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सेहत / शौर्यपथ /सुबह उठते ही कुछ ऐसे काम है जिन्हें यदि आपने कर लिया तो आपका दिन अच्छा व्यतित होना सुनिश्चित हो जाता है। आइए,जानते हैं ऐसे ही 5 कामों के बारे में जिन्हें करके आपको अपने दिन की शुरूवात करनी चाहिए -
आइए जानें,ऐसे ही 5 तरीके जिनके साथ करें दिन की शुरुआत...
1. सुबह उठते ही सबसे पहले आधा लीटर ठंडा पानी पिएं। खाली पेट ठंडा पानी पीने से मेटाबॉलिज्म यानी कि पाचन दुरूस्त रहने में मदद मिलती है।
2. खाली पेट छह से दस बादाम और अखरोट खाएं, इससे कुछ इंजाइम्स बनते हैं जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में सहायक होते हैं।
3. हमेशा थोड़ा भारी ब्रेकफास्ट करें, इससे आपको दोपहर के खाने तक ऊर्जा की कमी महसूस नहीं होगी। आपका ब्रेकफास्ट ऐसा हो जो कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर हो।
4. बादाम और अखरोट ऊर्जा के भंडार हैं। यदि आप रोजाना बादाम आरे अखरोट नहीं खा पाते हैं तो दिन भर थोड़ी-थोड़ी मूंगफली भी खा सकते हैं।
5. सुबह उठ कर चाहे 10 मीनिट ही सही लेकिन मेडिटेशन जरूर करें। इससे आपके विचार संतुलित हो जाएंगे और दिमाग शांत रहेगा।
सेहत / शौर्यपथ /अगर आपकी मम्मी या सासू मां मधुमेह से ग्रस्त हैं और हर बार की तरह इस बार भी करवा चौथ का व्रत रखने की जिद पर अड़ी हैं, तो आपको रखना होगा उनका खास ख्याल।
डायबिटीज यानी मधुमेह एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जिसमें खून में शुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसके पीछे इन्सुलिन कम बनने या इंसुलिन का शरीर द्वारा इस्तेमाल न हो पाना दोषी होता है। डायबिटीज के यूं तो कई कारण हैं, लेकिन खराब और अस्वस्थ जीवनशैली सबसे प्रमुख कारण है। अगर आप व्यायाम नहीं करतीं हैं या मोटापे से ग्रस्त हैं तो आपका डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
डायबिटीज सिर्फ एक लाइलाज बीमारी ही नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों की गंभीरता को भी बढ़ा देती है। एक डायबिटीज के मरीज को बहुत सावधानी बरतनी होती है। जैसे दिन में हर दो से तीन घण्टे पर छोटी मील लेना, व्यायाम करना, नियमित रूप से ब्लड शुगर लेवल जांचना और चिंता मुक्त रहना। आहार के लिए भी बहुत परहेज किया जाता है। साथ ही ग्लूकोज के सीधे सेवन से बचा जाता है।
ऐसे में चिंता यह है कि एक डायबिटीज का मरीज दिन भर उपवास कैसे रख सकता है! करवा चौथ का व्रत सोलह से अठारह घण्टे का उपवास होता है जिसमें कई संस्कृतियों में पानी भी नही पिया जाता।
दिन भर का उपवास यूं तो शरीर को डिटॉक्स करने के लिए अच्छा उपाय है, लेकिन डायबिटीज में ऐसा नहीं है। मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति को शुगर लेवल नियंत्रित करने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर पर मील्स लेनी जरूरी होती हैं। तो ऐसे में मधुमेह से ग्रस्त आपकी मम्मी या सासू मां करवा चौथ का व्रत कैसे रखेंगी?
घबराने की जरूरत नहीं है, आप उनके स्वास्थ्य से समझौता किये बिना ही उनकी आस्था में उनका साथ दे सकती हैं। हम आपको बता रहे हैं वे तरीके जिनसे वे व्रत भी रख सकेंगी और उनकी सेहत को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
व्रत से पहले खाएं ये कुछ खास चीजें
सूर्योदय के साथ ही करवा चौथ के व्रत की शुरुआत होती है, और चंद्रमा निकलने के बाद ही व्रत खोला जाता है। व्रत शुरू करने से पहले सभी महिलाएं भोजन करती हैं, जिसे सरगी कहते हैं। पारम्परिक रूप से सास अपनी बहू के लिए सरगी बनाती है, जिसमें मिठाई, सेवईं, मेवे और फल इत्यादि होते हैं।
लेकिन अगर आप डायिबिटिक हैं तो आपकी सरगी बिल्कुल अलग होगी। अपनी सरगी में प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शामिल करें। प्रोटीन पचने में समय लेता है, जिससे आपके शरीर को लम्बे समय तक ऊर्जा मिलती रहेगी और हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति नहीं आएगी। हाइपोग्लाइसीमिया का अर्थ है खून में ग्लूकोज की कमी।
आप सुबह सरगी के रूप में दही, दूध, ओट्स, जौं या बाजरे की रोटी और ड्राई फ्रूट्स लें। अगर आपकी शुगर नियंत्रित रहती है तो आप फल भी ले सकती हैं।
व्रत तोड़ने के लिए
व्रत तोड़ने के लिए भी पारंपरिक व्यंजनों से दूरी बनाए रखें। तले, भुने और मसालेदार खाने से आपके शरीर मे एकदम से कार्बोहाइड्रेट बढ़ेगा जिससे हाइपरग्लाइसीमिया की समस्या हो जाएगी। व्रत तोड़ने के लिए ताजा फलों का जूस पियें। उसके बाद फाइबर युक्त भोजन थोड़ा-थोड़ा कर के, 15 से 20 मिनट के गैप पर खाएं।
ट्रान्स फैट और सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स से दूर ही रहें।
इन बातों का रखें ख्याल-
अगर आपकी डायबिटिक मां या सास जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, वह व्रत रखती हैं, तो उन्हें निर्जला व्रत न रखने दें। दिन में पानी, नारियल पानी, जूस और चाय इत्यादि देती रहें। याद रखें, किसी भी पूजा या व्रत में सबसे महत्वपूर्ण मन की पवित्रता और श्रद्धा होती है।
अगर आपकी शुगर अक्सर लो हो जाती है तो दिन में दूध, चाय, जूस इत्यादि ले लें।
व्रत से एक दो दिन पहले से ही डाइट कम कर लें ताकि शरीर कम ग्लूकोज के लिए तैयार हो जाये।
चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो तो दूध या नींबू पानी ले लें।
अपनी सेहत का ख्याल रखें क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / कोरोना काल में करवा चौथ का पावन पर्व आज बुधवार को मनाया जाएगा। अखंड सुहाग के निमित्त महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। चंद्रोदय के बाद विधिपूर्वक पूजन करके अर्घ्य देंगी। परंपरा के अनुसार पति को चलनी से निहारने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
हर सुहागिन के लिए प्रेम का प्रतीक करवा चौथ खासा मायने रखता है। लेकिन इस बार कोरोना कालखंड ने पर्व के प्रति आस्था, उल्लास को सीमित कर दिया है। इस का प्रभाव पारंपरिक पूजन, श्रृंगार, आभूषमों और कपड़ों पर दिख रहा है। संक्रमण का भय, सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन और कोरोना के प्रसार ने पर्व की रौनक कम कर दी है। लेकिन महिलाएं परंपरा के अनुसार पूजन अर्चन करके कोरोना से अपने सुहाग की रक्षा की कामना करेंगी।
पैर छूकर आशीर्वाद से परहेज
व्रत औऱ पूजन में महिलाएं पहले गले मिलकर और पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करती थी, लेकिन अब सोशल डिस्टेंसिंग के कारण पैर छूने से परहेज करेंगी। पति की ओर से दिए जाने वाले उपहार में इस बार डिजाइनर मास्क औऱ सेनिटाइजर दिए जाएंगे। करवा चौथ में पूजा के प्रसाद भी बाजार से ना मंगाकर घर पर ही शुद्ध प्रसाद बना लें।
यूट्यूबर पर सुनेंगी कथाएं: इस बार महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल न होकर यूटयूब, लाइव वीडियो कॉल में कथाएं सुनेंगी। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए इस तरह की सावधानी रखना बहुत जरूरी है।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त
पूजा समय शाम - शाम 6:04 से रात 7:19
उपवास समय सुबह - शाम 6:40 से रात 8:52
चौथ तिथि - सुबह 3:24 से 5 नवंबर सुबह 5:14 तक
चंद्रमा का उदय - 4 नवंबर रात 8.16 से 8:52 तक
इस व्रत में पूरे दिन निर्जला रहा जाता है। व्रत में पूरा श्रृंगार किया जाता है। महिलाएं दोपहर में या शाम को कथा सुनती हैं। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि सभी करवों में रौली से सतियां बना लें। अंदर पानी और ऊपर ढ़क्कन में चावल या गेहूं भरें। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद शिव परिवार का पूजन कर कथा सुननी चाहिए। करवे बदलकर बायना सास के पैर छूकर दे दें। रात में चंद्रमा के दर्शन करें। चंद्रमा को छलनी से देखना चाहिए। इसके बाद पति को छलनी से देख पैर छूकर व्रत पानी पीना चाहिए।
धर्म संसार / शौर्यपथ / नवंबर माह ज्योतिष के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने कई ग्रहों की चाल बदल रही है। जिनमें से एक गुरु बृहस्पति देव भी शनि की राशि मकर में गोचर करेंगे। गुरु दिवाली बाद मकर राशि में 20 नवंबर (शुक्रवार) को प्रवेश करेंगे। बृहस्पति देव को देवताओं का गुरु और सुख-सुविधाओं, संपत्ति और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरु ग्रह के राशि परिवर्तन से कुछ राशियों पर सकारात्मक तो कुछ राशियों को नाकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। जानिए इस राशि परिवर्तन से किन राशियों को होगा लाभ-
1. मेष राशि- गुरु के राशि परिवर्तन से मेष राशि के जातकों को सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि रोजी-रोजगार में तरक्की के योग बनेंगे और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बढ़ेगी। छात्रों को भी खुशखबरी मिल सकती है।
2. मिथुन राशि- माना जा रहा है कि इस राशि परिवर्तन के दौरान इस राशि के जातकों के अटके हुए कार्यों में तेजी आएगी। व्यापार में भी शुभ परिणाम मिल सकते हैं। बेरोजगार युवाओं को रोजगार के भी अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
3. कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन खुशखबरी लेकर आ सकता है। माना जा रहा है कि इस गोचर के दौरान जातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे और घर-वाहन का भी सपना पूरा हो सकता है। रुठा मित्र भी जिंदगी में वापस आ सकता है।
4. तुला राशि- तुला राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। पारिवारिक सुख में बढ़ोत्तरी के साथ संतान के विवाह की समस्या खत्म हो सकती है। घर में नए मेहमान के आगमन का शुभ समाचार मिल सकता है।
5. कुंभ राशि- इस राशि के जातकों के लिए यह राशि परिवर्तन धन लाभ के योग बना सकता है। पुराने निवेश में लाभ होने के साथ ही व्यापार में भी धन लाभ हो सकता है। जमीन में निवेश के लिए भी यह समय उत्तम है।
6. मकर राशि- गुरु के राशि परिवर्तन से इस राशि के जातकों के धार्मिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। शिक्षा के जुड़े क्षेत्र में नई पहचान बन सकती है।
सेहत / शौर्यपथ / महामारी के इस दौर में लोग अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए योग और आयुर्वेदिक काढ़े को जीवनशैली में शामिल कर रहे हैं। काढ़े के अलावा ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं, जिनके नियमित सेवन से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। वहीं, बदलते मौसम में भी शरीर को मजबूत बनाने के लिए डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।
ग्रीन टी और ब्लैक टी
ग्रीन टी और ब्लैक टी, दोनों ही इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद होती हैं लेकिन एक दिन में इनके एक से दो कप ही पिएं। इनका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से आपकी भूख घट सकती है या खाने में अनिच्छा जैसी परेशानी हो सकती है।
कच्चा लहसुन
आपको अगर हड्डियों में दर्द की शिकायत रहती है, तो आपको अपनी डाइट में कच्चे लहसुन को शामिल करना चाहिए। कच्चा लहसुन खाना भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में सहायक होता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में एलिसिन, जिंक, सल्फर, सेलेनियम और विटामिन ए व ई पाए जाते हैं।
दही
बहुत से लोगों को दूध नहीं पचता या फिर दूध पीने से उन्हें साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं लेकिन दही एक ऐसा खाद्य आहार है, जो लगभग सभी लोगों के लिए फायदेमंद है। अगर आपको पेट या पेट के निचले हिस्से पर जलन की शिकायत हो, तो आप दही का सेवन कर सकते हैं। दही के सेवन से भी इम्यून पावर बढ़ती है। इसके साथ ही यह पाचन तंत्र को भी बेहतर रखने में मददगार होती है।
ओट्स
आपके पास अगर नाश्ता बनाने का वक्त नहीं है, तो आप ओट्स के पैकेट घर पर लाकर रख सकते हैं। इसे खाने से सिर्फ आपका वेट कंट्रोल ही नहीं होता बल्कि ओट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं। साथ ही इसमें एंटी-माइक्राबियल गुण भी होता है। हर रोज ओट्स का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
विटामिन सी
संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी को सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है। इसके अलावा आप संतरा, मौसमी, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया और पालक भी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
अंजीर
अंजीर पोटैशियम, मैंगनीज और एंटी-ऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर होता है। यह शरीर के पीएच के स्तर को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर ब्लड में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
अलसी
कई लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें अलसी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। वहीं, इसके बारे में ज्यादा बात न होने की वजह से इसे अंडर रेटेड मान लिया गया है जबकि अलसी में ओमेगा-3 और फैटी एसिड पाया जाता है। शाकाहार करने वालों के लिए ओमेगा3 और फैटी एसिड सबसे अच्छा स्त्रोत है।
मशरूम
मशरूम का इस्तेमाल कई स्नैक्स में किया जाता है। मशरूम खाने से सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता ही मजबूत नहीं होती बल्कि यह सफेद रक्त कोशिकाओं के कार्य को बढ़ाकर शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को बूस्ट भी करता है। कैंसर से बचाव के तौर पर भी मशरूम का इस्तेमाल किया जाता है।
गाजर
गाजर का काम शरीर में खून बढ़ाने के साथ कई हानिकारक बैक्टीरिया के साथ लड़ने का भी होता है। गाजर विटामिन ए, कैरोटिनाइड और एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत है। गाजर के सेवन से लंग कैंसर की संभावना कम होती है। मोतियाबिंद की शिकायत होने या आंखों के रोगों से बचने के लिए गाजर का सेवन करते रहना चाहिए।
टमाटर
टमाटर ऐसा फल है, जो लगभग हर भारतीय डिश में इस्तेमाल किया जाता है इसलिए यह सभी के घरों में आसानी से मिल जाता है। टमाटर एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) का लेवल कम करने में भी सहायक होता है। इसमें लाइकोपेन होता है, जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज कर देता है, जिससे फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा पाते।
शौर्यपथ / फोन या कंप्यूटर पर हिंदी भाषा में टाइप करने के लिए ऑनलाइन दुनिया में कई एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर मौजूद हैं। कई लोग हिंदी में टाइप करने के लिए बड़े साइज के एप डाउनलोड कर लेते हैं जो काफी अधिक मात्रा में फोन की इंटरनल मेमोरी का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कंप्यूटर और फोन में पहले से ही हिंदी कीबोर्ड का फीचर इनबिल्ट है। बस इसे सेटिंग्स में जाकर ऑन करने की जरूरत होती है।
स्मार्टफोन में पाएं हिंदी कीबोर्ड
गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले अधिकतर फोन में गूगल कीबोर्ड पहले ही इंस्टॉल रहता है और इसी कीबोर्ड में हिंदी कीबोर्ड भी इनबिल्ट होता है। इस एप में इसके अलावा भी विश्व की कई भाषाएं शामिल हैं। इसके बावजूद कई यूजर हिंदी टाइपिंग के लिए अलग-अलग एप्लीकेशन को फोन में इंस्टॉल करते हैं।
ऐसे एक्टिवेट करें फोन में हिंदी टाइपिंग
इसके लिए सबसे पहले जिस फोन में हिंदी टाइपिंग करना चाहते हैं उसमें कोई मैसेज खोलें। इसके बाद जो टाइपिंग का विकल्प दिया गया है जिसमें कीबोर्ड के ऊपर या नीचे की तरफ एक 'ग्लोब' का आकन दिया होगा, उस पर क्लिक कर दें। इस पर क्लिक करते ही फोन स्क्रीन पर हिंदी समेत कई विकल्प आ जाएंगे, उनमें हिंदी का चुनाव करें। ऐसा करने के बाद यूजर हिंदी टाइपिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। हिंदी से दोबारा अंग्रेजी करने के लिए इसी प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं।
ग्लोब का आइकन न आने पर
जीबोर्ड बदलने के लिए अगर फोन में ग्लोब का आइकन नहीं आ रहा है तो सेटिंग में जाएं उसमें मौजूद ‘लैंग्वेज एंड इनपुट’ के विकल्प पर क्लिक करें। इसमें आपको कीबोर्ड और इनपुट मेथेड के नीचे ‘डिफॉल्ट’ लिखा दिखाई देगा। ‘डिफॉल्ट’ में उस एप का नाम आएगा जो आपके फोन में वर्तमान समय में काम कर रहा है। हिंदी कीबोर्ड का फीचर एक्टिवेट करने के लिए याद रहे कि डिफॉल्ट में गूगल कीबोर्ड सेट हो। डिफॉल्ट के नीचे गूगल कीबोर्ड दिखाई देगा। उस विकल्प के दाईं ओर टच करने पर एक नई डिस्प्ले खुलेगी जिसके ऊपर गूगल कीबोर्ड सेटिंग लिखा मिलेगा। इसके बाद ‘लैंग्वेज’ वाले बॉक्स पर क्लिक करते ही एक बॉक्स खुलेगा। पहले बॉक्स में ‘मार्क’ लगा हुआ दिखाई देगा, मगर उस बॉक्स से मार्क हटा दें। ऐसा करने से आपकी डिस्प्ले पर विश्व की अधिकतर भाषाओं का विकल्प दिखने लगेगा। हिंदी कीबोर्ड को चालू करने के लिए नीचे की तरफ जाने पर हिंदी का विकल्प दिखेगा, उसके दाईं ओर दिए गए बॉक्स पर क्लिक करें। इसके साथ ही अंग्रेजी (भारत) वाले बॉक्स पर क्लिक रहने दें ताकि आप हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग का इस्तेमाल कर सकें। इसके बाद फोन के कीबोर्ड में हिंदी और अंग्रेजी दोनों विकल्प आ जाएंगे।
विंडोज 7 में ऐसे चालू करें हिंदी टाइपिंग
विंडोज में हिंदी कीबोर्ड को ऑन करने के लिए यूजर को पहले कंप्यूटर या लैपटॉप के ‘कंप्यूटर पैनल’ में जाना होगा। कंप्यूटर पैनल में जाने के लिए डिस्प्ले में बाईं ओर स्टार्ट का विकल्प पर क्लिक करें। इससे जो नया मेन्यू बार खुलेगा उसमें काली पट्टी के अंदर ‘कंप्यूटर पैनल’ का विकल्प मिलेगा। कंप्यूटर पैनल खुलने के बाद यूजर को Region and Language के विकल्प पर जाना होगा। यहां आपको ऊपर वाली पट्टी में चार नए बार दिखाई देंगे। पहले बार पर फॉर्मेट, दूसरे पर लोकेशन, तीसरे पर कीबोर्ड और चौथे पर लैंग्वेंज एंड एडमिनस्ट्रेटव का विकल्प है। हिंदी कीबोर्ड पाने के लिए तीसरे नंबर के विकल्प ‘कीबोर्ड’ पर क्लिक करें। इसके बाद चेंज कीबोर्ड पर क्लिक करें। इसके बाद एक और स्क्रीन बार खुलेगा जिसमें ‘जनरल’ पर क्लिक करना होगा। यहां जाने के बाद हिंदी (इंडिया) के विकल्प पर जाएं। इसमें आपके ‘देवनागरी- इनक्रिप्ट’ और ‘हिंदी ट्रेडिशनल’ के बॉक्स दिखाई देंगे। इनमें से किसी भी एक का चयन करें और ‘एप्लाई’पर क्लिक कर दें। इससे कंप्यूटर में हिंदी कीबोर्ड का फीचर आ जाएगा। इसके लिए अलग फॉन्ट की जरूरत नहीं होगी। मंगल फॉन्ट माइक्रोसॉफ्ट की सभी विंडोज में डिफॉल्ट होता है।
आसान है कीबोर्ड को हिंदी-अंग्रेजी में बदलना
माइक्रोसॉफ्ट के इस इनबिल्ट कीबोर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बड़ी ही आसानी से हिंदी और अंग्रेजी में बदला जा सकता है। इसके लिए आपको बस Shift+Alt बटन को एक साथ दबाना होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप हिंदी टाइपिंग कर रहे हैं तो Shift+Alt को दबाकर कीबोर्ड को अंग्रेजी में बदल सकते हैं। वहीं अगर आप अंग्रेजी में टाइपिंग कर रहे हैं तो Shift+Alt को दबाने से हिंदी में टाइपिंग शुरू कर कर सकते हैं।
खाना खजाना /शौर्यपथ / ब्रेड स्प्रिंग रोल यह ऐसी रेसिपी है, जिसे आप 10 मिनट के अंदर तैयार कर सकते हैं। अगर घर पर अचानक मेहमान आ जाएं या फिर बर्थ डे पार्टी हो, आप इसे स्नैक्स के तौर पर आसानी से घर पर ही बना सकते हैं। आइए, जानते हैं आसान रेसिपी
सामग्री
1 कप पत्ता गोभी
1 कप गाजर
1 कप शिमला मिर्च
2-3 लहसुन कटे हुए
½ चम्मच लहसुन का पेस्ट
1 कप प्याज
6 ब्रेड पीस
नमक स्वादानुसार
तेल आवश्यकतानुसार (फ्राई करने के लिए)
1 चम्मच सोया सॉस
विधि
सारी सब्जियों को बारीक काट लें। एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें लहसुन का पेस्ट डालकर भून लें। फिर सभी सब्जियां डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर लें। अब मसाला और सोया सॉस डालकर मिक्स कर लें। 2-3 मिनट के लिए अच्छी तरह से पका लें। अब इस मिश्रण को अलग बर्तन में निकाल लें। ब्रेड स्लाइस लें और उसके किनारे काट दें। अब ब्रेड को बेल दें। बेलने के बाद सब्जी इसमें सब्जी का मिश्रण भरें, फिर बांध कर इसके किनारों पर पानी लगाकर रख दें। इससे यह तलते समय खुलेगी नहीं। अब इन्हें तवे पर सेंक लें या फिर डीप फ्राई भी कर सकते हैं। ब्रेड स्प्रिंग रोल तैयार हैं। इन्हें सॉस या हरी चटनी के साथ गर्मागर्म सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / सोचिए! आप किसी पार्टी में गए हैं। वहां आपकी पसंद की कई तरह की डिश रखी हुई हैं लेकिन आप इन पकवानों को खाने से घबरा रहे हैं। इसकी वजह है कि खाना खाने के कुछ देर बाद ही आपको टॉयलेट की तरफ भागने की समस्या है। कल्पना से अलग यह सच्चाई उन लोगों के लिए बहुत ही भयावह है, जो इस समस्या से गुजर रहे हैं। यह समस्या तब और भी गंभीर हो जाती है, जब खाना खाते ही शौचालय जाने से वजन घटने लगता है। कई बार शौच जाने से बचने के लिए व्यक्ति अपनी डाइट में कटौती तक कर लेता है। ऐसे में कुछ ऐसे उपाय हैं, जिससे आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आइए, पहले जान लेते हैं कि आखिर क्या है यह समस्या-
गैस्ट्रो-कॉलिक रिफलक्स की समस्या
खाना खाने के तुरंत बाद पॉटी लगने की समस्या को गैस्ट्रो-कॉलिक रिफलक्स कहते हैं। देखा गया है कि ये समस्या उन लोगों को ज्यादा आती है, जो शुरुआत में लंबे समय तक शौच को रोककर रखते हैं।
इन उपायों को आजमाएं
खाना अच्छी तरह चबाकर खाएं।
फाइबर वाले आहारों का करें सेवन।
3-4 बार में थोड़ा-थोड़ा भोजन करें।
आहार में शामिल करें ये चीजें
इस समस्याह से बचने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें। फाइबर से भरपूर खाद्य पर्दाथों में नाशपाती, सेब, मटर, ब्रोकोली, साबुत अनाज, सेम और दालें शामिल है। साथ ही आहार में दही, कच्चे सलाद, अदरक, अनानास, अमरूद, अजमोद आदि को शामिल करें। इसके अलावा केले, आम, पालक, टमाटर, नट्स, और शतावरी आदि आहारों में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए ये आहार भी फायदेमंद हैं।
सेहत / शौर्यपथ / गुड़ का इस्तेमाल सर्दियों में सबसे ज्यादा किया जाता है। चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करने से खांसी-जुकाम से बचाव होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सेहत के लिए गुड़ बहुत गुणकारी होता है, यह बात हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुड़ का इस्तेमाल त्वचा को निखारने और कई परेशानियों में भी कारगर है। आइए, जानतेे हैं गुड़ के फायदे-
इन गुणों से भरा है गुड़
गुड में विटामिन -A और विटामिन -B, सुक्रोज, ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, मैग्नेशियम तत्व पाए जाते हैं। फास्फोरस की मात्रा अधिक रहती है। गुड़ में कई तरह के आवश्यक मिनरल्स और विटामिन होते है। जो त्वचा के लिए प्राकृतिक क्लींजर का काम करते है। ये शरीर को अंदर से साफ रखते है, जो त्वचा के ग्लो करने के लिए बहुत आवश्यक होता है शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में गुड़ सहायक होता है। गुनगुने पानी या फिर चाय में शक्कर की जगह गुड़ पीना चाहिए, इससे सेहत और सुंदरता दोनों बनी रहती हैं।
झाइयों और दाग-धब्बों
इस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच गुड़ पाउडर लें और उसमें 1 चम्मच टमाटर का रस, नींबू का रस और हल्दी की एक चुटकी मिक्स कर लें। इसे अपने चेहरे पर लगाएं और लगभग 15 मिनट तक रहने दें। बाद में इसे सामान्य पानी से धो लें।
झुर्रियों लिए उपाय
1 चम्मच पिसे हुए गुड़ में 1 टीस्पून ब्लैमक टी, 1 टीस्पून अंगूर का रस, एक चुटकी हल्दी समेत थोड़ा सा गुलाबजल मिक्स करें। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर इसे सामान्य पानी से धो लें।
गुड़ खाने के फायदे
एसिडिटी से छुटकारा
आपको गैस या एसिडिटी है, तो गुड़ खाने से फायदा मिलेगा। वहीं, गुड़, सेंधा नमक और काला नमक मिलाकर खाने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिल जाता है।
खून की कमी दूर करता है
गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्रोत है। अगर आपका हिमोग्लोबिन कम है, तो रोजाना गुड़ खाने से तुरंत लाभ मिलने लगेगा। गुड़ खाने से शरीर में लाल रक्त़ कोशिकाओं की मात्रा बढ़ जाती है।
कंट्रोल रहेगा ब्लड प्रेशर
गुड़ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम भी करता है। खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है।
हड्डियां रहेंगी मजबूत
गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। यह दोनों तत्व हड्डियों को मजबूती देने में बेहद मददगार हैं। गुड़ के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।
शरीर बनेगा मजबूत और एक्टिव
गुड़ शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखता है। शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताकत आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है। अगर आपको दूध नहीं पसंद है, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से आपको थकान महसूस नहीं होगी।
सर्दी-जुकाम में कारगर
गुड़ सर्दी-जुकाम भगाने में काफी असरदार है। काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है। खांसी से बचने के लिए चीनी के बजाए गुड़ खाना चाहिए। गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश और जलन में राहत मिलती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री दारा सिंह चौहान ने आज दुधवा एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।
चौहान ने आज यहां वन विभाग के मुख्यालय पर दुधवा नेशनल पार्क एवं पीलीभीत टाईगर रिजर्व के वर्ष 2०2०-21 के पर्यटन सत्र के ऑनलाइन शुभारम्भ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वन मैन-वन जॉब की तर्ज पर दुधवा नेशनल पार्क एवं पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए। स्थानीय लोगों को ड्राईवर, गाइड आदि पदों पर रखने से वे जंगल के प्रति समर्पित भाव से काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पूर्व में पर्यटन सत्र 15 नवम्बर से आरम्भ हुआ करता था, लेकिन कतिपय स्रोतों से यह अनुरोध प्राप्त होने पर कि जिस प्रकार अन्य प्रदेशों में टाइगर रिजर्व 15 अक्टूबर से खोल दिये जाते है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजवोर् को भी खोला जाये। विभाग के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाईगर रिजर्व 15 दिन पहले खोल दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे खास बात यह रही कि सैलानियों के स्वागत के लिए शेरनी ने आज चार बच्चों को जन्म भी दिया है, यह बड़े हर्ष का विषय है। इससे पहले दुधवा में पिछले साल का विश्व रिकार्ड है कि शेरनी ने एक साथ पांच बच्चों को जन्म दिया था।
वन मंत्री ने अधिकारियों को यह निदेर्श दिये कि पर्यटन के लिए विकसित संसाधनों के अतिरिक्त स्थानीय निवासियों को सैलानियों के होम-स्टे के लिए संसाधन विकसित कराकर जोड़ने का प्रयास किया जाये। उन्होंने कहा कि सैलानियों के लिए उपलब्ध पर्यटन सुविधा के आधार पर प्रतिदिन भ्रमण किये जाने वाले सैलानियों की संख्या निर्धारित की जाये तथा सैलानियों की उत्सुकता के लिए उनके भ्रमण के दौरान एक से दो मिनट का संक्षिप्त वीडियों क्लिप तैयार कराकर उनके अनुभवों एवं सुुझावों को भविष्य में उन्हें उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधाओं के लिए आधार बनाया जाए।
श्री चैहान ने कहा कि विश्व में काजीरंगा के बाद दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पाया जाता है और विभाग से यह अपेक्षा करता हूं कि आने वाले समय में काफी स्कीम लाई जाए, जिससे सैलानियों को और सुविधाएं प्राप्त हो सकेें। उनहोंने कहा पूरे विश्व में उत्तर प्रदेश को ख्याति मिले इसके लिए विभागीय कमीर् पूरी निष्ठा के साथ मिलकर काम करें । टाइगर रिजर्व के आस-पास थारू हट बनाया जाए, जिससे टाइगर रिजर्व को हेरिटेज लुक मिल सके।
पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने ऑनलाइन उद्घाटन के मौके पर कहा कि 15 दिन पहले दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व को खोलना गर्व की बात है। साथ ही विभागीय अधिकारी/कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन में अधिकतम कितने सैलानी जा सकते हैं इसका निधार्रण अधिकारी कर लें, क्योंकि जब तक सैलानी व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं दिखेंगे तबतक हम अपनी कार्ययोजना को सफल नहीं मान सकते हैं।इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव सुनील पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष डा० राजीव गर्ग, प्रबन्ध निदेशक, वन निगम, अजय कुमार और मुकेश कुमार सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
वास्तुशास्त्र /शौर्यपथ / वास्तु पुरुष के 32 पदों में से यह कड़ी पश्चिम दिशा के 17 से 24 पदों तक पर आधारित है। इसमें हम आपको बताएंगे पश्चिम दिशा में किस जगह दरवाजा होने पर क्या नुकसान और फायदा हो सकता है। ज्योतिषचार्य पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार वास्तु की दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण है।
डब्ल्यू-1-यह पश्चिम दिशा का प्रथम पद है और पितृ कहलाता है। ऐसे पद पर दरवाजा होने पर घर से गरीबी नहीं जाती। घर के सदस्यों की आयु कम हो सकती है। रोग पीड़ा एवं अनावश्यक खर्चे बने रहते हैं। विशेष रुप से गृहस्वामी के लिए यह स्थान द्वार के लिए अशुभ होता है।
डब्ल्यू-2-पश्चिम दिशा का दूसरा पद द्वारिका कहलाता है। यह स्थान भी दरवाजे के लिए शुभ नहीं होता है। जिनके घर का द्वार इस पद पर होता है उस घर के निवासियों में अपव्यय की प्रवृत्ति होती है। नौकरी और व्यापार में अस्थिरता चलती है। कभी-कभी भयंकर धोखा हो जाता है और कर्जा बढ जाता है।
डब्ल्यू-3-पश्चिम दिशा का तीसरा पद सुग्रीव कहलाता है। यह पद पश्चिम दिशा का सबसे शुभ पद है। इस पद पर दरवाजा होने पर घर में खुशियों की बहार आ जाती है। व्यापार, फैक्ट्री, दुकान आदि के लिए द्वार बनाने के लिए बहुत ही शुभ स्थान है। यहां पर दरवाजा होना घर की विकास के द्वार खोल देता है। यदि कंपनी अथवा फैक्ट्री या दुकान का दरवाजा हो तो शीघ्र ही कई ब्रांच खुल जाती हैं।
डब्ल्यू-4-पश्चिम दिशा का चौथा पद पुष्यदंत कहलाता है। इस पद पर घर का द्वार बहुत शुभ रहता है। इस पद पर द्वार होने से घर में संतुलित आय होती है। इस घर की संतान वृद्धि को प्राप्त होते हैं और उन्नति करते हैं। घर में सुख, शांति, एकता का निवास होता है। ऐसे घर के लोग मर्यादित जीवन जीते हैं।
डब्ल्यू-5- पश्चिम दिशा का पांचवा पद वरुण कहलाता है। पश्चिम दिशा का यह पद द्वार के लिए बहुत शुभ होता है। जिसके घर का द्वार इस पद पर होता है, वहां के लोग बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। वे हर कार्य में निपुणता प्राप्त कर लेते हैं और धन वृद्धि व प्रतिष्ठा वृद्धि निरंतर बनी रहती है। इसी पद पर द्वार वाले व्यक्ति दूसरों की सहायता करने में देर नहीं करते।
डब्ल्यू-6-पश्चिम दिशा का छठा पद असुर कहलाता है। यहां द्वार बनाना परिवार के लिए शुभ नहीं होता है। ऐसे घरों में तनाव और निराशा का भाव जल्दी आता है। आर्थिक हानियां निरंतर चलती रहती हैं। कई घरों में तो ऐसी स्थिति वाले द्वारों के घरों के सदस्य डिप्रेशन में पाए गए हैं। धन संबंधी कार्यों में सफलता कम मिलती है। धन के मामले में कोई न कोई अभाव बना रहता है।
डब्ल्यू-7- पश्चिम दिशा का सातवां पद सौख्य कहलाता है। इस पद पर द्वार होना भी शुभ नहीं होता है। हमेशा निराशाजनक वातावरण रहता है। ऐसे घरों के व्यक्ति स्वार्थी हो जाते हैं। गृह स्वामी को निरंतर घर से बाहर रहना पड़ता है। कई घरों में वहां के सदस्यों के मन में नकारात्मक विचार घर कर लेते हैं। इससे वहां की प्रगति प्रभावित होती है।
डब्ल्यू-8-पश्चिम दिशा का आठवां एवं अंतिम पद पापयक्ष्मा कहलाता है। जिन व्यक्तियों के घर के द्वार इस दिशा में होते हैं उस घर के लोग स्वार्थी होते हैं। घर के महिला सदस्य अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहती हैं। पुरुष वर्ग को अधिकतर बाहर रहना पड़ता है। कई लोग तो विदेशों में भी फंस जाते हैं। अर्थात यह स्थान द्वार के लिए उपयुक्त नहीं है। घर में अनावश्यक आवागमन बना रहता है। इससे घर में अपव्यय अधिक होता रहता है।
शिक्षा /शौर्यपथ / नीति शास्त्र में बताया गया है कि स्त्रियों के व्यक्तित्व और स्वभाव को समझना मुश्किल है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि महिलाएं किस वक्त खुशी और किस व्यक्ति दुखी हैं, यह जानना कठिन काम है। ऐसा कहा जाता है कि स्त्रियों के स्वभाव को समझना दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में से एक है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में कुछ ऐसी आदतें बताई हैं, जिनसे महिलाओं के स्वभाव और व्यक्तित्व को समझना आसान होता है।
1. धार्मिक कार्यों में रूचि- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिन स्त्रियों की धार्मिक कार्यों में रूचि होती है, उनका मन शांत होता है। ऐसी महिलाएं तरक्की या सफलता पाने के लिए एकाग्र होती है। नीति शास्त्र के अनुसार, ऐसी स्त्रियों को दूसरों की सफलता या असफलता परेशान वहीं करती है। वह सिर्फ अपने जीवन के उद्देश्य में मग्न होती हैं।
2. आलसी- आचार्य चाणक्य कहते हैं जो स्त्रियां आलस्य से भरी होती हैं, उन्हें जीवन में सफलता हासिल करना मुश्किल होता है। नीति शास्त्र के अनुसार, ऐसी महिलाओं को सफलता पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कहते हैं इन्हें परिवार के सदस्य खूब प्रेम देते हैं लेकिन समाज में मान-सम्मान नहीं मिलता है।
3. अनुशासन में रहना- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो स्त्रियां अनुशासन में रहती हैं वह जल्दी सफलता हासिल करती हैं। कहते हैं कि ऐसी महिलाएं दूसरे के लिए प्रेरणा होती हैं। नीति शास्त्र के अनुसार, अपने सपनों और कार्यों को पूरा करने के कारण इस स्वभाव की महिलाओं को परिवार के सदस्यों के साथ समाज में भी खूब मान-सम्मान मिलता है।
4. ईर्ष्या करने वाली- माना जाता है कि जिन महिलाओं में ईर्ष्या का भाव होता है, वह चालाकी से खुद तरक्की हासिल करती हैं। कहते हैं कि ऐसी स्त्रियां दूसरों के सफलता के रास्ते में बाधाएं डालती हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऐसी महिलाओं पर विश्वास करने से बचना चाहिए। क्योंकि समय आने पर आप भी विश्वासघात का शिकार हो सकते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीकृष्ण पहले ही बता चुके थे कि जयद्रथ को उसके पिता द्वारा वरदान मिला है कि जो भी उसका वध करेगा और जैसे ही उसका सिर भूमि पर गिरेगा तो वध करने वाले के सिर के 100 टुकड़े हो जाएंगे। तब श्रीकृष्ण अर्जुन को एक नई युक्ति बताते हैं उसी युक्ति और नीति के अनुसार अगले दिन का युद्ध प्रारंभ हो जाता है। चारों ओर शंख ध्वनि बजने लगती है। अर्जुन युद्ध भूमि पर तबाही मचा देता है। सभी कौरव सिंधु नरेश जयद्रथ की सुरक्षा की शपथ ले चुके होते हैं।
अर्जुन के रोद्र रूप को देखकर सिंधु नरेश जयद्रथ घबरा जाता है। कृपाचार्य कहते हैं कि तुम निश्चिंत हो जाओ तुम्हें कुछ नहीं होगा। शकुनि कहता है कि सिंधु नरेश क्या आप हम पर भरोसा नहीं करते हैं? यह सुनकर वह कहता है कि करता हूं परंतु आपसे ज्यादा मुझे अर्जुन के शौर्य और पराक्रम पर भरोसा है। अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा अवश्य पूरी करेगा और उसकी प्रतिज्ञा पूरी होने का अर्थ है मेरा अस्तित्व ही मिट जाना। लगता है कि सूर्य को भी अस्त होने की कोई जल्दी नहीं है। इस तरह सिंधु नरेश बहुत ही घबरा जाता है।
उधर, श्रीकृष्ण कहते हैं कि सूर्य सर पर आ गया है। आधा दिन हाथ से निकल गया है और अब तक जयद्रथ हमें दिखाई नहीं दिया है। यह सुनकर अर्जुन कहता है कि कब तक, कब तक छिपेगा अपनी मृत्यु से? आज में उसे जीवित नहीं छोड़ूंगा। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि पार्थ! ये तुम्हारी भावना बोल रही है। इस समय तुम भावनावश सच्चाई को भूल रहे हो। यह सुनकर अर्जुन पूछता है- कौनसी सचाई। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि यही की द्रोणाचार्य ने कुशलतापूर्वक व्यूह के अंदर व्यूह की रचना की है। तुम कौरवों का जो व्यूह ध्वस्त करके जयद्रथ तक पहुंचना चाहता हो वह द्रोणाचार्य का रचा हुआ केवल बाहरी व्यूह है और उन्होंने जो आंतरिक व्यूह बनाया है उसमें जयद्रथ सुरक्षित है और इस व्यूह के मुख पर स्वयं द्रोणाचार्य खड़े हैं। अब तक हम इस बाहरी व्यूह का भेदन भी नहीं कर सके हैं जबकि हमें चाहिए कि हम इस बाहरी व्यूह को तोड़कर हम आगे बढ़ें और द्रोणाचार्य से युद्ध करके उन्हें पराजित करें। इसके बाद ही हम आंतरिक व्यूह में प्रवेश कर सकेंगे। जयद्रथ तक पहुंचना बहुत ही दुष्कर कार्य है। क्योंकि हमारे पास केवल सूर्यास्त तक का समय है और समय है कि हमारे हाथों से निकला जा रहा है।
यह सुनकर अर्जुन कहता है कि धन्यवाद केशव जो तुमने मुझे गुरु द्रोणाचार्य की चाल समझा दी। अब चलो गुरु द्रोणाचार्य और उस आंतरिक व्यूह की ओर चलो। यह देखकर दुर्योधन सेना को आदेश देता है कि अर्जुन को रोको और उसे आगे मत बढ़ने दो, उसे चारों ओर से घेर लो। परंतु अर्जुन अपने तीरों से कोहराम मचा देता है। अर्जुन को रोकने के लिए कर्ण आता है परंतु भीम बीच में ही कूदकर कहता है कि अर्जुन तुम जाओ, इस सूत पुत्र से तो मैं निपटता हूं।
उधर यह घटना संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि अर्जुन को रोकने के लिए कौरववीर एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं परंतु उसे रोकने में असफल हैं। महाराज अर्जुन ने मानो आज साक्षात यमराज का अवतार धारण कर लिया है। उसके सामने जो भी कोई आता है ढेर हो जाता है। यह सुनकर धृतराष्ट्र कहते हैं कि संजय यह तो बताओ कि सिंधु नरेश जयद्रथ तो सुरक्षित है ना? इस पर संजय कहता है कि हां महाराज परंतु वो अपना आत्मविश्वास खो चुके हैं। तब धृतराष्ट्र कहते हैं कि तुम सबकुछ बता रहे हो संजय परंतु दिन कितना चढ़ चुका है ये नहीं बता रहे हो। तब संजय बताता है कि ऐसा लगता है कि सूर्य कुरुक्षेत्र के आकाश में ठहरकर अर्जुन का पराक्रम देख रहा है।
उधर अर्जुन लाशों के ढेर लगा देता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि वाह अर्जुन वाह। आड़े आने वाली हर बाधाओं को इसी प्रकार दूर करते जाओ। यह देखकर दुर्योधन अर्जुन को रोकने का प्रयास करता है परंतु अर्जुन के पराक्रम के आगे उसे हार मानना पड़ती है। श्रीकृष्ण कहते हैं- दुर्योधन पहले गुरु द्रोण से धनुर्विद्या की शिक्षा लेकर आना फिर अर्जुन से युद्ध करना। फिर अर्जुन कहता है कि चलो केशव, रथ द्रोणाचार्य के सामने ले चलो।
अर्जुन का द्रोणाचार्य से भयंकर युद्ध होता है। इस बीच सिंधु नरेश घबराता रहता है। कृपाचार्य और अश्वत्थामा उसे सांत्वना देते हैं परंतु सिंधु नरेश कहता है कि अरे! अर्जुन कर्ण और दुर्योधन सहित सभी सेना को परास्त करके यहां तक पहुंच गया है। अब मुझे कोई नहीं बचा सकता। तुम मानो या ना मानो मेरी रक्षा का वचन देकर कर्ण, दुर्योधन, शकुनि और तुम लोग अपने ही प्राणों की रक्षा करते रहे इसलिए अर्जुन यहां तक आ पहुंचा, नहीं तो वह यहां सूर्यास्त तो क्या प्रलय तक भी नहीं पहुंच सकता था। बस अब मुझे लगता है कि मेरा अंत किसी भी क्षण आ जाएगा।
उधर धृतराष्ट्र पूछता है कि संजय सूर्यास्त हुआ या नहीं? तब संजय कहता है कि सूर्यास्त होने में अभी समय है महाराज। यह सुनकर धृतराष्ट्र कहता है कि क्या यह सूर्य भी पांडवों का पक्षपाती बन गया है। शीघ्र बताओ संजय कि अर्जुन अब कहां तक पहुंच गया है। यह सुनकर संजय कहता है कि अर्जुन अब द्रोणाचार्य के रचे दूसरे व्यूह के पास पहुंच गया है।
अर्जुन और द्रोणाचार्य में भयंकर युद्ध चल रहा होता है। तभी श्रीकृष्ण सूर्य को देखकर कहते हैं कि पार्थ सूर्य पश्चिम दिशा की ओर झुक गया है पर हम व्यूह में अब तक प्रवेश भी नहीं कर सके। हमें व्यूह में शीघ्र ही प्रवेश करना चाहिए। यह सुनकर अर्जुन कहता है कि परंतु द्रोणाचार्य को परास्त किए बिना इस व्यूह में प्रवेश नहीं कर सकते। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि और द्रोणाचार्य के हाथों में जब तक शस्त्र है उन्हें कोई भी परास्त नहीं कर सकता। चाहे वह कितना ही वीर क्यों ना हो। यदि तुम्हें जयद्रथ का वध करना है तो द्रोणाचार्य को टालकर व्यूह में प्रवेश करना होगा और वह भी अतिशीघ्र क्योंकि अब हमारे पास समय नहीं है। यह सुनकर अर्जुन अपने तीर से माया रचता है, द्रोणाचार्य को एक नहीं रथ पर बैठे कई अर्जुन और कृष्ण नजर आने लगते हैं। यह देखकर सभी घबरा जाते हैं।
उधर, धृतराष्ट्र कहते हैं कि क्या कह रहे हो तुम संजय, कुरुक्षेत्र में कई अर्जुन प्रकट हो गए हैं? इस पर संजय कहता है कि हां महाराज दुर्योधन और अन्य कौरव भ्रम में पड़ गए हैं। तब धृतराष्ट्र कहते हैं कि ये अर्जुन मायावी कब से बन गया? कहीं ये कृष्ण की माया तो नहीं?
फिर द्रोणाचार्य बताते हैं कि अर्जुन ने गांधर्वास्त्र फेंककर हमें भ्रमित कर दिया है। फिर दुर्योधन के कहने पर द्रोणाचार्य गांधर्वास्त का प्रत्युतर देते हैं और अर्जुन की माया को समाप्त कर देते हैं परंतु जब माया समाप्त होती है तो शकुनि कहता है आचार्य ये असली अर्जुन और कृष्ण कहां चले गए? दिखाई नहीं दे रहे। यह सुनकर सभी घबरा जाते हैं तभी दुर्योधन कहता है वो देखो आचार्य अर्जुन व्यूह में प्रवेश कर गया है। आचार्य अब क्या होगा? उधर, भीम के साथ युधिष्ठिर भी कहता है कि इसी व्यूह में जयद्रथ को छुपाया है।
द्रोणाचार्य कहते हैं कि तुम चिंता मत करो अर्जुन जयद्रथ के पास पहुंच ही नहीं पाएगा क्योंकि अर्जुन के पास उतना समय ही नहीं है। वो देखिये सूर्यास्त होने का समय आ चुका है। सभी सूर्य की ओर देखते हैं। सूर्य बस डूबने ही वाला रहता है। यह देखकर सभी खुश हो जाते हैं। उधर, धृतराष्ट्र भी यह सुनकर खुश हो जाता है।
उधर, अर्जुन व्यूह को तोड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है और इधर युधिष्ठिर सहित सभी पांडव सूर्य को देखकर चिंतित हो जाते हैं और खुद को कोसते रहते हैं।
दूसरी ओर सिंधु नरेश अश्वत्थामा और कृपाचार्य से कहता है कि इन धमाकों का अर्थ यह है कि अर्जुन ने ना केवल व्यूह में प्रवेश कर लिया है बल्कि वह मेरे निकट भी आ पहुंचा है। बस कुछ ही क्षणों में वह मेरे सर तक भी पहुंच जाएगा। तब अश्वत्थामा कहता है कि घबराइये नहीं सिंधु नरेश इसकी कोई संभावन दिखाई नहीं देती क्योंकि एक व्यहू को ध्वस्त करने के बाद इस दूसरे व्यूह को ध्वस्त करने में अर्जुन को सारा दिन लग जाएगा। परंतु इतना समय लाएगा कहां से वह?
तभी श्रीकृष्ण अपनी माया से सूर्य को अस्त कर देते हैं। सभी कौरव पक्ष में हर्ष व्याप्त हो जाता है। अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा अनुसार अग्नि में प्रवेश करने के लिए चिता तैयार करता है और चिता में अग्नि प्रज्वलित कर देता है। यह देखने के लिए सभी कौरव एकत्रित हो जाते हैं। उनके साथ जयद्रथ भी हंसता हुआ वहां आ खड़ा होता है। तभी श्रीकृष्ण अपनी माया दिखाते हैं और सूर्य फिर से निकल आता है।
तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि अभी सूर्यास्त कहां हुआ है पार्थ, वो देखो। सभी आसमान में देखने लगते हैं। यह देखकर जयद्रथ घबराकर कहता है कि ये कैसे हो गया? फिर श्रीकृष्ण कहते हैं कि और जब सूर्यास्त नहीं हुआ है तो तुम्हें अग्नि में प्रवेश करने के बदले अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनी चाहिए। पार्थ! वो देखो सूर्य और वो रहा जयद्रथ, तुम्हारा शत्रु। यह देख और सुनकर अर्जुन हर्षित हो जाता है और जयद्रथ कहता है बचाओ। परंतु तब तक अर्जुन अपने धनुष पर बाण का संधान करके छोड़ चुका होता है।
जयद्रथ का सिर कटकर धनुष पर सवार होकर आसमान में दूर निकल जाता है और सीधा जाकर उसके पिता की गोद में गिर जाता है। तपस्या कर रहे जयद्रथ के पिता चौंक जाते हैं और वह उसका सिर उठाकर भूमि पर रख देते हैं तभी उनके सिर के 100 टुकड़े हो जाते हैं। यह देखकर अर्जुन और श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं तभी आसमान में सूर्यास्त हो जाता है। जय श्रीकृष्णा।
शौर्यपथ /सामग्री : 1 किलो कद्दूकस की हुई लौकी, 50 ग्राम ताजा मावा (खोया), 2 बड़े चम्मच घी, 150 ग्राम शकर, पाव चम्मच इलायची पावडर और 2-3 केसर के लच्छे।
विधि :
सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर किसी हुई लौकी को हल्का भूनकर अलग रख लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा पानी डालें, फिर चीनी डालें। जब शकर पूरी तरह घुल जाए, तब इसमें भूनी हुई लौकी डालकर चलाएं।
जब शकर का पानी पूरी तरह खत्म हो जाए और चाशनी जैसा गाढ़ा दिखाई देने लगे, तब इसमें मावा डालकर हिलाएं। फिर इलायची पावडर डालें और अच्छी तरह चलाकर 2-3 मिनट तक चलाएं। अब केसर को हाथ से मसलकर ऊपर से बुरकाएं।
लीजिए आपके लिए तैयार है लौकी और खोया का जायकेदार हलवा। व्रत के दिनों में लाभदायी ये हलवा सेहत की दृष्टि से बहुत फायदेमंद है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
