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May 31, 2026
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  खाना खजाना /शौर्यपथ /स्नैक के साथ चटनी हमेशा एक अच्छा ऑप्शन बनती है. अगर आप भी चटनी खाने के शौकीन हैं और होली पर घर आए गेस्ट को स्नैक्स के साथ सॉस को नहीं पेयर करना चाहते हैं तो आप चटपटी इमली की चटनी बना सकते हैं. इमली की चटनी को बनाना बहुत ही आसान है. होली पर तरह-तरह के स्नैक्स बनाएं जाते हैं. होली पर्व को पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है. पहले दिन होलिका दहन होता है. उसके बाद अगले दिन रंग-गुलाल से होली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी और 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर इसका समापन होगा. इसलिए होलिका दहन 24 मार्च दिन रविवार को होगा और रंग वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी. तो चलिए बिना किसी देरी के जानते हैं इमली की चटनी बनाने की आसान रेसिपी.
कैसे बनाएं इमली की चटनी-
सामग्री-
    इमली
    चीनी
    काला नमक
    लाल मिर्च
    काली मिर्च
    भुना जीरा
    हरी मिर्च
    हरा धनिया
विधि-
सबसे पहले इमली को गरम पानी में 2 घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद इसमें छलनी से छानकर गूदे को अलग निकाल दें और पानी को अलग कर लें. अब इस पानी में लालमिर्च, काला नमक, पीसा हुआ भुना जीरा पाउडर, थोड़ी कालीमिर्च डालकर और हल्की सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें, बारीक कटी हरी धनिया मिक्स करें. स्वादिष्ट चटनी तैयार है.
इमली के स्वास्थ्य लाभ-
इमली खाने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. इमली को सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इमली में एंटीऑक्सीडेंट, फाइटोकेमिकल्स है और विटामिन ए, सी, ई, के, बी 6, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन जैसे अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं.

  खाना खजाना /शौर्यपथ /होली का त्योहार प्रेम, उमंग और उल्लास को दर्शाता है. होली बसंत ऋतु में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है. होली पर्व को पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है. पहले दिन होलिका दहन  होता है. उसके बाद अगले दिन रंग-गुलाल से होली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को सुबह 9 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी और 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर इसका समापन होगा. इसलिए होलिका दहन 24 मार्च दिन रविवार को होगा और रंग वाली होली 25 मार्च को खेली जाएगी. होली पर तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाएं जाते हैं. होली के दिन लोग एक दूसरे के घर जाकर गुलाल लगाते हैं. घर में गेस्ट आते हैं. अगर आप भी इस होली अपने घर आए गेस्ट को स्नैक्स में कुछ स्वादिष्ट खिलाना चाहते हैं तो आप इस रेसिपी को ट्राई कर सकते हैं.  
कैसे बनाएं सेव पूरी रेसिपी-
सामग्री-
    मैदा
    सूजी
    उबला मैश किया आलू
    प्याज, टुकड़ों में कटा हुआ
    टमाटर
    स्वादानुसार नमक
    लाल चटनी
    इमली चटनी
    हरी चटनी
    तेल जरूरत के अनुसार
    अजवाइन
    चाट मसाला
    एक चुटकी जीरा पाउडर
    नींबू का रस
विधि-
एक बाउल में मैदा, सूजी, नमक अजवाइन और तेल डालकर मिक्स करें, फिर पानी डालकर एक डो तैयार करें. फिर इस डो को रोटी की तरह बेल लें और छोटे गोल कटर की मदद से छोटी छोटी पूरी कट कर लें.  एक पैन या कढ़ाही में तेल गरम करें और पूरियों को क्रिस्पी और गोल्डन होने तक फ्राई करें. अब एक प्लेट में पूरियों को लगाएं, इस पर उबला मैश आलू, प्याज, टमाटर डालें. तीनों चटनियां डालें, फिर सेव, चाट मसाला, नमक और जीरा पाउडर डालें. आखिर मे नींबू का रस डालकर सर्व करें.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि जो भक्त संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं उनपर भगवान गणेश अपनी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं. पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. फाल्गुन मास में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि शिव-पार्वती पुत्र गणेश भगवान की पूजा करने से घर में सिद्धि आती है. इससे पूजा करने वाले भक्त को शुभ फल की प्राप्ति होती है और बप्पा सदैव भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं. जानिए इस माह किस दिन रखा जाएगा द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत और कैसे की जा सकती है बप्पा की पूजा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है |
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी तिथि का आरंभ 28 फरवरी की रात 1 बजकर 53 मिनट पर हो रहा है और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 29 फरवरी की सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर हो जाएगा. इस चलते द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 28 फरवरी, बुधवार के दिन रखा जाएगा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा करने के लिए सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त में उठना बेहद शुभ माना जाता है. इसके पश्चात स्नान किया जाता है, स्वच्छ वस्त्रों का धारण करते हैं और भगवान गणेश का पूजन किया जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है. पूजा करने के लिए चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उसपर भगवान गणेश की प्रतिमा या मूर्ति विराजित की जाती है. इसके बाद गणपति बप्पा के समक्ष रोली, अक्षत, पंचामृत, दूर्वा, जनेऊ, सिंदूर और सुपारी आदि अर्पित किए जाते हैं. अब दीपक जलाकर बप्पा की आरती की जाती है, गणेश चालीसा का पाठ होता है और संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ी जाती है. भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और संध्याकाल में बप्पा की आरती के पश्चचात फलाहार किया जाता है. अगली सुबह पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण होता है. कहते हैं इस व्रत को रखने पर बप्पा प्रसन्न हो जाते हैं.

  आस्था /शौर्यपथ /तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में धार्मिक महत्व रखता है. पुराणों मे तुलसी को मां का दर्जा मिला है. यही कारण है कि इस पौधे की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पवित्र पौधा लगा होता है उस घर में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि बनी रहती है. इससे घर की नेगेटिविटी दूर होती है. ऐसे में आज इस महत्वपूर्ण पौधे में जल के अलावा और क्या चढ़ाना चाहिए, उसके बारे में बताने वाले हैं.  भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है यह फल, जरूर चढ़ाएं पूजा करते समय शिवलिंग पर
तुलसी के पौधे पर जल के अलावा चढ़ाते हैं ये चीजें
हिंदू परिवारों में नियमित रूप से तुलसी की पूजा की जाती है. तुलसी पूजन के कुछ खास नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है. इनमें रविवार और द्वादशी तिथि को तुलसी के पौधे जल चढ़ाने से मना किया जाता है. तुलसी पर जल चढ़ाने की परंपरा से तो सब वाकिफ हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि तुलसी पर और कई चीजें चढ़ाई जाती हैं. इनमें गन्ने का रस और कच्चे दूध का भी काफी महत्व है.
तुलसी के पौधे पर कच्चा दूध चढ़ाने के कई फायदे
हिंदू धर्म शास्त्रों में तुलसी के पौधे पर कच्चा दूध चढ़ाने के कई फायदे बताए गए हैं. इनमें सबसे पहला लाभ यह माना जाता है कि घर-परिवार से क्लेश और लड़ाई-झगड़ा खत्म होता है. मान्यता है कि भगवान शिव को बेहद प्रिय कच्चे दूध को तुलसी के पौधे पर चढ़ाने से घर की आमदनी बढ़ती है, धन का लाभ होता है. लोगों का आर्थिक संकट दूर होता है और घर में खुशहाली आती है.
तुलसी के पौधे पर कच्चा दूध चढ़ाने का तरीका
तुलसी में सीधे कच्चा दूध नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि जल के साथ कच्चा दूध मिलाकर अर्पित किया जाता है. खासकर गुरुवार के दिन ऐसा जरूर करना चाहिए. ऐसा करने वालों को भगवान विष्णु की कृपा भी बनी रहती है. क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय हैं. परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
तुलसी की नियमित पूजा में बरतें यह सावधानी
तुलसी की नियमित पूजा करने वाले भक्तों को सावधानी रखनी चाहिए कि कभी भी अशुद्ध हाल में तुलसी को नहीं छूना चाहिए. वहीं, घर में दक्षिण दिशा में तुलसी के पौधे नहीं लगाने चाहिए. तुलसी का गमला भी नहीं रखना चाहिए. इसके साथ ही भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं इस्तेमाल करना चाहिए. भगवान शिव को भूलकर भी तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए.

  आस्था /शौर्यपथ /तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में धार्मिक महत्व रखता है. पुराणों मे तुलसी को मां का दर्जा मिला है. यही कारण है कि इस पौधे की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पवित्र पौधा लगा होता है उस घर में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि बनी रहती है. इससे घर की नेगेटिविटी दूर होती है. ऐसे में आज इस महत्वपूर्ण पौधे में जल के अलावा और क्या चढ़ाना चाहिए, उसके बारे में बताने वाले हैं.  भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है यह फल, जरूर चढ़ाएं पूजा करते समय शिवलिंग पर
तुलसी के पौधे पर जल के अलावा चढ़ाते हैं ये चीजें
हिंदू परिवारों में नियमित रूप से तुलसी की पूजा की जाती है. तुलसी पूजन के कुछ खास नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है. इनमें रविवार और द्वादशी तिथि को तुलसी के पौधे जल चढ़ाने से मना किया जाता है. तुलसी पर जल चढ़ाने की परंपरा से तो सब वाकिफ हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि तुलसी पर और कई चीजें चढ़ाई जाती हैं. इनमें गन्ने का रस और कच्चे दूध का भी काफी महत्व है.
तुलसी के पौधे पर कच्चा दूध चढ़ाने के कई फायदे
हिंदू धर्म शास्त्रों में तुलसी के पौधे पर कच्चा दूध चढ़ाने के कई फायदे बताए गए हैं. इनमें सबसे पहला लाभ यह माना जाता है कि घर-परिवार से क्लेश और लड़ाई-झगड़ा खत्म होता है. मान्यता है कि भगवान शिव को बेहद प्रिय कच्चे दूध को तुलसी के पौधे पर चढ़ाने से घर की आमदनी बढ़ती है, धन का लाभ होता है. लोगों का आर्थिक संकट दूर होता है और घर में खुशहाली आती है.
तुलसी के पौधे पर कच्चा दूध चढ़ाने का तरीका
तुलसी में सीधे कच्चा दूध नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि जल के साथ कच्चा दूध मिलाकर अर्पित किया जाता है. खासकर गुरुवार के दिन ऐसा जरूर करना चाहिए. ऐसा करने वालों को भगवान विष्णु की कृपा भी बनी रहती है. क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय हैं. परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
तुलसी की नियमित पूजा में बरतें यह सावधानी
तुलसी की नियमित पूजा करने वाले भक्तों को सावधानी रखनी चाहिए कि कभी भी अशुद्ध हाल में तुलसी को नहीं छूना चाहिए. वहीं, घर में दक्षिण दिशा में तुलसी के पौधे नहीं लगाने चाहिए. तुलसी का गमला भी नहीं रखना चाहिए. इसके साथ ही भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं इस्तेमाल करना चाहिए. भगवान शिव को भूलकर भी तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए.

  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / होली का त्योहार खुशी और मेलजोल का एक शानदार मौका है. साथ ही यह आगे की खुशियों की तसल्ली कर लेने का भी समय है. दुनिया भर के हिंदू परिवार होली पर न सिर्फ रंग और गुलाल के साथ खुलकर जश्न मनाते हैं, मिठाइयां खाते और बांटते हैं, बल्कि भगवान को धन्यवाद कहते हैं. कुछ लोग होली पर कई ऐसे धार्मिक उपाय भी आजमाते हैं जिनसे उनकी दिक्कतें दूर हो जांए. कुछ खास उपाय आजमाने से आपकी परेशानी दूर होने की मान्यता लंबे समय से चली आ रही है. इनमें से एक है होली की रात घर में सरसों के तेल का दीया या दीपक जलाना. कहा गया है कि ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. आइए, दीपक को जलाने के समय और तरीके के बारे में जानते हैं.
कब जलाएं होली की रात दीया
- होली की रात घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल से भरा मिट्टी का चौमुखी दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से घर में मौजूद निगेटिव एनर्जी खत्म होती है. इसके साथ ही घर और परिवार के लोगों में सकारात्मक उर्जा का वास होता है.
- होली की रात घर में सरसों के तेल का दीपक जलने से धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, ऐसा माना जाता है. हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए हर तरह के जतन किए जाते हैं. लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख, शांति और संपन्नता आती है. धन की समस्या तो बिल्कुल खत्म हो जाती है.
- अगर लंबे समय से कोशिश करने के बावजूद किसी काम में सफलता नहीं मिल रही हो तो आपको होली की रात घर में सरसों तेल का दीपक जरूर जलाना चाहिए. इससे आपकी कामयाबी के रास्ते खुलेंगे, ऐसा माना जाता है.
- अगर परिवार में आपस में नहीं बन रही हो, घर में कलेश रहता हो, अपने लोगों के बीच बेवजह विवाद होता हो तो होली की रात घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल से भरा मिट्टी का चौमुखी दीप जलाने का उपाय करना चाहिए. माना जाता है कि इससे परिवार में प्रेम बढ़ेगा और घर में शांति का वास होता है.
- ये भी माना जाता है कि होली की रात सरसों तेल के दीपक जलाने के उपाय से घर में लड़ाई-झगड़े नहीं होंगे, माहौल अच्छा होगा तो खुशहाली को आने से भला कौन रोक सकता है.
- अगर आप बेरोजगार हैं, कोशिश करने के बावजूद सही नौकरी नहीं मिल रही है तो होली की रात घर के मेन गेट पर सरसों का तेल भरकर मिट्टी का चौमुखी दीपक जरूर जलाएं. इसके बाद मनचाही नौकरी मिलने में मदद मिलेगी. कहा भी गया है कि माता लक्ष्मी की कृपा हो जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है.

आस्था /शौर्यपथ / शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और बाधाएं दूर करने के लिए लोग शनिवार को कई तरह के उपाय करते हैं. मान्यता है कि शनिवारको शनिदेव के मंदिर में सरसों के तेल के साथ-साथ पीपल के पेड़ को जल चढ़ाने से शनि की साढ़े साती से मुक्ति मिलती है. एक उपाय ऐसा भी है जिससे शनिदेव के साथ लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न किया जा सकता है. आइए जानते हैं शनिवार को क्या करने से लक्ष्मी नारायण भी हैं कृपा बरसाते हैं.
लक्ष्मी नारायण की कृपा
शनिदेव न्याय के स्वामी ग्रह हैं. मान्यता है कि पूर्व जन्म के कर्मों के कारण इस जन्म में लोगों पर शनिदेव की दृष्टि पड़ती है और जिस पर भी शनिदेव की कुदृष्टि पड़ती है उसे जीवन में कष्ट उठाने पड़ते हैं. पद्म पुराण में कहा गया है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है. इसमें पानी देने या उसकी परिक्रमा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं, ऐसी मान्यता है शनिदेव भगवान विष्णु के भक्त हैं.
तीनों देवों का वास
यह भी मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर सिर्फ भगवान विष्णु नहीं बल्कि तीनों देवों का वास होता है. पीपल के पेड़ की जड़ों में भगवान विष्णु वास करते हैं, जबकि तने में भगवान शंकर और ऊपरी भाग में ब्रह्मा का वास माना गया है.
शनिवार को करें उपाय
शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे दिया जलाने से न केवल शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है बल्कि भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं, ऐसी मान्यता है. शनिवार का यह उपाय सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा शाम को 5 बजे से 7 बजे के बीच भी दिया जलाया जा सकता है. रात को 9 बजे के बाद यह उपाय नहीं करना चाहिए.

  आस्था /शौर्यपथ /ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. भगवान शिव को समर्पित मंत्रों का जाप हमें परेशानियों से उबरने में मदद करता है. ऐसे शिव मंत्र हैं जिनका जाप जीवन से दुख, रोग और परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है. वह विनाश के देवता हैं और दया के प्रतीक भी हैं. वह भक्तों को मोक्ष देते हैं, अर्थात भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाते हैं. भगवान शिव के इन शक्तिशाली मंत्रों के जाप मात्र से आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं.
 ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. भगवान शिव को समर्पित मंत्रों का जाप हमें परेशानियों से उबरने में मदद करता है. ऐसे शिव मंत्र हैं जिनका जाप जीवन से दुख, रोग और परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है. वह विनाश के देवता हैं और दया के प्रतीक भी हैं. वह भक्तों को मोक्ष देते हैं, अर्थात भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाते हैं. भगवान शिव के इन शक्तिशाली मंत्रों के जाप मात्र से आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं.
शक्तिशाली मंत्र
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- शिव गायत्री मंत्र - ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्
- ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।
- श्री शिवाय नम: ।।
श्री शंकराय नम: ।।
श्री महेशवराय नम: ।।
ॐ नमो भगवते रूद्राय।।
- करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं ।
विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥
इन मंत्रों का जाप करने के फायदे
आपको बता दें कि इन मंत्रों का जाप करने से परिवार में क्लेश नहीं होता है दिमाग शांत रहता है. इन मंत्रों का जाप करने से शरीर भी निरोगी रहती है. इससे आप तनाव मुक्त रहते हैं. आपको बता दें कि इन मंत्रों का जाप अपनी हथेलियों को देखते हुए करें. तो आज से आप इन मंत्रों को जीवन का हिस्सा बना लीजिए फिर देखिए कैसे आपको इसके फायदे मिलते हैं.

   टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / त्वचा की सुंदरता बढ़ाने के लिए ना सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल फायदेमंद होता है बल्कि घर की भी ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनके सेवन से त्वचा अंदरूनी रूप से बेहतर बनती है. यहां भी रसोई की कुछ ऐसी ही चीजों का जिक्र किया जा रहा है जो चेहरे को निखारने में कमाल का असर दिखाती हैं. इन चीजों को पानी में मिलाकर पीने पर शरीर से गंदे टॉक्सिंस निकलते हैं और शरीर डिटॉक्स होता है, वजन कम होने में असर नजर आता है, चेहर पर चमक नजर आती है और त्वचा पर निकलने वाले फोड़े-फुंसियों की दिक्कत भी दूर हो जाती है. जानिए पानी में किन-किन चीजों को मिलाकर बनाया जा सकता है डिटॉक्स वॉटर.
निखरी त्वचा के लिए डिटॉक्स वॉटर |
पानी में नींबू डालना
रोजाना एक गिलास पानी में नींबू का रस निचोड़कर या फिर नींबू का टुकड़ा डालकर पीने पर अच्छा डिटॉक्स वॉटर तैयार हो जाता है. इस डिटॉक्स ड्रिंक को पीने पर शरीर को विटामिन सी और नमी मिल जाती है. इस पानी से स्किन पर कोलाजन का प्रोडक्शन भी बढ़ता है.
खीरे वाला पानी
आप अपनी पानी की बोतल में खीरे के टुकड़े डालकर अपने साथ ऑफिस लेकर जा सकते हैं. इस पानी से शरीर को हाइड्रेशन मिलता है जिससे रूखी-सूखी त्वचा की दिक्कत भी दूर हो जाती है. इस पानी को पीने पर चेहरे पर निखार बना रहता है.
सेब के सिरके का पानी
सेब का सिरका त्वचा को निखारने में तो असरदार है ही, साथ ही इसका पानी पीने पर शरीर शेप में आने लगता है. सेब के सिरके वाला पानी बनाने के लिए एक गिलास पानी में 2 चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर मिक्स कर लें. इस पानी को रोजाना पिया जाए तो चेहरे पर एक्ने और फोड़े-फुंसी की दिक्कत नहीं होती है.
संतरे वाला पानी
एक से डेढ़ लीटर पानी में एक बड़े संतरे को काटकर डाल लें. इसमें एक अदरक के टुकड़े को भी घिसकर डालें. बस तैयार है आपका डिटॉक्स वॉटर. इस पानी को रोजाना पिएं या इसे एक दिन छोड़कर पीना शुरू करें. शरीर से टॉक्सिंस निकलेंगे और त्वचा पर चमक नजर आएगी सो अलग.
हल्दी से बनाएं डिटॉक्स वॉटर
  औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का सौंदर्य बढ़ाने में कई तरह से इस्तेमाल होता है. ऐसे में हल्दी का पानी पीकर त्वचा पर निखार लाया जा सकता है. इस पानी को तैयार करने के लिए 2 से 3 कप पानी लें और उसमें कच्ची हल्दी को काटकर डाल लें. अब इस पानी में 2 से 3 चम्मच नींबू के रस की डालें और स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिला लें. इस पानी को पीने पर त्वचा चमकने लगती है. 

  टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /आयुर्वेद में ऐसी कई चीजें हैं जिनका इस्तेमाल बालों को बढ़ाने और लंबा बनाने के लिए किया जाता है. इन चीजों से हेयर ग्रोथ बेहतर तरह से होती है, बालों का टेक्सचर अच्छा होता है, बाल टूटते नहीं रहते, सिर पर डैंड्रफ जमा हुआ नहीं दिखता और बाल खूबसूरत बनते हैं सो अलग. ऐसी ही एक बेहद फायदेमंद चीज है गुड़हल का फूल. बालों पर गुड़हल के फूल  का सही तरह से इस्तेमाल किया जाए जाए तो बालों की कायापलट हो सकती है. यहां जानिए किस तरह गुड़हल के फूल का इस्तेमाल करके बालों को लंबा) बनाया जा सकत है.
लंबे बालों के लिए गुड़हल का फूल |
गुड़हल का पेस्ट
बालों पर गुड़हल के फूलों का पेस्ट बनाकर लगाया जा सकता है. इस पेस्ट को बनाने के लिए 2 गुड़हल के फूलों और 3 से 4 गुड़हल के पत्तों  को पीसकर पेस्ट बना लें. इस तैयार पेस्ट को बालों की जड़ों से सिरों तक लगाकर आधा घंटा रखें और फिर धोकर सिर साफ कर लें. इस तरह गुड़हल के पेस्ट को बालों पर लगाने पर डैंड्रफ की दिक्कत भी हट जाती है और बाल लंबे होने लगते हैं सो अलग.
गुड़हल और दही
गुड़हल के फूलों को पीसें और दही के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को बालों पर अच्छे से लगाएं और एक घंटे लगाकर रखने के बाद धोकर हटा लें. हफ्ते में एक बार इस हेयर मास्क को बालों पर लगाने से फायदा नजर आने लगता है.
नारियल दूध और गुड़हल का फूल
यह हेयर मास्क बालों की ग्रोथ  को तो बेहतर करता ही है, साथ ही रूखे-सूखे बालों को मुलायम बनाने में भी असरदार है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए गुड़हल के फूल में नारियल का दूध और शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं. इस हेयर मास्क को बालों पर आधा घंटा लगाकर रखने के बाद सिर धो लें. बालों को बढ़ने में मदद मिलेगी.
अंडा और गुड़हल का फूल
एक कटोरी में 3 चम्मच गुड़हल के फूलों का पेस्ट लें और उसमें 2 अंडे की सफेदी मिलाएं. इन दोनों चीजों को एकसाथ मिक्स करें और पेस्ट तैयार कर लें. सिर पर 20 से 25 मिनट इस मिश्रण को लगाकर रखने के बाद सिर धोकर साफ करें. बाल खूबसूरत नजर आने लगेंगे. 

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