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सेहत / शौर्यपथ क्या आप जानते हैं कि हर सेहतमंद चीज, हर मौसम में फायदेमंद नहीं होती? लेकिन ये बात बिल्कुल सही है। इसलिए हम आपको बता रहे हैं ऐसी 5 चीजों के बारे में, जिनका ठंड में इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद की जगह नुकसानदायक हो सकता है।
1 दही -
दही वैसे तो बेहद फायदेमंद होता है, लेकिन ठंड के दिनों में कच्चे दही का इस्तेमाल आपके लिए ठीक
नहीं है। इसकी तासीर ठंडी है, इस मौसम में यह आपको सर्दी, जुकाम खांसी या पाचन संबंधी समस्या दे सकता है। आप इसे खाना ही चाहते हैं, तो फ्राय करके या छाछ के रूप में कर सकते हैं।
2 दूध - भले ही आपको यकीन न हो, लेकिन ठंड में दूध का इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है। यह कफ पैदा करता है, जो कफ या ठंडी तासीर वालों के लिए नुकसानदायक है। आप चाहें तो इसे गर्म करके, हल्दी, शहद, गुड़ या अंजीर के साथ इसे ले सकते हैं।
3 पुदीना - इस मौसम में भी पुदीने को स्वाद से खाते हैं तो थोड़ा संभल जाएं, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और इस मौसम में यह सर्दी जुकाम का कारण बन सकता है।
4 फल - फलों में इस मौसम में आपको चयन करना होगा कि कौन से फल ठंडी तासीर के हैं और कौन से नहीं। इस मौसम में केला, संतरा जैसे फल कफ और कोल्ड का कारण बन सकते हैं।
5 ठंडा पानी - नॉर्मल पानी की जगह ठंडा पानी पीने की आदत है, तो इन दिनों में ऐसा न करें। इससे आपका गला खराब हो सकता है और यह सर्दी जुकाम का कारण बन सकता है।
श्रध्दा /शौर्यपथ / दीपावली के दिन माता लक्ष्मी को यदि ये भोग लगाएंगे तो उनकी कृपा सदा आप पर बनी रहेगी। लेकिन ध्यान रहे कि माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना सदा भगवान विष्णुजी के साथ ही करना चाहिए। लक्ष्मीजी को धन की देवी माना गया है। कहते हैं कि अर्थ बिना सब व्यर्थ है। लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय भोग को लक्ष्मी मंदिर में जाकर अर्पित करना चाहिए या दीपावली के दिन पूजा के दौरान इन्हें अर्पित करें।
लक्ष्मी भोग
1. केसर भात : पीले रंग के केसर भात भी माता को अर्पित करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है।
2. पीले रंग के मिष्ठान : माता लक्ष्मी को पीले और सफेद रंग के मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं।
3. खीर : माता लक्ष्मी को चावल की खीर में किशमिश, चारोली, मखाने और काजू मिलाकर अर्पित करें।
4. हलुआ : शुद्ध घी का हलुआ माता को प्रिय है।
5. ईख (गन्ना) : दीपावली के दिन गन्ना को इसलिए अर्पित किया जाता क्योंकि उनके सफेद हाथी को यह प्रिय है।
6. सिघाड़ा : सिंघाड़ा माता लक्ष्मी को बहुत ही पसंद है। इसकी उत्पत्ति भी जल से होती है।
7. मखाना : जिस तरह माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र से हुई उसी तरह मखाने की उत्पत्ति भी जल से हुई है। मखाना कमल के पौधे से मिलता है।
8. बताशे : पताशा या बताश भी माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय है। रात्रि की पूजा में इसे अर्पित किया जाता है।
9. नारियल : नारियल को श्रीफल भी कहते हैं। इसमें सबसे शुद्ध जल भरा रहता है। श्रीफल होने के कारण माता यह बहुत पसंद है।
10. पान : माता लक्ष्मी की पूजा में मीठा पान का बहुत महत्व है। यह प्रसन्नता और समृद्धि का प्रतीक है।
11. अनार : मां लक्ष्मी को फलों में अनार बेहद प्रिय है। दीपावली की पूजन के दौरान अनार जरूर अर्पित करें।
इसके अलावा पूजन के दौरान 16 प्रकार की गुजिया, पपड़ियां, अनर्सा, लड्डू चढ़ाएं जाते हैं। आह्वान में पुलहरा चढ़ाया जाता है। इसके बाद चावल, बादाम, पिस्ता, छुआरा, हल्दी, सुपारी, गेंहूं, नारियल अर्पित करते हैं। केवड़े के फूल और आम्रबेल का भोग अर्पित करते हैं। जो कोई भी व्यक्ति एक लाल फूल अर्पित कर लक्ष्मीजी के मंदिर में उन्हें यह भोग लगाता है तो उसके घर में हर तरह की शांति और समृद्धि रहती है। किसी भी प्रकार से धन की कमी नहीं रहती।
धर्म संसार / शौर्यपथ /देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर पूजन-अर्चन करने से आर्थिक संकट समाप्त हो जाता है। खासकर शुक्रवार को यहां जाना चाहिए। महालक्ष्मी और लक्ष्मी के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। उनमें से ही जानते हैं 10 की जानकारी।
1. पद्मावती का मंदिर : तिरुपति के पास तिरुचुरा नामक एक छोटा-सा गांव है। इस गांव में देवी पद्मावती का सुंदर मंदिर है। यह मंदिर 'अलमेलमंगापुरम' के नाम से भी जाना जाता है। लोक मान्यता है कि तिरुपति बालाजी के मंदिर में मांगी मुराद तभी पूरी होती है, जब श्रद्धालु बालाजी के साथ-साथ देवी पद्मावती का आशीर्वाद भी ले लें।
2. दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर : भारतीय राज्य तमिलनाडु के जिले वेल्लू में स्थित थिरुमलई कोड गांव श्रीपुरम में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को 'दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर' कहा जाता है। 100 एकड़ में फैला यह मंदिर चेन्नई से 145 किलोमीटर दूर पलार नदी के किनारे स्थित है।
3. पद्मनाभस्वामी मंदिर : पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुअनंतपुरम् में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है, लेकिन यहां से अपार मात्रा में 'लक्ष्मी' की प्राप्ति हुई थी। यह मंदिर अपने सोने के खजाने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। भगवान विष्णु को समर्पित पद्मनाम मंदिर को त्रावणकोर के राजाओं ने बनाया था। इसका जिक्र 9वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है, लेकिन मंदिर के मौजूदा स्वरूप को 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था।
4. मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर : समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित यह मंदिर अत्यंत सुंदर, आकर्षक और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ज्ञात इतिहास के अनुसार इस महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना अंग्रेजों के काल में हुई। उस समय देवी लक्ष्मी एक ठेकेदार रामजी शिवाजी के स्वप्न में प्रकट हुईं और उन्हें समुद्र तल से देवियों की 3 प्रतिमाएं निकालकर मंदिर में स्थापित करने का आदेश दिया। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती तीनों देवियों की प्रतिमाएं एकसाथ विद्यमान हैं।
5. कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर : कोल्हापुर महाराष्ट्र का एक जिला है। कहा जाता है कि यहां स्थित महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण चालुक्य शासक कर्णदेव ने 7वीं शताब्दी में करवाया था। इसके बाद शिलहार यादव ने 9वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण करवाया था।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में देवी महालक्ष्मी की लगभग 40 किलो की प्रतिमा स्थापित है जिसकी लंबाई लगभग 4 फीट की है। कहा जाता है कि यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7,000 साल पुरानी है।
6. लक्ष्मीनारायण मंदिर : दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक लक्ष्मीनारायण मंदिर को मूल रूप में 1622 में वीरसिंह देव ने बनवाया था, उसके बाद पृथ्वीसिंह ने 1793 में इसका जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सन् 1938 में भारत के बड़े औद्योगिक परिवार बिड़ला समूह ने इसका विस्तार और पुनरुद्धार कराया जिसके बाद इसे बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है।
7. इंदौर का महालक्ष्मी मंदिर : इंदौर शहर के हृदयस्थल राजवाड़ा की शान कहे जाने वाले श्री महालक्ष्मी मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1832 में मल्हारराव (द्वितीय) ने कराया था। 1933 में यह 3 तलों वाला मंदिर था, जो आग के कारण तहस-नहस हो गया था। 1942 में मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार कराया गया था। वर्तमान में मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करके इसे भव्य रूप दिया गया है।
8. चौरासी मंदिर : यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के चंबा से 65 किलोमीटर दूर भरमौर जिला नगर में स्थित है। यहां महालक्ष्मी के साथ गणेशजी और नरसिंह भगवान की मूर्ति भी स्थित है। प्राकृतिक वादियों में बसा यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
9. चंबा का लक्ष्मीनारायण का मंदिर : हिमाचल के चंबा में स्थित यह मंदिर पारंपरिक वास्तुकारी और मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। चंबा के 6 प्रमुख मंदिरों में यह मंदिर सबसे विशाल और प्राचीन है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर राजा साहिल वर्मन ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था। यह मंदिर शिखर शैली में निर्मित है।
10. अष्टलक्ष्मी मंदिर : चेन्नई के इलियट समुद्र तट के पास स्थित यह मंदिर लगभग 65 फीट लम्बा और 45 फीट चौड़ा है। मंदिर में देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूप 4 मंजिल में बने 8 अलग-अलग कमरों में स्थापित है। इस मंदिर में देवी लक्ष्मी अपने पति और भगवान विष्णु के साथ मंदिर की दूसरी मंजिल में विराजित है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कार्तिक मास की एकादशी को रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। रमा एकादशी के दिन व्रत और पूजा करने से मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी कृपा मिलती है। इस बार एकादशी तिथि 11 नवंबर की रात 3 बजे शुरू होगी और 12 नवंबर तक रहेगी। माता लक्ष्मी के नाम रमा पर इस एकादशी का नाम रमा एकादश पड़ा। आपको बता दें कि रमा एकादशी दिवाली से चार दिन पहले आती है। इसलिए इस एकादशी की पूजा के साथ ही दिवाली का उत्सव भी शुरू हो जाता है।
हिंदू शास्त्रों में एकादशी को शुभ तिथियों में से एक माना गया है। यह एक महत्वपूर्ण एकादशी हैं क्योंकि माता लक्ष्मी की पूजा भगवान विष्णु के साथ कुछ ही एकादशी पर की जाती है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी का व्रत एक दिन पहले से ही शुरू होता है इसलिए दशमी के दिन सूर्यास्त से पहले भोजन ग्रहण कर लेना चाहिए। एकादशी पर सुबह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके बाद पूरे दिन ग्रहण नहीं किया जाता है। व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है।
सेहत / शौर्यपथ / वजन कम करने के लिए हेब्रेकफस्ट करना बहुत जरूरी है। जो खाना आप सुबह ब्रेकफास्ट में लेते हैं, वह आपको पूरे दिन के लिए ऊर्जा देता है। ब्रेकफास्ट स्किप करने से आपका वजन घटने की बजाय बढ़ सकता है। इसलिए शरीर को ऊर्जा देने के लिए हमें प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाना चाहिए। खाने में आपकी खराब पसंद आपके शरीर के पाचन तंत्र पर प्रभाव डाल सकती है।
इसलिए हमें डाइट का चुनाव बहुत ही समझदारी से करना चाहिए। खासकर अगर बात आपके वजन को कम करने को लेकर हो। वजन कम करने के लिए आपको नाश्ते में प्राकृतिक चीजों को उनके ही असली रूप में हीखाना चाहिए।
वजन कम करने की सोच रहे हैं तो कभी भी पैक किए हुए अनाज और फ्रूट जूस का इस्तेमाल न करें। दरअस इनमें सुगर जरूर होती है। वजन कम करने के लिए जरूरी है कि हम यही कैलोरी और पोषक तत्व लें, इसलिए इन चीजों को नाश्ते में नहीं लेना चाहिए। कुछ लोग नाश्ते में एनर्जी ड्रिंक भी लेते है, वजन कम करने की सोच रहे लोगों को इन चीजों से परहेज करना चाहिए।
लो फैट स्नैक: लो फैट स्नैक सुनने में अजीब सा लगता है, लेकिन इसमें शुगर औऱ नमक काफी ज्यादा होता है, क्योंकि इनसे ही उनमें फ्लेवर आता है और उन्हें प्रिजर्व किया जाता है।
वजन कम करने के दौरान बाहर की सलाद बिल्कुल भी न लें। दरअसल बाहर की सलाद मायोनीज से सजाई गई होती हैं, जो आपके वजन को कम करने के लिए सही नहीं। इसी तरह अगर आप सूप खाना चाहते हैं तो पैकेट के सूपे की जगह घर में बनाया हुआ सूप लें।
पाटन में 101 आंगनबाड़ी केंद्रों का रेनोवेशन वेदांता समूह की मदद से हुआ, लोकार्पण के पश्चात बच्चों से प्रश्न पूछे मुख्यमंत्री ने
दुर्ग / शौर्यपथ / बच्चे सबसे अच्छे, मुख्यमंत्री ने जब आर जामगांव में आंगनबाड़ी के बच्चों की क्लास ली तो ब्लैकबोर्ड में यह लिख दिया। बच्चों के साथ उनके यह बेहद आत्मीय क्षण थे मौका था पाटन विधानसभा में 101 आंगनबाड़ी केंद्रों के रेनोवेशन पश्चात लोकार्पण का। यह वेदांता समूह के सहयोग से हुआ। मुख्यमंत्री ने इस केंद्र की बड़ी तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस ऑडियो विजुअल की सुविधा वाले केंद्र में बच्चों को कल्पनाशीलता विकसित करने में खेल खेल में सीखने में खासी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बच्चों से प्रश्न भी पूछे।
आंगनबाड़ी की दीवारों पशु पक्षियों के सुंदर तस्वीरों से सजी थी। मुख्यमंत्री एक एक कर इनके बारे में पूछते रहे और बच्चे उत्साह से जवाब देते रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी पहली ऐसी जगह होती है जहां घर से परे बच्चे पहली बार देर तक रुकते हैं। यह सुंदर हो, सुविधापूर्ण हो, मनोरंजक हो तो बच्चों को बहुत अच्छा लगता है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बच्चों को गिफ्ट भी दिये। उल्लेखनीय है कि लोकार्पित होने वाले केंद्रों में ऑडियो विजुअल क्लास के लिए टीवी सेट आदि की व्यवस्था की गई है। हाइजिनिक किचन बनाया गया है। वाटर फ़िल्टर की सुविधा है। एक मॉडल आंगनबाड़ी के अनुकूल बड़ा सुंदर माहौल यहां बनाया गया है।
यहां मौजूद जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि यहां की कार्यकर्ता श्रीमती मोहिनी म्हस्के और सहायिका श्रीमती देवेंद्री श्रीवास ने सुपोषण को लेकर बहुत अच्छा काम किया है तथा अपने केंद्र को कुपोषण से मुक्त किया है। इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों का सम्मान किया। इस मौके पर संभागायुक्त टीसी महावर, आईजी विवेकानंद सिन्हा, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
खाना खजाना / शौर्यपथ /सर्दियों में अलग-अलग तरह के पराठे खाने का अलग ही मजा है। ब्रेकफास्ट के लिए पराठे बेस्ट ऑप्शन है। आइए, जानते हैं आज मूली के पराठे बनाने का तरीका-
सामग्री :
2 मूली
2 हरी मिर्च बारीक कटी
आधी कटोरी हरा धनिया बारीक कटा
अदरक एक टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ
एक चम्मच चाट मसाला
एक छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
स्वादानुसार नमक
आटा गूंदने के लिए सामग्री
3 कप गेहूं का आटा
आधा चम्मच अजवाइन
आधा छोटा चम्मच नमक
घी या मक्खन (पिघला हुआ पराठे सेंकने के लिए)
विधि : सबसे पहले एक बर्तन में आटे में अजवाइन, नमक और पानी डालकर आटा गूंद लें। ध्यान रहे आटा न ज्यादा सख्त हो और न ही ज्यादा नर्म।
मूली को छीलकर धो लें और फिर इसे कद्दूकस करें। कद्दूकस की हुई मूली को दोनों हाथों से दबाकर उसका पानी अच्छी तरह निचोड़ लें।
अब मूली में हरी मिर्च , चाट मसाला, भुना जीरा पाउडर, हरी धनिया और नमक डालकर मिक्स करें।
फिर आटे की लोई बनाकर उसकी छोटी पूरी बेलकर, इसके बीच में मूली का मिश्रण रखें और पूरी को चारों ओर से पलटकर मिश्रण को उसमें बंद करके फिर लोई बनाएं। अब इस लोई को बेलकर पराठा बनाएं।
इसके बाद गैस पर तवा रखकर गर्म करें। फिर गर्म तवे पर थोड़ा घी डालें। उस पर पराठा डालकर मध्यम आंच पर सेंकें। - अब पराठे के ऊपरी तरफ भी चम्मच से घी लगाएं और इसे पलटकर दूसरी तरफ से भी सेंकें। ऐसे ही सभी पराठे सेंक लें।
लीजिए तैयार हैं गर्मागर्म मूली के पराठे।चटनी या दही के साथ इनका स्वाद लें।
सेहत / शौर्यपथ / फिटनेस पाने के लिए लोग क्या-क्या जतन करते हैं। कई सर्वे के अनुसार आप शरीर पर चर्बी होने के कारण कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में आपको बैली फैट कम करने के साथ फिट रहने की कोशिश करनी चाहिए। खुद को फिट रखने में ब्रेकफॉस्ट का भी अहम रोल होता है, ऐसे में आपको अगर हमेशा स्लिम ट्रिम रहना है, तो ऐसी 5 चीजें हैं, जो आपको नाश्ते में बिल्कुल नहीं खानी चाहिए-
प्रोसेस्ड फूड
ऐसे खाद्य पदार्थों को कई बार पकने की क्रिया से गुजरना पड़ता है। साथ ही तेल, मसाले, घी होने की वजह से ये सेहत के लिए भी अच्छे नहीं होते। आपको चिप्स, पॉपकॉर्न, ड्राई फ्रूट्स, स्नैक्स आदि से दूर रहना चाहिए।
केक, कुकीज
केक और कुकीज में मैदे के अलावा घी और क्रीम का इस्तेमाल होता है, जो आपकी फिटनेस के हिसाब से बिल्कुल भी सही नहीं है इसलिए आपको नाश्ते में इन चीजों को नहीं खाना चाहिए।
नूडल्स
नूडल्स खाने में तो बहुत अच्छे लगते हैं लेकिन इसे हेल्दी ब्रेकफॉस्ट नहीं माना जा सकता है, इसी वजह से आपको नूडल्स नाश्ते में बिल्कुल नहीं खाने चाहिए।
फ्रूट जूस
आपको कोशिश करनी चाहिए कि मार्केट में उपलब्ध फ्रूट जूस बिल्कुल न पिएं बल्कि आप घर में ही फलों का जूस निकालकर पी सकते हैं। आपके पास अगर जूस की जगह फल खाने का समय है, तो नाश्ते के लिए सबसे बेहतरीन रहेगा।
पकौड़े-कचौड़ी
सुबह-सुबह तली चीजें खाना बिल्कुल भी सही नहीं है। आप पकौड़े और कचौड़ी जैसी तली हुई चीजें सुबह नहीं खाएंगे, तो आपकी सेहत के लिए अच्छा रहेगा।
शौर्यपथ / त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। कुछ ही दिनों में दिवाली, भैया दूज भी आने वाले हैं। ऐसे में हर उत्सव का मजा दोगुना करने और रिश्तों में मिठास घोलने के लिए लोग घर पर ही कई तरह की मिठाइयां बनाते हैं। ज्यादातर मिठाइयां मावा से बनाई जाती हैं, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट होती हैं। लेकिन मिठाई बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला मावा अगर नकली हो तो न सिर्फ त्योहार का मजा खराब हो जाता है बल्कि सेहत को भी काफी नुकसान होता है। अगर आप भी नकली माला खरीदने और सेहत को होने वाले नुकसान से बचना चाहते हैं तो मावा खरीदते समय ध्यान रखें ये जरूरी बातें।
-मावा खरीदते समय ध्यान रखें ये जरूरी बातें-
1-मावा पहचानने का सबसे आसान तरीका है कि यह ध्यान रखें कि असली खोया मुलायम और नकली खोया दरदरा होता है।
2- मावा खरीदने से पहले थोड़ा मावा खाकर देखें, मावा अगर असली होगा तो मुंह में चिपकेगा नहीं जबकि नकली मावा चिपक जाएगा।
3- हथेली पर खोया को लेकर उसकी गोली बनाएं। अगर यह फटने लग जाए तो समझ जाएं मावा नकली है या फिर इसमें मिलावट की गई है।
4- मावा या खोया को अपने अंगूठे के नाखून पर रगड़ें। अगर यह असली है तो इसमें से घी की महक आएगी।
5- असली मावे को खाने पर कच्चे दूध जैसा स्वाद आएगा। जबकि नकली मावा चखने पर स्वाद में कसैला होता है
6- मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें।अगर ये पानी छोड़ने लगे तो यह नकली खोया है।
7- असली खोया पानी में जल्दी घुल जाता है जबकि नकली खोया पानी में जल्दी नहीं घुलता।
8- असली खोया चिपचिपा नहीं होता बल्कि नकली खोया चिपचिपा होता है।
9- नकली मावे का पता लगाने के लिए उसे पानी में डालकर फेंटने से वह दानेदार टुकडों में अलग हो जाएगा।
10-असली खोया सफेद रंग का और नकली हल्का पीले रंग का होता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / सुख-समृद्धि की कामना के साथ त्योहार मनाए जाते हैं। हर त्योहार से जुड़ी तैयारियां वास्तु के सिद्धांत पर ही आधारित हैं। दीपावली के अवसर पर वास्तु के अनुसार त्योहारों की तैयारियां करें। आइए जानते हैं इनके बारे में।
त्योहारों के अवसर पर अपने घर या प्रतिष्ठान की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। घर या प्रतिष्ठान के प्रवेश द्वार पर की जाने वाली सजावट के लिए चावल के आटे, रंगीन पाउडर, फूल, आम के पत्ते का प्रयोग करें। घर में रखे अनुपयोगी सामान को घर से बाहर कर दें। घर की साज सज्जा में विविध रंगों का इस्तेमाल करें। घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीया जलाएं। त्योहार के अवसर पर किसी को भी पानी वाली चीजें या शोपीस उपहार में न दें। अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित चीजें भी किसी को उपहार में न दें। किसी को भी भगवान श्रीगणेश-माता लक्ष्मी की मूर्ति उपहार में न दें। घर या प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के पैरों के निशान लगाना शुभ माना जाता है। पैरों की दिशा द्वार से अंदर आते हुए हो। दीपावली पर घर या दुकान के मुख्यद्वार के पास किसी बर्तन में पानी भरकर उसमें फूल डाल दें। इस बर्तन को मुख्यद्वार की पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। त्योहार पर बर्तनों में पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन ख़रीद सकते हैं। सोने या चांदी का सिक्का ख़रीदना भी शुभ होता है। दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक ही जलाएं। दीपावली पर मिट्टी के दीए जरूर जलाएं। त्योहारों पर मखाने की खीर बनाने से घर में संपन्नता आती है। पूजाघर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां बैठी हुई अवस्था में होनी चाहिए। दीपावली के दिन नई झाडू खरीदे। इस नई झाडू की पूजा कर आप पूरे घर की सफाई नई झाडू से करें।
शौर्यपथ / त्योहार हमारे जीवन में नई खुशियां, नई ऊर्जा और नया उत्साह लेकर आते हैं। दीपावली के साथ कई त्योहार आने वाले हैं। घर और प्रतिष्ठानों में त्योहारों को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं जो इन त्योहारों पर आपके परिवार में सुख और समृद्धि में वृद्धि करने में सहायक हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
घर या प्रतिष्ठान का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। त्योहारों के स्वागत में घर या प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार को तोरण, रंगोली से सजाएं। घर के प्रवेश द्वार की सफाई का विशेष ध्यान रखें और प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीपक जलाएं। अगर घर या प्रतिष्ठान में रंग-रोगन की आवश्यकता है तो इसे जरूर कराएं। दीवारों पर दरारें, टूट-फूट, सीलन के निशान सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण नहीं कर पाती हैं। घर में जो वस्तुएं अनुपयोगी हैं और नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर रही हैं तो उन्हें घर से बाहर कर दें। त्योहारों पर घर या प्रतिष्ठान का वातावरण धूप-अगरबत्ती से सुगंधित करें। घर की सफाई का विशेष ध्यान रखें और फूल, आम के पत्ते, रंगोली, रंगीन बल्ब आदि से घर या प्रतिष्ठान की साज सज्जा करें। रंगोली बनाते समय काले या भूरे रंग का प्रयोग न करें। त्योहार पर घर में बच्चों, बहू-बेटियों को रुपया-पैसा या दूसरी वस्तुओं का दान अवश्य करें। किसी को भी उपहार में चाकू या चमड़े आदि का सामान न भेंट करें। घर के कोने-कोने में नमक मिश्रित जल का छिड़काव करें। त्योहारों पर ध्यान रखें कि घर में कोई कमरा बंद न हो। पूजा में पीले वस्त्रों का प्रयोग करें। पीले आसन पर बैठकर पूजा करें। त्योहारों पर तुलसी के पौधे पर लाल या पीले रंग का वस्त्र चढ़ाएं और घी का दीप जलाकर रखें।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य में बढ़ती ठंड और प्रदूषण को देखते हुए कोरोना संक्रमण की संभावनाओं को देखते हुए विशेषज्ञ लगातार सभी को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
राजधानी रायपुर की प्रसिद्ध स़्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ सरिता दुबे इस समय गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती महिलाओं को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। उन्होने कहा कि गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन जब भी बाहर जाएं मास्क जरूर लगाएं,भीड़ में न जाएं और दूसरों से 1 मीटर की दूरी बनाकर रखें। ऐसे समय में उन्हे अपने शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बनाए रखनी है। उन्होने कहा कि कोरोना संक्रमित शिशुवती माताएं, शिशुओं को पूरी सावधानी बरतते हुए मास्क लगाकर और हाथ अच्छी तरह से धोकर स्तनपान करा सकती हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के पाटन ब्लाक के ग्राम पतोरा के गौठान पहुंचे। वहां स्वसहायता समूह की महिलाओं ने दीवाली त्योहार के लिए सुंदर डिजाइनर दीये, सजावटी सामग्री तथा परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के पैकेट की सामग्री उन्हें दिखाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बिहान बाजार के बुकलेट का भी लोेकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं द्वारा संचालित आयमूलक गतिविधियों और उनके द्वारा उत्पादित सामग्री की गुणवत्ता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सामग्रियों को केवल स्थानीय स्तर विक्रय करने के बजाए इसकी मार्केटिंग अन्य बाजारों एवं शहरों में की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को महिला समूहों के उत्पाद की मार्केटिंग एवं ऑनलाईन विक्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि आनलाइन प्लेटफार्म के लिए बातचीत चल रही है। इन उत्पादों को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने दुर्ग में बिहान बाजार जिला पंचायत परिसर में आरंभ किया गया है। केवल दो दिनों में 3 लाख रुपए की बिक्री बिहान बाजार में हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं से कहा कि जिन वस्तुओं की बाजार में ज्यादा माँग है, उन्हें तैयार करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि इन्हें सिलाई मशीन का प्रशिक्षण भी दें। अगरबत्ती, फिनाइल, साबुन जैसे उत्पादों के निर्माण के लिए भी सभी समूहों को प्रेरित करें। कोशिश यह हो कि स्थानीय मार्केट में अधिकाधिक उत्पाद स्थानीय एसएचजी ही उपलब्ध करा दें। इससे आय का रास्ता खुलेगा।
मुख्यमंत्री ने गौठान में वर्मी कंपोस्ट उत्पादन को भी देखा। मुख्यमंत्री ने पूछा कि डिकंपोजर डाला या नहीं। महिला समूह से जुड़ी सुमन ने बताया कि डिकंपोजर के उपयोग से खाद बनाने में लगने वाला समय काफी कम हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों को आत्मनिर्भर बनाना है। आप लोग जितना काम गोधन न्याय योजना पर करेंगे, आपकी आय उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने पहाटियों से भी बातचीत की। पहाटियों ने बताया कि इससे हमें आय जरिया मिल गया है।इस मौके पर गुंडरदेही के विधायक श्री कुंवर निषाद, संभागायुक्त श्री टीसी महावर, आईजी विवेकानंद सिन्हा, सीएफ श्रीमती शालिनी रैना, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर, सीईओ सच्चिदानंद आलोक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य में गोबर विक्रेताओं को अब तक हो चुका 47.38 करोड़ रूपए का भुगतान
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राज्य शासन की महत्वाकांक्षी 'गोधन न्याय योजना' के तहत राज्य के 77 हजार 592 ग्रामीणों एवं गौपालकों से 20 अक्टूबर से 5 नवम्बर के मध्य गौठानों में क्रय किए गए गोबर के एवज में 8 करोड़ 97 लाख रूपए का ऑनलाइन भुगतान किया। गोधन न्याय योजना के तहत अब तक गोबर विक्रेताओं को 47 करोड़ 38 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास से गौठान और गोधन न्याय योजना का राज्य में सफल क्रियान्वयन हो रहा है और इसका लाभ ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों सहित समाज के गरीब तबके के लोगों को मिलने लगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन और विक्रय भी शुरू हो चुका है। इससे अब महिला समूहों को भी लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट सहित अन्य सामग्रियों के निर्माण के लिए महिला समूहों को प्रशिक्षित किए जाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन एवं अप्रारंभ गौठानों को तेजी से पूरा कराने और इसे आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित करने की बात कही। उन्होंने महिला समूहों द्वारा उत्पादित सब्जी एवं अन्य सामग्रियों की मार्केटिंग के लिए उन्हें शासकीय संस्थाओं विशेषकर स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम तथा आश्रम-छात्रावास में आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि महिला समूह मांग आधारित सामग्रियों का उत्पादन करें, ताकि उन्हें लाभ होता रहे। उन्होंने कहा कि सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चर्चा पूरे देश में है। उन्होंने राज्य में इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गोधन न्याय योजना के तहत प्रत्येक पखवाड़े में गोबर खरीदी की राशि का भुगतान कर अपने वादे को निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अब तक 47.38 करोड़ रूपए का भुगतान गोबर बेचने वाले ग्रामीणों एवं गौपालकों को किया जा चुका है। यह समाज के जरूरतमंद एवं गरीब लोगों को सीधा लाभ पहुंचाने वाली योजना है। उन्होंने कहा कि गौठानों में उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट की गुणवत्ता की जांच के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। गौठानों के आजीविका मिशन से जोडऩे की कार्ययोजना है। उन्होंने गौठानों में आजीविका मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र को 10-10 गौठानों से तथा एग्रीकल्चर, डेयरी एवं मत्स्य महाविद्यालयों को भी गौठानों से जोडऩे की बात कहीं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम.गीता ने बताया कि राज्य में 5454 गौठान निर्मित है, जिसमें से 3677 गौठानों में गोबर की खरीदी की जा रही है। अब तक 23 लाख 68 हजार 900 क्विंटल गोबर क्रय किया गया है। उन्होंने बताया कि गोबर विक्रेताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के 51.51 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति वर्ग के 37.24 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति वर्ग के 7.40 प्रतिशत हितग्राही शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्मी खाद के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गौठानों में वर्मी टांको का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। अब तक 44 हजार से अधिक टांके बनाए जा चुके है, जबकि 16 हजार टांके निर्माणाधीन है। गौठानों में 8 हजार से अधिक क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद का उत्पादन हुआ है। जिसमें से एक हजार क्विंटल खाद की बिक्री हो चुकी है। शेष खाद की मात्रा की पैकेजिंग एवं विक्रय प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि गोधन न्याय योजना शुरू होने से बीते 3 माह में सक्रिय गौठानों की संख्या में लगभग 1 हजार की बढ़ोत्तरी हुई है।
इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर, संसदीय सचिव शिशुपाल शोरी, सचिव कृषि अमृत कुमार खलखो, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक उद्यानिकी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
