकासखंड डौंडी, और जितेश्वर तारम (20 वर्ष), निवासी कुम्हालोरी गांव के रूप में हुई है।

पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

घटना ने एक बार फिर युवा वर्ग में बढ़ते भावनात्मक दबाव और सामाजिक संवेदनशीलता के मुद्दे को उजागर किया है। प्रशासन द्वारा परिजनों से पूछताछ कर घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

कवर्धा/कबीरधाम | शौर्यपथ समाचार | ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता

कबीरधाम पुलिस ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए एक अज्ञात मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की सराहनीय पहल की है। पुलिस की तत्परता और संवेदनशील कार्रवाई के चलते महिला को अब उचित देखभाल और इलाज मिल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 2 मई को थाना कोतवाली को सूचना मिली कि ग्राम डबराभाट में लगभग 25 से 30 वर्ष की एक महिला, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही थी, गांव में इधर-उधर भटक रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वह अपना नाम और पता बताने में असमर्थ रही।

महिला की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए पुलिस उसे थाना कोतवाली लेकर आई, जहां से जिला अस्पताल में उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित वातावरण में रखने के लिए सखी सेंटर में रखा गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों—पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल एवं अमित पटेल, तथा उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) आशीष शुक्ला—के निर्देशन में महिला को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय ने महिला की मानसिक स्थिति और उसकी पहचान अज्ञात होने के कारण उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र सेंदरी, बिलासपुर में भर्ती कराने का आदेश दिया। आदेश के पालन में 5 मई 2026 को पुलिस द्वारा महिला को विधिवत सेंदरी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां अब उसका उपचार जारी है।

कबीरधाम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को उक्त महिला के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त हो, तो वे तत्काल थाना कोतवाली कबीरधाम या पुलिस कंट्रोल रूम (मोबाइल नंबर: 9479192499) पर सूचना दें, ताकि महिला को उसके परिजनों से मिलाने में सहायता मिल सके।

यह पहल न केवल पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि समाज के प्रति उसकी मानवीय जिम्मेदारी का भी एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता

 कबीरधाम जिला के पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह (भा.पु.से.) के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित पटेल के मार्गदर्शन तथा उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय श्री आशीष शुक्ला के दिशा निर्देश में थाना कोतवाली पुलिस टीम के द्वारा लगातार असामाजिक तत्वों के विरुद्ध एवं अवैध गतिविधियों जैसे अवैध शराब बिक्री एवं परिवहन, जुआ,सट्टा पर प्रभावी नियंत्रण हेतु लगातार सघन अभियान चलाया जा रहा है।

इसी तारतम्य में आज दिनांक 6 मई 2026 को विश्वसनीय मुखबिर के सूचना के आधार पर कोतवाली पुलिस टीम द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर मरघट के पास घेराबंदी कर जांच की गई। कार्यवाही के दौरान दो व्यक्तियों को अवैध शराब का परिवहन करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया।

पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम (1) विनायक वर्मा, पिता – धनेश वर्मा, उम्र – 25 वर्ष, निवासी – बैहरसरी, थाना बोड़ला, जिला कबीरधाम (2) टेकराम वर्मा, पिता – रामेश्वर वर्मा, उम्र – 27 वर्ष, निवासी – बैहरसरी, थाना बोड़ला, जिला कबीरधाम बताया। आरोपियों के कब्जे से कुल 90 नग देशी प्लेन शेरा शराब (प्रत्येक 180 एम.एल.), कुल 16.200 बल्क लीटर, जिसकी अनुमानित कीमत 7,200/- रुपये तथा परिवहन में प्रयुक्त होंडा मोटरसाइकिल (कीमत लगभग 50,000/- रुपये ) जब्त की गई। इस प्रकार कुल 57,200/- रुपये मूल्य की सामग्री जप्त कर विधिवत कब्जे में ली गई।

आरोपियों का उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के अंतर्गत दंडनीय पाए जाने पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 179/2026 पंजीबद्ध कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई किया गया।

कबीरधाम पुलिस द्वारा अवैध गतिविधियों के विरुद्ध इसी प्रकार सख्त एवं सतत कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी।

बालोद/ शौर्यपथ /
बालोद जिले के डौंडी लोहारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हथोद में देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां जहरीले सांप के काटने से 6 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, डिंपल चौहान (उम्र 6 वर्ष) अपने माता-पिता के साथ घर के फर्श पर सो रही थी। रात करीब 12 बजे के आसपास उसे जहरीले सांप ने काट लिया, लेकिन परिजनों को इसकी भनक नहीं लगी।
कुछ समय बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे उल्टी-दस्त होने लगे। परिजनों ने इसे सामान्य समस्या समझते हुए घरेलू उपचार के रूप में नींबू पानी आदि दिया। हालांकि, हालत में सुधार नहीं होने पर जब उन्होंने आसपास देखा तो बिस्तर के पास जहरीला सांप दिखाई दिया, जिससे घटना का अंदेशा हुआ।


इसके बाद परिजन तत्काल बच्ची को डौंडी लोहारा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के दौरान सांप के काटने की पुष्टि हुई। उपचार के दौरान ही मासूम डिंपल ने दम तोड़ दिया।

कोंडागांव / शौर्यपथ समाचार
कोंडागांव जिले के बनियागांव क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। कुछ दिन पूर्व शौर्यपथ समाचार द्वारा इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था, जिसमें फर्जी नक्शे के आधार पर जमीन की बिक्री और नियमों की खुलेआम अनदेखी का खुलासा किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या जांच प्रतिवेदन सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में धमतरी और कांकेर में अवैध प्लाटिंग के मामलों को लेकर गंभीर चर्चा हुई थी, जिसके बाद एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया था। इसी कड़ी में कोंडागांव के बनियागांव में हो रही अवैध प्लाटिंग का मामला भी सामने आया। उम्मीद थी कि समिति इस पर शीघ्र कार्रवाई करेगी, लेकिन अब तक न तो जांच की प्रगति स्पष्ट है और न ही कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है।

स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि जमीन दलालों ने स्कूल मैदान के बीच का फर्जी नक्शा दिखाकर प्लॉट बेचे हैं। यह मामला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के सीधे उल्लंघन का संकेत देता है। आरोप यह भी हैं कि इस पूरे प्रकरण में राजस्व अमले—विशेष रूप से आरआई और पटवारी—की मिलीभगत से इन गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जांच में देरी से संदेह और गहराता जा रहा है।

शौर्यपथ समाचार द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाए जाने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। विधानसभा में मामला उठने और जांच टीम गठित होने के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है, बल्कि अवैध कारोबार में लगे तत्वों के हौसले भी बढ़ा सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकारी घोषणाएं तेज़ हैं, मगर डिमरापाल में तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती दिख रही है। सवाल सीधा है—जब अस्पताल ही नियमित रूप से संचालित न हो, तो मरीज इलाज कहां कराएं? योजनाओं की चमक और ज़मीनी हकीकत के बीच यह फासला न सिर्फ व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आयुर्वेद की साख पर भी असर डाल सकता है। और सबसे दिलचस्प बात—निगरानी तंत्र को जैसे यह सब दिखता ही नहीं, या दिखता है तो दर्ज नहीं होता।

इसी कड़ी में शासकीय आयुर्वेद औषधालय डिमरापाल चर्चा में है, जहां सेवाएं कथित तौर पर “हफ्ते में एक-दो दिन” तक सिमट गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की नियमित अनुपस्थिति के चलते उन्हें छोटे-छोटे इलाज के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ता है, जबकि रजिस्टरों में सब कुछ ‘समय पर’ और ‘नियमित’ बताया जाता है।

“शौर्यपथ” टीम के निरीक्षण में सोमवार से बुधवार तक चिकित्सा अधिकारी मौजूद नहीं मिलीं। गुरुवार—सियान जतन —पर अस्पताल में उपस्थिति दर्ज कर सेवाएं दी जाती दिखीं। ग्रामीणों के शब्दों में, “यहां इलाज नहीं, हाजिरी का कैलेंडर चलता है।”

सूत्रों के अनुसार, उपस्थिति और ओपीडी आंकड़ों के बीच अंतर की आशंका जताई जा रही है। संबंधित चिकित्सा अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में पारिवारिक कारणों—विशेषकर छोटे बच्चों की देखभाल—का हवाला देते हुए बताया कि वे प्रतिदिन उपस्थित नहीं हो पातीं। साथ ही यह भी संकेत दिया कि मरीजों की संख्या कम होने के बावजूद नियमित आंकड़े प्रस्तुत करने का दबाव रहता है, जिसके चलते प्रविष्टियों में अंतर आ सकता है। सवाल यह है कि अगर आंकड़े ही इलाज बन जाएं, तो मरीज का भरोसा किस पर टिका रहेगा?

मामले की सूचना जिला आयुर्वेद अधिकारी को दिए जाने पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन मिला और 20 दिन पहले शिकायत भी सौंपी गई। लेकिन “तत्काल” शब्द फिलहाल फाइलों में ही सक्रिय नजर आता है—स्थानीय स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई की पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या व्यवस्था में ‘सब ठीक है’ मान लेना ही नई कार्यप्रणाली बन गई है?

अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे, या फिर डिमरापाल का औषधालय यूं ही कागज़ों में रोज़ खुलता रहेगा और ज़मीन पर हफ्ते में एक-दो दिन ही दिखाई देगा।

मुंबई | (शौर्यपथ समाचार)

वृत्तचित्र, एनिमेशन और लघु फिल्म निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच ‘वेव्स डॉक बाज़ार’ का दूसरा संस्करण 16 से 18 जून 2026 तक मुंबई में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) के साथ एनएफडीसी कॉम्प्लेक्स में होगा, जहां देश-विदेश के फिल्म निर्माता, वितरक, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ जुटेंगे।

वेव्स डॉक बाज़ार को ऑडियो-विज़ुअल उद्योग में उभरती प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मंच फिल्म निर्माताओं को सहयोग, मार्गदर्शन, बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करेगा।

इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में ‘व्यूइंग रूम’ शामिल है, जहां हाल ही में पूर्ण या पोस्ट-प्रोडक्शन में मौजूद फिल्मों को चुनिंदा खरीदारों, वितरकों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। यह एक सुरक्षित मंच होगा, जहां फिल्म निर्माताओं को वितरण, सह-निर्माण और वित्तीय सहयोग के अवसर मिलेंगे।

इसके साथ ही ‘वर्क-इन-प्रोग्रेस (डब्ल्यूआईपी) लैब’ भी आयोजित की जाएगी, जिसमें डॉक्यूमेंट्री और एनिमेशन फिल्मों के रफ-कट चरण के प्रोजेक्ट्स को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिलेगा। अनुभवी फिल्म निर्माता, संपादक और अंतरराष्ट्रीय सलाहकार प्रतिभागियों को अपनी फिल्मों को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देंगे।

पहली बार इस आयोजन में वीआर (वर्चुअल रियलिटी), एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) और एक्सआर (एक्सटेंडेड रियलिटी) आधारित कंटेंट पर केंद्रित एक उभरता बाजार भी प्रस्तुत किया जाएगा, जो इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और नई तकनीकों को बढ़ावा देगा।

वेव्स डॉक बाज़ार 2026 के लिए व्यूइंग रूम और डब्ल्यूआईपी लैब में भागीदारी हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक प्रतिभागी 15 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह मंच उन फिल्म निर्माताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो अपने प्रोजेक्ट्स के लिए वितरण, निवेश या अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के अवसर तलाश रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह आयोजन भारतीय और वैश्विक फिल्म उद्योग के बीच सेतु का काम करेगा और रचनात्मकता के साथ-साथ तकनीकी नवाचार को भी नई दिशा देगा।

कोच्चि | (शौर्यपथ समाचार) रॉयल नीदरलैंड्स नेवी का अत्याधुनिक युद्धपोत एचएनएलएमएस डी रूयटर (एफ-804) 4 मई 2026 को कोच्चि बंदरगाह पहुंचा, जहां भारतीय नौसेना द्वारा उसका भव्य और औपचारिक स्वागत…
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