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रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों विशेष रूप से किसान भाइयों को पारंपरिक पोला तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नागरिकों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की है। अपने शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा है कि पोला तिहार छत्तीसगढ़ की परम्परा, संस्कृति और लोक जीवन की गहराइयों से जुड़ा है। इस त्यौहार में उत्साह से बैलों और जाता-पोरा की पूजा कर अच्छी फसल और घर को धन-धान्य से परिपूर्ण होनेे के लिए प्रार्थना की जाती है।
यह त्यौहार हमारे जीवन में खेती-किसानी और पशुधन का महत्व बताता है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि यह पर्व बच्चों को हमारी संस्कृति और परम्पराओं से परिचय कराने का भी अच्छा माध्यम है। घरों में प्रतिमान स्वरूप मिट्टी के बैलों और बर्तनों की पूजा कर बच्चों को खेलने के लिए दिया जाता है,जिससे बच्चे अनजाने ही अपनी मिट्टी और उसके सरोकारों से जुड़ते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए ग्रामीणों और किसान भाइयों से पोला तिहार के मनाने के दौरान मास्क लगाने तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्य में वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के उद्ेदश्य से इंदिरा वन मितान योजना शुरू किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत राज्य के आदिवासी अंचल के दस हजार गांव में युवाओं के समूह गठित कर उनके माध्यम से वन आधारित समस्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इन समूहों के माध्यम से वनवासियों के स्वरोजगार और उनकी समृद्धि के नए द्वारा खुलेंगे। इस योजना के तहत समूहों के माध्यम से वनोपज की खरीदी, उसका प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के प्रत्येक आदिवासी विकासखण्डों में वनोपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना किए जाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के 10 हजार गांवों में इस योजना के अंतर्गत समूह गठित किए जाएंगे, जिनमें युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक समूह में 10 से 15 सदस्य होंगे। इंदिरा वन मितान योजना में अनुसूचित क्षेत्रों के 19 लाख परिवारों को जोडऩे का लक्ष्य है। इस योजना के माध्यम से समूहों को वृक्ष प्रबंधन का अधिकार प्रदान किया जाएगा, जिससे वे वन क्षेत्रों के वृक्षों से वनोपज संग्रहण कर आर्थिक लाभ ले सकें। वनोपज की खरीदी की व्यवस्था समूह के माध्यम से की जाएगी, जिससे वनोपज का सही मूल्य मिल सके। समूह के माध्यम से लोगों के लिए स्व-रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। वनोपजों की मार्केटिंग की व्यवस्था के साथ अनुसूचित क्षेत्रों के प्रत्येक विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। एक यूनिट की अनुमानित लागत लगभग 10 लाख रूपए होगी। अनुसूचित क्षेत्रों के 85 विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना के लिए 8 करोड़ 50 लाख रूपए की राशि प्राधिकरण मद से उपलब्ध कराई जाएगी। वनों में इमारती लकड़ी की बजाए फलदार और वनौषधियों के पौधे लगाए जाएंगे। जिससे वनवासियों की आय बढ़ सके।
विश्व आदिवासी दिवस का गरिमामय कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्रीगणों, संसदीय सचिवों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों तथा आदिवासी समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अतिथियों द्वारा आंगादेव, बूढ़ादेव एवं मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना से हुआ। इस अवसर पर आदिवासी नर्तक दल द्वारा गौर नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। इस मौके पर मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, अमरजीत भगत, डॉ. शिव डहरिया, श्रीमती अनिला भेंडिय़ा तथा खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन भी नर्तक दलों के साथ मांदर की थाप पर थिरके और आदिवासी कला संस्कृति को आगे बढ़ाने और उसे जीवंत बनाए रखने की छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। आदिवासी गौर नृत्य में मंत्रीगणों की भागीदारी से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय का पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर उठा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने उद्बोधन में आगे कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बड़ा संरक्षक रहा है। प्रकृति से निकटता और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित दोहन भावी पीढ़ी के बेहतर जीवन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हमें आदिवासी समाज के हित के सभी पहलुओं पर समग्रता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज के प्रत्येक सदस्य और संगठन से अपील की कि वे अपने अधिकारों और विकास के अवसरों के बारे में मुखर हो। छत्तीसगढ़ सरकार सदैव आपके साथ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के काम-काज, नीतियों और फैसलों से आदिवासी अंचलों की फिजा में तेजी से बदलाव आ रहा है। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार की नई ईबारत लिखी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने राज्य के सभी पात्र वनवासियों को वन अधिकार पट्टा देने का अभियान शुरू किया है। छत्तीसगढ़ राज्य वनवासियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक पट्टा देने के मामले में देश में अव्वल स्थान पर है। अभी तक राज्य में 4.50 लाख व्यक्तिगत तथा 43 हजार सामुदायिक पट्टे दिए जा चुकें है। वन अधिकार पट्टों के माध्यम से चार लाख 18 हजार हेक्टेयर भूमि आबंटित की गई है, जो देश में सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकार पट्टों को मनरेगा, सिंचाई, खेती-किसानी और खाद्य संरक्षण जैसे अनेक कार्यो से जोड़कर पट्टे की ंभूमि को हमने वनवासियों के खुशहाली और आमदनी का माध्यम बनाने का प्रयास कर रहें है। उन्होंने इस मौके पर राज्य के सभी वन भूमि पट्टाधारियों से अपने अधिकार और अवसर का भरपूर लाभ उठाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज की खरीदी और उनके समर्थन मूल्य में वृद्धि सहित शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की यह तमाम कोशिशें आदिवासी भाई-बहनों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में पहले सात लघु वनोपज की खरीदी होती थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 31 कर दिया है। उन्होंने कहा कि महुआ सहित अन्य लघु वनोपजों के मूल्य में वृद्धि किए जाने से इसका सीधा फायदा संग्राहक परिवारों को हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी अंचलों में विशेषकर बस्तर में सिंचाई का रकबा बहुत कम है। इसे बढ़ाने और बस्तर अंचल के लोगों की हर जरूरत के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु बोधघाट परियोजना की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के डूबान क्षेत्र में आने वाली भूमि का मुआवजा और पुनर्वास पैकेज आदिवासी समाज के लोग खुद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि बोधघाट सिंचाई परियोजना की पुनर्वास नीति देश दुनिया की सबसे अच्छी नीति बने यह उनकी मंशा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी भाई-बहनों को सिर्फ जल, जंगल और जमीन की ताकत ही नही बल्कि शासन और प्रशासन की ताकत भी सौंपी है। उन्होंने इस मौके पर आदिवासी समाज के लोगों से पूरी सक्षमता के साथ आगे बढऩे और राज्य के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की।
इस अवसर पर मंत्री कवासी लखमा एवं मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा है, उनका मान-सम्मान बढ़ाया है। मंत्रीद्वय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने तथा उसे विश्व पटल पर लाने की सराहनीय पहल मुख्यमंत्री ने की है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर वनांचल क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सौगातों के लिए उनका आभार जताया। कार्यक्रम को सर्वआदिवासी समाज के अध्यक्ष बी.पी.एस. नेताम ने भी सम्बोधित किया और आदिवासी समाज से संबंधित मांगों का ज्ञापन सौंपा।
कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिय़ा, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, संसदीय सचिव सुश्री शकुंतला साहू, चिंतामणि महाराज और जशपुर विधायक विनय भगत, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन अनेक जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ /कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने खैरागढ़ विकासखंड के ग्राम सहसपुर में गौठान का निरीक्षण किया और वहां ग्रामवासियों से मुलाकात की। उन्होंने गौठान में वर्मी बेड का निरीक्षण किया और उन्होंने स्वसहायता समूह की महिलाओं को अधिक मात्रा में जैविक खाद का निर्माण करने के लिए कहा। इस अवसर पर उन्होंने जय मां शारदा स्वसहायता समूह को उद्यानिकी विभाग द्वारा 13 हजार रूपए का जैविक खाद विक्रय करने पर चेक सांैपा। समूह की महिलाओं ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए कृषि विभाग से प्रशिक्षण दिया गया है।
कलेक्टर ने गौठान में उपस्थित चरवाहा केवल से बातचीत की और उन्हें गोबर एकत्रित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि शासन ने पशुओं की देखभाल के लिए इतना बड़ा गौठान बनाया है सभी ग्रामवासी अपने पशुओं को गौठान में रखे। उन्होंने जनपद पंचायत सीईओ को गौठान में शेड निर्माण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने गौठान परिसर में आंवला का पौधरोपण किया। इस अवसर पर एसडीएम श्रीमती निष्ठा पाण्डेय, जनपद सीईओ श्रीमती रोशनी भगत टोप्पो, नायब तहसीलदार सुश्री मनीषा देवांगन, हुलेश्वर खुंटे, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी रविन्द्र मेहरा, पीओ मनरेगा उपेन्द्र वर्मा, डीपीएम बिहान दिनानाथ लिलहरे एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मोहला वनांचल के अंतिम छोर में बसे शेरपार संकुल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला मुचर में मोहल्ला क्लास की शुरुवात की गई। शाला के प्रधान पाठक उमाशंकर दिल्लीवार और गोटाटोला जोन के मीडिया प्रभारी शेख अफजल ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण स्कूल अनिश्चितकाल के लिए बंद है। ऐसे समय मे पढ़ई तुंहर दुआर योजना के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोडऩे के लिए शाला के दोनों ही शिक्षकों ने बहुत ही अच्छा प्रयास किया। बच्चों को ऑनलाइन क्लास से जोडऩे में मुचर से मोबाइल धारक निकिता, रेशम, मंजू, टोमेश और देव कुमार ने बहुत सहयोग किया। बच्चों की होमवर्क करने में, होमवर्क की फोटो खींच कर शिक्षकों को भेजने में इस युवाओं ने काफी मदद किया। लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण सभी बच्चे ऑनलाइन क्लास से जुड़ नहीं पाते थे। इसी समस्या के समाधान के रूप में स्कूल शिक्षा विभाग ऑफलाइन शिक्षा के विकल्प के रूप में मोहल्ला क्लास की योजना ले के आई। अब इस योजना का मकसद बच्चों को उनके घरों के आस पास शिक्षकों और शिक्षक सारथी की मदद से पढ़ाना है। इसी योजना पर अमल करते हुए ग्राम मुचर में भी मोहल्ला क्लास की शुरूआत की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार देवांगन, मुकादाह सरपंच श्रीमती द्रौपदी कोला, ब्लॉक नोडल अधिकारी केवल साहू, सोमाटोला से राजकुमार यादव, मुकादाह हाई स्कूल के प्राचार्य विक्रम साहू, शेरपार संकुल समन्वयक प्रदीप मंडावी, जगदेव उर्वशा, पुरुषोत्तम तरम, श्रीमती शारदा कुमेटी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार देवांगन ने बताया कि प्राथमिक शाला मुचर हमेशा से ही मोहला और शेरपार संकुल के अच्छे स्कूलों में शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि मुचर के शिक्षक उमाशंकर दिल्लीवार और शेख अफजल हमेशा से बहुत सक्रिय रहे है और ब्लॉक, जिले के अलावा राज्य तक मे अपनी अलग पहचान बनाई है। सरपंच ने अपने उद्बोधन में दोनों शिक्षकों के इस प्रयास की तारीफ करते हुए पंचायत की तरफ से भरपूर मदद देने का आश्वासन दिया है। इस दौरान शिक्षक सारथी कुमारी मंजू, कुमारी रेशम, कुमारी निकिता, टोमेश कुमार, शारदा कुमेटी को मुख्य अतिथियों के हाथों से चॉक, पेन, कॉपी, सैनिटाइजर बोतल, ब्लैक बोर्ड का वितरण किया गया। मुचर में 5 से 6 मोहल्ला क्लास के संचालन की तैयारी शिक्षकों और ग्रामीणों द्वारा किया गया है। शाला के सभी बच्चों को मास्क का वितरण भी दोनों शिक्षकों द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम में ग्राम मुचर से दीपक, जनक, कलीराम के अलावा पालक भी मौजूद थे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के दोनों ही शिक्षकों के इस प्रयास की तारीफ करते हुए दूसरे स्कूलों में इसी मॉडल को लागू करने पर जोर दिया है। शाला के प्रधान पाठक उमाशंकर दिल्लीवार और शिक्षक शेख अफजल ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जाहिर की है कि इस योजना से बच्चों को बहुत लाभ होगा और वे फिर से नियमित पढ़ाई से जुडेंगे।
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर तेंदूपत्ता संग्राहक , सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को मिला पहला भुगतान, मुख्यमंत्री श्री बघेल ने अंतरित किए 1.65 करोड़ रूपए
// 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं को मिला लाभ
// शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि
// मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से की चर्चा
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया की एक अनूठी योजना है। इस योजना पर सभी लोगों की निगाह है। उन्होंने कहा कि येाजना के शुरूआत के एक पखवाड़े के भीतर इसके उत्साह जनक परिणाम देखने और सुनने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों के जीवन में बदलाव लाने वाली तथा लोगों को बारहों महीने रोजगार देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री बघेल आज अपने निवास कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गोबर खरीदी के पहले भुगतान का शुभारंभ करते हुए उक्त बातें कही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 46 हजार 964 गोबर विक्रेताओं के खाते में एक करोड़ 65 लाख रूपए की राशि आनलाइन अंतरित की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की शुरूआत में शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके नाम पर प्रदेश में ‘तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना‘ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पूर्व मंत्री और लोकप्रिय नेता शहीद श्री महेंद्र कर्मा की जयंती पर उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण उन्हेें विनम्र श्रद्धंाजलि दी। इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सभी सदस्यगणों ने भी शहीद श्री कर्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि श्री महेन्द्र कर्मा बस्तर टाइगर के नाम से जाने जाते थे, वे आदिवासियांे के हक की हर लड़ाई में दमदारी से खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना देश-दुनिया में अपने तरह की पहली अनूठी योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। इस योजना के माध्यम से एक ओर जहां पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा, दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लोगों को कई फायदे मिलेंगे। इससे गांवों में बारह महीने लोगों को रोजगार सुलभ होगा। गोबर विक्रय करने से ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को नियमित आमदनी होगी। इसके अलावा गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होगा। खुले में चराई पर रोक लगेगी और किसान एक से अधिक फसलों का उत्पादन कर सकेंगे। इससे पशुओं के संरक्षण तथा संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हर गौठानों में रोजगार ठौर स्थापित किए जाएंगे। गौठानों में इसके लिए एक-एक एकड़ जमीन को आय मूलक व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इनमें समूहों के सदस्य गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के अलावा गौमूत्र से फिनाईल तथा औषधि का निर्माण, साबुन, अगरबत्ती का निर्माण, धान कुट्टी मशीन के माध्यम से चावल निकालने और सिलाई मशीन के माध्यम से सिलाई-बुनाई आदि जैसी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण एवं संचालन सुगमता से कर सकेंगे और इससे उन्हें गांव में ही रोजगार और जीवन यापन का जरिया मिलेगा।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने जशपुर, जांजगीर-चांपा, सुकमा, बलौदाबाजार जिले कीे विभिन्न गौठान समितियों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं, पशुपालक एवं गोबर विक्रेताओं से गोधन न्याय योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गोबर विक्रय करने वाले लोगों से भुगतान की राशि प्राप्त होेने, महिला स्व-सहायता समूहों से उनके द्वारा संचालित गतिविधियों विशेषकर वर्मी कम्पोस्ट खाद के निर्माण एवं विक्रय की स्थिति, गौठानों में आने वाले पशुओं की संख्या एवं उनके चारे-पानी के प्रबंध के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौठान समितियों से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट टांका पर्याप्त संख्या में तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन गौठानों में सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 31 प्रकार के लघु वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है। लघु वनोपज के वेल्यू एडिशन के कार्य गौठानों में करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किए जाने की दिशा में हम सब को मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से समाज के सभी वर्ग के लोगों को न्याय योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य में इस योजना की लोकप्रियता और इसकी सफलता को देखते हुए अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ ही मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम के शुभारंभ में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने गोधन न्याय योजना की अब तक की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की परिकल्पना आज मूर्तरूप ले चुकी है। यह योजना ग्राम पंचायतों के बाद गांव तक विस्तारित होगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 15 दिन के भीतर उनके बैंक खाते में राशि के भुगतान का जो वादा किया था, वह आज पूरा हो रहा है। इस योजना के तहत हर 15वें दिन गोबर विक्रेताओं को भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में जमा की गई है। इस योजना से 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 20 अगस्त को किया जाएगा। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
प्रदेश में शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
प्रदेश में आज से शुरू हुई शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में तेंदूपत्ता संगहण कार्य में लगे पंजीकृत संग्राहक परिवार के मुखिया (50 वर्ष से अधिक आयु न हो) की सामान्य मृत्यु पर नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को 2 लाख रूपए की अनुदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना से मृत्यु होने पर दो लाख रूपए अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में एक लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि दी जाएगी।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप तेन्दूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशुद्ध रूप से वन विभाग द्वारा संचालित होने वाली शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बीमित किए जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संचालित बीमा योजना के बंद होने के कारण प्रदेश सरकार द्वारा यह सामाजिक सुरक्षा योजना तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत बीमा दावा के प्रकरणों का तत्परता से निराकरण एवं पीड़ित परिवार को एक माह के भीतर दावा राशि का भुगतान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि संग्राहक परिवार के मुखिया की 50 से 59 आयु वर्ष के बीच सामान्य मृत्यु होती है, तो 30 हजार रूपए, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 75 हजार रूपए, दुर्घटना में पूर्ण विकलांगता की स्थिति पर 75 हजार रूपए और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 37 हजार 500 रूपए की सहायता अनुदान राशि परिवार के नामांकित व्यक्ति अथवा उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
इस अवसर पर मंत्री सर्वश्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, ताम्रध्वज साहू, टी. एस. सिंहदेव, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिव कुमार डहरिया, कवासी लखमा, गुरू रूद्र कुमार, अमरजीत भगत, श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी एवं चंद्रदेव राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, श्री रूचिर गर्ग, श्री विनोद वर्मा, मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू एवं अमिताभ जैन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वर्षों से काबिज वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से वनवासियों को खुशी है, वहीं अब वे काबिज वन भूमि पर बेदखली के भय से मुक्त होकर कृषि कार्य कर रहे हैं।
कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलर के कालीराम को वन भूमि का मालिकाना हक मिलने से उनके जीवन में खुशियों की बहार आ गई है। राज्य शासन द्वारा वन अधिकार पट्टा वितरण करने की योजना की सराहना करते हुए श्री कालीराम कहते हैं कि वर्षों से काबिज 2 एकड़ वन भूमि का वन अधिकार पट्टा मिलने से मेरी चिंता दूर हो गई है और बेदखली का भय भी समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा मनरेगा के तहत मेरी उबड़-खाबड़ जमीन पर समतलीकरण का कार्य होने से जहां मेरी भूमि कृषि योग्य हो गई है। वहीं मेरे द्वारा 2 एकड़ में धान की फसल लगाई गई है। कालीराम अपने खेत में लहलहाती फसलों को देखकर भविष्य में होने वाली आमदनी के बारे में सोच कर काफी खुश हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा वनवासियों और किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
भिलाई नगर / शौर्यपथ / गोधन न्याय योजना के अंतर्गत निगम क्षेत्र के पंजीकृत 38 पशुपालकों को 89934 रूपए पहला भुगतान किया गया। इस योजना के तहत सबसे अधिक वार्ड-3 यादव मोहल्ला कोसा नगर निवासी मनोज यादव ने गोबर बेचकर 9296 रूपए कमाए। मनोज के पास 23 गाय और भैंस हैं। उन्होंने 20 जुलाई को ही पंजीयन कराया तथा 1 अगस्त तक गोधन न्याय योजना के अंतर्गत शहरी गौठान में 4648 किलोग्राम गोबर बेचा। श्री यादव को दो रूपए की दर से उन्हें बुधवार को समन्वय समिति ने बैंक के माध्यम से 9296 रूपए भुगतान किया गया। इसी प्रकार वार्ड-3 निवासी भरत लाल यादव ने 4032 किलोग्राम गोबर बेचा था। उन्हें 8065 रूपए भुगतान किया गया। योजना के नोडल अधिकारी व उपायुक्त अशोक द्विवेदी ने बताया कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत पशुपालक गोबर बेचने अपना पंजीयन निरंतर करा रहे हैं। इनमें से 38 हितग्राही 20 जुलाई से लगातार शहरी गौठान में गोबर बेच रहे हैं। इस तरह से 20 जुलाई से 1 अगस्त की अवधि में पंजीकृत 38 पशुपालकों से कुल 44,967 किलोग्राम खरीदी गई। जिसका पहला भुगतान बैंक खाते के माध्यम किया गया।
पशुपालक करवा सकते है पंजीयन
गोधन न्याय योजना के अंतर्गत कोई भी पशुपालक जोन कार्यालय से संपर्क कर पंजीयन करवा सकता है। निगम प्रशासन की ओर से चिन्हित स्थल पर ले जाकर गोबर बेच सकता है। जोन-1 अंतर्गत शहरी गौठान कोसा नगर, जोन-4 एसएलआरएम सेंटर में गोबर खरीदी की व्यवस्था की गई है। इसी तरह से जोन-2, जोन -3 और जोन-5 में भी गोबर खरीदा जाएगा। पंजीकृत हितग्राहियों के बैंक खाता के माध्यम से 15-15 दिन के अंतराल में भुगतान किया जाएगा।
गोधन न्याय योजना के नोडल अधिकारी ने की समीक्षा
निगम उपायुक्त अशोक द्विवेदी ने निगम के सभागर में गोधन न्याय योजना की समीक्षा की। सभी जोन आयुक्त को अपने क्षेत्र के चिन्हित स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने कहा। जल्द से जल्द से गोबर खरीदी शुरू करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने स्व सहायता समूह की महिलाओं को गोधन न्याय योजना की विस्तृत जानकारी भी दी तथा डॉक्यूमेंटेशन को लेकर अद्यतन करने कहा। बैठक में उपायुक्त तरूण पाल लहरे, लेखा अधिकारी जितेन्द्र ठाकुर, पीएमयू के शुभम पाटनी, सभी जोन आयुक्त और समन्वय समिति की महिलाएं मौजूद थी।
// 46 हजार 964 हितग्राहियों को 1.65 करोड़ रूपए का होगा भुगतान
शहीद महेन्द्र कर्मा को उनकी जयंती के अवसर पर अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि
// शहीद महेन्द्र कर्मा के नाम पर प्रदेश में शुरू होगी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना
// प्रदेश के 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिलेगा लाभ
// मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोबर विक्रेताओं से भी करेंगे चर्चा
// राम वन गमन पथ पर दिया जाएगा प्रस्तुतीकरण
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 5 अगस्त को अपने रायपुर निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार की अभिनव योजना 'गोधन न्याय योजनाÓ के तहत गोबर खरीदी का पहला भुगतान हितग्राहियों के खाते में अंतरित करने की प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे। श्री बघेल इस अवसर पर प्रदेश में शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना का भी शुभारंभ करेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री बघेल दोपहर 3 बजे शहीद महेन्द्र कर्मा की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे और वन मंत्री मोहम्मद अकबर का उद्बोधन होगा। मुख्यमंत्री 3.15 बजे गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर खरीदी की राशि का हितग्राहियों के खाते में अंतरण प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री बघेल इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों से चर्चा करेंगे। दोपहर 3.35 बजे मुख्यमंत्री शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना का शुभारंभ करने के बाद कार्यक्रम को सम्बोधित करेंगे। पर्यटन विभाग के अधिकारियों द्वारा दोपहर 3.50 बजे राम वन गमन पथ पर प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री बघेल गोधन न्याय योजना के तहत 20 जुलाई से 1 अगस्त तक गोबर खरीदी की पहली किश्त की राशि 5 अगस्त को सहकारी बैंक के माध्यम से हितग्राहियों के खाते में अंतरित करेंगे। राज्य में कुल 4140 गौठानों में पंजीकृत 65 हजार 694 हितग्राहियों में से 46 हजार 964 हितग्राही द्वारा 82 हजार 711 क्विंटल गोबर का विक्रय किया गया, जिसकी कुल राशि 2 रूपए प्रति किलो की दर से 1 करोड़ 65 लाख रूपए पशुपालकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। इस योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर के पशुपालकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिसमें 38 प्रतिशत महिला हितग्राही, 48 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 39 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 8 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत सामान्य वर्ग के हितग्राही हैं। गोबर खरीदी का आगामी भुगतान 15 अगस्त को किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत राज्य के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी और बालोद जिलों में सबसे अधिक गोबर विक्रय किया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में रायपुर एवं दुर्ग के पशुपालकों ने सबसे ज्यादा गोबर विक्रय किया गया है।
गोधन न्याय योजना देश में अपने तरह की प्रथम योजना है, जिसमें पशुपालकों, किसानों से 2 रूपए प्रति किलो (परिवहन व्यय सहित) की दर पर गौठानों में खरीदी की जा रही है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर इसका सहकारी समितियों के माध्यम से विक्रय किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से एक ओर पशुपालकों को आर्थिक लाभ होगा। दूसरी ओर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री बघेल ने राज्यपाल सुश्री उइके की राखी मिलने पर कहा: आपने मुझे स्नेह, आर्शीवाद और राखी भेजकर जो विश्वास व्यक्त किया है, वह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और सम्मान का विषय
मुख्यमंत्री ने बहन सुश्री उइके को पत्र के साथ उपहार में भेजी साड़ी(लुगरा)
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके द्वारा रक्षाबंधन पर्व पर भेजी गई राखी मिलने पर प्रसन्नता प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि रक्षाबंधन और भुजलिया पर्व के अवसर पर आपने मुझे स्नेह, आर्शीवाद तथा राखी भेजकर जो विश्वास व्यक्त किया है, वह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता तथा सम्मान का विषय है। श्री बघेल ने बहन सुश्री उइके को रक्षाबंधन पर्व की परंपरा अनुरूप भाई की तरफ से शुभकामनाओं सहित उन्हें नगद राशि और साड़ी उपहार में भेजी है।
मुख्यमंत्री बघेल ने बहन सुश्री उइके को लिखे पत्र में कहा है कि रक्षाबंधन का यह पर्व हमारे पारिवारिक संबंधों को नए शिखर पर पहुंचाने का माध्यम बना है। आपका संरक्षण मेरे और राज्य के लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने, कोरोना महामारी से निपटने और प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए आपने मेरा जो उत्साहवर्धन किया है, उसके लिए मैं सदैव आपका आभारी रहूूंगा।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह पावन पर्व हमारी महान संस्कृति के गरिमामय उत्कर्ष का प्रतीक भी है, जो बहनों के प्रति भाईयों के संकल्पों को सुदृढ़ बनाता है। आपने उत्तरदायित्वों के प्रति सजग करते हुए मुझे जो शुभकामनाएं प्रेषित की है, उसके लिए मैं कृतज्ञता व्यक्त करता हॅू तथा आपको विश्वास दिलाता हॅू कि आपकी भावनाओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरी निष्ठा तथा परिश्रम से करूंगा।
- मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के प्रथम चरण में लगभग पांच हजार बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने में मिली थी सफलता
- दुर्ग जिले के अभियान में नवाचार भी शामिल, हर महीने हो रहा वजन त्योहार और बच्चों के बढ़त का रखा जा रहा रिकार्ड
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुपोषण से मुक्ति को प्रदेश के सबसे प्राथमिकता के कार्यों में रखा है। इसका व्यापक असर मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सफलता में दिखा है। पहले चरण में दुर्ग जिले में ही 4800 बच्चे कुपोषण के दायरे से बाहर आये। अब शेष बच्चों को कुपोषण के दायरे से निकालने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के द्वितीय चरण की शुरूआत हो रही है। अगले तीन सौ दिनों का लक्ष्य लेकर इस योजना में काम किया जाएगा। आज सभी जनप्रतिनिधियों ने घरों में बच्चों के लिए सुपोषण टोकरी देकर इस योजना की शुरूआत की।
कलेक्टर डाॅक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे भी ग्राम अछोटी पहुंचे। वहां उन्होंने रूही देशमुख को सुपोषण की टोकरी भेंट किया। कलेक्टर ने इस मौके पर बच्चों के परिजनों से कहा कि बच्चे के शुरूआती पांच साल उसके आगे का भविष्य तय करते हैं। यदि इस दौरान बच्चे के पोषण का पूरा ध्यान रखा तो निश्चित ही बच्चा शारीरिक मानसिक रूप से मजबूत होगा जिससे उसका भविष्य उज्ज्वल होगा। इसी के अंतर्गत आपको सुपोषण टोकरी दी गई है। चूंकि अभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद है इसलिए कार्यकर्ता आपके बच्चे के लिए घर में ही रेडी-टू-ईट छोड़ जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने हम सभी को निर्देशित किया है कि कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। इसके लिए हम लोगों ने डीएमएफ मद से बच्चों के पोषण के लिए विशेष राशि रखी है। छह माह से तीन साल तक के बच्चों के लिए हम लोग विशेष रूप से गर्म आहार देंगे। ऐसे बच्चों की संख्या जिले में सात हजार है। अभी लाकडाउन है इसलिए सामग्री घर में ही पंहुचा दी जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि आंगनबाड़ी की दीदी लोग आपसे गृह भेंट करने आते रहेंगे। आप उनके द्वारा दिये गए सुझावों पर अमल करें। इससे बच्चा बहुत तेजी से पोषित होगा। इस मौके पर कलेक्टर ने आंगनबाड़ी क्रमांक 3 भी देखा। वहां सुपोषण वाटिका देखकर उन्होंने खुशी जताई। यहां भाजियों और पपीते के साथ मुनगा के पौधे भी रोप दिये गए हैं। उन्होंने कार्यकर्ता की प्रशंसा करते हुए कहा कि आपका काम देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने सरपंच श्री घनश्याम दिल्लीवार तथा जनपद सदस्य श्री टिकेश्वरी लाल देशमुख को भी बधाई दी।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और रुचि से सुपोषण अभियान कारगर तरीके से आगे बढ़ रहा है। आपके हाथों में आपके गांव का उज्ज्वल भविष्य है। इस दिशा में आप जितना काम करेंगे, गांव का भविष्य उतना ही मजबूत होगा। इस मौके पर परियोजना अधिकारी श्री अजय साहू, सुपरवाइजर श्रीमती देवकी साहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दिनेश्वरी दिल्लीवार, आशालता दिल्लीवार तथा माया रामटेके भी उपस्थित रहे।
क्या है दुर्ग माडल में खास-
जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि दुर्ग में सुपोषण अभियान में दो खास बातें हैं। पहला तो यह कि हम लोग हर महीने बच्चों के वजन ले रहे हैं। जो पंद्रह से 20 तारीख के बीच होता है। इनके आंकड़े एनआईसी की वेबसाइट में अपलोड हो जाते हैं। हमारे पास हर बच्चे के ग्रोथ का रिकार्ड है। इससे हमें सुपोषण मिशन को ट्रैक करने में आसानी होती है। कमजोर क्षेत्रों के लिए हम विशेष रणनीति बनाते हैं और अच्छा कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने में हमें इससे मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को चिक्की आदि बहुत प्रिय होते हैं। इससे उन्हें स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ भी मिलता है और हम उन्हें इसी बहाने आवश्यक प्रोटीन भी दे पाते हैं। जैन ने कहा कि हमने सुपोषण वाटिका भी विकसित की है। पूरे जिले में बारह हजार मुनगा के पौधे भी लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने सपरिवार कौशल्या माता मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की , छत्तीसगढ़ सरकार ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ में प्रस्तावित 09 स्थलों के विकास के लिए बनाया है 137.45 करोड़ का कान्सेप्ट प्लान ,चंदखुरी मंदिर के सामने बायपास सड़क की स्वीकृति: राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा भी खुलेगी , पर्यटकों की सुविधा के लिए स्थलों में पेयजल, शौचालय, विद्युतीकरण, रेस्टोरेंट, पहुंच मार्ग बनाये जाएंगे , मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में लगाया बेल का पौधा
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर के समीप माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी में शीघ्र ही भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्यों के साथ चंदखुरी पहुंचकर वहां स्थित माता कौशल्या के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सौन्दर्यीकरण और परिसर के विकास के लिए तैयार परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर के सौन्दर्यीकरण के दौरान मंदिर के मूलस्वरूप को यथावत रखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ पर पडऩे वाले महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसकी शुरूआत चंदखुरी स्थित माता कौशल्या के मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्य के बीते 22 दिसम्बर को भूमि-पूजन के साथ कर दी गई है। भव्य मंदिर की निर्माण की कार्ययोजना में परिसर में विद्युतीकरण, तालाब का सौंदर्यीकरण, घाट निर्माण, पार्किंग, परिक्रमा पथ का विकास आदि कार्य शामिल किए गए हैं।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। यहां कण-कण में भगवान राम बसे हुए है। भगवान राम ने वनवास का बहुत सा समय यहां व्यतीत किए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भगवान राम के वन गमन मार्ग को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित कर रही है ताकि इन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिल सके। श्री बघेल ने कहा कि चंदखुरी में 15 करोड़ की लागत से सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर यहां तालाब के बीच से होकर गुजरने वाले पुल की मजबूती के साथ ही यहां परिक्रमा पथ, सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला और शौचालय बनाने कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौन्दर्यीकरण कार्य का भूमिपूजन हो गया है यहां अगस्त के तीसरे सप्ताह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणों की मांग पर मंदिर के पास से बायपास सड़क की स्वीकृति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। वहीं ग्राम वासियों की सहुलियत को देखते हुए चंदखुरी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए है। श्री बघेल ने इस अवसर पर मंदिर परिसर पर बेल और उनकी धर्मपत्नी ने महुआ का पौधा भी रोपा। इसके साथ ही परिसर में आवंला, पीपल, अमरूद और करंज आदि के पौधे भी लगाए गए। मुख्यमंत्री ने इन रौपे गए पौधों पर सेरीखेड़ी महिला समूह द्वारा बांस से बनाए जा रहे ट्री-गार्डो का लगवाया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणजनों से गौठान और गोधन न्याय योजना सहित गांव में उपलब्ध अन्य सुविधाओं की चर्चा की। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, जनपद पंचायत आरंग के अध्यक्ष खिलेश देवांगन, ग्राम पंचायत चंदखुरी की सरपंच श्रीमती मालती धीवर और कौशल्या माता समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र वर्मा और ग्रामीणजन उपस्थित थे।
शौर्यपथ विचार / गाय का गोबर कई मायनों में हिन्दू धर्म के लिए अलग अलग महत्तव रखता है . घर के आँगन में गोबर की लिपाई , पूजा स्थल में गोबर से लिपना शुभ माना जाता है . गाय के गोबर से ईंधन का उपयोग प्रदुषण के लिए अन्य ईंधनो की अपेक्षा कम हानिकारक है , जमीन की उपजाऊ क्षमता की बढ़ोतरी गाय के गोबर से बने खाद से बढती है , गोबर गैस से ईंधन का निर्माण किया जा सकता है , गोबर से पेपर , गमले , अगरबत्ती आदि कई उपयोगी वस्तुओ का निर्माण किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है . ऐसे कई उपयोगी वस्तुओ के लिए गोबर एक महत्तवपूर्ण पदार्थ है .
ऐसी ही कई परिकल्पना को जमीनी स्तर पर लाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने गोबर का क्रय करने की योजना शुरू की चूँकि ये योजना कांग्रेस नीत सरकार ने शुरू की तो इसे नीचा दिखाने की कसार विपक्ष भला कैसे भूल सकती है और गोधन न्याय योजना के शुरू होते ही शुरू हो गयी विपक्ष की अनगर्ल तथ्यहीन विरोध की वाणी किन्तु विपक्ष इस विरोध में ये भी भूल गए कि गोबर से निर्मित उत्पाद के लिए केंद्र सरकार ने पहले भी कई योजनाये बनाई और स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित भी किया साल २०१८ में केन्द्रीय मन्त्रिय गिरिराज ने 12 सितंबर को कुमारप्पा नेशनल हेंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गोबर से बने पेपर कैरी बैग को लॉन्च किया था। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने गोबर क्रय करने का निर्णय लेकर छोटे छोटे रोजगार के अवसर तो प्रदान किये साथ ही उन लोगो की नींद भी उड़ा दी जो खाद व उर्वरक के नाम पर प्रतिवर्ष करोडो का मुनाफा करते है किन्तु जमीन की उर्वरक शक्ति को खत्म करने में भी अपरोक्ष रूप से अपना योगदान देते है . सरकार के द्वारा गोबर कराया करने से कई तरह के उत्पाद तो तैयार होंगे ही जो पर्यावरण के लिए तो फायदेमंद रहेंगे ही वही जमीनों की पैदावार क्षमता को भी जैविक खाद के रूप में बढ़ाएंगे . प्रकृति को संतुलन रखने के लिए ऐसे कदम सराहनीय है जो भविष्य में रोजगार के अवसर तो प्रदान करेंगे ही . आत्मनिर्भरता के मोदी सरकार के प्रयासों पर भी पंख लगेंगे . खैर विपक्ष के तथ्यहीन विरोध को दरकिनार करते हुए प्रदेश सरकार ने गोधन न्याय योजना की शुरुवात तो कर ही दी है और सरकार इस गोधन ( गोबर ) का किस तरह उपयोग करती है ये भी धीरे धीरे स्पष्ट हो जायेगा .
आइये हम बताते है गोबर का उपयोग रोजगार के किस किस क्षेत्र में आमदनी बढाने के लिए किया जा सकता है जिस पर केंद्र सरकार भी गंभीर है सिवाय अंध भक्ति से लिप्त लोगो के ....
अगर आप गाय के गोबर से पैसा कमाना चाहते हैं तो केंद्र सरकार आपका सहयोग करने को तैयार है। कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गाय के गोबर से पेपर बनाने की विधि इजाद की गई है। इस विधि को अब 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' के तहत आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। मतलब अब आप भी इस प्लांट को लगाकर गोबर से पैसे बना सकते हैं। जयपुर स्थित कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (केएनएचपीआई) के डायरेक्टर ए.के. गर्ग ने गांव कनेक्शन से बताया, ''गाय के गोबर से हैंडमेड पेपर तैयार किया जा रहा है। इस पेपर की क्वालिटी बहुत अच्छी है। इससे कैरी बैग भी तैयार किया जा रहा है। जैसा की प्लास्टिक बैग बैन हो रहे हैं, ऐसे में पेपर के कैरी बैग अच्छा विकल्प हैं।'
'' ए.के गर्ग इस प्लांट की लागत पर कहते हैं, ''ये तो क्वांटिटी (मात्रा) पर निर्भर करता है। 5 लाख से लेकर 25 लाख तक में प्लांट लगाए जा सकते हैं। चूंकि ये हैंडमेड पेपर हैं तो इससे हर प्लांट में कुछ लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अगर 15 लाख में कोई प्लांट लगाता है तो इसमें 10 से 12 लोगों को रोजगार मिल सकता है।''
एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करने वाली हैंडमेड पेपर एंड फाइबर इंडस्ट्री के डायरेक्टर के.जे. भोसले ने बताया, ''गोबर से पेपर बनाने की विधि से रोजगार मिल सकेगा। इससे पेपर के अच्छे कैरी बैग बनने की जानकारी मिली है। जयपुर के केएनएचपीआई में तो इसकी शुरुआत भी हो गई है। जिसे भी ये प्लांट लगाना हो वो एक बार जयपुर में बन रहे पेपर के कैरी बैग को देख सकता है। इससे उसे प्रोत्साहन भी मिलेगा।'

केंद्रीय मंत्री ने किया था लॉन्च (२०१८)
इससे पहले केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री गिरिराज सिंह ने 12 सितंबर को कुमारप्पा नेशनल हेंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट में गोबर से बने पेपर कैरी बैग को लॉन्च किया था। इस दौरान उन्होंने कहा, ''गाय के गोबर से बने उत्पाद गुणवत्ता में बेहतर हैं और किफायती भी हैं. देशभर में इन्हें पसंद किया जा रहा हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का ही परिणाम हैं कि किसान गाय के गोबर से भी पैसा कमा सकेगा.'' केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अधिकारियों को गोबर से कागज बनाने की यूनिट लगाने के प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर मंत्रालय भेजने का निर्देश भी दिया थ। इसलिए अधिकारी प्रोजेक्ट को लैब से जमीन पर लाने के लिए जुटे हुए हैं।
पीएम मोदी भी गिना चुके हैं गोबर की उपयोगिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पशुओं के अपशिष्ठ (यानि गोबर-गोमूत्र) से कमाई की बात करते रहे हैं। पीएम मोदी ने मन की बात में कहा था, ''गोबर भी किसानों की कमाई का जरिया हो सकता है। किसान गोबर की खाद अपने खेतों के लिए ही नहीं बल्कि उसे ज्यादा मात्रा में उत्पादन कर कारोबार भी कर सकते हैं। सरकार की गोबरधन स्कीम के जरिए वेस्ट को एनर्जी में बदलकर इसे आय का जरिया बनाया जा सकता है।'' सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में पशुओं से हर साल 100 मिलियन टन गोबर मिलता है जिसकी कीमत 5,000 करोड़ रुपए है। इस गोबर का ज्यादातर प्रयोग बायोगैस बनाने के अलावा कंडे और अन्य कार्यों में किया जाता है।
कमाई का जरिया बन रहा गोबर
गोबर से बन रहे गमले और अगरबत्ती गोबर से बना गमला इलाहाबाद जिले के कौड़िहार ब्लॉक के श्रींगवेरपुर में स्थित बायोवेद कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान में गोबर से बने उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां गोबर से गमले और अगरबत्ती जैसे कई उत्पाद बनाए जाते हैं। संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ. हिमांशू द्विवेदी बताते हैं, "हमारे यहां गोबर की लकड़ी भी बनाई जाती है, इसका हम प्रशिक्षण भी देते हैं। इसे गोकाष्ठ कहते हैं। इसमें लैकमड मिलाया गया है, इससे ये ज्यादा समय तक जलती है। गोकाष्ठ के साथ ही गोबर का गमला भी काफी लोकप्रिय हो रहा है।"
गोबर से बायो सीएनजी बनाने का प्लांट
गोबर से बायो सीएनजी भी बनाई जाने लगी है। ये वैसे ही काम करती है, जैसे हमारे घरों में काम आने वाली एलपीजी। लेकिन ये उससे काफी सस्ती पड़ती है और पर्यावरण की भी बचत होती है। बॉयो सीएनजी को गाय भैंस समेत दूसरे पशुओं के गोबर के अलावा सड़ी-गली सब्जियों और फलों से भी बना सकते हैं। ये प्लांट गोबर गैस की तर्ज पर ही काम करता है, लेकिन प्लांट से निकली गैस को बॉयो सीएनजी बनाने के लिए अलग से मशीनें लगाई जाती हैं, जिसमें थोड़ी लागत तो लगती है लेकिन ये आज के समय को देखते हुए बड़ा और कमाई देने वाला कारोबार है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले विशाल अग्रवाल हाईटेक मशीनों से मदद से बॉयो सीएनजी बना रहे हैं, उनकी न सिर्फ सीएनजी हाथो हाथ बिक जाती है, बल्कि अपशिष्ट के तौर पर निकलने वाली स्लरी यानी बचा गोबर ताकतवर खाद का काम करता है। कानपुर से करीब 35 किमी. दूर ससरौल ब्लॅाक में लगभग पौने दो एकड़ में 5,000 घन मीटर का बायोगैस प्लांट लगा हुआ है।

गोबर से बना दिया 'वैदिक प्लास्टर'
हरियाणा के डॉ शिवदर्शन मलिक ने देसी गाय के गोबर से एक ऐसा 'वैदिक प्लास्टर' बनाया है जिसका प्रयोग करने से गांव के कच्चे घरों जैसा सुकून मिलेगा। वर्ष 2005 से वैदिक प्लास्टर की शुरुआत करने वाले शिवदर्शन मलिक का कहना है, "हमें नेचर के साथ रहकर नेचर को बचाना होगा, जबसे हमारे घरों से गोबर की लिपाई का काम खत्म हुआ तबसे बीमारियां बढ़नी शुरु हुईं। देसी गाय के गोबर में सबसे ज्यादा प्रोटीन होती है। जो घर की हवा को शुद्ध रखने का काम करता है, इसलिए वैदिक प्लास्टर में देसी गाय का गोबर लिया गया है।" शिवदर्शन बताते हैं, "हमारे देश में हर साल 100 मिलियन टन गोबर निकलता है। जिसका सही तरह से उपयोग न होने से ज्यादातर बर्बाद होता है। देसी गाय के गोबर में जिप्सम, ग्वारगम, चिकनी मिट्टी, नीबूं पाउडर आदि मिलाकर इसका वैदिक प्लास्टर बनाते हैं जो अग्निरोधक और उष्मा रोधी होता है। इससे सस्ते और इको फ्रेंडली मकान बनते हैं, इसकी मांग ऑनलाइन होती है। हिमाचल से लेकर कर्नाटक तक, गुजरात से पश्चिमी बंगाल तक वैदिक प्लास्टर से 300 से ज्यादा मकान बन चुके हैं।"

- 85 करोड़ 61 लाख रुपए के 435 विकास कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 16 करोड़ 90 लाख रुपए के 178 कार्यों का किया लोकार्पण,
-शानदार अधोसंरचना के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं का आगाज
कम्युनिटी हाल के लोकार्पण के दौरान पाटन के नागरिकों के साथ किया संवाद भी
दुर्ग / शौर्यपथ / पाटन ब्लाक में हरेली तिहार के अवसर पर गोधन न्याय योजना की शुरूआत के साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 102 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया। लगभग 85 करोड़ रुपए के 435 कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 16 करोड़ रुपए के 178 विकास कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री के हाथों हुआ। इन विकास कार्यों से पाटन ब्लाक के लोगों की अधोसंरचना संबंधी जरूरत तो पूरी होगी ही, अत्याधुनिक सुविधाओं वाले शहर के रूप में भी पाटन पूरी तरह तैयार होगा। इंडोर स्टेडियम, अत्याधुनिक कम्युनिटी हाल, स्वीमिंग पुल के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री के द्वारा ग्राम सिकोला में पथ वृक्षारोपण का लोकार्पण भी किया गया। इसमें 44 किलोमीटर सड़को में लगभग इतने ही पेड़ लगाए गए। इस मौके पर जिले के सभी ब्लाकों में 10 ग्राम पंचायत इस तरह 30 ग्राम पंचायतों में गोधन न्याय योजना का भी शुभारंभ हुआ। 31 जुलाई तक सभी 216 गौठानों में यह योजना आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पाटन के कम्युनिटी हाल के लोकार्पण के दौरान पाटन के नागरिकों के साथ संवाद भी किया।
पाटन नगर को सामुदायिक भवन जीर्णोद्धार की सौगात- प्रमुख लोकार्पण कार्यों में पाटन में वार्ड क्रमांक 15 में 34 लाख रुपए की लागत से निर्मित डाॅ. खूबचंद बघेल सामुदायिक भवन जीर्णोद्धार कार्य के साथ ही इसी वार्ड में 24 लाख रुपए की लागत से निर्मित गौठान, विभिन्न वार्डों में 32 लाख रुपए से डामरीकरण कार्य, नगर के विभिन्न विकास वार्डों में 73 लाख रुपए के विकास कार्य शामिल है। इस प्रकार नगर पंचायत पाटन में विभिन्न विकास कार्यों के लिए एक करोड़ 65 लाख रुपए की राशि से निर्मित संरचनाओं का लोकार्पण किया गया।
4 नलजल आवर्धन योजनाओं का शुभारंभ- कुल एक करोड़ 83 लाख रुपए की राशि से निर्मित 4 नलजल आवर्धन योजनाओं का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। यह योजनाएं पतोरा, ढौर, भानसुली और खुड़मुड़ा में आरंभ हो जाएंगी। इनकी शुरूआत से इन चार गांवों के लोगों की पेयजल की समस्या पूरी तरह हल हो जाएगी।
सोलर एनर्जी के कार्य भी होंगे लोकार्पित- पाटन में दो करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सोलर पावर प्लांट के माध्यम से स्ट्रीट लाइट स्थापना कार्य का लोकार्पण भी किया गया। इसी प्रकार 170 सोलर ड्यूल पंप के माध्यम से पेयजल व्यवस्था के कार्यों का लोकार्पण भी हुआ। इसकी लागत 7 करोड़ 41 लाख रुपए है। इस प्रकार 9 करोड़ 41 लाख रुपए की लागत के 178 कार्यों का लोकार्पण सोलर एनर्जी से संबंधित कार्यों का हुआ।
29 ऐसे कार्य जिनसे गुलजार होगा पाटन- नकटा तालाब का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का भूमिपूजन भी इस अवसर पर हुआ। पांच करोड़ 97 लाख रुपए की लागत से इस तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य होगा। तालाब से शहर की खूबसूरती भी बढ़ेगी और गहराई होने से वाटर लेवल भी बढ़ेगा। इसी तरह से 2 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से हनुमान तालाब का गहरीकरण भी होगा। स्पोर्ट्स फैसिलिटी बढ़ाने के लिए वार्ड क्रमांक 5 में मल्टी परपस इंडोर स्पोर्ट्स हाल का भूमिपूजन हुआ। साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से इसी वार्ड में स्वीमिंग पुल निर्माण कार्य भी होगा। 21 लाख 55 हजार रुपए की लागत से प्रेस क्लब के भवन का भूमिपूजन और 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाले कृषक सदन का भूमिपूजन भी इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही नगर के विकास एवं बुनियादी संरचनाओं से संबंधित अनेक कार्यों का भूमिपूजन भी मुख्यमंत्री ने किया। इस प्रकार 40 करोड़ 72 लाख रुपए के 29 अधोसंरचनाओं से संबंधित कार्यों का भूमिपूजन मुख्यमंत्री ने किया।
जनपद पंचायत संसाधन केंद्र का भी भूमिपूजन- इस मौके पर जनपद पंचायत संसाधन केंद्र का भूमिपूजन भी मुख्यमंत्री ने किया। इसका निर्माण 1 करोड़ 26 लाख रुपए की राशि से कराया जाएगा। इसके साथ ही झीट, मर्रा और सांतरा में भी धान संग्रहण केंद्र का भूमिपूजन भी हुआ।
19 जलआवर्धन योजनाओं का भी भूमिपूजन- मुख्यमंत्री द्वारा पाटन ब्लाक के 19 गांवों में 4 करोड़ 84 लाख रुपए की लागत से 19 योजनाओं का भूमिपूजन किया गया। इनमें से मुड़पार, तर्रीघाट, सिपकोन्हा, केसरा, छाटा, परसाही, उफरा, सोनपुर, बोरेन्दा, गुढ़ियारी, मगरघटा, सिकोला, अचानकपुर, चुनकट्टा, अमलेश्वर, गोडपेण्ड्री, नवागांव, तेलीगुण्डरा और फेकारी में नलजल आवर्धन योजनाओं का भूमिपूजन किया।
26 करोड़ रुपए की लागत से नहरों के जीर्णोद्धार का कार्य- मुख्यमंत्री द्वारा इस अवसर पर 6 करोड़ रुपए की लागत में बेलौदी जलाशय तथा नहरों का जीर्णोद्धार कार्य, 4 करोड़ 33 लाख रुपए की लागत से कौही उदवहन सिंचाई योजना का आधुनिकीकरण एवं नहरों की लाइनिंग, 3 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत से गुजरा व्यपवर्तन नहर का मरम्मत कार्य शामिल है। इसके साथ ही मगरघटा, कापसी, सांकरा माइनर का जीर्णोद्धार , सेलूद तथा तर्रा के निरीक्षण गृह का जीर्णोद्धार कार्य भी शामिल है।
हितग्राहियों को वितरण कार्यक्रम- इस अवसर पर 217 स्वसहायता समूहों को 78 लाख रुपए की राशि सक्षम योजना अंतर्गत प्रदाय की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुपोषण मिशन के द्वितीय चरण की शुरूआत भी की गई। छत्तीसगढ़ महिला कोष अंतर्गत चेक का वितरण भी किया गया। कृषि विभाग द्वारा स्प्रिंकलर एवं मिनीकीट वितरण भी इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही श्रम विभाग की योजनाओं के हितग्राहियों को भी योजनाओं का लाभ दिया गया।
लगभग चौवालीस किमी सड़कों पर चौवालीस हजार पौधे लगाने के मातृछाया पथ वृक्षारोपण कार्यक्रम में ग्राम सिकोला में लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा प्रकृति को सहेज कर विकास की ओर सतत बढ़ा रहे कदम
दुर्ग । शौर्यपथ । हम ऐसी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं जिनके माध्यम से प्रकृति के संरक्षण के साथ ही लोगों के आर्थिक बेहतरी का रास्ता भी खुलता है। मातृछाया पथ वृक्षारोपण के लोकार्पण मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा। इस मौके पर उन्होंने बेल और कृष्ण वट पौधे को रोपा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्ग जिले में वन होम, वन ट्री अभियान चलाया गया था। इसमें भी लोगों ने बहुत उत्साह से हिस्सा लेकर अपने घरों में पौधे लगाए। प्रकृति को सहेजने लोग इतने उत्साह से आगे आते हैं तो इस दिशा में अच्छा कार्य करने का हमारा उत्साह दोगुना हो जाता है।
उल्लेखनीय है कि इस योजना अंतर्गत 44 किमी रास्तों में चौवालीस हजार पौधे प्रमुख सड़कों पर रोपे गए हैं। इसमें खूबसूरत बात यह है कि इनमें केवल एक तरह के पौधे नहीं है जो आम तौर पर सड़क किनारे वृक्षारोपण में किये जाते हैं और पूरे माहौल में एकरसता सी आ जाती है। इसमें सत्रह प्रजाति के पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें बरगद और पीपल जैसे विशाल पेड़ों के पौधे रोपे गए हैं जो दीर्घजीवी होते हैं और ढेर सारा आक्सीजन भी देते हैं और भारतीय परंपरा में जिनका विशेष महत्व है। इसके साथ ही आम, जामुन और इमली जैसे पेड़ों के पौधे लगाए गए हैं। यह फलदार पौधे छायादार और पथिकों के लिए भी उपयोगी होंगे। अर्जुन जैसा मेडिसिनल प्लांट भी लगाया गया है और हर्रा, बहेड़ा तथा आंवला जैसे मेडिसिनल प्लांट भी लगाए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। मातृछाया पथ वृक्षारोपण के लिए व्यापक स्तर पर पौधरोपण किए गए हैं। पौधरोपण के साथ ही इन्हें सहेजने की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है। इस अवसर पर मातृछाया पथ लोकार्पण स्थल पर भी अतिथियों ने पौधे रोपे। इस मौके पर मुख्य सचिव आरपी मंडल, पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू , कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती एम गीता, प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुवा,मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आईजी विवेकानंद सिन्हा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी श्रीनिवास राव, वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना, संचालक कृषि नीलेश क्षीरसागर, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर, डीएफओ केआर बढ़ाई, जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
इस मौके पर विधायक भिलाई देवेंद्र यादव, खनिज विकास निगम के चेयरमैन गिरीश देवांगन, पूर्व विधायक प्रदीप चौबे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक साहू एवं जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।
*पिछले साल खारून के किनारे लगाए गए थे पौधे-*
पिछले साल वन विभाग द्वारा खारून नदी के किनारे पौधे लगाए गए थे। नदी के कटाव को रोकने, तटबंध को मजबूत करने के लिए ऐसे पौधों का प्लांटेशन किया गया था जो मिट्टी की पकड़ को मजबूत करते हैं। नदी तट में प्लांटेशन से नदियों में पानी का स्तर भी बढ़ता है क्योंकि मिट्टी अधिक जल संरक्षण कर रखती है। यह ऐसा काम है जिसके दीर्घकालीन अच्छे नतीजे निकलते हैं।
*ऐसा निवेश जो भविष्य के लिए बेहद उपयोगी-*
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार द्वारा ऐसी योजनाओं पर काम हो रहा है जो इस पीढ़ी को ही नहीं, अगली कई पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होंगे। मिट्टी की ऊर्वरता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने गोधन न्याय योजना आरंभ की जिससे गोबर खरीद कर कंपोस्ट खाद के माध्यम से जैविक खेती की दिशा में बड़ा काम होगा। व्यापक पौधरोपण के माध्यम से मिट्टी का संरक्षण तो होगा ही। भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ेगा।
*इन रास्तों में हुआ पौधरोपण-*
मड़ियापार से हिर्री, अमलेश्वर से झीट, पाटन सिकोला तुलसी मार्ग, भिलाई 3 से तर्रा, खुड़मुड़ी-झीट-मोतीपुर, पाटन-रानीतराई-जामगांव आर, सेलूद जामगांव आर, गाड़ाडीह से फुण्डा, बोरसी से उतई, मोतीपुर-जामगांव-लोहरसी, खर्रा से बरबसपुर, पाटन-मोतीपुर मुख्य मार्ग से सिपकोन्हा, बीजाभाठ से सुरपा, पाटन-मोतीपुर मुख्य मार्ग से ठकुराइनटोला, फुण्डा नहर से अरसनारा, सिकोला से सोनपुर, गुढ़ियारी से कानाकोट, दुर्ग-राजनांदगांव महमरा मुख्य मार्ग, रवेली से राखी और मानिकचैरी से गोड़पेण्ड्री।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
