January 08, 2026
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शौर्यपथ

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फ्री ब्लड टेस्ट का व्यापक लाभ — हर दिन सैकड़ों लोग करा रहे 31 पैरामीटर की जांच

भिलाई नगर / शौर्यपथ /
वैशाली नगर विधानसभा के रहवासियों के लिए नए वर्ष की शुरुआत बड़ी सौगात के साथ होने जा रही है। क्षेत्र के विधायक रिकेश सेन ने जीरो रोड, शांति नगर स्थित अपने विधायक कार्यालय में मात्र 1 रुपये में एक्स-रे सुविधा शुरू करने की घोषणा की है। यह सेवा 14 जनवरी से प्रतिदिन सुबह 8 से 11 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

एक्स-रे सुविधा क्यों ज़रूरी?
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर विधायक रिकेश सेन ने कहा कि एक्स-रे आधुनिक चिकित्सा पद्धति का मुख्य आधार है। यह—हड्डियों के फ्रैक्चर,मोच, गठिया एवं जोड़ों के विस्थापन ,निमोनिया, टीबी तथा सांस संबंधी संक्रमण ,पाचन तंत्र में समस्या या शरीर में फंसी वस्तुओं ,दंत समस्याओं ,स्तन कैंसर (मैमोग्राम) सहित विभिन्न ट्यूमर का तेज़, सुरक्षित और सटीक निदान प्रदान करता है, जिससे डॉक्टर उपचार की सही दिशा तय कर पाते हैं और गंभीर स्थितियों में मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

पहले से मिल रही ब्लड टेस्ट सुविधा को मिल रही बड़ी प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य सेवाओं को जनसुलभ बनाने के उद्देश्य से विधायक कार्यालय में पहले से चल रही निःशुल्क ब्लड टेस्ट सुविधा क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। हर दिन सैकड़ों लोग आकर 31 प्रकार के ब्लड पैरामीटर की जांच करवा रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट उन्हें वहीं उपलब्ध कराई जा रही है।

‘सभी को सहज स्वास्थ्य सुविधा’ — विधायक रिकेश सेन
विधायक रिकेश सेन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि वैशाली नगर विधानसभा का कोई भी व्यक्ति आर्थिक कारणों से स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि — “एक्स-रे बेहद ज़रूरी चिकित्सा सुविधा है। हम चाहते हैं कि आम लोग महंगे इलाज और जांचों की चिंता किए बिना सही समय पर निदान करा सकें, ताकि गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सके।”

14 जनवरी से शुरू होगी 1 रुपये वाली एक्स-रे सुविधा
वैशाली नगर क्षेत्र के सभी रहवासी विधायक कार्यालय में सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि देकर एक्स-रे करा सकेंगे। समय — प्रतिदिन सुबह 8:00 से 11:00 बजे तक

दंतेवाड़ा में आयोजित चैम्पियनशिप में टीम ने जीता तृतीय स्थान, कई वर्गों में स्वर्ण–रजत–कांस्य पदक

दंतेवाड़ा।शौर्यपथ खेल समाचार
दंतेवाड़ा जिले के पुराना मार्केट इनडोर स्टेडियम में हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय थाई बॉक्सिंग प्रतियोगिता में दुर्ग जिले की कारा-कु-जु-बो-काई काॅन कराते डो मार्शल आर्ट्स फुल कांटेक्ट कराते संस्था के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार भागीदारी में ही चैम्पियन ट्रॉफी हासिल कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दंतेवाड़ा जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत, विधायक चेतराम आतामी, महापौर श्रीमती पायल गुप्ता, तथा महिला आयोग की प्रदेश सदस्य श्रीमती मंडावी उपस्थित रहीं।
संस्था के डायरेक्टर व मुख्य प्रशिक्षक सेनसाई गिरी राव के मार्गदर्शन में आयोजित इस सहभागिता में टीम कोच जे. पी. राजू तथा टीम मैनेजर सुभाष सोनी के नेतृत्व में कुल 21 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय दिया।

⭐ पदक विजेता खिलाड़ी
संस्था के 21 खिलाड़ियों में से कई खिलाड़ियों ने विभिन्न भार वर्गों में पदक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया—
जे. हर्षिता (-22 किग्रा) – स्वर्ण , पार्थ दावड़ा (-36 किग्रा) – रजत , तृप्ति साहू (-49 किग्रा) – स्वर्ण , पूर्वी सिंह (-50 किग्रा) – कांस्य , अंशिका राय (-36 किग्रा) – कांस्य , वीणा देवांगन (-32 किग्रा) – कांस्य , तानिया वर्मा (-25 किग्रा) – स्वर्ण , कोमल देवांगन (-38 किग्रा) – रजत , विवेक पांडे (-32 किग्रा) – कांस्य , मुस्कान कुमारी (-38 किग्रा) – कांस्य ,अविश सिंह मनराल (-60 किग्रा) – कांस्य , रायन दावड़ा (-50 किग्रा) – रजत , चांदनी साहू (-60 किग्रा) – स्वर्ण , एल. सुजल (-57 किग्रा) – स्वर्ण , जी. श्रेयस (-75 किग्रा) – स्वर्ण , महक फातिमा (-54 किग्रा) – स्वर्ण,अनुज दहाते (-60 किग्रा) – स्वर्ण
इसके साथ ही विपिन दहाते, सोहन जोशी, आराध्या ताम्रकार और नूतन साहू ने भी सराहनीय प्रदर्शन कर टीम के कुल स्कोर में अहम योगदान दिया।

बधाई और सम्मान
संस्था के इस गौरवपूर्ण प्रदर्शन पर सीनियर एवं जूनियर खिलाड़ियों, अभिभावकों और वरिष्ठ सदस्यों—
अरविंद चंदेल, दीपक गुप्ता, जेपी राजू, रामकुमार पांडे, गांधी सोनी, सुभाष सोनी, लक्ष्मी तिवारी, मनोज नेताम, भरत लाल साहू, श्रवण साहू, विधि मिश्रा, काजल बेहरा, महक हुसैन, अमरकांत तिवारी—ने सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
संस्था के डायरेक्टर सेनसाई गिरी राव ने खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष को प्रतियोगिता की वास्तविक उपलब्धि बताया तथा आने वाले नेशनल व इंटरनेशनल इवेंट्स में और बेहतर प्रदर्शन का विश्वास जताया।

राम रसोई के नाम पर सड़क पर कब्जा, धर्म स्थल के सामने कब्ज़े की दीवार , और प्रशासन की चुप्पी — क्या यही है सुशासन ?

शौर्यपथ विशेष
एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार सुशासन की बात कर रहे हैं,धर्म रक्षा की बात कर रहे है सुशासन पर्व मनाया जा रहा है, और जनता को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि सरकार पारदर्शिता, न्याय और कानून के राज के लिए प्रतिबद्ध है प्रदेश में राम राज्य की स्थापना हो रही है । वहीं दूसरी ओर, उन्हीं की सरकार में नियुक्त अधिकारी ज़मीनी स्तर पर सुशासन को खुलेआम आईना दिखाते नजर आ रहे हैं , हिन्दुओ के आराध्य प्रभु राम की सत्य और निति की बातो का विरोध करते नजर आ रहे है । दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में सामने आया मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि सरकार के दावों पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह और धर्म व प्रभु राम के नाम पर अवैध कब्ज़े सन्देश खड़ा करता है।


दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में गणेश मंदिर के सामने स्थित एक सार्वजनिक मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए उपयोग में आने वाला स्थल, राम रसोई के संचालक द्वारा सड़क पर कब्जा कर लिया गया है। यह कोई खाली भूमि नहीं थी, बल्कि वर्षों से आम जनता के आवागमन और त्योहारों के दौरान प्रार्थना स्थल के रूप में प्रयुक्त होती रही है। इसके बावजूद यह अवैध कब्जा आज भी जस का तस बना हुआ है।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल को इस अवैध कब्जे की पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आम जनता ने विरोध दर्ज कराया, आवाज उठाई, लेकिन धनवानों के प्रभाव और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी के सामने जनता की आवाज दबती चली गई। यह चुप्पी केवल लापरवाही नहीं, बल्कि कहीं न कहीं अवैध कब्जाधारियों को दिया गया मौन समर्थन प्रतीत होती है।


एक तरफ शहर के चौक-चौराहों पर अतिक्रमण की भरमार है, दूसरी ओर निगम प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने के लिए गरीबों की छोटी-छोटी गुमटियों पर बुलडोज़र चलाकर कार्रवाई का ढोल पीटता है। प्रश्न यह है कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए ही क्यों सक्रिय होता है? धनवानों और प्रभावशाली लोगों के सामने प्रशासन की कलम क्यों सूख जाती है?
राम रसोई जैसे पवित्र नाम का उपयोग कर शासकीय भूमि और सड़क पर कब्जा करना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक आस्था पर भी प्रहार है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने कभी अन्याय और नियमों के विरुद्ध आचरण नहीं किया, लेकिन उन्हीं के नाम पर आज अवैध कब्जा किया जा रहा है — और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
यह और भी चिंताजनक है कि यह सब उस दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में हो रहा है, जहाँ प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, प्रदेश संगठन मंत्री जितेंद्र वर्मा और दुर्ग जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक जैसे बड़े नेताओं के निवास हैं। इन सबके बीच खुलेआम अवैध कब्जे पर कार्रवाई न होना क्या इस बात का संकेत नहीं है कि मुख्यमंत्री का सुशासन दुर्ग में सिर्फ काग़ज़ों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित है?


निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल द्वारा शहर की बिगड़ती व्यवस्था पर मौन, अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई से परहेज और चुनिंदा कार्रवाई की नीति, यह स्पष्ट करती है कि संवैधानिक शक्तियों का उपयोग जनहित में नहीं, बल्कि मनमर्जी और प्रभाव के आधार पर किया जा रहा है।
दुर्ग नगर निगम की यह स्थिति सरकार के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते ऐसे अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो सुशासन का दावा जनता की नजर में खोखला साबित होगा। सवाल साफ है — क्या सरकार सच में सुशासन चाहती है, या फिर कुछ अधिकारी अपनी चुप्पी से पूरे शासन को कठघरे में खड़ा करने पर आमादा हैं?

लोक-संस्कृति का यह महोत्सव 10 जनवरी से 06 फरवरी तक चलेगा

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशा निर्देश पर छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की लोक-संस्कृति, परंपरा और विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए बस्तर पंडुम 2026 के आयोजन की तैयारियां शुरु कर दी गई है। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में “बस्तर पंडुम 2026” का आयोजन जनपद, जिला एवं संभाग स्तर पर प्रतियोगात्मक स्वरूप में किया जाएगा। यह आयोजन बस्तर अंचल की लोककला, शिल्प, नृत्य, गीत-संगीत, पारंपरिक व्यंजन, बोली-भाषा, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, नाट्य एवं जनजातीय जीवन-पद्धति के संरक्षण और संवर्धन का एक भव्य मंच बनेगा।
राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सभी सात जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर-में इस उत्सव को व्यापक सहभागिता के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग की 1885 ग्राम पंचायतों से जुड़े 32 जनपद मुख्यालयों में 12 विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ग्राम पंचायत स्तर से चयनित लोक कलाकारों और कला दलों को निःशुल्क ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में आमंत्रित किया जाएगा। पहले चरण में जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं 10 से 20 जनवरी 2026 के बीच आयोजित होंगी। प्रत्येक विधा से एक-एक विजेता दल का चयन किया जाएगा, जिन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। जनपद स्तर पर आयोजन के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को 5 लाख रुपये का बजट आबंटित किया गया है।
दूसरे चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं 24 से 29 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएंगी। जिला स्तर पर प्रत्येक विधा के विजेता दल को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले को 10 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। अंतिम और सबसे भव्य चरण के रूप में संभाग स्तरीय प्रतियोगिता 2 से 6 फरवरी 2026 तक जगदलपुर, जिला बस्तर में आयोजित होगी। इसमें सातों जिलों से चयनित 84 विजेता दल भाग लेंगे। संभाग स्तर पर प्रथम पुरस्कार 50 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार 20 हजार रुपये तथा शेष 48 प्रतिभागी दलों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
इस महोत्सव की विशेषता यह होगी कि इसमें केवल वही कलाकार भाग ले सकेंगे, जो बस्तर संभाग के वास्तविक मूल निवासी हैं और जनजातीय लोक कला विधाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, गांवों और कस्बों में अपनी कला से पहचान बना चुके वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ नवोदित कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जाएगा।
प्रत्येक स्तर पर विजेता दलों को पुरस्कार राशि के साथ प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह (फोटो फ्रेम) प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। आयोजन को जनउत्सव का स्वरूप देने के लिए समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों, आदिवासी मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों एवं संस्कृति प्रेमियों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
इस संपूर्ण आयोजन के लिए संचालनालय, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। संस्कृति विभाग से श्री युगल तिवारी, नोडल अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक (मोबाइलः 94063-98080) को आयोजन का दायित्व सौंपा गया है। समन्वय हेतु श्री प्रशांत दुबे (मोबाइलः 75093-62263) एवं श्री भाविन राठौर (मोबाइलः 99071-41307) को नामांकित किया गया है। सभी जिलों को अपने-अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि “बस्तर पंडुम 2026” को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से आयोजित किया जाए, ताकि बस्तर की लोक-संस्कृति की असली पहचान को सहेजते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

भोरम देव कॉरिडोर विकास से छत्तीसगढ़ के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
धार्मिक-ऐतिहासिक विरासत को मिलेगा आधुनिक स्वरूप

रायपुर / शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल भोरमदेव के लिए नया वर्ष 2026 एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली ‘भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना’ का भूमिपूजन 01 जनवरी को संपन्न होगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। यह अब तक की छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी केंद्रीय पर्यटन परियोजना मानी जा रही है।
इस परियोजना का भूमिपूजन 01 जनवरी को केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के करकमलों से मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की गरिमामय उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं श्री अरुण साव, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, सांसद श्री संतोष पाण्डेय, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री नीलू शर्मा सहित विधायकगण, निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण एवं स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।
‘छत्तीसगढ़ के खजुराहो’ के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इस कॉरिडोर के विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को नई गति मिलेगी। हाल ही में मंदिर का केमिकल संरक्षण कार्य भी पूर्ण किया गया है, जिससे इस धरोहर की दीर्घकालीन सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
परियोजना के अंतर्गत मुख्य मंदिर परिसर, तालाब क्षेत्र, मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ मंदिर, शिव प्लाजा, मेला ग्राउंड एवं सरोधा डैम में प्रवेश द्वार, प्लाजा, संग्रहालय, मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, पार्क, ब्रिज, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, कैफेटेरिया, फूड कोर्ट, बोटिंग एवं वाटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इस परियोजना से पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। भोरमदेव कॉरिडोर का भूमिपूजन छत्तीसगढ़ के पर्यटन इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

भिलाई। शौर्यपथ विशेष

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय और उनके भाई, छत्तीसगढ़ शासन में दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री राकेश पाण्डेय , प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग मोर्चों पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। जहां सरोज पाण्डेय केंद्रीय राजनीति में एक मुखर, प्रभावशाली और अनुभवी नेता के रूप में पहचान बना चुकी हैं, वहीं राकेश पाण्डेय संगठन से निकलकर भिलाई में जमीनी राजनीति के मैदान में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में भिलाई में पहली बार पंडित धीरेंद्र शास्त्री महाराज की श्री हनुमंत कथा का आयोजन हुआ। आयोजनकर्ता के रूप में राकेश पाण्डेय का यह प्रयास संगठनात्मक और व्यवस्थागत दृष्टि से सफल माना जा सकता है। पांच दिनों तक चली कथा गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई, श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने सहभागिता की और स्वयं आयोजक राकेश पाण्डेय ने पूरे आयोजन के दौरान किसी भी विवादित बयान या आक्रामक राजनीतिक संकेत से दूरी बनाए रखी। उन्होंने इस आयोजन को लगातार "शुद्ध धार्मिक कार्यक्रम" के रूप में प्रस्तुत किया।
इसी तरह, भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के बावजूद सुश्री सरोज पाण्डेय ने भी इस आयोजन के दौरान एक संयमित और संतुलित भूमिका निभाई । मंचीय उपस्थिति और सार्वजनिक वक्तव्यों में विवाद से बचने का प्रयास साफ दिखाई दिया। कुल मिलाकर, नेतृत्व के स्तर पर यह आयोजन राजनीतिक शालीनता और परिपक्वता का उदाहरण बन सकता था।
लेकिन यहीं से कहानी का दूसरा, और शायद ज्यादा महत्वपूर्ण, पहलू सामने आता है।

जहां नेता सौम्य, वहां समर्थक आक्रामक
इस पूरे आयोजन में एक बात जिसने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी, वह थी कट्टर समर्थकों का व्यवहार। एक ओर राकेश पाण्डेय का सौम्य आचरण, संवादशीलता और संयम दिखा, वहीं दूसरी ओर उनके और सुश्री सरोज पाण्डेय के कुछ समर्थकों का दमदारी, घमंड और अहंकार से भरा रवैया न सिर्फ आम जनता, बल्कि स्वयं भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।
कई लोग जिन्होंने इस आयोजन को नजदीक से देखा, उनका कहना है कि नेताओं और आम श्रद्धालुओं के बीच एक अदृश्य लेकिन कठोर दीवार खड़ी नजर आई—और यह दीवार नेताओं ने नहीं, बल्कि उनके कट्टर समर्थकों ने बनाई। प्रवेश, संवाद, व्यवस्था और व्यवहार—हर स्तर पर यह अहसास हुआ कि नेता तक पहुंच आसान नहीं, क्योंकि बीच में समर्थकों की "फौज" खड़ी है।

दुर्ग की राजनीति और पुराना अनुभव
दुर्ग-भिलाई की राजनीति में यह कोई नई स्थिति नहीं है। यहां पहले भी देखा गया है कि चुनावी मौसम या सामान्य परिस्थिति में जब आम जनता नेता से सीधे संवाद करना चाहती है, तब अति-उत्साही और कट्टर समर्थक उस संवाद को बाधित कर देते हैं। परिणाम यह होता है कि जनता का असंतोष सीधे नेता तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ देता है—और वही असंतोष चुनाव के दिन चुपचाप अपना असर दिखाता है।
इसी संदर्भ में एक पुरानी कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है—
"नेता को सबसे बड़ा नुकसान विरोधी नहीं, उसके कट्टर समर्थक पहुंचाते हैं।"
राजनीतिक भविष्य की राह में चेतावनी
इसमें कोई संदेह नहीं कि सुश्री सरोज पाण्डेय एक परिपक्व, अनुभवी और राष्ट्रीय स्तर की नेता हैं, और राकेश पाण्डेय संगठन से निकलकर जमीनी राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन श्री हनुमंत कथा का यह आयोजन एक संकेत भी दे गया—कि यदि समर्थकों का अहंकार नियंत्रित नहीं हुआ, तो यही लोग आने वाले समय में नेताओं और आम जनता के बीच न टूटने वाली दीवार बन सकते हैं।
राजनीति में जीत का रास्ता मंच, आयोजन या शक्ति-प्रदर्शन से नहीं, बल्कि जनसंपर्क, विनम्रता और संवाद से बनता है। अगर नेता जमीन पर खड़े रहकर जनता की बात सुनना चाहते हैं, तो उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके आसपास खड़े लोग जनता को दूर न भगाएं।
भिलाई की श्री हनुमंत कथा धार्मिक आयोजन के रूप में सफल रही, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसने एक अहम सवाल छोड़ दिया—
क्या कट्टर समर्थकों का घेरा, नेताओं के बड़े राजनीतिक भविष्य के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है?
यदि समय रहते इस पर आत्ममंथन नहीं हुआ, तो आने वाले चुनावी मौसम में यह "समर्थन" ही सबसे भारी बोझ साबित हो सकता है।

बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए सरकार की प्रशासनिक अक्षमता जिम्मेदार
रायपुर/ शौर्यपथ / राजधानी में कमिश्नरी प्रणाली लागू करने का मंत्रिमंडल का फैसला शुतुरमुर्गी है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार राजधानी और प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुधारने क्या निर्णय लेना चाहिए यह समझ ही नहीं पा रही है, बीमारी कहीं है, इलाज कहीं और खोजा जा रहा है। पिछले दो साल में मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की लचर प्रशासनिक क्षमता के कारण प्रदेश में अपराध बढ़ गये है।
राजधानी रायपुर अपराध का गढ़ बन गया है। सरकार इसके लिए प्रदेश के अक्षम गृहमंत्री को बदलने के बजाए पुलिस की प्रणाली बदलने जा रही है। कमिश्नरी प्रणाली लागू हो जाने से क्या हो जायेगा? पुलिस कमिश्नर को दंडाधिकारी अधिकार भी मिल जायेंगे। सरकार को क्या ऐसा लगता है वर्तमान में पुलिस और जिला प्रशासन के बीच सामंजस्य का अभाव है, इस कारण राजधानी की कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है, इसलिए कमिश्नर प्रणाली लागू करने जा रहे है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ऐसे समय जब दुनिया भर में प्रशासनिक सुधार के लिए व्यवस्था का सरलीकरण किया जा रहा है, अधिकारों के विकेन्द्रीयकरण का दौर चल रहा उस समय राज्य सरकार द्वारा कमिश्नरी प्रणाली लागू कर के सत्ता अधिकारों का केंद्रीयकरण किया जा रहा है। एक ही व्यक्ति के अधीन गिरफ्तारी से लेकर जमानत तक के अधिकार दिये जाने के निर्णय लिया जाना सरकार की रूढ़िवादी सोच को दर्शाता है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था सरकार की लापरवाही, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की अक्षमता के कारण बिगड़ी है। केवल राजधानी नहीं प्रदेश के सभी जिलों में लूट, हत्या, बलात्कार, डकैती, चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ गयी है। राजधानी में सरकार बिगड़ती कानून व्यवस्था के नाम पर कमिश्नरी प्रणाली लागू करने जा रही है, शेष प्रदेश में क्या करेंगे? गृहमंत्री का गृह जिला कवर्धा तो दो साल में अपराध की राजधानी बन गयी है। बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़ हर जगह अपराध का ग्राफ बढ़ा है। वहां के बारे में सरकार की क्या कार्ययोजना है?
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यदि सरकार को ऐसा लगता है कि बिगड़ चुकी कानून व्यवस्था का समाधान सिर्फ कमिश्नरी प्रणाली लागू करना ही है तो प्रदेश के सभी बड़े शहरों बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर, रायगढ़ में भी कमिश्नरी प्रणाली लागू करके देख लें।

  दुर्ग / शौर्यपथ /

   अविभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भविष्यदृष्टा एवं जननेता पंडित रविशंकर शुक्ल की 68 वीं पुण्यतिथि पर 31 दिसम्बर, 2025 को इस्पात नगरी भिलाई के सेक्टर-9 स्थित उनकी भव्य प्रतिमा के समक्ष प्रातः 10.00 बजे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर भिलाई बिरादरी के सदस्य और आम जन द्वारा पं. शुक्ल को पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी।
उल्लेखनीय है कि देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना में पंडित रविशंकर शुक्ल ने आधारभूत भूमिका निभाई थी। पं. जगन्नाथ शुक्ल एवं श्रीमती तुलसी देवी के पुत्र के रूप 2 अगस्त, 1876 में सागर में जन्में पं. रविशंकर शुक्ल बचपन से ही मेघावी रहे। उनकी प्राथमिक शिक्षा सागर में ही हुईं। व्यवसाय के कारण पिता श्री जगन्नाथ शुक्ल के छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में आ जाने के कारण पं. शुक्ल ने अपनी मिडिल स्कूल की शिक्षा राजनांदगांव से शुरू की। कुछ ही समय बाद पिता के रायपुर आने से पु. शुक्ल ने अपनी शिक्षा रायपुर में जारी रखी। जबलपुर के राबिनसन कॉलेज से इंटरमिडियेट और नागपुर के हिसलॉप कॉलेज से शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही युवा पं. शुक्ल कांग्रेस के आंदोलन से प्रभावित हो गये थे। 1899 में 22 वर्ष की उम्र में पं. शुक्ल स्नातक हो गये।
1898 में अमरावती में हुए कांग्रेस के 13 अधिवेशन में पं. शुक्ल ने अपने शिक्षक के साथ भाग लिया और देश के अनेक तत्कालीन महानायकों के संपर्क में आये। यही से पं. शुक्ल की राजनैतिक जीवन और आजादी के आंदोलन की यात्रा प्रारंभ हुई। 50 वर्ष के अपने राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन में पं. शुक्ल ने अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास, शिक्षा और आधारभूत संरचनाओं की स्थापना के लिये महत्वपूर्ण और स्मरणीय कार्य किये। पूर्व सी पी एवं बरार तथा अविभाजित मध्य प्रदेश के विकास में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जायेगा। पं. रविशंकर शुक्ल ने 31 दिसम्बर, 1956 में 80 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली में अंतिम सांस ली।


देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना के प्रबल समर्थक और प्रणेता पं. शुक्ल की पुण्य स्मृति में श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन भिलाई इस्पात संयंत्र के क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा किया गया है। दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी के और पं रवि शंकर शुक्ल सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति और कान्यकुब्ज सामाजिक चेतना मंच भिलाई द्वारा सभी लोगों से श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने और श्रद्धांजलि देने की अपील की है।
पं रवि शंकर शुक्ल सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति के महासचिव श्री मनोज मिश्रा और जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष श्री मुकेश चंद्राकर ने इस्पात नगरी के सभी गणमान्य नागरिकों, जिला कांग्रेस समिति के सदस्यों और भिलाई बिरादरी के सदस्यों से श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

शौर्यपथ विशेष 2025

वर्ष 2025 छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज किया गया है। राज्य ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर "रजत जयंती" मनाई। यह वर्ष न केवल उत्सवों का रहा, बल्कि राज्य ने बुनियादी ढांचे, शांति बहाली, आर्थिक सुदृढ़ीकरण और सांस्कृतिक गौरव के क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं।

1. रजत जयंती महोत्सव और राष्ट्रीय गौरव
1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर नया रायपुर में भव्य "राज्य उत्सव" का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समारोह का उद्घाटन करते हुए आगामी वर्ष को "अटल निर्माण वर्ष" के रूप में घोषित किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन और एक अत्याधुनिक डिजिटल जनजाति संग्रहालय का लोकार्पण किया गया, जो राज्य की आधुनिक दृष्टि और गौरवशाली अतीत के संगम का प्रतीक बना।

2. नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक विजय
सुरक्षा के मोर्चे पर साल 2025 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ। राज्य सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के कड़े प्रहार के चलते बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुँच गया है। इस वर्ष रिकॉर्ड 1,562 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। इसके साथ ही, बड़े नक्सली नेटवर्क को ध्वस्त करने में मिली सफलता ने राज्य में शांति और विकास की नई राहें खोली हैं।

3. आर्थिक क्रांति और निवेश के नए आयाम
छत्तीसगढ़ अब केवल एक कृषि प्रधान राज्य नहीं, बल्कि भारत के टॉप 10 निवेश गंतव्य राज्यों में शामिल हो चुका है।

लिथियम नीलामी: छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना जिसने अपने लिथियम ब्लॉक की सफल ई-नीलामी की, जिससे यह भविष्य की 'क्लीन एनर्जीÓ और इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक का केंद्र बनने की राह पर है।
बजट 2025-26: राज्य ने 1.65 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया, जिसमें 'त्र्रञ्जढ्ढÓ (बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास) पर विशेष जोर दिया गया।
कृषि समृद्धि: 'कृषक उन्नति योजनाÓ के माध्यम से किसानों को सीधे लाभ पहुँचाया गया और तेंदूपत्ता संग्राहकों के पारिश्रमिक को बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया।

4. वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक पहचान
छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति ने सात समुंदर पार अपनी चमक बिखेरी। जापान के ओसाका में आयोजित विश्व एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ के मंडप ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की। बस्तर की 'डोकरा कलाÓ और जनजातीय शिल्प को देखने के लिए प्रतिदिन हजारों विदेशी पर्यटक उमड़े। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा पर्यटन को "पूर्ण उद्योग का दर्जा" देने से 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो स्थानीय रोजगार के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

5. सामाजिक सशक्तिकरण: नारी शक्ति और शिक्षा
वर्ष 2025 में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को नई उड़ान मिली। 'लखपति दीदीÓ अभियान के तहत राज्य की 74,000 से अधिक महिलाओं ने 1 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय अर्जित कर एक मिसाल पेश की। साथ ही, 'महतारी वंदन योजनाÓ के निरंतर क्रियान्वयन ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार किया है। शिक्षा और स्वास्थ्य में नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार द्वारा "सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य" के पुरस्कार से भी नवाजा गया।

6. बुनियादी ढांचा और भविष्य की योजनाएं
शहरी विकास के क्षेत्र में रायपुर और दुर्ग के बीच मेट्रो रेल परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन की शुरुआत एक बड़ी सुखद खबर रही। वहीं, नया रायपुर में 'फार्मास्यूटिकल पार्कÓ की स्थापना ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं। खेल के क्षेत्र में भी रायपुर ने "भारत गोल्फ महोत्सव" की सफल मेजबानी कर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत किया है।

चुनौतियों के बावजूद, साल 2025 छत्तीसगढ़ के लिए एक "सफल और सुखद" वर्ष रहा है। एक तरफ जहां बस्तर के जंगलों में गोलियों की गूँज कम हुई है, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक और डिजिटल क्रांति की लहर ने राज्य के कोने-कोने को छुआ है। रजत जयंती के इस पड़ाव पर छत्तीसगढ़ 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़Ó के संकल्प को चरितार्थ करते हुए देश के एक अग्रणी और विकसित राज्य के रूप में उभर रहा है।

शौर्यपथ विशेष

साल 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अभूतपूर्व सम्मान का वर्ष रहा है। इस वर्ष उन्होंने विभिन्न महाद्वीपों की यात्रा की, जहाँ उन्हें कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा।
साल 2025 में प्रधानमंत्री मोदी को निम्नलिखित देशों द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिए गए:

// मॉरीशस (12 मार्च 2025): 'ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन" (Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Ocean)। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय नेता बने।
// श्रीलंका (अप्रैल 2025): राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायक द्वारा 'श्रीलंका मित्र विभूषणÓ (Sri Lanka Mitra Vibhushana) सम्मान।
// साइप्रस (16 जून 2025): 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस IIIÓ (Grand Cross of the Order of Makarios III) । यह साइप्रस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
// घाना (2 जुलाई 2025): 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घानाÓ (Officer of the Order of the Star of Ghana)।
// त्रिनिदाद और टोबैगो (4 जुलाई 2025): 'ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगोÓ (Order of the Republic of Trinidad and Tobago)।
 // ब्राजील (8 जुलाई 2025): 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द साउदर्न क्रॉसÓ (Grand Collar of the National Order of the Southern Cross)  ।
// नामीबिया (9 जुलाई 2025): 'ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेलविट्सचिया मिराबिलिसÓ (Order of the Most Ancient Welwitschia Mirabilis) । वह इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय नेता हैं।
// इथियोपिया (16 दिसंबर 2025): 'ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपियाÓ (Great Honour Nishan of Ethiopia)।
// ओमान (18 दिसंबर 2025): 'ऑर्डर ऑफ ओमानÓ (Order of Oman)। यह ओमान का विशिष्ट नागरिक सम्मान है।
// बारबाडोस (2025): 'मानद ऑर्डर ऑफ फ्रीडमÓ (Honorary Order of Freedom)।

इन पुरस्कारों के साथ ही 2025 के अंत तक प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय नागरिक सम्मानों की संख्या 29 तक पहुँच गई है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

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