
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
खाना खजाना / शौर्यपथ / अरबी के पत्तों की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले इन पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर लें। कोरोना काल में सब्जियों को अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप पहले सादे पानी से इन पत्तों को धो लें, फिर गर्म पानी करके इसमें नमक डालें। फिर इन पत्तों को नमक वाले पानी से अच्छी तरह साफ कर लें।
अब 1 कटोरी बेसन लें। इसमें अदरक, लहसुन का पेस्ट, नमक स्वाद के अनुसार, लालमिर्च पाउडर, धनिया पाउडर व हल्दी पाउडर मिला लें और इन्हें अच्छी तरह से मिक्स करके अलग रख दें।
अब जो अरबी के पत्ते आपने धोकर रखे हैं, उन्हें लें। उन पर तेल लगा लें। फिर इस पेस्ट को उनके ऊपर लगाकर इन्हें लपेट लें। यदि ये खुल रहे हैं, तो आप ऊपर से धागा भी बांध सकते हैं ताकि ये अरबी के पत्ते खुल न पाएं।
अब एक बर्तन में पानी गर्म कर लें और उसके ऊपर एक छन्नी रखें। जब पानी अच्छी तरह से गर्म हो जाए तो अरबी के पत्तों को छन्नी के ऊपर रख दें ताकि अरबी के पत्ते अच्छी तरह से स्टीम हो जाए।
स्टीम होने के इन्हें थोड़ी देर ठंडा होने दें। जब ये ठंडे हो जाएं तो इन्हें कट कर लें।
अब बारी आती है इन्हें फ्राई करने कि तो गर्म तेल में इन्हें तलकर अलग प्लेट में निकाल लें।
ग्रेवी के लिए...
2 प्याज, अदरक, लहसुन का पेस्ट, राई और जीरा। इनका पेस्ट तैयार कर लें।
अब तेल गर्म होने के बाद इस पेस्ट को तेल में डालकर अच्छी तरह पका लें।
ख्याल रखें कि आपको मसाला अच्छी तरह से पका लेना है।
अब हल्दी, मिर्च, नमक व स्वाद अनुसार धनिया पाउडर इन मसालों को तेल में डालकर पकाना है।
जब ये अच्छी तरह से पक जाएं और तेल ऊपर आ जाए तो इसमें पानी मिला लें। ग्रेवी के लिए फिर एक उबाल के बाद इसमें अरबी के पत्ते डालकर इसे 5 मिनट रखने के बाद गैस बंद कर दें।
तो लीजिए तैयार है आपकी घर में तैयार अरबी के पत्तों की सब्जी।
शौर्यपथ / पितृपक्ष में पडऩे वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जानते हैं। इस साल इंदिरा एकादशी 13 सितंबर (रविवार) यानी आज है। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखना, भगवान विष्णु की पूजा और इंदिरा एकादशी व्रत कथा सुनना पुण्यकारी होता है। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इंदिरा एकादशी में व्रत कथा सुनना जरूरी होता है, वरना एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।
इंदिरा एकादशी की व्रत कथा-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में महिष्मति नाम का एक नगर था। जिसका राजा इंद्रसेन था। इंद्रसेन एक बहुत ही प्रतापी राजा था। राजा अपनी प्रजा का पालन-पोषण अपनी संतान के समान करते था। राजा के राज में किसी को भी किसी चीज की कमी नहीं थी। राजा भगवान विष्णु का परम उपासक था।
एक दिन अचानक नारद मुनि का राजा इंद्रसेन की सभा में आगमन हुआ। नारद मुनि राजा के पिता का संदेश लेकर पहुंचे थे। राजा के पिता ने कहा था कि पूर्व जन्म में किसी भूल के कारण वह यमलोक में ही हैं। यमलोक से मु्क्ति से के लिए उनके पुत्र को इंदिरा एकादशी का व्रत करना होगा, ताकि उन्हें मोक्ष मिल सके।
पिता का संदेश सुनकर राजा इंद्रसेन ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में बताने को कहा। तब नारद जी ने कहा कि यह एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। एकादशी तिथि से पूर्व दशमी को विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करने के बाद एकादशी को व्रत का संकल्प करें।
नारद जी ने आगे बताया कि द्वादशी के दिन स्नान आदि के बाद भगवान की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद व्रत खोलें। नारद जी ने कहा कि इस तरह से व्रत रखने से तुम्हारे पिता को मोक्ष की प्राप्ति होगी और उन्हें श्रीहरि के चरणों में जगह मिलेगी।
राजा इंद्रसेन ने नारद जी के बताए अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत किया। जिसके पुण्य से उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे बैकुंठ चले गए। इंदिरा एकादशी के पुण्य प्रभाव से राजा इंद्रसेन को भी मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति हुई।
शिक्षा / शौर्यपथ / आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में व्यक्ति को सफल बनाने की बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षाविद और कुशल अर्थशास्त्री भी थे। चाणक्य की नीतियां आप भी लोगों को जीवन में सही रास्ता दिखा रही हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, मित्रता और दुश्मनी संबंधी समस्याओं का उपाय बताया है।
चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सफल होना है तो उसे नीति शास्त्र को जीवन में अपना लेना चाहिए। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति में कौन-से ऐसे दो गुण होने चाहिए, जो दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।
1. विनम्रता-
चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा विनम्र होना चाहिए। विनम्रता से व्यक्ति लोगों के दिलों में राज करता है। विनम्र व्यक्ति क्रोध से मुक्त होता है और उसे समाज में भी मान-सम्मान मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो काम व्यक्ति धैर्य के साथ करता है, उसे सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को विनम्रता का गुण अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कई बार दु्श्मन भी आपकी विनम्रता के सामने झुक जाता है और दोस्ती का हाथ खुद ही बढ़ा देता है।
2. सत्य बोलना-
चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में झूठ नहीं बोलना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, झूठ बोलने से व्यक्ति की प्रतिभा का नुकसान होता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं और कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा झूठ से दूर रहना चाहिए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /जीवन में परेशानियां आना आम बात है. इस दुनिया में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है, जो कभी भी दुखी न हुआ हो। बुरे दिनों को आप कैसे हैंडल करते हैं, यह बात बहुत महत्व रखती है। कहते हैं कि कोई भी परिस्थिति स्थाई नहीं होती। ऐसे में अगर आपके सामने कोई मुसीबत आ भी जाती है, तो आपको यही बात सोचकर आगे बढऩा चाहिए। आइए, जानते हैं कि आप खुश रहकर परिस्थितियों से कैसे निपट सकते हैं-
परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है
भगवत गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि युग, व्यक्ति, स्वभाव, जीवन, भाव सबकुछ परिवर्तनशील है, इसलिए दुख या बोझिल दिन भी एक दिन जरूर बदलेंगे।
खुश रहने से सोचने की क्षमता बढ़ती है
आप किसी घटना से हमेशा दुखी रहेंगे, तो इससे न सिर्फ आपकी क्रियाशीलता कम होगी बल्कि तार्किक सोचने की क्षमता भी प्रभावित होगी, इसलिए खुद को समझाते रहें कि खुश रहने से दिन उपाय जल्दी मिलता है।
खुशियां बांटने से बढ़ती है और गम बांटने से घटता है।
जिस तरह खुशियां शुभचिंतकों के साथ बांटने पर बढ़ती है, उसी तरह गम विश्वासपात्र और अपनों के साथ बांटने से कम होता है, इसलिए अपने मन की बात जरूर कहें।
अपनी संभावनाओं को पहचानने का समय
जिस तरह बुरे वक्त में अपने-पराए की पहचान होती है, उसी तरह बुरे वक्त में खुद की प्रतिभा और संभावनाओं को भी परखा जा सकता है, इसलिए बुरे दिनों में ये बातें ध्यान रखकर मुस्कुराकर आगे बढऩे की प्रेरणा मिलेगी।
धर्म संसार / शौर्यपथ / सावन का महीना शुरू हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अपनी भक्ति से भोलेबाबा को मनाने में लगे हुए हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी व्यक्ति इस महीने व्रत रखता है भगवान शिव उसकी सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। माना जाता है कि इस पावित्र महीने में अकाल मृत्यु से बचने,दुर्घटना, अनिष्ट ग्रहों के प्रभावों से दूर करने आयु बढ़ाने के साथ असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करना बेहद शुभ होता है।
सावन के महीने में इस मंत्र का जाप करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन हर पूजा और मंत्र जाप के लिए हिंदू धर्म में कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर ही व्यक्ति को उसका लाभ मिलता है। जबकि पूजा करते समय की गई कुछ गलतियों से आप भगवान को नाराज कर सकते हैं। तो आइए जान लेते हैं, लंबी आयु का वरदान देने वाला भोलेनाथ के महामृत्युंजय मंत्र को करते समय साधक को भूलकर भी नहीं करनी चाहिए कौन सी गलतियां।
महामृत्युंजय मंत्र-
ऊँ हौं जूं स:। ऊँ भू: भुव: स्व: ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊँ स्व: भुव: भू: ऊँ। ऊँ स: जूं हौं।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय न करें ये गलतियां-
-सबसे पहले इस बात को समझ लें कि भगवान शंकर के इस मंत्र का जाप करते समय मंत्र का उच्चारण ठीक होना चाहिए।
-महामृत्युंजय मंत्र की संख्या हमेशा बढ़ाकर की जाती है। मंत्र का जाप एक निश्चित संख्या निर्धारण करके शुरू करें। अगले दिन इनकी संख्या बढ़ाते रहें, याद रखें मंत्र की संख्या कम न करें।
-इस मंत्र का जाप करते समय शुद्ध आसन बिछा कर बैठे। कभी भी धरती में बैठकर इस मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।
-महामृत्युंजय मंत्र का जाप हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करें।
-मंत्र का जाप करते समय अपने मन को भटकने न दे।
महामृत्युंजय मंत्र के लाभ-
-ग्रहों के सारे कुप्रभाव नष्ट होते हैं।
-शोक, मृत्यु के संकट टल जाते हैं।
-लंबे समय से चल रहे रोगों से मुक्ति मिलती है।
-पुराने कर्ज से मुक्ति मिलती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोनावायरस से बचने का एकमात्र उपाय है कि सावधानी के साथ आगे कदम बढ़ाया जाए। घर के बाहर निकलने से लेकर घर आने तक हमें इस बात की जानकारी होनी जरूरी है कि हमें क्या करना है और कैसे इस वायरस निपटना है? अब धीरे-धीरे लोग अपनी सामान्य दिनचर्या की तरह कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि अत्यधिक सावधानी बरती जाए।
कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें सावधान व सतर्क रहने की जरूरत है। हम में से कुछ ऐसे लोग हैं, जो अभी भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बच रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने बाहर आना-जाना शुरू कर दिया है। यदि आप भी मॉल या किसी भीड़भाड़ वाली जगह में जा रहे हैं तो आपको कुछ बातों का ख्याल रखने की जरूरत है। हम इस लेख में आपको बता रहे हैं कि यदि आप मॉल जा रहे हैं, तो आपको किन-किन बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है? आइए जानते हैं।
मॉल जाएं तो क्या सावधानियां रखें?
मॉल में प्रवेश करने पर हमें सबसे पहले पार्किंग मिलती है। जब आप गाड़ी पार्क करते हैं तो वहां कर्मी मौजूद होते हैं, जो कई लोगों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में आपको ख्याल रखना है कि मास्क और ग्लव्स का उन्होंने इस्तेमाल किया हो। रखें कि बिना थर्मल स्कैनिंग के मॉल में प्रवेश नहीं करना है।
मॉल में फिजिकल टच से बचें। बिना मास्क व ग्लव्स के प्रवेश न करें। मास्क और ग्लव्स का उपयोग आपको करना ही है, इस बात का ख्याल रखें।
जब आप मॉल में प्रवेश करें और यदि आप कतार में लगे हैं तो आपको इस बात का ख्याल रखना है कि कतार में लगे लोगों से आपको उचित दूरी बनाए रखनी है। इस बात का ख्याल हर पल रखें।
एस्केलेटर और लिफ्ट का इस्तेमाल भी आपको सावधानीपूर्वक करना है। जब एस्केलेटर का इस्तेमाल करें तो एक स्टेप छोड़कर आपको खड़े रहना है। ख्याल रखें कि आपने ग्लव्स पहनें हों, क्योंकि यदि आप एस्केलेटर की स्ट्रिप को टच करते हैं तो आपको ग्लव्स पहनना बहुत जरूरी हो जाता है इसलिए बिना ग्लव्स के इन्हें टच न करें।
लिफ्ट का इस्तेमाल करते वक्त हाथों में टिशू रखें। लिफ्ट के बटन को प्रेस करते वक्त टिशू का इस्तेमाल करें फिर इसे डिस्पोज कर दें।
लिफ्ट में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। जहां डिस्टेंसिग मार्क बने हैं, वहीं खड़े रहें।
मॉल में टॉयलेट का इस्तेमाल करते हुए किन बातों का ख्याल रखें?
सबसे जरूरी कि आप मॉल में टॉयलेट जाना अवॉइड ही न करें तो बेहतर है।
यदि आप टॉयलेट का इस्तेमाल करते भी हैं तो आपको हाथों में टिशू को रखना है और इन्हीं की मदद से टॉयलेट के गेट को खोलना और बंद करना है।
खानाखाजना / शौर्यपथ 250 ग्राम करेले, 100 ग्राम प्याज, 100 ग्राम बेसन, 150 ग्राम तेल, चुटकीभर हींग, जीरा, लाल मिर्च, सूखा हरा धनिया, हल्दी, नमक, चीनी, नींबू या सत और हरी मिर्च।
विधि :करेले को धोकर ऊपर के छिलके साफ बर्तन में निकालें। एक भाग में चाकू से चीरा लगाकर बीज इत्यादि निकाल कर छिलके के साथ रखें तथा प्याज के टुकड़े को पीसकर एक ओर रख लें। करेले के अंदर के भाग में नमक भरकर 15 मिनट तक रखें व उन्हें धो लें।
अब मसाला तैयार करें। फ्रायपैन में 100 ग्राम तेल डालकर मसाला भून लें। बाद में एक कटोरी में पिसी लाल मिर्च, नमक, पिसा धनिया, चीनी, नींबू, हल्दी को मिला लें तथा भूने हुए मसाले में डाल दें एवं बेसन डाल दें तथा भून लें। करेले के छिलके व बीज इत्यादि इसमें डालकर भूनकर प्लेट में ठंडा कर लें।
अब करेले में मसाले भरें और सफेद धागा लपेट दें ताकि मसाला बाहर न निकले एवं पेन में तेल रखकर गरम करके उसमें भरे हुए करेले डालें तथा थोड़ी देर बाद उसे ढँक कर पका लें। ठंडा होने पर बँधा धागा अलग कर करेलों को हरे धनिए से सजाएँ व सर्व करें।
जानिए करेले से होने वाले ये 8 फायदे
हरी सब्जियों के बीच आकर्षित करने वाला करेला, स्वाद में भले ही कड़वा लगता हो, लेकिन इससे होने वाले फायदे जरूर मीठे हैं। क्या आप जानते हैं, करेले से स्वास्थ्य को होने वाले इन लाभ के बारे में। अगर नहीं जानते, तो पढि़?ए कड़वे करेले के यह फायदे - 1करेले में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह कफ, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। इसके सेवन से भोजन का पाचन ठीक तरह से होता है, और भूख भी खुलकर लगती है।
2अस्थमा की शि?कायत होने पर करेला बेहद फायदेमंद होता है। दमा रोग में करेले की बगैर मसाले की सब्जी खाने से लाभ मिलता है।
3पेट में गैस बनने और अपच होने पर करेले के रस का सेवन करना अच्छा होता है, जिससे लंबे समय के लिए यह बीमारी दूर हो जाती है ।
4करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है, और लीवर की सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। प्रतिदिन इसके सेवन से एक सप्ताह में परिणाम प्राप्त होने लगते हैं। इससे पीलिया में भी लाभ मिलता है।
5 करेले की पत्त?ियों या फल को पानी में उबालकर इसका सेवन करने से, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, और किसी भी प्रकार का संक्रमण हो, ठीक हो जाता है।
6 उल्टी-दस्त या हैजा हो जाने पर करेले के रस में काला नमक मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है। जलोदर की समस्या होने पर भी दो चम्मच करेले का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
7 लकवा या पैरालिसिस में भी करेला बहुत कारगर उपाय है। इसमें कच्चा करेला खाना रोगी के लिए लाभदायक होता है।
8 खून साफ करने के लिए भी करेला अमृत के समान है।
मधुमेह में यह बेहद असरकारक माना जाता है। मधुमेह में एक चौथाई कप करेले का रस, उतने ही गाजर के रस के साथ पीने पर लाभ मिलता है।
खेल / शौर्यपथ / पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने एक बार फिर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत के कप्तान की एक बल्लेबाज के तौर पर सफलता जबरदस्त है। इस दौरान अख्तर ने विराट के इंटरनेशनल करियर के पहले साल को याद किया है साथ ही खुद से उनकी तुलना करते हुए उन्हें 'बिगड़ैलÓ भी कहा। विराट के लिए अख्तर ने कहा कि उन्होंने खुद को बहुत ज्यादा बेहतर बनाया है और आज जो उनका स्तर है वो पहले नहीं हुआ करता था।
शोएब अख्तर ने यूट्यूब शो 'क्रिकेट बाजÓ में टीम इंडिया के कप्तान की जमकर तारीफ की और उनके आज का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बताया। उन्होंने कहा कि विराट कोहली एक अलग ही स्तर पर पहुंच गए हैं लेकिन कोहली के ब्रांड नेम के पीछे कौन है। साल 2010 और 2011 में कोहली कहीं नहीं थे। वह एक घेरे का का हिस्सा हुआ करते थे। वह भी एक बिगडैल थे बिल्कुल मेरी तरह। अचानक से ही सिस्टम ने उनका समर्थन किया। मैनेजमेंट का उनके साथ आया और उनको भी इस बात का एहसास हुआ कि काफी सम्मान दांव पर लगा है।
इस बातचीत में अख्तर ने विराट की तुलना महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से भी की। उन्होंने कहा कि सचिन ने जहां एक अलग दौर में क्रिकेट खेला वहीं विराट के समय में चीजें काफी आसान हैं। उन्होंने कहा कि यह उनकी गलती नहीं है कि वह एक आसान क्रिकेट के युग में खेल रहे हैं या तो सचिन न मुश्किल युग में खेला जब वसीम अकरम, वकास यूनिस और इंजमाम उल हक जैसे कहीं ज्यादा टक्कर देने वाले खिलाड़ी थे। इसी वजह से जब वो रन बनाते हैं हम उनके बारे में बातें करते हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / भारत की राजनीती में दुर्ग जिला एक ऐसा जिला है जहा से दोनों ही पार्टी के नेता दिल्ली तक केन्द्रीय राजनीती कर चुके है और दोनों ही दल के नेताओ में कई तरह की समानताये है तो कई विरोधाभास भी . जी हाँ हम बात करते है दुर्ग जिले में दीदी के नाम से मशहूर भाजपा की राष्ट्रिय महासचिव राज्यसभा सांसद डॉ सरोज पाण्डेय की . भिलाई के मैत्री नगर से एक सामान्य परिवार से राजनितिक सफऱ शुरू करने वाली सरोज पाण्डेय ने दुर्ग निगम में 10 साल तक महापौर के रूप में शहरी सरकार चलाई है महापौर रहते रहते विधायक और सांसद के पद में एक साथ विद्यमान रही .
वर्तमान में डॉ. सरोज पाण्डेय भारत ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े संगठन में आठ राष्ट्रिय महासचिव में से एक है , साथ ही राज्यसभा की सांसद भी है . सामान्य परिवार से आने के बाद अपने मेहनत के दम पर महापौर , विधायक और सांसद तक का सफऱ भाजपा के राष्ट्रिय महासचिव के सफऱ तक पहुँचाने के बाद भी जारी है . राजनितिक जीवन में कई उतार चढाव आने के बाद भी यहाँ तक एक बार लोकसभा का चुनाव हारने के बाद भी संगठन ने भरोसा कायम रखा और केंद्र की राजनीती में महासचिव के पद पर शोभित किया . डॉ. सरोज पाण्डेय के बाद उनके ही ख़ास समर्थको को दुर्ग निगम में महापौर के रूप में सत्ता हांसिल हुई जैसे कि वर्तमान में विधायक वोरा के समर्थन से ही धिरक बाकलीवाल को महापौर की खुर्सी प्राप्त हुई .
अब बात करे तो शहर के विधायक अरुण वोरा की पिछले 6 चुनाव में कांग्रेस की तरफ से एक ही प्रत्याशी शहर के लिए निर्धारित रहा यानी की 30 साल के राजनितिक जीवन में 3 हार और तीन जीत के बाद भी शहर के विधायक अरुण वोरा है ये भी संभव है कि भविष्य के चुनाव में शहर विधायक के प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर अरुण वोरा का नाम आये या हो सकता है कि युवाओ की मांग के अनुसार विधायक पुत्र को टिकिट मिल जाए जो भी हो कांग्रेस की तरफ से एक ही चेहरा या एक ही परिवार को मौका मिलेगा जो की भविष्य में तय होगा किन्तु अगर वर्तमान की बात करे तो लगभग एक साथ राजनीती शुरू करने वाले शहर के लाडले अरुण भैया ( कांग्रेस ) और भाजपा से डॉ. सरोज पाण्डेय उफऱ् दीदी दोनों ने ही राजनीती की शुरुवात लगभग एक साथ की थी किन्तु तब स्थिति बहुत ही अलग थी तब अरुण वोरा देश के कद्दावर नेता मोतीलाल वोरा जो मुख्यमंत्री , राज्यपाल और अखिल भारतीय कांग्रेस के सालो से कोषाध्यक्ष पद पर रहे साथ ही गाँधी परिवार के सबसे करीबी रहे है बावजूद इसके अरुण वोरा दुर्ग की राजनीती से कभी बाहर नहीं जा पाए और दुर्ग तक सीमित रहे . अरुण वोरा के दुर्ग की राजनितिक तक सीमित रहने से दुर्ग का कोई भी कांग्रेसी ब्लाक अध्यक्ष , विधानसभा क्षेत्र का अध्यक्ष , विधायक प्रतिनिधि , सांसद प्रतिनिधि से आगे नहीं बढ़ पाया क्योकि आगे बढऩे के लिए उनके नेता को भी आगे बढऩे का इंतज़ार करना पडा . दुर्ग में आज ऐसे कई कांग्रेसी है जो धीरे धीरे ग्रामीण राजनीती की तरफ तो कोई वैशानी नगर की तरफ तो कोई भिलाई की तरफ रुख कर लिया ताकि आगे बढ़ सके .
जबकि इसके विपरीत दुर्ग जो एक समय कांग्रेस का गढ़ था इस गढ़ में स्व. हेमचंद यादव ने सेंध मारी और सरकार में मंत्री पद पर 10 सालो तक रहे , स्व. हेमचंद यादव भी दुर्ग बैगा पारा के सामान्य यादव परिवार से मंत्री पद तक का सफऱ फिर प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर संगठन में प्रदेश स्तर की राजनीती में सक्रीय रहे . वही भाजपा से दूसरी बड़ी नेत्री के रूप में डॉ. सरोज पाण्डेय आगे बड़ी जो आज भाजपा के केन्द्रीय संगठन में एक महत्तवपूर्ण पद पर है और कई प्रदेशो में प्रभारी की भूमिका का कुशल तरीके से नेत्रित्व भी कर चुकी है . उनके कई समर्थक विधायक तक का सफऱ तय कर चुके है और अपनी एक अलग पहचान बना चुके है . वही दुर्ग कांग्रेस में संगठन की बात करे पद की बात करे या अन्य किसी भी समबन्ध में कांग्रेस की चर्चा हो पिछले 40 सालो से एक ही नाम . दुर्ग कांग्रेस से आज वर्तमान में ऐसा कोई नहीं जो प्रदेश स्तर की राजनीति तो दूर जिले स्तर की राजनीती कर रहा हो ऐसे में वर्तमान में कई कांग्रेसी दबी जुबान में और कई बार तो खुले में भी इस बात को कह चुके है कि दुर्ग में कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में राजनीती की शुरुवात कार्यकत्र्ता के रूप में ही अंत भी . यह आंकलन पूर्व से लेकर वर्तमान राजीनीतिक स्तर का आंकलन मात्र है भविष्य में कोई और दुर्ग से प्रदेश स्तर या केंद्र स्तर पर भी पहुँच सकता है क्योकि भविष्य किसी ने नहीं देखा किन्तु भूतकाल सबके सामने है .
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र में पानी सप्लाई के लिए लगे विद्युत् पेनल लगभग २०-३० साल पुराने थे और निगम प्रशासन द्वारा नए पेनल लगाने की दिशा में कदम उठाया गया ताकि शहर की आम जनता को पानी की बार बार किल्लत न हो . चूँकि विद्युत् पेनल काफी पुराने थे और तकनिकी अपडेट ना होने के कारण आये दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता था इस लिहाज से पेनल को बदलने का कार्य निगम आयुक्त के निर्देश पर हुआ किन्तु विद्युत् विभाग के अधिकारियों की नासमझी कहे या वर्तमान महापौर को बदनाम करने की रणनीति जिसके तहत २-३ दिन के कार्य को एक ही दिन में पूरा करने की बात कही गयी जो कि सिमित स्टाफ के साथ संभव नहीं था और हुआ भी वही कार्य समय पर पूरा ना होते ही विपक्ष को एक बार फिर मौका मिल गया शहरी सत्ता को घेरने का चूँकि एक दिन के बजाये यह कार्य २-३ दिन में पूरा हुआ और तब तक जनता पानी के लिए हाहाकार मचाने लगी हालांकि टेंकर से कई क्षेत्रो में पानी सप्लाई किया गया किनती यहाँ भी सिमित साधन आड़े आयी . इसे अधिकारियों की लापरवाही या साजिश जो भी कहे किन्तु गलत जानकारी देने के कारण शाहर में पानी की राजनीती दो दिनों तक गर्म रही और विपक्ष ने जमकर मुद्दा को हवा दी .
निगम अधिकारियों के अनुसार नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा शहर में निरंतर पानी सप्लाई के लिए नया पेनलबोर्ड लगाकर स्थायी समाधान किया गया । 10 सितंबर से शडडाउन लेकर पेनलबोर्ड लगाने का कार्य प्रारंभ किया गया था। परन्तु लगातार बारिश होने के कारण विद्युत लाईन का पेनलबोर्ड लगाने का कार्य बाधित हो रहा था। इस दौरान महापौर धीरज बाकलीवाल एवं आयुक्त इंद्रजीत बर्मन, जलकार्य प्रभारी संजय कोहले, स्वास्थ्य प्रभारी इमीद खोखर ने भी फिल्टर प्लांट पहुॅचकर मौके का निरीक्षण किया गया। कार्य पर देरी के लिए नाराजगी व्यक्त की गई। उन्होने जल्द से जल्द कार्य पूरा कर पानी सप्लाई सामान्य करने निर्देश दिये।
अंततः कल 11 सितंबर की रात्रि 11.00 बजे के करीब एक पेनलबोर्ड का कार्य पूरा कर शहर की टंकियों को भरने का कार्य प्रारंभ कर आज प्रातः से विभिन्न वार्डो में पानी की सप्लाई किया जा सका। दूसरा पेनलबोर्ड को लगाने का कार्य अभी जारी है। विभाग अधिकारी ने बताया दोनों पेनलबोर्ड के लग जाने से शहर में पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है।
विभाग अधिकारी ने बताया कि 24 एमएलडी फिल्टर प्लांट में 25 वर्ष लगा पुराना पेनलबोर्ड खराब हो गया था जिसके कारण आये दिन एक से दो दिनों के अंदर बार-बार विद्युत सप्लाई बंद हो जाता था जिससे पानी भरने में परेशानी होती थी। उसे ठीक करने शडडाउन करना पड़ता था। आम जनता को पानी की समस्या से जूझना पड़ता था। पुराने पेनलबोर्ड में काम करते वक्त हमेशा कर्मचारियों का जान जोखिम में रहता है कुछ माह पहले कार्य करते समय दो कर्मचारी घायल भी हो चुके हैं। जिसे देखते हुये फिल्टर प्लांट में लगे दोनों पेनलबोर्ड को बदलकर नया पेनलबोर्ड लगाया जा रहा है। इसके कारण बार-बार होने वाली समस्या अब नहीं होगी ।
उन्होनें बताया शहर में पानी की समस्या होने के कारण मांग अनुसार आज 12 सितंबर को करीबन 18 पानी टैंकर विभिन्न वार्डो में भिजवाया गया। इसमें पद्मनाभपुर वाड्र, कसारीडीह वार्ड 43, गंजपारा वार्ड, ब्राम्हण पारा वार्ड, हरनबांधा क्षेत्र वार्ड 9, आजाद वार्ड, अस्पताल वार्ड, शिवपारा वार्ड बजरंग नगर, पोलसाय पारा वार्ड, पचरीपारा वार्ड, केलाबाड़ी वार्ड में टैंकर से पानी भिजवाया गया। इनमें से 3 से 4 वार्डो में दो-दो टैंकर पानी दिया गया। अधिकारी ने बताया रात्रि 11.00 बजे के बाद टंकियों में पानी भरना प्रारंभ कर आज प्रातः से शंकर नगर, शक्ति नगर, पद्मनाभपुर, उरला, पोटिया, दीपक नगर, रायपुर नाका, शिवपारा, गंजपारा आदि क्षेत्रों में पानी सप्लाई की गई। उन्होनें बताया शाम के समय भी पानी की सप्लाई देरी से हो पायेगा।

दुर्ग निगम महापौर बाकलीवाल ने कहा ....
25 साल पुराना पेनल बोर्ड बदलने में दो से तीन दिन लग गए इस कारण शहर में पानी की सप्लाई बाधित हुई किन्तु नया पेनल बोर्ड लगने से पानी सप्लाई में जो बार बार रुकावट आती थी एवं निगम के फिल्ड कर्मचारी को भी जो जान का जोखिम था अब दूर हो जायेगा और भविष में विद्युत् खराबी की छोटी छोटी समस्या के कारण जल प्रदाय बाधित नहीं होगा . नए पेनल बोर्ड लगने से अब जल प्रदाय में सुरक्षित तरीके से कार्य सम्पादित होगा . नए पेनल बोर्ड लगने से फिल्ड पर कार्य कर रहे निगम के कर्मचारी भी अब सुरक्षित तरीके से कार्य कर पायेंगे .

कल सुबह के समय कुछ क्षेत्रों में रहेगा जलप्रदाय प्रभावित ...( 10 सितम्बर को निगम ने जारी की थी प्रेस विज्ञप्ति )
दुर्ग / नगर पालिक निगम दुर्ग के 24 एमएलडी फिल्टर प्लांट में पैनल बोर्ड लगाने का काम निरंतर जारी है जलगृह विभाग अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार आज लगभग डेढ़ से 2 घंटा बारिश होने के कारण पैनल बोर्ड लगाए जाने का कार्य में विलंब हो गया है जिसके कारण पैनल बोर्ड लगाने का कार्य देर रात्रि तक पूरा किया जाएगा । अधिकारी ने बताया देरी से पैनल बोर्ड लगने के कारण कल सुबह 11 सितंबर को शक्तिनगर, शंकर नगर, पदमनाभपुर, क्षेत्र के टंकी से होने वाली पानी सप्लाई वाली क्षेत्रों में पानी की सप्लाई नहीं हो पाएगी । उसी प्रकार 11 एमएलडी फिल्टर प्लांट क्षेत्र के शिक्षक नगर ब्राह्मण पारा बनिया पारा तुहर पारा फसारी केलाबाड़ी आदि क्षेत्रों में भी जल प्रदाय प्रभावित रहेगा इन क्षेत्रों में मांग अनुसार टैंकर के माध्यम से पानी की सप्लाई की जा सकेगी अधिकारी ने बताया निगम के बघेरा पोटिया बोरसी के पानी टंकियों से आउटर के क्षेत्रों में सुबह के समय निर्धारित समय पर पानी की सप्लाई होगी । नागरिकों को होने वाली असुविधा के लिए खेद है। ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
