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June 01, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति को समर्पित होता है। इस दिन भगवान बृहस्पति की विधि-विधान से पूजा की जाती है। बृहस्पति भगवान को देवताओं का गुरु माना जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से विवाह मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही बृहस्पति भगवान की कृपा से उच्च शिक्षा और अपार धन की प्राप्ति के योग की भी मान्यता है। हर व्यक्ति सुखद गृहस्थ जीवन, नौकरी, धन और शिक्षा चाहता है, ऐसे में हर व्यक्ति को भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। जानिए गुरुवार के दिन भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के आसान उपाय-
1. मान्यता है कि गुरुवार के दिन पानी में हल्दी डालकर नहाने से भगवान बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना फलकारी माना जाता है।
2. बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना शुभ माना जाता हैं। इसके साथ ही पीले रंग के कपड़े और पपीते की डल गले में पहनना शुभ माना जाता है।
3. कहते हैं कि गुरुवार को किसी को न ही उधार देना चाहिए और न ही लेना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से जातक की कुंडली में गुरु की स्थिति खराब हो सकती है, जिसके कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
4. गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि स्नान के बाद ‘ॐ बृ बृहस्पते नमः’ का जाप करने से धन-संपदा में तरक्की होती है।
5. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा व चित्र का सामने घी का दीया जलाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5. कहते हैं कि भगवान बृहस्पति को पीले रंग अतिप्रिय है। इसलिए इस दिन ब्राह्मणों को पीले रंग की वस्तुएं जैसे- चने की दाल, फल आदि दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में बरकत होती है।
6. अगर प्रमोशन या रोजगार संबंधी बाधा आ रही हो तो गुरुवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुएं जैसे फल, कपड़े इत्यादि का दान करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से विवाह संबंधी और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
7. घर से दरिद्रता दूर करने के लिए गुरुवार के दिन घर के सदस्य खासतौर पर महिलाओं के बाल धोने से मनाही होती है। कहते हैं कि इस दिन नाखून काटना भी अशुभ होता है।

जगदलपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में सौगातों का पिटारा खोला। उन्होंने यहां बस्तर दशहरा के आयोजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मांझी-चालकी सहित विभिन्न पदाधिकारियों के मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर दिल जीत लिया।
मुख्यमंत्री बघेल ने सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा उठाई गई मांगों पर 20 घोषणाएं कीं। उन्होंने सभी मांझी चालकियों से वन अधिकार पट्टे के लिए आवेदन लेकर उन्हें 6 माह के भीतर पट्टा देने की घोषणा की। इसी प्रकार मांझियों का मानदेय 1350 से बढ़ाकर 2000 रूपए प्रतिमाह, चालकियों का मानदेय 675 रूपए से बढ़ाकर एक हजार रूपए, कार्यकारिणी मेम्बरीन का मानदेय एक हजार से बढ़ाकर 11 सौ रूपए, और साधारण मेम्बरिनों को 15 सौ रूपए वार्षिक मानदेय, 21 पुजारियों का मानदेय 3 हजार से बढ़कार 3500 रूपए, गुरूमाय और भंडारदेवी पुजारी, मुण्डा बाजा वादक, मोहरी बाजा वादक और पूजा करने वाले सात सदस्यों को 1500 वार्षिक मानदेय, जोगी बिठाई करने वाले लोगों को 11 हजार रूपए, रथ निर्माण करने वाले दल को 21 हजार रूपए के मान से कुल 42 हजार रूपए की राशि दिए जाने की घोषणा की।
इसी प्रकार उन्होंने मांझी-चालकी के रिक्त पदों पर 6 माह के भीतर भर्ती किए जाने और जगदलपुर के मांझी भवन का उन्नयन कराने और चालकी की मांगों पर 6 माह के भीतर पूर्ण करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर कहा कि विश्व का सबसे लंबा पर्व मनाने का कीर्तिमान बस्तर के पास है। प्रतिवर्ष ढाई महीने तक मनाया जाने वाला यह पर्व इस वर्ष साढ़े तीन माह तक मनाया गया। बस्तर दशहरा हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया में सबसे अधिक समय तक चलने वाला पर्व है। यह आयोजन हिन्दुस्तान में ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय है, जिसे देखने बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी आते हैं।
उन्होंने बस्तर को आजादी पसंद बताते हुए कहा कि 1857 में आजादी की लड़ाई से काफी पहले यहां राजा गैंदसिंह को 1824 में फांसी दी गई थी। वर्ष 1857 में विद्रोह की ज्वाला बस्तर से निकली’।
छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीरनारायण सिंह सहित सभी सपूतों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ने देश की आजादी में विशेष भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि मुरिया दरबार में आकर उन्हें काफी प्रसन्नता हो रही है। इस आयोजन में दंतेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, कोण्डागांव और कांकेर से आदिवासी समाज के लोग शामिल होने आते हैं। मुरिया दरबार में समारोह के अलावा समाज उन्नति पर भी विचार विमर्श होता है यह सराहनीय है। यह समाज प्रकृति के साथ स्वतंत्रता पूर्वक रहने वाला समाज है। बस्तर दशहरा के लिए रथ निर्माण हेतु पेड़ कटाई की भरपाई के लिए वृक्षारोपण के संकल्प की मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने गरीब, आदिवासी एवं किसान हितैषी नीतियों के बारे में कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद किसानों की ऋण माफी और 25 सौ रूपए में धान खरीदी की गई। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए धान, मक्का और गन्ना किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की राशि दे रहे हैं। इसकी दो किस्त दे चुके हैं। तीसरी किस्त एक नवंबर को देंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोहण्डीगुड़ा में हमने 1700 आदिवासी किसानों की 42 सौ एकड़ जमीन वापस की है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए सबसे ज्यादा प्रति बोरा 4000 रूपए की राशि दी जा रही है। वनवासियों को सतत रूप से आय सुनिश्चित करने के लिए समर्थन मूल्य पर 7 की जगह अब 31 लघु वनोपजों की खरीदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद था, ऐसे कठिन समय में राज्य सरकार ने स्वसहायता समूहों के माध्यम से लघुवनोपज की खरीदी की व्यवस्था की। जिस समय लोग एक-एक पैसे के लिए मोहताज थे, हमारी सरकार ने मनरेगा में एक दिन में 26 लाख लोगों को रोजगार देने का कीर्तिमान बनाया, जिससे लोगों को कोई तकलीफ नहीं हुई।
मुख्यमंत्री ने सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष का दायित्व भली भांति निभाया। उन्होंने इस पर्व के आयोजन में शामिल विभिन्न समुदायों की हर छोटी-बड़ी समस्याओं की जानकारी ली और उनका समाधान किया। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल के दौरान इस महापर्व के सफल आयोजन के लिए बस्तर दशहरा समिति और जिला प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पर्व की सभी रस्मों का आयोजन करने के साथ ही सुरक्षा का भी भरपूर ध्यान रखा गया। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री एवं बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने भी उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया।
झंडा मांझी के छायाचित्र का लोकार्पण
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर झंडा मांझी के छायाचित्र का लोकार्पण किया। बस्तर दशहरा के उत्कृष्ट आयोजन में सहयोग के लिए मांझी, चालकी सहित बस्तर दशहरा समिति के सदस्यों और कर्मचारियों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव, संसदीय सचिव एवं जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप, क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार, मत्स्य बोर्ड के अध्यक्ष एम.आर. निषाद, महापौर श्रीमती सफीरा साहू, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

शौर्यपथ / स्कूल खोलने से सामुदायिक संक्रमण नहीं फैलता है। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह दावा किया है। शोधकर्ता दल ने अमेरिका और ब्रिटेन के स्कूलों में संक्रमण की स्थिति का आकलन करने पर पाया कि बच्चों से संक्रमण तो फैल रहा है पर वे कम्युनिटी संक्रमण नहीं फैला रहे।
अमेरिका और ब्रिटेन में स्कूल खुले लगभग तीन महीने हो चुके हैं। इन दोनों देशों के स्कूलों में हुई सैंडम टेस्टिंग के डाटा का शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसके आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में तुलनात्मक रूप से कम संक्रमण फैला और इन स्कूलों के कारण बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
यानी बच्चों में संक्रमण का डर तो है पर इससे बहुत बड़ा खतरा पैदा नहीं होता। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ब्रूक निकोलस का कहना है कि हम स्कूल से जुड़े जितने ज्यादा डाटा का अध्ययन कर रहे हैं, उतने ज्यादा निश्चिंत हो रहे हैं कि बच्चे वायरस के संक्रमण को नहीं फैलाते। विशेषकर स्कूल में मौजूदगी के दौरान बच्चों के जरिए संक्रमण नहीं फैल रहा।
बच्चों से बड़े संक्रमण का खतरा नहीं
सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. माइकल ब्रीच ने कहा कि बच्चों से बहुत बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने या कम्युनिटी संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक के तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे संक्रमित होते हैं और वे संक्रमण फैलाते भी हैं पर यह संक्रमण बहुत बड़े स्तर पर नहीं फैलता। उन्होंने कहा कि यही बच्चों और स्कूल खोलने से जुड़ी वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी चिंता थी।
स्कूल बंद करना समाधान नहीं
पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के बाल रोग व संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. डेविड रुबिन का कहना है कि संक्रमण के डर से स्कूल बंद कर देना समाधान नहीं है। कम से कम प्राथमिक स्कूलों में कक्षाएं (इन-पर्सन) शुरू कर देनी चाहिए। साथ ही अगर बड़े बच्चों की कक्षाएं चलाने के लिए स्कूल पर्याप्त बचाव के इंतजाम करें तो ज्यादा बड़े खतरे के उन्हें शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में पढ़ाई जारी रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।
बार-रेस्तरां बंद हों, स्कूल नहीं
शोधकर्ताओं का कहना है कि छोटी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई चलती रहती चाहिए। अगर सरकारें किसी हॉटस्पॉट क्षेत्र में संक्रमण को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकना चाहती हैं तो उन्हें बार और रेस्टोरेंट जैसे सार्वजनिक स्थानों को बंद करना चाहिए क्योंकि यहां युवा बचाव के तरीकों को अपनाए बिना मिलते हैं, जिससे संक्रमण फैलता है।
नीदरलैंड बना उदाहरण
नीदरलैंड में इन दिनों एक बार फिर संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यहां सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए बार और रेस्टोरेंट को बंद किया है, जबकि स्कूल लगातार संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, ब्रिटेन में भी अभी कुछ प्रतिबंधों के साथ स्कूल खुल रहे हैं जबकि वहां संक्रमण बढ़ गया है।
स्पेन में आज तक स्कूल बंद नहीं हुए
दुनिया में स्पेन उन कुछ देशों में से एक है, जहां संक्रमण फैलने के बावजूद कभी स्कूलों को बंद नहीं किया गया। यहां 16 साल से छोटे बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं, वहीं बड़े बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं।

शौर्यपथ / केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि एकल अभिभावक वाले पुरुष सरकारी कर्मचारी अब चाइल्ड केयर लीव के हकदार हैं। उन्होंने कहा,‘‘ एकल पुरुष अभिभावक में ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जो अविवाहित या विधुर या तलाकशुदा हैं और इसलिए बच्चे की देखभाल करने की जिम्मेदारी लेने की उम्मीद की जा सकती है।’’
सरकारी सेवकों के जिंदगी आसान करने के लिए पथ-प्रदर्शक और प्रगतिशील सुधार बताते हुए, सिंह ने कहा कि निर्णय के संबंध में आदेश कुछ समय पहले जारी किए गए थे, लेकिन किसी भी तरह से सार्वजनिक डोमेन में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा कि बाल देखभाल अवकाश पर एक कर्मचारी अब सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के साथ मुख्यालय छोड़ सकता है। इसके अलावा, कर्मचारी को लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) का लाभ मिल सकता है, भले ही वह चाइल्ड केयर लीव पर हो।
सिंह ने कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा कि पहले 365 दिनों के लिए चाइल्ड केयर लीव 100 प्रतिशत पर दी जा सकती है और अगले 365 दिनों के लिए 80 प्रतिशत लीव सेलरी दी जा सकती है।

शौर्यपथ / पंजाब इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसिज (पिम्स) के चिकित्सकों ने लेज़र तकनीक से 26 और 28 सप्ताह के प्रीमेच्योर बच्चों की आंखों के आप्रेशन कर पदोर्ं को ठीक करने में सफलता पाई है।
शिशु विशेषज्ञ प्रोफेसर डा. जतिंदर सिंह ने मंगलवार को बताया कि कोरोना काल के दौरान अगस्त महीने में जालंधर और होशियारपुर के दो परिवारों के 28 और 26 हफ्तों के प्रीमेच्योर बच्चों को अत्यंत गंभीर हालात में अथक प्रयास से बचाने में कामयाबी हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में जालंधर निवासी अंजू के घर 28 सप्ताह की दो प्रीमेच्योर बच्चियों ने जन्म लिया।
जन्म के समय यह बच्चे 68० ग्राम और 89० ग्राम के थे जबकि समान्य नवजात बच्चे का भार ढाई से चार किलो होता है। इसी प्रकार होशियारपुर निवासी रशपाल कौर के घर में भी 26 हफ्तों की एक प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। जिसका उस समय भार 63० ग्राम था। इस तीनो बच्चों के फेफड़े तक नहीं बने हुए थे। बहुत ही गंभीर हालत में इन तीन बच्चियों को पिम्स के निकू वार्ड में दखिल किया गया।
डॉ सिंह ने बताया कि अंजु की बच्चियों को सांस नहीं ले पाने के कारण नौ दिन तक वेंटलेटर पर रखा गया उसके बाद उसे 5 दिन सीपेप स्पोर्ट पर रखा गया। सात ग्राम खून होने कारण बच्चे बहुत ही कमजोर थे। इन बच्चों को तीन बार खून चढ़ाया गया और काफी समय तक आक्सीजन पर भी रहे। इसके अलावा थायरेड नहीं बन रहा था और बच्चे दूध भी नहीं पचा रहे थे। इसके बाद इस बच्चियों की आंख के पीछे वाला पदार् भी नहीं बन रहा था। लेजर तकनीक के द्वारा इनकी आंख का आप्रेशन किया गया।
इसके अलावा होशियारपुर की रशपाल कौर के घर 18 साल बाद एक प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। लेकिन जन्म के समय उसकी हालत भी काफी गंभीर थी। बच्ची को पिम्स में इलाज के लिए भतीर् किया गया। निकू में दाखिल करने के बाद इसका भी इलाज शुरू किया गया।
इस बच्ची को एक महीने तक सीपेप स्पोर्ट पर रखा गया। बच्ची को इंफेक्शन काफी ज्यादा थी। इसका भी खून सात ग्राम था। खून नहीं बन रहा था। सांस रुक-रुक कर आ रही थी। डा. जतिंदर ने कहा कि इन तीनो बच्चों का तुरंत इलाज किया गया। इलाज के बाद इन बच्चों के फेफड़े भी बनने शुरु हो गये हैं। तीनों अब पूरे तरह स्वस्थ्य हैं। तीनो को जल्द ही पिम्स से छुट्टी देकर घर भेज दिया जाएगा।

शौर्यपथ / कोविड-19 वायरस को लेकर दुनियाभर में नए-नए शोध हो रहे हैं। इसी कड़ी में प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भी कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए नया शोध हो रहा है। इस शोध में यूरिन जांच के जरिए कोरोना संक्रमण के पता लगाने की संभावना तलाशी जा रही है। माना जा रहा है कि जल्द चौंकाने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलोजी विभाग में कोरोना संक्रमित के यूरिन को शोध की जांच प्रक्रिया में रखा गया है। इसके लिए करीब 50 संक्रमितों के यूरिन सैंपल को लिए गए हैं। शोध कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लक्षण में यह संभव होता दिख रहा है।
एसआरएन के कोरोना नोडल अफसर डॉ सुजीत राय के अनुसार, यूरिन के जरिए कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए शोध किया जा रहा है। इसके लिए संक्रमितों के यूरिन सैंपल को शोध में शामिल किया गया है। यूरिन से कोरोना का पता चलेगा या नहीं, फिलहाल इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
मुंह व नाक का ही लेते हैं सैंपल :
कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए अबतक एक ही जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है। संबंधित व्यक्ति के मुंह व नाक से ही सैंपल लिया जाता है। इसके आधार पर आई रिपोर्ट पर ही संक्रमण होने या न होने के बारे में बताया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह व नाक से ठीक से सैंपल न लेने के कारण रिपोर्ट भी रुक जाती है।
तो खुद जाना जरूरी नहीं होगा :
यूरिन की जांच से अगर कोरोना संक्रमितों के बारे में पता लगेगा तो पीड़ित को काफी आसानी होगी। अबतक मुंह व नाक से सैंपल लेने के कारण खुद जाना जरूरी होता था। अगर यूरिन से यह संभव हुआ तो जरूरी नहीं है कि संबंधित व्यक्ति खुद जांच कराने पहुंचे।
आंखों से भी संक्रमण का जताया था खतरा :
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में आंखों से कोरोना संक्रमण होने पर भी शोध किया जा रहा है। माना गया था कि आंखों से निकलने वाला तरल पदार्थ व आंसुओं में कोरोना संक्रमण का आरएनए पाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना था कि संक्रमित की आंखों से निकलने वाला तरल पदार्थ व आंसू नाक की नली व मुंह तक पहुंच जाते हैं। नाक व मुंह के जरिए वह दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है।

धर्म संसार / शौर्यपथ / आज बुधवार है। शास्त्रों में यह दिन भगवान शिवजी के पुत्र प्रभु गणेश को समर्पित है। भगवान गणेश के बुध ग्रह का कारक देव होने के कारण बुधवार को बुध देव की पूजा का भी विधान है। कहते हैं कि बुध ग्रह का शुभ फल पाने के लिए श्रीगणेश के कुछ उपाय करने चाहिए। हिंदू शास्त्रों में श्रीगणेश को मां लक्ष्मी का मानस पुत्र बताया गया है। ऐसे में मान्यता है कि मां लक्ष्मी अपने पुत्र के भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के साथ ही धन प्राप्ति के योग भी बनाती हैं। जानिए बुधवार के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के ये सरल उपाय-
1. मान्यता है कि बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाने से जीवन की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और धन-धान्य में कोई कमी नहीं रहती है।
2. कहते हैं कि बुधवार के दिन सुबह स्नान आदि के बाद एक कांस की थाली में चंदन से ऊँ गं गणपतयै नम: लिखकर पांच बूंदी के लड्डू के रखकर पास के मंदिर में दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
3. बुधवार के दिन श्रीगणेश को सुबह शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाना उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और बिगड़े काम भी बन जाते हैं।
4. शास्त्रों में बुधवार के दिन भगवान गणेश के अभिषेक का विधान बताया गया है। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।
5. बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में जाकर दर्शन करना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी भक्त के मन की मुरादें पूरी करती हैं।
6. बुधवार के दिन घर में गंगा जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर आती हैं।
7. बुधवार के दिन घर के मंदिर में भगवान गणपति को 8 अर्क के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर में स्थायी बसेरा बनाती हैं।

शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में तरक्की, धन, बिजनेस, वैवाहिक जीवन, परिवार, नौकरी आदि से जुड़े सवालों का सरलता से जवाब दिया है। कहते हैं कि आचार्य चाणक्य की नीतियों को अपनाना कठिन होता है, लेकिन जिस व्यक्ति ने अपना लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। नीति शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति की कुछ आदतें ही उसके धनवान बनने के रास्ते का रोड़ा होती हैं। इन आदतों के कारण व्यक्ति का जीवन मुश्किलों से भर जाता है। जानिए उन आदतों के बारे में-
चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति चाहे जितना गरीब हो, उसे साफ-सुथरा होना चाहिए। चाणक्य का मानना है कि गंदे या मैले कपड़े पहनने वाले व्यक्ति के पास मां लक्ष्मी का वास कभी नहीं होता है। ऐसे लोग अपमानित होते हैं।
नीति शास्त्र में चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति दांतों को गंदा रखता है और उनकी सफाई नहीं करता है। उसे गरीबी का सामना करना पड़ता है। वहीं दांत साफ रखने वाला व्यक्ति खुशहाल रहता है।
चाणक्य कहते हैं कि ज्यादा खाने वाला व्यक्ति कभी धनवान नहीं बन पाता है। चाणक्य कहते हैं कि ज्यादा खाने वाले व्यक्ति की सेहत भी खराब रहती है।
नीति शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा मीठा बोलना चाहिए। कड़वा बोलने वाले व्यक्ति को लोग पसंद नहीं करते हैं और उसके दुश्मनों की संख्या भी बढ़ती जाती है।
चाणक्य का मानना है कि अच्छे तरीके से कमाया गया धन ज्यादा दिनों तक टिकता है। वहीं गलत तरीके से कमाया गया धन व्यक्ति को हमेशा परेशान रखता है। चाणक्य कहते हैं कि धूर्त और चालाक व्यक्ति ज्यादा दिनों तक खुशहाल नहीं रह पाते हैं।

सेहत / शौर्यपथ /भारतीय वैज्ञानिकों ने गठिया की दवा सल्फापायरीडाइन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए रोगियों को दवा देने का नया तरीका खोजा है। पंजाब स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार सल्फापायरीडाइन गठिया (रूमटॉइड आर्थराइटिस) की तीसरी सबसे पुरानी दवा है जो अब भी इस्तेमाल होती है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस दवा के सेवन से जी मिचलाना, उल्टी आना, त्वचा पर चकत्ते पडऩा, चक्कर आना, बेचैनी और पेट में दर्द जैसे दुष्प्रभाव सामने आते हैं।
एलपीयू में स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर भूपिंदर कपूर ने 'पीटीआई-भाषा से कहा, 'Óअत्यधिक खुराक की वजह से दवा के अणु के दुष्प्रभाव होते हैं, इसलिए हमने एक ऐसा तरीका निकाला है जिससे सीधे शरीर के प्रभावित हिस्से तक पहुंचाया जा सकता है और यह सुरक्षित है। 'मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग सी नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने सल्फापायरीडाइन का एक 'प्रोड्रग विकसित करने और इसे दवा देने के नए तरीके में शामिल करने की जानकारी दी है।
प्रोड्रग को रोगी के शरीर के प्रभावित हिस्से में सीधे इंजेक्ट किया जाता है। इसका दवा के रूप में सेवन नहीं किया जाता। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इसका मतलब है कि दवा शेष शरीर में फैले बिना सीधे प्रभावित अंग तक पहुंचती है।
अनुसंधानकर्ताओं के दल ने दवा देने की इस नवोन्मेषी प्रणाली के प्री- क्लीनिकल ट्रायल और परीक्षण सफलतापूर्वक किए हैं। इस अध्ययन का संचालन फोर्टिस अस्पताल, लुधियाना और तमिलनाडु के ऊटी स्थित जेएसएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी के साथ मिलकर किया गया है।

सेहत / शौर्यपथ / सिर्फ बादाम और अखरोट पर ही क्यों अटके रहें , जब आप किशमिश से भी बहुत सारी गुडनेस ले सकते हैं? यहां जाने कि क्यों आपको इस स्वस्थ नाश्ते को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।
कौन कहता है कि स्वस्थ खाद्य पदार्थ हमेशा उबाऊ होते हैं? मदर नेचर में जब इतने स्वादिष्ट, स्वस्थ और पौष्टिक सुपरफूड मौजूद हैं जिसका हम किसी भी समय आनंद ले सकते हैं, और वह भी बिना किसी अपराधबोध के। जब पोषक तत्वों की बात आती है ऐसा ही एक सुपरफूड है ?किशमिश
किशमिश मूल रूप से सूखे हुए अंगूर होते हैं, जो विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट, फाइटोन्यूट्रिएंट्स, पॉलीफेनोल्स और कई अन्य आहार फाइबर जैसे कई पोषक तत्वों से भरे होते हैं।
यह सब किशमिश को उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है, जो अपने स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति सचेत हैं।
यहां दैनिक आधार पर किशमिश खाने के सात अद्भुत स्वास्थ्य लाभ हैं, जैसा कि अमरीन शेख, वोकहार्ट अस्पताल, मुंबई के प्रमुख आहार विशेषज्ञ और पोषण सुझा रहीं हैं:
1.किशमिश पूप को आसान बनाती है
स्वस्थ शरीर के लिए कब्जयुक्त पेट एक हेल होल है। यही कारण है कि आपको हर समय पाचन मार्ग को साफ रखने की आवश्यकता है। किशमिश निश्चित रूप से इसमें आपकी मदद कर सकती है!
किशमिश अघुलनशील आहार फाइबर युक्त है, जो उन्हें एक प्राकृतिक रेचक बनाता है। ये बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाता है, और हमारे सिस्टम से मल को चिकना बनाकर निकालने में मदद करती है।
वह कहती है, "किशमिश कब्ज के साथ-साथ पेट दर्द, इरिटेटिंग बाउल सिंड्रोम, गैस, सूजन और पेट फूलना जैसी अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से राहत प्रदान करती है।"
2.वजन बढ़ाने के लिए किशमिश खाएं
हर कोई वजन कम करने के लिए नहीं सोचता है। ऐसे लोग भी हैं जो स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए किशमिश पर भरोसा किया जा सकता है।
शेख बताती हैं, "अगर आप वजन बढ़ाना चाहती हैं, तो किशमिश आपकी सबसे अच्छे दोस्त हो सकती हैं। किशमिश फ्रुक्टोज और ग्लूकोज में समृद्ध हैं, जिससे यह आपको ऊर्जा प्रदान करती है। यह आपके सिस्टम में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाए बिना वजन बढ़ाने में आपकी मदद करेगी।"
3.यह कैंसर की रोकथाम में भी मददगार है
वह कहती हैं, "किशमिश की उपस्थिति के कारण किशमिश एंटीकार्सिनोजेनिक लाभ प्रदान करती है। कैटेचिन में पॉलीफेनोल यौगिक होते हैं, जो एंटीऑक्सिडेंट यौगिक होते हैं।"
4.यह आपके बीपी को नियंत्रण में रखती है
तनाव और हमारे खाने की आदतों से हमारे रक्तचाप में उतार-चढ़ाव हो सकता है। यह अच्छा संकेत नहीं है। लेकिन भगवान का शुक्र है कि किशमिश इसे कंट्रोल कर सकती है।
हाइ ब्लड प्रेसर ही नही लो ब्लड प्रेसर भी हो सकता है आपके सेहत के लिए हानी कारक। चित्र: शटरस्टॉककिशमिश आपकी बीपी को भी नियंत्रित करता है। चित्र: शटरस्टॉक
किशमिश में उच्च पोटेशियम सामग्री होती है, और पोटेशियम एक प्राकृतिक वासोडिलेटर है जो हमारी रक्त वाहिकाओं को आराम देता है, रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और इस प्रकार उच्च रक्तचाप से राहत देता है।
इसके अलावा, किशमिश में आहार फाइबर रक्त वाहिकाओं की कठोरता को कम करता है, जिससे रक्तचाप में सुधार होता है। यह बदले में उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करता है।
5.किशमिश इम्यूनिटी भी बढ़ाती है
कोविड -19 के लिए धन्यवाद, जिसने सभी को अपनी इम्?युनिटी पर ध्?यान देना सिखाया। जब किशमिश की बात आती है, तो उसमें विटामिन और खनिजों के साथ-साथ अन्य यौगिकों, जैसे एंटीऑक्सिडेंट और पॉलीफेनोल्स जैसे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
ये सभी हमारे सिस्टम में मुक्त कणों से लडऩे में मदद करते हैं, उन्हें स्थिर करते हैं और हमारी कोशिकाओं को सफेद रक्त कोशिकाओं सहित ऑक्सीडेटिव क्षति से रोकते हैं। ये सब मिलकर हमारी इम्?युनिटी को बढ़ाते हैं।
सुश्री शेख बताती हैं,"इनमें जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो विभिन्न संक्रमणों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।"
6.गठिया जैसे एंटी इंफ्लामेटरी विकारों को रोकने में मदद करता है
किशमिश गठिया और गाउट जैसी इंफ्लामेटरी समस्याओं के कारण दर्द से राहत प्रदान करने में सहायक होती है। इसका कारण एंटीऑक्सिडेंट और पॉलीफेनोल की उपस्थिति है।
वह कहती हैं, "विटामिन सी और पॉलीफेनोल जैसे एंटीऑक्सिडेंट प्रकृति में एंटी इंफ्लामेटरी हैं, जो गठिया और गठिया से जुड़े दर्द और सूजन से राहत देती हैं।"
7.यह आपको बेहतर नींद देने में भी है मददगार
कई कारणों से शांतिपूर्ण नींद की कमी आपके मानसिक के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी खराब कर सकती है। आपकी नींद संबंधी समस्?याओं को हल करने के लिए किशमिश से बेहतर क्?या होगा?
"आयरन जैसे आवश्यक पोषक तत्व की मौजूदगी के कारण अनिद्रा का इलाज करने के लिए किशमिश को काफी फायदेमंद माना गया है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, लोहा एक महत्वपूर्ण खनिज है जो न केवल हीमोग्लोबिन के उत्पादन को बढ़ाता है, बल्कि चयापचय में सुधार करता है, ऑक्सीजन वहन करता है, प्रतिरक्षा को मजबूत करता है और बेहतर नींद सुनिश्चित करता है।"
अंत मे कुछ महत्वपूर्ण
हालांकि इस बात पर ज्यादा शोध नहीं किया गया है कि किशमिश तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर कैसे मदद करता है, इसके कुछ सकारात्मक निष्कर्ष निकले हैं। यह नींद को प्रेरित करने, आपके शरीर को आराम देने और आपको शांत रखने के लिए माना जाता है।
"इसके अलावा, अगर आपको मीठे की क्रेविंग बहुत ज्?यादा है, तो किशमिश चॉकलेट और कैंडी से बेहतर ऑप्?शन है। इसके मीठे स्वाद के कारण।"
तो, अब आप जानते हैं कि किशमिश आपके लिए इतनी अच्?छी क्?यों है!

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