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लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जियोवानी कैरिली और जियैमपिएरो नोबिली इटली के सुदूर नॉर्तोशे कस्बे के दो मात्र बाशिंदे हैं। बावजूद इसके वे कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी सभी एहतियाती उपायों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। एक-दूसरे से मिलते समय दोनों न सिर्फ मास्क पहनना सुनिश्चित करते हैं, बल्कि आपस में छह फीट का फासला बनाए रखना भी नहीं भूलते।
नॉर्तोशे पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पेरुगिया प्रांत की नरीना घाटी का बेहद खूबसूरत कस्बा है। हालांकि, समुद्र तल से 900 मीटर की ऊंचाई के चलते यहां पहुंचना उतना आसान नहीं। बावजूद इसके 82 वर्षीय कैरिली और 74 साल के नोबिली खुद को सार्स-कोव-2 वायरस के प्रकोप से सुरक्षित नहीं महसूस करते।
बकौल कैरिली, ‘कोविड-19 का नाम सुनते ही मेरी रूह कांप उठती है। मैं अगर संक्रमित हो गया तो कौन मेरा ख्याल रखेगा। मेरी उम्र हो चली है, फिर भी मैं जिंदा रहना चाहता हूं, अपनी भेड़ों, कुत्ते, सेब के बगानों, मधुमक्खी के छत्तों, वाइनयार्ड और मशरूम के खेतों के लिए।’
कैरिली कहते हैं, ‘नॉर्तोशे में न तो कोई होटल-रेस्तरां या बार है, न ही अस्पताल,क्लीनिक, दवा की दुकान या मिनी बाजार। हर छोटे-बड़े सामान की खरीदारी के लिए हमें शहर जाना पड़ता है। वहां अगर हम किसी संक्रमित के संपर्क में आ गए हों तो नहीं चाहते कि दूसरा भी वायरस का शिकार हो। मास्क लगाने और सामाजिक दूरी पर अमल करने की एक बड़ी वजह यह भी है।’
नियमों का पालन करना जरूरी
-इटली में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना और एक मीटर की सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने पर 470 से 1170 डॉलर (करीब 32900 से 81900 रुपये) का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। नोबिली के मुताबिक वह और कैरिनी सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से मास्क नहीं पहनते या फिर सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल नहीं करते। दोनों का मानना है कि नियम-कायदे सबके लिए समान होते हैं। इन्हें तोड़ना अपने उसूलों का अपमान करने जैसा है।
आखिरी सांस तक नॉर्तोशे में रहेंगे
-कैरिली की पैदाइश नॉर्तोशे की ही है, पर पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में उनका ज्यादातर वक्त राजधानी रोम में गुजरा। रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी बिताने के लिए वह पुश्तैनी गांव लौट गए। उनके साले के बहनोई नोबिली ने भी नॉर्तोशे में जा बसने का मन बना लिया। कैरिली कहते हैं, नोबिली के अलावा उनकी पांच भेड़ें और एक कुत्ता ही नॉर्तोशे में रहते हैं। बावजूद इसके दोनों को कभी अकेलापन महसूस नहीं होता। बाजार से लंबी दूरी और साधन का अभाव भी उन्हें शहर में बसने के लिए नहीं उकसाता।
वास्तु टिप्स / शौर्यपथ /हर इंसान सुख-सुविधाओं भरा जीवन गुजारना चाहता है। अपनी ख्वाहिशों के साथ जरुरतों को पूरा करने के लिए भी इंसान को पैसों की जरुरत होती है। कभी-कभी ऐसा होता है हम अपने परिवार की जरुरतों को पूरा करने के दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन अंत में हमारे हाथ खाली ही रहते हैं। कई बार घर में धन के टिकने का न कारण वास्तु दोष भी होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, वास्तु दोष को कुछ उपायों और टोटकों से दूर किया जा सकता है। जानिए अगर आपके घर का भी वास्तु खराब है तो उसे कैसे कर सकते हैं दूर, ताकि घर में टिकने लगे धन-
1. वास्तु शास्त्र के अनुसार, आप जहां पैसे रखते हैं उस अलमारी या तिजोरी का मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए। कहा जाता है कि इससे धन में वृद्धि के साथ खर्चा भी कम होता है।
2. वास्तु के अनुसार, घर के पानी का निकास दक्षिण और पश्चिम दिशा से ही होना चाहिए। सही दिशा से जल निकासी का रास्ता होने से आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।
3. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में अक्सर टोटियों या नल से पानी गिरते रहना अशुभ होता है। इसके धन पानी की तरह बहता है और बेवजह के खर्च भी बढ़ता है।
4. कहा जाता है कि घर में टूटे शीशे रखना अशुभ होता है। ऐसा करने से घर में नेगेटिव एनर्जी का वास होता है और आर्थिक नुकसान भी होता है।
ये 3 चीजें बदल सकती हैं घर का माहौल-
1. माना जाता है कि घर में स्वास्तिक का निशान होना जरुरी होता है। कहते हैं कि जिस घर में स्वास्तिक चिन्ह होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
2. कहते हैं कि घर में कलश रखना बेहद शुभ होता है। इससे घर में खुशियां आती हैं और आर्थिक लाभ भी होता है।
3. कहते हैं कि घर में ओम का चिन्ह बनाने से वास्तु दोष दूर होता है और घर के सदस्यों के बीच प्यार बढ़ता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / पावन नवरात्र में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत सौम्य है। मां का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। मां के मस्तक में घंटे का आकार का अर्द्धचंद्र है, इसलिए मां को चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने से हर तरफ सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो जाता है।
मां को लाल रंग के फूल अर्पित करें। मां की उपासना करते समय मंदिर की घंटी अवश्य बजाएं। घंटे की ध्वनि से मां अपने भक्तों पर हमेशा अपनी कृपा बरसाती हैं। मां को मखाने की खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से अहंकार नष्ट हो जाता है। मां की आराधना से घर-परिवार में शांति आती है। तृतीय नवरात्र पर लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां को गाय का दुग्ध अर्पित करने से दुखों से मुक्ति मिलती है। माता चंद्रघंटा को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से सभी कष्टों का निवारण होता है। मां सौभाग्य, शांति और वैभव प्रदान करती हैं। मां का उपासक निर्भय हो जाता है। मां चंद्रघंटा के भक्त जहां भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी को हरा रंग बेहद प्रिय होता है। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी को हरे रंग का भोग अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही भक्त की मन की मुरादें भी पूरी होती हैं। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सिद्धी की प्राप्ति होती है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम पाने के लिए देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।
इनका पूजन मंत्र है-
दधाना करपाद्माभ्याम, अक्षमालाकमण्डलु।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
मां ब्रह्मचारिणी के पूजन में हरे वस्त्रों को धारण करें। हरा रंग आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है। हरा रंग प्रकृति, शांति और प्रगति का प्रतीक है। साथ ही साथ यह नई शुरुआत का भी प्रतीक है। सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करें। मां सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने
वाली बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। नारद जी के आदेशानुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने वर्षों तक कठिन तपस्या की। एक हजार वर्षों तक माता ने सिर्फ फल-फूल खाकर जावन यापन किया।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आज, अपनों को माता की भक्ति से भरें भेजें ये इमेज और स्रूस्
नवरात्रि का त्योहार 17 अक्टूबर, 2020 से शुरू हो चुका है। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के देवी ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार सालों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी। उनकी इस कठिन तपस्या के कारण ही उनका नाम तपचारिणी यानी ब्रह्मचारिणी पड़ गया। नवरात्रि के पर्व की लोग अपनों को माता की भक्ति से भरे मैसेज और इमेज से बधाई देते हैं। हम आपको बता रहे हैं ऐसे कुछ स्रूस्, इमेज और मैसेज जिनसे आप नवरात्रि के दूसरे दिन की दे सकते हैं बधाई-
1. जब जब याद किया तुझे ए मां
तूने आंचल में अपने आसरा दिया.
कलयुगी इस जहां में, एक तूने ही सहारा दिया.
शुभ नवरात्रि।
2. जब जब याद किया तुझे ए मां
तूने आंचल में अपने आसरा दिया.
कलयुगी इस जहां में, एक तूने ही सहारा दिया.
शुभ नवरात्रि।
3. मां अम्बे आपको
सुख समृद्धि वैभव ख्याति प्रदान करें.
जय माता दी.
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
4. लाल रंग की चुनरी से सजा मां का दरबार
हर्षित हुआ मन, पुलकित हुआ संसार
नन्हें-नन्हें कदमों से मां आए आपके द्वार
इस नवरात्रि यही हैं हमारी दुआ
जय माता दी.
हैप्पी नवरात्रि 2020
5. माता रानी वरदान ना देना हमें,
बस थोड़ा सा प्यार देना हमें,
तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा,
एक बस यही आशीर्वाद देना हमें
आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
शुभ नवरात्रि 2020
6. जब दु:ख बढ़ जाता हैं,
हल कहीं नहीं मिल पाता हैं,
तब वो मां के दरबार आता हैं,
चेहरे पर मुस्कान लेकर जाता हैं।
हैप्पी नवरात्रि 2020
आस्था / शौर्यपथ /और शक्ति का प्रतीक शारदीय नवरात्रि का उत्सव 17 अक्तूबर से शुरु हो चुका है। नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिन प्रसाद के रूप में मां को अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के हर दिन अलग रंग पहनकर मां की अराधना करने से भी व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के 9 दिनों में किस दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
पहले दिन-
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन मां के भक्तों को पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
दूसरा दिन-
नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को हरे रंगे के वस्त्र पहनने चाहिए।
तीसरा दिन-
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को भूरे रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
चौथा दिन-
नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को नारंगी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
पांचवा दिन-
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
छठा दिन-
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
सातवां दिन-
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को नीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
आठवां दिन-
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
नौवें दिन-
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन भक्तों को जामुनी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
शौर्यपथ / केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि समाचार पत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। ये कोरोना वायरस के प्रसार का स्रोत नहीं हैं। सोशल मीडिया पर संडे संवाद के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों के मौसम में कोरोना अनुकूल व्यवहार का पालन करें ताकि संक्रमण बढ़ने से रोका जा सके।
सुबह की चाय के साथ समाचार पत्र पढ़ने का अवसर नहीं मिलने के कारण आनंद की अनुभूति नहीं होने से संबंधित एक सवाल पर डॉ. हर्षवर्धन ने भरोसा दिलाया कि कोई ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, जो साबित कर सके कि समाचार पत्रों से कोरोना वायरस का प्रसार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाचार पत्र पढ़ना कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूरी तरह सुरक्षित है।
डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में केरल में कोरोना मामलों में उछाल को लेकर अपने विचार साझा किए। केरल ओणम त्योहार के दौरान हुई घोर लापरवाही की कीमत भुगत रहा है। जब राज्य में अनलॉक अवधि के दौरान गतिविधियों जैसे व्यापार और पर्यटन के लिए अंतरराज्यीय यात्रा को शुरू किया जा रहा था, तब राज्य के विभिन्न जिलों में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हुई।
केरल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई और दैनिक मामले दोगुना हो गए। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इससे उन सभी राज्यों को सबक लेना चाहिए, जो त्योहारों के मौसम के दिशा-निर्देश जारी करने में लापरवाह रहते हैं।
चीन के इस दावे पर कि पिछले वर्ष कई देशों में एक साथ कोरोना वायरस का फैलाव हुआ था, डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है, जिससे इस दावे की वैधता साबित हो सके। हालांकि, चीन के वुहान को विश्व में कोरोना के पहले मामले की रिपोर्ट करने के लिए अब भी माना जाता है।
एफडीआई स्वीकृत पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने की सलाह
बाजारों में चीन द्वारा निर्मित ऑक्सीमीटर की भरमार होने के एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि उपभोक्ताओं को बाजार से या ऑनलाइन विक्रेताओं से पल्स ऑक्सीमीटर खरीदते समय एफडीए/सीई स्वीकृत उत्पादों और उनके साथ आईएसओ/आईईसी विनिर्दिष्टताओं को देखना चाहिए।
यद्यपि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन स्तर में कमी कोविड-19 का लक्षण नहीं है, क्योंकि ऐसा कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी हो सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यों को दूसरे चरण का कोरोना पैकेज जारी कर दिया गया है। कुल 1352 करोड़ दिए गए हैं।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /जानलेवा कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन में इंसानी गतिविधियां कम होने का कुछ जीवों को फायदा भी मिला है। एक अध्ययन ने इस बात का खुलासा किया है कि इसी बदलाव के कारण पक्षियों के गाने का अंदाज में भी बदलाव आ गया है। महामारी ने इंसानों को घर में समेट कर रख दिया है। इसका दुनिया के कई शहरों में रहने वाले जीवों पर भी असर हुआ है।
कैल पॉली के शोधकर्ता जेनिफर फिलिप्स और नॉक्सविले में टेनेसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलिजाबेथ डेरीबेरी ने अपने शोध में यह खुलासा किया है। उन्होंने लॉकडाउन से पहले और बाद में सैन फ्रांसिस्को क्षेत्र सफेद गौरैया की ध्वनि और गीतों की तुलना की। उन्होंने पाया कि अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर की गलियां महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के चलते शुरुआती महीनों में खाली हो गई थीं।
इस वजह से शोर बहुत कम होने से वहां गौरैया ने भी बदलते हालात के अनुसार अपने गाना की आवाज धीमी कर दी। ज्यादातर पक्षी अब बहुत मधुर और बेहतर अंदाज में गीत गाने लगे हैं। जब शहर में शोर ज्यादा था तो उन्हें तेज आवाज में गाना पड़ता था लेकिन जब ट्रैफिक रुकने से ध्वनि प्रदूषण कम हुआ तो अब पक्षी धीमी आवाज में और पहले से मधुर गीत गा रहे हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके इस अध्ययन से यह बात साफ हो गई है कि मानवीय व्यवहार और गतिविधियां सीधे तौर पर वन्य जीवों को प्रभावित करती हैं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए कई चीजों का भोग लगाते हैं। आस्था और शक्ति के इस पर्व पर हर कोई मां को अपनी भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न कर लेना चाहता है। अगर इस नवरात्री आप भी माता के भोग के लिए कुछ अलग हटकर ट्राई करना चाहते हैं तो बना सकते हैं कच्चे केले का हलवा। यह बहुत ही टेस्टी रेसिपी है जो झटपट बनकर तैयार हो जाती है। तो आइए जानचे हैं कैसे बनता है कच्चे केले का हलवा।
केले का हलवा बनाने के लिए साम्रगी-
-3 कच्चे केले
-3-4 कप चीनी
-5 चम्मच घी
-1/5 कप दूध
-10-12 काजू
-10-12 बादाम
-25 किशमिश
-आधा चम्मच इलायची पाउडर
कच्चे केले का हलवा बनाने का तरीका-
कच्चे केले का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे केलों को उबालकर उन्हें पका लें। इसके बाद केलों के छिलके उतार कर अच्छे से मसल लें। अब कढ़ाई में 5 चम्मच देसी घी डालकर उसमें मसले हुए केले को डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। केले का रंग सुनहरा होने पर या घी केले से अलग होने लगे तब आप इसमें चीनी और दूध डालकर, दो उबाल लगा दें। जब उबाल आ जाए तब इसमें आप काजू , बादाम और किशमिश डाल लें। हलवे के गाढ़ा होने तक इसे पकाएं। इसके बाद आप इसमें इलायची पाउडर डालें। आपका केले का हलवा बनकर तैयार है। हलवे के ऊपर ड्राई फ्रूट्स डालकर गार्निश करके सर्व करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि को दौरान माता के भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए पूरे 9 दिनों तक उपवास रखते हैं। ऐसे में व्रत के दौरान सही डाइट फॉलो न करने से व्यक्ति को कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर आप भी व्रत के दौरान अपनी चटपटा खाने की क्रेविंग को दूर करने के लिए कोई पौष्टिक विकल्प ढूंढ रहे हैं तो ट्राई करें मखाने की चाट। यह टेस्टी चाट बनने में जितनी आसान है सेहत के लिए उससे भी ज्यादा फायदेमंद। तो आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी मखाने की चाट।
मखाना चाट बनाने के लिए सामग्री-
-3 कप मखाना
-2 चम्मच देसी घी
-1 चम्मच नींबू का रस
- लाल मिर्च पाउडर
-3 बड़े चम्मच मूंगफली
-1 टमाटर बारीक कटा हुआ
-2 चम्मच हरी चटनी
-1 चम्मच इमली की चटनी
-1 खीरा बारीक कटा हुआ
-1/2 सेब कटा हुआ
- सेंधा नमक स्वादानुसार।
मखाना चाट बनाने की विधि-
मखाना चाट बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में घी गर्म करके उसमें सेंधा नमक डालकर मखाने फ्राई करें। मखाने जब क्रिस्पी हो जाए तो इसे आंच से उतार लें।अब इस फ्राईड मखाने में रोस्टेड मूंगफली, कटे हुए टमाटर, हरी मिर्च डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें।
अब इस मिश्रण में हरी चटनी, लाल चटनी, कटे हुए खीरे, सेब डालकर अच्छे से मिला लें। आप चाहे तो इसमें अपना मनपसंद फल जैसे अनार के दाने और अंगूर भी डाल सकती हैं। लीजिए तैयार है आपकी स्वादिष्ट चटपटी मखाना चाट
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अखिल भारतीय स्तर पर चिकित्सा स्नातक में राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों के शानदार प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताई है। उन्होंने इस परीक्षा में सफल रहे विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। नीट परीक्षा में प्रयास आवासीय विद्यालयों के 166 विद्यार्थियों में सफलता प्राप्त की है। चिकित्सा स्नातक में राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) का परिणाम 16 अक्टूबर को जारी हुआ। आदिम जाति कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, विभाग के सचिव डी.डी.सिंह और संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
उल्लेखनीय है कि चिकित्सा स्नातक में राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) में 367 विद्यार्थी शामिल हुए, इनमें से 166 विद्यार्थी सफल हुए हैं। सफल विद्यार्थियों में सर्वाधिक 38 बालिकाएं प्रयास कन्या आवासीय विद्यालय रायपुर की हैं। इसके अलावा प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग के 33, प्रयास आवासीय विद्यालय बस्तर के 26, प्रयास आवासीय विद्यालय बिलासपुर के 24, प्रयास बालक आवासीय विद्यालय रायपुर के 19, प्रयास आवासीय विद्यालय अंबिकापुर के 17 और प्रयास आवासीय विद्यालय कांकेर के 9 विद्यार्थी परीक्षा में सफल हुए हैं।
इसके अतिरिक्त नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा से 34 विद्यार्थियों और जशपुर में संकल्प विद्यालय के 15 विद्यार्थियों ने नीट की परीक्षा क्वालीफाई की है।
भिलाई / शौर्यपथ / सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के बार एवं राॅड मिल में 17 अक्टूबर, 2020 को विभाग के कार्मिकांे को “कर्म शिरोमणि पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। बार एवं राॅड मिल में आयोजित इस कार्यक्रम में महाप्रबंधक प्रभारी श्री संजय शर्मा ने श्री सुमेघ मानकर, श्री एस एस मीणा, श्री धनराज साहू एवं श्री मान सिंग मीणा को कर्म शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित किया।
इस रचनात्मक एवं स्वस्थ परम्परा को आगे बढ़ाते हुए संजय शर्मा ने महाप्रबंधक कक्ष मंे अनुभाग प्रभारियों, कार्मिक अधिकारी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कार्मिकांे को उत्कृष्टता प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह और उनके जीवनसाथी के लिए प्रशंसा-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। प्रबंधन द्वारा प्रारंभ किया गया यह सम्मान कर्मियों को एक आत्मिक खुशी देता है यह भावना कर्मियों के अभिव्यक्ति से स्पष्ट झलक रही थी।
इस अवसर पर उपस्थित महाप्रबंधकगण मुकेश गुप्ता, आशीष एवं संजय कुमार शर्मा ने पुरस्कृत कार्मिकांे के योगदान एवं व्यक्तिगत गुणों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डाॅ जे एस बघेल, कार्मिक अधिकारी (मिल्स जोन-1) ने किया।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उसके सुनिश्चित क्रियांवयन के उद्देश्य से राज्य में पांचों संभाग में संभाग स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा मंडल का गठन किया गया है। इसका प्रावधान मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 73 (3) के अनुसार है ।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में गति लाने के उद्देश्य से राज्य में संभाग स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा मंडल का गठन किया गया है । इस समीक्षा मंडल का मुख्य कार्य मानसिक रोग से पीड़ित लोगों को गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करना है । इसके द्वारा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत दी जाने वाली सेवाओं की समीक्षा भी सुनिश्चित की जायेगी । यह समीक्षा मंडल मानसिक स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करने वाले केंद्रों का निरीक्षण करेगा और उनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देगा साथ ही मानव संसाधनों की समस्या का भी निराकरण करेगा । इसके अतिरिक्त सभी स्तरों पर उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य के उपचार की व्यवस्था भी देखेगा।
घरेलू हिंसा पीड़ितों, चिल्ड्रेन्स होम, वरिष्ठ नागरिक, डे-केयर शेल्टर होम्स के लिए मानसिक स्वास्थ्य उपचार की सुविधा प्रदान कराने में भी मदद करेगा जिससे । इसलिए यह कहा जा सकता है कि अब जरुरतमंद लोग अब मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित रोगों का उपचार आसानी से करा सकेंगे ।
रायपुर में संभाग स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा मंडल ज़िला न्यायधीश, अध्यक्ष होंगे,ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा मनोनित अधिकारी सदस्य होंगे, मंडल में डॉ.अविनाश शुक्ला,चिकित्सा अधिकारी,डॉ.सोनिया परियल, मनोचिकित्सक,डॉ. संजीव मेश्राम तथा ममता गिरी गोस्वामी और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ के सदस्य को सदस्य बनाया गया है।
वहीं दुर्ग संभाग में संभाग स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा मंडल जिला न्यायधीश अध्यक्ष होंगे, डिप्टी कलेक्टर,, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक जिला दुर्ग, डॉ. आकांक्षा गुप्ता, मनोचिकित्सक, डॉ प्रमोद गुप्ता,निजी रोग विशेषज्ञ, मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ के सदस्य इसमें मंडल मे सदस्य होंगे ।
बिलासपुर संभाग के समीक्षा मंडल में जिला न्यायधीश, अध्यक्ष होंगे, अपर कलेक्टर, जिला बिलासपुर डॉ.सतीश श्रीवास्तव, मनोरोग विशेषज्ञ,डॉ.प्रदीप सिहारे, शिशु रोग विशेषज्ञ, एस.पी चतुर्वेदी तथा प्रमोद वर्मा, मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ के सदस्य इस समिति में सदस्य होंगे ।
बस्तर संभाग के संभाग स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा मंडल में जिला न्यायाधीश, अध्यक्ष होंगे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी,बस्तर डॉ.वत्सला मरियम,मनोचिकित्सक, डॉ.ऋषभ साव, मेडिकल प्रेक्टिशनर और अर्शिल शिक्षण एवं प्रशिक्षण वेलफेयर सोसायटी तथा आशीर्वाद मेंटल रिहैबिलिटेशन सेंटर जिला बस्तर और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ के सदस्य इस समीक्षा मंडल में सदस्य होंगे ।
सरगुजा संभाग की संभाग स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा मंडल में जिला न्यायधीश अध्यक्ष होंगे वही मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला सरगुजा डॉ. पीके सिन्हा, चर्म रोग विशेषज्ञ, डॉ. पी.संदीप मनोचिकित्सक, श्रीमती नीतू शर्मा एवं अन्नि लकड़ा, होली क्रॉस आशा निकुंज हैंडीक्राफ्ट सेंटर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले एनजीओ के सदस्य समीक्षा मंडल में सदस्य होंगे ।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / क्या आप हर रात कुछ न कुछ सोचते रहते हैं और कई तरह के ख्याल आपकी नींद उड़ा देते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो आप मेडिटेशन के साथ अखरोट खाना शुरू कर दीजिए, इससे आपकी यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। आज हम आपको खाली पेट भिगाए हुए अखरोट खाने के फायदे बता रहे हैं।
सूखे अखरोट की बजाय खाएं भीगा हुआ अखरोट
अखरोट को कच्चा खाने की बजाए अगर भिगोकर खाया जाए, तो इसके फायदे कई गुणा बढ़ जाते हैं। इसके लिए रात में 2 अखरोट को भिगोकर रख दें और सुबह के समय खाली पेट इसे खा लें। यकीन मानिए भीगे हुए बादाम खाना जितना फायदेमंद है उतना ही फायदेमंद भीगे हुए अखरोट खाना भी है। भीगा हुआ अखरोट कई बीमारियों से निजात दिलाने में मदद करता है।
डायबिटीज का खतरा करता है कम
ब्लड शुगर और डायबिटीज से बचना चाहते हैं, तो भीगे हुए अखरोट का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। बहुत सी स्टडीज में यह बात सामने आयी है कि जो लोग रोजाना 2 से 3 चम्मच अखरोट का सेवन करते हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो जाता है। अखरोट ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है जिससे डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है।
पाचन शक्ति होती है बेहतर
अखरोट फाइबर से भरपूर होता है, जो आपकी पाचन प्रणाली को दुरुस्त रखता है। पेट सही रखने और कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त चीजें खानी जरूरी है। ऐसे में अगर आप रोजाना अखरोट का सेवन करते हैं, तो आपका पेट भी सही रहेगा और कब्ज भी नहीं होगा। भीगे हुए अखरोट को पचाना भी आसान हो जाता है।
हड्डियों की मजबूती के लिए खाएं अखरोट
अखरोट में ऐसे कई घटक और प्रॉपर्टीज पाए जाते हैं जो आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं। अखरोट में अल्फा-लिनोलेनिक ऐसिड पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। इसके अलावा, अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी ऐसिड सूजन को भी दूर करता है।
तनाव को दूर करने में कारगर
अखरोट खाने से कई मायनों में आपका तनाव और स्ट्रेस कम होता है और आपको अच्छी नींद भी आती है। अखरोट में मेलाटोनिन होता है, जो बेहतर नींद लाने में मदद करता है। वहीं, ओमेगा-3 फैटी ऐसिड ब्लड प्रेशर को संतुलित कर तनाव से राहत दिलाता है। भीगे अखरोट खाने से आपका मूड भी अच्छा होता है और फिर ऑटोमैटिकली आपका स्ट्रेस कम हो जाता है।
वेट लॉस करके आपको फिट रखता है अखरोट
अखरोट वजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। ये बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और आपकी बॉडी से एक्स्ट्राभ फैट कम करने में हेल्प करता है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन व कैलरी होती है, जो वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है। शोध में भी यह बात साबित हो चुकी है कि अखरोट का सेवन न सिर्फ वजन कम करता है, बल्कि उसे कंट्रोल में रखने में भी मदद करता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि में व्रत रखने के दौरान कई बार ऐसा होता है कि शरीर में कमजोरी हो जाती है जिसकी वजह से कभी-कभी चक्कर भी आने लगते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि अपने शरीर का भी ध्यान रखा जाए। आज हम आपको व्रत की ऐसी ही हेल्दी रेसिपी बता रहे हैं, जिसे व्रत के दौरान खाने से आपको कमजोरी और ज्यादा भूख भी नहीं लगेगी। रोजाना एक लड्डू के सेवन करने से आपकी इम्युनिटी भी बढ़ेगी।
सिंघाड़े के आटे के फायदे
सिंघाड़े में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी व सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स, रायबोफ्लेबिन जैसे तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि सिंघाड़े में भैंस के दूध की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक खनिज लवण और क्षार तत्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने तो अमृत तुल्य बताते हुए इसे ताकतवर और पौष्टिक तत्वों का खजाना बताया है। इस फल में कई औषधीय गुण हैं, जिनसे शुगर, अल्सर, हृदय रोग, गठिया जैसे रोगों से बचाव हो सकता है। बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह काफी गुणकारी है।
सामग्री :
सिंघाड़े का आटा
गुड़
सोंठ पाउडर
देसी घी
काजू-बादाम
विधि :
सबसे पहले सिंघाड़े के आटे को छान लीजिए। अगर सिंघाड़े का आटा थोड़ा मोटा रहेगा तो लड्डू सोंधे बनेंगे।
गुड़ को अच्छी तरह से फोड़ लीजिए। गुड़ में एक भी गांठ नहीं रहनी चाहिए।
कटे हुए मेवे को तवे पर हल्का सा भून लीजिए।
कड़ाही में करीब 150 ग्राम घी गर्म कर लीजिए। आपका करीब 100 ग्राम घी बचा रहेगा, इसका बाद में इस्तेमाल करेंगे।
गैस की आंच मीडियम करके सिंघाड़े के आटे को अच्छी तरह से भून लीजिए। जब आटे से सोंधी खुशबू आने लगे और ये गुलाबी हो जाए तो समझिए की ये भून गया है।अब पिटे हुए गुड़ के ऊपर गरम-गरम सिंघाड़े के आटे को इस तरह से डालिए कि गुड़ पूरी तरह से ढक जाए। आटे की गर्मी से गुड़ नरम हो जाएगा और सिंघाड़े का लड्डू बनाने में आसानी होगी।आटे के ऊपर अब सोंठ, घी और मेवे डालकर चम्मच की मदद से अच्छी तरह मिला लीजिए। ध्यान रहे कि मिश्रण ठंडा होने से पहले ही आप इसे मिला लें।
जब मिश्रण इतना गरम रह जाए कि आप इसे हाथ से छू सकें, तब इसे एक बार हाथ से भी अच्छी तरह मिक्स कर लीजिए।
अब आपको फटाफट लड्डू बनाना है क्योंकि अगर मिश्रण ठंडा हो गया तो लड्डू बनाना मुश्किल हो जाएगा।
दोनों हाथ से लड्डू बनाने की कोशिश करें इससे ये मिश्रण के गर्म रहते ही
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
