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आस्था / शौर्यपथ /और शक्ति का प्रतीक शारदीय नवरात्रि का उत्सव 17 अक्तूबर से शुरु हो चुका है। नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिन प्रसाद के रूप में मां को अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के हर दिन अलग रंग पहनकर मां की अराधना करने से भी व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के 9 दिनों में किस दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
पहले दिन-
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन मां के भक्तों को पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
दूसरा दिन-
नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को हरे रंगे के वस्त्र पहनने चाहिए।
तीसरा दिन-
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को भूरे रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
चौथा दिन-
नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को नारंगी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
पांचवा दिन-
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
छठा दिन-
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
सातवां दिन-
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को नीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
आठवां दिन-
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
नौवें दिन-
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को जामुनी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
ख़ास बात ....
सेन्टर फाॅर माॅनिटरिंग इंडियन इकानामी के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर घटकर हुई 2 प्रतिशत
देश में असम के बाद छत्तीसगढ़ में सबसे कम बेरोजगारी की दर
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर सितंबर 2020 में घटकर 2 प्रतिशत रह गयी है, जो राष्ट्रीय स्तर पर देश में बेरोजगारी की दर 6.8 प्रतिशत से काफी कम है। देश में शहरी क्षेत्रों में यह दर 7.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 6.3 प्रतिशत रही। सेन्टर फाॅर माॅनिटरिंग इंडियन इकानामी (सीएमआईई) द्वारा 16 अक्टूबर को जारी बेरोजगारी दर के ताजा आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी की दर असम में 1.2 प्रतिशत के बाद छत्तीसगढ़ में सबसे कम 2 प्रतिशत है। जो देश के बड़े और विकसित राज्यों से काफी कम है।
राजस्थान में बेरोजगारी की दर 15.3 प्रतिशत, दिल्ली में 12.2 प्रतिशत, बिहार में 11.9 प्रतिशत, हरियाणा में 19.1 प्रतिशत, पंजाब में 9.6 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 4.5 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 9.3 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 4.2 प्रतिशत, झारखण्ड में 8.2 प्रतिशत, ओडिसा में 2.1 प्रतिशत है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों और फैसलों से छत्तीसगढ़ में उद्योगों सहित कृषि क्षेत्र में गतिविधियां तेजी से संचालित हो रही हैं, जिससे छत्तीसगढ़ में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं और बेरोजगारी की दर में कमी दर्ज की जा रही है। इसके पहले छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर जून माह में 14.4 से घटकर जुलाई माह में 9 प्रतिशत के स्तर पर आ गयी थी। राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से कोरोना काल में भी राज्य में लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर रखा गया।
छत्तीसगढ़ में अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह से ही औद्योगिक गतिविधियां प्रारंभ हो गई थी। वर्तमान में लगभग शत-प्रतिशत उद्योगों में कोरोना से रोकथाम और बचाव के साथ काम शुरू हो गया है। अच्छी बारिश से राज्य में कृषि की गतिविधियों में तेजी आयी है। मनरेगा में अधिक से अधिक रोजगार मूलक कार्यों के संचालन और लघुवनोपज की खरीदी से प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े। राजीव गांधी किसान न्याय योजना सहित किसान हितैषी योजनाओं तथा जनकल्याणकारी फैसलों से उत्साहजनक वातावरण बना है। अनलॉक होते ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ी, जिसकी वहज से छत्तीसगढ़ में जीएसटी कलेक्शन बढ़ा, ऑटोमोबाईल, कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में तेजी आयी।
शौर्यपथ / केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि समाचार पत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। ये कोरोना वायरस के प्रसार का स्रोत नहीं हैं। सोशल मीडिया पर संडे संवाद के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों के मौसम में कोरोना अनुकूल व्यवहार का पालन करें ताकि संक्रमण बढ़ने से रोका जा सके।
सुबह की चाय के साथ समाचार पत्र पढ़ने का अवसर नहीं मिलने के कारण आनंद की अनुभूति नहीं होने से संबंधित एक सवाल पर डॉ. हर्षवर्धन ने भरोसा दिलाया कि कोई ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, जो साबित कर सके कि समाचार पत्रों से कोरोना वायरस का प्रसार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाचार पत्र पढ़ना कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूरी तरह सुरक्षित है।
डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में केरल में कोरोना मामलों में उछाल को लेकर अपने विचार साझा किए। केरल ओणम त्योहार के दौरान हुई घोर लापरवाही की कीमत भुगत रहा है। जब राज्य में अनलॉक अवधि के दौरान गतिविधियों जैसे व्यापार और पर्यटन के लिए अंतरराज्यीय यात्रा को शुरू किया जा रहा था, तब राज्य के विभिन्न जिलों में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई।
केरल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और दैनिक मामले दोगुना हो गए। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इससे उन सभी राज्यों को सबक लेना चाहिए, जो त्योहारों के मौसम के दिशा-निर्देश जारी करने में लापरवाह रहते हैं।
चीन के इस दावे पर कि पिछले वर्ष कई देशों में एक साथ कोरोना वायरस का फैलाव हुआ था, डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है, जिससे इस दावे की वैधता साबित हो सके। हालांकि, चीन के वुहान को विश्व में कोरोना के पहले मामले की रिपोर्ट करने के लिए अब भी माना जाता है।
एफडीआई स्वीकृत पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने की सलाह
बाजारों में चीन द्वारा निर्मित ऑक्सीमीटर की भरमार होने के एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि उपभोक्ताओं को बाजार से या ऑनलाइन विक्रेताओं से पल्स ऑक्सीमीटर खरीदते समय एफडीए/सीई स्वीकृत उत्पादों और उनके साथ आईएसओ/आईईसी विनिर्दिष्टताओं को देखना चाहिए।
यद्यपि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन स्तर में कमी कोविड-19 का लक्षण नहीं है, क्योंकि ऐसा कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी हो सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यों को दूसरे चरण का कोरोना पैकेज जारी कर दिया गया है। कुल 1352 करोड़ दिए गए हैं।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /जानलेवा कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन में इंसानी गतिविधियां कम होने का कुछ जीवों को फायदा भी मिला है। एक अध्ययन ने इस बात का खुलासा किया है कि इसी बदलाव के कारण पक्षियों के गाने का अंदाज में भी बदलाव आ गया है। महामारी ने इंसानों को घर में समेट कर रख दिया है। इसका दुनिया के कई शहरों में रहने वाले जीवों पर भी असर हुआ है।
कैल पॉली के शोधकर्ता जेनिफर फिलिप्स और नॉक्सविले में टेनेसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलिजाबेथ डेरीबेरी ने अपने शोध में यह खुलासा किया है। उन्होंने लॉकडाउन से पहले और बाद में सैन फ्रांसिस्को क्षेत्र सफेद गौरैया की ध्वनि और गीतों की तुलना की। उन्होंने पाया कि अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर की गलियां महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के चलते शुरुआती महीनों में खाली हो गई थीं।
इस वजह से शोर बहुत कम होने से वहां गौरैया ने भी बदलते हालात के अनुसार अपने गाना की आवाज धीमी कर दी। ज्यादातर पक्षी अब बहुत मधुर और बेहतर अंदाज में गीत गाने लगे हैं। जब शहर में शोर ज्यादा था तो उन्हें तेज आवाज में गाना पड़ता था लेकिन जब ट्रैफिक रुकने से ध्वनि प्रदूषण कम हुआ तो अब पक्षी धीमी आवाज में और पहले से मधुर गीत गा रहे हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके इस अध्ययन से यह बात साफ हो गई है कि मानवीय व्यवहार और गतिविधियां सीधे तौर पर वन्य जीवों को प्रभावित करती हैं।
ख़ास बात ...
सुपेबेड़ा के डायलिसिस वाले मरीजों को अब नहीं आना पड़ेगा रायपुर
स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर सुपेबेड़ा में पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और रायपुर एम्स का पायलट प्रोजेक्ट
रायपुर / शौर्यपथ / किडनी रोग से प्रभावित सुपेबेड़ा के लोगों को अब पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड (Fluid) लेने रायपुर नहीं आना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य इकाई ने इसके लिए फ्लूइड अब देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही उपलब्ध करा दिया है। नियमित पेरेटोनियल डायलिसिस कराने वाले सुपेबेड़ा के एक मरीज को इसके लिए फ्लूइड 17 अक्टूबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दिया गया। देवभोग में ही फ्लूइड मिलने से कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच अब मरीजों को डायलिसिस के लिए बार-बार रायपुर नहीं आना पड़ेगा। किडनी के मरीजों में कोरोना संक्रमण घातक होता है। स्थानीय स्तर पर फ्लूइड मिलने से मरीजों और उसके परिजनों के रायपुर आने-जाने में लगने वाले समय, श्रम और धन की बचत होगी।
स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव की पहल पर सुपेबेड़ा के किडनी प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एम्स रायपुर द्वारा पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।इसके तहत डायलिसिस के लिए एम्स द्वारा मरीज और उनके परिजनों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। देवभोग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों एवं स्टॉफ को भी किडनी रोग के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये डायलिसिस वाले मरीजों की नियमित निगरानी कर उनका फालो-अप लेंगे। सुपेबेड़ा में डायलिसिस के लिए जरूरी फ्लूइड की आपूर्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा की जा रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि सुपेबेड़ा के मरीजों के पेरेटोनियल डायलिसिस के लिए दो करोड़ 40 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अंतर्गत वहां 100 मरीजों के डायलिसिस का प्रबंध किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम को देखते हुए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा। घर में किए जाने वाले पेरेटोनियल डायलिसिस के दौरान किसी तरह की समस्या आने पर मरीज को तुरंत उपचार के लिए देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा सकता है। गंभीर मरीजों को वहां से रायपुर भी रिफर किया जाएगा।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए कई चीजों का भोग लगाते हैं। आस्था और शक्ति के इस पर्व पर हर कोई मां को अपनी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न कर लेना चाहता है। अगर इस नवरात्री आप भी माता के भोग के लिए कुछ अलग हटकर ट्राई करना चाहते हैं तो बना सकते हैं कच्चे केले का हलवा। यह बहुत ही टेस्टी रेसिपी है जो झटपट बनकर तैयार हो जाती है। तो आइए जानचे हैं कैसे बनता है कच्चे केले का हलवा।
केले का हलवा बनाने के लिए साम्रगी-
-3 कच्चे केले
-3-4 कप चीनी
-5 चम्मच घी
-1/5 कप दूध
-10-12 काजू
-10-12 बादाम
-25 किशमिश
-आधा चम्मच इलायची पाउडर
कच्चे केले का हलवा बनाने का तरीका-
कच्चे केले का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे केलों को उबालकर उन्हें पका लें। इसके बाद केलों के छिलके उतार कर अच्छे से मसल लें। अब कढ़ाई में 5 चम्मच देसी घी डालकर उसमें मसले हुए केले को डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। केले का रंग सुनहरा होने पर या घी केले से अलग होने लगे तब आप इसमें चीनी और दूध डालकर, दो उबाल लगा दें। जब उबाल आ जाए तब इसमें आप काजू , बादाम और किशमिश डाल लें। हलवे के गाढ़ा होने तक इसे पकाएं। इसके बाद आप इसमें इलायची पाउडर डालें। आपका केले का हलवा बनकर तैयार है। हलवे के ऊपर ड्राई फ्रूट्स डालकर गार्निश करके सर्व करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि को दौरान माता के भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए पूरे 9 दिनों तक उपवास रखते हैं। ऐसे में व्रत के दौरान सही डाइट फॉलो न करने से व्यक्ति को कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर आप भी व्रत के दौरान अपनी चटपटा खाने की क्रेविंग को दूर करने के लिए कोई पौष्टिक विकल्प ढूंढ रहे हैं तो ट्राई करें मखाने की चाट। यह टेस्टी चाट बनने में जितनी आसान है सेहत के लिए उससे भी ज्यादा फायदेमंद। तो आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी मखाने की चाट।
मखाना चाट बनाने के लिए सामग्री-
-3 कप मखाना
-2 चम्मच देसी घी
-1 चम्मच नींबू का रस
- लाल मिर्च पाउडर
-3 बड़े चम्मच मूंगफली
-1 टमाटर बारीक कटा हुआ
-2 चम्मच हरी चटनी
-1 चम्मच इमली की चटनी
-1 खीरा बारीक कटा हुआ
-1/2 सेब कटा हुआ
- सेंधा नमक स्वादानुसार।
मखाना चाट बनाने की विधि-
मखाना चाट बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में घी गर्म करके उसमें सेंधा नमक डालकर मखाने फ्राई करें। मखाने जब क्रिस्पी हो जाए तो इसे आंच से उतार लें।अब इस फ्राईड मखाने में रोस्टेड मूंगफली, कटे हुए टमाटर, हरी मिर्च डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें।
अब इस मिश्रण में हरी चटनी, लाल चटनी, कटे हुए खीरे, सेब डालकर अच्छे से मिला लें। आप चाहे तो इसमें अपना मनपसंद फल जैसे अनार के दाने और अंगूर भी डाल सकती हैं। लीजिए तैयार है आपकी स्वादिष्ट चटपटी मखाना चाट
रायपुर / शौर्यपथ / जेल में बंद शराब लुटेरे को छुड़ाने सांसद विजय बघेल के धरना पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की 20 महीने के जनकल्याणकारी कार्यकाल के बाद मुद्दाविहीन हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक पूर्व मंत्री एवं विधायक ब्रिजमोहन अग्रवाल राज्य में लचर कानून व्यवस्था का आरोप लगाते है। वही दूसरी ओर भाजपा के दुर्ग सांसद विजय बघेल जेल में बंद शराब लुटेरे को छुड़ाने धरना देते है जिसे भाजपा के रायपुर सांसद सुनील सोनी और कांकेर सांसद मोहन मंडावी समर्थन देते है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि भाजपा सांसद नेता कार्यकर्ता अपराधियों के पक्ष में धरना दे रहे हैं।अब तक यूपी बिहार मध्य प्रदेश हरियाणा गुजरात में देखा गया है कि भाजपा के नेता अपराधियों को बचाने के लिए आंदोलन करते हैं धरना देते हैं प्रदर्शन करते हैं पीड़िता को डराते धमकाते हैं वही चरित्र अब छत्तीसगढ़ की जनता को भाजपा सांसद नेताओ में भी देखने को मिल रहा है ।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पाटन क्षेत्र में हुई शराब दुकान में लूट के मामले में जेल में बंद लुटेरो को माननीय न्यायालय ने जमानत नहीं दिया। भाजपा सांसद विजय बघेल लुटेरों को जमानत नहीं मिलने के बाद धरना देकर न्यायालय के फैसले पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे है न्यायलय के फैसले का विरोध कर रहे है न्यायालय का अवमानना किया है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 9 भाजपा सांसद 9 हाल के हैं कद्रीय मंत्री एवं सांसद रेणुका सिंह जी ने कोरोना संकटकाल में जनता की सेवा कर रहे अधिकारियों को अंधेरी कोठरी में बंद कर पीटने की धमकी दिए थे रायपुर सांसद सुनील सोनी एम्स में इलाज करा रहे एक विशेष वर्ग के युवा के व्यवहार को लेकर झूठे मनगढ़ंत आरोप लगाए थे जिसका एम्स ने खंडन किया था कांकेर के सांसद मोहन मंडावी ने तो हाथरस में हुई रेप की घटना को फेंक करार दिया वहीं भाजपा के दुर्ग सांसद विजय बघेल लुटेरे को बचाने के लिए धरना देते हैं भाजपा सांसदों का रवैया हमेशा से छत्तीसगढ़ विरोधी रहा है भाजपा के सांसद कभी भी मोदी सरकार के किसान विरोधी मजदूर विरोधी कृत्यों का विरोध नहीं किए केंद्र सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ के साथ निरंतर बरत रहे भेदभाव अन्याय पर मौन रहे छत्तीसगढ़ के किसानों मजदूरों युवाओं के हित को लेकर कभी केंद्र सरकार के पास बात नहीं रखें ।अपराधी को बचाने भाजपा सांसदों के धरना से इनका वास्तविक चरित्र को जनता के बीच उजागर हुआ है भाजपा के सांसदों के इस रवैए से भाजपा के अपराधियों के प्रति नरम रवैया भी स्पष्ट हो गया है और भाजपा में इसी कारण अपराधियों का बोलबाला है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि मोदी करोना महामारी के सामने तो विफल हुए ही, देश की अर्थव्यवस्था का भी बंटाधार कर दिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जो बहुत सीना चौड़ा करके कोरोना से लड़ने की बात करते थे, वह इस महामारी के सामने तो पूरी तरह से विफल हुए ही हैं, उन्होंने अर्थव्यवस्था का भी बँटाधार कर दिया है।
कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों में ना सिर्फ भारत विश्व के दूसरे स्थान पर है पर इसका प्रबंधन विचलित करने वाला है। आज देश में लगभग 74 लाख संक्रमण के मामले हैं और क़रीब 1,12,000 से ऊपर मौतें हो चुकी हैं। मोदी सरकार ने लगातार कोरोना के आंकड़ों को लेकर भ्रमित करने का काम किया है सच तो यह है कि भारत में मृत्यु की दर पडोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों से दुगनी है और श्रीलंका जैसे हमारे पड़ोसी देश के मुकाबले आठ गुना है और इसका हमारी जनसंख्या से कोई लेना देना नहीं है. किस मुँह से यह सरकार effective Corona प्रबंधन की बात करती है?
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों में बड़े ही परेशान करने वाले आर्थिक आंकड़े सामने आए हैं. IMF ने कहा है कि भारत में इस वित्तीय वर्ष में आर्थिक वृद्धि की अनुमानित दर में लगभग 10.3 प्रतिशत संकुचन होगा, जो कि IMF के पहली अनुमानित 4.5 प्रतिशत संकुचन से बहुत अधिक है. IMF के आँकड़ों के मुताबिक़ भारत विश्व की सबसे तेज़ी से गिरने वाली अर्थव्यवस्था होगी।
Change in Real GDP Growth in 2020(IMF)
India -10.3
UK -9.8
France -9.8
S.Africa -8
Germany -6
Brazil -5.8
USA -4.3
Australia -4.2
Russia -4.1
Indonesia -1.5
China +1.9
प्र देश कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि जिस बांग्लादेश को अमित शाह दीमक कहते नहीं थकते थे, उस देश ने आज हमें ही आर्थिक मामलों में पछाड़ दिया है। यह सच है कि बांग्लादेश का Per Capita GDP मतलब प्रति व्यक्ति आय आज भारत से आगे है. इसका मोटा-मोटा मतलब यह है कि एक आम बांग्लादेशी आज एक आम भारतवासी से ज्यादा संपन्न है. बांग्लादेश का Per Capita GDP $1888 है जबकि भारत का $1876 है। मुद्दे की बात तो यह है कि मात्र पाँच साल पहले भारत का यही आँकड़ा बांग्लादेश से लगभग 25 प्रतिशत अधिक होता था।
हैरानी वाली बात तो यह है कि बजाए सारा ध्यान केंद्रित करके अर्थव्यवस्था को संभाला जाए, मोदी सरकार झूठ और भ्रांतियां फैलाने पर तुल गई है और मुद्दे पर पर्दा डालने की विफल कोशिश में उलझी हुई है। सरकारके तमाम प्रवक्ता, पार्टी के शीर्ष नेता, पूरी की पूरी सोशल मीडिया आर्मी और तथाकथित पीएमओ के सूत्र अब यह कह रहे हैं कि Per Capita GDP भले बांग्लादेश का हम से अधिक हो लेकिन Purchasing Power Parity में भारत बांग्लादेश से आगे है। इससे बड़ी विडंबना इससे बड़ी विडंबना दूसरी क्या होगी किस तरह का दुष्प्रचार करके ध्यान बांटा जा रहा है क्योंकि Purchasing Power Parity किसी भी देश की मुद्रा की असली कीमत होती है और वह भी विकसितदेश की मुद्रा जैसे कि यूरो या डॉलर के मुकाबले।
जबकि Per Capita GDP ही वाकई में किसी भी देश के लोगों की समृद्धि उनकी संपन्नता का वास्तविक मानक होता है। Per Capita GDP का मतलब होता है कि कोई भी व्यक्ति अपने ही देश में अपनी मुद्रा से क्या और कितना खरीद सकता है और इससे उस देश में उसकी संपन्नता का अंदाजा लगाया जा सकता है।अब भारत अपने पड़ोसी देशों के मुकाबले चौथे स्थान पर आ गया है आम लोगों की संपन्नता के मामले में शीर्ष स्थान पर श्रीलंका फिर मालदीव, बांग्लादेश और अब चौथे स्थान पर भारत है। पर मोदी सरकार सिर्फ जबानी जमा खर्च दुष्प्रचार व्हाट्सएप के माध्यम से गलत सूचना और इसी तरह के काम करने में मशगूल है जबकि उनका सारा का सारा ध्यान इस समय अर्थव्यवस्था को बचाने और नौकरियां उत्पन्न करने पर होना चाहिए। सच तो यह है कि तथाकथित दीमक ने हर तरफ से ध्यान हटाकर अपना ध्यान अपनी अर्थव्यवस्था पर केंद्रित किया और मोदी सरकार ने सुर्खियां बटोरने, अपने बारे में धारणा बनाने में ही बीता जा रहा है।
एक जमाना था जब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था हम पर निर्भर थी पर आज जरूरत है कि हम इस छोटे से देश से कुछ महत्वपूर्ण सबक सीखें। कुछ आंकड़े आपके सामने जरूर रखना चाहते हैं बांग्लादेश का बेरोजगारी का दर मात्र 4.5 प्रतिशत है, वह सबसे तेजी से आर्थिक विकास करने वाले 7 देशों में लगातार बना हुआ है, और गौरतलब बात यह है कि बांग्लादेश का जो गारमेंट एक्सपोर्ट है मतलब कपड़े का निर्यात है वह करीब 32 बिलियन डॉलर है जो कि हमारे कपड़े के निर्यात से लगभग चार गुना है। विडंबना यह भी है कि जब अमेरिका और चीन की ट्रेड वॉर चल रही थी तब बांग्लादेश वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों ने उसका बड़ा लाभ उठाया और हमारी सरकार ने अपनी विफलताओं, गलत नीतियों के चलते निर्यात क्षेत्र को कुंठित करके रख दिया, हम उस व्यापार युद्ध का एक तिनका लाभ भी नहीं उठा पाए।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सरकार की विफल नीतियां और आर्थिक मंदी से जूझने के लिए कोई व्यापक रणनीति नहीं है। आज भी मोदी सरकार यह नहीं समझ रही है कि हमारी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से पटरी पर लाने के लिए सबसे पहले उपभोग बढ़ाना पड़ेगा और वह एलटीसी वाउचर से नहीं बढ़ेगा वह बढ़ेगा जब आप गरीबों के हाथ में पैसा रखेंगे। डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के अलावा आज कोई और उपाय सरकार के पास नहीं है लेकिन सरकार यह नहीं कर रही है। आज जरूरत है की मांग बढ़ाई जाए, पर उसको छोड़ कर बाकी सब कुछ करने के लिए तैयार है सरकार। और सबसे जरूरी बात तो यह है की मांग के ना होने के बावजूद आज महंगाई निरंतर बढ़ती जा रही है।
अभी ध्वस्त अर्थव्यवस्था से लोग जूझ ही रहे थे कि अब महंगाई भी लोगों की कमर तोड़ रही है। सितंबर महीने का रिटेल इन्फ्लेशन 7.43 प्रतिशत पर RBI के टारगेट से तो बहुत ऊंचा है ही पर दिक्कत की बात यह है कि यह बढ़त खाने की सामग्री के दामों में जबरदस्त उछाल के कारण आई है। सब्जियों के दाम में लगभग 21 प्रतिशत उछाल हुई है और दाल के दाम लगभग 15 प्रतिशत महंगे हुए हैं। इसके बारे में सरकार की कौन सी नीति है और जो सरकार बिचौलियों को खत्म करने की बात करती है, वह हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है क्योंकि लोगों ने ना सिर्फ नौकरी खोई ही हैं, ना सिर्फ उनका वेतन काम हुआ है पर अब दैनिक जीवन की चीजें भी महंगी होती जा रही हैं, पर मोदी सरकार की सेहत पर इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी व नोडल अधिकारी श्रीमती तनुजा सलाम के मार्गदर्शन में कार्ययोजना बनाकर 5 से 14 अक्टूबर 2020 तक कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान चलाया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 3 लाख 35 हजार 630 घरों में सर्वे किया गया। जिसमें 11 हजार 389 कोरोना के लक्षणात्मक व्यक्तियों की पहचान कर सैम्पल लिया गया। कोरोना संक्रमण के लक्षणात्मक व्यक्तियों के पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें आवश्यकतानुसार होम आइसोलेशन, हॉस्पिटल एडमिशन या कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान मैदानी स्तर के कार्यकर्ता, एएनएम, मितानीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आरएचओ, पंचायत विभाग के कर्मचारी, सुपरवाईजर, नगर निगम के कर्मचारी की टीम द्वारा घर-घर सर्वे किया गया। सर्वे में कोरोना लक्षण वाले 11 हजार 389 व्यक्तियों को चिन्हांकित किया गया। जिसमें 1406 व्यक्ति उच्च जोखिम की श्रेणी में थे। जिन्हें कोई अन्य बीमारी थी एवं 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे। लक्षण सहित एवं उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों का प्राथमिकता क्रम में सैम्पल लिया गया। जिसमें 839 व्यक्ति एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव पाए गये। ऐसे लक्षण वाले व्यक्ति जिनका एंटीजन टेस्ट नेगेटिव था, उनमें से 3861 लोगों का आरटीपीसीआर ट्रूनाट सैम्पल लिया गया।
डॉ. चौधरी ने बताया कि मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. प्रियंका शुक्ला ने भी अभियान के दौरान सर्वें कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक सुझाव दिए। साथ ही प्रति सप्ताह बुधवार एवं गुरूवार को सर्वे अभियान लगातार जारी रहेगा। जिससे कोरोना श्रृंखला को तोड़ी जा सकेगी। उन्होंने जिले के नागरिकों से सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, स्वाद व सूंघने की क्षमता में कमी आदि लक्षण आने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में 24 घंटे के भीतर जांच कराने की अपील की है। जिससे कोरोना से स्वयं का बचाव एवं परिवार तथा साथियों का बचाव संभव है।
वर्तमान समय में मास्क ही वैक्सीन है। जब भी घर से निकले तो मास्क पहनकर ही निकलें। कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान के लिए नगर निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक, डिप्टी कलेक्टर लवकेश धु्रव, सहायक नोडल अधिकारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक गिरीश कुर्रे, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री अनामिका विश्वास, जिला डाटा प्रबंधक अखिलेश चोपड़ा, मितानीन, समन्वय आदि को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
