August 08, 2026
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      आस्था /शौर्यपथ /ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. भगवान शिव को समर्पित मंत्रों का जाप हमें परेशानियों से उबरने में मदद करता है. ऐसे शिव मंत्र हैं जिनका जाप जीवन से दुख, रोग और परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है. वह विनाश के देवता हैं और दया के प्रतीक भी हैं. वह भक्तों को मोक्ष देते हैं, अर्थात भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाते हैं. भगवान शिव के इन शक्तिशाली मंत्रों के जाप मात्र से आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं.
     ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. भगवान शिव को समर्पित मंत्रों का जाप हमें परेशानियों से उबरने में मदद करता है. ऐसे शिव मंत्र हैं जिनका जाप जीवन से दुख, रोग और परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है. वह विनाश के देवता हैं और दया के प्रतीक भी हैं. वह भक्तों को मोक्ष देते हैं, अर्थात भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाते हैं. भगवान शिव के इन शक्तिशाली मंत्रों के जाप मात्र से आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं.
    शक्तिशाली मंत्र
    - ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
    - शिव गायत्री मंत्र - ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्
    - ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।
    - श्री शिवाय नम: ।।
    श्री शंकराय नम: ।।
    श्री महेशवराय नम: ।।
    ॐ नमो भगवते रूद्राय।।
    - करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं ।
    विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥
    इन मंत्रों का जाप करने के फायदे
    आपको बता दें कि इन मंत्रों का जाप करने से परिवार में क्लेश नहीं होता है दिमाग शांत रहता है. इन मंत्रों का जाप करने से शरीर भी निरोगी रहती है. इससे आप तनाव मुक्त रहते हैं. आपको बता दें कि इन मंत्रों का जाप अपनी हथेलियों को देखते हुए करें. तो आज से आप इन मंत्रों को जीवन का हिस्सा बना लीजिए फिर देखिए कैसे आपको इसके फायदे मिलते हैं.

       टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / त्वचा की सुंदरता बढ़ाने के लिए ना सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल फायदेमंद होता है बल्कि घर की भी ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनके सेवन से त्वचा अंदरूनी रूप से बेहतर बनती है. यहां भी रसोई की कुछ ऐसी ही चीजों का जिक्र किया जा रहा है जो चेहरे को निखारने में कमाल का असर दिखाती हैं. इन चीजों को पानी में मिलाकर पीने पर शरीर से गंदे टॉक्सिंस निकलते हैं और शरीर डिटॉक्स होता है, वजन कम होने में असर नजर आता है, चेहर पर चमक नजर आती है और त्वचा पर निकलने वाले फोड़े-फुंसियों की दिक्कत भी दूर हो जाती है. जानिए पानी में किन-किन चीजों को मिलाकर बनाया जा सकता है डिटॉक्स वॉटर.
    निखरी त्वचा के लिए डिटॉक्स वॉटर |
    पानी में नींबू डालना
    रोजाना एक गिलास पानी में नींबू का रस निचोड़कर या फिर नींबू का टुकड़ा डालकर पीने पर अच्छा डिटॉक्स वॉटर तैयार हो जाता है. इस डिटॉक्स ड्रिंक को पीने पर शरीर को विटामिन सी और नमी मिल जाती है. इस पानी से स्किन पर कोलाजन का प्रोडक्शन भी बढ़ता है.
    खीरे वाला पानी
    आप अपनी पानी की बोतल में खीरे के टुकड़े डालकर अपने साथ ऑफिस लेकर जा सकते हैं. इस पानी से शरीर को हाइड्रेशन मिलता है जिससे रूखी-सूखी त्वचा की दिक्कत भी दूर हो जाती है. इस पानी को पीने पर चेहरे पर निखार बना रहता है.
    सेब के सिरके का पानी
    सेब का सिरका त्वचा को निखारने में तो असरदार है ही, साथ ही इसका पानी पीने पर शरीर शेप में आने लगता है. सेब के सिरके वाला पानी बनाने के लिए एक गिलास पानी में 2 चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर मिक्स कर लें. इस पानी को रोजाना पिया जाए तो चेहरे पर एक्ने और फोड़े-फुंसी की दिक्कत नहीं होती है.
    संतरे वाला पानी
    एक से डेढ़ लीटर पानी में एक बड़े संतरे को काटकर डाल लें. इसमें एक अदरक के टुकड़े को भी घिसकर डालें. बस तैयार है आपका डिटॉक्स वॉटर. इस पानी को रोजाना पिएं या इसे एक दिन छोड़कर पीना शुरू करें. शरीर से टॉक्सिंस निकलेंगे और त्वचा पर चमक नजर आएगी सो अलग.
    हल्दी से बनाएं डिटॉक्स वॉटर
      औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी का सौंदर्य बढ़ाने में कई तरह से इस्तेमाल होता है. ऐसे में हल्दी का पानी पीकर त्वचा पर निखार लाया जा सकता है. इस पानी को तैयार करने के लिए 2 से 3 कप पानी लें और उसमें कच्ची हल्दी को काटकर डाल लें. अब इस पानी में 2 से 3 चम्मच नींबू के रस की डालें और स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिला लें. इस पानी को पीने पर त्वचा चमकने लगती है. 

      टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /आयुर्वेद में ऐसी कई चीजें हैं जिनका इस्तेमाल बालों को बढ़ाने और लंबा बनाने के लिए किया जाता है. इन चीजों से हेयर ग्रोथ बेहतर तरह से होती है, बालों का टेक्सचर अच्छा होता है, बाल टूटते नहीं रहते, सिर पर डैंड्रफ जमा हुआ नहीं दिखता और बाल खूबसूरत बनते हैं सो अलग. ऐसी ही एक बेहद फायदेमंद चीज है गुड़हल का फूल. बालों पर गुड़हल के फूल  का सही तरह से इस्तेमाल किया जाए जाए तो बालों की कायापलट हो सकती है. यहां जानिए किस तरह गुड़हल के फूल का इस्तेमाल करके बालों को लंबा) बनाया जा सकत है.
    लंबे बालों के लिए गुड़हल का फूल |
    गुड़हल का पेस्ट
    बालों पर गुड़हल के फूलों का पेस्ट बनाकर लगाया जा सकता है. इस पेस्ट को बनाने के लिए 2 गुड़हल के फूलों और 3 से 4 गुड़हल के पत्तों  को पीसकर पेस्ट बना लें. इस तैयार पेस्ट को बालों की जड़ों से सिरों तक लगाकर आधा घंटा रखें और फिर धोकर सिर साफ कर लें. इस तरह गुड़हल के पेस्ट को बालों पर लगाने पर डैंड्रफ की दिक्कत भी हट जाती है और बाल लंबे होने लगते हैं सो अलग.
    गुड़हल और दही
    गुड़हल के फूलों को पीसें और दही के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को बालों पर अच्छे से लगाएं और एक घंटे लगाकर रखने के बाद धोकर हटा लें. हफ्ते में एक बार इस हेयर मास्क को बालों पर लगाने से फायदा नजर आने लगता है.
    नारियल दूध और गुड़हल का फूल
    यह हेयर मास्क बालों की ग्रोथ  को तो बेहतर करता ही है, साथ ही रूखे-सूखे बालों को मुलायम बनाने में भी असरदार है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए गुड़हल के फूल में नारियल का दूध और शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं. इस हेयर मास्क को बालों पर आधा घंटा लगाकर रखने के बाद सिर धो लें. बालों को बढ़ने में मदद मिलेगी.
    अंडा और गुड़हल का फूल
    एक कटोरी में 3 चम्मच गुड़हल के फूलों का पेस्ट लें और उसमें 2 अंडे की सफेदी मिलाएं. इन दोनों चीजों को एकसाथ मिक्स करें और पेस्ट तैयार कर लें. सिर पर 20 से 25 मिनट इस मिश्रण को लगाकर रखने के बाद सिर धोकर साफ करें. बाल खूबसूरत नजर आने लगेंगे. 

      लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / लोंग-डिस्टेरंस रिलेशनशिप वो रिलेशनशिप होता है जिसमें कपल एकदूसरे से अलग रहता है. कई बार दूरी शहरों की होती है तो कई बार दोनों अलग-अलग देशों में रह रहे होते हैं. ऐसे में यह कपल एकदूसरे से कई-कई हफ्तों या महीनों तक नहीं मिल पाता है. लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप में परेशानियां आते भी देर नहीं लगती क्योंकि दोनों एकदूसरे के साथ तो होते हैं लेकिन एकदूसरे के पास नहीं होते. ऐसे में कम्यूनिकेशन पूरी तरह से फोन पर निर्भर करता है और कभी-कभार फोन पर उन इमोशंस को बयां करना मुश्किल हो जाता है जो व्यक्ति सामने से कर पाता है. वहीं, रिलेशनशिप में प्यार होते हुए भी स्पार्क बनाए रखना एक बड़ा चैलेंज होता है. ऐसे में कहीं आप भी तो लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप में वो गलतियां  तो नहीं कर रहे जो आपके रिश्ते को खत्म करने का कारण बन सकती हैं, जानिए यहां.
    लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप में गलतियां |  
    एकदूसरे के अनुसार टाइम टेबल ना बनाना
    अगर आप दोनों का शेड्यूल एकदूसरे से बहुत ज्यादा अलग होगा तो एकदूसरे के लिए आप समय नहीं निकाल पाएंगे. ऐसे में जब पहले से दूरी हो और उसपर भी बात करने का भी टाइम ना हो तो रिश्ते में एकदसूरे की कमी खलने लगती है. इससे मन उदास होता है तो आपसी तकरार भी होने लगती है.
    लोंग-डिस्टेंस कब खत्म होगा इसपर बात ना करना
    लोंग-डिस्टेंस रिलेशनशिप में पार्टनर्स को आपस में जो चीज जोड़े रखती है वो है भविष्य की आस. भविष्य में शादी होगी, एकसाथ घूमना-फिरना होगा, साथ जीवन बिताना होगा, यह सब बातें हीं पार्टनर्स को एक उम्मीद देती हैं. लेकिन, अगर लोंग डिस्टेंस के बाद भी एकदूसरे के साथ का कोई खास प्लान ना हो तो दिक्कत होने लगती है. एकदूसरे को लेकर पार्टनर्स का क्या फ्यूचर प्लान है और कब लोंग-डिस्टेंस खत्म होगा इसपर सही तरह से बात ना हो तो झगड़े शुरू होने लगते हैं.
    एकदूसरे से बातें छिपाना
    रिलेशनशिप चाहे लोंग-डिस्टेंस हो या ना हो, एकदूसरे से बातें छुपाना परेशानी खड़ी कर देता है. लोंग-डिस्टेंस रिलेशनशिप में खासतौर से कोशिश यह होनी चाहिए कि एकदूसरे के बारे में और एकदूसरे का दिन कैसा गया, जिंदगी में क्या चल रहा है इसबारे में ज्यादा से ज्यादा एकदूसरे को बताया जाए. लेकिन, जब जान-बूझकर कोई बात छिपाई जाती है तो यह रिश्ते में विश्वास को कम करने वाली साबित होती है.
    एफर्ट्स की कमी
      रिश्ते में कुछ ना कुछ नया होता रहे, रिश्ते में स्पार्क बरकरार रहे और एकदूसरे को लेकर वही प्यार रहे इसके लिए एफर्ट्स   जरूरी होते हैं, कोशिश करते रहना जरूरी होता है. जब एफर्ट्स नहीं किए जाते हैं या एकदूसरे को खुश करने की कोशिशें कम होने लगती हैं तो रिश्ते में दरार पड़ने लगती है. ऐसे में चाहे रिश्ता एक महीने का हो या फिर एक साल या 10 सालों का, एफर्ट्स की कमी ना होना जरूरी है. 

     ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /ऐसी कई प्राकृतिक चीजें हैं जो बालों पर बेहद अच्छा असर दिखाती हैं और उन्हीं में से एक है गुड़हल का फूल. बालों को गुड़हल के फूल  से एक नहीं बल्कि कई फायदे मिलते हैं. गुड़हल के फूल में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, अमीनो एसिड्स होते हैं और साथ ही फ्लेवेनॉइड्स पाए जाते हैं जो सूरज की हानिकारक किरणों से बालों को बचाते हैं. ऐसे में इन फूलों का सही तरह से इस्तेमाल किया जाए तो बालों को बढ़ने में मदद मिलती है और बालों का टूटना  कम होता है सो अलग. यहां जानिए किस तरह घर पर गुड़हल का तेल बनाकर तैयार किया जा सकता है.
    बाल बढ़ाने के लिए गुड़हल का तेल |
    बालों को लंबा, घना और मजबूत बनाने के लिए गुड़हल के इस तेल  को तैयार करें. सबसे पहले गुड़हल के कुछ फूल और पत्ते लेकर अच्छी तरह धो लें. कड़ाही को आंच पर रखें और उसमें नारियल का तेल डालें. अब इसमें गुड़हल के पत्ते और फूल डालकर पकाना शुरू करें. जब तेल का रंग बदलने लगे तो आंच को बंद कर दें. इस तेल को जस का तस ही 6 से 7 घंटे रखा रहने दें और उसके बाद छानकर किसी शीशी में भर लें. तैयार है आपका गुड़हल का तेल. इस तेल के नियमित इस्तेमाल से बालों के झड़ने की दिक्कत दूर होती है और बालों को लंबा बनने में मदद मिलती है. इसे सिर पर एक से डेढ़ घंटा लगाकर रखने के बाद सिर धो लें या फिर रातभर लगाए रखने के बाद अगले दिन धोकर हटाएं.
    ये तरीके भी आते हैं काम
        गुड़हल को बालों पर हेयर मास्क की तरह भी लगा सकते हैं. इसके लिए गुड़हल के फूलों को पीसकर पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट को बालों पर आधा एक घंटा लगाकर रखने के बाद धोकर हटा लें.
        एक कटोरी में नारियल का तेल  या फिर ऑलिव ऑयल लें और उसमें गुड़हल का पाउडर मिलाएं. इस मिश्रण को सिर पर आधा घंटा लगाकर रखा जा सकता है. इसके बाद सिर धोकर साफ कर लें.
        गुड़हल के फूलों को पानी में डालकर उबालें और इस पानी को ठंडा कर लें. इस पानी को छानकर किसी स्प्रे बोतल में भर लें. सिर पर स्कैल्प से लेकर बालों के सिरों तक इस पानी को छिड़कें. हेयर ग्रोथ में मदद मिलती है.
        गुड़हल के फूलों के साथ ही मेथी के दाने और करी पत्ते डालकर भी तेल बनाया जा सकता है. नारियल तेल में इन चीजों को साथ मिलाकर पकाने और फिर सिर पर लगाने से इस तेल का असर और ज्यादा बढ़ जाता है.

      ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /सौंफ को उसकी सुगंध और सेहत पर होने वाले फायदों के चलते जाना जाता है. सौंफ में कॉपर, कैल्शियम, पौटेशियम, मैंग्नीज, जिंक और आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं. स्किन केयर में सौंफ  का इस्तेमाल करने पर एक्ने, सेल डैमेज, झुर्रियों और दाग-धब्बों से छुटकारा मिलता है. चेहरे पर सौंफ का टोनर बनाकर लगाया जा सकता है, इसे फेस पैक की तरह लगा सकते हैं या फिर सौंफ से स्क्रब तैयार कर सकते हैं. यहां जानिए चेहरे पर सौंफ  लगाने के अलग-अलग तरीकों के बारे में.
    चेहरे पर सौंफ लगाने के तरीके |
    सौंफ का फेस पैक
    निखरी और बेदाग त्वचा पाने के लिए सौंफ का फेस पैक बनाया जा सकता है. सौंफ का फेस पैक बनाने के लिए आपको एक चम्मच सौंफ, 2 चम्मच ओटमील और जरूरत के अनुसार पानी की जरूरत होगी. इस फेस पैक को बनाने के लिए सभी चीजों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इसे चेहरे पर 20 से 25 मिनट लगाए रखने के बाद धोकर हटा लें. चेहरा चमक जाएगा और छूने पर बेहद मुलायम भी लगेगा.
    सौंफ का टोनर
    घर पर ही आसानी से सौंफ का टोनर  तैयार किया जा सकता है. सौंफ का टोनर बनाने के लिए एक गिलास पानी को आंच पर चढ़ाएं और इसमें 2 चम्मच सौंफ के दाने डाल दें. जब सौंफ पक जाए तो आंच बंद कर दें. पानी ठंडा करके किसी शीशी में भरकर रखें. इस तैयार टोनर को चेहरे पर स्प्रे करें या फिर रूई की मदद से लगाएं. चेहरे पर ताजगी महसूस होगी.
    सौंफ का स्क्रब
    सौंफ के दानों को पीसकर इसमें शहद मिलाएं. इस तैयार स्क्रब को चेहरे पर एक से 2 मिनट मलकर चेहरा धो लें. सौंफ के स्क्रब को चेहरे पर लगाने से डेड स्किन सेल्स और गंदगी हट जाती है. इससे चेहरे पर निखार नजर आने लगता है. इस स्क्रब का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार ही करें और कोशिश करें कि आप चेहरे को घिसें ना बल्कि हल्के हाथों से मलते हुए साफ करें.
    पफी आईज के लिए सौंफ
    अक्सर ही बहुत ज्यादा सोने, रोने या फिर नींद की कमी से आंखें सूजी-सूजी नजर आने लगती हैं. इस पफी आईज की दिक्कत को दूर करने के लिए सौंफ का इस्तेमाल किया जा सकता है. सौंफ के पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट को किसी साफ कपड़े में बांधकर आंखों के ऊपर रखें. ऐसा करने पर आंखों को ठंडक मिलेगी और पफी आईज की दिक्कत कम होगी सो अलग.

       ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /बालों का झड़ना एक ऐसी समस्या है जिससे अनेक लोग परेशान रहते हैं. लगातार बाल झड़ते रहें तो गंजेपन का कारण बनते देर नहीं लगते. कई बार बालों के झड़ते रहने पर सिर पर बालों से ज्यादा स्कैल्प नजर आने लगती है. ऐसे में समय रहते बालों का झड़ना रोकना बेहद जरूरी होता है. हार्मोन इंबैलेंस, तनाव, जेनेटिक्स, मौसम में बदलाव, हीट डैमेज और पोषण की कमी भी बालों के झड़ने की वजह बनती है. यहां कुछ ऐसे हेयर मास्क दिए जा रहे हैं जो बालों का झड़ना कम होने में असर दिखा सकते हैं. इन हेयर मास्क  को घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है. इनसे बालों का झड़ना तो कम होता ही है, साथ ही बाल पहले से ज्यादा घने और मुलायम नजर आते हैं. बालों का झड़ना रोकने के लिए हेयर मास्क |
    शहद का हेयर मास्क
    इस हेयर मास्क को बनाने के लिए एक चम्मच एलोवेरा जैल में एक चम्मच भरकर शहद मिलाएं. दोनों ही चीजों को एकसाथ मिलाकर सिर पर अच्छी तरह मलकर लगा लें. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर इस हेयर मास्क को बालों पर आधा घंटा लगाए रखने के बाद धोकर हटा लें. हफ्ते में एक बार इस हेयर मास्क को बालों पर लगाया जा सकता है.
    प्याज का हेयर मास्क
      प्याज के आयुर्वेदिक गुण इसे बालों के लिए बेहद अच्छा बनाते हैं. प्याज को घिसकर उसका रस निकाल लें. इस रस को बालों की जड़ों से सिरों पर अच्छी तरह मल लें. इसे पूरे बालों पर लगाकर कम से कम एक घंटा रखें और धोकर हटा लें. हफ्ते में 2 से 3 बार इस तरह प्याज को सिर पर लगाने से बालों का झड़ना कम होता है. प्याज के रस  के गुण हेयर ग्रोथ में भी असरदार होते हैं.
    अंडे का हेयर मास्क
      बालों को मजबूती के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है और यह प्रोटीन अंडे से बालों को मिलता है. अंडे का हेयर मास्क बालों को भरपूर पोषण देता है. इस हेयर मास्क को बनाने के लिए एक अंडा लें और उसमें एक चम्मच ऑलिव ऑयल मिला लें. इस मिश्रण को पूरे बालों पर लगाने के बाद आधे घंटे तक जस का तस ही रखें. इसके बाद सिर धोकर साफ कर लें. बालों का झड़ना कम होने में इस हेयर मास्क का अच्छा असर दिखता है.
    मेथी का हेयर मास्क
      मेथी के पीले दाने खानपान का स्वाद तो अच्छा करते ही हैं, साथ ही इन दानों से बना हेयर मास्क बालों का झड़ना कम करता है. हेयर मास्क बनाने के लिए मेथी के दाने  लेकर रातभर भिगोने रख दें. अगली सुबह इन दानों को पीसकर पेस्ट बनाएं. मेथी के दानों का यह हेयर मास्क सिर पर आधा घंटा लगाए रखने के बाद धोकर साफ करें. मेथी में करी पत्ते मिलाकर भी हेयर मास्क बनाया जा सकता है. 

       व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास में होली का त्योहार मनाया जाता है. इस साल 25 मार्च के दिन होली खेली जाएगी. माना जाता है कि होली के दिन आपसी बैर मिट जाते हैं और लोग एकदूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की बधाईयां देते हैं. होलिका दहन से यूं तो होलिका, हिरण्यकश्यप और विष्णु भक्त प्रह्लाद की कथा जुड़ी हुई है, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि रंगों वाली होली क्यों खेली जाती है. असल में रंगों वाली होली खेलने के पीछे भगवान शिव और कामदेव की रोचक कथा छिपी है. जानिए ऐसा क्या हुआ था कि होली खेलने की शुरूआत हुई और धूमधाम से रंग खेला जाने लगा.
    होली की पौराणिक कथा |
    पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है जब महादेव और माता पार्वती का विवाह नहीं हुआ था. माता पार्वती महादेव से विवाह करना चाहती थीं लेकिन तपस्या में डूबे भगवान शिव का ध्यान उनकी ओर नहीं गया. माता पार्वती की इस उलझन को देख कामदेव वहां आ पहुंचे और उन्होंने महादेव की तपस्या भंग करने के लिए उनपर पुष्प बाण चला दिया. इस बाण के कारण महादेव की आंखें खुल गईं और उनके क्रोध से कामदेव अग्नि में भस्म हो गए. इसके बाद महादेव की दृष्टि माता पार्वती पर गई. माता पार्वती की इच्छा पूरी हुई और भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह रचा लिया.
    कामदेव के अग्नि में भस्म हो जाने के बाद शिव शंकर को अनुमान हुआ कि कामदेव निर्दोष थे. इसके बाद माता पार्वती के पूर्व जन्म की कहानी जानकर उन्हें कामदेव के लिए और ज्यादा सद्भाव जागा. ऐसे में महादेव ने कामदेव को एकबार फिर जीवित कर दिया और उन्हें अशरीरी बना दिया. इस दिन लोग फाल्गुन मास पर होलिका दहन कर रहे थे. इसी होलिका में कामदेव की वासना की मलिनता जलकर प्रेम के रूप में प्रकट हुई और कामदेव का अशरीरी भाव से सृजन हुआ जिसका सभी ने जश्न मनाया. इसके बाद से ही होली का त्योहार मनाया जाने लगा. गुलाल से होली खेली गई और हर ओर मधुर संगीत फैल गया.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी कहा जाता है. इस बार यह 20 मार्च दिन बुधवार को आने वाले वाली है. मान्यतानुसार इस दिन उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं को 12 महीने की एकादशी का फल मिल जाता है. इस पावन दिन उपवास, दान, स्नान करने से लोगों पर सुख-समृद्धि की बरसात होती है. रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव, माता पार्वती, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव माता पार्वती को पहली बार अपने प्रिय धाम काशी लेकर आए थे. इसलिए भक्त इस दिन काशी में माता पार्वती का भव्य स्वागत करते हैं.
    एकादशी पर तुलसी पूजा का महत्व |
    धर्माचार्यों के अनुसार, रंगभरी एकादशी पर तुलसी की उपासना अवश्य की जानी चाहिए क्योंकि तुलसी में भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी का वास होता है. ऐसे में तुलसी की पूजा करने वालों पर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. आइए जानते हैं तुलसी के उन उपायों को जिनको रंगभरी एकादशी पर करने से लक्ष्मी माता प्रसन्न रहती हैं और लोगों को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता.
    जरूर करें ये उपाय
        रंगभरी एकादशी पर माता तुलसी  की उपासना करते समय दीपक जरुर जलाएं. इसके साथ ही भागवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें. मंत्रों का जाप करें. उनको लगाए भोग में तुलसी के पत्ते जरुर डालें. माना जाता है कि तुलसी भगवान विष्णु  की बहुत प्रिय है. यदि आप रंगभरी एकादशी पर तुलसी की पूजा इस तरह से करेंगे तो भगवान विष्णु आपकी हर इच्छा को पूरा करेंगे.
        इसके अलावा माता तुलसी की पूजा के समय उनकी 11 बार परिक्रमा जरुर करें. इससे आपके परिवार की सभी आर्थिक और शारीरिक समस्याएं खत्म हो जाएंगी.
        जिन लोगों के दांपत्य जीवन परेशानियों से गुजर रहा है वो रंगभरी एकादशी पर माता तुलसी को लाल चुनरी बांधकर उनकी पूजा करें. इससे आपका वैवाहिक जीवन खुशमय हो जाएगा.

      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / रंगों का त्योहार होली आने वाला है. इस वर्ष 24 मार्च को होलिका दहन होगा और इसके एक दिन बाद यानी 25 मार्च को होली मनाई जाएगी. रंगों के इस त्योहार से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाते हैं. 17 मार्च से शुरू होने वाला होलाष्टक 24 मार्च तक रहेगा. होलिका दहन के साथ ही इनकी समाप्ति हो जाएगी. मान्यतानुसार होलाष्टक के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. मान्यता है कि इस दौरान शादी , मुंडन या फिर गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य करने पर उनका अच्छा फल नहीं प्राप्त होता. ऐसे में चलिए जानते हैं इन आठ दिवसीय होलाष्टक के दौरान कौन-कौन से कार्य करने चाहिए और कौन-कौन से नहीं.
    भूलवश भी न करें ये कार्य
        होलाष्टक में विवाह, मुंडन, सगाई और बच्चों का नामकरण समेत 16 कार्य निषेध माने गए हैं. इस दौरान न मकान का निर्माणकार्य शुरू करना चाहिए और न ही गृह प्रवेश करना चाहिए. इसके साथ ही मकान, वाहन और जमीन की खरीददारी भी होलाष्टक में वर्जित मानी गई है.
        इसके अतिरिक्त होलाष्टक में यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक कार्य भी नहीं करने चाहिए. यदि आप चाहें तो होलाष्टक के पहले या बाद में यह कार्य कर सकते हैं.
        इसके साथ ही जो लोग अपने नौकरी बदलना चाहते हैं या फिर नई नौकरी ज्वाइन करना चाहते हैं वो होलाष्टक के बाद ऐसा करें. यहां तक कि होलाष्टक के दौरान नया बिजनेस शुरू करना भी अच्छा नहीं माना जाता है.

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