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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

जांजगीर-चाम्पा / शौर्यपथ / जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ द्वारा जिलाधीश महोदय एवं प्राधिकृत अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर (छ.ग.) के नाम एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें शाखा प्रबंधक हसौद के द्वारा कर्मचारियों एवं कृषकों के साथ दुर्व्यवहार के संबंध में ज्ञापन सौंपा है संघ के द्वारा ज्ञापन में कहा गया है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक हसौद के शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार कश्यप के द्वारा सेवा सहकारी समिति कैथा के विक्रेता उमेश कुमार बंजारे के साथ अभद्रता का व्यवहार किया गया जो कर्मचारी संघ के लिए असहनीय बात है विक्रेता कर्मचारी उमेश कुमार बंजारे उपभोक्ता समान बिक्री की राशि जमा करने हेतु शाखा हसौद गया था भीड़ भाड़ होने के कारण शाखा प्रबंधक द्वारा विक्रेता को बोला गया कि पैसा मेरे पास जमा कर दो मैं बाद में जमा करवा दूंगा दूसरे दिन केशियर से फोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि पैसा जमा नहीं हुआ है बात की जानकारी शाखा प्रबंधक को होने के बाद विक्रेता उमेश कुमार बंजारे को शाखा प्रबंधक द्वारा गंदी गंदी गाली दी एवं धमकी दी गई की शाखा में आओ उसके बाद तुमको बताता हूं क्योंकि शाखा प्रबंधक कृष्ण कुमार कश्यप स्थानीय ग्राम कैथा का निवासी है एवं कृषकों को कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत करने के लिए उकसाते हैं एवं कर्मचारी को मानसिक आर्थिक रूप से प्रताड़ित करते हैं जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ जिला जांजगीर चांपा शाखा प्रबंधक निंदा करती है .
अधिकारी महोदय से मांग करती है कि शाखा प्रबंधक के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए अन्यथा इस स्थिति में कर्मचारी संघ अपने कर्मचारी हित में उग्र कदम उठाने हेतु बाध्य हो जाएंगे। संघ द्वारा अपने प्रतिलिपि में श्रीमान कलेक्टर महोदय जिला जांजगीर चांपा श्रीमान संयुक्त पंजीयक महोदय सहकारी संस्थान बिलासपुर श्रीमान उप पंजीयक महोदय सहकारी संस्था जांजगीर श्रीमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर श्रीमान नोडल अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक जिला जांजगीर चांपा को पत्र प्रेषित किया है।

सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधि भी ऐसे समय में मौन है जो छोटी छोटी बातो की शिकायत आयुक्त से , कलेक्टर से , प्रभारी मंत्री से समय समय पर करते आ रहे है किन्तु इस तरह की अव्यवस्था पर सिर्फ तमाशबीन बने बैठे है . शहर ऐसी भयावह स्थिति से गुजर रहा है और अपने आप को शहर के सबसे कद्दावर नेता कहने वाले जनप्रतिनिधि छोटे छोटे विकास कार्य के उद्घाटन में व्यस्त है ...

दुर्ग / शौर्यपथ / प्रतिदिन अखबारों में कोविड अस्पताल शंकराचार्य हॉस्पिटल की अव्यवस्था, साफ सफाई, से लेकर मरीजों को पानी तक नसीब नही होने और बिना इलाज के लोगों द्वारा असमय परलोक सिधारने के बाद भी सरकारी अफसरों को सब सही सही नजर आ रहा है। अलिमुद्दीन सिद्दिकी से लेकर, एक महिला, दो बुजुर्गो का ऑक्सजीन रहने के बाद नही लगाने । दवा खाने के लिए पानी तक नसीब नही होने, एवं सही उपचार नही होने, दो दो, तीन तीन दिनों तक मरीजों को डॉक्टरों द्वारा चेकअप के लिए नही आने वाली अव्यवस्थाओं को दरकिनार कर पता नही किस नजरिये से सरकारी नुमाइंदे निरीक्षण कर रहे है, कि उनको यहां की कमियां नजर नही आ रही है।
अव्यवस्था को लेकर शंकराचार्य हॉस्पिटल प्रबंधन को टाईट करने के बजाय जिले के प्रमुख सभी सरकारी नुमाईदें उल्टा शंकराचार्य हॉस्पिटल के शान में कसीदे पढ रहे है। इस अस्पताल में उपचार नही, मिलने, ऑक्सीजन नही मिलने, एडमिट के बाद मरीजों को भगवान भरोसे छोडऩे, समय से खाना पानी, काढा नही मिलने, सहित अन्य अव्यवस्थाओं को के कारण लोगों के मरने की लगातार मिडिया में आ रही खबरों के कारण इस अस्पताल में लोग जाने से डरने लगे है, और इसके कारण लोग अपना संभावना होने के बाद भी डर के मारे कोरोना का टेस्ट नही करा रहे है कि कहीं जो कोरोना निकल गया तो शंकरा में ले जाकर डाल देंगे और जीते जी परलोक पहुंचा देंगे, जबकि मिडिया में आ रही यहां के अव्यवस्थाओं को सरकारी अफसर अफवाह बता रहे है।
एक दिन पहले जिला कलेक्टर डॉ. भूरे ने यहां का निरीक्षण किया, उनको भी कुछ नही नजर नही आया वहीं आज जिले कें संभागायुक्त महावर ने इस अस्पाल का निरीक्षण किया लेकिन इनकों भी यहां की कोई कमी नजर नही आई। संभागायुक्त टी0सी0 महावर एवं आईजी विवेक सिन्हा, कलेक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे, एवं एस.पी. प्रशंात ठाकुर द्वारा आज संयुक्त रुप से कोविड हास्पीटल शंकराचार्य का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। उन्होनें हास्पीटल में भर्ती मरीजों से फोन पर बात की एवं वहॉ ईलाज और खाने-पीने की सुविधा की जानकारी उनसे ली। कोविड हास्पीटल शंकराचार्य मे नाश्ता, भोजन और ईलाज की सुविधा और व्यवस्था पर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त करते हुये कहा कोविड हास्पीटल इंचार्ज इंद्रजीत बर्मन और स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता को निर्देशित कर कहा और अच्छी सुविधा और व्यवस्था बनाकर रखें।
उल्लेखनीय है कि दुर्ग और भिलाई क्षेत्र में कोरोना पॉजिटिव मिल रहे मरीजों के लिए कोविड हास्पीटल शंकराचार्य में भर्ती कर उनका ईलाज किया जा रहा है। हास्पीटल की सुविधा और व्यवस्था का आज दुर्ग संभागायुक्त टी.सी. महावर ने अधिकारियों के साथ हास्पीटल पहुॅचकर आकस्मिक निरीक्षण किया गया । इस दौरान उन्होनें कोरोना पॉजिटिव मरीज त्रिलोचन दास 9770265611, सत्येन्द्र बहादुर तिवारी मो0. 9329009932, प्रशांत मनहरे मो0.9827179033, तथा हरेराम यादव, अनिल रत्नाकर से फोन में बात किये । भर्ती मरीजों ने संभागायुक्त को बताये कि हमें सुबह 8 बजे नाश्ता, 12 बजे खाना, शाम 5 बजे नाश्ता, और रात्रि 8 बजे खाना समय से दिया जा रहा है। खाद्य पदार्थ की क्वालिटी भी अच्छी और स्वादिष्ट हैं। इसके अलावा हास्पीटल में कार्यरत डाक्टरर्स नियमित रुप से तीन से चार बार निरीक्षण कर हमारी हाल-चाल और तबीयत की जानकारी लेते रहते हैं। संभागायुक्त ने हास्पीटल में सुविधा और व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किये, उन्होनें इंचार्ज अधिकारी इंद्रजीत बर्मन और स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता का उत्साहवर्धन करते हुये हास्पीटल में निरंतर और अच्छी सुविधा व्यवस्था बनाये रखने के निर्देश दिये ।
किन्तु अस्पताल प्रबंधन ने ये नहीं बताया कि कैसे एक महिला लीला बसोड की मौत हो गयी और भर्ती होने के बाद मौत के सफऱ तक किसी भी प्रकार की जानकारी महिला के परिजन को नहीं दी गयी . स्व. लीला बसोड के बेटे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर प्रश्चिन्ह लगाया किन्तु ये अफसरों को नहीं दिक: . कैसे मृत व्यतियो के शव बदल गए और एक परिवार अपने मरीज के अंतिम दर्शन नहीं कर पाया गलती जिस किसी की भी किन्तु परिजन को जो मलाल है वो जिन्दगी भर रहेगा . कैसे एक बुजुर्ग सांस की तकलीफ से बिना आक्सीजन के मौत के आगोश में समा गया किन्तु अस्पताल प्रबंधन फिर भी मौन रहा . प्रशासन ने जाँच समिति तो बिठा दी किन्तु क्या जिस परिवार के साथ ये हादसा हुआ वो इसे जिन्दगी भर भुला पायेगा . इधर अधिकारी दिन में भ्रमण करते रहे किन्तु उधर 64 वर्षीय देवांगन जो आईसीयु में तडफ़ रहा था और उसका 34 वर्षीय बेटा अपने पिता की एक झलक पाने , एक आहात सुनने , एक खबर सुनने के लिए लगातार 3 दिनों तक परेशान रहा और जब खबर आयी तो ऐसी की वो एक पल में ही अनाथ हो गया क्या इस बारे में सरकारी अधिकारी कोई कडा कदम उठाएंगे ?

 

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की वर्चुअल बैठक आज परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर की अध्यक्षता में उनके निवास कार्यालय में आयोजित की गई। मंत्री मो. अकबर ने परिषद द्वारा परिवहन, स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा, पुलिस, नगरीय प्रशासन, पर्यटन विभाग सहित अन्य निर्धारित एजेण्डों की समीक्षा करते हुए सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने तथा यातायात जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू , विधायक कुलदीप जुनेजा , शिशुपाल सिंह सोरी सहित परिषद के प्रतिनिधिगण वीडियो कान्फं्रेंिसग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान गृहमंत्री साहू सहित विधायकों एवं सदस्यों के सुझावों पर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश संबंधित अधिकारियों को मंत्री मो अकबर ने दिए।
सडक़ बनाते समय अनावश्यक मोड़ न बनाए
सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में गृहमंत्री साहू के सुझाव पर मो. अकबर ने सड़क निर्माण के दौरान सड़कों में अनावश्यक मोड़ नही रखने, सड़क सीधी बनाते हुए प्रभावितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए ताकि मोड़ की वजह से सड़कों पर दुर्घटनाओं की संभावना कम हो। उन्होंने नगरीय निकाय, नगर पंचायत अंतर्गत सड़कों में बंद स्ट्रीट लाइटों की निरन्तर जांच कर बंद लाइटों को चालू कर पर्याप्त रोशनी रखने, वाहनों की तेज गति को नियंत्रित करने स्पीड गवर्नर लगाने की दिशा में कार्यवाही करने, नशापान और सड़क पर स्टंट करके वाहन चलाने वालों के विरुद्ध सख्ती से कार्यवाही करने, चौक के पूर्व चारों ओर की सड़कों में नियमानुसार ब्रेकर बनाने और मुख्य मार्ग से आकर जुडऩे वाली ग्रामीण या अन्य उपनगरीय सड़कों को जंक्शन वाले स्थान पर दुर्घटनाओं को रोकने तथा व्यवस्थित रखने के निर्देश भी दिए। गृहमंत्री के सुझाव पर परिवहन मंत्री ने कण्डम वाहनों के परिचालन पर रोक तथा आवश्यक कार्यवाही की बात कहीं। उन्होंने सड़क किनारे वाहनों के पार्किंग, गैरेज में सुधार हेतु आने वाले वाहनों की बेतरतीब पार्किंग, यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बिठाए जाने पर कड़ी कार्यवाही के सुझाव पर उचित कार्यवाही करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
मंत्री मो. अकबर ने यातायात के नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध ई-चालान की कार्यवाही को सही बताते हुए विधायक श्री बोरा द्वारा उच्च गुणवत्ता के सीसीटीवी लगाने, मुख्य मार्गों पर होर्डिंग हटाने और विधायक सोरी के सुझाव सड़क पर पशुओं से दुर्घटना, दुकानों के सामने नो पार्किंग में वाहन पार्किंग से होने वाली समस्या, विधायक जुनेजा के सुझाव पर भी उचित कार्यवाही के निर्देश दिए।
जिला स्तरीय बैठक अनिवार्य रूप से कराए
परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक अनिवार्य रूप से समय पर कराने के निर्देश दिए। बैठक में परिवहन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मंत्री को विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। अध्यक्ष, अतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा एवं संयुक्त परिवहन आयुक्त श्री संजय शर्मा ने परिषद की बैठक में विभागवार एजेण्डा की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पूर्व बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन होने के साथ ही अनेक महत्वपूर्ण विभागीय पहल भी की गई है। दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। ब्लैक स्पॉट की पहचान व सुधार, ओवर लोडिंग वाहनों पर कार्यवाही, स्कूल बसों की जांच एवं कार्यवाही, नाबालिग विद्यार्थियों को वाहन चलाने से रोकने के प्रयास, पाठय पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों में यातायात के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के अलावा अन्य जरूरी कदम उठाए गए हैं जिससे वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में जनवरी से अगस्त तक सड़क दुर्घटनाओं में 24.85 प्रतिशत तथा मृत्यु में 20.77 प्रतिशत की कमी आई है।
चेक पोस्ट से जुड़ी समस्याओं का किया जाएगा निराकरण
परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के जिला परिवहन अधिकारियों, चेक पोस्ट प्रभारियों और परिवहन उडनदस्ता प्रभारियों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान प्रभारियों द्वारा शासकीय वाहन, वाहन चालक, भवन, बिजली, कर्मचारी आदि से वन टू वन चर्चा और उनकी समस्याएं जानने के बाद परिवहन मंत्री ने यथासंभव निराकरण करने की बात कही। उन्होंने कहा कि चेकपोस्ट पर निरन्तर कार्यवाही करे, आने वाले दिनों में इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। परिवहन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह ने कहा कि चेकपोस्ट पर जिनकी डयूटी लगी है वे निर्धारित ड्रेस में ही रहेंगे। अंबिकापुर, कोरबा, दुर्ग और बिलासपुर जिला प्रभारियों को कार्यवाही बढ़ाने के निर्देश देते हुए कार्यवाही से प्राप्त राशि को शासन के खाते में 24 घण्टे के भीतर चालान के माध्यम से अनिवार्य रूप से जमा करने के निर्देश दिए। परिवहन आयुक्त ने ओवर लोडिंग की कार्यवाही में प्रगति लाने, सड़क सुरक्षा की दृष्टिकोण से यातायात का उलंघन करने वाले वाहन चालकों का लाइसेंस निलंबित करने के अनुरोध पर समय रहते कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए।

// कोरोना मरीजों के हाईटेक अस्पताल में इलाज के लिए 7 दिनों का प्रतिबंध
// निजी अस्पतालों की आ रही शिकायतों पर कलेक्टर हुए सख्त
// प्राइवेट हॉस्पिटल प्रबंधकों को बैठक लेकर कहा व्यवस्था सुधारे, प्रत्येक अस्पताल के लिए नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त,

दुर्ग / शौर्यपथ / निजी अस्पतालों के प्रबंधन कि लगातार आ रही शिकायतों को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने आज निजी अस्पताल के प्रबंधकों की अहम बैठक ली। बैठक में कलेक्टर ने निजी अस्पताल प्रबंधकों को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों के उपचार के मामले में किसी भी तरह की शिकायत आने पाने पर स्वास्थय विभाग की गाइड लाइन के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रत्येक अस्पताल में रिफरल मरीज एवं डेड बॉडी मैनेजमेंट तथा अन्य मामलों में समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। नोडल अधिकारी अस्पताल प्रबंधन के साथ इस संबंध में समन्वय करेंगे ताकि मरीजों को और उनके परिजनों को किसी तरह की दिक्कत ना आए। रिफरल की स्थिति में अस्पताल प्रबंधन नोडल ऑफिसर को जानकारी देंगे। कलेक्टर ने कहा कि गंभीर मरीजों, बुजुर्ग मरीजों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक हॉस्पिटल में आइसोलेशन वार्ड पृथक से होंगे। कलेक्टर ने हाइटेक हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 7 दिन का प्रतिबंध भी लगाया है। उन्होंने कहा कि सारी स्थिति की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जा रही है। नोडल अधिकारियों से समन्वय कर सबसे अच्छा इलाज दें।

// मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की बैठक सम्पन्न
// राज्य सरकार कृषि कार्यो को मनरेगा से जोडऩे, शहरी मनरेगा, मनरेगा की मजदूरी दर बढ़ाने के संबंध में केन्द्र को भेजेगी प्रस्ताव
// छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मनरेगा में 15 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजन का लक्ष्य
// मनरेगा से दी गई 706 नये ग्राम पंचायतों और 672 आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति
// ज्यादा मवेशी वाले गांवों में गोबर गैस प्लांट को दिया जाएगा प्रोत्साहन

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए मनरेगा से वर्मी टांका निर्माण के कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गौठान समितियों से वर्मी टांका निर्माण के लिए जितनी मांग आती है, उन्हें तत्काल स्वीकृति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की बैठक में यह निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री निवास पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव उपस्थित थे। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, वनमंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि सभी धान खरीदी केन्द्रों में चबूतरों के निर्माण और चबूतरों पर शेड निर्माण के कार्यो को भी प्राथमिकता देते हुए शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य के हर धान संग्रहण केन्द्र में एक शेड का निर्माण अवश्य हो। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 4649 चबूतरों के निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई है। जिनमें से 4630 चबूतरों का निर्माण हो चुका है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस वर्ष मनरेगा से राज्य में 5500 गौठानों के निर्माण की स्वीकृति देने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 4500 गौठानों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। ऐसे गौठानों में जहां स्व-सहायता समूह आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, वहां आजीविका केन्द्र के निर्माण की स्वीकृति प्राथमिकता के आधार पर देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कृषि कार्य को मनरेगा से जोडऩे, शहरी मनरेगा, मनरेगा की मजदूरी दर बढ़ाने, मनरेगा में 200 दिनों का रोजगार देने के प्रावधान के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर केन्द्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजने का महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि मनरेगा के तहत नर्सरी, कुंआ और डबरी निर्माण तथा नहर लाईनिंग के कराये गए कार्यो से लोगों को मिलने वाले लाभ के बारे में सर्वे कराया जाना चाहिए। इसी तरह जिले की उपयोगी डायवर्सन सिंचाई योजनाओं की नहर लाईनिंग का कार्य पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कराया जाए, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल सके। श्री बघेल ने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में पानी में हैवीमेटल्स, आरसेनिक, फ्लोराइड, आयरन की शिकायत है, वहां गांव वालों को सतही जल का उपयोग पेयजल के लिए करने हेतु जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि खेतों में डबरी और कूपों का निर्माण कराया जाना चाहिए, जिससे पानी की रिचार्जिंग हो सके और जरूरत के समय फसलों की सिंचाई में इसका उपयोग किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने वन अधिकार पट्टे प्राप्त हितग्राहियों को जमीन पर फलदार वृक्ष लगाने, बड़े वृक्षों के बीच हल्दी, अदरक, तीखूर जैसी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जाए। मनरेगा से भूमि विकास और जमीन को घेरने के कार्य कराए जाएं। कृषि विभाग के माध्यम से हितग्राहियों की जमीन पर ट्यूबवेल खनन कराकर क्रेडा के माध्यम से सोलर पंप स्थापित किए जाएं, जिससे फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि 100 दिन का रोजगार देने में छत्तीसगढ़ का देश में तीसरा स्थान है। प्रदेश में इस वर्ष अब तक 84 हजार 455 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार दिया गया। मनरेगा में इस वर्ष रिकार्ड 26 लाख 5 हजार परिवारों को रोजगार दिया गया। प्रदेश में मनरेगा के तहत 39.79 लाख जॉब कार्ड धारी हैं। इस वर्ष छत्तीसगढ़ लौटे प्रवासी मजदूरों के क्वारेंटाइन के दौरान लगभग 2.37 लाख जॉब कार्ड बनाए गए। इस वर्ष 13 करोड़ 50 लाख मानव दिवस रोजगार के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 9 करोड़ 52 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया। इसमें महिलाओं की 50 प्रतिशत की सक्रिय भागीदारी रही। बैठक में बताया गया कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रस्ताव पर 15 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजन के लक्ष्य को मंजूरी दी है। मनरेगा के तहत 2155 करोड़ रूपए की मजदूरी का भुगतान किया गया है। मनरेगा के कार्यो में दिव्यांगों की भागीदारी बढ़ी है। नरवा विकास योजना में चिन्हांकित 1406 नरवा में 66 हजार से अधिक भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण प्रगति पर है। श्री बघेल ने कहा कि ऐसे नाले जिनका एक हिस्सा वन क्षेत्र से गुजरता है, उसका सम्पूर्ण डीपीआर वन विभाग द्वारा तैयार किया जाए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2017 में मनरेगा के तहत निर्मित परिसम्पत्तियों की जियोटेगिंग में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है। इसी तरह वन अधिकार पत्र प्राप्त हितग्राहियों को लाभान्वित करने और ग्राम पंचायतों के विकास के लिए जीआईएस केन्द्रित योजना तैयार करने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है। प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और कृषि तथा उससे जुड़े कार्यो में मनरेगा योजना से खर्च के मामले में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर है। मनरेगा से 706 नये ग्राम पंचायत भवन और 672 आंगनबाड़ी केन्द्रों को मंजूरी दी गई है।
बैठक में मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन और सुब्रत साहू, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, खाद्य विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह, आदिमजाति कल्याण विभाग के सचिव डी. डी. सिंह, मनरेगा आयुक्त मोहम्मद अब्दुल कैसर हक शामिल हुए। विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के सदस्य और अधिकारी इस बैठक में वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े।

जशपुरनगर / शौर्यपथ / प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला ने बगीचा विकासखंड के पूर्व माध्यमिक शाला रौनी में संचालित मोहल्ला क्लास का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों के बौद्धिक क्षमता का आंकलन करते हुए विद्युत का सुचालक एवं कुचालक विज्ञान प्रयोग के साथ कक्षा अध्यापन एवं बच्चों में समझ विकसित होने के संबंध में जानकारी ली। इसी कड़ी में शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला दुर्गापारा में बच्चों के पठन कौषल गणितीय प्रयोग कौषल, जोड़कर खेल विधि प्रयोग की भी जानकारी ली और बच्चों के बौद्धिक क्षमता का आंकलन किया।
इस अवसर पर बगीचा के अनुभागीय अधिकारी रोहित व्यास, शिक्षा अधिकारी एन.कुजूर. राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला मिषन समन्वयक विनोद कुमार पैंकरा, संबंधित विकासखण्डों के विकास खण्ड षिक्षा अधिकारी, विकासखण्ड स्त्रोत केन्द्र समन्वयक, सकुल शैक्षिक समन्वयक षिक्षक एवं पालक उपस्थित थे।

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग संभागायुक्त टी0सी0 महावर एवं आईजी विवेक सिन्हा, कलेक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे, एवं एस.पी. प्रशंात ठाकुर द्वारा आज संयुक्त रुप से कोविड हास्पीटल शंकराचार्य का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। उन्होनें हास्पीटल में भर्ती मरीजों से फोन पर बात की एवं वहाॅ ईलाज और खाने-पीने की सुविधा की जानकारी उनसे ली। कोविड हास्पीटल शंकराचार्य मे नाश्ता, भोजन और ईलाज की सुविधा और व्यवस्था पर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त करते हुये कहा कोविड हास्पीटल इंचार्ज इंद्रजीत बर्मन और स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता को निर्देशित कर कहा और अच्छी सुविधा और व्यवस्था बनाकर रखें।
उल्लेखनीय है कि दुर्ग और भिलाई क्षेत्र में कोरोना पाॅजिटिव मिल रहे मरीजों के लिए कोविड हास्पीटल शंकराचार्य में भर्ती कर उनका ईलाज किया जा रहा है। हास्पीटल की सुविधा और व्यवस्था का आज दुर्ग संभागायुक्त टी.सी. महावर ने अधिकारियों के साथ हास्पीटल पहुॅचकर आकस्मिक निरीक्षण किया गया । इस दौरान उन्होनें कोरोना पाॅजिटिव मरीज त्रिलोचन दास 9770265611, सत्येन्द्र बहादुर तिवारी मो0. 9329009932, प्रशांत मनहरे मो0.9827179033, तथा हरेराम यादव, अनिल रत्नाकर से फोन में बात किये । भर्ती मरीजों ने संभागायुक्त को बताये कि हमें सुबह 8 बजे नाश्ता, 12 बजे खाना, शाम 5 बजे नाश्ता, और रात्रि 8 बजे खाना समय से दिया जा रहा है। खाद्य पदार्थ की क्वालिटी भी अच्छी और स्वादिष्ट हैं। इसके अलावा हास्पीटल में कार्यरत डाक्टरर्स नियमित रुप से तीन से चार बार निरीक्षण कर हमारी हाल-चाल और तबीयत की जानकारी लेते रहते हैं। संभागायुक्त ने हास्पीटल में सुविधा और व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किये, उन्होनें इंचार्ज अधिकारी इंद्रजीत बर्मन और स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता का उत्साहवर्धन करते हुये हास्पीटल में निरंतर और अच्छी सुविधा व्यवस्था बनाये रखने के निर्देश दिये ।

बिलासपुर / शौर्यपथ / सेवा सहकारी समितियों के बड़े घोटालों में एक नाम सेवा सहकारी समिति मल्हार का भी है। वर्ष 2013 में  इस समिति में 4 करोड़ 76 लाख रुपये का घपला पाया गया था। मात्र एक आरोपी जेल गया और शेष 13 आरोपी फरार हो गए किन्तु पंजीयक सहकारी समिति की जांच हुई, जांच  में पांच आरोपियों के खिलाफ प्रकरण चल रहा है जिसमे से मुख्य आरोपी जो जेल यात्रा कर चुका है लगातार अनुपस्तिथि है। साथ ही समिति का कम्प्यूटर ऑपरेटर भी उपस्थित नही होता है। शेष तीन आरोपी जांच कार्य मे अपना जवाब प्रस्तुत करते है, पूरा मामला मल्हार क्षेत्र के एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की शह पर हुआ था, जिसे इस चुनाव में जनता ने नकार दिया। सहकारी समितियों की जांच तथा पंजीयक की जांच के  तरीके अलग-अलग है और दोनों जांच को एक दूसरे से कोई लेना देना नही है, इस बात का लाभ आरोपियों को मिल जाता है। (फोटो धान की बोरी) 

बिलासपुर / शौर्यपथ / एक तरफ जिला प्रशासन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बीपीएल को दो माह का राशन एक साथ दे रहा है और दूसरी ओर सरकार की योजना को बिलासपुर खाद्य नियंत्रक कार्यालय स्वयं ही पलीता लगा रहा है। विभागीय लोगों पर ग्रामीणों का भरोसा उठ गया है इसी का परिणाम है कि खाड़ा में चोरी का माल महिला स्व सहायता समूह ने पकड़ा और पुलिस के हवाले किया। पूरे मामले खाद्य नियंत्रक कार्यालय कही नजर नहीं आया। चावल तस्करी का पूरा मामला इन दिनों जिले में सुनियोजित तस्करी की तर्ज पर चल रहा है। यहां भी जिस चावल का घपला होना था वह 3 सितंबर को लाया जा चुका था। ग्रामीणों की माने तो चावल तस्करी में जिस ट्रेक्टर का उपयोग हो रहा है वह कांग्रेसी नेता रोशन जायसवाल का है। किंतु ट्रेक्टर पर जो नम्बर दर्ज है उसका मालिक एक आदिवासी है। कुल मिलाकर पीडीएस के क्षेत्र में तस्करों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है जिसकी जड़े राइस मिल से होते हुए रेडी टू इट तक पहुचती है। इस प्रकरण में भी खाद्य निरीक्षक पति पत्नी दीवान एक विधानसभा में नियुक्त है और रात में तहसीलदार के बुलाने पर भी नही आये। पुलिस ने कुछ लोंगो को हिरासत में लेकर कोर्ट प्रस्तुत किया। खाद्य नियंत्रक ने बताया कि मामला अभी मेरे तक नही आया है।   

बिलासपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य की कुल वर्ग किमी क्षेत्र पर में से बड़े क्षेत्र में कोयले को भंडार है, पानी है और जंगल है, इसलिए छत्तीसगढ़ में पिछले चार दशकों से कोयला खनन की गतिविधियां सतत जारी है। साथ ही विधुत उत्पादन कंपनियों ने भी अपनी इकाइयां स्थापित की। इनमें अब तक केंद्र एवं राज्य सरकार की मुख्य थी। किन्तु अब बदले हुए नियम के कारण कोल सेक्टर का पूर्णतः निजीकरण हो जाएगा। एसे में छत्तीसगढ़ के जंगल और किसान दोनों सीधे प्रभावित होंगे। किन्तु उदासीन जनप्रतिनिधित्व और जागरूकता की कमी के कारण छत्तीसगढ़ में प्रकृतिक संसाधनों की लूट खसोट को रोकना कठिन होगा और बड़ी शक्तिशाली निजी कंपनियों के सामने जनता लूटने के लिए मजबूर होगी। इस सब के बावजूद राज्य के भीतर राजनैतिक दल अथवा श्रमिक संगठन में से कोई भी आज आवाज उठाने तैयार नही है। भारत मे कुल सेक्टर ने निजीकरण भी देखा राष्ट्रीकरण भी देखा और फिर से निजीकरण को भी देखेगा। 2013 में यूपीए जिसका नेतृत्व कांग्रेस के पास था ने पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 पारित हुआ । यह एक ऐसा कानून है जो किसान के पक्ष में है और पंचायत को मजबूत करता है। इसके अतिरिक्त देश में भूमि अधिग्रहण के 13 और कानून है जो सड़क, नहर, रेल, टावर, टावर लाइन लगाने के लिए उपयोग में लाये जाते है। इन सबके के साथ 1957 के कानून कोल बियरिंग एरिया अधिग्रहण एयर विकास अधिनियम पर चर्चा जरूरी है जो कि छत्तीसगढ़ में कोई नही करता। विकास अधोसंरचना निर्माण जरूरी है, पर सहभागिता और पारदर्शिता के साथ। साथ मे मानवतावाद जिसमे मानववाद के साथ जिसमे पशुपक्षी जल चर भी जुड़े। तभी सच्चे अर्थों में जल, जंगल और जमीन का सही उपयोग होगा। 2013 का कानून 1957 के कानून को समाप्त नही करता अब सवाल यह है कि 1957 का कानून केंद्र सरकार की कंपनी के हित में भूमि अधिग्रहण के लिए था अब इसी कानून से निजी कंपनियों के लिए जमीन का अधिग्रहण होगा। जानकारी यह कहती है कि छत्तीसगढ़ में 40 कोल ब्लॉक के लिए 60000 हेक्टर अथवा एक लाख 50 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण होगा, और छत्तीसगढ़ के 150 आदिवासी बाहुल्य गांव सीधे प्रभावित होंगे। इतनी बड़ी विप्पलवपारी योजना के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ का गठन का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।

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