July 24, 2026
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    शौर्यपथ / अच्छी सेहत के लिए हम क्या कुछ नहीं करते है, लेकिन सही खान-पान के साथ कुछ ऐसी बातें भी हमें ध्यान रखनी चाहिए जिसका सीधा असर हमारी हेल्थ पर पड़ता है। दरअसल हममें से ऐसे कई लोग है। जो दोपहर के खाने के बाद कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक होता है। वो क्या गलतियां है आइए जानते हैं...
    1 आपने सुना होगा कि खाने के एकदम बाद पानी नहीं पीना चाहिए? अगर आप इसका पालन करते हैं तो ठी है, लेकिन अगर नहीं करते और पानी पी लेते हैं तो ध्यान रखें कि कभी ठंडा पानी न पिएं। खाना खाने के बाद यह पाचन बिगाड़ सकता है। अगर आपको पीना ही है तो गुनगुना पानी पिएं, यह पाचन को और बेहतर करेगा।
    2 खाना खाने के बाद चाय या कॉफी पीना अगर आपको पसंद है, तो अफसोस कि यह आपकी बड़ी गलती है। इससे शरीर आहार में मौजूद आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता और न ही प्रोटीन को पचा पाता है।
    3 दोपहर का खाना खत्म करने के बाद अगर आप तुरंत अपने काम पर लौट जाते हैं और तेज चलना या अन्य गतिविधि करते हैं, तो यह भी गलती है। खाने के बाद कुछ देर रेस्ट करें उसके बाद ही एक्ट‍िव हों, वह भी धीरे।
    4 खाने के बाद कुछ घंटों तक फल, जूस या अन्य खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करें। ये आपके पाचन की प्रक्रिया को बाधित कर देता है।
    5 खाने के बाद लेटना ठीक नहीं है, ना ही धूम्रपान का सेवन ठीक है। यह तेजी से आपके पाचन तंत्र और शरीर को हानि पहुंचा सकता है।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अधिकतर लोग कहते हैं कि age is just a number। जी हां, उम्र सिर्फ एक नंबर ही तो है। किसी भी सच्चे रिश्ते में उम्र का फर्क कितना मायने रखता है? ज्यादातर लोग मानते हैं कि लड़के की उम्र लड़की से बड़ी होनी चाहिए ताकि दोनों के बीच आपसी समझ और तालमेल बना रहे। आपको क्या लगता है? क्या ये भ्रम नहीं है? बदलते वक्त के साथ अब लड़का, लड़की से बड़ा हो या लड़की, लड़के से उम्र में बड़ी हो ये मायने नहीं रखता। मायने ये रखता है कि दोनों की आपसी समझ कैसी है? वे दोनों एक-दूसरे से कितना प्यार करते हैं? एक-दूसरे के साथ कितने खुश हैं? ऐसे कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज कपल हैं जिसमें लड़की, लड़के से बड़ी है और उनका रिश्ता काफी मजबूत भी है। वैसे भी कहते हैं कि प्यार में उम्र की सीमा नहीं होती है। यदि आप दोनों एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं, एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझते हैं तो बाकी चीजें मायने नहीं रखतीं। बस आपको अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है। वो क्या है, आइए जानते हैं...।
    कभी भी अपने पार्टनर को इस बात का एहसास न दिलाएं कि वे आपसे बड़ी हैं। शायद कभी उनको आपकी ये बात हर्ट भी कर जाए। आपके रिश्ते में उम्र नहीं, आप दोनों की आपसी समझ मायने रखती है, इस बात का ख्याल रखें। रिश्ते समझ और प्यार से मजबूत होते हैं।

    महिलाएं हमेशा अपने पति से छोटी बने रहना चाहती हैं। वे हमेशा इस बात को लेकर कॉन्शियस रहती हैं और ये सब वे आपके लिए करती हैं।

    अपनी पार्टनर को हमेशा स्पेशल होने का अहसास करवाएं। उन्हें इस बात का एहसास करवाएं कि वे आपके लिए बहुत खास हैं। इससे आप दोनों के बीच प्रेम और बढ़ेगा।
    आपकी पार्टनर आपसे उम्र में बड़ी हैं, आप ये कहने में संकोच न करें। यदि आप अपने परिचित से ये बात छुपाते हैं, तो इसका यह मतलब है कि आप इस बात को लेकर कहीं-न-कहीं सोचते हैं। ये बात आपकी पार्टनर को बुरी भी लग सकती है इसलिए इसे बिलकुल नॉर्मल लें कि ये आपके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। आप दोनों के बीच प्यार और समझदारी मायने रखती है, जो शायद ऐसे कपल के बीच भी न हो जो सेम एज के हों...।

    सरप्राइज गिफ्ट आपके रिश्तों में और मधुरता लेकर आएगा। ऐसा करके आप अपने पार्टनर को खुश रख सकते हैं। आप चाहे तो सरप्राइज डिनर भी प्लान कर सकते हैं।

    सेहत / शौर्यपथ /विटामिन-सी से भरपूर आंवला, हर मौसम में लाभदायक होता है। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए तो फायदेमंद है ही, साथ ही इसके और भी कई फायदे हैं, जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। आमतौर पर आंवले का प्रयोग अचार, मुरब्बा या चटनी के रूप में किया जाता है,लेकिन इसका अलग-अलग तरह से सेवन आपके लिए बेहद उपयोगी है। अगर आप नहीं जानते इस अनमोल फल के बारे में तो जरूर पढ़ि‍ए -
    1 डायबिटीज के मरीजों के लिए आंवला बहुत काम की चीज है। पीड़ि‍त व्यक्ति अगर आंवले के रस का प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करे तो बीमारी से राहत मिलती है।
    2 एसिडिटी की समस्या होने पर आंवला बेहद फायदेमंद होता है। आंवला का पाउडर, चीनी के साथ मिलाकर खाने या पानी में डालकर पीने से एसिडिटी से राहत मिलती है। इसके अलावा आंवले का जूस पीने से पेट की सारी समस्याओं से निजात मि‍लती है।
    3 पथरी की समस्या में भी आंवला कारगर उपाय साबित होता है। पथरी होने पर 40 दिन तक आंवले को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, और उस पाउडर को प्रतिदिन मूली के रस में मिलाकर खाएं। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में पथरी गल जाएगी।
    4 रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर, प्रतिदिन आंवले के रस का सेवन करना काफी लाभप्रद होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, और खून की कमी नहीं होने देता।
    5 आंखों के लिए आंवला अमृत समान है, यह आंखों की रौशनी को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके लिए रोजाना एक चम्मच आंवला के पाउडर को शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है और मोतियाबिंद की समस्या भी खत्म हो जाती है।
    6 बुखार से छुटकारा पाने के लिए आंवले के रस में छौंक लगाकर इसका सेवन करना चाहिए, इसके अलावा दांतों में दर्द और कैविटी होने पर आंवले के रस में थोड़ा सा कपूर मिला कर मसूड़ों पर लगाने से आराम मिलता है।
    7 शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर आंवल सबसे बेहतर उपाय है। आंवले के रस का सेवन या आंवले को किसी भी रूप में खाने पर यह ठंडक प्रदान करता है। हिचकी तथा उल्टी होने की पर आंवले के रस को मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करने से काफी राहत मिलेगी।
    8 याददाश्त बढ़ाने में आंवला काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए सुबह के समय आंवला के मुरब्बा गाय के दूध के साथ लेने से लाभ होता है,
    इसके अलावा आप प्रतिदिन आंवले के रस का प्रयोग भी कर सकते हैं।
    9 चेहरे के दाग-धब्बे हटाकर उसे खूबसूरत बनाने के लिए भी आंवला आपके लिए उपयोगी होता है। इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ, चमकदार होती है और झुर्रियां भी कम हो जाती हैं।
    10 बालों को काला, घना और चमकदार बनाने के लिए आंवले का प्रयोग होता है, इसके पाउडर से बाल धोने या फिर इसका सेवन करने से बालों की समस्याओं से निजात मिलती है

    सेहत /शौर्यपथ / मूंग की दाल अधिकांश घरों में बनाई जाती है और काफी पसंद भी की जाती है। वैसे तो सभी तरह की दालों में पौष्टिक तत्व होते हैं, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि मूंग की दाल खाने से आपको कौन से फायदे मिलेंगे -
    1 मूंग की दाल में भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है। साथ ही इसे खाने से विटमिन-सी, कार्ब्स, प्रोटीन और डायटरी फाइबर भी मिलता है।

    2 मूंग की दाल खाने से एनीमिया की समस्या में राहत मिलती है और वजन कम करने में भी ये सहायक होती है।

    3 मूंग की दाल का पानी पिने से फाफी देर तक पेट भरा रहता है और आप एनर्जेटिक भी फील करते हैं।

    4 मूंग की दाल का पानी छोटे बच्चों के लिए भी फायदेमंद होता है, बच्चे इसे आसानी से पचा पाते हैं। ये बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कतती है।
    5 अगर किसी को दस्त या डायरिया की समस्या हो गई हो, तो उन्हें 1 कटोरी मूंग दाल पिलाएं। इससे उनके शरीर में पानी की कमी पूरी होगी साथ ही दस्त रूकने में मदद मिलेगी।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार का विशेष महत्व है। दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस साल दिवाली 14 नवंबर को है। दिवाली के दिन लोग लक्ष्मीजी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर विचरण के लिए आती हैं और लोगों पर कृपा बरसाती हैं। दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा को लेकर यूं तो कई तरह की पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक साहूकार की बेटी से भी जुड़ी है।

    पढ़ें दिवाली की पौराणिक कथा-

    एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में साहूकार रहता था। उसकी बेटी हर दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने के लिए जाती थी। जिस पीपल के पेड़ पर वह जल चढ़ाती थी, उस पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास था। एक दिन लक्ष्मीजी ने साहूकार की बेटी से कहा कि वह उसकी मित्र बनना चाहती हैं। लड़की ने जवाब में कहा कि वह अपने पिता से पूछकर बताएगी। घर आकर साहूकार की बेटी ने पूरी बात बताई। बेटी की बात सुनकर साहूकार ने हां कर दी। दूसरे दिन साहूकार की बेटी ने लक्ष्मीजी को सहेली बना लिया।
    दोनों अच्छी सखियों की तरह एक-दूसरे से बातें करतीं। एक दिन लक्ष्मीजी साहूकार की बेटी को अपने घर ले आईं। लक्ष्मी जी ने अपने घर में साहूकार की बेटी का खूब आदर किया और पकवान परोसे। जब साहूकार की बेटी अपने घर लौटने लगी तो लक्ष्मीजी ने उससे पूछा कि वह उन्हें कब अपने घर बुलाएगी। साहूकार की बेटी ने लक्ष्मी जी को अपने घर बुला लिया, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह स्वागत करने में घबरा रही थी कि क्या वह अच्छे तरह से स्वागत कर पाएगी।

    साहूकार अपनी बेटी की मनोदशा को समझ गया। उसने बेटी को समझाते हुए कहा कि वह परेशान न हो और फौरन घर की साफ-सफाई कर चौका मिट्टी से लगा दे। चार बत्ती वाला दीया लक्ष्मी जी के नाम से जलाने के लिए भी साहूकार ने अपनी बेटी से कहा। उसी समय एक चील किसी रानी का नौलखा हार लेकर साहूकार के घर आ गया। साहूकार की बेटी ने उस हार को बेचकर भोजन की तैयारी की। थोड़ी ही देर में मां लक्ष्मी भगवान गणेश के साथ साहूकार के घर आईं और साहूकार के स्वागत से प्रसन्न होकर उसपर अपनी कृपा बरसाई। लक्ष्मी जी की कृपा से साहूकार के पास किसी चीज की फिर कभी कमी न हुई।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति को समर्पित होता है। इस दिन भगवान बृहस्पति की विधि-विधान से पूजा की जाती है। बृहस्पति भगवान को देवताओं का गुरु माना जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से विवाह मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही बृहस्पति भगवान की कृपा से उच्च शिक्षा और अपार धन की प्राप्ति के योग की भी मान्यता है। हर व्यक्ति सुखद गृहस्थ जीवन, नौकरी, धन और शिक्षा चाहता है, ऐसे में हर व्यक्ति को भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। जानिए गुरुवार के दिन भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के आसान उपाय-
    1. मान्यता है कि गुरुवार के दिन पानी में हल्दी डालकर नहाने से भगवान बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना फलकारी माना जाता है।
    2. बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना शुभ माना जाता हैं। इसके साथ ही पीले रंग के कपड़े और पपीते की डल गले में पहनना शुभ माना जाता है।
    3. कहते हैं कि गुरुवार को किसी को न ही उधार देना चाहिए और न ही लेना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से जातक की कुंडली में गुरु की स्थिति खराब हो सकती है, जिसके कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
    4. गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। कहते हैं कि स्नान के बाद ‘ॐ बृ बृहस्पते नमः’ का जाप करने से धन-संपदा में तरक्की होती है।
    5. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा व चित्र का सामने घी का दीया जलाने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
    5. कहते हैं कि भगवान बृहस्पति को पीले रंग अतिप्रिय है। इसलिए इस दिन ब्राह्मणों को पीले रंग की वस्तुएं जैसे- चने की दाल, फल आदि दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से घर में बरकत होती है।
    6. अगर प्रमोशन या रोजगार संबंधी बाधा आ रही हो तो गुरुवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुएं जैसे फल, कपड़े इत्यादि का दान करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से विवाह संबंधी और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
    7. घर से दरिद्रता दूर करने के लिए गुरुवार के दिन घर के सदस्य खासतौर पर महिलाओं के बाल धोने से मनाही होती है। कहते हैं कि इस दिन नाखून काटना भी अशुभ होता है।

    जगदलपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में सौगातों का पिटारा खोला। उन्होंने यहां बस्तर दशहरा के आयोजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मांझी-चालकी सहित विभिन्न पदाधिकारियों के मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर दिल जीत लिया।
    मुख्यमंत्री बघेल ने सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा उठाई गई मांगों पर 20 घोषणाएं कीं। उन्होंने सभी मांझी चालकियों से वन अधिकार पट्टे के लिए आवेदन लेकर उन्हें 6 माह के भीतर पट्टा देने की घोषणा की। इसी प्रकार मांझियों का मानदेय 1350 से बढ़ाकर 2000 रूपए प्रतिमाह, चालकियों का मानदेय 675 रूपए से बढ़ाकर एक हजार रूपए, कार्यकारिणी मेम्बरीन का मानदेय एक हजार से बढ़ाकर 11 सौ रूपए, और साधारण मेम्बरिनों को 15 सौ रूपए वार्षिक मानदेय, 21 पुजारियों का मानदेय 3 हजार से बढ़कार 3500 रूपए, गुरूमाय और भंडारदेवी पुजारी, मुण्डा बाजा वादक, मोहरी बाजा वादक और पूजा करने वाले सात सदस्यों को 1500 वार्षिक मानदेय, जोगी बिठाई करने वाले लोगों को 11 हजार रूपए, रथ निर्माण करने वाले दल को 21 हजार रूपए के मान से कुल 42 हजार रूपए की राशि दिए जाने की घोषणा की।
    इसी प्रकार उन्होंने मांझी-चालकी के रिक्त पदों पर 6 माह के भीतर भर्ती किए जाने और जगदलपुर के मांझी भवन का उन्नयन कराने और चालकी की मांगों पर 6 माह के भीतर पूर्ण करने की घोषणा की।
    मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर कहा कि विश्व का सबसे लंबा पर्व मनाने का कीर्तिमान बस्तर के पास है। प्रतिवर्ष ढाई महीने तक मनाया जाने वाला यह पर्व इस वर्ष साढ़े तीन माह तक मनाया गया। बस्तर दशहरा हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया में सबसे अधिक समय तक चलने वाला पर्व है। यह आयोजन हिन्दुस्तान में ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय है, जिसे देखने बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी आते हैं।
    उन्होंने बस्तर को आजादी पसंद बताते हुए कहा कि 1857 में आजादी की लड़ाई से काफी पहले यहां राजा गैंदसिंह को 1824 में फांसी दी गई थी। वर्ष 1857 में विद्रोह की ज्वाला बस्तर से निकली’।
    छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीरनारायण सिंह सहित सभी सपूतों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ने देश की आजादी में विशेष भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि मुरिया दरबार में आकर उन्हें काफी प्रसन्नता हो रही है। इस आयोजन में दंतेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, कोण्डागांव और कांकेर से आदिवासी समाज के लोग शामिल होने आते हैं। मुरिया दरबार में समारोह के अलावा समाज उन्नति पर भी विचार विमर्श होता है यह सराहनीय है। यह समाज प्रकृति के साथ स्वतंत्रता पूर्वक रहने वाला समाज है। बस्तर दशहरा के लिए रथ निर्माण हेतु पेड़ कटाई की भरपाई के लिए वृक्षारोपण के संकल्प की मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की।
    मुख्यमंत्री ने गरीब, आदिवासी एवं किसान हितैषी नीतियों के बारे में कहा कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद किसानों की ऋण माफी और 25 सौ रूपए में धान खरीदी की गई। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए धान, मक्का और गन्ना किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की राशि दे रहे हैं। इसकी दो किस्त दे चुके हैं। तीसरी किस्त एक नवंबर को देंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोहण्डीगुड़ा में हमने 1700 आदिवासी किसानों की 42 सौ एकड़ जमीन वापस की है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए सबसे ज्यादा प्रति बोरा 4000 रूपए की राशि दी जा रही है। वनवासियों को सतत रूप से आय सुनिश्चित करने के लिए समर्थन मूल्य पर 7 की जगह अब 31 लघु वनोपजों की खरीदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद था, ऐसे कठिन समय में राज्य सरकार ने स्वसहायता समूहों के माध्यम से लघुवनोपज की खरीदी की व्यवस्था की। जिस समय लोग एक-एक पैसे के लिए मोहताज थे, हमारी सरकार ने मनरेगा में एक दिन में 26 लाख लोगों को रोजगार देने का कीर्तिमान बनाया, जिससे लोगों को कोई तकलीफ नहीं हुई।
    मुख्यमंत्री ने सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष का दायित्व भली भांति निभाया। उन्होंने इस पर्व के आयोजन में शामिल विभिन्न समुदायों की हर छोटी-बड़ी समस्याओं की जानकारी ली और उनका समाधान किया। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल के दौरान इस महापर्व के सफल आयोजन के लिए बस्तर दशहरा समिति और जिला प्रशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पर्व की सभी रस्मों का आयोजन करने के साथ ही सुरक्षा का भी भरपूर ध्यान रखा गया। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री एवं बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने भी उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया।
    झंडा मांझी के छायाचित्र का लोकार्पण
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर झंडा मांझी के छायाचित्र का लोकार्पण किया। बस्तर दशहरा के उत्कृष्ट आयोजन में सहयोग के लिए मांझी, चालकी सहित बस्तर दशहरा समिति के सदस्यों और कर्मचारियों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
    इस अवसर पर बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव, संसदीय सचिव एवं जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप, क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार, मत्स्य बोर्ड के अध्यक्ष एम.आर. निषाद, महापौर श्रीमती सफीरा साहू, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    शौर्यपथ / स्कूल खोलने से सामुदायिक संक्रमण नहीं फैलता है। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह दावा किया है। शोधकर्ता दल ने अमेरिका और ब्रिटेन के स्कूलों में संक्रमण की स्थिति का आकलन करने पर पाया कि बच्चों से संक्रमण तो फैल रहा है पर वे कम्युनिटी संक्रमण नहीं फैला रहे।
    अमेरिका और ब्रिटेन में स्कूल खुले लगभग तीन महीने हो चुके हैं। इन दोनों देशों के स्कूलों में हुई सैंडम टेस्टिंग के डाटा का शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसके आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में तुलनात्मक रूप से कम संक्रमण फैला और इन स्कूलों के कारण बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
    यानी बच्चों में संक्रमण का डर तो है पर इससे बहुत बड़ा खतरा पैदा नहीं होता। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ब्रूक निकोलस का कहना है कि हम स्कूल से जुड़े जितने ज्यादा डाटा का अध्ययन कर रहे हैं, उतने ज्यादा निश्चिंत हो रहे हैं कि बच्चे वायरस के संक्रमण को नहीं फैलाते। विशेषकर स्कूल में मौजूदगी के दौरान बच्चों के जरिए संक्रमण नहीं फैल रहा।
    बच्चों से बड़े संक्रमण का खतरा नहीं
    सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. माइकल ब्रीच ने कहा कि बच्चों से बहुत बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने या कम्युनिटी संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक के तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे संक्रमित होते हैं और वे संक्रमण फैलाते भी हैं पर यह संक्रमण बहुत बड़े स्तर पर नहीं फैलता। उन्होंने कहा कि यही बच्चों और स्कूल खोलने से जुड़ी वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी चिंता थी।
    स्कूल बंद करना समाधान नहीं
    पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के बाल रोग व संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. डेविड रुबिन का कहना है कि संक्रमण के डर से स्कूल बंद कर देना समाधान नहीं है। कम से कम प्राथमिक स्कूलों में कक्षाएं (इन-पर्सन) शुरू कर देनी चाहिए। साथ ही अगर बड़े बच्चों की कक्षाएं चलाने के लिए स्कूल पर्याप्त बचाव के इंतजाम करें तो ज्यादा बड़े खतरे के उन्हें शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में पढ़ाई जारी रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।
    बार-रेस्तरां बंद हों, स्कूल नहीं
    शोधकर्ताओं का कहना है कि छोटी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई चलती रहती चाहिए। अगर सरकारें किसी हॉटस्पॉट क्षेत्र में संक्रमण को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकना चाहती हैं तो उन्हें बार और रेस्टोरेंट जैसे सार्वजनिक स्थानों को बंद करना चाहिए क्योंकि यहां युवा बचाव के तरीकों को अपनाए बिना मिलते हैं, जिससे संक्रमण फैलता है।
    नीदरलैंड बना उदाहरण
    नीदरलैंड में इन दिनों एक बार फिर संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यहां सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए बार और रेस्टोरेंट को बंद किया है, जबकि स्कूल लगातार संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, ब्रिटेन में भी अभी कुछ प्रतिबंधों के साथ स्कूल खुल रहे हैं जबकि वहां संक्रमण बढ़ गया है।
    स्पेन में आज तक स्कूल बंद नहीं हुए
    दुनिया में स्पेन उन कुछ देशों में से एक है, जहां संक्रमण फैलने के बावजूद कभी स्कूलों को बंद नहीं किया गया। यहां 16 साल से छोटे बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं, वहीं बड़े बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं।

    शौर्यपथ / केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि एकल अभिभावक वाले पुरुष सरकारी कर्मचारी अब चाइल्ड केयर लीव के हकदार हैं। उन्होंने कहा,‘‘ एकल पुरुष अभिभावक में ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जो अविवाहित या विधुर या तलाकशुदा हैं और इसलिए बच्चे की देखभाल करने की जिम्मेदारी लेने की उम्मीद की जा सकती है।’’
    सरकारी सेवकों के जिंदगी आसान करने के लिए पथ-प्रदर्शक और प्रगतिशील सुधार बताते हुए, सिंह ने कहा कि निर्णय के संबंध में आदेश कुछ समय पहले जारी किए गए थे, लेकिन किसी भी तरह से सार्वजनिक डोमेन में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
    कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा कि बाल देखभाल अवकाश पर एक कर्मचारी अब सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के साथ मुख्यालय छोड़ सकता है। इसके अलावा, कर्मचारी को लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) का लाभ मिल सकता है, भले ही वह चाइल्ड केयर लीव पर हो।
    सिंह ने कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा कि पहले 365 दिनों के लिए चाइल्ड केयर लीव 100 प्रतिशत पर दी जा सकती है और अगले 365 दिनों के लिए 80 प्रतिशत लीव सेलरी दी जा सकती है।

    शौर्यपथ / पंजाब इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसिज (पिम्स) के चिकित्सकों ने लेज़र तकनीक से 26 और 28 सप्ताह के प्रीमेच्योर बच्चों की आंखों के आप्रेशन कर पदोर्ं को ठीक करने में सफलता पाई है।
    शिशु विशेषज्ञ प्रोफेसर डा. जतिंदर सिंह ने मंगलवार को बताया कि कोरोना काल के दौरान अगस्त महीने में जालंधर और होशियारपुर के दो परिवारों के 28 और 26 हफ्तों के प्रीमेच्योर बच्चों को अत्यंत गंभीर हालात में अथक प्रयास से बचाने में कामयाबी हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में जालंधर निवासी अंजू के घर 28 सप्ताह की दो प्रीमेच्योर बच्चियों ने जन्म लिया।
    जन्म के समय यह बच्चे 68० ग्राम और 89० ग्राम के थे जबकि समान्य नवजात बच्चे का भार ढाई से चार किलो होता है। इसी प्रकार होशियारपुर निवासी रशपाल कौर के घर में भी 26 हफ्तों की एक प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। जिसका उस समय भार 63० ग्राम था। इस तीनो बच्चों के फेफड़े तक नहीं बने हुए थे। बहुत ही गंभीर हालत में इन तीन बच्चियों को पिम्स के निकू वार्ड में दखिल किया गया।
    डॉ सिंह ने बताया कि अंजु की बच्चियों को सांस नहीं ले पाने के कारण नौ दिन तक वेंटलेटर पर रखा गया उसके बाद उसे 5 दिन सीपेप स्पोर्ट पर रखा गया। सात ग्राम खून होने कारण बच्चे बहुत ही कमजोर थे। इन बच्चों को तीन बार खून चढ़ाया गया और काफी समय तक आक्सीजन पर भी रहे। इसके अलावा थायरेड नहीं बन रहा था और बच्चे दूध भी नहीं पचा रहे थे। इसके बाद इस बच्चियों की आंख के पीछे वाला पदार् भी नहीं बन रहा था। लेजर तकनीक के द्वारा इनकी आंख का आप्रेशन किया गया।
    इसके अलावा होशियारपुर की रशपाल कौर के घर 18 साल बाद एक प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। लेकिन जन्म के समय उसकी हालत भी काफी गंभीर थी। बच्ची को पिम्स में इलाज के लिए भतीर् किया गया। निकू में दाखिल करने के बाद इसका भी इलाज शुरू किया गया।
    इस बच्ची को एक महीने तक सीपेप स्पोर्ट पर रखा गया। बच्ची को इंफेक्शन काफी ज्यादा थी। इसका भी खून सात ग्राम था। खून नहीं बन रहा था। सांस रुक-रुक कर आ रही थी। डा. जतिंदर ने कहा कि इन तीनो बच्चों का तुरंत इलाज किया गया। इलाज के बाद इन बच्चों के फेफड़े भी बनने शुरु हो गये हैं। तीनों अब पूरे तरह स्वस्थ्य हैं। तीनो को जल्द ही पिम्स से छुट्टी देकर घर भेज दिया जाएगा।

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