Google Analytics —— Meta Pixel
June 02, 2026
Hindi Hindi
शौर्यपथ

शौर्यपथ

मेलबॉक्स /शौर्यपथ / कोरोना महामारी से मानव जीवन का हरेक पहलू प्रभावित हुआ है। ऐसे में, शिक्षा-व्यवस्था में परिवर्तन समय की मांग है। मौजूदा शिक्षा-सत्र पूरी तरह से कोरोना की भेंट चढ़ गया है और विकल्प के तौर पर ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की गई है। हालांकि, हर जगह ऑनलाइन कक्षा संभव नहीं है। बेशक कॉलेज व विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को कुछ नियमित तरीके से, और कुछ विषयों में पत्राचार से पढ़ाई कराते रहे हैं, लेकिन अभी जिस माध्यम से पढ़ाई हो रही है, वह खुला विश्वविद्यालय की तरह ही है। ऐसे में, सरकार को अब यह निर्णय लेना चाहिए कि हर विश्वविद्यालय खुले विश्वविद्यालय की तरह ऑनलाइन नामांकन ले और विद्यार्थियों को पाठ्य-सामग्रियां डाक से भेजे, ताकि वे अपने-अपने घर पर ही पढ़ाई कर सकें। परीक्षा भी खुले विश्वविद्यालय के मानकों की तरह आयोजित हो। इस तरह की व्यवस्था होने से बच्चों के सत्र बरबाद नहीं होंगे।
मिथिलेश कुमार, भागलपुर

पोल खोलती बारिश
दिल्ली में बारिश अभी पूरी तरह से शुरू भी नहीं हुई है और नाले उफनने लगे हैं। यह दयनीय स्थिति है, क्योंकि जब मूसलाधार बारिश होगी, तब हालात कैसे होंगे? दिक्कत यह है कि हर बरसात में लोगों को इस संकट से गुजरना पड़ता है, फिर भी हमारे नगर निगम सिर्फ निरीक्षण की खानापूर्ति कर शांत हो जाते हैं। नालों की सफाई रोजाना नहीं, तो कम से कम हफ्ते में एक बार तो हो ही सकती है। यदि ऐसी व्यवस्था बन जाए, तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
रितिक सविता, दिल्ली विश्वविद्यालय

अयोध्या का कायाकल्प
लंबे समय से लंबित श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा होने के बाद हर भारतवासी की निगाहें अयोध्या की तरफ थीं कि आखिर मंदिर कब बनेगा? अब इसका रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री मंदिर का भूमि पूजन करने वाले हैं। मंदिर बनने से सबसे ज्यादा फायदा अयोध्यावासियों को होगा, क्योंकि इससे पर्यटकों का आना बढ़ेगा, जिससे व्यापार के नए मार्ग खुलेंगे और यहां का चौतरफा विकास हो सकेगा। आखिर बरसों से उपेक्षित अयोध्या में रामराज्य पुन: स्थापित होगा और उम्मीद है कि आगामी वर्षों में अयोध्या का विकास उसे देश के बड़े दार्शनिक स्थलों में शुमार कर देगा।
शुभम पांडेय गगन
अयोध्या, फैजाबाद

चुनाव कराना बड़ी चुनौती
बिहार में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए इस राज्य में विधानसभा का चुनाव कराना खतरे को बढ़ावा देना है। इससे बिहार में संक्रमण की गति और बढ़ सकती है। सरकार को अभी लोगों की फिक्र करने की जरूरत है, न कि चुनाव की। चुनाव आयोग को करोड़ों बिहारवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही फैसला करना चाहिए, क्योंकि जान है, तभी जहान है। यदि कोई भी कोरोना संक्रमित मतदाता वोट देने मतदान केंद्र पर पहुंच जाता है, तो वह दूसरे को भी संक्रमित करेगा। इसलिए इस साल चुनाव को स्थगित कर देना चाहिए। ‘न्यू नॉर्मल’ में नए तरीके से चुनाव आयोग को सोचना चाहिए।
मो. अजहरुद्दीन
जनता बाजार, छपरा

महिलाओं का सम्मान
काफी लंबे समय से महिलाओं के स्थाई कमीशन की मांग सेना में चल रही थी, जिसे अब जाकर पूरा किया गया है। अब महिलाएं भी सेना में अहम भूमिका निभा सकेंगी। सवाल यह है कि इस फैसले को अमल में लाने में इतना वक्त क्यों लग गया? खैर, कहते हैं न कि देर आए, दुरुस्त आए। इस एक फैसले से बहुत से क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति हीन भावना खत्म होगी। हमें इसका स्वागत करना चाहिए।
अमन कुमार

ओपिनियन / शौर्यपथ /खबर अमेरिका से आई है। मगर चिंता पूरी दुनिया की है। कोरोना का हाल सुधरते-सुधरते अचानक बिगड़ता नजर आया। अनिश्चितता बढ़ रही है कि यह बीमारी काबू में आती दिखे, तब भी चैन से नहीं बैठा जा सकता। इसी तरह, अमेरिका में बेरोजगारी भत्ता मांगने वालों की गिनती भी पिछले हफ्ते अचानक तेजी से उछली है। जुलाई के पहले हफ्ते में करीब 3.20 करोड़ अमेरिकियों ने यह भत्ता लिया है। कोरोना की वजह से हरेक बेरोजगार के खाते में 600 डॉलर अलग से पहुंचते हैं। सरकार पर दबाव बन रहा है कि कोरोना थम नहीं रहा है और इस मदद की मीयाद भी बढ़ाई जाए। इधर, 18 जुलाई को जो हफ्ता खत्म हुआ, उसमें करीब 14 लाख नए लोगों ने बेरोजगारी भत्ते की अर्जी लगाई है। यह पिछले हफ्ते से करीब एक लाख नौ हजार ज्यादा है। ऐसी बढ़त पिछले चार महीने में पहली बार हुई है। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि रोजगार के मोर्चे पर अमेरिका में हालत खराब है।
इसके उलट भारतीय रोजगार बाजार में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, शहरी इलाकों में रोजगार का आंकड़ा अप्रैल के 26 प्रतिशत से बढ़ते-बढ़ते जुलाई में करीब 38 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। शहरी इलाकों में लोगों के काम पर लौटने की रफ्तार तेज है और इसमें ज्यादातर वे लोग हैं, जो मध्यमवर्गीय घरों में जरूरी काम करते हैं। जैसे बाई, रसोइए, ड्राइवर या सफाईकर्मी। इस तरह के लोग ही सबसे तेजी से काम पर लौटे हैं और इसका नतीजा है कि मध्यवर्ग के लिए अब लॉकडाउन शायद उतना कष्टकारी नहीं रह गया है।
हालांकि सीएमआईई के ही एक सर्वे में पता चला है कि लोगों के बजट टाइट हो रहे हैं। खासकर अप्रैल से जून के बीच बहुत से परिवारों की कमाई पर भारी असर पड़ा है। जहां पिछले साल इस दौरान 33 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि उनकी कमाई बढ़ गई है, वहीं इस साल ऐसा कहने वालों की गिनती छह प्रतिशत के आसपास है। हालांकि कई और आंकड़े हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि कामकाज वापस पटरी पर आ रहा है। दोपहिया बेचने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बिक्री में तेज उछाल दिख रहा है। जून में हीरो मोटो ने साढ़े चार लाख गाड़ियां बेचीं, मई से चार गुना ज्यादा। हालांकि, पिछले साल के जून के मुकाबले यह 26 प्रतिशत कम है। कंपनी के चेयरमैन सुनील मुंजाल के अनुसार, सबसे अच्छी मांग गांव और कस्बों से आ रही है। इसकी वजह सरकार के आर्थिक पैकेज से निकली रकम का इन इलाकों तक पहुंचना है। सामान्य मॉनसून और रबी की बंपर पैदावार के बाद उन्हें लग रहा है कि अब अगर कोई नया झटका नहीं लगा, तो साल खत्म होते-होते बिक्री में इतनी तेजी आ चुकी होगी कि दो महीने की बंदी से हुआ नुकसान भी धुल जाएगा।
रोजमर्रा की चीजें बनाने वाली कंपनियों का हाल भी अलग नहीं है। जिस दौरान पूरा देश लॉकडाउन की सबसे गंभीर मार झेल रहा था, उसी समय यानी अप्रैल से जून के बीच ब्रिटैनिया का मुनाफा पिछले साल से दोगुने से भी ज्यादा हो गया। यही हाल कुछ अन्य कंपनियों का है।
दूसरी तरफ, कोरोना के आंकड़े देखिए, जो डरावनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद शेयर बाजार को देखिए, तो लगता ही नहीं कि कहीं कोई मुसीबत है। भारी गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी फिर से नई ऊंचाई की ओर रेस लगा रहे हैं। छोटी और मंझोली कंपनियों में भी तेजी दिख रही है। बाजार में इस तेजी के कई कारण बताए जा रहे हैं। एक तो नए लोगों को बताया जा रहा है कि भारी गिरावट के बाद बाजार में तेजी आती है और ऐसी गिरावट ही पैसा बनाने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। इस चक्कर में बहुत से नए लोग शेयर बाजार में आ गए हैं। लेकिन 23 मार्च की तेज गिरावट के बाद उछाल की शुरुआत इन लोगों के भरोसे नहीं हुई थी। दरअसल, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में सरकारों ने बहुत बड़ी रकम लोगों के हाथों में खर्च करने के लिए दी है। उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा उन देशों के म्यूचुअल फंड के रास्ते भारत पहुंचा है। यह रकम कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों में ही लगती है, लेकिन इससे आई तेजी से दूसरे निवेशक आकर्षित होते हैं।
एक समस्या यह है कि बैंकों में पैसा रखना करीब-करीब बेकार लगने लगा है। ऐसे में, अगर कोई शेयर बाजार का लालच दिखा दे, तो मन मचलना स्वाभाविक है। कुछ लोग हिम्मत कर रहे हैं और कूद रहे हैं। जनवरी से मई के बीच देश में करीब 29 लाख नए डीमैट अकाउंट खुले हैं और शेयर बाजार में कैश सेगमेंट में जो कारोबार हो रहा है, अप्रैल से जून के बीच उसका आधे से ज्यादा हिस्सा छोटे निवेशकों से ही आया है। पिछले साल से मुकाबला करें, तो इस दौरान रिटेल निवेशकों का कारोबार 78 प्रतिशत बढ़ा है और उन्होंने 33 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन किया है।
बाजार में इस तेजी से सबको मजा आ रहा है, लेकिन यह खतरनाक स्थिति है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी शुक्रवार को जारी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि बाजार और बाजार के सूचकांक जिस तरह चल रहे हैं, उनका देश की आर्थिक स्थिति या जमीनी सच्चाई से कोई रिश्ता नहीं दिखता। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि बैंकों के डूबे कर्ज दोगुने हो सकते हैं और उस स्तर पर पहुंच जाएंगे, जहां पिछले 20 साल में कभी नहीं रहे। साफ है, जमीनी तकलीफ दूर किए बिना इस समस्या से पार नहीं पाया जा सकता। आर्थिक विशेषज्ञ शोभना सुब्रमण्यम कहती हैं कि सरकार को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर खर्च करना होगा। इसके लिए कम से कम चार-पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना होगा। सवाल है कि इस वक्त सरकार कर्ज लेगी, तो चुकाएगी कब और कैसे? क्या कमाई का कोई दूसरा रास्ता है? काम-धंधे बिगड़ते रहे, तो टैक्स की कमाई भी घटेगी। रास्ता एक ही है कि सरकार खर्च करे। इसके लिए पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का सुझाव है कि सरकार को सारी हिचक और रेटिंग वगैरह की चिंता छोड़ नए नोट छापने चाहिए और उसे प्रोजेक्ट्स में भी लगाने चाहिए और जनता की जेब में भी पैसा डालना चाहिए। इससे इकोनॉमी में वह रफ्तार आ सकेगी, जो इस आपदा को अवसर में बदल पाएगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) आलोक जोशी, वरिष्ठ पत्रकार

 

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में इन दिनों लॉक डाउन है और लॉक डाउन का सबसे ज्यादा फायदा अमृत मिशन के कार्य करने वाले ठेकेदार उठा रहे है , अमृत मिशन के कार्यो में पाइप लाइन बिछाने के बाद फिलिंग का कार्य किया जाना है जिसमे तय मानक मात्रा में मटेरियल मिला कर फिलिंग करना है किन्तु इस कार्य में स्तर हीन मसाला मिश्रण का उपयोग खुल कर किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मौन है .
इन जिम्मेदार अधिकारियों में निगम क्षेत्र में नाली में कचरा फेकने वालो से कचरा उठवा कर अपनी प्रशासनिक ताकत का अहसास कराने वाले निगम आयुक्त इन्द्रजीत बर्मन भी शामिल . आयुक्त बर्मन को शौर्यपथ समाचार के माध्यम से पूर्व में भी सुचना दी गयी किन्तु आयुक्त द्वारा मामले को संज्ञान में ना लेना और जिम्मेदार अधिकारी ईई बाबर व सब इंजिनियर भीम राव को कार्य में सतत निगरानी का निर्देश ना देना ही इस ओर इशारा करता है कि आयुक्त सिर्फ शहर की आम जनता से जुर्माना वसूल कर सकते है अधिकारियों की लापरवाही पर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं कर सकते .


पूर्व में भी ऐसे कई मामले आये जिसमे आयुक्त द्वारा लापरवाह अधिकारियो पर कार्यवाही का आश्वासन ही दिया जाता रहा कार्यवाही नहीं हुई . भ्रष्टाचार की जड़ निगम के लापरवाह इंजिनियर ही होते है . इंजीनियरों की लापरवाही के कारण ठेकेदार मिलावटी कार्य कर घटिया निर्माण करते हुए शासन को चुना लगा रहे है और जिम्मेदार अधिकारी मौन होकर ऐसे ठेकेदार का साथ दे रहे है .
क्या आयुक्त बर्मन अमृत मिशन के कार्यो में हो रहे घटिया निर्माण पर निष्पक्ष जाँच करेंगे या फिर जिस तरह भीम राव ( सब इंजिनियर ) के पूर्व में किये अनैतिक कार्य पर पर्दा डाल कर बचाते रहे है इस बार भी ऐसा ही कार्य कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देनेगे और फिर शहर के एक आम जनता की तलाश में निकल जायेंगे जो नाली में कचरा डाल कर निगम के नियमो की अवहेलना कर रहा हो और उससे जुर्माना वसूल कर एक बार फिर वाह वाही बटोरेंगे ?

बढ़ते कोरोना के मरीजों को देखते हुए मेयर देवेंद्र यादव ने की पहल
सीएम हॉस्पिटल में मरीजों का हो सकेगा बेहतर इलाज

दुर्ग / शौर्यपथ / भिलाई नगर विधायक व मेयर देवेंद्र यादव की पहल से सीएम हॉस्पिटल कचांदुर को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। मेयर यादव की पहल से 800 बिस्तर वाले इस अस्पताल को क्वारंटाइन सेंटर बनाने से क्षेत्र की जनता को काफी लाभ होगा। जनता की सुविधाओं को देखते हुए मेयर यादव ने पहल की है और शहर में अन्य जगह क्वारंटाइन सेंटर बनाने के बजाए सीएम हॉस्पिटल कचांदुर में ही 800 बिस्तर वाला क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है।
महापौर की पहल के बाद आज निगम के अधिकारी अस्पताल का निरीक्षण करने भी गए। जहां अस्पताल प्रबंधन ने भी अपनी ओर से इस बेहतर पहल के लिए हामी भर दी है और जो भी भिलाई क्षेत्र में काेरोना मरीज मिलेंगे। उन्हें इसी अस्पताल में क्वारंटाइन किया जाएगा। मरीजों के लिए बेहतर सुविधा हैं। इससे शहर में लगातार मिल रहे कोरोना मरीजों को समय पर जल्द से जल्द बेहतर इलाज मिल पाएगा। मरीजों को रायपुर के अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। साथ ही मरीज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख रेख में रहेंगे। इससे मरीजों जल्दी ठीक हो जाएंगे।
गौरतलब है कि शहर में लगातार कोरोना के मरीज मिल रहे है। स्वास्थ्य विभाग ने काेरोना जांचने सैम्पल बढ़ा दिया है। विभाग जितने ज्यादा लोगों की जांच कर रहा है। उतने ही ज्यादा मरीज शहर में मिल रहे हैं। ऐेसे में स्वास्थ्य विभाग के पास भी इन मरीजों को क्वारंटाइन रखने के लिए पर्याप्त सुविधा युक्त जगह की कमी थी। खुर्सीपार सहित शहर के कुछ स्थानों पर विभाग के मार्गदर्शन में क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया था। इस वजह से क्वारंटाइन सेंटर के आसपास के लोगों में कोरोेना का भय व्याप्त था और इस वजह से लोग क्वारंटाइन सेंटरों का विरोध कर रहे थे। ऐसे में जनता की हित और सुरक्षा को देखते हुए मेयर व भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने पहल की और शहर से बाहर सीएम हास्पिटल को क्वारंटाइन सेंटर बनाने की पहल की है।

नई दिल्ली / अमरीकी राजनयिक चीन के दक्षिणी-पश्चिमी शहर चंगडू स्थित अमरीकी महावाणिज्य दूतावास को छोड़कर निकल गए हैं. दरअसल चीन ने इस मिशन को बंद करने का फ़ैसला लिया था और यहां के अमरीकी राजनयिकों को सोमवार सुबह तक जाने की डेडलाइन दी थी. डेडलाइन ख़त्म होने के कुछ घंटों पहले कर्मचारियों को बक्से की फाइलें और कूड़े के बैग ले जाते हुए देखा गया.

इस बीच स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा हो गई. कई लोग चीन के झंडे लहरा रहे थे और सेल्फी ले रहे थे. चीन ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमरीका का ये महावाणिज्य दूतावास बंद किया है, क्योंकि अमरीका ने पिछले हफ़्ते टेक्सस के ह्यूस्टन स्थित उसके दूतावास को बंद कर दिया था. ह्यूस्टन मिशन को छोड़ने की 72 घंटे की डेडलाइन शुक्रवार को ख़त्म हो गई थी. जिसके बाद पत्रकारों ने अमरीकी अधिकारी लग रहे कई आदमियों को चीनी दूतावास में के दरवाज़े जबरन खुलवाते हुए देखा.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अमरीका ने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि चीन "बौद्धिक संपदा" चुरा रहा था.

वहीं चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता वांग वेनबिन ने जवाब देते हुए कहा कि ये अमरीकी कदम "चीन-विरोधी झूठ के घालमेल" पर आधारित है. इन दो परमाणु शक्तियों के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का प्रशासन व्यापार और कोरोना वायरस महामारी के मुद्दे पर चीन से बार-बार उलझत रहा है.अमरीका ने हॉन्ग कॉन्ग में चीनी की ओर से विवादित नए सुरक्षा क़ानून लागू करने का विरोध भी किया है.
चंगडू में नया क्या हुआ है?


चीन का सरकारी मीडिया अमरीकी महावाणिज्य दूतावास से बाहर निकलती बड़ी गाड़ियों की तस्वीरें दिखा रहा है और इन तस्वीरों में ये भी दिख रहा है कि कर्मचारी इमारत से राजनयिक प्रतीक चिन्ह हटा रहे हैं. बाहर दर्जनों चीनी पुलिसकर्मी हैं, जो वहां खड़े लोगों को हटने की अपील कर रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह के उकसावे की स्थिति ना बने. हालांकि समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के मुताबिक़, रविवार को जब काली फ़िल्म चढ़ी खिड़कियों वाली बस इमारत से निकली तो हूटिंग की आवाज़ें सुनी गईं. पिछली बार जब चीनी राजनयिक ह्यूस्टन स्थित अपने मिशन से निकले थे तो वहां प्रदर्शनकारियों ने उन्हें चिढ़ाया था. चंगडू का अमरीकी महावाणिज्य दूतावास 1985 में बनाया गया था जिसमें 200 से अधिक लोग काम करते थे और ये रणनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यह तिब्बत के क़रीब था.
अपने उद्योगों और बढ़ते सर्विस सेक्टर की वजह से चंगडू को अमरीका कृषि उत्पादों, कारों और मशिनरी के निर्यात के अवसर देने वाली जगह के रूप में देखता था. इस महावाणिज्य दूतावास के बंद हो जाने के बाद चीन में अमरीका के चार दूतावास बचेंगे और राजधानी बिजिंग में उसकी एक एम्बेसी है. वहीं हॉन्ग कॉन्ग में भी अमरीका का एक महावाणिज्य दूतावास है. चीन ने पिछले हफ़्ते ह्यूस्टन स्थित अपना दूतावास खो दिया था. हालांकि अभी भी अमरीका में उसके चार अन्य महावाणिज्य दूतावास हैं और राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक एम्बेसी है.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत ने 275 चीनी ऐप की लिस्ट बनाई है, जिनकी जांच की जाएगी कि कहीं वो राष्ट्रीय सुरक्षा या लोगों की निजता का उल्लंघन तो नहीं कर रहे. मामले से परिचित लोगों के मुताबिक़, संभावना है कि और भी कई चीनी इंटरनेट कंपनियां देश में बैन हो सकती हैं.
एशिया के इन दो बड़े देशों में जारी सीमा विवाद के बीच पिछले महीने ही 59 चीनी ऐप पर हाई प्राफाइल बैन लगाया गया था. जिसमें टिकटॉक जैसे ऐप शामिल थे.
इकॉनोमिक टाइम्स अख़बार का कहना है कि उसने नई लिस्ट देखी है, जिसमें लोकप्रिय गेमिंग ऐप - पबजी, शाओमी का ज़िली, अलीबाबा का अलीएक्सप्रेस के अलावा रेसो और टिकटॉक की मालिकाना कंपनी बाइटडांस का एक और ऐप - यूलाइक शामिल है.
मामले के जानकार एक शख़्स ने बताया, "सरकार इन सभी ऐप को बैन कर सकती है. या हो सकता है कुछ को करे या किसी को ना करे." हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. लेकन आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि समीक्षा जारी है जिसका मक़सद और चीनी ऐप्स की पहचान करना और उनकी फंडिग का पता लगना है.

एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से कुछ ऐप्स की सुरक्षा कारणों को लेकर शिकायत आई है, वहीं कुछ के बारे में डेटा शेयरिंग करने और निजता की चिंता को लेकर आगाह किया गया है.

शौर्यपथ । सेहत । शिक्षा । ज्यादातर लोगों को क्या लगता है कि सेक्स के बाद सभी कपल्स फिल्मों की तरह एक दूसरे को बांहों में भर कर सो जाते हैं या फिर दोनों एक दूसरे से प्यार भरी बातें करते हैं। जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि फिल्मों में जैसा दिखाते हैं वैसा आपके साथ रियल में भी हो ऐसा मुमकिन नहीं है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आपका ये भ्रम दूर हो जाएगा। जी हां कुछ कपल्स ने सेक्स के बाद एक दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार किया जो हैरान करने लायक था। एक कपल ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार सेक्स किया तो मर्द पार्टनर सेक्स के बाद बिल्कुल चुप हो गया। घर जाकर बाद में उसने मैसेज करके पूछा कि बैड पर मैं कितना सक्सेस हुआ। मर्द पार्टनर को ये लग रहा था कि कहीं अगर महिला को मजा नहीं आया तो शायद वो उससे इस बात के लिए रिश्ता भी तोड़ सकती है। एक कपल ने बताया कि जब उन्होंने सेक्स किया तो महिला पार्टनर सेक्स के तुरंत बाद बहुत जोर-जोर से रोने लगी। जब वो ज्यादा देर तक रोने लगी तो मर्द पार्टनर ने उससे पूछा कि तुम क्यों रो रही हो तो महिला पार्टनर ने बताया कि कुछ दिनों पहले तुम्हारी मां से मेरी लड़ाई हो गई थी। एक लड़के ने बताया कि एक बार उसने एक लड़की के साथ सेक्स किया तो उससे पहले हमने काफी देर बात की और एक दूसरे को अपने बारे में बताया। जब हमने सेक्स कर लिया तो लड़की ने बोला कि मेरा असली नाम कुछ और ही है। एक लड़की ने बताया कि एक बार वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स कर रही थी तो उसे याद आया कि थोड़ी देर बार उसकी रूप मेट आने वाली है। तो लड़की ने सेक्स के तुरंत बाद ही लड़के से कहा कि तुम यहां से निकल जाओ अभी के अभी। फिर लड़की ने बाद में फोन पर लड़के को सारी बात बताई। नोट: 18+ स्टोरी का उद्देश्य अश्लीलता परोसना नहीं, बल्कि सेक्स के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि आपके जीवन में खुशहाली आए।

० राजनांदगांव, महासमुंद एवं दंतेवाड़ा पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा बिहार-झारखंड में की धमाकेदार छापामार कार्यवाही
० हाईप्रोफाईल ठग कई टीम बनाकर देते थे ठगी की घटना को अंजाम
० फर्जी सिम लाने, फोन करने, खातों में रकम ट्रांसफर करने से लेकर एटीएम से रकम निकालने ठगों के हर सदस्यों का बटा हुआ था अलग-अलग काम
० सेवानिवृत होने वाले अधिकारियों के बारे में ऑनलाईन करते थे पहचान
० बड़ी चतुराई से अपने आप को पेंशन अधिकारी बताकर लेते थे प्रार्थी की खातें की संपूर्ण जानकारी


राजनांदगांव / शौर्यपथ / प्रार्थी भगवान सिंह सलामे उम्र 60 साल निवासी अंबागढ़ चौकी के द्वारा 16 जुलाई 2020 को थाना अंबागढ़ चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराया कि 15 जुलाई 2020 को अज्ञात व्यक्ति द्वारा फोन कर अपने आप को पेंशन अधिकारी बताकर बैंक खाते एवं एटीएम की संपूर्ण जानकारी लेकर खाते से 18.33 लाख रूपये का धोखाधड़ी कर आहरण कर लिया गया है। रिपोर्ट पर थाना अंबागढ़ चौकी में अपराध क्रमांक 131/20 धारा 420 कायम कर विवेचना में लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक रायपुर डा. आनंद छाबड़ा, पुलिस महानिरीक्षक बस्तर पी. सुंदरराज, पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव जितेन्द्र शुक्ला, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा अभिषेक पल्लव, पुलिस अधीक्षक महासमुंद प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देशन एवं अति. पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव गोरखनाथ बघेल, श्रीमती सुरेशा चौबे एवं नगर पुलिस अधीक्षक मणीशंकर चंद्रा, एसडीओपी अं. चौकी घनश्याम कामड़े मार्गदर्शन में उप पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षु मयंक रणसिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम मामले के जल्द से जल्द खुलासे के लिए गठित की गई।
       विशेष टीम द्वारा कॉल किए गए मोबाईल नंबर व प्रार्थी के खाते से ट्रांसफर किए गए संपूर्ण बैंक खातों की जानकारी प्राप्त कर बारिकी से हर बिंदुओं पर जांच की गई, उसी दौराने छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों महासमुंद, दंतेवाड़ा, कांकेर, रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा में भी ऐसे ही घटना घटित होना पता चलने पर सभी जिलो से संपर्क कर घटना की संपूर्ण जानकारी एकत्र कर तकनीकी टीम व फिल्ड में पुलिस स्टॉफ द्वारा अथक प्रयास कर आरोपियों की पहचान कर तत्काल विशेष टीम बिहार-झारखंड की ओर रवाना हुई। दंतेवाड़ा एवं महासमुंद की टीम भी अपने-अपने जिले से आरोपियों की पता-तलाश हेतु बिहार-झारखंड पहुंची। अलग-अलग जिलों के पुलिस स्टॉफ द्वारा संयुक्त टीम बनाकर स्थानीय पुलिस की मदद से बिहार-झारखंड के अलग-अलग स्थानों में रेड कार्यवाही कर घेराबंदी कर 5 आरोपियों को पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ पर पता चला कि ठगों के गिरोह द्वारा पूरे भारत में इस प्रकार के ठगी की घटना को अंजाम देकर करोड़ों रूपये की ठगी की जा चुकी है।
      प्रार्थी को फोन करने, खातों की जानकारी लेने, खातों से रकम दूसरे खातों में भेजने से लेकर एटीएम से रकम आहरण करने ठगों के टीम के अलग-अलग सदस्यों की भूमिका निर्धारित होती है, जिनको उनके कार्यो के आधार पर कमीशन दिया जाता है। पुलिस को गुमराह करने हेतु आरोपियों द्वारा पं. बंगाल के महिलाओं के नाम पर फर्जी सिम खरीदकर बिहार-झारखंड बार्डर के जंगलों में बैठकर ठगी के लिए फोन करते थे ठगी कर आरोपी अलग-अलग दिशाओं में चले जाते थे। रकम आहरण करने हेतु झारखंड के देवघर, गिरिडिह, डुमका जिले के अलग-अलग एटीएम का उपयोग करते थे। रकम आहरण पश्चात् वापस बिहार आकर अपने-अपने ठिकानों में चले जाते थे। विशेष टीम द्वारा आरोपी बाबुर अली हेम्ब्राम पिता लखीराम हेम्बाम उम्र 30 वर्ष साकिन लीलावरण पोस्ट चुआपानी थाना बंधुआकुरावा (पुराना थाना बौन्सी) जिला बांका (बिहार), मनोज कुमार राय पिता जर्नादन राय निवासी लीलावरण थाना बंधुआकुरावा (पुराना थाना बौन्सी) जिला बांका (बिहार), रोहित कुमार यादव पिता भगिरोध यादव निवासी झालर थाना बंधुआकुरावा (पुराना थाना बौन्सी) जिला बांका (बिहार), पिंटु कुमार मंडल पिता छोटन मंडल निवासी बगीचा थाना बौन्सी बिहार एवं जितेन्द्र चौधरी पिता देवेन्द्र चौधरी निवासी लीलावरण थाना बंधुआकुरावा (पुराना थाना बौन्सी) जिला बांका (बिहार) को गिरफ्तार कर आरोपियों के कब्जे से 7 नग विभिन्न कंपनियों के मोबाईल, 2 नग लैपटॉप, 1 नग कलर प्रिंटर, 12 नग विभिन्न बैंकों के एटीएम, 2 नग इंडिया पोष्ट पेयमेंट बैंक का कार्ड, 2 नग जियों कंपनी का नया सिम, 4 नग आधार कार्ड, 2 नग मतदाता परिचय पत्र, 2 नग पैनकार्ड सहित 3 लाख 62 हजार रूपये नगद जप्त किया गया।
       उपरोक्त कार्यवाही में उप पुलिस अधीक्षक (प्रशिक्षु) मयंक रणसिंह, निरीक्षक अमित पाटले (दंतेवाड़ा), उप निरीक्षक नरेन्द्र मिश्रा, उप निरीक्षक संजय राजपूत (महासमुंद), उप निरीक्षक शैलेश पाण्डेय (देवघर), सउनि विकास शर्मा (महासमुंद), प्रधान आरक्षक बसंत राव, जी सिरिल, मिनेश धु्रव (महासमुंद), आरक्षक मनीष मानिकपुरी, प्रवीण मेश्राम, राकेश धु्रव, आदित्य सिंह, हेमन्त साहू (सायबर सेल राजनांदगांव), रविन्द्र गुप्ता (दंतेवाड़ा), जुगेश सिंह पैकरा (दंतेवाड़ा), शुभम पाण्डेय (महासमुंद), विरेन्द्र नेताम (महासमुंद) की सराहनीय भूमिका रही।

नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च श्रेणी के स्तर के कोरोनावायरस परीक्षण के तीन केंद्रों का शुभारंभ करेंगे. यह सुविधाएं देश में कोरोनावायरस टेस्टिंग की क्षमता को बढ़ाएंगी और शुरुआती पहचान और उपचार को मजबूत करने में मदद करेंगी, जिससे महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
यह तीन टेस्टिंग सेंटर ICMR नोएडा, मुंबई और कोलकाता में शुरू किए जा रहे हैं. हर केंद्र एक दिन में कोरोना के 10 हजार सैंपल टेस्ट करने की क्षमता रखता है. यह लैब्स कर्मियों के संक्रमित होने की गुंजाइश को भी कम करेंगी. इन लैब्स में कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों की भी जांचें हो सकेंगी. कोरोना महामारी के खत्म होने के बाद यहां पर हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी, डेंगू समेत अन्य बीमारियों की जांचें की जाएंगी.

इन लैब्स के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हिस्सा लेंगे.

गौरतलब है कि भारत समेत दुनियाभर के 180 से ज्यादा देश कोरोनावायरस की जद में हैं. अभी तक 1.60 करोड़ से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. यह वायरस 6 लाख से ज्यादा मरीजों की जान ले चुका है. भारत में भी तेजी से कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार सुबह जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 13,85,522 हो गई है. पिछले 24 घंटों में कोविड -19 के 48,661 नए मामले सामने आए हैं.

इस दौरान 705 कोरोना मरीजों की मौत हुई है. 8,85,577 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं. कुल 32,063 लोगों की मौत हुई है. रिकवरी रेट की बात करें तो यह मामूली बढ़ोतरी के बाद 63.91 प्रतिशत पर पहुंच गया है. पॉजिटिविटी रेट 11 फीसदी है. देश के लगभग सभी राज्यों से कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं. कई राज्य ऐसे भी हैं, जो इस महामारी से मुक्त हो चुके थे लेकिन प्रवासियों के राज्य में दाखिल होने से वह फिर से इस संक्रमण की जद में आ गए.

 

कोलकाता / शौर्यपथ / कोलकाता के जाने-माने साउथ पॉइंट स्कूल की पहचान हालिया तौर पर यह थी कि नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी स्कूल के पूर्व छात्र हैं. अब, स्कूल को अपनी नई उपलब्धि पर उतना ही गर्व है. इस साल 10वीं की बोर्ड परीक्षा में स्कूल के दो छात्रों ने बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं. 18 वर्षीय महादेव बागल के 83.6 प्रतिशत और रोहित मंडी के 74 प्रतिशत अंक आए हैं. हालांकि, साउथ प्वाइंट आमतौर पर इससे बेहतर प्रदर्शन करता है. यहां तक कि इस साल सीबीएसई की परीक्षाओं में स्कूल के टॉपर के 99.4 प्रतिशत अंक आए हैं. तो आखिर स्कूल के लिए बड़ी बात क्या है?
इसका जवाब पाने के लिए आपको कोलकाता से 209 किमी पश्चिम में बेलपहाड़ी जाना होगा. स्कूल के छात्र रोहित मंडी यहीं से आते हैं. जबकि महादेव गिदनी से लगभग 25 किमी दूर के रहने वाले हैं. ये छात्र बंगाल के जनजातीय समूह से संबंध रखते हैं और जंगलमहल में बड़े हुए हैं जो कि एक वक्त में माओवादी गतिविधियों का केंद्र भी था.

रोहित के पिता एक बैंक कर्मचारी हैं जबकि महादेब के पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं. दोनों छात्र 2015 में कक्षा 6 में बेलपहाड़ी एससी स्कूल में साथ पढ़ते थे. इसके बाद दोनों छात्रों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कहने पर रोहित और महादेव और इस पिछड़े इलाके के नौ अन्य छात्रों को कोलकाता भेजा. खास बात यह कि उनमें से कोई भी पहले शहर कभी नहीं गया था. छात्रों का दाखिला साउथ पॉइंट स्कूल में कराया गया जो कि शहर का सबसे नामी स्कूल है.

रोहित ने कहा, "मैं अंग्रेजी में वाक्य नहीं बना सकता." इसलिए मुझे इतिहास और भूगोल पढ़ने में खासी दिक्कत हुई.
महादेव ने कहा,"मैं (अंग्रेजी) शब्दों को समझ सकता था लेकिन बोल नहीं पाता था, यह सच में मुश्किल था." ये दो छात्र साल्ट लेक में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए सरकार द्वारा संचालित छात्रावास में रहे. सरकार ने उनके लिए भाषा और अन्य विषयों के ट्यूशन आयोजित किए. कक्षा 7वीं में छात्रों का खासी मुश्किल पेश आई. लेकिन कक्षा 8 तक उन्हें इंग्लिश आ ही गई.

महादेव के बोर्ड में अंग्रेजी में 91 प्रतिशत और रोहित के 83 प्रतिशत अंक आए हैं. दोनों छात्र कक्षा 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भी साउथ पॉइंट स्कूल से जारी रखेेंगे. दोनों साइंस पढ़ना चाहते हैं. महादेब कंप्यूटर इंजीनियर तो रोहित एक आईएएस अधिकारी बनना चाहता हैं. हालांकि दोनों को साइंस स्ट्रीम में सीट नहीं पाई है और टीचरों ने उन्हें कॉमर्स लेने के लिए कहा है.

कोरोनावायरस महामारी के चलते दोनों अभी तक स्कूल नहीं लौट सके हैं. इसलिए वे ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं. इंटरनेट कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है. रोहित जैसे तैसे इंतजाम कर लेते हैं लेकिन महादेव को मुश्किल पेश आ रही है. महादेब जहां रहते हैं वहां बिजली एक बड़ी समस्या है ,उनके फोन की बैटरी अक्सर खत्म हो जाती है और कनेक्टिविटी बहुत खराब है. कभी-कभी इंटरनेट लिंक खोजने के लिए उन्हें कुछ किलोमीटर तक चलना पड़ता है.

साउथ प्वाइंट स्कूल को दोनों लड़कों पर बहुत गर्व है. प्रिंसिपल रूपा सान्याल भट्टाचार्य ने कहा, "इस बात को लेकर चिंता थी कि लड़के स्कूल में एडजस्ट कैसे करेंगे." महादेव और रोहित स्कूल रोइंग क्लब में शामिल हुए और बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. उनकी कक्षा 11वीं और 12वीं में भी रोइंग के साथ जारी रखने की योजना है. दोनों छात्रों ने कहा,"हमें स्कूल में कोई समस्या नहीं हुई. छात्र और शिक्षक बहुत सहायक थे."

बता दें कि महादेब कविता भी लिखते हैं. रोहित ने कहा, "वे बहुत अच्छी कविता लिखते हैं." रोहित को क्रिकेट खेलना पसंद है. यहां तक ​​कि उन्होंने साल्ट लेक में पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली द्वारा स्थापित क्रिकेट अकादमी में भी दाखिला लिया. लेकिन उसके माता-पिता फीस का भुगतान जारी रखने में असमर्थ थे. तो वह बंद हो गया है. लेकिन दोनों लड़के अपने भविष्य को लेकर उत्साहित हैं.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)