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टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / सिर में खुजली, बालों का पतला होना और झड़ने की समस्या बहुत ज्यादा हो जाती है. कई बार यह समस्या हेयर थिनिंग का रूप ले लती है, जिसमें आपके स्कैल्प पर पैचेज होने लगते हैं. बालों के पतले होने के कुछ सामान्य कारणोंमें तनाव, पोषक तत्वों की कमी, रूसी, ऑयली स्कैल्प थायरॉयड या हार्मोनल असंतुलन शामिल है. इसके साथ ही केमिकल्स का प्रयोग और हीटिंग टूल्स के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से भी बाल झड़ सकते हैं. मेनोपॉज के दौरान भी बालों के पतले होने की समस्या होती है. बाल कमजोरऔर ब्रिटल हो सकते हैं. बालों को रबर बैंड से बांधना, ड्राईनेस, हेयर ड्रायर के अत्यधिक उपयोग आदि से भी ऐसा होता है. इस बारे में हमने बात की ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन से. तो आप भी जानिए शहनाज हुसैन के टॉप 4 घरेलू नुस्खों के बारे में.
एक हफ्ते में बालों का झड़ना रोक सकते हैं ये घरेलू नुस्खे
बालों को झड़ने से रोकने के लिए एप्पल साइडर विनेगर
यह डैमेज और बेजान बालों में जान डालने के लिए अच्छी सामग्री है. इसके लिए एक कटोरे में 2 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर और 1 बड़ा चम्मच नारियल का तेल डालकर मिला लें. इसे अपने सिर पर लगाकर अच्छी तरह से मसाज करें. शावर कैप पहनकर बालों को 40 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें. इस नुस्खे से कुछ ही दिनों में आपको अपने बालों में फर्क नजर आने लगेगा.
बालों को मजबूत और लंबा बनाने के लिए नारियल का दूध
नारियल के दूध में पाए जाने वाले फैटी एसिड्स भी बालों के लिए वरदान से कम नहीं है. यह बालों के झड़ने की समस्या को काफी कम करता है और बालों में चमक लाता है. इसके लिए 1 कप नारियल के दूध में 1/4 करी पत्ते का पाउडर डालकर मिला लें. इसे जड़ों से एंड्स तक लगाएं और 1 घंटे के लिए छोड़ दें. 1 घंटे बाद, बालों को हर्बल शैंपू से धो लें. करी पत्ता प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सिडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो बालों के रेशों को मजबूत करने, तेजी से बालों के विकास को प्रोत्साहित करने और बालों के झड़ने को रोकने में मदद करता है. करी पत्ते में मौजूद अमीनो एसिड बालों की मजबूती और चमक बनाए रखने में मदद करता है.
बालों को तेजी से लंबा करने में मदद करेगा तिल का तेल
सफेद, रूखे, डैंड्रफ, झड़ते और पतले बालों के लिए तिल के तेल बहुत अच्छा है. तिल का तेल आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर होता है, जो बालों के झड़ने की समस्या को कम करने और आपके बालों हेल्थ में सुधार करने में मदद करता है. यह आपके स्कैल्प को स्वस्थ और तेजी से बालों के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है. 2 बड़े चम्मच तिल के तेल को गुनगुना गर्म कर लें. इसके बाद कॉटन की मदद से इसे अपनी जड़ों में और एंड्स पर लगाएं. 10 मिनट अच्छी तरह मसाज करें और फिर 30 मिनट के बाद बालों को हर्बल शैंपू की मदद से धो लें.
बालों का झड़ना रोक नए बाल उगाने के लिए क्या करें
सर्दियों में स्कैल्प के रूखेपन और फ्लैकी होने के कारण डैंड्रफ की समस्या हो सकती है. डैंड्रफ बालों के झड़ने का कारण बन सकता है. डैंड्रफ और दोमुंहे बालों के लिए हॉट ऑयल थेरेपी एक अच्छा ऑप्शन है. हफ्ते में एक या दो बार शुद्ध नारियल तेल को गर्म करके बालों और स्कैल्प पर लगाएं. सिरों पर भी लगाएं. एक तौलिये को गर्म पानी में डुबोएं और फिर निचोड़ कर पानी निकाल दें. गर्म तौलिये को सिर पर पगड़ी की तरह लपेट लें. इसे पांच मिनट तक लगा रहने दें. ऐसा करीब 3-4 बार करें. आप तेल रात भर लगाकर भी छोड़ सकते हैं और फिर दूसरे दिन बालों को धो लें.
तेज से गिर रहे हैं बाल, तो किन बातों का रखें ख्याल
अगर आपके बाल झड़ रहे हैं तो डाइट पर ध्यान दें. रोजाना एक छोटी कटोरी स्प्राउट्स खाएं. स्प्राउट्स में अमीनो एसिड होता है जो बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
अपने डेली मील में ताजे फल, कच्चा सलाद, पत्तेदार हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दही शामिल करें.
डैंड्रफ है तो खूब पानी पिएं. एक गिलास पानी में एक नींबू का रस मिलाएं और सुबह सबसे पहले इसका सेवन करें.
तनाव कम करने का प्रयास करें. योग सीखें और रोजाना इसका अभ्यास करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /खानपान की ऐसी अनेक चीजें हैं जो वजन घटाने में मददगार होती हैं. इन्हीं में से एक है मेथी. पीले मेथी के दानों का सही तरह से सेवन किया जाए तो शरीर का वजन कम होने लगता है और बाहर निकलता पेट अंदर जाना शुरू हो जाता है. मेथी के दाने सोल्यूबल फाइबर से भरपूर होते हैं जिस चलते इनके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती है. इन दानों में कॉपर, रिबोफ्लेविन, विटामिन ए, बी6, सी, के, कैल्शियम, आयरन और फॉलिक एसिड की भी अच्छी मात्रा होती है. यहां जानिए किन-किन तरीकों से मेथी के दानों का सेवन किया जाए जिससे वजन घटने में असर दिखने लगे.
वजन घटाने के लिए मेथी के दाने |
मेथी दाने का पानी
रात के समय एक गिलास में 2 चम्मच मेथी के दाने डालें और रातभर भीगने के लिए रख दें. इन भीगे दानों वाले पानी को अगली सुबह हल्का गर्म करें और छानकर पी लें. आप चाहे तो मेथी के भीगे दाने भी खा सकते हैं या फिर इन दानों से फेस पैक या हेयर मास्क बनाकर लगा सकते हैं. मेथी के दानों का पानी पीने पर मेटाबॉलिज्म दुरुस्त होता है और शरीर का एक्सेस फैट बर्न होने लगता है.
मेथी दाने की चाय
जिस तरह मेथी के दानों का पानी बनाया जाता है कुछ-कुछ उसी तरह मेथी के दानों की चाय तैयार होती है. फर्क बस तापमान का होता है. मेथी के दाने बर्तन में डालें और पानी के साथ अच्छी तरह उबाल लें. जब पानी एकदम उबल जाए तो कप में छानकर निकालें. इस चाय को पीने पर क्रेंविग्स कंट्रोल होती है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा नहीं होती. सुबह या शाम के समय मेथी के दानों की यह चाय पी जा सकती है.
मेथी दानों का सलाद
जिस तरह मूंग की दाल या चने का अंकूरण किया जाता है बिल्कुल उसी तरह मेथी के दानों का अंकूरण किया जा सकता है. स्प्राउट्स किए गए मेथी दानों की चाय बनाकर खा सकते हैं. इन दानों में सब्जियां काटकर डालें और नींबू भी निचोड़ें. इससे स्वाद तो अच्छा आएगा ही साथ ही वजन कम होगा सो अलग.
खाना खजाना /शौर्यपथ / कढ़ी का नाम सुनते ही बच्चों के ही नहीं बड़ों के मुंह में भी पानी आ जाता है. यह बहुत ही स्वादिष्ट होती है. बता दें कि , कढ़ी एक भारतीय डिश है जिसमें बेसन की गाढ़ी ग्रेवी बनाई जाती है और उसमें बेसन के ही पकोडे तलकर डाले जाते है. कढ़ी को हल्का और खट्टा बनाया जाता है, जिसके लिए उसमें दही मिलाई जाती है. दरअसल, उत्तरी भारत में कढ़ी बड़े शौक से खाई जाती है और इसके साथ लोग चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं. वहीं पूरे भारत में अलग अलग जगहों पर कढ़ी बनाने का तरीका भी अलग है और काफी जगह पर तो इसे हरी सब्जियां डालकर भी बनाया जाता है. मगर एक अच्छी कढ़ी वह है जिसे अच्छी तरह से उबाला जाता है और धीमी आंच पर पकाया जाता है. पकाने से उसमें खुशबू आती है, स्वाद आता है और यह गाढ़ी होती है. वैसे तो कढ़ी से कभी दिल नहीं भरता, मगर कई बार कढ़ी खाते खाते बोरियत होने लगती है. जी हां, आज हम आपके लिए कढ़ी की नई रेसिपी (Recipe) लेकर आए हैं, जिसे बिना पकोड़े के बनाया जाता है.
ऐसे में अगर आप कुछ डिफरेंट ट्राई करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है.
आलू की बाटी बनाने के लिए आप एक बाउल में बेसन डालें और इसमें उबले आलू और सभी मसाले, पानी आदि डालकर एक घोल तैयार कर लें.
कड़ाही में आलू की बाटी डालें और इसे अच्छी तरह से पका लें. अब एक प्लेटमें इसे निकाल लें और साइड में रख दें बस हो गया तैयार आधा काम. आप चाहें तो आलू को बिना उबला बेसन में भरकर भी आलू की बाटी को बना सकते हैं.
1.कढ़ी बनाने के लिए अब आप दही में थोड़ा बेसन लें और अच्छी तरह से घोल लें और अलग रख दें.
2.दही अगर खट्टा होगा, तो कढ़ी का स्वाद ज्यादा अच्छा लगेगा.
3.इसलिए हो सके तो दही को एक रात पहले फ्रिज से बाहर निकाल कर रख लें.
4.कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें राई दाना और मेथी दाना डालें.
5.आप प्याज और लहसुन को अच्छी तरह से भून लें.
6.अगर घोल गाढ़ा हो रहा है, तो आपको उसमें छाछ या फिर हल्का-सा पानी डाल कर उसके गाढ़ेपन को दूर कर दें.
7.जब कढ़ी अच्छी तरह से पाक जाए तो उसमें बेसन की बाटी को डाल दें और अब कुछ देर कढ़ी को उबलने दें.
8.ध्यान रखें, कढ़ी जितनी अच्छी तरह से उबलेगी यह उतनी ही स्वादिष्ट बनेगी। आखिर में कढ़ी में एक तड़का लगाना है.
सेहत टिप्स/शौर्यपथ/ कैलोरी में कम और पानी की मात्रा अधिक होने के कारण, खीरा वजन घटाने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन में बहुत प्रभावी है. इन्हें कच्चे सलाद के रूप में डेली डाइट में लिया जा सकता है. इसके अलावा, नाश्ते के दौरान खीरे का जूस पीने से यूरिनरी इंफेक्शन से बचाव हो सकता है. खीरे का गूदा या उसका रस त्वचा पर लगाने से सनबर्न के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है, मुंहासों से बचाव होता है और आंखों के आसपास काले घेरे और सूजन भी कम होती है. ऐसा खीरे के कैसेले गुण के कारण होता है. लेकिन ये सारे फायदे आपको तभी मिलेंगे जब इसको सही समय पर खाएंगे, इस आर्टिकल में हम इसी के बारे में बताएंगे.
खीरा खाने का सही समय क्या
- आपको बता दें कि खीरे को दिन में ही खाना चाहिए. इससे मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है. इससे आप ओवरीटिंग से बच जाते हैं. इसमें 95 प्रतिशत पानी होता है, जिससे डिहाइड्रेशन की परेशानी नहीं होती है. यह इम्यूनिटी और हड्डियों को मजबूत करता है.
- रात में आप खीरा खाते हैं तो पेट भारी हो सकता है. इसे पचाना मुश्किल हो सकता है. यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है. जिनका पाचन कमजोर है उन्हें रात में खाने से बचना चाहिए.
- आप सुबह के समय खीरा खाते हैं, तो आपके हेल्थ के लिए अच्छा होगा. यह आपके वजन को भी कंट्रोल करता है. खाने से आधे घंटे पहले आपको खीरा खाना चाहिए. क्योंकि खीरा पचने में समय लगता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / बेल पत्र कैल्शियम और फाइबर के साथ-साथ विटामिन ए, सी, बी1 और बी6 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है. बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि ये पत्तियां कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद होती हैं और यही कारण है कि आपको रोजाना इसको खाना चाहिए. जब आप रोजाना सेवन करते हैं, तो यह पेट से संबंधित समस्याओं में राहत देने, हृदय स्वास्थ्य और लीवर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट भी इस पत्ती को डेली रूटीन में शामिल करने की बात कहते हैं.
वैसे तो इस पत्ते का सेवन दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन एक्सपर्ट का सुझाव है कि जब आप इसे खाली पेट खाते हैं यानि सुबह तो अनगिनत फायदे पहुंचाता है. क्योंकि बासी मुंह शरीर पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित कर लेता है.
बेलपत्र खाने के फायदे
- बेल पत्र पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. अगर आपको पेट से जुड़ी कोई समस्या है तो रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन कर सकते हैं
- रोजाना सुबह बेल पत्र का सेवन करने से गैस, एसिडिटी और अपच से छुटकारा मिल सकता है.
- वहीं, जिन लोगों को बवासीर की समस्या है उनके लिए खाली पेट बेल पत्र खाना फायदेमंद हो सकता है.
दिल के लिए हेल्दी
- अगर आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो दिल को बीमारियों से बचाते हैं.
- साथ ही हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी कम हो जाता है.
शरीर रखे ठंडा
- दरअसल, बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है. ऐसे में अगर आप बेल पत्र का सेवन करते हैं तो आपका शरीर पूरे दिन ठंडा रहेगा.
- खासतौर पर गर्मियों में बेल पत्र का सेवन अधिक फायदेमंद होता है. इससे आपको ठंडक मिलेगी.
छाले करे ठीक
- मुंह में छाले होने पर भी रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन फायदेमंद होता है. इसके लिए आप बेल पत्र को चबाकर खा सकते हैं.
डायबिटीज में मिले राहत
- अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन कर सकते हैं.
- बेल पत्र में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व मधुमेह रोगियों के लिए आवश्यक हैं.
- खाली पेट बेल पत्र खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.
आस्था /शौर्यपथ / हिन्दू धर्म में कई ऐसे पेड़ या पौधे बताये गए हैं जिनके पास दीया जलाना शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इन पेड़ या पौधों के पास दीया जलाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. हालांकि हर पेड़ या पौधे के पास दीया जलाने से अलग-अलग लाभ मिलते हैं.दरअसल, हिंदू कहानियों में भगवान शिव बहुत महत्वपूर्ण हैं और लोग सोचते हैं कि वे बहुत खास हैं और वे अलग-अलग तरीकों से उनकी पूजा करते हैं और उनसे मदद मांगने के लिए विशेष कार्य करते हैं. एक काम जो वे करते हैं वह है एक विशेष पेड़ के नीचे दीपक जलाना जिसे बेलपत्र का पेड़ कहा जाता है. यह लेख बताता है कि लोग ऐसा क्यों करते हैं, किसे करना चाहिए और भगवान शिव के लिए बेलपत्र का पेड़ क्यों महत्वपूर्ण है.
बेलपत्र का पौधा भगवान शिव को अति प्रिय माना जाता है. साथ ही,कुछ शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है. की माता पार्वती के पसीने से बेलपत्र पेड़ की उत्पति हुई हैं. इसलिए बेलपत्र का पेड़ भगवान शिव को अतिप्रिय हैं. इसी प्रकार बेलपत्र पेड़ में माता पार्वती का वास होता है.
1.बेलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से मां लक्ष्मी का घर में वास होता है और धन अलाभ के योग बनते हैं. घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगती है और तंगी, कर्ज, अधिक खर्च आदि समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है.
2. बेलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और उनकी कृपा से जीवन के दुःख दूर हो जाते हैं. जीवन में खुशहाली का आगमन होता है और हर एक काम में सफलता मिलने लग जाती है.
3. बेलपत्र का पौधा अगर घर में है तो रोजाना शाम के समय बेलपत्र के पौधे के पास सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है और घर में शांति का वास स्थापित होने लग जाता है.
4. बेलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से घर में पसरा हुआ पारिवारिक क्लेश दूर होता है. इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि बलपत्र के पौधे के पास दीया जलाने से ग्रह दोष एवं वास्तु दोष भी खत्म हो दाता है.
दुर्ग / शौर्यपथ / विगत 26 मार्च 2024 को छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई एवं आईआईटी मंडी हिमाचल प्रदेश के बीच एमओयू किया गया। इस एमओयू को विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. एम. के. वर्मा एवं आईआईटी मंडी के निदेशक डॉक्टर लक्ष्मीधर बेहरा द्वारा सम्पदित किया गया जिसके तहत अनुसंधान एवं अकादमिक गतिविधियों के विकास पर दोनों संस्थाओं द्वारा संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इस एम ओ यू के तहत फैकल्टी एवं स्टाफ, दोनों संस्थानों में आवागमन कर शैक्षणिक एवं कंसल्टेंसी कार्यों का क्रियान्वयन कर सकेंगे। इसके तहत संयुक्त रूप से संस्थान के नियम अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट, पी. एच.डी. के छात्रों का सुपरविजन किया जाएगा।
विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग के बी. टेक. ऑनर्स के छात्र अपनी 6 माह की इंटर्नशिप स्टाइपेंड के साथ आईआईटी मण्डी में विषय विशेषज्ञों के मार्ग दर्शन में वहीं रहकर पूर्ण कर सकेंगे।संयुक्त रूप से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट सेमिनार वर्कशॉप कॉन्फ्रेंस आदि आयोजित किया जा सकेंगे। इस प्रकार से विश्वविद्यालय के छात्रों को विश्व स्तर के प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक सुविधा मिल पाएगी साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसाधनों की उपयोगिता के अवसर मिलेगा। उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण एवं उन्नयन की सुविधा भी छात्रों को प्राप्त होगी जिसे आधुनिक जगत की आवश्यकता अनुसार इंडस्ट्री रेडी मानव संसाधन तैयार हो सके। विदित हो कि आई आई टी मंडी में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन और निर्माण केंद्र (C4DFED Lab) इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन और निर्माण पर बहु-विषयक अनुसंधान के लिए एक अद्वितीय विश्व स्तरीय सुविधा है। इस लैब में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस फेब्रिकेशन, एडवांस्ड लिथोग्राफी एंड मैटेरियल्स फॉर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्रीज , फोटोनिक एंड फोटोवोल्टिक डिवाइस , टेस्टिंग एंड पैकेजिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस , इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स ( MEMS, NEMS, BIO-MEMS, SENSORS), इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस डिज़ाइन एंड सिमुलेशन स्थापित है । इस केंद्र में class 100, class 1000 और class 10000 स्तर की फेब्रिकेशन प्रयोगशालाएँ हैं जहाँ उच्च-स्तरीय परिष्कृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण डिज़ाइन, निर्माण और लक्षण वर्णन उपकरण स्थापित हैं। यह एमओयू 5 वर्षों के लिये होगा ।
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /तनाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बिगाड़ने का काम करता है, जितना हम सोचते हैं तनाव उससे कहीं ज्यादा नुकसान कर सकता है. बहुत से लोग इसे नजरअंदाज करते हैं, लेकिन आपको बता दें कि तनाव से निपटने के लिए कुछ नेचुरल उपाय अपनाना बहुत जरूरी है. तनाव से राहत देने वाले फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करना स्ट्रेस लेवल को मैनेज करने का एक शानदार तरीका हो सकता है. हम यहां उन चीजों के बारे में बत रहे हैं जो स्ट्रेस लेवल को कम करने और हमारे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं.
तनाव दूर करने में मदद करते हैं ये फूड्स और ड्रिंक |
1. कैमोमाइल की चाय
कैमोमाइल चाय अपने शांत गुणों के लिए जानी जाती है और चिंता को कम करने और बेहतर नींद को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है. अपनी नसों को शांत करने और अपने दिमाग को आराम देने के लिए एक कप कैमोमाइल चाय बनाएं और पूरे दिन गर्म या बर्फीली चाय का आनंद लें.
2. नट्स
बादाम, अखरोट और पिस्ता जैसे नट्स हेल्दी फैट, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को स्थिर करने और तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं. नाश्ते के रूप में मुट्ठी भर नट्स का आनंद लें या कुरकुरापन और स्वाद बढ़ाने के लिए उन्हें सलाद, दलिया या दही के ऊपर छिड़कें.
3. डार्क चॉकलेट
डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनोइड्स होते हैं, जो एंटीऑक्सिडेंट हैं जो मस्तिष्क में सेरोटोनिन लेवल को बढ़ाकर मूड में सुधार कर सकते हैं. हाई कोको सामग्री (70 प्रतिशत या ज्यादा) वाली डार्क चॉकलेट का लक्ष्य रखें और बहुत ज्यादा शुगर के सेवन से बचने के लिए इसका सीमित मात्रा में सेवन करें.
4. ब्लूबेरी
ब्लूबेरी एंटीऑक्सिडेंट होते हैं खासकर ये विटामिन सी से भरपूर होती है, जो शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके तनाव से निपटने में मदद कर सकती है. पौष्टिक नाश्ते के लिए इन्हें स्मूदी, ओटमील या दही में ताजा या जमाकर आनंद लें.
3. एवोकाडो
एवोकाडो मोनोअनसैचुरेटेड फैट और पोटेशियम से भरपूर होता है, जो ब्लड प्रेशर को कम करने और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है. अपने भोजन को मलाईदार और संतोषजनक बनाने के लिए सलाद, सैंडविच या स्मूदी में एवोकाडो के स्लाइस एड करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / करक्यूमिन एक नेचरल कंपाउंड है जो हल्दी की जड़ में पाया जाता है. इसका उपयोग सदियों से नेचरल मेडिसिन के रूप में खासतौर से आयुर्वेद में इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता रहा है. करक्यूमिन अपने शक्तिशाली सूजन को कम करने वाले गुणों, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और कैंसररोधी गुणों के लिए जाना जाता है. यह कई हेल्थ कंडिशन से निपटने में मदद करता है. गट हेल्थ के लिए हल्दी को काफी फायदेमंद माना जाता है. यहां पेट के लिए हल्दी के फायदों के बारे में पढ़िए.
करक्यूमिन पेट के स्वास्थ्य को कैसे सुधारता है पढ़िए:
1. एंटी इंफ्लेमेटरी गुण
करक्यूमिन में शक्तिशाली सूजन-रोधी प्रभाव होते हैं, जो जठरांत्र संबंधी मार्ग में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. यह सूजन आंत्र रोग (आईबीडी), क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी कंडिशन के लिए फायदेमंद हो सकता है.
2. आंतों की रुकावट से बचाता है
कर्क्यूमिन को आंतों की परेशानी को दूर करने के लिए जाना जाता है, जो आंत से ब्लड फ्लो में हानिकारक पदार्थों के रिसाव को रोकने में मदद करता है. बेहतर गट हेल्थ और इम्यून फंक्शन के लिए एक हेल्दी बाउल ऑब्स्ट्रक्शन जरूरी है.
3. गट माइक्रोबायोटा का मॉड्यूलेशन
करक्यूमिन आंत माइक्रोबायोटा के स्ट्रक्चर को कंट्रोल कर सकता है, हानिकारक बैक्टीरिया को रोकते हुए लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ावा दे सकता है. आंत माइक्रोबायोटा में यह संतुलन डायजेशन हेल्थ के लिए जरूरी है.
4. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को दूर करती है
करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्स को बेअसर करने और आंत में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है. ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाकर करक्यूमिन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल टिश्यू और सेल्स हेल्थ को सपोर्ट करता है.
5. पाचन क्रिया में सुधार
करक्यूमिन पाचन एंजाइमों को स्टिमुलेट करता है, जो पोषक तत्वों के टूटने और एब्जॉर्प्शन में सहायता करते हैं. यह पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार कर सकता है, जिससे गट हेल्थ को बढ़ावा मिलता है.
6. आईबीएस के लक्षणों को दूर करता है
अध्ययनों से पता चलता है कि करक्यूमिन सूजन को कम करके और इंटेस्टिनल मॉबिलिटी को कंट्रोल करके इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) जैसे पेट दर्द, सूजन और दस्त के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है.
7. म्यूसिन को बढ़ावा देना
म्यूसिन एक सुरक्षात्मक परत है जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को लाइन करती है. बढ़ा हुआ म्यूसिन आंत की परत को डैमेज से बचाने में मदद करता है और गट ब्लॉकर फंक्शन को सपोर्ट करता है.
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /लड़कियों को आमतौर पर 12 से 16 साल की उम्र के बीच में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं. ज्यादातर मां ही इस दौरान बेटी को पीरियड्स के बारे में बताती है. लेकिन, अक्सर ही देखा जाता है कि पीरियड्स शुरू होने से पहले कितनी ही बच्चियों को इसके बारे में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं होती और पीरियड्स होने के बाद भी उसके प्रश्नों का उसे बस यह जवाब मिलता है कि 'यह हर लड़की के साथ होता है'. पीरियड्स को लेकर जानकारी और जागरूकता की कमी ना सिर्फ बच्ची को परेशान करती है लेकिन उसके लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है यह हाल ही में मुंबई में देखने को मिला है. मुंबई में 14 साल की लड़की ने पहली बार हुए पीरियड्स के तनाव और दर्द के चलते आत्महत्या कर ली. पुलिस के अनुसार, उसे पीरिड्स को लेकर कुछ खासा जानकारी नहीं थी इसीलिए वह तनाव में थी और उसने यह कदम उठाया. यह घटना सभी पैरेंट्स के लिए एक बहुत बड़ा सबक है कि बच्चियों को कम्र से ही पीरियड्स के बारे में बताना कितना ज्यादा जरूरी है.
बेटी को जरूर बताएं पीरियड्स से जुड़ी ये 5 बातें
10 साल की उम्र होने के बाद से ही बेटी को बैठाकर उससे पीरियड्स के बारे में बातचीत करना शुरू करें. उसे बताएं कि यह हर महीने होने वाली प्रक्रिया है. हफ्ते में 4 से 5 दिन पीरियड्स हो सकते हैं यह भी समझाएं.
पीरियड्स में पैड्स किस तरह इस्तेमाल करते हैं, किस तरह फेंकते हैं और पर्सनल हाइजीन कैसे मेंटेन करते हैं उसे सिखाएं. उसे पीरियड्स के बारे में कुछ पूछने के लिए झिझक महसूस करने की जरूरत नहीं है यह आश्वासन भी दें.
बेटी को पीरिड्स में होने वाले दर्द के बारे में भी बताएं. पेट में दर्द, पीठ में ऐंठन और कभी-कभी सीने में दर्द महसूस होता है इसके बारे में भी बताएं. उसे कहें कि जब भी उसे पीरियड्स में जरूरत से ज्यादा दर्द महसूस हो तो आपसे कहने से बिल्कुल ना घबराए. पैरेंट्स दिक्कत बढ़ने पर गाइनीकोलॉजिस्ट को दिखा सकते हैं.
पीरियड्स शुरू होने के बाद शरीर में और कौन-कौनसे बदलाव होते हैं इसके बारे में भी बेटी को बताना चाहिए.
आखिर में, पीरियड्स में होने वाले तनाव को नजरअंदाज ना करें. बेटी को इस तनाव से निपटने के तरीके बताएं, उसे आराम करना है तो किसी काम के लिए जबरदस्ती ना करें और सबसे जरूरी है कि पीरियड्स के दर्द या स्ट्रेस को लेकर उसकी बाकी लड़कियों से तुलना ना करें. सभी के लिए यह अनुभव अलग-अलग होता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /फलों को सेहत के लिए कितना फायदेमंद माना जाता है ये तो हम सभी जानते हैं. आज हम एक ऐसे ही फल के बारे में बात कर रहे हैं. जिसे स्टार फ्रूट और कमरख के नाम से जाना जाता है. ये फल कटने के बाद बिल्कुल स्टार जैसा दिखता है. इसका वैज्ञानिक नाम एवररहो कारंबोला है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मददगार हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि स्टार फ्रूट्स का जरूरत से ज्यादा सेवन सेहत को फायदा की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. तो चलिए जानते हैं स्टार फ्रूट्स का सेवन करने से होने वाले फायदे और नुकसान.
स्टार फ्रूट खाने के फायदे-
1. डायबिटीज-
स्टार फ्रूट पौधे की पत्तियों से निकलने वाले अर्क सीरम ग्लूकोज के लेवल में सुधार कर सकते हैं. डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आप फल और पत्तियों दोनों का सेवन कर सकते हैं.
2. पाचन-
अगर फ्रूट में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन को बेहतर रखने में मदद कर सकता है.
3. सांस-
स्टार फ्रूट में एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, जिंक, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे गुण पाए जाते हैं, जो सांस संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
स्टार फ्रूट्स का सेवन करने के नुकसान-
1. कब्ज-
कब्ज की समस्या से परेशान हैं तो आप भूलकर भी स्टार फ्रूट का सेवन न करें. स्टार फ्रूट का जरूरत से ज्यादा सेवन करने से कब्ज की समस्या हो सकती है.
2. पेट में जलन-
स्टार फ्रूट का जरूरत से ज्यादा सेवन करने से पेट और छाती में जलन हो सकती है. इसलिए आपको पहले से ही ऐसा समस्या है तो आप इसका ज्यादा सेवन न करें.
3. दवाएं-
अगर आप किसी भी तरह की कोई दवा ले रहे हैं तो आप भूलकर भी स्टार फ्रूट का सेवन न करें. इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / चने को सेहत के लिए कितना फायदेमंद माना जाता है ये तो हम सभी जानते हैं. आपने भीगे चने, अंकुरित चने, भुने चने तो खाए होंगे लेकिन क्या कभी आपने दूध में भीगे चने खाएं हैं जी हां आपने बिल्कुल सही सुना. दूध में भीगे चने का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. असल में चने में फाइबर, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स आयरन और मैग्नीशियम जैसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई लाभ पहुंचाने में मददगार हैं. तो वहीं दूध को पोषण का भंडार कहा जाता है. रोजाना एक गिलास दूध के सेवन से शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद मिल सकती है. इतना ही नहीं अगर आप अपने शरीर में मास को बढ़ाना चाहते हैं यानि वजन को बढ़ाना चाहते हैं तो दूध में भीगे चने का सेवन फायदेमंद हो सकता है. तेजी से वजन को बढ़ाने के लिए आप इसका सेवन कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं दूध में भीगे चने खाने के अन्य फायदे-
दूध में भीगे चने खाने के फायदे-
1. वजन बढ़ाने-
दूध में भीगे चने खाने से आपको वजन प्रबंधन में मदद मिलती है. अगर आप वजन को बढ़ाना चाहते हैं तो रात में चने को धोकर दूध में भीगो कर रख दें. फिर अगली सुबह इस दूध को छानकर पी लें और भीगे चने भी खा लें. ऐसा करने से वजन को तेजी से बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
2. बालों-
दूध में चने डालकर रात भर के लिए छोड़ दें, फिर सुबह दूध छानकर पी लें और साथ-साथ चने भी खाएं. इससे बालों को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है.
3. एनर्जी-
एनर्जी की कमी करते हैं महसूस तो आपके लिए दूध में भीगे चने का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. सुबह इस दूध का सेवन करने से शरीर में दिनभर एनर्जी बनी रहती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मोटापे से आजकल बहुत से लोग परेशान हैं. पेट का मोटापा सबसे ज्यादा दुखदायी होता है. ये न सिर्फ आपकी पर्सनालिटी को खराब करता बल्कि कई बीमारियों का घर भी होता है. हर कोई चाहता है कि वह एकदम फिट रहे और इस जीवन का आनंद ले, लेकिन पेट की चर्बी और लटकती तोंद रंग में भंग डाल देती हैं. ऐसे में बहुत से लोग सवाल करते हैं कि पेट का मोटापा कैसे कम करें, पेट की चर्बी घटाने के लिए क्या करें. अक्सर हम अपने दिन के कामों में इतने व्यस्त रहते हैं कि हम खाने के बाद कुछ गलतियां कर देते हैं, जो हमारे मोटापे का कारण बनती हैं. खाने के बाद कुछ चीजें करना या न करना, यह हमारे फिटनेस का सबसे बड़ा राज है. खासकर जब बात मोटापे वाले लोगों की हो. तो चलिए जानते हैं कि दिन का खाना खाने के बाद मोटे पेट वालों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.
मोटापा से परेशान लोग लंच के बाद न करें ये काम |
1. ठहरे नहीं बैठना
ज्यादातर लोग खाने के बाद बैठ जाते हैं, जो कि उनके पेट को ज्यादा दबाव डालता है. इससे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है और आपके पेट का आकार भी बढ़ सकता है. इसलिए, खाने के बाद ठहरे नहीं बैठना चाहिए.
2. ठंडे पानी का सेवन
खाने के बाद ज्यादा ठंडे पानी का सेवन करना पाचन शक्ति को कमजोर कर सकता है और आपके पेट में गैस बना सकता है. इसलिए, खाने के बाद ठंडे पानी का सेवन कम करें.
3. हैवी एक्सरसाइज
खाने के तुरंत बाद हैवी एक्सरसाइज करना भी अच्छा नहीं है, क्योंकि यह पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और आपका वजन और पेट बढ़ा सकता है.
4. मसालेदार और फ्राइड चीजें
ज्यादा मसालेदार और तली हुई चीजें खाने से आपके पेट में जलन और अपच की समस्या हो सकती है. साथ ही ये पेट का मोटापा भी बढ़ा सकता है.
5. चाय/कॉफी का सेवन
खाने के बाद ज्यादा मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन करना भी अच्छा नहीं है, क्योंकि यह पेट में एसिड बढ़ा सकता है और पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकता है.
6. तुरंत सोना
भोजन के बाद तुरंत सोना आपको पेट के पाचन प्रक्रिया को रिस्ट्रिक्ट कर सकता है और अपच जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.
खाने के बाद इन बातों का ध्यान रखें और हेल्दी लाइफ जीने के लिए बैलेंस डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज को अपनाएं.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /चावल हर भारतीय घर में रोज बनने वाली चीजों में से एक है. लंच हो या डिनर चावल के बिना मील अधूरा सा लगता है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में चावल के प्रेमी आपको देखने को मिल जाएंगे. चावल को सबसे ज्यादा लोग दाल के साथ खाना पसंद करते हैं. दाल के अलावा इसे अपनी-अपनी पसंद के अनुसार किसी भी डिश के साथ पेयर कर सकते हैं. यानि चावल हर दिन बनने वाली चीजों में से एक है. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि जिस चावल के पानी को आप बेकार समझ कर फेंक देते हैं. दरअसल वो आपके स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है. चावल के पानी को रोजाना पीने से कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है. क्योंकि चावल कई प्रकार के विटामिन और मिनरल्स का खजाना है. इसमें नियासिन, विटामिन डी, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, थायमीन और राइबोफ्लेविन पर्याप्त मात्रा में होता है. चावल का पानी फाइबर से भरपूर होता है और आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है. चावल के पानी के इस्तेमाल से स्किन को चमकदार बनाया जा सकता है. तो चलिए जानते हैं चावल के पानी से होने वाले फायदे-
चावल के पानी के फायदे-
1. स्किन-
चावल के पानी को सिर्फ सेहत ही नहीं सुंदरता को बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर आप अपनी स्किन को चमकदार बनाना चाहते हैं तो चावल के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं.
2. डी-हाइड्रेशन-
गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी, डी-हाइड्रेशन की समस्या काफी देखी जा सकती हैं. चावल के पानी को पीने से डी-हाइड्रेशन की समस्या को दूर किया जा सकता है.
3. हाई ब्लड प्रेशर-
चावल का पानी पीने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. चावल में सोडियम की कम मात्रा होती है, जो हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकती है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
