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जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग में अधिकारियों एवं 73 शाखा प्रबंधकों की महत्वपूर्ण बैठक
दुर्ग / शौर्यपथ /
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, दुर्ग के अध्यक्ष माननीय श्री प्रीतपाल बेलचंदन द्वारा बैंक मुख्यालय में अधिकारियों एवं शाखा प्रबंधकों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में धान खरीदी, परिवहन व्यवस्था, लिंकिंग वसूली, कालातीत ऋण वसूली तथा किसानों को नगद भुगतान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हृदेश शर्मा, वर्ग-1 अधिकारी श्री एस.के. निवसरकर, अतिरिक्त मुख्य पर्यवेक्षक सुश्री कुसुम ठाकुर, अधीक्षक श्री के.के. नायक, नोडल अधिकारी बेमेतरा श्री राजेन्द्र वारे तथा नोडल अधिकारी बालोद श्री सी.आर. रावटे उपस्थित रहे।
374 उपार्जन केंद्रों में 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी
समीक्षा के दौरान बताया गया कि 03 जनवरी 2026 की स्थिति में बैंक के कार्यक्षेत्र अंतर्गत जिला दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा के कुल 374 उपार्जन केन्द्रों में 12,03,306.64 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 3,57,165.64 मीट्रिक टन धान का परिवहन हो चुका है, जबकि उपार्जन केन्द्रों में अभी 10,81,487 मीट्रिक टन धान शेष है।
अधिकारियों ने अवगत कराया कि 281 उपार्जन केन्द्रों में बफर लिमिट से अधिक धान संग्रहित है, वहीं 25 उपार्जन केन्द्रों में 40,000 क्विंटल से अधिक धान का भंडारण है, जिससे शीघ्र परिवहन की आवश्यकता बनी हुई है।
शाखा प्रबंधकों ने रखी जमीनी समस्याएं
इसके पश्चात बैंक मुख्यालय में शाखा प्रबंधकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें धान खरीदी के दौरान जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं पर चर्चा की गई। शाखा प्रबंधकों ने बताया कि उपार्जन केन्द्रों की दैनिक खरीदी सीमा के कारण पंजीकृत किसानों द्वारा अपने उपार्जित धान का 31 जनवरी 2025 तक विक्रय कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस समस्या के समाधान हेतु धान खरीदी की दैनिक लिमिट बढ़ाने के लिए संबंधित शीर्ष कार्यालयों को अवगत कराने की जानकारी बैठक में दी गई। बैठक में बैंक कार्यक्षेत्र की कुल 73 शाखाओं के शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन ने धान खरीदी एवं परिवहन कार्य को प्राथमिकता के साथ तेज करने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा बैंकिंग कार्यों में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए।
कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने किया योजनागत कार्यों का निरीक्षण, मत्स्य उत्पादन व रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि
मोहला / शौर्यपथ /
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत जिले में संचालित विभिन्न कार्यों का कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने स्थल भ्रमण कर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक पॉण्ड एवं मछली बीज उत्पादन हेचरी की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर ने विकासखंड मानपुर के ग्राम वासड़ी (घोटिया) में हितग्राही रोहित सलामे द्वारा निजी भूमि पर स्थापित बायोफ्लॉक पॉण्ड का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत उन्हें 16.80 लाख रुपये की अनुदान स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में 0.20 हेक्टेयर क्षेत्र में मछली पालन से प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हो रही है, जिससे हितग्राही की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।
इसके पश्चात कलेक्टर ने मछली पालन विभाग द्वारा 4.00 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर निर्मित की जा रही जिले की प्रथम मछली बीज उत्पादन हेचरी का निरीक्षण किया। इस हेचरी से प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन किया जाएगा। हेचरी निर्माण हेतु शासन द्वारा 25 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में 13 तालाबों का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा शेष निर्माण कार्य प्रगतिरत है। कलेक्टर ने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। हेचरी के पूर्ण होने से जिले के मछली पालकों को शासकीय दर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा और जिला मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा।
निरीक्षण के क्रम में ग्राम खड़गांव, विकासखंड मानपुर में कचरू राम सलामे के निजी भूमि पर 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में किए जा रहे नवीन तालाब निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया गया। इस परियोजना के लिए 14 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें तालाब निर्माण पूर्ण होने के पश्चात 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। तालाब से प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख रुपये की आय के साथ 5 से 6 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
इसी क्रम में ग्राम गिधाली, विकासखंड मोहला में श्रीमती संतोषी बाई मण्डावी एवं श्री हमेन्द्र मण्डावी द्वारा किए जा रहे तालाब एवं बायोफ्लॉक पॉण्ड निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। श्रीमती संतोषी बाई को 1.00 हेक्टेयर में नवीन तालाब एवं 0.10 हेक्टेयर में बायोफ्लॉक पॉण्ड निर्माण की स्वीकृति दी गई है, वहीं श्री हमेन्द्र मण्डावी को 0.10 हेक्टेयर क्षेत्र में बायोफ्लॉक पॉण्ड निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन इकाइयों से प्रतिवर्ष लगभग 10 टन मछली उत्पादन के साथ 4 से 5 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।
कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के माध्यम से केज कल्चर, बायोफ्लॉक एवं आधुनिक तालाब निर्माण जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों एवं मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। इससे जिले की मत्स्य उत्पादन क्षमता में निरंतर इजाफा हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान मछली पालन विभाग के सहायक संचालक एस.के. साहू, सहायक मत्स्य अधिकारी डी.के. उर्वशा, मत्स्य निरीक्षक गौरांक वर्मा सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
दुर्ग / शौर्यपथ।
पैदल लड़खड़ाते कदमों और बैसाखियों के सहारे कार्यक्रम स्थल तक पहुँचे दिव्यांगजन, जब ट्रायसिकल, व्हीलचेयर और बैसाखी लेकर मुस्कुराते हुए अपने घर लौटे, तो यह दृश्य मानवता और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण बन गया। अवसर था जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग के सेवा कार्यों के 9 वर्ष पूर्ण होने का।
जन समर्पण सेवा संस्था द्वारा शहर के जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्रायसिकल, व्हीलचेयर और बैसाखी का वितरण किया गया। भूखे को भोजन कराना और निःशक्तों को सहारा देना सबसे बड़ा मानव धर्म है—इसी मूल भावना के साथ संस्था बीते 9 वर्षों से लगातार सेवा कार्यों में जुटी हुई है। “कोई भूखा न सोए” संकल्प के तहत 1 जनवरी 2017 से आज तक बिना एक दिन रुके, दुर्ग रेलवे स्टेशन सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर प्रतिदिन 200 से अधिक गरीब, असहाय और दिव्यांगजनों को निःशुल्क भोजन एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
संस्था के सदस्य सुजल शर्मा एवं अख्तर खान ने बताया कि शहर में ऐसे कई दिव्यांगजन हैं, जो अब तक पैदल या बैसाखी के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर थे। उनकी आवश्यकता को समझते हुए संस्था के 9 वर्ष पूर्ण होने तथा संस्था की विशेष सहयोगी समाजसेविका सुश्री पायल जैन के जन्मदिवस के अवसर पर 2 जनवरी को सहायक उपकरणों का वितरण किया गया।
इस अवसर पर सुनीता राम (सुपेला, भिलाई) एवं दीपमाला देवराज (अटल आवास, उरला, दुर्ग) को ट्रायसिकल, अनंत कुमार पवार (हाउसिंग बोर्ड, भिलाई) को व्हीलचेयर तथा राजेश कुमार साहू (दुर्ग रेलवे स्टेशन) को बैसाखी प्रदान की गई। इन साधनों के माध्यम से अब वे सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकेंगे और आत्मनिर्भर होकर अपने जीवन यापन की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।
संस्था द्वारा अब तक 9 वर्षों में 113 बैसाखी, 59 व्हीलचेयर एवं 56 ट्रायसिकल का वितरण दिव्यांगजनों को किया जा चुका है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय और प्रेरणादायी उपलब्धि है।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ यह प्रेरणा बन सकती है। शारीरिक अभाव को यदि शक्ति में बदला जाए, तो वही व्यक्ति समाज के लिए उदाहरण बन जाता है।
जन समर्पण सेवा संस्था विगत 9 वर्षों से गरीबों, भूखों, दिव्यांगों, विक्षिप्तों, गौमाता तथा पशु-पक्षियों की सेवा में सतत रूप से सक्रिय है। संस्था द्वारा न केवल ट्रायसिकल और व्हीलचेयर, बल्कि कमोड चेयर, मेडिकल पलंग और अन्य आवश्यक सहायता भी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाती रही है।
संस्था के सेवा कार्य दुर्ग तक सीमित न रहकर अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। दीपावली पर बुजुर्गों और बच्चों को नए वस्त्र व मिष्ठान वितरण, पशु-पक्षियों के लिए हजारों सकोरे एवं कोटना वितरण तथा प्रतिदिन रात्रि में निःशुल्क भोजन सेवा जैसी गतिविधियाँ संस्था की पहचान बन चुकी हैं।
9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्था द्वारा विशेष सेवा अभियान के अंतर्गत विगत तीन दिनों से ठंड से बचाव हेतु फुटपाथ पर रहने वाले जरूरतमंदों को कंबल, भोजन एवं मिष्ठान का वितरण भी किया जा रहा है।
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी सहित संदीप वोरा, विवेक मिश्रा, मनोज शर्मा, विकास पुरोहित, आशीष मेश्राम, अर्जित शुक्ला, प्रतिभा पुरोहित, रूपल गुप्ता, सुजल शर्मा, अख्तर खान, संजय सेन, मोहित पुरोहित, ऋषि गुप्ता, राजेन्द्र ताम्रकार, मृदुल गुप्ता, अंकेश पेशवानी, वाशु शर्मा, गौरव बजाज, प्रवीण पींचा, अनश खान, अंश पांडेय, सुधीर कुमार, तरेंद्र, विकास सापेकर, आसिफ खान, संदीप साहू, हरीश सेन, दद्दू ढीमर, शुभम सेन सहित संस्था के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
रायपुर/ शौर्यपथ / तमनार घटना पर महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने कहा कि महिला टीआई और महिला आरक्षक के साथ जो घटना घटित हुआ उस घटना का कड़े शब्दों में निंदा करती हूं। रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में गारे पेलमा सेक्टर-1 में जिंदल स्टील को ओपन कास्ट कोल माइंस आवंटित की गई है। इसके लिए 8 दिसंबर को जनसुनवाई आयोजित की गई थी, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीण, आदिवासी और स्थानीय निवासी शुरू से ही इस खदान का विरोध कर रहे हैं। प्रभावित 14 गांवों के लोग अपनी पुश्तैनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि कोयला उत्खनन से खेती-बाड़ी, जंगल और पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएंगे। तभी से वहां के ग्रामीण और आदिवासी सरकार से वार्तालाप करके समाधान चाहती थी लेकिन सरकार में बैठे जिम्मेदार एक भी व्यक्ति या प्रशासन की ओर से एक भी अधिकारी आंदोलनकारियों से भेंट मुलाकात कर समाधान के लिए प्रयत्न नहीं किये, जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी की सरकार में प्रदेश में लगातार अराजकता का माहौल निर्मित हो रहा है। कानून व्यवस्था आईसीयू में है। आंदोलनकारी पर जो लाठी चलाई गई वह भी दुखद है, महिला पुलिस कर्मियों के ऊपर जो हृदय विदारक घटना घटित हुआ वह भी दुखद है। प्रदेश में ऐसा माहौल कभी देखने को नहीं मिला था।
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के डबल इंजन की सरकार में जनता लगातार आक्रोशित क्यों हो रहे है, और आक्रामक रूप से कानून को अपने हाथ में लेने को क्यों मजबूर हो रहे हैं? आज प्रदेश की स्थिति चिंताजनक हो गई है। माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के सरकार ने कसम खा रखी है कि यह जल, जंगल, जमीन सिर्फ पूंजीपतियों के लिए है, यदि इस पर कोई भी मुखरता से अपनी बात रखते हैं या आंदोलन करते है तो आंदोलनकारी से सरकार बिना संवाद के लाठी, डंडा बरसाया जा रहा है। डराया जा रहा है, धमकाया जा रहा है, यहां तक की बड़ी गाड़ियों से आंदोलनकारी को कुचल करके करने कभी षड्यंत्र कर रहे हैं जिनके परिणाम है आंदोलनकारियों में से एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, उसके भी जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में महिला टीआई महिला आरक्षक सुरक्षित नहीं है तो सामान्य महिला सुरक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती।
भिलाई/रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य की जूनियर बालक एवं बालिका फेंसिंग टीम 33वीं जूनियर राष्ट्रीय फेंसिंग चैंपियनशिप में भाग लेने हेतु कटक (उड़ीसा) के लिए रवाना हो गई है। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता उड़ीसा फेंसिंग एसोसिएशन द्वारा फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम, कटक में 5 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है। इस चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ राज्य की 28 सदस्यीय जूनियर बालक एवं बालिका टीम भाग ले रही है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ जूनियर फेंसिंग टीम के चयन हेतु 14 दिसंबर 2025 को इस्पात क्लब, सेक्टर-1, भिलाई में चयन स्पर्धा आयोजित की गई थी, जिसमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर संभावित खिलाड़ियों का चयन किया गया। इसके पश्चात चयनित खिलाड़ियों के लिए 20 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक बहुउद्देशीय हॉल, इस्पात क्लब, भिलाई में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। प्रशिक्षण शिविर का समापन 3 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन के महासचिव श्री समीर खान द्वारा किया गया, जिसके बाद अंतिम टीम की घोषणा की गई।
जूनियर बालक वर्ग में फॉइल इवेंट में हिमेश साहू, आयुष नेताम, अंशुल फब्यानी और हर्ष रजक, ईपी इवेंट में ऋषभ गुप्ता, जनार्दन साहू, दीपांशु साहू और भूपेंद्र कुमार यादव तथा सैबर इवेंट में नवीन साहू, विनीत साहू, अनुज चौहान और करनजीत सिंह आनंद का चयन किया गया है। टीम के प्रशिक्षक श्री प्रवीण कुमार गाँवरे और प्रबंधक श्री मोहनीश वर्मा हैं।
जूनियर बालिका वर्ग में फॉइल इवेंट में कु. लावण्या साहू, कु. अंशिका यादव, कु. पी. दिव्या रेड्डी और कु. धारणा ठाकुर, ईपी इवेंट में कु. रश्मान कौर धीमान, कु. रुपाली साहू, कु. रीबा बैनी और कु. तुलसी मानिकपुरी तथा सैबर इवेंट में कु. चांदनी साहू, कु. मर्लिन मेरी शिबू, कु. नीतू यादव और कु. तेजस्वनी मोहिले का चयन किया गया है। बालिका टीम के प्रशिक्षक श्री व्ही. जॉनसन सोलोमन एवं प्रबंधक कु. मोना पटेल हैं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खिलाड़ियों को आने-जाने का रेलवे किराया, दैनिक यात्रा भत्ता एवं ट्रैकसूट प्रदान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन द्वारा खिलाड़ियों एवं अधिकारियों को टी-शर्ट उपलब्ध कराई गई है। टीम 3 जनवरी 2026 को बस द्वारा कटक के लिए रवाना हुई है और 11 जनवरी 2026 को वापस लौटेगी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एस. प्रकाश (आईएएस) ने दूरभाष के माध्यम से खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ देते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदक प्राप्त करने की कामना की। साथ ही एसोसिएशन के चेयरमेन श्री सुनील रामदास अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री अजीत सिंह पटेल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री दिनेश गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों एवं विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधियों ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और प्रबंधकों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं को साकार करने की दिशा में मछली पालन विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की गई हैं। कम लागत, कम समय और अधिक आय देने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, जिससे न केवल रोजगार सृजन हो रहा है बल्कि कुपोषण दूर करने में भी सहायता मिल रही है।
पिछले दो वर्षों में मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जलक्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 2.027 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र की तुलना में यह बढ़कर 2.039 लाख हेक्टेयर हो गया है। उपलब्ध जलक्षेत्र में से वर्ष 2025 तक 97.25 प्रतिशत क्षेत्र को मत्स्य पालन के अंतर्गत लाया जा चुका है, जो जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को दर्शाता है।
राज्य में मछली बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। इन दो वर्षों में 20 नई मत्स्य बीज हैचरी का निर्माण किया गया है। परिणामस्वरूप राज्य में वर्तमान में 583 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन हो रहा है, जो वर्ष 2023 की तुलना में 69.4 प्रतिशत अधिक है। मछली बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान पर पहुँच गया है।
पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ-साथ केज कल्चर, बायोफ्लॉक, आरएएस, एनीकट में संचयन तथा तीव्र बढ़वार वाली प्रजातियों के पालन को बढ़ावा दिया गया है। इन प्रयासों के चलते राज्य का कुल मत्स्य उत्पादन दो वर्षों में 34.10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.73 लाख टन तक पहुँच गया है। मत्स्य उत्पादन में भी छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष छह राज्यों में शामिल हो गया है।
मत्स्य कृषकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 10 और 3 दिवसीय प्रशिक्षण तथा अन्य राज्यों में अध्ययन भ्रमण के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 17,900 हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं मत्स्य सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने हेतु प्रति समिति तीन लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे प्रतिवर्ष 226 समितियाँ लाभान्वित हो रही हैं।
मछुआरों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दुर्घटना बीमा योजना का विस्तार किया गया है। वर्ष 2025 में राज्य में 2,20,525 मछुआरों का निःशुल्क दुर्घटना बीमा किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके साथ ही बंद ऋतु के दौरान मछुआरों को बचत सह राहत योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से जलाशयों एवं बंद पड़ी गहरी खदानों में केज कल्चर को प्रोत्साहित किया गया है। इन दो वर्षों में राज्य में 2,577 केज स्थापित किए गए हैं। स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण योजना के तहत 946.05 हेक्टेयर नवीन जलक्षेत्र विकसित किया गया है, वहीं 142.84 हेक्टेयर क्षेत्र में संवर्धन पोखरों का निर्माण किया गया है।
स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त और सस्ता मत्स्य आहार उपलब्ध कराने के लिए पाँच फीड मील की स्थापना की गई है। मत्स्य विपणन को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल, थ्री व्हीलर तथा सजीव मछली वेंडिंग के लिए फोर व्हीलर वाहनों का वितरण किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं तक ताजी मछली की पहुँच सुनिश्चित हो रही है।
नवीन तकनीक को अपनाते हुए बायोफ्लॉक पोंड लाइनर, बायोफ्लॉक टैंक तथा रिसरकुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम की स्थापना की गई है। इन दो वर्षों में 497 बायोफ्लॉक पोंड लाइनर, 234 बायोफ्लॉक टैंक और 5 आरएएस यूनिट स्थापित की गई हैं, जिससे कम पानी और कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है।
राज्य की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2024 में कांकेर जिले को “बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट” का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं वर्ष 2025 में रायपुर के श्री सुखदेव दास और महासमुंद के श्री अब्दुल जमील को बेस्ट फिश फार्मर प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त श्री सुखदेव दास को वर्ष 2025-26 के लिए “श्रीमती बिलासा देवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया है।
रायपुर / शौर्यपथ / संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा विगत दो वर्षों में प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। प्रदेश की विविध जलवायु और तीन एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के कारण यहाँ आम, काजू, लीची, नाशपाती सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। विशेष रूप से केला और पपीता जैसी एक वर्षीय फसलों का रकबा तेजी से बढ़ा है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है।
उद्यानिकी विभाग द्वारा फसल क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत फल, सब्जी, मसाला, पुष्प, सुगंधित फसलों के साथ-साथ ऑयल पाम एवं बांस रोपण को बढ़ावा दिया गया है। साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना, मशरूम उत्पादन एवं स्पॉन मेकिंग यूनिट, गुणवत्तायुक्त पौध एवं बीज उत्पादन, पॉलीहाउस व शेडनेट हाउस जैसी संरक्षित खेती अधोसंरचना, यंत्रीकरण, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन तथा कृषकों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।
प्रदेश में उद्यानिकी विकास को गति देने के लिए बजट प्रावधानों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2023–24 में उद्यानिकी योजनाओं पर 215.17 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे, जबकि वर्ष 2025–26 में 431.03 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026–27 के लिए 483.80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे चार वर्षों में उद्यानिकी बजट में लगभग 125 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है।
आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र विस्तार किया जाएगा। राज्य के प्रमुख धार्मिक तीर्थ क्षेत्रों—डोंगरगढ़, रतनपुर, दंतेवाड़ा, जांजगीर, अम्बिकापुर एवं भैयाथान—को फ्लोरीकल्चर हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जहाँ 111 क्लस्टर विकसित कर 27,700 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती प्रस्तावित है, जिससे लगभग 70 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
प्रदेश में खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आगामी तीन वर्षों में 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही सीड नर्सरी, सीड गार्डन तथा राज्य स्तर पर ऑयल पाम प्रसंस्करण इकाई की स्थापना का प्रस्ताव है। सिंचाई क्षेत्र विस्तार हेतु 37 हजार हेक्टेयर में ड्रिप और 4,500 हेक्टेयर में स्प्रिंकलर प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाएगा।
विभागीय रोपणियों के माध्यम से 22,500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन किया जाएगा। नर्सरी विहीन क्षेत्रों में 54 नई नर्सरियों की स्थापना और 55 नर्सरियों का उन्नयन किया जाएगा। वर्ष पर्यंत खेती को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और मल्चिंग हेतु किसानों को अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, फार्मगेट पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों तथा ग्रामीण व खुदरा बाजारों की स्थापना भी की जाएगी।
उद्यानिकी विभाग द्वारा नवाचार के रूप में ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर पौधों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे मृदा जनित रोगों पर नियंत्रण संभव हो सके। वर्ष 2025–26 में 2356 ग्राफ्टेड पौधों के माध्यम से प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा संरक्षित खेती के अंतर्गत शेडनेट हाउस के माध्यम से किसानों द्वारा सब्जी बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिसमें प्रदेश के 2176 किसान 86 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में बीज उत्पादन कर रहे हैं।
नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम योजना के अंतर्गत वर्ष 2025–26 में 2240 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम रोपण किया गया है, जिसमें से 1042 हेक्टेयर क्षेत्र में अंतरवर्तीय फसल ली जा रही है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र की योजना के अतिरिक्त प्रति हेक्टेयर 69,620 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है, जिससे किसानों को फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और अंतरवर्ती फसलों के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार में भी सतत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 तक फलों, सब्जियों, मसाला और पुष्प फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विभागीय प्रयासों से उद्यानिकी क्षेत्र प्रदेश में किसानों की आय वृद्धि, फसल विविधिकरण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रायपुर/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहाँ अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के शौर्य को नमन करते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएँ और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।
घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंक राम वर्मा ने निभाई छेरछेरा की परम्परा
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
मंत्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
मंत्री वर्मा ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है।
छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर
“छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…”
का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह होता है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान करें।इकट्ठा की गई सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परम्पराओं से जोड़ता है।छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 की मेजबानी पर सीएम साय की केंद्रीय मंत्री मांडविया से भेंट
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से सौजन्य भेंट कर “प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026” के आयोजन पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सम्मान का विषय है, जिससे राज्य की जनजातीय खेल परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के तहत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तैराकी की प्रतियोगिताएँ होंगी, जबकि दो खेल डेमो स्वरूप आयोजित किए जाएंगे। सरगुजा में कुश्ती, तीरंदाजी व वेटलिफ्टिंग, रायपुर में हॉकी, फुटबॉल व तैराकी तथा बिलासपुर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताएँ प्रस्तावित हैं। उद्घाटन समारोह 14 फरवरी 2026 को रायपुर में होगा।
केंद्रीय मंत्री मांडविया ने आयोजन के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय युवाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह और अवसर पैदा करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने ईएसआईसी अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण, खेल अधोसंरचना विकास और लेबर कोड जैसे ऐतिहासिक सुधारों के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
