
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
सेहत / शौर्यपथ / सिर्फ बादाम और अखरोट पर ही क्यों अटके रहें , जब आप किशमिश से भी बहुत सारी गुडनेस ले सकते हैं? यहां जाने कि क्यों आपको इस स्वस्थ नाश्ते को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।
कौन कहता है कि स्वस्थ खाद्य पदार्थ हमेशा उबाऊ होते हैं? मदर नेचर में जब इतने स्वादिष्ट, स्वस्थ और पौष्टिक सुपरफूड मौजूद हैं जिसका हम किसी भी समय आनंद ले सकते हैं, और वह भी बिना किसी अपराधबोध के। जब पोषक तत्वों की बात आती है ऐसा ही एक सुपरफूड है ?किशमिश
किशमिश मूल रूप से सूखे हुए अंगूर होते हैं, जो विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट, फाइटोन्यूट्रिएंट्स, पॉलीफेनोल्स और कई अन्य आहार फाइबर जैसे कई पोषक तत्वों से भरे होते हैं।
यह सब किशमिश को उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है, जो अपने स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति सचेत हैं।
यहां दैनिक आधार पर किशमिश खाने के सात अद्भुत स्वास्थ्य लाभ हैं, जैसा कि अमरीन शेख, वोकहार्ट अस्पताल, मुंबई के प्रमुख आहार विशेषज्ञ और पोषण सुझा रहीं हैं:
1.किशमिश पूप को आसान बनाती है
स्वस्थ शरीर के लिए कब्जयुक्त पेट एक हेल होल है। यही कारण है कि आपको हर समय पाचन मार्ग को साफ रखने की आवश्यकता है। किशमिश निश्चित रूप से इसमें आपकी मदद कर सकती है!
किशमिश अघुलनशील आहार फाइबर युक्त है, जो उन्हें एक प्राकृतिक रेचक बनाता है। ये बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाता है, और हमारे सिस्टम से मल को चिकना बनाकर निकालने में मदद करती है।
वह कहती है, "किशमिश कब्ज के साथ-साथ पेट दर्द, इरिटेटिंग बाउल सिंड्रोम, गैस, सूजन और पेट फूलना जैसी अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से राहत प्रदान करती है।"
2.वजन बढ़ाने के लिए किशमिश खाएं
हर कोई वजन कम करने के लिए नहीं सोचता है। ऐसे लोग भी हैं जो स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए किशमिश पर भरोसा किया जा सकता है।
शेख बताती हैं, "अगर आप वजन बढ़ाना चाहती हैं, तो किशमिश आपकी सबसे अच्छे दोस्त हो सकती हैं। किशमिश फ्रुक्टोज और ग्लूकोज में समृद्ध हैं, जिससे यह आपको ऊर्जा प्रदान करती है। यह आपके सिस्टम में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाए बिना वजन बढ़ाने में आपकी मदद करेगी।"
3.यह कैंसर की रोकथाम में भी मददगार है
वह कहती हैं, "किशमिश की उपस्थिति के कारण किशमिश एंटीकार्सिनोजेनिक लाभ प्रदान करती है। कैटेचिन में पॉलीफेनोल यौगिक होते हैं, जो एंटीऑक्सिडेंट यौगिक होते हैं।"
4.यह आपके बीपी को नियंत्रण में रखती है
तनाव और हमारे खाने की आदतों से हमारे रक्तचाप में उतार-चढ़ाव हो सकता है। यह अच्छा संकेत नहीं है। लेकिन भगवान का शुक्र है कि किशमिश इसे कंट्रोल कर सकती है।
हाइ ब्लड प्रेसर ही नही लो ब्लड प्रेसर भी हो सकता है आपके सेहत के लिए हानी कारक। चित्र: शटरस्टॉककिशमिश आपकी बीपी को भी नियंत्रित करता है। चित्र: शटरस्टॉक
किशमिश में उच्च पोटेशियम सामग्री होती है, और पोटेशियम एक प्राकृतिक वासोडिलेटर है जो हमारी रक्त वाहिकाओं को आराम देता है, रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और इस प्रकार उच्च रक्तचाप से राहत देता है।
इसके अलावा, किशमिश में आहार फाइबर रक्त वाहिकाओं की कठोरता को कम करता है, जिससे रक्तचाप में सुधार होता है। यह बदले में उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करता है।
5.किशमिश इम्यूनिटी भी बढ़ाती है
कोविड -19 के लिए धन्यवाद, जिसने सभी को अपनी इम्?युनिटी पर ध्?यान देना सिखाया। जब किशमिश की बात आती है, तो उसमें विटामिन और खनिजों के साथ-साथ अन्य यौगिकों, जैसे एंटीऑक्सिडेंट और पॉलीफेनोल्स जैसे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
ये सभी हमारे सिस्टम में मुक्त कणों से लडऩे में मदद करते हैं, उन्हें स्थिर करते हैं और हमारी कोशिकाओं को सफेद रक्त कोशिकाओं सहित ऑक्सीडेटिव क्षति से रोकते हैं। ये सब मिलकर हमारी इम्?युनिटी को बढ़ाते हैं।
सुश्री शेख बताती हैं,"इनमें जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो विभिन्न संक्रमणों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।"
6.गठिया जैसे एंटी इंफ्लामेटरी विकारों को रोकने में मदद करता है
किशमिश गठिया और गाउट जैसी इंफ्लामेटरी समस्याओं के कारण दर्द से राहत प्रदान करने में सहायक होती है। इसका कारण एंटीऑक्सिडेंट और पॉलीफेनोल की उपस्थिति है।
वह कहती हैं, "विटामिन सी और पॉलीफेनोल जैसे एंटीऑक्सिडेंट प्रकृति में एंटी इंफ्लामेटरी हैं, जो गठिया और गठिया से जुड़े दर्द और सूजन से राहत देती हैं।"
7.यह आपको बेहतर नींद देने में भी है मददगार
कई कारणों से शांतिपूर्ण नींद की कमी आपके मानसिक के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी खराब कर सकती है। आपकी नींद संबंधी समस्?याओं को हल करने के लिए किशमिश से बेहतर क्?या होगा?
"आयरन जैसे आवश्यक पोषक तत्व की मौजूदगी के कारण अनिद्रा का इलाज करने के लिए किशमिश को काफी फायदेमंद माना गया है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, लोहा एक महत्वपूर्ण खनिज है जो न केवल हीमोग्लोबिन के उत्पादन को बढ़ाता है, बल्कि चयापचय में सुधार करता है, ऑक्सीजन वहन करता है, प्रतिरक्षा को मजबूत करता है और बेहतर नींद सुनिश्चित करता है।"
अंत मे कुछ महत्वपूर्ण
हालांकि इस बात पर ज्यादा शोध नहीं किया गया है कि किशमिश तनाव और अन्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर कैसे मदद करता है, इसके कुछ सकारात्मक निष्कर्ष निकले हैं। यह नींद को प्रेरित करने, आपके शरीर को आराम देने और आपको शांत रखने के लिए माना जाता है।
"इसके अलावा, अगर आपको मीठे की क्रेविंग बहुत ज्?यादा है, तो किशमिश चॉकलेट और कैंडी से बेहतर ऑप्?शन है। इसके मीठे स्वाद के कारण।"
तो, अब आप जानते हैं कि किशमिश आपके लिए इतनी अच्?छी क्?यों है!
खाना खजाना / शौर्यपथ / नवरात्रि के बाद अब जल्द ही करवा चौथ का त्योहार भी आने वाला है। इस दिन महिलाएं परिवार के लोगों के लिए कई तरह के व्यंजन बनाती है। आप भी अपने दिन को खास बना सकती हैं इस स्पेशल रेसिपी के साथ , जिसका नाम है क्रिस्पी नमकीन कचोरी। जी हां यह कचोरी खाने में हलवाई जैसी खस्ता होती हैं। आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती हैं यह कचोरी।
क्रिस्पी नमकीन कचोरी बनाने के लिए सामग्री-
-1 कटोरी मैदा
- 1 कटोरी गेहूं का आटा
- 2 चम्मच मोयन का तेल
- नमक
- अजवाइन
भरावन सामग्री-
-1 कटोरी बेसन
- नमक
-लाल मिर्च,
- जीरा
-सौंफ,
-तिल्ली
-धनिया
-गरम मसाला
- मोयन का तेल
क्रिस्पी नमकीन कचोरी बनाने की विधि-
क्रिस्पी नमकीन कचोरी बनाने के लिए सबसे पहले आटे में सभी सामग्री मिलाकर पूड़ी जैसा आटा गूंथकर अलग रख दें। अब बेसन में सारे मसालों के साथ इतना मोयन डालें कि उसकी गोली बन जाए। अब इसे अच्छी तरह मिक्स करके इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें।
अब आटे की लोई बनाकर पूरी बेलें, फिर उसमें बेसन की गोली रखकर हाथ से गोल-गोल दबाते हुए कचोरी बना लें। एक कड़ाही में तेल गरम करके धीमी आंच पर कचोरी कुरकुरी होने तक तल लें। गरमा-गरम कचोरी को चटनी के साथ पेश करें। इस कचोरी की खास बात यह है कि इन्हें आप सात-आठ दिनों तक आसानी से उपयोग में ला सकते हैं। आप चाहे तो इसमें चाट की सामग्री डलकर भी खा सकते हैं।
मुख्यमंत्री की पहल पर प्रदेश में खेल अधोसंरचनाओं को विकसित करने के प्रयासों को मिली एक और बड़ी सफलता
अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक निर्माण के लिए भारत सरकार से मिली मंजूरी
अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के लिए 4.50 करोड़ रूपए और महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक निर्माण के लिए 6.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचनाओं को विकसित करने के राज्य सरकार के प्रयासों को एक और बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य में खेल अधोसंरचनाओं के विकास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर भारत सरकार के युवा कल्याण और खेल मंत्रालय द्वारा खेलो इंडिया योजना के तहत अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के निर्माण तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक निर्माण के राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये दोनों प्रस्ताव छत्तीसगढ़ सरकार के खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय द्वारा भारत सरकार को भेजे गए थे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और खेल मंत्री श्री उमेश पटेल के विशेष प्रयासों से भारत सरकार ने अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के निर्माण के लिए 4 करोड़ 50 लाख रूपए तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक के निर्माण के लिए 6 करोड़ 60 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं खेल मंत्री उमेश पटेल ने हर्ष व्यक्त करते हुए प्रदेश के खिलाड़ियों तथा खेल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार बडे़ कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मापदण्डों के अनुरूप खेल अधोसंरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
दुर्ग । शौर्यपथ । जनता को रामराज्य का झुनझुना दिखाकर इस राम की भूमि को रावण राज्य में बदलने वाले देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने सभी को छला है । आप किस बात को लेकर रामराज्य की संकल्पना करते है महोदय ... •भूखे पेट रहकर अन्न उगाकर देश का पेट भरने वाले किसानो के ख़िलाफ़ कृषि बिल पर ?? •समाज को जीवन देने वाली महिलाएँ , बालिकाओं पर आए दिन हो रहे दुष्कर्म पर ??? •देश को बुलंदी तक पहुँचाने में व मानव संसाधन के रूप में व्याप्त युवाओं के रोज़गार छीनने पर ??? •आज़ाद भारत जो एक सुई भी बाहर से ख़रीदता था जिसे हमारे पूर्वजों ने अपनी मेहनत से सींच कर इस लायक़ बनाया कि आज हम पूरी दुनिया को सुई क्या सामरिक हथियार बेच रहे थे और आपने आते ही प्रगतिशील बनाने की जगह उस भारत देश को बेचना शुरू किया क्या उस पर ??? आपकी नीतियो में रावणरूपी अँहकार ,छल ,कपट ,तानाशाही ,लोभ जैसे शब्द के प्रदर्शित होते है ।जिसका दमन रामरूपी किसान , महिला ,युवा , छात्र,व्यापारी से होना अतिआवश्यक है ..।। आज दुर्ग NSUI द्वारा रावणरूपी नरेंद्र मोदी व सहायक मन्त्रीगण का पुतला दहन रामरूपी किसान द्वारा दुर्ग पटेल चौक के पुतला दहन किया गया कार्यक्रम के माध्यम से संकल्पना शुरू हो चुकी है कि आपके रावणराज्य के नीतियो से जनता त्राहिमाम कर चुकी है और इसका दमन निकट भविष्य में निश्चित रूप से होगा । कार्यक्रम में मुख्य रूप से दुर्ग विधानसभा से जय सेन,गोल्डी कोसरे,विनिश साहू,अमोल जैन,अमन दुबे,हरीश देवांगन,दीपक,तुषार,अमनदीप एवं अन्य लोग उपस्थित थे..
राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के जिला अध्यक्ष त्रिगुण सादानी का यह कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी जिले में प्रायवेट स्कूलों को सीधे लाभ पहुंचाने में लगे हुए है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत चयनित सभी बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाने और शिक्षा प्रदान कराने के लिए उत्तरदायी है, लेकिन सैकड़ों गरीब चयनित गरीब बच्चे जो विगत तीन माह से प्रायवेट स्कूलों में प्रवेश और शिक्षा पाने जिला शिक्षा अधिकारी के चक्कर काट रहे है, लेकिन इस जिम्मेदार अधिकारी ने इन बच्चों को प्रवेश और शिक्षा दिलाने में कोई रूचि नहीं दिखाया और इस प्रकार इन चयनित गरीब बच्चों के जीवन व भविष्य के साथ जान-बुझकर खिलवाड़ करने वाले इस जिम्मेदार अधिकारी को अब जिले में रहने का कोई औचित्य नहीं है।
सादानी ने बताया कि प्रायवेट स्कूलों के द्वारा पालकों को फीस के नाम से लुट रहे है और लगातार पीड़ित पालक जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगा रहे है कि प्रायवेट स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्यवाही किया जाए और उन्हें अवैध और अनुचित फीस लेने से रोका जाए, क्योंकि प्रदेश में अब अधिनियम प्रभावशील है और इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार समिति फीस निर्धारित और अनुमोदित करेगी, इसलिए अब प्रायवेट स्कूलों को फीस लेने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन इस जिम्मेदार अधिकारी ने प्रायवेट स्कूलों को अवैध और अनुचित फीस लेने से नहीं रोका और प्रायवेट स्कूलों ने पालकों से अवैध और अनुचित फीस पूरा वसूल लिया, जिसके लिए यह जिम्मेदार अधिकारी उत्तरदायी है। इस प्रकार जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा प्रायवेट स्कूलों को लाभ पंहुचाने का प्रयास किया जा रहा है, सिर्फ जनसमान्य को दिखाने के लिए हर दूसरे दिन जांच आदेश दिए जा रहे और विगत चार माह में अनेकों जांच आदेश दिए जा चुके है, अनेकों जांच टीम गठित किया गया है, जो आज तक ना तो जांच कर पाई और ना किसी भी दोषी स्कूल पर कोई कार्यवाही किया गया।
सादानी का कहना है कि प्रदेश सरकार के द्वारा जिले में एक मात्र उत्कृष्ट अंग्रेजी मिडियम स्कूल आरंभ किया गया, जिसमें अब तक सेटअप के अनुसार प्रयाप्त शिक्षक और स्टाफ की नियुक्ति तक नहीं किया जा सका है, जिसके कारण प्रतिदिन प्रवेश लिए बच्चे टीसी लेकर भाग रहे है जिससे प्रदेश सरकार की इस योजना पर अब सवाल उठने लगे है कि यह स्कूल जिले में चल भी पाएगा कीं नहीं, इसके लिए भी जिला शिक्षा अधिकारी उत्तरदायी है। हमारी यह मांग है कि ऐसे उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त कार्यवाही किया जाना चाहिए।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन के सहयोग एवं प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों से भी अब विद्यार्थी अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। सरगुजा जिले के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली कुमारी प्रिया पैकरा ने जो प्रयास आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर के शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन के सहयोग से नीट 2020 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर डॉक्टर बनने का मार्ग प्रशस्त की है। प्रिया पैकरा ने प्रयास आवासीय विद्यालय से नीट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग में पहला तथा सभी वर्गों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रिया पैकरा ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, प्रयास विद्यालय के शिक्षको के मार्गदर्शन तथा जिला प्रशासन के सहयोग को दिया हैं।
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो निवासी प्रिया पैकरा शुरू से ही मेधावी रही है। प्रिया पैकरा ने बताया कि पिता राकेश पैकरा कृषक है तथा कृषि एवं मजदूरी से परिवार का भरण पोषण करते है और माता श्रीमती प्रमिला गृहणी है। तीन बहनों में प्रिया सबसे बड़ी है। उससे छोटी कक्षा 11वी मल्टी पर्पज अम्बिकापुर तथा सबसे छोटी बहन कक्षा 9वी में अध्ययनरत है। प्रिया पैकरा ने बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर में अध्ययन कर इस वर्ष कक्षा 12वी की परीक्षा 89.9 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण की वही मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में 316 अंक के साथ क्वालीफाइ किया। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालय बंद हो जाने से कोचिंग में असुविधा हुई, किंतु प्रयास के शिक्षको के द्वारा लगातार ऑनलाईन माध्यम से मार्गदर्शन देते रहे तथा समस्याओं का समाधान भी किए।
कलेक्टर संजीव कुमार झा ने सुश्री प्रिया पैकरा के मेधावी होने और डॉक्टर बनने की प्रबल इच्छा को दृष्टिगत रखते हुए नीट की तैयारी में मदद हो सके इसके लिए आदिवासी विभाग के अधिकारियों को लैपटॉप देने के निर्देश दिए थे। कुछ दिनों बाद प्रभारी मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया का अम्बिकापुर आगमन होने पर उनके हाथों से प्रिया को लैपटॉप प्रदान किया गया था।
आज की कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में मेडिकल और इंजीनियरिंग के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए महंगे कोचिंग का सहारा आवश्यक हो गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के कम आय वाले परिवार के विद्यार्थियों का इन परीक्षाओं में चयन मुश्किल है। लेकिन राज्य शासन द्वारा संचालित प्रयास आवासीय विद्यालय के निःशुल्क भोजन, अध्ययन और कोचिंग की सुविधा से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के सपने पूरे हो रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ’निष्ठा’ ऑनलाइन प्रशिक्षण का आयोजन 26 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। प्रशिक्षण में कक्षा पहली से 8वीं तक के शिक्षक और शाला प्रमुख शामिल होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने निष्ठा ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन के संबंध में समस्त कलेक्टरों को निर्देश जारी किए है। जिलों में 26 अक्टूबर से पूर्व निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कक्षा पहली से 8वीं तक के सभी शिक्षकों का ऑनलाइन पंजीयन दीक्षा एप में अनिवार्य रूप से पूर्ण कराना सुनिश्चित करें।
जिला कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग भारत सरकार की गाइडलाइन अनुसार कक्षा पहली से 8वीं तक के समस्त शिक्षकों और शाला प्रमुखों को एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित 18 माड्यूल पर निष्ठा ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। कक्षा पहली से 8वीं तक के छत्तीसगढ़ राज्य के एक लाख 34 हजार 599 शिक्षकों और शाला प्रमुखों का क्षमता संवर्धन और नेतृत्व करने के गुणों का विकास किया जाना है।
निष्ठा अंतर्गत शिक्षकों का ऑनलाइन पंजीयन दीक्षा पोर्टल पर प्रारंभ हुआ है। प्रत्येक 15 दिवस में 3 मॉड्यूल पर प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इस प्रकार की सभी 18 मॉड्यूल के प्रशिक्षणों को तीन महीने में पूर्ण किया जाएगा। इसके बाद भी संबंधित शिक्षकों को निष्ठा अंतर्गत प्रशिक्षण पूर्णता का प्रमाण-पत्र के सफलतापूर्वक पूर्ण करने के उपरांत दीक्षा पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाएगा। प्रत्येक मॉड्यूल के लिए भी पूर्णता प्रमाण पत्र दीक्षा पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री बघेल ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है। दशहरा पर्व हमें सत्य के मार्ग पर चलने की हिम्मत और साहस देता है, हमें विश्वास दिलाता है कि सत्य के मार्ग में कितनी भी परेशानियां और कठिनाईयां क्यों न हो, विजय सदा सत्य की होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि आज पूरे विश्व के समक्ष कोरोना संकट की चुनौती है, इस संकट पर विजय पाने के लिए हमें अपने दैनिक जीवन में कोरोना से बचाव की गाइड लाइन का स्वयं पालन करने और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करने की जरूरत है। मास्क लगाने, फिजिकल डिस्टेंटिग और साबुन या सेनेटाइजर से बार-बार हाथ धोने जैसे उपायों से ही कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहा जा सकता है और इस महामारी पर विजय प्राप्त की जा सकेगी।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी में इस बार "बालक-बालिकाओं की पढ़ाई, खेलकूद, भविष्य आदि " विषय पर प्रदेशवासियों से बात करेंगे।
इस संबंध में 16 वर्ष से कम आयु के बालक-बालिकाएं आकाशवाणी रायपुर के दूरभाष नंबर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर 28, 29 एवं 30 अक्तूबर को अपरान्ह 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकाॅर्ड करा सकते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 12वीं कड़ी का प्रसारण 8 नवंबर को होगा। लोकवाणी का प्रसारण छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केंद्रों,एफएम रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों से सुबह 10.30 से 11 बजे तक होगा I
धर्म संसार /शौर्यपथ / या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे अपनी कृपा का पात्र बनाओ।
मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है।
इनके नाम इस प्रकार हैं -
1. अणिमा 2. लघिमा 3. प्राप्ति 4. प्राकाम्य 5. महिमा 6. ईशित्व,वाशित्व 7. सर्वकामावसायिता 8. सर्वज्ञत्व 9. दूरश्रवण 10. परकायप्रवेशन 11. वाक्सिद्धि 12. कल्पवृक्षत्व 13. सृष्टि 14. संहारकरणसामर्थ्य 15. अमरत्व 16. सर्वन्यायकत्व 17. भावना 18. सिद्धि
मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में 'अर्द्धनारीश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुए।
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करें। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।
नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं। इन सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।
सिद्धिदात्री मां के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे। वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। मां भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती।
मां के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करनी चाहिए। मां भगवती का स्मरण, ध्यान, पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है।
इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। आज के युग में इतना कठिन तप तो कोई नहीं कर सकता लेकिन अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर कुछ तो मां की कृपा का पात्र बनता ही है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में नवमी के दिन इसका जाप करना चाहिए।
नवरात्रि के अंतिम दिन पूजी जाती हैं मां सिद्धिदात्री, शिव भी करते हैं उपासना
नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।
इनके चारों हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमल रहता है। सिर पर ऊंचा सा मुकूट और चेहरे पर मंद मुस्कान ही मां सिद्धिदात्री की पहचान है। इस दिन भी कई भक्त अपने घरों में कुंजिकाओं को बिठाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं।
कैसे करें सिद्धिदात्री की पूजा
घी का दीपक जलाने के साथ-साथ मां सिद्धिदात्री को कमल का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा जो भी फल या भोजन मां को अर्पित करें वो लाल वस्त्र में लपेट कर दें।
निर्धनों को भोजन कराने के बाद ही खुद खाएं।
कौन हैं मां सिद्धिदात्री?
भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही 8 सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं। इन्हीं माता की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना। हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से अष्ट सिद्धि और नव निधि, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।
शौर्यपथ / कई लोगों को हद से ज्यादा पसीना आता है। अगर पसीने को साफ नहीं किया गया और ये लंबे समय तक शरीर पर रहा तो इससे दुर्गंध तो आती ही है, साथ ही ये कीटाणुओं को जन्म देता है। ऐसी स्थिती से बचने के लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। आइए, हम आपको बताते हैं
1. शरीर के जिन हिस्सों से आपको ज्यादा दुर्गंध आने की समस्या हो, ऐसे में घर से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनटों तक उन जगहों पर बर्फ लगाकर रखें। इससे ज्यादा पसीना नहीं आएगा।
2. यदि आपके पैरों के तलवों में ज्यादा पसीना आता है, तो एक टब में पानी भरें और उसमें दो चम्मच फिटकरी पाउडर डाल दें। अब इस टब में दो से पांच मिनट अपने पैरों को डुबोकर बैठें।
3. जो कपड़े आप पूरा दिन पहनकर बाहर गए हों वे कपड़े धोने के बाद ही अलमारी में रखें।
4. ज्यादा समय पहने और बिना धुले कपड़े अलमारी में रखने से उनमें दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं और यह दुर्गंध दूसरे साफ कपड़ों में भी पहुंच जाती है और आप समझ ही नहीं पाते हैं कि साफ-धुले कपड़ों से अजीब सी गंध क्यों आ रही है?
5. इस मौसम में सिंथेटिक कपड़े न पहनें, बल्कि सूती कपड़े ही पहनें। ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर से चिपके हुए न हों, क्योंकि तंग कपड़ों में ज्यादा पसीना आता है और इससे हवा पास नहीं हो पाती, जिससे दुर्गंध आती है।
6. शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, जरुरत पड़े तो दिन में दो बार भी नहा लें।
7. नहाने के लिए नीम या एंटी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।
8. तली-भुनी व मसालायुक्त चीजें इस मौसम में खाने से बचें।
9. बॉथ टब में नहाने से एक घंटा पहले संतरे का छिलका डालकर छोड़ दें।
इस पानी से नहाने से शरीर में ताजगी महसूस होगी।
10. शरीर को रगड़कर ताजे पानी से नहाने से शरीर से गंदगी का सफाया हो जाता है। और शरीर से दुर्गेंध नहीं आती है।
शौर्यपथ / गूगल ने एंड्रायड के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है जो बधिर उपयोगकर्ताओं को कई परिस्थितियों में अलर्ट भेजेगा। बधिर लोग अलार्म या चेतावनी वाली आवाजें न सुन पाने के कारण हमेशा मुश्किल में पड़ जाते हैं। ऐसे में गूगल ने उनके लिए एक ऐसा फीचर लॉन्च किया है जो बुरी परिस्थितियों के दौरान बजने वाले अलार्म या आवाजों की जानकारी बधिर उपयोगकर्ताओं को फोन को वाइब्रेट कर, फ्लैशलाइट जलाकर या पुश नोटिफिकेशन भेजकर देगा। यह फीचर बच्चे के रोने, फायर अलार्म के बजने, कुत्ते भौंकने जैसे दस आवाजों की पहचान करने में सक्षम है।
हेडफोन लगाए लोगों को भी मिलेगी चेतावनी
गूगल ने कहा कि साउंड नोटिफिकेशन को दुनियाभर में मौजूद 46.6 करोड़ बधिर लोगों के लिए बनाया गया है। लेकिन, यह फीचर उन लोगों की भी मदद कर सकता है जो हेडफोन लगाए बैठे हो या किसी कारणवश उनका ध्यान भटका हुआ हो। कई बार हेडफोन लगाए रहने के कारण भी लोग कई आवाजें नहीं सुन पाते और कई हादसे हो जाते हैं।
दस तरह के आवाजों की करेगा पहचान
मशीन लर्निंग तकनीक से विकसित किए गए साउंड नोटिफिकेशन के फीचर के लिए स्मार्टफोन के माइक्रोफोन का उपयोग किया जाता है। यह दस तरह की आवाजों की पहचान करने में सक्षम है। इसमें बच्चों का रोना, चिल्लाना, नल से पानी टपकने, स्मोक और फायर अलार्म, साइरन, उपकरणों की बीप, दरवाजे की डोरबेल और लैंडलाइन फोन की घंटी शामिल है।
नाम पुकारे जाने की जानकारी देगा
पिछले साल गूगल ने दो नए एसेसबिलिटी विकल्प प्रदान किए थे। साउंड एंपलीफायर लाइव ट्रांसक्राइब कही हुई बात को टेक्स्ट में रियल टाइम में बदल देता है और लोगों का नाम पुकारे जाने पर भी उन्हें अलर्ट भेजता है। एंड्रायड फोन के अलावा यह गूगल वीयर ओएस स्मार्टवॉच में भी काम करता है। किसी महत्वपूर्ण आवाज की पहचान करने पर यह वाइब्रेट करता है।
बधिर उपयोगकर्ताओं के लिए अहम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोडक्ट मैनेजर सागर सावला और एसेसबिलिटी प्रोडक्ट मैनेजर शार्लेन युआन ने कहा, कम सुन पाने वाले और बधिर लोग हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि सोये रहने के दौरान उन्हें किसी आपात परिस्थिति के बारे में पता नहीं चल पाता इसलिए हमने यह फीचर बनाया है जो सोते वक्त भी ऐसे लोगों को अलर्ट भेजेगा।
उपयोगकर्ता टाइमलाइन व्यू को स्क्रॉल कर पिछले कुछ घंटों में भेजे गए नोटिफिकेशन को देख पाएंगे और जान पाएंगे कि किस समय क्या हुआ था। इसके लिए एंड्रायड के एसेसिबिलिटी मेन्यू में जाकर साउंड नोटिफिकेशन को सक्रिय करना पड़ेगा। इसे सीधे गूगल प्ले से डाउनलोड भी किया जा सकता है।
बधिर उपयोगकर्ता थे नाराज
गूगल का यह फीचर एप्पल के साउंड डिटेक्शन फीचर जैसा ही है। पिछले महीने गूगल ने यूट्यूब के वीबडियो से क्राउडसोर्स कैप्शन के विकल्प को हटा दिया था। इसके खिलाफ पांच लाख बधिर उपयोगकर्ताओं ने चेंज डॉट ओआरजी पीटिशन पर हस्ताक्षर किया था।
बधिर उपयोगकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए ही गूगल ने यह नया साउंड नोटिफिकेशन लॉन्च किया है। बधिर समुदाय ने गूगल के इस कदम की सराहना की है और कहा है कि इससे उनकी जिंदगी आसान होगी।
सेहत / शौर्यपथ / मौसम बदलने के साथ ही मच्छरों का आतंक भी शुरू हो जाता है। ऐसे में मच्छर भगाने के लिए कितने ही उपाय क्यों न कर लें लेकिन मच्छर काट ही लेते हैं। नींद खराब करने वाले मच्छर कभी-कभी इतने खतरनाक होते हैं कि उनके काटने से एलर्जी तक हो जाती है। खासतौर पर मच्छरों के काटने से कई बार लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं। चेहरे पर ये लाल रंग के निशान और भी बेकार लगते हैं। कभी-कभी इन चकत्तों से छुटकारा पाने में 6-7 दिनों से ज्यादा का वक्त लग जाता है। ऐसे में अगर आपके चेहरे पर मच्छरों के काटने के बाद अगर लाल रंग के निशान पड़ जाएं, तो आप कुछ घरेलू उपायों का इस्तेमाल करके इनसे छुटकारा पा सकते हैं।
सेब का सिरका
सेब का सिरका स्किन और हेयर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही वजन घटाने के लिए भी सेब का सिरका पानी में मिलाकर पिया जाता है। आपके चेहरे पर अगर मच्छर काटने से निशान पड़ जाएं, तो आप तीन चम्मच पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर लगा लें। निशान गायब हो जाएंगे।
नींबू का छिलका
अगर मच्छर के काटने से चकत्ते बन गए हैं तो उस जगह पर नींबू का छिलका लगाएं। इससे आपके चकत्ते के निशान गायब हो जाएंगे। खुजली भी नहीं होगी।
प्याज का टुकड़ा
मच्छर के काटने से बनने वाले चकत्ते के निशान पर प्याज का टुकड़ा लगाएं। इससे निशान दूर हो जाएंगे और खुजली भी खत्म हो जाएंगी।
बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडे में पानी मिलाकर पहले से ही घोल बना लें। जब भी मच्छर काटें तो काटे वाले स्थान पर लगा लें। इससे चकत्ते के निशान दूर हो जाएंगे और खुजली भी कम हो जाएंगी।
एलोवेरा जेल
आपकी स्किन पर मच्छर काटने की परेशानी को दूर करेगा। साथ ही स्किन पर ठंडकता भी प्रदान करेगा। अगर मच्छर काटने के स्थान से खून निकल रहा है, तो यह उसे भी ठीक कर देगा और स्किन पर जलन और खुजली की परेशानी को दूर करेगा।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना महामारी ने दुनियाभर में लोगों की नींद और चैन छीन लिया है। संक्रमण की वजह से शुरुआत में लगे लॉकडाउन के चलते लोगों की जीवनशैली में अनचाहे बदलाव आए। एक नए शोध के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान लोगों के खान-पान में आए बदलाव के चलते मोटापे से जूझ रहे लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते नींद भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है। जर्नल ओबेसिटी में प्रकाशित इस अध्ययन ने महामारी के व्यापक प्रतिबंधों के तहत लोगों के स्वास्थ्य व्यवहारों में होने वाले अनजाने परिवर्तनों का मूल्यांकन किया। अमेरिका में लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी (एलएसयू) के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया। उनके अनुसार लॉकडाउन के दौरान लोगों का वजन काफी बढ़ा। परिणामस्वरूप स्वास्थ्य संबंधी तमाम समस्याएं पैदा हो गईं।
लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से अध्ययन की सह-लेखक लीन रेडमैन ने कहा, लॉकडाउन के दौरान लोगों ने पौष्टिक भोजन का सेवन ज्यादा किया और घर पर रहकर खाने-पीने पर पूरा ध्यान दिया,वहीं, दूसरी तरफ शारीरिक गतिविधियां बहुत कम हो गईं। व्यायाम नहीं किया। घर से काम करने के चलते नींद का पैटर्न बदल गया। रात को देरी से सोने की वजह से नींद में खलल आई और नींद पूरी नहीं हुई। काम के घंटों में बढ़ोतरी और स्क्रीन पर बिताए गए समय ने नींद की खलल में बहुत बड़ी भूमिका अदा की। नींद की आदतें बदलने की वजह से लोगों में चिंता का स्तर काफी बढ़ गया।
मानसिक सेहत पर असर पड़ा
रेडमैन ने कहा, अध्ययन में पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों ने अपनी डाइट में सबसे ज्यादा सुधार किया लेकिन इस बीच उन उनकी मानसिक सेहत पर विपरीत असर पड़ा। वजन बढ़ने का अनुभव करने के साथ-साथ उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया। मोटापे से ग्रसित एक तिहाई लोगों ने यह स्वीकार किया कि लॉकडाउन के दौरान उनकी यह बीमारी पहले से ज्यादा बढ़ गई। अध्ययन से पता चलता है कि मोटापे जैसी बीमारी सिर्फ शारीरिक सेहत पर नहीं, बल्कि मन की सेहत पर भी असर डालती है।
अप्रैल माह में हुए इस अध्ययन में 7,754 लोगों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में से अधिकांश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिकर के निवासी थे। इनके अलावा इसमें 50 से अधिक अन्य देशों ने भी भाग लिया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
