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June 01, 2026
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आस्था / शौर्यपथ /आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस वर्ष यह पर्व 11 जुलाई 2021 रविवार से आषाढ़ शुक्र प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है जो आषाढ़ शुक्ल नवमी अर्थात 18 जुलाई 2021 रविवार तक रहेगा। आओ जानते हैं कि गुप्त नवरात्रि क्या है? क्यों मनाई जाती है? दूसरी नवरात्रि से क्यों अलग है?
गुप्त नवरात्रि क्या है?
हिन्दू माह के अनुसार नवरात्रि वर्ष में 4 पवित्र माह में आती है। यह चार माह है:- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी या बसंतनवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी नवरात्रि या शारदीय नवरात्रि कहते हैं। दोनों के बीच 6 माह की दूरी है। बाकी बची दो आषाढ़ और माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं।
गुप्त अर्थात छिपा हुआ। इस नवरात्रि में गुप्त विद्याओं की सिद्धि हेतु साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में तंत्र साधनाओं का महत्व होता है और तंत्र साधना को गुप्त रूप से ही किया जाता है। इसीलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इसमें विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। साधकों को इसका ज्ञान होने के कारण या इसके छिपे हुए होने के कारण इसको गुप्त नवरात्र कहते हैं।
क्यों मनाई जाती है?
वसंत और शारदीय नवरात्रि गृहस्थों और सामान्य जनों के लिए है परंतु गुप्त नवरात्रि संतों और साधकों को लिए है। यह साधना की नवरात्रि है उत्सव की नहीं। इसलिए इसमें खास तरह की पूजा और साधना का महत्व होता है। यह नवरात्रि विशेष कामना हेतु तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए होती है। गुप्‍त नवरात्रि में विशेष पूजा से कई प्रकार के दुखों से मुक्‍ति पाई जा सकती है। अघोर तांत्रिक लोग गुप्त नवरात्रि में महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। यह नवरात्रि मोक्ष की कामने से भी की जाती है।
दूसरी नवरात्रि से क्यों अलग है?
1. वसंत या शारदीय नवरात्रि को प्रत्यक्ष और बाकी को गुप्त नवरात्रि कहते हैं।
2. प्रत्यक्ष नवरात्रि में नवदुर्गा की पूजा होती है परंतु गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा होती है।
3. प्रत्यक्ष नवरात्रि में सात्विक साधना, नृत्य और उत्सव मनाया जाता है जबकि गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक साधना और कठिन व्रत का महत्व होता है।
4. प्रत्यक्ष नवरात्रि को सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति हेतु मनाया जाता है जबकि गुप्त नवरात्रि को आध्‍यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति, सिद्धि, मोक्ष हेतु मनाया जाता है।
5. यह भी कहा जाता है कि प्रत्यक्ष नवरात्रि वैष्णवों की है और गुप्त नवरात्रि शैव और शाक्तों की है।
6. प्रत्यक्ष नवरात्रि की प्रमुख देवी मां पार्वती है जबकि गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवी मां काली है।

सेहत / शौर्यपथ / बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए योगा सबसे बेस्ट है। यदि आपके पास समय की कमी है, तो आप सुर्य नमस्कार के साथ अपनी वेट लॉस और फिटनेस जर्नी को शुरू कर सकते हैं। सुर्य नमस्कार को रोजाना सुबह अपने वार्मअप और स्ट्रेचिंग में शामिल करें।
सुर्य नमस्कार क्या है
सुर्य नमस्कार संस्कृत शब्द है, जो 12 योग आसन का एक समूह है। इसकी मदद आपको शारीरिक और मानसिक स्वास्थ दोनों से लाभ होता है। इस योग को वजन घटाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक के रूप में मान्यता दी गई है। यह आपके शरीर और मांसपेशियों को मजबूत करता है, साथ ही बल्ड फ्लो को ठीक रखने में मदद करता है। सांस के मरीजों के लिए भी ये अच्छा माना जाता है। वहीं शरीर को शेप में रखने में मदद मिलती है। वैसे तो योगा दिन में किसी भी समय हो सकती है, लेकिन इसे खाली पेट करना सही माना जाता है।
सुर्य नमस्कार के फायदे
यदि आप वजन घटाने के लिए सुर्य नमस्कार कर रहे हैं, तो आपको रोजाना इसका अभ्यास करने की जरूरत है। इसकी मदद से आपको कई फायदे मिल सकते हैं। जैसे:
-शरीर में लचीलापन
-ग्लोइंग त्वचा
-जोड़ों और मांसपेशियों को मजबूती
-बेहतर पाचन शक्ति
-अच्छा मानसिक स्वास्थ्य
-डिटॉक्सीफिकेशन और बल्ड सरक्यूलेशन
वजन कम करने के लिए सुर्य नमस्कार
अपने मन और शरीर दोनों को डिटॉक्सीफाई करने के लिए आसन से पहले और बाद में कम से कम 2 मिनट का ध्यान करें। साथ मन को खुश रखें और योग का आनंद लें।
इसका एक राउंड करने में लगभग 13.90 कैलोरी बर्न होती हैं, और वजन घटाने के लिए इसे 12 बार करें, लेकिन शुरूआत में इसके 5 सेट काफी हैं। धीरे-धीरे सेट बढ़ाएं तभी आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी।
ध्यान दें
अच्छे रिजल्ट के लिए हर आसन को कम से कम 5 सेकंड के लिए होल्ड करें। साथ ही इस आसन को सूर्य के सामने करने से आपको मदद मिलेगी क्योंकि यह आपके विटामिन डी को बढ़ाएगा।

ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / सीजन का असर आपकी त्वचा पर भी पड़ता है। जैसे -जैसे सीजन बदलती आपकी बॉडी भी उसी अनुसार ढलती है। ऐसे में सीजन कोई सा भी हो लेकिन त्वचा की केयर करना बेहद
जरूरी है। अगर आप घर पर ही अपनी त्वचा को निखारना पसंद करते हैं तो एक दिन में कभी भी आराम नहीं मिलेगा। इसके लिए आपको सप्ताह में कम से कम दो बार चेहरे की
देखभाल करना होगी। चॉकलेट सेहत के लिहाज से सेहतमंद जरूर है लेकिन फेस पर भी लगाने से अलग ही ग्लो आता है। और बारिश के सीजन में इसका ग्‍लो बेहतर आता है। तो
आइए जानते हैं मानसून सीजन में चॉकलेट फेस पैक कैसे लगाएं और इसको लगाने से क्या लाभ होते हैं।
सबसे पहले जानते हैं डार्क चॉकलेट फेस पैक लगाने के फायदे
1. बेजान त्वचा को सहारा -
रूखी त्वचा होने से किसी भी प्रकार की क्रीम नहीं टिकती है। चॉकलेट में मौजूद विशेष तत्वों की मदद से विटामिन सी आपकी त्वचा को हाइड्रेट रखता है।इससे आपकी त्वचा में नमी बनी रहती है और स्किन को ग्लो करने लगती है।
2.चेहरे को रखे मॉइश्चराइजर -चॉकलेट फेस मास्क लगाने के बाद आपको दिनभर अलग से किसी भी प्रकार का क्रीम लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें मौजूद तत्व त्वचा को माइश्‍चराइजड कर देते हैं। इसलिए रूखी त्वचा के लिए चॉकलेट फेस मास्‍क सबसे अच्‍छा माना जाता है। इसे लगाने से त्वचा का मॉइश्चराइजर भी बरकरार रहेगा।
3. झुर्रियों को कहे टाटा -चॉकलेट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फलैवेनोल जो एक तरह से त्वचा की रक्षा करते हैं। फेस मास्‍क लगाने से सनटैन खत्म होगा, समय से पहले आ रही
झुर्रियों को भी कम करता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण चेहरे में कसावट भी पैदा करता है।
आइए जानते हैं कैसे बनाएं डार्क चॉकलेट और मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक
सामग्री -डार्क चॉकलेट, मुल्तानी मिट्टी।
विधि -
डार्क चॉकलेट को पिघला लें। इसके बाद आधा कप डार्क चॉकलेट लें और 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी मिक्‍स कर दें। इन दोनों को अच्‍छे से मिक्‍स कर लें। अब इसे चेहरे पर लगा
लें और करीब 20 मिनट लगा रहने दें। सूखने के बाद नॉर्मल पानी से चेहरे को धो लें। लगे हुए फेस पैक निकालते वक्‍त ध्‍यान रहे कि उसे हल्‍के हाथों से गोल गोल घुमाएं किसी भीएक डायरेक्‍शन में।
धोने के बाद तौलिए की सहायता से चेहरे को हल्‍के हाथों से पौछें।
डार्क चॉकलेट, शहद और नींबू का फेस पैक
सामग्री -1 नींबू, शहद, और डार्क चॉकलेट।
विधि -आधा कटोरी डार्क चॉकलेट, आधा नींबू और आधा चम्मच शहद तीनों को अच्‍छे से मिक्‍स कर लें। और इसके बाद लगा लें। करीब 15 मिनट तक चेहरे पर मास्क लगा रहने
दें। इसके बाद नॉर्मल पानी से चेहरे को धो लें और लगे हुए फेस पैक निकालते वक्‍त ध्‍यान रहे कि उसे हल्‍के हाथों से गोल गोल घुमाएं किसी भी एक डायरेक्‍शन में। धोने के बाद
तौलिए की सहायता से चेहरे को हल्‍के हाथों से पौछें।

सेहत /शौर्यपथ / केला का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा होता है। इसमें मौजूद पोटेशियम, कैल्शियम, विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। दिल के मरीजों के लिए केले का सेवन लाभदायक होता हैै। साथ ही वजन कम करने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर की कमजोरी को दूर करता है। इसी के साथ केले के छिलके में भी कई सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें विटामिन बी, सी, ई पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा होती है। जिससे पिंपल्स और मुहांसे दूर करने में मदद मिलती है। आइए जानते हैं केले के छिलके से कैसे दाग धब्बे दूर होते हैं।
1.सबसे पहले केले के छिलकों को चेहरे पर अच्छे से रंगड़े। इसमें मौजूद
एंटीऑक्सीडेंट
दाग - धब्बों से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं।केले के छिलकों को रगड़ने के बाद अब चेहरे पर थोड़ा सा
शहद
लगा ले और
केले के छिलके की मदद से एक ही
डायरेक्शन
में रगड़ें। सप्ताह में 2 बार ऐसा करें। जल्द आपको फर्क नजर आने लगेगा।
2. अगर आप अंडे का प्रयोग करते हैं तो यह उपाय आपको झुर्रियां कम करने में मदद करेगा। केले के छिलकों को पहले पीस लें। इसके बाद एक अंडा मिक्स करें। दोनों को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगालीजिए। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। सप्ताह में कम से कम 2 बार इसका प्रयोग करें।
3. डार्क सर्कल होने से चेहरे की चमक चली जाती है। इसके लिए केले के छिलके का इस्तेमाल करें। जी हां, छिलके से सफेद रेशे निकाल उसमें एलोवेरा जेल मिक्स करें। और 15 मिनट के लिए आंखों के नीचे लगाएं। कुछ दिन तक लगातार इस्तेमाल करने के बाद आपको फर्क नजर आने लगेगा।

टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह अंतिम माह होता है इसके बाद चैत्र माह वैशाख, ज्येष्ठ और फिर आषाढ़। इस बार आषाढ़ का प्रारंभ अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 25 जून 2021 शुक्रवार को प्रारंभ होगा और 24 जुलाई शनिवार 2021 गुरु पूर्णिाम तक रहेगा। आओ जानते हैं इस माह के महत्व की 10 खासियत।
आषाढ़ मास का नाम पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र ऊपर रखा गया है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्र इन दोनों नक्षत्रों के मध्य रहता है। जिसकी वजह से इस महीने को आषाढ़ कहा जाता है।
1. किसानों का माह : आषाढ़ माह से ही वर्षा ऋतु की विधिवत शुरुआत मानी जाती है। कृषि के लिए ये मास बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
2. स्वच्छ जल ही पिएं : आषाढ़ माह में पौराणिक मान्यता के अनुसार इस माह में जल में जंतुओं की उत्पत्ति बढ़ जाती है अत: इस माह में जल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
3. सेहत का रखें ध्यान : आषाढ़ माह में पाचन क्रिया भी मंद पड़ जाती है अत: इस मास में सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस मास ही नहीं बल्की अगले तीन माह तक सेहत का ध्यान रखना चाहिए। इस महीने में जल युक्त फल खाने चाहिए। आषाढ़ में बेल बिलकुल भी न खाएं।
4. विष्णु उपासना और दान : आषाढ़ मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है। आषाढ़ मास के पहले दिन खड़ाऊं, छाता, नमक तथा आंवले का दान किसी ब्राह्मण को किया जाता है।
5. सो जाते हैं देव : इसी माह में देव सो जाते हैं। इसी माह में देवशयनी या हरिशयनी एकादशी होती है। इसी दिन से सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य बंद हो जाते हैं।
6. चतुर्मास का माह : आषाढ़ माह से ही चतुर्मास प्रारंभ हो जाता है। चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। इस अवधि में यात्राएं रोककर संत समाज एक ही स्थान पर रहकर व्रत, ध्यान और तप करते हैं।
7. कामनापूर्ति का माह : इस महीने को कामना पूर्ति का महीना भी कहा जाता है। इस माह में जो भी कामना की जाती है उसकी पूर्ति हो जाती है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का महान उत्सव भी मनाया जाता है।वर्ष के इसी मास में अधिकांश यज्ञ करने का प्रावधान शास्त्रों में बताया गया है।
8. गुप्त नवरात्रि का माह : वर्ष में चार नवरात्रि आती है:- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी या बसंत नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी या शारदीय नवरात्रि कहते हैं। दोनों के बीच 6 माह की दूरी है। बाकी बची दो आषाढ़ और माघ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। आषाढ़ माह में तंत्र और शक्ति उपासना के लिए 'गुप्त नवरात्रि' होती है।
9. मंगल और सूर्य की पूजा : इस माह में विष्णुजी के साथ ही जल देव की उपासना से धन की प्राप्ति सरल हो जाती है और मंगल एवं सूर्य की उपासना से ऊर्जा का स्तर बना रहता है। इसके अलावा देवी की उपासना भी शुभ फल देती है।
10. गुरु पूर्णिमा का महत्व : आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को बहुत ही खास माना जाता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को ही गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

आस्था /शौर्यपथ /आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। गुप्त नवरात्रि में प्रलय एवं संहार के देव महादेव एवं मां काली की पूजा का विधान है। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त सिद्धियों को अंजाम देते हैं और चमत्कारी शक्तियों के स्वामी बन जाते हैं। इस बार यह पर्व 11 जुलाई 2021, रविवार को आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है जो आषाढ़ शुक्ल नवमी अर्थात 18 जुलाई 2021, रविवार तक जारी रहेगा।
गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां-
गुप्त नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।
गुप्त नवरात्रि का महत्व-
देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
कलश स्थापना के मुहूर्त-
दिन 11 जुलाई, रविवार : कलश स्थापना का शुभ समय- लाभ और अमृत का चौघड़िया प्रातःकाल 9.08 मिनट से शुरू होकर 12.32 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त- दिन में 12.05 मिनट से 12.59 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में आषाढी गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना की जाएगी।

कलश स्थापना-
* सनातन धर्म में कोई भी धार्मिक कार्य आरंभ करने से पूर्व कलश स्थापना करने का विधान है। पृथ्वी को कलश का रूप माना जाता है तत्पश्चात कलश में उल्लिखित देवी- देवताओं का आवाहन कर उन्हें विराजित किया जाता है। इससे कलश में सभी ग्रहों, नक्षत्रों एवं तीर्थों का निवास हो जाता है।
* कलश स्थापना के उपरांत कोई भी शुभ काम करें वह देवी-देवताओं के आशीर्वाद से निश्चिंत रूप से सफल होता है।
* प्रथम गुप्त नवरात्रि में दुर्गा पूजा का आरंभ करने से पूर्व कलश स्थापना करने का विधान है। जिससे मां दुर्गा का पूजन बिना किसी विध्न के कुशलता पूर्वक संपन्न हो और मां अपनी कृपा बनाएं रखें।
* कलश स्थापना के उपरांत मां दुर्गा का श्री रूप या चित्रपट लाल रंग के पाटे पर सजाएं। फिर उनके बाएं ओर गौरी पुत्र श्री गणेश का श्री रूप या चित्रपट विराजित करें।
* पूजा स्थान की उत्तर-पूर्व दिशा में धरती माता पर सात तरह के अनाज, पवित्र नदी की रेत और जौं डालें। कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, अक्षत, हल्दी, सिक्का, पुष्पादि डालें।
* आम, पीपल, बरगद, गूलर अथवा पाकर के पत्ते कलश के ऊपर सजाएं।
* जौ अथवा कच्चे चावल कटोरी में भरकर कलश के ऊपर रखें उसके बीच नए लाल कपड़े से लिपटा हुआ पानी वाला नारियल अपने मस्तक से लगा कर प्रणाम करते हुए रेत पर कलश विराजित करें।
* अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करें जो पूरे नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए। विधि-विधान से पूजन किए जानें से अधिक मां दुर्गा भावों से पूजन किए जाने पर अधिक प्रसन्न होती हैं।
* अगर आप मंत्रों से अनजान हैं तो केवल पूजन करते समय दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' से समस्त पूजन सामग्री अर्पित करें। मां शक्ति का यह मंत्र चमत्कारी शक्तियों से सपंन्न करने में समर्थ है।
* अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजन सामग्री लाएं और प्रेम भाव से पूजन करें। संभव हो तो श्रृंगार का सामान, नारियल और चुनरी अवश्य अर्पित करें। नौ दिन श्रद्धा भाव से ब्रह्म मुहूर्त में और संध्याकाल में सपरिवार आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
क्या है गुप्त नवरात्रि-
हिन्दू धर्म में नवरात्रि मां दुर्गा की साधना के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि के दौरान साधक विभिन्न तंत्र विद्याएं सीखने के लिए मां भगवती की विशेष पूजा करते हैं। तंत्र साधना आदि के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद विशेष माने जाते हैं। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस नवरात्रि के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है।
मान्यतानुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान अन्य नवरात्रिों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्रि व्रत का उद्यापन करना चाहिए।
इन खास 17 पूजन सामग्री से देवी मां होंगी प्रसन्न, पढ़ें सूची
पूजन सामग्री की सूची-
1. मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र
2. लाल चुनरी
3. आम की पत्तियां
4. चावल
5. दुर्गा सप्तशती की किताब
6. लाल कलावा
7. गंगा जल
8. चंदन
9. नारियल
10. कपूर
11. जौ के बीच
12. मिट्टी का बर्तन
13. गुलाल
14. सुपारी
15. पान के पत्ते
16. लौंग
17. इलायची।

रायपुर / शौर्यपथ / राज्य के कक्षा पहली से आठवीं तक के सभी स्कूलों में ट्विनिंग ऑफ स्कूल कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा को तत्काल कार्यवाही करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए है। स्कूलों के प्राचार्य, शाला संकुलों से भी इसके लिए शत्-प्रतिशत स्कूलों में ट्विनिंग ऑफ स्कूल के बेहतर संचालन और सभी कार्यक्रमों को शाला संकुल की सभी स्कूलों में शीघ्र प्रारंभ करने हेतु निर्देशित करते हुए कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करें।
जिला मिशन समन्वयकों से कहा गया है कि शाला संकुल प्राचार्य अपने अधिनस्थ आने वाले सभी शासकीय और निजी स्कूलों की जोड़ी बनाकर उन्हें आपस में एक दूसरे से साझेदारी करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु निर्देशित करें। जोड़ी में कोई भी दो आसपास के स्कूल एक दूसरे के साझेदारी कर सकेंगे। इसकी सूची बनाकर सभी स्कूलों को उपलब्ध कराने भी कहा गया है। यह स्कूल आपस में अपने संसाधन और विशेषज्ञता की साझेधारी कर सकेंगे। इसके तहत दोनों स्कूल संसाधनों की पहचान कर ले, जिसका उपयोग दोनों स्कूल कर सकते है। जैसे- प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान, विषय-विशेषज्ञ शिक्षक, स्पोर्ट्स शिक्षक आदि। बच्चों को भी उनके पालकों की अनुमति से सुरक्षा के सभी मानकों का पालन करते हुए एक दूसरे के स्कूलों में भ्रमण के अवसर प्रदान किए जाए। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को एक दूसरे को सहयोग, बड़ी कक्षाओं में आगे पढ़ना जारी रखने के लिए प्रोत्साहन आदि के अवसर प्रदान किए जाए।

राजनंदगांव / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण के दौर में भी शिक्षण व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में चंदन सर की क्लासेस के द्वारा अनुकरणीय पहल की जा रही है। इस नेक पहल के माध्यम से नवमीं व दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को सभी विषयों की कोचिंग निर्बाध गति से दी जाएगी।
इंजीनियर चंदन द्विवेदी सर ने समाजोपयोगी पहल करते हुए अभिभावकों को एक शानदार विकल्प दिया है। इसके अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार से संबंधित नवमीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थी उनकी कक्षा में मुफ्त शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। बताते चलें कि, वैश्विक महामारी करोना (कोविड-19) की वजह से शिक्षा का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इसमें ऐसे अभिभावक जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करते हैं, वे अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आज भी बेहद चिंतित हैं। वे मजदूरी या ठेला.खोमचा लगाकर व्यवसाय करते हैं तथा उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर पड़ गई है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इंजीनियर चंदन द्विवेदी सर ने समाजोपयोगी पहल करते हुए अभिभावकों को एक बेहतर विकल्प देने का प्रयास किया है। उनकी कक्षा में गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा ग्रहण करने का अवसर दिया जा रहा है। कक्षा 11वीं एवं 12वीं में केवल फिजिक्स की पढ़ाई होगी, जबकि कक्षा 9वीं से दसवीं तक के सभी विषयों की कोचिंग दी जाएगी। चंदन सर क्लासेस प्रबंधन ने कहा है कि, इच्छुक अभिभावक एवं छात्र-छात्राएं चंदन सर से उनके मोबाइल नंबर 8709432913 पर संपर्क कर सकते हैं और अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं।

शौर्यपथ / कोविड-19 से ठीक होने के बाद लोगों में लगातार अलग-अलग किस्‍म की जानलेवा बीमारियां सामने आ रही है। जो बीमारियां कभी सामान्‍य हुआ करती थी अब जुकाम होने पर भी
खतरा बन गया है। अभी तक मच्‍छर काटते थे तो क्रीम या मच्‍छर मारने की दवा से छुटकारा मिल जाता था। लेकिन अब एक मच्‍छर के काटने से वायरस का खतरा हो गया है । जी
हां, केरल में एक गर्भवती महिला को मच्‍छर काटने से जीका वायरस हो गया है। इस बात की पुष्टि केरल के हेल्‍थ मिनिस्‍टर ने की है। फिलहाल नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे की ओर से रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
जीका वायरस ज्यादातर संक्रमित एडीज प्रजाति के मच्छर के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर वही होते हैं जो डेंगू, चिकनगुनिया और पीला बुखार फैलाते हैं। यह वायरस गर्भवती
महिला से उसके भ्रूण में जा सकता है और शिशुओं को माइक्रोसेफली और अन्य जन्मजात विकृतियों के साथ पैदा कर सकता है।
हालांकि इस पर अभी रिसर्च जारी है। लेकिन, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति इस बीमारी को अपने पार्टनर तक भी
पहुंचा सकते हैं। अभी तक जानकारी के मुताबिक जीका वायरस से गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा है। इससे गर्भपात गिरने का भी खतरा है।
जीका वायरस के लक्षण
-हल्‍का बुखार, रेशैज होना, आंखे लाल होना,मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, सिरदर्द।
साथ ही जीका वायरस रोग की अवधि 3 से14 दिन तक होने का अनुमान है और इसके लक्षण 2से7 दिन तक रहते हैं। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार अधिकतर
लोगों में इसके लक्षण नहीं भी दिखते हैं।
जीका वायरस से बचाव के उपचार
CDC के अनुसार इस वायरस का फिलहाल कोई उपचार नहीं है। लेकिन इस दौरान
- अधिक से अधिक आराम करें।
-अधिक से अधिक पानी पीएं।
- डॉक्‍टर की सलाह से ही मेडिसिन लें।

             शौर्यपथ /गिलोय का सेवन सेहत के लिए के अच्‍छा होता है। इसके सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। कोरोना काल में लोगों ने गिलोय का बहुत सेवन किया ताकि कोविड महामारी जैसी बीमारी की चपेट में आने से बच सकें। इससे पहले लोग गिलोय को लेकर बहुत अधिक जागरूक नहीं थे।लेकिन कोरोना काल में गिलोय का अत्यधिक सेवन करना बहुत अधिक भारी पड़ गया है। हालांकि किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन हानिकारक ही है। हाल ही में जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी में पब्लिश हुए एक शोध में पता चला है कि कोरोनावायरस के दौरान गिलोय के अत्यधिक सेवन से कई लोगों में लिवर की समस्या हो गई है। इसे लेकर बड़ी तादाद में लोग बीमार पड़ रहे हैं।
हर्बल इम्यून बूस्टर गिलोय के सेवन से लोगों के लिवर पर असर पड़ा है। इंडियन नेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लिवर में प्रकाशित अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि गिलोय के लगातार सेवन से लिवर को खतरा है।
गिलोय के सेवन के बाद शोध में नजर आए ये लक्षण
हाल में रिपोर्ट हुए गिलोय के सेवन के बाद कई लोगों को पीलिया, थकान, सुस्ती, पेट फूलना, भूख नहीं लगना, आंखों और त्वचा का लाल होना जैसी समस्या सामने आई है।देखा जाए तो गिलोय का सीधा असर लोगों के लीवर पर पड़ा है।
गिलोय का उपयोग उपचार के लिए सदियों से किया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी इसका सेवन करने की सलाह दी थी। साथ ही बताया गया था इसका सेवन कब और कैसे करना है। इसे कम मात्रा में लेना है। आयुष मंत्रालय के मुताबिक अर्क के रूप में 500 मिलीग्राम और 1-3 ग्राम चूर्ण को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लेना है। इसे पहले 15 दिन इसके बाद 1 महीने तक ले सकते हैं। किसी प्रकार की समस्या है तो अपने डॉ से सलाह जरूर लें। इसके बाद ही सेवन करें।
गिलोय का सेवन करने से लाभ

-गिलोय का सेवन करने से टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं।
-रक्त को प्यूरीफाई करने में सबसे अधिक मददगार।
-तनाव को कम करने में मदद करता है।
-पाचन संबंधी समस्या को सुधारता है।
-सांस संबंधी परेशानी को कम करने में मदद करता है।

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