September 08, 2026
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     शौर्यपथ / अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार आज के समय में एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेने वाले बैक्टीरिया चुनौती बनते जा रहे हैं। अमेरिका में हर लगभग 28 लाख लोग एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमण की जद में आ जाते हैं और इनमें से तकरीबन 35,000 लोगों की मौत हो जाती है। अब अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के पेरलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक ततैया (वाष्प) के जहर से एक नया एंटीबायोटिक अणु तैयार किया है।
    अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसके जहर से ऐसे एंटीमाइक्रोबियल अणु विकसित किए हैं जो उन बैक्टीरिया को खत्म करेंगे जिन पर दवाओं का असर नहीं हो रहा। अणु तैयार करने वाली अमेरिका की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी का कहना है इससे तैयार होने वाली दवा से टीबी और सेप्सिस के खतरनाक बैक्टीरिया का इलाज किया जाएगा।
    बैक्टीरिया पर बेअसर हो रही दवा का विकल्प-
    नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने एशियन, कोरियन और वेस्पुला ततैया के जहर से प्रोटीन का छोटा से हिस्सा निकालकर उसमें बदलाव किया। बदलाव के कारण दवा के अणु में उन बैक्टीरिया को खत्म करने की क्षमता बढ़ी है जिन पर दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। इन बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया पर मौजूद एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर रही हैं।
    चूहे पर किया गया अध्ययन-
    चूहे पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि जिन बैक्टीरिया पर दवा का असर नहीं हो रहा है उन पर इसका असर हुआ। वैज्ञानिकों का कहना है, वर्तमान में ऐसे नए एंटीबायोटिक्स की जरूरत है जो दवा से नष्ट न होने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर सकें क्योंकि ऐसे संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। हमें लगता है जहर से निकले अणु नए तरह के एंटीबायोटिक का काम करेंगे।
    ऐसे तैयार हुई दवा-
    रिसर्च के मुताबिक, ततैया के जहर से मास्टोपरन-एल पेप्टाइड को अलग किया गया है। यह इनसानों के लिए काफी जहरीला होता है और रक्तचाप के स्तर को बढ़ाता है जिससे इनसानों की हालत नाजुक हो जाती है। इसके इस असर को कम करके इसमें इतना बदलाव किया गया कि यह बैक्टीरिया के लिए जहर का काम करे। इंसानों के लिए यह कितना सुरक्षित है, इस पर क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है।
    इन बैक्टीरिया पर हुआ प्रयोग-
    वैज्ञानिकों ने दवा का ट्रायल चूहे में मौजूद ई-कोली और स्टेफायलोकोकस ऑरेयस बैक्टीरिया पर किया। नई दवा की टेस्टिंग के दौरान 80 फीसदी चूहे जिंदा रहे। लेकिन जिन चूहों को इस दवा की मात्रा अधिक दी गई उनमें दुष्प्रभाव दिखे। शोध में दावा किया गया है कि यह दवा जेंटामायसिन और इमिपेनेम का विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के मामले बढ़ रहे हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वो इस तरह के जहर से और एंटीबायोटिक अणु बना सकेंगे और इससे नई तरह की असरदार दवाएं बनाई जा सकेंगी।

     शौर्यपथ / कोरोनावायरस महामारी के दौरान लॉकडाउन में घर में बैठे-बैठे लोगों के स्क्रीन देखने के समय में इजाफा हो गया है। एक और जहां बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के कारण ज्यादा देर तक स्क्रीन देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर कामकाजी लोग भी काफी देर तक काम करने के दौरान स्क्रीन देखते रहते हैं।
    अब एक नए शोध में पता चला है कि रात को सोने से पहले नीली रोशनी को काटने वाले चश्मे का प्रयोग करने से नींद भी अच्छी आती है और अगले दिन कामकाज की उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होती है।
    इंडियाना यूनिवर्सिटी के केली स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर क्रिस्टियानों एल गुआराना ने कहा, हमने पाया कि नीली रोशनी को काटने या फिल्टर करने वाले चश्मे नींद को बेहतर करने में एक प्रभावी हस्तक्षेप साबित हुए हैं। इसके अलावा कार्यक्षमता को बढ़ाने, प्रदर्शन को बेहतर करने, संस्थागत व्यवहार को बेहतर करने और खराब कार्य व्यवहार को कम करने में भी ये ब्लू लाइट चश्मे प्रभावी साबित हुए हैं।
    नीली रोशनी को फिल्टर करने वाले चश्मे आंखों के सामने एक शारीरिक अंधेरा पैदा कर देते हैं जिससे नींद की गुणवत्ता और अवधि दोनों में ही बढ़ोतरी होती है।
    इन उपकरणों से निकलती है नीली रोशनी
    ज्यादातर इस्तेमाल में आने वाले उपकरण जैसे कंप्यूटर स्क्रीन, स्मार्टफोन, टैबलेट और टीवी से नीली रोशनी निकलती है। पूर्व शोधों के अनुसार इस नीली रोशनी से नींद में खलल पड़ती है। घर से काम करने के दौरान लोगों की इन उपकरणों पर निर्भरता बढ़ गई है। शोधकर्ता गुआराना ने कहा, सामान्य तौर पर नीली रोशनी को रोकने वाले चश्मे से देर रात जागने वाले लोगों को ज्यादा फायदा होता है।
    हालांकि नीली रोशनी से बचने से सभी को फायदा होता है। रात को काम करने वाले कर्मचारियों को इन चश्मों से ज्यादा फायदा होता है क्योंकि उनकी आंतरिक जैविक घड़ी और बाहरी नियंत्रित कार्य के समय में काफी गड़बड़ होती है। हमारे शोध से पता चलता है कि ब्लू लाइट चश्मे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों ही बढ़ाते हैं।
    कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को होगा फायदा
    यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के प्रोफेसर बारनेस ने कहा, इस शोध से पता चलता है कि ये नीली रोशनी को रोकने वाले चश्मे के इस्तेमाल के सस्ते तरीके से कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को ही फायदा होगा।
    शोधकर्ताओं ने 63 कंपनी मैनेजरों और 67 कॉल सेंटर अधिकारियों से डाटा लिया। कुछ कर्मचारियों को ब्लू लाइट चश्मे दिए गए और कुछ को नहीं दिए गए। उन्होंने पाया कि कभी-कभी कर्मचारियों को अहले सुबह भी काम करना पड़ता है। इससे उनकी जैविक घड़ी में गड़बड़ी आ जाती है।
    नियोक्ताओं को नीली रोशनी के संपर्क में आने की मात्रा को लेकर सोचना चाहिए और कर्मचारियों की जैविक घड़ी को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जियोवानी कैरिली और जियैमपिएरो नोबिली इटली के सुदूर नॉर्तोशे कस्बे के दो मात्र बाशिंदे हैं। बावजूद इसके वे कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी सभी एहतियाती उपायों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। एक-दूसरे से मिलते समय दोनों न सिर्फ मास्क पहनना सुनिश्चित करते हैं, बल्कि आपस में छह फीट का फासला बनाए रखना भी नहीं भूलते।
    नॉर्तोशे पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पेरुगिया प्रांत की नरीना घाटी का बेहद खूबसूरत कस्बा है। हालांकि, समुद्र तल से 900 मीटर की ऊंचाई के चलते यहां पहुंचना उतना आसान नहीं। बावजूद इसके 82 वर्षीय कैरिली और 74 साल के नोबिली खुद को सार्स-कोव-2 वायरस के प्रकोप से सुरक्षित नहीं महसूस करते।
    बकौल कैरिली, ‘कोविड-19 का नाम सुनते ही मेरी रूह कांप उठती है। मैं अगर संक्रमित हो गया तो कौन मेरा ख्याल रखेगा। मेरी उम्र हो चली है, फिर भी मैं जिंदा रहना चाहता हूं, अपनी भेड़ों, कुत्ते, सेब के बगानों, मधुमक्खी के छत्तों, वाइनयार्ड और मशरूम के खेतों के लिए।’
    कैरिली कहते हैं, ‘नॉर्तोशे में न तो कोई होटल-रेस्तरां या बार है, न ही अस्पताल,क्लीनिक, दवा की दुकान या मिनी बाजार। हर छोटे-बड़े सामान की खरीदारी के लिए हमें शहर जाना पड़ता है। वहां अगर हम किसी संक्रमित के संपर्क में आ गए हों तो नहीं चाहते कि दूसरा भी वायरस का शिकार हो। मास्क लगाने और सामाजिक दूरी पर अमल करने की एक बड़ी वजह यह भी है।’
    नियमों का पालन करना जरूरी
    -इटली में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना और एक मीटर की सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने पर 470 से 1170 डॉलर (करीब 32900 से 81900 रुपये) का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। नोबिली के मुताबिक वह और कैरिनी सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से मास्क नहीं पहनते या फिर सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल नहीं करते। दोनों का मानना है कि नियम-कायदे सबके लिए समान होते हैं। इन्हें तोड़ना अपने उसूलों का अपमान करने जैसा है।
    आखिरी सांस तक नॉर्तोशे में रहेंगे
    -कैरिली की पैदाइश नॉर्तोशे की ही है, पर पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में उनका ज्यादातर वक्त राजधानी रोम में गुजरा। रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी बिताने के लिए वह पुश्तैनी गांव लौट गए। उनके साले के बहनोई नोबिली ने भी नॉर्तोशे में जा बसने का मन बना लिया। कैरिली कहते हैं, नोबिली के अलावा उनकी पांच भेड़ें और एक कुत्ता ही नॉर्तोशे में रहते हैं। बावजूद इसके दोनों को कभी अकेलापन महसूस नहीं होता। बाजार से लंबी दूरी और साधन का अभाव भी उन्हें शहर में बसने के लिए नहीं उकसाता।

    वास्तु टिप्स / शौर्यपथ /हर इंसान सुख-सुविधाओं भरा जीवन गुजारना चाहता है। अपनी ख्वाहिशों के साथ जरुरतों को पूरा करने के लिए भी इंसान को पैसों की जरुरत होती है। कभी-कभी ऐसा होता है हम अपने परिवार की जरुरतों को पूरा करने के दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन अंत में हमारे हाथ खाली ही रहते हैं। कई बार घर में धन के टिकने का न कारण वास्तु दोष भी होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, वास्तु दोष को कुछ उपायों और टोटकों से दूर किया जा सकता है। जानिए अगर आपके घर का भी वास्तु खराब है तो उसे कैसे कर सकते हैं दूर, ताकि घर में टिकने लगे धन-
    1. वास्तु शास्त्र के अनुसार, आप जहां पैसे रखते हैं उस अलमारी या तिजोरी का मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए। कहा जाता है कि इससे धन में वृद्धि के साथ खर्चा भी कम होता है।
    2. वास्तु के अनुसार, घर के पानी का निकास दक्षिण और पश्चिम दिशा से ही होना चाहिए। सही दिशा से जल निकासी का रास्ता होने से आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।
    3. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में अक्सर टोटियों या नल से पानी गिरते रहना अशुभ होता है। इसके धन पानी की तरह बहता है और बेवजह के खर्च भी बढ़ता है।
    4. कहा जाता है कि घर में टूटे शीशे रखना अशुभ होता है। ऐसा करने से घर में नेगेटिव एनर्जी का वास होता है और आर्थिक नुकसान भी होता है।
    ये 3 चीजें बदल सकती हैं घर का माहौल-
    1. माना जाता है कि घर में स्वास्तिक का निशान होना जरुरी होता है। कहते हैं कि जिस घर में स्वास्तिक चिन्ह होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
    2. कहते हैं कि घर में कलश रखना बेहद शुभ होता है। इससे घर में खुशियां आती हैं और आर्थिक लाभ भी होता है।
    3. कहते हैं कि घर में ओम का चिन्ह बनाने से वास्तु दोष दूर होता है और घर के सदस्यों के बीच प्यार बढ़ता है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / पावन नवरात्र में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत सौम्य है। मां का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। मां के मस्तक में घंटे का आकार का अर्द्धचंद्र है, इसलिए मां को चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने से हर तरफ सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो जाता है।
    मां को लाल रंग के फूल अर्पित करें। मां की उपासना करते समय मंदिर की घंटी अवश्य बजाएं। घंटे की ध्वनि से मां अपने भक्तों पर हमेशा अपनी कृपा बरसाती हैं। मां को मखाने की खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से अहंकार नष्ट हो जाता है। मां की आराधना से घर-परिवार में शांति आती है। तृतीय नवरात्र पर लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां को गाय का दुग्ध अर्पित करने से दुखों से मुक्ति मिलती है। माता चंद्रघंटा को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से सभी कष्टों का निवारण होता है। मां सौभाग्य, शांति और वैभव प्रदान करती हैं। मां का उपासक निर्भय हो जाता है। मां चंद्रघंटा के भक्त जहां भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी को हरा रंग बेहद प्रिय होता है। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी को हरे रंग का भोग अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही भक्त की मन की मुरादें भी पूरी होती हैं। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सिद्धी की प्राप्ति होती है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम पाने के लिए देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।
    इनका पूजन मंत्र है-
    दधाना करपाद्माभ्याम, अक्षमालाकमण्डलु।
    देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
    मां ब्रह्मचारिणी के पूजन में हरे वस्त्रों को धारण करें। हरा रंग आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है। हरा रंग प्रकृति, शांति और प्रगति का प्रतीक है। साथ ही साथ यह नई शुरुआत का भी प्रतीक है। सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करें। मां सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी।
    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने
    वाली बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। नारद जी के आदेशानुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने वर्षों तक कठिन तपस्या की। एक हजार वर्षों तक माता ने सिर्फ फल-फूल खाकर जावन यापन किया।
    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आज, अपनों को माता की भक्ति से भरें भेजें ये इमेज और स्रूस्
    नवरात्रि का त्योहार 17 अक्टूबर, 2020 से शुरू हो चुका है। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के देवी ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार सालों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी। उनकी इस कठिन तपस्या के कारण ही उनका नाम तपचारिणी यानी ब्रह्मचारिणी पड़ गया। नवरात्रि के पर्व की लोग अपनों को माता की भक्ति से भरे मैसेज और इमेज से बधाई देते हैं। हम आपको बता रहे हैं ऐसे कुछ स्रूस्, इमेज और मैसेज जिनसे आप नवरात्रि के दूसरे दिन की दे सकते हैं बधाई-
    1. जब जब याद किया तुझे ए मां
    तूने आंचल में अपने आसरा दिया.
    कलयुगी इस जहां में, एक तूने ही सहारा दिया.
    शुभ नवरात्रि।
    2. जब जब याद किया तुझे ए मां
    तूने आंचल में अपने आसरा दिया.
    कलयुगी इस जहां में, एक तूने ही सहारा दिया.
    शुभ नवरात्रि।
    3. मां अम्बे आपको
    सुख समृद्धि वैभव ख्याति प्रदान करें.
    जय माता दी.
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
    4. लाल रंग की चुनरी से सजा मां का दरबार
    हर्षित हुआ मन, पुलकित हुआ संसार
    नन्हें-नन्हें कदमों से मां आए आपके द्वार
    इस नवरात्रि यही हैं हमारी दुआ
    जय माता दी.
    हैप्पी नवरात्रि 2020
    5. माता रानी वरदान ना देना हमें,
    बस थोड़ा सा प्यार देना हमें,
    तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा,
    एक बस यही आशीर्वाद देना हमें
    आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
    शुभ नवरात्रि 2020
    6. जब दु:ख बढ़ जाता हैं,
    हल कहीं नहीं मिल पाता हैं,
    तब वो मां के दरबार आता हैं,
    चेहरे पर मुस्कान लेकर जाता हैं।
    हैप्पी नवरात्रि 2020

    आस्था / शौर्यपथ /और शक्ति का प्रतीक शारदीय नवरात्रि का उत्सव 17 अक्तूबर से शुरु हो चुका है। नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिन प्रसाद के रूप में मां को अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के हर दिन अलग रंग पहनकर मां की अराधना करने से भी व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के 9 दिनों में किस दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
    पहले दिन-
    नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन मां के भक्तों को पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    दूसरा दिन-
    नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को हरे रंगे के वस्त्र पहनने चाहिए।
    तीसरा दिन-
    नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को भूरे रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    चौथा दिन-
    नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को नारंगी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    पांचवा दिन-
    नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    छठा दिन-
    नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    सातवां दिन-
    नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को नीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    आठवां दिन-
    नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
    नौवें दिन-
    नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को जामुनी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।

    शौर्यपथ / केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि समाचार पत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। ये कोरोना वायरस के प्रसार का स्रोत नहीं हैं। सोशल मीडिया पर संडे संवाद के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों के मौसम में कोरोना अनुकूल व्यवहार का पालन करें ताकि संक्रमण बढ़ने से रोका जा सके।
    सुबह की चाय के साथ समाचार पत्र पढ़ने का अवसर नहीं मिलने के कारण आनंद की अनुभूति नहीं होने से संबंधित एक सवाल पर डॉ. हर्षवर्धन ने भरोसा दिलाया कि कोई ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, जो साबित कर सके कि समाचार पत्रों से कोरोना वायरस का प्रसार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाचार पत्र पढ़ना कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूरी तरह सुरक्षित है।
    डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में केरल में कोरोना मामलों में उछाल को लेकर अपने विचार साझा किए। केरल ओणम त्योहार के दौरान हुई घोर लापरवाही की कीमत भुगत रहा है। जब राज्य में अनलॉक अवधि के दौरान गतिविधियों जैसे व्यापार और पर्यटन के लिए अंतरराज्यीय यात्रा को शुरू किया जा रहा था, तब राज्य के विभिन्न जिलों में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई।
    केरल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और दैनिक मामले दोगुना हो गए। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इससे उन सभी राज्यों को सबक लेना चाहिए, जो त्योहारों के मौसम के दिशा-निर्देश जारी करने में लापरवाह रहते हैं।
    चीन के इस दावे पर कि पिछले वर्ष कई देशों में एक साथ कोरोना वायरस का फैलाव हुआ था, डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है, जिससे इस दावे की वैधता साबित हो सके। हालांकि, चीन के वुहान को विश्व में कोरोना के पहले मामले की रिपोर्ट करने के लिए अब भी माना जाता है।
    एफडीआई स्वीकृत पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने की सलाह
    बाजारों में चीन द्वारा निर्मित ऑक्सीमीटर की भरमार होने के एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि उपभोक्ताओं को बाजार से या ऑनलाइन विक्रेताओं से पल्स ऑक्सीमीटर खरीदते समय एफडीए/सीई स्वीकृत उत्पादों और उनके साथ आईएसओ/आईईसी विनिर्दिष्टताओं को देखना चाहिए।
    यद्यपि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन स्तर में कमी कोविड-19 का लक्षण नहीं है, क्योंकि ऐसा कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी हो सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यों को दूसरे चरण का कोरोना पैकेज जारी कर दिया गया है। कुल 1352 करोड़ दिए गए हैं।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /जानलेवा कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन में इंसानी गतिविधियां कम होने का कुछ जीवों को फायदा भी मिला है। एक अध्ययन ने इस बात का खुलासा किया है कि इसी बदलाव के कारण पक्षियों के गाने का अंदाज में भी बदलाव आ गया है। महामारी ने इंसानों को घर में समेट कर रख दिया है। इसका दुनिया के कई शहरों में रहने वाले जीवों पर भी असर हुआ है।
    कैल पॉली के शोधकर्ता जेनिफर फिलिप्स और नॉक्सविले में टेनेसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलिजाबेथ डेरीबेरी ने अपने शोध में यह खुलासा किया है। उन्होंने लॉकडाउन से पहले और बाद में सैन फ्रांसिस्को क्षेत्र सफेद गौरैया की ध्वनि और गीतों की तुलना की। उन्होंने पाया कि अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर की गलियां महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के चलते शुरुआती महीनों में खाली हो गई थीं।
    इस वजह से शोर बहुत कम होने से वहां गौरैया ने भी बदलते हालात के अनुसार अपने गाना की आवाज धीमी कर दी। ज्यादातर पक्षी अब बहुत मधुर और बेहतर अंदाज में गीत गाने लगे हैं। जब शहर में शोर ज्यादा था तो उन्हें तेज आवाज में गाना पड़ता था लेकिन जब ट्रैफिक रुकने से ध्वनि प्रदूषण कम हुआ तो अब पक्षी धीमी आवाज में और पहले से मधुर गीत गा रहे हैं।
    शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके इस अध्ययन से यह बात साफ हो गई है कि मानवीय व्यवहार और गतिविधियां सीधे तौर पर वन्य जीवों को प्रभावित करती हैं।

    खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए कई चीजों का भोग लगाते हैं। आस्था और शक्ति के इस पर्व पर हर कोई मां को अपनी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न कर लेना चाहता है। अगर इस नवरात्री आप भी माता के भोग के लिए कुछ अलग हटकर ट्राई करना चाहते हैं तो बना सकते हैं कच्चे केले का हलवा। यह बहुत ही टेस्टी रेसिपी है जो झटपट बनकर तैयार हो जाती है। तो आइए जानचे हैं कैसे बनता है कच्चे केले का हलवा।

    केले का हलवा बनाने के लिए साम्रगी-

    -3 कच्चे केले

    -3-4 कप चीनी

    -5 चम्मच घी

    -1/5 कप दूध

    -10-12 काजू

    -10-12 बादाम

    -25 किशमिश

    -आधा चम्मच इलायची पाउडर

    कच्चे केले का हलवा बनाने का तरीका-
    कच्चे केले का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे केलों को उबालकर उन्हें पका लें। इसके बाद केलों के छिलके उतार कर अच्छे से मसल लें। अब कढ़ाई में 5 चम्मच देसी घी डालकर उसमें मसले हुए केले को डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। केले का रंग सुनहरा होने पर या घी केले से अलग होने लगे तब आप इसमें चीनी और दूध डालकर, दो उबाल लगा दें। जब उबाल आ जाए तब इसमें आप काजू , बादाम और किशमिश डाल लें। हलवे के गाढ़ा होने तक इसे पकाएं। इसके बाद आप इसमें इलायची पाउडर डालें। आपका केले का हलवा बनकर तैयार है। हलवे के ऊपर ड्राई फ्रूट्स डालकर गार्निश करके सर्व करें।

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