September 08, 2026
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    सेहत / शौर्यपथ / सोचिए! आप किसी पार्टी में गए हैं। वहां आपकी पसंद की कई तरह की डिश रखी हुई हैं लेकिन आप इन पकवानों को खाने से घबरा रहे हैं। इसकी वजह है कि खाना खाने के कुछ देर बाद ही आपको टॉयलेट की तरफ भागने की समस्या है। कल्पना से अलग यह सच्चाई उन लोगों के लिए बहुत ही भयावह है, जो इस समस्या से गुजर रहे हैं। यह समस्या तब और भी गंभीर हो जाती है, जब खाना खाते ही शौचालय जाने से वजन घटने लगता है। कई बार शौच जाने से बचने के लिए व्यक्ति अपनी डाइट में कटौती तक कर लेता है। ऐसे में कुछ ऐसे उपाय हैं, जिससे आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए, पहले जान लेते हैं कि आखिर क्या है यह समस्या-
    गैस्ट्रो-कॉलिक रिफलक्स की समस्या
    खाना खाने के तुरंत बाद पॉटी लगने की समस्या को गैस्ट्रो-कॉलिक रिफलक्स कहते हैं। देखा गया है कि ये समस्या उन लोगों को ज्यादा आती है, जो शुरुआत में लंबे समय तक शौच को रोककर रखते हैं।
    इन उपायों को आजमाएं
    खाना अच्छी तरह चबाकर खाएं।
    फाइबर वाले आहारों का करें सेवन।
    3-4 बार में थोड़ा-थोड़ा भोजन करें।
    आहार में शामिल करें ये चीजें
    इस समस्याह से बचने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें। फाइबर से भरपूर खाद्य पर्दा‍थों में नाशपाती, सेब, मटर, ब्रोकोली, साबुत अनाज, सेम और दालें शामिल है। साथ ही आहार में दही, कच्चे सलाद, अदरक, अनानास, अमरूद, अजमोद आदि को शामिल करें। इसके अलावा केले, आम, पालक, टमाटर, नट्स, और शतावरी आदि आहारों में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए ये आहार भी फायदेमंद हैं।

    सेहत / शौर्यपथ / गुड़ का इस्तेमाल सर्दियों में सबसे ज्यादा किया जाता है। चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करने से खांसी-जुकाम से बचाव होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सेहत के लिए गुड़ बहुत गुणकारी होता है, यह बात हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुड़ का इस्तेमाल त्वचा को निखारने और कई परेशानियों में भी कारगर है। आइए, जानतेे हैं गुड़ के फायदे-
    इन गुणों से भरा है गुड़
    गुड में विटामिन -A और विटामिन -B, सुक्रोज, ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, मैग्नेशियम तत्व पाए जाते हैं। फास्फोरस की मात्रा अधिक रहती है। गुड़ में कई तरह के आवश्यक मिनरल्स और विटामिन होते है। जो त्वचा के लिए प्राकृतिक क्लींजर का काम करते है। ये शरीर को अंदर से साफ रखते है, जो त्वचा के ग्लो करने के लिए बहुत आवश्यक होता है शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में गुड़ सहायक होता है। गुनगुने पानी या फिर चाय में शक्कर की जगह गुड़ पीना चाहिए, इससे सेहत और सुंदरता दोनों बनी रहती हैं।
    झाइयों और दाग-धब्बों
    इस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच गुड़ पाउडर लें और उसमें 1 चम्मच टमाटर का रस, नींबू का रस और हल्दी की एक चुटकी मिक्स कर लें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और लगभग 15 मिनट तक रहने दें। बाद में इसे सामान्य पानी से धो लें।
    झुर्रियों लिए उपाय
    1 चम्मच पिसे हुए गुड़ में 1 टीस्पून ब्लैमक टी, 1 टीस्पून अंगूर का रस, एक चुटकी हल्दी समेत थोड़ा सा गुलाबजल मिक्स करें। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर इसे सामान्य पानी से धो लें।
    गुड़ खाने के फायदे
    एसिडिटी से छुटकारा
    आपको गैस या एसिडिटी है, तो गुड़ खाने से फायदा मिलेगा। वहीं, गुड़, सेंधा नमक और काला नमक मिलाकर खाने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिल जाता है।
    खून की कमी दूर करता है
    गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है। अगर आपका हिमोग्लोबिन कम है, तो रोजाना गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलने लगेगा। गुड़ खाने से शरीर में लाल रक्त़ कोशिकाओं की मात्रा बढ़ जाती है।
    कंट्रोल रहेगा ब्लड प्रेशर
    गुड़ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है। खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है।
    हड्डियां रहेंगी मजबूत
    गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। यह दोनों तत्व हड्डियों को मजबूती देने में बेहद मददगार हैं। गुड़ के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।
    शरीर बनेगा मजबूत और एक्टिव
    गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है। अगर आपको दूध नहीं पसंद है, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से आपको थकान महसूस नहीं होगी।
    सर्दी-जुकाम में कारगर
    गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है। खांसी से बचने के लिए चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए। गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री दारा सिंह चौहान ने आज दुधवा एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।
     चौहान ने आज यहां वन विभाग के मुख्यालय पर दुधवा नेशनल पार्क एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व के वर्ष 2०2०-21 के पर्यटन सत्र के ऑनलाइन शुभारम्भ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वन मैन-वन जॉब की तर्ज पर दुधवा नेशनल पार्क एवं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए। स्थानीय लोगों को ड्राईवर, गाइड आदि पदों पर रखने से वे जंगल के प्रति समर्पित भाव से काम करेंगे।
    उन्होंने कहा कि दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पूर्व में पर्यटन सत्र 15 नवम्बर से आरम्भ हुआ करता था, लेकिन कतिपय स्रोतों से यह अनुरोध प्राप्त होने पर कि जिस प्रकार अन्य प्रदेशों में टाइगर रिजर्व 15 अक्टूबर से खोल दिये जाते है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजवोर् को भी खोला जाये। विभाग के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाईगर रिजर्व 15 दिन पहले खोल दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे खास बात यह रही कि सैलानियों के स्वागत के लिए शेरनी ने आज चार बच्चों को जन्म भी दिया है, यह बड़े हर्ष का विषय है। इससे पहले दुधवा में पिछले साल का विश्व रिकार्ड है कि शेरनी ने एक साथ पांच बच्चों को जन्म दिया था।
    वन मंत्री ने अधिकारियों को यह निदेर्श दिये कि पर्यटन के लिए विकसित संसाधनों के अतिरिक्त स्थानीय निवासियों को सैलानियों के होम-स्टे के लिए संसाधन विकसित कराकर जोड़ने का प्रयास किया जाये। उन्होंने कहा कि सैलानियों के लिए उपलब्ध पर्यटन सुविधा के आधार पर प्रतिदिन भ्रमण किये जाने वाले सैलानियों की संख्या निर्धारित की जाये तथा सैलानियों की उत्सुकता के लिए उनके भ्रमण के दौरान एक से दो मिनट का संक्षिप्त वीडियों क्लिप तैयार कराकर उनके अनुभवों एवं सुुझावों को भविष्य में उन्हें उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधाओं के लिए आधार बनाया जाए।
    श्री चैहान ने कहा कि विश्व में काजीरंगा के बाद दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पाया जाता है और विभाग से यह अपेक्षा करता हूं कि आने वाले समय में काफी स्कीम लाई जाए, जिससे सैलानियों को और सुविधाएं प्राप्त हो सकेें। उनहोंने कहा पूरे विश्व में उत्तर प्रदेश को ख्याति मिले इसके लिए विभागीय कमीर् पूरी निष्ठा के साथ मिलकर काम करें । टाइगर रिजर्व के आस-पास थारू हट बनाया जाए, जिससे टाइगर रिजर्व को हेरिटेज लुक मिल सके।
    पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने ऑनलाइन उद्घाटन के मौके पर कहा कि 15 दिन पहले दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व को खोलना गर्व की बात है। साथ ही विभागीय अधिकारी/कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन में अधिकतम कितने सैलानी जा सकते हैं इसका निधार्रण अधिकारी कर लें, क्योंकि जब तक सैलानी व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं दिखेंगे तबतक हम अपनी कार्ययोजना को सफल नहीं मान सकते हैं।इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव सुनील पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष डा० राजीव गर्ग, प्रबन्ध निदेशक, वन निगम, अजय कुमार और मुकेश कुमार सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

    वास्तुशास्त्र /शौर्यपथ / वास्तु पुरुष के 32 पदों में से यह कड़ी पश्चिम दिशा के 17 से 24 पदों तक पर आधारित है। इसमें हम आपको बताएंगे पश्चिम दिशा में किस जगह दरवाजा होने पर क्या नुकसान और फायदा हो सकता है। ज्योतिषचार्य पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार वास्तु की दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण है।
    डब्ल्यू-1-यह पश्चिम दिशा का प्रथम पद है और पितृ कहलाता है। ऐसे पद पर दरवाजा होने पर घर से गरीबी नहीं जाती। घर के सदस्यों की आयु कम हो सकती है। रोग पीड़ा एवं अनावश्यक खर्चे बने रहते हैं। विशेष रुप से गृहस्वामी के लिए यह स्थान द्वार के लिए अशुभ होता है।
    डब्ल्यू-2-पश्चिम दिशा का दूसरा पद द्वारिका कहलाता है। यह स्थान भी दरवाजे के लिए शुभ नहीं होता है। जिनके घर का द्वार इस पद पर होता है उस घर के निवासियों में अपव्यय की प्रवृत्ति होती है। नौकरी और व्यापार में अस्थिरता चलती है। कभी-कभी भयंकर धोखा हो जाता है और कर्जा बढ जाता है।
    डब्ल्यू-3-पश्चिम दिशा का तीसरा पद सुग्रीव कहलाता है। यह पद पश्चिम दिशा का सबसे शुभ पद है। इस पद पर दरवाजा होने पर घर में खुशियों की बहार आ जाती है। व्यापार, फैक्ट्री, दुकान आदि के लिए द्वार बनाने के लिए बहुत ही शुभ स्थान है। यहां पर दरवाजा होना घर की विकास के द्वार खोल देता है। यदि कंपनी अथवा फैक्ट्री या दुकान का दरवाजा हो तो शीघ्र ही कई ब्रांच खुल जाती हैं।
    डब्ल्यू-4-पश्चिम दिशा का चौथा पद पुष्यदंत कहलाता है। इस पद पर घर का द्वार बहुत शुभ रहता है। इस पद पर द्वार होने से घर में संतुलित आय होती है। इस घर की संतान वृद्धि को प्राप्त होते हैं और उन्नति करते हैं। घर में सुख, शांति, एकता का निवास होता है। ऐसे घर के लोग मर्यादित जीवन जीते हैं।
    डब्ल्यू-5- पश्चिम दिशा का पांचवा पद वरुण कहलाता है। पश्चिम दिशा का यह पद द्वार के लिए बहुत शुभ होता है। जिसके घर का द्वार इस पद पर होता है, वहां के लोग बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वे हर कार्य में निपुणता प्राप्त कर लेते हैं और धन वृद्धि व प्रतिष्ठा वृद्धि निरंतर बनी रहती है। इसी पद पर द्वार वाले व्यक्ति दूसरों की सहायता करने में देर नहीं करते।
    डब्ल्यू-6-पश्चिम दिशा का छठा पद असुर कहलाता है। यहां द्वार बनाना परिवार के लिए शुभ नहीं होता है। ऐसे घरों में तनाव और निराशा का भाव जल्दी आता है। आर्थिक हानियां निरंतर चलती रहती हैं। कई घरों में तो ऐसी स्थिति वाले द्वारों के घरों के सदस्य डिप्रेशन में पाए गए हैं। धन संबंधी कार्यों में सफलता कम मिलती है। धन के मामले में कोई न कोई अभाव बना रहता है।
    डब्ल्यू-7- पश्चिम दिशा का सातवां पद सौख्य कहलाता है। इस पद पर द्वार होना भी शुभ नहीं होता है। हमेशा निराशाजनक वातावरण रहता है। ऐसे घरों के व्यक्ति स्वार्थी हो जाते हैं। गृह स्वामी को निरंतर घर से बाहर रहना पड़ता है। कई घरों में वहां के सदस्यों के मन में नकारात्मक विचार घर कर लेते हैं। इससे वहां की प्रगति प्रभावित होती है।
    डब्ल्यू-8-पश्चिम दिशा का आठवां एवं अंतिम पद पापयक्ष्मा कहलाता है। जिन व्यक्तियों के घर के द्वार इस दिशा में होते हैं उस घर के लोग स्वार्थी होते हैं। घर के महिला सदस्य अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहती हैं। पुरुष वर्ग को अधिकतर बाहर रहना पड़ता है। कई लोग तो विदेशों में भी फंस जाते हैं। अर्थात यह स्थान द्वार के लिए उपयुक्त नहीं है। घर में अनावश्यक आवागमन बना रहता है। इससे घर में अपव्यय अधिक होता रहता है।

    शिक्षा /शौर्यपथ / नीति शास्त्र में बताया गया है कि स्त्रियों के व्यक्तित्व और स्वभाव को समझना मुश्किल है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि महिलाएं किस वक्त खुशी और किस व्यक्ति दुखी हैं, यह जानना कठिन काम है। ऐसा कहा जाता है कि स्त्रियों के स्वभाव को समझना दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में से एक है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में कुछ ऐसी आदतें बताई हैं, जिनसे महिलाओं के स्वभाव और व्यक्तित्व को समझना आसान होता है।
    1. धार्मिक कार्यों में रूचि- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिन स्त्रियों की धार्मिक कार्यों में रूचि होती है, उनका मन शांत होता है। ऐसी महिलाएं तरक्की या सफलता पाने के लिए एकाग्र होती है। नीति शास्त्र के अनुसार, ऐसी स्त्रियों को दूसरों की सफलता या असफलता परेशान वहीं करती है। वह सिर्फ अपने जीवन के उद्देश्य में मग्न होती हैं।
    2. आलसी- आचार्य चाणक्य कहते हैं जो स्त्रियां आलस्य से भरी होती हैं, उन्हें जीवन में सफलता हासिल करना मुश्किल होता है। नीति शास्त्र के अनुसार, ऐसी महिलाओं को सफलता पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कहते हैं इन्हें परिवार के सदस्य खूब प्रेम देते हैं लेकिन समाज में मान-सम्मान नहीं मिलता है।
    3. अनुशासन में रहना- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो स्त्रियां अनुशासन में रहती हैं वह जल्दी सफलता हासिल करती हैं। कहते हैं कि ऐसी महिलाएं दूसरे के लिए प्रेरणा होती हैं। नीति शास्त्र के अनुसार, अपने सपनों और कार्यों को पूरा करने के कारण इस स्वभाव की महिलाओं को परिवार के सदस्यों के साथ समाज में भी खूब मान-सम्मान मिलता है।
    4. ईर्ष्या करने वाली- माना जाता है कि जिन महिलाओं में ईर्ष्या का भाव होता है, वह चालाकी से खुद तरक्की हासिल करती हैं। कहते हैं कि ऐसी स्त्रियां दूसरों के सफलता के रास्ते में बाधाएं डालती हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऐसी महिलाओं पर विश्वास करने से बचना चाहिए। क्योंकि समय आने पर आप भी विश्वासघात का शिकार हो सकते हैं।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीकृष्ण पहले ही बता चुके थे कि जयद्रथ को उसके पिता द्वारा वरदान मिला है कि जो भी उसका वध करेगा और जैसे ही उसका सिर भूमि पर गिरेगा तो वध करने वाले के सिर के 100 टुकड़े हो जाएंगे। तब श्रीकृष्ण अर्जुन को एक नई युक्ति बताते हैं उसी युक्ति और नीति के अनुसार अगले दिन का युद्ध प्रारंभ हो जाता है। चारों ओर शंख ध्वनि बजने लगती है। अर्जुन युद्ध भूमि पर तबाही मचा देता है। सभी कौरव सिंधु नरेश जयद्रथ की सुरक्षा की शपथ ले चुके होते हैं।
    अर्जुन के रोद्र रूप को देखकर सिंधु नरेश जयद्रथ घबरा जाता है। कृपाचार्य कहते हैं कि तुम निश्चिंत हो जाओ तुम्हें कुछ नहीं होगा। शकुनि कहता है कि सिंधु नरेश क्या आप हम पर भरोसा नहीं करते हैं? यह सुनकर वह कहता है कि करता हूं परंतु आपसे ज्यादा मुझे अर्जुन के शौर्य और पराक्रम पर भरोसा है। अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा अवश्य पूरी करेगा और उसकी प्रतिज्ञा पूरी होने का अर्थ है मेरा अस्तित्व ही मिट जाना। लगता है कि सूर्य को भी अस्त होने की कोई जल्दी नहीं है। इस तरह सिंधु नरेश बहुत ही घबरा जाता है।
    उधर, श्रीकृष्ण कहते हैं कि सूर्य सर पर आ गया है। आधा दिन हाथ से निकल गया है और अब तक जयद्रथ हमें दिखाई नहीं दिया है। यह सुनकर अर्जुन कहता है कि कब तक, कब तक छिपेगा अपनी मृत्यु से? आज में उसे जीवित नहीं छोड़ूंगा। इस पर श्रीकृष्‍ण कहते हैं कि पार्थ! ये तुम्हारी भावना बोल रही है। इस समय तुम भावनावश सच्चाई को भूल रहे हो। यह सुनकर अर्जुन पूछता है- कौनसी सचाई। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि यही की द्रोणाचार्य ने कुशलतापूर्वक व्यूह के अंदर व्यूह की रचना की है। तुम कौरवों का जो व्यूह ध्वस्त करके जयद्रथ तक पहुंचना चाहता हो वह द्रोणाचार्य का रचा हुआ केवल बाहरी व्यूह है और उन्होंने जो आंतरिक व्यूह बनाया है उसमें जयद्रथ सुरक्षित है और इस व्यूह के मुख पर स्वयं द्रोणाचार्य खड़े हैं। अब तक हम इस बाहरी व्यूह का भेदन भी नहीं कर सके हैं जबकि हमें चाहिए कि हम इस बाहरी व्यूह को तोड़कर हम आगे बढ़ें और द्रोणाचार्य से युद्ध करके उन्हें पराजित करें। इसके बाद ही हम आंतरिक व्यूह में प्रवेश कर सकेंगे। जयद्रथ तक पहुंचना बहुत ही दुष्कर कार्य है। क्योंकि हमारे पास केवल सूर्यास्त तक का समय है और समय है कि हमारे हाथों से निकला जा रहा है।
    यह सुनकर अर्जुन कहता है कि धन्यवाद केशव जो तुमने मुझे गुरु द्रोणाचार्य की चाल समझा दी। अब चलो गुरु द्रोणाचार्य और उस आंतरिक व्यूह की ओर चलो। यह देखकर दुर्योधन सेना को आदेश देता है कि अर्जुन को रोको और उसे आगे मत बढ़ने दो, उसे चारों ओर से घेर लो। परंतु अर्जुन अपने तीरों से कोहराम मचा देता है। अर्जुन को रोकने के लिए कर्ण आता है परंतु भीम बीच में ही कूदकर कहता है कि अर्जुन तुम जाओ, इस सूत पुत्र से तो मैं निपटता हूं।
    उधर यह घटना संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि अर्जुन को रोकने के लिए कौरववीर एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं परंतु उसे रोकने में असफल हैं। महाराज अर्जुन ने मानो आज साक्षात यमराज का अवतार धारण कर लिया है। उसके सामने जो भी कोई आता है ढेर हो जाता है। यह सुनकर धृतराष्ट्र कहते हैं कि संजय यह तो बताओ कि सिंधु नरेश जयद्रथ तो सुरक्षित है ना? इस पर संजय कहता है कि हां महाराज परंतु वो अपना आत्मविश्वास खो चुके हैं। तब धृतराष्ट्र कहते हैं कि तुम सबकुछ बता रहे हो संजय परंतु दिन कितना चढ़ चुका है ये नहीं बता रहे हो। तब संजय बताता है कि ऐसा लगता है कि सूर्य कुरुक्षेत्र के आकाश में ठहरकर अर्जुन का पराक्रम देख रहा है।
    उधर अर्जुन लाशों के ढेर लगा देता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि वाह अर्जुन वाह। आड़े आने वाली हर बाधाओं को इसी प्रकार दूर करते जाओ। यह देखकर दुर्योधन अर्जुन को रोकने का प्रयास करता है परंतु अर्जुन के पराक्रम के आगे उसे हार मानना पड़ती है। श्रीकृष्ण कहते हैं- दुर्योधन पहले गुरु द्रोण से धनुर्विद्या की शिक्षा लेकर आना फिर अर्जुन से युद्ध करना। फिर अर्जुन कहता है कि चलो केशव, रथ द्रोणाचार्य के सामने ले चलो।
    अर्जुन का द्रोणाचार्य से भयंकर युद्ध होता है। इस बीच सिंधु नरेश घबराता रहता है। कृपाचार्य और अश्वत्थामा उसे सांत्वना देते हैं परंतु सिंधु नरेश कहता है कि अरे! अर्जुन कर्ण और दुर्योधन सहित सभी सेना को परास्त करके यहां तक पहुंच गया है। अब मुझे कोई नहीं बचा सकता। तुम मानो या ना मानो मेरी रक्षा का वचन देकर कर्ण, दुर्योधन, शकुनि और तुम लोग अपने ही प्राणों की रक्षा करते रहे इसलिए अर्जुन यहां तक आ पहुंचा, नहीं तो वह यहां सूर्यास्त तो क्या प्रलय तक भी नहीं पहुंच सकता था। बस अब मुझे लगता है कि मेरा अंत किसी भी क्षण आ जाएगा।
    उधर धृतराष्ट्र पूछता है कि संजय सूर्यास्त हुआ या नहीं? तब संजय कहता है कि सूर्यास्त होने में अभी समय है महाराज। यह सुनकर धृतराष्ट्र कहता है कि क्या यह सूर्य भी पांडवों का पक्षपाती बन गया है। शीघ्र बताओ संजय कि अर्जुन अब कहां तक पहुंच गया है। यह सुनकर संजय कहता है कि अर्जुन अब द्रोणाचार्य के रचे दूसरे व्यूह के पास पहुंच गया है।
    अर्जुन और द्रोणाचार्य में भयंकर युद्ध चल रहा होता है। तभी श्रीकृष्ण सूर्य को देखकर कहते हैं कि पार्थ सूर्य पश्चिम दिशा की ओर झुक गया है पर हम व्यूह में अब तक प्रवेश भी नहीं कर सके। हमें व्यूह में शीघ्र ही प्रवेश करना चाहिए। यह सुनकर अर्जुन कहता है कि परंतु द्रोणाचार्य को परास्त किए बिना इस व्यूह में प्रवेश नहीं कर सकते। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि और द्रोणाचार्य के हाथों में जब तक शस्त्र है उन्हें कोई भी परास्त नहीं कर सकता। चाहे वह कितना ही वीर क्यों ना हो। यदि तुम्हें जयद्रथ का वध करना है तो द्रोणाचार्य को टालकर व्यूह में प्रवेश करना होगा और वह भी अतिशीघ्र क्योंकि अब हमारे पास समय नहीं है। यह सुनकर अर्जुन अपने तीर से माया रचता है, द्रोणाचार्य को एक नहीं रथ पर बैठे कई अर्जुन और कृष्ण नजर आने लगते हैं। यह देखकर सभी घबरा जाते हैं।
    उधर, धृतराष्ट्र कहते हैं कि क्या कह रहे हो तुम संजय, कुरुक्षेत्र में कई अर्जुन प्रकट हो गए हैं? इस पर संजय कहता है कि हां महाराज दुर्योधन और अन्य कौरव भ्रम में पड़ गए हैं। तब धृतराष्ट्र कहते हैं कि ये अर्जुन मायावी कब से बन गया? कहीं ये कृष्ण की माया तो नहीं?
    फिर द्रोणाचार्य बताते हैं कि अर्जुन ने गांधर्वास्त्र फेंककर हमें भ्रमित कर दिया है। फिर दुर्योधन के कहने पर द्रोणाचार्य गांधर्वास्त का प्रत्युतर देते हैं और अर्जुन की माया को समाप्त कर देते हैं परंतु जब माया समाप्त होती है तो शकुनि कहता है आचार्य ये असली अर्जुन और कृष्ण कहां चले गए? दिखाई नहीं दे रहे। यह सुनकर सभी घबरा जाते हैं तभी दुर्योधन कहता है वो देखो आचार्य अर्जुन व्यूह में प्रवेश कर गया है। आचार्य अब क्या होगा? उधर, भीम के साथ युधिष्ठिर भी कहता है कि इसी व्यूह में जयद्रथ को छुपाया है।
    द्रोणाचार्य कहते हैं कि तुम चिंता मत करो अर्जुन जयद्रथ के पास पहुंच ही नहीं पाएगा क्योंकि अर्जुन के पास उतना समय ही नहीं है। वो देखिये सूर्यास्त होने का समय आ चुका है। सभी सूर्य की ओर देखते हैं। सूर्य बस डूबने ही वाला रहता है। यह देखकर सभी खुश हो जाते हैं। उधर, धृतराष्ट्र भी यह सुनकर खुश हो जाता है।
    उधर, अर्जुन व्यूह को तोड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है और इधर युधिष्‍ठिर सहित सभी पांडव सूर्य को देखकर चिंतित हो जाते हैं और खुद को कोसते रहते हैं।
    दूसरी ओर सिंधु नरेश अश्‍वत्थामा और कृपाचार्य से कहता है कि इन धमाकों का अर्थ यह है कि अर्जुन ने ना केवल व्यूह में प्रवेश कर लिया है बल्कि वह मेरे निकट भी आ पहुंचा है। बस कुछ ही क्षणों में वह मेरे सर तक भी पहुंच जाएगा। तब अश्वत्‍थामा कहता है कि घबराइये नहीं सिंधु नरेश इसकी कोई संभावन दिखाई नहीं देती क्योंकि एक व्यहू को ध्वस्त करने के बाद इस दूसरे व्यूह को ध्वस्त करने में अर्जुन को सारा दिन लग जाएगा। परंतु इतना समय लाएगा कहां से वह?
    तभी श्रीकृष्ण अपनी माया से सूर्य को अस्त कर देते हैं। सभी कौरव पक्ष में हर्ष व्याप्त हो जाता है। अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा अनुसार अग्नि में प्रवेश करने के लिए चिता तैयार करता है और चिता में अग्नि प्रज्वलित कर देता है। यह देखने के लिए सभी कौरव एकत्रित हो जाते हैं। उनके साथ जयद्रथ भी हंसता हुआ वहां आ खड़ा होता है। तभी श्रीकृष्ण अपनी माया दिखाते हैं और सूर्य फिर से निकल आता है।
    तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि अभी सूर्यास्त कहां हुआ है पार्थ, वो देखो। सभी आसमान में देखने लगते हैं। यह देखकर जयद्रथ घबराकर कहता है कि ये कैसे हो गया? फिर श्रीकृष्ण कहते हैं कि और जब सूर्यास्त नहीं हुआ है तो तुम्हें अग्नि में प्रवेश करने के बदले अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनी चाहिए। पार्थ! वो देखो सूर्य और वो रहा जयद्रथ, तुम्हारा शत्रु। यह देख और सुनकर अर्जुन हर्षित हो जाता है और जयद्रथ कहता है बचाओ। परंतु तब तक अर्जुन अपने धनुष पर बाण का संधान करके छोड़ चुका होता है।
    जयद्रथ का सिर कटकर धनुष पर सवार होकर आसमान में दूर निकल जाता है और सीधा जाकर उसके पिता की गोद में गिर जाता है। तपस्या कर रहे जयद्रथ के पिता चौंक जाते हैं और वह उसका सिर उठाकर भूमि पर रख देते हैं तभी उनके सिर के 100 टुकड़े हो जाते हैं। यह देखकर अर्जुन और श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं तभी आसमान में सूर्यास्त हो जाता है। जय श्रीकृष्णा।

     शौर्यपथ /सामग्री : 1 किलो कद्दूकस की हुई लौकी, 50 ग्राम ताजा मावा (खोया), 2 बड़े चम्मच घी, 150 ग्राम शकर, पाव चम्मच इलायची पावडर और 2-3 केसर के लच्छे।
    विधि :
    सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर किसी हुई लौकी को हल्का भूनकर अलग रख लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा पानी डालें, फिर चीनी डालें। जब शकर पूरी तरह घुल जाए, तब इसमें भूनी हुई लौकी डालकर चलाएं।
    जब शकर का पानी पूरी तरह खत्म हो जाए और चाशनी जैसा गाढ़ा दिखाई देने लगे, तब इसमें मावा डालकर हिलाएं। फिर इलायची पावडर डालें और अच्छी तरह चलाकर 2-3 मिनट तक चलाएं। अब केसर को हाथ से मसलकर ऊपर से बुरकाएं।
    लीजिए आपके लिए तैयार है लौकी और खोया का जायकेदार हलवा। व्रत के दिनों में लाभदायी ये हलवा सेहत की दृष्‍टि से बहुत फायदेमंद है।

    खाना खजाना / शौर्यपथ / 1/2-1/2 कटोरी उड़द मोगर-मूंग मोगर, मैदा 500 ग्राम, चुटकी भर हींग, 2 चम्मच दरदरी सौंफ, 2 चम्मच धनिया पावडर, 1 कटोरी दही, गरम मसाला 1/2 चम्मच, लाल मिर्च 1 चम्मच, तेल तलने के लिए।
    विधि :
    दोनों दालों को कचोरी बनाने के 3-4 घंटे पूर्व भिगो दें। कुछ दाल छोड़ कर बाकी को दरदरा पीस लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा तेल लेकर सौंफ का बघार व हींग डालें, दाल दरदरी एवं खड़ी दोनों को भूनें व सभी मसाले मिलाकर ठंडा कर लें।
    मैदे में 1/2 टी स्पून नमक मिलाकर छान लें। डेढ़ बड़ा चम्मच मोयन डालकर रोटी जैसा गूंध लें, छोटी-छोटी लोई बना लें, हथेली को चिकना करके लोई फैलाएं, किनारे पतले करके मसाला भरें व बंद करके कचौरियां तैयार कर लें। तेल गर्म करें फिर गुनगुने तेल में कचौरियां डालें।
    धीमी आंच पर कचौरियां सुनहरी होने तक तल लें। गर्मा-गर्म कचौरियों को रायते या हरी चटनी के साथ सर्व करें और पर्व का आनंद उठाएं।

    शौर्यपथ / इन दिनों अधिकतर लोगों की पहली पसंद जींस ही है। ये एक ऐसा परिधान है जिसे हर कोई पहनना पसंद करता है। लेकिन कुछ लोग स्टाइलिश दिखने के लिए स्किन टाइट जींस
    पहनना पसंद करते है। यदि आप भी टाइट जींस पहनते है, तो आपको इससे होने वाले नुकसान के बारे में जरूर जानना चाहिए।
    सेहत को ये 4 नुकसान हो सकते हैं -
    1 टाइट जींस पहनने की वजह से महिलाओं को कमर से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अत्यधिक टाइट जींस पूरा दिन पहने रहने से कमर दर्द के अलावा धीरे-धीरे स्लिप डिस्क होने की आशंका भी बढ़ सकती है।
    2 टाइट जींस पहनने से वेरिकोज वैन (Varicose Veins) बीमारी जिसमें बढ़ी हुई नसें, जो आमतौर पर पैरों और तलवों में दिखती हैं, होने की आशंका रहती है। इसके अलावा टाइट जींस के कारण पैरों में ऐंठ की समस्या भी बढ़ सकती है।
    3 टाइट जींस पहनने से शरीर में खून का संचार बाधित हो सकता है, जिससे कई अन्य परेशानियां हो सकती है।
    4 ऐसा भी माना जाता है कि टाइट जींस पहनने से गर्भाशय का संकुचन और बांझपन का खतरा भी बढ़ सकता है। साथ ही टाइट होने की वजह से
    पेट पर काफी जोर पड़ता है जो आगे चलकर समस्या पैदा कर सकता है।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / उत्तर मध्य रेलवे के तीनो मंडलों प्रयागराज, झांसी एवं आगरा में महिला यांत्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “ मेरी सहेली” अभियान चलाया गया है।
    आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस अभियान के अंतर्गत प्रारंभिक स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक ट्रेनों से यात्रा के दौरान महिला यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। रेल सुरक्षा बल उत्तर मध्य रेलवे (उमरे) की इस पहल के तहत, युवा महिला आरपीएफ कर्मियों की एक टीम द्वारा अकेले यात्रा कर रही महिला यात्रियों के साथ यात्रा के प्रारंभिक स्टेशनों पर वातार् की जाती है।
    उन्होंने बताया कि इस कार्यर्क्म के तहत 25 अक्टूबर से अबतक उमरे में संचालित होने वाली आठ प्रारंभिक ट्रेनों एवं 67 पासिंग ट्रेनों में सतत अभियान चलाया जा रहा है । इसके लिए 121 सुरक्षा कर्मियों की 27 टीमें गठित की गई हैं।गंतव्य स्टेशन पर रेल सुरक्षा बल की टीमें चिन्हित महिला यात्रियों से फीडबैक भी एकत्र करती हैं और इन प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है। सूत्रों ने बताया कि इन महिला यात्रियों को यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सभी सावधानियों के बारे में बताया जाता है और कहा जाता है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा सम्बंधित कोई समस्या होने पर वे 182 डायल करें। रेल सुरक्षा बल टीम महिला यात्रिओं की सीट संख्या नोट करती है और उन्हें मार्ग के स्टेशनों पर मॉनिटरिंग हेतु साझा करती हैं। मार्ग के ठहरावों के दौरान प्लेटफार्म ड्यूटी पर नियुक्त रेल सुरक्षा बल कमीर् संबंधित कोच और बर्थ पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर महिला यात्रियों से वातार् भी करते हैं।रेल सुरक्षा बल, रेल सुरक्षा विशेष बल के ऑनबोर्ड एस्कॉर्ट भी अपनी ड्यूटी अवधि के दौरान सभी चिन्हित कोच, पहचान वाले बर्थ को कवर करते हैं। उन्होंने बताया कि इन फीडबैक के विश्लेषण के आधार पर यदि कोई सुधार वांछित हो तो सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है। इसके अतिरिक्त यदि “मेरी सहेली” पहल के तहत कवर की गई ट्रेन से कोई डिस्ट्रेस कॉल आती है, तो कॉल के निरकारण की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर की जाती है। “मेरी सहेली” पहल को महिला यात्रियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।

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