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June 03, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

जैजपुर । शौर्यपथ । यूं तो पुलिस का काम ही समाज की सुरक्षा और कानून का बेहतर तरीके से पालन कराना होता है जिससे आमजन स्वतन्त्र और सुरक्षित रूप से अपना जीवन यापन कर सके । हालांकि जैजैपुर पुलिस पर अपने कर्तव्य के निर्वहन करने में लापरवाही बरतने जैसी लगातार कुछ ना कुछ आरोप तमाम समाचार पत्रों और चैनलों के खबरों के माध्यम से पता चल रहता है जिससे सबको लगने लगा था कि जैजैपुर पुलिस पूरी तरह निकम्मी हो चुकी है और यहां हर तरह के केस दब जाते हैं लेकिन जिस तरह से जैजैपुर पुलिस के निरिक्षक तेजराम यादव की टीम ने बीते 13 तारीख के दर्मयानी रात जैजैपुर नगर पंचायत के कचरा गोदाम के चौकीदार खेमचरण कुम्हार के कमरे में चल रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफ़ाश किया है जिसमें आठ लड़कों समेत एक लड़की व एक चौकीदार समेत कुल 10 लोगों को ipc की धारा 151,107, 116(3) के तहत गिरफ़्तार कर नयायालय पेश किया है । गिरफ़्तार किये गये लोगों में रामकुमार कुर्रे पिता सन्कर लाल कुर्रे उम्र 27 साल निवासी मुक्ता मालखरौदा ,कृष्णा यादव पिता फ़ूलसाय यादव उम्र 21 साल निवासी भोथीडीह,राम किशन यादव पिता इतवारी लाल यादव उम्र 24 साल निवासी मोहतरा मालखरौदा,आनंदराम साहू पिता भगत राम साहू उम्र 27 साल निवासी मुक्ता मालखरौदा, इमरान खान पिता आजम खान उम्र 28 साल मिशनचौक मालखरौदा,अरविंद कुमार पिता जगेश्वर प्रसाद उम्र 31 साल निवासी मिशन चौक मालखरौदा,हरिश यादव पिता मोहन यादव उम्र 26 साल निवासी संजयनगर जैजैपुर, माईकल साहू पिता खेमलाल साहू निवासी वार्ड 12 जैजैपुर,सहित युवती सन्तोषी चौहान उम्र 20 साल निवासी पंजरी प्लांट चक्रधर नगर रायगढ़ व चौकीदार खेमचरण कुम्हार शामिल हैं जैजैपुर क्षेत्र अब तक अवैध शराब ,जुआ और अवैध वसूली के कारण जाना जाने लगा था जो कि अब नये थाना प्रभारी तेजराम यादव के आने के बाद इस प्रकार की कार्यवाही से दिन भर धूप – बरसात में घूम घूम कर समाज की बुराईयों को कानून के सामने लाने वाले पत्रकारों और आम जनता में कानून और न्याय के प्रति उम्मीद भी जगी है कि अब जैजैपुर पुलिस भी समाज में फ़ैल रही बुराईयों और अपराधों को मिटाने में कामयाब होगी। इस कार्यवाही से अब इस तरह के घिनौने काम को अन्जाम देने वाले लोगों के बीच डर का माहौल हो गया है।

धर्म/ शौर्यपथ / न्याय के देवता शनि कर्म के ग्रह माने जाते हैं। इन की बुरी दृष्टि से बचने के लिए लोग क्या-क्या उपाय नहीं करते। शनि हमेशा मेहनती लोगों का साथ देते हैं। इनकी कृपा लोगों पर रहे तो ये रंक को राजा और राजा को रंक भी बना सकते हैं। गरीबों की सेवा करने वाले और कर्मठ लोगों पर इनकी हमेशा अच्छी दृष्टि रहती है। आपको बता दें कि शनि की कुछ राशियों पर हमेशा मेहरबान रहते हैं। कहा जाता है कि ये राशियां शनिदेव की पसंदीदा राशियां है। आइए जानें इन राशियों के बारे में:
तुला राशि के लोगों पर हमेशा शनि की अच्छी दृष्टि रहती है। तुला राशि के लोग विनम्र स्वभाव के होते हैं। ये लोग विवाद से दूर रहते हैं। तुला राशि के लोग मेहनत और ईमानदारी से जीवन निर्वाह करना पसंद करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अगर इस राशि के लोग मेहनती हों और गरीबों की सहायता करने वाले हों तो उनकों सफलता निश्चित ही मिलती है।
कुंभ राशि के लोगों पर भी शनि मेहरबान रहते हैं। शनि देव कुंभ राशि के स्वामी है। इस राशि के लोगों को शनि हमेशा मेहनत का फल देते हैं। इनके थोड़े से प्रयत्न से शनि देव प्रसन्न होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि कुंभ राशि के जातक बहुत सीधे और शांत होते हैं। ये किसी से धोखा आदि नहीं करते हैं। न्याय प्रिय देवता शनि इसी वजह से इस राशि के लोगों पर अपनी अच्छी दृष्टि रखते हैं।
कुंभ राशि के लोग मानवीय और परोपकारी होते हैं। ये लोग समाज की भलाई के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यही वजह है कि शनिदेव को यह राशि पसंद है।
मकर राशि के लोगों पर भी शनिदेव की अच्छी नजर रहती है। शनिदेव इस राशि के लोगों को हमेशा उनके अच्छे कार्यों का फल समय पर देते हैं। इनके जीवन में खुशियां ही खुशियां रहती है। मकर राशि के लोग गंभीर और सहनशील होते है। ये लोग मन के विपरीत कभी कुछ नहीं करते। शनि अगर इनकी राशि में अच्छा होते तो वारे न्यारे कर सकता है।

मनोरंजन / शौर्यपथ / एक्टर आयुष्मान खुराना को किसी परिचय की जरूरत नहीं। आज के समय में आयुष्मान खुराना बॉलीवुड इंडस्ट्री के सबसे वर्सेटाइल एक्टर माने जाते हैं। आज आयुष्मान अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस मौके पर उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने एक फोटो शेयर की है, जिसमें आयुष्मान के चेहरे पर केक लगा है और वह साथ में खड़ी हैं। फोटो शेयर करते हुए ताहिरा लिखती हैं, 'मेरे पास केक है जिसे मैं खा रही हूं, आयुष्मान खुराना, जन्मदिन मुबारक मेरे हमसफर।Ó
आपको बता दें कि आयुष्मान खुराना ने अपने करियर में कई अलग-अलग किस्म के किरदार निभाए। दर्शकों का दिल जीता। विक्की डोनर से लेकर फिल्म गुलाबो-सिताबो तक का इनका सफर काफी शानदार रहा। इस समय भी आयुष्मान खुराना के पास कई प्रोजेक्ट्स हैं जिसपर वह काम कर रहे हैं। हम सभी लोग जानते हैं कि आयुष्मान रिएलिटी शो रोडीज का हिस्सा रह चुके हैं। उसके बाद उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना सफर तय किया।
इस समय आयुष्मान खुराना चण्दीगढ़ में अपनी पत्नी ताहिरा कश्यप और दोनों बच्चों के साथ क्वॉलिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं। ताहिरा कश्यप सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह रोज पर्सनल लाइफ अपडेट्स फैन्स को दे रही हैं। बता दें कि आयुष्मान के भाई अपारशक्ति खुराना अपनी पत्नी संग चण्दीगढ़ में ही हैं।

खेल /शौर्यपथ / मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए तीन वनडे मैचों की सीरीज के दूसरे मैच में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 24 रन से हरा दिया। इंग्लैंड ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। टीम ने जो रूट और कप्तान इयोन मोर्गन के किफायती पारियों के दम पर 231 रन बनाए। इसके जवाब में कंगारू टीम कप्तान आरोन फिंच के 73 रनों की शानदार पारी के बावजूद 207 रन ही बना सकी। इससे पहले सीरीज के शुरुआती मैच में ऑस्ट्रेलिया ने 19 रन से जीत दर्ज की थी। अब सीरीज का आखिरी और निर्णायक वनडे 16 सितंबर को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में ही खेला जाएगा। जीता हुआ मैच हारने पर कंगारू तेज गेंदबाज पैट कमिंस ने बयान दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस ने कहा है कि इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में दो बार जीत के करीब पहुंचकर मिली हार को पचाना बहुत मुश्किल है। इंग्लैंड ने आठ विकेट 149 रन पर गंवाने के बाद नौ विकेट पर 231 रन बनाए। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने शानदार शुरुआत करके दो विकेट पर 144 रन बना लिए थे लेकिन पूरी टीम 207 रन पर ऑलआउट हो गई। तीन मैचों की सीरीज अब 1-1 से बराबर है।
कमिंस ने कहा कि मैं इस मैच के फुटेज देखूंगा। हमें 40वें ओवर तक लगा था कि मैच हमारी गिरफ्त में है लेकिन फिर पासा पलट गया। हमें उन्हें 200 रन पार करने देना नहीं चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस हार को पचाना मुश्किल है। हमने अच्छी गेंदबाजी की लेकिन आखिरी 10 ओवर में अतिरिक्त 40-50 रन दे दिए। कमिंस ने कहा कि उनकी टीम को इस तरह की पिचों पर बेहतर प्रदर्शन करना होगा क्योंकि 2023 में भारत में विश्व कप में ऐसी ही पिचों से सामना होगा।

सेहत / शौर्यपथ / पतझड़ में जन्मे बच्चों में अस्थमा, हे फीवर और खानपान से संबंधित एलर्जी होने का खतरा ज्यादा होता है। एक हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है। ब्रिटेन में दुनिया में सबसे अधिक एलर्जी की दर है, यहां की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी कम से कम एक एलर्जी विकार से पीडि़त है।
कोलोराडो की नेशनल ज्यूइश हेल्थ की शोधकर्ता डॉक्टर जेसिका हुई ने कहा, हमने अपने क्लिनिक में इलाज किए गए प्रत्येक बच्चे को देखा और पाया कि जो बच्चे पतझड़ में पैदा हुए थे, उनमें एलर्जी से जुड़ी सभी स्थितियों का अनुभव करने की अधिक संभावना थी। अब हम इस बारे में अधिक अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसा क्यों है और हम दृढ़ता से मानते हैं कि यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादातर एलर्जी बचपन में ही शुरू होती है जब एलर्जी फैलाने वाले रोगाणु सूखी हुई त्वचा से अंदर प्रवेश करते हैं। इससे एलर्जी की एक श्रृखंला की शुरुआत हो जाती है जिसे एटॉपिक मार्च कहते हैं।
ब्रिटेन में पांच में से एक बच्चे को एक्जीमा की शिकायत है। जिन्हें एक्जीमा की शिकायत होती है उनके शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया का स्तर ज्यादा होता है। इससे एलर्जी पैदा करने वाले रोगाणुओं को नष्ट करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि पतझड़ में पैदा होने वाले बच्चों की त्वचा बेहद कमजोर होती है और इसलिए ये बार-बार एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।

शिक्षा / शौर्यपथ / जीवन में हर कोई जीतना चाहता है लेकिन कभी-कभी काफी प्रयासों के बाद भी हम हार जाते हैं। जीवन के किसी पड़ाव पर हारना बुरा नहीं है लेकिन हारकर वापस न उठना या हारे हुए मन से जीते जाना बहुत बुरा है लेकिन कभी न कभी ऐसा होता है जब किसी हार से हम बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं और हमारी हिम्मत जवाब दे जाती है। ऐसे में खुद को फिर से खड़ा करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए-
अपनी जीत को याद करें
आपको जब भी लगे कि अब आप हारने के बाद फिर से खड़े नहीं हो सकते, तो आपको जरुरत है कि आप जीत को याद करते हुए सोचें कि एक दिन वो भी था, जब आपको जीत हासिल हुई थी। ऐसे में आप महसूस करेंगे कि आपके मन से नकारात्मकता जाने लगेगी।

जानवरों से सीखें
इंसान किताबों से सीखता है लेकिन जानवरों की प्रकृति से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। सभी जानवर भोजन की तलाश में इधर-उधर घूमते हुए मेहनत करते हैं। वो रोजाना यही काम करते हैं लेकिन फिर भी कभी हार नहीं मानते और मेहनत करते रहते हैं।
अपने लक्ष्य को फिर से याद करें
आपकी हार ने अगर हौंसला तोड़ दिया है, तो अपने लक्ष्य को दुबारा याद करें। आप यह सोचें कि आपको अगर अपना लक्ष्य मिल जाता है, तो आपके जीवन में क्या बदलाव आता है। इससे आपका हौंसला बढ़ जाएगा।
अपने करीबियों को याद करें
आप दुबारा कोशिश करते हैं और लक्ष्य को पा लेते हैं, तो आपके करीबियों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह सोचिए कि आप लक्ष्य को पाकर उनके जीवन में क्या बदलाव ला सकते हैं। ऐसा करने से आप निराशा को भूलकर आगे बढऩे का निर्णय लें पाएंगे।

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में व्यक्ति को सफल बनाने की बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षाविद और कुशल अर्थशास्त्री भी थे। चाणक्य की नीतियां आप भी लोगों को जीवन में सही रास्ता दिखा रही हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, मित्रता और दुश्मनी संबंधी समस्याओं का उपाय बताया है।

चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सफल होना है तो उसे नीति शास्त्र को जीवन में अपना लेना चाहिए। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति में कौन-से ऐसे दो गुण होने चाहिए, जो दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।

1. विनम्रता-

चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा विनम्र होना चाहिए। विनम्रता से व्यक्ति लोगों के दिलों में राज करता है। विनम्र व्यक्ति क्रोध से मुक्त होता है और उसे समाज में भी मान-सम्मान मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो काम व्यक्ति धैर्य के साथ करता है, उसे सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को विनम्रता का गुण अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कई बार दु्श्मन भी आपकी विनम्रता के सामने झुक जाता है और दोस्ती का हाथ खुद ही बढ़ा देता है।

2. सत्य बोलना-

चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में झूठ नहीं बोलना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, झूठ बोलने से व्यक्ति की प्रतिभा का नुकसान होता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं और कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा झूठ से दूर रहना चाहिए।

 

सेहत / शौर्यपथ / वजन घटाने की कोशिशों में जुटे हैं? कैलोरी में कटौती से लेकर एक्सरसाइज तक सब आजमाकर देख लिया, पर मोटापा पीछा छोडऩे का नाम ही नहीं ले रहा? अगर हां तो एक बार लो-कार्ब डाइट आजमाकर देखें। 2020 यूरोपियन एंड इंटरनेशनल ओबेसिटी कांग्रेस में पेश एक डच अध्ययन में कार्बोहाइड्रेट से परहेज को बढ़ते वजन पर काबू पाने में सबसे असरदार करार दिया गया है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे या खतरे के निशान पर पहुंचे लोगों में।
शोधकर्ताओं के मुताबिक मोटापे के शिकार 75 फीसदी लोग इस बात से अनजान होते हैं कि उनमें इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। दरअसल, 'इंसुलिन रेजिस्टेंसÓ पनपने पर शरीर में पहुंचने वाली शक्कर ऊर्जा में तब्दील नहीं हो पाती। इससे फास्टफूड, मीठे और तैलीय पकवानों से दूरी बनाने तथा जिम में घंटों पसीना बहाने के बावजूद वजन घटाने के अभियान में कुछ खास कामयाबी नहीं मिल पाती है। मोटापे पर नियंत्रण हासिल करने के लिए व्यक्ति का कार्बोहाइड्रेट की मात्रा में कमी लाना जरूरी हो जाता है।
प्रोफेसर एलेन गोवर्स के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने टाइप-2 डायबिटीज से पीडि़त 380 वयस्कों पर 'कैलोरी रिस्ट्रिक्शन डाइटÓ, 'लो कार्ब डाइटÓ और '6*6 डाइटÓ का असर आंका। '6*6 डाइटÓ में तीन चरणों में कार्बोहाइड्रेट के सेवन में कमी लाई जाती है। प्रतिभागी के जहां प्रोसेस्ड खाने पर पूर्ण पाबंदी होती है। वहीं, प्रोटीन और फाइबर की खुराक बढ़ाते हुए उसे तीनों पहर के खाने में सब्जी जरूर शामिल करने की सलाह दी जाती है।
एक साल बाद गोवर्स और उनके साथियों ने पाया कि '6*6 डाइटÓ वजन घटाने में 'कैलोरी रिस्ट्रिक्शन डाइटÓ से दोगुना ज्यादा असरदार थी। इससे इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाने और रक्तचाप नियंत्रित रखने में भी मदद मिली, वो भी बिना किसी दवा के। बकौल गोवर्स, अध्ययन से साफ है कि डायबिटीज, प्री-डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम सहित इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याएं झेल रहे मरीजों में वजन घटाने के लिए सिर्फ कैलोरी में कमी लाना काफी नहीं है। कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, फाइबर सहित विभिन्न मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों की संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।
'6*6 डाइटÓ सबसे ज्यादा फायदेमंद-
-'6*6 डाइटÓ में कैलोरी में कटौती पर जोर नहीं दिया जाता है। व्यक्ति को गुड फैट से लैस खाद्य वस्तुएं, मसलन मछली, बादाम, ऑलिव ऑयल, फलियां और अंकुरित अनाज खाने की पूरी छूट होती है। हालांकि, प्रोसेस्ड फूट खाने की मनाही रहती है। कार्बोहाइड्रेट से पूर्ण परहेज से इसलिए रोका जाता है, ताकि ग्लुटेन एलर्जी न विकसित हो। इसमें शरीर कार्बोहाइड्रेट पचाने की क्षमता खो देता है।
तीन चरण में होती है डाइटिंग-
-पहले चरण में दिनभर में 36 ग्राम से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट नहीं लेना होता। वहीं, प्रोटीन की खुराक 1.2 ग्राम प्रति किलोग्राम शारीरिक वजन के बराबर लानी होती है। जब मोटापे में उल्लेखनीय कमी आने लगे तो दूसरे चरण में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा थोड़ी बढ़ा दी जाती है। वहीं, तीसरे चरण में जब वजन कटौती का लक्ष्य पूरा हो जाए तो व्यक्ति सामान्य मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेने लगता है।
लाजवाब असर-
-46.9त्न प्रतिभागी सालभर में 5त्न या उससे अधिक वजन घटाने में कामयाब हुए
-40त्न का ब्लड शुगर सामान्य हो गया, रक्तचाप में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई
-30त्न थी ब्लड शुगर तो 40त्न थी वजन घटाने वालों की संख्या लो-कार्ब डाइट ग्रुप में
-50 से 100 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लेने की इजाजत होती है इस डाइट में, कैलोरी में कमी पर ज्यादा जोर रहता है

नई दिल्ली / शौर्यपथ / हिंदू मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिकों की शादी का केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है. केंद्र सरकार ने कहा कि हमारी कानूनी प्रणाली, समाज और समलैंगिक जोड़ों के बीच विवाह को मान्यता नहीं देती है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि अदालत को ध्यान में रखना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किया है, इससे ज्यादा कुछ नहीं. याचिकाकर्ता समलैंगिकों की शादी को कानूनी मान्यता की मांग नहीं कर सकते. स्त्र ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निषिद्ध संबंधों की डिग्री के खंड को पढ़ा और कहा कि यह "पुरुष" और "महिला" को संदर्भित करता है.
वहीं याचिकाकर्ता राघव अवस्थी का कहना था कि वो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिकों की शादी को पंजीकृत करने की मांग कर रहे हैं. कानून यह नहीं कहता है कि विवाह एक पुरुष और एक महिला के बीच होना है. विषमलैंगिक के लिए उपलब्ध लाभ इस प्रकार समलैंगिक जोड़ों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या किसी समलैंगिक जोड़े ने विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन किया लेकिन उसे इनकार कर दिया गया. अवस्थी ने कहा कि हां, लेकिन वे कोर्ट के सामने आने को तैयार नहीं थे, इसलिए जनहित याचिका दाखिल की गई है.

नई दिल्ली / एजेंसी / चेन्नई / NEET परीक्षा आयोजित करने को लेकर कई लोगों ने आवाज उठाई और सरकार से परीक्षाओं को स्थगित करने की अपील भी की. इस बीच, मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने लोकप्रिय साउथ स्टार सूर्या शिवकुमार के खिलाफ अवमानना का आरोप लगाया है. एक्टर सूर्या ने तमिलनाडु में तीन मेडिकल छात्रों के सुसाइड के बाद अदालत को लेकर रविवार को टिप्पणी की थी. बता दें कि तमिलनाडु में पिछले चार छात्रों ने आत्महत्या कर ली, इन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा NEET में शामिल होना था.
मद्रास उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में सूर्या के बयान से 'विवादास्पद हिस्सेÓ को लेते हुए जस्टिस एस एम बालासुब्रमण्यम ने कहा, "मेरी राय में उक्त कथन न्यायालय की अवमानना के बराबर है. इसमें न सिर्फ माननीय न्यायाधीशों की निष्ठा और भक्ति और हमारे देश की महान न्यायिक प्रणाली को भी कमतर दिखाया गया बल्कि बुरी तरह से आलोचना भी की गई. यह न्यायपालिका पर जनता के विश्वास के लिए खतरा है."
सूर्या ने नीट से जुड़ी मौत की घटनाओं को "दर्दनाक" और "अंतरात्मा को झकझोर" देने वाली करार देते हुए कहा था कि कोरोना वायरस खतरे को देखते हुए कोर्ट, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्याय दे रहा है, ने छात्रों को बिना डरे जाने और परीक्षा देने का आदेश दिया है."
चीफ जस्टिस को भेजे अपने पत्र में न्यायाधीश एस एम सुब्रमण्यम ने कहा, "बयान से पता चलता है कि माननीय जज को अपनी जान का खतरा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्याय प्रदान करते हैं. जबकि, उनका कोई मनोबल नहीं है कि वे छात्रों को बिना किसी डर के नीट परीक्षा में बैठने का निर्देश देते हुए आदेश पारित करें."

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