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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

सेहत / शौर्यपथ / संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है.
संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है. संतरा आपके दिल को स्वस्थ्य रखता है, ये आपकी आंखों को भी सुरक्षित रखता है और संतरे एक खासियत जिसकी हर किसी को जरूरत है. इम्यूनिटी बढ़ाने में संतरा फायदेमंद हो सकता है. संतरा कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी परेशानियों को दूर करने में भी लाभदायक माना जाता है. संतरे के फायदे कई हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होता है.संतरे के ज्यादा सेवन से संतरे के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. अगर आप इम्यून सिस्टम को बूस्ट करना चाहते हैं तो आप संतरे का सेवन बेझिझक कर सकते हैं लेकिन संतरा खाने का भी एक समय होता है जिसमें इसका सेवन करने की सलाह दी जाता है. यहां हम बता रहे हैं संतरे के फायदे और नुकसान के साथ संतरा किस समय खाना नुकसानदायक हो सकता है. संतरे को खाने का क्या है सही समय...
संतरे का सेवन कर पाएं ये कमाल के फायदे 7
1. इम्यूनिटी बढ़ाने में है मददगार
संतरे में विटामिन सी की मात्रा बहुत अच्छी होती है. संतरा विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है. विटामिन सी एक तरह से एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है और शरीर में डैमेज सेल्स को रिपेयर करने के साथ-साथ फ्री रेडिकल्स से लड़ता है. संतरा शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती भी देता है. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप संतरे का सेवन कर सकते हैं.
2. कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है संतरा
संतरे में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है, बल्कि इसके सेवन से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद मिल सकती है. संतरे में मौजूद विटामिन सी आपके शरीर में फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रिलाइज कर कोलेस्ट्रॉल को ऑक्सिडाइज करता है, जिससे पहले से जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम हो सकता है.
3. डायबिटीज में फायदेमंद
संतरा डायबिटीज में फायदेमंद माना जाता है. संतरे में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है. फाइबर ब्लड शुगर लेवल को बढऩे से रोक सकता है. अगर संतरे को साबूत खाया जाए तो यह डायबिटीज में मदद कर सकता है अगर आप इसका जूस पिएंगे तो यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है क्योंकि जूस निकालने पर इसका फाइबर कम हो सकता है.
4. दिल की बीमारियों को रखे दूर
अगर आप रोज एक संतरा खाते हैं, तो यह दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है. इसका कारण यह है कि संतरे में फ्लैवोनॉइड्स होते हैं, जो आर्टरीज के ब्लॉकेज को खोलते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में मदद कर सकते हैं.
5. कब्ज से राहत दिलाने में फायदेमंद
संतरे में घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं. यह आपके पेट को भी भरा रखता है और आंतों की सफाई करने में भी मददगार हो सकते हैं. संतरा खाने से आपकी कब्ज की समस्या दूर हो सकती है. संतरा पेट दर्द और फूड पॉयजनिंग को भी रोक सकता है.
6. संतरा स्किन के लिए भी असरदार
संतरा खाने से आपकी स्किन पर ग्लो आ सकता है. संतरे में बीटा कैरोटीन होता है, जो सेल्स को डैमेज से बचाने के लिए एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है. संतरा झुर्रियां, डार्क सर्कल्स और बुढ़ापे के लक्षणों को दूर करने में फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा बीटा कैरोटीन आपकी आंखों की रोशनी को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार हो सकता है.
ज्यादा संतरा खाने से हो सकते हैं ये नुकसान 7
1. पाचन की समस्या हो सकती है.
2. ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल.
3. वजन बढऩे की हो सकती है समस्या
4. दांतों से संबंधित हो सकती है परेशानी
5. ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा
इस समय न खाएं संतरा
संतरे में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होती है. इसके साथ ही इसमें विटामिन ए, बी कॉप्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमिनो एसिड के अलावा भी कई फायदेमंद तत्व होते हैं. हालांकि इन फायदों के लिए इसे सही समय पर ही खाना होता है. भूलकर भी संतरे को एकदम सुबह और रात में न खाएं. कोशिश करें संतरे को हमेशा दिन में खाएं. संतरे का खाने के तुरंत बाद सेवन न करें. खाने से एक घंटा पहले या खाने के एक घंटे बाद ही संतरे का सेवन करना चाहिए.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए जि़म्मेदारी का दावा नहीं करता है.

धर्म संसार / शौर्यपथ / सावन का महीना खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। 3 अगस्त को सावन के आखिरी सोमवार का व्रत रखा जाएगा। सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में सच्चे दिल से की गई पूजा का फल और आशीर्वाद भक्तों को महादेव जरूर देते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, सोमवार का दिन भगवान शिव की अराधना का होता है। माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।

इन बातों का जरूर रखें ध्यान-

1. ऐसी मान्यता है कि सावन में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसलिए भगवान शिव के उपासकों को सावन महीने में बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए।

2. कहा जाता है कि सावन महीने में पूजा में तुलसी के पत्तों और केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि भगवान शिव को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करने से पूजा का फल मिलता है।

3. कहते हैं कि भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग को कभी हल्दी और कुमकुम नहीं लगाना चाहिए। कुमकुम को लेकर कहा जाता है कि सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए कुमकुम लगाती हैं। जबकि भगवान शिव को संहारक के रूप में जाना जाता है। ऐसे में पूजा के दौरान कुमकुम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

4. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। हालांकि भगवान शिव की प्रतिमा पर नारियल का फल अर्पित करना शुभ माना गया है।

5. शिवलिंक का अभिषेक करते समय कास्य और पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करना शुभ माना गया है।

6. भगवान शिव को अर्पित की जाने वाले सभी चीजें शुद्ध और निर्मल होनी चाहिए।

सेहत / शौर्यपथ / संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है.
संतरा एक आम फल हो सकता है लेकिन संतरे के स्वास्थ्य लाभ आम नहीं होते हैं. संतरा का सेवन कर आप कमाल के फायदे ले सकते हैं. संतरे में काफी मात्रा में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है. संतरे में फैट, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा न के बराबर होती है. संतरा आपके दिल को स्वस्थ्य रखता है, ये आपकी आंखों को भी सुरक्षित रखता है और संतरे एक खासियत जिसकी हर किसी को जरूरत है. इम्यूनिटी बढ़ाने में संतरा फायदेमंद हो सकता है. संतरा कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी परेशानियों को दूर करने में भी लाभदायक माना जाता है. संतरे के फायदे कई हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होता है.संतरे के ज्यादा सेवन से संतरे के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. अगर आप इम्यून सिस्टम को बूस्ट करना चाहते हैं तो आप संतरे का सेवन बेझिझक कर सकते हैं लेकिन संतरा खाने का भी एक समय होता है जिसमें इसका सेवन करने की सलाह दी जाता है. यहां हम बता रहे हैं संतरे के फायदे और नुकसान के साथ संतरा किस समय खाना नुकसानदायक हो सकता है. संतरे को खाने का क्या है सही समय...
संतरे का सेवन कर पाएं ये कमाल के फायदे |


1. इम्यूनिटी बढ़ाने में है मददगार
संतरे में विटामिन सी की मात्रा बहुत अच्छी होती है. संतरा विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है. विटामिन सी एक तरह से एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है और शरीर में डैमेज सेल्स को रिपेयर करने के साथ-साथ फ्री रेडिकल्स से लड़ता है. संतरा शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती भी देता है. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आप संतरे का सेवन कर सकते हैं.
2. कोलेस्ट्रॉल में फायदेमंद है संतरा
संतरे में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है, बल्कि इसके सेवन से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद मिल सकती है. संतरे में मौजूद विटामिन सी आपके शरीर में फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रिलाइज कर कोलेस्ट्रॉल को ऑक्सिडाइज करता है, जिससे पहले से जमा हुआ कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम हो सकता है.
3. डायबिटीज में फायदेमंद
संतरा डायबिटीज में फायदेमंद माना जाता है. संतरे में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है. फाइबर ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोक सकता है. अगर संतरे को साबूत खाया जाए तो यह डायबिटीज में मदद कर सकता है अगर आप इसका जूस पिएंगे तो यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है क्योंकि जूस निकालने पर इसका फाइबर कम हो सकता है.
4. दिल की बीमारियों को रखे दूर
अगर आप रोज एक संतरा खाते हैं, तो यह दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है. इसका कारण यह है कि संतरे में फ्लैवोनॉइड्स होते हैं, जो आर्टरीज के ब्लॉकेज को खोलते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में मदद कर सकते हैं.
5. कब्ज से राहत दिलाने में फायदेमंद
संतरे में घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं. यह आपके पेट को भी भरा रखता है और आंतों की सफाई करने में भी मददगार हो सकते हैं. संतरा खाने से आपकी कब्ज की समस्या दूर हो सकती है. संतरा पेट दर्द और फूड पॉयजनिंग को भी रोक सकता है.

6. संतरा स्किन के लिए भी असरदार
संतरा खाने से आपकी स्किन पर ग्लो आ सकता है. संतरे में बीटा कैरोटीन होता है, जो सेल्स को डैमेज से बचाने के लिए एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है. संतरा झुर्रियां, डार्क सर्कल्स और बुढ़ापे के लक्षणों को दूर करने में फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा बीटा कैरोटीन आपकी आंखों की रोशनी को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार हो सकता है.
ज्यादा संतरा खाने से हो सकते हैं ये नुकसान |
1. पाचन की समस्या हो सकती है.

2. ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है ब्लड शुगर लेवल.

3. वजन बढ़ने की हो सकती है समस्या

4. दांतों से संबंधित हो सकती है परेशानी

5. ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा


इस समय न खाएं संतरा
संतरे में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होती है. इसके साथ ही इसमें विटामिन ए, बी कॉप्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमिनो एसिड के अलावा भी कई फायदेमंद तत्व होते हैं. हालांकि इन फायदों के लिए इसे सही समय पर ही खाना होता है. भूलकर भी संतरे को एकदम सुबह और रात में न खाएं. कोशिश करें संतरे को हमेशा दिन में खाएं. संतरे का खाने के तुरंत बाद सेवन न करें. खाने से एक घंटा पहले या खाने के एक घंटे बाद ही संतरे का सेवन करना चाहिए.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

गेजेट्स / शौर्यपथ / WhatsApp पर बेहतरीन फीचर्स की भरमार है, लेकिन एक चीज़ है जिसको लेकर व्हाट्सऐप हमें निराश करता है वो है मैसेज को शेड्यूल करने का फीचर। जी हां, व्हाट्सऐप पर अब तक मैसेज शेड्यूल करने का तरीका पेश नहीं किया गया है, जिस वजह से हमें कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक उदाहरण यह ही ले लीजिए अपने दोस्त को सबसे पहले बर्थडे मैसेज भेजने के लिए आपको रात के 12 बजे तक जागना पड़ता है, अगर व्हाट्सऐप पर शेड्यूलिंग मैसेज का फीचर होता तो रात के 12 बजे तक जागने की परेशानी न झेलनी पड़ती। भले ही व्हाट्सऐप पर इस फीचर को अब तक न जोड़ा गया हो, लेकिन आज हम आपकी इस परेशानी को दूर करने का तरीका जरूर बताएंगे। एंड्रॉयड व आइफोन स्मार्टफोन पर व्हाट्सऐप मैसेज शेड्यूल करने के कई दूसरे तरीके मौजूद हैं। तो चलिए जानते हैं क्या है वो तरीका जिनकी मदद से बिना व्हाट्सऐप खोले ही व्हाट्सऐप मैसेज भेजा जा सकता है।
जैसा कि हमने पहले बताया, WhatsApp ने मैसेज शेड्यूल करने का कोई ऑफिशियल फीचर पेश नहीं किया है। हालांकि, अगर आप एंड्रॉयड डिवाइस इस्तेमाल करते हैं, तो आप व्हाट्सऐप पर मैसेज को कई थर्ड-पार्टी ऐप की सहायता से शेड्यूल कर सकते हैं। जी हां, कई थर्ड-पार्टी ऐप्स मौजूद हैं, जो आपकी इस काम में सहायता कर सकते हैं, लेकिन एक ऐप है SKEDit जो अपना काम बेहतर तरीके से करता है। तो चलिए जानते हैं कैसे इस ऐप की मदद से करें व्हाट्सऐप मैजेस शेड्यूल-

1. सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर SKEDit डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें।

2. ओपन करने के बाद आपको सबसे पहले इसमें साइन-इन करना होगा।

3. साइन-इन करने के बाद मैन मैन्यू में से WhatsApp पर टैप करें।

4. इसके बाद ऐप आपसे कुछ परमिशन मांगेगा, उसे Grant कर दें। अब Enable Accessibility पर टैप करें फिर SKEDit पर जाएं और टॉगल को ऑन कर दें। आखिर में आपको Allow पर टैप करना है।

5. इसके बाद ऐप में वापस जाएं, जहां पर आप अपने मैसेज को शेड्यूल कर पाएंगे। सबसे पहले जिसे मैसेज भेजना है, उसे चुने और फिर अपना मैसेज लिखें। अब तारीख और समय को सेट करें। यहां आपको एक विकल्प यह भी मिलेगा कि आप इस मैसेज को दोहराना चाहते हैं या नहीं।

6. नीचे अब आपको फाइनल टॉगल दिखेगा। यहां आपको Ask Me Before Sending का विकल्प दिखेगा, यदि आप इसे ऑन करके शेड्यूल करते हैं, तो मैसेज भेजने से पहले यह आपको एक नोटिफिकेशन भेजेगा, जिस पर क्लिक करने के बाद ही यह मैसेज Send होगा। वहीं, अगर आप इस विकल्प को ऑफ करते हैं, तो बिना नोटिफिकेशन भेजे यह मैसेज Send कर देगा। दोस्त को बर्थडे विश करना है, तो आप इसे ऑफ भी रख सकते हैं।

How to schedule WhatsApp message in iPhone
एंड्रॉयड की तरह आइओएस में व्हाट्सऐप मैसेज शेड्यूल करने के लिए कोई थर्ड पार्टी ऐप उपलब्ध नहीं है। हालांकि, यहां हम आपको आइफोन पर व्हाट्सऐप मैसेज शेड्यूल करने का एक अलग तरीका बताएंगे, यह तरीका है Siri Shortcuts। यह एक ऐप्पल ऐप है, जो कि एक निश्चित समय पर व्हाट्सऐप मैसेज को ऑटोमेटिकली भेज देतe है। आइफोन पर व्हाट्सऐप मैसेज भेजने का तरीका-

1. सबसे पहले ऐप स्टोर पर जाकर Shortcuts app अपने आइफोन में डाउनलोड और इंस्टॉल करें।

2. अब नीचे दिए Automation टैब को चुनें।

3. अब टॉप राइट कॉर्नर पर दिए + आइकन पर क्लिक करें और Create Personal Automation पर टैप करें।

4. अगली स्क्रीन में Time of Day पर टैप करें जब भी आपको अपना मैसेज भेजना है उसे शेड्यूल कर दें। यह होने के बाद Next पर टैप कर दें।

5. अब Add Action पर टैप करें और सर्च बार में जाकर Text टाइप करें, अब नीचे आ रही लिस्ट में से Text को सिलेक्ट कर लें।

6. अब Text में जाकर अपना मैसेज टाइप करें, जो भी आप शेड्यूल करके भेजना चाहते हैं।

7. अब मैसेज बॉक्स के नीचे आपको एक + आइकन दिखेगा उस पर टैप करें और फिर सर्च बार में जाकर व्हाट्सऐप को सर्च करें।

8. यहां आपको कुछ विकल्प की लिस्ट दिखेगी, जहां पर आपको Send Message via WhatsApp सिलेक्ट करना है। अब जिसे मैसेज भेजना चाहते हैं उनका नंबर सिलेक्ट करें और फिर Next पर क्लिक कर दें। आखिर की स्क्रीन पर आपको Done पर टैप करना है।

अब आपको शेड्यूल टाइम पर Shortcuts app के द्वारा एक नोटिफिकेशन मिलेगा, जिस पर टैप करके आपका व्हाट्सऐप ओपन हो जाएगा और टाइप किया मैसेज भी दिखेगा। अब आपको बस इस मैसेज को Send करना है।

गौर करने वाली बात यह है कि इस तरीके से आप केवल एक हफ्ते के अंदर ही मैसेज को शेड्यूल कर सकते हैं, जो थोड़ा कम समय है। लेकिन मैसेज शेड्यूल न हो पाने से अच्छा है इस 1 हफ्ते वाले तरीके को अपनाकर दोस्तों को टाइम पर बर्थडे विश करना।

मेरी कहानी / शौर्यपथ / बहुत अमीर होते हैं वे लोग, जो नजरों से भी प्यार लुटाते चलते हैं और जिस पर प्यार की एक नजर पड़ जाए, तो उससे खुशनसीब कोई और नहीं होता। इसलिए कहा गया है कि मां सबसे अमीर होती है और उसके आंचल में बच्चे सबसे खुशनसीब। हालांकि यह भी कुदरत का स्याह करिश्मा ही है कि कोई मां प्यार के मामले में कंगाल हो, तो उसका बच्चा जाहिर है, बदनसीब ही होगा। पर ऐसी भी क्या बदनसीबी कि ममता भरी एक नजर के लिए दिल तरस जाए! मां या पिता, दोनों में से कोई तो निगाह भर देख ले, तो चैन आ जाए। सेना में रह चुके सेल्समैन पिता घर से ऐसे निकलते थे कि मानो उनकी सारी जिम्मेदारियां बाहर ही बसती हों और अभिनेत्री मां घर ऐसे लौटती थीं, मानो एक पैर बाहर ही रह गया हो।
संसाधनों की कोई कमी न थी, लेकिन एक धाय भरोसे बच्चे पल रहे थे। मां और पिता जब कभी मिलते थे, तब पता चलता था कि दुश्मनी क्या होती है। खुलकर लड़ाई होती थी, पास-पड़ोस तक गालियों की गंदगी बरसती थी। जिन हाथों को पुचकारने का धर्म निभाना था, वही हाथ ऐसे उठते थे कि लगता था, पिता पहले विश्व युद्ध से लौटे नहीं हैं, अभी वहीं दो-दो हाथ कर रहे हैं। सुधरने के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आते थे। परस्पर प्रेम और समर्पण के अभाव ने माता-पिता को बेरहम बना दिया था और यह आफत बच्चों पर भी समान रूप से बरसती थी। शारीरिक हिंसा से कई गुना ज्यादा मानसिक हिंसा से वह बच्चा मार्लन गुजर रहा था। सोचता रहता कि मां और पिता का ध्यान अपनी ओर कैसे खींचा जाए? ऐसा क्या किया जाए कि उनकी एक निगाह मिल जाए? वे देखने को मजबूर हो जाएं और उन्हें अपनी तंग जिंदगी में अपने बच्चे से भी कुछ खुशी नसीब हो। वैसे मार्लन को पता था कि माता और पिता अपनी-अपनी दुनिया में हर मुमकिन मनमानी करते हुए बहुत खुश हैं। उन्हें बच्चों की परवाह नहीं, लेकिन ऐसा क्या किया जाए कि दो पल वे अपने बच्चों के साथ भी बिताएं?
एक दिन मां घर में बैठी मिल गईं और मार्लन ने अपनी नई योग्यता का प्रदर्शन शुरू किया, ताकि मां नजर भर देख लें। मार्लन ने उस गाय का अभिनय शुरू किया, जो मां को प्यारी थी। मां ने अपने बेटे की हरकतों को नजर उठाकर देखा और उनकी आंखों में खुशी छलक आई। बेटा तो हर्ष से निहाल हो गया। सबसे बड़ी बात थी कि उसने कुछ ऐसा किया, जो मां को पसंद आया और मां ने देखा। उस ग्यारह साल के बच्चे का दिल बाग-बाग हो गया। एक राह मिली कि अभिनय ही वह कला है, जिस पर मां रीझ सकती हैं। गाय का अभिनय कर खुशी मिली, तो चस्का लग गया। फिर कभी घोडे़ का अभिनय, तो कभी किसी पड़ोसी बच्चे का अभिनय, एक सिलसिला चल पड़ा।
कभी-कभी पिता भी देख लेते थे, लेकिन कभी तारीफ नहीं करते थे। अपने बेटे को हमेशा नाकारा साबित करते थे। साफ कहते थे, तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते। तारीफ तो मां भी नहीं करती थीं, कभी देख भर लेतीं, तो भी कमाल हो जाता। मार्लन को पता चल गया कि ध्यान खींचना है, तो बेहतर से बेहतर अभिनय करो, जान डाल दो, जिसे निभा रहे हो, उस किरदार को जी जाओ। और यह सब किसलिए? बस प्यार भरी एक नजर के लिए। मां और पिता के लिए। खुशी के चंद लम्हों के लिए। ऐसे लम्हे, जिनकी बुनियाद पर दुनिया का सबसे शानदार अभिनेता खड़ा हुआ।
आज मनोरंजन की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा होगा, जो अभिनेता मार्लन ब्रैंडो (1924-2004) को नहीं जानता होगा। बड़े परदे पर गॉडफादर और अन्य अनेक किरदारों को साकार कर देने वाले मार्लन ने बचपन की तड़प व त्रासदी को अपना कलात्मक हथियार बना लिया। बिगड़ैल पिता को भले सुधार न सके, लेकिन एक दिन वह आया, जब पिटती हुई मां के पक्ष में जा खड़े हुए और पिता की कनपटी से पिस्तौल लगाकर कहा, ‘देखो, यह आखिरी बार है, अब कभी हाथ मत लगाना, वरना छोड़ूंगा नहीं’। जब कभी परदे पर गुस्सा दिखाने की जरूरत पड़ती, तो मार्लन अपने पिता को याद कर लेते थे और गुस्सा अनायास फट पड़ता था। हालांकि उन्होंने सफल होने के बाद पिता को फिल्म निर्माता बनाया और उनकी जरूरतों का पूरा ध्यान भी रखा, लेकिन पिता की मौत के बाद वह अक्सर हंसते हुए कह देते थे कि वह आदमी कुछ सेकंड के लिए भी सामने आ जाए, तो मैं उसका जबड़ा तोड़ दूंगा। और जिस साल मार्लन को अभिनय के लिए पहला ऑस्कर अवॉर्ड मिला, उसी साल दुनिया से जाते-जाते मां को एहसास हुआ कि बच्चों को पालने में बड़ी कमी रह गई। उन्होंने अफसोस का इजहार किया, लेकिन क्या फायदा? जब जो होना था, हो चुका था।
प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय मार्लन ब्रैंडो, अमेरिकी अभिनेता और निर्देशक

 

शौर्यपथ / उनके सामने दो विकल्प थे- किसी पुरअम्न मुल्क में एक खुशहाल जिंदगी और दूसरा, अपने गरीब व नाकाम देश (सोमालिया) में लौटकर खौफ व दुश्वारियों के बीच जीना। डॉक्टर हौवा अब्दी ने अपने वतन से वफा का रास्ता चुना। और बड़ी बात यह कि उन्हें अपने इस फैसले पर कभी अफसोस नहीं हुआ। तब भी नहीं, जब एक आतंकी समूह के सैकड़ों गुर्गों ने उनके अस्पताल पर हमला कर दिया था।
सन 1947 में मोगादिशु के एक खाते-पीते परिवार में हौवा पैदा हुईं। पिता खुद शिक्षित थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल भेजने में कभी कोताही नहीं की। मगर जब हौवा 12 साल की थीं, प्रसव के दौरान उनकी मां की मौत हो गई। वेदना से छटपटाती मां का चेहरा हौवा के भीतर जैसे नक्श हो गया। काश! उनकी मां को कोई डॉक्टर बचा लेता।
महज 12 साल की हौवा पर अचानक चार छोटी बहनों की देखरेख की जिम्मेदारी आ पड़ी। दादी थीं, मगर उम्रदराज होने के कारण जल्दी ही थक जाती थीं। ऐसे में, हौवा ने सारी जिम्मेदारियां निभाते हुए खुद से एक वादा किया कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर ही बनेंगी, ताकि किसी की मां को यूं मरने से बचा सकें। पढ़ने में तो वह शुरू से ही जहीन थीं, अब उसके साथ एक बड़ा मकसद आ जुड़ा था।
सन 1964 की बात है। हौवा तब 17 साल की थीं। हायर सेकेंडरी की तालीम मुकम्मल हो रही थी और यहीं से उन्हें अपने सपने की तरफ मुुड़ना था। संयोग से उसी वक्त उन्हें तत्कालीन सोवियत संघ का वजीफा मिल गया और वह मास्को पहुंच गईं। और फिर वहां से कीव। कीव अब यूके्रन की राजधानी है। वहां पर मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात अदन मोहम्मद से हुई। अदन भी सोमाली थे। वहीं पढ़ रहे थे। दोनों ने 1973 में शादी कर ली।
कीव से स्नातक और स्त्री रोग में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद हौवा वापस अपने मुल्क लौट आईं और यहां सरकारी अस्पतालों में उन्होंने काम करना शुरू कर दिया। इस दौरान वह दो बेटी और एक बेटे की मां बन चुकी थीं। जिंदगी ठीक गुजर रही थी, मगर देश की स्वास्थ्य सेवाओं की हालत देख हौवा बहुत दुखी रहती थीं। सोमालिया में अस्पताल बहुत कम थे और मरीज ज्यादा। गरीबी, भूख, कुपोषण ने तो जैसे इस भूखंड से गहरी नातेदारी पाल ली है। खैर, जब भी किसी महिला के प्रसव के दौरान मरने की खबर सुनतीं, तो हौवा बेचैन हो उठतीं। लगता, जैसे मां तड़प रही हैं।
लिहाजा 1983 में उन्होंने अपनी पैतृक जमीन पर एक कमरे का क्लिनिक शुरू किया। सोमालिया के तत्कालीन राष्ट्रपति ने खुद उन्हें इसकी इजाजत दी थी। हौवा अब आसपास की खानाबदोश, कबाइली औरतों को प्रेरित करने लगीं कि वे उनके पास सुरक्षित प्रसव के लिए आएं। मुफ्त, किफायती इलाज और काबिलियत ने हौवा को दूर-दूर तक मशहूर कर दिया। मगर 1991 में सोमालिया गृह युद्ध की चपेट में आ गया। इसके बावजूद हौवा मानव सेवा से नहीं डिगीं। 5 मई, 2010 की सुबह लगभग 750 लड़ाकों ने हौवा अब्दी अस्पताल पर धावा बोल दिया। हौवा कुछ समझ पातीं, उसके पहले ही उनकी कनपटी से बंदूक सटाकर एक आतंकी गरज उठा- ‘तुम क्यों अस्पताल चला रही हो? अव्वल तो तुम औरत हो, और फिर बूढ़ी भी। इसे फौरन बंद करो।’
हौवा ने गौर किया, किशोरवय के ये गुर्गे उस समूह के थे, जो हाथ काट डालने और व्यभिचार के आरोपियों को पत्थर मार-मारकर मौत के घाट उतार देने के लिए कुख्यात है। फिर भी उन्होंने पूरे साहस के साथ कहा, ‘मैं अपना अस्पताल नहीं छोड़ूंगी। अगर मरूंगी भी, तो अपनों के बीच और पूरी गरिमा के साथ।’ आतंकियों ने कई दिनों तक अस्पताल को अपने कब्जे में रखा। इस बीच कई बच्चे इलाज के अभाव में मर गए। फिर तो आस-पास की सैकड़ों औरतें हौवा के समर्थन में अस्पताल के इर्द-गिर्द जमा हो गईं। बढ़ते जन-आक्रोश और वैश्विक दबाव के आगे आतंकियों को झुकना पड़ा। वे न सिर्फ अस्पताल छोड़कर भागने को बाध्य हुए, बल्कि उन्होंने डॉक्टर हौवा से लिखित में माफी भी मांगी।
सन् 1983 में एक कमरे से शुरू हुए हौवा अब्दी अस्पताल में आज चार सौ बेड और तीन-तीन ऑपरेशन थिएटर हैं, उनकी दोनों बेटियां भी डॉक्टर बन चुकी हैं और हाथ बंटाती हैं। आधा दर्जन से अधिक डॉक्टरों और चालीस से अधिक नर्सों के साथ यह अस्पताल हजारों लोगों की खिदमत कर रहा है। इसके साथ ही गृह युद्ध में यतीम हुए बच्चों व बेवा औरतों के लिए भी हौवा ने पनाहगाह और स्कूल शुरू किए हैं। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वह अब तक करीब 90 हजार सोमाली लोगों की जिंदगी में उम्मीद की किरण लेकर आई हैं। इसके लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है।
एक सफल या सार्थक जिंदगी में से हौवा ने अपने लिए सार्थक जीवन चुना है। और उनके इस फैसले पर पूरी मानवता को फख्र होगा। सोमाली लोगों की ‘मामा हौवा’को काफी सारे लोग सोमालिया की मदर टेरेसा भी कहते हैं।
प्रस्तुति : चंद्रकांत सिंह हौवा अब्दी, डॉक्टर व मानवाधिकारवादी

 

सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / भारतीय चुनाव आयोग लोकसभा की एक सीट और विधानसभाओं की 56 सीटों पर उपचुनाव कराने को तैयार है, तो इससे पता चलता है कि महामारी की वजह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रुकेगी। मंगलवार को आठ सीटों के लिए तय उपचुनाव को जब रद्द किया गया था, तब यह माना जा रहा था कि कोरोना के दौर में मतदान आधारित कोई चुनाव नहीं हो सकेगा। लेकिन यह साफ हो गया है कि जिन सीटों पर अब आयोग चुनाव के लिए तैयार है, उनमें वे आठ सीटें भी शामिल हैं। आठ सीटों को लेकर जल्दी इसलिए भी है, क्योंकि इनके लिए 7 सितंबर तक चुनाव हो जाने चाहिए। बाकी बची 49 सीटों के लिए सितंबर का पूरा समय है। सब कुछ ठीक रहा और स्थानीय प्रशासन ने कोई अड़ंगा नहीं लगाया, तो आयोग चुनाव प्रक्रिया तेज कर देगा। वैसे भी, बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल ही रही हैं। समय पर चुनाव कराना आयोग की जिम्मेदारी है और अगर वह इसे निभाने को लालायित है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। हालांकि काफी कुछ सरकारों को भी तय करना है। अगस्त, सितंबर तक कोरोना जिन इलाकों में काबू में आ जाएगा, वहां तो ज्यादा परेशानी नहीं होगी, मगर उसी दौर में कोरोना चरम पर रहा, तो चुनाव टालने की नौबत आ सकती है। इतना तय है कि कोरोना के समय चुनाव कराने के लिए ज्यादा संसाधन, वाहन और सुरक्षा बलों की जरूरत पडे़गी। हर एक मतदान केंद्र पर बचाव के दिशा-निर्देशों की पालना कराना आसान नहीं होगा। लंबी लाइन और मतदाताओं की परस्पर दूरी को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
सर्वाधिक 27 सीटों पर मध्य प्रदेश में उपचुनाव होने हैं। मणिपुर में 11, गुजरात में आठ, तो उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में चार-चार सीटें और झारखंड में भी दो सीटें खाली हैं। हरियाणा, छत्तीसगढ़ इत्यादि में भी सीटें खाली हैं। संविधान के तहत इन सीटों को खाली नहीं रखा जा सकता। रिक्त विधानसभा क्षेत्रों के नागरिकों के अधिकारों की बहाली और किसी सांविधानिक संकट से बचने के लिए चुनाव जरूरी हैं। हो सकता है, जो प्रतिनिधि ऐसे मुश्किलों के बीच से चुनाव जीतकर आएं, वे जनता के बेहतर सेवक साबित हों। हो सकता है, जो सरकारें कोरोना के दौर में बनें, वे शायद ज्यादा समर्पित और संवेदनशील हों।
एक बड़ी महामारी के समय चुनाव का दुर्लभ अनुभव देश को होने जा रहा है। विभिन्न पार्टियां वर्चुअल रैलियां आयोजित कर रही हैं। ऐसे में, अपेक्षित शारीरिक दूरी बरतते हुए भी लोगों से संपर्क करना और मतदान के लिए रिझाना कैसे संभव है, यह देखना दिलचस्प होगा। हो सकता है, विशाल रैलियों और जनसभाओं में होने वाली बेहिसाब भीड़ से प्रभावित होने का मौका न मिलने पर लोग अपने प्रतिनिधि के बारे में सही फैसला कर सकें। ऐसा नहीं है कि कोरोना के समय दुनिया में चुनाव बंद हो गए हैं। दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में कोरोना के समय में ही चुनाव हुए हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव 3 नवंबर को तय है और इसकी प्रक्रिया भी वहां शुरू हो चुकी है। दुनिया के जिम्मेदार लोकतंत्रों ने यह संकेत दे दिया है कि कोरोना की वजह से चुनाव नहीं रुकने वाले। किसी बहाने से चुनाव से बचना ठीक नहीं। कोरोना के समय सुरक्षित चुनाव कुछ महंगा पड़ सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल रखने के लिए हमें इस लागत से गुजरना होगा।

 

ओपिनियन / शौर्यपथ / आज ‘विजय दिवस’है। ठीक 21 बरस पहले हमने संसार के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक में थोपी गई जंग जीतकर साबित कर दिया था कि हिन्दुस्तानियों के हौसले कभी पस्त नहीं होते। युद्ध-नीति के मुताबिक, हर जय-पराजय के अपने निश्चित सबक होते हैं। क्या नई दिल्ली के सत्ता-सदन ने इस अनुभव का पर्याप्त लाभ उठाया? लद्दाख की सीमाओं पर पसरे तनाव ने इस सवाल को बेहद मौजूं और धारदार बना दिया है।

पहले कारगिल की बात। इसकी जड़ें अतीत में धंसी हुई थीं। साल 1984 में सियाचिन की बर्फीली चोटियां गंवाने के बाद जनरल जिया के समक्ष तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स-पाकिस्तान ने एक जवाबी कार्ययोजना पेश की। इस रणनीति के तहत पाकिस्तानी फौज को सर्दियों में कारगिल की चोटियों पर चढ़कर श्रीनगर-लेह राजमार्ग को काट देना था। जिया ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। वजह? उन दिनों वह अपने आका अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान से सोवियत सेनाओं को बाहर करने में लगे थे। उनके पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि कारगिल के जवाब में अगर भारत ने समूचा युद्ध छेड़ दिया, तो रावलपिंडी का रक्षा प्रतिष्ठान दो मोर्चों के बीच सैंडविच तो नहीं बन जाएगा?

परवेज मुशर्रफ ने इसे नए संदर्भों में देखा। उनकी अगुवाई में फल-फूल रहे ‘गैंग ऑफ फोर’ ने पुरानी योजना को झाड़-पोंछकर नया जामा पहना दिया। परवेज मुशर्रफ इससे इतने मुतमइन थे कि बिना प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बताए, उन्होंने ‘नॉर्दर्न लाइट इन्फेंट्री’ के जवानों को कूच के आदेश दे दिए। यह अभियान इतना गोपनीय रखा गया कि थल सेना के अन्य कमांडरों के साथ वायु सेना के आला अफसर तक इससे अनजान रहे। भारत ने जब अपनी सरजमीं खाली कराने के लिए हवाई हमले शुरू किए, तब वे हक्का-बक्का रह गए। समूचा सत्ता प्रतिष्ठान उनसे असहमत था, सेना के अन्य अंग अनभिज्ञ थे और भारतीय प्रतिक्रिया अनपेक्षित थी।

वे भारतीय वायु सेना की कार्रवाई का प्रतिरोध भी नहीं कर सकते थे। नई दिल्ली जो कर रही थी, अपनी जमीन पर कर रही थी। नियंत्रण रेखा लांघने का मतलब होता युद्ध, जिसके लिए वे उस समय तैयार न थे। यही नहीं, तब तक उन्होंने यह भी नहीं माना था कि भारतीय चौकियों पर कब्जा जमाए बैठे लोग उनके नियमित सैनिक हैं। जनरल मुशर्रफ किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए और नवाज शरीफ हताश। निराशा भरे माहौल में इन्हें 4 जुलाई, 1999 को ह्वाइट हाउस की चौखट चूमनी पड़ी। उस बैठक के दौरान बिल क्लिंटन की मुद्रा बेहद कठोर थी। शरीफ ने कुछ शर्तों के साथ वापसी की बात कही। क्लिंटन ने कहा कि आपकी कोई शर्त नहीं मानी जाएगी। पाकिस्तान की भलाई इसी में है कि उसके दस्ते शराफत से वापस चले जाएं। नतीजतन, पाक फौजियों को लौटना पड़ा था। इस प्रक्रिया में भी उनके तमाम फौजी मारे गए। मुशर्रफ का यह गुनाह बेलज्जत साबित हुआ।

मुझे याद है, उन दिनों भी समझदार लोग कह रहे थे कि इस जीत का उल्लास मनाइए, पर सबक भी सीखिए। हमारी सीमाएं विशाल और बहुआयामी हैं। इनकी हिफाजत के लिए हम अभी तक तैयार नहीं हैं। तब 1962 की चीन से हुई जंग को भी याद किया गया था। जुलाई 1999 से जुलाई 2020 तक एनडीए और यूपीए ने दस-दस बरस हुकूमत की, पर सीमा सुरक्षा के मामले में हम आज भी सौ फीसदी अंकों के अधिकारी नहीं हैं। चीन के इस अतिक्रमण ने कारगिल और मुंबई पर आतंकवादी हमले सहित तमाम पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। हम चीन, पाकिस्तान और आतंक के हमसायों से तब तक नहीं जूझ सकते, जब तक कि सीमाएं सुरक्षित न हों।

चीन ने पिछले दिनों लद्दाख में वही तरीका अख्तियार किया, जो कारगिल में पाकिस्तान ने किया था। उनके सैनिक उस समय कारगिल की चोटियों पर जम चुके थे, जब अटल बिहारी वाजपेयी दोस्ती की बस लेकर लाहौर में अपना खैरमकदम करा रहे थे। चीनी राष्ट्रपति ने भी कुछ माह पूर्व 11 अक्तूबर, 2019 को चेन्नई के समीप मामल्लपुरम में भारतीय आतिथ्य का लुत्फ उठाया था। कभी पल्लव सम्राटों की आर्थिक राजधानी रहे इस शहर से चीन को भी तिजारत होती थी। लगा था, पुराने दिन लौट रहे हैं, पर कूटनीति भले मनोभावों की कीमत पर ही फलती-फूलती है।हालांकि, बीजिंग की नीयत में खोट पहले से ही नजर आ रही थी। इससे पहले डोका ला और उससे भी पहले दौलत बेग ओल्डी, दीपसांग में दोनों देशों की सेनाएं हफ्तों तक आमने-सामने रही थीं। हमें इसलिए भी सतर्क रहना चाहिए था, क्योंकि कई वर्षों से पीएलए के दस्ते वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास निर्माण कर रहे थे। उनके दस्ते ऐसी दुर्गम जगहों पर निरंतर अभ्यास कर रहे थे। इसीलिए संघर्ष के वक्त तैयारी के मामले में चीनी हमसे कहीं आगे थे।

यही वजह है कि जब वे अंदर आए, तो उन्हें वापस लौटाना कारगिल से कहीं ज्यादा दुष्कर साबित हो रहा है। अभी तक यह भी साफ नहीं हो सका है कि ये वापस लौटे हैं, तो कितना लौटे हैं? प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद विपक्षी दल और कई अवकाश प्राप्त सैन्य व कूटनीतिक सेवा के अधिकारी इसे मानने को तैयार नहीं हैं। पर एक बात तय है कि शी जिनपिंग और उनकी सत्ता चौकड़ी को अंदाज नहीं था कि भारत इतनी दृढ़ता से पेश आएगा। 15 जून को गलवान में हमारे जवानों ने शहादत दी और अब जो आंकडे़ सामने आ रहे हैं, उससे जाहिर है कि चीनी सैनिकों को अधिक तादाद में हताहत होना पड़ा। तब से अब तक सीमा और कूटनीति के मोर्चे पर कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

ध्यान दें। आज की भांति कारगिल के मामले में भी भारतीय नेकनीयती जगजाहिर थी और इसका खामियाजा पाकिस्तान को उठाना पड़ा। उसने अमेरिका की हमदर्दी हमेशा के लिए खो दी और यह कहने का हक भी कि भारतीय भूमि पर खूंरेजी करने वाले लोग दहशतगर्द नहीं, बल्कि मुजाहिदीन हैं। अब यही हाल चीन का हो रहा है। उसे दुनिया भर में कडे़ प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका सहित पश्चिम के सारे देश उसकी हरकत के खिलाफ हैं। इंग्लैंड, जापान और तमाम देशों ने भारत की तरह चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। उसके उपनिवेशवादी विस्तार को रोकने का सबसे बढ़िया तरीका यही है कि हम बीजिंग की कारोबारी सत्ता पर चोट करें। विश्व बिरादरी यही कर रही है। क्या देंग जियाओ पिंग की नीति को हवा में उड़ा डालने वाले शी जिनपिंग भी वही गलती कर बैठे हैं, जो कभी जनरल अयूब खां और भुट्टो की जोड़ी अथवा जनरल परवेज मुशर्रफ ने की थी? चाहे जो हो, पर यह तय है कि हमें अपनी ऐतिहासिक भूलों से बचना होगा। भारत शताब्दियों से अपनी सीमाओं की निगहबानी के मामले में नादान साबित होता रहा है। यह आत्मघाती सिलसिला अब थम जाना चाहिए।शशि शेखर

 

रायपुर/ शौर्यपथ / राजधानी रायपुर में लॉकडाउन के बावजूद स्टील सिटी के पास एक पॉश कालोनी में 4 लड़कियों केे साथ 5 युवकों को संदिग्ध हालत में पुलिस ने गिरफ्तार किया हैै। छापेमारी के दौरान ये सभी युवक-युवतियां संदिग्ध हालात में मिले। पकड़ी गई लड़कियों ने अपने आपको एक्सिस बैंक देवेन्द्र नगर में कर्मचारी बताया है जिसकी पुलिस जांच कर रही है पुलिस ने देर रात स्टील सिटी के पास में छापा मार कारवाई की। बताया जाता है कि स्टील सिटी के पास कॉलोनी के रहवासी भी एक बैंक कर्मी लेडी से बहुत परेशान थे उसके घर में लगातार कई दिनों तक अलग-अलग कार ,मोटरसाइकिल में कई संदिग्ध लड़कों और लड़कियों का आना-जाना लगातार जारी था आज लॉकडाउन के दौरान भी बैंक कर्मी लेडी के घर लड़के और लड़कियों का आने का सिलसिला जारी रहा तब कॉलोनी वालों ने भी इस मामले पर मोर्चा खोलते हुए थाना को फोन से सूचना दिया कि एक घर में आधा दर्जन से अधिक लड़के लड़कियां मौजूद है एवं संदिग्ध हालत में दरवाजा बंद कर के अंदर में बैठे हैं तब थाना के पुलिस दल ने इस दौरान चार लड़की और पांच युवकों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है पकड़ी गई एक युवती एक्सिस बैंक देवेन्द्र नगर रायपुर में काम करती है और पति दुबई में रहता है। युवती यहां पर एक कॉलोनी में अपने बच्चों के साथ रहती है। पूर्व में भी युवती के बारे में पुलिस को शिकायत मिल चुकी है। इस संबंध में खम्हारडीह थाना प्रभारी ममता शर्मा अली ने बताया कि, कॉलोनी के लोगों के द्वारा शिकायत मिली थी, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए लोगों के खिलाफ 151 के तहत कार्रवाई की गई है,अभी जांच की जा रही है।।

भिलाई नगर / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जोन क्रमांक 4 क्षेत्र में 10 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा! इस प्लांट की खासियत यह होगी कि वर्तमान में खुर्सीपार में बने हुए बीएसपी क्षेत्र के जोन क्रमांक 1, जोन क्रमांक 2 एवं जोन क्रमांक 3 जो कि वार्ड क्रमांक 36 तथा 37 एवं आसपास के वार्ड को सम्मिलित किया हुआ है इन एरिया के मल जल, गंदा पानी, बरसाती पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध करने का कार्य किया जाएगा! वर्तमान में खुर्सीपार अंतर्गत बीएसपी क्षेत्र के जोन क्रमांक 1,2,3 में निर्मित बीएसपी क्वार्टर से निकला हुआ गंदा पानी तेलहा नाला में बहाया जा रहा है! जिससे नाले का पानी प्रदूषित हो रहा है! बता दें कि सीवेज सिस्टम पूर्व से बीएसपी के समय का बिछा हुआ है, परंतु प्रबंधन द्वारा उपचारित नहीं किया जा रहा है! प्रदूषण से बचाने के लिए तेलहा नाला के दोनों तरफ निगम द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा! *चार करोड़ 16 लाख की लागत से स्थापित होगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट* सहायक अभियंता अखिलेश चंद्राकर ने जानकारी देते हुए बताया कि दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा! खुर्सीपार अंतर्गत आने वाले बीएसपी के जोन क्रमांक एक में 1.1 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा जोन क्रमांक दो एवं तीन के क्षेत्र को कवर करते हुए तीन एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा, इन दोनों एमएलडी को बनाने की लागत तकरीबन चार करोड़ 16 लाख की होगी! इसके अतिरिक्त पंप, स्टोरेज कलेक्शन एवं पाइप का विस्तारीकरण भी किया जाएगा! *तेलहा नाला को प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति* सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बन जाने से खुर्सीपार क्षेत्र के बीएसपी क्वार्टर एवं एवं समीप का बरसाती पानी, मलजल एवं गंदा पानी को तेलहा नाला में बहाने के बजाय इससे ट्रीटमेंट कर शुद्ध किया जाएगा उसके उपरांत ही नाला में बहाया जाएगा! माननीय एनजीटी के भी निर्देश के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बेहद आवश्यक हो गया है! *ट्रीटमेंट उपरांत सिंचाई में किया जा सकता है उपयोग* सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित करने के पश्चात शुद्ध पानी का उपयोग पौधों एवं उद्यानों की सिंचाई में किया जा सकता है खासकर ग्रीष्म ऋतु में पानी की अधिक आवश्यकता होती है! इसके लिए इस उपचारित जल का उपयोग अब विभिन्न कार्यों में किया जा सकता है इससे आवश्यकता अनुसार स्टोर करके भी रखा जा सकता है! औद्योगिक क्षेत्रों में भी पानी की अधिक मांग होती है इन उद्योगों को राशि निर्धारित कर पानी उपयोग के लिए दिया जा सकता है! *5 साल तक एजेंसी करेगी देखरेख* कार्यपालन अभियंता संजय बागड़े ने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के बेहतर संचालन के लिए निर्माण करने वाली एजेंसी को 5 साल तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का रखरखाव, देखरेख करना होगा! *पूरे भिलाई निगम क्षेत्र के मल जल को किया जा सकता है उपचारित* उल्लेखनीय है कि निगम क्षेत्र में सक्शन पंप के माध्यम से घरों एवं विभिन्न शौचालय इत्यादि के मल एवं गंदगी को निकाला जाता है! इस गंदगी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाकर इसे उपचारित किया जा सकता है, इस तरह से पूरे निगम क्षेत्र से निकले हुए मल, गंदगी इत्यादि को उपचारित करने के लिए सीवेज प्लांट बेहद कारगर साबित होगा! महापौर एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव के प्रयासों से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 10 करोड़ की राशि की स्वीकृति है! अब इसके जल्द निर्माण के लिए कयावद जारी हो चुकी है

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