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सेहत टिप्स /शौर्यपथ / महिलाओं में अक्सर पीरियड्स को लेकर कई तरह की समस्याएं होती हैं. कुछ महिलाओं के पीरियड रेगुलर नहीं होते हैं तो कुछ इससे जुड़ी बाकी चीजों से परेशान होती हैं. यही वजह है कि महिलाएं इस बात को लेकर काफी कंफ्यूज रहती हैं कि उन्हें हेल्दी पीरियड्स हो रहे हैं या फिर नहीं. कई बार दो महिलाओं को तारीख का ध्यान रखना पड़ता है, और अगर डेट को लेकर कंफ्यूजन हो जाए तो सेहत से जुड़ी टेंशन बढ़ने लगती है. ऐसे में आपके पीरियड्स हेल्दी है या नहीं, कोई प्रॉब्लम तो नहीं है बात का पता आप पीरियड्स के दौरान होने वाले लक्षणों से लगा सकते हैं. डॉक्टर्स भी ऐसा ही करने की सलाह देते हैं.
साइकिल नहीं बदलना
हेल्दी पीरियड्स का मलतब ये है कि आपको हर महीने एक फिक्स डेट पर पीरियड हो रहे हैं, ये एक या दो दिन आगे पीछे जरूर हो सकते हैं. लेकिन अगर ऐसा है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आमतौर पर साइकिल 21 से 35 दिनों के बीच का होता है. इसमें आपको ब्लीडिंग 2 से सात दिन तक हो सकती है. हालांकि अगर ज्यादा दिन पीरियड रहते हैं तो एक बार डॉक्टर को दिखा लें.
एक जैसी ब्लीडिंग
अब आप एक दूसरे तरीके से भी अपने हेल्दी पीरियड्स का पता लगा सकती हैं. अगर हर महीने आपको एक जैसी ब्लीडिंग हो रही है तो आपके पीरियड्स हेल्दी हैं. हेल्दी पीरियड्स में ब्लीडिंग बहुत तेज नहीं होती है, अगर ऐसा है तो आप कन्सीव करने के लिए भी बिल्कुल फिट हैं.
हो सकता है हल्का दर्द
पीरियड्स शुरू होने से पहले महिलाओं के पेट में हल्का दर्द होना सामान्य बात है, ये एक ऐंठन की तरह होता है क्योंकि गर्भाशय बाहर निकलने के लिए सिकुड़ जाता है. आप इससे राहत पाने के लिए हीटिंग पैड का इस्तेमाल कर सकती हैं. अगर दर्द ज्यादा नहीं है तो आपके पीरियड्स सामान्य हैं.
पीरियड्स शुरू होने से पहले महिलाओं में कई तरह के और भी लक्षण देखे जाते हैं, जिनमें हार्मोनल इनबैलेंस जैसी चीजें शामिल होती हैं. इस दौरान मूड स्विंग्स और ब्रेस्ट में हल्की सूजन दिख सकती है और ये सब सामान्य है. हेल्दी पीरियड्स होने पर महिलाएं एनर्जेटिक फील भी करती हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /मेनोपॉज मेंट्रुअल साइकिल के अंत का प्रतीक है. यह आमतौर पर 50 साल की उम्र के आसपास होता है. यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के लक्षण हो सकते हैं. हर महिला मेनोपॉज के लक्षणों को अलग-अलग तरह से अनुभव करती है. कुछ को भारी बदलाव का अनुभव हो सकता है जबकि कुछ को कोई बदलाव नजर भी नहीं आएगा. इरेगुलर पीरियड्स, वेजाइनल ड्राईनेस, मूड में बदलाव,हॉट फ्लैशेस, वजन बढ़ना, खराब मटाबॉलिज्म और नींद की समस्याएं मेनोपॉज के कुछ सामान्य लक्षण हैं. हालांकि, कुछ उपायों से इन लक्षणों के प्रभाव को कम कर सकते हैं और महिलाओं को इस इंफेक्शन से आसानी से निपटने में मदद कर सकते हैं. कुछ पोषक तत्व लक्षणों को कम करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
मेनोपॉज के लक्षणों को मैनेज करने के लिए जरूरी पोषक तत्व |
1. फोलेट
फोलेट आपकी हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है और मेनोपॉज के दौरान आपके शरीर में होने वाले बदलाओं से निपटने में आपकी मदद कर सकता है. फोलेट हॉट फ्लैशेस और मूड स्विंग जैसे लक्षणों को सुधारने में भी मदद कर सकता है.
2. विटामिन बी12
विटामिन बी12 की कमी आम है, खासकर शाकाहारियों में. विटामिन बी12 एनर्जी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है और हेल्दी नर्व्स फंक्शन का भी सपोर्ट करता है. इसलिए अगर आप मेनोपॉज के दौरान या उससे ठीक पहले बहुत ज्यादा थकावट महसूस कर रहे हैं, तो अपनी डाइट में विटामिन बी12 शामिल करने का प्रयास करें.
3. मैग्नीशियम
नींद मेनोपॉज का एक सामान्य लक्षण है. पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स शामिल करने से हेल्दी स्लीप साइकिल बनाने में मदद मिल सकती है. मैग्नीशियम डिप्रेशन और मूड में बदलाव से निपटने और हार्ट हेल्थ को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है.
4. कैल्शियम
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस विकसित होने का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए अपनी हड्डियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. अपनी डाइट में पर्याप्त कैल्शियम से भरपूर फूड्स शामिल करें और अपनी हड्डियों को सपोर्ट करें.
5. विटामिन डी
विटामिन डी शरीर में कैल्शियम एब्जॉर्प्शन का सपोर्ट करके हड्डियों के स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है. यह अवसाद के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है और मूड को बढ़ावा देता है.
आस्था /शौर्यपथ / सनातन धर्म में पूजा पाठ के दौरान कपूर का इस्तेमाल बहुत किया जाता है, कहते हैं कि घर में कपूर जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और घर में पॉजिटिविटी आती है. इतना ही नहीं कपूर के औषधीय महत्व भी होते हैं, जिसे जलाने से घर में कीटों का नाश होता है. अगर आप कपूर के साथ लौंग को घर में जलाएंगे तो इससे आपको चमत्कारी फायदे घर में देखने को मिलेंगे. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि किस समय घर में कपूर और लौंग जलाना चाहिए और इसका महत्व क्या है.
इस समय करें लौंग और कपूर की आरती
मान्यताओं के अनुसार, सुबह के समय अगर पूजा के दौरान आरती करते समय आप कपूर के साथ लौंग डालकर आरती करते हैं, तो इससे कई शुभ फल मिलते हैं और इससे घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है. इतना ही नहीं अगर शाम के समय भी आप लौंग डालकर कपूर से आरती करते हैं, तो इससे आरोग्य बल मिलता है और घर से दुख और बीमारियों का नाश होता है. लौंग और कपूर को हमेशा पूजा के बाद जलाना शुभ माना जाता है.
इस तरह से जलाएं लौंग और कपूर
शाम के समय एक कटोरी में थोड़ा सा कपूर का टुकड़ा डालिए. इसमें 7 से 8 कलियां लौंग की डालें, इसके धुएं को पूरे घर में फैला दीजिए. कहते हैं ऐसा करने से घर से रोग दूर होते हैं और अगर घर में किसी की तबीयत खराब है तो वह भी ठीक हो जाती है.
इतना ही नहीं अगर आपके घर में शिवलिंग है और आप लगातार 40 दिन तक लौंग अर्पित करेंगे, तो इससे सारे पाप खत्म हो जाएंगे, आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे. आप चाहे तो पान के पत्ते में लौंग, इलायची और सुपारी लपेटकर गणेश जी को भी अर्पित कर सकते हैं.
अगर आप परेशानियों से जूझ रहे हैं, घर पर या कार्यक्षेत्र में कुछ भी काम सही नहीं हो रहा, तो इससे छुटकारा पाने के लिए मंगलवार को हनुमान मंदिर में पांच लौंग और कपूर को एक साथ जलाएं, इससे आपकी दिक्कतें जल्द खत्म होगी.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर साल होलिका दहन से पहले नरसिंह द्वादशी मनाई जाती है. इसे नरसिंह जयंती के नाम से भी जाना जाता है. नरसिंह द्वादशी का विशेष धार्मिक महत्व है और इसकी कथा होलिका दहन से जुड़ी है. पौराणिक कथा के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप एक पापी राजा था जिसने अपने पुत्र को मारने के लिए अपनी बहन होलिका से उसे अग्नि में बैठने के लिए कहा था. लेकिन, भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जलकर राख हो गई. इस घटना के साथ ही हिरण्यकश्यप के पापों का घड़ा भर गया और भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था. जानिए इस साल किस दिन मनाई जाएगी नरसिंह द्वादशी और किस तरह किया जाएगा भगवान नरसिंह का पूजन.
2024 में कब है नरसिंह द्वादशी |
पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पूजा की जाती है. इस दिन भगवान नरसिंह खंबे को चीरकर बाहर निकले थे और उन्होंने दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था. इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 21 मार्च की देररात 2 बजकर 22 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन 22 मार्च सुबह 4 बजकर 44 मिनट पर होगा. इस चलते 21 मार्च के ही दिन नरसिंह द्वादशी मनाई जाएगी.
नरसिंह द्वादशी का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक है और दूसरा मूहूर्त सुबह 10 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक है.
इस तरह की जाती है पूजा
नरसिंह द्वादशी के दिन सुबह ब्रह्म मूहूर्त में उठकर निवृत होकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद भगवान नरसिंह की तस्वीर को समक्ष रखकर व्रत का संकल्प लिया जाता है. भक्त पूजा के समय नरसिंह भगवान को अबीर, चंदन, पीले अक्षत, पीले पुष्प, गुलाल, दीप, नारियल, पंचमेवा और फल आदि अर्पित करते हैं. भगवान की पूजा करते हुए ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥ मंत्र का जाप किया जाता है. इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यधिक शुभ होता है. इसके बाद भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की कथा पढ़ी जाती है और भगवान विष्णु की आरती गाकर पूजा का समापन होता है.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /शरीर के बाकी अंगों की तरह स्किन का खास ध्यान भी रखना जरुरी होता है. अगर आप अपनी स्किन का खास ख्याल नहीं रखती हैं तो ये डल लगने लगती है. आपका चेहरा मुरझाया हुआ सा लगता है. इसलिए स्किन का ध्यान रखना भी जरुरी होता है. जब हम बाहर निकलते हैं तो धूल-मिट्टी, गंदगी हमारे चेहरे पर छिपक जाती है जिसकी वजह से स्किन से संबंधित कई समस्याएं भी होने लगती हैं. आपकी स्किन में कोलेजन का लेवल भी कम हो जाता है. त्वचा को हेल्दी और निखरा हुआ रखने के लिए कोलेजन का लेवल बढ़ा हुआ होना जरुरी होता है. ये रिंकल्स, फाइन लाइंस को कम करने में मदद करता है. कोलेजन के लेवल को बढ़ाने के लिए कई महंगी क्रीम्स आती हैं मगर हम आज आपको एक ऐसी क्रीम के बारे में बताते हैं जो आप घर में भी बना सकती हैं साथ ही इसे बनाने में बहुत ही कम खर्चा आएगा.
घर पर कोलेजन बूस्टिंग क्रीम बनाने के लिए आपको ज्यादा सामान की जरुरत नहीं है. इसके लिए आपको बस एलोवेरा जेल, बादाम का तेल, विटामिन ई ऑयल, शहद और कोलेजन पाउडर की जरुरत होगी.
ऐसे बनाएं क्रीम
कोलेजन बूस्टिंग क्रीम बनाना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसे बनाने में मुश्किल से 10 मिनट लगेंगे. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में थोड़ा सा नारियल का तेल और 1 चम्मच बादाम का तेल डालकर उसे गर्म कर लें.
अब इसे ठंडा करने के लिए रख दें. जब ये ठंडा हो जाए तो इसमें 2 चम्मच एलोवेरा जेल, 1 चम्मच विटामिन ई
ऑयल और 1 चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें.
इस पेस्ट को कम से कम 1-2 मिनट तक मिक्स करें. उसके बाद 1 चम्मच कोलेजन पाउडर डालकर इसे दोबारा हिलाएं.
अब इसे एक एयर टाइट बॉक्स में डालकर फ्रिज में रख दें. आपकी क्रीम तैयार है.
ऐसे लगाएं क्रीम
इस क्रीम को लगाने का सही समय रात को सोने से पहले का है. जब आप सोने वाली हों उससे पहले चेहरे को अच्छे से साफ कर लें. उसके बाद चेहरे को सुखा लें. अब इस क्रीम को चेहरे पर लगाकर कम से कम 2-3 मिनट तक मसाज करें. इसका असर आपको कुछ ही दिनों में दिखने लगेगा.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /त्वचा की अच्छी देखरेख स्किन केयर प्रोडक्ट्स के बजाय हेल्दी डाइट से होती है. खानपान अच्छा होता है तो त्वचा अंदरूनी रूप से स्वथ्य बनती है जिसका असर बाहर भी नजर आता है. शरीर को अच्छे पोषक तत्व मिलते हैं तो चेहरे पर भी निखार नजर आने लगता है. यहां कुछ ऐसे ही हेल्दी जूस का जिक्र किया जा रहा है जो त्वचा को गुलाबी निखार देने में असरदार होते हैं. इन जूस को पीने पर शरीर डिटॉक्स होने लगता है यानी शरीर में जमे गंदे टॉक्सिंस बाहर निकलने लगते हैं, शरीर को हाइड्रेशन मिलता है और शरीर अंदर से साफ होता है सो अलग. इन सभी चीजों से सेहत और स्किन को अनेक फायदे मिलते हैं. यहां जानिए इन किन हेल्दी जूस को पीने पर निखर जाती है त्वचा.
निखरी त्वचा के लिए जूस |
संतरे का जूस
विटामिन सी से भरपूर संतरे के जूस से सेहत और स्किन को कई फायदे मिलते हैं. इससे इंफ्लेमेशन दूर होती है, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और स्किन डैमेज से बचती है सो अलग. ऐसे में रोजाना एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर संतरे के जूस को पिया जा सकता है.
तरबूज का जूस
स्किन के लिए फायदेमंद जूस में तरबूज का जूस भी शामिल है. तरबूज का जूस स्किन को हाइड्रेटेड बनाए रखता है और और स्किन के टेक्सचर को अच्छा करता है. इससे स्किन बाउंसी और मुलायम भी बनी रहती है. तरबूज के जूस में विटामिन बी6, विटामिन बी1 और विटामिन सी के साथ ही लाइकोपीन भी होता है. इससे स्किन के एजिंग साइंस कम होते हैं, टिशू डैमेज दूर होता है और फ्री रेडिकल्स कम होने लगते हैं.
अनार का जूस
कहते हैं हर बीमारी का तोड़ होता है अनार का जूस. अनार के जूस को पीने पर गाल भी अनार की ही तरह लाल नजर आने लगते हैं यानी त्वचा खिल जाती है. अनार के जूस में पौटेशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, कैल्शियम, विटामिन के, विटामिन सी और फोलेट की अच्छी मात्रा होती है. इस जूस को पीने पर स्किन की पिग्मेंटेशन भी कम होती है और धूप से हुए डैमेज से भी त्वचा बचती है.
अंगूर का जूस
अंगूर एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं. अंगूर का जूस पीने पर शरीर को विटामिन के, विटामिन सी, फोलेट, फॉस्फोरस, पौटेशियम और कैल्शियम की अच्छी मात्रा मिलती है. इस जूस के सेवन से स्किन निखरने लगती है और त्वचा पर चमक भी नजर आती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / फलों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है और केला उन्हीं फलों में से एक है. असल में केला एक ऐसा फल है जो आसानी से मार्केट में आपको मिल जाएगा. केला हर मौसम में मिलने वाले फलों में से एक है. केले को सेहत के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है. रोजाना केले का सेवन करने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. आपको बता दें कि केले में फाइबर, पोटैशियम, कैल्शियम,सोडियम, आयरन और विटामिन सी जैसे कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं रोजाना केले का सेवन करने से मिलने वाले लाभ.
केला खाने के फायदे-
1. डायबिटीज-
केला फाइबर, स्टार्च, विटामिन, खनिज, फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट सहित कई बायोएक्टिव कंपाउंड का अनूठा मिश्रण होता है, जो टाइप 2 डायबिटीज से लड़ने का काम कर सकता है.
2. इम्यूनिटी-
कमजोर इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए आप केले का सेवन कर सकते हैं. केले में विटामिन सी पाया जाता है, विटामिन सी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है.
3. कब्ज-
अगर आपको कब्ज की समस्या है तो आपके लिए केले का सेवन फायदेमंद हो सकता है. केले में रेसिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है. केले को डाइट में शामिल कर कब्ज की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.
4. हड्डियों-
केले में मौजूद मैग्नीशियम और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. केले और दूध का रोजाना सेवन करने से कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है.
5. स्ट्रेस-
स्ट्रेस की समस्या से हैं परेशान तो केले का सेवन आपके लिए हो सकता है फायदेमंद. केले में पोटैशियम और विटामिन बी पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर तनाव से राहत दिलाने में मदद कर सकता है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /हाई ब्लड प्रेशर यानि हाइपरटेंशन दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करने वाली एक आम समस्या में से एक है. अगर समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो इससे शरीर को कई हानि पहुंच सकती हैं. आपको बता दें कि हाई ब्लड प्रेशर हार्ट की बीमारी और स्ट्रोक का कारण बन सकता है. हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर को डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके मैनेज किया जा सकता है. हाई प्रेशर के मरीजों को अधिक नमक और मसालेदार चीजें खाने से बचना है. अगर आप भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप किचन मे मौजूद अजवाइन का ऐसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
अजवाइन में एंटीहाइपरटेन्सिव और एंटीस्पास्मोडिक गुण पाए जाते हैं. कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि अजवाइन को डाइट में शामिल करना हाई ब्लड प्रेशर के लिए चमत्कार से कम नहीं है. अजवाइन को आमतौर पर पूड़ी, परांठा, रसम और कई तरह की डिशेज को बनाने में किया जाता है. कब्ज की समस्या को दूर करने में भी अजवाइन का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है. अजवाइन में प्रोटीन, फाइबर, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन और कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें कि गर्मियों के मौसम में अजवाइन का सीमित मात्रा में ही सेवन करें. क्योंकि अजवाइन की तासीर गर्म होती है.
कैसे बनाएं अजवाइन पानी-
हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए आप अजवाइन पानी का सेवन कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए आपको एक कप पानी में सूखे भुने हुए एक चम्मच अजवाइन के बीज भिगोए. इसे रात भर छोड़ दें. अगले दिन पानी को उबालकर छान लें.
इसके ठंडा होने का इंतज़ार करें. खाली पेट इसका सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है.
आस्था /शौर्यपथ /पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली 15वीं तिथि को अमावस्या पड़ती है. अमावस्या की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है. इस दिन स्नान-दान धार्मिक महत्व रखता है. माना जाता है कि अमावस्या पर पूजा करने से और पितरों का तर्पण करने से घर-परिवार पर पितृ दोष नहीं लगता है. पितृ दोष तब लगता है जब पितृ नाराज हो जाते हैं. इससे घर में कलह और कलेश का माहौल रहने लगता है, घर की सुख-शांति खत्म होती है और परिवार पर आर्थिक दिक्कतें मंडराने लगती हैं. ऐसे में पितृ दोष से बचे रहने के लिए और पितृ दोष दूर करने के लिए अमावस्या के दिन कुछ मंत्रों का जाप किया जा सकता है. इन मंत्रों के जाप से पितृ नाराज नहीं होते हैं. जानिए इस साल कब पड़ रही है फाल्गुन अमावस्या और कैसे पाया जा सकता है पितृ दोष से छुटकारा.
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष से छुटकारा
इस साल पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि 9 मार्च शाम 6 बजकर 17 मिनट से शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 10 मार्च, दोपहर 2 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में 10 मार्च, रविवार के दिन अमावस्या मनाई जाएगी. निम्न वो मंत्र दिए जा रहे हैं जो पितृ दोष से बचाव करते हैं और छुटकारा दिलाते हैं.
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्'
ॐ कुल देवताभ्यो नमः।
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू
अयोध्या मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेयाः सप्तैता मोक्ष दायिका
कर सकते हैं ये काम
पितृ दोष से निवारण के लिए अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. अगर पवित्र नदी घर के आस-पास ना हो तो घर में रखे किसी पवित्र नदी के पानी, जैसे गंगाजल, को बाल्टी में पानी में मिलाएं और फिर इस पानी से स्नान करें. अमावस्या पर पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से भी पितृ दोष हट सकता है. इस दिन दान का भी अत्यधिक महत्व होता है. जरूरमंदों को भोजन और कपड़े दान में दिए जा सकते हैं.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / पपीता एक ऐसा फल है जिसे खाना ज्यादातर लोग पसंद करते हैं. सबसे ज्यादा पपीते का सेवन वो लोग करते हैं जो वजन को कम करना चाहते हैं. पपीते में मौजूद गुण शरीर को कई लाभ पहुंचाने का काम करते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि पपीते के कुछ दुष्प्रभाव भी हैं. पीला पपीता डायटरी फाइबर का एक हेल्दी स्रोत है. पपीत में कैलोरी और फैट कम मात्रा में होते हैं. जो वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. सेहत के गुणों से भरपूर पपीता कई लोगों के लिए हानिकारक भी है. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को नहीं करना चाहिए पपीते का सेवन.
पपीता खाने के नुकसान-
1. डिहाइड्रेशन-
पपीता एक रेशेदार फल है और इसका अधिक मात्रा में सेवन करने पर दस्त की समस्या हो सकती है. जरूरत से ज्यादा पपीते का सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है.
2. कब्ज-
अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से शरीर में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. अत्यधिक फाइबर के सेवन से भी कब्ज की समस्या हो सकती है.
3. गर्भावस्था-
गर्भावस्था के दौरान कच्चे या आधे पके पपीते का सेवन करना असुरक्षित हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान पपीते का सेवन हानिकारक हो सकता है.
4. एलर्जी-
पपीते में मौजूद एंजाइम पपैन एक शक्तिशाली एलर्जेन है. इसलिए पपीते का अत्यधिक सेवन कई रेस्पिरेटरी विकारों को ट्रिगर कर सकता है. कुछ लोगों को पपीता खाने से एलर्जी हो सकती है.
5. पाचन तंत्र-
पपीता खाने से आपका गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम खराब हो सकता है. अगर आपको पेट संबंधी समस्या है तो आप अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से बचे. जरूरत से ज्यादा पपीते का सेवन पाचन तंत्र की समस्या को बढ़ा सकता है.
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कई बच्चे पढ़ने लिखने के साथ जीवन जीने के तरीकों में भी माहिर होते हैं. वहीं कई कम बुद्धि वाले भी बच्चे होते हैं जो ठीक से न तो समस्याओं को सुलझा पाते हैं और न ही पढ़ाई लिखाई में अच्छे होते हैं. बच्चों की बुद्धिमत्ता का लेवल उनके बिहेवियर, सीखने की क्षमता और डेली लाइफ में उनके फैसलों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर कुछ अलग आदतों और बिहेवियर को दिखाते हैं जो उनके एजुकेशनल और सोशल ग्रोथ में चुनौतियों का संकेत दे सकते हैं. हालांकि, यह जरूरी है कि हम इन बच्चों को लेबल करने से बचें और उन्हें सपोर्ट दें ताकि वे अपनी फुल कैपेसिटी तक पहुंच सकें.
मंद बुद्धि बच्चों में होती हैं ये आदतें |
बहुत धीरे सीखना: कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर सीखने में धीमे होते हैं. उन्हें नई जानकारी को समझने और याद रखने में ज्यादा समय लग सकता है.
बात करने में कठिनाई: ऐसे बच्चे विचारों को व्यक्त करने और बातचीत करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं. उनकी शब्दावली भी लिमिटेड हो सकती है और उनमें अक्सर कम्यूनिकेशन क्लियरिटी की कमी दिखाई देती है.
समस्या सुलझाने में कठिनाई: ऐसे बच्चों को अक्सर समस्या-सुलझाने में चुनौती का सामना करना पड़ता है. वे कठिन समस्या को समझने और उनके समाधान खोजने में ज्यादा समय लेते हैं.
सोशल इंटिमेसी: कम बुद्धिमत्ता वाले बच्चे अक्सर सामाजिक संकेतों को पढ़ने और समझने में कठिनाई अनुभव करते हैं. इससे उनके सामाजिक अंतरंगता और दोस्ती बनाने में चुनौतियां आ सकती हैं.
ध्यान देने में कठिनाई: ध्यान केंद्रित करने और ध्यान बनाए रखने में इन बच्चों को कठिनाई हो सकती है. वे अक्सर आसानी से विचलित हो जाते हैं, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है.
यह जरूरी है कि परिवार और शिक्षक इन बच्चों के लिए एक सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करें. उन्हें एजुकेशन सपोर्ट, धैर्य और समझ की जरूरत होती है. इंडिविजुअल लर्निंग प्लान्स, थेरेपी सेशन और सोशल स्किल ट्रेनिंग उनकी ग्रोथ में बड़ा योगदान दे सकते हैं. अच्छे सपोर्ट के साथ ये बच्चे अपनी चुनौतियों को पार कर सकते हैं और अपने जीवन में सफल हो सकते हैं.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जब आप अपने बच्चे को पढ़ने के लिए कहते हैं तो वो रोने लग जाता है या बहाने बनाने लगता है. अगर आप उनको पढ़ने के लिए बैठाते भी हैं तो वो इधर-उधर करता है या फिर ध्यान नहीं लगाता है. बता दें कि बच्चे अक्सर ऐसा करते हैं जब उनका पढ़ने में मन नहीं लगता है. ऐसे में पेरेंट्स को उनकी टेंशन रहती है कि कहीं उनका बच्चा दूसरों से पीछे न रह जाएं और फेल ना हो जाएं. अगर आप भी अपने बच्चों को पढ़ाने में ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिससे आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा.
पढ़ाई से भागने वाले बच्चों को यूं करें पढ़ने के लिए तैयार
डिसिप्लिन बनाएं
बच्चे को पढ़ाने के लिए आप पढ़ाई का एक टाइम सेट कर लें. उनके लिए एक स्टडी कॉर्नर बनाएं जहां पर वो बैठकर पढ़ाई करें. उनके पढ़ने का टाइम सेट करें और उस समय उनको फोन और टीवी से दूर रखें.
इंट्रेस्टिंग बनाएं
आप उनके पढ़ाई को इंट्रेस्टिंग बनाएं. जिससे वो पढ़ते समय बोर न हो. इसके लिए आप बच्चे को पढ़ाने के लिए नए और क्रिएटिव तरीकों को अपनाएं. आप उन्हें किताबों के अलावा कार्टून्स, वीडियो की मदद से पढ़ाएं. साइंस और पर्यावरण से जुड़े विषयों के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए बच्चों को जंगल, साइंस सेंटर और साइंस एक्ज़िबिशन्स में भी ले जा सकते हैं.
अकेले ना छोड़ें
बच्चों को कभी भी अकेले पढ़ने के लिए न बैठाएं. आप उनके साथ बैंठे और उनके साथ उनकी किताबों को देखें और उनको इस तरह से पढ़ाएं और ऐसे एक्सांपल दें जिससे उनको पढ़ने में मजा और इंट्रेस्ट आए.
कंपेरिसन
बच्चे का कंपेरिसन किसी पड़ोसी के बच्चे या क्लास के किसी दूसरे बच्चे के साथ न करें. अगर आपका बच्चा पढ़ने में अच्छा नही है तो कभी भी दूसरों के सामने उसे बुरा-भला कहने से बचें.
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ / सरसों का तेल किचन में एक आम सामग्री है. इसका उपयोग खाना पकाने के साथ-साथ कई ब्यूटी और में भी किया जाता है. सरसों के तेल में विटामिन ई, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड के साथ-साथ एंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो स्किन में बड़ा रोल प्ले करते हैं. जब इसे चेहरे पर लगाया जाता है, तो यह स्किन को पोषण देता है, चेहरे की चमक बढ़ाता है और स्किन प्रोब्लम्स से बचाता है. हालांकि बहुत कम लोगों को पता होता है कि ग्लोइंग स्किन के लिए सरसों के तेल में क्या मिलाकर लगाना कमाल कर सकता है. अगर आप ग्लोइंग स्किन के लिए घरेलू नुस्खों (Glowing Skin Home Remedies) पर विश्वास करते हैं तो यहां हम बता रहे हैं कि कैसे चमकदार त्वचा के लिए सरसों का तेल चमत्कार कर सकता है.
सरसों के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं ये चीज |
1. हल्दी और सरसों का तेल
हल्दी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो स्किन को हेल्दी बनाते हैं. थोड़ी सी हल्दी को सरसों के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा में चमक आती है.
2. बेसन और सरसों का तेल
बेसन स्किन को साफ करने और डेड स्किन को हटाने में सहायक होता है. इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. यह मिश्रण त्वचा को पोषण देता है और चमक लाता है.
3. दही और सरसों का तेल
दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो स्किन के लिए अच्छे होते हैं. सरसों के तेल के साथ दही मिलाकर लगाने से स्किन की ड्राइनेस कम होती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है.
4. नींबू का रस और सरसों का तेल
नींबू का रस विटामिन सी से भरपूर होता है, जो त्वचा के लिए एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है. इसे सरसों के तेल के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे कम होते हैं और चेहरे पर चमक आती है.
उपयोग करने का तरीका:
सामग्री को सरसों के तेल के साथ सही मात्रा में मिलाएं.
इस मिश्रण को अपने चेहरे पर समान रूप से लगाएं.
इसे लगभग 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर रहने दें.
बाद में ठंडे पानी से चेहरा धो लें.
सरसों का तेल और इन सामग्रियों का मिश्रण स्किन को न केवल पोषण देता है बल्कि इसे हेल्दी और चमकदार भी बनाता है. हालांकि, किसी भी नए ट्रीटमेंट को आजमाने से पहले एक पैच टेस्ट करें, खासकर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हिंदू धर्म में देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा पूजा का अभिन्न अंग है. पूजा के नियमों में देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा भी शामिल होती है. चाहे मंदिरों की चारों ओर घूम कर की गई परिक्रमा हो या पूजा के दौरान एक ही जगह पर घूमकर की गइ परिक्रमा हो, दोनों का ही बहुत महत्व होता है. आप भी मंदिर में दर्शन करने जाते होंगे तो परिक्रमा जरूर करते होंगे. पर क्या आपको पता है की परिक्रमा क्यों की जाती है और परिक्रमा करने के नियम क्या हैं. आइए जानते हैं परिक्रमा के क्या है नियम और इनसे क्या लाभ होता है….
पहली बार परिक्रमा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश और कार्तिकेय ने सबसे पहले परिक्रमा लगाई थी. देवों में सबसे पहले पूजन के लिए निश्चित किया गया था कि जो देव सबसे पहले सृष्टि का चक्कर लगाएंगे उनकी प्रथम पूजा होगी. इसमें भगवान गणेश भगवान शंकर और माता पार्वती के दिन चक्कर लगाकर प्रथम पूज्य देव बन गए. इसी के आधार पर पुण्य की प्राप्ति के लिए देवी देवताओं और उनके घर मंदिरों की परिक्रमा की शुरुआत मानी जाती है.
सकारात्मक ऊर्जा
सनातन धर्म में परिक्रमा को बहुत शुभ माना जाता है. मान्यमा है कि देचर देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा करने से सकारत्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. इससे उसके चारों तरफ फैली नकारात्मकता का नाश हो जाता है. देवी देवताओं या मंदिर की परिक्रमा करना उनके प्रभुत्व के आगे सिर झुकाने की तरह होता है.
इस तरह करें परिक्रमा
शास्त्रों के अनुसार परिक्रमा हमेशा देवी देवता के दाएं हाथ से बाएं हाथ की तरफ लगाना शुभ माना जाता है. परिरकमा की गिनती हमेशा विषम संख्या में होनी चाहिए. जैसे 11 या 21 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. परिक्रमा करते समय बातें नहीं करनी चाहिएद्व इस समय चलते हुए भगवान को स्मरण करना सर्वोत्तम माना जाता है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी परिक्रमा लगाना फायदेमंद माना जाता है. जिस जगह पर प्रतिदिन पूजा होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है. इस ऊर्जा से आत्मबल मजबूत होता है और उसको मानसिक शांति मिलती है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
