September 09, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    रोड शो में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेश और खनिज विकास को दिया बढ़ावा; केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने उद्योगों से अधिक भागीदारी का किया आह्वान

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ने देश के महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करते हुए निवेशकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। खान मंत्रालय द्वारा रायपुर में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला को लेकर रोड शो आयोजित किया गया। इस श्रृंखला में नौ राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि तथा केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा को देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए कहा कि राज्य की खनिज क्षमता का तेजी से विकास करने के लिए अधिक निवेश, त्वरित परियोजना क्रियान्वयन और केंद्र-राज्य के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेश को सुगम बनाने, प्रक्रियाओं को सरल करने और सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    खनिज सुरक्षा से आत्मनिर्भर भारत तक

    केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को भारत की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि इन खनिजों की खोज और विकास में तेजी लाने के साथ उद्योग एवं निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने खनिजों की पूरी मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देते हुए इसे देश की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा।

    आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार का लाभ महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को मिल सकता है। इन खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक केंद्र विकसित होने, सतत अवसंरचना को मजबूती मिलने और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार एवं आर्थिक अवसर बढ़ने की संभावनाएं हैं। राज्य की बेहतर अवसंरचना, कुशल मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग को उन्होंने दीर्घकालिक निवेश के लिए अनुकूल आधार बताया।

    20 ब्लॉकों में छत्तीसगढ़ के पांच ब्लॉक

    खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने बताया कि नीतिगत सुधार, पारदर्शी नीलामी और परियोजनाओं के तेज संचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र लगातार मजबूत हुआ है। अब तक पेश किए गए 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

    नीलामी की 8वीं श्रृंखला में शामिल 20 ब्लॉकों में 17 समग्र लाइसेंस और तीन खनन पट्टा ब्लॉक हैं। इनमें ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इनमें पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं, जिससे राज्य की रणनीतिक खनिज क्षेत्र में भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।

    खनन के साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर जोर

    खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप कदम ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज केवल खनन तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि इनके प्रसंस्करण, परिशोधन और मूल्य संवर्धन पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने केंद्र, राज्य और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग के माध्यम से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने तथा आत्मनिर्भर महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर जोर दिया।

    सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की खनिज क्षमता में संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी के प्रति राज्य के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न पहलों का उल्लेख किया।

    संभावित बोलीदाताओं को दी गई तकनीकी जानकारी

    रोड शो के तकनीकी सत्र में एनएमईडीटी के महानिदेशक श्री पंकज गर्ग ने समग्र लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति संबंधी योजना की जानकारी दी। इसके बाद एमईसीएल के एचओडी (अन्वेषण) श्री श्रीकांत शर्मा ने खनिज ब्लॉकों एवं उनकी संभावनाओं, एसबीआईकैप्स के सहायक उपाध्यक्ष श्री प्रतिन शर्मा ने नीलामी प्रक्रिया एवं निविदा दस्तावेज तथा एमएसटीसी के सहायक प्रबंधक श्री पुष्कर हजेला ने ई-नीलामी प्रक्रिया की जानकारी दी।

    कार्यक्रम में संभावित बोलीदाताओं के सवालों का समाधान भी किया गया। रोड शो का उद्देश्य खनिज अन्वेषण में तेजी, निजी क्षेत्र एवं निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना रहा।

    आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र संचालन पर समीक्षा

    रोड शो के बाद खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र की अध्यक्षता में खनिज ब्लॉक आवंटियों एवं पसंदीदा बोलीदाताओं के साथ समीक्षा बैठक हुई। इसमें आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र संचालन, परियोजनाओं की प्रगति और सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई। केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों ने समयबद्ध समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

    यह पहल छत्तीसगढ़ को केवल खनिज उत्खनन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और रणनीतिक खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे ले जा सकती है। महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में निवेश बढ़ने से राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

    भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित लोहा चोरी के मामले को लेकर लगातार सवाल उठाने वाले वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की एक नई सोशल मीडिया पोस्ट ने दुर्ग जिले में एक बार फिर सनसनी पैदा कर दी है। इस बार विधायक ने देहदान और मानवता के नाम पर मृत शरीरों के कथित दुरुपयोग/बिक्री को लेकर बड़ा संकेत दिया है। हालांकि पोस्ट में संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    विधायक रिकेश सेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “भिलाई का एक यूट्यूबर जो सालों से देहदान के नाम से सैकड़ों लाशों को मेडिकल कॉलेजों को बेचता आया है! अब उसकी असलियत लाना जरूरी है!” विधायक की इस पोस्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि आखिर यह गंभीर आरोप किस व्यक्ति या संस्था की ओर इशारा कर रहा है?

    लोहा चोरी के बाद अब ‘देहदान’ का मुद्दा

    गौरतलब है कि भिलाई स्टील प्लांट से कथित लोहा चोरी के मामले में विधायक रिकेश सेन पहले भी सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार सवाल उठाते रहे हैं। मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी और कई लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं। इसी दौरान विधायक द्वारा कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों और स्वयंभू समाजसेवियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।

    अब इसी कड़ी में विधायक की ताजा पोस्ट ने मानवता और देहदान जैसे संवेदनशील विषय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    सवाल बड़ा है, अब नाम का इंतजार

    यदि विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं, तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, किसी व्यक्ति पर मृत शरीरों की बिक्री जैसे गंभीर आरोपों की वास्तविकता जांच और ठोस दस्तावेजी प्रमाणों से ही स्पष्ट होगी।

    ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधायक रिकेश सेन इस पोस्ट के बाद किसके खिलाफ शिकायत, कौन से दस्तावेज या क्या प्रमाण सार्वजनिक करते हैं? क्या इस कथित मामले में पुलिस अथवा प्रशासन से शिकायत होगी? और सबसे बड़ा सवाल—विधायक के निशाने पर आखिर वह कौन है, जिसका नाम अभी तक सामने नहीं आया है?

    लोहा चोरी के आरोपों से लेकर अब देहदान के नाम पर कथित ‘मृत शरीरों के सौदे’ तक—वैशाली नगर विधायक की नई पोस्ट ने दुर्ग-भिलाई की सियासत और सामाजिक गलियारों में एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। अब इंतजार है उस नाम और उन तथ्यों का, जिनके आधार पर यह गंभीर दावा किया गया है।

    प्रमोद रूसिया को कुम्हारी, युवराज साहू बने पाटन थाना प्रभारी; यातायात की जिम्मेदारी ओम प्रकाश पटेल को

    दुर्ग। जिले की पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए एसपी विजय अग्रवाल ने पांच पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में थाना प्रभारियों के साथ यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।

    आदेश के अनुसार पाटन थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश मिश्रा को पदमनाभपुर थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं पदमनाभपुर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रमोद रूसिया को हटाकर कुम्हारी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    इसी क्रम में निरीक्षक युवराज साहू को यातायात शाखा से हटाकर पाटन थाना प्रभारी बनाया गया है। रिजर्व केंद्र दुर्ग में पदस्थ निरीक्षक ओम प्रकाश पटेल को यातायात की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उप निरीक्षक पुरुषोत्तम कुर्रे को कुम्हारी थाना प्रभारी के पद से हटाकर यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है।

    एसपी विजय अग्रवाल ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल नवीन पदस्थापना स्थल पर आमद देने के निर्देश दिए हैं। पुलिस महकमे में हुए इस फेरबदल को जिले की कानून-व्यवस्था और थाना स्तर पर प्रशासनिक कसावट के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    GST जांच ने बढ़ाई हलचल, सोशल मीडिया के आरोपों ने भी खड़े किए गंभीर सवाल; अब जवाब देगी जांच या समाजसेवी की छवि?

    भिलाई। कभी समाजसेवी के रूप में सुर्खियों में रहने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारी इंद्रजीत सिंह उर्फ ‘छोटू’ इन दिनों कारोबार से ज्यादा गंभीर आरोपों और जांच को लेकर चर्चा में हैं। उनकी कंपनी हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी (HTC) के ठिकानों पर स्टेट जीएसटी की कार्रवाई के बाद करीब ₹10 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी सामने आने की बात मीडिया रिपोर्टों में कही जा रही है। हालांकि, विभाग की अंतिम जांच और ऑडिट के बाद ही टैक्स चोरी अथवा देनदारी की आधिकारिक पुष्टि होगी।

    24 से ज्यादा अधिकारियों की दबिश, डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में

    अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में स्टेट जीएसटी की 24 से अधिक अधिकारियों वाली टीम ने HTC के हथखोद स्थित कार्यालय और बलौदाबाजार स्थित यार्ड में एक साथ जांच की। कार्रवाई के दौरान कंप्यूटर, डिजिटल साक्ष्य और कारोबारी दस्तावेजों को कब्जे में लेकर रिकॉर्ड का मिलान किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    जांच के बाद करीब ₹10 करोड़ के वित्तीय अंतर का अंदेशा जताए जाने की बात कही जा रही है। विभाग ने कंपनी के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू को आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए समंस भी जारी किया है।

    GST के बाद ‘लोहा चोरी’ के आरोपों ने फिर पकड़ा तूल

    मामला सिर्फ GST जांच तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा इंद्रजीत सिंह छोटू को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में उन्हें कथित रूप से ‘लोहा चोर’ तक संबोधित किया गया है। वहीं वैशाली नगर विधायक द्वारा सार्वजनिक रूप से बिना नाम लिए हजारों करोड़ रुपये के कथित लोहा चोरी प्रकरण को लेकर लगाए गए आरोपों को भी सोशल मीडिया में इंद्रजीत सिंह छोटू से जोड़कर चर्चा की जा रही है।

    लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सोशल मीडिया के आरोप और राजनीतिक बयान किसी व्यक्ति को दोषी साबित कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। आरोपों की सच्चाई जांच एजेंसियों और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगी।

    समाजसेवी की छवि या जांच के सवाल?

    इंद्रजीत सिंह छोटू की सार्वजनिक छवि लंबे समय से समाजसेवी के तौर पर प्रस्तुत की जाती रही है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या समाजसेवा की छवि के पीछे कारोबारी गतिविधियों से जुड़े गंभीर सवालों को दबाया जा सकता है?

    GST की कार्रवाई, कथित ₹10 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी, समंस और दूसरी तरफ सोशल मीडिया में चल रहे कथित लोहा चोरी के आरोप—इन सभी घटनाक्रमों ने उनकी सार्वजनिक छवि को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।

    पत्रकारिता की निष्पक्षता पर भी उठ रहे सवाल

    एक दूसरा सवाल मीडिया की भूमिका को लेकर भी है। शहर में चर्चा है कि इंद्रजीत सिंह छोटू के पक्ष में लगातार सकारात्मक खबरें सामने आती रही हैं, जबकि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को उतनी प्रमुखता नहीं मिलती। यदि किसी कारोबारी के खिलाफ इतने गंभीर आरोप सार्वजनिक मंचों पर लगाए जा रहे हैं तो क्या पत्रकारिता का दायित्व नहीं कि आरोप लगाने वाले और आरोप झेल रहे व्यक्ति—दोनों का पक्ष सामने रखे?

    क्या आर्थिक प्रभाव, व्यक्तिगत संबंध या कारोबारी समीकरण पत्रकारिता की धार को कुंद कर सकते हैं? यह सवाल अब मीडिया जगत के सामने भी खड़ा है।

    राजनीति में एंट्री से पहले ही उठे सवाल

    इंद्रजीत सिंह छोटू को लेकर राजनीतिक गतिविधियों की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या कोई राजनीतिक दल उन्हें संरक्षण देकर आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, या जांचों और आरोपों की बढ़ती परतें राजनीतिक सफर शुरू होने से पहले ही ब्रेक लगा देंगी?

    फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। GST जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या होगा, कथित वित्तीय अंतर का वास्तविक स्वरूप क्या निकलता है और लोहा चोरी से जुड़े आरोपों में कोई आधिकारिक जांच आगे बढ़ती है या नहीं—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेंगे।

    लेकिन इतना जरूर है कि समाजसेवा की चमकदार तस्वीर के पीछे उठ रहे कारोबारी और कथित आपराधिक आरोपों के सवाल अब नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

    जंतर-मंतर से निकली नई पीढ़ी की आवाज अब स्कूलों के दरवाजे तक पहुंची, शिक्षा व्यवस्था की हर कमी पर नजर—गजेंद्र यादव के राजनीतिक भविष्य की भी होगी परीक्षा

    शौर्यपथ विशेष /रायपुर/दुर्ग।
    कभी शिक्षा विभाग की खबरें सरकारी विज्ञप्तियों, परीक्षा परिणामों और नियुक्तियों तक सीमित रहती थीं। लेकिन बदलते भारत में तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब स्कूल शिक्षा केवल विभागीय फाइलों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि अखबारों, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवाओं की सीधी आवाज का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
    जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में Gen Z के आंदोलनों के बाद अब Gen Alpha भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछने सड़क तक पहुंच रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ तक छात्रों की आवाज में एक समान सवाल दिखाई दे रहा है—स्कूल में शिक्षक कहां हैं, मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी और व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा?
    छत्तीसगढ़ में इसकी सबसे ताजा तस्वीर दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में देखने को मिली, जहां Gen Alpha से जुड़े विद्यार्थियों और अभिभावकों के आंदोलन के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव स्वयं स्कूल पहुंचे और छात्रों की समस्याएं सुनीं। आंदोलन में शिक्षकों की कमी और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।

    अब शिक्षा विभाग की हर कमी मोबाइल कैमरे की नजर में
    आज का विद्यार्थी केवल शिकायत नहीं करता—वह उसे रिकॉर्ड करता है, सोशल मीडिया पर डालता है और कुछ ही घंटों में वह मुद्दा हजारों लोगों तक पहुंच जाता है।
    कहीं शिक्षकों की कमी, कहीं स्कूल भवन की समस्या, कहीं मध्यान्ह भोजन को लेकर शिकायत, कहीं परीक्षा और पेपर से जुड़े विवाद, तो कहीं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल—शिक्षा व्यवस्था की छोटी से छोटी कमी अब बड़ी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
    यही बदलाव स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।
    क्योंकि अब सरकार के सामने केवल विभागीय रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जमीन पर खड़ा विद्यार्थी और उसके हाथ में मोबाइल कैमरा भी है।

    गजेंद्र यादव के सामने दो रास्ते—आलोचना या समाधान?
    छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मंत्री गजेंद्र यादव के पास है। हाल के दिनों में शिक्षा विभाग को लेकर उनकी सक्रियता और विभागीय समीक्षा लगातार चर्चा में रही है। 25 अगस्त को भी उनकी अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों, अधोसंरचना, डिजिटल शिक्षा और विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई।
    ऐसे समय में Gen Alpha का मैदान में उतरना उनके लिए सामान्य राजनीतिक चुनौती नहीं है।
    यह वह दौर है जब मंत्री के सामने यह साबित करने का अवसर है कि शिक्षा विभाग केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले बदलावों से चलता है।
    अगर किसी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं और मंत्री वहां शिक्षक पहुंचा देते हैं, अगर भवन जर्जर है और उसका समाधान होता है, अगर किसी व्यवस्था में गड़बड़ी है और उस पर कार्रवाई होती है—तो उसका प्रभाव केवल उस स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा।
    उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जाएगी, उसका वीडियो वायरल होगा और जनता यह देखेगी कि सरकार सवाल सुनती ही नहीं, उनका समाधान भी करती है।
    यही गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक अवसर है।

    पिछली सरकारों का हिसाब या वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी?
    राजनीति में यह आसान रास्ता होता है कि वर्तमान समस्या के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार बता दिया जाए।
    छत्तीसगढ़ में भाजपा की मौजूदा सरकार से पहले भूपेश बघेल सरकार का लगभग पांच वर्ष का कार्यकाल रहा। उससे पहले डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की कमियों की पूरी जिम्मेदारी किसी एक सरकार पर डालना आसान नहीं है।
    लेकिन जनता का सवाल भी उतना ही सीधा है—
    “गलती किसी की भी रही हो, अब सुधार कौन करेगा?”
    यहीं से गजेंद्र यादव की राजनीतिक परीक्षा शुरू होती है।
    यदि मंत्री हर समस्या के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बताते हुए दिखाई देंगे, तो सवाल उठेगा कि वर्तमान सरकार आखिर कब तक अतीत का हिसाब गिनाएगी?
    इसके विपरीत यदि वे पुराने विवादों को किनारे रखकर समस्याओं के समाधान पर फोकस करते हैं, तो यही शिक्षा विभाग उनके राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे मजबूत मंच बन सकता है।

    नरेंद्र मोदी का उदाहरण—छोटे अवसर से बड़ी मंजिल तक
    राजनीति में अवसर हमेशा बड़े मंच पर नहीं मिलता। कई बार किसी नेता को ऐसा विभाग या जिम्मेदारी मिलती है, जहां उसके काम का सीधा असर जनता पर दिखाई देता है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर इसका बड़ा उदाहरण है। संगठन में लंबे समय तक जमीन पर काम करने के बाद वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे।
    यानी राजनीति में अवसर वही बड़ा बनता है, जिसे नेता अपनी कार्यक्षमता से बड़ा बना दे।
    आज गजेंद्र यादव के सामने भी ऐसा ही अवसर दिखाई देता है।
    स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश के लाखों बच्चों, अभिभावकों और हजारों शिक्षकों से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। यदि यहां सुधार दिखाई देता है, तो उसका राजनीतिक लाभ भी व्यापक हो सकता है।
    लेकिन Gen Alpha को नजरअंदाज करना भारी भी पड़ सकता है

    दूसरी तरफ तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
    Gen Alpha वह पीढ़ी है जो सूचना के लिए सरकारी दफ्तरों की प्रतीक्षा नहीं करती। उसके पास मोबाइल है, इंटरनेट है और अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है।
    इसीलिए स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने चुनौती अब केवल विधानसभा, विपक्ष या मीडिया की नहीं है—एक ऐसी पीढ़ी भी सामने है जो सवाल पूछने से नहीं डरती।
    हाल के छत्तीसगढ़ आंदोलन ने यह संकेत दे दिया है कि यदि स्कूल की समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ तो विद्यार्थी और अभिभावक अपनी आवाज सामूहिक रूप से उठा सकते हैं।
    और इस आवाज को सोशल मीडिया की ताकत मिल जाए तो किसी छोटे गांव की समस्या भी पूरे प्रदेश की चर्चा बन सकती है।

    धर्मेंद्र प्रधान का घटनाक्रम भी देता है बड़ा राजनीतिक संदेश
    शिक्षा के मुद्दे की राजनीतिक संवेदनशीलता का राष्ट्रीय उदाहरण भी सामने है। 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रल्हाद जोशी को सौंपा गया।
    इस घटनाक्रम से यह संदेश जरूर निकलता है कि शिक्षा जैसा विभाग केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील राजनीतिक जिम्मेदारी भी है।
    हालांकि किसी मंत्री के पद से हटने के कारणों को केवल छात्र आंदोलन या किसी एक मुद्दे से जोड़ना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि शिक्षा से जुड़े विवाद जब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक दबाव बनाते हैं, तो उसका असर सत्ता और नेतृत्व के फैसलों तक पहुंच सकता है।

    गजेंद्र यादव के लिए फैसला जनता की नजरों के सामने होगा
    आज गजेंद्र यादव के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि Gen Alpha उनके समर्थन में है या विरोध में।
    बड़ा सवाल यह है कि—
    क्या Gen Alpha को यह महसूस होगा कि उसकी आवाज सत्ता तक पहुंच रही है?
    यदि बच्चों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है, शिक्षक पहुंचते हैं, स्कूल सुधरते हैं, भवन बनते हैं, योजनाओं में पारदर्शिता आती है और विभागीय जवाबदेही तय होती है, तो आज जो आंदोलन चुनौती दिखाई दे रहा है, वही कल गजेंद्र यादव की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बन सकता है।
    लेकिन यदि शिकायतों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा दिया गया, समस्याओं के लिए केवल पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया गया और जमीन पर बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो यही डिजिटल पीढ़ी सरकार के कामकाज का सबसे बड़ा आईना भी बन सकती है।
    क्योंकि Gen Alpha को न किसी नेता को वोट देना है, न किसी दल का झंडा उठाना है। उसे सिर्फ बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक और बेहतर शिक्षा चाहिए।
    और यही बात इस पूरे घटनाक्रम को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।

    अवसर भी, चुनौती भी… और फैसला काम करेगा
    राजनीति में हर नेता को अपने आपको साबित करने के लिए बार-बार मौका नहीं मिलता।
    गजेंद्र यादव के पास आज प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक की जिम्मेदारी है। शिक्षा व्यवस्था पर पूरे प्रदेश की नजर है। मीडिया देख रहा है, अभिभावक देख रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण—नई पीढ़ी खुद देख रही है।
    अब आने वाला समय तय करेगा कि Gen Alpha का आंदोलन—
    गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक चुनौती बनता है या उनके राजनीतिक करियर को नई ऊंचाई देने वाला अवसर।
    फिलहाल गेंद स्कूल शिक्षा मंत्री के पाले में है।
    सवाल आंदोलन का नहीं, अब जवाब कार्रवाई का है।

    आर्थिक संबल से कम हुई अभिभावकों की चिंता, पढ़ाई से विवाह तक भविष्य को लेकर बढ़ा भरोसा

    रायपुर / शौर्यपथ / बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की चिंता हर अभिभावक के मन में होती है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा की श्रीमती आकांक्षा भी अपनी बेटी की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटी के भविष्य के लिए पर्याप्त प्रबंध करना उनके लिए चुनौती था। ऐसे में नोनी सुरक्षा योजना उनके लिए उम्मीद और आर्थिक संबल बनकर सामने आई।

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से बेटी का योजना में पंजीयन कराने के बाद आकांक्षा को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है। उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली सहायता बेटी की पढ़ाई, आगे के महत्वपूर्ण पड़ाव और विवाह जैसे अवसरों पर परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी। इससे उन्हें बेटी के भविष्य को लेकर मानसिक राहत भी मिली है।

    सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, भविष्य का भरोसा

    आकांक्षा चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी करे और आत्मनिर्भर बने। उनके लिए नोनी सुरक्षा योजना केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक भरोसेमंद सहारा है।

    उन्होंने कहा कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने वाली सरकारी योजनाएं परिवारों का संबल बढ़ाती हैं। इससे अभिभावकों में बेटियों की शिक्षा, बेहतर परवरिश और उन्हें आगे बढ़ाने का विश्वास मजबूत होता है।

    मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    आकांक्षा ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी योजनाएं बेटियों के भविष्य को लेकर परिवारों में उम्मीद और सुरक्षा का भाव पैदा कर रही हैं।

    आकांक्षा के लिए नोनी सुरक्षा योजना अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुकी है।

    दंतेवाड़ा के दूरस्थ छिंदनार में पहली बार पूरे गांव ने सुनी प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’; मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूद
    दंतेवाड़ा/ शौर्यपथ / नक्सलवाद के साए से बाहर निकलते बस्तर की बदलती तस्वीर रविवार को दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में नजर आई। कुछ समय पहले तक जहां धमाकों की आवाज लोगों में दहशत पैदा करती थी, वहीं आज उसी गांव में ग्रामीण उत्साह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनने के लिए एकत्र हुए। गांव के कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुना।
    ग्रामीणों के साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने भी कार्यक्रम सुना। प्रधानमंत्री के संदेश को ग्रामीणों ने बेहद तल्लीनता से सुना और इसे देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला कार्यक्रम बताया। ग्रामीणों का कहना था कि ‘मन की बात’ देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की पहल को सामने लाकर लोगों को प्रेरित करती है।

    बदलते बस्तर की नई तस्वीर

    छिंदनार में ग्रामीणों का इस तरह एकत्र होकर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुनना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते माहौल का प्रतीक माना जा रहा है। नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सरकार सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

    दशकों तक विकास से दूर रहे दुर्गम गांवों तक शासन की योजनाएं और नागरिक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास तेज किए गए हैं। ऐसे में छिंदनार की तस्वीर यह संदेश देती नजर आई कि जहां कभी बंदूक और धमाकों का भय था, वहां अब विकास, संवाद और रेडियो की आवाज सुनाई दे रही है।

    धमाकों से ‘मन की बात’ तक का यह सफर बदलते बस्तर की सबसे बड़ी कहानी है।

    राज्य स्तरीय UCC समिति को दिए जाएंगे सुझाव, शहर काजी और वरिष्ठ अधिवक्ता रहेंगे मौजूद

       रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति को सुझाव देने के लिए रायपुर मुस्लिम समाज की ओर से एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। यह जानकारी छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दी है।

    1 सितंबर को गुरु घासीदास ऑडिटोरियम में होगी बैठक

    मुस्लिम समाज की यह बैठक 01 सितंबर 2026, मंगलवार को स्थान- गुरु घासीदास ऑडिटोरियम, कार्यालय छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड के सामने, कलेक्ट्रेट चौक, रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए रायपुर की समस्त मस्जिदों में जुमा को ऐलान के माध्यम से सूचना दी गई है।

    दो प्रतियों में लिखित सुझाव लाने की अपील

    आयोजकों ने अपील की है कि UCC के संबंध में सुझाव लिखित में अध्यक्ष, समान नागरिक संहिता समिति, छत्तीसगढ़ के नाम से संबोधित करते हुए दो प्रतियों में प्रस्तुत करें। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काजी जनाब कारी डॉ. मोहम्मद इमरान अशरफी साहब और अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब फैसल रिजवी साहब उपस्थित रहेंगे। मुस्लिम समाज द्वारा दिए गए सुझावों को बैठक में एकत्रित कर शाम 04:00 बजे समान नागरिक संहिता (UCC) समिति, छत्तीसगढ़ के माननीय सदस्यों के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किया जाएगा।

    टनल रेस्क्यू टीम और बेली ब्रिज लेकर पहुंचा भारत; 88 भारतीय सुरक्षित निकाले, 287 नागरिक अब भी संपर्क से बाहर

      नई दिल्ली / एजेंसी(पीआईबी) / नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बीच भारत ने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के तहत राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। भारत की चौथी विशेष उड़ान 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची। इसके साथ नेपाल को भेजी गई कुल आपातकालीन राहत सामग्री 68.5 टन हो गई है। भारत ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन मैत्री 2.0’ के तहत व्यापक रूप दिया है।

    टनल रेस्क्यू टीम मैदान में

    नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में श्रमिकों के फंसे होने की आशंका के बीच भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम अत्याधुनिक मलबा हटाने वाले उपकरणों और लाइफ-डिटेक्टर सेंसर के साथ बचाव अभियान में जुटी है।

    बाढ़ में बह चुके पुलों के कारण प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क बहाल करने के लिए भारत से 16 ट्रक बेली ब्रिज उपकरण नेपाल पहुंच चुके हैं। इनसे करीब 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज तैयार किया जाएगा। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज भेजने की तैयारी है।

    88 भारतीय सुरक्षित, सैकड़ों अब भी संपर्क से बाहर

    भारत ने अब तक 88 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें नागपुर और कर्नाटक के तीर्थयात्री भी शामिल हैं। लापता लोगों की पहचान और शवों के DNA परीक्षण में सहायता के लिए भारत की छह फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमें काठमांडू में स्थानीय प्रशासन के साथ काम कर रही हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 287 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अभी संपर्क से बाहर हैं। भारतीय दूतावास नेपाल सेना के साथ मिलकर उनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहा है।

    आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क

    भारतीय दूतावास, काठमांडू कंट्रोल रूम:
    ? +977-9851107021
    ? +977-9851312456

    विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली 24x7:
    ? +91-11-23012113
    ? +91-11-23014104

    बिहार आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम:
    ? 0612-2217305 | टोल-फ्री: 1070

    नेपाल की त्रासदी के बीच राहत सामग्री, विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम, पुल निर्माण उपकरण और नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत की बहुआयामी सहायता ने ‘पड़ोसी पहले’ नीति को जमीन पर प्रभावी रूप से सामने रखा है।

    5,967 पदों की भर्ती पूरी करने और सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग; कवर्धा-रायपुर में दिन-रात धरना, विजय शर्मा बोले—‘मामला कैबिनेट के निर्णय से होगा’

       कवर्धा/रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में विज्ञापित 5,967 पदों को पूरी तरह भरने और 1,940 रिक्त पदों के लिए सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में युवा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के कवर्धा स्थित निवास/कार्यालय और रायपुर स्थित कार्यालय के बाहर लगातार धरने पर बैठे हैं। अभ्यर्थी रात भी सड़क और कार्यालय के बाहर गुजार रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक सेकंड लिस्ट को लेकर सरकार लिखित निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार पुलिस भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और निर्धारित 5,967 पदों में से 1,940 पद अभी रिक्त हैं। उनका कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को मौका देने के लिए दूसरी प्रतीक्षा सूची जारी कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। 23-24 अगस्त के दौरान कवर्धा में गृह मंत्री के कार्यालय के घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस की स्थिति भी बनी।

    ‘आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए’

    अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे गृह मंत्री, अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री से पहले भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उन्हें ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन ही मिले। उनका कहना है कि यदि पद स्वीकृत और विज्ञापित हैं तो उन्हें खाली रखने के बजाय भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

    गृह मंत्री ने दिया बातचीत का भरोसा

    आंदोलन के बीच उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा स्वयं अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे उनकी मांग के प्रति संवेदनशील हैं और इस संबंध में अपनी ओर से सरकार को लिखकर भेज चुके हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सेकंड लिस्ट जारी करने का अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर ही लिया जा सकता है।

    विजय शर्मा ने आंदोलनकारी युवाओं को मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति के समक्ष ले जाने तथा मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात कराने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि अभ्यर्थी सीधे अपनी मांग रख सकें।

    ‘लिखित फैसला नहीं तो आंदोलन जारी’

    फिलहाल कवर्धा और रायपुर में प्रदर्शन जारी है। अभ्यर्थी मांग पर अड़े हैं और उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। दूसरी सूची जारी करने को लेकर आधिकारिक आदेश या ठोस लिखित निर्णय आने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी गई है।

    अब नजर इस बात पर है कि 5,967 पदों की भर्ती में शेष 1,940 पदों को लेकर कैबिनेट क्या फैसला करती है—और क्या वर्दी की उम्मीद लगाए बैठे इन युवाओं को सेकंड लिस्ट के रूप में राहत मिलती है?

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