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सेहत /शौर्यपथ / घर में बंद-बंद काम करने को मजबूर कर्मचारियों को अब पब के डेस्क से काम करने की सुविधा मिलेगी। दक्षिण वेल्स में न्यूपोर्ट के पास स्थित द फार्मर आर्म्स इन ग्लोडक्लिफ कर्मचारियों को तीन घंटे के लिए डेस्क की बुकिंग करने की सुविधा दे रही है।
तीन घंटे के लिए पब की टेबल को किराया पर लेने के लिए 10 पाउंड (लगभग 1000 रुपये) तक खर्च करना पड़ेगा। इस पब टेबल में काम करने के लिए वाई-फाई और बिजली का कनेक्शन के अलावा असीमित चाय, कॉफी और सैंडविच भी मिलेगा। यह पब कर्मचारियों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए लोगों से बातचीत करने का भी अवसर देगा।
पब के मालिक क्रेग लीथ ने कहा, यह अच्छा विचार है। लोग अपने घरों में बंद-बंद बोर हो गए हैं। इसके उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। हमें बुकिंग के लिए लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
यहां मंगलवार से लेकर शुक्रवार तक के लिए टेबल बुकिंग की सुविधा मिलेगी। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने के बाद लोगों के प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। ज्यादातर लोगों ने इसे अच्छा विचार बताया और कहा कि वे जरूर यहां जाना चाहेंगे।
सेहत / शौर्यपथ / इंसान के पूर्वजों में भूख से बचने के लिए उच्च कैलोरी वाला खाना संघूने की क्षमता थी। इसी क्षमता के कारण वर्तमान में हमें फास्टफूड को जल्दी सूंघ लेते हैं और याद रखते हैं। नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि शोध में मौजूद प्रतिभागियों को उच्च कैलोरी वाले फास्टफूड का स्थान कम कैलोरी वाले खाने की तुलना में ज्यादा याद था।
वैगेनइंगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम ने 512 प्रतिभागियों पर अध्ययन किया। इन्हें एक निर्धारित पथ पर जाने को कहा गया जहां कई सारे कमरे मौजूद थे। इन कमरों में आठ तरह के खाद्य पदार्थ रखे हुए थे जिनमें से खुशबू आ रही थी। जब प्रतिभागी इन खाद्य पदार्थों के नमूनों तक पहुंचे तो उन्होंने या तो खाया या सिर्फ सूंघा। इसके बाद उन्होंने अपनी पसंद के आधार पर खाद्य पदार्थों को रेटिंग दी। इन नमूनों में सेब, चिप्स, खीरा और चॉकलेट ब्राउनी मौजूद था।
शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागियों को वो कमरे ज्यादा याद रहें जिनमें उच्च कैलोरी वाला फास्ट फूड मौजूद था। कम कैलोरी वाले खाने की तुलना में प्रतिभागियों को उच्च कैलोरी वाले खाने के स्थान 27 फीसदी तक ज्यादा याद रही। फास्टफूड को सूंघने की क्षमता पर खाने के मीठे या नमकीन होने से कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
शोधकर्ताओं ने कहा, हमने देखा की प्रतिभागियों को वे स्थान ज्यादा याद रहें जहां उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ मौजूद थे। इससे पता चलता है कि इनसानों को उच्च कैलोरी वाले खाने की खुशबू ज्यादा आकर्षित करती है। इस शोध से यह भी खुलासा होता है कि प्राचीन समय से ही इनसान उच्च कैलोरी वाले खाने के लिए लालायित रहा है। इस शोध को पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / संगीत एक कला ही नहीं बल्कि एक भाव भी है। ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते कि कुछ छोटी-छोटी चीजें हमें मानसिक रूप से शांत रखती हैं, जिनकी वजह से तनाव, गुस्सा या फिर डर जैसे इमोशन्स हम पर हावी नहीं हो पाते। म्यूजिक भी इन्हीं चीजों में से एक है। रात के समय नींद न आने पर आप कोई ग़जल या मेलोडी सॉन्ग सुनते हैं, तो आपको नींद आने के आसार काफी बढ़ जाते हैं। साथ ही सुकून से सोने और तनाव से मुक्ति के लिए भी म्यूजिक को अपने जीवन का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए। आज ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ’ डे है। साथ ही आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गायक जगजीत सिंह की पुण्यतिथि भी है। आइए, हम आपको बताते हैं, जगजीत सिंह के ऐसे गाने जो आपको भागती-दौड़ती जिंदगी में सुकून पल देंगे।
तुमको देखा तो ये ख्याल आया
रेट्रो सॉन्ग के दीवानों के लिए यह गाना किसी बोनस से कम नहीं है। 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘साथ-साथ’ का यह गाना आज भी उतना ही सुना जाता है, जितना कि 80 के दशक में सुना जाता होगा। रात में धीमी आवाज में चलते इस गाने का जादू समा बांध देता है।
वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी (आज, 1987)
बचपन के दिनों को याद दिलाते हुए जिंदगी की गहराई में उतर जाने वाला गाना। आप अगर किसी बात को लेकर तनाव में हैं या आपका मूड खराब है, तो आप इस गाने को सुनकर मुस्कुरा सकते हैं।
होश वालों को खबर का बेखुदी क्या चीज है (सरफरोश, 1999)
आपके पार्टनर से लड़ाई हो गई है या फिर आप सिंगल ही क्यों न हो। यह गाना आपका मूड खुशनुमा कर देगा। धीमी आवाज में गुनगुनाकर इस गाने का मजा लें।
यह तेरा घर, यह मेरा घर (साथ-साथ, 1982)
जगजीत सिंह की खूबसूरत अंदाज के साथ जब सुरीला संगीत मिल जाता है, तो तनाव मिटाने वाला यह खुशनुमा गाना जन्म लेता है। आप गुनगुनाते हुए अपने पार्टनर का मूड इस गाने के साथ ठीक कर सकते हैं।
बड़ी नाजुक है, यह मंजिल (जॉगर्स पार्क, 2003)
बेहतरीन नगमा जिसे सुनकर आप खुद गुनगुनाने लगेंगे। आपकी थकान को उतार देने वाला यह गाना कुछ पलों के लिए आपको एक ‘ड्रीम वर्ल्ड’ में लेकर चला जाएगा।
आपके लिए खास-
मानसिक स्वास्थय का ध्यान रखना एक दिन का टॉस्क नहीं, बल्कि यह एक प्रक्रिया है। रोजाना की कई छोटी-छोटी बातें आपके दिमाग पर असर डालती हैं, इसलिए कोशिश करें कि आप हर परिस्थिति में खुश रहें और किसी भी बात को खुद पर हावी न होने दें। खुद को रिलेक्स करने के लिए रोजाना अपनी पसंद के गाने जरूर सुनें।
खेल / शौर्यपथ / इंडियन प्रीमियर लीग के 13वें सीजन के 25वें मैच में आज चेन्नई सुपर किंग्स का मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से होना है। सीएसके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और आरसीबी के कप्तान विराट कोहली एक साल से ज्यादा समय के बाद एकसाथ क्रिकेट के मैदान पर उतरेंगे, लेकिन एकसाथ खेलने के लिए नहीं बल्कि एक-दूसरे के खिलाफ खेलने के लिए। धोनी और विराट के बीच संबंध काफी अच्छे रहे हैं। सीएसके की ओर से आरसीबी के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी धोनी ही हैं और सीएसके के खिलाफ आरसीबी की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज विराट ही हैं। इस मैच में एक खास मामले में दोनों एक-दूसरे को पीछे छोड़ सकते हैं।
धोनी ने आरसीबी के खिलाफ 27 मैचों में 41.78 की औसत से 793 रन बनाए हैं, जिसमें चार हाफसेंचुरी भी शामिल हैं। वहीं, विराट कोहली का बल्ला सीएसके के खिलाफ जमकर चला है और इस टीम के खिलाफ विराट ने 40 से ऊपर की औसत से 747 रन जड़े हैं। आरसीबी के खिलाफ 800 रनों के आंकड़े से धोनी सात रन दूर हैं, जबकि सीएसके के खिलाफ 800 रनों के आंकड़े से विराट 53 रन दूर हैं। अब देखना होगा कि आज के मैच में दोनों में से कौन पहले इस आंकड़े पर पहुंचता है।
रोहित शर्मा के नाम है एक टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड
रोहित शर्मा वह बल्लेबाज हैं, जिन्होंने आईपीएल के इतिहास में एक टीम के खिलाफ सबसे अधिक रन जड़े हैं। हिटमैन ने केकेआर के खिलाफ सबसे ज्यादा 875 रन बनाए हैं, उन्होंने इस रिकॉर्ड को आईपीएल 2020 के 5वें मैच में हासिल किया था। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान डेविड वॉर्नर का नाम है, जिन्होंने केकेआर के खिलाफ ही 829 बनाए हैं। वॉर्नर ने किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ भी 818 रन जड़े हैं। विराट कोहली दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 825 रन जड़ चुके हैं।
मनोरंजन / शौर्यपथ / फिल्म सिटी की मांग पीलीभीत मे उठाने की मांग करने वाले हास्य फिल्म अभिनेता राजपाल यादव अपनी एक प्रस्तावित फिल्म की शूटिंग पीलीभीत की वादियों में करेंगे। दावा है कि उनकी इस प्रस्तावित फिल्म की शूटिंग पहले असम के मानस अभयारण्य में होनी थी। पर अब उनका मन बदल गया है। वे पीलीभीत में शूटिंग करेंगे।जिले के जंगलों की खूबसूरती के कायल हो चुके शाहजहांपुर के मूल निवासी अभिनेता राजपाल पिछले दिनों पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान के साथ वाइफरकेशन, गोमती उदगम आदि पर पहुंचे थे। यहां जंगल, नहर, वन्य जीव, जलाशय, साइफन आदि लोकेशन उन्हें काफी पसंद आई थी।
ऐसे में उन्होंने अपनी एक फिल्म जिसमें वे मुख्य रोल में हैं उसे पीलीभीत में शूट करने के लिए फिल्म के निर्माता निर्देशक से मिलकर पीलीभीत में शूटिंग करने की इच्छा जाहिर कर दी। अभिनेता ने बताया कि जल्द फाइनल बात आपकों बताएंगे। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। करोड़ों की फिल्म का फिल्मांकन पीलीभीत में होने पर अधिकांश धनराशि खर्च जिले में ही होगा। होटल व्यवसायी, टैक्सी चालक, मजदूरों व अन्य संबंधित लोगों को काफी अधिक काम मिलेगा। शूटिंग का कुछ हिस्सा उत्तराखंड के रानीखेत में शूट किया जाएगा। हाल ही में राजपाल फिल्म निर्देशक के साथ पीलीभीत पहुंचेंगे।
22 भाषा में बनेगी फ़िल्म, 178 देशों में होगी रिलीज
अभिनेता राजपाल यादव का मानना है कि अगर पीलीभीत में फिल्म की शूटिंग होती है तो पीलीभीत को देश ही नहीं वरन पूरी दुनिया जानेगी। यह फिल्म हिंदी और अंग्रेजी सहित 22 भाषाओं में तैयार होगी जो 178 देशों में रिलीज होगी।
वन्य जीवों की रक्षा का फिल्म में होगा संदेश
इस फिल्म में राजपाल यादव मुख्य भूमिका में होंगे। फिल्म के तीन भाग होंगे जिसमें पहले तो जंगली जानवरों का भक्षण और फिर उसके बाद उनकी रक्षा और फिर शिक्षक की भूमिका में नजर आएंगे। इसके माध्यम से वन्यजीवों की रक्षा का लोगों को अच्छा संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।
मनोरंजन / शौर्यपथ /कंगना रनौत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह हर मुद्दे पर अपनी बात रखती हैं। अब वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर कंगना ने फैन्स से अपनी फिल्म जजमेंटल है क्या को देखने की अपील की और साथ ही डिप्रेशन की दुकान चलाने वालों पर निशाना साधा।
कंगना ने ट्वीट किया, 'फिल्म जो हमने मेंटल हेल्थ अवेयरनेस के लिए बनाई थी जिसे उन लोगों ने कोर्ट में घसीट लिया था जो डिप्रेशन की दुकान चलाते हैं। मीडिया बैन के बाद फिल्म का नाम बदला गया जिससे इसकी मार्केटिंग पर बहुत असर पड़ा लेकिन यह एक अच्छी फिल्म है और इसे आज ही देखें।'
कंगना के इस ट्वीट के बाद कहा जा रहा है कि उन्होंने बिना नाम लिए दीपिका पादुकोण पर निशाना साधा है। इससे पहले कंगना, दीपिका के लिए डिप्रेशन की दुकान और डिप्रेशन का धंधा जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुकी हैं।
कंगना की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो वह लास्ट फिल्म पंगा में नजर आई थीं। फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। अब कंगना जल्द ही फिल्म थलाइवी में नजर आई थीं। कुछ दिनों पहले ही कंगना ने इस फिल्म की शूटिंग शुरू की है।
बताते चलें कि फिल्म थलाइवी में कंगना रनौत पॉलिटिकल लीडर जयललिता के किरदार में नजर आएंगी। इस फिल्म का निर्देशन एएल विजय कर रहे हैं। फिल्म को 'मणिकर्णिका', 'बाहुबली' के राइटर केव्ही विजयेंद्र प्रसाद और 'द डर्टी पिक्चर', 'वन्स अपॉन टाइम इन मुंबई' के राइटर रजत अरोड़ा ने मिलकर लिखा है। यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी लेकिन कोरोना के चलते इसकी शूटिंग पूरी नहीं हो पाई।
मुंंबई / शौर्यपथ / मुंबई में कोरोना वायरस से हुई कुल मौतों में 85% मौतें 50 से ऊपर की उम्र के लोगों और बुजुर्गों की हुई है. इस कठिन घड़ी में अच्छी ख़बर ग्लोबल अस्पताल से आई जहां हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके, 56 साल के एक कोविड पॉज़िटिव मरीज़ जो, मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर, निमोनिया, हार्टस्ट्रोक जैसी कई गंभीर तकलीफ़ों में थे, फिर भी एक हफ़्ते में कोविड को मात दे दी. डॉक्टर इसे चमत्कार मान रहे हैं. मुंबई में अब तक कोविड से 9,199 मौतें हुईं हैं जिनमें 7,793 मौतें 50 साल से ऊपर के मरीज़ों की हुईं हैं, यानी क़रीब 85 फीसदी. वैसे कोविड के कुल मामलों में 50 से ऊपर के संक्रमित मरीज़ों की संख्या क़रीब 42% है. बीएमसी, 50 से ऊपर के हर कोविड मरीज़ को अस्पताल भेजने की कोशिश में है. लक्षण-तकलीफ़ें हों या नहीं.
बीएमसी के एडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर सुरेश ककानी कहते हैं, 'हमने ऐसा प्रयास किया है कि 50 के ऊपर के मरीज़ को भले ही होम आइसोलेशन की सुविधा प्राप्त हो, लेकिन इन्हें निजी या सरकारी या महानगर पालिका के अस्पताल में दाखिल कराना ही सही रहेगा. इसको लेकर एक सर्कुलर जारी किया है.'मुंबई के ग्लोबल अस्पताल में 56 साल के महादेव हरी पटेल भर्ती हुए जिनका कोविड के कारण मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर, निमोनिया से सामना हुआ. दो साल पहले ही वो हार्ट ट्रान्स्प्लैंट भी करवा चुके हैं. हालत गम्भीर थी लेकिन एक हफ़्ते में ही इन्होंने कोरोना को हरा दिया. कोविड नेगेटिव होने के साथ ही इनके रिकवर होने को डॉक्टर चमत्कार मानते हैं और खुद महादेव कहते हैं कि उन्हें नई ज़िंदगी मिली है.
मरीज महादेव हरी पटेल ने कहा, ''मुझे घर जाने की अब ख़ुशी है, ऐसा लग रहा है मुझे तीसरी ज़िंदगी मिली है.'' वहीं उनके बेटे दिनेश पटेल ने कहा, ''डैडी की हालत 2018 में भी ख़राब थी, उनका तब हार्ट ट्रांसप्लांट करवाया था, ठीक थे तब से. लेकिन कोविड के कारण हालत काफ़ी सीरियस हो गयी. ग्लोबल में वेंटिलेटर पर रखा, डॉक्टरों की टीम ने अब इनको अच्छा ट्रीटमेंट देकर एकदम ठीक कर दिया है.'' ग्लोबल हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉक्टर प्रशांत बोराडे ने कहा, 'जब ये ग्लोबल हॉस्पिटल आए, हमने काफ़ी टेस्ट किए, तो हमें पता चला कि इनको स्ट्रोक हो चुका था, किडनी फेल हुआ था, हार्ट कमजोर था, फेफड़े में पानी जम गया था, फेफड़े में कोविड निमोनिया की मात्रा काफ़ी थी. बैक्टीरियल इन्फ़ेक्शन भी था. तो चुनौती ये थी कि मल्टी ऑर्गन फ़ेल्यर के साथ हार्ट ट्रांसप्लांट भी हुआ था इनका. कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी टीम, किडनी की टीम और इंटेन्सिव केयर जैसी सारी टीमों ने मिलकर ट्रीटमेंट दी. पांच दिन के बाद वेंटिलेटर से बाहर आये और इनका सक्सेसफ़ुली ट्रीटमेंट हो गया.'
कोविड के इलाज के लिए मरीज़ों की इम्यूनिटी बढ़ाई जाती है लेकिन ऑर्गन ट्रांसप्लानट वाले मरीज़ों के इलाज के लिए इम्यूनिटी घटानी पड़ती है. 17 सितम्बर को भर्ती हुए महादेव पटेल हफ़्ते भर बाद डिस्चार्ज तो हुए लेकिन सांस की दिक़्क़त के बाद फ़िलहाल स्थिर हालत में ऑक्सिजन बेड पर रिकवर कर रहे हैं. इनकी केस स्टडी डॉक्टर, मेडिकल जर्नल में छापने वाले हैं. ऐसे मरीज़ों की स्टडी में डॉक्टर मानते हैं कि कोविड के प्रकोप में भी वक्त पर इलाज कमजोर से कमजोर मरीज़ की ज़िंदगी बचा सकता है.
पटना / एजेंसी / राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव को चारा घोटाले के एक और मामले में ज़मानत मिल गई है लेकिन दुमका कोषागार के एक मामले में फ़िलहाल उन्हें जमानत नहीं मिली हैं इसलिए उन्हें रिहा होने के लिए अभी इंतज़ार करना होगा. इस मामले में सजा का पचास प्रतिशत अगले महीने यानी 9 नवम्बर को पूरा होगा. इसलिए, तब तक लालू यादव को जेल में ही रहना होगा. राष्ट्रीय जनता दल के नेता और कार्यकर्ता अब यह मानकर चल रहे हैं कि पहली बार बिहार विधान सभा चुनाव में लालू यादव प्रचार अभियान के लिए उपलब्ध नहीं होंगे.
हालाँकि, इससे पहले पिछले साल हुए लोक सभा चुनाव में भी लालू यादव ने चुनाव प्रचार में भाग नहीं लिया था.उस समय भी लालू जेल में बंद थे. ऐसे में सारा ज़िम्मा उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव के कंधों पर था. शुक्रवार (9 अक्टूबर) के कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब साफ़ हो गया कि इस बार के विधान सभा चुनाव में भी तेजस्वी यादव के ऊपर ही सभी प्रत्याशियों के प्रचार की ज़िम्मेवारी होगी.
लालू यादव ने पहली बार लोक सभा चुनाव 1977 में लड़ा था. उसमें उन्हें जीत हासिल हुई थी. 1990 में वो राज्य के मुख्यमंत्री बने. 1990 के बिहार विधान सभा चुनाव से पहले लालू यादव जनता दल और बाद में राष्ट्रीय जनता दल के ना सिर्फ स्टार प्रचारक रहे बल्कि चुनाव प्रबंधन का पूरा ज़िम्मा उन्हीं पर होता था. इस बार ये सारी जिम्मेदारी तेजस्वी यादव के कंधों पर आ गई है. हालाँकि इसका वोटर पर कोई असर नहीं होता लेकिन महागठबंधन के प्रत्याशियों का कहना है कि लालू यादव की अनुपस्थिति सबको खलती है. लोगों से संवाद का उनका तरीका अलग होता था. 1980 में पहली बार लालू यादव बिहार विधान सभा के लिए चुने गए थे.
भुवनेश्वर / शौर्यपथ / ओडिशा के भुवनेश्वर में एक स्थानीय कोर्ट के जज ने दहेज प्रताड़ना के एक केस में आधी रात को सुनवाई की. इस केस में सेना के एक मेजर पर अपनी पत्नी पर दहेज के लिए प्रताड़ना देने का आरोप लगा था. जज ने आधी रात में इसके लिए सुनवाई करते हुए आर्मी मेजर को जेल भेजने के बजाय आर्मी की कस्टडी में भेज दिया.
सब-डिवीजनल न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज एसके मिश्रा इस केस के लिए सुनवाई करने रात के 10 बजे कोर्ट पहुंचे थे. दरअसल, इसके पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केस की सुनवाई करने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन कामयाबाी नहीं मिली थी, जिसके बाद जज ने कोर्ट जाकर सुनवाई करने का फैसला किया. सुनवाई रात के डेढ़ बजे के बाद तक चलती रही. सुनवाई खत्म होने के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि गिरफ्तार मेजर को जेल की बजाय आर्मी कस्टडी में भेजा जाए.
इसके पहले महिला पुलिस स्टेशन ने मेजर को गिरफ्तार किया था. मेजर की पत्नी ने उसपर दहेज के लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने और हत्या करने की कोशिश के आरोप लगाए थे. आर्मी ऑफिसर का घर भुवनेश्वर के नायापल्ली में है.
ऑफिसर के खिलाफ पुलिस में भारतीय दंड संहिता और दहेज (रोकथाम) अधिनियम की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए हैं. आरोप हैं कि ऑफिसर ने अपनी पत्नी को अपने मायके से पैसे लाने को कहा था और पैसे न लाने की स्थिति में गोली मारने की धमकी दी थी.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / जयपुर / राजस्थान के करौली जिले में भूमि विवाद में एक पुजारी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है. पेट्रोल डालकर कुछ लोगों ने पुजारी को जलाने की कोशिश की. बुरी तरह से झुलसे पुजारी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई है. पुजारी ने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों ने उस पर हमला किया था और पेट्रोल छिड़कर जिंदा जलाने की कोशिश की थी. यह विवाद मंदिर की जमीन का बताया जा रहा है. पुजारी को आय के स्त्रोत के रूप में मंदिर के ट्रस्ट की ओर से 13 बीघा जमीन दी गई थी.
गांव के पुजारी बाबू लाल वैष्णव अपनी जमीन के पास स्थित एक प्लॉट पर अपना घर बनाना चाहते थे. मीणा समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और जमीन को अपना बताया. विवाद होने पर यह मामला गांव के बुजुर्गों के पास पहुंचा, उन्होंने पुजारी के पक्ष में फैसला दिया.
इसके बाद पुजारी ने जमीन पर बाजरा की गांठें लगा दी ताकि पjता चल सके कि जमीन पर उसका मालिकाना हक है. हालांकि, आरोपियों ने उस जगह पर अपनी झोपड़ी बनाना शुरू कर दी. जिसकी वजह से दोनों पक्षों में विवाद हो गया है.
पुलिस में दर्ज कराए बयान में पुजारी ने कहा कि छह लोगों ने बाजरे की गांठों पर पेट्रोल डालकर बुधवार को आग लगा दी. उन्होंने दावा किया उन लोगों ने उस पर भी पेट्रोल डाला और जलाने की कोशिश की. जलने की वजह से, पीड़ित पुजारी को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार शाम को उसने दम तोड़ दिया.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हरजी लाल यादव ने एनडीटीवी को बताया, "फिलहाल शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा है. हमने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है और मुख्य आरोपी कैलाश मीणा को हिरासत में ले लिया है." पुलिस को दिए बयान में पुजारी ने छह लोगों कैलाश, शंकर, नमो मीणा और तीन अन्य लोगों का नाम लिया है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
