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खाना खजाना / शौर्यपथ / दक्षिण भारत का लोकप्रिय व्यंजन इडली अपने पौष्टिक गुणों की वजह से आज देशभर में बेहद पसंद किया जाता है। खास बात यह है कि लोग इस टेस्टी व्यंजन को अपना वजन घटाने के लिए भी नाश्ते में शामिल करते हैं। इसमें मौजूद प्रोटीन भूख लगने वाले हार्मोन घ्रेलिन को रेगुलेट करके व्यक्ति को लंबे समय तक तृप्त रखने में मदद करता है। आमतौर पर इडली बनाने के लिए इडली मेकर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपके पास इडली मेकर मौजूद नहीं है तो भी आप इसे बड़ी आसानी से बिना इडली मेकर के बाजार जैसी इडली घर पर ही बना सकते हैं। जानिए कैसे।
ओट्स दाल इडली बनाने के लिए सामग्री-
-2 कप ओट्स
-500 ग्राम दही
-1 टी स्पून सरसों के दाने
-1 टी स्पून उड़द की दाल
-1/2 टी स्पून चने की दाल
-1/2 टी स्पून तेल
-2 टी स्पून हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
-1 कप गाजर, कद्दूकस
- करी पत्ता-3-4 पत्ते
-2 टी स्पून धनिया, बारीक कटा हुआ
-1/2 हल्दी पाउडर
-2 टी स्पून नमक
-एक चुटकी बेकिंग सोडा
ओट्स दाल इडली बनाने का तरीका-
ओट्स दाल इडली बनाने के लिए सबसे पहले एक तवे पर ओट्स को हल्का भूरा होने तक भून लें। अब इन्हें मिक्सर में डालकर ओट्स का पाउडर बना लें। एक पैन में तेल, सरसों के दाने (तड़कने दें), उड़द की दाल और चना दाल को भूरा होने तक भूनें। अब इसमें कटा हुआ हरा धनिया, हरी मिर्च, कद्दूकस की हुई गाजर और हल्दी डालकर एक मिनट चला लें।
अब यह मिश्रण ओट्स पाउडर में नमक, बेकिंग सोडा और दही डालते हुए एक साथ मिलाएं। मिश्रण को बनाने के लिए पानी का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करें। इडली का मिश्रण बनकर तैयार है।
अब कटोरी में तेल लगाकर उसे चिकना कर लें, हर कटोरी में इडली का मिश्रण डालें। अब एक कड़ाही में पानी रखकर उसके ऊपर छन्नी रख दें। छन्नी के ऊपर इडली की कटोरी रखने के बाद कड़ाही को ढ़क दें। 15 मिनट तक इडली को भाप में पकाने के बाद उन्हें प्लेट में निकाल लें और प्याज की चटनी के साथ सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / ओह् प्यूबिक हेयर! आप चाहें शेव करो या वैक्स या फिर कुछ भी न करो, प्यूबिक हेयर के विषय पर बात करना सभी के लिए जरूरी है। प्यूबिक हेयर रखना या न रखना दोनों ही बिल्कुल सही निर्णय हैं- हालांकि प्यूबिक हेयर होना आपकी वेजाइना के स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। लेकिन यह हर महिला की अपनी इच्छा है जिस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
फिर भी, यह जानना जरूरी है कि इंटिमेट एरिया की देखभाल कैसे करनी है। सिर्फ बाल रखना या ना रखना ही नहीं, सही साफ सफाई, सही वॉश का इस्तेमाल और सबसे जरूरी, क्या इस्तेमाल नहीं करना है- यह जानना भी बहुत जरूरी है।
हम बताते हैं कुछ नियम जिनका पालन करना आपके प्यूबिक हेयर और इंटिमेट एरिया के लिए बहुत जरूरी है।
1. साफ सफाई है सबसे जरूरी
आपकी वेजाइना खुद को साफ कर सकती है, लेकिन आपके प्यूबिक हेयर नहीं। चाहें आप प्यूबिक एरिया के बाल शेव करती हों या ट्रिम करें, पेशाब करते वक्त कुछ बूंदे प्यूबिक हेयर में रह ही जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप साबुन से रोज अपने प्यूबिक एरिया की सफाई करें।
2. हर बार नए रेजर का इस्तेमाल करें
अगर आप वैक्स के बजाय शेव करना पसंद करती हैं, तो यह नियम आपके लिए जरूरी है। हर बार शेव करने के लिए नए रेजर का इस्तेमाल करें। इससे आपके इंफेक्शन का खतरा कम होगा और फ्रेश रेजर से इनग्रोन हेयर की समस्या भी कम होगी। नया रेजर शार्प होगा तो आपको रेजर बर्न की दिक्कत भी नहीं होगी।
3. बिना झाग के शेव करने की गलती न करें
जिस तरह आप हाथ पैरों के लिए साबुन या शेविंग क्रीम का इस्तेमाल करती हैं, उसी तरह अपने प्यूबिक हेयर को शेव करते वक्त भी करें। शेविंग से पहले साबुन या शेविंग क्रीम से ढेर सारा झाग बना लें। इससे शेव करते वक्त कम फ्रिक्शन होगा और कटने का जोखिम भी कम होगा।
4. खुशबू वाले प्रोडक्ट से दूर रहें
चाहें आपके प्यूबिक हेयर हों या ना हों, कोई भी ऐसा प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें जिसमें खुशबू मिलाई गयी हो। खुशबू के लिये इन प्रोडक्ट में खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं जो आपकी वेजाइना के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं हैं।
अगर आप शेव या वैक्स करती हैं तो आपकी त्वचा और अधिक सेंसिटिव होती है, इसलिए खुशबू वाले प्रोडक्ट से दूर रहें। मॉइस्चराइजर या क्रीम चुनते समय इसका खास ख्याल रखें।
5. टाइट कपड़े न पहनें
यह नियम सबसे जरूरी है। इंटिमेट एरिया की साफ सफाई, मॉइस्चराइजिंग सब बेकार है अगर आपकी वेजाइना सांस ही नहीं ले पा रही। टाइट कपड़े आपके इंटिमेट एरिया में हवा के बहाव को रोकते हैं। इससे नमी अंदर ही रहती है और यीस्ट इन्फेक्शन का खतरा होता है।
कॉटन की अंडरवियर पहनें जिससे हवा पास हो सके। अगर सम्भव हो, तो रात को बिना अंडरवियर का बहुत ढीले शॉर्ट्स पहन कर सोएं।
खानाखाजना / शौर्यपथ / अमृतसरी चिकन मसाला पंजाब की बहुत पॉपुलर डिश है। इसके स्वाद को देखते हुए हर इंडियन रेस्टोरेंट के मेन्यू में यह डिश जरूर शामिल की जाती है। अगर आप भी इस पंजाबी ग्रेवी में बने चिकन का स्वाद चखना चाहते हैं तो ट्राई करें ये रेसिपी।
अमृतसरी चिकन मसाला बनाने के लिए सामग्री-
मैरीनेशन के लिए-
-500 ग्राम चिकन
-2 टी स्पून अदरक-लहसुन का पेस्ट
-3 टेबल स्पून दही
-1 टी स्पून नींबू का रस
-1 टी स्पून सिरका
-1 टी स्पून धनिया पाउडर
-1 टी स्पून जीरा पाउडर
-1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-1 टी स्पून नमक
-2 टी स्पून प्याज, टुकड़ों में कटा हुआ
अमृतसरी चिकन मसाला ग्रेवी बनाने के लिए-
-2 टी स्पून मक्खन
-1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
-1 टी स्पून धनिया पाउडर
-1 टी स्पून जीरा पाउडर
-1 टी स्पून अदरक
-1/2 कप पानी
-1 टी स्पून नमक
-1 हरी मिर्च
-6 टमाटर
-1/2 टी स्पून चीनी
-3 टी स्पून मक्खन
-3 टी स्पून क्रीम
अमृतसरी चिकन मसाला बनाने का आसान तरीका-
चिकन मैरीनेट करने के लिए सबसे पहले एक बड़े बाउल में चिकन लें। इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट, नींबू का रस, सिरका, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नमक और कटा हुआ प्याज डालें। सभी सामग्री को चिकन के साथ अच्छे से मिलाकर 2 घंटे के लिए अलग रख दें। अब एक पैन में मक्खन डालकर गर्म करें, उसमें लाल मिर्च पाउडर डालकर उसे हल्का सा भून लें। अब इसमें धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और कटा हुआ अदरक डालकर अच्छे से भूनकर पानी डालकर मसालों को अच्छे से पकाएं।
अब इसमें नमक, हरी मिर्च, टमाटर और चीनी डालकर अच्छे से मिलाएं। एक दूसरे पैन में मक्खन लें और इसे पैन में चारों तरफ फैला लें।इसमें अब मैरीनेट किया हुआ चिकन डालें।मक्खन के साथ चिकन को अच्छे से भूनें। पैन को ढककर चिकन को पकाएं।पैन का ढक्कन हटाकर देखें की चिकन गोल्डन ब्राउन हो गया है।अब इसे टमाटर की तैयार की गई ग्रेवी को डालकर अच्छे से मिलाएं।दोबारा पैन को ढक दें, चिकन को कुछ देर और पकाएं।ढक्कन हटाएं और ग्रेवी में क्रीम डालें।अच्छे से मिलाएं।अब इसके ऊपर मक्खन, हरा धनिया और हरी मिर्च डालकर गार्निश करें। गर्मागर्म सर्व करें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /कहते हैं, हमेशा हंसते-मुस्कराते रहना बीमारियों से बचाव का सबब कारगर जरिया है। हालांकि, ब्रिटेन में हुए एक नए अध्ययन की मानें तो नाचना-गाना भी सेहत के लिए कम फायदेमंद नहीं। इससे वजन नियंत्रित रखने के साथ ही ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाने और स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन घटाने में अच्छी-खासी मदद मिलती है।
‘द पोल’ के अध्ययन में दो हजार वयस्क शामिल हुए। इनमें से 80 फीसदी ने डांस को तनाव की छुट्टी करने में बेहद असरदार करार दिया। 75 प्रतिशत ने कहा, टीवी या मोबाइल पर गाना बजाकर नाचने में उन्हें अजब-सी खुशी मिलती है। 50 फीसदी ने माना कि झूमने-नाचने से काम का बोझ ज्यादा महसूस नहीं होता और चिड़चिड़ेपन के एहसास में भी कमी आती है।
मुख्य शोधकर्ता डॉ. पीटर लोवाट के मुताबिक नृत्य न सिर्फ रोजमर्रा के तनाव से ध्यान भटकाता है, बल्कि सोचने का अंदाज भी बदलता है। जब इनसान अलग-अलग मुद्राएं धारण करता है तो सेराटोनिन और डोपामाइन जैसे ‘फील गुड’ हार्मोन ज्यादा मात्रा में पैदा होने लगते हैं। साथ ही ‘ओपियॉएड रिसेप्टर’ भी अधिक सक्रिय हो जाता है और दर्द का एहसास खुद बखुद घटने लगता है। इसके अलावा ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में कमी लाने में भी नृत्य की अहम भूमिका पाई गई है।
आलोचना का डर नहीं-
अध्ययन में शामिल 67 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि झूमने-नाचने के लिए उन्हें किसी बहाने की तलाश नहीं होती। 41 प्रतिशत ने माना कि वे डांस में बिल्कुल कच्चे हैं। हालांकि, मजाक या आलोचनाओं का पात्र बनने की चिंता उन्हें नृत्य का लुत्फ उठाने से नहीं रोकती।
शौर्यपथ । सर्वे । अक्सर सेक्स को लेकर कई बातें कही और सुनी जाती है। पिछले साल टीनएजर्स लड़कियों के स्कूल की दिनचर्या और उनके सेक्सुअल रिलेशन के बीच अहम खुलासा हुआ है। इंडियाना यूनिवर्सिटी ने स्कूली छात्राओं पर ये स्टडी किया है। इस स्टडी में स्कूल बंक करना, टेस्ट में फेल होना और बिना कंडोम के सेक्स के बीच संबंध निकाला है। सर्वे में खुली कई बातें: इंडियाना यूनिवर्सिटी में सेक्स पर सर्वे 14 से 17 साल की लड़कियों पर किया गया है। 10 साल में पूरे हुए इस अध्ययन के लिए 387 लड़कियों की डायरियों से रोमांटिक और फिजिकल रिलेशन को लेकर उनके व्यवहार को समझने प्रयास किया गया। स्टडी में शामिल लड़कियां अपने हर छोटे-बड़े व्यवहार को रिसर्चर से साझा करती थीं। लड़कियां स्कूल बंक करती हैं और टेस्ट में फेल होती हैं, ऐसी लड़कियां के स्कूल बंक करने और टेस्ट में फेल होने वाले दिन बिना कंडोम के सेक्स करने के मामले ज्यादा पाए गए हैं। लड़कियों ने यह माना की टेस्ट में फेल होने के बाद वो बिना कंडोम के सेक्स करती है।
सेहत / शौर्यपथ / जब आपका पेट फूल जाता है, तो कब्ज की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में आपकी इंस्टेंट रेमेडी क्या होनी चाहिए? अगर आप घरेलू नुस्खों में यकीन रखते हैं, तो आज हम आपके लिए एक ऐसा अचूक आयुर्वेदिक नुस्खा लाए हैं, जो कुछ ही समय में आपकी कब्ज की समस्या को हल कर देगा।
पेश है कब्ज के लिए घरेलू उपाय : एक चम्मच घी के साथ गर्म पानी पीना।
इस बात को लेकर सिर्फ हम ही निश्चित नहीं है, बल्कि आयुर्वेद की स्वर्ण पुस्तक इसे कब्ज के लिए एक “रामबाण” इलाज मानती है!
यहां जाने घी के साथ गर्म पानी का सेवन कब्ज के लिए नंबर वन उपाय क्यों है?
आइए इस पर ध्यान दें: घी को कई बार गलत माना गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम इसके लाभों को प्राप्त करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का उचित तरीका नहीं जानते हैं। घी बायट्रिक एसिड का एक समृद्ध स्रोत है, कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार और पोलिश पत्रिका प्रेज़ग्लाड गैस्ट्रोएंटेरोलोगिकज़नी (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी रिव्यू) में प्रकाशित एक अध्ययन द्वारा बताया गया है कि इसके सेवन से कब्ज में जल्द ही राहत मिलती है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि बायट्रिक एसिड का सेवन इंटेस्टाइन के चयापचय में सुधार करता है और मल को बाहर निकलने में मदद करता है। साथ ही, यह पेट दर्द, सूजन और कब्ज के अन्य लक्षणों को कम करता है।
बताने की कोई जरूरत नहीं है कि घी सभी लैग्जेटिवो में सबसे बेस्ट लैग्जेटिव है। इसके अन्य लाभ यह भी हैं – जैसे हड्डियों की ताकत में वृद्धि, नींद को प्रेरित करना और वजन कम करना और यह बेनिफिट्स अपको खुद ही महसूस होंगे।
आयुर्वेदिक हेल्थ कोच और प्राण हेल्थकेयर सेंटर की संस्थापक डिंपल जांगडा बताती हैं कि घी हमारे शरीर को चिकनाई प्रदान करने में मदद करता है और आंतों के मार्ग को साफ करता है। यह वेस्ट प्रोडक्ट के मूवमेंट में सुधार करता है, जिससे कब्ज का खतरा कम होता है।
आप घी से कैसे कर सकती हैं कब्ज का इलाज?
डॉ.जांगडा का सुझाव है कि रोज सुबह एक चम्मच घी में 200 मिली गर्म पानी मिलाकर पीना चाहिए। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, वह इसे खाली पेट पीने की सलाह देती हैं।
“हार्ड कोष्ट के कारण कब्ज होती है, जिससे पाचन क्रिया, आंत और कोलोन, खुरदरा और कठोर हो जाता है। ऐसे में घी जैसे सुपरफूड् के साथ गर्म पानी का सेवन पाचन तंत्र को चिकनाई देकर, हमारे सिस्टम को नरम कर सकता हैं और शरीर से वेस्ट प्रोडक्ट को बाहर निकालने में मदद कर सकता हैं।
घी कब्ज के लिए एक अच्छा और सटीक घरेलू उपचार है। अब तो आप भी जान ही गई होंगी।
शौर्यपथ /हर कोई दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए दिनरात मेहनत करता है। भोजन भगवान द्वारा दिया गया प्रसाद है। अन्न को देवता माना जाता है। इसलिए अन्न का पूरा सम्मान करें। वास्तु में भोजन को ग्रहण करने और भोजन को बनाने को लेकर कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
भोजन ग्रहण करने से पहले हमेशा भगवान को भोग लगाएं। अन्न देवता और अन्नपूर्णा माता का स्मरण कर उन्हें धन्यवाद करें। अगर भोजन स्वादिष्ट न लगे तो कभी भी उसका तिरस्कार न करें। भोजन ग्रहण करते समय न तो किसी से बात करें और न ही कोई अन्य कार्य। वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि गीले पैरों के साथ भोजन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु भी बढ़ती है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर भोजन करने से ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख कर भोजन ग्रहण न करें। इससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। कभी भी टूटे या गंदे बर्तन में भोजन न खाएं। कभी भी बिस्तर पर बैठकर भोजन न ग्रहण करें। थाली को हाथ में उठाकर भी खाना न खाएं। जमीन पर बैठकर भोजन ग्रहण करना सबसे उत्तम है। भोजन की थाली को हमेशा अपने बैठने के स्थान से ऊपर रखें। ऐसा करने से घर में कभी भी खाने की कमी नहीं होगी। हर रोज गाय को रोटी खिलाएं। बिना स्नान किए रसोईघर में भोजन नहीं बनाना चाहिए। घर आए मेहमानों को दक्षिण या पश्चिम दिशा में बैठाकर भोजन कराएं। भोजन बनाते समय मन को शांत रखें और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य का विचार करें।
शौर्यपथ /काम के बढ़ते बोझ के बीच ‘फील गुड’ करना घर के बाहर रंग-बिरंगे फूल लगाना जितना आसान है। ब्रिटेन स्थित रॉयल हॉर्टिकल्चर सोसायटी का हालिया अध्ययन तो कुछ यही बयां करता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गुलाब, गुलमोहर और मालती जैसे फूल न सिर्फ स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्त्राव घटाते हैं, बल्कि ‘डोपामाइन’ व ‘सेरोटोनिन’ हार्मोन के उत्पादन को भी बढ़ावा देते हैं, जिन्हें नकारात्मक विचारों पर काबू पाने तथा जीवन से संतुष्टि का एहसास जगाने के लिए अहम माना जाता है।
लॉरियैन सुइन-पुई के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 42 वयस्कों को अपने घर के बगीचे में कुछ पौधे रखने को दिए। सभी पौधे ऐसे गमले में लगाए गए थे, जिनमें समय-समय पर खुद बखुद जरूरी मात्रा में पानी की आपूर्ति होती रहती थी। यानी प्रतिभागियों को इनकी देखभाल करने की जरूरत नहीं थी।
हालांकि, पौधे रखने के बाद प्रतिभागी खुद इनके रखरखाव में दिलचस्पी दिखाने लगे। इस दौरान शोधकर्ताओं ने उनमें ‘कॉर्टिसोल’, ‘डोपामाइन’ और ‘सेरोटोनिन’ सहित अन्य हार्मोन के स्तर की जांच की।
उन्हें 53 फीसदी प्रतिभागियों में सभी हार्मोन संतोषजनक स्थिति में मिले, जबकि शुरुआत में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत के करीब था। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल लैंडस्केप एंड अर्बन प्लानिंग’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / बस या मेट्रो में दूर खड़े किसी अजनबी से समय पूछने के लिए आप क्या करते हैं? यकीनन अपनी कलाई की तरफ उंगली दिखाते होंगे। हालांकि, ब्रिटेन स्थित लिंग्विस्टिक्स एंड कम्युनिकेशन्स इंस्टीट्यूट के हालिया अध्ययन की मानें तो इशारों-इशारों में बात करने का यह अंदाज जल्द बीते दिनों की बात बन जाएगा। मोबाइल सहित अन्य गैजेट के आविष्कार से नई पीढ़ी का इन इशारों को समझने में असमर्थ होना इसकी मुख्य वजह है।
शोधकर्ता वाइव इवांस के मुताबिक कुछ इशारों के खास मायने होते हैं। हर देश, हर भाषा, हर सभ्यता के लोग आपसी संवाद के लिए इनका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल करते हैं। पर चूंकि ये इशारे चुनिंदा उपकरण, गैजेट या फीचर से जुड़े हैं, इसलिए तकनीकी बदलाव और बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ इनका इतिहास के पन्नों में दफन होना लाजिमी है। युवा पीढ़ी को पता ही नहीं होगा कि कलाई की तरफ उंगली दिखाने, अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को कान के पास ले जाने या फिर रेस्तरां में हवा में लिखने का इशारा करने का क्या मतलब है।
इतिहास बनते इशारे-
1.बिल मांगना
-होटल-रेस्तरां में वेटर को हवा में लिखकर यह संदेश देना कि वह बिल ले आए।
2.नकद का जिक्र
-उंगलियों और अंगुठे को आपस में रगड़कर यह जताना कि आप पैसे की बात कर रहे।
3.फोन कॉल करना-
-अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को मुट्ठी से बाहर निकालकर कान के पास ले जाना।
4.समय पूछना-
-कलाई पर उंगली थपथपाकर सामने वाले से यह पूछना कि टाइम क्या हो रहा है?
5.शीशा चढ़ाना-गिराना-
-हाथ को गोल-गोल घुमाकर खिड़की के शीशे चढ़ाने और गिराने का संकेत देना।
स्मार्टफोन का आविष्कार जिम्मेदार-
-इवांस कहते हैं, सड़कों पर अब पीसीओ बूथ कम ही दिखते हैं। घरों में भी लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल न के बराबर होता है। हर हाथ में स्मार्टफोन का आ जाना इसकी मुख्य वजह है। चूंकि, स्मार्टफोन को पकड़ने का तरीका लैंडलाइन से जुदा होता है, इसलिए युवा पीढ़ी फोन कॉल का इशारा करने के लिए अंगुठे और कनिष्ठा उंगली का इस्तेमाल करने के बजाय पूरी हथेली को कान के पास ले जाती है। समय पूछने और बिल मांगने से जुड़े इशारे भी स्मार्टफोन में घड़ी की मौजूदगी व डिजिटल भुगतान की सुविधा के चलते गायब हो रहे हैं।
वायरल वीडियो से सामने आया सच-
-पुराने इशारे कैसे दम तोड़ रहे हैं, इसकी बानगी सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल एक वीडियो में दिखी। न्यूयॉर्क निवासी डैनियल अलवाराडो अपनी पत्नी मार्सिएला के पास जाते हैं और उनसे इशारे में यह बताने को कहते हैं कि वह फोन पर बात कर रही हैं? मार्सिएला अपने अंगुठे और कनिष्ठा उंगली को कान के पास ले जाकर दिखाती हैं। इसके बाद डैनियल अपने बच्चों से भी ऐसा करने को कहते हैं। इस दौरान दोनों अपनी हथेली को कान पर रखकर यह बताते हैं कि वे फोन पर बात करने में व्यस्त हैं। इस वीडियो को दो करोड़ से ज्यादा हिट मिल चुके हैं।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / दुनिया के 22 देशों में किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार होने वाली बड़ी आबादी में लड़कियों और युवा महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा है।
यह सर्वेक्षण ब्रिटेन के संगठन 'प्लान इंटरनेशनल ने किया है और इसका शीर्षक 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स गर्ल्स रिपोर्ट यानी दुनिया में लड़कियों की स्थिति है। भारत, ब्राजील, नाइजीरिया, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, थाईलैंड और अमेरिका समेत 22 देशों की 15-25 वर्ष की 14,000 किशोरियों और महिलाओं ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया।
इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली 58 फीसदी लड़कियों और महिलाओं ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, व्हाट्सऐप और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए समान था।
यह सर्वेक्षण 11 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस से पहले जारी हुआ है।
सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां मिलीं जबकि 59 फीसदी को दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा। सर्वेक्षण के मुताबिक, अल्पसंख्यक और एलजीबीटीक्यू समुदायों से ताल्लुक रखनेवाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें उनकी पहचान की वजह से निशाना बनाया गया।
प्लान इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी एन-बिरगिट अलब्रेस्टन ने कहा, ''लड़कियों को उत्पीड़न के जरिए चुप कराया जा रहा है। लैंगिक समानता और एलजीबीटी समेत अन्य मुद्दों पर बोलने वाले कार्यकर्ताओं को भी प्राय: निशाना बनाया जाता है। ऐसे लोगों और उनके परिवार को धमकियां मिलती हैं।
सेहत /शौर्यपथ / बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर में यह है अंतर-
-सबसे पहले यह जान लें कि बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर दोनों अलग अलग चीजें होती है। दोनों ही चीजों का इस्तेमाल भी अलग-अलग कामों के लिए किया जाता है।
-बेकिंग पाउडर चिकना मुलायम मैदे जैसा होता है, लेकिन बेकिंग सोडा दरदरा होता है।
-बेकिंग सोडा का इस्तेमाल खट्टी चीजों जैसे दही, छाछ और नींबू के रस में किया जाता है, लेकिन बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल नमी वाली चीजों के लिए किया जाता है।
- कोई भी नान, भटूरा जैसी चीजों को बनाने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जाता है, वही केक और बेकरी जिन्हे तला नहीं जाता उनमें बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है।
बेकिंग सोडा का इस्तेमाल खाने के अलावा इन जरूरी काम के लिए भी होता है-
-बेकिंग सोड़ा का इस्तेमाल कपड़े साफ करने के लिए भी किया जाता है। ज्यादा गंदे कपड़े हो तो उन्हे साफ करने के लिए बेकिंग सोड़ा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
-घर की सफाई करते समय फ्लोर और टाइल्स को चमकाने के लिए भी बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जाता है।
-खाना पकाते समय अगर बर्तन ज्यादा जल गए हैं तो बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर आप उन जले बर्तनों को साफ कर सकते हैं।
शौर्यपथ / विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने कहा है कि विश्व भर में प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है। विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि संक्रमण के जितने मामलों की संख्या बताई जा रही है, वास्तव में उससे अधिक लोग संक्रमण का शिकार हैं।
वैश्विक स्वास्थ्य निकाय में कोरोना महामारी पर सोमवार को हुई 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख डॉ. माइकल रायन ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है, लेकिन अंततः इसका अर्थ यही है कि ‘विश्व की बड़ी आबादी खतरे में है। अब हम मुश्किल समय की ओर जा रहे हैं।’
10 प्रतिशत आबादी चपेट में आने की आशंका-
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया की 10 प्रतिशत आबादी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुकी है। अब भी बहुत बड़ी आबादी पर इसका खतरा मंडरा रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लोगों के संक्रमित होने के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बस एक पहलू हैं क्योंकि इतने वृहद स्तर पर सटीक गिनती होने की संभावना कम है। डॉ. रायन ने कहा कि यह महामारी लगातार फैल रही है। दक्षिण पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और यूरोप तथा पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में संक्रमण और मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं।
कोरोना से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं-
दुनियाभर में अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को कोरोना महामारी के कारण गहरा खामियाजा भुगतना पड़ा। डब्ल्यूएचओ द्वारा सोमवार को जारी एक नए सर्वेक्षण के अनुसार इससे 93 प्रतिशत देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं हैं। करीब 72% बच्चों और किशोरों, 70% बुजुर्गों तथा 61% गर्भवती महिलाओं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल सकीं।
130 देशों में हुआ सर्वेक्षण-
डब्ल्यूएचओ ने जून से अगस्त के बीच 130 देशों में यह सर्वेक्षण किया और पता लगाया कि कोरोना महामारी के कारण मानसिक और न्यूरोलॉजिकल सेवाओं पर कितना प्रभाव पड़ा है। साथ ही देश इससे निपटने के लिए क्या तरीके अपना रहे हैं। सर्वेक्षण से पता चला है कि 67 प्रतिशत काउंसलिंग तथा साइकोथेरेपी सेवा में बाधा पहुंची और खुद को गहरी क्षति पहुंचाने वाले मरीजों को दी जाने वाली 65 प्रतिशत सेवाओं में व्यवधान आया।
10 अक्तूबर को वैश्विक कार्यक्रम होगा-
आगामी 10 अक्तूबर को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर डब्ल्यूएचओ द्वारा वैश्विक ऑनलाइन एडवोकेसी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के मद में अधिक निवेश की जरूरत पर चर्चा होनी है।
सेहत / शौर्यपथ / हम भारतीय महिलाओं की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती है फ्लैट बेली पाने की, जिसे हमने सिर्फ फिल्मों में ही देखा है। लेकिन क्या आप इसके लिए आवश्यक मेहनत करती हैं? पेट की चर्बी के लिए हम कभी अपने जीन्स तो कभी भारतीय खानपान को दोष दे देते हैं। लेकिन सच तो यह है कि बहुत छोटी-छोटी आदतें अगर हम छोड़ दें तो हम भी पेट की चर्बी से छुटकारा पा सकते हैं।
बेली फैट यानी पेट पर मौजूद चर्बी सिर्फ आपको क्रॉप टॉप पहनने से ही नहीं रोकती, आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत खतरनाक है। पेट या एब्डोमेन के हिस्से में ही हमारी महत्वपूर्ण मांसपेशियां होती हैं, जो हमारी सेहत में अपरिहार्य भूमिका अदा करती हैं। पेट में मौजूद चर्बी दिल की बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ा सकती है। यही नहीं, डायबिटीज के लिए भी पेट की चर्बी एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है।
हम बताते हैं व्यायाम की कमी के अलावा आपकी वह बुरी आदतें जो आपके बेली फैट के लिए जिम्मेदार हैं:
1. आप मील्स स्किप कर रही हैं
जी हां, ज्यादा खाने से अधिक खतरनाक है मील स्किप करना। जब आप लम्बे समय तक भूखी रहती हैं तो शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है। इसमें दिमाग यह सोचता है कि आप विकट परिस्थितियों से गुजर रही हैं, जहां आपको खाने के लिए कुछ मिल नहीं रहा। ऐसा होते ही शरीर अगली मील को पूरी तरह फैट के रूप में एकत्र कर लेता है। और फैट स्टोर करने के लिए सबसे पहली जगह है पेट।
इसलिए मील स्किप ना करें, बल्कि कम देरी पर थोड़ा-थोड़ा खाएं और हेल्दी खाएं।
2. आप सोडा बहुत पीती हैं
कोल्ड ड्रिंक और सोडा असल में मीठे जहर हैं। जर्नल फिटनेस के अनुसार एक गिलास कोल्ड ड्रिंक में 10 चम्मच के बराबर चीनी होती है और 150 खाली कैलोरी। इससे आपका पेट बिल्कुल नहीं भरता, लेकिन आपके शरीर में कैलोरी पहुंचती हैं। यह चिप्स जैसे स्नैक खाने से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसे पीने के बाद भी आपकी भूख नहीं मिटती तो आप खाते भी हैं। कोल्ड ड्रिंक और सोडा तो अपने आहार से बिल्कुल बाहर कर दें।
3. आपको काम करते वक्त ब्रेक लेने की आदत नहीं है
ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, अगर आप घण्टों बैठने की आदी हैं तो आपकी यह आदत आपके बेली फैट को बढ़ा रही है। जब आप कई घण्टें बैठी रहती हैं, तो आपका मेटाबॉलिक रेट धीमा पड़ जाता है।
इसके बजाय हर एक-दो घंटे पर पांच मिनट का ब्रेक लें। इस ब्रेक में स्ट्रेचिंग करें या कोई हल्की एक्सरसाइज करें। आप थोड़ा चल भी सकती हैं। आजकल तो घर पर ही हैं, तो आप अपने छोटे मोटे कामों को इन ब्रेक्स में ही निपटा सकती हैं। लम्बे अंतराल के लिए बैठने की आदत छोड़ दें।
4. आप इमोशनल ईटर हैं
फ्रंटियर ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के अनुसार महिलाएं अधिकांश भावनाओं में बह कर खाती हैं और ऐसा करने पर वे 350 से 500 कैलोरी एक्स्ट्रा ले लेती हैं। यही नहीं, भावनात्मक ईटिंग में हम अधिकतर मीठे भोजन की ओर ही आकर्षित होते हैं, जो कैलोरी काउंट बढ़ा देता है।
5. आप बहुत जल्दी-जल्दी खाती हैं
क्या आप जानती हैं कि आपके पेट भरने और दिमाग को यह सिग्नल मिलने में 20 मिनट तक लग सकते हैं? दिमाग यह 10 से 20 मिनट बाद एहसास करता है कि पेट भर गया है। ऐसे में अगर आप तेजी से खाएंगी तो आप अपनी भूख से अधिक खा सकती हैं।
इसलिए एक्सपर्ट्स धीरे-धीरे और देर तक चबा कर खाने की सलाह देते हैं। जब आप देर तक चबाकर खाती हैं, तो दिमाग जल्दी यह सिग्नल कर देता है कि पेट भर गया है।
अगर आपको जल्दी खाने की आदत है, तो खाने से 20 से 30 मिनट पहले एक गिलास पानी पी लें। इससे पेट जल्दी भर जाएगा और आप एक्स्ट्रा कैलोरी नहीं लेंगी।
धर्म संसार / शौर्यपथ / शारदीय नवरात्र ऐसा अवसर है जब देवी दुर्गा सिंह को छोड़ किसी अन्य सवारी से पृथ्वी पर आती हैं। इसके लिए पंचांगों की गणना, देवीपुराण एवं दुर्गाशप्तसती के आधार पर सवारी का निर्धारण होता है। इस वर्ष आगमन और प्रस्थान दोनों को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
बंगीय पंचांगों के अनुसार देवी का आगमन दोला (झूला) पर होगा जबकि देवी पुराण के अनुसार देवी घोड़े पर आएंगी। घोड़े और झूला दोनों पर ही आगमन हाहाकारी माना गया है। पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार शनिवार से नवरात्र की शुरुआत हो रही है इसलिए देवी का आगमन घोड़े पर और समापन सोमवार को होने से प्रस्थान हाथी पर माना जाएगा। देवीपुराण के अनुसार नवरात्र में देवी के आगमन एवं प्रस्थान को भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में देखा जाता है। घोड़े पर देवी के आगमन को 'छत्रभंग स्तुरंगमे' कहा गया है। घोड़े पर देवी का आगमन सर्व समाज के लिए अशुभ माना गया है। सत्ता पक्ष के लिए यह विशेष कष्टप्रद होता है।
पंचांग भेद के कारण देवी के प्रस्थान की सवारी में भेद सामने आ रहा है। कुछ के अनुसार देवी का प्रस्थान हाथी पर होगा तो कुछ भैंसे पर मान रहे हैं। इस दृष्टि से आगमन और प्रस्थान दोनों ही शुभदायक नहीं हैं।
देवीपुराण के अनुसार सवारी का निर्धारण
देवीपुराण के अनुसार नवरात्र की शुरुआत सोमवार-रविवार को हो तो देवी का आगमन हाथी पर होता है। शनिवार-मंगलवार होने से आगमन घोड़े पर होता है। गुरुवार-शुक्रवार को कलश स्थापन का अर्थ देवी का आगमन डोली पर है। बुधवार के दिन नाव पर आगमन माना गया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
