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रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन के सहयोग एवं प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों से भी अब विद्यार्थी अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। सरगुजा जिले के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली कुमारी प्रिया पैकरा ने जो प्रयास आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर के शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन के सहयोग से नीट 2020 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर डॉक्टर बनने का मार्ग प्रशस्त की है। प्रिया पैकरा ने प्रयास आवासीय विद्यालय से नीट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग में पहला तथा सभी वर्गों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रिया पैकरा ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, प्रयास विद्यालय के शिक्षको के मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन के सहयोग को दिया हैं।
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो निवासी प्रिया पैकरा शुरू से ही मेधावी रही है। प्रिया पैकरा ने बताया कि पिता राकेश पैकरा कृषक है तथा कृषि एवं मजदूरी से परिवार का भरण पोषण करते है और माता श्रीमती प्रमिला गृहणी है। तीन बहनों में प्रिया सबसे बड़ी है। उससे छोटी कक्षा 11वी मल्टी पर्पज अम्बिकापुर तथा सबसे छोटी बहन कक्षा 9वी में अध्ययनरत है। प्रिया पैकरा ने बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर में अध्ययन कर इस वर्ष कक्षा 12वी की परीक्षा 89.9 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण की वही मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में 316 अंक के साथ क्वालीफाइ किया। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालय बंद हो जाने से कोचिंग में असुविधा हुई, किंतु प्रयास के शिक्षको के द्वारा लगातार ऑनलाईन माध्यम से मार्गदर्शन देते रहे तथा समस्याओं का समाधान भी किए।
कलेक्टर संजीव कुमार झा ने सुश्री प्रिया पैकरा के मेधावी होने और डॉक्टर बनने की प्रबल इच्छा को दृष्टिगत रखते हुए नीट की तैयारी में मदद हो सके इसके लिए आदिवासी विभाग के अधिकारियों को लैपटॉप देने के निर्देश दिए थे। कुछ दिनों बाद प्रभारी मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया का अम्बिकापुर आगमन होने पर उनके हाथों से प्रिया को लैपटॉप प्रदान किया गया था।
आज की कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में मेडिकल और इंजीनियरिंग के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए महंगे कोचिंग का सहारा आवश्यक हो गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के कम आय वाले परिवार के विद्यार्थियों का इन परीक्षाओं में चयन मुश्किल है। लेकिन राज्य शासन द्वारा संचालित प्रयास आवासीय विद्यालय के निःशुल्क भोजन, अध्ययन और कोचिंग की सुविधा से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के सपने पूरे हो रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ’निष्ठा’ ऑनलाइन प्रशिक्षण का आयोजन 26 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। प्रशिक्षण में कक्षा पहली से 8वीं तक के शिक्षक और शाला प्रमुख शामिल होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने निष्ठा ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन के संबंध में समस्त कलेक्टरों को निर्देश जारी किए है। जिलों में 26 अक्टूबर से पूर्व निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कक्षा पहली से 8वीं तक के सभी शिक्षकों का ऑनलाइन पंजीयन दीक्षा एप में अनिवार्य रूप से पूर्ण कराना सुनिश्चित करें।
जिला कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग भारत सरकार की गाइडलाइन अनुसार कक्षा पहली से 8वीं तक के समस्त शिक्षकों और शाला प्रमुखों को एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित 18 माड्यूल पर निष्ठा ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। कक्षा पहली से 8वीं तक के छत्तीसगढ़ राज्य के एक लाख 34 हजार 599 शिक्षकों और शाला प्रमुखों का क्षमता संवर्धन और नेतृत्व करने के गुणों का विकास किया जाना है।
निष्ठा अंतर्गत शिक्षकों का ऑनलाइन पंजीयन दीक्षा पोर्टल पर प्रारंभ हुआ है। प्रत्येक 15 दिवस में 3 मॉड्यूल पर प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इस प्रकार की सभी 18 मॉड्यूल के प्रशिक्षणों को तीन महीने में पूर्ण किया जाएगा। इसके बाद भी संबंधित शिक्षकों को निष्ठा अंतर्गत प्रशिक्षण पूर्णता का प्रमाण-पत्र के सफलतापूर्वक पूर्ण करने के उपरांत दीक्षा पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाएगा। प्रत्येक मॉड्यूल के लिए भी पूर्णता प्रमाण पत्र दीक्षा पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री बघेल ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है। दशहरा पर्व हमें सत्य के मार्ग पर चलने की हिम्मत और साहस देता है, हमें विश्वास दिलाता है कि सत्य के मार्ग में कितनी भी परेशानियां और कठिनाईयां क्यों न हो, विजय सदा सत्य की होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि आज पूरे विश्व के समक्ष कोरोना संकट की चुनौती है, इस संकट पर विजय पाने के लिए हमें अपने दैनिक जीवन में कोरोना से बचाव की गाइड लाइन का स्वयं पालन करने और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करने की जरूरत है। मास्क लगाने, फिजिकल डिस्टेंटिग और साबुन या सेनेटाइजर से बार-बार हाथ धोने जैसे उपायों से ही कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहा जा सकता है और इस महामारी पर विजय प्राप्त की जा सकेगी।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी में इस बार "बालक-बालिकाओं की पढ़ाई, खेलकूद, भविष्य आदि " विषय पर प्रदेशवासियों से बात करेंगे।
इस संबंध में 16 वर्ष से कम आयु के बालक-बालिकाएं आकाशवाणी रायपुर के दूरभाष नंबर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर 28, 29 एवं 30 अक्तूबर को अपरान्ह 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकाॅर्ड करा सकते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 12वीं कड़ी का प्रसारण 8 नवंबर को होगा। लोकवाणी का प्रसारण छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केंद्रों,एफएम रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों से सुबह 10.30 से 11 बजे तक होगा I
धर्म संसार /शौर्यपथ / या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे अपनी कृपा का पात्र बनाओ।
मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है।
इनके नाम इस प्रकार हैं -
1. अणिमा 2. लघिमा 3. प्राप्ति 4. प्राकाम्य 5. महिमा 6. ईशित्व,वाशित्व 7. सर्वकामावसायिता 8. सर्वज्ञत्व 9. दूरश्रवण 10. परकायप्रवेशन 11. वाक्सिद्धि 12. कल्पवृक्षत्व 13. सृष्टि 14. संहारकरणसामर्थ्य 15. अमरत्व 16. सर्वन्यायकत्व 17. भावना 18. सिद्धि
मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में 'अर्द्धनारीश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुए।
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करें। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।
नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं। इन सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।
सिद्धिदात्री मां के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे। वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। मां भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती।
मां के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करनी चाहिए। मां भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है।
इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। आज के युग में इतना कठिन तप तो कोई नहीं कर सकता लेकिन अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर कुछ तो मां की कृपा का पात्र बनता ही है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करना चाहिए।
नवरात्रि के अंतिम दिन पूजी जाती हैं मां सिद्धिदात्री, शिव भी करते हैं उपासना
नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।
इनके चारों हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल रहता है। सिर पर ऊंचा सा मुकूट और चेहरे पर मंद मुस्कान ही मां सिद्धिदात्री की पहचान है। इस दिन भी कई भक्त अपने घरों में कुंजिकाओं को बिठाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं।
कैसे करें सिद्धिदात्री की पूजा
घी का दीपक जलाने के साथ-साथ मां सिद्धिदात्री को कमल का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा जो भी फल या भोजन मां को अर्पित करें वो लाल वस्त्र में लपेट कर दें।
निर्धनों को भोजन कराने के बाद ही खुद खाएं।
कौन हैं मां सिद्धिदात्री?
भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही 8 सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन्हीं माता की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना। हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से अष्ट सिद्धि और नव निधि, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।
शौर्यपथ / कई लोगों को हद से ज्यादा पसीना आता है। अगर पसीने को साफ नहीं किया गया और ये लंबे समय तक शरीर पर रहा तो इससे दुर्गंध तो आती ही है, साथ ही ये कीटाणुओं को जन्म देता है। ऐसी स्थिती से बचने के लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। आइए, हम आपको बताते हैं
1. शरीर के जिन हिस्सों से आपको ज्यादा दुर्गंध आने की समस्या हो, ऐसे में घर से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनटों तक उन जगहों पर बर्फ लगाकर रखें। इससे ज्यादा पसीना नहीं आएगा।
2. यदि आपके पैरों के तलवों में ज्यादा पसीना आता है, तो एक टब में पानी भरें और उसमें दो चम्मच फिटकरी पाउडर डाल दें। अब इस टब में दो से पांच मिनट अपने पैरों को डुबोकर बैठें।
3. जो कपड़े आप पूरा दिन पहनकर बाहर गए हों वे कपड़े धोने के बाद ही अलमारी में रखें।
4. ज्यादा समय पहने और बिना धुले कपड़े अलमारी में रखने से उनमें दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं और यह दुर्गंध दूसरे साफ कपड़ों में भी पहुंच जाती है और आप समझ ही नहीं पाते हैं कि साफ-धुले कपड़ों से अजीब सी गंध क्यों आ रही है?
5. इस मौसम में सिंथेटिक कपड़े न पहनें, बल्कि सूती कपड़े ही पहनें। ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर से चिपके हुए न हों, क्योंकि तंग कपड़ों में ज्यादा पसीना आता है और इससे हवा पास नहीं हो पाती, जिससे दुर्गंध आती है।
6. शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, जरुरत पड़े तो दिन में दो बार भी नहा लें।
7. नहाने के लिए नीम या एंटी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।
8. तली-भुनी व मसालायुक्त चीजें इस मौसम में खाने से बचें।
9. बॉथ टब में नहाने से एक घंटा पहले संतरे का छिलका डालकर छोड़ दें।
इस पानी से नहाने से शरीर में ताजगी महसूस होगी।
10. शरीर को रगड़कर ताजे पानी से नहाने से शरीर से गंदगी का सफाया हो जाता है। और शरीर से दुर्गेंध नहीं आती है।
शौर्यपथ / गूगल ने एंड्रायड के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है जो बधिर उपयोगकर्ताओं को कई परिस्थितियों में अलर्ट भेजेगा। बधिर लोग अलार्म या चेतावनी वाली आवाजें न सुन पाने के कारण हमेशा मुश्किल में पड़ जाते हैं। ऐसे में गूगल ने उनके लिए एक ऐसा फीचर लॉन्च किया है जो बुरी परिस्थितियों के दौरान बजने वाले अलार्म या आवाजों की जानकारी बधिर उपयोगकर्ताओं को फोन को वाइब्रेट कर, फ्लैशलाइट जलाकर या पुश नोटिफिकेशन भेजकर देगा। यह फीचर बच्चे के रोने, फायर अलार्म के बजने, कुत्ते भौंकने जैसे दस आवाजों की पहचान करने में सक्षम है।
हेडफोन लगाए लोगों को भी मिलेगी चेतावनी
गूगल ने कहा कि साउंड नोटिफिकेशन को दुनियाभर में मौजूद 46.6 करोड़ बधिर लोगों के लिए बनाया गया है। लेकिन, यह फीचर उन लोगों की भी मदद कर सकता है जो हेडफोन लगाए बैठे हो या किसी कारणवश उनका ध्यान भटका हुआ हो। कई बार हेडफोन लगाए रहने के कारण भी लोग कई आवाजें नहीं सुन पाते और कई हादसे हो जाते हैं।
दस तरह के आवाजों की करेगा पहचान
मशीन लर्निंग तकनीक से विकसित किए गए साउंड नोटिफिकेशन के फीचर के लिए स्मार्टफोन के माइक्रोफोन का उपयोग किया जाता है। यह दस तरह की आवाजों की पहचान करने में सक्षम है। इसमें बच्चों का रोना, चिल्लाना, नल से पानी टपकने, स्मोक और फायर अलार्म, साइरन, उपकरणों की बीप, दरवाजे की डोरबेल और लैंडलाइन फोन की घंटी शामिल है।
नाम पुकारे जाने की जानकारी देगा
पिछले साल गूगल ने दो नए एसेसबिलिटी विकल्प प्रदान किए थे। साउंड एंपलीफायर लाइव ट्रांसक्राइब कही हुई बात को टेक्स्ट में रियल टाइम में बदल देता है और लोगों का नाम पुकारे जाने पर भी उन्हें अलर्ट भेजता है। एंड्रायड फोन के अलावा यह गूगल वीयर ओएस स्मार्टवॉच में भी काम करता है। किसी महत्वपूर्ण आवाज की पहचान करने पर यह वाइब्रेट करता है।
बधिर उपयोगकर्ताओं के लिए अहम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोडक्ट मैनेजर सागर सावला और एसेसबिलिटी प्रोडक्ट मैनेजर शार्लेन युआन ने कहा, कम सुन पाने वाले और बधिर लोग हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि सोये रहने के दौरान उन्हें किसी आपात परिस्थिति के बारे में पता नहीं चल पाता इसलिए हमने यह फीचर बनाया है जो सोते वक्त भी ऐसे लोगों को अलर्ट भेजेगा।
उपयोगकर्ता टाइमलाइन व्यू को स्क्रॉल कर पिछले कुछ घंटों में भेजे गए नोटिफिकेशन को देख पाएंगे और जान पाएंगे कि किस समय क्या हुआ था। इसके लिए एंड्रायड के एसेसिबिलिटी मेन्यू में जाकर साउंड नोटिफिकेशन को सक्रिय करना पड़ेगा। इसे सीधे गूगल प्ले से डाउनलोड भी किया जा सकता है।
बधिर उपयोगकर्ता थे नाराज
गूगल का यह फीचर एप्पल के साउंड डिटेक्शन फीचर जैसा ही है। पिछले महीने गूगल ने यूट्यूब के वीबडियो से क्राउडसोर्स कैप्शन के विकल्प को हटा दिया था। इसके खिलाफ पांच लाख बधिर उपयोगकर्ताओं ने चेंज डॉट ओआरजी पीटिशन पर हस्ताक्षर किया था।
बधिर उपयोगकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए ही गूगल ने यह नया साउंड नोटिफिकेशन लॉन्च किया है। बधिर समुदाय ने गूगल के इस कदम की सराहना की है और कहा है कि इससे उनकी जिंदगी आसान होगी।
सेहत / शौर्यपथ / मौसम बदलने के साथ ही मच्छरों का आतंक भी शुरू हो जाता है। ऐसे में मच्छर भगाने के लिए कितने ही उपाय क्यों न कर लें लेकिन मच्छर काट ही लेते हैं। नींद खराब करने वाले मच्छर कभी-कभी इतने खतरनाक होते हैं कि उनके काटने से एलर्जी तक हो जाती है। खासतौर पर मच्छरों के काटने से कई बार लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं। चेहरे पर ये लाल रंग के निशान और भी बेकार लगते हैं। कभी-कभी इन चकत्तों से छुटकारा पाने में 6-7 दिनों से ज्यादा का वक्त लग जाता है। ऐसे में अगर आपके चेहरे पर मच्छरों के काटने के बाद अगर लाल रंग के निशान पड़ जाएं, तो आप कुछ घरेलू उपायों का इस्तेमाल करके इनसे छुटकारा पा सकते हैं।
सेब का सिरका
सेब का सिरका स्किन और हेयर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही वजन घटाने के लिए भी सेब का सिरका पानी में मिलाकर पिया जाता है। आपके चेहरे पर अगर मच्छर काटने से निशान पड़ जाएं, तो आप तीन चम्मच पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर लगा लें। निशान गायब हो जाएंगे।
नींबू का छिलका
अगर मच्छर के काटने से चकत्ते बन गए हैं तो उस जगह पर नींबू का छिलका लगाएं। इससे आपके चकत्ते के निशान गायब हो जाएंगे। खुजली भी नहीं होगी।
प्याज का टुकड़ा
मच्छर के काटने से बनने वाले चकत्ते के निशान पर प्याज का टुकड़ा लगाएं। इससे निशान दूर हो जाएंगे और खुजली भी खत्म हो जाएंगी।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडे में पानी मिलाकर पहले से ही घोल बना लें। जब भी मच्छर काटें तो काटे वाले स्थान पर लगा लें। इससे चकत्ते के निशान दूर हो जाएंगे और खुजली भी कम हो जाएंगी।
एलोवेरा जेल
आपकी स्किन पर मच्छर काटने की परेशानी को दूर करेगा। साथ ही स्किन पर ठंडकता भी प्रदान करेगा। अगर मच्छर काटने के स्थान से खून निकल रहा है, तो यह उसे भी ठीक कर देगा और स्किन पर जलन और खुजली की परेशानी को दूर करेगा।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना महामारी ने दुनियाभर में लोगों की नींद और चैन छीन लिया है। संक्रमण की वजह से शुरुआत में लगे लॉकडाउन के चलते लोगों की जीवनशैली में अनचाहे बदलाव आए। एक नए शोध के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान लोगों के खान-पान में आए बदलाव के चलते मोटापे से जूझ रहे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते नींद भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है। जर्नल ओबेसिटी में प्रकाशित इस अध्ययन ने महामारी के व्यापक प्रतिबंधों के तहत लोगों के स्वास्थ्य व्यवहारों में होने वाले अनजाने परिवर्तनों का मूल्यांकन किया। अमेरिका में लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी (एलएसयू) के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया। उनके अनुसार लॉकडाउन के दौरान लोगों का वजन काफी बढ़ा। परिणामस्वरूप स्वास्थ्य संबंधी तमाम समस्याएं पैदा हो गईं।
लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से अध्ययन की सह-लेखक लीन रेडमैन ने कहा, लॉकडाउन के दौरान लोगों ने पौष्टिक भोजन का सेवन ज्यादा किया और घर पर रहकर खाने-पीने पर पूरा ध्यान दिया,वहीं, दूसरी तरफ शारीरिक गतिविधियां बहुत कम हो गईं। व्यायाम नहीं किया। घर से काम करने के चलते नींद का पैटर्न बदल गया। रात को देरी से सोने की वजह से नींद में खलल आई और नींद पूरी नहीं हुई। काम के घंटों में बढ़ोतरी और स्क्रीन पर बिताए गए समय ने नींद की खलल में बहुत बड़ी भूमिका अदा की। नींद की आदतें बदलने की वजह से लोगों में चिंता का स्तर काफी बढ़ गया।
मानसिक सेहत पर असर पड़ा
रेडमैन ने कहा, अध्ययन में पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों ने अपनी डाइट में सबसे ज्यादा सुधार किया लेकिन इस बीच उन उनकी मानसिक सेहत पर विपरीत असर पड़ा। वजन बढ़ने का अनुभव करने के साथ-साथ उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया। मोटापे से ग्रसित एक तिहाई लोगों ने यह स्वीकार किया कि लॉकडाउन के दौरान उनकी यह बीमारी पहले से ज्यादा बढ़ गई। अध्ययन से पता चलता है कि मोटापे जैसी बीमारी सिर्फ शारीरिक सेहत पर नहीं, बल्कि मन की सेहत पर भी असर डालती है।
अप्रैल माह में हुए इस अध्ययन में 7,754 लोगों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में से अधिकांश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिकर के निवासी थे। इनके अलावा इसमें 50 से अधिक अन्य देशों ने भी भाग लिया।
शौर्यपथ /कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में गर्भवती महिलाओं के बीच काफी डर था। महामारी के बढ़ते प्रकोप के चलते होने वाले बच्चों को क्या परेशानियां हो सकती है, इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल था लेकिन धीरे-धीरे कई प्रेगनेंसी और डिलीवरी जुड़ी गलतफहमियों को दूर हो गईं। यह बात सच है कि कोरोना महामारी के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों की देखभाल में कुछ सावधानियों की जरुरत है लेकिन डर की बजाय कुछ बातों को ध्यान रखकर बच्चे को कोरोना से बचाना आसान है। अर्बन डिक्श नरी डॉट कॉम के अनुसार, साल 2020 में दस्त क देने वाली इस महामारी के दौरान बच्चों के जन्म की दर में इजाफा हुआ है और इस दौर में पैदा हुए जेनरेशन को कोरोनियल कहा गया है। कोरोनियल जेनरेशन के अधिकतर बच्चे दिसंबर 2020 के बाद और साल 2021 में वसंत ऋतु आने तक पैदा होंगे।
कई हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि कोरोना काल में जन्म लेने वाले बच्चों के साथ कुछ फायदे भी जुड़े हुए हैं।
-इस समय कई लोग घर से ही काम कर रहे हैं कि इसलिए वर्किंग मदर्स डिलीवरी के बाद जल्दक ही काम जॉइन करने का ऑप्शन है और उन्हें ऑफिस से ज्यादा लंबी छुट्टी लेने की जरूरत नहीं है, जिससे बच्चे की देखभाल करने में आसानी होगी और बच्चा 24 घंटे मां के नजरों के सामन रहेगा।
-कोरोना काल में कई पुरुष भी घर पर काम कर रहे हैं, तो प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद भी पार्टनर का साथ मिलेगा, जो पहले ऑफिस जाने पर मिलना मुश्किल होता था। इससे बच्चे को माता और पिता दोनों का साथ मिल पाएगा, जिससे उसका ध्यान रखना आसान होगा।
-इस समय घर पर मेहमान भी कम आ रहे हैं, इसलिए आप घर पर शांति से आराम और देखभाल मिलेगी और अपने बच्चे को बार-बार किसी की गोद में देने की भी जरूरत नहीं है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / सोशल मीडिया भारत की खूबसूरती को दिखाने वाले कई वीडियो वायरल होते रहते हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण में भारी कमी देखने को मिली थी, जिसके बाद पहाड़ी इलाकों से सटे कई शहरों से पहाड़ दिख रहे थे। वहीं, सड़कों पर कई जंगली जानवरों की चहल-कदमी के वीडियो भी सामने आए थे। हाल ही में एक और वीडियो ने यूजर्स का दिल जीत लिया है। दरअसल, सोशल मीडिया पर केदारनाथ के अनुपम सौंदर्य का वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें केदारनाथ मंदिर के पीछे साफतौर पर हिमालय पर्वत का सुंदर नजारा दिख रहा है।
बादलों से घिरे पर्वत की खूबसूरती देखकर सोशल मीडिया यूजर्स इसे महादेव की कृपा बता रहे हैं। हिमालय के इस अलौकिक सौंदर्य को देखकर ट्विटर पर यूजर्स हर हर महादेव के साथ इस वीडियो को रिट्वीट कर रहे हैं। इस वीडियो को देखने से पता चलता है कि इसे किसी ने मोबाइल से रिकॉर्ड किया है। ट्विटर पर अब तक लाखों यूजर्स इसे देख चुके हैं। केदारनाथ के इस वीडियो को इंडियन फॉरेस्ट सर्विस ऑफिसर परवीन कासवान ने भी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। केदारनाथ के इस अनुपम सौंदर्य वाले वीडियो को देखकर किसी का मन भी खुश हो जाएगा।
फिलहाल यह वीडियो कब और किसने बनाया इसके बारे में साफतौर तक नहीं कहा जा सकता और ‘लाइव हिन्दुस्तान’ इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि भी नहीं करता।
शौर्यपथ / व्रत में खाए जाने वाली चीजों में साबूदाना सबसे ज्यादा खाया जाता है व्रत के बिना भी कुछ लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में खाए जाने वाले यह आहार आखिर कैसे बनता है? आइए, जानते हैं इससे जुड़े फायदे-
इस पेड़ के तने से बनता है साबूदाना
साबूदाना किसी अनाज से नहीं बनता है, बल्कि यह सागो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से बनता है। सागो, ताड़ की तरह का एक पेड़ होता है। ये मूलरूप से पूर्वी अफ्रीका का पौधा है। इस पेड़ का तना मोटा हो जाता है और इसके बीच के हिस्से को पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इस पाउडर को छानकर गर्म किया जाता है जिससे दाने बन सके। साबूदाना के निर्माण के लिए एक ही कच्चा माल है ‘टैपिओका रूट’ जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘कसावा’ के रूप में जाना जाता है। कसावा स्टार्च को टैपिओका कहा जाता है।
ऐसे बनता है साबूदाना
भारत में साबूदाना टैपिओका स्टार्च से बनाया जाता है। Tapioca स्टार्च को बनाने के लिए कसावा नामक कंद का इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत हद तक शकरकंद जैसा होता है। इस गूदे को बड़े-बड़े बर्तनों में निकालकर आठ-दस दिन के लिए रखा जाता है और रोजाना इसमें पानी डाला जाता है। इस प्रक्रिया को 4-6 महीने तक बार-बार दोहराया जाता है। उसके बाद बनने वाले गूदे को निकालकर मशीनों में डाल दिया जाता है और इस तरह साबूदाना प्राप्त होता है, जिसे सुखाकर ग्लूकोज और स्टार्च से बने पाउडर की पॉलिश की जाती है और इस तरह सफेद मोतियों से दिखने वाले साबूदाने बाजार में आने के लिए तैयार हो जाते हैं।
इन गुणों से भरा है साबूदाना
इसमें कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में पाया जाता है और कैल्शियम और विटामिन-सी की कुछ मात्रा भी मौजूद होती है। इसी कारण व्रत में इससे बनी चीजें खाने का चलन बढ़ता गया है। इससे खिचड़ी, हलवा, चाट आदि व्रत वाली रेसिपीज बनाई जाती है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / मां दुर्गा का नौ दिनों का पावन पर्व कन्या पूजन के साथ ही समाप्त होता है। कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग अपने नवमी को अपनी परंपराओं के अनुसार कन्या पूजन करते हैं। ऐसे में मां कन्या पूजन को शुभ मुहूर्त में सही विधि विधान से किया जाना चाहिए। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर सभी कंफ्यूज हैं ,तो हम आपको बता दें कि शुक्रवार को सप्तमी का व्रत है, जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे लोग सप्तमी शुक्रवार को व्रत रखेंगे और शनिवार को अष्टमी का कन्या पूजन करेंगे। इसके अलावा जो लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं, वे लोग शनिवार को अष्टमी का व्रत रखेंगे और रविवार को कन्या पूजन करेंगे।
कन्या पूजन विधि
इस बार किसी भी नवरात्रि व्रत का क्षय नहीं हुआ है। नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत हैं। इस बार दशहरा और नवमी एक ही दिन हैं। कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। इनके लिए हलवा पूड़ी और चने प्रसाद के रूप में बनाए जाे हैं। इसके साथ ही कन्याओं को नारियल, फल और दक्षिणा और कहीं, कहीं चूड़िया और बिंदी भी दी जाती है। कन्याओं को सबसे पहले एक साथ बैठाकर उनके पैर एक थाली में धोए जाते हैं। इसके बाद उन्हें कलावा बांधकर तिलक लगाया जाता है, फिर भरपेट भोजन कराया जाता है।
शौर्यपथ /ग्रीन-टी न सिर्फ दिल, बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के हालिया शोध की मानें तो इसमें मौजूद कैफीन 'एडिनोसिनÓ का उत्पादन बाधित करती है। 'एडिनोसिनÓ एक अहम न्यूरोट्रांसमिटर है, जो यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति कब सुस्त या तरोताजा महसूस करेगा। इसकी अधिकता से तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने और अल्जाइमर पनपने के संकेत मिले हैं।
शोध दल में शामिल डॉ. मेलिंडा रिंग के मुताबिक ग्रीन-टी में 'एल-थियानिनÓ नाम का एक यौगिक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। स्ट्रेस हार्मोन 'कॉर्टिसोलÓ का स्तर घटाने और फील गुड हार्मोन 'सेरोटोनिनÓ का स्त्राव बढ़ाने में इसे खासा असरदार पाया गया है। यह भी देखा गया है कि कैफीन और 'एल-थियानिनÓ मिलकर याददाश्त, तर्क शक्ति व एकाग्रता में इजाफा कर सकते हैं। चूंकि, ग्रीन-टी में कॉफी के मुकाबले कैफीन का स्तर काफी कम होता है, इसलिए इसका सेवन उसके साइडइफेक्ट को भी दूर रखता है।
रक्तचाप घटाने में कारगर
रिंग ने ग्रीन-टी को रक्तचाप घटाने में भी बेहद असरदार करार दिया। उन्होंने 2016 में प्रकाशित एक अमेरिकी अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें हफ्ते में कम से कम छह कप ग्रीन-टी पीने वालों के हाइपरटेंशन का शिकार होने का खतरा 33 फीसदी कम मिला था।
कोलेस्ट्रॉल काबू में रहेगा
शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्रीन-टी में 'कैटेचिनÓ नाम का एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह खाने में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को सोखने की शरीर की क्षमता घटाता है। यही वजह है कि जो लोग दिन में दो कप ग्रीन-टी पीते हैं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा आधा हो जाता है।
हड्डियां-मांसपेशियां मजबूत होंगी
-ग्रीन-टी हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी अहम है। इसमें मौजूद फ्लैवेनॉयड जहां हड्डियों-मांसपेशियों में क्षरण की शिकायत दूर रखते हैं, वहीं फाइटोएस्ट्रोजन ऊतकों को नुकसान नहीं पहुंचने देते। मांसपेशियों का विकास सुनिश्चित करने में भी उनकी अहम भूमिका है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
