
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
शौर्यपथ / बंद जगहों पर संक्रमण फैलने के बढ़े मामलों के कारण कोरोना वायरस ताकतवर होता जा रहा है। हॉर्वर्ड मेडिसन स्कूल की वैज्ञानिक नैंसी एनोरिया ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि दुनियाभर की सरकारों को एरोसोल और एयरबोर्न संक्रमण के बारे में आम लोगों तक स्पष्ट तरीके से जरूरी जानकारी पहुंचानी चाहिए। अगर समय रहते लोगों को इनडोर संक्रमण के बारे में नहीं बताया गया तो यह वायरस और विकराल रूप ग्रहण कर लेगा।
एरोसोल : धुएं की तरह लंबे वक्त तक मौजूद रहता है वायरस
जिस तरह धूल और धुआं लंबे समय तक वातावरण में मौजूद रहते हैं, ठीक वैसे ही एरोसोल के गुण वाले वायरस लंबे वक्त तक हवा के साथ उड़ सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना है कि विशेष परिस्थितियों में कोविड-19 का वायरस एरोसोल संक्रमण फैला सकता है।
एयरबोर्न : इनडोर संक्रमण का मुख्य कारण
वायरस से संक्रमित नम बूंदें जब अपने छोटे आकार व हल्के वजन के कारण हवा में उड़ने लग जाती हैं तो इसे एयरबोर्न संक्रमण कहते हैं। ऐसा संक्रमण उन बंद जगहों पर ज्यादा फैलता है, जहां भीड़ मौजूद हो। रेस्टोरेंट, नाइट क्लब, सिनेमाहॉल और दफ्तरों में फैलने वाला संक्रमण इसका उदाहरण है।
ड्रॉपलेट : संक्रमण फैलने का मुख्य माध्यम
कोरोना वायरस फैलाने का यह सबसे मुख्य माध्यम माना जाता है, जिसमें किसी संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकली बूंदों या ड्रॉपलेट किसी दूसरे व्यक्ति की आंख, नाक या मुंह के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर जाती हैं। ड्रॉपलेट वजन में भारी होती हैं इसलिए वे ज्यादा देर तक हवा में मौजूद नहीं रह पातीं पर दो मीटर से कम दूरी पर खड़े व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं।
सर्दी में इनडोर संक्रमण का खतरा ज्यादा
शोधकर्ता नैंसी कहती हैं कि अगर सरकारें एरोसोल और एयरबोर्न संक्रमण से बचाव के लिए जनता को जागरूक करने में कामयाब नहीं हुईं तो सर्दियों में बंद जगहों पर कोरोना संक्रमण बहुत ज्यादा फैलेगा क्योंकि लोग ज्यादातर समय अपने घरों में बंद होंगे।
बेहतर वेंटिलेशन से बचाव
शोधकर्ता नैंसी का सुझाव है कि कार्यक्षेत्र, रेस्टोरेंट, पब व अन्य बंद स्थानों पर अगर सही वेंटिलेशन हो तो इनडोर संक्रमण से बचा जा सकता है। सरकारों को बंद जगहों की हवा को स्वच्छ करने के लिए वेंटिलेशन की बेहतर तकनीक अपनानी होंगी। साथ ही इनडोर स्थानों पर मौजूद लोगों को शारीरिक दूरी बनाकर और मास्क पहनकर रहने के लिए प्रेरित करना होगा।
सेहत / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण ने रातों की नींद उड़ा दी है? कभी नौकरी जाने तो कभी वायरस की जद में आने के डर से पूरी रात करवटें बदलते गुजर जाती है? अगर हां तो सोने से 20 मिनट पहले पसंदीदा लेखक की किताब पढ़ें। आपकी आंखों में आधे घंटे के भीतर मीठी नींद भर जाएगी। ब्रिटेन स्थित ससेक्स यूनिवर्सिटी का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक किताबें पढ़ना रोजमर्रा की चिंताओं से ध्यान भटकाने का बेहतरीन जरिया है। इससे स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के स्त्राव में 68 फीसदी तक की गिरावट आती है। बिस्तर पर जाने से पहले पसंदीदा गाना सुनने, गुनगुना दूध पीने या फिर पार्क में चहलकदमी करने पर भी तनाव का स्तर इस कदर नहीं घटता है। इन तीनों ही गतिविधियों से ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में क्रमशः 61 फीसदी, 54 फीसदी और 42 फीसदी कमी दर्ज की गई है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. डेविड लुइस की मानें तो किताब के पन्ने पलटने से महज छह मिनट में तन और मन आराम की मुद्रा में आ जाते हैं। इससे मस्तिष्क को संकेत मिलता है कि अब सोने का समय आ गया है और वह स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन करने लगता है। लुइस ने सिर्फ उन्हीं विषयों से जुड़ी किताबें पढ़ने की नसीहत दी, जो दिल को भाते हैं। ऐसा न करने पर मन फिर रोजमर्रा के तनाव में उलझ जाएगा और व्यक्ति सोने के लिए संघर्ष करेगा।
ई-बुक से परहेज करें-
-अध्ययन में किताबें पढ़ने के लिए स्मार्टफोन, टैबलेट या ई-बुक रीडर के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ‘मेलाटोनिन’ के उत्पादन में बाधा डालती है। इससे दिमाग आराम की मुद्रा में नहीं जा पाता और व्यक्ति को सोने में दिक्कत पेश आती है।
गुनगुने पानी से नहाएं-
-एक अन्य अध्ययन में सोने से पहले गुनगुने पानी में बाइकार्बोनेट सोडा मिलाकर नहाने की सलाह दी गई है। इससे त्वचा को डिटॉक्स करने में तो मदद मिलती ही है, साथ ही तन-मन पर थकान हावी होने से ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन तेज हो जाता है और व्यक्ति आसानी से नींद के आगोश में समा पाता है।
रूम फ्रेशनर भी कारगर-
-साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के शोध में लैवेंडर, चंदन, पीपरमिंट, मरुआ और बबूने के फूल की खुशबू को मांसपेशियों को सुकून पहुंचाने व हृदयगति को धीमा करने में कारगर पाया गया था। कमरे में ऐसे गंध वाले रूम फ्रेशनर का छिड़काव करने से व्यक्ति न सिर्फ गहरी नींद सोता है, बल्कि सुबह उठकर तरोताजा भी महसूस करता है।
शवासन आजमाएं-
-वहीं, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक शोध में शवासन और शशांकासन जैसे योग आसन को अनिद्रा की शिकायत से निजात दिलाने में असरदार पाया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक इन आसनों के अभ्यास से तंत्रिका तंत्र तो शांत होता ही है, साथ में रीढ़ की हड्डी भी शिथिल पड़ती है, जिससे व्यक्ति को अच्छी नींद आती है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / रात की रोटियां अगले दिन खाने में स्वादिष्ट नहीं लगती लेकिन रोटियों को फेंकना भी समझदारी नहीं है। ऐसे में आप रात की रोटियों से टेस्टी नाश्ता बना सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं बासी रोटियों से उपमा बनाने की रेसिपी-
सामग्री :
4 रोटियां
एक प्याज बारीक कटा हुआ
एक टमाटर बारीक कटा हुआ
2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
आधी शिमला मिर्च बारीक कटी हुई
आधी छोटी चम्मच राई
आधा कप मटर के दाने
एक बड़ी चम्मच मूंगफली दाने (भुने हुए)
एक चम्मच धनिया पाउडर
आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
एक छोटा चम्मच नींबू रस
स्वादानुसार नमक
तेल
विधि :
सबसे पहले को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें।
अब गैस पर पैन में तेल गर्म करें. इसमें राई का तड़का लगाएं।
जब राई चटकने लगे तो इसमें हरी मिर्च और प्याज डालकर मध्यम आंच पर पकाएं।
प्याज को सुनहरा होने तक पकाएं, फिर इसमें टमाटर मिर्च और मटर डालकर 3 मिनट तक पकाएं।
इसके बाद पैन में धनिया, लाल मिर्च पाउडर और मूंगफली दाने डालकर एक मिनट पकाएं।
अब रोटियों के टुकड़े और नमक डालकर मिक्स करें. इसे 2 मिनट तक पकाएं और गैस बंद कर दें।
लीजिए तैयार है बची हुई रोटी का इसे हरी धनिया पत्तियों से गार्निश करके गर्मागर्म सर्व करें।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / लॉकडाउन को दौरान कई लोग समय काटने के लिए अपने दोस्तों से बात-चीत करते रहते हैं और अगर आपको लगता है कि कुछ बातों को आप अपनें परिजन या भाई-बहनों से छिपाना चाहते हैं तो उसके लिए एक एप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपकी स्क्रीन पर लिखे टेक्स्ट को दूसरों को पढ़ने से रोकता है।
गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद MaskChat - Hides Whatsapp Chat एक शानदार एंड्रॉयड एप है जिसे यूजर की चैटिंग को प्राइवेट रखने के लिए बनाया गया है। जब आप अपने स्मार्टफोन पर प्राइवेट चैट करते हैं, तब यह एप आपके चैट के उपर की स्क्रीन को डिजिटल पर्दे से छिपा देता हैं। इससे आपके आसपास के झांकने वाले पड़ोसी से आपके मैसेज प्राइवेट रखने में मदद मिलती हैं।
अन्य चैटिंग एप के लिए भी कारगर
MaskChat - Hides Whatsapp Chat एप सिर्फ व्हाट्सएप तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल फेसबुक मैसेंजर, वीचैट,हाइक और स्नैपचेट के लिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही पासवर्ड टाइप करते समय या बैंक की इनफॉर्मेशन टाइप करते समय अपनी स्क्रीन को हाइड करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल
इस एप को डाउनलोड करने के बाद यूजर को स्क्रीन पर एक फ्लोटिंग मास्क चैट आइकॉन दिखाई देगा, जिस स्क्रीन को आप दूसरों से हाइड करना चाहते हैं, उस स्क्रीन पर इस आइकॉन को ऊपर से नीचे की ओर ड्रैग करें। अब एक डिजिटल पर्दा नीचे आ जाएगा, जो आपकी स्क्रीन को छिपा देगा और आप किसी भी शर्मिंदा पलों से बच सकते है जब आपके माता-पिता या बड़े आपके आसपास होते हैं।
पर्दे की बढ़ा सकते हैं डार्कनेस
इस एप में कंपनी की तरफ से दिए गए पर्दे की मोटाई औसतन होती है, जो आपको कम लग सकती है। इसके लिए आप पर्दे के दाईं ओर दिए गए तीन लाइन वाले विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं। इससे स्क्रीन के बीच में तीन नए विकल्प आएंगे। उनमें से बीच वाले विकल्प की मदद से आप पर्दे की ब्राइटनेस को नियंत्रित कर सकते हैं। बंद करने के लिए क्रॉस आइकॉन पर क्लिक कर आप पर्दे को क्लोज कर सकते हैं, लेकिन फ्लोटिंग मास्केचैट आइकॉन को पीछे छोड़ देगा। गियर आइकॉन पर टैप कर आप थीम को बदल भी सकते हैं। थीम को सिलेक्ट करने के बाद उसके नीचें के Apply theme बटन पर टैप कर अप्लाई करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / ब्रेड स्प्रिंग रोल की 10 मिनट रेसिपी, चाय के साथ लें हेल्दी स्नैक्स का मजा ब्रेड स्प्रिंग रोल यह ऐसी रेसिपी है, जिसे आप 10 मिनट के अंदर तैयार कर सकते हैं। अगर घर पर अचानक मेहमान आ जाएं या फिर बर्थ डे पार्टी हो, आप इसे स्नैक्स के तौर पर आसानी से घर पर ही बना सकते हैं। आइए, जानते हैं आसान रेसिपी
सामग्री
1 कप पत्ता गोभी
1 कप गाजर
1 कप शिमला मिर्च
2-3 लहसुन कटे हुए
½ चम्मच लहसुन का पेस्ट
1 कप प्याज
6 ब्रेड पीस
नमक स्वादानुसार
तेल आवश्यकतानुसार (फ्राई करने के लिए)
1 चम्मच सोया सॉस
विधि
सारी सब्जियों को बारीक काट लें। एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें लहसुन का पेस्ट डालकर भून लें। फिर सभी सब्जियां डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें। अब मसाला और सोया सॉस डालकर मिक्स कर लें। 2-3 मिनट के लिए अच्छी तरह से पका लें। अब इस मिश्रण को अलग बर्तन में निकाल लें। ब्रेड स्लाइस लें और उसके किनारे काट दें। अब ब्रेड को बेल दें। बेलने के बाद सब्जी इसमें सब्जी का मिश्रण भरें, फिर बांध कर इसके किनारों पर पानी लगाकर रख दें। इससे यह तलते समय खुलेगी नहीं। अब इन्हें तवे पर सेंक लें या फिर डीप फ्राई भी कर सकते हैं। ब्रेड स्प्रिंग रोल तैयार हैं। इन्हें सॉस या हरी चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व बताया गया है। इन नौ दिनों में माता के भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए मां के 9 स्वरुपों की पूजा करते हुए उनके व्रत रखते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरु हो रहे हैं जो कि 25 अक्टूबर तक चलेंगे। ऐसे में अगर आप गर्भवती हैं और नवरात्रि के व्रत रखना चाहती हैं तो अपनी और बच्चे की सेहत को बनाए रखने के लिए जरूर ध्यान रखें ये जरूरी बातें।
नवरात्रि के दौरान गर्भवती महिलाएं ध्यान रखें ये बातें-
-नवरात्रि के उपवास रखते समय गर्भवती महिलाएं हर दो घंटे में कुछ न कुछ जरूर खाए। ऐसा करने से आपको शरीर में कमजोरी महसूस नहीं होगी।
-गर्भवती महिलाएं कभी भी निर्जला व्रत न रखें। ऐसा करने से आपके शरीर में पानी की कमी हो सकती है। याद रखें आपको सिर्फ अपना ही नहीं अपने गर्भ में पल रहे शिशु का भी ध्यान रखना है।
- व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से जरुर सलाह लें। डॉक्टर की सलाह के बाद ही व्रत रखने के बारे में सोचे।
-गर्भवती महिला व्रत के दौरान अपने आहार में फल-दूध-सूखे मेवे जैसी पौष्टिक चीजें शामिल करें। अधिक तली-भुनी चीजों का सेवन करने से परहेज करें। ऐसी चीजें आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
-नवरात्रि के समय महिलाएं अकसर नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करती हैं। लेकिन अगर आप प्रेगनेंट हैं तो ऐसा करने से बचें। नमक का सेवन ना करने से आपका बीपी लो होने की संभावना बन सकती है जो आपके और बच्चे के लिए समस्याएं पैदा कर सकता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / आगामी 17 अक्तूबर से नवरात्रि शुरू होंगे। शहर के मंदिरों में इस बार कोरोना के कारण चहल-पहल नहीं रहेगी, लोग सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा करेंगे। इस बार पूजा सामग्री, खाद्य सामग्री के रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, फल-फूल अवश्य ही महंगे होंगे, क्योंकि लॉकडाउन में मांग खत्म होने पर अधिकांश किसानों ने खुद ही फसल नष्ट कर दी थी।
17 अक्तूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि में शहर के विभिन्न थोक परचून विक्रेताओं की दुकानों पर पूजा-पाठ में लगने वाली सामग्री, व्रत के दौरान खाई जाने वाली सामग्री, पूजा की चुन्नी, नारियल व मेवा सहित अन्य प्रकार का सामान बिकने लगा है। हालांकि, अभी खुदरा सामान बेचने वालों ने अपनी-अपनी दुकानें नहीं सजाई है। इतना जरूर है इस बार फूल के रेट ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है और फल के रेट भी थोड़े बहुत अवश्य बढ़ सकते हैं। इधर, मंदिरों में तैयारी चल रही हैं। पुजारी अवश्य दावा कर रहे हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा-पाठ अवश्य होगी।
पूजा सामग्री के नहीं बढेंगे रेट : नवरात्रों में पूजा अर्चना करने वालों के लिए राहत की खबर है कि नवरात्रों में पूजा-अर्चना का सामान पहले के मुकाबले कुछ सस्ता अवश्य हो सकता है, लेकिन महंगा नहीं मिलेगा। जो नारियल 40 रुपये का बेचा जाता था, वह इस बार भी 35-40 रुपये में ही मिलेगा। जो पान 5 रुपये का मिलता था अब वह पान मात्र 3 रुपये का मिलेगा। सामक के चावल, कुट्टू का आटा, साबुदाना, मूंगफली के रेट भी किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगी। धूप-अगरबत्ती के रेट में थोड़ा बहुत बदलाव है। परचून के थोक व्यापारी विपिन जैन का दावा है कि पूजा साम्रगी व खाद्य साम्रगी के रेट में बढ़ोतरी नहीं है। बादाम के रेट 720 से घटकर 580 रुपये किलो पहुंच गए हैं। काजू व किशमिश के रेट भी नहीं बढ़े हैं।
लॉकडाउन में फसल बर्बाद : किसानों ने लॉकडाउन में फूल की खपत नहीं होने के चलते फसल को नष्ट कर दिया। अब भी फूल की खपत बेहद कम है। यही कारण है कि गैंदे का फूल 300 रुपये किलो तक बिक सकता है। गुलाब का फूल भी 300 रुपये किलो, गुलदावरी का फुल भी 350 रुपये किलो तक बिकने की उम्मीद है। फुल विक्रेता गोविंद का कहना है कि कोरोना फूल की खेती को पूरी तरह खत्म कर दिया। इसी कारण फूल महंगा बिकेगा।
फल के दाम भी बढ़ने लगे : फल विक्रेता मुकेश गुलपाड़िया की मानें तो अनार 80 रुपये किलो से 120 रुपये किलो हो गया है। चीकू 100 से 120 रुपये किलो, सेब 60 से 80 रुपये किलो बेची जा रही है। दुकानदारों का दावा है कि नवरात्रि तक फल के रेट थोड़े बहुत और बढ़ सकते हैं। अंबेडकर चौक स्थित श्री शिव जी महाराज बलराम जी मंदिर (हनुमान मंदिर) के पुजारी कुलदीप अवस्थी का कहना है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखेंगे।
शौर्यपथ / यात्रा और उससे जुड़ी यादें अक्सर खुशी का अहसास कराती हैं। यात्रा पर निकलने से पहले कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। वास्तु में बताए गए यह उपाय आपकी यात्रा को मंगलमय बनाएंगे। आइए जानते हैं इनके बारे में।
यात्रा पर निकलने से पहले अगर आभूषण से लदी सुहागन स्त्री दिख जाए या जल से भरा घड़ा, बछड़े को दूध पिलाती गाय दिख जाए तो यह शुभ संकेत है। हंस, सफेद घोड़ा, कीर्तन, मोर, तोता, शंख दिख जाएं तो यह भी शुभ माना जाता है। यात्रा पर निकलने से पहले दही, दूध, घी, फल, फूल, चावल आदि अचानक सामने पड़ें तो यह भी शुभ संकेत माना जाता है। अगर घर से निकलते ही तेल बेचता व्यक्ति, हड्डी, बिल्ली, वस्त्रहीन मनुष्य, सांप, भैंस, सियार, बीमार कुत्ता, रोने की आवाज आदि पड़े तो इसे अशुभ माना जाता है। यात्रा शुरू करने से पहले नकारात्मक शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। हनुमान चालीसा का पाठ कर यात्रा पर निकलें। नदी, आग, हवा और प्रकृति के बारे में कोई अपशब्द न कहें। यात्रा पर जाते समय घर में विराजमान भगवान श्रीगणेश से वापस आकर मिलने का वादा करें। यात्रा शुरू करने से पहले अपने ईष्टदेव का स्मरण करें। गायत्री मंत्र का जाप करें। यात्रा पर जा रहे हैं और बिल्ली रास्ता काट जाए तो पहले मुंह झूठा करें और पानी पीकर ही आगे बढ़ें। रविवार को पान या घी खाकर निकलें। सोमवार को दूध पीकर घर से निकलें। मंगल को गुड़ खाकर, बुधवार को धनिया या तिल खाकर यात्रा पर जाएं। गुरुवार को जीरा या दही खाकर, शुक्रवार को दही पीकर और शनिवार को अदरक या उड़द खाकर यात्रा पर प्रस्थान करें।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / गूगल ने एंड्रायड के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है जो बधिर उपयोगकर्ताओं को कई परिस्थितियों में अलर्ट भेजेगा। बधिर लोग अलार्म या चेतावनी वाली आवाजें न सुन पाने के कारण हमेशा मुश्किल में पड़ जाते हैं। ऐसे में गूगल ने उनके लिए एक ऐसा फीचर लॉन्च किया है जो बुरी परिस्थितियों के दौरान बजने वाले अलार्म या आवाजों की जानकारी बधिर उपयोगकर्ताओं को फोन को वाइब्रेट कर, फ्लैशलाइट जलाकर या पुश नोटिफिकेशन भेजकर देगा। यह फीचर बच्चे के रोने, फायर अलार्म के बजने, कुत्ते भौंकने जैसे दस आवाजों की पहचान करने में सक्षम है।
हेडफोन लगाए लोगों को भी मिलेगी चेतावनी
गूगल ने कहा कि साउंड नोटिफिकेशन को दुनियाभर में मौजूद 46.6 करोड़ बधिर लोगों के लिए बनाया गया है। लेकिन, यह फीचर उन लोगों की भी मदद कर सकता है जो हेडफोन लगाए बैठे हो या किसी कारणवश उनका ध्यान भटका हुआ हो। कई बार हेडफोन लगाए रहने के कारण भी लोग कई आवाजें नहीं सुन पाते और कई हादसे हो जाते हैं।
दस तरह के आवाजों की करेगा पहचान
मशीन लर्निंग तकनीक से विकसित किए गए साउंड नोटिफिकेशन के फीचर के लिए स्मार्टफोन के माइक्रोफोन का उपयोग किया जाता है। यह दस तरह की आवाजों की पहचान करने में सक्षम है। इसमें बच्चों का रोना, चिल्लाना, नल से पानी टपकने, स्मोक और फायर अलार्म, साइरन, उपकरणों की बीप, दरवाजे की डोरबेल और लैंडलाइन फोन की घंटी शामिल है।
नाम पुकारे जाने की जानकारी देगा
पिछले साल गूगल ने दो नए एसेसबिलिटी विकल्प प्रदान किए थे। साउंड एंपलीफायर लाइव ट्रांसक्राइब कही हुई बात को टेक्स्ट में रियल टाइम में बदल देता है और लोगों का नाम पुकारे जाने पर भी उन्हें अलर्ट भेजता है। एंड्रायड फोन के अलावा यह गूगल वीयर ओएस स्मार्टवॉच में भी काम करता है। किसी महत्वपूर्ण आवाज की पहचान करने पर यह वाइब्रेट करता है।
बधिर उपयोगकर्ताओं के लिए अहम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोडक्ट मैनेजर सागर सावला और एसेसबिलिटी प्रोडक्ट मैनेजर शार्लेन युआन ने कहा, कम सुन पाने वाले और बधिर लोग हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि सोये रहने के दौरान उन्हें किसी आपात परिस्थिति के बारे में पता नहीं चल पाता इसलिए हमने यह फीचर बनाया है जो सोते वक्त भी ऐसे लोगों को अलर्ट भेजेगा।
उपयोगकर्ता टाइमलाइन व्यू को स्क्रॉल कर पिछले कुछ घंटों में भेजे गए नोटिफिकेशन को देख पाएंगे और जान पाएंगे कि किस समय क्या हुआ था। इसके लिए एंड्रायड के एसेसिबिलिटी मेन्यू में जाकर साउंड नोटिफिकेशन को सक्रिय करना पड़ेगा। इसे सीधे गूगल प्ले से डाउनलोड भी किया जा सकता है।
बधिर उपयोगकर्ता थे नाराज
गूगल का यह फीचर एप्पल के साउंड डिटेक्शन फीचर जैसा ही है। पिछले महीने गूगल ने यूट्यूब के वीबडियो से क्राउडसोर्स कैप्शन के विकल्प को हटा दिया था। इसके खिलाफ पांच लाख बधिर उपयोगकर्ताओं ने चेंज डॉट ओआरजी पीटिशन पर हस्ताक्षर किया था।
बधिर उपयोगकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए ही गूगल ने यह नया साउंड नोटिफिकेशन लॉन्च किया है। बधिर समुदाय ने गूगल के इस कदम की सराहना की है और कहा है कि इससे उनकी जिंदगी आसान होगी।
सेहत /शौर्यपथ / घर में बंद-बंद काम करने को मजबूर कर्मचारियों को अब पब के डेस्क से काम करने की सुविधा मिलेगी। दक्षिण वेल्स में न्यूपोर्ट के पास स्थित द फार्मर आर्म्स इन ग्लोडक्लिफ कर्मचारियों को तीन घंटे के लिए डेस्क की बुकिंग करने की सुविधा दे रही है।
तीन घंटे के लिए पब की टेबल को किराया पर लेने के लिए 10 पाउंड (लगभग 1000 रुपये) तक खर्च करना पड़ेगा। इस पब टेबल में काम करने के लिए वाई-फाई और बिजली का कनेक्शन के अलावा असीमित चाय, कॉफी और सैंडविच भी मिलेगा। यह पब कर्मचारियों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए लोगों से बातचीत करने का भी अवसर देगा।
पब के मालिक क्रेग लीथ ने कहा, यह अच्छा विचार है। लोग अपने घरों में बंद-बंद बोर हो गए हैं। इसके उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। हमें बुकिंग के लिए लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
यहां मंगलवार से लेकर शुक्रवार तक के लिए टेबल बुकिंग की सुविधा मिलेगी। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने के बाद लोगों के प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। ज्यादातर लोगों ने इसे अच्छा विचार बताया और कहा कि वे जरूर यहां जाना चाहेंगे।
सेहत / शौर्यपथ / इंसान के पूर्वजों में भूख से बचने के लिए उच्च कैलोरी वाला खाना संघूने की क्षमता थी। इसी क्षमता के कारण वर्तमान में हमें फास्टफूड को जल्दी सूंघ लेते हैं और याद रखते हैं। नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि शोध में मौजूद प्रतिभागियों को उच्च कैलोरी वाले फास्टफूड का स्थान कम कैलोरी वाले खाने की तुलना में ज्यादा याद था।
वैगेनइंगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की टीम ने 512 प्रतिभागियों पर अध्ययन किया। इन्हें एक निर्धारित पथ पर जाने को कहा गया जहां कई सारे कमरे मौजूद थे। इन कमरों में आठ तरह के खाद्य पदार्थ रखे हुए थे जिनमें से खुशबू आ रही थी। जब प्रतिभागी इन खाद्य पदार्थों के नमूनों तक पहुंचे तो उन्होंने या तो खाया या सिर्फ सूंघा। इसके बाद उन्होंने अपनी पसंद के आधार पर खाद्य पदार्थों को रेटिंग दी। इन नमूनों में सेब, चिप्स, खीरा और चॉकलेट ब्राउनी मौजूद था।
शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागियों को वो कमरे ज्यादा याद रहें जिनमें उच्च कैलोरी वाला फास्ट फूड मौजूद था। कम कैलोरी वाले खाने की तुलना में प्रतिभागियों को उच्च कैलोरी वाले खाने के स्थान 27 फीसदी तक ज्यादा याद रही। फास्टफूड को सूंघने की क्षमता पर खाने के मीठे या नमकीन होने से कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
शोधकर्ताओं ने कहा, हमने देखा की प्रतिभागियों को वे स्थान ज्यादा याद रहें जहां उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ मौजूद थे। इससे पता चलता है कि इनसानों को उच्च कैलोरी वाले खाने की खुशबू ज्यादा आकर्षित करती है। इस शोध से यह भी खुलासा होता है कि प्राचीन समय से ही इनसान उच्च कैलोरी वाले खाने के लिए लालायित रहा है। इस शोध को पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / संगीत एक कला ही नहीं बल्कि एक भाव भी है। ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते कि कुछ छोटी-छोटी चीजें हमें मानसिक रूप से शांत रखती हैं, जिनकी वजह से तनाव, गुस्सा या फिर डर जैसे इमोशन्स हम पर हावी नहीं हो पाते। म्यूजिक भी इन्हीं चीजों में से एक है। रात के समय नींद न आने पर आप कोई ग़जल या मेलोडी सॉन्ग सुनते हैं, तो आपको नींद आने के आसार काफी बढ़ जाते हैं। साथ ही सुकून से सोने और तनाव से मुक्ति के लिए भी म्यूजिक को अपने जीवन का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए। आज ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ’ डे है। साथ ही आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गायक जगजीत सिंह की पुण्यतिथि भी है। आइए, हम आपको बताते हैं, जगजीत सिंह के ऐसे गाने जो आपको भागती-दौड़ती जिंदगी में सुकून पल देंगे।
तुमको देखा तो ये ख्याल आया
रेट्रो सॉन्ग के दीवानों के लिए यह गाना किसी बोनस से कम नहीं है। 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘साथ-साथ’ का यह गाना आज भी उतना ही सुना जाता है, जितना कि 80 के दशक में सुना जाता होगा। रात में धीमी आवाज में चलते इस गाने का जादू समा बांध देता है।
वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी (आज, 1987)
बचपन के दिनों को याद दिलाते हुए जिंदगी की गहराई में उतर जाने वाला गाना। आप अगर किसी बात को लेकर तनाव में हैं या आपका मूड खराब है, तो आप इस गाने को सुनकर मुस्कुरा सकते हैं।
होश वालों को खबर का बेखुदी क्या चीज है (सरफरोश, 1999)
आपके पार्टनर से लड़ाई हो गई है या फिर आप सिंगल ही क्यों न हो। यह गाना आपका मूड खुशनुमा कर देगा। धीमी आवाज में गुनगुनाकर इस गाने का मजा लें।
यह तेरा घर, यह मेरा घर (साथ-साथ, 1982)
जगजीत सिंह की खूबसूरत अंदाज के साथ जब सुरीला संगीत मिल जाता है, तो तनाव मिटाने वाला यह खुशनुमा गाना जन्म लेता है। आप गुनगुनाते हुए अपने पार्टनर का मूड इस गाने के साथ ठीक कर सकते हैं।
बड़ी नाजुक है, यह मंजिल (जॉगर्स पार्क, 2003)
बेहतरीन नगमा जिसे सुनकर आप खुद गुनगुनाने लगेंगे। आपकी थकान को उतार देने वाला यह गाना कुछ पलों के लिए आपको एक ‘ड्रीम वर्ल्ड’ में लेकर चला जाएगा।
आपके लिए खास-
मानसिक स्वास्थय का ध्यान रखना एक दिन का टॉस्क नहीं, बल्कि यह एक प्रक्रिया है। रोजाना की कई छोटी-छोटी बातें आपके दिमाग पर असर डालती हैं, इसलिए कोशिश करें कि आप हर परिस्थिति में खुश रहें और किसी भी बात को खुद पर हावी न होने दें। खुद को रिलेक्स करने के लिए रोजाना अपनी पसंद के गाने जरूर सुनें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / ज्योतिष में भगवान शिव की पूजा-अर्चना को चंद्रमा से जुड़े सभी दोषों या नकारात्मक योग से मुक्ति के लिए बहुत ही शुभ और रामबाण उपाय माना गया है। इसमें भी विशेष रूप से शिवलिंग का अभिषेक करना श्रेष्ठ और शीघ्र परिणाम देने वाला होता है। ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा नीच राशि में हो, चंद्रमा-राहु की युति से चंद्रग्रहण योग बना हो, चंद्रमा-सूर्य की युति से अमावस्या योग बना हो, चंद्रमा-शनि की युति से विष योग बना हो, केमद्रुम योग बना हो या फिर कालसर्प यो, इन सभी दोषाों या नकारात्मक योग से व्यक्ति के जीवन में विशेष से मानसिक अशांति हमेशा बनी रहती है। मन कभी स्थिर नहीं हो पाता और व्यक्ति हमेशा नकारात्मक विचारों एवं अवसाद में डूबा रहता है। ऐसे लोगों के जीवन में संघर्ष एवं बाधाएं भी आती रहती हैं जिससे जीवन में उथल-पुथल बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा परेशान ही रहता है।
अगर कुंडली में ये छह योग बने हों तो प्रतिदिन शिवलिंग का अभिषेक करने से इनका दुष्परिणाम क्षीण हो जाता है। इससे व्यक्ति बुरे परिणामों से बच जाता है। उसके जीवन में स्थिरता और शांति आने लगती है। विभोर इंदुसुत के मुताबिक जिन लोगों की कुंडली में ये योग बन रहे हों तो उन्हें भगवान शिव का प्रतिदिन अभिषेक अवश्य करना चाहिए। ऐसे लोग अपने घर में भी एक छोटा शिवलिंग रखते हुए उसका रोज अभिषेक कर सकते हैं। भगवान शिव के अभिषेक से चंद्रमा मजबूत होता है। चंद्रमा जल एवं दूध दोनों का कारक है। इसलिए जल और धूल के मिश्रण से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। जिन लोगों को तनाव, मानसिक अशांति, घबराहट, एकाग्रता की कमी और नकारात्मक विचारों की समस्या हो उनके लिए यह उपाय रामाबाण सिद्ध होता है।
शौर्यपथ / अस्पताल में भर्ती रहे कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीज अब मानसिक अस्थिरता से जूझने लगे हैं। शिकागो के नॉर्थ-वेस्टर्न विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अध्ययन से पता लगा कि चालीस प्रतिशत गंभीर मरीजों के मस्तिष्क पर वायरस इतना गहरा असर कर रहा है कि वे मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक के खतरों जूझ रहे हैं।
कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि कोविड-19 का वायरस सिर्फ श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी नहीं है बल्कि यह शरीर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी मस्तिष्क समेत कई महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंचाता है। इसी क्रम में ताजा अध्ययन बताता है कि अस्पताल में भर्ती रहे एक-तिहाई संक्रमित मरीजों के मस्तिष्क में एन्सेफैलोपैथी बीमारी विकसित हो जाती है।
इस रोग में मस्तिष्क के उस हिस्से का पतन होने लगता है जिसके जरिए इंसान सोचता और शरीर को काम करने का निर्देश देता है। यह अध्ययन एन्नल्स ऑफ क्लीनिकल एंड ट्रांसजेशनल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ।
कोमा तक का खतरा
नॉर्थ-वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. इगोर कोरालनिक ने 509 कोविड मरीजों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि 82.3 प्रतिशत मरीजों के मस्तिष्क पर इलाज के दौरान ही न्यूरोलॉजिकल असर दिखने लगता है। 31.8 प्रतिशत मरीजों में एन्सेफैलोपैथी की स्थिति दिखती है जो मरीज में मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक पहुंचा सकती है।
वह कहते हैं कि यह कोविड-19 का सबसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल असर है। इसके अलावा 44.8 प्रतिशत मरीज मांसपेशियों का दर्द, 37.7 प्रतिशत मरीज सिरदर्द, 29.7 प्रतिशत मरीज थकावट, 15.9 प्रतिशत मरीज स्वादहीनता व 11.4 प्रतिशत मरीज गंधहीनता महसूस करने लगते हैं।
युवा मरीजों में खतरा ज्यादा
न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को देखा जाए तो करीब 45% मरीजों में मांसपेशियों में दर्द, 38% मरीजों में सिरदर्द, करीब 30% मरीजों में चक्कर आने की शिकायत देखी गईं। जबकि, स्वाद या सूंघने की परेशानियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या कम थी। स्टडी के मुताबिक, एंसेफेलोपैथी के अलावा युवाओं में न्यूरोलॉजिकल लक्षण होने की संभावना ज्यादा थी।
चीन और स्पेन से ज्यादा मामले
बदली हुई मानसिक स्थिति केवल न्यूरोलॉजिकल परेशानी नहीं है। कुल मिलाकर 82% भर्ती मरीजों में बीमारी के दौरान किसी न किसी मौके पर न्यूरोलॉजिकल लक्षण नजर आए थे। यह दर चीन और स्पेन में ज्यादा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
