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सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हाई ब्लड प्रेशर यानि हाइपरटेंशन दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करने वाली एक आम समस्या में से एक है. अगर समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो इससे शरीर को कई हानि पहुंच सकती हैं. आपको बता दें कि हाई ब्लड प्रेशर हार्ट की बीमारी और स्ट्रोक का कारण बन सकता है. हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर को डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके मैनेज किया जा सकता है. हाई प्रेशर के मरीजों को अधिक नमक और मसालेदार चीजें खाने से बचना है. अगर आप भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप किचन मे मौजूद अजवाइन का ऐसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
अजवाइन में एंटीहाइपरटेन्सिव और एंटीस्पास्मोडिक गुण पाए जाते हैं. कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि अजवाइन को डाइट में शामिल करना हाई ब्लड प्रेशर के लिए चमत्कार से कम नहीं है. अजवाइन को आमतौर पर पूड़ी, परांठा, रसम और कई तरह की डिशेज को बनाने में किया जाता है. कब्ज की समस्या को दूर करने में भी अजवाइन का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है. अजवाइन में प्रोटीन, फाइबर, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन और कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें कि गर्मियों के मौसम में अजवाइन का सीमित मात्रा में ही सेवन करें. क्योंकि अजवाइन की तासीर गर्म होती है.
कैसे बनाएं अजवाइन पानी-
हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए आप अजवाइन पानी का सेवन कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए आपको एक कप पानी में सूखे भुने हुए एक चम्मच अजवाइन के बीज भिगोए. इसे रात भर छोड़ दें. अगले दिन पानी को उबालकर छान लें.
इसके ठंडा होने का इंतज़ार करें. खाली पेट इसका सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है.
आस्था /शौर्यपथ /पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली 15वीं तिथि को अमावस्या पड़ती है. अमावस्या की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है. इस दिन स्नान-दान धार्मिक महत्व रखता है. माना जाता है कि अमावस्या पर पूजा करने से और पितरों का तर्पण करने से घर-परिवार पर पितृ दोष नहीं लगता है. पितृ दोष तब लगता है जब पितृ नाराज हो जाते हैं. इससे घर में कलह और कलेश का माहौल रहने लगता है, घर की सुख-शांति खत्म होती है और परिवार पर आर्थिक दिक्कतें मंडराने लगती हैं. ऐसे में पितृ दोष से बचे रहने के लिए और पितृ दोष दूर करने के लिए अमावस्या के दिन कुछ मंत्रों का जाप किया जा सकता है. इन मंत्रों के जाप से पितृ नाराज नहीं होते हैं. जानिए इस साल कब पड़ रही है फाल्गुन अमावस्या और कैसे पाया जा सकता है पितृ दोष से छुटकारा.
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष से छुटकारा
इस साल पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि 9 मार्च शाम 6 बजकर 17 मिनट से शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 10 मार्च, दोपहर 2 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में 10 मार्च, रविवार के दिन अमावस्या मनाई जाएगी. निम्न वो मंत्र दिए जा रहे हैं जो पितृ दोष से बचाव करते हैं और छुटकारा दिलाते हैं.
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्'
ॐ कुल देवताभ्यो नमः।
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू
अयोध्या मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेयाः सप्तैता मोक्ष दायिका
कर सकते हैं ये काम
पितृ दोष से निवारण के लिए अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. अगर पवित्र नदी घर के आस-पास ना हो तो घर में रखे किसी पवित्र नदी के पानी, जैसे गंगाजल, को बाल्टी में पानी में मिलाएं और फिर इस पानी से स्नान करें. अमावस्या पर पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से भी पितृ दोष हट सकता है. इस दिन दान का भी अत्यधिक महत्व होता है. जरूरमंदों को भोजन और कपड़े दान में दिए जा सकते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / पपीता एक ऐसा फल है जिसे खाना ज्यादातर लोग पसंद करते हैं. सबसे ज्यादा पपीते का सेवन वो लोग करते हैं जो वजन को कम करना चाहते हैं. पपीते में मौजूद गुण शरीर को कई लाभ पहुंचाने का काम करते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि पपीते के कुछ दुष्प्रभाव भी हैं. पीला पपीता डायटरी फाइबर का एक हेल्दी स्रोत है. पपीत में कैलोरी और फैट कम मात्रा में होते हैं. जो वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. सेहत के गुणों से भरपूर पपीता कई लोगों के लिए हानिकारक भी है. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को नहीं करना चाहिए पपीते का सेवन.
पपीता खाने के नुकसान-
1. डिहाइड्रेशन-
पपीता एक रेशेदार फल है और इसका अधिक मात्रा में सेवन करने पर दस्त की समस्या हो सकती है. जरूरत से ज्यादा पपीते का सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है.
2. कब्ज-
अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से शरीर में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. अत्यधिक फाइबर के सेवन से भी कब्ज की समस्या हो सकती है.
3. गर्भावस्था-
गर्भावस्था के दौरान कच्चे या आधे पके पपीते का सेवन करना असुरक्षित हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान पपीते का सेवन हानिकारक हो सकता है.
4. एलर्जी-
पपीते में मौजूद एंजाइम पपैन एक शक्तिशाली एलर्जेन है. इसलिए पपीते का अत्यधिक सेवन कई रेस्पिरेटरी विकारों को ट्रिगर कर सकता है. कुछ लोगों को पपीता खाने से एलर्जी हो सकती है.
5. पाचन तंत्र-
पपीता खाने से आपका गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम खराब हो सकता है. अगर आपको पेट संबंधी समस्या है तो आप अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से बचे. जरूरत से ज्यादा पपीते का सेवन पाचन तंत्र की समस्या को बढ़ा सकता है.
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कई बच्चे पढ़ने लिखने के साथ जीवन जीने के तरीकों में भी माहिर होते हैं. वहीं कई कम बुद्धि वाले भी बच्चे होते हैं जो ठीक से न तो समस्याओं को सुलझा पाते हैं और न ही पढ़ाई लिखाई में अच्छे होते हैं. बच्चों की बुद्धिमत्ता का लेवल उनके बिहेवियर, सीखने की क्षमता और डेली लाइफ में उनके फैसलों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर कुछ अलग आदतों और बिहेवियर को दिखाते हैं जो उनके एजुकेशनल और सोशल ग्रोथ में चुनौतियों का संकेत दे सकते हैं. हालांकि, यह जरूरी है कि हम इन बच्चों को लेबल करने से बचें और उन्हें सपोर्ट दें ताकि वे अपनी फुल कैपेसिटी तक पहुंच सकें.
मंद बुद्धि बच्चों में होती हैं ये आदतें |
बहुत धीरे सीखना: कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर सीखने में धीमे होते हैं. उन्हें नई जानकारी को समझने और याद रखने में ज्यादा समय लग सकता है.
बात करने में कठिनाई: ऐसे बच्चे विचारों को व्यक्त करने और बातचीत करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं. उनकी शब्दावली भी लिमिटेड हो सकती है और उनमें अक्सर कम्यूनिकेशन क्लियरिटी की कमी दिखाई देती है.
समस्या सुलझाने में कठिनाई: ऐसे बच्चों को अक्सर समस्या-सुलझाने में चुनौती का सामना करना पड़ता है. वे कठिन समस्या को समझने और उनके समाधान खोजने में ज्यादा समय लेते हैं.
सोशल इंटिमेसी: कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर सामाजिक संकेतों को पढ़ने और समझने में कठिनाई अनुभव करते हैं. इससे उनके सामाजिक अंतरंगता और दोस्ती बनाने में चुनौतियां आ सकती हैं.
ध्यान देने में कठिनाई: ध्यान केंद्रित करने और ध्यान बनाए रखने में इन बच्चों को कठिनाई हो सकती है. वे अक्सर आसानी से विचलित हो जाते हैं, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है.
यह जरूरी है कि परिवार और शिक्षक इन बच्चों के लिए एक सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करें. उन्हें एजुकेशन सपोर्ट, धैर्य और समझ की जरूरत होती है. इंडिविजुअल लर्निंग प्लान्स, थेरेपी सेशन और सोशल स्किल ट्रेनिंग उनकी ग्रोथ में बड़ा योगदान दे सकते हैं. अच्छे सपोर्ट के साथ ये बच्चे अपनी चुनौतियों को पार कर सकते हैं और अपने जीवन में सफल हो सकते हैं.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जब आप अपने बच्चे को पढ़ने के लिए कहते हैं तो वो रोने लग जाता है या बहाने बनाने लगता है. अगर आप उनको पढ़ने के लिए बैठाते भी हैं तो वो इधर-उधर करता है या फिर ध्यान नहीं लगाता है. बता दें कि बच्चे अक्सर ऐसा करते हैं जब उनका पढ़ने में मन नहीं लगता है. ऐसे में पेरेंट्स को उनकी टेंशन रहती है कि कहीं उनका बच्चा दूसरों से पीछे न रह जाएं और फेल ना हो जाएं. अगर आप भी अपने बच्चों को पढ़ाने में ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिससे आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा.
पढ़ाई से भागने वाले बच्चों को यूं करें पढ़ने के लिए तैयार
डिसिप्लिन बनाएं
बच्चे को पढ़ाने के लिए आप पढ़ाई का एक टाइम सेट कर लें. उनके लिए एक स्टडी कॉर्नर बनाएं जहां पर वो बैठकर पढ़ाई करें. उनके पढ़ने का टाइम सेट करें और उस समय उनको फोन और टीवी से दूर रखें.
इंट्रेस्टिंग बनाएं
आप उनके पढ़ाई को इंट्रेस्टिंग बनाएं. जिससे वो पढ़ते समय बोर न हो. इसके लिए आप बच्चे को पढ़ाने के लिए नए और क्रिएटिव तरीकों को अपनाएं. आप उन्हें किताबों के अलावा कार्टून्स, वीडियो की मदद से पढ़ाएं. साइंस और पर्यावरण से जुड़े विषयों के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए बच्चों को जंगल, साइंस सेंटर और साइंस एक्ज़िबिशन्स में भी ले जा सकते हैं.
अकेले ना छोड़ें
बच्चों को कभी भी अकेले पढ़ने के लिए न बैठाएं. आप उनके साथ बैंठे और उनके साथ उनकी किताबों को देखें और उनको इस तरह से पढ़ाएं और ऐसे एक्सांपल दें जिससे उनको पढ़ने में मजा और इंट्रेस्ट आए.
कंपेरिसन
बच्चे का कंपेरिसन किसी पड़ोसी के बच्चे या क्लास के किसी दूसरे बच्चे के साथ न करें. अगर आपका बच्चा पढ़ने में अच्छा नही है तो कभी भी दूसरों के सामने उसे बुरा-भला कहने से बचें.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सरसों का तेल किचन में एक आम सामग्री है. इसका उपयोग खाना पकाने के साथ-साथ कई ब्यूटी और में भी किया जाता है. सरसों के तेल में विटामिन ई, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड के साथ-साथ एंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो स्किन में बड़ा रोल प्ले करते हैं. जब इसे चेहरे पर लगाया जाता है, तो यह स्किन को पोषण देता है, चेहरे की चमक बढ़ाता है और स्किन प्रोब्लम्स से बचाता है. हालांकि बहुत कम लोगों को पता होता है कि ग्लोइंग स्किन के लिए सरसों के तेल में क्या मिलाकर लगाना कमाल कर सकता है. अगर आप ग्लोइंग स्किन के लिए घरेलू नुस्खों (Glowing Skin Home Remedies) पर विश्वास करते हैं तो यहां हम बता रहे हैं कि कैसे चमकदार त्वचा के लिए सरसों का तेल चमत्कार कर सकता है.
सरसों के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं ये चीज |
1. हल्दी और सरसों का तेल
हल्दी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो स्किन को हेल्दी बनाते हैं. थोड़ी सी हल्दी को सरसों के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा में चमक आती है.
2. बेसन और सरसों का तेल
बेसन स्किन को साफ करने और डेड स्किन को हटाने में सहायक होता है. इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. यह मिश्रण त्वचा को पोषण देता है और चमक लाता है.
3. दही और सरसों का तेल
दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो स्किन के लिए अच्छे होते हैं. सरसों के तेल के साथ दही मिलाकर लगाने से स्किन की ड्राइनेस कम होती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है.
4. नींबू का रस और सरसों का तेल
नींबू का रस विटामिन सी से भरपूर होता है, जो त्वचा के लिए एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है. इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे कम होते हैं और चेहरे पर चमक आती है.
उपयोग करने का तरीका:
सामग्री को सरसों के तेल के साथ सही मात्रा में मिलाएं.
इस मिश्रण को अपने चेहरे पर समान रूप से लगाएं.
इसे लगभग 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर रहने दें.
बाद में ठंडे पानी से चेहरा धो लें.
सरसों का तेल और इन सामग्रियों का मिश्रण स्किन को न केवल पोषण देता है बल्कि इसे हेल्दी और चमकदार भी बनाता है. हालांकि, किसी भी नए ट्रीटमेंट को आजमाने से पहले एक पैच टेस्ट करें, खासकर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा पूजा का अभिन्न अंग है. पूजा के नियमों में देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा भी शामिल होती है. चाहे मंदिरों की चारों ओर घूम कर की गई परिक्रमा हो या पूजा के दौरान एक ही जगह पर घूमकर की गइ परिक्रमा हो, दोनों का ही बहुत महत्व होता है. आप भी मंदिर में दर्शन करने जाते होंगे तो परिक्रमा जरूर करते होंगे. पर क्या आपको पता है की परिक्रमा क्यों की जाती है और परिक्रमा करने के नियम क्या हैं. आइए जानते हैं परिक्रमा के क्या है नियम और इनसे क्या लाभ होता है….
पहली बार परिक्रमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश और कार्तिकेय ने सबसे पहले परिक्रमा लगाई थी. देवों में सबसे पहले पूजन के लिए निश्चित किया गया था कि जो देव सबसे पहले सृष्टि का चक्कर लगाएंगे उनकी प्रथम पूजा होगी. इसमें भगवान गणेश भगवान शंकर और माता पार्वती के दिन चक्कर लगाकर प्रथम पूज्य देव बन गए. इसी के आधार पर पुण्य की प्राप्ति के लिए देवी देवताओं और उनके घर मंदिरों की परिक्रमा की शुरुआत मानी जाती है.
सकारात्मक ऊर्जा
सनातन धर्म में परिक्रमा को बहुत शुभ माना जाता है. मान्यमा है कि देचर देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा करने से सकारत्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. इससे उसके चारों तरफ फैली नकारात्मकता का नाश हो जाता है. देवी देवताओं या मंदिर की परिक्रमा करना उनके प्रभुत्व के आगे सिर झुकाने की तरह होता है.
इस तरह करें परिक्रमा
शास्त्रों के अनुसार परिक्रमा हमेशा देवी देवता के दाएं हाथ से बाएं हाथ की तरफ लगाना शुभ माना जाता है. परिरकमा की गिनती हमेशा विषम संख्या में होनी चाहिए. जैसे 11 या 21 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. परिक्रमा करते समय बातें नहीं करनी चाहिएद्व इस समय चलते हुए भगवान को स्मरण करना सर्वोत्तम माना जाता है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी परिक्रमा लगाना फायदेमंद माना जाता है. जिस जगह पर प्रतिदिन पूजा होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इस ऊर्जा से आत्मबल मजबूत होता है और उसको मानसिक शांति मिलती है.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /कहते हैं राधा-कृष्ण को होली का त्योहार सबसे ज्यादा प्रिय होता है. यही कारण है कि वृंदावन और बरसाना में फाल्गुन माह की शुरुआत से ही होली की शुरुआत हो जाती है और यहां पर फूलों वाली होली से लेकर लठमार होली तक खेली जाती है. इसी तरह से फुलेरा दूज भी होली का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इसी दिन से मथुरा-वृंदावन में होली की शुरुआत होती है. कहते हैं कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने राधा रानी के साथ फूलों की होली खेली थी, इसलिए इसे फुलेरा होली भी कहा जाता है. कहते हैं कि फुलेरा दूज पर अगर कुछ उपाय किए जाएं तो भगवान श्री कृष्ण की तरह जीवनसाथी मिलता है.
कब मनाई जाएगी फुलेरा दूज |
फुलेरा दूज की तिथि 11 मार्च सुबह 10:44 पर शुरू हो रही है और इसका समापन 12 मार्च को सुबह 7:13 पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, फुलेरा दूज 12 मार्च को ही मनाई जाएगी. वहीं, राधा-कृष्ण की पूजा का मुहूर्त 12 मार्च को सुबह 9:32 से लेकर दोपहर 2:00 तक रहेगा. इस दौरान अगर आप कुछ विशेष काम करें, तो राधा रानी का आशीर्वाद आपको मिलेगा और आपकी लव लाइफ एकदम ठीक चलेगी. साथ ही आपको मनचाहा जीवन साथी भी मिलेगा.
फुलेरा दूज पर करें ये उपाय
अगर आपकी लव लाइफ में परेशानियां चल रही हैं और आप चाहते हैं कि आपकी लव लाइफ राधा कृष्ण की तरह प्रेममय हो, तो आप फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण को पीले रंग के फूल और वस्त्र अर्पित करें. इसके साथ ही कृष्ण को प्रिय माखन मिश्री का भोग लगाएं. ऐसा करने से राधा-कृष्ण प्रसन्न होते हैं और आपकी लव लाइफ में खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं.
अगर आप चाहते हैं कि आपको अपना मनचाहा जीवनसाथी मिले और इसके लिए आपको कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है, घर वाले नहीं मान रहे या कोई अन्य समस्या है, तो फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद एक सफेद कागज पर केसर से उस इंसान का नाम लिखें जिसे आप जीवनसाथी बनाना चाहते हैं. इसके बाद इस सफेद कागज को राधा रानी के चरणों में अर्पित करें. कहते हैं कि ऐसा करने से राधा रानी मनचाहा जीवनसाथी आपको मिलने का आशीर्वाद देती हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /महाशिवरात्रि को लेकर पूरे देश में रौनक नजर आने लगी है. इस बार महाशिवरात्रि का पावन त्योहार 8 मार्च 2024, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. ऐसे में घरों के अलावा मंदिरों में भी जाकर भक्त पूजा-अर्चना करते हैं और शिवलिंग का रुद्राभिषेक करते हैं. कहते हैं कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और जातकों को मनचाहा वरदान देते हैं. लेकिन, अक्सर लोगों का सवाल होता है कि महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक कैसे करना चाहिए और उसका तरीका क्या है. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि रुद्राभिषेक में आपको किन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए.
इस तरह से करें भगवान शिव का रुद्राभिषेक
जल अभिषेक
सबसे सरल तरीका भगवान शिव के अभिषेक करने का है कि आप उन्हें एक लोटा शुद्ध जल अर्पित करें. कहते हैं कि भगवान को शुद्ध जल चढ़ाने मात्र से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं. आप चाहे तो किसी तीर्थ स्थान के जल का इस्तेमाल भी अभिषेक के लिए कर सकते हैं. कहते हैं ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
दूध और घी से करें रुद्राभिषेक
अगर आप चाहते हैं कि आप आरोग्य रहें और सुख संपत्ति के अलावा आपके जीवन में आनंद आए तो आप महाशिवरात्रि के दिन गाय के कच्चे दूध और शुद्ध घी (Ghee) से भगवान शिव का अभिषेक करें.
पंचामृत से करें रुद्राभिषेक
महाशिवरात्रि के मौके पर आप पंचामृत यानी कि दूध, दही, शहद, चीनी, पंच मेवा जैसी चीजें मिलाकर पंचामृत बनाएं और इससे भगवान का रुद्राभिषेक करें. इससे जातकों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
शहद से करें रुद्राभिषेक
स्टूडेंट अगर पढ़ाई में आगे बढ़ना चाहते हैं और सफल होना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि के मौके पर शहद से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें. इससे शिक्षा में सफलता मिलने के साथ ही मान-सम्मान में भी वृद्धि होती है और कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है.
इत्र का करें इस्तेमाल
महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग पर इत्र लगाने से मानसिक शांति मिलती है, इतना ही नहीं अगर आप किसी भी प्रकार के तनाव या नींद की समस्या से परेशान है तो आपको इत्र से रुद्राभिषेक करना चाहिए.
गन्ने के रस से करें रुद्राभिषेक
शिवरात्रि के मौके पर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इससे जातकों की धन की समस्या दूर होती है और घर में समृद्धि आती है.
दही से करें अभिषेक
दूध और घी के अलावा अगर दही से शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया जाए, तो इससे किसी भी कार्य में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सकता है. साथ ही इससे ग्रह कलेश भी दूर होता है और घर में सुख-शांति आती है.
भांग से करें रुद्राभिषेक
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव को भांग अति प्रिय है और उन्हें भांग की पत्तियां जरूर चढ़ाई जाती हैं. ऐसे में शिवरात्रि के मौके पर यदि आप भांग की पत्तियों को पीसकर इससे शिवलिंग का रुद्राभिषेक करते हैं, तो परिवार में हो रहा लड़ाई झगड़ा, बीमारियां और अन्य समस्याओं से निजात मिलती है.
प्रेरणा : परिणाम की चिंता किए बिना अपना बेस्ट देना ही सफलता का मूलमंत्र - मंत्री ओ.पी. चौधरी
छात्रों को अपनी काबिलियत बढ़ाने वाले गुणों पर करना चाहिए काम
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने छात्रों से की परीक्षा पर चर्चा, बढ़ाया मनोबल, छात्रों के सवालों के दिए जवाब
रायपुर / शौर्यपथ /
वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता असफलता जीवन का हिस्सा है लेकिन व्यक्ति को लगातार अपनी काबिलियत पर काम करना चाहिए, व्यक्तित्व को मजबूत बनाना चाहिए, कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक भाव से धैर्य के साथ अपना प्रयास जारी रखना चाहिए। ये गुण किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन में सफल होने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से छात्रों को परीक्षा की तैयारियों को लेकर मार्गदर्शन दे रहे थे। उन्होंने बच्चों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परिणाम की चिंता किए बगैर अपना बेस्ट देने पर फोकस करें।
वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि व्यक्ति को अपने भीतर ऐसे मानवीय गुणों का विकास करना चाहिए जो उसके सफलता के लिए सहायक हो। लक्ष्य के प्रति समर्पण और परिश्रम करने की क्षमता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे फर्क नही पड़ता कि आप असफल होते हो, अगर आप ईमानदारी से प्रयास करते हैं तो आगे बड़ी सफलता को जरूर प्राप्त करेंगे। उन्होंने अपनी शैक्षणिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर चर्चा करते हुए बताया कि आईएएस बनने के लक्ष्य के साथ उन्होंने मेहनत की। परिस्थितियां कैसी भी हों, हमेशा अपना बेस्ट देने का प्रयास किया। इससे वे देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करने में सफल रहे। आगे उन्होंने राजनीतिक जीवन में प्रवेश करने का निश्चय किया। इसके लिए भी लगातार मेहनत की।
इस मौके पर उन्होंने छात्रों के सवालों के जवाब दिए चिन्मय डनसेना ने पूछा कि परीक्षा के एक दिन पहले होने वाले तनाव को कैसे दूर करें। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि परीक्षा के दौरान तनाव स्वाभाविक है। लेकिन आप यह ध्यान रखें कि पूरे साल भर के मेहनत का सार परीक्षा के 3 घंटों में निकलता है। इसलिए अपना मन शांत रखें और उन 3 घंटों में शांत चित्त से अपना बेस्ट देने पर फोकस करें। परिणाम की चिंता मत करें। इससे चिंता और तनाव के कारण होने वाली गलतियों की संभावनाएं भी काफी कम हो जाएंगी।गीता में भी कहा गया है कि व्यक्ति को कर्म करने चाहिए फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। प्रयास अच्छा है तो परिणाम भी अच्छा होगा। सिर्फ टॉपर होना या स्कूल में अच्छे परसेंटेज लाना ही जीवन में सफलता की गारंटी नहीं है। कई सफल लोग अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई में असफल हुए लेकिन जीवन में उन्होंने सफलता के कीर्तिमान रचे और जीनियस कहलाए। रामानुजन 12 वीं की परीक्षा में फेल हो गए थे, लेकिन आगे चल कर वे महान गणितज्ञ बने। मुंशी प्रेमचंद अपने प्रतिभा से शीर्ष साहित्यकारों में शुमार हुए। बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स कॉलेज ड्रॉपआउट थे। लेकिन उन्होंने अपनी काबिलियत से जो काम किया आज वो इतिहास है। एक छात्र ने जब वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी से पूछा कि वे अपना सिलेबस रिवीजन कैसे करते थे तो उन्होंने बताया कि नोट्स बनाकर पढ़ने से रिवीजन अच्छा होता है। नोट्स ऐसा हो जिस पर एक नजर मारने से पूरा चैप्टर क्लियर हो जाए। रिवीजन परीक्षा की तैयारी का अहम हिस्सा है।
इमोशनल इंटेलिजेंस भी सफलता के लिए बेहद जरूरी
प्राची गुप्ता ने पूछा कि आज आईक्यू के साथ इक्यू को भी सफलता के लिए जरूरी बताया जाता है, यह क्या होता है। वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने इस आज के समय में इक्यू को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आईक्यू बुद्धिमत्ता को दर्शाता है। वहीं इक्यू भावनात्मक गुणांक को बताता है। आज इमोशनल इंटेलिजेंस बहुत जरूरी है। यह विचार को लेकर भावनात्मक समझ और नकारात्मकता से निपटने में व्यक्ति की योग्यता को बढ़ाता है। यह बताता है कि हम अपने व्यक्तित्व को किस तरह से लेकर चल रहे हैं। किसी व्यक्ति का ईक्यू अच्छा होगा तो वह मन में आने नेगेटिव विचार के कारणों को समझ कर उसे दूर करने के लिए सही कदम उठा पाएगा। कठिन परिस्थिति में व्यक्तित्व बिखरेगा नही बल्कि उचित निर्णय ले पाएगा।
पालक भी समझें बच्चों की योग्यता, अनावश्यक न लादें उम्मीदों का बोझ
निधि बघेल ने पूछा कि कई बार माता पिता और शिक्षकों के उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन करने को लेकर दबाव महसूस होता है, इसे कैसे दूर करें। इस पर वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने कहा कि छात्र अपना बेस्ट दें और मन में यह भाव रखें कि मैंने अपनी क्षमता और योग्यता ने अनुरूप पूरा प्रयास किया है। कई बार परिणाम ऊपर नीचे हो सकते हैं। लेकिन इसको लेकर अनावश्यक दबाव नहीं लेना चाहिए। उन्होंने पालकों से भी अपील करते हुए कहा कि बच्चों की क्षमता को समझें। उसे बढ़ाने के लिए उनका मनोबल बढ़ाएं। उन पर उम्मीदों का बोझ बिलकुल न लादें। उन्हें हाई परसेंटेज लाने का प्रेशर न डालें। बच्चों को सकारात्मक माहौल देंगे और उनका आत्मविश्वास बढ़ाते रहेंगे तो वे उम्मीद से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
प्रयास संस्था और नालंदा परिसर से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की मिलेगी सुविधा
वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी ने बच्चों को आगे क्लैट, यूनिवर्सिटीज के एंट्रेंस एग्जाम के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जागरूक रहकर परीक्षा की तैयारी करने और उसमें शामिल होने की बात कही। उन्होंने बताया कि रायगढ़ में प्रयास संस्था खुलने जा रही है। पहली बार संभागीय मुख्यालय से बाहर रायगढ़ में यह संस्था खुलने जा रही है। यहां 11 वीं और 12 वीं के छात्रों को स्कूली शिक्षा के साथ आईआईटी, मेडिकल एंट्रेंस नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की निःशुल्क सुविधा भी मिलेगी। यह एक आवासीय संस्था होगी। साथ ही यहां नालंदा परिसर भी खुलने जा रहा है। इन सुविधाओं से यहां के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों के लिए अच्छा माहौल मिलेगा। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मेहनत ऐसा करो कि आपका हस्ताक्षर एक दिन ऑटोग्राफ बन जाए।
दुर्ग / शौर्यपथ / हेमचंद यादव विश्वद्यालय से संबंद्ध छत्तीसगढ कॉमर्स एंड साइंस महाविद्यालय सेक्टर 6 की बीएड के चौथे सेमेस्टर की छात्रा नंदिता देशमुख ने टॉप टेन में स्थान बनाया है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग द्वारा गत दिवस घोषित प्राविण्य सूचि जारी की है जिसमें स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडकों की छात्रा युक्ति साहू ने 12 सौ में से जहां 1004 अंक प्राप्त कर पूरे यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान प्राप्त की है वहीं छत्तीसगढ कॉमर्स एंड साइंस महाविद्यालय सेक्टर 6 की बीएड के चौथे सेमेस्टर की छात्रा नंदिता देशमुख 983 अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त कर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय सहित छत्तीसगढ कॉमर्स एंड साइंस महाविद्यालय का नाम रौशन की है। नंदिता के इस उपलब्धि पर छग कॉमर्स एंड साइंस महाविद्यालय के डायरेक्टर ताहिर खान, प्राचार्य श्रीमती अनघा आगासे एचओडी श्रीमती पूनम पटेल सहित सभी प्राध्यापकों ने छात्रा नंदिता देशमुख को बधाई दी है।
छात्रा नंदिता देशमुख ने हमारे संवाददाता को बताया कि मेरे इस सफलता के पीछे मेरे माता पिता के साथ सबसे अधिक योगदान मेरे इस महाविद्यालय के डायरेक्टर मो. ताहिर खान के प्रोत्साहन और प्राचार्य श्रीमती अनघा आगासे,एचओडी श्रीमती पूनम पटेल एवं मेरे सभी प्राध्यापकों को जाता है जिनके उचित मार्गदर्शन एवं उच्च स्तरीय अध्यापन कार्य और उनके दिशा निर्देश के अनुसार पढाई की और परीक्षा की तैयारी की जिसके कारण प्राविण्य सूची में दूसरा स्थान प्राप्त कर सकी।
सेहत /शौर्यपथ /हल्दी की गिनती औषधीय मसालों में की जाती है. इसमें करक्यूमिन होता है जो सेहत के लिए फायदेमंद है. वहीं, हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण भी होते हैं. मसाले के रूप में तो हल्दी फायदेमंद है ही, लेकिन कच्ची हल्दी सेहत के लिए अत्यधिक लाभकारी होती है. कच्ची हल्दी मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर करती है और यह शरीर को कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से बचाती है सो अलग. यहां जानिए सेहत को कच्ची हल्दी की चाय से मिलने वाले फायदों के बारे में.
कच्ची हल्दी की चाय पीने के फायदे |
कच्ची हल्दी की चाय एंटी-ऑक्सीडेंट्स, करक्यूमिन और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है. इसके सेवन से शरीर को फैट बर्निंग गुण भी मिलते हैं. इस चाय को बनाने के लिए एक कप पानी में कच्ची हल्दी को कूटकर डालिए. जब पानी पक जाए तो इसे छानकर निकाल लें. तैयार है कच्ची हल्दी की चाय.
पाचन बेहतर करने में कच्ची हल्दी की चाय के फायदे देखे जा सकते हैं. कच्ची हल्दी डाइजेस्टिव सिस्टम में फैट्स को ब्रेक करती है और शरीर को बेहतर तरह से पोषक तत्वों को सोखने में मदद करती है.
कच्ची हल्दी की चाय पीने पर इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है. इस चाय से डायबिटीज के मरीजों को खासतौर से फायदा मिलता है.
सूजन को कम करने में भी कच्ची हल्दी की चाय के फायदे देखे जा सकते हैं. कच्ची हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मोटाबॉलिक फंक्शन को बेहतर करने में भी असरदार हैं.
वजन घटाने के लिए भी कच्ची हल्दी की चाय पी जा सकती है. कच्ची हल्दी के फैट बर्निंग एंजाइम्स शरीर के एक्सेस फैट को कम करने में कारगर होते हैं.
कच्ची हल्दी से शरीर को एंटी-एजिंग इफेक्ट्स भी मिलते हैं. इससे ना सिर्फ शरीर बल्कि त्वचा की पर भी एजिंग साइंस कम होने लगते हैं.
त्वचा पर कच्ची हल्दी के कई फायदे होते हैं. कच्ची हल्दी की चाय पीने पर चोट जल्दी भरने लगती है, दाग-धब्बे कम होते हैं और एक्ने की दिक्कत कम होती है.
हड्डियों को भी कच्ची हल्दी से फायदा मिलता है. इसके सेवन से हड्डियों में रहने वाला दर्द कम होने लगता है.
रसोई टिप्स /शौर्यपथ / कीड़े मकोड़ों का आना रसोई में एक सामान्य समस्या है. इन मकोड़ों को रोकने के लिए कई केमिकल उपाय उपलब्ध हैं, लेकिन ये उपाय अक्सर नुकसानकारक हो सकते हैं. इसलिए, हम आपको कुछ प्राकृतिक उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं. किचन में चींटियों का सामना करना आम समस्या है और यह खासकर गर्मी के मौसम में ज्यादा होता है. चींटियां खाने की चीजों पर हमला करती हैं और उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं. किचन की स्लिप हो या दीवार चींटियां हर कहीं पहुंच जाती हैं. ऐसे में बहुत से लोग सवाल करते हैं कि चींटियों को कैसे भगाएं? चींटियों से छुटकारा पाने के उपाय क्या हैं? अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो यहां हम कुछ तरीके बता रहे हैं कि आप कैसे चींटियों से छुटकारा पा सकते हैं.
किचन में चीटियों से कैसे छुटकारा पाएं |
1. सफाई और हाइजीन
किचन को साफ और स्वच्छ रखना चींटियों के आने को रोक सकता है. खाना बनाने के बाद साफ पानी और साबुन का उपयोग करके किचन को अच्छी तरह से साफ करें. बर्तनों को तुरंत धोएं और ज्यादा समय तक भोजन न छोड़ें.
2. कपूर का पानी
चींटियों के आने को रोकने के लिए कपूर का पानी का मिश्रण बनाएं और इसे उन स्थानों पर लगाएं जहां चींटियां आती हैं. यह तरीका चींटियों को भगाने में मदद कर सकता है.
3. लाइम का प्रयोग
लाइम का रस भी चींटियों को भगाने में उपयोगी हो सकता है. लाइम के रस को वहां लगाएं जहां चींटियों पनपने की संभावना होती है या जहां से चींटियां आ रही हैं.
4. नीम का तेल
नीम का तेल भी चींटियों को भगाने के लिए उपयोगी है. इसे उन जगहों पर लगाएं जहां चींटियाँ आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
5. लाल मिर्च पाउडर
मकोड़ों को भगाने के लिए एक अच्छा उपाय है लाल मिर्च पाउडर. आप जहां भी मकोड़ों के आने की संभावना हो, वहां पर थोड़ा सा लाल मिर्च पाउडर छिड़ककर रख सकते हैं. मकोड़े इस खुशबू को बिलकुल पसंद नहीं करते और दूर भाग जाते हैं.
6. लहसुन का तेल
लहसुन का तेल भी मकोड़ों को भगाने के लिए उपयुक्त होता है. आप रसोई के कोनों में लहसुन का तेल लगा सकते हैं या फिर एक टिस्यू के साथ इस तेल को पोंचकर वहां रख सकते हैं जहां मकोड़े ज्यादा पाए जाते हैं.
चींटियों के साथ लड़ना आसान नहीं हो सकता, लेकिन ऊपर बताए गए उपायों को फॉलो करके आप चींटियों से छुटकारा पा सकते हैं और अपने किचन को साफ रख सकते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है. मान्यता है महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है और जीवन में कोई कष्ट नही रहता है. इस व्रत को करने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेलपत्र के उपाय किए जा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे करना चाहिए बेलपत्र के उपाय.
महाशिवरात्रि को करें बेलपत्र के उपाय
बेलपत्र के पेड़ के नीचे करें पूजा
महाशिवरात्रि के दिन बेलपत्र के पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित कर विधिविधान से उसकी पूजा करें. मान्यता है कि बेल के वृक्ष पर भगवान शिव वास करते हैं.
बेलपत्रके नीचे करे पूजा
जीवन की समस्याओं को समाप्त करने के लिए बेलपत्र के नीचे जाएं और वहां किसी भी कंकड़ को भगवान शिव का रूप मानकर विधिविधान से पूजा अर्चना करें. उन्हें चावल और मूंग अर्पित कर लोटे से जल चढ़ाएं. इसके बाद प्रभु से अपनी समस्याएं बताएं. यह उपाय आपकी समस्याओं को दूर करने में मदद करेगा.
घर में लगाएं बेल का पेड़
मान्यता है कि बेल के वृक्ष के जड़ों में माता गिरजा, तने मां महेश्वरी, शाखाओं में मां दक्षायनी, पत्तियों में माता पार्वती और फूलों में मां गौरी का निवास होता है. बेल पत्र के पेड़ से घर की नकारात्मक और बुरी शक्तियां घर से दूर रहती है और चंद्रदोष दूर हो जाता है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
