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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / घरों में कैद रहने और लॉकडाउन में सीमित हुई जीवन की स्वतंत्रता ने अच्छी बौद्धिक क्षमता (आईक्यू) के बच्चों को भी बिगड़ैल बना दिया है। समय से काउंसिलिंग और माता-पिता ने ध्यान न दिया तो आने वाले समय में इनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

मनोवैज्ञानिकों की संस्था साइकोलॉजिकल टेस्टिंग एंड काउंसिलिंग सेंटर (पीटीसीसी) ने लॉकडाउन से अब तक आए ऐसे 200 मेधावियों के व्यवहार में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया है जिनका आईक्यू 120 या इसके ऊपर था। इनमें केवल 10 फीसदी खुद अपनी समस्या लेकर आए थे जबकि 90 प्रतिशत मामलों में माता-पिता साथ लाए।

तेजी से बढ़ रही विनाशकारी सोच-
संस्था के निदेशक और सेवानिवृत्त मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एल.के. सिंह के मुताबिक, उच्च बौद्धिक क्षमता वाले 60 फीसदी बच्चों की सोच डेस्ट्रक्टिव (हानिकारक, विनाशकारी) पाई गई। ये अपने माता-पिता का कहना ही नहीं मान रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। दोपहर 12 बजे या बाद तक सोते रहते हैं। इनके पास से मोबाइल कोई नहीं हटा सकता। इसके बाद केवल नेट सर्फिंग करते हैं। गलत चीजें सीखते हैं।

इस तरह संभव है सुधार-
माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों के बीच ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। इनकी मनोरंजन में हिस्सेदारी बढ़ाएं। वीडियो गेम्स की जगह सीरियल देखने को कहें। इनका उत्साहवर्धन करते रहें। कोरोना से डराएं नहीं, बल्कि कहें कि जल्द खत्म हो जाएगा। दोस्तों के पास जाने की छूट दें। दोस्तों को आने से न रोकें। इन पर निगाह रखें। खुद रिश्तेदारों या परिचितों के यहां साथ लेकर जाएं। मौका मिलने पर मोबाइल की हिस्ट्री में झांकते रहें। यदि बच्चा अकेलेपन में जीना जा रहा है तो यह एक संकेत है। इसे भांपते ही मनोवैज्ञानिकों के पास ले जाएं और उसकी काउंसिलिंग कराएं।

फैक्टस-
- 200 बच्चों पर मनोवैज्ञानिक अध्ययन, आईक्यू लेवल 120 पार मिला।
-20 फीसदी बच्चों में मानसिक तनाव ज्यादा पाया गया।
-10 फीसदी ने इस दौरान अपने को और बेहतर बनाया।
-10 फीसदी में सुधार की उम्मीद कम, अपने मन की ही करेंगे।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ /पेड़-पौधों में देवताओं का वास माना गया है। घर में पौधे रोपने से कई तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगाए गए पौधे भी हमारे जीवन पर प्रभाव डालते हैं। आइए जानते हैं कि किन पौधों को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

घर की छत पर गमले में तुलसी का पौधा लगाने से वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है वहां भगवान विष्णु का वास होता है। घर में मनी प्लांट लगाना शुभ होता है। इसे रोपने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। रसोई घर के अंदर गमलों में पुदीना, धनिया, पालक और हरी मिर्च के पौधे लगाए जा सकते हैं। हल्दी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। चंपा, चमेली, रात की रानी आदि को घर के बाहर लगाएं। घर में नकली पौधे नहीं लगाने चाहिए। घर की किसी दीवार पर पीपल उग आए तो उसे पूजा कर हटाते हुए गमले में लगा देना चाहिए। पीपल के पौधे की जड़ काटने की गलती न करें। पौधे की पूजा करने के बाद इसे गमले में लगाकर किसी मंदिर में रख आएं। घर में कांटेदार पौधा नहीं लगाना चाहिए। गुलाब जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं लेकिन इसे छत पर रखें। केले का पौधा घर में लगाने से कई समस्याएं दूर होती हैं। घर के मुख्य द्वार पर केले के पौधे को न लगाएं। घर के पिछले हिस्से में लगाएं। केले के पौधे के आसपास साफ-सफाई रखें। केले के तने में लाल धागा बांधकर रखें। ऐसे पौधे जिनको काटने या छीलने पर सफेद द्रव्य निकलते हैं उनसे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। इस प्रकार के पौधे घर में नहीं लगाने चाहिए।

 

धर्म संसार /शौर्यपथ / शास्त्रों में बताया गया है कि भक्ति-पूजा के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है। यानी ईश्वर का स्मरण या उनकी पूजा अराधना जब चाहे की जा सकती है। हालांकि ऐसी मान्यता है कि भगवान की पूजा के लिए समय का ख्याल करना बेहद जरूरी होता है। खास तौर पर जब हम रात में भगवान की पूजा करते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। रात में पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखने से पूजा फलदायी होती है। जानिए रात में की गई पूजा में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।

शंख बजाना सही या गलत

ऐसी मान्यता है कि रात में पूजा के समय शंख नहीं बजाना चाहिए। माना जाता है कि सूरज अस्त होने के बाद देवी-देवता सोने के लिए चले जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद शंख बजाने से निद्रा में बाधा आती है। इसलिए रात में पूजा के दौरान शंख बजाना अशुभ माना गया है। हालांकि दीवाली और जन्माष्टमी जैसी कुछ अवसरों पर शंख बजाना अशुभ नहीं माना गया है।

न करें सूर्य भगवान की पूजा

सूर्य भगवान को दिन का देवता माना जाता है। इसलिए रात्रि की पूजा में भगवान सूर्य की पूजा करना वर्जित माना गया है।


तुलसी का प्रयोग

ऐसी मान्यता है कि तुलसी के पत्ते के बिना पूजा अधूरी होती है। लेकिन रात में कभी भी तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। माना जाता है कि तुलसी माता नाराज हो जाती हैं। इसलिए सूर्यास्त से पहले ही तुलसी का पत्ता तोड़कर रख लेना चाहिए।


दूर्वा का इस्तेमाल

हिंदू पुराणों के मुताबिक, रात में वनस्पतियों को तोड़ना अशुभ होता है। लेकिन गणेश जी को दूर्वा प्रिय है। ऐसे में सूर्यास्त से पहले दूर्वा को तोड़कर रख लेना चाहिए।

 

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जीवन में सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति के भीतर मेहनत और लगन के साथ आत्मविश्वास का गुण भी मौजूद होना बेहद जरूरी होता है। आत्मविश्वास के बिना व्यक्ति का जीवन ऐसे फूल की तरह होता है जिसमें खुशबू नहीं होती है। दुनियाभर में मौजूद सभी सफल व्यक्तियों में आत्मविश्वास का यह गुण देखा जा सकता है। आइए जानते हैं सफलता पाने और आत्मविश्वास बढ़ाने के क्या हैं वो 5 सक्सेस मंत्र।

नकारात्मक विचारों से रहें दूर-
नकारात्मक विचार व्यक्ति को हमेशा आगे बढ़ने से रोकते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा खुद पर विश्वास रखते हुए चुनौती भरे कामों को भी करने के लिए आगे बढ़ें। ऐसे लोग और विचार जो मन में किसी भी तरह की नेगेटिविटी को जन्म देते हैं उनसे दूर रहें।

अपने हुनर को पहचानें-
खुद पर विश्वास और अपने हुनर को पहचानते हुए जीवन में मिलने वाली हर चुनौती को स्वीकार करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते जाएं।

कंफर्ट जोन से निकलें बाहर-
अक्सर जब व्यक्ति को कोई नया काम सौंप दिया जाता है तो वो थोड़ा घबरा जाता है। लेकिन आप चुनौतियां स्वीकार करना सीखें और जीवन में आगे बढ़ें। जैसे ही आप कुछ नया करना शुरू करेंगे आपके अंदर आत्मविश्वास दिखने लगेगा।

फैसले लेने में ज्यादा देर न करें-
आज के समय में जब जिंदगी बेहद व्यस्त हो गई है तो लोगों को अच्छे अवसरों के लिए सोचने समझने के लिए मौके और समय बेहद कम मिलता है। इसलिए सफलता पाने के लिए जल्द से जल्द सही फैसले लेने की क्षमता को खुद के भीतर विकसित करें। जब आप गंभीर फैसले लेने लगेंगे तो वहीं से आप में आत्मविश्वास आना भी शुरू हो जाएगा।

आत्मविश्वासी लोगों को बनाएं अपना साथी-
अगर आपने ऐसे लोगों को अपना दोस्त बनाया हुआ है जिनमें आत्मविश्वासी नहीं हैं तो आप जीवन में कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं। सफलता पाने के लिए ऐसे लोगों से मिलना शुरू करें जो आपको अपने कामों से प्रभावित करने वाले हों।

 

शौर्यपथ / सपने तो हर कोई देखता है। चाहे वह खुली आंखों से हो या फिर नींद में। कभी-कभी कोई सपना सुहाना होता है, जो अपनी अच्छी याद छोड़ जाता है। वहीं कुछ सपने ऐसे होते हैं जो कुछ बुरी यादें छोड़ जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर सपने का कोई न कोई अर्थ जरूर होता है। कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें स्वप्नशास्त्र में शुभ माना गया है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सपनों के बारे में और उनका अर्थ-

1. कमल का फूल, हाथी, बंदर, गाय और हंस का स्वप्न शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस तरह के सपने धन संपत्ति या संतान का सुख के सूचक हैं।

2. अगर किसी व्यक्ति की मौत का सपना दिखाई दे, तो समझना चाहिए कि उस शख्स पर आया हुआ कोई संकट टल गया है। इस तरह का स्वप्न आयु वृद्धि का सूचक भी माना गया है।

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3. सपने में खुद को घोड़े पर चढ़ते हुए देखना शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस तरह के स्वप्न व्यापार या नौकरी में लाभ होने का संकेत मिलता है।

4. स्वप्न में खुद का चेहरा शीशे में देखना शुभ माना गया है। माना जाता है कि आपकी लव लाइफ में प्यार और मिठास और बढ़ती है। अगर इस तरह का सपना कोई लड़की देखती है, तो समझना चाहिए कि उसे जल्द ही जीवनसाथी मिलने वाला है।

5. सपने में काले बादल के साथ बारिश दिखाई देना शुभ माना गया है। माना जाता है कि आपने जिन चीजों में निवेश किया है, उसमें लाभ होने वाला है।

6. सपने में खान-पान का देखना भी शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस तरह से स्वप्न समृद्धि और धन का संकेत देते हैं। इसके साथ ही यह स्थान परिवर्तन का भी सूचक है।

 

मनोरंजन / शौर्यपथ / कन्नड़ सुपरस्टार यश की धमाकेदार फिल्म केजीएफ चैप्टर 2 को लेकर जब से ऐलान हुआ था इस फिल्म के फैन अपनी नजरें गड़ाए बैठे हैं कि इस फिल्म की रिलीज डेट का फाईनल ऐलान कब होगा। हालांकि इसी बीच फिल्म के मेकर्स ने एक अपने फैंस को एक बड़ी खुशखबरी दी है। जी हां! रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर के एक्सेल एंटरटेनमेंट सहित निर्माताओं ने घोषणा करते हुए कहा है कि एक्टर संजय दत्त के जन्मदिन पर यानि 29 जुलाई, 2020 को फिल्म के विलेन 'अधीरा' का लुक रिलीज किया जाएगा। इस घोषणा के साथ साझा किए गए पोस्टर में "29 जुलाई को सुबह 10 बजे क्रूरता का अनावरण" लिखा गया है।

गौरतलब है कि इस फिल्म में सुपरस्टार संजय दत्त विलेन के किरदार में नजर आने वाले हैं जिनका नाम अधीरा है। केजीएफ में इस नाम को कई बार लिया गया था ,लेकिन चेहरा नहीं दिखाया गया था। बता दें कि हाल ही में, कुछ समय पहले अधीरा के लुक का स्केच खूब वायरल हुआ था और इसी के साथ प्रशंसकों का उत्साह अपने चरम पर था। वहीं निर्माताओं ने एक साल पहले केजीएफ चैप्टर 2 का पहला पोस्टर लॉन्च किया था, जिसमें रहस्यमयी अधीरा से परिचित करवाया गया था। अब फिल्म का पोस्टर सामने आते ही संजय दत्त के फैंस ट्विटर पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं और देखते देखते संजय दत्त का नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

आपको बता दें कि यश स्टारर इस फिल्म ने रिलीज होकर तगड़ा धमाका किया था और लोगों को फिल्म की कहानी और तगड़े एक्शन से चौंका डाला था। इस फिल्म के अगले पार्ट को लेकर काफी ज्यादा उत्सुकता इसलिए भी है कि फिल्म में कई बदलाव देखने को मिले हैं जो कि दमदार साबित होने वाले हैं। इस फिल्म में सुपरस्टार संजय दत्त और रवीना टंडन भी हैं। फिल्म में संजय दत्त विलेन का रोल प्ले करेंगे तो वहीं रवीना एक राजनेता का किरदार निभाएंगी। रवीना का रोल काफी धमाकेदार होने वाला है। इस फिल्म का निर्देशन प्रशांत नील ने किया है और उनके निर्देशन की काफी ज्यादा तारीफ पहली फिल्म में हो चुकी है।यह फिल्म कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी में रिलीज होगी।

 

मनोरंजन / शौर्यपथ / अमिताभ बच्चन, अभिषेक, ऐश्वर्या और आराध्या नानावटी अस्पताल में कोरोना का इलाज करा रहे हैं। हालांकि इस बीच भी बिग बी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और फैन्स के साथ अपनी बातें शेयर करते रहते हैं। अब हाल ही में बिग बी ने अपनी ऐसी फोटो शेयर की है जिसे देखकर आपके भी चेहरे पर स्माइल आ जाएगी।

बिग बी ने अपनी एक फोटो शेयर की है जिस पर लाल लिपस्टिक से किस के निशान बने हुए हैं। इस फोटो को शेयर करने के साथ बिग बी का कैप्शन काफी अलग है। उन्होंने लिखा, 'दुश्मन बनाने के लिए जरूरी नही लड़ा जाए, आप थोड़े कामयाब हो जाओ तो वो खैरात में मिलेंगे'।

इससे पहले बिग बी ने बताया था अस्पताल में अपने ट्रीटमेंट का एक्सपीरियंस

बिग बी ने ब्लॉग लिखा था जिसमें उन्होंने बताया कि कोरोना का असर मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। बिग बी ने लिखा था, रात के अंधेरे और एक ठंडे कमरे में मैं गाता हूं, सोने की कोशिश में आंखें बंद करता हूं। यहां आपके पास कोई नहीं होता। कई हफ्तों से किसी को नहीं देखा, जो डॉक्टर्स आपका इलाज कर रहे होते हैं वह भी पीपीई किट में होते हैं।

बिग बी ने आगे लिखा था कि 'क्या इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है? साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक इसका असर पड़ता है। यहां से निकलने के बाद भी मरीज डरे हुए रहते हैं। वो पब्लिक प्लेस पर जाने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि लोग अब उनके साथ अलग तरह से बिहेव करेंगे। ऐसा बिहेव करेंगे जैसे आप अपने साथ बीमारी लेकर चल रहे हैं। इसे परियाह सिंड्रोम (छुआछूत का डर) कहते हैं। इससे लोग डिप्रेशन और अकेलेपन में जा रहे हैं।'

 

*मेयर ने सीएम को लिखा पत्र राजस्व हानि रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग* भिलाई। शौर्यपथ । भिलाई इस्पात संयत्र में अधिकारियों की सांठगांठ से नीजी वाहन व सैकड़ों कंडम वाहन चल रहे हैं। इनमें ट्रेवल एजेंसी द्वारा अधिकारियों की सेवा में लगाए गए वाहनों से लेकर भारी वाहन भी शामिल हैं। संयंत्र में ऐसे कई वाहन चल रहे हैं जिनकी न तो फिटनेस सही है और न ही वे मानकों पर खरे उतरते हैं। केवल अधिकारियों की मिलीभगत से इन वाहनों का संचालन हो रहा है। इससे छत्तीसगढ़ सरकार को वर्षों से भारी मात्रा में राजस्व की हानि हो रही है। इस मामले में भिलाई नगर विधायक व महापौर देवेन्द्र यादव ने सीएम भूपेश बघेल को पत्र लिखकर राजस्व हानि को रोकने ऐसे अधिकारियों व कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मेयर देवेन्द्र यादव ने पत्र में लिखा है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में विभिन्न टूर एवं ट्रेवल्स के माध्यम से संचालित वाहन टैक्सी परमिट के स्थान पर संयंत्र के उच्च अधिकारियोंं की सांठगांठ से नीजी वाहन संलग्र कर संचालित किए जा रहे हैं। वहीं संयंत्र के भीतर काफी संख्या में भारी वाहन ट्रक, डंफर, जेसीबी आदि बिना पंजीयन व फिटनेस के लंबे समय से अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित हो रहे हैं। इससे संयंत्र के भीतर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। साथ ही वाहनों का परमिट व पंजीयन शुल्क राज्य सरकार को नहीं मिल पा रहा है। जिससे सरकार को वर्षों से राजस्व की हानि हो रही है। विधायक व महापौर देवेन्द्र यादव ने पत्र के माध्यम से सीएम भूपेश बघेल से कहा है कि भिलाई इस्पात संयंत्र में चल रहे वाहनों की जांच कराई जाए। राजस्व हानि को लेकर स्थानीय प्रशासन से जांच कराने के बाद संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

नजरिया /शौर्यपथ / ट्वंटी-20 विश्व कप के स्थगित होते ही आईपीएल के 13वें सत्र के आयोजन की तैयारियों में तेजी आ गई है। आईपीएल के चेयरमैन बृजेश पटेल ने इसे 19 सितंबर से 8 नवंबर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आयोजित करने की घोषणा कर दी है। हालांकि, इस आयोजन के लिए सरकार की अनुमति का इंतजार है, पर जिस तरह से तैयारियां चल रही हैं, उनसे लगता है कि बीसीसीआई को अनुमति मिल जाने का पूरा भरोसा है। यह सही है कि यूएई में 2014 में आईपीएल के कुछ मैचों का आयोजन हो चुका है, पर इस बार कोविड-19 के कारण यह आसान नहीं होगा। हां, इतना जरूर है कि इस बार का आयोजन आईपीएल के पिछले संस्करणों से भिन्न होगा। बीसीसीआई को मैच से ज्यादा इंतजाम स्टेडियम के बाहर करने होंगे। फें्रचाइजियों को भी इस बार ज्यादा खिलाड़ी साथ रखने होंगे, क्योंकि किसी खिलाड़ी के कोरोना पॉजिटिव आ जाने पर उसे आइसोलेशन में भेजना जरूरी हो जाएगा। फिर बार-बार टेस्ट होने से खिलाड़ियों के ऊपर भी मानसिक दबाव बना रहेगा। मगर इतना जरूर है कि इंग्लैंड जैसी व्यवस्था करके खिलाड़ियों को दबाव मुक्त किया जा सकता है, पर इसके लिए प्रॉटोकोल को सख्ती से लागू करना पड़ेगा।
आईपीएल क्रिकेट और मनोरंजन का मिला-जुला रूप है। इसे देखने के लिए पहुंचने वाले हजारों दर्शकों में तमाम ऐसे होते हैं, जो क्रिकेट की बजाय मैच के माहौल का लुत्फ उठाने जाते हैं। अव्वल तो यूएई में भारत जैसा माहौल मिलना संभव नहीं है, फिर यदि वहां की सरकार दर्शकों को स्टेडियम में आने की अनुमति दे देती है, तब भी सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाने से स्टेडियम में एक चौथाई दर्शक ही आ सकेंगे। बीसीसीआई के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम होगा, खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, टीम प्रबंधन से जुड़े लोगों को ठहरने के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया कराना। इस संबंध में ईसीबी ने इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच टेस्ट सीरीज के दौरान बहुत अच्छा काम किया है, मगर ईसीबी जैसा जैव सुरक्षित माहौल यूएई में बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इंग्लैंड में सीरीज के दौरान दोनों टीमों को आयोजन स्थल पर ही ठहराया गया, जबकि आईपीएल में आठ टीमों को एक जगह ठहराना संभव नहीं है।
आईपीएल शुरू होने से पहले बीसीसीआई को एक बड़ा काम दुनिया भर से क्रिकेटरों, सपोर्ट स्टाफ, कमेंटेटरों व अन्य अधिकारियों को यूएई पहुंचाने का करना होगा। अभी ज्यादातर देशों में उड़ान की शुरुआत हुई नहीं है। बताया जा रहा है कि फ्रेंचाइजियों से निजी विमानों की व्यवस्था करने को कहा गया है। यही नहीं, इन सभी को लाने से पहले 72 घंटों में दो बार कोविड टेस्ट भी करना होगा। कोविड टेस्ट निगेटिव आने पर ही उन्हें विमान में चढ़ने की अनुमति मिलेगी। हां, इतना जरूर है कि यूएई में कोविड टेस्ट निगेटिव लेकर आने वालों को क्वारंटीन में नहीं रहना पडे़गा। हालांकि, कुछ फ्रेंचाइजी मालिक तो आयोजन से जुड़ने वालों, खासकर खिलाड़ियों के रोजाना कोविड टेस्ट का सुझाव दे रहे हैं। लिहाजा यह देखने वाली बात होगी कि बीसीसीआई इस संबंध में क्या दिशा-निर्देश जारी करता है?
आईपीएल बीसीसीआई ही नहीं, दुनिया भर के क्रिकेटरों व पूर्व क्रिकेटरों के लिए क्या मायने रखता है, यह कोई छिपी बात नहीं है। यह अच्छी-खासी कमाई का साधन है। यही वजह है कि ज्यादातर क्रिकेटर ट्वंटी-20 विश्व कप की बजाय आईपीएल के आयोजन के पक्षधर थे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इसे मार्च में आयोजित होना था और चूंकि बीसीसीआई प्रायोजकों से करीब आधी रकम ले भी चुका है, इसलिए वह हर हाल में इस आयोजन के पक्ष में है। यदि यह आयोजन नहीं होता, तो उसे यह रकम लौटानी पड़ सकती थी। वैसे, फ्रेंचाइजी को मौजूदा माहौल में प्रायोजक तलाशने में दिक्कत हो सकती है, पर इंग्लैंड-वेस्ट इंडीज टेस्ट सीरीज को टीवी दर्शकों ने जिस तरह से हाथों-हाथ लिया है, उससे लगता नहीं है कि आईपीएल देखने वालों में कोई कमी आएगी।
आईपीएल का आयोजन यदि सफलतापूर्वक हुआ, तो अन्य खेलों के लीग आयोजनों की भी मांग तेज होगी। क्रिकेटर ही नहीं, आज अन्य खेलों के खिलाड़ी भी बहुत उम्मीद लगाए बैठे हैं। खेल आयोजन बढ़े, तो महामारी के समय लोगों का मनोबल और उत्साह भी बढ़ेगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार

 

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना के समय भी अंतरिक्ष विज्ञान विकास का न रुकना न केवल सुखद, बल्कि स्वागतयोग्य भी है। विशेष रूप से मंगल अभियान की दिशा में जो प्रगति हुई है, वह बहुत प्रेरित करती है। अव्वल तो 19 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात दुनिया का पहला मुस्लिम देश हो गया, जिसने मंगल की ओर अपना यान भेजा है, दूसरी ओर, 23 जुलाई को चीन ने भी उधर अपना यान रवाना किया है। अब एशिया में भारत सहित तीन देश हो गए, जो मंगल की खोज में आगे बढे़ हैं। 1960 के बाद से करीब 60 अभियान मंगल की ओर गए हैं, लेकिन उनमें से 26 को ही थोड़ी या ज्यादा कामयाबी मिली है। इसलिए मंगल पर किसी खोज के लिए चलाया जाने वाला कोई भी अभियान पूरी दुनिया के लिए ही बहुत महत्व रखता है।
वैसे चीन ने रूस के साथ मिलकर एक प्रयास 2011 में भी किया था, लेकिन वह यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल पाया था। इसके बाद भारत ने 2014 में अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में यान स्थापित कर इतिहास रच दिया। ध्यान रहे, तब चीन ने भी भारत की तारीफ की थी। फिलहाल चीन के अभियान की सफलता की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उसने न केवल मंगल की कक्षा में घूमने वाला यान ऑर्बिटर रवाना किया है, बल्कि साथ में लैंडर और रोवर भी भेजे हैं। यूएई और चीन, दोनों के ही यान आगामी फरवरी में मंगल की कक्षा में पहुंच जाएंगे। उम्मीद करनी चाहिए कि दोनों को सफलता मिले। अभी तक दुनिया में अमेरिका, रूस, यूरोपीय यूनियन और भारत को ही मंगल अभियान में सफलता मिली है। इसमें भी सबसे खास भारत की सफलता है, पहली ही बार में कामयाब भारत का यान अभी भी मंगल की परिक्रमा कर रहा है। चीन ने इस मिशन को तियानवेन नाम दिया है, यह दो सदी पुरानी एक कविता के शीर्षक पर आधारित है, जिसका अर्थ है, जन्नत से सवाल। वाकई, जब हम अंतरिक्ष में किसी भी अभियान में जुटते हैं, तब हमारी जिज्ञासा दूसरी दुनिया या जन्नत की खोज से जुड़ जाती है। ऐसी खोज सकारात्मक होती है और हमारे दिलो-दिमाग को सपने और खुशी देती है, जिसकी जरूरत आज कोरोना काल में बहुत ज्यादा है।
अभी अमेरिका, यूरोप और भारत के करीब आठ अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर हैं या उसकी परिक्रमा कर रहे हैं, चीन और यूएई के यानों को अगर कामयाबी मिली, तो न केवल मुस्लिम देशों, बल्कि चीन को भी एक सकारात्मक दिशा मिलेगी। अमेरिका मंगल पर पहले भी रोवर स्थापित कर चुका है और जल्दी ही ज्यादा बड़ा रोवर भेजने वाला है। अपने अभियान के शुरू होने के बाद चीन ने जिस भावना का प्रदर्शन किया है, उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। चीन के एक वैज्ञानिक ने कहा है, ‘यह चीनी अभियान एक वैज्ञानिक पहल है, किसी के साथ प्रतिस्पद्र्धा के लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे से सहयोग के लिए है’। चीन मंगल ग्रह पर पानी और बर्फ के संकेतों की खोज करेगा, उसके रोवर में 13 वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं। चीन का यान उत्तरी गोलाद्र्ध में एक मैदान, यूटोपिया प्लैनिटिया में उतरने की कोशिश करेगा। वहां लैंडर की मदद से रोवर तैनात करेगा। मंगल पर दक्षिणी यूटोपिया प्लैनिटिया में कोई भी खोज इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वैज्ञानिकों को लगता है, मंगल के इस हिस्से पर कभी महासागर था।

 

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