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21 नवंबर से 4 दिसंबर तक आयोजित होगा पुरुष नसबंदी पखवाड़ा
पहले चरण में दंपती संपर्क सप्ताह, दूसरे चरण में सेवा वितरण सप्ताह मनेगा
रायपुर / शौर्यपथ / परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व पुरुष नसबंदी पखवाड़े का आयोजन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 21 नवंबर से 4 दिसंबर तक किया जायेगा । विश्व पुरुष नसबंदी पखवाड़े को दो चरणों में मनाया जायेगा।
प्रथम चरण में मोबिलाइजेशन सप्ताह 21 से 27 नवंबर तक तथा द्वितीय चरण में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक सेवा वितरण सप्ताह मनाया जाएगा। यह अभियान` परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी, जीवन में लाए स्वास्थ्य और खुशहाली’ के नारे के साथ चलाया जाएगा।
इस पखवाड़े की जानकारी देते हुए ज़िला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल ने बताया पखवाड़े के माध्यम से पुरुष नसबंदी के बारे में समाज में जागरूकता लाना और पुरुषों में नसबंदी को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करना है। दंपती संपर्क 21 से 27 नवंबर तक चलेगा और 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक द्वितीय चरण में सेवा वितरण सप्ताह मनाया जाएगा।यह सेवा उपलब्धता पर केंद्रित रहेगा जो कोविड-19 के संदर्भ में संशोधित किया गया है । पखवाड़े के अंतर्गत समस्त गतिविधियों को कोविड-19 संबंधित समस्त सावधानियां एवं सलाह को सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त रूप से संशोधित किया है मुख्यत: शारीरिक दूरी, मास्क पहनने, संक्रमण की रोकथाम का पूर्णता पालन सुनिश्चित किया जाएगा ।
परिवार नियोजन के लिए दी जाने वाली सेवाएं दिशा निर्देशों के अनुसार ही प्रदान की जाएंगी । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग से सूचनाओं का आदान प्रदान के साथ ही जिला एवं विकासखंड के अधिकारियों का क्षमता वर्धन भी किया जाएगा शारीरिक दूरी एवं कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए पखवाड़ा 21 नवंबर से 2 सप्ताह तक मुख्यता वेसेक्टॉमी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा । इस सप्ताह के दौरान पुरुष नसबंदी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित होने वाली गतिविधियां
केंद्र पर पुरुष नसबंदी सेवा और इसके फायदे को प्रदर्शित किया जाएगा । नसबंदी के तीन माह उपरांत (जांच में शुक्राणु संख्या शून्य पाए जाने पर) ही प्रमाण पत्र हितग्राही को प्रदान किया जाएगा । भारत सरकार द्वारा निर्देशित समस्त मानकों एवं दिशा निर्देशों का पालन समस्त स्तरों पर सुनिश्चित किया जाएगा ।
मोबिलाइजेशन फेस में आयोजित की जाने वाली गतिविधियां
अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किया जाएगा जिसमें व्यक्तिगत चर्चा और पुरुष नसबंदी के फायदे हितग्राहियों को बताये जाऐंगे। ‘मोर मितान मोर संगवारी’ का आयोजन दिशा निर्देश के अनुसार किया जाएगा । साथ ही पुरुष नसबंदी से संबंधित मिथकों को दूर करने के लिए परामर्श भी प्रदान किया जाएगा । प्रचार प्रसार के लिए डिजिटल माध्यम के प्रयोग को बल दिया जाएगा । कंटोनमेंट एवं बफर जोन में मोबाइल वेन की व्यवस्था कर प्रचार प्रसार किया जाएगा। प्रचार प्रसार के दौरान कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरी सावधानी रखी जाएगी कहीं भी अधिक भीड़ एकत्रित ना हो इसका भी ध्यान रखा जाएगा
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / राजस्थान में बीकानेर संभाग मुख्यालय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत आह्वान का असर इस दीपावली पर ऐसा नजर आ रहा है कि इस बार बाजारों में चीन में बने सामान दिखाई नहीं दे रहे हैं। आमजन का स्वदेशी वस्तुओं के प्रति काफी रूझान देखने को मिल रहा है। इस बार गाय के गोबर से बने दीपकों के प्रति भी लोगों का काफी रुझान नजर आ रहा है। बीकानेर गोशाला संघ के अध्यक्ष सूरजमालसिंह नीमराना ने आज बताया कि राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के आह्वान पर इस अभियान के तहत प्रदेश के 33 जिलों में 33 लाख गायों के गोबर से बने दीपक लोगों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इस बार दीपावली पर गौमय दीपक जलाए जाएंगे। बीकानेर में अब तक 15 हजार से ज्यादा दीपक लोग स्वेच्छा से अपने घर ले जा चुके हैं और लगातार इन दीपकों के ऑर्डर भी आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह दीपक दो प्रकार के हैं। एक दीपक जो तेल से जला कर सामान्य दीपक की तरह उसे घर में सजाया जाएगा, दूसरा दीपक घर के वातावरण को शुद्ध करने के लिए हवन सामग्री के साथ बना है, उस दीपक को देसी घी से जलाया जाएगा, उससे घर का वातावरण शुद्ध होगा। इस दीपक के जलने से घर में हवन की खुशबू महकेगी। जिससे घर के वातावरण को पटाखों की गैस को कम करने में सहायक होगी। नीमराणा के अनुसार देसी गाय के गोबर से बने दीपक में गोबर के साथ गोंद का उपयोग किया गया है। इसमें 4० प्रतिशत ताजा गोबर और 6० प्रतिशत सूखा गोबर गोंद के साथ मिलाकर यह दीपक बनाए जा रहे हैं। गोबर के साधारण दीपक की कीमत 2 रुपए व हवन सामग्री मिलाकर बनाए गए गोबर के दीपक की कीमत 5 रुपए है। गोबर के दीपक के साथ-साथ गोबर से लक्ष्मी-गणेशजी की प्रतिमा भी बनाई गई है। लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा की कीमत 31 रुपए रखी गई है।
सेहत / शौर्यपथ / क्या आप हर रात कुछ न कुछ सोचते रहते हैं और कई तरह के ख्याल आपकी नींद उड़ा देते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो आप मेडिटेशन के साथ अखरोट खाना शुरू कर दीजिए, इससे आपकी यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। आज हम आपको खाली पेट भिगाए हुए अखरोट खाने के फायदे बता रहे हैं।
सूखे अखरोट की बजाय खाएं भीगा हुआ अखरोट
अखरोट को कच्चा खाने की बजाए अगर भिगोकर खाया जाए, तो इसके फायदे कई गुणा बढ़ जाते हैं। इसके लिए रात में 2 अखरोट को भिगोकर रख दें और सुबह के समय खाली पेट इसे खा लें। यकीन मानिए भीगे हुए बादाम खाना जितना फायदेमंद है उतना ही फायदेमंद भीगे हुए अखरोट खाना भी है। भीगा हुआ अखरोट कई बीमारियों से निजात दिलाने में मदद करता है।
डायबिटीज का खतरा करता है कम
ब्लड शुगर और डायबिटीज से बचना चाहते हैं, तो भीगे हुए अखरोट का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। बहुत सी स्टडीज में यह बात सामने आयी है कि जो लोग रोजाना 2 से 3 चम्मच अखरोट का सेवन करते हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो जाता है। अखरोट ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है जिससे डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है।
पाचन शक्ति होती है बेहतर
अखरोट फाइबर से भरपूर होता है, जो आपकी पाचन प्रणाली को दुरुस्त रखता है। पेट सही रखने और कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त चीजें खानी जरूरी है। ऐसे में अगर आप रोजाना अखरोट का सेवन करते हैं, तो आपका पेट भी सही रहेगा और कब्ज भी नहीं होगा। भीगे हुए अखरोट को पचाना भी आसान हो जाता है।
हड्डियों की मजबूती के लिए खाएं अखरोट
अखरोट में ऐसे कई घटक और प्रॉपर्टीज पाए जाते हैं जो आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं। अखरोट में अल्फा-लिनोलेनिक ऐसिड पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूत करने में मदद करता है। इसके अलावा, अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी ऐसिड सूजन को भी दूर करता है।
तनाव को दूर करने में कारगर
अखरोट खाने से कई मायनों में आपका तनाव और स्ट्रेस कम होता है और आपको अच्छी नींद भी आती है। अखरोट में मेलाटोनिन होता है, जो बेहतर नींद लाने में मदद करता है। वहीं, ओमेगा-3 फैटी ऐसिड ब्लड प्रेशर को संतुलित कर तनाव से राहत दिलाता है। भीगे अखरोट खाने से आपका मूड भी अच्छा होता है और फिर ऑटोमैटिकली आपका स्ट्रेस कम हो जाता है।
वेट लॉस करके आपको फिट रखता है अखरोट
अखरोट वजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। ये बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और आपकी बॉडी से एक्स्ट्राभ फैट कम करने में हेल्प करता है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन व कैलरी होती है, जो वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है। शोध में भी यह बात साबित हो चुकी है कि अखरोट का सेवन न सिर्फ वजन कम करता है, बल्कि उसे कंट्रोल में रखने में भी मदद करता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / 13 नवंबर यानी आज धनतेरस के साथ उत्तर भारत में हनुमान जयंती भी मनाई जा रही है। कहते हैं हनुमान जयंती पर रामायण, रामचरित मानस का अखंड पाठ, सुंदरकाण्ड का पाठ और हनुमान बाहुक आदि का पाठ करने से बजरंगी बली प्रसन्न होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हनुमान जी का जन्मदिन एक साल में दो बार मनाते हैं। इसके पीछे का कारण है कि कर्क राशि से दक्षिण वासी इनका जन्मदिन चैत्र पूर्णिमा को मानते हैं, जबकि कर्क राशि से उत्तर वासी हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मानते हैं।
इसलिए नाम पड़ा हनुमान-
वायुपुराण में एक श्लोक वर्णित है- आश्विनस्या सितेपक्षे स्वात्यां भौमे च मारुतिः। मेष लग्ने जनागर्भात स्वयं जातो हरः शिवः।। यानी- भगवान हनुमान का जन्म कृष्ण पक्ष चतुर्दशी मंगलवार को स्वाति नक्षत्र की मेष लग्न और तुला राशि में हुआ था। हनुमान जी बाल्यकाल से ही तरह-तरह की लीलाएं करते थे। एक दिन उन्हें ज्यादा भूख लगी तो सूर्य को मधुर समझकर उसे अपने मुंह में भर लिया। जिसके कारण पूरे संसार में अंधेरा छा गया। इसे विपत्ति समझकर इंद्र भगवान ने हनुमान जी पर व्रज से प्रहार किया। इसके प्रभाव से उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई। यही वजह है कि इनका नाम हनुमान पड़ा।
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते मामलों के बीच इसके नए-नए लक्षण सामने आ रहे हैं। ताजा शोध के मुताबिक कमजोरी, पेट संबंधी विकार और डायबिटीज को भी नए लक्षणों के रूप में पहचाना गया है। अमेरिकन जर्नल ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन में प्रकाशित इस शोध में यह दावा किया गया है।
वैज्ञानिकों ने न्यूयॉर्क शहर स्थित कोविड अस्पतालों में भर्ती बारह हजार से अधिक मरीजों पर अध्ययन किया। इसके निष्कर्षों के आधार पर इन लक्षणों की पुष्टि की गई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि अस्पताल पहुंचे करीब 57 फीसदी मरीजों को कमजोरी की शिकायत थी, इन्हें बाद में जांच में कोविड-19 से संक्रमित पाया गया। वहीं, 55 फीसदी मरीज ऐसे थे जिनका ब्ल्ड शुगर लेवल काफी बढ़ा हुआ था जबकि 51 फीसदी को पेट संबंधी शिकायतों के बाद अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
65 वर्ष से अधिक वालों को ज्यादा परेशानी :
अध्ययन में यह भी पाया गया कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में गैस, डायरिया जैसी परेशानी होने पर अस्पताल में भर्ती किया गया और बाद में जांच में ये सभी संक्रमित मिले। शोधकर्ताओं में शामिल इक्हान स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. क्रिस्टोफर क्लिफर्ड के अनुसार, नए अध्ययन से ज्यादा मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
वैक्सीन की राह में बड़ी चुनौती :
कोरोना वायरस से निपटने के लिए तैयार की जा रही अधिकांश वैक्सीन के ट्रायल अंतिम चरण में हैं। ऐसे में नए लक्षणों की पहचान ने वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि अब तक परीक्षण में सफल उतरे टीकों को तैयार करते वक्त इन लक्षणों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। निश्चित ही अब दवा कंपनियां इन पहलुओं पर भी गौर करेंगी। ऐसे में बेसब्री से कोरोना वैक्सीन का इंतजार कर रही दुनिया को कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।
पहले ये लक्षण माने जाते थे कारण
- सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अगस्त माह में कोविड-19 को लेकर छह नए लक्षणों के बारे में बताया था। जिनमें सर्दी लगना, ठिठुरन, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश और सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता कम होना शामिल था।
- सितंबर माह में नेशनल हेल्थ सर्विस ने आंखों संबंधी समस्या, खांसी, अधिक बेचैनी और चमड़ी के रंग बदलने को भी कोरोना के नए लक्षणों में शामिल किया था।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / रेल यात्रियों के बीच अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलाई जा रही तेजस एक्सप्रेस की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए इंडियन रेल कैटरिंग टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने कई आकर्षक टूर पैकेजों की घोषणा की है।
आईआरसीटीसी दिसंबर सप्ताह के पहले 3 दिन के लिए तेजस एक्सप्रेस के क्यूरेटेड पैकेज को पेश करेगी। इस टूर पैकेज में यात्री मुंबई, वड़ोदरा और अहमदाबाद घूम सकेंगे। हालांकि अभी तक इस टूर पैकेज की कीमत अभी तय नहीं की गई है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि एक दिन के लिए इस टूर पैकेज की कीमत लगभग 2000 रुपये प्रति यात्री होगी। IRCTC के मुंबई और अहमादाबाद तेजस एक्सप्रेस में दिए जा रहे टूर पैकेज की बुकिंग करने वाले यात्री को 4 स्टार होटल में ठहराया जाएगा।
इस टूर पैकेज में यात्रियों को वड़ोदरा और अहमदाबाद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगहों पर घुमाने ले जाया जाएगा। IRCTC's के west zone के जनरल मैनेजर Rahul Himalian के मुताबिक यात्रियों को घुमने के लिए वाहन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुंबई की यात्रा में लक्ष्मी विलास पैलेस, अक्षरधाम मंदिर, साबरमती रिवरफ्रंट, शामिल होंगे। गुजरात में साबरमती आश्रम। मुंबई के लिए भी गुजरात से जाने वाले यात्रियों के लिए इसी तरह का पैकेज आईआरसीटीसी द्वारा तैयार किया जा रहा है।
कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से पिछले 7 महीनों से बंद तेजस एक्सप्रेस एक बार फिर 17 अक्टूबर से पटरी पर दौड़ेगी। कोरोना महामारी के पहले जहां ये ट्रेन 95 फीसदी तक भर के चलती थी वहीं अब ये ट्रेन 40 फीसदी तक भर के चल रही है। प्रीमियम आउटस्टेशन ट्रेन में 736 यात्रियों की क्षमता है। आईआरसीटीसी वर्तमान में केवल 60 प्रतिशत सीटें प्रदान कर रहा है, जबकि कोचों के अंदर सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए वैकल्पिक सीट उपलब्ध हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / दीपावली का त्योहार या पर्व 5 दिनों तक मनाया जाता है। कार्तिक माह की त्रयोदशी से शुक्ल द्वितिया तक यह त्योहार मनाया जाता है जिसमें कार्तिक माह की अमावस्या को मुख्य दीपावली पर्व होता है। अर्थात धनतेरस से भाई दूज तक यह त्योहार चलता है। आओ जानते हैं कि आखिर यह त्योहार किन किन कारणों से मनाया जाता है।
1. इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दीपावली मनाई थी।
2. इस दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह रुप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था।
3. इसी दिन समुद्रमंथन के पश्चात लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इसी दिन माता काली भी प्रकट हुई थी इसलिए बंगाल में दीपावली के दिन कालिका की पूजा का प्रचलन है।
4. इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। कहते हैं कि श्रीराम रावण का वध करने के 21 दिन बाद अयोध्या लौटे थे। इसीलिए इस दिन राम विजयोत्सव के रूप में दीप जलाए जाते हैं।
5. इस दिन के ठीक एक दिन पहले श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस खुशी के मौके पर दूसरे दिन दीप जलाए गए थे।
6. यह दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी है। जैन मंदिरों में निर्वाण दिवस मनाया जाता है।
7. गौतम बुद्ध के अनुयायियों ने 2500 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध के स्वागत में लाखों दीप जला कर दीपावली मनाई थी।
8. इसी दिन उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था।
9. इसी दिन गुप्तवंशीय राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने 'विक्रम संवत' की स्थापना करने के लिए धर्म, गणित तथा ज्योतिष के दिग्गज विद्वानों को आमन्त्रित कर मुहूर्त निकलवाया था।
10. इसी दिन अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था।
11. दिवाली ही के दिन सिक्खों के छ्टे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को कारागार से रिहा किया गया था।
12. इसी दिन आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती का निर्वाण हुआ था।
13. इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष आरम्भ होता है।
14.भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का था। उन्हें आयुर्वेद का जन्मदाता और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। धनतेरस के दिन उनका जन्म हुआ था। इस दिन यम पूजा भी होती है।
15. भाई दूज को यम द्वीतीया भी कहते हैं। यम के निमित्त धन तेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज पांचों दिन दीपक लगाना जाहिए। कहते हैं कि यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस दिन यम के मुंशी भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी प्रचलन है। इस दिन श्रीकृष्ण ने इंद्रोत्सव की जगह गोवर्धन पूजा को प्रारंभ किया था।
उक्त सभी कारणों से हमारी सांझा संस्कृति दीपावली का त्योहार मनाती हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / रामचरित मानस के उत्तरकांड में श्रीराम के अयोध्या आगमन पर भव्य स्वागत का उल्लेख मिलता है। कहते हैं कि कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। जब प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे तो सभी शहरवासी उनके आगमन के लिए उमड़ पड़े। भगवान श्रीराम अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद पुन: लौट आए थे। आओ जानते हैं कि वे दीपावली के दिन ही पहुंचे थे या कि और किसी दिन?
1. श्रीराम के अयोध्या लौटने की तिथि पर इतिहासकारों में मतभेद हैं, लेकिन परंपरा के अनुसार कार्तिक अमावस्या अर्थात दीपावली को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे।
2. रावण का वध करने के बाद लंका से अयोध्या लौटते समय राम, लक्ष्मण, सीता एवं हनुमानजी पुष्पक विमान से अयोध्या के पास नंदीग्राम नामक स्थान पर उतरे थे, जहां पर राम की खड़ाऊं रखकर राजा भरत अपना राजपाट चलाते थे। कहते हैं कि नंदीग्राम में एक दिन रुकने के बाद वे दूसरे दिन अयोध्या पहुंचे थे।
3. यह भी उल्लेख मिलता है कि रावण वध यदि दशमी के दिन हुआ था तो उसके दूसरे दिन सीता को अग्नि परीक्षा से गुजरने के बाद अर्थात उन्हें अग्निदेव से वापस मांगने के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे थे। मतलब यह कि वे एकादशी के दिन अयोध्या की ओर चले थे और रास्ते में वह निषादराज गुह केवट के यहां रुके भी थे।
4. वाल्मीकि रामायण में उल्लेख मिलता है कि श्रीराम का नंदीग्राम में भव्य स्वागत किया गया था। उस दौरान अयोध्या के सभी आठों मंत्री और राजा दशरथ की तीनों रानियां हाथियों पर सवार होकर नंदीग्रम पहुंचे। उनके साथ अयोध्या के सभी नागरिक भी नंदीग्रम पहुंचे।
5. वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड सर्ग 127 के अनुसार सभी नागरिकों, मंत्रियों और रानियों ने देखा की श्रीराम पुष्पक विमान से धरती पर उतरे। सभी ने विमान पर विराजमान श्रीराम के दर्शन किए और वे उन्हें लेकर अयोध्या गए।
6.श्रीराम का जन्म इंडियन गर्वनमेंट के साइंस मिनिस्ट्री से मान्यता प्राप्त 'इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च ऑन वेदाज' (आईसर्व) के शोधानुसार श्रीराम का जन्म इस शोधानुसार 5114 ईसा पूर्व हुआ था। आईसर्व डायरेक्टर सरोज बाला के शोध अनुसार श्रीराम ने रावण का वध 4 दिसंबर 5076 ईसा पूर्व किया था। फिर वे अलग अलग जगहों पर रुकते हुए 29वें दिन 2 जनवरी 5075 ईसा पूर्व वापस अयोध्या लौटे थे। अयोध्या लौटने के खुशी में अयोध्यावासियों ने दीपावली मनाई थी। रुकने के दिनों को छोड़कर इस सफर में उन्हें करीब 24 दिन लगे। इस दौरान वे 8 से 9 जगहों पर रुके। यह निष्कर्ष वाल्मीकि रामायण में लिखे उस दौर के ग्रहों, नक्षत्रों, तारामंडलों की स्थिति के आधार पर नासा के वेद स्पेशल 'प्लेटिनम गोल्ड' सॉफ्टवेयर से निकाला गया।
7.श्रीरामजी की खड़ाऊ ले जाते समय भरतजी ने कहा था कि
चर्तुर्दशे ही संपूर्ण वर्षेदद्व निरघुतम।
नद्रक्ष्यामि यदि त्वां तु प्रवेक्ष्यामि हुताशन।।
अर्थात: हे रघुकुल श्रेष्ठ। जिस दिन चौदह वर्ष पूरे होंगे उस दिन यदि आपको अयोध्या में नहीं देखूंगा तो अग्नि में प्रवेश कर जाऊंगा। भरत के मुख से ऐसे प्रतिज्ञापूर्ण शब्द सुनकर रामजी ने भरत को आश्वस्त करते हुए कहा था- तथेति प्रतिज्ञाय- अर्थात ऐसा ही होगा।
8. इसी प्राकार महर्षि वशिष्ठजी ने महाराजा दशरथ से राम के राज्याभिषेक के संदर्भ में कहा था-
चैत्र:श्रीमानय मास:पुण्य पुष्पितकानन:।
यौव राज्याय रामस्य सर्व मेवोयकल्प्यताम्।।
अर्थात: जिसमें वन पुष्पित हो गए। ऐसी शोभा कांति से युक्त यह पवित्र चैत्र मास है। रामजी का राज्याभिषेक पुष्प नक्षत्र चैत्र शुक्ल पक्ष में करने का विचार निश्चित किया गया है। षष्ठी तिथि को पुष्य नक्षत्र था। रामजी लंका विजय के पश्चात अपने 14 वर्ष पूर्ण करके पंचमी तिथि को भारद्वाज ऋषि के आश्रम में उपस्थित हुए। वहां एक दिन ठहरे और अगले दिन उन्होंने अयोध्या के लिए प्रस्थान किया उससे पहले उन्होंने अपने भाई भरत से पंचमी के दिन हनुमानजी के द्वारा कहलवाया-
अविघ्न पुष्यो गेन श्वों राम दृष्टिमर्हसि।
अर्थात: हे भरत! कल पुष्य नक्षत्र में आप राम को यहां देखेंगे। इस प्रकार राम चैत्र के माह में षष्ठी के दिन ही ठीक समय पर अयोध्या में पुन: लौटकर आए।
9. वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीताजी का हरण बसंत ऋतु में हुआ था। अपहरण के पश्चात रावण ने उन्हें बारह मास का समय देते हुए कहा कि हे सीते! यदि इस अवधि के भीतर तुमने मुझे स्वीकार नहीं किया तो मेरे याचक तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगे।
10. यह बाद हनुमानजी ने जब श्रीराम से कही तो उन्होंने भली प्रकार चिंतन करके सुग्रीव को आदेश दिया कि
उत्तरा फाल्गुनी हयघ श्वस्तु हस्तेन योक्ष्यते।
अभिप्रयास सुग्रिव सर्वानीक समावृता:।।
अर्थात आज उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। कल हस्त नक्षत्र से इसका योग होगा। हे सुग्रीव इस समय पर सेना लेकर लंका पर चढ़ाई कर दो। इस प्रकार फाल्गुन मास में श्री लंका पर चढ़ाई का आदेश श्री राम ने दिया। यह जानकर रावण ने भी अपने मंत्री से सलाह लेकर कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को युद्धारंभ करके अमावस्या के दिन सेना से युक्त होकर विजय के लिए निकला और चैत्र मास की अमावस्या को रावण मारा गया। तब रावण की अंत्येष्टि क्रिया तथा विभीषण के राजतिलक के पश्चात रामचंद्र यथाशीघ्र अयोध्या के लिए निकल पड़े। तब यह सिद्ध होता है कि रामजी चैत्र के माह में ही अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में लोगों ने अपने अपने घरों में दीप जलाकर उनका स्वागत किया।
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पाटन क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान के दौरान उन महिलाओं से मिले जिनके द्वारा गोबर से बनाए दीयों, वंदनवार, शुभ-लाभ,वॉल हैंगिंग इत्यादि ने न केवल प्रदेश में बल्कि देश के बाहर भी छत्तीसगढ़ को पहचान दिलाई है।
महिलाओं ने मुख्यमंत्री जी को शुध्द गोबर से बने वंदनवार और दीये भेंट भी किए।महिलाओं द्वारा दी गई भेंट को मुख्यमंत्री जी ने बड़े स्नेह से स्वीकार किया और उनके साथ तस्वीर भी खिंचवाई।संस्था की संचालिका श्रीमती निधि चन्द्राकर ने जब मुख्यमंत्री जी को बताया कि उन्होंने देश के बाहर भी दीये और वंदनवार भेजे हैं तो वे बहुत खुश हुए। उनकी मेहनत की सराहना की और आशीर्वाद दिया ऐसे ही अच्छा काम करते रहिए।महिलाओं की हुनरमंदी देखकर मुख्यमंत्री जी ने उनका उत्साहवर्धन भी किया।उन्होंने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं आपने गोधन से बने उत्पादों को देश के बाहर पहचान दिलाई जो काबिले तारीफ है।
संस्था की सभी महिलाएं श्रीमती कल्पना वर्मा, श्रीमती शशि ,श्रीमती मनीषा और श्रीमती पिंकी मुख्यमंत्री से मिलकर काफी उत्साहित नजर आईं।इन महिलाओं ने बताया उन सबको बहुत अच्छा लगा जब उन सबको प्रदेश के मुख्यमंत्री का इतना स्नेह और आशीर्वाद मिला।अब वे दुगने उत्साह से काम करेंगी।
दुर्ग / शौर्यपथ / ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए गौठान का सशक्तिकरण आवश्यक है। गौठान के बनने से यहां जानवरों के रखने की व्यवस्था हो गई। गोधन न्याय योजना के माध्यम से पशुधन को लोग ज्यादा सहेजने लगे हैं। इससे फसल सुरक्षा भी हो रही है। कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने काफी समय पहले ओन्हारी फसल ली थी। इस बार उन्होंने फिर से यह फसल लगाई है। यह बताता है कि मवेशियों से फसल सुरक्षा बेहद आवश्यक थी।
गौठान और गोधन न्याय योजना से इसका रास्ता खुला। यह खेती और पशुपालन की बेहतरी के लिए शानदार योजना है। साथ ही जैविक खेती की ओर भी इससे राह प्रशस्त होती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार किसानों ने गौठान के लिए मुक्त हस्त से पैरादान किया था। गोमाता के संवर्धन के लिए ये सबसे उत्तम कार्य है। इस बार भी खेतों में फसल अवशेष जलाएं नहीं अपितु पैरादान करें।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गौठान ग्रामीण आजीविका केंद्र के रूप में स्थापित होंगे। अभी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने दीपावली को देखते हुए उत्पाद तैयार किये हैं। इनकी अच्छी बिक्री हो रही है। इन्हें स्थानीय जरूरत के मुताबिक चीजें तैयार करने के लिए कहा जा रहा है। अपने हुनर, गुणवत्ता और मेहनत से ये अपने उत्पादों की बाजार में जगह बना लेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान उत्पादन करने वाले किसानों को एथेनॉल का प्लांट लगने से विशेष मदद मिलेगी। इसके लिए केंद्र से अनुमति मांगी गई थी, प्लांट आरम्भ होने से धान उगाने वाले किसानों की समृद्धि और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को खेती किसानी में किसी तरह की दिक्कत न आये, इसके लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना की किश्त ऐसे समय में दी गई जब किसानों को खेती के लिए सबसे ज्यादा राशि की जरूरत होती है।
त्यौहार स्पेसल / शौर्यपथ / धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा के प्रसाद में कई तरह के भोग तैयार किए जाते हैं। ऐसे ही एक भोग का नाम है खोए की बर्फी । मावा या खोए की बर्फी देश भर में खूब पसंद की जाती है। इस मिठाई को व्रत और त्योहार के मौके पर खास तौर से तैयार किया जाता है। खोए की बर्फी न सिर्फ खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है, साथ ही बनने में भी बेहद आसान होती है। तो आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह स्वादिष्ट खोए की बर्फी।
खोए की बर्फी बनाने के लिए सामग्री-
-1 कप खोया
-1/4 कप घी
-1/2 कप चीनी पाउडर
-¼ टी स्पून इलायची पाउडर
-खोए की बर्फी बनाने की विधि-
खोए की बर्फी बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी पैन में घी गर्म करके उसमें खोया डालकर भून लें। ध्यान रहे खोए के मिक्सचर को लगातार चलाते रहे। जब यह मिक्सचर बीच में इकट्ठा होने लगे, तो इसमें चीनी डालकर हल्की आंच पर अच्छी तरह भूनें ताकि चीनी पूरी तरह मिश्रण में घुल जाए।जब मिक्सचर बीच में एक बॉल की तरह बन जाए, तो इसे एक घी लगी प्लेट में निकालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने पर इसे अपनी पसंद की शेप में काटकर सर्व करें।
शौर्यपथ / घंटों कसरत, दौड़ या डाइट कंट्रोल करने के बावजूद भी अगर आप अपना वजन कम नहीं कर पा रहे हैं तो टेंशन छोड़ अपनी डाइट में शामिल करें ये खास चाय। जी हां इस चाय का नाम है करी पत्ते की चाय। सुबह करी पत्ते का सेवन करने से शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर में मेटाबॉलिज्म लेवल को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। तो आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये सेहतमंद चाय।
करी पत्ता टी बनाने के लिए लगने वाली सामग्री-
-8-10 करी पत्ते
-आधा इंच अदरक
-2-3 कप पानी
-नींबू और शहद
करी पत्ता टी बनाने का आसान तरीका-
करी पत्ता की चाय बनाने के लिए सबसे पहले करी पत्तों और अदरक को साफ करके 15-20 मिनट के लिए मीडियम आंच पर पानी में उबालने के बाद गैस बंद करके ढक्कन बंद करके 10 मिनट के लिए और पकने दें। अब एक कप में चाय को छानकर इसमें नींबू का रस या शहद मिलाएं। आपकी करी पत्ते की चाय बनकर तैयार हैं।
सेहत / शौर्यपथ / देश-दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग स्वस्थ रहने की चाह में रोजाना विटामिन और मिनरल की गोलियां खाते हैं। हालांकि, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन की मानें तो विटामिन और मिनरल की रंग-बिरंगी गोलियां शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में कुछ खास असरदार नहीं साबित होतीं। लोगों का यह सोचना कि गोली खाने से वे शारीरिक और मानसिक स्तर पर मजबूत हो रहे हैं, महज ख्याली पुलाव पकाने जैसा है।
डॉ. कैरी रक्सटन के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में 21600 वयस्क शामिल हुए। इनमें से पांच हजार प्रतिभागियों ने नियमित रूप से विटामिन और मिनरल की गोलियां खाने की बात स्वीकारी। वहीं, 16660 ने बताया कि अच्छी सेहत की चाह में वे ऐसी किसी दवा का सेवन नहीं करते। सेहत से जुड़े एक साक्षात्कार में गोलियां खाने वाले प्रतिभागियों ने उन लोगों के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा स्वस्थ महसूस करने की बात कही, जो इनसे दूर रहते हैं।
हालांकि, जब रक्सटन और उनके साथियों ने जीवनशैली व चिकित्सकीय इतिहास के आधार पर सभी प्रतिभागियों के शारीरिक, मानसिक और जैविक स्वास्थ्य पर गोलियों के असर का विश्लेषण किया तो इन्हें खाने तथा न खाने वालों में कोई अंतर नहीं दिखा।
रक्सटन के मुताबिक विटामिन या मिनरल की गोलियां आमतौर पर ऐसे लोग ही खाते हैं, जो अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सजग हैं। ऐसे में उनके बीमारियों को दूर रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की गुंजाइश भी अधिक रहती है।
रक्सटन ने कहा, स्वस्थ जीवनशैली का असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दिखना लाजिमी है। लिहाजा विटामिन या मिनरल की गोलियों को सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बेहतर स्थिति में होने का श्रेय देना मुनासिब नहीं रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि विटामिन या मिनरल की गोलियां खाने वाले लोग उनके फायदों को लेकर आश्वस्त होते हैं। इससे मानसिक स्तर पर उनमें सुरक्षा का भाव पनपता है, जिसका सकारात्मक असर शरीर पर भी दिखता है।
खुलासा
-शोधकर्ताओं ने 21600 वयस्कों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का जायजा लिया।
-5000 प्रतिभागी रोज विटामिन-मिनरल की गोलियां खाते थे, 16660 ऐसा नहीं करते थे।
-30% ज्यादा स्वस्थ मिले गोलियों का सेवन करने वाले, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना थी वजह
बड़ा बाजार-
-40% से अधिक वैश्विक आबादी रोजाना विटामिन या मिनरल की गोलियां खाती है
-मल्टीविटामिन सहित अन्य सप्लीमेंट का बाजार 3.8% सालाना की दर से बढ़ रहा है
-इस मौजूदा वार्षिक कमाई 1952.34 करोड़ डॉलर (लगभग 146425.20 करोड़ रुपये) है
कमी होने पर ही करें सेवन-
-रक्सटन के मुताबिक विटामिन और मिनरल की गोलियां उन लोगों के लिए बनी हैं, जो खानपान या अन्य प्राकृतिक स्रोतों के जरिये इन अहम पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने में असमर्थ हैं। इन दवाओं को बीमारियों की रोकथाम या बचाव की गारंटी समझकर बेवजह नहीं खाना चाहिए।
रायपुर / शौर्यपथ / परिवार नियोजन के अस्थाई साधन के तौर पर छाया साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोलियां महिलाओं की पहली पसंद बन रही है । जागरूकता बढ़ने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनका इस्तेमाल शुरू हो गया है।लॉकडाउन के बाद से जिले में इसका प्रसार-प्रचार जोरों पर है। छाया गर्भनिरोधक गोलियों के प्रसार-प्रचार में मितानिन की भी भूमिका महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल के अनुसार परिवार को नियोजित रखने में छाया गर्भनिरोधक गोलियां काफी कारगर हैं। वर्ष 2019-20 में जहॉ 3,845 गोलियां इस्तेमाल हुई थी वहीं 1अप्रैल 2020 से 31 अगस्त 2020 तक 3,975 छाया गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल किया जा चुका है । छाया का वितरण स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा मितानिन के द्वारा भी गृह भ्रमण के दौरान किया जा रहा है ।
ज़िले में महिलाओं की रुचि परिवार नियोजन के प्रति बढ़ रही है।पिछले साल की अपेक्षा इस साल छाया का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ है। लोग इनके प्रति जागरूक हो रहे हैं। और इसका प्रयोग भी बढ़ रहा है।
बीरगॉव की मितानिन सविता साहू बताती हैं,“मैं पिछले 4 माह से छाया टेबलेट का इस्तेमाल कर रही हूँ और मेरे दो बच्चे हैं, मैं और बच्चे नहीं चाहती हूँ इसलिए मैं टेबलेट का नियमित इस्तेमाल कर रही हूं । इसके इस्तेमाल से गर्भधारण नहीं होता है और अनचाहे गर्भ की चिंता से भी छुटकारा मिलता है।“
वहीं हितग्राही मधु साहू कहती है,“मैं एक गृहणी हूँ,मेरी 1 वर्ष की एक बच्ची है और मैं अभी दोबारा मां बनना नहीं चाहती हूँ। मैं अपने बच्चों में 5 वर्ष का अंतर रखना चाहती हूँ ताकि मैं अपने पहले बच्चे का देखरेख अच्छे से कर सकूं । इसलिए मैं छाया गोली का प्रयोग कर रहीं हूँ इसकी जानकारीमुझे मितानिन दीदी के द्वारा मिली है | उन्होंने बच्चों में अंतर रखने के लिए छाया गोली का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी और कहा था कि इसको खाने से तुम अनचाहे गर्भ को रोक सकती हो और जब बच्चा चाहिये तब इस गोली का उपयोग बंद कर देना।“
छाया गर्भ निरोधक गोली प्राप्त करने की सुविधा जिला अस्पताल, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध है।अनेक मितानिन स्वयं परिवार नियोजन के लिए छाया अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। साथ ही अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रहीं हैं।
छाया का नहीं है कोई साइड इफेक्ट
स्टीरॉयड न होने की वजह से छाया नान हार्मोनल गर्भनिरोधक गोली है, जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। मासिक चक्र के दीर्घकरण के अलावा छाया का कोई दुष्प्रभाव नहीं पाया गया है। हार्मोनल गोलियों की तुलना में छाया के सेवन से मोटापा, मतली होना, उल्टी या चक्कर आना, रक्तस्त्राव और मुहांसे जैसे कोई दुष्प्रभाव नहीं होते। इस कारण यह अधिक सुरक्षित है।
ऐसे करें छाया का सेवन
छाया का सेवन आरंभ करने के लिए मासिक धर्म शुरू होने वाले दिन पहली गोली लेनी होती है। इसके बाद चौथे दिन दूसरी गोली। उदाहरण के तौर पर यदि किसी का मासिक धर्म रविवार को शुरू हुआ तो पहली गोली रविवार को व दूसरी चौथे दिन यानि बुधवार को लेनी होगी। इसके बाद तीन माह तक हर सप्ताह रविवार और बुधवार को यह गोली लेनी है।तीन महीने बाद हफ्ते में एक गोली सिर्फ रविवार को लेना है जब तक बच्चा नहीं चाहिये।
ज़िले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर है उपलब्ध
छाया टेबलेट जिला मातृएवं शिशु अस्पताल के अलावा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सभी उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर मिलती है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में 11सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 35प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,163उप स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य केन्द्रों है ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
