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June 03, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

सेहत / शौर्यपथ / जब आपका पेट फूल जाता है, तो कब्ज की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में आपकी इंस्‍टेंट रेमेडी क्या होनी चाहिए? अगर आप घरेलू नुस्खों में यकीन रखते हैं, तो आज हम आपके लिए एक ऐसा अचूक आयुर्वेदिक नुस्खा लाए हैं, जो कुछ ही समय में आपकी कब्ज की समस्‍या को हल कर देगा।
पेश है कब्ज के लिए घरेलू उपाय : एक चम्मच घी के साथ गर्म पानी पीना।
इस बात को लेकर सिर्फ हम ही निश्चित नहीं है, बल्कि आयुर्वेद की स्वर्ण पुस्तक इसे कब्ज के लिए एक “रामबाण” इलाज मानती है!
यहां जाने घी के साथ गर्म पानी का सेवन कब्ज के लिए नंबर वन उपाय क्यों है?
आइए इस पर ध्यान दें: घी को कई बार गलत माना गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम इसके लाभों को प्राप्त करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का उचित तरीका नहीं जानते हैं। घी बायट्रिक एसिड का एक समृद्ध स्रोत है, कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार और पोलिश पत्रिका प्रेज़ग्लाड गैस्ट्रोएंटेरोलोगिकज़नी (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी रिव्यू) में प्रकाशित एक अध्ययन द्वारा बताया गया है कि इसके सेवन से कब्ज में जल्द ही राहत मिलती है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि बायट्रिक एसिड का सेवन इंटेस्टाइन के चयापचय में सुधार करता है और मल को बाहर निकलने में मदद करता है। साथ ही, यह पेट दर्द, सूजन और कब्ज के अन्य लक्षणों को कम करता है।
बताने की कोई जरूरत नहीं है कि घी सभी लैग्जेटिवो में सबसे बेस्ट लैग्जेटिव है। इसके अन्य लाभ यह भी हैं – जैसे हड्डियों की ताकत में वृद्धि, नींद को प्रेरित करना और वजन कम करना और यह बेनिफिट्स अपको खुद ही महसूस होंगे।
आयुर्वेदिक हेल्‍थ कोच और प्राण हेल्थकेयर सेंटर की संस्थापक डिंपल जांगडा बताती हैं कि घी हमारे शरीर को चिकनाई प्रदान करने में मदद करता है और आंतों के मार्ग को साफ करता है। यह वेस्ट प्रोडक्ट के मूवमेंट में सुधार करता है, जिससे कब्ज का खतरा कम होता है।
आप घी से कैसे कर सकती हैं कब्‍ज का इलाज?
डॉ.जांगडा का सुझाव है कि रोज सुबह एक चम्मच घी में 200 मिली गर्म पानी मिलाकर पीना चाहिए। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, वह इसे खाली पेट पीने की सलाह देती हैं।
“हार्ड कोष्ट के कारण कब्ज होती है, जिससे पाचन क्रिया, आंत और कोलोन, खुरदरा और कठोर हो जाता है। ऐसे में घी जैसे सुपरफूड् के साथ गर्म पानी का सेवन पाचन तंत्र को चिकनाई देकर, हमारे सिस्टम को नरम कर सकता हैं और शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट को बाहर निकालने में मदद कर सकता हैं।
घी कब्ज के लिए एक अच्छा और सटीक घरेलू उपचार है। अब तो आप भी जान ही गई होंगी।

शौर्यपथ /हर कोई दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए दिनरात मेहनत करता है। भोजन भगवान द्वारा दिया गया प्रसाद है। अन्न को देवता माना जाता है। इसलिए अन्न का पूरा सम्मान करें। वास्तु में भोजन को ग्रहण करने और भोजन को बनाने को लेकर कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
भोजन ग्रहण करने से पहले हमेशा भगवान को भोग लगाएं। अन्न देवता और अन्नपूर्णा माता का स्मरण कर उन्हें धन्यवाद करें। अगर भोजन स्वादिष्ट न लगे तो कभी भी उसका तिरस्कार न करें। भोजन ग्रहण करते समय न तो किसी से बात करें और न ही कोई अन्य कार्य। वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि गीले पैरों के साथ भोजन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु भी बढ़ती है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर भोजन करने से ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख कर भोजन ग्रहण न करें। इससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। कभी भी टूटे या गंदे बर्तन में भोजन न खाएं। कभी भी बिस्तर पर बैठकर भोजन न ग्रहण करें। थाली को हाथ में उठाकर भी खाना न खाएं। जमीन पर बैठकर भोजन ग्रहण करना सबसे उत्तम है। भोजन की थाली को हमेशा अपने बैठने के स्थान से ऊपर रखें। ऐसा करने से घर में कभी भी खाने की कमी नहीं होगी। हर रोज गाय को रोटी खिलाएं। बिना स्नान किए रसोईघर में भोजन नहीं बनाना चाहिए। घर आए मेहमानों को दक्षिण या पश्चिम दिशा में बैठाकर भोजन कराएं। भोजन बनाते समय मन को शांत रखें और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य का विचार करें।

शौर्यपथ /काम के बढ़ते बोझ के बीच ‘फील गुड’ करना घर के बाहर रंग-बिरंगे फूल लगाना जितना आसान है। ब्रिटेन स्थित रॉयल हॉर्टिकल्चर सोसायटी का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गुलाब, गुलमोहर और मालती जैसे फूल न सिर्फ स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव घटाते हैं, बल्कि ‘डोपामाइन’ व ‘सेरोटोनिन’ हार्मोन के उत्पादन को भी बढ़ावा देते हैं, जिन्हें नकारात्मक विचारों पर काबू पाने तथा जीवन से संतुष्टि का एहसास जगाने के लिए अहम माना जाता है।
लॉरियैन सुइन-पुई के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 42 वयस्कों को अपने घर के बगीचे में कुछ पौधे रखने को दिए। सभी पौधे ऐसे गमले में लगाए गए थे, जिनमें समय-समय पर खुद बखुद जरूरी मात्रा में पानी की आपूर्ति होती रहती थी। यानी प्रतिभागियों को इनकी देखभाल करने की जरूरत नहीं थी।

हालांकि, पौधे रखने के बाद प्रतिभागी खुद इनके रखरखाव में दिलचस्पी दिखाने लगे। इस दौरान शोधकर्ताओं ने उनमें ‘कॉर्टिसोल’, ‘डोपामाइन’ और ‘सेरोटोनिन’ सहित अन्य हार्मोन के स्तर की जांच की।
उन्हें 53 फीसदी प्रतिभागियों में सभी हार्मोन संतोषजनक स्थिति में मिले, जबकि शुरुआत में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत के करीब था। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल लैंडस्केप एंड अर्बन प्लानिंग’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।

लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / बस या मेट्रो में दूर खड़े किसी अजनबी से समय पूछने के लिए आप क्या करते हैं? यकीनन अपनी कलाई की तरफ उंगली दिखाते होंगे। हालांकि, ब्रिटेन स्थित लिंग्विस्टिक्स एंड कम्युनिकेशन्स इंस्टीट्यूट के हालिया अध्ययन की मानें तो इशारों-इशारों में बात करने का यह अंदाज जल्द बीते दिनों की बात बन जाएगा। मोबाइल सहित अन्य गैजेट के आविष्कार से नई पीढ़ी का इन इशारों को समझने में असमर्थ होना इसकी मुख्य वजह है।

शोधकर्ता वाइव इवांस के मुताबिक कुछ इशारों के खास मायने होते हैं। हर देश, हर भाषा, हर सभ्यता के लोग आपसी संवाद के लिए इनका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल करते हैं। पर चूंकि ये इशारे चुनिंदा उपकरण, गैजेट या फीचर से जुड़े हैं, इसलिए तकनीकी बदलाव और बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ इनका इतिहास के पन्नों में दफन होना लाजिमी है। युवा पीढ़ी को पता ही नहीं होगा कि कलाई की तरफ उंगली दिखाने, अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को कान के पास ले जाने या फिर रेस्तरां में हवा में लिखने का इशारा करने का क्या मतलब है।

इतिहास बनते इशारे-
1.बिल मांगना
-होटल-रेस्तरां में वेटर को हवा में लिखकर यह संदेश देना कि वह बिल ले आए।

2.नकद का जिक्र
-उंगलियों और अंगुठे को आपस में रगड़कर यह जताना कि आप पैसे की बात कर रहे।

3.फोन कॉल करना-
-अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को मुट्ठी से बाहर निकालकर कान के पास ले जाना।

4.समय पूछना-
-कलाई पर उंगली थपथपाकर सामने वाले से यह पूछना कि टाइम क्या हो रहा है?

5.शीशा चढ़ाना-गिराना-
-हाथ को गोल-गोल घुमाकर खिड़की के शीशे चढ़ाने और गिराने का संकेत देना।

स्मार्टफोन का आविष्कार जिम्मेदार-
-इवांस कहते हैं, सड़कों पर अब पीसीओ बूथ कम ही दिखते हैं। घरों में भी लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल न के बराबर होता है। हर हाथ में स्मार्टफोन का आ जाना इसकी मुख्य वजह है। चूंकि, स्मार्टफोन को पकड़ने का तरीका लैंडलाइन से जुदा होता है, इसलिए युवा पीढ़ी फोन कॉल का इशारा करने के लिए अंगुठे और कनिष्ठा उंगली का इस्तेमाल करने के बजाय पूरी हथेली को कान के पास ले जाती है। समय पूछने और बिल मांगने से जुड़े इशारे भी स्मार्टफोन में घड़ी की मौजूदगी व डिजिटल भुगतान की सुविधा के चलते गायब हो रहे हैं।

वायरल वीडियो से सामने आया सच-
-पुराने इशारे कैसे दम तोड़ रहे हैं, इसकी बानगी सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल एक वीडियो में दिखी। न्यूयॉर्क निवासी डैनियल अलवाराडो अपनी पत्नी मार्सिएला के पास जाते हैं और उनसे इशारे में यह बताने को कहते हैं कि वह फोन पर बात कर रही हैं? मार्सिएला अपने अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को कान के पास ले जाकर दिखाती हैं। इसके बाद डैनियल अपने बच्चों से भी ऐसा करने को कहते हैं। इस दौरान दोनों अपनी हथेली को कान पर रखकर यह बताते हैं कि वे फोन पर बात करने में व्यस्त हैं। इस वीडियो को दो करोड़ से ज्यादा हिट मिल चुके हैं।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / दुनिया के 22 देशों में किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार होने वाली बड़ी आबादी में लड़कियों और युवा महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है।
यह सर्वेक्षण ब्रिटेन के संगठन 'प्लान इंटरनेशनल ने किया है और इसका शीर्षक 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स गर्ल्स रिपोर्ट यानी दुनिया में लड़कियों की स्थिति है। भारत, ब्राजील, नाइजीरिया, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, थाईलैंड और अमेरिका समेत 22 देशों की 15-25 वर्ष की 14,000 किशोरियों और महिलाओं ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया।
इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली 58 फीसदी लड़कियों और महिलाओं ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, व्हाट्सऐप और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए समान था।
यह सर्वेक्षण 11 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस से पहले जारी हुआ है।
सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां मिलीं जबकि 59 फीसदी को दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा। सर्वेक्षण के मुताबिक, अल्पसंख्यक और एलजीबीटीक्यू समुदायों से ताल्लुक रखनेवाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें उनकी पहचान की वजह से निशाना बनाया गया।
प्लान इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी एन-बिरगिट अलब्रेस्टन ने कहा, ''लड़कियों को उत्पीड़न के जरिए चुप कराया जा रहा है। लैंगिक समानता और एलजीबीटी समेत अन्य मुद्दों पर बोलने वाले कार्यकर्ताओं को भी प्राय: निशाना बनाया जाता है। ऐसे लोगों और उनके परिवार को धमकियां मिलती हैं।

मनोरंजन /शौर्यपथ / हरियाणवी क्वीन सपना चौधरी हाल ही में मां बनी हैं। उन्होंने इस साल की शुरुआत में हरियाणा के सिंगर-राइटर वीर साहू से शादी कर ली थी। इस खबर के बाहर आने के बाद कुछ लोग सपना की शादी और उनके मां बनने को लेकर सवाल उठाने लगे तो उनके पति वीर साहू भड़क गए और उन्होंने ट्रोलर्स की जमकर क्लास लगाई।
वीर साहू ने फेसबुक लाइव के जरिए फैंस को बताया कि वह पिता बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन लोगों करारा जवाब दिया, जो उनकी शादी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वीर ने कहा कि मेरी शादी हुई, बेटा हुआ तुमको क्या मतलब है? वीर ने कहा कि शादी के बाद मेरे फूफा का निधन हो गया था तो क्या किसी ने पूछा?
वीर ने सपना के खिलाफ गलत कमेंट करने वाले लोगों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि हमसे इस तरह सवाल पूछे जा रहे हैं जैसे हमने किसी डाका डाल दिया या किसी को मार दिया है। तुम किसी की बहन-बेटी की इज्जत नहीं करते। वीर ने गुस्से में कहा कि अगर तुम सपना की कहानी सुन लोगे तो आंखों मे आंसू आ जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने सपना का हमेशा साथ देने की बात कही।
बता दें कि सपना के पीआरओ चरणसिंह सहरावत ने हिन्दुस्तान लाइव से बातचीत में सपना के मां बनने की खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सपना चौधरी ने 4 अक्टूबर को बेबी व्बॉय को जन्म दिया है। सपना की शादी को लेकर उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी में सपना ने वीर साहू से कोर्ट मैरिज की थी।
उन्होंने आगे बताया कि एक प्रोग्राम का आयोजन कर इस शादी के बारे में सभी को बताना था लेकिन उसी दौरान वीर साहू के फूफा का निधन हो गया। इस वजह से प्रोग्राम को टाल दिया गया लेकिन फिर बाद में कोरोना के चलते देश में लॉकडाउन हो गया। इसके चलते सपना फैन्स को अपनी शादी की जानकार नहीं दे पाईं।

मनोरंजन / शौर्यपथ / आमिर खान की बेटी इरा खान मल्टीटैलेंटेड हैं। इरा की लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट से ऐसा लगता है कि उनके करियर लिस्ट में एक और प्रोफेशन शामिल हो गया है। यह प्रोफेशन है- टैटू आर्टिस्ट। जी हां, इरा ने सोशल मीडिया पर अपनी विशलिस्ट को शेयर करते हुए बताया कि उन्हें टैटू आर्टिस्ट बनने की ख्वाहिश थी और वह अब गई हैं। इरा की नई इंस्टाग्राम पोस्ट में एक परमानेंट टैटू की तस्वीरें शेयर की हैं, जिसे उन्होंने अपनी ट्रेनर नुपुर शिखर के हाथ में बनाया है।
तस्वीरों को शेयर करते हुए इरा ने कैप्शन लिखा- 'बकेट लिस्ट आइटम- #5 डन। मैंने अपना पहला टैटू बनाया। शुक्रिया नुपूर मुझपर विश्वास करने के लिए। इतना बुरा नहीं है, है ना। मुझे लगता है कि अब मेरे पास एक और करियर ऑप्शन है।' एक तस्वीर में इरा मास्क और ग्लव्स पहनकर टैटू बना रही हैं। इरा खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर फैमिली और फ्रेंड्स के साथ तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं। खास बात यह है कि इरा अपने पिता आमिर खान की तरह ही कई क्रिएटिव चीजें करती रहती हैं।
आपको बता दें कि इरा खान बॉलीवुड की पॉपुलर स्टार डॉटर्स में से एक हैं। लाइमलाइट से दूर रहने वालीं इरा बीते दिनों नए घर में शिफ्ट होने के कारण चर्चा में थीं। इरा पूरे लॉकडाउन पिता आमिर खान के घर पर थीं। इरा ने अपने भाई अजाद राव को 'लॉकडाउन बडी' बताया था।

 

क्या अवैध सूदखोरी पर होगी जाँच , क्या आयकर विभाग लेगा मामले को संज्ञान

दुर्ग / शौर्यपथ / सूदखोरी समाज के लिए वर्तमान परिवेश में एक अभिशाप बनता जा रहा है शासन की लाख कोशिश के बाद भी अवैध रूप से सूदखोरी आज भी चलन में है अवैध सूदखोरी के मामले समय समय पर सामने भी आते रहे है किन्तु आज भी ऐसे कई लोग है जो इस सूदखोरी के जाल में उलझे हुए है . ऐसे कई प्रकरण न्यायालय में लंबित है जिसमे प्रतिवादी द्वारा कर्ज ली गयी रकम से कई गुना ज्यादा देने के बाद भी मुकदमे की मार झेल रहे है . सूदखोर जरुरत के समय रकम तो देते है किन्तु साथ ही विश्वास और भरोसे को भी दफऩ करते हुए जरुरतमंदो से खाली स्टाम्प , ब्लैंक चेक आदि पर दस्खत करवा कर अपनी तरफ से मजबूत हो जाते है और फिर खेल शुरू होता है 5 प्रतिशत से लेकर 25-30 प्रतिशत तक के ब्याज का धीरे धीरे कर्ज लेने वाला रकम चुकाते चुकाते थक जाता है किन्तु सूदखोरों की भूख नहीं मिटती और मामला पहुँच जाता है न्यायालय जहा कई प्रकरण में समझौता होता है तो कई प्रकरण में सजा किन्तु इस पर फिर भी कोई ध्यान नहीं देता कि रकम देने वाले के पास जो पैसे है क्या वो आयकर विभाग की नजर में है क्योकि ऐसे रकम का लेनदेन अधिकतर नगद ही होता है ऐसे ही एक मामले की जानकारी शौर्यपथ समाचार के पास है जिसमे सामने जो दिख रहा है वो भी सच हो सकता है किन्तु जो नहीं दिख रहा है उस पर जांच की तरफ रुख करने से कई मामले का खुलासा हो सकता है .
ऐसे ही एक मामले मे सुभाष नगर निवासी फिरोज राठोर के साथ धोखाधड़ी हुई जिसकी एफआईआर प्रार्थी द्वारा पद्मनाभपुर चौकी में 2019 में कर दी गयी मामला था वाहन खरीदी बिक्री में लेनदेन का जसके अनुसार चिखली निवासी देवेन्द्र द्वारा फिरोज राठौर से 2 लाख 90 हजार और 29 लाख की रकम के लेनदेन पर विवाद कौर्ट तक पहुँच गया . मामले के अनुसार देवेन्द्र सिंह ने एक वाहन का क्रय किया जिसका भुगतान फिरोज राठौर द्वारा 2लाख90 हजार टोयोटाशोरूममें (ह्म्ह्लद्दह्य) द्वारा किया गया साथ ही 29 लाख रूपये का कर्ज भी दिया गया और वाहन के अपने कब्जे में ले लिया गया जिसकी कि़स्त की रकम का भुगतान देवेन्द्र सिंह को करना था जिसकी बाकायदा लिखा पढ़ी भी हुई लिखा पढ़ी कितनी सच है और कितने झोल मामला न्यायालय में है किन्तु इन सबमे बड़ी बात यह है कि फिरोज राठौर द्वारा इस लेनदेन में लिखापढ़ी जिस स्टाम्प में हुई उस पर कई तरह के सवाल परिवादी की तरफ से उठाये जा रहे है इतनी बड़ी रकम की लिख पढ़ी में एक बात गौर करने वाली है कि जो रकम छोटी है और जिसका लेनदेन बैंकिंग से हुआ वह रकम बाकायदा टाइप की हुई है वही उससे 10 गुना बड़ी रकम 29 लाख रूपये पेन से लिखे हुए है और नगद भुगतान की बात लिखी गयी है .
वही आरोपी देवेन्द्र सिंह का कहना है कि मेरे द्वारा सिर्फ 2 लाख 90 हजार की रकम ली गयी थी वही 29 लाख की रकम की जानकारी मुझे नहीं है इससे पहले भी संव्यवहार हुआ था किन्तु इतनी बड़ी रकम मेरे द्वारा नहीं ली गयी . वैसे 29 लाख की रकम के बारे में देवेन्द्र सिंह द्वारा आयकार विभाग में जांच की मांग की गयी है कि क्या इतनी बड़ी रकम फिरोज राठौर के पास होने की जानकारी विभाग को है वही इन सबमे बड़ी बात यह है कि जिस वाहन का लेनदेन हुआ था वह वाहन फोर्चुनर टोयटा है जिसका बाजार मूल्य लगभग 32 लाख का है इतनी बड़ी वाहन को खरीदने वाला आखिरकार उस वाहन को अपने पास क्यों नहीं रखा है प्राप्त जानकारी के अनुसार वाहन देवेन्द्र सिंह के नाम से है जिसके रकम का भुगतान फिरोज राठौर ने किया किन्तु वाहन का उपयोग अन्य कोई तीसरा कर रहा है . क्या इन शिकायतों की सच्चाई के पीछे कोई और कहानी है . आरोपी देवेन्द्र सिंह की धर्मपति से चर्चा पर पता चला कि वाहन में अवैध कार्य कर फ़साने की धमकी के भी फोन आ रहे है जिसकी शिकायत देवेन्द्र सिंह की पत्नी ने मोहन नगर थाने में कर दी है .

पुलिस जाँच से हो सकते है कई खुलासे ..

शिकायत पर शिकायत लें दें पर बड़ी बड़ी रकम कभी नगद तो कभी बैंकिंग आखिर ऐसा क्या व्यापार करते है है वादी और परिवादी की लाखो के नगद लेनदेन पर जो सालो से हो रहा अचानक दरार आ गयी क्योकि इस बार रकम 30 लाख के करीब की है और दोनो पक्ष अपने अपने बात पर अडिग है क्या इस नगद लेनदेन के पीछे कोई और कहानी तो नहीं इस बात की निष्पक्ष जाँच से हो सकते है कई खुलासे हो क्योकि अब इन लेन देंन के फर्जी होने की बात पर देवेन्द्र सिंह की धर्मपत्नी के द्वारा भी फिरोज राठौर व अन्य को नोटिस भेजने की बात कही गयी है .

दुर्ग । शौर्यपथ । अवैध भूमि पर कब्जे के नित नए मामले उजागर होते है जो विवाद का कारण बनते है इसमे जितना दोष अवैध कब्जा करने वालो का होता है उतना ही दोष क्षेत्र के निगम की कार्यप्रणाली का भी है । दुर्ग निगम में अवैध कब्जेधारियों के हौसले बुलंदी पर है कारण अधिकारियों की लापरवाही का है । एक तरफ तो आयुक्त अपील करते है कि ऐसी किसी तरह की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्यवाही की जाएगी वही दूसरी तरफ जानकारी होने के बाद भी निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौन रहते है जिससे ये तो स्पष्ट है कि निगम की अपील पूरी तरह दिखावा मात्र है । ऐसे कई मामले है जिनकी जानकारी विभाग को है किंतु कार्यवाही के नाम पर शून्य । निगम अधिकारी इतने लापरवाह है कि शासन के आदेशों को भी लगता है रद्दी की टोकरी पर डाल देते है । शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा ऐसे कई अवैध निर्माण की सूचना के बार अधिकारियों को दी गई किन्तु आश्वासन के अलावा अधिकारी कुछ नही करते और ऐसे ही कारणों से अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद पर है चाहे मामला आदर्श नगर में नाले की जमीन पर घर बनाने का हो या सड़क के ऊपर से एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक रोपवे बनाने वाले गंगोत्री हॉस्पिटल का हो या sdm दुर्ग के आदेश पर शासन की जमीन को सुरक्षित करने के लिए घेरा बनाने का हो ऐसे कई मामलों की जानकारी के बाद भी निगम के भवन अधिकारियों द्वारा लापरवाही पूर्वक कार्य दो पक्षो के विवाद का कारण बनता जा रहा है । ऐसे ही एक मामला हाल ही में आया है जिसमे करोड़ो की जमीन पर अवैधानिक रूप से निर्माण कार्य प्रगति पर है और निगम प्रशासन मौन है । मामला है बाफना मंगलम से लगी हुई जमीन का करोड़ो की इस जमीन पर जिसका प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद भी रसूखदारों द्वारा क्रय किया गया और अब फैसला एक पक्ष ऋषिकेश गुप्ता के पक्ष में आ गया । किन्तु सारी जानकारी के बाद भी कौड़ियों के दाम खरीदने वाले रसूखदारों द्वारा कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए निगम के नियमो की धज्जी उड़ाते हुए निर्माण चालू कर दिया गया जिस तेजी से निर्माण कार्य हो रहा ऐसा प्रतीत होता है कि माह दो माह में बिल्डिंग खड़ी हो जायेगी । इस मामले में ऋषिकेश गुप्ता द्वारा निर्माण करने वालो को , पटवारी को व सम्बंधित विभाग को सूचना व शिकायत की गई किन्तु कोई भी शासन के आदेश कोर्ट के फैसले को गंभीरता से नही ले रहा । दुर्ग निगम क्षेत्र में होने के कारण बिना अनुमति निर्माण पर कार्यवाही की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की बनती है किंतु निगम प्रशासन भी मौन है ऐसे में भविष्य में इस जमीन के मालिक और अवैध निर्माण करने वालो के बीच कोई विवाद हो तो कौन इसका जिम्मेदार होगा जब शक्तियां प्राप्त प्रशासन मौन है तो कैसे कह सकते है कि दुर्ग में सुशासन है । जब अवैध रूप से निर्माण करने वाले खुले आम शासन के सामने बेख़ौफ़ निर्माण कर रहे है तो कैसे कहा जा सकता है कि शासन कार्य के प्रति जिम्मेदार है अधिकारी कार्य के प्रति गंभीर है ये हाल उस जिला मुख्यालय का है जहां प्रदेज़ह के मुख्यमंत्री का , गृह मंत्री का , पीएचई मंत्री का निवास है प्रदेश के हाई प्रोफाइल जिले में ये हाल है तो सोंचिये दुरस्त इलाके का क्या हाल होगा । शेषण के इस धृतराष्ट्र रूपी रवैये से अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद है और पीड़ितों की परेशानी दुगनी हो गई । क्या दुर्ग निगम आयुक्त मामले को संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही करेंगे या फिर मौन रहेंगे क्योकि गुप्ता द्वारा सम्पूर्ण जानकारी और शिकायत निगम प्रशासन में कर दी गई है अब देखना यह है कि निगम किस ओर अपना रुख रखता है पीड़ित की ओर या अवैध निर्माण करने वालो की तरफ ?

रायपुर। शौर्यपथ । छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर में हाल ही में नक्सल हिंसा की वारदात तेज होने पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके भी चिंतित हैं। राजभवन के सूत्रों के अनुसार उन्होंने प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को पत्र लिखकर अपनी चिंता से अवगत कराया है, इसके साथ ही उन्होंने राज्य में नक्सली घटनाएं बढ़ने के मामले को लेकर एक समीक्षा बैठक भी बुलाई है। इस बैठक में गृह विभाग के उच्चाधिकारी भी शामिल होंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह सहित कुछ अन्य लोगों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बढ़ती नक्सल घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी। 138 लोगों की गई हैं जान राज्य में कांग्रेस सरकार के शासन काल में वर्ष 2019 से लेकर 2020 में अब तक नक्सलियों के हाथों 53 सुरक्षा कर्मियों की जानें गई हैं। इसी तरह नक्सलियों ने इसी अवधि में अब तक 85 ग्रामीणों की हत्याएं की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार ज्यादातर घटनाएं अलग-अलग हुई हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों की नक्सल हत्याओं से पूरे बस्तर में दहशत का वातावरण बनता जा रहा है। समीक्षा बैठक जल्द राजभवन से पिछले दिनों गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि नक्सल घटनाओं को लेकर इसी माह समीक्षा बैठक आयोजित की जानी है। इस बैठक के लिए अभी तारीख तय नहीं है। माना जा रहा है कि गृहमंत्री द्वारा पत्र के जवाब के साथ बैठक की तारीख सामने आएगी। कई बिंदुओं पर होगी समीक्षा बताया गया है कि गृहमंत्री को लिखे पत्र में राज्यपाल ने राज्य में हो रही नक्सल घटनाओं के संबंध में कुछ बिंदुओं के आधार पर चर्चा व समीक्षा की बात कही है। इसमें यह बात शामिल है कि प्रदेश में नक्सली घटनाएं क्यों बढ़ रही है, इन घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या किया जा सकता है, बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए है, इन घटनाओं को रोकने के लिए कौने से कदम उठाए जा सकते हैं? रमन ने भी लिखा था राज्यपाल को पत्र पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने प्रदेश में नक्सल घटनाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर तीन दिन पहले ही राज्यपाल को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कहा था कि प्रदेश में बीते कुछ महीनों में नक्सलवादी बस्तर संभाग में दहशत और आतंक का माहौल बनाने में सफल हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में ही बस्तर संभाग में ही नक्सलियों ने 76 लोगों की हत्याएं की हैं इनमें ग्रामीण तथा पुलिस कर्मी शामिल हैं। उन्होंने ये भी लिखा था कि पूर्व में भाजपा सरकार ने नक्सलियों की कमर तोड़ना का प्रयास कर बस्तर को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विकास किया था,वह अब रुक गया है। बताया गया है कि डॉ.रमन के अलावा कई अन्य लोगों ने भी पत्र लिखकर नक्सल घटनाओं पर चिंता जताते हुए राज्यपाल से कार्रवाई का आग्रह किया था।

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